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तृषा कृष्णन और CM विजय पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में उदयनिधि स्टालिन गिरफ्तार, पहले भी महिलाओं पर दे चुके हैं विवादित बयान: सनातन को खत्म करने का भी देखते हैं सपना

                     तृषा कृष्णन और सीएम विजय पर अश्लील टिप्पणी कर फंसे उधयनिधि स्टालिन, गिरफ्तार
जब नेता महिला का सम्मान नहीं कर सकते फिर किस कीमत पर उनके वोट और उनके हित की बात करते हैं। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी द्वारा बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती के साथ गेस्ट हाउस कांड तमिल नाडु में जयललिता के साथ विधानसभा में शर्मनाक हरकत पर किस आधार पर महिलाएं इन पार्टियों में हैं? यह सोंचने की बात है।  

तमिलनाडु की राजनीति में विरोधी दलों से जुड़ी महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। इसी सिलसिले में DMK के नेता और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने 3 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की आलोचना करते हुए अभिनेत्री तृषा कृष्णन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की।

तृषा कृष्णन को निशाना बनाकर की गई इस मानहानिकारक टिप्पणी के मामले में मंगलवार (4 अगस्त 2026) को पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया।

3 अगस्त को कर्नाटक के साथ कावेरी जल बंटवारे के मुद्दे पर तंजावुर में आयोजित एक विरोध रैली को संबोधित करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने आरोप लगाया कि सीएम विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार कावेरी का पानी नहीं मिलने के मुद्दे पर चुप है और उसका पूरा ध्यान DMK नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर झूठे मामले दर्ज कराने पर है।

इसी दौरान रैली में मौजूद DMK कार्यकर्ताओं ने ‘तृषा, तृषा’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस पर उदयनिधि स्टालिन कुछ पल रुके, मुस्कुराए और एक ऐसी टिप्पणी की, जिसे कई लोगों ने आपत्तिजनक और दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी के तौर पर देखा।

तृषा कृष्णन का नाम लिए बिना उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “हमारे यहाँ पानी आए या न आए, वहाँ पानी जरूर पहुँचना चाहिए। उन्हें बस इसी की चिंता है।” इसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा, “मेरा मतलब कावेरी के पानी से था।”

सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया है, जिस पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और वैचारिक पृष्ठभूमि के लोगों ने प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों ने अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन को लेकर उदयनिधि स्टालिन की कथित दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी की आलोचना की है।

तृषा इन दिनों अभिनेता से राजनेता बने और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के साथ अपने कथित निजी संबंधों को लेकर भी चर्चा में हैं। उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी को लेकर तमिलनाडु की राजनीति भी गरमा गई है।

TVK विधायक रेवन्थ चरण ने इसे ‘घृणित और अस्वीकार्य’ बताते हुए कहा, “इसी वजह से तमिलनाडु की जनता ने आपको नकार दिया और आज आप जिस स्थिति में हैं, वहीं सीमित कर दिया। अरिवालयम के पहले से ही बेहद निम्न स्तर के बावजूद यह उससे भी नीचे की बात है।”

तमिलनाडु भाजपा ने भी विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की कथित टिप्पणी की कड़ी निंदा की। पार्टी ने इसे ‘घृणित, अश्लील, अभद्र और शर्मनाक’ करार देते हुए उनके बयान पर सवाल उठाए।

तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वह अपने बेटे उदयनिधि स्टालिन की एक महिला के खिलाफ अभद्र टिप्पणी पर मौन क्यों हैं। उन्होंने उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी की भी माँग की थी।

इधर सत्तारूढ़ TVK ने इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) को पत्र लिखकर उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। पार्टी का कहना है कि उनकी भाषा सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को वस्तु समझने और मौखिक उत्पीड़न (Verbal harassment) को सामान्य बनाती है तथा सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों से अपेक्षित मर्यादा को गंभीर रूप से ठेस पहुँचाती है।

TVK ने यह भी कहा कि इस तरह का आचरण सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के प्रति व्यवहार को लेकर एक ‘खतरनाक मिसाल’ कायम करता है। TVK ने राष्ट्रीय महिला आयोग से आग्रह किया है कि वह उदयनिधि स्टालिन से इस मामले में स्पष्टीकरण माँगे और उन्हें बिना शर्त सार्वजनिक माफी जारी करने का निर्देश दे।

साथ ही पार्टी ने माँग की है कि उनके खिलाफ सार्वजनिक अश्लीलता फैलाने और महिला की मर्यादा का कथित रूप से अपमान करने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाए।

राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधने के लिए महिलाओं को घसीटने के आरोपों को लेकर पहले भी विवादों में रहे हैं उदयनिधि स्टालिन

अभिनेत्री तृषा कृष्णन पर कथित तौर पर निशाना साधते हुए की गई दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी को लेकर उदयनिधि स्टालिन को भारी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। हालाँकि, राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से जुड़ी महिलाओं को निशाना बनाते हुए लैंगिक (सेक्सिस्ट) टिप्पणियाँ करने के आरोप पहले भी उन पर लग चुके हैं।

2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले, प्रचार के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने कहा था, “जब भी मैं अपने चुनावी भाषण में एडप्पडी सरकार का जिक्र करता हूँ, लोग मुझसे एडप्पडी नहीं, बल्कि ‘एडुपुडी’ (किसी के इशारों पर चलने वाला) कहने को कहते हैं। मैं पूछता हूँ कि एडुपुडी कौन है, तो लोग कहते हैं, मोदी का एडुपुडी। मेरी हाल की एक रैली में भीड़ से किसी ने कहा कि वह एडुपुडी नहीं, बल्कि ‘डेड बॉडी’ है, क्योंकि वह शशिकला के पैरों में गिर चुका है।”

इसी वर्ष जब TVK ने सरकार बनाई, तब उदयनिधि स्टालिन ने TVK प्रमुख जोसेफ विजय पर अपने राजनीतिक हमलों में उनकी पत्नी संगीता सोर्नालिंगम को भी घसीटा था। उन्होंने कहा था, “उनका (विजय का) ‘कुट्टी स्टोरी’ सुनाने वाला भाषण विधानसभा की गरिमा के पूरी तरह खिलाफ है। चेंगलपट्टू कोर्ट में अपने पति को तलाशती पत्नी की कहानी पूरे तमिलनाडु को पता है।”

मुख्यमंत्री विजय और उनकी पत्नी के बीच निजी विवाद को अपने राजनीतिक हमलों में घसीटने को लेकर उदयनिधि स्टालिन की उस समय कड़ी आलोचना हुई थी। और अब एक बार फिर उदयनिधि स्टालिन ने छोटे राजनीतिक लाभ के लिए तृषा कृष्णन और सीएम विजय के कथित निजी संबंधों को अपने राजनीतिक हमले का हिस्सा बनाया है।

उदयनिधि स्टालिन पिछले कई वर्षों में अलग-अलग कारणों से विवादों में रहे हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने सनातन धर्म की तुलना ‘डेंगू, मलेरिया’ से करते हुए इसके ‘उन्मूलन’ का आह्वान किया था। उस समय देशभर में उनके खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी डीएमके नेता को फटकार लगाई थी।

तमिलनाडु चुनाव से पहले घुसे भारत में, नकली डॉक्यूमेंट दिखाकर वोटिंग की: मदुरै एयरपोर्ट पर 25 विदेशी गिरफ्तार, जाँच एजेंसियाँ पड़ताल में जुटीं

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में फर्जी मतदान के आरोप में करीब 25 विदेशी नागरिक अरेस्ट (फोटो साभार: न्यूज 18)
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान फर्जी दस्तावेजों के जरिए वोट डालने का मामला उजागर हुआ है। पुलिस ने इस संबंध में अब तक करीब 25 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है।

पुलिस और इमिग्रेशन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में चेन्नई, मदुरै और अन्य हवाई अड्डों पर इन लोगों को उस समय पकड़ा गया, जब वे भारत छोड़कर विदेश जाने की तैयारी में थे। इन विदेशी नागरिकों की उँगलियों पर वोटिंग के बाद लगाई जाने वाली पक्की स्याही (Indelible ink) के निशान पाए गए, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।

जाँच एजेंसियों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए लोगों में अधिकांश श्रीलंकाई नागरिक हैं, जबकि कुछ ब्रिटेन और कनाडा के पासपोर्ट धारक भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, कई संदिग्ध चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद तमिलनाडु पहुँचे थे और मतदान के बाद कुछ दिनों तक राज्य में रुके रहे ताकि उनकी उँगलियों पर लगी स्याही मिट जाए।

अधिकारियों ने बताया कि कई विदेशी नागरिक अभी भी भारत में मौजूद हो सकते हैं और जाँच एजेंसियाँ उन सभी लोगों का डेटा खंगाल रही हैं, जो मतदान से पहले भारत आए और अब तक वापस नहीं लौटे। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।

चुनाव आयोग को सौंपी गई रिपोर्ट

 पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेज दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों की जाँच पहले भी सामने आ चुकी है। वर्ष 2025 में इमिग्रेशन अधिकारियों ने चुनाव आयोग से लगभग 100 विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाने का अनुरोध किया था।

जाँच के दौरान पाया गया था कि विदेशी नागरिकों के पास मतदाता पहचान पत्र (EPIC) मौजूद थे और उन्होंने गलत पते के आधार पर मतदान अधिकार हासिल कर लिए थे। इस वर्ष भी करीब 60 विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।

चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार केवल वही ‘ओवरसीज इलेक्टर’ मतदान कर सकता है, जिसने किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण न की हो। NRI मतदाता के तौर पर पंजीकरण कराने के लिए भारतीय नागरिकता बनाए रखना और मतदान के समय मूल भारतीय पासपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

TMC का विरोध पड़ा महँगा? पार्टी की गुंडागर्दी पर रील बनाने वाले इन्फ्लुएंसर की गिरफ्तारी पर विवाद

                                     शमिक अधिकारी (साभार: Instagram/yournonsane)
कोलकाता पुलिस ने 25 साल के सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर शमिक अधिकारी को यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया है। शमिक को ऑनलाइन ‘नॉनसेन’ के नाम से जाना जाता है। उन्हें गुरुवार (5 फरवरी 2026) को दमदम से पकड़ा गया। पहले उन्हें गलत तरीके से कैद करने, हमला करने और महिला की इज्जत से खिलवाड़ करने के आरोप में पकड़ा किया गया था, लेकिन बाद में 22 साल की पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने रेप का केस भी जोड़ दिया।

शमिक को शुक्रवार (6 फरवरी 2026) को कोर्ट में पेश किया गया और अब उन्हें 16 फरवरी 2026 तक पुलिस कस्टडी में रखा गया है। पुलिस के मुताबिक, महिला ने शिकायत की थी कि शमिक ने उसे 2 फरवरी 2026 की रात करीब साढ़े नौ बजे से अगले दिन शाम 5 बजे तक अपने बेहाला वाले घर में जबरन रोका रखा।

इस दौरान महिला का आरोप है कि उसे मारा-पीटा गया, धमकाया गया। उसने कहा कि शमिक ने उसे गलत तरीके से छुआ, कपड़े खींचे और फिर जबरन यौन हमला किया।

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि पीड़िता का मेडिको-लीगल टेस्ट एमआर बांगुर अस्पताल में हुआ। एक महिला पुलिस अधिकारी ने उसका बयान दर्ज किया और इसके बाद भारतीय न्याय संहिता की रेप वाली धारा FIR में जोड़ी गई। पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान मिले और वह काफी आघात में थी, इसलिए शिकायत करने में देरी हुई।

पुलिस ने आगे कहा कि शमिक ने पीड़िता को अश्लील फोटो भेजकर धमकाया था। जाँचकर्ताओं के मुताबिक टावर लोकेशन से पता चला कि शिकायत में बताए समय पर दोनों आरोपित और पीड़िता अपराध वाली जगह पर मौजूद थे।

शमिक की तरफ से कहा गया कि दोनों पुराने दोस्त हैं और लंबे समय से जानते हैं। उस रात गलतफहमी हुई थी, लेकिन कोई जबरदस्ती नहीं की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जाँच में कुछ बचा ही नहीं है तो पुलिस कस्टडी की क्या जरूरत है।

वायरल रील जिसने छेड़ दी राजनीतिक बहस

शमिक कोई आम इंफ्लुएंसर नहीं हैं। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 4.20 लाख और फेसबुक पर 4 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। लेकिन राजनीतिक सुर्खियों में तब आए जब उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट ‘@yournonsane’ पर 21 जनवरी को एक रील पोस्ट की। पश्चिम बंगाल में आने वाले चुनाव से सिर्फ दो महीने पहले की बात है।

यह रील वायरल हो गई, 30 लाख से ज्यादा व्यूज और 3.5 लाख से ज्यादा लाइक्स आए। इसमें शमिक ने टीएमसी सरकार पर तीखा हमला किया था। वीडियो में वे खुद को आम वोटर दिखाते हैं जो वोट डालने जा रहा है। वहाँ एक लोकल टीएमसी गुंडा वोटरों को सिर्फ सत्ताधारी पार्टी को वोट देने का दबाव डालता है और नहीं मानने पर धमकी देता है।

वीडियो में आगे राज्य की स्थिति दिखाने वाले फ्लैशबैक थे। इसमें 26 हजार सरकारी टीचर्स की नौकरी जाने और उसका भावनात्मक असर दिखाया गया। रात में अकेली चलती महिला को कुछ लोग पीछे चल रहे हैं।

रील में आरजी कर रेप-मर्डर केस का भी जिक्र था। उस केस में कोलकाता कोर्ट ने दोषी संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई और राज्य सरकार को पीड़िता के माता-पिता को 17 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया, हालाँकि पीड़िता के माता-पिता ने कहा कि उन्हें न्याय चाहिए, मुआवजा नहीं।

वीडियो ने सीधे सत्ताधारी सरकार को निशाना बनाया और चुनाव से ठीक पहले आया, इसलिए कई लोगों ने इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना। वायरल होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ आने लगीं।

TMC ने BJP से लिंक का किया दावा

रील वायरल होने के बाद कई टीएमसी लीडर्स और सपोर्टर्स ने दावा किया कि शमिक का बीजेपी से लिंक है। उनका कहना था कि वह सिर्फ कंटेंट क्रिएटर नहीं, राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।

TMC प्रवक्ता रिजू दत्ता ने सोशल मीडिया पर कड़ा बयान दिया और शमिक को ‘बीजेपी यूट्यूबर’ कहा। पोस्ट में उन्होंने कहा कि वही शख्स जो पश्चिम बंगाल सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा में नाकाम होने का आरोप लगा रहा था, अब खुद महिला की इज्जत से खिलवाड़ और मारपीट के केस में फंसा है।

दत्ता ने केस में दर्ज धाराओं का जिक्र किया और बताया कि पीड़िता ने करीब 12 घंटे कैद रखने, मारपीट और धमकी देने का आरोप लगाया है। एक विवादास्पद टिप्पणी में उन्होंने शमिक को बीजेपी आईटी सेल चीफ अमित मालवीय से जोड़ा और कहा कि महिलाओं का गलत इस्तेमाल करने वाले बीजेपी में शामिल हो जाते हैं।

अब टीएमसी की बात है कि यह सीधा-सादा क्रिमिनल मामला है और विपक्ष अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दे रहा है।

गिरफ्तारी पर उठे सवाल, झूठे मामले में फँसाने का शक

दूसरी तरफ बीजेपी सपोर्टर्स और कई इंफ्लुएंसर्स ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए हैं। कई लोगों ने इशारा किया कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई हो सकती है, खासकर क्योंकि शमिक की रील ने राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की थी।

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स तो यहाँ तक कह रहे हैं कि यौन उत्पीड़न की शिकायत झूठी बनाई गई है ताकि उन्हें चुप कराया जाए। उनका तर्क है कि वायरल वीडियो के ठीक बाद और चुनाव से पहले गिरफ्तारी हुई, जिससे शक पैदा होता है।

बीजेपी आईटी सेल चीफ अमित मालवीय ने ममता बनर्जी की सरकार पर कड़ा हमला बोला। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल ‘तानाशाही शासन’ बन गया है जहाँ आलोचकों को झूठे और दुर्भावनापूर्ण FIR से निशाना बनाया जाता है।

मालवीय ने लिखा, “यह टीएमसी का शासन मॉडल है: अभिव्यक्ति की आजादी को दबाओ, आलोचकों को डराओ, पुलिस का इस्तेमाल करो और सत्ता में बने रहने के लिए प्रतिष्ठा बर्बाद करो। लेकिन बंगाल देख रहा है। और बंगाल चुप नहीं रहेगा। बीजेपी हर उस शख्स के साथ खड़ी है जो ममता बनर्जी के शासन का शिकार बना है।”

उन्होंने आगे कहा, “पश्चिम बंगाल के लोगों के साथ मिलकर हम डर को हराएँगे, सत्ता के दुरुपयोग को बेनकाब करेंगे और लोकतंत्र बहाल करेंगे। यह न्याय नहीं है। यह राजनीतिक उत्पीड़न है। और इसका अंत होगा।”

साथी इंफ्लुएंसर्स ने किया शमिक का समर्थन

शमिक को कुछ साथी कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया यूजर्स का भी समर्थन मिला है। एक एक्स यूजर ने सवाल उठाया कि पश्चिम बंगाल में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बोलने वाले इंफ्लुएंसर्स के खिलाफ क्यों केस हो रहे हैं। उन्होंने पूछा कि ऐसे मामलों में सार्वजनिक आक्रोश क्यों नहीं होता।

समर्थकों का कहना है कि शासन और महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है और इसके लिए कानूनी परेशानी नहीं होनी चाहिए। हालाँकि दूसरे लोग कहते हैं कि क्रिमिनल आरोपों को गंभीरता से लेना चाहिए और राजनीतिक बहस से अलग जाँच होनी चाहिए।

फिलहाल शमिक अधिकारी ने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। आने वाले दिनों में कोर्ट की कार्यवाही और जाँच के नतीजे इस मुद्दे में बड़ी भूमिका निभाएँगे।

केस एक अपराध की शिकायत से शुरू हुआ था, लेकिन अब यह राजनीतिक बहस बन गया है जो आरोपी पर लगे आरोपों के साथ-साथ अभिव्यक्ति की आजादी, राजनीतिक दुश्मनी और चुनाव के समय सोशल मीडिया की भूमिका पर सवाल उठा रहा है।

वेनेजुएला के ऊर्जा और तेल भंडारों का नियंत्रण होगा अमेरिका के पास: राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने किया ऐलान, बोले- अनिश्चितकाल तक यहाँ करेंगे शासन

    मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप का बड़ा ऐलान: अनिश्चितकाल तक अमेरिका चलाएगा वेनेजुएला (साभार: आज तक, न्यूज 18)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार (3 जनवरी 2026) को एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका अनिश्चितकाल तक वेनेजुएला को चलाएगा। उन्होंने सत्ता हस्तांतरण को लेकर कोई समय-सीमा नहीं बताई और साफ किया कि जब तक अमेरिका को सुरक्षित, सही और उचित नहीं लगेगा, तब तक वह नियंत्रण अपने हाथ में रखेगा। फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने इस पूरे सैन्य अभियान और आगे की रणनीति पर विस्तार से बात की।

राष्ट्रपति मादुरो गिरफ्तारी के बाद सामने आई फोटो में दिख रहा है कि मादुरो की आँखों को काली शील्ड से ढका हुआ है। उनके हाथ बँधे हुए हैं और हाथ में एक पानी की बोतल पकड़ाई गई है, जो मादुरो ठीक से पकड़ भी नहीं पा रहे हैं। तस्वीर में वे ग्रे रंग का ट्रैकसूट पहने हुए हैं।

ट्रंप का ऐलान: सुरक्षित बदलाव तक अमेरिका का नियंत्रण

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला में तब तक रहेगा, जब तक वहाँ सही और सुरक्षित सत्ता परिवर्तन नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि किसी और को सत्ता देकर फिर वही हालात पैदा हों, जो बीते वर्षों में रहे। ट्रंप के मुताबिक, यह फैसला वेनेजुएला की जनता के हित में लिया गया है, ताकि अगला नेता देश के भले को ध्यान में रखे। हालाँकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह व्यवस्था कितने समय तक चलेगी।

 ट्रंप ने यह भी घोषणा की कि वेनेजुएला के ऊर्जा और तेल के भंडारों का नियंत्रण अब अमेरिकी तेल कंपनियों को दिया जाएगा। उनका दावा है कि अमेरिका की सबसे बड़ी तेल कंपनियाँ अरबों डॉलर का निवेश करेंगी, खराब हो चुके तेल के बुनियादी ढाँचों की मरम्मत करेंगी और देश के लिए कमाई शुरू करेंगी। ट्रंप ने कहा कि इससे वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा, “हमारी बहुत बड़ी अमेरिकी तेल कंपनियाँ, जो दुनिया में कहीं भी सबसे बड़ी हैं, वहाँ जाएँगी, अरबों डॉलर खर्च करेंगी, बुरी तरह से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे, तेल के बुनियादी ढाँचे की मरम्मत करेंगी और देश के लिए पैसा कमाना शुरू करेंगी।”

मादुरो की गिरफ्तारी का सैन्य ऑपरेशन

ट्रंप ने मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर अमेरिकी सेना की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन इतना प्रभावी था कि कराकस के कई हिस्सों में बिजली गुल हो गई। उन्होंने दावा किया कि इस मिशन में अमेरिका के किसी भी सैनिक की मौत नहीं हुई और न ही कोई सैन्य उपकरण खोया गया।

इस अभियान में अमेरिकी विमान और हेलिकॉप्टर समेत बड़े पैमाने पर सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा, “अंधेरा था, कराकस की बत्तियाँ हमारे विशेष कौशल के कारण लगभग पूरी तरह से बंद थीं। अँधेरा था और स्थिति बेहद खतरनाक थी।”

मादुरो पर चलेगा केस

अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी ने कहा है कि मादुरो और उनकी पत्नी पर नारको-टेररिज्म, कोकेन जैसे ड्रग्स की तस्करी की साजिश और हथियारों से जुड़े आरोप हैं। 2020 से चले आ रहे इंडिक्टमेंट को अपडेट कर नया अभियोग दायर किया गया है। जहाँ वे मैनहैटन की एक संघीय कोर्ट में आरोपों का सामना करेंगे।

बता दें कि वेनेजुएला की सुप्रीम कोर्ट ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त कर दिया है। दूसरी ओर अमेरिका में भी इस कार्रवाई पर सियासी घमासान शुरू हो गया है। उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने ट्रंप के कदम को गैरकानूनी और अविवेकपूर्ण बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई तेल और सत्ता के लिए है, न कि लोकतंत्र या कानून के लिए।

मिर्जापुर : क्रिसमस पर बड़े पैमाने पर 2000+ को ईसाई बनाने का खेल धर्मांतरण कराने वाला मिशनरी गिरोह का खेल फेल हुआ, 8 महिला-पादरी समेत 11 गिरफ्तार

ईसाई धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़ (फोटो साभार: AI GROK)
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के देहात इलाके में दो साल से चल रहा एक सीक्रेट गेम का खुलासा हो गया। यहाँ के खरहरा गाँव के छोटे से चर्च में हिंदू परिवारों को ईसाई बनाने का काम चल रहा था। लेकिन स्थानीय युवक की समझदारी के चलते मिशनरी गैंग का पर्दाफाश हो गया।

मिर्जापुर में रविवार (14 दिसंबर 2025) को हुई पुलिस छापेमारी में चर्च के पादरी भोलानाथ पटेल समेत 11 लोग गिरफ्तार हुए हैं। ऑपइंडिया के पास इस पूरे मामले की FIR की कॉपी मौजूद है। जिसमें इस गंदे खेल के बारे में विस्तार से जानकारी दर्ज है।

सूत्रों के मुताबिक, 25 दिसंबर को क्रिसमस पर बड़े पैमाने पर धर्मांतरण की साजिश रची जा रही थी। लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह सब कैसे शुरू हुआ? दो सालों में सैकड़ों परिवार क्यों फँसते चले गए? इस ग्राउंड रिपोर्ट में मिशनरी गिरोह के कारनामों को उजागर किया गया है।

किसान की सतर्कता से खुला धर्मांतरण का गंदा खेल

मिर्जापुर के इस इलाके में गंगा की लहरें विंध्याचल की पहाड़ियों से टकराती हैं। इलाके में गरीबी और बेरोजगारी फैली है। छोटे-छोटे गांवों में किसान, मजदूर और दिहाड़ी मजूर दिन-रात गुजारते हैं। यहीं के कुरकुठिया गाँव के रहने वाले आनंद दुबे (35 वर्ष) एक साधारण किसान हैं। उनके दो बच्चे हैं और पत्नी लंबे समय से बीमार है, जिसकी वजह से घर का खर्चा मुश्किल से चलता है।

आनंद ने मिशनरियों के खेल को बताते हुए कहा, “साहब, एक हफ्ते पहले एक आदमी आया था। नाम था भोलानाथ पटेल, खुद को पादरी बताता था। बोला, ‘भाई, तुम्हारी परेशानियाँ खत्म हो जाएँगी। जीसस भगवान के आश्रय में आ जाओ। पैसे देंगे, बच्चों की फ्री पढ़ाई कराएँगे, बीवी का इलाज मुफ्त में होगा। शादी-ब्याह में भी मदद करेंगे।’ मैंने सोचा, गरीब आदमी हूँ, क्या बिगड़ जाएगा। लेकिन जब रविवार को चर्च बुलाया, तो वहाँ का नजारा देखकर रोंगटे खड़े हो गए।”

2023 से जारी है खरहरा चर्च में धर्मांतरण का खेल

आनंद की यह कहानी कोई पहली नहीं है। दो साल पहले साल 2023 के आखिर से खरहरा चर्च में अनगिनत लोगों का धर्मांतरण कराया जा चुका है। बहुत सारे लोग लल्लू से जोसेफ जैसे नाम वाले हो चुके हैं। दिखने में खरहरा गाँव का चर्च पुराना लगता है, लेकिन अंदर से काफी सजा-धजा है। यहाँ आसपास के गाँवों कुरकुठिया, बढ़ौली, लेढ़ू, जसोहर पहाड़ी से लोग आते रहते हैं। किसी की तबियत ठीक नहीं रहती, तो कोई आर्थिक रूप से टूटा हुआ है और इन सबका फायदा उठाते हैं धर्मांतरण गिरोह, जो लोगों को छल-कपट से ईसाई बनाते हैं।
एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर ऑपइंडिया से कहा, “बहू की तबीयत खराब थी। डॉक्टरों ने कहा-ऑपरेशन के 50 हजार लगेंगे। पादरी साहब आए, बोले ‘चिंता मत करो, जीसस सब ठीक कर देंगे। बस, प्रार्थना में शामिल हो जाओ।’ हम गए, पानी छिड़क दिया, नाम बदल दिया। पैसा मिला भी लेकिन अब लगता है धोखा हुआ है।” उन्होंने कहा कि बेटे ने बताया कि वो घर वापसी भी नहीं कर सकते, क्योंकि पादरी और उनके लोगों ने ईसाई बनाते समय उनका वीडियो-फोटो लिया हुआ है।

पादरी भोलानाथ पटेल संभालता है धर्मांतरण का खेल

मिर्जापुर के इस छोटे से गाँव में धर्मांतरण का पूरा खेल संभालता है पादरी भोलानाथ पटेल। खुद मूल रूप से गाजीपुर जिले के रेवतीपुर थाना इलाके में आने वाले तिवला गाँव का है। वो रहता भी पहले लखनऊ में था, जहाँ वो सेंट जीसस स्कूल में पढ़ाता था। टीचर थे।
पुलिस ने जब भोलानाथ पटेल और उसकी पत्नी को गिरफ्तार किया, तो उसने खुद के ईसाई बनने की कहानी बताई। भोलानाथ ने बताया, “साल 2008 में मुझे किडनी की गंभीर बीमारी हुई थी। डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था, लेकिन ईसाई प्रार्थना सभा में शामिल होने के बाद वे ‘चमत्कारिक’ तरीके से ठीक हो गए।”
भोलानाथ (पुलिस पूछताछ के दौरान) ने बताया, “मैंने जीसस का शुक्रिया अदा किया। उसी ने मुझे नई जिंदगी दी। तब से मैंने फैसला किया, दूसरों को भी यह रास्ता दिखाऊँगा।” इसके बाद भोलानाथ को लखनऊ के मिशनरी कार्यालय से खरहरा चर्च भेजा गया। यहाँ वो अपनी पत्नी माया पटेल के साथ रहने लगा। बीवी माया महिलाओं को धर्मांतरण के जाल में फँसाती, तो खुद भोला पुरुषों को।

सामाजिक बहिष्कार के शिकार हो चुके हैं ईसाई बने लोग

भोलानाथ के मुताबिक, “हम कोई जबरदस्ती नहीं करते। लोग खुद आते हैं। जीसस की कृपा से उनकी जिंदगी बदल जाती है।” लेकिन ग्रामीणों का कहना अलग है। विजय (नाम-परिवर्तित) ने कहा, “मैंने पहले धर्मांतरण किया था। शुरु में ये अच्छा लगता था। पैसे भी मिले, नौकरी भी लगी। लेकिन अब लगता है, हमारी पहचान ही छीन ली गई। गाँव वाले ताने मारते हैं।”
14 दिसंबर 2025 को दोपहर करीब 12:45 बजे आनंद दुबे को चर्च बुलाया गया। वहाँ 35-40 ग्रामीण थे, ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर। पादरी भोलानाथ ने कहा, “आज तुम जीसस भगवान के आश्रय में आओगे। सारी तकलीफें खत्म हो जाएँगी। जो ना मानेगा, उसके साथ बुरा होगा।”
पादरी ने आनंद पर पवित्र पानी छिड़का, नाम बदलकर ‘जोसेफ आनंद’ कर दिया। फिर ‘पवित्र डुबकी’ की रस्म शुरू की, लेकिन आनंद हल्ला मचाकर भाग निकले। सीधे थाने पहुँचे और तहरीर दी।
शिकायत पाने के बाद सक्रिय हुई पुलिस ने तुरंत छापेमारी की और भोलानाथ, माया, कृष्णकांत तिवारी, अंगनू प्रसाद, फूलपत्ती, निशा देवी, सुशीला देवी, हीरावती देवी, रेनू, लक्ष्मी और साधना समेत को 11 को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को मौके से चार बाइबल, 10 कॉपी-किताबें, तीन स्मार्टफोन और एक की-पैड फोन मिले। लोगों के वीडियो और फोटो थे, जो धर्मांतरण की रस्मों के थे। इस मामले में पुलिस ने उत्तर प्रदेश धार्मिक विधि (संशोधन) अधिनियम 2021 की धारा 3 और 5(1) के तहत मामला दर्ज किया है।
ऑपइंडिया के पास उपलब्ध एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, तहरीर में आनंद दुबे ने लिखा,”मेरी पत्नी को पुरानी बीमारी है। एक सप्ताह पूर्व आरोपी भोलानाथ पटेल उर्फ पादरी जीसस चर्च खरहरा आकर मेरे घर पर आया और बोला कि यदि आप ईसाई धर्म अपना लेंगे तो आर्थिक लाभ, बच्चों की फ्री शिक्षा, मेडिकल सुविधा आदि प्रदान की जाएगी। मैंने सहमति जताई। आज (14 दिसंबर 2025) को दोपहर लगभग 12:45 बजे मुझे चर्च बुलाया। वहाँ 35-40 ग्रामीण उपस्थित थे।”
                                                                 एफआईआर की कॉपी
आनंद ने आगे लिखा है, “आरोपित भोलानाथ पटेल, माया पटेल, कृष्णकांत तिवारी, अंगनू प्रसाद, निशा देवी, सुशीला देवी, हीरावती देवी, रेनू, लक्ष्मी, साधना और फूलपत्ती मौजूद थे। उन्होंने कहा कि जीसस भगवान के आश्रय में आ जाओ, सारी पीड़ाएँ समाप्त हो जाएँगी। ना मानने पर दुर्भाग्य आएगा। उन्होंने मेरे ऊपर पवित्र जल छिड़का, नाम ‘जोसेफ आनंद’ रखा और पवित्र स्नान कराने का प्रयास किया। मैंने विरोध किया और भाग आया। यह अवैध धर्मांतरण है।”
                                                                    एफआईआर की कॉपी

प्रशासन कर रहा कार्रवाई, पूछताछ जारी

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा ने बताया, “धर्म परिवर्तन के काम में लगे 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी लोगों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करा रहे थे। उनके पास से मजहबी पुस्तकें और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। खुफिया सूचना थी कि 25 दिसंबर को बड़े स्तर पर धर्मांतरण होने वाला था। जाँच जारी है।”
देहात कोतवाल अमित मिश्रा ने खुलासा किया, “खरहरा चर्च में लगभग दो हजार लोगों का धर्मांतरण कराने की साजिश थी। स्थानीय और आसपास के गाँवों के भोले-भाले लोग निशाना बनाए जा रहे थे। पादरी भोलानाथ लखनऊ से फंडिंग लेता था। हम सख्ती से कार्रवाई करेंगे।”

साल 2023 से धर्मांतरण के 15 केस आ चुके हैं सामने

बीते 2 सालों में मिर्जापुर में ईसाई मिशनरी की सक्रियता ने स्थानीय प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। 2023 से अब तक कम से कम 15 मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें अवैध धर्मांतरण के आरोप लगे हैं। इनमें से 11 मामले युवतियों को बहला-फुसलाकर भगाने, फिर धर्म परिवर्तन कर शादी कराने के हैं। बाकी चार बड़े रैकेट से जुड़े हैं।
उदाहरण के तौर पर, विंध्याचल थाने में एक केस दर्ज हुआ, जिसमें भुजवा चौकी के विजय एम को गिरफ्तार किया गया। अहरौरा थाने में 30 सितंबर 2025 को देव सहायम डेनियर समेत पाँच गिरफ्तार हुए। लालगंज पुलिस ने जेम्स उर्फ रामदीन उर्फ राजू और उनकी पत्नी सरिता देवी को पकड़ा। इन मामलों में प्रलोभन का पैटर्न एक जैसा रहा- पैसे, नौकरी, शिक्षा।
इन 15 मामलों ने न सिर्फ परिवारों को तोड़ा है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी प्रभावित किया है। ग्रामीणों में डर का माहौल है। एक सामाजिक कार्यकर्ता, बजरंग दल के शांतनु तिवारी ने कहा, “ये मिशनरी गरीबी का फायदा उठाते हैं। हिंदू समाज जागे, तो ये रुकेंगे।” खरहरा की यह घटना एक चेतावनी है। गरीबों के सपनों पर डाका डालने वाले इस खेल को रोकना होगा, वरना और कितने आनंद दुबे फँसेंगे?

रूबिया अपहरण कांड : 35 साल बाद शफत अहमद को CBI ने दबोचा, आतंकी यासीन मलिक का था मददगार


केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने 01 दिसंबर 2025 को 1989 के रूबिया सईद अपहरण कांड में नई गिरफ्तारी की है। CBI ने 35 साल बाद इस केस में श्रीनगर के हवाल इलाके से शफत अहमद शुंगलू को धर दबोचा। पहले शुंगलू को निशात पुलिस स्टेशन ले जाया गया, फिर सीबीआई (CBI) ने हिरासत में ले लिया। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ से कई राज खुल सकते हैं।

उस समय यह भी चर्चा थी कि यह तथाकथित अपहरण है। यह सिर्फ आतंकियों को छुड़ाने के लिए ड्रामा था। दादी उसके साथ रह रही है खाना घर से जा रहा है फिर अपहरण कैसा? और इसका किसी ओर से खंडन करने की बजाए चुप्पी साध ली गयी थी। असली कहानी अब आएगी सामने। 

देखा जाए तो अपहरण हो या प्लेन हाइजेक इसकी जन्मदाता कांग्रेस ही है। मुफ़्ती मोहम्मद सईद जनता पार्टी से पहले किस पार्टी में था कांग्रेस में। दूसरे, इंदिरा गाँधी को जेल से छुड़ाने के लिए प्लेन हाइजेक किसने करवाया संजय गाँधी ने, संजय गाँधी किस पार्टी में था कांग्रेस। फिर भी महामूर्ख कहते है कांग्रेस अच्छी पार्टी है।    

रूबिया अपहरण केस क्या था, जिसने हिला दिया था पूरा देश

शफत अहमद शुंगलू की ताजा गिरफ्तारी रूबिया सईद अपहरण कांड की जाँच को नई जान दे रही है, जो कश्मीर के आतंकवाद के इतिहास का एक काला अध्याय है। 8 दिसंबर 1989 को तब के गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया को जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के आतंकियों ने अगवा कर लिया था।

लाल डीड अस्पताल में डॉक्टर रूबिया बस से घर लौट रही थीं जब बंदूक की नोक पर उन्हें किडनैप कर लिया गया। यह खबर दिल्ली पहुँचते ही हड़कंप मच गया। पूरे देश में सन्नाटा छा गया, क्योंकि यह पहली बार था जब आतंकी केंद्र सरकार के मंत्री के घर तक सेंध लगा बैठे।

अपहरण के पीछे साफ मकसद था- जेल में बंद अपने साथियों को रिहा कराना। आतंकियों ने शर्त रखी: रूबिया की जान चाहिए तो पाँच खूँखार सदस्यों को छोड़ो। सरकार मुश्किल में फँस गई। एक तरफ मंत्री की बेटी की जिंदगी, दूसरी तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा। कई दिनों तक पर्दे के पीछे बातचीत चली।

आखिरकार 13 दिसंबर को वीपी सिंह सरकार झुक गई। पाँच आतंकियों को रिहा किया गया, बदले में रूबिया घर लौट आईं। लेकिन इस सौदे ने कश्मीर का चेहरा हमेशा के लिए बदल दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी घटना ने आतंकियों के हौसले बुलंद कर दिए।

यासीन मलिक था अपहरण केस का मास्टरमाइंड, खुद रूबिया ने की थी पहचान

इस सौदे के केंद्र में था जेकेएलएफ का चीफ यासीन मलिक। मलिक पर अपहरण का मास्टरमाइंड होने का आरोप है। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, दिसंबर 1989 के पहले हफ्ते में मलिक और उसके साथियों ने साजिश रची। रूबिया को निशाना बनाकर सरकार को ब्लैकमेल करने का प्लान था।

मलिक ने खुद को अपहरण की योजना का सूत्रधार बताया। 2022 में रूबिया ने टाडा कोर्ट में मलिक समेत चार आरोपितों की पहचान की। उन्होंने कहा, “यही वो लोग थे जिन्होंने मुझे अगवा किया।” रूबिया का यह बयान केस को मजबूत करने वाला साबित हुआ। “

यासीन मलिक की भूमिका सिर्फ अपहरण तक सीमित नहीं थी। वह जेकेएलएफ का चेहरा था, जो पाकिस्तान समर्थित आतंक को कश्मीर में फैला रहा था। मलिक ने अपहरण को एक राजनीतिक हथियार बनाया। रिहाई के बाद रिहा हुए आतंकी जैसे अली मोहम्मद मीर, मोहम्मद यासिन फतेह और इकबाल अहमद गंदरू ने जेकेएलएफ को नई ताकत दी। मलिक ने इन्हें हथियारों से लैस किया और हमलों की साजिशें रचीं।

मलिक की गिरफ्तारी के बाद दोबारा खुली फाइल

साल 2019 में मलिक की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने पुरानी फाइलें खोलीं। जनवरी 2024 में मलिक समेत 10 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। इसमें अपहरण, साजिश और बंधक बनाने के आरोप हैं। अब उम्रकैद की सजा काट रहे आतंकी मलिक ने कभी अपराध नहीं माना, लेकिन गवाहों के बयानों ने उसे आखिरकार न्याय के कटघरे में खड़ा कर दिया।

रूबिया अपहरण केस के बाद कश्मीर में हिंदुओं पर हुआ जुल्म

इस अपहरण ने कश्मीर में आतंकवाद को तेजी से बढ़ावा दिया। पहले कश्मीर में अलगाववाद था, लेकिन 1989 के बाद यह हिंसा का सैलाब बन गया। रिहा हुए आतंकियों ने नई भर्तियाँ कीं, हथियारों का जखीरा बढ़ाया। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस सौदे ने आतंकियों को संदेश दिया- सरकार झुक सकती है। नतीजा? 1990 में कश्मीरी पंडितों का पलायन शुरू हो गया।

जेकेएलएफ ने हिंदू परिवारों पर हमले किए, हजारों घर जलाए। मलिक पर कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का भी आरोप है। सरकार ने 2019 में जेकेएलएफ को आतंकी संगठन घोषित किया। गृह मंत्रालय ने कहा, “यह संगठन 1989 के पंडित जेनोसाइड, आईएएफ अधिकारियों की हत्या और रूबिया अपहरण के लिए जिम्मेदार है।”

कश्मीर में आई अपहरण की बाढ़, हर तरफ आतंकी ही आतंकी

अपहरण के बाद किडनैपिंग की होड़ लग गई। 1991 में आईएएस अधिकारी ए.के. भट्टाचार्य का बेटा अपहरण हुआ। 1992 में वीसी चिल्टन का बेटा। ये सभी जेकेएलएफ की साजिशें थीं। मलिक ने इनसे फंडिंग और हथियार जुटाए। कश्मीर घाटी में ग्रेनेड हमले, सड़क किनारे बम विस्फोट आम हो गए। 1989 से 1990 के बीच आतंकी घटनाएं दोगुनी हो गईं।

पीआईबी के अनुसार, 1989 में 200 से ज्यादा हमले हुए, जो 1990 में 1000 पार कर गए। मलिक की रणनीति थी- हाई-प्रोफाइल टारगेट चुनो, सरकार को मजबूर करो। इसने अलगाववाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाकर पाकिस्तान को मजबूत किया।

कश्मीर में आतंकवाद के बढ़ने की वजह सिर्फ अपहरण नहीं, बल्कि मलिक जैसी साजिशें थीं। 1989 के बाद जेकेएलएफ ने आईएएफ के चार अधिकारियों की हत्या की। मलिक पर यह केस भी चल रहा है। एनआईए ने 2019 में मलिक को टेरर फंडिंग में उम्रकैद दी। ओपन मैगजीन के अनुसार, मलिक ने अपहरण से कश्मीर को ‘कॉन्सपिरेटर’ बना दिया।

इस अपहरण कांड के बाद बढ़ा था कश्मीर में आतंकवाद

सीबीआई की यह कार्रवाई दिखाती है कि कानून कभी सोता नहीं। शुंगलू की पूछताछ से बाकी फरार जैसे अली मोहम्मद मीर तक पहुँच बन सकती है। मलिक की साजिश ने कश्मीर को आग में झोंक दिया, लेकिन अब न्याय की बारी है। कश्मीर के इतिहासकार कहते हैं कि अपहरण ने ‘अलगाववाद से आतंकवाद’ का रास्ता खोला। 1990 में 1 लाख पंडित बेघर हुए। जेकेएलएफ ने 1000 से ज्यादा हमले किए। मलिक ने पाकिस्तान से ट्रेनिंग ली, हथियार मँगवाए।

बहरहाल, ताजा गिरफ्तारी से केस में नया मोड़ आ गया है। शफत अहमद शुंगलू पर अपहरण में सहयोग का आरोप है। एक चश्मदीद गवाह ने कहा, “मैंने 1989 के बाद सोपोर में शुंगलू को देखा।” कुछ आरोपित धारा 164 के तहत जुर्म कबूल कर चुके हैं। वहीं, सीबीआई इस केस को टाडा कोर्ट में चला रही है। जिसमें जनवरी 2021 में कोर्ट ने मलिक समेत 10 के खिलाफ आरोप तय किए थे। अब अगली सुनवाई में शुंगलू की भूमिका खुल सकती है।

मोकामा हिंसा मामले में देर रात अनंत सिंह गिरफ्तार, पटना पुलिस एक्शन में आई: EC ने अधिकारियों का किया तबादला, कई सस्पेंड

                                  जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह गिरफ्तार ( फोटो साभार-it)
बंगाल, उत्तर प्रदेश, केरल और बिहार ऐसे राज्य हैं जिनमे माफिया और दबंगों का बोलबाला रहा है। उत्तर प्रदेश में तो योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद से स्थिति काफी हद तक काबू में आ गयी है। लेकिन बंगाल और बिहार में जब तक योगी की तरह राज्य सरकारें सख्त नहीं होंगी दबंगों का बोलबाला ख़त्म नहीं होगा। बंगाल में पहले वामपथियों के संरक्षण में दबंग फलफूल रहे थे और अब ममता बनर्जी की छत्रसाया में। 

बिहार में इतने सालों से नितीश कुमार मुख्यमंत्री हैं क्यों नहीं दबंगों पर योगी की तरह कार्यवाही की? फिर कहा जाता है कि नितीश के सुशासन में बिहार विकास कर रहा है। लेकिन कोई पार्टी ऐसी नहीं जिसने दबंगों को चल रहे विधानसभा चुनाव में टिकट न दिया हो। जब अपने आपको ईमानदार का प्रमाण लिए फिर पार्टी ही अपराधियों को टिकट देगी अपराध ख़त्म नहीं हो सकता। फिर चुनाव आयोग अपराधियों(चाहे जमानत पर हो) के नामांकन क्यों स्वीकार करती है? जेलों में बंद अपराधी चुनाव लड़ते हैं, क्यों?      

बिहार के मोकामा में चुनाव प्रचार के दौरान जन सुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या के सिलसिले में जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह को शनिवार (1 नवंबर 2025) देर रात गिरफ्तार कर लिया। उन्हें पूछताछ के लिए पटना लाया गया है।

पटना पुलिस ने मोकामा से जदयू उम्मीदवार और पूर्व विधायक अनंत सिंह को जन सुराज कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की गुरुवार को हुई हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया है।

पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के नेतृत्व में पुलिस शनिवार रात करीब 11.10 बजे बाढ़ पहुँची। यहाँ के कारगिल बाजार में अनंत सिंह अपने समर्थकों के साथ मौजूद थे।

पुलिस की टीम ने उनसे बातचीत की और देर रात हिरासत में लेकर बाढ़ उनके घर पहुँची। पूछताछ के बाद अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया और देर रात ही पटना लाया गया।

जनसुराज समर्थक दुलारचंद की हत्या को लेकर दायर एफआईआर में अनंत सिंह का भी नाम है। वह पुलिस की जाँच के घेरे में हैं।

पुलिस ने मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम को भी इस मामले में गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि ये लोग दुलारचंद यादव की हत्या के समय घटनास्थल पर मौजूद थे। तीनों को जल्द ही मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।

पटना के पास मोकामा में चुनाव प्रचार के दौरान फेफड़े में चोट और कई पसलियों में फ्रैक्चर के कारण दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। गुरुवार को जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए प्रचार करते समय उन पर हमला करने का आरोप लगा था।

पटना के डीएम त्यागराजन देर रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना की जानकारी दी। इस दौरान पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने कहा, “पुलिस ने दुलार चंद यादव की हत्या के सिलसिले में तीन लोगों – अनंत सिंह, मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम को गिरफ़्तार किया है।”

 उन्होंने आगे कहा, “पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और शुरुआती जाँच से पता चलता है कि यह हत्या का मामला है।”

एसएसपी ने आगे कहा कि शुरुआती जाँच में दो प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों के समर्थकों के बीच झड़प का पता चला है, जिसके बाद यादव का शव बरामद किया गया। दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज की गई और जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि घटना के समय अनंत सिंह अपने साथियों के साथ मौके पर मौजूद थे। अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी पर भी आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का भी आरोप है।

अनंत सिंह का नाम एफआईआर में दर्ज

पुलिस ने घटना से संबंधित 3 एफआईआर दर्ज की थी और दो लोगों को गिरफ्तार किया था। दुलारचंद यादव के पोते द्वारा दर्ज कराई गई एक एफआईआर में अनंत सिंह समेत 5 लोगों के नाम हैं। दूसरी एफआईआर अनंत सिंह गुट द्वारा दर्ज की गई थी, जबकि तीसरी एफआईआर पुलिस ने अपनी जाँच के आधार पर दर्ज की थी।

सिंह ने आरोप लगाया था कि यह हमला पूर्व सांसद सूरजभान सिंह ने कराया है। वह आरजेडी उम्मीदवार वीणा देवी के पति हैं।

सिंह ने दावा किया, “हम लोगों से मिल रहे थे और वोट माँग रहे थे, तभी एक अन्य उम्मीदवार के समर्थकों ने नारे लगाने शुरू कर दिए। मैंने अपने समर्थकों से कहा कि वे जवाब न दें और आगे बढ़ गए। सूरजभान के लोगों ने हमारे वाहनों पर हमला किया। दुलार चंद ने सबसे पहले हाथ उठाया। यह पूरा खेल सूरजभान सिंह द्वारा खेला जा रहा है।”

चुनाव आयोग ने लिया एक्शन

चुनाव आयोग ने मोकामा में यादव की हत्या से जुड़ी हिंसा को कड़ा रुख अपनाते हुए इस मामले में बाढ़ के SDO चंदन कुमार को हटा दिया है। इनकी जगह पर 2022 बैच के IAS अधिकारी आशीष कुमार को भेजा गया है। इसी तरह बाढ़ के SDPO-1 राकेश कुमार को भी हटा दिया है। इनकी जगह CID के डीएसपी आनंद कुमार सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा बाढ़-2 के अनुमंडल पुलिस अधिकारी अभिषेक सिंह को भी निलंबित करने का निर्देश दिया है।

शनिवार(नवम्बर 1) को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को बताया, “आयोग ने निर्देश दिया है कि पटना के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) विक्रम सिहाग का भी तबादला किया जा सकता है। इसलिए, उनके स्थान पर किसी अन्य अधिकारी की नियुक्ति के लिए अधिकारियों का एक पैनल तत्काल भेजा जाए।”

अधिकारियों को चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

बिहार में 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा, जबकि मतों की गिनती 14 नवंबर को होगी।

कौन है चीन के लिए जासूसी करने वाला US स्टेट डिपार्टमेंट का वरिष्ठ सलाहकार अश्ले टेलिस? हजारों दस्तावेजों के साथ पकड़ा गया, सीक्रेट पेपर्स की करता था चोरी

                                        अश्ले टेलिस (फोटो साभार: Fox News, iStock))
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के सीनियर सलाहकार अश्ले टेलिस पर सुरक्षित सरकारी जगहों से क्लासिफाइड दस्तावेज चुपके से निकालने का आरोप लगा है। भारतीय मूल का टेलिस एक मशहूर फॉरेन पॉलिसी एक्सपर्ट और डिफेंस स्ट्रैटेजिस्ट है। साल 2023 से ही उसके चीनी अधिकारियों से मीटिंग के आरोप भी हैं।

वर्जीनिया के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के यूएस अटॉर्नी ऑफिस ने मंगलवार (14 अक्टूबर 2025) को बताया कि अश्ले टेलिस को ‘नेशनल डिफेंस इंफॉर्मेशन को गैरकानूनी तरीके से रखने’ के चार्ज पर गिरफ्तार किया गया है। टेलिस को 11 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया, जब यूएस अथॉरिटीज ने उसके वर्जीनिया के वियना में घर की तलाशी ली।

वर्जीनिया के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के यूएस अटॉर्नी लिंडसे हेलिगन ने एक स्टेटमेंट में कहा कि वियना के अश्ले टेलिस को वीकेंड पर गिरफ्तार किया गया और क्रिमिनल कंप्लेंट के जरिए नेशनल डिफेंस इंफॉर्मेशन को गैरकानूनी रखने के चार्ज लगाए गए, जो 18 यूएससी § 793(ई) का उल्लंघन है।

स्टेटमेंट में कहा गया, “हम पूरी तरह फोकस्ड हैं अमेरिकी लोगों को हर तरह के खतरे से बचाने पर, चाहे वो विदेशी हो या घरेलू। इस केस में लगे आरोप हमारे नागरिकों की सेफ्टी और सिक्योरिटी के लिए बड़ा खतरा हैं। इस केस के फैक्ट्स और लॉ क्लियर हैं, और हम इन्हें फॉलो करते रहेंगे ताकि जस्टिस हो सके।”

खास बात ये है कि भारतीय मूल का अमेरिकी नागरिक अश्ले टेलिस स्टेट डिपार्टमेंट का अनपेड सीनियर सलाहकार था। वो डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस (डीओडी) के ऑफिस ऑफ नेट असेसमेंट का कॉन्ट्रैक्टर भी था।

एफबीआई स्पेशल एजेंट जेफरी स्कॉट के एफिडेविट के मुताबिक, टेलिस के पास टॉप सीक्रेट सिक्योरिटी क्लीयरेंस था, जिसमें ‘सेंसिटिव कम्पार्टमेंटेड इंफॉर्मेशन’ तक एक्सेस था।

फेडरल प्रॉसिक्यूटर्स के अनुसार, टेलिस के वियना वाले घर पर रेड के दौरान इन्वेस्टिगेटर्स को टॉप सीक्रेट और/या सीक्रेट लेवल के क्लासिफिकेशन मार्क्स वाले 1000 से ज्यादा पेज के पेपर डॉक्यूमेंट्स मिले।

अश्ले टेलिस ने सुरक्षित फैसिलिटी से कैसे निकाले क्लासिफाइड दस्तावेज?

अश्ले टेलिस ने 2001 में यूएस गवर्नमेंट के साथ क्लासिफाइड इंफॉर्मेशन नॉनडिस्क्लोजर एग्रीमेंट पर साइन किया था, लेकिन उसने कथित तौर पर ये एग्रीमेंट तोड़ा और सिक्योर्ड कम्पार्टमेंटेड इंफॉर्मेशन फैसिलिटी (एससीआईएफ) से क्लासिफाइड मटेरियल निकाल लिया।

टेलिस की हरकतें तब स्कैनर पर आईं जब 12 सितंबर 2025 को वीडियो सर्विलांस से देखा गया कि वो वर्जीनिया के मार्क सेंटर के डीओडी फैसिलिटी के अंदर ऑफिस ऑफ नेट असेसमेंट (ओएनए) वाले एससीआईएफ में घुसा। कंप्यूटर रिकॉर्ड्स से पता चला कि टेलिस ने एक आईडेंटिफाइड क्यूबिकल पर कंप्यूटर यूज किया और उसके को-वर्कर ने उसी दिन उसके लिए कई क्लासिफाइड डॉक्यूमेंट्स प्रिंट किए।

एफबीआई एजेंट स्कॉट के एफिडेविट में लिखा है, “उस शाम बाद में, जब टेलिस चला गया, तो इन्वेस्टिगेटर्स को उसी क्यूबिकल में दो रेडवेल्ड फाइल पॉकेट्स मिले, दोनों पर ‘टेलिस’ लिखा था। इनमें वो डॉक्यूमेंट्स थे जो को-वर्कर ने टेलिस के लिए पहले प्रिंट किए थे, जिसमें एक टॉप सीक्रेट लेवल का डॉक्यूमेंट भी था।”

एक और मामले में 25 सितंबर को टेलिस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट के एचएसटी बिल्डिंग पहुँचा। वो साउथ एंड सेंट्रल एशियन अफेयर्स ब्यूरो के सूट 5247 में घुसा और ‘क्लासनेट’ पर लॉग इन किया, जो डीओएस का सीक्रेट-लेवल कंप्यूटर सिस्टम है। वो करीब एक घंटा रुका और फिर चला गया।

एफिडेविट में लिखा है, “उस शाम बाद में टेलिस एक लेदर ब्रीफकेस लेकर एचएसटी बिल्डिंग लौटा और क्लासनेट पर लॉग इन किया। उसने डेस्कटॉप से एक पीडीएफ फाइल खोली, जिसका फाइलनेम एडवर्सरी फाइटर एयरक्राफ्ट और 2024 का रेफरेंस देता था। फाइल 1288 पेज की खुली, जो टाइटल यूएस एयर फोर्स टैक्टिक्स, टेक्नीक्स एंड प्रोसीजर्स का हिस्सा थी। डॉक्यूमेंट के ऊपर डिपार्टमेंट ऑफ एयर फोर्स का सील था और टॉप-बॉटम पर बैनर मार्किंग्स थे – सीक्रेट//फॉरेन गवर्नमेंट इंफॉर्मेशन/रिस्क सेंसिटिव नोटिस/नोफॉर्न//फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विलांस एक्ट।”

टेलिस ने पीडीएफ को ‘ईकॉन रिफॉर्म’ के नाम से री-सेव किया, प्रिंट विंडो खोली और ‘पेजेस’ में ’59-172′ डाला। उसने सेंसिटिव डॉक्यूमेंट के चुनिंदा पेज प्रिंट करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन प्रिंट नहीं हुआ। बाद में उसने एक अनक्लासिफाइड डॉक्यूमेंट खोला, जो किसी यूएस गवर्नमेंट ऑफिशियल के पब्लिक स्पीच का था और उसे प्रिंट किया। कुछ मिनट बाद उसने ‘ईकॉन रिफॉर्म’ डॉक्यूमेंट दोबारा खोला, पेज 943-959 प्रिंट किए और फाइल डिलीट कर दी।

फिर उसने एक पीडीएफ डॉक्यूमेंट खोला जो ‘सीक्रेट’ या ‘नोफॉर्न’ क्लासिफाइड था, मतलब ये इंफॉर्मेशन यूएस पर्सन्स के अलावा किसी को नहीं दी जा सकती।

फाइल यूएस एयर फोर्स वेपन्स स्कूल का डॉक्यूमेंट था, जो मिलिट्री एयरक्राफ्ट कैपेबिलिटीज के बारे में था। टेलिस ने डॉक्यूमेंट स्क्रॉल किया और उसके सारे 40 पेज प्रिंट कर दिए।

एफिडेविट में लिखा है, “रात करीब 8:53 बजे टेलिस ने एक पीडीएफ डॉक्यूमेंट खोला जो सीक्रेट//नोफॉर्न क्लासिफाइड था। ये एक और यूएस एयर फोर्स वेपन्स स्कूल का डॉक्यूमेंट था, मिलिट्री एयरक्राफ्ट के बारे में। टेलिस ने उसके सारे 40 पेज प्रिंट कर दिए।”

अथॉरिटीज ने 10 अक्टूबर को टेलिस को फिर मार्क सेंटर के अंदर ओएनए वाले एससीआईएफ सूट में देखा, उसी क्यूबिकल पर बैठे हुए। वीडियो सर्विलांस से 10 बजे के आसपास देखा गया कि वो लेदर ब्रिफकेस लेकर क्यूबिकल पर पहुँचा। उसने डेस्क पर रेडवेल्ड फाइल पॉकेट से कई पेज निकाले और एक पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन जैसा डॉक्यूमेंट (डॉक्यूमेंट ए) रखा। एफिडेविट के अनुसार, ये डॉक्यूमेंट भी टॉप सीक्रेट लगते हैं, क्योंकि ये पहले प्रिंट होकर 12 सितंबर 2025 को उसी क्यूबिकल में छूटे थे जब टेलिस आया था।

टेलिस ने कथित तौर पर क्लासिफाइड डॉक्यूमेंट को अपने नोटपैड्स के पेजों में मिला दिया, ब्रिफकेस में रखा और ऑफिस से चला गया। वो अपनी वियना वाली घर पर ड्राइव करके लौटा।

अश्ले टेलिस और चीन कनेक्शन

कोर्ट फाइलिंग के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में अश्ले टेलिस ने कई बार पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) के सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की। एक मीटिंग 15 सितंबर 2022 को हुई, जब टेलिस और कई पीआरसी ऑफिशियल्स ने वर्जीनिया के फेयरफैक्स में एक रेस्टोरेंट पर डिनर किया। मीटिंग में टेलिस एक मनीला एनवेलप लेकर आया और पीआरसी ऑफिशियल्स गिफ्ट बैग लेकर रेस्टोरेंट में घुसे। फेडरल प्रॉसिक्यूटर्स का आरोप है कि टेलिस ने एनवेलप पीआरसी (चीनी) ऑफिशियल्स को सौंप दिया।

टेलिस ने 11 अप्रैल 2023 को वर्जीनिया के एक रेस्टोरेंट में चीनी गवर्नमेंट ऑफिशियल्स से मीटिंग की। डिनर के दौरान टेलिस और चीनी ऑफिशियल्स को ‘ओवरहीयर्ड’ करते हुए ईरानी-चीनी रिलेशंस और इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में बात करते सुना गया।

मार्च 2024 में एक इसी तरह की मीटिंग में, टेलिस और चीनी गवर्नमेंट ऑफिशियल्स ने यूएस-पाकिस्तान रिलेशंस पर डिस्कस किया।

जब टेलिस ने 2 सितंबर 2025 को कथित तौर पर क्लासिफाइड डॉक्यूमेंट्स निकालना शुरू किया, उसके कुछ दिन पहले टेलिस और कुछ चीनी ऑफिशियल्स ने फिर डिनर किया। इस बार उन्होंने टेलिस को एक लाल रंग का गिफ्ट बैग दिया।

टेलिस के घर की तलाशी से क्लासिफाइड डॉक्यूमेंट्स मिले

फेडरल कोर्ट के ऑर्डर पर 11 अक्टूबर को इन्वेस्टिगेटर्स ने वर्जीनिया के वियना में टेलिस के घर की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान, घर के अलग-अलग जगहों पर टॉप सीक्रेट या सीक्रेट लेवल के क्लासिफिकेशन मार्क्स वाले 1000 से ज्यादा पेज के पेपर डॉक्यूमेंट्स मिले।

एफिडेविट में डिटेल किया गया है और ये जोड़ा गया कि बेसमेंट होम ऑफिस एरिया में “सीक्रेट” पोरशन मार्क्स वाला एक डॉक्यूमेंट रिकवर किया गया। इसमें डॉक्यूमेंट्स मुख्य रूप से चार जगहों पर मिले-

बेसमेंट होम ऑफिस एरिया के क्लोजेट में एक फोर-ड्रॉअर लॉक्ड फाइलिंग कैबिनेट
बेसमेंट होम ऑफिस एरिया में एक टू-ड्रॉअर लॉक्ड फाइलिंग कैबिनेट
बेसमेंट होम ऑफिस एरिया में डेस्क के आसपास
बेसमेंट के अनफिनिश्ड स्टोरेज रूम में तीन बड़े ब्लैक ट्रैश बैग्स में।

अगर दोषी साबित हुआ, तो टेलिस को 10 साल तक की जेल हो सकती है।

अश्ले टेलिस और उसका परेशान करने वाला ट्रैक रिकॉर्ड

अश्ले टेलिस अभी कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस (सीईआईपी) में टाटा चेयर फॉर स्ट्रैटेजिक अफेयर्स और सीनियर फेलो है। दिलचस्प बात ये है कि सीईआईपी को हंगेरियन-अमेरिकी इन्वेस्टर और रिजीम चेंज स्पेशलिस्ट जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से फंडिंग मिलती है।

सोरोस की मोदी गवर्नमेंट से दुश्मनी जगजाहिर है और वो नई दिल्ली में अपनी पसंद का पपेट एडमिनिस्ट्रेशन लगाने की कोशिश करता रहा है। सोरोस ने पब्लिक फोरम्स पर भारत के खिलाफ अपनी बुरी नीयत खुलकर जाहिर की है। वो अपनी दौलत का इस्तेमाल भारत को कमजोर करने के लिए करता रहता है।

सीईआईपी को सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से लगातार फंड्स मिलते हैं। ग्रुप के ग्रांट्स रिकॉर्ड्स के मुताबिक, ओएसएफ ने सीईआईपी को करीब 40 ग्रांट्स में लाखों डॉलर दिए हैं। 2024 में ओएसएफ ने सीईआईपी को ‘जनरल सपोर्ट’ के लिए 3,000,000 डॉलर दिए।

जॉर्ज डब्ल्यू बुश एडमिनिस्ट्रेशन के दौरान वो अंडरसेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर पॉलिटिकल अफेयर्स का सीनियर एडवाइजर था। उसे यूएस-इंडियन सिविल न्यूक्लियर डील नेगोशिएट करने में अहम रोल का क्रेडिट मिलता है। वो यूएस आर्मी वॉर कॉलेज के स्ट्रैटेजिक इंस्टीट्यूट में रिसर्च डायरेक्टर भी रहा।

टेलिस का रैंड कॉर्पोरेशन से भी गहरा कनेक्शन था, जो एक नॉन-प्रॉफिट ग्लोबल पॉलिसी थिंक टैंक है। उसकी इन्वॉल्वमेंट यूएस गवर्नमेंट सर्विस से पहले की है। अश्ले टेलिस रैंड में सीनियर पॉलिसी एनालिस्ट था, जो ओपन सोसाइटी फाउंडेशंस से स्पेसिफिक प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग लेता था।

बिना आश्चर्य के अश्ले टेलिस को इंडियन लेफ्ट लिबरल मीडिया सर्कल में हाइप मिला। लेफ्टिस्ट प्रोपगैंडा पोर्टल और चाइनीज फंडिंग लेने व एफसीआरए रूल्स तोड़ने के आरोपि न्यूजक्लिक से लेकर द वायर तक, टेलिस इंडियन लेफ्ट लिबरल गिरोह का फेवरेट रहा। टेलिस करण थापर के एक इंटरव्यू में आ चुका है, जो इंडियन लेफ्टिस्ट्स और पाकिस्तानियों में पॉपुलर है।

अपने आर्टिकल्स और इंटरव्यूज में टेलिस ने मोदी गवर्नमेंट को बुरा कहने का कोई मौका नहीं छोड़ा। वो अक्सर कहता था कि भारत को अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी छोड़ देनी चाहिए और चीन को काउंटर करने के लिए यूएस का ‘जूनियर पार्टनर’ बन जाना चाहिए।

फॉरेन अफेयर्स मैगजीन में कंट्रीब्यूटर के तौर पर टेलिस ने एक्सपर्ट जियोपॉलिटिकल एनालिसिस के बहाने एंटी-इंडिया आर्टिकल्स लिखे। एक ऐसे पीस में, “इंडिया’s ग्रेट पावर डेल्यूशंस” टाइटल से टेलिस ने कहा कि भारत का मल्टीपोलैरिटी और स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी में विश्वास ‘इफेक्टिव या रियलिस्टिक नहीं हो सकता।’

उसका चीन प्रेम भी आर्टिकल में झलका, जब उसने पाकिस्तान के बेबुनियाद दावे को बढ़ा-चढ़ाकर बताया कि मई के कॉन्फ्लिक्ट में पाक ने चाइनीज डिफेंस सिस्टम्स से इंडियन फाइटर जेट गिराया, जबकि भारत ने पहलगाम में इस्लामिक टेरर अटैक के बाद दुश्मन पड़ोसी को करारा जवाब दिया था।

टेलिस ने इस साल जून में पब्लिश हुए आर्टिकल में लिखा, “हालाँकि भारत ने पिछले दो दशकों में इकोनॉमिक स्ट्रेंथ बढ़ाई है, लेकिन वो चीन को बैलेंस करने जितनी तेजी से नहीं बढ़ रहा, छोड़िए यूएस को, लॉन्ग टर्म में भी। ये मिडसेंचुरी तक रिलेटिव जीडीपी के टर्म्स में ग्रेट पावर बनेगा, लेकिन सुपरपावर नहीं। मिलिट्री टर्म्स में ये साउथ एशिया की सबसे सिग्निफिकेंट कन्वेंशनल पावर है, लेकिन यहाँ भी लोकल राइवल पर इसका एडवांटेज बहुत बड़ा नहीं।”

उसने आगे लिखा, “मई की लड़ाई में पाकिस्तान ने चाइनीज-सप्लाइड डिफेंस सिस्टम्स यूज करके इंडियन एयरक्राफ्ट गिराए। चीन एक तरफ और एडवर्सरियल पाकिस्तान दूसरी तरफ होने से, भारत को हमेशा अनपैलेटेबल टू-फ्रंट वॉर का डर रहता है।”

बिना आश्चर्य के टेलिस ने भारत के कथित ‘हिंदू नेशनलिज्म’ को अपनाने और ‘लिबरल डेमोक्रेसी’ को छोड़ने पर भी निराशा जताई।

9 बौद्ध भिक्षुओं को सेक्स जाल में फँसाया, ब्लैकमेल कर वसूले 100 करोड़, घर में जमा कर रखे थे 80000 फोटो-वीडियो: थाइलैंड पुलिस ने ‘मिस गोल्फ’ को पकड़ा

                   थाईलैंड में महिला ने बौद्ध भिक्षुओं को फँसाया, हुई गिरफ्तार ( फोटो साभार- एशियन एज )
थाईलैंड पुलिस ने 15 जुलाई 2025 को एक महिला को गिरफ्तार किया है। महिला पर कई बौद्ध भिक्षुओं को यौन संबंध बनाने के लिए उकसाने और फिर उसे ब्लैकमेल करने का आरोप है। उसके पास से चोरी का सामान भी बरामद हुए है।

पुलिस ने महिला को ब्लैकमेलिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस महिला को ‘मिस गोल्फ’ कह रही है।

पुलिस को मिले 80 हजार से ज्यादा वीडियो और तस्वीरें

पुलिस ने बताया कि उसके घर की तलाशी के दौरान भिक्षुओं को ब्लैकमेल करने के लिए इस्तेमाल की गई 80,000 से ज्यादा तस्वीरें और वीडियो मिले हैं। कई चैट लॉग मिले जिससे कई भिक्षुओं से उसके संबंधों का खुलासा हुआ है।

बौद्ध भिक्षुओं के ब्रह्मचर्य को पालन करने के नियम के उल्लंघन से बौद्ध संस्थानों में हलचल मच गई है। थाइलैंड में इस पर जबरदस्त बहस चल रही है। पिछले कुछ वर्षों में भिक्षुओं पर यौन अपराधों और मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल होने के कई आरोप भी लगे थे।

रॉयल थाई पुलिस सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने बताया है कि इस मामले में करीब 9 बौद्ध भिक्षुओं को संलिप्त पाया गया है, जिन्हें मठ से निष्कासित कर दिया गया है।

महिला की ऐसे हुई गिरफ्तारी

बैंकॉक के उत्तर में नोंथबुरी प्रांत में रहने वाली 35 साल की विलावान एम्सावत को गिरफ्तार किया गया। चोरी के सामान भी उसके पास से मिले हैं। पुलिस को महिला विलावान के खाते से पता चला है कि थाईलैंड के एक बौद्ध मंदिर के बैंक खाते से एक वरिष्ठ भिक्षु ने उसे पैसे ट्रांसफर किए।

महिला ने ये स्वीकार किया बौद्ध भिक्षुओं से ऐंठे पैसे

थाई पुलिस ने बताया कि महिला विलावान को वरिष्ठ भिक्षुओं से पैसे मिले। पुलिस ने जाँच में पाया कि महिला ने बौद्ध भिक्षुओं को जब अपने प्रेम जाल में फँसाना शुरू किया तो पिछले 3 सालों में उसके खाते में 11.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी 102.33 करोड़ रुपए आए। इनमें से ज्यादातर रकम बौद्ध भिक्षुओं ने ट्रांसफर किए हैं। जाँच में पता चला कि इनमें से अधिकांश पैसे ऑनलाइन खेली गई जुए वाली वेबसाइट पर खर्च कर दी गई।

मामले का ऐसे हुआ खुलासा

सेंट्रल इंवेस्टीगेशन ब्यूरो के उपायुक्त जारूनकियात पंकेव के मुताबिक जाँच पिछले महीने शुरू हुई और ये मामले तब सुर्खियों में आया जब बैंकॉक के एक प्रसिद्ध बौद्ध मंदिर के वरिष्ठ भिक्षु पर गाज गिरी। जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि महिला विलावन ने वरिष्ठ भिक्षु को अपने प्रेम जाल में फँसाया। उसने भिक्षु को बताया कि वह गर्भवती है और उसे 72 लाख थाई बाट की जरूरत है। ये रकम 222,000 अमेरिकी डॉलर या 1.85 करोड़ रुपए के बराबर है।
मामले के सामने आने के बाद थाइलैंड के मठ प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं। देशभर में थेरवाद संप्रदाय के बौद्ध भिक्षुओं की संख्या काफी है जिन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है। महिलाओं को छूने मात्र से इनके ब्रह्मचर्य पर सवाल उठने लगते हैं।
देश की बड़ी जनसंख्या बौद्ध धर्म को मानने वाली है और बौद्ध मठों को काफी दान दिया जाता है। ये पैसा बौद्ध भिक्षुओं, मठ के वरिष्ठ भिक्षुओं और दूसरे मद में खर्च होता है।
सेंट्रल इंवेस्टीगेशन ब्यूरो ने एक फेसबुक पेज बनाया है, जहाँ लोग किसी भिक्षुक की शिकायत कर सकते हैं। थाईलैंड में बड़े पैमाने पर बौद्ध भिक्षुओं की जाँच की जाएगी। जाँच के बाद कई बदलाव किये जाएँगे ताकि बौद्ध धर्म में लोगों की आस्था बनी रहे। मंदिर की वित्तीय व्यवस्था से जुड़े कानून में भी संशोधन किया जा सकता है।
थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई ने अधिकारियों को आदेश दिये हैं कि जाँच में किसी तरह की कोताही नहीं बरती जाए और दोषी भिक्षुओं को हर हाल में सामने लाया जाए ताकि लोगों का विश्वास कायम रह सके।

क्या सुप्रीम कोर्ट जेहादियों की संरक्षक है? मोदी सरकार इन जेहादियों और इनको संरक्षण देने वालों कब कार्यवाही करेगी? ये दोनों आतंकियों से ज्यादा खतरनाक हैं। कामाख्या देवी और भगवान कृष्ण को गालियाँ रं$, चु$, ब$… देने वाले वजाहत खान की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक क्यों ?

हिंदूओं को गालियाँ देने वाले वजाहत खान की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक (फोटो साभार: ऑपइंडिया अंग्रेजी)
पहलगाम में आतंकियों द्वारा धर्म पूछकर हिन्दू महिलाओं का सिन्दूर उजाड़ने पर आतंकियों पर कार्यवाही करने वाली मोदी सरकार अपने देश में हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित भाषा बोलने वाले जेहादियों पर क्यों नहीं करती कार्यवाही। साथ में इन्हे संरक्षण देने वालों पर भी कार्यवाही जरुरी है, क्योकि दोनों ही आतंकवादियों से कहीं ज्यादा खतरनाक है। आतंकवादियों पर क्या कार्यवाही इसलिए हुई कि वो पाकिस्तानी थे और देश में जो उनके स्लीपर सेल पल रहे हैं उन पर चुप्पी क्यों?    

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (23 जून 2025) को वजाहत खान की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। वजाहत के खिलाफ पश्चिम बंगाल सहित कई अन्य राज्यों में FIR दर्ज थी। उसे हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

यह अंतरिम आदेश जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि 14 जुलाई 2025 तक वजाहत के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

सुनवाई के दौरान जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा, “नफरत भरे भाषण हमें कहीं नहीं ले जाते।” उन्होंने आगे कहा कि आग की वजह से लगे घाव भर सकते हैं, लेकिन शब्दों से लगे घाव कभी नहीं भरते। वजाहत खान के वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने दलील दी थी कि आरोपित ने जैसा बोया है, वैसा ही काट रहा है और सजा से उसने सबक भी सीखा है।

वजाहत खान की शिकायत पर ही ऑपरेशन सिंदूर को लेकर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भड़काऊ पोस्ट करने पर सोशल मीडिया इफ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली को पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी के बाद बंगाल पुलिस ने वजाहत के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था।

जहाँ एक ओर शर्मिष्ठा को दो हफ्ते तक जेल में रखने के बाद भी उसकी बेल को नामंजूर कर दिया गया था। वहीं वजाहत ने उसकी गिरफ्तारी का जश्न मुस्लिम समुदाय के साथ मनाया था।

वजाहत के सोशल मीडिया पर हिंदू धर्म के देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट दिखा थे। इसके बाद लोगों ने उसकी गिरफ्तारी की माँग की थी। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में वजाहत ने लिखा था “कामाख्या देवी मंदिर में ब्राह्मण को अन्य हिंदुओं से कटी हुई योनि की पूजा करवानी पड़ती है। इसमें अंतर करना बहुत मुश्किल है कि यह अंधभक्ति है या कोई मानसिक बीमारी।”

उसने ट्वीट किया था “एक हिंदू अपनी साली को अंग-अंग पर रंग लगाते हुए और अपने दोस्तों को भी उसके साथ ऐसा करने का निमंत्रण देते हुए…हिंदू.. यहीं है इनकी असलियत… बलात्कारी संस्कृति।”

एक अन्य पोस्ट में उसने लिखा था, “नहीं वो उसकी बात कर रहा है जिसकी 16108  रखैलों के साथ रंग रसिया मनाता था…या चुपके-चुपके लड़कियों को नहाते हुए देखता था..”

ऐसे ही उसने एक पोस्ट में लिखा था, “मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ है… पहले अपने धर्म के बारे में पढ़ो। मूत्र पीने वाले बदमाश”

हिंदूओं को गाली देते हुए वजाहत ने एक पोस्ट में लिखा था “तुझ जैसी रं* पेट की औलाद रसूल के बारे में मेरी बात करे ये जेब नहीं देता…तू इसकी बात कर, तेरा कृष्णा कैसा रंगीला था देख…सच्चाई देख वहम में मत जी…झं$% सा&% तूने जो भी कहा वो सब तो झूठ और बहुत है लेकिन ये तेरे ही किताब का है सच पढ़, सु*& के पि*%$”

इंस्टाग्राम पर एक आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उसने लिखा “अबे भो**, ब**… अपनी बहन से जाकर सीख तेरा धर्म ला**, तेरा धर्म जो तेरी बहन कोठे में बैठ कर सिखाती है… या फिर वही धर्म तेरे घर पे आकर सिखाती है, चु** कर ब**… अपनी बीवी को तुझ जैसा संघी काम चो* है दूसरे के लिए चो* देता है और अपनी बहन चो* है… ब*… सुन रं* पेट का जाना… मेरे अबाओ अजदाद कन्वर्ट हुए भी ते ना तो हमें उनपर फक्र है…के गंदा धर्म शैतानों का पूजा करने वाला, लिंग का पूजा करने वाला धर्म चो* कर… पाक साफ धर्म अपना और हक धर्म अपना…फखर है उनपे…जा तू लिंगम पूजा कर…लौ*

वजाहत खान कोलकाता में रशीदी फाउंडेशन चलाता है। सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने और दो धर्मों के बीच दुश्मनी पैदा करने के आरोप में वजाहत के खिलाफ काफी साक्ष्यों और दस्तावेजों के होने के बावजूद पश्चिम बंगाल पुलिस ने उसे शुरउआत में गिरफ्तार नहीं किया था।

बाद में सोशल मीडिया पर लोगों के उसके खिलाफ आक्रोश को देखने और अन्य राज्यों में वजाहत के खिलाफ दर्ज हुई FIR के बाद जब दबाव बढ़ने लगा तो 9 जून 2025 को पुलिस ने  उसे गिरफ्तार किया। इसके बाद उसे 23 जून तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया था।

हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ उसकी गंदी टिप्पणियों को देखने के बावजूद किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न करके और पश्चिम बंगाल के बाहर के राज्यों में दर्ज FIR के तहत उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से साफ समझा जा सकता है कि कोर्ट ने वजाहत के मामले में अनावश्यक नरमी दिखाई है।

हिन्दुओं को दी थी गाय-बकरी की तरह काटने की धमकी, असम पुलिस ने किया गिरफ्तार तो सनीउर रहमान की बंध गई घिग्गी


सोशल मीडिया पर हिन्दुओं को गाय-बकरी की तरह काटने की धमकी देने वाला सनीउर रहमान उर्फ़ सनी भाई गिरफ्तार हो गया है। असम की कामरूप पुलिस ने उसके खिलाफ यह कार्रवाई की है। यह जानकारी असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दी है।

यह कार्रवाई शुक्रवार (6 जून, 2025) को हुई। सनीउर रहमान ने बकरीद का जिक्र करते हुए एक वीडियो में कहा था, “तुम हिंदू नहीं जानते कि मियाँ कौन हैं, हमें कोई डर नहीं, हम हर साल बकरीद मनाते हैं।” उसने आगे कहा, “याद रखना हम तुम्हें बकरियों और गायों की तरह काटेंगे।”

उसका यह भड़काऊ बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बाद उसे गिरफ्तार करने की माँग की गई थी। असम CM हिमंता बिस्वा ने बताया है कि गोलपाड़ा जिले से सनिदुल इस्लाम नाम का एक युवक भी भगवान राम पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तार हुआ है।