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दिल्ली में गिरफ्तार ISIS आतंकी अबू मुहरिब पहले भी हुआ था अरेस्ट, ज्ञानवापी सर्वे का आदेश देने वाले ‘काफिर’ जज को मारने की दी थी धमकी: सिर्फ 4 माह में मिल गई थी जमानत

                             दिल्ली में ISIS के 2 आतंकी गिरफ्तार (साभार: OPIndia English)
राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार (24 अक्टूबर 2025) की सुबह एक आतंकवादी साजिश को नाकाम कर दिया गया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) के एक आतंकवादी मॉड्यूल को तोड़ दिया। इस ऑपरेशन में दो आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक का नाम मोहम्मद अदनान खान उर्फ अबू मुहरिब है, जो दिल्ली का रहने वाला है। दूसरा अदनान खान उर्फ अबू मोहम्मद है, जो मध्य प्रदेश का रहने वाला था। मुहरिब की उम्र 19 साल तो अबू मोहम्मद की उम्र 20 साल है

इससे पहले, ऑपइंडिया ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में खुलासा किया था कि ISIS के एक आतंकवादी मोहम्मद अदनान खान उर्फ अबू मुहरिब को उत्तर प्रदेश ATS ने पहले भी गिरफ्तार किया था।

वो 2024 से जमानत पर बाहर था। उसे उत्तर प्रदेश ATS ने UAPA के तहत गिरफ्तार किया था। दिल्ली स्पेशल सेल ने कहा, “भोपाल से एक संदिग्ध को पहले UP ATS ने अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था; 2024 में जमानत मिलने के बाद उसने आतंकवादी गतिविधियां फिर शुरू कर दीं, मुख्य रूप से ऑनलाइन भर्ती और प्रोपगैंडा फैलाने के जरिए। निगरानी से पता चला कि मॉड्यूल ने इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बनाने के लिए सामग्री जुटानी शुरू कर दी थी।”

दिल्ली स्पेशल सेल ने बताया कि मोहम्मद को सख्त UAPA एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था, लेकिन कोर्ट ने 2024 में उसे जमानत दे दी थी। 

जमानत पर बाहर आने के बाद उसने अपनी आतंकवादी गतिविधियाँ फिर शुरू कर दीं और ISIS से जुड़ाव बढ़ा लिया। उसने सोशल मीडिया के जरिए इस्लामिक प्रोपगैंडा सामग्री फैलानी शुरू की और ISIS के लिए आतंकवादियों की भर्ती शुरू करती। उसने आतंकी हमलों के लिए IED बनाने की सामग्री भी जुटानी शुरू कर दी थी।

ऑपइंडिया ने अब वो केस ढूँढ निकाला है जिसमें अदनान को UP ATS ने गिरफ्तार किया था और बाद में उत्तर प्रदेश के लखनऊ में स्पेशल NIA कोर्ट ने उसे जमानत दे दी थी।

ISIS आतंकवादी ने ज्ञानवापी केस में ‘काफिर’ जज को मारने की दी थी धमकी

दिल्ली स्पेशल सेल ने अब जिस ISIS आतंकी मोहम्मद अदनान को गिरफ्तार किया है, उसने ज्ञानवापी केस से जुड़े एक जज को धमकी दी थी। उसने इंस्टाग्राम पर लिखा, “THE KAFIRS BLOOD IS HALAL FOR YOU THOSE WHO FIGHT AGAINST YOUR DEEN.” तस्वीर में जज की आंखों के ऊपर लाल रंग में ‘KAFIR’ लिखा हुआ था।
FIR के मुताबिक, मोहम्मद अदनान ने अतिरिक्त जिला जज (फास्ट ट्रैक कोर्ट) बरेली, रवि कुमार दीवाकर की फोटो शेयर की थी, जिन्होंने 2022 में विवादित ज्ञानवापी ढाँचे के वीडियोग्राफिक सर्वे का आदेश दिया था।
UP ATS की FIR में लिखा है, “उनके विचारधारा से जुड़े लोग ज्ञानवापी केस सुन रहे जज को मारने के लिए प्रेरित हो रहे हैं और ये पोस्ट दूसरी धर्मों वालों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचा रही है और वर्गों के बीच दुश्मनी व नफरत फैलाने के लिए राष्ट्रविरोधी गतिविधियाँ की जा रही हैं।”

जमानत देते वक्त कोर्ट ने क्या कहा था?

स्पेशल NIA जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने 26 सितंबर 2024 को मोहम्मद अदनान को जमानत दी। उन्होंने जमानत देने के दो मुख्य कारण बताए। पहला ये कि अदनान पर लगा अपराध 7 साल से कम सजा वाला था। वो जून 2024 से जेल में था, इसलिए उसे जमानत का हक था।
दूसरा कारण ये था कि उसका कोई पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं था।
अदनान पर IPC की धारा 153A, 115 और 506 के साथ UAPA की धारा 13 लगी थी। उस केस में जमानत मिलने के बाद उसने कथित तौर पर चरमपंथी गतिविधियाँ फिर शुरू कर दीं। यूट्यूब, इंस्टाग्राम और दूसरी प्लेटफॉर्म्स पर चैनल बनाकर चरमपंथी सामग्री पोस्ट की और समान विचार वाले लोगों की भर्ती की। उसने सीरिया में बैठे हैंडलर अबू इब्राहिम अल-कुरैशी से संपर्क होने की बात भी कबूल की।

‘शायद शिव जी का भी खतना…’ : महादेव का अपमान करने वाले DU प्रोफेसर को अदालत से झटका, FIR रद्द करने से किया साफ मना

शिवलिंग पर आपत्तिजनक कमेंट करने वाले DU प्रोफेसर की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में ख़ारिज हुई (साभार- organiser.org)
ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले एक प्रोफेसर को दिल्ली हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के प्रोफेसर रतन लाल पर दर्ज मुकदमा रद्द करने से इंकार कर दिया है। यह मुकदमा हिन्दुओं की भावनाओं को ठुकराने के लिए दर्ज किया गया था। हाईकोर्ट ने माना कि रतन लाल की टिप्पणियों से सामाजिक सौहार्द पर बुरा असर पड़ा था। यह आदेश मंगलवार(17 दिसंबर, 2024) को दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस चंद्रधारी सिंह की अदालत में हुई। रतन लाल की तरफ से पेश वकीलों ने अभिव्यक्ति की आज़ादी सहित तमाम दलीलें पेश कीं। उन्होंने इस आधार पर रतन लाल के खिलाफ FIR को रद्द करने की माँग की। हालाँकि कोर्ट पर इन दलीलों का कोई असर नहीं पड़ा।

अपने फैसले में अदालत ने कहा कि रतन लाल द्वारा पेश की गई दलीलों में वो तथ्य नहीं थे जिसके आधार पर आरोपित के खिलाफ FIR को रद्द किया जा सके। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि प्रोफेसर रतन लाल का इरादा एक वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का ही था। कोर्ट ने कहा कि प्रोफेसर जैसे पद वाले व्यक्ति की यह टिप्पणियाँ अशोभनीय हैं।

पूरा मामला

दिल्ली यूनिवर्सिटी में रतन लाल इतिहास विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। मई 2022 में जब ज्ञानवापी के मुकदमे में हिन्दू पक्ष ने शिवलिंग मिलने की बात कही तो तब रतन लाल ने सोशल मीडिया के अपने X और फेसबुक हैंडल पर एक आपत्तिजनक पोस्ट डाली थी। 14 मई, 2022 को डाली गई इस पोस्ट में उन्होंने लिखा, “यदि यह शिवलिंग हैं तो लगता है कि शायद शिव जी का भी खतना कर दिया गया था।” इसी पोस्ट में रतन लाल ने हंसी वाली इमोजी भी डाली थी।
प्रोफेसर रतन लाल के इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। उनके खिलाफ एक्शन की माँग जोर पकड़ने लगी थी। 18 मई, 2022 को दिल्ली के उत्तरी मौरिस नगर साइबर थाने में रतन लाल के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई थी। धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में यह शिकायत शिवाल भल्ला नाम के व्यक्ति ने दर्ज करवाई थी। पुलिस ने इस शिकायत पर IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा 153- A और 295- A के तहत FIR दर्ज कर ली थी।
20 मई, 2022 को पुलिस ने रतन लाल को खोज निकाला और गिरफ्तार कर लिया। अगले ही दिन 21 मई को प्रोफेसर रतन लाल जमानत पा गए। अब रतन लाल इस केस को खत्म करवाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुँचे थे। हालाँकि यहाँ उनकी याचिका ख़ारिज कर दी गई है।

‘कट्टरपंथी रच रहे हत्या की साजिश, बताते हैं काफिर’: ज्ञानवापी में सर्वे का आदेश देने वाले जज के लिए NIA ने माँगी सुरक्षा, घर के पास से धराया था PFI एजेंट; सरकार को उपद्रवियों और इनके समर्थकों को भी आजीवन कारावास देनी चाहिए

                                        जिस जज ने दी ज्ञानवापी में सर्वे की अनुमति, उन्हें मिल रही धमकी
वाराणसी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे के सर्वे का आदेश देने वाले जज को धमकी मिल रही है, जिसके बाद NIA ने उसके लिए सुरक्षा की माँग की है। न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 2022 में ज्ञानवापी के ढाँचे की मूल प्रकृति का पता लगाने के ASI द्वारा इसके वैज्ञानिक सर्वे की अनुमति दी थी। मुस्लिम इसे मस्जिद बताते हैं, जबकि मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने यहाँ मंदिर ध्वस्त कर उसके ऊपर मस्जिद खड़ी कर दी थी। इसके भीतर कलश और त्रिशूल से लेकर कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ भी मिली हैं।

NIA कोर्ट के स्पेशल जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि जज रवि कुमार दिवाकर की सुरक्षा अपर्याप्त है और इसे बढ़ाने की ज़रूरत है। 3 सप्ताह पहले भी अदनान खान नामक शख्स ने उन्हें धमकी दी है, जिसे लेकर FIR भी दर्ज की जा चुकी है। NIA ने कहा है कि इस्लामी कट्टरपंथी उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं। इसे एक बेहद संवेदनशील मामला बताते हुए कहा गया है कि अगर अदनान की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो कोई बड़ी घटना हो सकती है।

रवि कुमार दिवाकर बरेली में एडिशनल सेशन जज हैं। वो उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भी जून 2022 में पत्र लिख कर निवेदन किया था कि उनकी सुरक्षा बढ़ाई जाए। 13 मई, 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें सुरक्षा देने को कहा था, लेकिन इसे अब अपर्याप्त बताया जा रहा है। दिवाकर ने कहा था कि इस्लामी कट्टरपंथी अल्पसंख्यक समाज का ब्रेनवॉश कराने में लगे हैं और उन्हें ‘काफिर’ बताते हैं। वर्तमान में उन्हें 2 पुलिसकर्मी मिले हुए हैं, लेकिन आतंकी हमलों से निपटने के लिए उनके पास उचित हथियार तक नहीं हैं।

उत्तर प्रदेश ATS ने 3 जून, 2024 को अदनान खान के खिलाफ FIR भी दर्ज की थी। वो जस्टिस रवि कुमार दिवाकर को धमकाने के लिए इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करता है। जून 2022 में उन्हें ‘इस्लामिक आगाज़ मूवमेंट’ की तरफ से धमकी भरा पत्र भेजा गया था। इसके उनके परिवार की हत्या की धमकी के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाना बनाया गया था। अप्रैल 2024 में दिवाकर ने बरेली के SSP को भी पत्र लिख कर कहा था कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय नंबरों से फोन कॉल आ रहे हैं। लखनऊ स्थित उनके आवास से PFI के एक एजेंट की गिरफ़्तारी भी हुई थी।

ज्ञानवापी के लिए पैसे देने वाले माफिया मुख्तार अंसारी की मौत के बाद मुकदमों पर पड़ेगा, असर रिपोर्ट में दावा - महंगे वकीलों की फीस कैसे दी जाएगी?

                                    मुख्तार अंसारी देता था ज्ञानवापी के लिए पैसे (फोटो साभार : जागरण)
ज्ञानवापी से जुड़े मामलों की सुनवाई एक ही दिन में जिला कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक में होती रहती थी। अब लगता है, वो रुक जाएगी। भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में बीजेपी नेता के हवाले से दावा किया है कि मुख्तार अंसारी ज्ञानवापी को चंदे देता था और उन पैसों से मुकदमे बाजी की जाती थी। बीजेपी नेता ने कहा कि साल 2012 से मुख्तार अंसारी की ओर से पैसे दिए जाते हैं। उनका दावा है कि अब ज्ञानवापी के मुकदमे को लड़ने पर फर्क पड़ सकता है, क्योंकि फंड की कमी आ सकती है।

इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2022 में भी ज्ञानवापी पक्ष के लिए हो रहे फंडिंग की जाँच का मुद्दा उठा था, लेकिन बाद में ये माँग ढीली पड़ गई। माफिया विरोधी मंच के अध्यक्ष और बीजेपी नेता सुधीर सिंह का दावा है कि साल 2012 में पहली बार मुख्तार अंसारी ने ज्ञानवापी के लिए 10 लाख रुपए दिए थे। मुख्तार अंसारी अपने इलाजे के लिए बीएचयू पहुँचे थे। यहाँ उनकी मुलाकात मुफ्ती अब्दुल बातिन से हुई थी। मुफ्ती की तरफ से ही ज्ञानवापी के जर्जर होने की दुहाई दी गई, जिसके बाद मुख्तार ने अपने पीए को बुलाकर 10 लाख रुपए मंगवाए और उन्हें दे दिए। सुधीर सिंह का दावा है कि ये लेनदेन उनकी मौजूदगी में हुई थी, क्योंकि वो भी उस समय समाजवादी पार्टी के नेता थे।

सुधीर सिंह ने कहा, “मुख्तार अंसारी ने आगे भी पैसे देने का वादा किया। वो सेशन कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक केस लड़ने के लिए पैसे भिजवाता था।” हालाँकि अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने इस दावे को खारिज किया है। ज्वॉइंट सेक्रेटरी एसएम यासीन ने कहा कि मुख्तार से कभी पैसे नहीं लिए गए। मुख्तार ने खुद से चंदा दिया हो, ऐसा कोई वाकया उन्हें याद नहीं। वहीं, मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी ने भी वही बाते दोहराई और कहा कि जो व्यक्ति साल 2005 से जेल में बंद हो, वो हमारी मदद क्या करेगा?

अपने दावे के बारे में बात करते हुए सुधीर सिंह ने बताया, “साल 2012 में मुख्तार अंसारी को यूरिक एसिड की समस्या थी, जिसके इलाज के लिए वो बीएचयू आए थे। वहीं मुफ्ती नोमानी से उनकी मुलाकात हुई। इस मुलाकात के दौरान मुफ्ती नोमानी ने कहा कि ज्ञानवापी की हालत जर्जर होती जा रही है, वो कभी भी गिर सकती है। मरम्मत के लिए रकम की जरूरत है। इस पर मुख्तार ने अपने पीए को कहकर 10 लाख रुपए गाड़ी से मँगवाए और उन्हें दे दिया। इसके बाद मुफ्ती ने रकम को नाकाफी बताया, तो मुख्तार ने और भी मदद करने की बात कही, साथ ही कहा कि हर माह उन्हें रकम पहुँचती रहेगी।”

कर्नाटक : SDPI के चाँद पाशा ने ज्ञानवापी वाले जज को बताया ‘RSS का जूता चाटने वाला’, SI तनवीर हुसैन ने विरोध करने वालों पर ही कर दी FIR

वाराणसी के जज पर अभद्र टिप्पणी के खिलाफ कर्नाटक में लामबंद हुए वकील (फोटो साभार: द साउथ फर्स्ट/टाइम्स नाउ)
पिछले महीने वाराणसी की जिला अदालत ने ज्ञानवापी ढाँचे के व्यास जी तहखाना में पूजा का अधिकार हिंदुओं को दिया था। इस फैसले के बाद कर्नाटक के रामनगर में एक नया बखेड़ा शुरू हो गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार फैसला सुनाने वाले जज को लेकर वकील चाँद पाशा ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। पाशा प्रतिबंधित इस्लामी संगठन PFI की राजनीतिक विंग SDPI से भी जुड़ा हुआ है। उसकी टिप्पणी का विरोध करने वाले वकीलों पर SI तनवीर हुसैन द्वारा FIR करने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया है।

यह मामला एक अभद्र फेसबुक पोस्ट से जुड़ा हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार SDPI से जुड़े वकील चाँद पाशा ने वाराणसी कोर्ट के जज के निर्णय पर प्रश्न उठाते हुए एक पोस्ट किया। उसने हिंदुओं को व्यास जी तहखाना में पूजा करने की अनुमति देने वाले जज को कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ‘जूता चाटने वाला’ बताया था।

इसको लेकर रामनगर के वकीलों ने चाँद पाशा के खिलाफ इजूर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पाशा को जिले के अधिवक्ता संघ से निकाले जाने की माँग भी हुई। इसको लेकर जब मीटिंग बुलाई गई तो उसमें विवाद हो गया। आरोप है कि पाशा ने इस मीटिंग में खलल डाला।

वकीलों ने आरोप लगाया है कि पाशा और उसके समर्थकों ने उत्पात मचाया। इसके बाद पाशा के एक साथी रफीक खान ने विरोध करने वाले वकीलों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। इस पर इजूर थाने के SI तनवीर हुसैन ने 10 वकीलों समेत 40 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली।

वकीलों ने तनवीर पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है। उन्होंने रामनगर में जिला कलेक्टर के दफ्तर के बाहर धरना देकर तनवीर को निलंबित किए जाने की माँग की है। इसको लेकर वकीलों ने रामनगर में रैली भी निकाली। वकीलों ने आरोप लगाया है कि स्थानीय प्रशासन उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और स्थानीय विधायक MA इकबाल हुसैन के दबाव में काम कर रहा है।

रामनगर की इस घटना पर अब राज्य में राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। भाजपा और जेडीएस ने राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन कर रहे वकीलों का समर्थन किया है। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा विधायक आर अशोक ने आरोप लगाया है कि SI तनवीर हुसैन राष्ट्रविरोधी ताकतों को मदद दे रहा है। अशोक ने कहा कि चाँद पाशा लगातार ऐसे ही अभद्र बयान देता रहा है और उसके खिलाफ जिले में 12 शिकायतें दर्ज हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेन्द्र ने भी इस मामले पर राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राज्य की पुलिस को चाँद पाशा को गिरफ्तार करना चाहिए था, क्योंकि उसने न्यायपालिका पर अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि तनवीर हुसैन को ऊपर से किसी ताकत का समर्थन हासिल है, क्योंकि उसने एक राष्ट्र विरोधी के साथ खड़े होने का काम किया है। इसकी उन्होंने जाँच की माँग की है।

चाँद पाशा को तो गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन वकील अपनी माँग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि इस मामले में तनवीर हुसैन ने सही आचरण नहीं दिखाया इसलिए उसे भी निलंबित किया जाना चाहिए। इसको लेकर आज (21 फरवरी 2024) बेंगलुरु में प्रदर्शन की भी चेतावनी दी है।


उत्तर प्रदेश : जुमे से पहले ही बँट गया था पर्चा…मौलाना तौकीर रज़ा के भड़काने के बाद बरेली में हिंसा; दंगाई क्षेत्र में पुलिस को blind firing आर्डर देकर भेजा जाए, लाठी या अश्रु गैस के भरोसे नहीं

                      रेली में मौलाना तौकीर रज़ा के इशारे पर हिंसा (फोटो साभार: हिंदुस्तान/दैनिक जागरण)
बरेली में मौलाना तौकीर रज़ा के इशारे पर निकली भीड़ ने जुमे की नमाज के बाद हिन्दुओं को पीटा, गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त की, पत्थरबाजी की और पुलिस के बैरिकेड्स तोड़े। मौलाना ने ज्ञानवापी के तहखाने में अदालत द्वारा पूजा फिर से शुरू करवाए जाने के खिलाफ गिरफ़्तारी देने और ‘जेल भरो’ अभियान का ऐलान किया था। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जुमे से पहले पर्चे बाँटे गए थे। उसने बताया कि इकट्ठा होने के बाद भीड़ ने बवाल किया, हिंसा की।
देश में जब भी दंगे होते हैं दंगाई पत्थरबाज़ी और पेट्रोल बम का इस्तेमाल किया जाता है, फिर पुलिस को सीधे blind firing आदेश देकर क्यों नहीं भेजा जाता? क्या दंगाई लाठी या अश्रु गैस से मानने वाले हैं, बल्कि उनको छुपने का मौका दिया जाता है। राज्य सरकारों से लेकर केंद्र और केंद्र सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट को इस मुद्दे को अति गंभीरता से लेना चाहिए। Victim card खेलने वालों पर भी सख्ती जरुरी है। आखिर देश कब तक दंगों में जलता रहेगा? इसका अंत केवल blind firing है, लाठीचार्ज या अश्रु गैस नहीं। दूसरे दोषी पाए जाने वालो को ब्लैकलिस्ट कर उन्हें मिलने वाली सारी सरकारी सुविधाएं कम से कम 10 वर्षों के लिए बंद कर देनी चाहिए। क्योकि दंगाइयों ने अब बच्चों और औरतों को आगे कर अपना खेल खेलने की रणनीति बनाई हुई है, जब blind firing में बेगुनाहों की लाशें बिछाने वालों की भी लाशें बिछनी शुरू नहीं होंगी, तभी दंगों की रोकथाम संभव है। यह काम केवल तभी संभव हो पायेगा अगर केंद्र सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक दंगा मुक्त भारत चाहती हैं। दंगे में हमेशा से बेगुनाह-हिन्दू अथवा मुसलमान- ही मरता आया है, दंगाई या दंगे के लिए उकसाने वाला नहीं।   

दुकानों में भी तोड़फोड़ की है, एक दुकान में लगे फूलों को तोड़ कर फेंक दिया गया। पीड़ित दुकानदार ने बताया कि 2000 रुपए का नुकसान हुआ है, बाकी दिन फूल यूँ ही लगे होते थे और कोई गड़बड़ी नहीं होती थी। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि भीड़ ने पत्थर भी फेंके, CCTV कैमरों में सब कुछ कैद है। उन्होंने बताया कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पर्चे में ग्राउंड में इकट्ठा होने को कहा गया। नाबालिग बच्चों को भी आगे किया गया।

एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि नमाज के बाद निकलते हुए लोगों ने हिंसा की, दुकानों को तोड़ दिया गया। उधर मौलाना तौकीर रज़ा ने कहा कि वो ज्ञानवापी पर मुस्लिम पक्ष का दावा छोड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले भाजपा के लोग अगर सचमुच मंदिर से मोहब्बत करते हैं तो कैलाश मानसरोवर को चीन से आज़ाद कराएँ। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मौजूद रहने के बावजूद कोर्ट में मुस्लिमों के फैसले भी UCC के तहत होते रहे हैं, UCC देश में पहले से मौजूद है।

बवाल श्यामगंज इलाके से शुरू हुआ। ‘मौलाना आज़ाद इंटर कॉलेज’ के सामने कमल शर्मा और समीर सागर नामक 2 युवक मौजूद थे, उनके साथ मारपीट की गई। उनकी बाइक तोड़े जाने के बाद पत्थरबाजी शुरू कर दी गई। बिहारीपुर पुलिस चौकी के पास मौलाना तौकीर रज़ा ने गिरफ़्तारी दी। पुलिस ने उन्हें तुरंत रिहा भी कर दिया, जिसके बाद वो अपने घर चला गया। GIC ऑडिटोरियम के पास स्थित मस्जिद में नमाज के बाद मुस्लिम भीड़ ने ‘जेल भरो’ अभियान शुरू किया।

मुलायम ने लगाई थी रोक;अब योगी राज में ज्ञानवापी में भी करिए पूजा-पाठ: कोर्ट ने व्यास तहखाने में दिया पूजा का अधिकार, कहा – 7 दिन में करो व्यवस्था

ज्ञानवापी ढाँचे में हिन्दुओं को पूजा-पाठ की मिली अनुमति
वाराणसी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बुधवार (31 जनवरी, 2024) को ‘अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमिटी’ को नोटिस जारी किया है। असल में हिन्दू पक्ष ने उस क्षेत्र के वैज्ञानिक सर्वे की माँग की थी, जिसे मुस्लिम वजूखाना बताते हैं लेकिन वहाँ शिवलिंग मिला था। इसी पर हाईकोर्ट ने वजूखाना से जवाब माँगा था। उधर ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में पूजा-पाठ की अनुमति हिन्दुओं को मिल गई है। वाराणसी की जिला अदालत ने ये फैसला सुनाया है।

जिला प्रशासन को आदेश दिया गया है कि बैरिकेडिंग लगाया जाए और और एक सप्ताह के भीतर पूजा-पाठ की व्यवस्था की जाए। ये तहखाना ढाँचे के नीचे है। मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद बताता है। अब यहाँ नियमित पूजा-अर्चना के लिए मार्ग प्रशस्त हो गया है। हिन्दू पक्ष ने इसे बड़ी जीत करार दिया है। बता दें कि नवंबर 1993 तक पूजा होती थी। मुलायम सिंह यादव की सरकार ने पूजा-पाठ पर रोक लगा दी थी। शैलेन्द्र कुमार पाठक ने इस संबंध में याचिका दाखिल की थी, जिस पर अब फैसला आया है।

वहीं मुस्लिम पक्ष इस मामले में ‘वर्शिप एक्ट’ का हवाला देते हुए कह रहा था कि पूजा-पाठ की अनुमति यहाँ नहीं दी जा सकती है। लेकिन, कोर्ट ने हिन्दू पक्ष की याचिका स्वीकार कर ली। 17 जनवरी को ही ‘व्यास तहखाने’ को जिला प्रशासन ने अपने नियंत्रण में ले लिया था। ASI ने यहाँ सर्वे किया था, साथ ही साफ़-सफाई भी की गई थी। इसे ‘व्यास तहखाना’ कहा जाता है, क्योंकि सोमनाथ व्यास नामक पुजारी और उनका परिवार यहाँ 1993 तक पूजा-अर्चना करता आ रहा था।

हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि जिला प्रशासन व्यवस्था करेगा, वहाँ पूजा-पाठ शुरू हो जाएगी। इस फैसले के बाद ‘हर-हर महादेव’ के नारे भी लगे। उन्होंने इस घटना की तुलना 1986 के उस आदेश से की, जब केएम पांडेय ने यहाँ का ताला खुलवाया था। उन्होंने कहा कि वजूखाने का सर्वे अगला लक्ष्य है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद लोगों में उम्मीद जगी है कि काशी विश्वनाथ में भी उन्हें जीत मिलेगी।


योनिपट्ट से गायब शिवलिंग, टूटी हनुमान-गणेश की मूर्ति… ज्ञानवापी में गाजियों(मुग़ल बादशाह) द्वारा हुआ हिंदू देवी-देवताओं का अपमान, ASI ने साफ कहा- पहले ये मंदिर था

ज्ञानवापी के भीतर मिली खंडित हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ
केंद्र और उत्तर प्रदेश में एक ही पार्टी यानि भाजपा की सरकार होने से अयोध्या के बाद अब ज्ञानवापी की सच्चाई सामने आ गयी। अगर दोनों जगह भाजपा सरकारें नहीं होती अयोध्या की तरह ज्ञानवापी की भी सच्चाई को छुपाकर मुस्लिम कट्टरपंथी और छद्दम सेक्युलरिस्ट्स हिन्दुओं को साम्प्रदायिक बताकर अपना नंगा नाच खेल रहे होते। गाज़ियों को महान बादशाह बताकर भारतीयों को गलत इतिहास पढ़ाया जाता रहा। 

ज्ञानवापी की जगह एक बड़ा हिंदू मंदिर था… ऐसा भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण ने अपनी रिपोर्ट में बताया है। उन्होंने कई सबूत पेश किए हैं जिनसे पता चलता कि हिंदू मंदिर को तोड़कर वहाँ ज्ञानवापी का ढाँचा खड़ा किया गया। 26 जनवरी की सुबह इस रिपोर्ट पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने जानकारी दी थी। हालाँकि अब रिपोर्ट में जोड़ी गई कुछ तस्वीरें भी मीडिया में आ गई हैं जिन्हें देख हिंदू आक्रोशित हैं।

                                                                 हनुमान जी की खंडित मूर्ति 

ASI की रिपोर्ट में साफ लिखा गया था ज्ञानवापी परिसर में हिंदू मंदिर था, जिसे 17वीं शताब्दी में तोड़कर नया ढाँचा बनाया गया और ज्ञानवापी परिसर को बनाने में उसी मंदिर के मलबे को लगा दिया गया।

                                               बिन शिवलिंग के योनिपट्ट (तस्वीर साभार: दैनिक जागरण)

तस्वीरों में देख सकते हैं कि कितनी बेरहमी से हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को खंडित किया गया। इन तस्वीरों में हनुमान जी की मूर्ति है, गणेश जी की प्रतिमा है, विष्णु जी हैं और योनिपट्टा भी है जिसमें से शिवलिंग गायब है।

                                                                   खंडित गणेश प्रतिमा

बता दें कि ASI क रिपोर्ट में मंदिर होने के 32 सबूत मिले हैं।

                                                       चार भुजाधारी खंडित मूर्ति

ज्ञानवापी मामले में ASI रिपोर्ट से हुए मुख्य खुलासे

  • सबसे बड़ी चीज जो इस रिपोर्ट में आई वो भगवान शिव के 3 नाम दीवारों पर लिखे मिले हैं- जनार्दन, रुद्र और ओमेश्वर।
  • दीवारों पर कन्नड़, तेलुगु, देवनागरी और ग्रंथा भाषाओं में लेखनी मिली है।
  • ढाँचे के सारे खंभे भी गवाही दे रहे हैं कि वह पहले मंदिर का हिस्सा थे उन्हें मॉडिफाई करके वहाँ नए ढाँचे में शामिल किया गया।
  • ढाँचे की पश्चिमी दीवार से भी पता चलता है कि वो मंदिर की दीवार है जो 5 हजार साल पहले की नागर शैली में निर्मित है।
  • दीवार के नीचे 1 हजार साल पुराने अवशेष भी मिले हैं।
  • ये भी पता चला है कि ढाँचे से पहले मंदिर में बड़ा केंद्रीय कक्ष और उत्तर की ओर छोटा कक्ष था।
  • कुछ खंबों से हिंदू चिह्नों को मिटाने के भी प्रमाण मिले हैं।
  • इतना ही नही हनुमान जी और गणेश जी की खंडित मूर्तियाँ, दीवार पर त्रिशूल की आकृति भी मिली हैं। साथ ही तहखाने में भी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ मिलीं।
  • यह भी पता चला कि ढाँचे का गुंबद महज 350 साल पुराना है जबकि उसके परिसर में मिलने वाले हिंदू साक्ष्य हजारों वर्ष पुराने हैं।
  • ढाँचे के निर्माण संबंधी एक शिलापट पर अंकित समय को मिटाने का भी प्रयास हुआ है।
  • ASI रिपोर्ट से निष्कर्ष आया है कि 2 सितंबर 1669 को मंदिर ढहा दिया गया था।

इस रिपोर्ट के आने के बाद  मुस्लिम पक्ष ने इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। वहीं हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने कहा है कि 839 पेज की रिपोर्ट में वजूखाने को छोड़कर हर कोने का एक-एक ब्‍योरा एएसआई ने लिखा है। रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि मंदिर तोड़कर ज्ञानवापी ढाँचा बनाया गया थी। इसलिए अब हिंदुओं को वहाँ पूजा-पाठ की अनुमति मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ढाँचे के भीतर वजूखाने में मिले शिवलिंग का भी एएसआई सर्वे होने के बाद साफ हो जाएगा कि वो कोई फव्वारा नहीं शिवलिंग ही है। इसके अलावा भी कई सबूत मिलेंगे जो हिंदुओं के पक्ष को मजबूत करेंगे।


ज्ञानवापी मंदिर : ज्ञानवापी मस्जिद समर्थकों को ज्ञानवापी का अर्थ जानने के लिए स्कन्द पुराण पढ़ने की जरुरत

आज ज्ञानवापी का अर्थ जाने बिना मुस्लिम कट्टरपंथी अपनी दुकान चलाए रखने लिए इसका विरोध कर रहे हैं, जिसका कुर्सी की खातिर तुष्टिकरण के आगे घुटने टेक चुके अधर्मी हिन्दुओं का भी समर्थन रहा है। दोनों जनता को गुमराह कर मालपुए खा रहे हैं। इन उपद्रवियों को सनातन का विरोध करने से पहले  ज्ञानवापी के अर्थ को समझने के लिए स्कन्द पुराण पढ़ना चाहिए कि ज्ञानवापी नाम क्यों पड़ा। 
पुराणों के अनुसार, ज्ञानवापी की उत्पत्ति तब हुई थी जब धरती पर गंगा नहीं थी और इंसान पानी के लिए बूंद-बूंद तरसता था तब भगवान शिव ने स्वयं अपने अभिषेक के लिए त्रिशूल चलाकर जल निकाला..

यही पर भगवान शिव ने माता पार्वती को ज्ञान दिया। इसीलिए, इसका नाम ज्ञानवापी पड़ा और जहां से जल निकला उसे ज्ञानवापी कुंड कहा गया। ज्ञानवापी का उल्लेख हिंदू धर्म के पुराणों मे मिलता है तो फिर ये मस्जिद के साथ नाम कैसे जुड़ गया?
वापी का अर्थ होता है तालाब। ज्ञानवापी का सम्पूर्ण अर्थ है ज्ञान का तालाब। काशी की छः वापियों का उल्लेख पुराणों मे भी मिलता है।
पहली वापी: ज्येष्ठा वापी, जिसके बारे मे कहा जाता है की ये काशीपुरा मे थी, अब लुप्त हो गई है।
दूसरी वापी: ज्ञानवापी, जो काशी विश्वनाथ मंदिर के उत्तर मे है।
तीसरी वापी: कर्कोटक वापी, जो नागकुंआ के नाम से प्रसिद्ध है।
चौथी वापी: भद्रवापी, जो भद्रकूप मोहल्ले मे है।
पांचवीं वापी: शंखचूड़ा वापी, लुप्त हो गई।
छठी वापी: सिद्ध वापी, जो बाबू बाज़ार मे है और अब लुप्त हो गई।
अठारह (18) पुराणों मे से एक लिंग पुराण मे कहा गया है:

"देवस्य दक्षिणी भागे वापी तिष्ठति शोभना।
तस्यात वोदकं पीत्वा पुनर्जन्म ना विद्यते।"

इसका अर्थ है: प्राचीन विश्ववेश्वर मंदिर के दक्षिण भाग में जो वापी है, उसका पानी पीने से जन्म मरण से मुक्ति मिलती है।
स्कंद पुराण मे कहा गया है: 
उपास्य संध्यां ज्ञानोदे यत्पापं काल लोपजं।
क्षणेन तद्पाकृत्य ज्ञानवान जायते नरः
।

अर्थात इसके जल से संध्यावंदन करने का भी बड़ा फल है, इससे भी ज्ञान उत्पन्न होता है, पाप से मुक्ति मिलती है।
स्कंद पुराण:

योष्टमूर्तिर्महादेवः पुराणे परिपठ्यते ।।
तस्यैषांबुमयी मूर्तिर्ज्ञानदा ज्ञानवापिका।।

अर्थात ज्ञानवापी का जल भगवान शिव का ही स्वरूप है।
पुराण जो ना जाने कितनी सदियों पहले लिखे गए, उसमें भी ज्ञानवापी को भगवान शिव का स्वरूप बताया गया है। सारे पुराण, कह रहे है की ज्ञानवापी हिंदुओं से जुड़ा हुआ है लेकिन आज 2023मे आप सुनते है की मस्जिद का नाम है ज्ञानवापी मस्जिद। मुस्लिम आक्रांताओं के आक्रमण से पहले काशी को अविमुक्त और भगवान शिव को अविमुक्तेश्वर कहा जाता था।
काशी मे अविमुक्तेश्वर के स्वयं प्रकट हुए शिवलिंग की पूजा होती थी जिसे आदिलिंग कहा जाता था!

‘कितना भी सर्वे कराओ कोई मस्जिद नहीं देंगे, इंशाअल्लाह सड़कों पर होगी लड़ाई’: ज्ञानवापी पर मौलाना तौकीर रज़ा का ऐलान, सुप्रीम कोर्ट को बताया ‘बेईमान’

मौलाना तौकीर रज़ा ने अब किसी भी मस्जिद पर कोई भी समझौता न करने का एलान किया (चित्र साभार- X/@KhanUsama78255)
अपने विवादित बयानों के लिए कुख्यात मौलाना तौकीर रज़ा ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। तौकीर रज़ा ने ज्ञानवापी के लिए सड़कों पर लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है। मथुरा और काशी मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वो अब कोई मस्जिद देने को तैयार नहीं हैं भले ही कोई कितना भी सर्वे क्यों न करा ले। उन्होंने राम मंदिर पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी बेईमानी बताया। तौकीर ने यह बयान सोमवार (18 दिसंबर, 2023) को दिल्ली में दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 18 दिसंबर, 2023 को दिल्ली के ऐवान-ए-गालिब हॉल में मुस्लिम पंचायत आयोजित की गई थी। यह पंचायत इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) ने बुलाई गई थी। इसी आयोजन में बोलते हुए तौकीर ने अपनी आस्था का हवाला देते हुए कहा, “बाबरी मस्जिद के बाद अब बस। हमने बाबरी को सब्र किया है ज्ञानवापी पर सब्र नहीं करेंगे। इंशाअल्लाह यह लड़ाई सड़कों पर लड़ी जाएगी।” वकील महमूद प्राचा को मंच पर बुलाते हुए तौकीर ने उन्हें कोर्ट में लड़ाई लड़ने वाला बताया और खुद अपने समर्थकों के साथ सड़कों पर उतरने का ऐलान किया। 

तौकीर शायद यह भूल रहे है कि ज्ञानवापी के पीछे 30,000+ की लम्बी सूची है, जिन्हे मुग़ल आतताइयों ने मस्जिद, दरगाह या कब्रिस्तान में बदल दिया था, कब तक बेगुनाहों को भड़काते रहोगे? अभी 4/5 मुद्दे और सुलझने दो, फिर आम मुसलमान इनके भड़काऊ बयानों से दूरी बनाएंगे और इन्हीं से पूछेंगे कि 'बताओ सच्चाई क्या है?' 'क्या इस्लाम किसी विवादित जगह पर नमाज़ अदा करने की इजाजत देता है?' नूपुर शर्मा विवाद में कुछ चैनलों पर कुरान, हदीसों और शरीयत खुलकर सामने आने पर किसी की 'सर तन से जुदा' की आवाज़ नहीं उठी। क्यों? क्योकि बेपर्दा करने वाले मुसलमान ही थे और मौलाना वातानुकूलित कमरों में बैठने के बावजूद पसीने पोछने पर लताड़ पड़ती, कि A C में बैठकर भी पसीना क्यों आ रहा है? क्यों बेगुनाहों को गुमराह किये हुए हो। उस समय के देखिए Jaipur Dialogue, Sach, News Nation पर 'इस्लाम क्या कहता है' आदि कई चैनल है, जिन पर सब कुछ खुलकर जगजाहिर हो गया।      

आखिर सच्चाई से क्यों पीछे भाग रहे हो? कब तक झूठ और फरेब पर अपनी दुकानदारी चलाते रहोगे? 

मौलाना तौकीर यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें दिखाना है कि वो बर्दाश्त नहीं करेंगे। तौकीर ने इसी भाषण में अयोध्या के विवादित ढाँचे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “अब हम ये कहते हैं कि हमारी आस्था कोर्ट से ऊपर है क्योंकि हम एक बार अदालत की बेईमानी देख चुके हैं।” तौकीर का यह भी कहना है कि बाबरी मस्जिद पर मुस्लिमों के सब्र के बदले उनको बुजदिल समझा गया। उसने उकसाते हुए कहा कि अगर लोग बेजार नहीं हुए तो बाबरी की तरह ज्ञानवापी भी छीन ली जाएगी।

तौकीर ने आगे बताया कि ज्ञानवापी के बाद मुस्लिमों से मथुरा और बदायूँ की मस्जिदें छीनी जाएँगी। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में जामा मस्जिद पर भी हमला बोला जाएगा। बकौल तौकीर कहीं तो मुस्लिमों को खड़े हो कर अपनी बात रखनी होगी। अंत में अपने अनुभव का हवाला देते हुए तौकीर ने बताया कि वो महसूस कर रहे हैं कि सभा में मौजूद लोगों के लिए ये तक़रीर नहीं बल्कि तकलीफ का समय है। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी पर ‘फूट डालो, राज करो’ की नीति अपनाने का भी आरोप लगा।

मौलाना तौकीर ने केंद्र के साथ उत्तर प्रदेश सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिमों का खुलेआम एनकाउंटर हो रहा है और कानून का राज खत्म हो चुका है। बकौल तौकीर तो सत्ता में हिस्सेदारी चाहते हैं न कि मोहताजी। मौलाना तौकीर ने आगे बताया कि कॉन्ग्रेस और भाजपा की सोच एक जैसी ही है।



ज्ञानव्यापी पर अदालत का फैसला आने के बाद “पत्रकार” आरफा खानम शेरवानी ने की मुसलमानों को भड़काने की कोशिश


वाराणसी कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद प्रकरण में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ज्ञानवापी स्थित शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और विग्रहों के संरक्षण की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही जिला जज डॉ. अजय कृष्‍ण विश्‍वेश की अदालत ने इस याचिका पर आगे भी सुनवाई करने का फैसला लिया है। जज का फैसला आते ही कोर्ट परिसर हर हर महादेव के जयकारे से गूंज उठा। अदालत में टेनेबिलिटी यानी पोषणीयता पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी मस्जिद केस में आगे सुनवाई होगी। दरअसल कोर्ट को आज यही फैसला करना था कि हिन्दू पक्ष की याचिका सुनने योग्य है या फिर नहीं। वहीं मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी।

जिला जज ने मुस्लिम पक्ष के आवेदन रूल 7 नियम 11 के आवेदन खारिज किया। मुख्य रूप से उठाये गए तीन बिंदुओं प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, काशी विश्वनाथ ट्रस्ट और वक्फ बोर्ड से इस वाद को बाधित नहीं माना और श्रृंगार गौरी वाद सुनवाई योग्य माना। याचिका खारिज होने पर मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि ये फैसला न्यायोचित नहीं है। हम फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। मुस्लिम पक्ष के वकील ने जज पर संसद के कानून को दरकिनार कर फैसला देने और बिकने का आरोप लगाया।

कोर्ट के फैसले के बाद सोशल मीडिया में प्रतिक्रियाओं का दौरा शुरू हो गया। फैसले के पक्ष और विपक्ष में दलीलें दी जाने लगीं। लेकिन द वायर की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने वारणसी कोर्ट के फैसले पर जो प्रतिक्रिया दी, वो कोर्ट और संविधान के प्रति नफरत को दर्शाता है। खुद को कथित सेकुलर-लिबरल बताने वाली आरफा खानम शेरवानी ने ट्वीट कर मुसलमानों को भड़काने की कोशिश की। उन्होंने ट्वीट करके लिखा, “हर रोज एक नया जख्म !”

आरफा खानम शेरवानी के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही हैं। लोगों ने मुस्लिमों को भड़काने का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि ये “पत्रकार” मुसलमानों को भड़काने के लिए इस तरह का ट्वीट कर रही हैं। और फिर यही लोग संविधान और अदालत की दुहाई देते फिरते हैं।

एक ट्विटर यूजर ने आरफा खानम शेरवानी पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया। उसने लिखा, “मोहतरमा जबरन कब्जा क्यों,चोरी करों,और जब वादी संवैधानिक तरीके से अपने हक को मांगे,तब विक्टिम कार्ड खेलों गजब हैं।” आइए देखते हैं, किस तरह लोगों ने आरफा खानम शेरवानी के भड़काने वाले ट्वीट के बाद अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं…

‘मस्जिदों के खिलाफ मुकदमों की बाढ़ आ जाएगी’: धरी रह गई जमीयत की माँग

सुप्रीम कोर्ट 9 सितम्बर, 2022 को पूजा स्थल अधिनियम, 1991 (Worship Act) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया। शीर्ष अदालत ने कहा कि तीन न्यायाधीशों की पीठ 11 अक्टूबर को याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित, जस्टिस रवींद्र भट और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने केंद्र से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।

ये याचिकाएँ अधिनियम के खिलाफ दायर की गई हैं। जमीयत उलेमा-ए-हिंद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने पूजा स्थल अधिनियम, 1991 की समीक्षा की माँग करने वाली याचिकाओं का विरोध करते हुए याचिकाएँ दायर की थीं। जमीयत ने शीर्ष अदालत से अपील की थी कि वह चुनौती देने वाली याचिकाओं के संबंध में नोटिस भी जारी न करे और उन्हें खारिज कर दे। जमीयत के मुताबिक, नोटिस जारी करने से मुस्लिमों में डर पैदा होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीठ दिल्ली भाजपा के पूर्व प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय, भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ सुब्रमण्यम स्वामी और कुछ अन्य लोगों द्वारा पूजा स्थल अधिनियम 1991 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार कर रही है। आज की सुनवाई में जमीयत उलेमा-ए-हिंद (जो मामले में हस्तक्षेप करने की माँग कर रहा है) की ओर से पेश अधिवक्ता एजाज मकबूल ने कहा कि बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने कानून की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। वहीं उपाध्याय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि उन टिप्पणियों का ढिंढोरा पीटा गया था।

जमीयत की ओर से तर्क दिया कि अगर अदालत अधिनियम की समीक्षा करने के लिए सहमत होती है, तो देश में मस्जिदों के खिलाफ मुकदमों की बाढ़ आ जाएगी। दिलचस्प बात यह है कि ऐसे समय में जब श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद और ज्ञानवापी विवादित ढाँचे का मामला सुर्खियों में है, सुप्रीम कोर्ट पूजा स्थल अधिनियम, 1991 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अगस्त 2022 में निचली अदालत को कृष्ण जन्मभूमि के विवादित हिस्से के सर्वेक्षण से संबंधित याचिका पर चार महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया था।

पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991

पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार द्वारा लाए गए पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम में कहा गया है कि 15 अगस्त, 1947 तक अगर किसी धर्म का कोई पूजा स्थल है तो उसे दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता। कानून में इसके लिए एक से तीन साल तक की जेल और जुर्माना का प्रावधान किया गया है। इस कानून में अयोध्या को अलग रखा गया था, क्योंकि उस समय यह मामला कोर्ट में था।
इस कानून की धारा-2 में कहा गया है कि अगर 15 अगस्त, 1947 में मौजूद किसी धार्मिक स्थल में बदलाव को लेकर अगर किसी अदालत, न्यायाधिकरण या अन्य प्राधिकरण में कोई याचिका लंबित है तो उसे रद्द किया जाएगा। कानून की धारा-3 में कहा गया है कि किसी पूजा स्थल को पूरी तरह या आंशिक रूप से दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता है।
वहीं, इस कानून के धारा-4(1) में कहा गया है कि किसी भी पूजा स्थल का चरित्र देश की स्वतंत्रता के दिन का वाला ही रखना होगा। इस कानून का धारा-4(2) उन मुकदमों, अपीलों और कानूनी कार्यवाहियों पर रोक लगाता है, जो पूजा स्थल कानून के लागू होने की तिथि पर लंबित थे।

‘दाढ़ी वाले’ ज्ञानवापी केस में हिंदू पक्ष की वादी रेखा पाठक की कर रहे रेकी, पड़ोसियों से कर रहे पूछताछ

                                      रेखा पाठक के घर की हो रही रेकी (तस्वीर साभार: आजतक)
जिस तरह अब ज्ञानवापी केस में हिन्दू पक्षकारों को धमकियां मिलनी शुरू हो गयी हैं, मंशा साफ हो गयी है कि "नूपुर बहाना है, देश में उपद्रव मचाकर कर ज्ञानवापी को बचाना है", सरकार को ऐसे उपद्रवियों को पकड़ जेलों में ही नहीं डाले, बल्कि अब तक मिली हर सरकारी सुविधा को ब्याज सहित वापस लिया जाये, वापस न कर पाने की स्थिति में इनके परिवार की सम्पत्तियों को जब्त किया जाए। क्योकि नूपुर शर्मा मुद्दा शुरू होने से जिस बात की शंका थी, अब वह हकीकत में बदलनी शुरू हो गयी है, क्योकि यह विवाद शुरू हुआ ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग पर हो रही अभद्र टिप्पणियों से और ज्ञानवापी से ध्यान हटाने के लिए जुबेर जैसे सांप्रदायिक पत्रकारों ने नूपुर के बयान को नबी का  अपमान करार कर देश में अशांति फैलाकर डर का वातावरण बनाने में कुछ हद तक सफल हो गए, लेकिन कट्टरपंथी बहुत जल्द बेनकाब होने शुरू हो गए। विदेशी इस्लामिक विद्वानों के अलावा केवल दो ही भारतीय इस्लामिक विद्वानों को छोड़ कोई यह कहने का साहस नहीं कर पा रहा कि नूपुर ने गलत नहीं बोला। नूपुर के समर्थन में सोशल मीडिया पर Jaipur Dialogue, Sach Wala और News Nation चैनल(इस्लाम क्या कहता है) के सिवा कोई चैनल हिम्मत जुटा पाया। इनके विरुद्ध न कोई कट्टरपंथी और न ही मुस्लिम देशों में से कोई देश बोलने की हिम्मत कर रहे। न कोई फतवा और न ही 'सिर तन से जुदा' की आवाज़। सारे खोजी पत्रकार पता नहीं किस बिल में छुपे बैठे हैं? 
   
वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे और श्रृंगार गौरी केस में हिंदू पक्ष की एक महिला याचिकाकर्ता ने शिकायत की है कि कुछ लोग उनके घर की रेकी कर रहे हैं। रेखा पाठक नाम की याचिकाकर्ता ने बताया कि आस-पड़ोस वाले उन्हें बताते हैं कि कुछ नकाबपोश लोग आ आकर उनके घर के बारे में पूछते हैं।

आजतक से बातचीत में रेखा ने बताया कि वह वाराणसी के भदऊ इलाके की गंगानगर कॉलोनी में रहती हैं। कई दिनों से कुछ लोग उस इलाके की रेकी कर रहे हैं। ये लोग नकाबपोश होते हैं और मोहल्ले वालों से रेखा के घर के बारे में पूछताछ करते हैं। हालाँकि पड़ोसी सर्तक हैं। वह रेखा के बारे में कुछ भी उनको नहीं बताते और रेखा को आगाह कर देते हैं कि वो थोड़ा संभलकर रहें।

महिला याचिकाकर्ता बताती हैं कि उन्होंने इस संबंध में पुलिस को सूचना दे दी है। पड़ोसियों के बताए अनुसार संदिग्धों का हूलिया बताया गया है। रेखा कहती हैं कि पड़ोसियों ने उनको बताया था कि वो लोग जो पूछताछ कर रहे थे वह दाढ़ी वाले लोग थे और मुँह ढके हुए थे।

रेखा पाठक की तरह एक अन्य महिला याचिकाकर्ता सीता साहू ने भी जानकारी दी है कि कि उनके रिश्तेदार भी उन्हें आगाह करते रहते हैं। लेकिन वह डरेंगी नहीं और माँ श्रृंगार गौरी के लिए आगे बढ़ती रहेंगी।

वकील सोहन लाल आर्य को मिली धमकी

इससे पहले माँ श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी विवादित ढाँचे मामले के पैरोकार डॉक्टर सोहन लाल आर्य को जान से मारने की धमकी मिली थी। सोहनलाल को पाकिस्तान के नंबर से फोन करके धमकाया गया था। सोहनलाल आर्य ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया था कि धमकी देने वाले ने कहा, “राजस्थान के कन्हैया की तरह तुम्हारा भी सिर तन से जुदा कर दिया जाएगा।”
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ज्ञानवापी केस के हिन्दू पक्षकार को ‘सिर तन से जुदा’ करने की धमकी, पीछे हट जाओ नहीं तो होगा कन्है
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ज्ञानवापी केस के हिन्दू पक्षकार को ‘सिर तन से जुदा’ करने की धमकी, पीछे हट जाओ नहीं तो होगा कन्है
तस्वीर-ट्विटर...
उन्होंने धमकी मिलने के बाद 16 अगस्त, 2022 को इसकी जानकारी वाराणसी के पुलिस और प्रशासन के अफसरों को दी। साथ ही डॉ. आर्य ने सर तन से जुदा करने की धमकी के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि धमकी के बारे में इंटेलीजेंस ब्यूरो के अधिकारियों से भी बात हुई है। उनको ऐसा अंदेशा था कि भारत से ही कोई व्यक्ति पाकिस्तान के नंबर का इस्तेमाल करके कॉल कर रहा है। इन नंबरों को उन्होंने इंटेलिजेंस के अधिकारियों को सौंपा है।

ज्ञानवापी केस के हिन्दू पक्षकार को ‘सिर तन से जुदा’ करने की धमकी, पीछे हट जाओ नहीं तो होगा कन्हैया लाल जैसा हाल

                                                                                                                               तस्वीर-ट्विटर
वाराणसी के माँ श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी विवादित ढाँचे मामले के पैरोकार डॉक्टर सोहन लाल आर्य को जान से मारने की धमकी मिली है। सोहनलाल को पाकिस्तान के नंबर से फोन करके धमकाया गया है। सोहनलाल आर्य ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया कि धमकी देने वाले ने कहा, “राजस्थान के कन्हैया की तरह तुम्हारा भी सिर तन से जुदा कर दिया जाएगा।”

आखिर बिल्ली थैले से बाहर आ ही गयी, नूपुर शर्मा एक बहाना है, ज्ञानवापी से ध्यान हटाने के लिए आतंक फैलाना है। 'सिर तन से जुदा' भी एक तरह से आतंक ही है। जान दोनों में ही जाती है। सरकार को भी 'सिर तन से जुदा' के आरोप में पकडे गए उपद्रवियों के परिवारों को हर सरकारी सुविधा से ब्लैकलिस्ट किया जाए। नूपुर विवाद होने के बाद से ही अनुमान व्यक्त किये जा रहे थे कि तस्लीम रहमानी के उकसाने पर नूपुर ने जो इस्लामिक किताब के हवाले से बात कही, जिसे फिरकापरस्त मोहम्मद जुबेर ने तोड़मरोड़ कर पेश करने के बाद ही 'सिर तन से जुदा' का शोर मचना शुरू हुआ। जो इस्लामिक देश नूपुर के बयान पर नाराजगी दिखा रहे थे, उनके सामने नबी के लिए गाली देने की गलत बात पेश की गयी थी। अब सोशल मीडिया और News Nation चैनल पर हो रही चर्चा पर क्यों खामोश हैं? इस सच्चाई को समझने की जरुरत है। 

 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सोहन लाल ने 16 अगस्त, 2022 को ही इसकी जानकारी वाराणसी के पुलिस और प्रशासन के अफसरों को दी है। डीसीपी काशी ने कहा कि इस मामले में केस दर्ज होगा।

डॉ. आर्य ने सर तन से जुदा करने की धमकी के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि धमकी के बारे में इंटेलीजेंस ब्यूरो के अधिकारियों से भी बात हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसा अंदेशा है कि भारत से ही कोई व्यक्ति पाकिस्तान के नंबर का इस्तेमाल करके कॉल कर रहा है। इन नंबरों को इंटेलिजेंस के अधिकारियों को सौंपा गया है।

उन्होंने बताया कि वाराणसी कमिश्नर और डीएम से मिलने का समय मिला है। वाराणसी के लक्सा थाने में एफआईआर दर्ज कराएँगे। उनके दोनों मोबाइल नंबर पर धमकी मिली है। हालाँकि, अभी तक FIR दर्ज नहीं हुई है।

वहीं पाकिस्तान के नंबर से जान से मारने की धमकी के बारे में बताते हुए डॉ. सोहनलाल आर्य ने कहा कि कुछ आतंकवादी संगठन उनके पीछे पड़े हैं। उन्हें मुकदमा वापस लेने की धमकी दी गई। जवाब में मैंने कहा कि हम धमकी से झुकने वाले नहीं हैं। कल 18 अगस्त को तारीख है। हिंदुओं के पक्ष में फैसला आने वाला है।

इससे पहले सोहनलाल आर्य को इसी साल 19 मार्च और फिर 19 जुलाई को भी जान से मारने की धमकी मिल चुकी है। इन जान से मारने की धमकियों पर उन्होंने कहा, “वो इससे डरने वाले नहीं हैं। हिंदुत्व और मंदिर की रक्षा के लिए प्राण भी चला जाए तो फर्क नहीं पड़ता।” जानकारी के लिए बता दें लगातार मिल रही धमकियों के मद्देनजर सिक्योरिटी में दो पुलिसकर्मी पहले से ही तैनात हैं।

दिल्ली की राखी सिंह के अलावा वाराणसी की 4 महिलाओं ने माँ शृंगार गौरी के नियमित दर्शन और ज्ञानवापी विवादित परिसर के अन्य देव विग्रहों की सुरक्षा और उनकी नियमित पूजा के लिए मुकदमा दाखिल किया था। डॉ. सोहनलाल आर्य वाराणसी की उन्हीं चारों महिलाओं के कोर्ट में पैरोकार हैं। डॉ सोहनलाल आर्य 1984 में विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। इस समय RSS के प्रांतीय पदाधिकारी हैं।

शांतिप्रिय समुदाय के हिंसक प्रदर्शन के बाद अब नूपुर शर्मा के पक्ष में बन रहा माहौल

पैगंबर मोहम्मद पर नूपुर शर्मा की टिप्पणी के बाद ‘शांतिप्रिय समुदाय’ के लोगों के जिस तरीके से पूरे देश में अशान्ति फैलाई है, उसने दूसरे समुदाय के लोगों को सोचने के लिए विवश कर दिया है। नूपुर शर्मा ने वहीं कहा था जो मुस्लिम धर्मगुरू जाकिर नाइक इस शांतिप्रिय समुदाय के सामने कह चुका है और यह किताबों में भी लिखा है। इसको लेकर आम लोगों में यह संदेश जा रहा है कि अगर नूपुर शर्मा गलत तो फिर किताब या जाकिर नाइक सही कैसे?

नूपुर शर्मा के बयान के बाद कई दिनों बाद देश के कई हिस्सों में हिंसा की चिंगारी उठने लगी। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर नूपुर को मारने के लिए फतवा जारी कर दिए गए। पुतले जलाए गए और ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे लगाए गए। कई जगह हिंसक प्रदर्शन कर आगजनी-तोड़फोड़ की गई। शंका भी व्यक्त की जा रही है कि उपद्रवियों को शायद ही मालूम हो कि नूपुर ने बोला क्या है? जानमाल का काफी नुकसान हुआ। भारत तेरे टुकड़े होंगे वाली मानसिकता रखने वाले इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने शाहीन बाग में विरोध-प्रदर्शन के नाम पर महीनों सड़क जाम रखा था। ये लोग बोलने की आजादी के नाम पर देश विरोधी नारे लगने लगाते हैं। विरोध प्रदर्शन के नाम पर देश में हिंसा फैलाते हैं। 

इस्लामिक किताबों में लिखी बात को ही बोलने को लेकर नूपुर के बहाने साम्प्रदायिक दंगे करने का असली मकसद मथुरा और काशी आदि से ध्यान हटाना है। क्योकि ज्ञानवापी में हुए सर्वे में सच्चाई सामने के बाद ओवैसी और कट्टरपंथी कहते आ रहे हैं कि "एक मस्जिद खोने के बाद और मस्जिद नहीं खोएंगे।" फिर जो नूपुर ने जो बोला अगर वह गलत है, फिर ज़ाकिर नाइक ठीक क्यों? क्यों नहीं उसका सर तन से जुदा करने की मांग हुई? क्यों नहीं उसको जेल भेजने के लिए आंदोलन हुआ? अब ब्रिटेन में इसी विषय पर निर्मित फिल्म के विरोध में किसी की आवाज़ नहीं निकल रही, क्यों? टीवी पर वकील डॉ रिज़वान अहमद ऐसे वक्ता कट्टरपंथियों को मुंह तोड़ जवाब देते हैं। सुनिए:-  

इसके पहली भी यूजर्स नूपुर शर्मा के पक्ष में सोशल मीडिया पर उतर मुस्लिम मौलाना जाकिर नाइक का वो वीडियो भी शेयर किया, जिसमें वो हदीस के हवाले से मुसलमानों के बीच कहता दिख रहा है कि पैगंबर ने 6 साल की बच्ची से शादी की थी और 9 साल की उम्र में उससे शारीरिक संबंध बनाए थे। लेकिन यही बात कहने पर नूपुर शर्मा को धमकियां मिल रही हैं। यहां आप सुनिए कि जाकिर नाइक ने क्या कहा था।  

 हैरानी की बात तो यह है कि यह हिंसक प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है तो इन्हें भड़काने वाले कोर्ट पहुंच जाते हैं लेकिन किसी प्रदर्शनकारी को आगजनी और तोड़फोड़ करने या पत्थरबाजी करने से मना नहीं करते। मुस्लिम धर्मगुरु हो या औवेसी जैसे मुस्लिम नेता सभी सिर्फ भड़काने का काम करते हैं। कोई भी मुस्लिम कट्टरपंथियों को समझाने का काम नहीं करते। उन्हें नहीं समझाते कि जब तुम कहते हो कि ये देश किसी के बाप का नहीं है तो फिर अपने बाप की संपत्ति का नुकसान क्यों करते हो? कोई मौलाना या नेता मुस्लिम समुदाय के आम लोगों को ये बताने की कोशिश नहीं करता कि नूपुर शर्मा ने जो कहा है वो हमारे किताब में लिखा है और हमारे धर्मगुरु भी इस बारे में बात कर चुके हैं। ऐसे में इस शांतिप्रिय समुदाय के हिंसक प्रदर्शन ने दूसरे समुदाय के लोगों को यह विचार करने के लिए विवश कर दिया है कि आखिर ये कितने दिनों तक चलेगा?

अब देश भर में लोग नूपुर शर्मा के पक्ष में सामने आने लगे हैं। मंगलवार को बिहार में आरा के रमना मैदान में नूपुर के समर्थन में विशाल सभा की गई। 

इस सभा के बाद रैली भी निकाली गई और कहा गया कि हमारी चु्प्पी को कमजोरी ना समझिए। इस दौरान लोगों ने जय श्री राम के नारे भी लगाए। आरा में नूपुर के समर्थन में हुई इस रैली का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आप भी देखिए-