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‘अयोध्या, काशी और मथुरा हमें सौंप देते मुस्लिम तो बाकी जगहों पर विवाद नहीं होता’: मंदिर-मस्जिद विवाद पर विश्व हिन्दू परिषद

आज सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक से जगह-जगह सर्वे कर मन्दिरों को सामने लेने पर देश में साम्प्रदायिक माहौल ख़राब करने का डर दिखा कर जनता को बार-बार गुमराह किया जा रहा है।रामजन्मभूमि विवाद के दिनों में विश्व हिन्दू परिषद से सार्वजनिक रूप कहा था कि "मुस्लिम समाज हिन्दुओं के तीन तीर्थ अयोध्या, काशी और मथुरा सौंप दें, अन्यथा जितने भी विवादित स्थल है सबको लेकर रहेंगे।" लेकिन छद्दम धर्म-निरपेक्ष मुस्लिम कट्टरपंथियों के साथ बाबरी मस्जिद के नाम पर अपनी तिजोरियां भरने में लगे रहे। विडंबना देखिए राममन्दिर लगभग पूरा होने को है लेकिन मस्जिद के नाम मिली जमीन पर कुछ भी काम नहीं हो रहा है। इस कटु सच्चाई को हर मुस्लिम को समझना चाहिए कि किस तरह मस्जिद के नाम पर उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है।       
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने गुरुवार (26 दिसंबर 2024) को हिंदू समाज में मुस्लिम स्मारकों पर अधिकार के दावों और अदालतों में दायर याचिकाओं की वजह बताई। विहिप के महासचिव मिलिंद परांडे ने कहा कि मुस्लिम समुदाय द्वारा अयोध्या, काशी और मथुरा के विवादित स्थलों को हिंदुओं को स्वेच्छा से नहीं सौंपने से हिंदू समाज में नाराजगी है।

1984 का धर्म संसद और 2025 की स्थिति

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विहिप के महासचिव मिलिंद परांडे ने 1984 में आयोजित धर्म संसद का जिक्र करते हुए कहा, “तब यह प्रस्ताव रखा गया था कि अयोध्या, काशी और मथुरा हमें दे दी जाएँ, और इसके बाद अन्य मुद्दों पर कोई हलचल नहीं होगी। लेकिन 2025 आने को है और यह प्रस्ताव अब तक लागू नहीं हो सका। इसी कारण समाज में जो नाराजगी दिख रही है, वह स्वाभाविक है।”

मोहन भागवत के बयान पर भी दी प्रतिक्रिया

संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान को लेकर परांडे ने कहा, “भागवत जी ने काशी और मथुरा के संदर्भ में जो बात कही, उसे समझने की जरूरत है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर को हिंदुओं के विश्वास का प्रतीक बताया था और कहा था कि रोजाना नए मुद्दे उठाना नफरत और द्वेष पैदा कर सकता है।” हालाँकि, कुछ हिंदू संतों द्वारा उनके बयान के विरोध करने के सवाल पर उन्होंने कहा, “हम संतों के विरुद्ध टिप्पणी नहीं करते।”

मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण का विरोध

परांडे ने मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण के मुद्दे पर कहा कि विहिप 5 जनवरी 2025 से देशव्यापी जन जागरूकता अभियान शुरू करेगी। यह अभियान विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में आयोजित होने वाली ‘हैंदव शंखावरम’ नाम की विशेष सभा से शुरू होगा। विहिप ने मंदिर प्रबंधन को समाज को सौंपने के लिए एक मसौदा कानून भी तैयार किया है, जिसे हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को सौंपा गया।

विहिप की प्रमुख माँगें

विहिप ने मंदिरों को समाज को सौंपने से पहले कुछ प्रमुख माँगें रखी हैं:
  • मंदिरों और एंडोमेंट विभागों से सभी गैर-हिंदू कर्मचारियों को हटाना।
  • पूजा और सेवा के कार्यों में केवल धर्म का पालन करने वाले हिंदुओं को नियुक्त करना।
  • मंदिर प्रबंधन और ट्रस्ट बोर्ड में राजनीतिक दलों से जुड़े व्यक्तियों की नियुक्ति पर प्रतिबंध।
  • मंदिर परिसर में दुकानों के संचालन की अनुमति केवल हिंदुओं को देना।
  • मंदिरों की भूमि पर गैर-हिंदुओं द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाना।
विहिप का कहना है कि उनकी यह पहल हिंदू समाज को मंदिरों के संरक्षण और प्रबंधन में सशक्त बनाने के लिए है। उनका मानना है कि मंदिर हिंदू संस्कृति और परंपरा का आधार हैं और इनका सही प्रबंधन जरूरी है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब हिंदू-मुस्लिम विवादित स्थलों पर चर्चा और मंदिर निर्माण की मांग तेज हो रही है। विहिप ने स्पष्ट किया कि उनका अभियान सांप्रदायिकता फैलाने के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकार सुनिश्चित करने के लिए है।

 

काशी विश्वनाथ मंदिर और महाकालेश्वर मंदिर परिसर के दुकानदारों को लगाना होगा नेम प्लेट: बिहार के बोधगया की दुकानों में खुद ही लगाया बोर्ड

आज कई राज्यों द्वारा योगी जैसा मुख्यमंत्री की मांग करने का कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किसी सख्त फैसले को लेने में हिचकाते नहीं। कितने सालों पहले कांग्रेस की यूपीए सरकार ने जनहित में कानून बनाकर अलमारी में सजाकर रखा हुआ था। अगर यह कानून उसी समय लागु हो गया होता, आज ये चीखा-चिल्ली नहीं होती। सब कुछ सामान्य रहता, क्योकि चीखा-चिल्ली करने वाली सभी पार्टियां प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से यूपीए सरकार में शामिल थे। इस एपिसोड में एक बात खुलकर सामने आ गयी कि हिन्दुओं और हिन्दू देवी-देवताओं को अभद्र बोलने वाले उन्हीं के नाम से धंधा कर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं।    

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में काँवड़ मार्ग में पड़ने वाले दुकानों पर नेम प्लेट लगाने के योगी सरकार के निर्देश के बाद भले विपक्षी दल इस पर विवाद कर रहे हों, लेकिन यह नियम धीरे-धीरे पूरे उत्तर भारत में लागू हो रहा है। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड सरकार के बाद यह मध्य प्रदेश के उज्जैन और बिहार के गया आदि जगहों पर नेम प्लेट लगने लगे हैं। इसे पूरे मध्य प्रदेश में लागू करने की माँग उठ रही है।

जब यूपीए ने अपने कार्यकाल में कानून बनाया है फिर इसे केवल मन्दिरों तक सीमित रखने की बजाए पूरे भारत में लागू करना चाहिए। योगी सरकार द्वारा विपक्ष द्वारा चील-कौओं की तरह मुस्लिम विरोधी बताकर चीखा-चिल्ली देख लगता है कि यूपीए सरकार ने शायद मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक इस कानून को लागु नहीं किया। यानि पिछली कांग्रेस समर्पित यूपीए भी असलियत जानती थी। आज I.N.D.I. गठबंधन में भी लगभग वही सभी पार्टियां है, जो यूपीए में शामिल थीं।  

उज्जैन में नेम प्लेट का आदेश

उज्जैन नगर निगम ने शनिवार (20 जुलाई 2024) को दुकान मालिकों को अपनी दुकानों के बाहर अपना नाम और मोबाइल नंबर की प्लेट लगाने का निर्देश दिया। उज्जैन के मेयर मुकेश ततवाल ने कहा कि इस आदेश का पहली बार उल्लंघन करने पर 2,000 रुपए और दूसरी बार 5,000 रुपए का जुर्माना देना होगा। उन्होंने कहा कि इस आदेश का उद्देश्य सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
ततवाल ने कहा कि उज्जैन की मेयर-इन-काउंसिल ने 26 सितंबर 2002 को दुकानदारों को अपना नाम प्रदर्शित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। बाद में इसे आपत्तियों और औपचारिकताओं के लिए राज्य सरकार को भेज दिया गया था। अब इस प्रस्ताव को लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेयर ने कहा कि यह कदम एमपी दुकान स्थापना अधिनियम या गुमास्ता लाइसेंस में निहित है।
मेयर ने कहा, “उज्जैन एक धार्मिक और पवित्र शहर है। लोग यहाँ धार्मिक आस्था के साथ आते हैं। उन्हें उस दुकानदार के बारे में जानने का अधिकार है, जिससे वे सामान खरीद रहे हैं। अगर कोई ग्राहक असंतुष्ट है या उसके साथ धोखा हुआ है तो दुकानदार के बारे में जानकारी होने से उसकी समस्या हल हो सकती है।”
वहीं, इंदौर से भाजपा विधायक रमेश मेंदोला ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू करने की माँग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दुकानों के बाहर दुकानदार का नाम लिखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि हर छोटा-बड़ा व्यक्ति अपना नाम बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करता है। उन्होंने इसे आस्था के साथ-साथ व्यापार के लिए महत्वपूर्ण बताया।

काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के दुकानों पर भी नेम प्लेट

वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ धाम के आसपास स्थित दुकानदारों को भी अपने नाम का बोर्ड लगाना होगा। गोदौलिया में शनिवार (20 जुलाई 2024) को पुलिस ने दुकानदारों से बात की और उन्हें अपना नाम लिखने के लिए कहा। काशी विश्वनाथ परिक्षेत्र में लगभग 500 दुकानें हैं। इन दुकानों में लगभग 15 प्रतिशत दुकानें मुस्लिमों की हैं।
वहीं, राष्ट्रीय हिंदू दल के पदाधिकारियों ने भी दुकानों पर भगवा झंडा और आधार कार्ड रखने के लिए कहा है। उधर, उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने मंदिर के बाहर दुकानदारों को नाम लिखने की अपील की है। बता दें कि सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर में जल चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इस बार लगभग 1 करोड़ लोगों के आने के अनुमान है।
प्रशासन के मुताबिक, इस आदेश के बाद अब मंदिर के बाहर स्थित दुकानदार श्रद्धालुओं को गुमराह करके पूजा सामग्री की बिक्री नहीं कर पाएँगे। दुकान मालिक का नाम लिखकर किराएदार दुकान संचालित नहीं कर सकेंगे। उन्हें बाहर अपना असली नाम-पता लिखना होगा। मंदिर के सामने देवी-देवताओं के नाम लिखकर गैर-धर्म के दुकानदार व्यवसाय करते मिले हैं। पुलिस ने उन्हें नोटिस थमाया है।
मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा, “यह आदेश सरकार के नहीं हैं। पुलिस विभाग ने दुकानदारों की पहचान के लिए सख्ती की है। सोशल मीडिया पर अक्सर ये दिखता है कि एक वर्ग के लोग मांस भी खा रहे हैं और शाकाहारी खाने का सामान भी बेच रहे हैं। ऐसे भी वीडियो देखने में आए हैं कि खाने पर पहले थूकते हैं, फिर बेच रहे हैं। ऐसे में एक वर्ग, जो सामान खरीद रहा है, उसकी आस्था को चोट पहुँचती है।”

बिहार के गया स्थित महाबोधि मंदिर के दुकानदारों ने लगाए नेम प्लेट

उत्तर प्रदेश में शुरू हुए इस नियम को लेकर भले ही विपक्ष राजनीति करे, लेकिन श्रद्धालुओं और दुकानदारों ने इसे सही बताया है। यही कारण है कि बिहार के गया स्थित प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर के बाहर स्थित दुकानदारों ने अपने मन से दुकानों पर नेम प्लेट लगा ली है। हिंदू और मुस्लिम दुकानदारों ने अपनी स्वेच्छा से फल की दुकानों के आगे ये नेमप्लेट लगा रखा है।
अवलोकन करें:-
सावन के महीने में बोधगया के महाबोधि मंदिर में भी काँवड़िया पहुँचते हैं और गर्भगृह में स्थापित भगवान शिव पर जल और बेल पत्र चढ़ाते है। इसको देखते हुए स्थानीय दुकानदारों ने आपसी सहमति से दुकान के आगे नेम प्लेट लगाने का फैसला लिया है। यहाँ पर कुछ फल दुकानदार तो बीते 20 सालों से अपने दुकान पर अपना नाम लिखे हैं। उनका कहना है कि इससे उनके व्यापार पर फर्क नहीं पड़ता।

‘कट्टरपंथी रच रहे हत्या की साजिश, बताते हैं काफिर’: ज्ञानवापी में सर्वे का आदेश देने वाले जज के लिए NIA ने माँगी सुरक्षा, घर के पास से धराया था PFI एजेंट; सरकार को उपद्रवियों और इनके समर्थकों को भी आजीवन कारावास देनी चाहिए

                                        जिस जज ने दी ज्ञानवापी में सर्वे की अनुमति, उन्हें मिल रही धमकी
वाराणसी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे के सर्वे का आदेश देने वाले जज को धमकी मिल रही है, जिसके बाद NIA ने उसके लिए सुरक्षा की माँग की है। न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 2022 में ज्ञानवापी के ढाँचे की मूल प्रकृति का पता लगाने के ASI द्वारा इसके वैज्ञानिक सर्वे की अनुमति दी थी। मुस्लिम इसे मस्जिद बताते हैं, जबकि मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने यहाँ मंदिर ध्वस्त कर उसके ऊपर मस्जिद खड़ी कर दी थी। इसके भीतर कलश और त्रिशूल से लेकर कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ भी मिली हैं।

NIA कोर्ट के स्पेशल जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि जज रवि कुमार दिवाकर की सुरक्षा अपर्याप्त है और इसे बढ़ाने की ज़रूरत है। 3 सप्ताह पहले भी अदनान खान नामक शख्स ने उन्हें धमकी दी है, जिसे लेकर FIR भी दर्ज की जा चुकी है। NIA ने कहा है कि इस्लामी कट्टरपंथी उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं। इसे एक बेहद संवेदनशील मामला बताते हुए कहा गया है कि अगर अदनान की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो कोई बड़ी घटना हो सकती है।

रवि कुमार दिवाकर बरेली में एडिशनल सेशन जज हैं। वो उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भी जून 2022 में पत्र लिख कर निवेदन किया था कि उनकी सुरक्षा बढ़ाई जाए। 13 मई, 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें सुरक्षा देने को कहा था, लेकिन इसे अब अपर्याप्त बताया जा रहा है। दिवाकर ने कहा था कि इस्लामी कट्टरपंथी अल्पसंख्यक समाज का ब्रेनवॉश कराने में लगे हैं और उन्हें ‘काफिर’ बताते हैं। वर्तमान में उन्हें 2 पुलिसकर्मी मिले हुए हैं, लेकिन आतंकी हमलों से निपटने के लिए उनके पास उचित हथियार तक नहीं हैं।

उत्तर प्रदेश ATS ने 3 जून, 2024 को अदनान खान के खिलाफ FIR भी दर्ज की थी। वो जस्टिस रवि कुमार दिवाकर को धमकाने के लिए इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करता है। जून 2022 में उन्हें ‘इस्लामिक आगाज़ मूवमेंट’ की तरफ से धमकी भरा पत्र भेजा गया था। इसके उनके परिवार की हत्या की धमकी के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाना बनाया गया था। अप्रैल 2024 में दिवाकर ने बरेली के SSP को भी पत्र लिख कर कहा था कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय नंबरों से फोन कॉल आ रहे हैं। लखनऊ स्थित उनके आवास से PFI के एक एजेंट की गिरफ़्तारी भी हुई थी।

दिल्ली : मथुरा-काशी के लिए चाहिए 400 पार सीटें: हिमंता बिस्वा सरमा, असम के मुख्यमंत्री, कहा- बनेंगे भव्य मंदिर, PoK में भी दिखने लगा है तिरंगा; जिसका लाभ हिन्दुओं से अधिक मुसलमानों के पक्ष में होगा


असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बड़ा दावा किया है। हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि लोकसभा में एनडीए के 400 पार सीटों के लक्ष्य को प्राप्त करने का मतलब है कि अयोध्या के बाद अब काशी और मथुरा में भव्य मंदिरों का निर्माण किया जाएगा। हिमंता बिस्वा सरमा पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट पर बीजेपी प्रत्याशी हर्ष मल्होत्रा के लिए लक्ष्मी नगर में चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे, जब उन्होंने ये बातें कही।

मोदी के 400+ सीटें मांगने की मंशा विपक्ष अच्छी तरह समझ चुका है कि 400 सीटों का क्या महत्व होता है। 400 सीटें या उसके आसपास होने से अधिकतर विपक्षियों की दुकानें और देश-विरोधियों की दुकानें बंद होने के कगार होंगी। हिन्दुओं से ज्यादा यह मुसलमानों के पक्ष में होंगी। अब तक जितनी भी योजनाएं शुरू हुई समस्त भारतवासियों के हुई है, केवल एक धर्म के लिए नहीं। मुसलमानों को मालूम होगा कि इन नेताओं ने हमें केवल वोटबैंक तक ही सीमित रखा, कभी मुख्य धारा से नहीं जुड़ने दिया। भारतीय जनसंघ से लेकर बीजेपी तक मुसलमानों को इसका डर दिखाया गया।  

हिमंता बिस्वा सरमा ने आगे कहा कि लोकसभा चुनाव में जब भाजपा 400 के पार जाएगी तो मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनेगा और काशी में ज्ञानवापी मस्जिद की जगह पर बाबा विश्‍वनाथ का भव्य मंदिर बनेगा। उन्होंने कहा कि मुगलों ने जो-जो कारनामे किए थे, उसमें से अभी बहुत कुछ साफ करना बाकी है। असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने का अपना वादा पूरा कर दिया है, इसलिए इस बार जीत भी बड़ी होनी चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि PoK में भी भारत का झंडा दिख रहा है, जबकि कांग्रेस के शासन में अपने जम्मू-कश्मीर में भी पाकिस्तानी झंडा दिखता था। हिमंता ने कहा कि संसद में पहले कश्मीर की चर्चा नहीं होती थी, लेकिन अब PoK में भी लोग भारत का झंडा थामे दिख रहे हैं।

दिल्ली के विकास को लेकर आम आदमी पार्टी को घेरा

हिमंता बिस्वा सरमा ने दिल्ली में विकास को लेकर आम आदमी पार्टी को घेरा। हिमंता ने कहा, “पहले दिल्ली आने पर लालकिला और कुतुबमीनार देखने के लिए बोला जाता था और अब मोहल्ला क्लीनिक देखने के लिए कहा जाता है, लेकिन आज जब मोहल्ला क्लीनिक देखने गया तो आश्चर्य हुआ कि अगर दिल्ली की पहचान मोहल्ला क्लीनिक है तो फिर देश का सम्मान कहाँ है? असम में हर जिले में मेडिकल कॉलेज बन रहा है और दिल्ली में जब भाजपा की सरकार आएगी तो मोहल्ला क्लीनिक की बजाय यहां सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज बनाएँगे।

कांग्रेस की गोद में बैठ गए केजरीवाल

लक्ष्मी नगर में जनसभा के बाद हिमंता ने मीडिया से भी बातचीत की। उन्होंने कहा, “कभी कांग्रेस के साथ हाथ नहीं मिलाने की बात कहने वाले केजरीवाल अब कांग्रेस की गोद मे जाकर बैठ गए हैं और कांग्रेस के साथ इलू-इलू कर रहे हैं।” केजरीवाल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि परिवारवाद का विरोध करने वाले अरविंद केजरीवाल अब अपनी पत्‍नी को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। केजरीवाल खुद आलीशान बँगले में रहते हैं। उन्होंने कहा कि केजरीवाल जो भी बोलते हैं, ठीक उसके उल्टा करते हैं और अब वह मानसिक संतुलन खो चुके हैं और जब तक वह ठीक होंगे तब तक दोबारा जेल जाने का समय हो जाएगा।

स्वाति मालीवाल को क्यों पीटा गया? उपराष्ट्रपति से कार्रवाई की माँग

इस दौरान हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ हुई मार-पीट के लिए केजरीवाल को घेरा। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के सभापति एवं उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ जी को स्वतः संज्ञान लेकर दिल्ली के सीएम के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुनीता केजरीवाल को भी यह बताना चाहिए कि स्वाति मालीवाल की पिटाई क्यों की गई? 
जब मुख्यमंत्री आवास में महिला सुरक्षित नहीं, फिर कहाँ होगी?
माना अपने वकील को राज्य सभा भेजने के लिए इस्तीफा चाहिए था, इसका ये मतलब नहीं कि घसीट-घसीट कर मारोगे या मरवाओगे। वो भी उस महिला को जो तुम्हारी एक आवाज़ पर कुछ भी किसी भी हद तक जाने को तैयार रहती थी। जिस पीठ ने जमानत दी उसे केजरीवाल के criminal background को भी देखना था। दिल्ली के लोगों ने ऐसे आदमी को अपना मुख्यमंत्री चुना जिसने गणतंत्र के अवसर पर सेना भवन के पास धरने पर बैठ गणतंत्र दिवस में बाधा पहुँचाने का दुस्साहस किया था। बीजेपी को आम आदमी पार्टी में हुए सारे कांडों जैसे कोली हत्याकांड को जनता के सामने लाना चाहिए।  

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Criminal प्रवित्ति के केजरीवाल से स्वाति मालीवाल की जान को खतरा… CM के घर महिला की पिटाई साजिश के तहत ह

CAA पर मुस्लिमों को किया गुमराह: अजमेर दरगाह के दीवान ने कबूली सच्चाई

राजस्थान के अजमेर में स्थित मुस्लिमों के लिए पाक मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान एवं सजदानशीं सैयद ज़ैनुल आबेदीन ने CAA और मथुरा-काशी को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि CAA उन लोगों के लिए है, जो दूसरे देशों से प्रताड़ित होकर भारत आते हैं और यहाँ नागरिकता के आवेदन करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि काशी और मथुरा के मंदिर के मामले को कोर्ट के बाहर आपसी बातचीत से हल कर लेना चाहिए।

जब सैयद जैनुल आबेदीन से पूछा गया कि क्या CAA कानून मुस्लिमों को खिलाफ है। इस पर सैयद जैनुल आबेदीन ने कहा, “पार्लियामेंट के अंदर होम मिनिस्टर कह रहा है भाई। मैं थोड़े कह रहा हूँ। पार्लियामेंट के अंदर सबने ये कहा है कि CAA कानून बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, म्यांमार से जो माइग्रेट होकर यहाँ आए हैं और वर्तमान में यहाँ रह रहे हैं उनके लिए है।”

उन्होंने आगे कहा, “इन देशों से आने वाले लोगों दिया गया क्या इंडियन सिटीजनशिप? नहीं दी गई। ये कानून उनके लिए ही है। हिंदुस्तान का मुसलमान डर क्यों रहा है? ये उनके लिए नहीं है। इससे सिटीजनशिप कैंसिल नहीं होती है। बस बात खत्म।” बता दें कि देश के मुस्लिमों में ये प्रोपेगेंडा फैलाई गई थी कि CAA कानून मुस्लिमों की नागरिकता खत्म करने के लिए लाई गई है।

सैयद आबेदीन ने CAA को लेकर ही नहीं, बल्कि वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर ज्ञानवापी ढाँचा विवाद तथा मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह ढाँचे को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि काशी और मथुरा के विवाद को आपसी सहमति से दोनों पक्षों को मिलकर सुलझा लेना चाहिए। आबेदीन ने कहा कि इससे दोनों पक्षों के बीच कटुता नहीं रहेगी।

सैयद आबेदीन ने कहा, “मथुरा और काशी का विवाद अभी कोर्ट के सामने विचाराधीन है। इसलिए उसके ऊपर कोई कमेंट नहीं कर सकते। हमारा जो पुराना एक्सपीरियंस है, उसके हिसाब से हम चाहते हैं कि इस मसले का हल कोर्ट के बाहर बैठकर तय हो सकता है तो सबसे ज्यादा बेहतर है दोनों पक्षों के लिए। उससे दोनों पक्षों के अंदर कटुता भी नहीं रहेगी। अमन और शांति रहेगी।”

उन्होंने कहा, “कोर्ट के फैसले से तो जिसके पक्ष में फैसला आएगा, वह खुश होगा और जिसके हक में नहीं होगा, उसके दिल में कटुता रहेगी। तो ऐसा क्यों करना? ये देश वो पुराना नहीं है। जितने राजे-रजवाड़े, महाराजा थे, उनका एक धर्मगुरु होता था। ये धर्म के मामले में उनसे परामर्श लेकर फैसले लिया करते थे। आज जो एक नई बात पैदा की है इन्होंने कि धर्म और राजनीति….।”

धर्म और राजनीति के मिश्रण पर सैयद आबेदीन ने कहा, “गोरखपुर प्रेस सबसे ज्यादा मशहूर है इंडिया के अंदर। गीता प्रेस। उसका 1957 का एडिशन ‘श्री कल्याण’ है। बहुत मोटी बुक है। उस किताब के पेज नंबर 771 और 772 का श्लोक कहता है कि अगर राजनीति को धर्म से अलग कर दिया जाएगा तो राजनीति विधवा हो जाएगी और धर्म को राजनीति से अलग कर दिया जाएगा तो धर्म विधुर (जिसकी पत्नी की मृत्यु हो गई हो) हो जाएगा।”


ज्ञानवापी मंदिर : ज्ञानवापी मस्जिद समर्थकों को ज्ञानवापी का अर्थ जानने के लिए स्कन्द पुराण पढ़ने की जरुरत

आज ज्ञानवापी का अर्थ जाने बिना मुस्लिम कट्टरपंथी अपनी दुकान चलाए रखने लिए इसका विरोध कर रहे हैं, जिसका कुर्सी की खातिर तुष्टिकरण के आगे घुटने टेक चुके अधर्मी हिन्दुओं का भी समर्थन रहा है। दोनों जनता को गुमराह कर मालपुए खा रहे हैं। इन उपद्रवियों को सनातन का विरोध करने से पहले  ज्ञानवापी के अर्थ को समझने के लिए स्कन्द पुराण पढ़ना चाहिए कि ज्ञानवापी नाम क्यों पड़ा। 
पुराणों के अनुसार, ज्ञानवापी की उत्पत्ति तब हुई थी जब धरती पर गंगा नहीं थी और इंसान पानी के लिए बूंद-बूंद तरसता था तब भगवान शिव ने स्वयं अपने अभिषेक के लिए त्रिशूल चलाकर जल निकाला..

यही पर भगवान शिव ने माता पार्वती को ज्ञान दिया। इसीलिए, इसका नाम ज्ञानवापी पड़ा और जहां से जल निकला उसे ज्ञानवापी कुंड कहा गया। ज्ञानवापी का उल्लेख हिंदू धर्म के पुराणों मे मिलता है तो फिर ये मस्जिद के साथ नाम कैसे जुड़ गया?
वापी का अर्थ होता है तालाब। ज्ञानवापी का सम्पूर्ण अर्थ है ज्ञान का तालाब। काशी की छः वापियों का उल्लेख पुराणों मे भी मिलता है।
पहली वापी: ज्येष्ठा वापी, जिसके बारे मे कहा जाता है की ये काशीपुरा मे थी, अब लुप्त हो गई है।
दूसरी वापी: ज्ञानवापी, जो काशी विश्वनाथ मंदिर के उत्तर मे है।
तीसरी वापी: कर्कोटक वापी, जो नागकुंआ के नाम से प्रसिद्ध है।
चौथी वापी: भद्रवापी, जो भद्रकूप मोहल्ले मे है।
पांचवीं वापी: शंखचूड़ा वापी, लुप्त हो गई।
छठी वापी: सिद्ध वापी, जो बाबू बाज़ार मे है और अब लुप्त हो गई।
अठारह (18) पुराणों मे से एक लिंग पुराण मे कहा गया है:

"देवस्य दक्षिणी भागे वापी तिष्ठति शोभना।
तस्यात वोदकं पीत्वा पुनर्जन्म ना विद्यते।"

इसका अर्थ है: प्राचीन विश्ववेश्वर मंदिर के दक्षिण भाग में जो वापी है, उसका पानी पीने से जन्म मरण से मुक्ति मिलती है।
स्कंद पुराण मे कहा गया है: 
उपास्य संध्यां ज्ञानोदे यत्पापं काल लोपजं।
क्षणेन तद्पाकृत्य ज्ञानवान जायते नरः
।

अर्थात इसके जल से संध्यावंदन करने का भी बड़ा फल है, इससे भी ज्ञान उत्पन्न होता है, पाप से मुक्ति मिलती है।
स्कंद पुराण:

योष्टमूर्तिर्महादेवः पुराणे परिपठ्यते ।।
तस्यैषांबुमयी मूर्तिर्ज्ञानदा ज्ञानवापिका।।

अर्थात ज्ञानवापी का जल भगवान शिव का ही स्वरूप है।
पुराण जो ना जाने कितनी सदियों पहले लिखे गए, उसमें भी ज्ञानवापी को भगवान शिव का स्वरूप बताया गया है। सारे पुराण, कह रहे है की ज्ञानवापी हिंदुओं से जुड़ा हुआ है लेकिन आज 2023मे आप सुनते है की मस्जिद का नाम है ज्ञानवापी मस्जिद। मुस्लिम आक्रांताओं के आक्रमण से पहले काशी को अविमुक्त और भगवान शिव को अविमुक्तेश्वर कहा जाता था।
काशी मे अविमुक्तेश्वर के स्वयं प्रकट हुए शिवलिंग की पूजा होती थी जिसे आदिलिंग कहा जाता था!

ASI करेगा ज्ञानवापी परिसर का सर्वे: वाराणसी कोर्ट ने स्वीकार की हिन्दू श्रद्धालुओं की माँग, वकील विष्णु शंकर जैन बोले – मंदिर को बना दिया था मस्जिद

वाराणसी की अदालत ने ज्ञानवापी परिसर का सर्वे ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) से सर्वे कराने की माँग को स्वीकार कर लिया है। वाराणसी की जिला अदालत में 4 महिलाओं ने इस बाबत याचिका दायर की थी। उन्होंने माँग की थी कि कथित ‘वजूखाने’ के अलावा बाकी पूरे ज्ञानवापी परिसर का सर्वे ASI से करवाया जाए, जहाँ विवादित ढाँचा स्थित है वहाँ का भी। ASI सर्वे से ये पता लगाने की माँग की गई है कि क्या मंदिर को ध्वस्त कर के उसके ऊपर मस्जिद बनाई गई।

डिस्ट्रिक्ट जज AK विश्वेश्वा ने दोनों पक्षों को 14 जून, 2023 को सुना था। इसके बाद उन्होंने शुक्रवार (21 जुलाई, 2023) को निर्णय सुनाया कि महिला हिन्दू श्रद्धालुओं की याचिका को स्वीकार किया जाता है। इस संबंध में मई में ही कोर्ट में एप्लिकेशन दायर किया गया था। इसके लिए सेक्शन-75(e) और CPC के नियम-10A के ऑर्डर-26 का हवाला दिया गया था। ज्ञानवापी परिसर में साल भर पूजा की अनुमति के लिए पहले से ही इन महिला श्रद्धालुओं की याचिका अदालत में लंबित है।

 डिस्ट्रिक्ट जज AK विश्वेश्वा ने दोनों पक्षों को 14 जून, 2023 को सुना था। इसके बाद उन्होंने शुक्रवार (21 जुलाई, 2023) को निर्णय सुनाया कि महिला हिन्दू श्रद्धालुओं की याचिका को स्वीकार किया जाता है। इस संबंध में मई में ही कोर्ट में एप्लिकेशन दायर किया गया था। इसके लिए सेक्शन-75(e) और CPC के नियम-10A के ऑर्डर-26 का हवाला दिया गया था। ज्ञानवापी परिसर में साल भर पूजा की अनुमति के लिए पहले से ही इन महिला श्रद्धालुओं की याचिका अदालत में लंबित है।

महिला श्रद्धालुओं ने अपने इस एप्लिकेशन में बताया है कि जिस जगह को मुस्लिम ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ कहते हैं, वहाँ स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लाखों वर्षों से स्थित है। साथ ही इसका भी जिक्र किया गया है कि कैसे ककई बार इस्लामी आक्रांताओं द्वारा यहाँ स्थित मंदिर को ध्वस्त किया गया। इसमें इसका भी जिक्र किया गया है कि सन् 1017 में महमूद गजनी के आक्रमण के साथ ही प्रतिमाओं और मूर्तिपूजकों से अपनी घृणा का प्रदर्शन करते हुए मंदिर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था।

अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए बताया, “कई खास अवधि में ये तथाकथित मस्जिद खाली रहती है, ऐसे में उस समय ASI सर्वे करता है तो नमाज भी बाधित नहीं होगी। राम मंदिर के समय ASI को रिपोर्ट देने में 3 साल लगे थे, लेकिन वहाँ परिसर बड़ा था। यहाँ भी 3 से 6 महीने लग सकते हैं। इसमें बहुत मॉडर्न तकनीकों का इस्तेमाल होगा, राडार वगैरह लगाए जाएँगे और जिओलॉजिस्ट्स को भी बुलाया जाएगा।”

उन्होंने बताया कि उनके एप्लिकेशन संख्या 127 को स्वीकार कर लिया गया है और इस संबंध में कैविएट भी दाखिल की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर इसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाता है तो वो जा सकता है। इससे पहले मई 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ढाँचा परिसर में स्थित माता श्रृंगार गौरी पूजा को लेकर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति को खारिज कर दी थी। अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने जिला जज वाराणसी के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।।

‘ज्ञानवापी ढाँचे की जगह भव्य शिव मंदिर जल्द’: इलाहाबाद हाईकोर्ट से मुस्लिम पक्ष को झटका


हिन्दुओं के विभिन्न धार्मिक स्थलों को मुक्त कराने के लिए अदालत में लड़ाई लड़ रहे हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब वाराणसी के ज्ञानवापी ढाँचे की जगह पर भव्य शिव मंदिर बनेगा। बताते चलें कि ज्ञानवापी ढाँचा (Gyanvapi Masjid) मामले में भी हरिशंकर जैन (Hari Shankar Jain) हिंदू पक्ष के वकील हैं। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार (31 मई 2023) को ढाँचा परिसर में स्थित माता श्रृंगार गौरी पूजा को लेकर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति को खारिज कर दिया।

भगवान विश्वेश्वर के मंदिर को तोड़कर मुगल आक्रांता औरंगजेब (Mughal Invader Aurangzeb) द्वारा बनवाए गए ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर वकील जैन ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि वह दिन दूर नहीं जब वर्तमान ढाँचे को हटा दिया जाएगा और हम (हिंदू समुदाय) वहाँ एक भव्य शिव मंदिर का निर्माण करेंगे।”

वकील हरिशंकर जैन ने कहा, “353 साल से हिंदू जनता संघर्ष कर रही है और चाहती है कि वहाँ से ढाँचा हटे और भगवान भोलेनाथ प्रकट हों। वहाँ भगवान भोलेनाथ प्रकट हो गए हैं। उनकी भी साइंटिफिक जाँच होगी और मालूम पड़ जाएगा कि वहाँ पर शिवजी हैं।

ज्ञानवापी ढाँचे की जाँच को लेकर उन्होंने आगे कहा, “हमने पूरे-के-पूरे परिसर की वैज्ञानिक जाँच के लिए प्रार्थना-पत्र दिया है और उससे साबित हो जाएगा कि पूरा परिसर हिंदुओं का है। भगवान भोलेनाथ चाहते हैं कि मंदिर बने और हम उसी तरफ आगे बढ़ रहे हैं।”

 वाराणसी के ज्ञानवापी ढाँचा परिसर में ही माता श्रृंगार स्थित हैं। इनकी पूजा करने को लेकर राखी सिंह के नेतृत्व में 5 महिलाओं ने कोर्ट से अनुमति माँगी थी। हालाँकि, मस्जिद पक्ष से जुड़े अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने इसका विरोध करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High court) ने याचिका दाखिल की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया।

इस अर्जी के खारिज होते ही माता श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा की माँग वाली अर्जी पर सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। अब वाराणसी की जिला कोर्ट माता श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा की माँग वाली याचिका पर सुनवाई करेगी।हाईकोर्ट के इस फैसले को मुस्लिम पक्ष के लिए बहुत बड़ा झटका माना जाता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जेजे मुनीर की एकल पीठ ने इस मामले में 23 दिसंबर 2022 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। दिसंबर में ही इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी थी। अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने जिला जज वाराणसी के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जिला जज की अदालत ने मुस्लिम पक्ष की आपत्तियों को खारिज कर दिया था।

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने अपनी अर्जी में कहा था कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के उपबंधों के तहत अदालत को वाद सुनने का अधिकार नहीं है। अदालत ने कमेटी की अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

दरअसल, रेखा सिंह एवं अन्य महिलाओं ने माता श्रृंगार गौरी की हर दिन पूजा करने की इजाजत कोर्ट से माँगी थी। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर परिसर का सर्वे हुआ था। सर्वे के दौरान ढाँचे के तहखाने में कई हिंदू प्रतीक मिले। इसके साथ ही एक शिवलिंग भी मिला। मुस्लिम पक्ष इसे फव्वारा बताता आ रहा है।

इसके बाद 18 अगस्त 2021 को इन महिलाओं ने ज्ञानवापी परिसर में माता श्रृंगार गौरी, भगवान गणेश, भगवान हनुमान समेत मौजूद अन्य देवताओं की रोजाना पूजा की इजाजत माँगने के लिए कोर्ट पहुँची। अभी यहाँ साल में एक बार ही पूजा होती है। अब हाईकोर्ट से मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज होने के बाद परिसर में स्थित भगवानों की नियमित पूजा पर सुनवाई होगी।

मुगल बादशाह औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर तोड़ने का नहीं दिया फरमान’: ज्ञानवापी पर मस्जिद कमेटी की दलील, कहा- परिसर में शिवलिंग नहीं फव्वारा है

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के पूरे सर्वे की माँग के विरोध में अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी ने वाराणसी कोर्ट में एप्लीकेशन दायर की है। इस एप्लीकेशन में न केवल हिंदुओं की याचिका का विरोध किया गया बल्कि औरंगजेब के आतंक को धो-पोंछने का प्रयास भी हुआ है। इसमें कहा गया है औरंगजेब निर्दयी नहीं था और उसने आदि विशेश्वर मंदिर को नहीं तोड़ा था।

हिंदुओं ने पूरे विवादित ढाँचे के एएसआई सर्वे के लिए याचिका डाली थी। इसमें उन्होंने कहा था भगवान आदि विशेश्वर मंदिर को मुस्लिम आक्रमणकारियों ने तोड़ दिया था। बाद में राजा टोंडल ने सन् 1580 में इसका दोबारा निर्माण कराया।

कमेटी ने अब इसी याचिका का विरोध करते हुए कहा है दो काशी विश्वनाथ मंदिरों की कोई अवधारणा है ही नहीं। इसके अलावा उन्होंने ‘आक्रमणकारी’ शब्द के प्रयोग पर भी आपत्ति जताई। कमेटी ने इसे हिंदू और मुस्लिमों के बीच नफरत फैलाने का एक प्रयास बताया।

एप्लीकेशन में कहा गया, “जमीन पर जो मस्जिद आलमगिरी/ज्ञानवापी मस्जिद है वो हजारों सालों से है। वह कल भी मस्जिद था और अब भी मस्जिद ही है। वाराणसी के मुसलमान या पड़ोसी जिलों के मुसलमान, अधिकार के नाते और बिन किसी पाबंदी के नमाज पंजगाना और नमाज जुमा और नमाज इदान यहाँ अदा कर रहे हैं।”

कमेटी यह भी मानने से इनकार करती है कि विवादित ढाँचे के परिसर में कोई शिवलिंग बरामद हुआ है। उनका अब भी यही कहना है कि वो एक फव्वारा है। वो कोर्ट से माँग करते हैं कि हिंदू श्रद्धालुओं की याचिका को खारिज कर दिया जाए।

मालूम हो कि अप्रैल 2021 में वाराणसी के सिविल जज ने विवादित ढाँच की एएसआई जाँच के लिए ऑर्डर पास किया था। इसपर मुस्लिमों ने इलाहाबाद कोर्ट में याचिका लगाई। मामला की सुनवाई हुई और दलीलों के बाद फैसला रिजर्व रख लिया गया। मस्जिद कमेटी का कहना है कि ऐसी स्थिति में एएसआई सर्वे का निर्देश नहीं दिया जा सकता है।

हिंदुओं ने वकील विष्णु शंकर जैन के माध्यम से याचिका देते हुए माँग उठाई है कि विवादित ढाँचे का पूरा सर्वे ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार का इस्तेमाल होते हुए होना चाहिए। इस पर कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से और यूपी सरकार को आपत्ति जाहिर करने के लिए 19 मई का समय दिया। अब मामले में एप्लीकेशन दायर हो गई है। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई है।

औरंगजेब नहीं था क्रूर…कितना सच?

इस एप्लीकेशन में मस्जिद कमेटी ने दावा किया है कि औरंगजेब ने भगवान विशेश्वर के मंदिर को नहीं तोड़ा। जबकि इतिहास की किताबों में यह विदित है कि सन् 1669 CE में काशी विश्वनाथध मंदिर पर औरंगजेब ने हमला किया था। उसने मंदिर को तुड़वाकर ज्ञानवापी मस्जिद बनाया। इसके प्रमाण अब भी विवादित ढाँचों के खंबों में देखने को मिल जाते हैं।
हिंदू श्रद्धालु जिस काशी विश्वनाथ परिसर में आज पूजा करते हैं वो ज्ञानवापी मस्जिद के सामने हैं। इसे महान अहिल्या बाई होल्कर ने इंदौर में 1780 में बनवाया था। मासिर-ई-आलमगिरी में इस बात का उल्लेख मिलता है कि अप्रैल 1669 को औरंगजेब ने एक फरमान जारी किया था जिसमें काफिरों के स्कूल और मंदिर तोड़ने का आदेश दिया गया था। इसके अलावा इस फरमान के बारे में वाराणसी गजेटियर में भी पढ़ने को मिलता है जो 1965 में प्रकाशित हुआ था।

उत्तर प्रदेश : वर्शिप एक्ट के खिलाफ कोर्ट पहुँची शाही परिवार की बेटी : औरंगजेब-ऐबक ने ध्वस्त किए थे मंदिर; रजिया मस्जिद और धरहरा मस्जिद पर कानूनी लड़ाई

कुतुब -उद-दीन ऐबक ने 1194 ईस्वी में मूल मंदिर को नष्ट कर दिया था (फोटो साभार: Aneesh Gokhale twitter)
काशी के शाही परिवार की बेटी ने पूजा स्थल अधिनियम 1991 को चुनौती देने वाली याचिका में हस्तक्षेप आवेदन दायर किया है​। इसके तहत काशी में विवादित ढाँचे रजिया मस्जिद (Razia Mosque) में बदलाव की माँग की गई है।

इसमें दावा किया गया है कि यहाँ मूल रूप से काशी विश्वनाथ मंदिर है​। हस्तक्षेप आवेदन के अनुसार, काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर 1194 ईस्वी में कुतुब-उद-दीन-ऐबक (Qutub-ud-Din Aibak) द्वारा रजिया मस्जिद का निर्माण किया गया था। ‘लॉ बीट’ के मुताबिक, रजिया मस्जिद के अलावा शाही परिवार धरहरा मस्जिद के मंदिर के रूप में पुनर्निर्माण की भी माँग कर रहा है, जिसे औरंगजेब ने 1682 में वाराणसी के पंचगंगा घाट पर बिंदु माधव मंदिर को तोड़कर बनाया था।

औरंगजेब ने दो बड़े मंदिरों को गिराया

वहीं, इतिहासकारों का दावा है कि औरंगजेब ने न केवल ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को बनाया, बल्कि इसी तरह उसने हिंदुओं के दो बड़े मंदिरों समेत अन्य कई सनातन आस्था के केंद्रों को भी गिराया था और वहाँ मस्जिदें बनवाई थी। भगवान शिव की नगरी काशी के पंचगंगा घाट पर स्थित ‘बिंदु माधव का मंदिर’ अब ‘धरहरा मस्जिद’ के नाम से जाना जाता है।
औरंगजेब ने सन 1669 के आसपास बिंदु माधव का प्राचीन मंदिर तोड़कर यहाँ धरहरा मस्जिद बनवाई थी, जिसके बाद औंध नरेश ने मंदिर से बिंदु माधव की मूर्ति को बगल में एक अन्य जगह स्थानांतरित करा दिया था। यहाँ पर अभी भी उनकी (भगवान विष्णु) पूजा की जाती है। अब इसे आलमगीर मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है।

काशी को काफी नुकसान पहुँचाया

इसके अलावा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रोफेसर माधव जनार्दन रटाटे ने भी बताया था कि औरंगजेब ने काशी को काफी नुकसान पहुँचाया था। उसने यहाँ के कृतिवाशेश्वर, बिंदु माधव और विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर उस स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया था। इसके अलावा ओंकारेश्वर और लाटभैरव मंदिर को भी उसने नष्ट कर दिया था। साथ ही ओंकारेश्वर मंदिर के आसपास भी कई मंदिरों को नुकसान पहुँचाकर उन्हें पूरी तरह लुप्त कर दिया।

शांतिप्रिय समुदाय के हिंसक प्रदर्शन के बाद अब नूपुर शर्मा के पक्ष में बन रहा माहौल

पैगंबर मोहम्मद पर नूपुर शर्मा की टिप्पणी के बाद ‘शांतिप्रिय समुदाय’ के लोगों के जिस तरीके से पूरे देश में अशान्ति फैलाई है, उसने दूसरे समुदाय के लोगों को सोचने के लिए विवश कर दिया है। नूपुर शर्मा ने वहीं कहा था जो मुस्लिम धर्मगुरू जाकिर नाइक इस शांतिप्रिय समुदाय के सामने कह चुका है और यह किताबों में भी लिखा है। इसको लेकर आम लोगों में यह संदेश जा रहा है कि अगर नूपुर शर्मा गलत तो फिर किताब या जाकिर नाइक सही कैसे?

नूपुर शर्मा के बयान के बाद कई दिनों बाद देश के कई हिस्सों में हिंसा की चिंगारी उठने लगी। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर नूपुर को मारने के लिए फतवा जारी कर दिए गए। पुतले जलाए गए और ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे लगाए गए। कई जगह हिंसक प्रदर्शन कर आगजनी-तोड़फोड़ की गई। शंका भी व्यक्त की जा रही है कि उपद्रवियों को शायद ही मालूम हो कि नूपुर ने बोला क्या है? जानमाल का काफी नुकसान हुआ। भारत तेरे टुकड़े होंगे वाली मानसिकता रखने वाले इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने शाहीन बाग में विरोध-प्रदर्शन के नाम पर महीनों सड़क जाम रखा था। ये लोग बोलने की आजादी के नाम पर देश विरोधी नारे लगने लगाते हैं। विरोध प्रदर्शन के नाम पर देश में हिंसा फैलाते हैं। 

इस्लामिक किताबों में लिखी बात को ही बोलने को लेकर नूपुर के बहाने साम्प्रदायिक दंगे करने का असली मकसद मथुरा और काशी आदि से ध्यान हटाना है। क्योकि ज्ञानवापी में हुए सर्वे में सच्चाई सामने के बाद ओवैसी और कट्टरपंथी कहते आ रहे हैं कि "एक मस्जिद खोने के बाद और मस्जिद नहीं खोएंगे।" फिर जो नूपुर ने जो बोला अगर वह गलत है, फिर ज़ाकिर नाइक ठीक क्यों? क्यों नहीं उसका सर तन से जुदा करने की मांग हुई? क्यों नहीं उसको जेल भेजने के लिए आंदोलन हुआ? अब ब्रिटेन में इसी विषय पर निर्मित फिल्म के विरोध में किसी की आवाज़ नहीं निकल रही, क्यों? टीवी पर वकील डॉ रिज़वान अहमद ऐसे वक्ता कट्टरपंथियों को मुंह तोड़ जवाब देते हैं। सुनिए:-  

इसके पहली भी यूजर्स नूपुर शर्मा के पक्ष में सोशल मीडिया पर उतर मुस्लिम मौलाना जाकिर नाइक का वो वीडियो भी शेयर किया, जिसमें वो हदीस के हवाले से मुसलमानों के बीच कहता दिख रहा है कि पैगंबर ने 6 साल की बच्ची से शादी की थी और 9 साल की उम्र में उससे शारीरिक संबंध बनाए थे। लेकिन यही बात कहने पर नूपुर शर्मा को धमकियां मिल रही हैं। यहां आप सुनिए कि जाकिर नाइक ने क्या कहा था।  

 हैरानी की बात तो यह है कि यह हिंसक प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है तो इन्हें भड़काने वाले कोर्ट पहुंच जाते हैं लेकिन किसी प्रदर्शनकारी को आगजनी और तोड़फोड़ करने या पत्थरबाजी करने से मना नहीं करते। मुस्लिम धर्मगुरु हो या औवेसी जैसे मुस्लिम नेता सभी सिर्फ भड़काने का काम करते हैं। कोई भी मुस्लिम कट्टरपंथियों को समझाने का काम नहीं करते। उन्हें नहीं समझाते कि जब तुम कहते हो कि ये देश किसी के बाप का नहीं है तो फिर अपने बाप की संपत्ति का नुकसान क्यों करते हो? कोई मौलाना या नेता मुस्लिम समुदाय के आम लोगों को ये बताने की कोशिश नहीं करता कि नूपुर शर्मा ने जो कहा है वो हमारे किताब में लिखा है और हमारे धर्मगुरु भी इस बारे में बात कर चुके हैं। ऐसे में इस शांतिप्रिय समुदाय के हिंसक प्रदर्शन ने दूसरे समुदाय के लोगों को यह विचार करने के लिए विवश कर दिया है कि आखिर ये कितने दिनों तक चलेगा?

अब देश भर में लोग नूपुर शर्मा के पक्ष में सामने आने लगे हैं। मंगलवार को बिहार में आरा के रमना मैदान में नूपुर के समर्थन में विशाल सभा की गई। 

इस सभा के बाद रैली भी निकाली गई और कहा गया कि हमारी चु्प्पी को कमजोरी ना समझिए। इस दौरान लोगों ने जय श्री राम के नारे भी लगाए। आरा में नूपुर के समर्थन में हुई इस रैली का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आप भी देखिए-

सत्यार्थ प्रकाश में महर्षि दयानंद ने भी किया है ज्ञानवापी में स्थित शिवलिंग का उल्लेख

उगता भारत के संपादक डॉ राकेश कुमार आर्य ने अपने निम्न लेख में काशी ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग के होने का जो एक और प्रमाण दिया है। जिससे ध्यान हटाने के लिए कट्टरपंथियों द्वारा जो नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के बहाने देशभर में हिंसात्मक प्रदर्शन किये जा रहे हैं। लेकिन सच्चाई उपद्रवियों के मुंह से बाहर आ ही गयी। देखिए SDPI का ये व्यक्ति भीड़ को भड़काते हुए कहता है कि ये 1992 का भारत नहीं है। वीडियो में उसे कहते सुना जा सकता है, “हमारी एक मस्जिद थी वो चली गई लेकिन अभी हमारे दिलों से नहीं गई है। आप भूल जाओ मस्जिद क्या, फव्वारा क्या… अब मस्जिद के लाइट, नल के लिए अपनी जानों को कुर्बान कर देंगे। तुमने क्या समझा है कि ये 1992 का भारत है। ये अब का भारत है… जब तक हमें इंसाफ नहीं मिलेगा तब तक हम अपनी आवाज को इसी तरह उठाएँगे। अगर रहना हो तो इज्जत से इस मुल्क में रहो। हम हर एक की कदर करना जानते हैं। अगर तुम नहीं जानते तो तुम्हारे बाप जहाँ से आए थे वहाँ चले जाओ।” जिसे नीचे दिए लिंक में विस्तार से पढ़ा एवं सुना जा सकता है।  

दुर्भाग्य यह है कि मोदी सरकार ने फेक न्यूज़ फैलाकर मुसलमानों बदनाम करने वाले जुबेर के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की, क्यों? सुनिए नूपुर की ज़ुबानी:-

https://www.facebook.com/watch/?extid=WA-UNK-UNK-UNK-AN_GK0T-GK1C&v=711695083470064  

प्रस्तुत है डॉ राकेश का लेख:-

आज ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर जिस प्रकार लोगों को अनेक प्रकार के साक्ष्य एकत्र करने पड़ रहे हैं, उनके दृष्टिगत महर्षि दयानंद के ‘ सत्यार्थ प्रकाश’ की साक्षी भी बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि शिवलिंग के रूप में डाले जाने का उल्लेख महर्षि दयानंद ने भी ‘सत्यार्थ प्रकाश’ में किया है । यद्यपि उसका प्रसंग थोड़ा दूसरा है ,परंतु शिवलिंग को उस समय कूप में डाल दिया गया था यह बात तो ऋषि दयानंद जी को भी ज्ञात थी और उन्होंने उसे यथावत अपने अमर ग्रंथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ में स्पष्ट किया है। उस प्रसंग को हम यहां यथावत प्रस्तुत कर रहे हैं :–

प्रश्न) जैसे स्त्री की पाषाणादि मूर्ति देखने से कामोत्पत्ति होती है वैसी वीतराग शान्त की मूर्त्ति देखने से वैराग्य और शान्ति की प्राप्ति क्यों न होगी?

(उत्तर) नहीं हो सकती। क्योंकि उस मूर्त्ति के जड़त्व धर्म आत्मा में आने से विचारशक्ति घट जाती है। विवेक के विना न वैराग्य और वैराग्य के विना विज्ञान, विज्ञान के विना शान्ति नहीं होती। और जो कुछ होता है सो उनके संग, उपदेश और उनके इतिहासादि के देखने से होता है क्योंकि जिस का गुण वा दोष न जानके उस की मूर्त्तिमात्र देखने से प्रीति नहीं होती। प्रीति होने का कारण गुणज्ञान है। ऐसे मूर्त्तिपूजा आदि बुरे कारणों ही से आर्य्यावर्त्त में निकम्मे पुजारी भिक्षुक आलसी पुरुषार्थ रहित क्रोड़ों मनुष्य हुए हैं। सब संसार में मूढ़ता उन्हीं ने फैलाई है। झूठ छल भी बहुत सा फैला है।

(प्रश्न) देखो! काशी में ‘औरंगजेब’ बादशाह को ‘लाटभैरव’ आदि ने बड़े-बड़े चमत्कार दिखलाये थे। जब मुसलमान उन को तोड़ने गये और उन्होंने जब उन पर तोप गोला आदि मारे तब बड़े-बड़े भमरे निकल कर सब फौज को व्याकुल कर भगा दिया।

(उत्तर) यह पाषाण का चमत्कार नहीं किन्तु वहां भमरे के छत्ते लग रहे होंगे। उन का स्वभाव ही क्रूर है। जब कोई उन को छेड़े तो वे काटने को दौड़ते हैं। और जो दूध की धारा का चमत्कार होता था वह पुजारी जी की लीला थी।

(प्रश्न) देखो! महादेव म्लेच्छ को दर्शन न देने के लिये कूप में और वेणीमाधव एक ब्राह्मण के घर में जा छिपे। क्या यह भी चमत्कार नहीं है?

(उत्तर) भला जिस के कोटपाल, कालभैरव, लाटभैरव आदि भूत प्रेत और गरुड़ आदि गणों ने मुसलमानों को लड़के क्यों न हटाये? जब महादेव और विष्णु की पुराणों में कथा है कि अनेक त्रिपुरासुर आदि बड़े भयंकर दुष्टों को भस्म कर दिया तो मुसलमानों को भस्म क्यों न किया? इस से यह सिद्ध होता है कि वे बिचारे पाषाण क्या लड़ते लड़ाते? जब मुसलमान मन्दिर और मूर्त्तियों को तोड़ते-फोड़ते हुए काशी के पास आए तब पूजारियों ने उस पाषाण के लिंग को कूप में डाल और वेणीमाधव को ब्राह्मण के घर में छिपा दिया। जब काशी में कालभैरव के डर के मारे यमदूत नहीं जाते और प्रलय समय में भी काशी का नाश होने नहीं देते तो म्लेच्छों के दूत क्यों न डराये? और अपने राज के मन्दिरों का क्यों नाश होने दिया? यह सब पोपमाया है।

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इस उदाहरण से स्पष्ट है कि हिंदू समाज में प्रचलित आम धारणा के आधार पर महर्षि दयानंद ने अपने अमर ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश में इस घटना को यथावत स्थान दिया । यदि महर्षि दयानंद जैसे महापुरुष ने इस घटना का उल्लेख किया है तो निश्चय ही यह घटना उस समय तक लोगों के चित्त में बनी बैठी रही होगी। इसके अतिरिक्त महर्षि दयानंद ने इस पर पर्याप्त अध्ययन करने के उपरांत ही इसे इस प्रकार उल्लेखित किया होगा।