प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: GROK ai)
पंजाब सीमावर्ती राज्य है और सीमावर्ती राज्य में महिलाओं की हो रही दुर्दशा पर वहां की सरकार, प्रशासन और राजनीतिक पार्टियां चुप क्यों? इस गंभीर मुद्दे पर वहां के राज्यपाल को ही कोई सख्त कदम उठाना चाहिए। यह देखना चाहिए कि क्या पंजाब को बर्बाद करने पाकिस्तान षड़यंत्र रच रहा है। केवल चुनावों में नशे को मुद्दा बनाने की बजाए अभी मुद्दा बनाने का समय है। समय रहते वहां के विपक्ष को सचेत होना पड़ेगा।
‘नशा मुक्ति अभियान’ लंबे समय से देश के कोने-कोने में चल रहा है लेकिन इसका असर हर जगह एक जैसा नहीं है। पंजाब में AAP सरकार जोर-शोर से दावा करती कि वो राज्य से नशे का खात्मा कर देंगे। वहीं दूसरी ओर एक लड़की की आपबीती सामने आती है जो बताती है कि राज्य में नशे के कारण कैसे लड़कियों की जिंदगी बर्बाद हो रही है और उन्हें नशा दे-देकर वेश्यावृत्ति में धेकला जा रहा है।
प्रशासन के लिए अगर उस लड़की की आपबीती एक धक्का है तो सवाल उठता है कि क्या ‘नशा मुक्ति अभियान’ जमीन तक पहुँचा भी है और अगर अधिकारी ऐसी स्थितियों से वाकिफ हैं तो फिर अब तक राज्य में ऐसे हालात क्यों हैं।
लड़की की आपबीती मीडिया में प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट बताती हैं कि जिस समय नशा विरोधी कमेटी की टीम मार्च निकाल रही थी तभी उन्हें कोट ईसे खाँ के मसीता रोड पर लड़की सड़क किनारे खाना खाते हुए मिली। लड़की से सवाल-जवाब हुए तो उसने सरेआम जो कहना शुरू किया उससे सभी लोग हिल गए। लड़की ने कहा, “मुझे बस नशे के लिए छह कैप्सूल चाहिए और उसके बाद कोई मेरे साथ कोई कुछ भी करे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। एक महिला ने पहले मुझे नशे की लत लगाई और मुझे अब जिस्मफिरोशी में धकेल दिया है। मेरे जैसी कई युवतियों को हवस के भूखे भेड़ियों के समक्ष परोसती है और बदले में 300 रुपए लेती है। आधा हिस्सा 150 रुपए मुझे मिलते हैं। पहले 600-700 रुपए की कमाई होती थी पर अब जो पैसा मिलता है, उससे केवल नशे की पूर्ति हो पाती है।”
लड़की ने इस दौरान ये भी जानकारी दी कि वेश्यावृत्ति का काम अनाज मंडी में होता है। वहाँ लगे कुछ तंबू में जिस्म का सौदा करवाया जाता है लेकिन उससे पहले उन्हें नशे का आदी बनाते हैं। वो खुद जब कैप्सूल नहीं मिलती तो अस्पताल से मिलने वाली ‘बुपरीमार्फिन’ गोली पानी में मिलाकर इंजेक्शन लगा लेती है। युवती के मुताबिक ये इंजेक्शन लगाना भी उसे उसी औरत ने ही सिखाया है जिसने उसे वेश्यावृत्ति में धकेला। वहीं गोली उसे सरकारी अस्पताल के पास वाले मेडिकल स्टोर से मिल जाती है।
बच्ची की आपबीती आने के बाद पुलिस ने इस मामले को दर्ज तो कर लिया है लेकिन इसके बाद पूरे प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। पूछा जा रहा है कि जब राज्य में नशे की कैप्सूल सब बंद हैं तो इनके पास वो कैसे पहुँच रही है।











