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DU की advisory पर भड़क गए राहुल, DU को धमकाया:JNU छात्रों को बांग्लादेश की तर्ज पर उकसा रही जिहादन आरफा, छात्रों को हिंसा की तरफ ढकेल रहा इस्लामी-कांग्रेसी इकोसिस्टम

                      प्रदर्शन को लेकर यूनिवर्सिटी की एडवाइजरी से क्यों किलसे राहुल गाँधी और आरफा खानुम
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में पिछले 4 दिनों से लगातार हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। इसी बीच दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) ने अपने छात्रों के लिए एडवाइजरी जारी की है। दोनों यूनिवर्सिटी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि छात्र और शिक्षक जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में शामिल न हों और वहाँ जाने से भी बचें।

इससे पहले एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने भी सभी यूनिवर्सिटी को एडवाइजरी भेजी, जिसमें छात्रों से पढ़ाई पर ध्यान देने और अपनी ऊर्जा किसी और दिशा में न लगाने की सलाह दी गई।

छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जारी की गई इन एडवाइजरी के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी और आरफा खानुम शेरवानी जैसे तथाकथित पत्रकारों को परेशानी हो गई। जहाँ राहुल गाँधी ने इन यूनिवर्सिटीज को छात्रों को रोकने के लिए धमकाया है, वहीं आरफा खानुम ने छात्रों को ‘वाइस चांसलर के इस्तीफे’ की माँग का नया एजेंडा सौंप दिया है।

यूनिवर्सिटीज की एडवाइजरी में क्या कहा गया?

JNU की एडवाइजरी में लिखा गया है कि यूनिवर्सिटी के सभी शिक्षकों, छात्रों और अन्य सदस्यों को जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। एडवाइजरी में साफ कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के सार्वजनिक प्रदर्शनों को लेकर दिए गए निर्देशों के मुताबिक, सभी को जंतर-मंतर पर या उसके आसपास होने वाले जमावड़ों में शामिल होने या वहाँ जाने से बचना चाहिए।

साथ ही सोशल मीडिया पर भी जिम्मेदारी से व्यवहार करने की सलाह दी गई है। एडवाइजरी में यह भी लिखा है कि अगर कोई इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ साथ यूनिवर्सिटी की आचार संहिता के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। इसके अलावा छात्रों को शैक्षणिक जिम्मेदारी और जिम्मेदार नागरिकता के मूल्यों को बनाए रखने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है।

वहीं DU की एडवाइजरी में कहा गया कि छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा यूनिवर्सिटी के लिए बहुत मायने रखती है। एडवाइजरी में बताया गया है कि जंतर-मंतर पर होने वाली किसी भी गैरकानूनी सभा या प्रदर्शन में शामिल होना सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन माना जाएगा और इससे कानूनी कार्रवाई हो सकती है। साथ ही यह भी कहा गया है कि ऐसी गतिविधियाँ छात्रों की व्यक्तिगत सुरक्षा के साथ साथ उनकी पढ़ाई और आगे के करियर पर भी गंभीर असर डाल सकती हैं।

इसी वजह से सभी छात्रों से जंतर मंतर से दूर रहने और कानून का पालन करते हुए अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की गई है। इसके अलावा DU ने छात्रों को यह भी सतर्क किया है कि सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर काफी फर्जी और भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है, इसलिए छात्रों को सावधान रहना चाहिए।

AIU ने भी अपनी एडवाइजरी में यही संदेश दोहराया है कि छात्रों को अपनी ऊर्जा पढ़ाई में लगानी चाहिए, न कि किसी और दिशा में भटकानी चाहिए।

राहुल गाँधी और आरफा खानुम को हुई दिक्कत

इन एडवाइजरी के सामने आते ही कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर सीधा हमला बोला। उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने से रोकने की हिम्मत कैसे हो सकती है। उन्होंने आगे चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो लोग आज छात्रों को धमका रहे हैं, आने वाले समय में उन्हें भी इसका हिसाब देना होगा।

वहीं तथाकथित पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी ने भी यूनिवर्सिटीज की एडवाइजरी का विरोध किया। आरफा ने छात्रों को उकसाते हुए कहा कि अब अपनी ‘इस्तीफे की सूची में एक और नाम जोड़ेंगे, और वह नाम है दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति का।”

एक तरफ यूनिवर्सिटी छात्रों को आगाह कर रही हैं कि प्रदर्शन में हो रही हिंसा और कानूनी कार्रवाई में पड़ने से उनका भविष्य खतरे में पड़ सकता है, पर दूसरी ओर राहुल गाँधी और आरफा खानुम को यह रास नहीं आ रहा है। क्योंकि अगर छात्रों ने यूनिवर्सिटी का आदेश पालन किया तो ये उनके मंसूबे पूरे नहीं करेगा। यह उसी प्रकार का मॉडल है, जो दो साल पहले बांग्लादेश में ‘छात्र आंदोलन’ के समय पर देखा गया था, जहाँ बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटी पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया गया था।

बांग्लादेश में शिक्षकों से लिए गए थे जबरन इस्तीफे, हुई थी हिंसा

जब साल 2024 में बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार एक ‘छात्र आंदोलन’ के नाम पर गिराई गई थी, तब भी यही मॉडल सामने आया था। आंदोलन के नाम पर बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, प्रिंसिपल और हेड टीचर को इस्तीफा माँगा गया था। और रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैंकड़ों शिक्षकों को जबरन पद से इस्तीफा दिलावाया भी गया था।

ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, UGC के चेयरमैन प्रोफेसर काजी शाहीदुल्लाह, नेशनल यूनिवर्सीट के वाइस चांसलर प्रोफेसर मशियुर रहमान, जगन्नाथ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. सादेका हलीम, बांग्लादेश एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर एमदादुल हक चौधरी, कोमिला यूनिवर्सिी के कुलपति प्रोफेसर एएफएम अब्दुल मोईन ने इस्तीफा दे दिया था और यह सामने आया था कि इनमें से कई को जबरन हटने के लिए मजबूर किया गया था।

इसीलिए राहुल गाँधी और आरफा खानुम का यूनिवर्सिटी की एडवाइजरी का न सिर्फ विरोध करना, बल्कि धमकाया और छात्रों को VCs के इस्तीफे के लिए उकसाना एकदम उसी तरह से है, जैसे बांग्लादेश में हुआ था।

NSUI ने किया बिहारी महिला का अपमान : ‘भगाओ इस बिहारन को, मैडम बीड़ी-दारू पीती है, मिथिला से है…’: DUSU की संयुक्त सचिव दीपिका झा को गाली देने वाले कौन, ABVP नेता ने कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI को बताया जिम्मेदार

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2025 में ABVP से संयुक्त सचिव के पद पर जीत हासिल करने वाली दीपिका झा  (साभार: Dainik Bhaskar)
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2025 में ABVP से संयुक्त सचिव के पद पर जीत हासिल करने वाली बिहार की दीपिका झा को इंस्टाग्राम पर ट्रोल किया जा रहा है। उन्होंने इसके खिलाफ दिल्ली साइबर पुलिस में FIR दर्ज करवाई है। साथ ही दीपिका झा ने इसके पीछे NSUI का हाथ बताते हुए करारा जवाब दिया है।

इसकी जानकारी खुद दीपिका झा ने एक वीडियो जारी कर दी। वीडियो में दीपिका झा ने कहा, “इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया पर बदतमीजी की जा रही है। बिहार से जुड़ा ‘बिहारन’ शब्द को गाली की तरह उपयोग किया जा रहा है। तमाम कमेंटबाजों के खिलाफ FIR हो चुकी है। जो-जो लिंक है इस FIR से सबके पास समय से सूचना पहुँच जाएगी।”

दीपिका झा ने नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) पर निशाना साधते हुए कहा, “पूरे NSUI को कह देना चाहती हूँ कि अब करो तुम कमेंट। अब मैं FIR-FIR खेलुँगी। एक लड़की को नीचा दिखाने के लिए तुम इस हद तक गए। तुम चाहते हो कि लड़की शांत होकर घर बैठ जाए। लेकिन नहीं, मैं शांत बैठने वालों में से नहीं हूँ। मैं आप सभी की टाइम-टाइम पर औकात याद दिलाती रहूँगी कि मैं क्या हूँ।”

उन्होंने राज्य के नाम पर बदतमीजी झेलने वालों के साथ खड़े रहने की भी बात कही, “किसी के भी चमचे हो अगर इस तरह का कमेंट दोबारा करा जाएगा तो मैं सदैव खड़ी रहूँगी अपने समाज के साथ, अपने राज्य के साथ और सिर्फ अपने राज्य के साथ ही नहीं अगर किसी को भी उसके राज्य के नाम को गाली की तरह इस्तेमाल किया जाएगा तो मैं सदैव उन लोगों के साथ खड़ी रहूँगी।”

दीपिका झा बताती हैं कि उन्होंने इंस्टाग्राम में पर बदतमीजी के खिलाफ दिल्ली पुलिस के साइबर सेल में शिकायत कर दी है। वह कहती हैं कि इस शिकायत में कुछ लोगों का नाम शामिल किया गया है, जिनके पास जल्द ही पुलिस का नोटिस पहुँच जाएगा।

इंस्टाग्राम पर लगातार किया जा रहा ट्रोल

दीपिका झा को DUSU चुनाव में संयुक्त सचिव पद पर खड़े होने के साथ उस पद पर जीत हासिल करने तक भी इंस्टाग्राम पर लगातार ट्रोल किया गया। चुनाव अभियान में दीपिका ने कई वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए, जिस पर ट्रोलर्स ने भद्दे-भद्दे कमेंट्स किए हैं। यहाँ तक की उनके राज्य और उनकी पहचान मिथिला को लेकर भी सवाल उठाए गए।

इंस्टाग्राम पर पोस्ट में एक ट्रोलर ने लिखा, “भगाओ इस बिहारन को।”

                              दीपिका झा के इंस्टाग्राम पोस्ट पर किए गए कमेंट का स्क्रीनशॉट

एक इंस्टाग्राम यूजर ने लिखा, “मिथिला से है या पूर्वांचल से है। मतलब वोट के लिए कुछ भी।”

                                         दीपिका झा के इंस्टाग्राम पोस्ट पर किए गए कमेंट का स्क्रीनशॉट

दीपिका झा ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस से हुई झड़प की फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर की तो एक यूजर ने ट्रोल करते हुए लिखा, “मैडम की पार्टी की सरकार और मैडम उनसे ही लड़ रही।”

                                  दीपिका झा के इंस्टाग्राम पोस्ट पर किए गए कमेंट का स्क्रीनशॉट

यहाँ तक की दीपिका झा के चरित्र को मैला करने की भी कोशिश की गई। ट्रोलर्स ने लिखा, “यह दीपिका झा सिगरेट बीड़ी दारू सब पीती है। स्टूडेंट होने के बाद भी और फिर छात्र अध्यक्ष का इलेक्शन लड़ती है और शरीफ होने का ड्रामा करती है।”

NSUI की भद्दी राजनीति

इंस्टाग्राम ट्रोल्स के पीछे दीपिका झा ने NSUI का हाथ बताया है। दीपिका झा ने NSUI को चेतावनी भी दी कि अगर इस बार वो FIR-FIR खेलेंगी। साथ ही दीपिका झा ने अपने वीडियो में यह भी बताया कि इंस्टाग्राम पर भद्दे कमेंट्स करने वाले NSUI के ही ‘चमचे’ हैं।

यह पहली बार नहीं है जब NSUI ने ABVP को नीचा दिखाने के लिए किसी महिला का अपमान किया हो। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2025 में भी NSUI ने भद्दी राजनीति खेली। लगातार ABVP के उम्मीदवारों को निशाना बनाकर बदनाम करने की कोशिश की।

चुनाव प्रचार के दौरान दीपिका झा का एक वीडियो भी वायरल करवाया और दावा किया कि वो सिगरेट पीती हैं। NSUI ने कांग्रेस का प्रोपेगेंडा आगे बढ़ाते हुए दिल्ली चुनाव में ‘वोट चोरी’ के भी आरोप लगाए थे। अब ‘बिहारन’ नाम से गाली दी जा रही है।

लेकिन फिर भी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2025 में ABVP तीन पदों पर परचम लहराया। DUSU के अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद पर ABVP ने जीत हासिल की। DUSU के नए अध्यक्ष बने आर्यन मान के खिलाफ भी NSUI ने नैगेटिव कैंपने चलाया था।

‘शायद शिव जी का भी खतना…’ : महादेव का अपमान करने वाले DU प्रोफेसर को अदालत से झटका, FIR रद्द करने से किया साफ मना

शिवलिंग पर आपत्तिजनक कमेंट करने वाले DU प्रोफेसर की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में ख़ारिज हुई (साभार- organiser.org)
ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले एक प्रोफेसर को दिल्ली हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के प्रोफेसर रतन लाल पर दर्ज मुकदमा रद्द करने से इंकार कर दिया है। यह मुकदमा हिन्दुओं की भावनाओं को ठुकराने के लिए दर्ज किया गया था। हाईकोर्ट ने माना कि रतन लाल की टिप्पणियों से सामाजिक सौहार्द पर बुरा असर पड़ा था। यह आदेश मंगलवार(17 दिसंबर, 2024) को दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस चंद्रधारी सिंह की अदालत में हुई। रतन लाल की तरफ से पेश वकीलों ने अभिव्यक्ति की आज़ादी सहित तमाम दलीलें पेश कीं। उन्होंने इस आधार पर रतन लाल के खिलाफ FIR को रद्द करने की माँग की। हालाँकि कोर्ट पर इन दलीलों का कोई असर नहीं पड़ा।

अपने फैसले में अदालत ने कहा कि रतन लाल द्वारा पेश की गई दलीलों में वो तथ्य नहीं थे जिसके आधार पर आरोपित के खिलाफ FIR को रद्द किया जा सके। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि प्रोफेसर रतन लाल का इरादा एक वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का ही था। कोर्ट ने कहा कि प्रोफेसर जैसे पद वाले व्यक्ति की यह टिप्पणियाँ अशोभनीय हैं।

पूरा मामला

दिल्ली यूनिवर्सिटी में रतन लाल इतिहास विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। मई 2022 में जब ज्ञानवापी के मुकदमे में हिन्दू पक्ष ने शिवलिंग मिलने की बात कही तो तब रतन लाल ने सोशल मीडिया के अपने X और फेसबुक हैंडल पर एक आपत्तिजनक पोस्ट डाली थी। 14 मई, 2022 को डाली गई इस पोस्ट में उन्होंने लिखा, “यदि यह शिवलिंग हैं तो लगता है कि शायद शिव जी का भी खतना कर दिया गया था।” इसी पोस्ट में रतन लाल ने हंसी वाली इमोजी भी डाली थी।
प्रोफेसर रतन लाल के इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। उनके खिलाफ एक्शन की माँग जोर पकड़ने लगी थी। 18 मई, 2022 को दिल्ली के उत्तरी मौरिस नगर साइबर थाने में रतन लाल के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई थी। धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में यह शिकायत शिवाल भल्ला नाम के व्यक्ति ने दर्ज करवाई थी। पुलिस ने इस शिकायत पर IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा 153- A और 295- A के तहत FIR दर्ज कर ली थी।
20 मई, 2022 को पुलिस ने रतन लाल को खोज निकाला और गिरफ्तार कर लिया। अगले ही दिन 21 मई को प्रोफेसर रतन लाल जमानत पा गए। अब रतन लाल इस केस को खत्म करवाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुँचे थे। हालाँकि यहाँ उनकी याचिका ख़ारिज कर दी गई है।

दिल्ली शिक्षा मॉडल का खस्ता हाल, कॉलेज अध्यापकों को चार महीने से नहीं मिला वेतन, जूता पॉलिस कर जता रहे विरोध


मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हर जगह दिल्ली शिक्षा मॉडल की डफली बजाते फिरते हैं। उनके डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव और उन्नति के दावे करने का कोई मौका नहीं चूकते हैं। लेकिन उनके इस शिक्षा मॉडल की पोल खुलती जा रही है। केजरीवाल के ‘रेवड़ी कल्चर’ ने दिल्ली सरकार का खजाना खाली कर दिया है। इसकी वजह से कॉलेज अध्यापकों को वेतन देने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं है। दिल्ली विश्वविद्यालय के महाराजा अग्रसेन कॉलेज के अध्यापकों को चार महीने से वेतन नहीं मिला है। उनके सामने भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई। केजरीवाल सरकार की बेरुखी ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है। इससे परेशान होकर अध्यापक सड़क पर जूते पॉलिश कर अपना विरोध जता रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या में छात्र भी अध्यापकों का साथ दे रहे हैं।

केजरीवाल के राज में अध्यापक जूता पॉलिस करने के लिए मजबूर 

दरअसल दिल्ली विश्वविद्यालय के तहत आने वाले 12 कॉलेजों में से एक महाराजा अग्रसेन कॉलेज के अध्यापक आज सड़क पर है। कॉलेज के प्रोफेसरों ने कॉलेज के बाहर ही दिल्ली सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर करने और अपनी बदहाली पर ध्यान आकर्षित करने के लिए लोगों के जूते पॉलिश कर रहे हैं। दिल्ली सरकार द्वारा इस कॉलजे का शत-प्रतिशत वित्तपोषण किया जाता है। लेकिन सरकार का खजाना खाली होने से कॉलेज के शिक्षकों को वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

स्कूल फीस,लोन की किश्तों का भुगतान और बीमारी का इलाज हुआ मुश्किल

प्रोफेसर पीके शर्मा के मुताबिक महाराजा अग्रसेन कॉलेज के अध्यापकों और कर्मचारियों को चार महीनों से वेतन नहीं मिला है। वेतन न मिलने की स्थिति में कर्मचारी और अध्यापक अपने बच्चों की स्कूल फीस का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं, ये अपने लोन के भुगतान की किश्तें भी नहीं दे पाए हैं। अध्यापकों का आरोप है कि पिछले तीन सालों से इन कॉलेजों को मिलने वाले अनुदान में कमी की गई है और इनका समय पर भुगतान नहीं हो रहा है। बीमारी और कई के परिवार में किसी मृत्यु की स्थिति में उधार मांगकर क्रिया-कर्म निपटाने जैसे मामले भी सामने आए हैं।

स्थायी समाधान तक आर-पार की लड़ाई के मूड में अध्यापक

दिल्ली सरकार बेरुखी और आर्थिक तंगी से परेशान होकर अध्यापकों ने आंदोलन करने का फैसला लिया ताकि सरकार कुछ ठोस कदम उठाए। अब अध्यापक आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी बातों पर ध्यान नहीं देती है और स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक नए नए तरीकों से आंदोलन जारी रहेगा। अध्यापकों ने हर महीने वेतन का नियमित भुगतान संतोषजनक तरीके से करने की मांग की है।

कॉलेज के अध्यापकों के आरोप

  1. महाराजा अग्रसेन कॉलेज के अध्यापकों को चार महीने से वेतन नहीं मिल रहा है।
  2. तदर्थ शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग के एरियर भी अभी तक नहीं मिले हैं।
  3. पिछले तीन सालों से शिक्षकों को चिकित्सा बिलों का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
  4. एलटीसी सुविधा का भुगतान और बाल शिक्षा भत्ता भी नहीं मिल रहा है
दिल्ली शिक्षा मॉडल में भुखमरी के कगार पर पहुंचे कॉलेज अध्यापक
सम्मानजनक पेशे से जुड़े अध्यापक खुद को एकदम बेबस और अपमानित महसूस कर रहे हैं और मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं। इससे परेशान अध्यापकों ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर भी हमला बोला है। शिक्षकों का आरोप है कि शिक्षा क्षेत्र में बढ़-चढ़कर बखान करने वाली दिल्ली सरकार ने उन्हें भुखमरी के कगार पर ला दिया है। दिल्ली सरकार को बजट की समस्या से हो रही है जिसकी वजह से उन्हें समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है। सरकार सिर्फ आश्वासन पर आश्वासन दे रही है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शिक्षा को लेकर कितने गंभीर हैं
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली शिक्षा मॉडल को देश में सबसे बेस्ट बताते हैं। गुजरात चुनाव के दौरान उन्होंने अपने शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के लिए यहां तक कह दिया कि शिक्षा के क्षेत्र में उनके काम के लिए उनको भारत रत्न मिलना चाहिए। अब वही केजरीवाल फिनलैंड के शिक्षा मॉडल का अध्ययन करने के लिए टीम वहां भेजना चाहते हैं। यहां यह सवाल उठता है कि अगर दिल्ली का शिक्षा मॉडल बेस्ट है तो दिल्ली को फिनलैंड जाने की क्या जरूरत है फिर तो फिनलैंड को दिल्ली आकर अध्ययन करना चाहिए। आश्चर्य की बात यह है कि फिनलैंड की टीम खुद पिछले साल केरल शिक्षा मॉडल का अध्ययन करने भारत आई थी। सवाल यहां फिर उठता है कि है कि फिनलैंड की टीम जब शिक्षा मॉडल का अध्ययन करने भारत आई तो दिल्ली क्यों नहीं आई। दिल्ली के उपराज्यपाल ने जब फिनलैंड जाने की मंजूरी नहीं दी तो केजरीवाल अराजक हो गए। 
फिनलैंड ने केंद्र सरकार के साथ बातचीत करने के लिए विशेषज्ञ नियुक्त किया
फिनलैंड ने केंद्र सरकार के साथ बातचीत करने के लिए दिल्ली में एक फिनिश शिक्षा विशेषज्ञ की प्रतिनियुक्ति की है। फिनलैंड में शिक्षा विभाग के राज्य सचिव डैन कोइवलासो ने कहा कि भारत को शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग करने वाले प्रमुख देशों में से एक के रूप में देखा जाता है। नोबेल पीस सेंटर के कार्यकारी निदेशक जेर्स्टी फ्लगस्टैड ने कहा कि विश्व शांति बैठक आयोजित करने के सरकार के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।