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तृषा कृष्णन और CM विजय पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में उदयनिधि स्टालिन गिरफ्तार, पहले भी महिलाओं पर दे चुके हैं विवादित बयान: सनातन को खत्म करने का भी देखते हैं सपना

                     तृषा कृष्णन और सीएम विजय पर अश्लील टिप्पणी कर फंसे उधयनिधि स्टालिन, गिरफ्तार
जब नेता महिला का सम्मान नहीं कर सकते फिर किस कीमत पर उनके वोट और उनके हित की बात करते हैं। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी द्वारा बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती के साथ गेस्ट हाउस कांड तमिल नाडु में जयललिता के साथ विधानसभा में शर्मनाक हरकत पर किस आधार पर महिलाएं इन पार्टियों में हैं? यह सोंचने की बात है।  

तमिलनाडु की राजनीति में विरोधी दलों से जुड़ी महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। इसी सिलसिले में DMK के नेता और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने 3 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की आलोचना करते हुए अभिनेत्री तृषा कृष्णन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की।

तृषा कृष्णन को निशाना बनाकर की गई इस मानहानिकारक टिप्पणी के मामले में मंगलवार (4 अगस्त 2026) को पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया।

3 अगस्त को कर्नाटक के साथ कावेरी जल बंटवारे के मुद्दे पर तंजावुर में आयोजित एक विरोध रैली को संबोधित करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने आरोप लगाया कि सीएम विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार कावेरी का पानी नहीं मिलने के मुद्दे पर चुप है और उसका पूरा ध्यान DMK नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर झूठे मामले दर्ज कराने पर है।

इसी दौरान रैली में मौजूद DMK कार्यकर्ताओं ने ‘तृषा, तृषा’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस पर उदयनिधि स्टालिन कुछ पल रुके, मुस्कुराए और एक ऐसी टिप्पणी की, जिसे कई लोगों ने आपत्तिजनक और दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी के तौर पर देखा।

तृषा कृष्णन का नाम लिए बिना उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “हमारे यहाँ पानी आए या न आए, वहाँ पानी जरूर पहुँचना चाहिए। उन्हें बस इसी की चिंता है।” इसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा, “मेरा मतलब कावेरी के पानी से था।”

सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया है, जिस पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और वैचारिक पृष्ठभूमि के लोगों ने प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों ने अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन को लेकर उदयनिधि स्टालिन की कथित दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी की आलोचना की है।

तृषा इन दिनों अभिनेता से राजनेता बने और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के साथ अपने कथित निजी संबंधों को लेकर भी चर्चा में हैं। उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी को लेकर तमिलनाडु की राजनीति भी गरमा गई है।

TVK विधायक रेवन्थ चरण ने इसे ‘घृणित और अस्वीकार्य’ बताते हुए कहा, “इसी वजह से तमिलनाडु की जनता ने आपको नकार दिया और आज आप जिस स्थिति में हैं, वहीं सीमित कर दिया। अरिवालयम के पहले से ही बेहद निम्न स्तर के बावजूद यह उससे भी नीचे की बात है।”

तमिलनाडु भाजपा ने भी विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की कथित टिप्पणी की कड़ी निंदा की। पार्टी ने इसे ‘घृणित, अश्लील, अभद्र और शर्मनाक’ करार देते हुए उनके बयान पर सवाल उठाए।

तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वह अपने बेटे उदयनिधि स्टालिन की एक महिला के खिलाफ अभद्र टिप्पणी पर मौन क्यों हैं। उन्होंने उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी की भी माँग की थी।

इधर सत्तारूढ़ TVK ने इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) को पत्र लिखकर उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। पार्टी का कहना है कि उनकी भाषा सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को वस्तु समझने और मौखिक उत्पीड़न (Verbal harassment) को सामान्य बनाती है तथा सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों से अपेक्षित मर्यादा को गंभीर रूप से ठेस पहुँचाती है।

TVK ने यह भी कहा कि इस तरह का आचरण सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के प्रति व्यवहार को लेकर एक ‘खतरनाक मिसाल’ कायम करता है। TVK ने राष्ट्रीय महिला आयोग से आग्रह किया है कि वह उदयनिधि स्टालिन से इस मामले में स्पष्टीकरण माँगे और उन्हें बिना शर्त सार्वजनिक माफी जारी करने का निर्देश दे।

साथ ही पार्टी ने माँग की है कि उनके खिलाफ सार्वजनिक अश्लीलता फैलाने और महिला की मर्यादा का कथित रूप से अपमान करने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाए।

राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधने के लिए महिलाओं को घसीटने के आरोपों को लेकर पहले भी विवादों में रहे हैं उदयनिधि स्टालिन

अभिनेत्री तृषा कृष्णन पर कथित तौर पर निशाना साधते हुए की गई दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी को लेकर उदयनिधि स्टालिन को भारी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। हालाँकि, राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से जुड़ी महिलाओं को निशाना बनाते हुए लैंगिक (सेक्सिस्ट) टिप्पणियाँ करने के आरोप पहले भी उन पर लग चुके हैं।

2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले, प्रचार के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने कहा था, “जब भी मैं अपने चुनावी भाषण में एडप्पडी सरकार का जिक्र करता हूँ, लोग मुझसे एडप्पडी नहीं, बल्कि ‘एडुपुडी’ (किसी के इशारों पर चलने वाला) कहने को कहते हैं। मैं पूछता हूँ कि एडुपुडी कौन है, तो लोग कहते हैं, मोदी का एडुपुडी। मेरी हाल की एक रैली में भीड़ से किसी ने कहा कि वह एडुपुडी नहीं, बल्कि ‘डेड बॉडी’ है, क्योंकि वह शशिकला के पैरों में गिर चुका है।”

इसी वर्ष जब TVK ने सरकार बनाई, तब उदयनिधि स्टालिन ने TVK प्रमुख जोसेफ विजय पर अपने राजनीतिक हमलों में उनकी पत्नी संगीता सोर्नालिंगम को भी घसीटा था। उन्होंने कहा था, “उनका (विजय का) ‘कुट्टी स्टोरी’ सुनाने वाला भाषण विधानसभा की गरिमा के पूरी तरह खिलाफ है। चेंगलपट्टू कोर्ट में अपने पति को तलाशती पत्नी की कहानी पूरे तमिलनाडु को पता है।”

मुख्यमंत्री विजय और उनकी पत्नी के बीच निजी विवाद को अपने राजनीतिक हमलों में घसीटने को लेकर उदयनिधि स्टालिन की उस समय कड़ी आलोचना हुई थी। और अब एक बार फिर उदयनिधि स्टालिन ने छोटे राजनीतिक लाभ के लिए तृषा कृष्णन और सीएम विजय के कथित निजी संबंधों को अपने राजनीतिक हमले का हिस्सा बनाया है।

उदयनिधि स्टालिन पिछले कई वर्षों में अलग-अलग कारणों से विवादों में रहे हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने सनातन धर्म की तुलना ‘डेंगू, मलेरिया’ से करते हुए इसके ‘उन्मूलन’ का आह्वान किया था। उस समय देशभर में उनके खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी डीएमके नेता को फटकार लगाई थी।

‘हम भी सनातन को खत्म करने मैदान में आए हैं’ : उदयानिधि स्टालिन के बाद TVK के मुस्तफा ने जाहिर की हिंदू घृणा

तमिलनाडु में जिस तरह चुनावों में सेकुलरिज्म के गुमराह करने वाले नारों का इस्तेमाल कर सनातन विरोधियों ने सत्ता हथियाई उससे हिन्दुओं को आंखें खोलने चाहिए। बहुत कलाकार को मुख्यमंत्री बनाने का नशा चढ़ा था। अब 5 साल भुगतना। मोदी-योगी-अमित से रहम की भीख मत मांगना। हिन्दू किसी भी राज्य का हो उसे सेकुलरिज्म और जातिगत सियासत के नशे से बाहर आना होगा। ताली कभी एक हाथ से नहीं बजी। सनातन को अपमानित करने वाली DMK पार्टी को वोट देने वालों पर शर्म आती है। मुसलमान बीजेपी को हराने एकजुट वोट करता है और हिन्दू जातिगत सियासत में फंस पागलों की तरह सेकुलरिज्म के नशे में डूब वोट करता है। योगी ने ठीक कहा था "बंटे तो कटे"। बंगाल में जब तक विभाजित रहा ममता की ज्यादतियों का शिकार हुआ और एकजुट हुआ राहत की साँस ली। 

तमिलनाडु में डीएमके के उदयानिधि स्टालिन के बाद तमिलनाडु मुस्लिम लीग (TNML) के संस्थापक और मदुरै सेंट्रल से TVK विधायक वीएमएस मुस्तफा ने सनातन धर्म को लेकर विवादित बयान दिया है।

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी राजनीति में ‘सनातन धर्म को खत्म करने’ के उद्देश्य से उतरी है। उन्होंने कहा, “हमारे पास पेरियार और आंबेडकर की विचारधारा है और हम सनातन को समाप्त करने के लिए मैदान में आए हैं।”

मुस्तफा ने मदुरै सेंट्रल सीट पर जीत हासिल की है। जहाँ हिंदुओं का विश्व प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर स्थित है। यह देखते हुए उनके बयान पर राजनीतिक विवाद और गहरा गया गया है। भाजपा नेता के अन्नामलाई ने ऐसी प्रतिक्रियाओं पर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि ये लोग ध्यान रखे हिंदू धर्म कोई पंचिंग बैग नहीं है।

इससे पहले, 12 मई 2026 को तमिलनाडु विधानसभा में उदयानिधी स्टालिन ने भी सनातन धर्म पर अपनी पुरानी टिप्पणी दोहराते हुए कहा, “जो सनातन लोगों को बाँटता है, उसे समाप्त किया जाना चाहिए।” इस भाषा के वक्त सदन में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय भी मौजूद थे और उन्होंने भाषण के बाद उदयनिधि का अभिवादन भी किया था किया।


‘सनातन का नाश होना चाहिए’: तमिलनाडु विधानसभा में बोले उदयनिधि स्टालिन-चुपचाप सुनते रहे ईसाई CM विजय; क्या सनातन विरोध करना DMK के DNA में है?

                            तमिलनाडु विधानसभा में उदयनिधि स्टालिन और CM विजय (फोटो साभार: ANI)
तमिलनाडु में मिली करारी हार के बाद भी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) का राजनीतिक अहंकार कम होने का नाम नहीं ले रहा है। तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता और DMK विधायक उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर सनातन के खिलाफ जहर उगला है। सनातन धर्म को लेकर अपना पुराना बयान दोहराते हुए उन्होंने सनातन को खत्म करने की बात कही है।

स्टालिन को ज्ञान नहीं कि सदियों प्राचीनतम सनातन को ख़त्म करने पता नहीं कितने आये और गए कोई उनका नामलेवा भी नहीं। अभी स्टालिन के पाप का घड़ा भरा नहीं है। जिस दिन भर जाएगा शायद इनका अपना परिवार ही इसे अपनाने से मना कर दे। सनातन विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है। यह अडिग और अमर है और रहेगा। अब जो कालचक्र चल रहा है। जिस दिन बंगाल की तरह तमिलनाडु में भी हिन्दू और सनातन एकजुट हो गया राज्य के इतिहास में भी इनका कोई नामलेवा नहीं मिलेगा। क्या सनातन विरोध करना DMK के DNA में है?    

तमिलनाडु के नवनिर्वाचित ईसाई मुख्यमंत्री C जोसेफ विजय की मौजूदगी में मंगलवार (12 मई 2026) को विधानसभा को संबोधित करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “सनातन, जिसने लोगों को बाँटा है। उसका नाश होना चाहिए।”

यह पहली बार नहीं है जब उदयनिधि स्टालिन ने सनातन के खिलाफ जहर उगला हो, इससे पहले भी वो सनातन को खत्म करने की बात कह चुके हैं। इस साल की शुरुआत में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने सनातन धर्म पर उनकी 2023 की टिप्पणी को हिंदू समुदाय के खिलाफ ‘हेट स्पीच’ माना था।

तमिलनाडु सरकार में युवा कल्याण और खेल विकास मंत्री रहते हुए सितंबर 2023 में उदयनिधि स्टालिन ने ‘सनातन उन्मूलन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए सनातन धर्म की तुलना मच्छर, डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से की थी। उन्होंने कहा था कि सनातन धर्म का सिर्फ विरोध नहीं बल्कि उसका पूरी तरह नाश होना चाहिए।

बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अपने बयान का समर्थन किया। उन्होंने दावा किया कि सनातन धर्म जाति और धर्म के नाम पर लोगों को बाँटता है। उन्होंने कहा था कि मानवता और समानता के लिए सनातन धर्म को ‘जड़ से खत्म’ करना जरूरी है।

इसके बाद जनवरी 2026 में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने त्रिची सिटी पुलिस द्वारा भाजपा नेता अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया था। यह FIR उदयनिधि के सनातन धर्म पर दिए गए बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने के आरोप में दर्ज की गई थी। जस्टिस एस श्रीमथी ने तब कहा था कि उदयनिधि का कथित बयान स्वयं ‘हेट स्पीच’ की श्रेणी में आता है, ऐसे में उस पर सवाल उठाने को अपराध नहीं माना जा सकता है।

‘जैसे HIV और कुष्ठ सामाजिक कलंक, वैसा ही है सनातन’: उदयनिधि के बाद अब ए राजा के बिगड़े बोल, RJD नेता बोले- तिलकधारियों ने देश को गुलाम बनाया

                                                       ए राजा और उदयनिधि (साभार: टीवी9 भारतवर्ष)
सनातन धर्म को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का सिलसिला रूक नहीं रहा है। तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि के बाद अब डीएमके सांसद ए राजा ने सनातन धर्म की तुलना HIV और कुष्ठ रोग जैसी बीमारियों से तुलना की है। वहीं, राजद नेता जगदानंद सिंह ने कहा कि तिलक लगाकर घुमने वालों ने देश को गुलाम बनाया।

दरअसल, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया के मच्छर तथा कोरोना से की थी। साथ ही कहा था कि सनातन ने लोगों को जातियों के आधार पर बाँटा। अब ए राजा ने इसकी तुलना असाध्य बीमारियों से की है। इतना ही नहीं, ए राजा ने उदयनिधि का बचाव भी किया।

डीएमके सांसद ए राजा ने कहा कि सनातन धर्म पर उदयनिधि का रुख बहुत नरम था। इसकी तुलना सामाजिक कलंक वाली कुछ बीमारियों से की जानी चाहिए, जबकि उदयनिधि ने इसकी तुलना डेंगू और मलेरिया से की है। राजा ने कहा, “सनातन धर्म की तुलना HIV और कुष्ठ रोग जैसी सामाजिक कलंक वाली बीमारियों से की जानी चाहिए।” 

वहीं, I.N.D.I.A. गठबंधन का हिस्सा बिहार के राष्ट्रीय जनता दल के नेता जगदानंद सिंह ने भाजपा और RSS पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि तिलक लगाकर घुमने वालों ने भारत को गुलाम बनाया। RJD बिहार के अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने कहा, “देश गुलाम किस समय हुआ? क्या उस समय कर्पूरी ठाकुर, लालू प्रसाद, राम मनोहर लोहिया जैसे नेता थे?”

राजद के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जगदानंद सिंह ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में हिंदू मुस्लिम को बाँटने से काम नहीं चलेगा और ना ही देश मंदिर बनाओ या मस्जिद तोड़ो से चलेगा।

जगदानंद सिंह के बयान पर बिहार भाजपा के प्रवक्ता अरविंद सिंह ने कहा कि भारत को गुलाम वैसे टीकाधारी लोगों ने बनाया, जो सत्ता के लिए, कुर्सी के लिए, पद के लिए, राज्य के लिए अपना सब कुछ…. जमीर से लेकर जागीर और धर्म तक को बेच दिया। उन्होंने लालू यादव और नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग पुत्र को मुख्यमंत्री बनाने के लिए और कुछ लोग खुद प्रधानमंत्री बनने के लिए नकली जनेऊ पहन रहे हैं और नकली बाइबल पढ़ रहे हैं।उधर, एमके स्टालिन ने अपने बेटे उदयनिधि के बयान के बाद उनका बचाव किया है। स्टालिन ने कहा कि उदयनिधि ने अनुसूचित जातियों, जनजातियों और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव करने वाले सनातन सिद्धांतों पर अपने विचार व्यक्त किए थे। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म या धार्मिक मान्यताओं को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था।

दरअसल, सनातन धर्म मिटाने की बात कही थी। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए जा रहे उनके भाषण की एक वीडियो क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।”

उदयनिधि ने कहा, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू, मलेरिया, कोरोना ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

अवलोकन करें:-

अमेरिका में मनेगा ‘सनातन धर्म दिवस’: उदयनिधि स्टालिन के बयान के बाद ऐलान, लुइसविले में 3 सितंबर

उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा, “सनातन क्या है? यह संस्कृत भाषा से आया शब्द है। सनातन समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ होने के अलावा कुछ नहीं है। सनातन का क्या अभिप्राय है? यह शाश्वत है, जिसे बदला नहीं जा सकता, कोई सवाल नहीं कर सकता है। यही इसका मतलब है। सनातन ने लोगों को जातियों के आधार पर बाँटा है और इसे बदला नहीं जा सकता।”

अमेरिका में मनेगा ‘सनातन धर्म दिवस’: उदयनिधि स्टालिन के बयान के बाद ऐलान, लुइसविले में 3 सितंबर सनातन धर्म दिवस घोषित

   उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयान पर विदेशों में होने लगा बवाल (फोटो साभार- ट्विटर                        @Udhaystalin /इंडिया टुडे)
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेता उदयनिधि स्टालिन और कॉन्ग्रेस के प्रियांक खड़गे की सनातन धर्म को लेकर की गई टिप्पणियों पर भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं। मलेशिया के एक हिंदू संगठन ने उदयनिधि के बयान पर कड़ा विरोध जताया है। वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका में केंटुकी के लुइसविले शहर की मेयर ने 3 सितंबर 2023 को सनातन धर्म दिवस घोषित कर दिया है।

मलेशिया के हिंदू संगम नाम के हिंदू संगठन ने उदयनिधि के खिलाफ आवाज उठाई है। संगठन ने मलेशिया के भारतीय उच्चायोग को उदयनिधि के खिलाफ शिकायती पत्र दिया। वहीं, अमेरिका में लुइसविले की मेयर बारबरा सेक्सटन ने महाकुंभ अभिषेकम उत्सव के दौरान शहर में हर साल 3 सितंबर को सनातन धर्म दिवस मनाने का आधिकारिक ऐलान किया है।

मलेशिया हिंदू संगम ने जताया एतराज

तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने चेन्नई का कामराजार एरिना में सनातन उन्मूलन सम्मेलन में विवादित टिप्पणी की थी। सम्मेलन के शीर्षक की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा था कि आयोजनकर्ताओं ने ‘सनातन विरोधी सम्मेलन’ के बजाए ‘सनातन उन्मूलन सम्मेलन’ शब्द का इस्तेमाल किया, जो बहुत अच्छा है।

उन्होंने आगे कहा था, “कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिनका महज विरोध ही काफी नहीं होता, हमें उन्हें जड़ से मिटाना होगा। मच्छर, डेंगू, मलेरिया, कोरोना, ये ऐसी चीजें हैं जिनका हम केवल विरोध नहीं कर सकते, बल्कि हमें उन्हें मिटाना होगा। सनातन धर्म भी ऐसा ही है।” उनके इस बयान पर भारत भारत में बवाल हो गया।
मलेशिया के हिंदू संगम ने सोमवार 4 सितंबर को मलेशिया में भारतीय उच्चायोग को पत्र लिखकर कहा, “मलेशिया हिंदू संगम और मलेशिया के हिंदू समुदाय की तरफ से हम उदयनिधि स्टालिन के बयान का सख्त विरोध करते हैं। सनातन रोको कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जो बयान दिया, हम उसकी निंदा करते हैं। सनातन उन्मूलन सम्मेलन में दिए गए भाषण में उन्होंने सनातन धर्म की तुलना मच्छरों, डेंगू, मलेरिया और कोरोना से की और कहा कि सनातन धर्म को बढ़ने से रोकना होगा।”
मलेशिया हिंदू संगम ने पत्र में लिखा कि तमिलनाडु के खेल मंत्री एक तरह से एक धर्म के लोगों के नरसंहार का आह्वान कर रहे थे। उन्होंने अपने भाषण में हिंदुत्व यानी सनातन धर्म की शुद्धता को तार-तार कर दिया। यह एक अपमानजनक भाषण था। इसमें एक मंत्री ने ऐसे धर्म के खिलाफ बोला, जिसे भारत में अधिकतर लोग मानते हैं।
पत्र में आगे लिखा है, “मंत्री होने के नाते उन्हें धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए और पूरी पारदर्शिता के साथ अपने कार्यों का निर्वहन करना चाहिए। उनके भाषण से पूरी दुनिया के हिंदुओं में नफरत और गुस्से को बढ़ाया है।” इस संगठन ने भारत सरकार से स्टालिन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।
संगठन ने लिखा, “हम एक बार फिर इस भाषण पर अपनी कड़ी निंदा और असहमति दर्ज करते हैं। हम भारत सरकार से लोगों की संवेदनशीलता का अपमान करने वाले इस कृत्य के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह करते हैं।”

लुइसविले में 3 सितंबर सनातन धर्म दिवस घोषित

संयुक्त राज्य अमेरिका में केंटुकी के लुइसविले के मेयर ने शहर में 3 सितंबर को सनातन धर्म दिवस घोषित किया है। लुइसविले में केंटुकी के हिंदू मंदिर में महाकुंभ अभिषेकम उत्सव के दौरान मेयर क्रेग ग्रीनबर्ग की ओर से डिप्टी मेयर बारबरा सेक्स्टन स्मिथ ने ये आधिकारिक उद्घोषणा पढ़ी।
इस कार्यक्रम में आध्यात्मिक नेता मौजूद रहे थे। इनमें परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के अध्यक्ष चिदानंद सरस्वती, श्री श्री रविशंकर और भगवती सरस्वती के साथ-साथ उपराज्यपाल जैकलीन कोलमैन, डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ कीशा डोर्सी और कई अन्य आध्यात्मिक नेताओं और गणमान्य लोगों ने शिरकत की थी।

उदयनिधि और प्रियांक खड़गे खिलाफ दर्ज हैं एफआईआर

I.N.D.I.A. गठबंधन में डीएमके की सहयोगी पार्टियों ने भी स्टालिन के बयान की निंदा की है। वहीं, देश के 262 मशहूर हस्तियों ने स्टालिन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को एक पत्र लिखकर इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने का निवेदन किया है।
हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे के खिलाफ रामपुर में एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं, उदयनिधि के खिलाफ दिल्ली में भी एफआईआर दर्ज कराई गई है।

देवी-देवताओं की नग्न तस्वीरें, भगवान की प्रतिमा को चप्पल मारने वाला जुलूस… पेरियार ने गैर मर्दों से सेक्स को भी बताया था जायज, सुपरस्टार रजनीकांत ने किया था प्रहार

सुपरस्टार रजनीकांत ने भी पेरियार द्वारा हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान पर उठाए थे सवाल
जब से उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को खत्म करने की बात की है और इसे डेंगू-मलेरिया बताया है, तब से पेरियार का नाम चर्चा में है। इरोड वेंकटप्पा रामासामी नायकर को ‘पेरियार’ नाम से जाना गया और तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति के नेताओं ने लंबे समय तक सत्ता में रह कर उसे सामाजिक न्याय का मसीहा घोषित कर दिया। उदयनिधि स्टालिन का कहना है कि वो अपने बयान पर कायम है। इस दौरान उन्होंने खुद को पेरियार की विचारधारा का अनुसरण करने वाला भी बताया।

उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु में युवा एवं खेल मामलों के मंत्री हैं। उनके पिता, जो सत्ताधारी DMK के सुप्रीमो हैं, वो राज्य के मुख्यमंत्री हैं। उदयनिधि स्टालिन के दादा करुणानिधि ने 1969-2011 के बीच 5 बार मुख्यमंत्री का पद सँभाला था। पेरियार की बनाई ‘द्रविड़ कझगम’ पार्टी ही बाद में DMK कहलाई और अभिनेता MGR ने इसे तोड़ कर AIADMK बनाया था। एमजीआर भी तमिलनाडु के सीएम रहे। डीएमके की पूरी की पूरी राजनीति ही हिन्दू विरोध और ब्राह्मण विरोध के इर्दगिर्द घूमती है।

अब जब पेरियार की चर्चा हो रही है, ये भी जानने लायक बात है कि कभी सुपरस्टार रजनीकांत ने भी उसके हिन्दू विरोध को लेकर उस पर निशाना साधा था। उनके खिलाफ तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन हुए थे, नेताओं ने बयानबाजी की थी, पुलिस में शिकायत तक दर्ज हुई थी – लेकिन, दक्षिण भारत के सबसे मशहूर अभिनेता ने माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया था। उस समय रजनीकांत की राजनीतिक एंट्री की पटकथा भी लिखी जा रही थी, लेकिन तबीयत खराब होने के बाद उन्होंने नई पार्टी के गठन का इरादा छोड़ दिया था।

जब सुपरस्टार रजनीकांत ने पेरियार पर साधा निशान

14 जनवरी, जनवरी 2020 को सुपरस्टार रजनीकांत ने ‘तुगलक’ मैगजीन की 50वीं वर्षगाँठ पर आयोजित कार्यक्रम में कहा था कि पेरियार हिंदू देवी-देवताओं का कट्टर आलोचक था और उसने 1971 में सलेम में अंधविश्वास उन्मूलन सम्मेलन के दौरान भगवान राम और सीता की आपत्तिजनक तस्वीरें भी दिखाई थीं। उन्होंने बताया था कि इसके बाद भी किसी ने पेरियार की आलोचना नहीं की। केवल चो रामास्वामी (तुगलक मैग्जीन के संस्थापक) ने इस मामले को उजागर किया।
विरोध होने के बाद उन्होंने कहा था कि कार्यक्रम में उन्होंने पेरियार को लेकर जो भी बोला वो उस समय मीडिया में भी प्रकाशित हुआ था। रजनीकांत ने स्पष्ट कर दिया था कि इसके सबूत उनके पास अब भी है, इसलिए वे माफी नहीं माँगेंगे। रजनीकांत ने इस दौरान ये जानकारी भी दी थी कि सत्‍तारूढ़ डीएमके को ये बात पसंद नहीं आई और मैगजीन के उस संस्‍करण को तमिलनाडु सरकार ने जब्‍त कर लिया। मगर, चो ने इसे दोबारा छापा। इसके बाद ये मैगजीन ब्‍लैक में बिकी।
सुपरस्टार रजनीकांत ने इसके बाद बताया था कि उस दौरान जो मैगजीन 10 रुपए की बिकती थी, उसकी बिक्री 50 और 60 रुपए में हुई। उन्होंने तंज कसा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने मैगजीन को मुफ्त की पब्लिसिटी दे दी। इसके लिए अगले संस्‍करण में चो ने उन्‍हें पब्लिसिटी मैनेजर के तौर पर काम करने के लिए धन्‍यवाद भी दिया। हालाँकि, इसके बाद मैग्जीन के संस्थापक चो को करुणानिधि का गुस्सा झेलना पड़ा। लेकिन, तब तक वे पूरे देश में लोकप्रिय हो गए थे।

 विरोध होने के बाद सुपरस्टार रजनीकांत ने स्पष्ट कहा था, “मैं अपनी बात से पीछे नहीं हटूँगा। क्योंकि मैं इसे साबित कर सकता हूँ।” कोयम्बटूर में उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। उनके खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में याचिका भी दौर की गई थी, जिसे ख़ारिज कर दिया गया था। ‘द्रविदार विधुतलाई कझगम (DVK)’ ने ये याचिका दायर की थी। तब रजनीकांत के धुर विरोधी रहे सुब्रमण्यम स्वामी ने भी उन्हें इस प्रकार का कड़ा स्टैंड लेने पर बधाई दी थी और कहा था कि ज़रूरत पड़ी तो न्यायालय में वो उनका साथ देंगे।

तमिलनाडु के सेलम में 1971 में क्या हुआ था

सुपरस्टार रजनीकांत ने बताया था कि राम और सीता की नग्न तस्वीरों को चप्पल से मारा गया था। इस संबंध में 25 जनवरी, 1971 को ‘द हिन्दू’ ने स्थानीय संवाददाता के हवाले से छापा था कि ‘द्रविड़ कझगम’ नामक पार्टी ने अन्धविश्वास के खिलाफ इस कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस दौरान भगवान मुर्गा के जन्म से संबंधित एक अश्लील प्रदर्शनी दिखाई गई थी। ऋषियों को तपस्या करते हुए और अप्सराओं को भी दिखाया गया था। इसी दौरान भगवान राम की एक 10 फुट की प्रतिमा को एक गाड़ी पर रखा गया था और दर्जनों लोग इसे चप्पल से पीटते हुए चल रहे थे।
लकड़ी पर भगवान राम का कटआउट बनाया गया था। साथ ही सरकार से माँग की गई थी कि किसी अन्य व्यक्ति की पत्नी को आकर्षित करना अपराध नहीं होना चाहिए। इस सभा में पेरियार ने ये भी कहा था कि किसी दूसरे की पत्नी के साथ प्यार करना, संबंध बनाने से उस महिला के पति को ऐतराज नहीं होना चाहिए। इस पर सवाल पूछे जाने पर तत्कालीन सीएम करुणानिधि ने कहा था कि कुछ लोगों की भावनाएँ आहत हुई होंगी, वो इसे समझ सकते हैं। पेरियार ने इस दौरान विवाहेतर संबंधों की वकालत की थी।
इतना ही नहीं, रैली के अंत में भगवान राम की तस्वीर को जला भी डाला गया था। इस दौरान पेरियार एक ट्रैक्टर पर बैठा हुआ था और इस रैली में पीछे-पीछे चल रहा था। इस दौरान पारित किए गए प्रस्ताव में कहा गया था कि किसी विवाहिता द्वारा किसी गैर-मर्द से संबंध बनाना ‘Tweedledum& Tweedledee’ (बच्चों वाली अंग्रेजी कविता) नहीं है, बल्कि ये ज़रूरी है।

नेहरू ने कहा था – पेरियार को पागलखाने में डालो

1957 में पेरियार ने एक जनसभा में अपने अनुयायियों को ब्राह्मणों के नरसंहार और उनका घर जला डालने के लिए उकसाया। जवाहरलाल नेहरू तब भारत के प्रधानमंत्री थे और के कामराज तमिलनाडु के मुख्यमंत्री। उस साल अक्टूबर में नेहरू ने सीएम को लिखा था कि ये हैरान करने वाला है, क्योंकि इससे सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो सकता है, हत्या भी हो सकती है। नवंबर में दूसरे पत्र में उन्होंने कहा कि EV रामासामी नायकर द्वारा लगातार ब्राह्मण विरोधी अभियान चलाए जाने के कारण वो चिंता में हैं।
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पत्र में जवाहरलाल नेहरू ने लिखा था, “जो पेरियार ने कहा है, वो सिर्फ एक पागल या अपराधी द्वारा ही कहा जा सकता है। मैं उसे पर्याप्त रूप से नहीं जानता, ताकि मैं समझ सकूँ कि वो क्या है। लेकिन, एक बात को लेकर मैं स्पष्ट हूँ कि इस तरह की चीज देश पर बहुत ही निरुत्साही प्रभाव डालने वाली है। सभी समाज विरोधी आपराधिक तत्व यही सोचते हैं कि वो इस तरह की चीजें कर सकें। इसीलिए, मैं आपको सलाह देता हूँ कि इस मामले में कार्रवाई करने में देरी न करें। उसे किसी पागलखाने में डाल कर उसके विकृत दिमाग का इलाज करवाया जाए।”

उदयनिधि स्टालिन के सनातन विरोधी बयान पर घिरी I.N.D.I.A.: कोट पर जनेऊ पहनने वाले राहुल गाँधी खामोश क्यों? क्या वोट बैंक के लिए हिंदू धर्म का करवा रहे विरोध?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि के सनातन विरोधी बयान पर बीजेपी नेताओं ने I.N.D.I.A. गठबंधन पर करारा हमला बोला है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा है कि वोटों की चाहत में यह गठबंधन हिंदुओं का विरोध कर रही है।

Zee News पर ठाकुर देवकीनंदन जी महाराज ने कहा कि यदि इस तरह का बयान किसी अन्य मजहब के लिए दिया होता, भूल जाते किसका बेटा हूँ। सनातन धर्म पर हमला करना इनको भाता है। I.N.D.I.A गठबंधन में शामिल समस्त पार्टियों को स्टालिन का विरोध कर DMK को अलग करना होगा, वरना परिणाम अच्छे नहीं होंगे।  

भाजपा नेताओं ने राहुल गाँधी समेत गठबंधन के सभी नेताओं की चुप्पी को शर्मनाक बताया। दिल्ली बीजेपी ने तमिलनाडु भवन के सामने प्रदर्शन भी किया है।

मंदिर घूमने वाले राहुल क्यों नहीं बोल रहे?

पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है, “उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म के खिलाफ अपने बेशर्मी भरे बयान को दोहराया है। वे सनातन धर्म की तुलना डेंगू, कोरोना और मलेरिया से कर रहे हैं। लेकिन राहुल गाँधी खामोश हैं, जबकि यही राहुल गाँधी मंदिर-मंदिर घूमते हैं, जल चढ़ाते हैं, अपने गोत्र की बात करते हैं। इस मामले पर नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव भी चुप हैं। साफ है कि वोट बैंक की राजनीति के लिए घमंडिया संगठन हिंदू धर्म का विरोध कर रही है। इनकी बुनियादी सोच हिंदू विरोधी है।”
प्रसाद ने कहा कि स्टालिन की टिप्पणी हिंदुओं के खिलाफ नफरत और घृणा को बढ़ावा देती है। यह सनातन धर्म के सभी अनुयायियों के लिए अपमानजनक है। भारत के संविधान के मूल्यों और सिद्धांतों के खिलाफ है।

अनुराग ठाकुर बोले- सनातन हमेशा रहेगा

वहीं, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा है कि सनातन को कुचलने की हसरत वाले कितने ही खाक हो गए। हिंदुओं को मिटाने के ख्वाब पाले कितने ही राख हो गए। उन्होंने कहा, “घमंडिया गठबंधन के घमंडियों, तुम और तुम्हारे मित्र रहें या ना रहें। सनातन था, सनातन है और सनातन रहेगा।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ध्रुवीकरण करके राजनीतिक लाभ उठाने के मकसद से इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं।
वहीं, वाराणसी में न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि उदयनिधि को ऐसा बयान देने से पहले सोचना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के खिलाफ ऐसी बयानबाजी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
उदयनिधि स्टालिन ने एक सम्मेलन में कहा था, “ऐसी कुछ चीज़ें होती हैं जिनका विरोध करना काफी नहीं होता, हमें उन्हें समूल मिटाना होगा। मच्छर, डेंगू बुख़ार, मलेरिया, कोरोना ये ऐसी चीजें हैं जिनका हम केवल विरोध नहीं कर सकते हमें इन्हें मिटाना होगा। सनातन भी ऐसा ही है।”

‘हिन्दुओं को गाली देने की लगी है होड़’: कांग्रेस के प्रमोद कृष्णम् ने स्टालिन को लताड़ा, ISRO का मजाक उड़ाने वाले प्रकाश राज ने अब सनातन धर्म को कहा भला-बुरा

प्रमोद कृष्णम् ने उदयनिधि स्टालिन के बयान का किया विरोध, प्रकाश राज समर्थन में (दाएँ से बाएँ)
उदयनिधि स्टालिन के बाद अब साउथ के एक्टर प्रकाश राज ने सनातनियों का मजाक उड़ाते हुए उन्हें ‘एंटी ह्यूमन’ कहा है। वहीं, तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि के सनातन विरोधी बयान पर कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम ने हमला बोला है। साथ ही सख्त कार्रवाई की माँग की है।

प्रकाश राज ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर ईवी रामास्वामी उर्फ पेरियार और डॉ भीमराव अंबेडकर की फोटो शेयर की है। इसके साथ ही प्रकाश राज ने लिखा है, “हिंदू तनतानी नहीं हैं। तनातनी मानवता विरोधी हैं।” तनतानी या TanaThanis शब्द का उपयोग वामपंथी, इस्लामवादी और ईसाई हिंदुओं और सनातन धर्म का मजाक उड़ाने के लिए करते हैं। ऐसे में उन्होंने न केवल इशारे में सनातन धर्म का मजाक उड़ाने की कोशिश की है बल्कि अपना हिंदू विरोधी चेहरा एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है।

हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने वाला पेरियार

प्रकाश राज ने जिस ईवी रामास्वामी उर्फ पेरियार की फोटो शेयर की है। उसने ताउम्र हिंदू धर्म को लज्जित और अपमानित किया। कभी भगवानों का अपमान किया तो कभी हिन्दुओं के धर्म ग्रंथों को जलाने का संदेश दिया। पेरियार के प्रति हिन्दुओं के प्रति विचार उनके इस एक बयान से भी समझे जा सकते हैं –
“मैंने सब कुछ किया, मैंने गणेश आदि सभी ब्राह्मण देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ डालीं। राम आदि की तस्वीरें भी जला दीं। मेरे इन कामों के बाद भी मेरी सभाओं में मेरे भाषण सुनने के लिए यदि हजारों की गिनती में लोग इकट्ठा होते हैं तो साफ है कि ‘स्वाभिमान तथा बुद्धि का अनुभव होना जनता में, जागृति का सन्देश है।”
तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बेटे और राज्य के खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया के मच्छर की तरह खत्म करने की अपील की थी। उसके इस बयान पर कॉन्ग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम ने हमला बोला है। उन्होंने एक्स पर लिखा है, “सत्य ‘सनातन’ के बिना भारत की कल्पना नहीं की जा सकती। सनातन को मिटाने का ख़्वाब देखने वाले भारतीय नहीं हो सकते उदयनिधि स्टालिन ने करोड़ों सनातनियों की आस्था पर कुठाराघात किया है। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री कार्यालय उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
वहीं ANI से बातचीत में आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने कहा है, “हिंदुओं को गाली देने की नेताओं में एक होड़ सी मची हुई है। सत्य सनातन धर्म को मिटाने की कोशिशें हजारों सालों से हो रहीं हैं। लेकिन सनातन को लोग मिटा नहीं पाए। 1000 साल भारत गुलाम रहा। इस पूरे समय तक लगातार सनातन को मिटाने की कोशिशें हुईं।”
उन्होंने आगे कहा है, “महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह जी महाराज, छत्रपति शिवाजी महाराज कितने ही महापुरुषों का लहू शामिल है सनातन धर्म की शक्ति में। सनातन को मिटाने का जो ख्वाब है वह अंग्रेजों ने भी देखा, मुगलों ने भी देखा। लेकिन सनातन नहीं मिट पाया।”

उदयनिधि के खिलाफ दर्ज हुई शिकायत

सुप्रीम कोर्ट के वकील विनीत जिंदल ने उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ सनातन धर्म के खिलाफ उत्तेजक, भड़काऊ और मानहानिकारक बयान के लिए दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 120A, 153A, 295, 504 और आईटी एक्ट की धाराएँ शामिल हैं।

ट्विटर पर वायरल हो रहा बयान

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर किए गए उनके भाषण की एक वीडियो क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।

‘सनातनम को खत्म करना हमारा पहला काम’

उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना, ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”
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उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा कि “सनातन ​​क्या है? सनातन ​​नाम संस्कृत से आया है। सनातन ​​समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन ​​का अर्थ ‘स्थायित्व’ के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता। कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। सनातन ​​का यही अर्थ है।”

‘सनातन धर्म और कुछ नहीं, जातियों में विभाजित समाज है’: हजरतबल दरगाह में सजदा करने वाले कार्ति चिदंबरम

हजरबल दरगाह में कार्ति चिदंबरम (साभार: कार्ति X हैंडल)
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन को मच्छर की तरह खत्म करने के बयान पर बवाल हो गया है। इस बीच कांग्रेस के नेता और पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति ने कहा कि सनातन धर्म और कुछ नहीं, बल्कि जातियों के बंटवारे पर आधारित समाज है। उन्होंने इसे अभिशाप बताया।

उदयनिधि के बयान पर जारी बहस के बीच कार्ति चिदंबरम ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “सनातन धर्म जातियों में विभाजन के लिए नियम के अलावा और कुछ नहीं है। इसकी वकालत करने करने वाले सभी अच्छे पुराने दिनों के लिए उत्सुक हैं! जाति भारत का अभिशाप है।”

उन्होंने आगे कहा, “तमिलनाडु की आम बोलचाल में ‘सनातन धर्म’ का अर्थ जाति पदानुक्रमित समाज है। ऐसा क्यों है कि हर कोई जो सनातन धर्म की वकालत कर रहा है, वह विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग से आता है और इस ‘पदानुक्रम’ का लाभार्थी है। किसी के खिलाफ ‘नरसंहार’ का कोई आह्वान नहीं किया गया था, यह एक शरारती फिरकी है।”

सनातन धर्म पर ज्ञान देने वाले कार्ति चिदंबरम ने सितंबर 2021 में कश्मीर के हजरतबल दरगाह जाकर वहाँ सजदा किया था। इसकी तस्वीर भी उन्होंने बड़े गर्व के साथ ट्विटर पर डाली थी और कहा था कि कश्मीर के ‘हजरतबल में शुक्रवार की नमाज पढ़ा’। नमाज़ पढ़ने से शंका भी है कि क्या इस्लाम काबुल कर लिया है। 

कहा जाता है कि इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद की दाढ़ी का यहाँ बाल रखा हुआ है। 1963-64 में मू-ए-मुकद्दस (पैगंबर मोहम्मद की दाढ़ी का बाल) चोरी हो गया था। हालांकि, बाद में यह रहस्यमयी ढंग से मिल भी गया था। उसके बाद से यह दरगाह चर्चित हो गया।

ये वही कार्ति चिदंबरम पर हैं, जिन पर भ्रष्टाचार के कई केस हैं। प्रवर्तन निदेशायल (ईडी) ने उन्हें 16 अक्टूबर 16 2019 को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया था। कार्ति पर आरोप है कि अपने पिता पी. चिदंबरम के केंद्र में मंत्री रहते समय कार्ति ने कई कंपनियों से पैसे लेकर उन्हें फायदा पहुँचाया है।

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‘डेंगू-मलेरिया की तरह है सनातन धर्म, इसे खत्म करना होगा’: MK स्टालिन के मंत्री बेटे उदयनिधि ने उगल

आईएनएक्स मीडिया समूह को 2007 में 305 करोड़ रुपये का विदेशी धन प्राप्त करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने में अनियमितता बरतने का आरोप चिदंबरम पर है। उस समय वे केंद्र में वित्त मंत्री थे। सीबीआई ने 15 मई 2017 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद, ईडी ने 2017 में इस संबंध में धन शोधन का मामला दर्ज किया था।