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‘हुमायूं हम आएंगे, बाबरी फिर गिराएंगे’ से हिंदुओं की हुंकार, बंगाल में बाबरी के जिन्न से ममता की मुश्किलें चौतरफा बढ़ीं


मुर्शिदाबाद में तृणमूल कांग्रेस के हुमायूँ कबीर(अब पार्टी से निष्काषित) द्वारा बाबर के नाम पर मस्जिद बनाए जाने से ममता बनर्जी के सत्ता में आने के रास्ते में कांटे बिछा दिए हैं। ममता के लिए आगे कुआँ पीछे खाई वाली स्थिति है यानि ममता मस्जिद का विरोध करती है मुस्लिम वोटबैंक बुरी तरह से छिटक जाएगा, इसलिए ममता ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है। लेकिन चुप्पी भी ममता को भारी पड़ने जा रही है।     

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले जिस तरह से ध्रुवीकरण की जमीन तैयार हो रही है, उसने ममता बनर्जी की रातों की नींद उड़ाकर रख दी है। विश्व हिंदू रक्षा परिषद के पोस्टर—“हुमायूं हम आएंगे, बाबरी फिर गिराएंगे” के साथ ही हिंदुओं ने हुंकार भरी है कि पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद को नहीं बनने दिया जाएगा। दरअसल, बाबरी विवाद ने ममता बनर्जी की राजनीति की कमजोर नस पकड़ ली है। विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनने से यह सियासी आग उनकी सत्ता को झुलसा सकती है। बंगाल का चुनाव अब सिर्फ सत्ता का संघर्ष नहीं रहा, बल्कि यह पहचान, आस्था और राजनीतिक भविष्य की लड़ाई बन चुका है। लखनऊ में विश्व हिंदू रक्षा परिषद का बाबरी को लेकर नारा सिर्फ एक संगठन का उग्र बयान नहीं, बल्कि यह जागृत हो चुके हिंदुओं के ज्वालामुखी का संकेत है, जो मुर्शिदाबाद से निकलकर पूरे पश्चिम बंगाल राजनीति को झुलसाने की तैयारी में है। बाबरी मस्जिद विवाद का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ चुका है और इसका सबसे बड़ा नकारात्मक असर तृणमूल कांग्रेस पर पर पड़ता दिख रहा है। क्योंकि तुष्टिकरण की राजनीति के भंवर में फंसी ममता बनर्जी से अब बाबरी की जिन्न ना निगला जा रहा है और ना ही उगला जा रहा है।

लखनऊ में मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने पर भारी विरोध
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बन रही एक मस्जिद का विरोध करने के लिए ‘मुर्शिदाबाद चलो’ का नारा दिया। इस मस्जिद की आधारशिला टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर 2024 को रखी थी, जिसे उन्होंने “बाबरी मस्जिद की तर्ज पर” बनाने का दावा किया था। लखनऊ में संगठन के कार्यकर्ताओं ने हाथों में फावड़ा, कुल्हाड़ी और भगवा झंडा लेकर प्रदर्शन किया और “बंटोगे तो कटोगे” आदि नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे बाबर के नाम पर किसी भी नई संरचना का निर्माण नहीं होने देंगे। 10 फरवरी (मंगलवार) को जब संगठन के कार्यकर्ता लखनऊ से मुर्शिदाबाद के लिए रवाना होने वाले थे, तब उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें रोक दिया। विश्व हिंदू रक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय को उनके आवास पर नजरबंद कर दिया। क्योंकि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार नहीं चाहती कि कानून-व्यवस्था में किसी तरह का खलल पड़े। यह कार्रवाई बताती है कि मामला कितना संवेदनशील हो चुका है।

मुर्शिदाबाद में बाबरी-शैली मस्जिद ने आग में घी डाला
मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यही मस्जिद निर्माण कार्य में 1000 से 1200 धर्मगुरुओं द्वारा कुरान की तिलावत भी की गई। इसके साथ ही इस कथित बाबरी मस्जिद का विरोध भी तेज हो गया है। यह विवाद अब केवल स्थानीय नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है। जिस तरह हिंदू संगठन सड़क पर उतरने को तैयार हैं, योगी और ओवैसी आदि नेता मैदान में हैं और ममता बनर्जी असहज चुप्पी साधे बैठी हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह मुद्दा बंगाल चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में सस्पेंडेड टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर द्वारा बाबरी मस्जिद के नाम से मस्जिद की नींव रखने की घोषणा ने सियासत को विस्फोटक मोड़ दे दिया। कबीर ने कहा कि यह महज धार्मिक पहल नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक प्रयोग है। यह मामला केवल राजनीतिक नहीं रहा, समाज के विभिन्न वर्गों ने इसे अलग-अलग रुख से लिया है। हिन्दू संगठनों ने इसे ‘अवैध’ और ‘संविधान के अनुरूप नहीं’ करार दिया है और बुलंद आवाज़ों में यह मांग उठी है कि सरकार कबीर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे।

हुमायूं के 100 सीटों पर लड़ने के ऐलान से ममता पर संकट
टीएमसी से निलंबित हुमायूं कबीर अब खुद को स्वतंत्र राजनीतिक ताकत बनाने की कोशिश में हैं। नई पार्टी बनाने और 100 से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारने के ऐलान ने ममता बनर्जी के लिए अंदरूनी संकट खड़ा कर दिया है। टीएमसी चाहे औपचारिक रूप से उनसे दूरी बनाए, लेकिन यह विवाद ममता सरकार की प्रशासनिक कमजोरी और राजनीतिक असमंजस को उजागर करता है। इसके अलावा कबीर यदि किसी गठबंधन में चुनाव लड़े तो वह तृणमूल कांग्रेस के ही कोर वोट बैंक में सैंध लगाएगा। अब सवाल यह है कि क्या बंगाल का चुनाव रोज़गार, उद्योग, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर होगा या फिर बाबरी मस्जिद जैसे भावनात्मक विषयों पर होगा। ममता सरकार के दौरान यह विवाद खड़ा होना, उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

बाबरी विवाद: भाजपा के लिए अवसर, टीएमसी के लिए संकट
भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को ममता सरकार की विफलता के तौर पर पेश कर रही है। पार्टी का दावा है कि बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति ने सामाजिक संतुलन बिगाड़ दिया है। बाबरी विवाद भाजपा को हिंदू मतों के ध्रुवीकरण का अवसर दे रहा है, जबकि टीएमसी का पारंपरिक समीकरण दरकता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव में ओवैसी और हुमायूं कबीर जैसे चेहरे मुस्लिम मतदाताओं को अलग दिशा में मोड़ सकते हैं। इससे टीएमसी का मुस्लिम वोट बैंक भी कमजोर हो सकता है। यही वजह है कि यह विवाद ममता बनर्जी के लिए दोहरी मार साबित हो सकता है यानी हिंदू नाराज और मुस्लिम बंटे हुए। यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि बंगाल धीरे-धीरे धार्मिक राजनीति की प्रयोगशाला बनता जा रहा है।

ममता बनर्जी के लिए क्या है खतरा?
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीति पर यह विवाद गंभीर प्रभाव डाल रहा है। टीएमसी की तरफ से इसकी शुरुआत को पार्टी की आधिकारिक नीति नहीं बताते हुए दूरी बनाई गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी को इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से जनता तक पहुंचाने में कठिनाई हो रही है। हुमायूं कबीर के सार्वजनिक आरोपों और टिप्पणिओं ने टीएमसी नेतृत्व को अंदरूनी विवाद में उलझाया है। इसके अलावा, ओवैसी जैसे राष्ट्रीय नेताओं के बंगाल आने की खबरें राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना रही हैं। इससे यह उदाहरण स्थापित हो रहा है कि चुनावों में धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दों को उघाड़ने से स्थिति अस्थिर हो सकती है। राजनीतिक समीकरणों का निचोड़ यह है कि बाबरी मस्जिद विवाद वोट बैंक राजनीति का एक नया मोड़ है। हिंदू मतदाताओं के बीच स्पष्टता की उम्मीदें पैदा होती दिख रही हैं। दरअसल, अब तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से कोई स्पष्ट और मजबूत बयान नहीं आया है। यह चुप्पी बताती है कि वह दो पाटों के बीच फंसी हुई हैं—एक तरफ मुस्लिम वोट बैंक, दूसरी तरफ नाराज हिंदू मतदाता। यही असमंजस उनके लिए सबसे बड़ा राजनीतिक खतरा बनता जा रहा है।

कयामत के दिन तक भी बाबरी ढांचा नहीं बनेगा- सीएम योगी
उधर उत्तर प्रदेश से बाबरी मस्जिद विवाद का जिन्न एक बार फिर फूट पड़ा है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से बाबरी मस्जिद विवाद यहां गरमा गया है। मामले में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी मैदान में उतर गए हैं। सीएम योगी ने मुद्दे पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि बाबरी ढांचे का पुनर्निर्माण कभी भी नहीं होगा, कयामत तक बाबरी ढांचा नहीं बनेगा। बाराबंकी के श्री राम जानकी मंदिर में आयोजित दशम श्री हनुमान विराट महायज्ञ में सीएम योगी ने कहा कि यह सरकार जो बोलती है, करके दिखाती है। यह जितना करती है, उतना ही बोलती है। हमने कहा था रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। सीएम योगी ने सवालिया लहजे में जनसमूह से पूछा कि क्या आज कोई संदेह है? हम आज फिर इस बात को कह रहे हैं कि कयामत के दिन तक भी बाबरी ढांचा नहीं बनेगा। उन्होंने कहा कि कयामत का दिन तो कभी आना नहीं है, इसलिए बाबरी ढांचे का पुनर्निर्माण भी कभी होना नहीं है। सीएम योगी कहा कि कयामत के दिन के आने का जो लोग सपना देख रहे हैं, ऐसे ही सड़ गल जाएंगे। कयामत का वह दिन कभी आने वाला नहीं है। जिन्हें सपना देखना है, देखते रहें। हम अपनी विरासत को सम्मान देते हुए, भारत की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य करते रहेंगे।

मुस्लिम वोटों के लिए औवेसी और हुमायूं कबीर के मिलने की अटकलें
सीएम योगी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कानून तोड़ने वालों के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं है। अगर कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे। कयामत के दिन के लिए मत जियो। हिंदुस्तान में कायदे से रहना सीखो। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगर कोई भी यहां कानून तोड़ने की कोशिश करेगा तो उसके लिए कानून के तहत ही कार्रवाई होगी। ऐसे लोगों का रास्ता जहन्नुम की तरफ ही जाता है। कानून तोड़कर अगर कोई जन्नत जाने का सपना देख रहा है तो उसका सपना कभी पूरा नहीं होने वाला है। हैदाराबाद वाले भड़काऊ भाईजान ओवैसी भी मुर्शिदाबाद जाने की सोच रहे हैं। यहां पर औवेसी और हुमायूं कबीर मिलकर पश्चिम बंगाल में मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करने की रुपरेखा बना सकते हैं। अयोध्या में दफ्न हो चुकी बाबरी को मुर्शिदाबाद में जिंदा कर हुमायूं कबीर ने एक ऐसे विवाद को जन्म दे दिया है जिसके नासूर बनने की पूरी आशंका है। लखनऊ के पोस्टर इसकी तस्दीक कर रहे हैं कि भविष्य में यह बड़ा मुद्दा बनने वाला है।

भगवान श्रीराम और हिंदुओं को कोसने वाली ममता बनर्जी उर्फ़ बेगम ममता का नया पैंतरा, महाकाल की आड़ में हिंदू वोट लेने का ढकोसला

कल तक अपने मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने, जय श्रीराम सुनने पर कार से बाहर आकर हिन्दुओं को धमकाने वाली ममता बनर्जी उर्फ़ बेगम ममता को बिहार चुनाव में बीजेपी के परचम लहराने के डर से कुछ महीनों बाद बंगाल में अपनी सत्ता सताने लगी है। दुर्गा पूजा पंडालों में ममता के इस्लामिक गुंडों द्वारा अड़चनें डालने पर हिन्दुओं को कोर्ट का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन अब हिन्दू वोट की चिंता सताने के डर से महाकाल की शरण में पहुँच गयी है। अगर हिन्दू कालनेमि हिन्दू ममता के इस पाखंड में फंस ममता को वोट देता है उससे बड़ा महामूर्ख दुनिया में नहीं मिलेगा। हिन्दुओं को याद करना होगा कि जब से कालनेमि ममता बंगाल की मुख्यमंत्री बनी है इसके इस्लामिक गुंडों ने हिन्दुओं का जीना दूबर किया हुआ है। ये कालनेमि ममता इतनी बड़ी ड्रामेबाज़ है कि कुर्सी हिलती देख चोटिल होने का ड्रामा खेल सहानुभूति वोट बटोर मुख्यमंत्री बन जाती है। अब हिन्दुओं को अपने हित में इस कालनेमि बेगम ममता के किसी भ्रमजाल में नहीं फंसना होगा।  
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस और उसकी मुखिया ममता बनर्जी की हालिया चालबाजी ने उसे एक ऐसे नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। ममता बनर्जी लंबे समय तक खुलेआम “तुष्टिकरण की राजनीति” करती रही हैं। यहां तक कि वे हिंदू भावनाओं और भगवान श्रीराम के नाम पर उपहास का माहौल बनाती रही हैं। वही हिंदू विरोधी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब अचानक “महाकाल मंदिर” निर्माण की घोषणा कर रही हैं। सवाल उठना स्वाभाविक है क्या यह वास्तविक अध्यात्म का उद्गम है या मात्र चुनावी मौसम की राजनीतिक ठिठोली मात्र है। सभी को पता है कि अगले साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हैं। हाल ही में बिहार की जनता ने भाजपा और एनडीए को जितना प्रचंड समर्थन दिया है, उसने ममता बनर्जी को हिलाकर रख दिया है। यही वजह है कि वे अब हिंदू विरोध की राजनीति से कुछ समय तक पल्ला झाड़ने की रणनीति बना रही हैं। ताकि उनका हश्र भी राजद और महागठबंधन जैसा ना हो। इसकी शुरुआत उन्होंने अचानक ‘महाकाल’ के प्रति प्रेम को दर्शाकर आरंभ की है। लेकिन पश्चिम बंगाल की प्रबुद्ध जनता जानती है कि महाकाल मंदिर का कार्ड वास्तव में अध्यात्म नहीं, यह चुनाव का गणित मात्र है।

बिहार में भाजपा की महाविजय ने ममता बनर्जी को बुरी तरह डराया

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो ममता बनर्जी की यह रणनीति सिर्फ और सिर्फ चुनावी मौसम के अनुरूप है। बिहार में भाजपा की महाविजय ने ममता बनर्जी को बुरी तरह डरा दिया है। दरअसल, बीते वर्षों में पश्चिम बंगाल में भाजपा के तेजी से उभार के पीछे एक बड़ा निर्णायक वर्ग हिंदू मतदाता भी रहा है। ममता सरकार का कुशासन तो इसका बड़ा मजबूत पहलू है ही। ऐसे में तृणमूल को यह समझ आने लगा है कि बंगाल की राजनीति में राम, दुर्गा और महाकाल अब सब चुनावी विमर्श का केंद्र बन चुके हैं। बंगाल में जिस हिन्दू मतदाताओं ने 2021 में TMC को कड़ी चुनौती दी थी, वही वर्ग अब 2026 के आगामी विधानसभा चुनावों में निर्णायक बन सकता है। ममता की राजनीतिक टीम को इसका पूरा एहसास है। इसलिए अचानक बड़े-बड़े धार्मिक स्थलों की घोषणाएँ, देवी-देवताओं के नाम पर सरकारी कार्यक्रम और अब यह महाकाल मंदिर का कार्ड खेलने की कोशिश कर रही हैं।

चुनाव से पहले जनता के साथ महाकाल कार्ड खेलने की कोशिश

पश्चिम बंगाल की जनता ऐन चुनाव से पहले महाकाल कार्ड खेलने की कोशिश को देख रही है और इसे सफल नहीं होने देगी। दरअसल, सालों तक ममता बनर्जी दुर्गा पूजा विसर्जन से लेकर रामनवमी जुलूस पर प्रतिबंध लगाने या इन हिंदू धार्मिक आयोजन को सीमित करने के षडयंत्र करती रही हैं। यह छवि बंगाल से बाहर तो व्यापक रूप से बनी ही है। अब बंगाल के अंदर भी हिंदू समाज का इससे बहुत आहत हुआ है। इसीलिए उनका मानना है कि महाकाल मंदिर का कार्ड सिर्फ ममता बनर्जी की “छवि सुधार अभियान” का हिस्सा मात्र है। हकीकत में वह अपनी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति से एक इंच भी पीछे हटने वाली नहीं है। विरोधियों का कहना है कि जब कभी भगवान श्रीराम का नाम जनता के बीच ताकत से उठा है, ममता बनर्जी का पहला रिएक्शन “भगवान को राजनीति में घसीटने” की शिकायत करना होता है। लेकिन अब विडंबना देखिए आज वही सरकार धार्मिक आस्थाओं का सहारा लेराजनीतिक संदेश दे रही है।

महाकाल मंदिर मजाक- बिना प्रोजेक्ट लागत के जमीन आवंटित
सवाल यह भी है कि यह हिंदू विरोधी मानसिकता वाली ममता के मन में अध्यात्म किस गति से जागृत हुआ? बंगाल कैबिनेट ने अक्टूबर 2025 में महाकाल मंदिर निर्माण के लिए भूमि को पर्यटन विभाग को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। 25.15 एकड़ जमीन में से 17.4 एकड़ केवल मंदिर परिसर के लिए निर्धारित कर दी गई। लेकिन सबसे बड़ा मजाक देखिए, प्रोजेक्ट लागत जो किसी भी सरकारी परियोजना की पारदर्शिता का मुख्य तत्व होती है—अब तक घोषित नहीं की गई है। इतने बड़े पैमाने पर भूमि आवंटन हो गया, सरकारी पहल की प्रेस कॉन्फ़्रेंसें हो गईं। राजनीतिक संदेश देने की खोखली कोशिश भी हो गई, पर असल परियोजना व्यय का कोई ठोस आंकड़ा सार्वजनिक मंचों पर नहीं रखा गया। क्या यह जल्दबाजी और हड़बड़ी का संकेत नहीं है?

बंगाल की जनता-जनार्दन के मन में बिहार की शानदार जीत बैठी
इस राजनीतिक जल्दबाजी के पीछे कारण भी उतने ही स्पष्ट हैं। बंगाल की जनता-जनार्दन के मन में बिहार की शानदार जीत से भाजपा की धार्मिक अपील गहरी पैठ बना चुकी है। राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा, शानदार शुरुआत और अब भगवा शिखर ध्वजारोहण ने राष्ट्रीय स्तर पर हिंदू आस्था की एक नई ऊर्जा पैदा की—जो बंगाल में भी शिद्दत से महसूस की जा रही है। यह असर तृणमूल कांग्रेस के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं है। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक समर्थन मिला था, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ हिंदू मतदाता संख्या अधिक है। और 2026 की ओर बढ़ते हुए यह समर्थन और प्रभाव दोनों ही बढ़ते दिख रहे हैं। ऐसे में ममता बनर्जी का महाकाल मंदिर निर्माण कार्ड विरोधियों के लिए तो केवल एक “राजनीतिक औजार” है। ऐसा औजार जिसे मजबूरी में उठाया गया है।

ममता को 14 वर्षों में कभी महाकाल का ख्याल क्यों नहीं आया?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू है, महाकाल मंदिर बनाने के लिए समय का चुनाव। अगर ममता बनर्जी को महाकाल में इतनी ही आस्था थी तो यह विचार पिछले 14 वर्षों में कभी क्यों नहीं आया? क्यों यह घोषणा ठीक उसी समय आई जब हिंदू मतदाता का झुकाव विपक्ष की ओर तेजी से बढ़ रहा है? क्यों वही नेता, जिन्होंने रामनवमी जुलूस, दुर्गा विसर्जन, रथ यात्रा जैसे आयोजनों पर कहाँ–कहाँ पर प्रतिबंध या प्रतिबंध–समान व्यवस्थाएँ लागू की थीं, आज मंदिर निर्माण की अगुआई कर रही हैं? क्या यह किसी अचानक हुए आध्यात्मिक परिवर्तन का परिणाम है, या फिर यह चुनावी मजबूरी की तपिश में तैयार की गई रणनीति है? बंगाल के राजनीतिक पंडितों का कहना है कि इस कदम के पीछे सत्ता खोने का डर भी है। क्योंकि जनता सजग हो चुकी है। वह जानती है कि जब आस्था वास्तविक होती है तो सरकार के निर्णय लंबे समय तक धार्मिक समुदायों के विश्वास को मजबूत करते हैं। और जब निर्णय केवल चुनावी समय में, अचानक, बिना किसी व्यापक परामर्श या स्पष्ट योजना के आते हैं, तो वे आस्था से अधिक राजनीति की गंध देते हैं।

तुष्टिकरण की राजनीति और “हिंदू विरोधी छवि” के लिए मशहूर
यह स्पष्ट है कि पश्चिम बंगाल का मतदाता—भोला नहीं, बल्कि सजग, प्रबुद्ध और आस्थावान है। बंगाल की राजनीति इन दिनों केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि यह प्रतीकों, आस्थाओं और भावनाओं का अखाड़ा बन चुकी है। इसी अखाड़े के बीच खड़े होकर ममता बनर्जी ने अचानक “महाकाल मंदिर” का कार्ड खेलने को मजबूर हो चुकी हैं। “तुष्टिकरण की राजनीति” और घोर “हिंदू विरोधी छवि” के बीच ममता बनर्जी ने अब सिलीगुड़ी में 17.4 एकड़ भूमि पर महाकाल मंदिर की घोषणा की है। यह ऐन चुनावी वर्ष से पहले की केवल रणनीतिक घोषणा है। जिसका उद्देश्य उनके माथे पर लगा हिंदू विरोध के दाग को धोना है। लेकिन बंगाल का हिंदू मतदाता उनके इस राजनीतिक पैंतरे को समझ गया है। दरअसल, ममता ने बरसों तक “हिंदुत्वात्मक प्रतीकों से दूरी” बनाए रखी। लेकिन अब जब भाजपा का हिंदू मतदाता आधार बंगाल की राजनीति में निर्णायक बनता जा रहा है, तभी अचानक ममता को “महाकाल” याद आने लगे हैं।

 पश्चिम बंगाल के बदलते सियासी मौसम में तृणमूल कांग्रेस की बैचैनी

ममता बनर्जी के विरोधियों का साफ-साफ तर्क है कि यह सब एक सुनियोजित, पर बेहद हड़बड़ी में तैयार की गई रणनीति है। ताकि कम से कम प्रतीकात्मक रूप से ही सही, हिंदू वोट बैंक में अपनी साख कुछ बचाई जा सके। राजनीतिक पंडित साफ कहते हैं कि यह हड़बड़ी तृणमूल कांग्रेस को फायदा पहुंचाने वाली नहीं है। दरअसल, लोकसभा चुनावों के बाद से पश्चिम बंगाल में भी भाजपा के हिंदुत्व-मुख्य एजेंडे का प्रभाव बढ़ा है और तृणमूल अपनी जमीन खिसकती देख रही है। ममता बनर्जी द्वारा मंदिरों, आरती, पूजा और धार्मिक प्रतीकों का उपयोग तब और संदिग्ध लगता है जब उन्हें यह करते वर्षों में पहली बार देखा जा रहा है। इसलिए यह शीशे की तरह साफ है कि पश्चिम बंगाल की जनता इस दिखावटी अध्यात्म और नकली आस्था का चुनाव में पुरजोर जवाब देने वाली है।

हिन्दुओं को दी थी गाय-बकरी की तरह काटने की धमकी, असम पुलिस ने किया गिरफ्तार तो सनीउर रहमान की बंध गई घिग्गी


सोशल मीडिया पर हिन्दुओं को गाय-बकरी की तरह काटने की धमकी देने वाला सनीउर रहमान उर्फ़ सनी भाई गिरफ्तार हो गया है। असम की कामरूप पुलिस ने उसके खिलाफ यह कार्रवाई की है। यह जानकारी असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दी है।

यह कार्रवाई शुक्रवार (6 जून, 2025) को हुई। सनीउर रहमान ने बकरीद का जिक्र करते हुए एक वीडियो में कहा था, “तुम हिंदू नहीं जानते कि मियाँ कौन हैं, हमें कोई डर नहीं, हम हर साल बकरीद मनाते हैं।” उसने आगे कहा, “याद रखना हम तुम्हें बकरियों और गायों की तरह काटेंगे।”

उसका यह भड़काऊ बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बाद उसे गिरफ्तार करने की माँग की गई थी। असम CM हिमंता बिस्वा ने बताया है कि गोलपाड़ा जिले से सनिदुल इस्लाम नाम का एक युवक भी भगवान राम पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तार हुआ है।  

‘अगर हम लोग (मुस्लिम) खड़े हुए तो आप लोगों (हिंदुओं) को चलने का रास्ता नहीं मिलेगा’: हिजाब वाली ने वक्फ कानून पर धमकाया, देखिए Video

वक्फ संशोधन एक्ट-2025 के खिलाफ जितने भी लोग सड़क पर हैं क्या किसी ने अपने आकाओं से पूछा कि तुमने वक़्फ़ की कितनी जमीन पर कब्ज़ा कर रखा है? उस जमीन का कितना किराया देते हो और उसके पलटे कितने करोड़ हर महीने कमा रहे हो?    
वक्फ संशोधन एक्ट-2025 के खिलाफ एक मुस्लिम महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में महिला ने चेतावनी दी कि अगर दुनिया भर के मुस्लिम एकजुट हो गए, तो हिंदुओं के पास खड़े होने की जमीन भी नहीं बचेगी।

हिजाब पहनी महिला ने कहा, “पूरी दुनिया में मुसलमान से ज्यादा तादात किसी की नहीं है। अगर हम लोग खड़े हुए, तो आप लोगों (हिंदुओं) को चलने का रास्ता नहीं मिलेगा इंसाल्लाहताला.. जितनी जल्दी हो सके, आप अपने वक्फ बिल को वापस लीजिए।”

वक्फ (संशोधन) एक्ट को अप्रैल 2025 में संसद ने पारित किया। यह एक्ट वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और गैर-मुस्लिम सदस्यों को बोर्ड में शामिल करने जैसे सुधार लाता है। लेकिन कई मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों ने इसे मुस्लिम अधिकारों पर हमला बताया।

इस कानून के खिलाफ पश्चिम बंगाल में लगातार हिंसा हो रही है। हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं। मंदिरों, हिंदुओं की संपत्तियों, वाहनों को निशाना बनाया जा रहा है, तो घर में घुसकर पिता-बेटे की हत्या कर दी गई।

मुर्शिदाबाद में इस्लामी हिंसा पर भड़के ‘बाबा बागेश्वर’, हिन्दुओं के पलायन पर जताई चिंता: कहा- इसके पीछे साजिश, लेकिन जल्दी सब बंद हो जाएगा


बंगाल में वक्फ कानून के विरोध में हिंसा जारी हैं। मुर्शिदाबाद के अलावा राज्य के कई जिले इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा की आग में झुलस रहे हैं, जिसके चलते हिंदुओं का पलायन भी हुआ है। मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ‘बाबा बागेश्वर’ चिंतिंत है।

पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, “मैंने सुना है कि वहाँ से हिंदू पलायन कर रहे हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से भी हिंदू पलायन करेंगे।”

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आगे कहा “देश में हिंदू डरे हुए हैं। यह सब पहले से ही योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है। यह देश और खासकर हिंदुओं के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि हिंदू एकजुट नहीं हैं। लेकिन, मेरा मानना है कि जल्द ही ये सब बंद हो जाएगा।”

दक्षिण 24 परगना में पुलिस से भिड़े आईएसएफ समर्थक

कोलकाता रैली में शामिल होने जा रहे आईएसएफ समर्थकों को जब दक्षिण 24 परगना में बसंती राजमार्ग पर भोजेरहाट के पास रोका गया। उस दौरान वहाँ पर मीनाखान और संदेशखाली से भी बड़ी संख्या में आईएसएफ समर्थक भी इकट्ठा थे। पुलिस द्वारा रोके जाने पर भीड़ ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिससे तनाव बढ़ गया। इसके बाद हिंसा शुरू हो गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शकारियों ने कुछ पुलिस वाहनों में आग लगा दी। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

मुर्शिदाबाद में कैसे भड़की हिंसा 

बता दें कि, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में 8 और 11 अप्रैल को वक्फ कानून के विरोध के दौरान प्रदर्शन ने हिंसा का रूप ले लिया। अब तक मुर्शिदाबाद हिंसा में 3 लोगों के मौत हो चुकी हैं। वहीं भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की याचिका पर सुनवाई के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने जिले में केंद्रीय बलों की तैनाती के आदेश दिए थे। इस्लामी कट्टरपंथी हिंसा के चलते सैकड़ों हिंदू नदी पार करके पास के मालदा जिले में शरण लेने को मजबूर हुए हैं। 

दिल्ली : हिंदू क्यों लगा रहे ‘मकान बिकाऊ’ के पोस्टर; मस्जिद को बढ़ाना, शिव मंदिर के सामने उसका गेट खोलना… दिल्ली सीलमपुर (ब्रह्मपुरी) की इसी अल-मतीन मस्जिद से 2020 हिंदू-विरोधी दंगों में चली थी गोलियाँ

अल-मतीन मस्जिद से निकली भीड़ ने ही बोला था 2020 में हिंदुओं पर धावा (साभार: ऑपइंडिया हिंदी, विशेष प्रबंध द्वारा)
उत्तर-पूर्वी दिल्ली का ब्रह्मपुरी इलाका इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है। यहाँ की अल-मतीन मस्जिद के विस्तार को लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। मस्जिद के सामने हर साल होलिका दहन होता है, लेकिन इस बार होली का त्योहार जुमे की नमाज और रमजान के महीने के साथ टकरा रहा है। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच डर और आशंका का माहौल है।

हिंदू समुदाय का एक बड़ा हिस्सा इसे 2020 के दिल्ली दंगों से जोड़कर देख रहा है, जब इसी मस्जिद से गोलियाँ चलने और हजारों की भीड़ जुटने की बात सामने आई थी। क्या ब्रह्मपुरी सचमुच एक इस्लामी एपिसेंटर में तब्दील हो रही है, या यह सिर्फ़ एक बनाया गया विवाद है? इसकी जड़ में जाने के लिए हमने स्थानीय लोगों से बात की और बैकग्राउंड को खंगाला।

क्या दिल्ली और केंद्र सरकार सतर्कता बरतते दोबारा इलाके को दंगा होने से रोक षड्यंत्रकारियों को गिरफ्त में लेगी? अगर इलाके में दोबारा दंगा होता है तो यह दिल्ली और केंद्र सरकारों की बड़ी नाकामी होगी?   

मस्जिद विस्तार और ‘मकान बिकाऊ’ के नोटिस

अल-मतीन मस्जिद पहले से ही गली नंबर-13 में एक चार मंजिला मकान में चल रही थी। लेकिन हाल ही में इसके विस्तार की योजना बनी। अब इस मस्जिद को बगल के प्लॉट तक फैलाया जा रहा है। एक बेहद बारीक योजना बनाकर पहले तो मस्जिद के बगल की जमीन हिंदू परिवार से खरीदी गई और फिर उस एक मंजिला घर को तोड़कर वहाँ नई बिल्डिंग बनाई जा रही है, जो मूल-रूप से गली नंबर 13 की मस्जिद को विस्तार देने के लिए है।
इस पूरे वाकये को बहुत प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया। स्थानीय लोगों को डर है कि जैसे 25 फरवरी 2020 को हिंदुओं पर हमला बोला गया, इस अल-मतीन मस्जिद से निकली इस्लामी भीड़ द्वारा, अगर मस्जिद 2 गुनी बड़ी हो गई, तो सोचिए कि और कितने हमलावर एक साथ उनके ही दरवाजे पर जमा हो जाएगी। यही वजह है कि ब्रह्मपुरी की गली नंबर-12 के करीब 60 मकान हिंदू परिवारों में से 25-30 मकानों पर ‘मकान बिकाऊ है’ के नोटिस लग चुके हैं।
इस अल-मतीन मस्जिद के विस्तार का विरोध करने वाले शिकायतकर्ता पंडित शंकर लाल गौतम कहते हैं, “यह निर्माण अवैध है। MCD को गुमराह करके नक्शा पास कराया गया। मस्जिद के ठीक बगल में शिवालय है। अगर यहाँ मस्जिद का गेट खुला तो दोनों समुदाय आमने-सामने होंगे, और तनाव बढ़ेगा। हम 2020 जैसा कुछ नहीं चाहते।” शंकर लाल का आरोप है कि यह सिर्फ मस्जिद का विस्तार नहीं, बल्कि इलाके की डेमोग्राफी बदलने की साजिश है। उनके मुताबिक, दंगों के बाद से ज्यादातर मकान हिंदुओं ने बेचे और खरीदने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग हैं।

2020 का हिंदू विरोधी दंगा: एक जख्म जो अभी भरा नहीं

2020 के फरवरी महीने में दिल्ली के उत्तर-पूर्वी हिस्से में हुए दंगे आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। सीलमपुर, जाफराबाद और ब्रह्मपुरी जैसे इलाकों में हिंसा ने 53 लोगों की जान ले ली थी और सैकड़ों घायल हुए थे। इस दौरान अल-मतीन मस्जिद का नाम भी चर्चा में आया था। स्थानीय लोगों का दावा है कि मस्जिद से गोलियाँ चली थीं और अचानक हजारों की भीड़ वहाँ जमा हो गई थी। ऑपइंडिया के पास मौजूद वीडियो और तस्वीरें उस वक्त की भयावह स्थिति को बयान करती हैं – जलते हुए घर, सड़कों पर बिखरा मलबा और डरे हुए लोग। वीडियो फुटेज, जो अभी हार्ड ड्राइव में सुरक्षित हैं और पुलिस-कोर्ट के रिकॉर्ड में भी मौजूद हैं, इस बात की तस्दीक करते हैं कि हिंसा के दौरान यह इलाका एक युद्धक्षेत्र में बदल गया था।
उस वक्त के बाद से ब्रह्मपुरी में डेमोग्राफी तेजी से बदली है। हिंदू समुदाय के कई परिवारों ने अपने मकान बेच दिए और इलाका छोड़ दिया। स्थानीय निवासी दिनेश शर्मा (बदला हुआ नाम) बताते हैं, “2020 के बाद यहाँ का माहौल बदल गया। दंगों में हमने अपने लोगों को खोया, घर जले और डर ऐसा बैठा कि कई लोग यहाँ से चले गए। अब मस्जिद का विस्तार देखकर लगता है कि फिर वही सब होगा।” रमेश की बात में एक गहरा डर झलकता है, जो सिर्फ उनके नहीं, बल्कि गली नंबर-12 के कई हिंदू परिवारों का है।

मुस्लिम पक्ष का आरोप – “विवाद जबरदस्ती पैदा किया जा रहा”

मस्जिद के सामने खड़े मिले अल-मतीन के नायब ईमाम सद्दाम हुसैन से हमारी बातचीत हुई। उनका कहना है, “हमारी आबादी बढ़ रही है, मौजूदा मस्जिद छोटी पड़ गई थी। दान में मिले प्लॉट पर विस्तार शुरू किया, इसमें गलत क्या है? कुछ लोग आपस में लड़वाना चाहते हैं, इसलिए इसे मुद्दा बना रहे।” सद्दाम हुसैन का दावा है कि मकान बेचना लोगों की अपनी मर्जी है। “यहाँ अच्छी कीमत मिल रही है, इसलिए लोग बेच रहे हैं। कोई जबरदस्ती नहीं कर रहा। हम शांति चाहते हैं।”
सद्दाम हुसैन ने कहा कि गली नंबर 12 में मस्जिद का नहीं, बल्कि कम्युनिटी सेंटर के लिए जमीन ली गई है। हालाँकि स्थानीय मुस्लिमों का दावा है कि वहाँ मस्जिद ही बन रही है। मुस्लिम समुदाय के लोग यह भी कहते हैं कि वे बड़े दिल वाले हैं। हर साल मस्जिद के सामने होलिका दहन होता है, और उन्हें कोई आपत्ति नहीं। लेकिन हिंदू पक्ष इसे छिपी सच्चाई मानता है। एक महिला, जो अपना नाम नहीं बताना चाहतीं, कहती हैं, “ये लोग बाहर से शांति की बात करते हैं, लेकिन 2020 में क्या हुआ, सबको पता है। अब होली और रमजान साथ आए हैं, जुमे की नमाज होगी, और हमें डर है कि कोई बड़ा खेल न हो जाए।”
                   ब्रह्मपुरी की गली नंबर – 13 में स्थित मस्जिद चौक, यहीं पर होता है होलिका दहन

होली और रमजान का टकराव

इस बार होली का त्योहार 24 मार्च को है, जो जुमे की नमाज और रमजान के महीने के साथ पड़ रहा है। मस्जिद के सामने हर साल होलिका दहन होता है, लेकिन इस बार तनाव की वजह से लोग डरे हुए हैं। गली नंबर-12 के निवासी अजय कुमार कहते हैं, “पुलिस अभी शांति बनाए हुए है, लेकिन सिपाही चले गए तो क्या होगा? 2020 में भी पहले सब ठीक था, फिर अचानक हमला हुआ। हम अपने बच्चों को नहीं गँवाना चाहते।” अजय की बात में 2020 का डर साफ झलकता है, जब हिंसा ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया था।
खास बात ये है कि अल-मतीन मस्जिद एक निजी घर में चल रही थी। बात में इस जगह को मस्जिद में तब्दील कर दिया गया और सोसायटी के नाम पर ‘जकात’ यानी दान दे दिया गया। गली नंबर 13 में स्थित मस्जिद 10 से 12 साल पुरानी है, जो धीरे-धीरे खड़ी की गई। अब ये 4 मंजिला है। जबकि इस जगह पर होलिका दहन बहुत पहले से होता रहा है।
दरअसल, गली नंबर 13 में स्थित अल-मतीन मस्जिद के बगल वाली जमीन ही गली नंबर 12 की तरफ है। यहीं पर गली नंबर 12 और 13 को जोड़ने वाला एक छोटा कट भी है। जहाँ मस्जिद का गेट बन सकता था, लेकिन गली नंबर 12 में जहाँ मस्जिद का गेट खोलने की कोशिश की गई थी, उसी के सामने शिव मंदिर है। इसी बात का विरोध हिंदू कर रहे हैं। क्योंकि शिव मंदिर 1984 का बना हुआ है। ये आज का नहीं है, जबकि मस्जिद अभी पिछले दशक ही बनी है। लोग होलिका दहन के दिन भी मंदिर में पूजा करते हैं। सिर्फ होलिका ही नहीं, महाशिवरात्रि से लेकर हर सोमवार को लोग पूजा करते हैं। ये रिपोर्ट पढ़ने के बाद अपने आप चीजें साफ हो जाती हैं कि असलियत क्या है। कौन पहले से है और कौन बाद में आया।
    1984 में निर्मित मंदिर, मंदिर के सामने ही मस्जिद का गेट बनाने की कोशिश (दाईं तरफ- मंदिर निर्माण की जानकारी                                                                                                                                     देता शिलापट)

पुलिस और MCD की कार्रवाई

विवाद बढ़ता देख दिल्ली पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है। मौके पर सिपाही तैनात हैं और MCD ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी। अल-मतीन सोसाइटी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिसमें आरोप है कि गलत जानकारी देकर नक्शा पास कराया गया। पुलिस का कहना है कि दोनों समुदाय शांति की बात कर रहे हैं, और अभी कोई बड़ी घटना नहीं हुई। लेकिन स्थानीय बीजेपी निगम पार्षद का कहना है, “यह माहौल बिगाड़ने की कोशिश है। हम हिंदुओं को पलायन नहीं करने देंगे।”

डेमोग्राफी बदलाव का आरोप

हिंदू समुदाय मस्जिद निर्माण को एक ‘मोडस ऑपरेंडी’ मानता है। उनका कहना है कि पहले मस्जिद बनती है, फिर माहौल बदलता है, और हिंदू पलायन को मजबूर हो जाते हैं। 2020 के बाद से ब्रह्मपुरी में यह ट्रेंड देखने को मिला है। एक बुजुर्ग निवासी कहते हैं, “पहले यहाँ हिंदू-मुस्लिम साथ रहते थे। दंगों के बाद सब बदल गया। अब मस्जिद का विस्तार देखकर लगता है कि हमें यहाँ से भगाने की तैयारी है।”
ब्रह्मपुरी की विवादित गली नंबर 12-13 मौजपुर-वार्ड नंबर 228 में आती है। यहाँ साल 2020 में 25 फरवरी 2025 को हिंदुओं पर हमले के बाद फायरिंग में 3 हिंदू युवक घायल हो गए थे। इसी गली नंबर 13 में अल-मतीन मस्जिद है, जिसका विस्तार किया जा रहा है।
साल 2020 के दंगों के बाद से हिंदुओं पर जबरदस्त दबाव है। वो अपने घर बेच रहे हैं। मुस्लिमों का कहना है कि वो अच्छे पैसे दे रहे हैं, इसलिए लोग घर बेच रहे हैं, जबकि हकीकत ये है कि लोगों का जीना मुहाल हो चुका है। वो डर के साए में जी रहे हैं, इसलिए पलायन को मजबूर हो रहे हैं। उनके दिलों में 2020 की खौफनाक यादें अब भी ताजा हैं।
ऐसे में ब्रह्मपुरी का यह विवाद सिर्फ मस्जिद निर्माण तक सीमित नहीं है। यह 2020 के दंगों का जख्म, डेमोग्राफी बदलाव का डर और धार्मिक त्योहारों के टकराव का नतीजा है। पुलिस और MCD की कार्रवाई से अभी शांति है, लेकिन लोगों के मन में आशंका बनी हुई है। हिंदू और मुस्लिम दोनों दिल्ली पुलिस की तारीफ कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह शांति टिकाऊ होगी? या फिर होली और रमजान का यह संयोग एक बार फिर ब्रह्मपुरी को 2020 की आग में झोंक देगा? जवाब समय के पास है, लेकिन फिलहाल यहाँ के लोग डर और उम्मीद के बीच जी रहे हैं। 

‘अयोध्या, काशी और मथुरा हमें सौंप देते मुस्लिम तो बाकी जगहों पर विवाद नहीं होता’: मंदिर-मस्जिद विवाद पर विश्व हिन्दू परिषद

आज सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक से जगह-जगह सर्वे कर मन्दिरों को सामने लेने पर देश में साम्प्रदायिक माहौल ख़राब करने का डर दिखा कर जनता को बार-बार गुमराह किया जा रहा है।रामजन्मभूमि विवाद के दिनों में विश्व हिन्दू परिषद से सार्वजनिक रूप कहा था कि "मुस्लिम समाज हिन्दुओं के तीन तीर्थ अयोध्या, काशी और मथुरा सौंप दें, अन्यथा जितने भी विवादित स्थल है सबको लेकर रहेंगे।" लेकिन छद्दम धर्म-निरपेक्ष मुस्लिम कट्टरपंथियों के साथ बाबरी मस्जिद के नाम पर अपनी तिजोरियां भरने में लगे रहे। विडंबना देखिए राममन्दिर लगभग पूरा होने को है लेकिन मस्जिद के नाम मिली जमीन पर कुछ भी काम नहीं हो रहा है। इस कटु सच्चाई को हर मुस्लिम को समझना चाहिए कि किस तरह मस्जिद के नाम पर उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है।       
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने गुरुवार (26 दिसंबर 2024) को हिंदू समाज में मुस्लिम स्मारकों पर अधिकार के दावों और अदालतों में दायर याचिकाओं की वजह बताई। विहिप के महासचिव मिलिंद परांडे ने कहा कि मुस्लिम समुदाय द्वारा अयोध्या, काशी और मथुरा के विवादित स्थलों को हिंदुओं को स्वेच्छा से नहीं सौंपने से हिंदू समाज में नाराजगी है।

1984 का धर्म संसद और 2025 की स्थिति

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विहिप के महासचिव मिलिंद परांडे ने 1984 में आयोजित धर्म संसद का जिक्र करते हुए कहा, “तब यह प्रस्ताव रखा गया था कि अयोध्या, काशी और मथुरा हमें दे दी जाएँ, और इसके बाद अन्य मुद्दों पर कोई हलचल नहीं होगी। लेकिन 2025 आने को है और यह प्रस्ताव अब तक लागू नहीं हो सका। इसी कारण समाज में जो नाराजगी दिख रही है, वह स्वाभाविक है।”

मोहन भागवत के बयान पर भी दी प्रतिक्रिया

संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान को लेकर परांडे ने कहा, “भागवत जी ने काशी और मथुरा के संदर्भ में जो बात कही, उसे समझने की जरूरत है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर को हिंदुओं के विश्वास का प्रतीक बताया था और कहा था कि रोजाना नए मुद्दे उठाना नफरत और द्वेष पैदा कर सकता है।” हालाँकि, कुछ हिंदू संतों द्वारा उनके बयान के विरोध करने के सवाल पर उन्होंने कहा, “हम संतों के विरुद्ध टिप्पणी नहीं करते।”

मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण का विरोध

परांडे ने मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण के मुद्दे पर कहा कि विहिप 5 जनवरी 2025 से देशव्यापी जन जागरूकता अभियान शुरू करेगी। यह अभियान विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में आयोजित होने वाली ‘हैंदव शंखावरम’ नाम की विशेष सभा से शुरू होगा। विहिप ने मंदिर प्रबंधन को समाज को सौंपने के लिए एक मसौदा कानून भी तैयार किया है, जिसे हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को सौंपा गया।

विहिप की प्रमुख माँगें

विहिप ने मंदिरों को समाज को सौंपने से पहले कुछ प्रमुख माँगें रखी हैं:
  • मंदिरों और एंडोमेंट विभागों से सभी गैर-हिंदू कर्मचारियों को हटाना।
  • पूजा और सेवा के कार्यों में केवल धर्म का पालन करने वाले हिंदुओं को नियुक्त करना।
  • मंदिर प्रबंधन और ट्रस्ट बोर्ड में राजनीतिक दलों से जुड़े व्यक्तियों की नियुक्ति पर प्रतिबंध।
  • मंदिर परिसर में दुकानों के संचालन की अनुमति केवल हिंदुओं को देना।
  • मंदिरों की भूमि पर गैर-हिंदुओं द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाना।
विहिप का कहना है कि उनकी यह पहल हिंदू समाज को मंदिरों के संरक्षण और प्रबंधन में सशक्त बनाने के लिए है। उनका मानना है कि मंदिर हिंदू संस्कृति और परंपरा का आधार हैं और इनका सही प्रबंधन जरूरी है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब हिंदू-मुस्लिम विवादित स्थलों पर चर्चा और मंदिर निर्माण की मांग तेज हो रही है। विहिप ने स्पष्ट किया कि उनका अभियान सांप्रदायिकता फैलाने के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकार सुनिश्चित करने के लिए है।

 

बँटेंगे तो कटेंगे… बांग्लादेश का हाल बता योगी ने हिंदुओं को बताया सुरक्षित रहने का मंत्र; जितना हिन्दू जातियों में विभाजित होगा, उससे ज्यादा भारत कमजोर होगा

हिन्दुओं को मुसलमानों को किसी हीन भावना से देखने की बजाए, मुसलमानों से शिक्षा लेनी चाहिए। मुसलमानों में हिन्दुओं से अधिक जातियां और उप-जातियां हैं, लेकिन उनका झगड़ा जगजाहिर नहीं होता,  इस्लाम के नाम पर एकजुट रहते, जबकि लालची हिन्दू अपने निजी स्वार्थों में अपने ही धर्म के विरुद्ध खड़ा रहता है। 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश की जनता और हिंदुओं को राष्ट्र के लिए हमेशा एकजुट रहने का संदेश दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। ये वीडियो 26 अगस्त का है। जन्माष्टमी के अवसर पर आगरा में दुर्गादास राठौर की प्रतिमा का अनावरण करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देशवासियों से एकजुट रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश को समाज, जाति, भाषा के नाम पर बांटने वाली ताकतों से सावधान रहना होगा। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में सीएम आदित्यनाथ कह रहे हैं कि हमें हमें एक रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता। राष्ट्र तब सशक्त होगा, जब हम एक होंगे। बांग्लादेश में देख रहे हैं न, वो गलतियां यहां नहीं होनी चाहिए। बंटेंगे तो कटेंगे। एक रहेंगे तो नेक रहेंगे, सुरक्षित रहेंगे और समृद्धि की परकाष्ठा तक पहुंचेंगे। हमें विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए कार्य करना है।’ उन्होंने आगरा के एक कार्यक्रम में जनता को संबोधित करते हुए स्पष्ट रूप से कहा- “बँटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो नेक रहेंगे, सुरक्षित रहेंगे।”

योगी ने कहा, “राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता। राष्ट्र तब सशक्त होगा जब हम सब एक होंगे। बंटेंगे तो कटेंगे। आप बांग्लादेश में देख रहे हैं, वो गलतियाँ यहाँ नहीं होनी चाहिए। बंटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो नेक रहेंगे, सुरक्षित रहेंगे और समृद्धि की पराकाष्ठा को पहुँचेंगे।”

उन्होंने आगरा में अपना यह बयान राष्ट्रवीर दुर्गादास राठौड़ की भव्य प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में सम्मिलित होते समय दिया। सीएम योगी ने कहा कि जिस देश में दुर्गादास राठौर जैसे महान वीर पैदा होते हैं, उस देश का कोई विदेशी आक्रांता बाल भी बाँका नहीं कर सकता है। उन्होंने बताया कि कैसे दुर्गादास राठौड़ ने मुगल शासक औरंगजेब को खदेड़ा था

 योगी ने याद दिलाया कि क्रांतिकारियों का उद्घोष था- “तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें ना रहें।” भाषण के दौरान उन्होंने कहा, “हमें विकसित भारत की कल्पना को स्वीकार करना है।”

उन्होंने अपने भाषण में मुगल बादशाह औरंगजेब को दुष्ट बताया। साथ ही बताया कि कैसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने औरंगजेब की सत्ता को चुनौती दी थी और उससे कहा था- “तुम चूहे की तरह ऐसे तड़पते रह जाओगे, लेकिन हिंदुस्तान पर तुझे कब्जा तो नहीं करने देंगे।”

अब सोशल मीडिया पर उनके इस बयान की खूब चर्चा है। लोग सीएम योगी को निर्भीक बेबाक, हिंदू हृदय सम्राट कह रहे हैं। लोग बोल रहे हैं कि सीएम योगी ने बिन खौफ बिन डरे एकदम सच्ची बात कह दी है।

सीएम आदित्यनाथ के बयान के इस वीडियो को लोग सोशल मीडिया पर जमकर शेयर कर रहे हैं। लोग भी कह रहे हैं कि एक रहेंगे तो नेक रहेंगे, बंटेंगे तो कटेंगे। आप भी देखिए लोग किस तरह से सोशल मीडिया पर इस वीडियो को वायरल कर रहे हैं…

बांग्लादेश : इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हिन्दुओं पर बरपाया कहर, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की 54+ घटनाएँ: घर जलाए, दुकानें लूटीं, मंदिरों में की तोड़फोड़

          बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने हमलों की सूची जारी की (चित्र साभार: वायरल वीडियो से एसएस)
बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने के साथ ही लगातार हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले जारी हैं। सोमवार (5 अगस्त, 2024) को बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने इस दौरान देश में हिंदू मंदिरों, घरों और दुकानों पर हुए हमलों की एक लिस्ट जारी की है।

एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल वॉयस ऑफ बांग्लादेशी हिंदू के अनुसार, यह सभी हमले मात्र पाँच घंटे के भीतर हो गए। हालाँकि, हमलों की असल संख्या इस लिस्ट से कहीं अधिक हो सकती है। इस संस्था द्वारा जारी लिस्ट में 54 हमलों के बारे में बताया गया है।

इस लिस्ट के अनुसार, शेरपुर में श्रीबर्डी उपजिला युवा एकता परिषद के अध्यक्ष के घर पर हमला किया गया, तोड़फोड़ हुई और लूटपाट भी की गई। इसके अलावा खुलना के रूपसा थाना क्षेत्र के हाईगेट गाँव में श्यामल कुमार दास और स्वजन कुमार दास के घर पर हमला हुआ।

खुलना शहर के ही टूटपारा में खुलना जिला एकता परिषद के अध्यक्ष बिमन बिहारी अमित और युवा एकता परिषद के अध्यक्ष अनिमेष सरकार रिंकू के घर पर हमला हुआ। डाकोप के आमतली बनिसंता में जयंत गेन के घर और कोयरा के दारपारा में भी अल्पसंख्यकों पर हमला हुआ। उनके घरों में तोड़फोड़ की गई और लूटपाट की गई।

लक्ष्मीपुर में पूजा परिषद के नेता और व्यवसायी दीपक साहा के घर और कार्यालय पर हमला कर तोड़फोड़ और लूटपाट की गई। कोषोरगंज के कुलियारचर के अगरुपुर गाँव में नकुल कुमार और सुहसंत के घरों को जलाया गया। चटगाँव के रौज़ान में उज्जल चक्रवर्ती के घर पर हमला और लूटपाट की गई।

जसूर के अभयनगर के धोपडी पालपारा गाँव में तीन घरों को जला दिया गया। बघारपारा के नारिकेल बरिया में बाबुल साहा के गोदाम समेत 22 दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई, केशवपुर, बेचपारा और बरमनपारा में अल्पसंख्यकों के घरों पर हमला किया गया।

सतखैरा में भी अल्पसंख्यकों की दुकानों को लूटा गया, कोलारोआ में जिला एकता परिषद के अध्यक्ष विश्वजीत साधु के घर पर हमला कर लूटपाट की गई। एकता परिषद के केंद्रीय सहायक संगठन सचिव डॉ. सुब्रत घोष के घर पर हमला कर इस्लामी कट्टरपंथियों ने उसे जला दिया।

शैस्तागंज बाजार, हबीगंज में उपजिला एकता परिषद के अध्यक्ष असित बरन दास की दुकान पर हिंसक हमला, तोड़फोड़ और लूटपाट की गई। नरैल के लोहागरा में अल्पसंख्यकों के घरों पर हमला किया गया, तोड़फोड़ और लूटपाट भी हुई। अब यहाँ के हिन्दू बेघर हैं।

बोगरा में हिंसा की कई घटनाएँ हुई हैं। बरगोला के तिलपट्टी में अल्पसंख्यकों की 5-7 दुकानों पर हमला, तोड़फोड़ और लूटपाट की गई। इसी तरह, दुपचांचिया उपजिला के सहपुकुर गाँव में डॉ गौतम कुमार मंडल के घर पर हमला किया गया और लूटपाट की गई।

पटुआखाली में कुआकाटा के राधा गोविंद मंदिर पर हमला हुआ और तोड़फोड़ की गई। अनंत मुखर्जी के घर पर हमला किया गया, तोड़फोड़ की गई और लूटपाट भी हुई। सदर, पंचगढ़ के वार्ड 2 और 3 में अल्पसंख्यकों के घरों को निशाना बनाया गया, तोड़फोड़ की गई और लूटपाट की गई।

नोआखली के हटिया के सोनादिया में सहदेव रॉय के घर पर हमला और लूटपाट हुई। ठाकुरगाँव के सदर में अल्पसंख्यकों के घरों पर हमला किया गया, तोड़फोड़ और लूटपाट की गई। इसके अलावा, पीरगंज के वार्ड 2 में श्मशान मंदिर पर हमला किया गया और उसे इस्लामी कट्टरपन्थियों ने जला दिया।

झेनैदाह में भारी हिंसा हुई। यहाँ चकलापारा नगरपालिका में 10 अल्पसंख्यक परिवारों के घरों पर लगातार हमले, तोड़फोड़ और लूटपाट की गई। कोटचंदपुर में भी अल्पसंख्यकों की दुकानों पर हमला किया गया और लूटपाट की गई। हथुरिया, बेरा थाना और पबना में अल्पसंख्यकों के घरों पर हमला हुआ और यहाँ भी तोड़फोड़ और लूटपाट की गई।

नेत्रकोना में रामकृष्ण मिशन और सदर में इस्कॉन मंदिर पर हमला किया गया और तोड़फोड़ की गई। भीड़ ने अल्पसंख्यकों के घरों पर भी हमला किया, तोड़फोड़ की और लूटपाट की। सदर, मुंशीगंज में अल्पसंख्यकों के घरों पर हमला किया गया, तोड़फोड़ की गई और लूटपाट की गई।

चांदपुर के फरीदगंज उपजिला में हरिपद दास के घर पर हमला किया गया, तोड़फोड़ की गई और लूटपाट की गई। नारायणगंज के अराईहाजर में राम डॉक्टर के घर पर हमला करने और तोड़फोड़ करने की कोशिश की गई।

नेत्रकोना में रामकृष्ण मिशन और सदर में इस्कॉन मंदिर पर हमला हुआ। इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने अल्पसंख्यकों के घरों पर भी हमला किया, तोड़फोड़ की और लूटपाट की। चांदपुर के फरीदगंज उपजिला में हरिपद दास के घर पर हमला किया गया, तोड़फोड़ की गई और लूटपाट की गई।

हिन्दुओं पर हमले के वीडियो भी वायरल

इस लिस्ट के अलावा सोशल मीडिया पर कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हुई हैं। इनमें बांग्लादेश में हिंदुओं के घरों, दुकानों और मंदिरों पर सरकार के खिलाफ हिंसा की आड़ में हमले किए गए हैं। ऑपइंडिया सभी वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सका।
एक्स हैंडल राजू दास (RajuDas777) ने ऐसे कई वीडियो पोस्ट किए हैं। एक वीडियो में बांग्लादेश के बोगरा जिले के गबताली उपजिला में बामुनिया पालपारा हिंदुओं के घरों पर भीड़ को हमला करते देखा गया।
एक अन्य पोस्ट में राजू दास ने बांग्लादेश के पिरोजपुर जिले के मथबरिया पुलिस स्टेशन क्षेत्र में संकट में फंसी एक हिंदू लड़की का वीडियो शेयर किया। वीडियो में लड़की बांग्ला भाषा में मदद की गुहार लगाती दिख रही है।
एक और वीडियो में, चटगाँव के नवग्रह बाड़ी स्थित शनि मंदिर को दंगाइयों ने जला दिया।
इस्कॉन इंडिया के प्रवक्ता युधिष्ठिर गोविंद दास ने एक पोस्ट में कहा, “मुझे मिली जानकारी के अनुसार, मेहरपुर (खुलना डिवीजन) में हमारे एक इस्कॉन केंद्र को भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा देवी की मूर्तियों के साथ जला दिया गया। केंद्र में रहने वाले 3 भक्त किसी तरह भागने में सफल रहे और बच गए।”
विसेग्राद 24 द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में, इस्लामी कट्टरपंथियों को हिंदुओं के घरों को घेरते और अंदर मौजूद लोगों को धमकाते हुए देखा गया।
बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार के अनुसार, देश के भीतर 27 जगहों पर हिंदू समुदाय के घर हमले की चपेट में आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लालमोनीहाट सदर उपजिला के तेलीपारा गांव और थाना रोड में प्रदीप चंद्र रॉय और मुहिन रॉय के घर में गोदाम और आबादियां की गईं। कालीगंज उपजिला, चंद्रपुर गांव में चार हिंदू परिवारों के घरों पर हमला किया गया।
हाथीबंधा उपजिला के पुरबो सरदुबी गांव में 12 हिंदू घरों को जला दिया गया, जबकि बांधवगढ़ के सदर उपजिला में कई हिंदू घरों को जला दिया गया। दिनाजपुर में दस हिंदू घरों पर हमला और रेल बाजार में एक मंदिर पर हमला किया गया। खानसामा उपजिला में तीन हिंदू घरों पर हुआ हमला।
खुलना में, ओइक्या काउंसिल के नेताओं और अन्य लोगों के घरों में सामान रखा गया। बरिशाल के गौरानादी में भीड़ ने आदिवासी अधिकारी के घर पर हमला कर दिया। इसी समय, बोगुरा, पटुआखली, शेरपुर, नरसिंगडी, किशोरगंज, चटगाँव, जोशोर, सतखिरा, हबीगंज और नरैल में भी ऐसी ही घटनाएँ सामने आई हैं।

हिंदू गंदे हैं, इसलिए उनका पुनर्जन्म होता है… हाफिज जन्नत ले जाता है: दरभंगा के इरफान-अफगान चला रहे थे अवैध मदरसा, जकात के पैसे से खरीद रहे अपने लिए जमीन


उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दुबग्गा स्थित एक अवैध मदरसे से 21 बच्चों को बचाया गया है। बच्चों ने बताया कि वहाँ पढ़ाने वाला हाफिज या मौलवी उनका ब्रेनवॉश करता था। वह बच्चों को जन्नत पाने से संबंधित तालीम देता था। मौलवी कहता था कि एक हाफिज अपने साथ 10 बच्चों को जन्नत ले जाता है। वहीं, हिंदुओं में गंदा काम करने वालों का पुनर्जन्म होता है।

मदरसे से रेस्क्यू किए गए 7 से 15 साल इन बच्चों को मोहान रोड स्थित राजकीय बालगृह में रखा गया है। राज्य बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉक्टर शुचिता चतुर्वेदी का कहना है कि जिस तरह से इन बच्चों का ब्रेनवॉश किया जा रहा था, वह किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। जो बच्चे ठीक से हिंदी तक नहीं बोल पाते, वे पुनर्जन्म बोल रहे हैं। हिंदू धर्म और इस्लाम में अंतर बता रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इन बच्चों को दीन (इस्लाम मजहब) की शिक्षा दी जा रही थी और जन्नत के सपने दिखाए जाते थे। उन्हें पढ़ाई-लिखाई से दूर रखा जा रहा था। चतुर्वेदी ने राज्य के मुख्य सचिव को एक पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने एक कमिटी बनाकर इसकी जाँच करने और ऐसे मदरसों पर रोक लगाने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसे सैकड़ों मदरसे संचालित किए जा रहे हैं।

जाँच में पता चला है कि बिहार के दरभंगा के रहने वाले इरफान और अफसान दुबग्गा में अवैध मदरसा चला रहे थे। बाल आयोग के सदस्यों का कहना है कि अवैध मदरसा चलाने वाले ये लोग मुस्लिम समाज से जकात (दान) के नाम पर पैसे लेते थे। जकात के पैसे से निजी संपत्ति बनाने का भी खुलासा हुआ है। जकात में मिले पैसों से एक ट्रस्ट का गठन कराया गया, जिसमें 3.5 लाख रुपए जमा हुए हैं।

इतना ही नहीं, इन पैसों से दोनों निजी जमीन भी खरीदी है। यह मदरसा आवासीय शिक्षा के नाम पर खोला गया था और इसमें बच्चों को इस्लाम की शिक्षा दिया जा रहा था। इनके पास बच्चों के माता-पिता का सहमति पत्र भी नहीं है। जिस मकान में मदरसा संचालित हो रहा था उसका एग्रीमेंट भी नहीं है। मकान में शौचालय तक नहीं है। इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी की गई है।

वहीं, जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास सिंह ने शुक्रवार (3 मई 2024) को राजकीय बालगृह का निरीक्षण किया और बच्चों से बात की। इस दौरान सात साल के एक बच्चे ने कहा, “अंकल जी, अब्बा-अम्मी की बहुत याद आ रही है। उन्हें बुला दीजिए।” इस अधिकारी ने कहा कि वे जल्दी आने वाले हैं। बच्चों ने यह भी बताया कि वे 15 दिन पहले मदरसे में आए थे।

लखनऊ के दुबग्गा में अवैध तरीके से घर में एक मदरसे का संचालन हो रहा था। इसके बारे में सूचना मिलते ही 1 मई 2024 को 23 बच्चों (कुछ रिपोर्ट में 21 बच्चे) को बचाया गया था। इसके बाद इन बच्चों को बाल संरक्षण गृह में रखा गया है। ये सारे बच्चे बिहार के रहने वाले हैं। अभी तक इन बच्चों के अभिभावकों ने अपने बच्चों की खोज खबर नहीं ली है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ में पंजीकृत मदरसों की कुल संख्या 131 है, जबकि 111 मदरसे अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। पंजीकृत मदरसों में कुल 18 ऐसे मदरसे हैं, जिन्हें सरकार की तरफ से अनुदान मिलता है। वहीं, अधिकांश मदरसे सिर्फ मान्यता के आधार पर चलते हैं।

रामनवमी पर सपा सांसद रामगोपाल यादव ने उगला जहर : ‘पूजा-पाठ पाखंडी करते हैं, इस देश में हजारों राम मंदिर’

एक कहावत है कि 'गुलाम हमेशा गुलाम ही रहेगा', यह बात समाजवादी पार्टी पर शत-प्रतिशत सटीक बैठती है। जिस मुस्लिम वोट की खातिर हिन्दू होकर पाखंडी हिन्दू बना जा रहा है, उनसे सीखो कुछ नालायकों। जो सच को झूठ साबित करने में कुछ भी कर गुजरने को तैयार है, उसी तरह मुस्लिम वोट के ये पाखंडी हिन्दू भी सच को झूठ साबित करने में लगे पड़े हैं। कुर्सी प्रेम में ये पाखंडी इतने गिर चुके हैं, जिसे शब्दों में नहीं कहा जा सकता। निहत्ते रामभक्तों पर गोली चलवाने पार्टी श्रीराम की पक्षधर हो नहीं सकती। कभी इनका कोई नेता रामायण पर आरोप लगाता है, तो कोई नेता सनातन धर्म पर हमला। सनातन धर्म पर हुए इन सब हमलों को देख इनके हिन्दू होने पर ही शंका होने लगती है। 
टी.राजा सिंह हैदराबाद,को श्रीराम नवमीं की शोभायात्रा निकाली तो उनके बेटे का अपहरण करने की धमकी दी गई
तब राजासिंह ने उनकी मस्जिद के सामने ही रथ यात्रा रोक कर कहा, एक बाप की संवेदना को समझते हुए इनकी भाषा पर ध्यान मत दीजिए, सनातन धर्म के रक्षक ऐसी महान सपूत को हम हृदय से नमन वंदन

देश और दुनिया भर में आज बुधवार (17 अप्रैल 2024) को हिन्दू समाज रामनवमी का पर्व श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मना रहा है। अयोध्या में रामभक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। इस मौके पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने राम मंदिर पर आपत्तिजनक बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि पूजा-पाठ पाखंडी लोग करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि रामजन्मभूमि जैसे हजारों मंदिर हैं। उनके इस बयान की काफी आलोचना हो रही है।

रामगोपाल यादव बुधवार (17 अप्रैल 2024) को समाचार एजेंसी ANI से बात कर रहे थे। पत्रकार ने अयोध्या में मंदिर निर्माण के बाद प्रथम रामनवमी पर्व पर देश भर में हर्षोल्लास को लेकर सवाल किया। जवाब में रामगोपाल ने कहा, “रामनवमी तो हमेशा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती रही है। जो कुछ लोगों ने इसे पेटेंट करा लिया है, उनकी बपौती नहीं है रामनवमी। करोड़ों लोग हजारों वर्षों से इसे मनाते आ रहे हैं।”

अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर पर भी सपा नेता रामगोपाल यादव ने आपत्तिजनक बयान दिया है। उन्होंने कहा, “एक राम मंदिर नहीं, हजारों राम मंदिर इस देश में हैं। इसमें (राम मंदिर में) तो इन्होंने (मोदी सरकार ने) अधूरा प्राण प्रतिष्ठा करवाया है। भगवान राम उन्हें दंड दें।” रामगोपाल ने मंदिर निर्माण के दौरान कुछ साधु-संतों द्वारा उठाई गई आपत्तियों का भी जिक्र किया।

पत्रकार ने रामगोपाल यादव से सवाल किया कि क्या वो रामनवमी पर कोई पूजा-पाठ कर रहे हैं। इसके जवाब में उन्होंने कहा, “पहले होती रही हो, लेकिन मैंने तो कभी पूजा नहीं किया। मैं दिखावा नहीं करता। मैं पाखंडी नहीं हूँ। पाखंडी लोग ये सब करते हैं।” रामगोपाल ने कहा कि वे भगवान का नाम लेते हैं। उन्होंने खुद को असली भक्त बताया है।

सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव के इस बयान की खूब आलोचना हो रही है। दीपक शर्मा नाम के यूजर ने रामगोपाल यादव को चुनाव का इंतज़ार करने की नसीहत दी है। उन्होंने दावा किया है कि यादव समाज ही इस बार रामगोपाल यादव का विरोध करेगा। उन्होंने कहा, “इंतजार कर रामद्रोही, इंतजार कर।”

पत्रकार सुशांत सिन्हा ने रामगोपाल यादव से सवाल किया है कि रामनवमी में जो हिन्दू रामनवमी में पूजा कर रहे हैं, क्या वो सब पाखंडी हैं?

आशुतोष यादव अभिषेक ने रामगोपाल यादव के बयान को जहरीला करार दिया है। उन्होंने दावा किया है कि इस बार यादव समाज मुँह पर वोट की थप्पड़ मारकर जवाब देगा।

इन सभी के अलावा, X यूजर अजीत झा ने भी रामगोपाल के शब्दों पर आपत्ति जताई है। उन्होंने लिखा, “नाम रामगोपाल यादव। माता-पिता राम-कृष्ण की भक्ति में नाम रखा होगा। मगर सियासत के चक्कर में ये कह रहे हैं ‘पूजा करने वाले पाखंडी हैं’। सीधे-सीधे सनातन का अपमान नहीं तो क्या है? हिम्मत है तो नमाज पढ़ने या चर्च में जाने वालों को बारे में कुछ कह दें।”

मुलायम ने लगाई थी रोक;अब योगी राज में ज्ञानवापी में भी करिए पूजा-पाठ: कोर्ट ने व्यास तहखाने में दिया पूजा का अधिकार, कहा – 7 दिन में करो व्यवस्था

ज्ञानवापी ढाँचे में हिन्दुओं को पूजा-पाठ की मिली अनुमति
वाराणसी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बुधवार (31 जनवरी, 2024) को ‘अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमिटी’ को नोटिस जारी किया है। असल में हिन्दू पक्ष ने उस क्षेत्र के वैज्ञानिक सर्वे की माँग की थी, जिसे मुस्लिम वजूखाना बताते हैं लेकिन वहाँ शिवलिंग मिला था। इसी पर हाईकोर्ट ने वजूखाना से जवाब माँगा था। उधर ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में पूजा-पाठ की अनुमति हिन्दुओं को मिल गई है। वाराणसी की जिला अदालत ने ये फैसला सुनाया है।

जिला प्रशासन को आदेश दिया गया है कि बैरिकेडिंग लगाया जाए और और एक सप्ताह के भीतर पूजा-पाठ की व्यवस्था की जाए। ये तहखाना ढाँचे के नीचे है। मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद बताता है। अब यहाँ नियमित पूजा-अर्चना के लिए मार्ग प्रशस्त हो गया है। हिन्दू पक्ष ने इसे बड़ी जीत करार दिया है। बता दें कि नवंबर 1993 तक पूजा होती थी। मुलायम सिंह यादव की सरकार ने पूजा-पाठ पर रोक लगा दी थी। शैलेन्द्र कुमार पाठक ने इस संबंध में याचिका दाखिल की थी, जिस पर अब फैसला आया है।

वहीं मुस्लिम पक्ष इस मामले में ‘वर्शिप एक्ट’ का हवाला देते हुए कह रहा था कि पूजा-पाठ की अनुमति यहाँ नहीं दी जा सकती है। लेकिन, कोर्ट ने हिन्दू पक्ष की याचिका स्वीकार कर ली। 17 जनवरी को ही ‘व्यास तहखाने’ को जिला प्रशासन ने अपने नियंत्रण में ले लिया था। ASI ने यहाँ सर्वे किया था, साथ ही साफ़-सफाई भी की गई थी। इसे ‘व्यास तहखाना’ कहा जाता है, क्योंकि सोमनाथ व्यास नामक पुजारी और उनका परिवार यहाँ 1993 तक पूजा-अर्चना करता आ रहा था।

हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि जिला प्रशासन व्यवस्था करेगा, वहाँ पूजा-पाठ शुरू हो जाएगी। इस फैसले के बाद ‘हर-हर महादेव’ के नारे भी लगे। उन्होंने इस घटना की तुलना 1986 के उस आदेश से की, जब केएम पांडेय ने यहाँ का ताला खुलवाया था। उन्होंने कहा कि वजूखाने का सर्वे अगला लक्ष्य है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद लोगों में उम्मीद जगी है कि काशी विश्वनाथ में भी उन्हें जीत मिलेगी।