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‘घरों पर लेटर लगा बताते थे आज किसकी होगी हत्या’: अब ‘कश्मीर फाइल्स’ की वेब सीरीज, पीड़ित खुद बताएँगे किस बुजुर्ग की टाँगों में डाली कील, कैसे आयरन प्रेस से किया टॉर्चर

वेब सीरीज 'द कश्मीर फाइल्स: अनरिपोर्टेड' के ट्रेलर का एक दृश्य (फोटोशाभर: ZEE5)
जिस जम्मू कश्मीर को कभी धरती का स्वर्ग कहा जाता था, वो अपनी राजनीतिक भूक्षेत्र के कारण एक युद्ध के क्षेत्र में बदल गया। आखिर कश्मीरी पंडितों के पलायन और अनुच्छेद-370 को हटाए जाने के पीछे क्या-क्या कारण थे? इसी सवाल का जवाब देने ZEE5 नामक OTT प्लेटफॉर्म पर ‘The Kashmir Files: Unreported’ नामक वेब सीरीज आ रही है। ये डॉक्यूमेंट्री की शक्ल में है, जिसमें पीड़ितों और विशेषज्ञों से बात की गई है।

‘The Kashmir Files: Unreported’ के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ही हैं, जिन्होंने ‘द कश्मीर फाइल्स’ बनाई थी। ट्रेलर की शुरुआत में एक महिला की आवाज गूँजती है, “कश्मीर में यश चोपड़ा फ़िल्में बना रहे थे, आप ‘शिकारा’ देखते थे। लेकिन, कश्मीर एक और अलग भी था जिसे हम देख रहे थे।” इसके बाद ‘आज़ादी-आज़ादी’ के नारे लगाती हुई भीड़ को दिखाया गया है। बैकग्राउंड में विवेक अग्निहोत्री की आवाज आती है, “ये कैसी पीड़ा थी, जिसे सहते-सहते आप मर भी जाएँ और उसका कुछ नाम ही न हो।”

इसके बाद वो महिला फिर से बताती हैं कि लाउडस्पीकर से जोर-जोर से आवाजें आती थीं – “हम क्या चाहते, आज़ादी।” एक बुजुर्ग महिला भी बताती हैं कि उस माहौल में डर लगता था, कि हम मरने वाले हैं। फिर लोगों ने बताया कि कैसे वो कहते थे कि हमें कश्मीर चाहिए, लेकिन हिन्दू महिलाओं के साथ, बिना हिन्दू मर्दों के। एक महिला ने बताया कि घर के बाहर लेटर्स लगा दिए जाते थे कि आज किसे मारा जाएगा। एक महिला ने बताया कि एक बुजुर्ग की टाँगों में कील डाल दी गई थी।

आतंकी कह रहे थे कि ये बूढ़े हैं, इन पर गोली क्यों खर्च करनी? एक व्यक्ति ने आयरन प्रेस से टॉर्चर किए जाने की बात कही। एक महिला ने बताया कि हम कश्मीरी कुत्ते-बिल्लियों की तरह मर रहे थे। स्क्रीन पर आकर विवेक अग्निहोत्री कहते हैं, “भारत के इतिहास में शायद ऐसा कभी नहीं हुआ।” फिर आतंकी बिट्टा कराटे का इंटरव्यू दिखाया गया है, जिसमें उसने कहा था कि अगर उसके आका उसकी माँ को मारने के लिए कहते तो भी वो मार देता।

बताया गया है कि कैसे पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को हथियारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। एक महिला ने कहा कि हमें इसीलिए मारा गया क्योंकि हमने भारत का प्रतिनिधित्व किया। एक पीड़ित ने बताया कि अपने देश में डर कर रहना पड़ेगा, ये नहीं पता था। विवेक अग्निहोत्री की पत्नी पल्लवी जोशी भी इसमें दिखाई देती हैं। वो कहती हैं, “इन कश्मीरी पंडितों का सत्य आखिर क्या था?” एक कश्मीरी पंडित ने रोते हुए कहा कि वो रोज घर जाना चाहिए हैं, लेकिन होटल नहीं बल्कि अपने घर में।

निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि ये इतिहास का वो चैप्टर है जिसे मिटाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन आपका हक़ बनता है कि आप इसे जानें। उन्होंने से सबसे ज्यादा मानवीय टच वाली वेब सीरीज करार दिया। बता दें कि इसे डॉक्यूमेंट्री स्टाइल में बनाया गया है। इस बारे में अधिकतर रिसर्च विवेक अग्निहोत्री और पल्ल्वी जोशी ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ बनाने के दौरान ही कर ली थी। कई कहानियाँ फिल्म में छूट गई थीं, जिन्हें तथ्यों के साथ इसमें दिखाया जाएगा।


72 हूरें’: सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट देने से इनकार, कहा- ‘कुरान का रेफरेंस ’ हटाओ

सेंसर बोद द्वारा नकारे जाने के बावजूद रिलीज हुआ '72 हूरें' का ट्रेलर
अशोक पंडित की फिल्म ’72 हूरें’ को सर्टिफिकेट देने से सेंसर बोर्ड ने इनकार कर दिया, जिसके बाद संस्था का खासा विरोध हो रहा है। ‘सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC)’ के अध्यक्ष प्रसून जोशी की भी लोग आलोचना कर रहे हैं। अशोक पंडित ने बताया कि एक लाश का पाँव इसमें दिखाया गया है, सेंसर बोर्ड ने जिसे हटाने के लिए कहा। साथ ही कुरान का एक रेफरेंस भी हटाने को कहा गया है।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं जब भगवान श्रीराम, हनुमान और लक्ष्मण के अलावा माँ सीता को लेकर बनी फिल्म ‘आदिपुरुष’ में देवी-देवताओं को लेकर आपत्तिजनक संवाद और दृश्य पास हो गए, फिर ’72 हूरें’ को लेकर ही क्रिएटिव फ्रीडम का मर्दन क्यों? पशुहित के नाम पर भी एक दृश्य को हटाने के लिए कहा गया है, लेकिन निर्माताओं को इससे कोई समस्या नहीं है। अशोक पंडित ने कहा कि ये नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली फिल्म है और इसे सर्टिफिकेशन सेंसर बोर्ड ने ही दिया था।

अशोक पंडित ने पूछा कि ट्रेलर में फिल्म के ही तो दृश्य हैं, फिर इससे समस्या क्यों? उन्होंने ऐलान किया कि इसके बावजूद ट्रेलर को डिजिटल रूप से रिलीज कर दिया गया है। पहले इसे PVR में रिलीज करने की योजना थी, लेकिन अब अँधेरी के एक क्लब में ये कार्यक्रम होगा। उन्होंने कहा कि वो सेंसर बोर्ड की पोल खोलेंगे, राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली एक फिल्म के ट्रेलर को रिलीज के लिए सर्टिफिकेट न देना गंभीर मुद्दा है।

IFFI में भी ’72 हूरें’ को पैनोरमा सेक्शन में अवॉर्ड मिला है। अशोक पंडित ने कहा कि सेंसर बोर्ड में कुछ बाहर के लोग बैठे हुए हैं, प्रसून जोशी को इसका जवाब देना होगा। बता दें कि फिल्म को पहले ही सेंसर बोर्ड हरी झंडी दिखा चुका है। निर्माताओं ने अब केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। संजय पूरन सिंह द्वारा निर्देशित फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो चुका है।

अशोक पंडित ने कहा, “आप विडम्बना देखिए। फिल्म में जो दृश्य है, उसे ट्रेलर में नहीं चाहिए। कुर्सी पर बैठने वालों के विरोधाभास का हम विरोध कर रहे हैं। ये फिल्म किसी भी धर्म या इंसानियत के खिलाफ नहीं है। ये आतंकवाद के खिलाफ है। जो कंटेंट्स फिल्म में हैं, वो ट्रेलर में क्यों नहीं हो सकते?” एक महिला पत्रकार ने जब प्रोपेगंडा बताया तो अशोक पंडित ने उसे करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जिन फिल्मों को देश-विदेश में करोड़ों लोगों ने स्वीकार किया, उसकी इंटेलिजेंस पर आप सवाल उठा रहे हो?

क्या 53 साल बाद सामने आ पाएगा लाल बहादुर शास्त्री की मौत का सच?

53 साल बाद खुलेगा लाल बहादुर शास्त्री की मौत का सच, रिलीज हुआ फिल्म का Trailer
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
इन दिनों बॉलीवुड भी पूरी तरह से चुनाव के मौसम और राजनीति के रंग में रंगा नजर आ रहा है। जहां अगले महीने की शुरुआत में पीएम मोदी की बायोपिक 'पीएम नरेंद्र मोदी' पर्दे पर आ रही है
बॉलीवुड में देश के कई मंत्रियों पर फिल्में बन चुकी हैं, इसी कड़ी में देश के दूसरे प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री पर फिल्म बनाई गई है। लाल बहादुर शास्त्री की मौत से जुड़ी इस मिस्ट्री थ्रिलर फिल्म 'द ताशकंद फाइल्स' का ट्रेलर रिलीज किया गया है फिल्म के ट्रेलर को देखकर लगता है कि इसमें कई सारे मुद्दों को उठाया गया है जो शास्त्री जी की रहस्यमयी मृत्यु से जुड़े हुए हैं फिल्म का निर्माण विवेक अग्निहोत्री ने किया है इस फिल्म में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के कई दिग्गज चेहरे काम करते नजर आ रहे हैंफिल्म का ट्रेलर शुरू होता है एक बैकग्राउंड आवाज के साथ जो बताती है कि दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी के दूसरे प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री ताशकंद जाते हैं और वहां पर पाकिस्तान के साथ 1965 की जंग को खत्म करने के लिए समझौता पत्र पर साइन करते हैं दूसरे ही दिन उनकी मौत हो जाती है सैकड़ों सवालों के बीच इस मौत पर कोई भी जांच कमेटी नहीं बिठाई जाता है? इसके बाद मिथुन चक्रवर्ती विपक्ष नेता श्याम सुंदर त्रिपाठी के रोल में बोलते नजर आ रहे हैं कि शास्त्री जी मरे या मार दिए गए? फिल्म देखने की उत्सुकता को और बढ़ा देता है
Related imageज्ञात हो, जब उनका मृतक शरीर दिल्ली लाया गया था, उनके परिवार तक को दूर रखने का भरपूर प्रयास किया था। लेकिन विधवा हुई ललिता शास्त्री के द्वारा हंगामा किये जाने उपरान्त ही पत्नी और पुत्र को उनके पास जाने दिया गया था। क्योकि ललिता शास्त्री का विरोध किसी अनहोनी का स्पष्ट दे रहा था। ताशकंत समझौते के विरोध में शास्त्री के दिल्ली आगमन पर काले झंडे दिखाए जाने की तैयारी कर चुकी तत्कालीन भारतीय जनसंघ स्तब्ध थी, परन्तु इस गुत्थी से पर्दा हटाने की किसी ओर से गंभीर मांग नहीं हुई।  
फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती के अलावा नसीरुद्दीन शाह, श्वेता बासु, पंकज त्रिपाठी, विनय पाठक, मंदिरा बेदी, पल्लवी जोशी, अंकुर राठी और प्रकाश बेलावाड़ी नजर आएंगे हैं। फिल्म 'द ताशकंद फाइल्स' 12 अप्रैल को रिलीज होगी। फिल्म में पंकज त्रिपाठी साइंटिस्ट गंगाराम झा के किरदार में नजर आएंगे तो एक्ट्रेस पल्लवी जोशी पद्मश्री लेखिका आयशा अली शाह की भूमिका में दिखेंगी। वहीं फिल्म में श्वेता बसु प्रसाद पत्रकार रागिनी फुले की भूमिका निभाती दिखेंगी
फिल्म का ट्रेलर जितना शानदार है, उससे ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि फिल्म देखने की उत्सुकता लोगों में बढ़ जाएगी। बता दें कि लाल बहादुर शास्त्री की मौत आज तक मिस्ट्री बनी हुई है। 11 जनवरी 1966 को खबर आई कि हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई है। हालांकि इस पर अभी भी संदेह बरकरार है।दो साल पहले शास्त्री जी के परिवार ने उनकी मौत से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करने की मांग सरकार से की थी
हैरानी की बात तो यह है कि "इतने वर्ष कांग्रेस से जुड़े होने के बावजूद परिवार ने अपने पिता की रहस्मयी मृत्यु की जाँच की माँग क्यों नहीं की?" आखिरकार, इस परिवार को भी वर्तमान प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी से कुछ उम्मीद नज़र आ रही है। 
मिथुन चक्रवर्ती से लेकर पंकज त्रिपाठी तक, सबकी जुबान पर एक सवाल- 'हू किल्ड शास्त्री?'
फिल्म में लाल बहादुर शास्त्री की मौत की गुत्थी को दिखाया गया है, फोटो साभार:twitter@taranadarsh

मिथुन चक्रवर्ती ने पूछा "शास्त्री जी को किसने मारा?"
कौन होगा क्या
इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती ने काफी अहम किरदार में नजर आ रहे हैं। वे यहां श्याम सुंदर त्रिपाठी की भूमिका में होंगे। उनका लुक लंबे बालों के साथ काफी अट्रेक्टिव नजर आ रहा है। 

वहीं यहां नामी एक्ट्रेस पल्लवी जोशी का भी एक पोस्टर सामने आया है। फिल्म में पल्लवी आयशा अली शाह की भूमिका में हैं। उनके लुक्स को देखकर समझ आ रहा है कि वह शायद किसी जज या वकील का रोल निभा रही हैं
पंकज त्रिपाठी एक बार फिर पूरी तरह से अपने किरदार में उतरे हुए नजर आ रहे हैं। उनका यह गेटअप बता रहा है कि पंकज फिर से तारीफ बटोरने की तैयारी में हैं। वह इस फिल्म में गंगाराम झा के किरदार में होंगे
वहीं फिल्म में श्वेता बसु प्रसाद ने रागिनी फुले की भूमिका निभाई है। उनका लुक भी पहले से काफी बदला हुआ नजर आ रहा है। गौरतलब है कि यह फिल्म 'द ताशकंद फाइल्स' भारत के चर्चित और दूसरे प्रधानमंत्री लाल बाहदुर शास्त्री की डेथ मिस्ट्री पर बनाई गई है। फिल्म का नाम 'द ताशकंद फाइल्स' रखा गया है क्योंकि लाल बाहदुर शास्त्री की मौत ताशकंद में ही हुई थी। वह उस समय पर राजनीतिक दौरे पर थे
इस ऐतिहासिक घटना पर आधारित फिल्म के निर्माता-निर्देशक विवेक अग्निहोत्री हैं। फिल्म के मुख्य किरदारों में नसीरुद्दीन शाह, मिथुन चक्रवर्ती, श्वेता बासु, पंकज त्रिपाठी, विनय पाठक, मंदिरा बेदी, पल्लवी जोशी, अंकुर राठी और प्रकाश बेलावाड़ी के नाम शुमार हैं
10 जनवरी 1966 को उज्बेकिस्तान के ताशकंद शहर में एक अंर्तराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच शांति समझौता हुआ था। इस समझौते को ताशकंद समझौता कहते हैं। इसी के अगले दिन 11 जनवरी को प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की संदिग्ध तरीके से मृत्यु हो गई थी
ये वही शास्त्री जी हैं, जिन्होंने अपने प्रधानमंत्री रहते लाहौर पर कब्ज़ा जमाया था। पुरे विश्व ने जोर लगा लिया लेकिन लाहौर देने से इनकार कर दिया था! आख़िरकार ताशकंद में उनकी रहस्यमय मौत हो गयी, जिसका आज तक पता नहीं लगाया जा सका है!
1. जब इंदिरा गांधी शास्त्री जी के के घर (प्रधान मंत्री आवास ) पर पहुँची तो कहा कि यह तो चपरासी का घर लग रहा है, इतनी सादगी थी हमारे शास्त्रीजी में...
2. जब 1965 में पाकिस्तान से युद्ध हुआ तो वे भारतीय सेना का मनोबल इतना बढ़ा दिये थे कि भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना को गाजर-मूली की तरह काटती चली गयी थी और पाकिस्तान का बहुत बड़ा हिस्सा जीत लिया था।
3. जब भारत पाकिस्तान का युद्ध चल रहा तो अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाने के लिए कहा था कि भारत युद्ध खत्म कर दे नहीं तो अमेरिका भारत को गेहूँ देना बंद कर देगा,तो इसके जवाब में शास्त्री जी ने कहा था कि हम स्वाभिमान से भूखे रहना पसंद करेंगे,किसी के सामने भीख मांगने की जगह. वे देशवासियों से निवेदन किये थे कि जब तक अनाज की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक सब लोग सोमवार का व्रत रखना चालू कर दें और खाना कम खाया करें।
4. जब शास्त्री जी ताशकंद समझोते के लिए जा रहे थे तो उनकी पत्नी ने कहा था कि अब तो इस पुरानी फटी धोती की जगह नई धोती खरीद लीजिये, तो शास्त्री जी ने कहा इस देश मे अभी भी ऐसे बहुत से लोग हैं जो फटी हुई धोती पहनते हैं. इसलिए मै अच्छे कपडे कैसे पहन सकता हूँ? क्योंकि वे उन गरीबों के ही नेता थे अमीरों के नहीं. वे अपनी फटी पुरानी धोती को अपने हाथ से सिलकर ताशकंद समझोते के लिए गए।
5. जब पाकिस्तान से युद्ध चल रहा था तो शास्त्री जी ने देशवासियों से कहा कि युद्ध में बहुत रूपया खर्च हो सकता है. इसलिए सभी लोग अपने फालतू के खर्च कम कर दें और जितना हो सके सेना को धन राशि देकर सहयोग करें । खर्च कम करने वाली बात शास्त्री जी ने अपने खुद के दैनिक जीवन में भी उतारी । उन्होने अपने घर के सारे काम करने वाले नौकरों को हटा दिया था और वे खुद ही अपने काम करते थे.
6. शास्त्री जी दिखने में जरूर छोटे थे, पर वे सच में बहुत बहादुर और स्वाभिमानी थे.
7. जब शास्त्री जी की मृत्यु हुई तो कुछ नीच लोगों ने उन पर इल्ज़ाम लगाया की वे भ्रष्ट थे. पर जांच होने के बाद पता चला कि उनके बैंक खाते में मात्र365/- रूपये थे। इससे पता चलता है कि शास्त्री जी कितने ईमानदार थे.
8. शास्त्री जी अभी तक के एक मात्र ऐसे प्रधान मंत्री रहे हैं जिन्होंने देश के बजट मे से 25 प्रतिशत सेना के ऊपर खर्च करने का फैसला लिया था । शास्त्री जी हमेशा कहते थे कि देश का जवान और किसान सबसे महत्वपूर्ण हैं. इसलिए इन्हे कोई भी तकलीफ नहीं होना चाहिए. शास्त्री जी ने 'जय जवान जय किसान' का नारा दिया.
9. चर्चा है कि जब शास्त्रीजी ताशकंद गए थे तो उन्हें जहर देकर मार दिया गया था और देश मे झूठी खबर फैला दी गयी थी की शास्त्री जी की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई । और आज तक इस बात पर से पर्दा नहीं हटा है.
10. शास्त्री जी जातिवाद के खिलाफ थे. हम धन्य हैं कि हमारी भूमि पर ऐसे स्वाभिमानी और देश भक्त इंसान ने जन्म लिया । यह बहुत गौरव की बात है कि हमें शास्त्री जी जैसे प्रधान मंत्री मिले.