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पंजाब : ईसाइयत और ड्रग में जल रहा पंजाब ; केजरीवाल की मान सरकार लड़कियों को सेक्स वर्कर बना रहा ‘उड़ता पंजाब’; ड्रग्स की गोली दो, फिर मेरे साथ कुछ भी करो… , अनाज मंडी में ‘धंधा’: हाई कोर्ट बोला- नशाखोरी दीमक की तरह खा रहा

                                                 प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: GROK ai)
पंजाब सीमावर्ती राज्य है और सीमावर्ती राज्य में महिलाओं की हो रही दुर्दशा पर वहां की सरकार, प्रशासन और राजनीतिक पार्टियां चुप क्यों? इस गंभीर मुद्दे पर वहां के राज्यपाल को ही कोई सख्त कदम उठाना चाहिए। यह देखना चाहिए कि क्या पंजाब को बर्बाद करने पाकिस्तान षड़यंत्र रच रहा है। केवल चुनावों में नशे को मुद्दा बनाने की बजाए अभी मुद्दा बनाने का समय है। समय रहते वहां के विपक्ष को सचेत होना पड़ेगा।    
दिल्ली और पंजाब मॉडल लेकर घूमते अरविन्द केजरीवाल जनता को मुफ्त रेवड़ियों के जाल में फांस किस तरह पागल बनाते रहे हैं। दिल्ली नमूना तो सबने देख लिया और पंजाब की दुर्दशा देखो। आम आदमी पार्टी सरकार ने पंजाब में महिलाओं को ड्रग एडिक्ट बना सेक्स वर्कर बनने को मजबूर कर दिया। जिस राज्य में महिलाओं की इतनी दुर्दशा हो रही हो, क्या वह राज्य विकास की ओर जा सकता है।   

‘नशा मुक्ति अभियान’ लंबे समय से देश के कोने-कोने में चल रहा है लेकिन इसका असर हर जगह एक जैसा नहीं है। पंजाब में AAP सरकार जोर-शोर से दावा करती कि वो राज्य से नशे का खात्मा कर देंगे। वहीं दूसरी ओर एक लड़की की आपबीती सामने आती है जो बताती है कि राज्य में नशे के कारण कैसे लड़कियों की जिंदगी बर्बाद हो रही है और उन्हें नशा दे-देकर वेश्यावृत्ति में धेकला जा रहा है।

प्रशासन के लिए अगर उस लड़की की आपबीती एक धक्का है तो सवाल उठता है कि क्या ‘नशा मुक्ति अभियान’ जमीन तक पहुँचा भी है और अगर अधिकारी ऐसी स्थितियों से वाकिफ हैं तो फिर अब तक राज्य में ऐसे हालात क्यों हैं।

लड़की की आपबीती मीडिया में प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट बताती हैं कि जिस समय नशा विरोधी कमेटी की टीम मार्च निकाल रही थी तभी उन्हें कोट ईसे खाँ के मसीता रोड पर लड़की सड़क किनारे खाना खाते हुए मिली। लड़की से सवाल-जवाब हुए तो उसने सरेआम जो कहना शुरू किया उससे सभी लोग हिल गए। लड़की ने कहा, “मुझे बस नशे के लिए छह कैप्सूल चाहिए और उसके बाद कोई मेरे साथ कोई कुछ भी करे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। एक महिला ने पहले मुझे नशे की लत लगाई और मुझे अब जिस्मफिरोशी में धकेल दिया है। मेरे जैसी कई युवतियों को हवस के भूखे भेड़ियों के समक्ष परोसती है और बदले में 300 रुपए लेती है। आधा हिस्सा 150 रुपए मुझे मिलते हैं। पहले 600-700 रुपए की कमाई होती थी पर अब जो पैसा मिलता है, उससे केवल नशे की पूर्ति हो पाती है।”

लड़की ने इस दौरान ये भी जानकारी दी कि वेश्यावृत्ति का काम अनाज मंडी में होता है। वहाँ लगे कुछ तंबू में जिस्म का सौदा करवाया जाता है लेकिन उससे पहले उन्हें नशे का आदी बनाते हैं। वो खुद जब कैप्सूल नहीं मिलती तो अस्पताल से मिलने वाली ‘बुपरीमार्फिन’ गोली पानी में मिलाकर इंजेक्शन लगा लेती है। युवती के मुताबिक ये इंजेक्शन लगाना भी उसे उसी औरत ने ही सिखाया है जिसने उसे वेश्यावृत्ति में धकेला। वहीं गोली उसे सरकारी अस्पताल के पास वाले मेडिकल स्टोर से मिल जाती है।

बच्ची की आपबीती आने के बाद पुलिस ने इस मामले को दर्ज तो कर लिया है लेकिन इसके बाद पूरे प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। पूछा जा रहा है कि जब राज्य में नशे की कैप्सूल सब बंद हैं तो इनके पास वो कैसे पहुँच रही है।

नशे से हो रही पंजाब में जिंदगियाँ बर्बाद

ये पहली बार नहीं है जब पंजाब में नशे की लत के कारण किसी की जिंदगी बर्बाद हुई हो। 1 साल पहले एक डांसर की खबर आई थी जिसकी पूरी जिंदगी नशे की लत के कारण खराब हो गई थी।
खुद उसके भाई-बहनों ने उसे पहचानने से मना कर दिया था। इसके अलावा उसका पति भी छो़डकर चला गया था। बाद में उसे घर चलाने के लिए सेक्स वर्कर बनना पड़ा। मगर जब उम्र ढली तो उसे वो काम मिलना भी बंद हो गया।
ऐसे ही एक अन्य खबर बताती है कि कैसे अमृतसर के गाँव में नशे की आदत के कारण 100 से ज्यादा महिलाओं का सुहाग उजड़ गया। रिपोर्ट के अनुसार सभी के पतियों की पिछले तीन से छह साल में नशे के कारण मौत हुई थी।
महिलाओं ने शिकायत में पुलिस पर आरोप लगाया था कि पुलिस इन नशा तस्करों को नहीं पकड़ती। नशे से हमारा भविष्य बर्बाद हो रहा है। कई लोग तो इस क्षेत्र से जा चुके हैं। हाल ऐसे हैं कि अब तो लोग यहाँ मकान खरीदने में भी संकोच करते हैं।
इसी तरह 4 दिन पहले एक खबर पंजाब के फिल्लौर से आई थी। यहाँ नशे की एक्स्ट्रा डोज लेने पर 22 साल के युवक की मौत हो गई। उसका शव पेड़ के पास पड़ा मिला। जवान बेटे की मौत की खबर सुनते ही पूरे परिवार में कोहरा मच गया।

कोर्ट बार-बार लगा चुका है फटकार

पंजाब में नशाखोरी इतने चरम पर है कि कोर्ट तक इस मामले पर राज्य की आलोचना कर चुका है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कहा था कि नशाखोरी देश के भविष्य को दीमक की तरह खा रही है। विशेष रूप से पंजाब में ये बड़ी चिंता का विषय है।
पिछले वर्ष अगस्त 2024 भी बठिंडा कोर्ट ने ड्रग तस्करों के खिलाफ सख्त स्टैंड लेने को पुलिस को आदेश दिया था। उन्होंने एक तस्कर की याचिका पर सुनवाई के दौरान पुलिस से कहा था कि वह बताएँ कि राज्य में एनडीपीएस के कितने मामले हैं, जिनमें आरोपी 6 महीने से अधिक समय से फरार हैं। अगर पुलिस द्वारा ड्रग मामलों में आरोपितों को उचित समय अवधि के भीतर गिरफ्तार नहीं किया जाता है, तो ऐसे आरोपितों को तुरंत घोषित अपराधी (पीओ) घोषित किया जाना चाहिए और कानून के प्रावधान के अनुसार बिना किसी देरी के उनकी संपत्ति जब्त की जानी चाहिए।
मार्च 2024 में भी कोर्ट ने पंजाब में पुलिस अधिकारियों से ड्रग तस्करों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी कोर्ट को देने को कही थी। हाईकोर्ट ने पंजाब की जेलों से नशे की तस्करी के बढ़ते मामलों पर टिप्पणी करते हुए इसे एसएसओसी की नाकामी बताई थी। साथ ही कहा था कि इन केसों की जाँच सीबीआई और ईडी द्वारा होनी चाहिए। पंजाब में स्थिति नियंत्रण से बाहर है और जेल अधिकारियों के खिलाफ जँच करने में पंजाब पुलिस सक्षम नहीं है।
इसी प्रकार साल 2023 में भी कोर्ट ने नशे के कारोबार और तस्करी के आँकड़ों को देख इन्हें डराने वाला बताया था। कोर्ट ने कहा था कि नशे की जड़ों को समाज से काटना बहुत जरूरी है। आरोपितों के खिलाफ न केवल एनडीपीएस का बल्कि मनी लॉंड्रिंग का मामला दर्ज होना चाहिए। अपराधियों को कम से कम 10 से 20 साल कैद की सजा सुनाई जानी चाहिए और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाना चाहिए।

पंजाब की AAP सरकार और उनके नशा मुक्त पंजाब को लेकर वादे

साल 2022 में जब पंजाब में चुनाव थे तब AAP प्रमुख केजरीवाल ने राज्य की जनता से वादा किया था कि AAP की सरकार आने के चार महीने के भीतर नशीले पदार्थ पर अंकुश लगवा देंगे। बाद में साल 2023 में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पटियाला में सभा को संबोधित करते हुए कहा ता कि वह अगले स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त 2024 तक पंजाब से चिट्टे के खतरे को खत्म कर देंगे। हालाँकि वो अपना वादा पूरा करने में विफल रहे जिसके कारण विपक्षी पार्टियों ने उन्हें घेरा भी और उनके वादे को महज ‘लॉलीपॉप’ बताया।
अवलोकन करें:-
अब हर साल-छह महीने पर खबरों में कुछ आँकड़े दिए जाते हैं। बताया जाता है कि एक अवधि में पंजाब में कितने ड्रग तस्कर पकड़े गए, कितनों के मादक पदार्थ जब्त हुए आदि। कभी मुख्यमंत्री घोषणा करते हुए कि जो गाँव नशा मुक्त होगा उन्हें विशेष अनुदान मिलेगा, तो कभी कोई टीम बनाकर नशा रोकने की बात होती है… लेकिन इन घोषणा से ज्यादा जरूरी तो ये है न कि देखा जाए जो प्रयास शुरू हुए उससे जमीनी स्तर पर क्या फर्क पड़ रहा है। अगर इसी चरण पर ध्यान नहीं दिया जाएगा तो ‘100 महिलाओं के विधवा’ होने वाली जैसी खबरें कभी आना बंद नहीं होगीं। लड़कियाँ नशे की लत लगाकर वेश्यावृत्ति में धकेली जाती रहेंगी। ड्रोन तस्करों को पकड़ लेगा लेकिन मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली नशीली दवाइयों पर कार्रवाई नहीं होगी।

कर्नाटक : मंदिर को अगर दान-चढ़ावे में मिले 1 करोड़ रूपए तो सरकार को देना होगा 10 लाख रूपए : कांग्रेस ने किया बिल पास; निशाने पर हिन्दू ही क्यों?

कर्नाटक में हिंदू मंदिरों से कर वसूलने वाला बिल पास (फोटो साभार: HerJindagi & ANI)
कर्नाटक सरकार ने हाल में ‘कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती विधेयक 2024’ पारित किया है। यह विधेयक सरकार को अधिकार देता है कि वह मंदिरों से टैक्स वसूल सकें।

कांग्रेस हिन्दू चोला ओढ़ हिन्दुओं का ही हनन करती रही है। इतिहास साक्षी है। कभी इस्लाम या ईसाई धर्म में हस्तक्षेप करने की हिम्मत नहीं। ये वही कांग्रेस जो अपने यूपीए काल में हिन्दुओं के विरुद्ध Anti-Communal Violence Bill ये तो देवी-देवताओं का आशीर्वाद है, जो यह बिल पास नहीं हो पाया। अगर दुर्घटनावश यह बिल पास हो गया होता मुग़ल आक्रांताओं के जुल्मों से कहीं अधिक जुल्म हो रहा होता।  

इस बिल के अनुसार अगर किसी हिंदू मंदिर का राजस्व 1 करोड़ है तो सरकार उनसे 10 फीसद टैक्स ले सकती है और जिनका राजस्व 1 करोड़ से कम है लेकिन 10 लाख रुपए से ज्यादा है तो उनसे सरकार 5 प्रतिशत कर ले सकती है।

बताया जा रहा है कि इस बिल में ये भी कहा गया है कि एक निगमित निकाय के मामले में सदस्यों को हिंदू और अन्य धर्मों दोनों से नियुक्त किया जा सकता है।

इस विधेयक के पारित होने के बाद प्रदेश के भाजपा नेताओं ने इसका जमकर विरोध किया। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा ने कहा कि कांग्रेस सरकार हिंदू विरोधी नीतियाँ अपनाकर अपना खाली खजाना भरना चाहती है।

उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस सरकार राज्य में लगातार हिंदू विरोधी नीतियाँ अपना रही है। अब उसकी हिंदू मंदिरों के राजस्व पर टेढ़ी नजर है। सरकार ने अपने खाली खजाने को भरने के लिए हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती विधेयक पारित किया है। सरकार हिंदू मंदिरों से धन जुटाकर अपने दूसरे उद्देश्य पूरा करेगी।

विजयेंद्र ने कहा कि सरकार 1 करोड़ से अधिक कमाई वाले मंदिरों से आय का 10% टैक्स लेगी। भक्तों द्वारा भगवान को चढ़ाए गए धन का इस्तेमाल मंदिर और भक्तों की सुविधा के लिए होना चाहिए। यदि इसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए आवंटित किया जाता है, तो यह लोगों के साथ हिंसा और धोखाधड़ी होगी। येदियुरप्पा ने आश्चर्य जताया कि कर्नाटक सरकार केवल हिंदू मंदिरों को ही क्यों निशाना बना रही है। अन्य धर्मों को क्यों नहीं?

बीजेपी द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने विजयेंद्र पर पलटवार किया। उन्होंने भाजपा पर धर्म को राजनीति में लाने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कहा- “हिंदुत्व की सच्ची समर्थक तो कॉन्ग्रेस है। लेकिन भाजपा हमेशा कॉन्ग्रेस को हिंदू विरोधी दिखाकर लाभ लेती है। पर, हिंदू धर्म के सच्चे समर्थक हम हैं, क्योंकि वर्षों से कांग्रेस ने मंदिर और हिंदू हितों की रक्षा की है।”

सनातन धर्म का अपमान कांग्रेस को ले डूबा… अपनी ही पार्टी पर बरसे आचार्य प्रमोद कृष्णम, पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद बोले – सनातन को गाली देने का नतीजा

विधानसभा चुनाव 2023 में कॉन्ग्रेस पार्टी को आचार्य प्रमोद कृष्णम और पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने दिखाया आईना
इतिहास साक्षी है कि सनातन विरोधियों का विश्व में कोई नामलेवा नहीं, एक अपवाद भारत को छोड़ कर, वह भी कांग्रेस और वामपंथियों द्वारा मुस्लिम तुष्टिकरण करते गौरवशाली हिन्दू सम्राटों के इतिहास को धूमिल कर आतताई मुगलों को महान बता दिया गया। वही स्थिति इन विधान सभा चुनावों से पूर्व सनातन धर्म पर कितने प्रहार किये सभी ने देखा। 

मानो या न मानो, तेलंगाना में भाजपा द्वारा अपने इकलौते विधायक टी राजा सिंह के विरुद्ध ओवैसी द्वारा बिछाये जाल में फंसने की बजाए राजा के साथ खड़ी होती, तेलंगाना की स्थिति भी कुछ और ही होती। सम्भावना व्यक्त की जा रही है कि भाजपा ओवैसी को ओवैसी के ही गढ़ शिकस्त दे दी होती।  ओवैसी जो अपने ही राज्य में समस्त सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने में असमर्थ है यानि अपने संसदीय क्षेत्र यानि हैदराबाद क्षेत्र को छोड़ इतने बड़े तेलंगाना में चुनाव लड़ने में पूर्णरूप से असफल हैं। ओवैसी की पार्टी AIMIM को क्षेत्रीय पार्टी भी नहीं कह सकते, ये तो मीडिया ने इसे इतना उठा रखा है। ओवैसी की पार्टी से कहीं सम्मानित समाजवादी, बहुजन समाज, जनता दल और आम आदमी पार्टी आदि पार्टियां हैं, जिनमे अपने राज्य में दबदबा होने के साथ साथ दूसरे राज्यों में जाकर जमकर चुनाव लड़ने की क्षमता रखते हैं, लेकिन ओवैसी अपने राज्य तेलंगाना में नहीं।   

देश के पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव 2023 के नतीजे लगभग आ चुके हैं। रविवार (3 दिसंबर, 2023) को चार राज्यों के चुनाव नतीजों जारी किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के रुझानों की मानें तो तीनों ही राज्यों में भाजपा सत्ता में आ रही है। इन चुनाव परिणामों के साथ ही कांग्रेस पार्टी को याद दिलाई जा रही है कि कैसे पार्टी ने सनातन धर्म का अपमान किया था, सनातन का अपमान करने वालों का जम कर साथ दिया।

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के पिछड़ने पर पार्टी नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, “सनातन (धर्म) का विरोध करने से पार्टी डूब गई है। यह सनातन (धर्म) का विरोध करने का अभिशाप है।”

उन्होंने कहा, “भारत भावनाओं का देश है और सनातन का विरोध हमें ले डूबा। जातिवादी राजनीति को इस देश ने कभी स्वीकार नहीं किया है। 6 सितंबर, 1990 का राजीव गाँधी जी का भाषण हैं संसद में वो सुन लीजिएगा। देश अगर जातिवादी होता तो विश्वनाथ प्रताप सिंह को गाँव-गाँव पूजा जाता। विश्वनाथ प्रताप सिंह जी जब मंडल लाए थे उनसे बड़ा कोई जातिवाद का कार्ड खेलने वाला नहीं था और न हुआ, लेकिन विश्वनाथ प्रताप सिंह जी की हालत इस देश में क्या हुई ये सबके सामने है। इसीलिए, जातिवादी राजनीति और सनातन का विरोध ये हमें ले डूबे।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है ये कांग्रेस की हार नहीं है बल्कि वामपंथ की हार है। कुछ दिनों से कांग्रेस में कुछ ऐसे नेता घुस आए थे और घुस आए हैं और उनका बड़ा प्रभुत्व हैं। कांग्रेस के सभी फैसलों में उनकी बड़ी भूमिका है। और वो कुछ नेता कांग्रेस को महात्मा गाँधी के रास्ते से हटाकर वामपंथ के रास्ते पर ले जाना चाहते हैं और ले जा रहे हैं। जो कांग्रेस पार्टी महात्मा गाँधी के रास्ते पर चलकर यहाँ तक आई है।”

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आगे कहा, “महात्मा गाँधी जी के सभा की शुरुआत रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम से हुई थी। आज उस कांग्रेस को सनातन के विरोधी पार्टी के रूप में देखा जा रहा है। ये दुर्भाग्य है। कांग्रेस पार्टी ने अगर ऐसे नेताओं को नहीं निकाला तो पार्टी की हालत जल्द ही AIMIM जैसी हो जाएगी। कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “कांग्रेस को महात्मा गाँधी, पंडित नेहरू, इंदिरा गाँधी राजीव गाँधी की कांग्रेस  रहने दिया जाए। पार्टी को महात्मा गाँधी के रास्ते से हटाकर मार्क्स के रास्ते पर ले जाने वाले जो नेता है। इनको बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए।” आचार्य प्रमोद ने राजस्थान और मध्य प्रदेश की हार पर कहा, “इस हार का पूरा विश्लेषण होगा। फिलहाल तो इन राज्यों के पार्टी प्रभारियों को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। अगर उनमें जरा सी भी शर्म हो। तो खुद ऐसा करना चाहिए।”

वहीं पूर्व क्रिकेटर वेंकटेंश प्रसाद ने भी सनातन धर्म का विरोध करने वालों पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर ट्वीट किया, “सनातन धर्म को गालियाँ देने वालों का बुरा नतीजा भुगतना पक्का था। प्रचंड जीत के लिए भाजपा को बहुत-बहुत बधाई। प्रधानमंत्री के अद्भुत नेतृत्व का एक और प्रमाण नरेंद्र मोदी जी और अमित शाह और जमीनी स्तर पर पार्टी कैडर के शानदार काम का नतीजा है ये चुनाव परिणाम।”

‘पाकिस्तान आ जाओ, भारत को तुम्हारी ज़रूरत नहीं’: दानिश कनेरिया, पाकिस्तानी क्रिकेटर ने कर दिया आरफा खानम शेरवानी का ‘इलाज’

भारत के मीडिया गिरोह की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी अक्सर कट्टर इस्लामी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए जानी जाती हैं। प्रोपेगंडा पोर्टल ‘The Wire’ में काम करने वाली अरफ़ा खानम शेरवानी का इस बार एक पाकिस्तानी क्रिकेटर ने ही ‘इलाज’ कर दिया है। पाकिस्तान के हिन्दू क्रिकेटर ने उन्हें ऐसा जवाब किया कि लोग वाह-वाह करने लगे। दरअसल, भारत में चल रहे वनडे वर्ल्ड कप को लेकर आरफा खानम शेरवानी देश के खिलाफ नकारात्मक माहौल बना रही थी।

उन्होंने ट्वीट कर के लिखा, “विश्व कप के मैचों के दौरान कई फैंस के निंदनीय व्यवहार से एक भारतीय के रूप में मुझे शर्म महसूस हो रही है, मैं इससे लज्जित हूँ। खेल का उद्देश्य था लोगों को एक साथ लाना, लेकिन इसे लेकर गंदा, असुरक्षित भावना और बहुसंख्यकवाद मोदी-RSS द्वारा पिछले 10 साल में बनाए गए माहौल का प्रतीक है।” उनका इशारा भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान अहमदाबाद में फैंस द्वारा ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने को लेकर था।

हालाँकि, अरफ़ा खानम शेरवानी पाकिस्तानी विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान द्वारा मैदान पर ही नमाज पढ़े जाने को लेकर खामोश रहती हैं। पाकिस्तान के हिन्दू क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने इस बार उन्हें जवाब देते हुए कहा, “अगर तुम एक भारतीय के रूप में शर्म महसूस कर रही हो तो मेरे देश पाकिस्तान में आ जाओ। भारत को तुम्हारे जैसे लोगों की ज़रूरत ही नहीं है। मैं आश्वस्त हूँ कि भारत में कई लोगों को तुम्हें पाकिस्तान भेजना का खर्च उठाने में ख़ुशी होगी।”

जैसे ही लोगों ने आरफा खानम शेरवानी को जवाब देना शुरू किया, उन्होंने ‘विक्टिम कार्ड’ निकाल लिया। उन्होंने दावा किया कि दानिश कनेरिया ने उनकी ‘ऑनलाइन लिंचिंग’ के लिए भीड़ छोड़ दी है और वो ट्विटर पर ट्रेंड कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें दुःख है कि कई धर्मों के फैंस द्वारा जिस अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर को प्यार किया गया वो अब एक सांप्रदायिक ट्रोल बन गया है। इसके बाद आरफा ने पाकिस्तान जाने से भी इनकार कर दिया और कहने लगीं कि ‘अपने देश’ को छोड़ कर दुनिया में कहीं नहीं जाएँगी।

इसके बाद दानिश कनेरिया ने आरफा खानम शेरवानी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों (भीड़, लिंच, धार्मिक, ट्रोल) पर कटाक्ष किया। उन्होंने साफ़ कहा कि उनके खिलाफ इन प्रोपेगंडा शब्दों का इस्तेमाल न किया जाए। दानिश कनेरिया ने पूछा कि क्या उन्होंने अपने ट्वीट में कहीं भी सांप्रदायिकता की बात की? दानिश ने कहा कि उन्होंने ऐसा नहीं किया। बता दें कि आरफा खानम शेरवानी अक्सर आतंकी घटनाओं पर चुप्पी साध लेती हैं या फिर इस्लामी कट्टरपंथियों का बचाव करती दिखती हैं।

घर में भी घिरे जस्टिन ट्रूडो, कनाडा के पत्रकार ने कहा- भारतीय राजनयिक को हटाना पागलपन

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर मढ़ा है। इस आरोप के बाद से भारत ही नहीं बल्कि कनाडा में भी ट्रुडो को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। कनाडा के लोग भारत के साथ संबंध खराब करने को लेकर सोशल मीडिया पर ट्रुडो की आलोचना कर रहे हैं।

कैनेडियन पत्रकार डेनियल बोर्डमैन जस्टिन ट्रुडो के बयान और भारतीय राजनयिक को देश से हटाने के उनके फैसले से हैरान हैं। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि हरदीप सिंह निज्जर की मौत में भारत का हाथ होने को लेकर एक आंतरिक रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट की जाँच चल रही है। लेकिन इस रिपोर्ट के आधार पर भारतीय राजनयिक को हटाना पागलपन की तरह है।

पत्रकार बोर्डमैन ने यह भी लिखा कि ट्रुडो और उनकी टीम का इस तरह का व्यवहार पूरी तरह से बकवास है। उन्हें नहीं लगता कि पीएम ट्रुडो के इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी प्रकार का लाभ मिलने वाला है।

जस्टिन ट्रूडो के पैरोडी अकाउंट से भी पोस्ट शेयर किया गया है। इस पोस्ट में यूजर ने लिखा, “हमारी वोटिंग अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। इसलिए मुझे कनाडाई लोगों का ध्यान भटकाने के लिए एक नई समस्या पैदा करने की आवश्यकता है। यही कारण है कि मेरी सरकार इस साल की शुरुआत में हुई एक सिख व्यक्ति की हत्या को लेकर भारत के साथ संबंधों के बारे में अचानक ही बड़ी-बड़ी बातें कर रही है। अगर लोग डरे हुए होंगे तो मुझे अधिक समर्थन मिल सकता है।”

पियरे नामक यूजर ने लिखा, “ट्रूडो प्रसिद्ध आतंकवादी प्रेमी है।”

‘ए किड फ्रॉम ब्रुकलिन’ नामक यूजर ने एक्स पर लिखा, “वह सिख वोटों लिए पूरी योजना बना रहे हैं। उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं है कि मंदिर पर हमला हो रहे हैं और वे बदला लेने की माँग करते हैं।”

एक अन्य यूजर ने भारत के खिलाफ बयानबाजी को कनाडा के लिए नुकसानदेह होने का अंदेशा जताया। यूजर ने लिखा, “यह भारत-कनाडा संबंधों के लिए बहुत बड़ा खतरा होगा। भारत एक उभरती हुई शक्ति है और मुझे नहीं लगता कि सहयोगी देश इन आरोपों पर कनाडा का पक्ष लेंगे।”

कैनेडियन सोशल मीडिया यूजर ने जस्टिन ट्रूडो पर देश के आंतरिक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस तरह की बयानबाजी करने और राजनयिक को हटाने का फैसला किया है। जेसन कुचिरका नामक यूजर ने लिखा, “मुझे लगता है कि यह सब ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। मुझे हैरानी हो रही है।”

मैडी नामक यूजर ने लिखा कि ट्रुडो भारत के खिलाफ बयानबाजी कर कनाडा के मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।

एक यूजर ने लिखा, “उन्हें झूठ बोलने या विपक्ष पर हमला करने की भी जरूरत नहीं है कि वे क्या करते हैं। उनकी बात करने की लय, उनसे कहीं अधिक खराब है। इसलिए मैं उनका थोबड़ा बिगड़ना चाहता हूँ।”

अवलोकन करें:-

‘5 दिन में देश छोड़ो’: ट्रूडो के खालिस्तानी तुष्टिकरण के बाद भारत ने कनाडा के राजनयिक को निकाला

दरअसल, खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की 18 जून, 2023 को दो अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने भारत को दोषी ठहराते हुए भारतीय राजनयिक को निष्कासित कर दिया था। भारत ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए कनाडाई राजनयिक को 5 दिन के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया है। चूँकि ट्रुडो के झूठे आरोपों से दोनों देशों के बीच संबंध खराब हो गए हैं। इसलिए कनाडा में ट्रुडो का विरोध हो रहा है।

‘हिन्दुओं को गाली देने की लगी है होड़’: कांग्रेस के प्रमोद कृष्णम् ने स्टालिन को लताड़ा, ISRO का मजाक उड़ाने वाले प्रकाश राज ने अब सनातन धर्म को कहा भला-बुरा

प्रमोद कृष्णम् ने उदयनिधि स्टालिन के बयान का किया विरोध, प्रकाश राज समर्थन में (दाएँ से बाएँ)
उदयनिधि स्टालिन के बाद अब साउथ के एक्टर प्रकाश राज ने सनातनियों का मजाक उड़ाते हुए उन्हें ‘एंटी ह्यूमन’ कहा है। वहीं, तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि के सनातन विरोधी बयान पर कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम ने हमला बोला है। साथ ही सख्त कार्रवाई की माँग की है।

प्रकाश राज ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर ईवी रामास्वामी उर्फ पेरियार और डॉ भीमराव अंबेडकर की फोटो शेयर की है। इसके साथ ही प्रकाश राज ने लिखा है, “हिंदू तनतानी नहीं हैं। तनातनी मानवता विरोधी हैं।” तनतानी या TanaThanis शब्द का उपयोग वामपंथी, इस्लामवादी और ईसाई हिंदुओं और सनातन धर्म का मजाक उड़ाने के लिए करते हैं। ऐसे में उन्होंने न केवल इशारे में सनातन धर्म का मजाक उड़ाने की कोशिश की है बल्कि अपना हिंदू विरोधी चेहरा एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है।

हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने वाला पेरियार

प्रकाश राज ने जिस ईवी रामास्वामी उर्फ पेरियार की फोटो शेयर की है। उसने ताउम्र हिंदू धर्म को लज्जित और अपमानित किया। कभी भगवानों का अपमान किया तो कभी हिन्दुओं के धर्म ग्रंथों को जलाने का संदेश दिया। पेरियार के प्रति हिन्दुओं के प्रति विचार उनके इस एक बयान से भी समझे जा सकते हैं –
“मैंने सब कुछ किया, मैंने गणेश आदि सभी ब्राह्मण देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ डालीं। राम आदि की तस्वीरें भी जला दीं। मेरे इन कामों के बाद भी मेरी सभाओं में मेरे भाषण सुनने के लिए यदि हजारों की गिनती में लोग इकट्ठा होते हैं तो साफ है कि ‘स्वाभिमान तथा बुद्धि का अनुभव होना जनता में, जागृति का सन्देश है।”
तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बेटे और राज्य के खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया के मच्छर की तरह खत्म करने की अपील की थी। उसके इस बयान पर कॉन्ग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम ने हमला बोला है। उन्होंने एक्स पर लिखा है, “सत्य ‘सनातन’ के बिना भारत की कल्पना नहीं की जा सकती। सनातन को मिटाने का ख़्वाब देखने वाले भारतीय नहीं हो सकते उदयनिधि स्टालिन ने करोड़ों सनातनियों की आस्था पर कुठाराघात किया है। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री कार्यालय उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
वहीं ANI से बातचीत में आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने कहा है, “हिंदुओं को गाली देने की नेताओं में एक होड़ सी मची हुई है। सत्य सनातन धर्म को मिटाने की कोशिशें हजारों सालों से हो रहीं हैं। लेकिन सनातन को लोग मिटा नहीं पाए। 1000 साल भारत गुलाम रहा। इस पूरे समय तक लगातार सनातन को मिटाने की कोशिशें हुईं।”
उन्होंने आगे कहा है, “महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह जी महाराज, छत्रपति शिवाजी महाराज कितने ही महापुरुषों का लहू शामिल है सनातन धर्म की शक्ति में। सनातन को मिटाने का जो ख्वाब है वह अंग्रेजों ने भी देखा, मुगलों ने भी देखा। लेकिन सनातन नहीं मिट पाया।”

उदयनिधि के खिलाफ दर्ज हुई शिकायत

सुप्रीम कोर्ट के वकील विनीत जिंदल ने उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ सनातन धर्म के खिलाफ उत्तेजक, भड़काऊ और मानहानिकारक बयान के लिए दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 120A, 153A, 295, 504 और आईटी एक्ट की धाराएँ शामिल हैं।

ट्विटर पर वायरल हो रहा बयान

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर किए गए उनके भाषण की एक वीडियो क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।

‘सनातनम को खत्म करना हमारा पहला काम’

उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना, ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”
अवलोकन करें:-
उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा कि “सनातन ​​क्या है? सनातन ​​नाम संस्कृत से आया है। सनातन ​​समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन ​​का अर्थ ‘स्थायित्व’ के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता। कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। सनातन ​​का यही अर्थ है।”

‘चुप क्यों हैं मंत्री आतिशी, जाँच में बाधा डाल रही स्वाति मालीवाल’: बाँसुरी स्वराज ने पूछा- बलात्कारी को क्यों बनाया OSD

                       बाँसुरी स्वराज (बाएँ) ने स्वाति मालीवाल (बाएँ) और आतिशी मार्लेना (दाएँ) पर साधा निशाना
दिल्ली में एक कट्टर ईसाई अधिकारी द्वारा एक बच्ची का बलात्कार करने का मामला सामने आया है। प्रेमोदय खाखा नाम का उक्त अधिकारी, जो मूल रूप से झारखंड का रहने वाला है और जो दिल्ली सरकार की महिला एवं बाल विकास (WCD) विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर काबिज था, उसे अब गिरफ्तार कर लिया गया है। उसकी पत्नी भी गिरफ्तार की गई है, जो पीड़िता को गर्भपात की गोलियाँ खिलाती थी। चर्च के माध्यम से बची का परिवार अधिकारी के परिवार के संपर्क में आया था।

ये भी सामने आया है कि बच्ची आरोपित को मामा कह कर बुलाती थी, क्योंकि उसकी माँ उसे भाई बोलती थी। अधिकारी प्रेमोदय खाखा उसके पिता का दोस्त था। लेकिन, पिता की मृत्यु के कारण वो एकदम गुमसुम सी रहती थी। अक्सर चर्च जाने वाले अधिकारी को माँ ने बेटी को जिम्मेदारी सौंप दी। माँ काम से बाहर रहती थी और फोन पर बात करती थी। जनवरी 2021 में बच्ची वापस माँ के पास आई, लेकिन उसे पैनिक अटैक आने लगे थे। काउंसिलिंग के दौरान उसने डॉक्टरों के सामने रेप-गर्भपात का खुलासा किया।

14 वर्षीय लड़की के पिता की मृत्यु के बाद अधिकारी और उसकी पत्नी उसे लेकर अपने घर आ गए। NCPCR (राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अनाथ बच्ची के डिटेल्स ‘स्वराज पोर्टल’ पर अपलोड नहीं किए गए। यानी, दिल्ली सरकार ने इस मामले में गलती की। उन्होंने चर्च का किरदार भी इस पूरे प्रकरण में संदिग्ध माना है। बलात्कार की ये घटनाएँ नवंबर 2020 से लेकर जनवरी 2021 तक चलीं। पीड़िता अब 17 साल की है और 12वीं की छात्रा है।

वहीं अब भाजपा भी इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और AAP पर हमलावर है। दिल्ली भाजपा के प्रभारी विजयंत जय पांडा ने ट्वीट करते हुए लिखा, “अब सामने आया है कि जिस अधिकारी को दोस्त की बेटी के साथ बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किया गया है, वो केजरीवाल सरकार का पसंदीदा था। इतना फेवरिट कि उसे महिला एवं बाल विकास मंत्री के OSD के पद के लिए खास तौर पर चुना गया था। इसीलिए, ‘अत्याचारी आदमी पार्टी’ से जुड़े जो लोग खुद के नैतिक रूप से श्रेष्ठ होने का दिखावा करते हैं, उन्हें शर्म आनी चाहिए।”

साथ ही उन्होंने इस आदेश के लिए जारी पत्र की तस्वीर भी शेयर की। उधर दिल्ली भाजपा की स्टेट सेक्रेटरी और दिवंगत पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की बेटी बाँसुरी स्वराज ने भी इस मामले को लेकर AAP सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने इसे बहुत ही घिनौनी और शर्मनाक हरकत करार दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के इतने वरिष्ठ अधिकारी ने एक बच्ची के साथ बार-बार दुष्कर्म किया, रोंगटे खड़े करने वाली बात ये है कि बच्ची ने अक्टूबर 2020 में पिता को खोया, इसके बाद अभियुक्त ने बच्ची को लालन-पालन के लिए अपने पास रखा, यानी एक गार्डियन की भूमिका में वो आए।

बाँसुरी स्वराज ने कहा कि इसके बाद उस बच्ची के साथ अनाचार तभी शुरू कर दिया जब वो मात्र 14 वर्ष की थी। बाँसुरी ने कहा कि इस अपराध के कारण बच्ची गर्भवती हुई और आरोपित की पत्नी ने सारे मातृत्व को ताक पर रखते हुए बच्ची को कुछ ऐसी दवाइयाँ दीं जिससे उसका गर्भपात हुआ। बाँसुरी स्वराज ने कहा कि बच्ची को इस बलात्कार के बारे में बोलने से रोका गया और ये सब इसके बाद भी जारी रहा। उन्होंने कहा कि भाजपा इस वारदात की कड़ी निंदा करती है।

उन्होंने इस दौरान मार्च 2022 की दिल्ली के सरकारी आदेश की एक प्रति दिखाई, जिसमें लिखा है कि मंत्री ने प्रेमोदय खाखा को WCD मंत्री के OSD के रूप में नियुक्त किया जाता है। उन्होंने कहा कि ये व्यक्ति AAP सरकार का चहेता है, जिसे चुना गया इस पद के लिए। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त को FIR के बावजूद निलंबन में इतना समय क्यों लग गया। उन्होंने कहा कि इस विभाग की मंत्री आतिशी हैं जो खुद एक महिला हैं, ऐसे में उनकी चुप्पी भी काफी सवाल खड़े करती हैं।

‘दिल्ली महिला आयोग (DCW)’ की अध्यक्ष बाँसुरी स्वराज ने इस दौरान उस अस्पताल में धरना दे दिया, जिसमें बच्ची को पैनिक अटैक के बाद भर्ती कराया गया है। बच्ची अभी बात करने की स्थिति में नहीं है। बाँसुरी स्वराज ने कहा कि स्वाति मालीवाल पर इस बच्ची को न्याय दिलाने का दारोमदार है, वो धरना देकर और राजनीति कर के जाँच में अवरोध पैदा कर रही है। उन्होंने इसे शर्मसार घटना करार देते हुए कहा कि भाजपा इस वेदना में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।

दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने भी इस घटना की निंदा करते हुए उस आदेश की कॉपी शेयर की, जिसमें तत्कालीन WCD मंत्री कैलाश गहलोत ने उन्हें अपना OSD नियुक्त किया था। उन्होंने भी कहा कि खास तौर पर इस अधिकारी को इस पद के लिए चुना गया था। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल को जवाब देना पड़ेगा कि एक बलात्कारी अधिकारी को इस पद के लिए क्यों चुना गया? उन्होंने स्वाति मालीवाल से भी कहा कि वो आना ड्रामा बंद करें।

‘इस जनम में नहीं छोड़ूँगा तिलक, कांग्रेस के बड़े नेताओं को चिढ़’: आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने राजस्थान में गहलोत के हार की भी कर दी भविष्यवाणी


उत्तर प्रदेश के संभल स्थित श्रीकल्कि धाम पीठ के मुख्य महंत आचार्य प्रमोद कृष्णम् के सुर आजकल बदले-बदले लग रहे हैं। वो राज्य में कांग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं में से एक हैं और प्रियंका गाँधी के करीबी माने जाते हैं। टीवी चैनलों पर भी अक्सर उन्हें पार्टी के पक्ष में बहस करते हुए देखा जा सकता है। क्या राजनीति में गहरी रुचि लेने वाले महंत का अब कांग्रेस पार्टी से मोहभंग हो रहा है? ऐसा इसीलिए, क्योंकि उनके कुछ ट्वीट्स ऐसे सामने आए हैं जो इसी तरफ इशारा करते हैं।

असल में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘कांग्रेस वर्किंग कमिटी’ का नए सिरे से गठन किया है, जिसमें 39 सदस्य हैं। साथ ही 32 परमानेंट इंवाइटिज और 13 स्पेशल इंवाइटिज के नामों की भी घोषणा की गई। हालाँकि, इसमें आचार्य प्रमोद कृष्णम् को जगह नहीं मिली। जब एक पत्रकार ने पूछा कि आखिर एक हिन्दू संत को CWC में जगह क्यों नहीं दी, तो कल्कि धाम पीठाधीश्वर के दिल का छिपा हुआ दर्द बाहर आ गया और उन्होंने ट्वीट के जरिए ही पार्टी पर निशाना साधा।

उन्होंने लिखा, “पार्टी के कुछ बड़े नेताओं को मेरी वेशभूषा और तिलक से चिढ़ है, जिन्हें मैं इस जन्म में नहीं छोड़ सकता।” यानी, उन्होंने न सिर्फ बता दिया है कि वो हिन्दू धर्म की पहचान को नहीं छोड़ सकते, बल्कि ये भी खुलासा कर दिया है कि पार्टी में कुछ लोग साधु-संतों की वेशभूषा और तिलक से नफरत करते हैं। हालाँकि, कई ट्वीट्स के माध्यम से उन्होंने होने उन साथी नेताओं को बधाई दी, जिन्हें CWC में शामिल किया गया है। पवन खेड़ा, शशि थरूर, सलमान खुर्शीद, जयराम रमेश, जितेंद्र सिंह अलवर, कुमारी शैलजा, राजीव शुक्ला और दीपेंद्र हुड्डा को उन्होंने बधाई दी।

वहीं एक अन्य ट्वीट के माध्यम से उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भी निशाना साध दिया। अशोक गहलोत ने विमान में कुछ दस्तावेजों के साथ तस्वीर डालते हुए लिखा था कि वो ‘मिशन 2030’ की तैयारी में लगे हुए हैं। इस पर कटाक्ष करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने लिखा, “भ्रष्टाचार, बलात्कार, लूट खसोट और खनन, नासिर-जुनैद की हत्या ‘लाल डायरी’ और गमन।” यानी, उन्होंने इस ट्वीट के माध्यम से भविष्यवाणी कर दी है कि राजस्थान में कांग्रेस हार रही है और अशोक गहलोत का ‘गमन’ होगा।

यहाँ यह बढ़ाना ज़रूरी है कि राजस्थान में कांग्रेस के मंत्री रहे राजेंद्र सिंह गुढ़ा को बरख़ास्त कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने महिला अपराध में राजस्थान के नंबर-1 होने को लेकर विधानसभा में अपनी ही सरकार पर तंज कसा। इसके बाद उन्होंने बताया कि सीएम अशोक गहलोत एक ‘लाल डायरी’ को जाँच एजेंसियों से छिपाना चाहते थे, जिसमें उनके भ्रष्टाचार का पूरा लेखा-जोखा है। उन्होंने कहा था कि इसी डायरी में लिखा है कि किसे कितने पैसे दिए गए। साथ ही विधानसभा में उन्होंने कांग्रेस के नेताओं पर मारपीट करते हुए ये डायरी छीनने का आरोप भी लगाया था।

ये भी जानकारी देते चलें कि उत्तर प्रदेश के संभल में कल्कि धाम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निर्माण पर लगी रोक को असंवैधानिक बताया है। मुस्लिमों की आपत्ति के 2016 में निर्माण पर जिलाधिकारी ने रोक लगा दी थी। उस समय उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा की सरकार थी। मुस्लिमों की आपत्ति के बाद संभल के तत्कालीन डीएम ने कानून-व्‍यवस्‍था बिगड़ने का हवाला देकर मंदिर निर्माण पर रोक लगा दी थी। 

72 हूरें’: सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट देने से इनकार, कहा- ‘कुरान का रेफरेंस ’ हटाओ

सेंसर बोद द्वारा नकारे जाने के बावजूद रिलीज हुआ '72 हूरें' का ट्रेलर
अशोक पंडित की फिल्म ’72 हूरें’ को सर्टिफिकेट देने से सेंसर बोर्ड ने इनकार कर दिया, जिसके बाद संस्था का खासा विरोध हो रहा है। ‘सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC)’ के अध्यक्ष प्रसून जोशी की भी लोग आलोचना कर रहे हैं। अशोक पंडित ने बताया कि एक लाश का पाँव इसमें दिखाया गया है, सेंसर बोर्ड ने जिसे हटाने के लिए कहा। साथ ही कुरान का एक रेफरेंस भी हटाने को कहा गया है।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं जब भगवान श्रीराम, हनुमान और लक्ष्मण के अलावा माँ सीता को लेकर बनी फिल्म ‘आदिपुरुष’ में देवी-देवताओं को लेकर आपत्तिजनक संवाद और दृश्य पास हो गए, फिर ’72 हूरें’ को लेकर ही क्रिएटिव फ्रीडम का मर्दन क्यों? पशुहित के नाम पर भी एक दृश्य को हटाने के लिए कहा गया है, लेकिन निर्माताओं को इससे कोई समस्या नहीं है। अशोक पंडित ने कहा कि ये नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली फिल्म है और इसे सर्टिफिकेशन सेंसर बोर्ड ने ही दिया था।

अशोक पंडित ने पूछा कि ट्रेलर में फिल्म के ही तो दृश्य हैं, फिर इससे समस्या क्यों? उन्होंने ऐलान किया कि इसके बावजूद ट्रेलर को डिजिटल रूप से रिलीज कर दिया गया है। पहले इसे PVR में रिलीज करने की योजना थी, लेकिन अब अँधेरी के एक क्लब में ये कार्यक्रम होगा। उन्होंने कहा कि वो सेंसर बोर्ड की पोल खोलेंगे, राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली एक फिल्म के ट्रेलर को रिलीज के लिए सर्टिफिकेट न देना गंभीर मुद्दा है।

IFFI में भी ’72 हूरें’ को पैनोरमा सेक्शन में अवॉर्ड मिला है। अशोक पंडित ने कहा कि सेंसर बोर्ड में कुछ बाहर के लोग बैठे हुए हैं, प्रसून जोशी को इसका जवाब देना होगा। बता दें कि फिल्म को पहले ही सेंसर बोर्ड हरी झंडी दिखा चुका है। निर्माताओं ने अब केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। संजय पूरन सिंह द्वारा निर्देशित फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो चुका है।

अशोक पंडित ने कहा, “आप विडम्बना देखिए। फिल्म में जो दृश्य है, उसे ट्रेलर में नहीं चाहिए। कुर्सी पर बैठने वालों के विरोधाभास का हम विरोध कर रहे हैं। ये फिल्म किसी भी धर्म या इंसानियत के खिलाफ नहीं है। ये आतंकवाद के खिलाफ है। जो कंटेंट्स फिल्म में हैं, वो ट्रेलर में क्यों नहीं हो सकते?” एक महिला पत्रकार ने जब प्रोपेगंडा बताया तो अशोक पंडित ने उसे करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जिन फिल्मों को देश-विदेश में करोड़ों लोगों ने स्वीकार किया, उसकी इंटेलिजेंस पर आप सवाल उठा रहे हो?