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पंजाब : AAP नेता के करीबी नितिन बजाज ने ED को देख 9वीं मंजिल से फेंका 21 लाख रूपए से भरा बैग, नीचे ‘कैच’ करने को तैयार था ड्राइवर

                                                                                                                        साभार: इंडियन एक्सप्रेस

पंजाब में गुरुवार (7 मई 2026) को ED ने हवाला मनी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की। मोहाली के खरार इलाके में ED की टीम ने आईटी प्रोफेशनल नितिन बजाज के घर पर भी रेड डाली। इस दौरान बिल्डिंग से नकदी से भरा बैग फेंके जाने का वीडियो भी सामने आया है।

नितिन बजाज को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के करीबी सहयोगी और OSD से जुड़ा माना जाता है। पंजाब सरकार के प्रवक्ता के अनुसार, “टीम को आते देख किसी ने इमारत की नौवीं मंजिल से नकदी से भरा बैग नीचे फेंक दिया, जिसे नीचे खड़े एक ड्राइवर ने उठा लिया। हालाँकि टीम ने घटना को भांप लिया और भाग रहे ड्राइवर को बैग के साथ पकड़ लिया।”

बिक्रम सिंह मजीठिया के अनुसार, उनके पास से लगभग 21 लाख रुपए नकद बरामद हुए। मजीठिया ने दावा किया कि बरामद की गई रकम पंजाब सीएम के OSD के करीबी सहयोगियों और रिश्तेदारों की है। हालाँकि ED की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर जब्त रकम या मामले के पूरे विवरण का खुलासा नहीं किया गया है।

मोहाली में बिर देविंदर सिंह के ठिकानों पर भी जाँच एजेंसी पहुँची, जिन्हें भी AAP से जुड़े एक प्रभावशाली पदाधिकारी का करीबी बताया जा रहा है। पूरा मामला हवाला लेनदेन, संदिग्ध फंडिंग और वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़ा माना जा रहा है। फिलहाल ED की जाँच जारी है।

‘मजहब’ के नाम पर फिदायीन बनते हैं, पर लिबरल-इस्लामी गैंग चाहता है कि ‘मजहब’ की बात न हो; अजित भारती द्वारा 'डॉक्टरों' की गिरफ्तारी पर बिलखती 'बुआओं' का धुंआधार रोस्ट, देखिए वीडियो

   दिल्ली ब्लास्ट के फिदायीन उमर नबी के वायरल वीडियो पर उदारवादी-मुस्लिम और इस्लामी कट्टरपंथी तिलमिलाए (फोटो साभार: NDTV)
कैसी अजीब विडंबना है कि इस्लाम के नाम पर आतंकवाद करेंगे लेकिन उनके गुर्गे कहते हैं इस्लाम का नाम मत लो। भारत में जयचन्दों की कभी कमी नहीं रही। एक ढूंढने निकलोगे हज़ार मिल जाएंगे। जयचन्द तो मर गया लेकिन अपने वंशज छोड़ गया। हिन्दू राज में जयचन्द चंद चांदी के टुकड़ों के लालच में मुग़ल आक्रांताओं को भारत में घुसा गया। खैर अब आतंकवादियों के साथ-साथ इन जयचन्दों का हिसाब होना शुरू हो चुका है। अगर आतंकी और उनके गुर्गे भारत को गजवा-ए-हिन्द बनाने का असफल प्रयास कर रहे हैं जब 2014 से पहले नहीं कर पाए तो अब क्या क्या करेंगे। 2014 चुनावों से पहले कोशिश तो बहुत हुई थी लेकिन तपस्वियों के तप ने उनके नापाक मंसूबे पूरे नहीं होने दिए। ये भारत ऋषि-मुनियों के तप की भूमि है। उसी तप ने सनातन की समर्पण किए वेद, पुराण, भागवत गीता, शास्त्र, उपनिषद, महर्षि वाल्मीकि ने रामायण, महर्षि वेदव्यास ने महाभारत और  अनेकों महाकाव्य आदि।       

दिल्ली में लाल किला के पास धमाका करने वाले आतंकी उमर नबी का हाल ही में एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में उमर ‘सुसाइड बॉम्बिंग’ यानी फिदायीन बनने को सही ठहरा रहा है। वह इसे ‘शहादत का ऑपरेशन’ बताकर पेश करता है। यह वीडियो उन उदारवादी-बुद्धिजीवियों और इस्लामी कट्टरपंथियों की आँखों पर ढकी उस सच्चाई को दिखाता है, जो दावा करती हैं कि ‘आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता’ है। शायद इसीलिए ऐसे लोगों को वीडियो बाहर आने से परेशानी हो रही है।

आज(21 नवम्बर) को TimesNow नवभारत के अनुसार 7 महीनों में 40 करोड़ का लेन-देन होने के साथ-साथ बम बनाने के वीडियो बरामद हुए।   

ये लोग मीडिया पर इस वीडियो को प्रसारित करने के लिए सवाल उठा रहे हैं और चाहते हैं कि मजहब की बात न हो। वीडियो सामने आने पर मजहब के लिए फिदायीन बनने वाले उमर नबी का महिमामंडन करने में भी लगे कुछ कुछ इस्लामी कट्टरपंथी को यकीन नहीं हो रहा कि एक डॉक्टर इस तरह की चरमपंथी सोच में शामिल कैसे हो सकता है? वे आतंकवादी की मुस्लिम पहचान को अब भी नकार रहे हैं।

उमर नबी के वीडियो का अनुवाद

उमर नबी ने यह रोंगटे खड़े करने वाला वीडियो दिल्ली में धमाका करने से ठीक पहले रिकॉर्ड किया था। वीडियो में वह बिल्कुल प्रोफेशनल अंग्रेजी भाषा में बात कर रहा है। यह उस ‘व्हाइट कॉलर आतंकवाद’ का सबूत है, जिसका पिछले कई दिनों से जाँच एजेंसियाँ पर्दाफाश करने में लगी हुई हैं। फरीदाबाद, सहारनपुर से लेकर कश्मीर तक अब तक 5 से अधिक डॉक्टर पेशे आतंकी पकड़े जा चुके हैं।

वीडियो में उमर नबी कहता है, “आत्मघाती हमलों का सबसे अहम मुद्दा यह है कि जब कोई व्यक्ति यह मान लेता है कि वह किसी तय समय और स्थान पर निश्चित रूप से मरने जा रहा है तो वह एक खतरनाक मानसिकता में चला जाता है। वह खुद को एक ऐसी स्थिति में रखता है, जहाँ वह मान लेता है कि मौत ही उसकी एकमात्र मंजिल है।”

उमर नबी आगे कहता है, “हकीकत यह है कि किसी भी लोकतांत्रिक और मानवीय व्यवस्था में ऐसी सोच या ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह जीवन, समाज और कानून तीनों के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।”

ऐसा पहली बार हुआ है जब आत्मघाती हमले के आतंकी का वीडियो सामने आया है। वीडियो सामने आने से काफी लोगों को परेशानी तो हुई, लेकिन यह कहना गलत नहीं है कि ऐसे वीडियो समाज में फैलने चाहिए ताकि भारत का हर नागरिक इस्लामी कट्टरपंथी की सोच वाली ‘सुसाइड बॉम्बिंग’ को सही ठहराने वाले लोगों से बचकर रह सके। क्या पता ऐसे इस्लामी कट्टरपंथी हमारे आसपास ही घूम रहे हों।

लिबरल का ‘इस्लाम से आतंकी विचारधारा’ को ढकने की तमाम कोशिश

वहीं आतंकी उमर नबी की इस वीडियो पर कुछ लिबरल और बुद्धिजीवी तिलमिला गए। ऐसे लोगों ने वीडियो को ‘संवेदनशील’ बताया और आतंकी की छवि पर पर्दा डालने के साथ-साथ इस ‘इस्लाम’ से जोड़ने पर नाराजगी जाहिर की। यह उनका हमेशा वाला प्रोपेगेंडा है। जो सिर्फ ‘मुस्लिमों की हिंसा और क्राइम’ पर आम लोगों को भटकाने की कोशिश में लगे रहते हैं। ये लोग सबसे पहले मीडिया को निशाना बनाते हैं।

ऐसी ही एक इस्लामी कट्टरपंथी RJ सैयमा ने आतंकी उमर नबी की वीडियो सामने लाने वाली मीडियो को निशाना बनाया लेकिन ‘सुसाइड बॉम्बिंग’ को सही ठहराने वाले इस आतंकी के खिलाफ एक शब्द भी नहीं लिखने से कतराई। सैयमा ने लिखा, “मेनस्ट्रीम न्यूज मीडिया आतंकी का वो वीडियो क्यों शेयर कर रहे हैं! ये बहुत ही विचलित करने वाला है और मैं सोच भी नहीं सकती कि इसे देखकर पीड़ितों के परिवारों पर क्या बीत रही होगी! सनसनीखेज TRP का ये दौर कितना विचलित करने वाला है! बिल्कुल निंदनीय।”

                                           सैयमा के पोस्ट का स्क्रीनशॉट (साभार: X- @_sayema)

यहाँ सैयमा की ही तरह द हिंदू (The Hindu) की डिप्टी एडिटर विजेता सिंह लिखती हैं, “उस आत्मघाती हमलावर का वीडियो पोस्ट करना बंद करो, तुम बस उसके जहरीले बयान को बढ़ावा दे रहे हो।”

 विजेता सिंह के पोस्ट का स्क्रीनशॉट (साभार: X-@vijaita)

इसी क्रम में लिबरल सोच वाली ऋचा द्विवेदी भी अपनाी ‘अलोकप्रिय राय’ लिखती हैं, “डॉक्टर से आत्मघाती हमलावर बने व्यक्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर नहीं होना चाहिए और इसे निश्चित रूप से टेलीविजन पर प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए।”

                            ऋचा द्विवेदी के पोस्ट का स्क्रीनशॉट (साभार: X- @RichhaDwivedi)

कुछ इस्लामी कट्टरपंथी को वीडियो सामने आने से ‘असहज’ हो जाते हैं और सवाल करते हैं, “जब जाँच पूरी नहीं हुई है तो यह वीडियो, निगरानी फुटेज, जाँच संबंधी जानकारी आदि मीडियो को कौन दे रहा है?”   

                                         एक्स यूजर का स्कीनशॉट (साभार: @salman_sayyid)                                   

वहीं इन इस्लामी कट्टरपंथियों को यकीन नहीं होता कि आखिर एक डॉक्टर इस तरह की चरमपंथी सोच वाला कैसे हो सकता है। ये लोग ‘आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता’ वाले मनगढ़ंत बयान को उछालने में लग जाते हैं। एक एक्स यूजर ने लिखा, “यह वीडियो एक स्पष्ट चेतावनी है कि आतंकवाद धर्म, शिक्षा या पेशेवर पृष्ठभूमि तक सीमित नहीं है। यह एक खतरनाक विकृति है, एक सामाजिक रोग है जो हमारे युवाओं के मन में घर कर गया है और हमारे समाज के ताने-बाने के लिए खतरा बना हुआ है।”

                            एक्स यूजर के पोस्ट का स्क्रीनशॉट (फोटो साभार: X- @tabishhaji)

इन लिबरल और इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा वाले लोगों ने आतंकवाद एक धर्म तक सीमित नहीं है वाले प्रोपेगेंडा को बढ़ाने की तमाम कोशिश की। यहाँ तक कि मीडिया पर वीडियो उजागर करने को लेकर सवाल उठाया। ये लोग दिल्ली ब्लास्ट में मारे गए 15 लोगों की जान गवाने वाले परिवारों का दर्द तो समझ रहे हैं लेकिन इस्लामी कट्टरपंथ से बढ़ते आतंक को नजरअंदाज कर देते हैं।

लिबरल और इस्लामी कट्टरपंथियों का दोहरा सच

इससे यह साफ हो गया कि उमर नबी का वीडियो सामने आते ही लिबरल और इस्लामी कट्टरपंथियों को जो बेचैनी दिखी, वह दरअसल उनकी अपनी दोहरी राजनीति का पर्दाफाश है। यह वही लोग हैं जो हर मंच पर सच दिखाने का दावा करते हैं लेकिन जैसे ही कोई वीडियो उनकी पसंदीदा कथाओं पर चोट करता है, तुरंत उसे छिपाने में लग जाते हैं।

आतंकी उमर नबी का वीडियो ‘सुसाइड बॉम्बिंग’ को सही ठहराता है, उसे इस्लाम में जरूरी बताता है और युवाओं को हिंसा की राह पर धकेलने के लिए प्रभावित करता है। लेकिन इस जहर पर इन कथित लिबरल की जुबान अचानक सिल जाती है। इनके लिए आतंक का समर्थन करने वाला ‘भटका हुआ नौजवान‘ होता है, जबकि यही लोग गुजरात दंगों में ‘बाबू बजरंगी’ के स्टिंग ऑपरेशन की क्लिप्स दुनिया को दिखाना चाहते हैं। क्योंकि वहाँ एजेंडा पूरा होता है।

ये वही लोग है जो हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर आंतकी बुरहान वानी को ‘हेडमास्टर का बेटा’ कहकर भावनात्मक एंगल देते हैं और लेकिन ‘सुसाइड बॉम्बिंग’ को सही ठहराने वाले उमर नबी पर खामोश रहते हैं। उमर नबी का ठीक दिल्ली ब्लास्ट से पहले ‘सुसाइड-बॉम्बिंग’ पर वीडियो बनाने की यही वजह होगी, क्योंकि इन आतंकियों को पता है कि भारत के लिबरल इनके अपराध को ‘शहादत’ बताने के लिए अब भी बैठे हैं।

बिहार : कांग्रेस की मोहब्बत की दुकान में दे-दनादन ; पूर्व MLC अजय सिंह घायल, सुनील सिंह का फटा सिर

                                            कांग्रेस ऑफिस में दो गुटों में हिंसक भिड़ंत (साभार पत्रिका) 
बिहार के भोजपुर जिले में गुरुवार(10 जुलाई 2025) को कांग्रेस पार्टी के दो गुटों में भयंकर मारपीट हुई। यह हंगामा कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक बैठक के दौरान हुआ। इस मारपीट में पार्टी के नेता शिवकुमार सिंह के बेटे और कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता सुनील कुमार सिंह का सिर भी फट गया है।

भोजपुर में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और छत्तीसगढ़ के भिलाई विधानसभा के विधायक देवेंद्र यादव के आगमन पर आयोजित अभिनंदन एवं स्वागत कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसी बीच दो गुटों ने आपस में मारपीट शुरु कर दी। इसी दौरान दो गुटों के बीच मारपीट होने लगी। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ है।

इसमें कार्यकर्ता एक-दूसरे पर लात-घूसे चलाते दिखाई दे रहें हैं। हमले में गंभीर रुप से घायल सुनील कुमार ने बताया कि वे बीच-बचाव कर रहे थे। इस दौरान करीब 10 लोगों ने उन्हें पकड़ लिया और गाली-गलौज करते हुए उनके सिर पर ईंट से हमला कर दिया। नवादा थानाध्यक्ष विपिन बिहारी ने बताया कि आवेदन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अवलोकन करें:-

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, कांग्रेस कार्यालय में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक चल रही थी। इसी दौरान दोनों गुटों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। मारपीट में सुनील कुमार सिंह का सिर फट गया, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद पूर्व एमएलसी अजय सिंह अपने घायल समर्थक के साथ नवादा थाना पहुंचे और आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की। इस घटना ने कांग्रेस की अंदरूनी कलह को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

नहाती हुई महिला, कपड़े बदलती हुई महिला… महाकुंभ की फोटो-वीडियो बता बेच रहे थे डार्क बेव पर: UP पुलिस हुई सख्त तो कई अकाउंट हुए बंद, ‘पत्रकार’ कामरान पहुँचा हवालात

महाकुंभ को बदनाम करने के क्रम में सोशल मीडिया पर हिंदू लड़कियों की इज्जत उछालने का मामला प्रकाश में आया है। पता चला है कि सोशल मीडिया पर कुछ अकॉउंटों से लड़कियों की नदियों में नहाते हुए फोटो-वीडियो साझा की जा रही है। इसके अलावा ये भी जानकारी सामने आई कि लड़कियों के नहाने की वीडियो को डार्क वेब पर बेचा जा रहा है। उन्हें टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर कुछ हजार रुपयों में वायरल करने का काम हो रहा है।

पुलिस ने अब इन शिकायतों की जाँच करनी शुरू कर दी है। वीडियोज डार्क वेब पर बेची गईं या नहीं, इसकी जाँच के लिए पुलिस ने इंस्टाग्राम के हेडऑफिस कैलिफोर्निया को एक ईमेल भेजकर अकाउंट की डिटेल्स माँगी है। साथ ही जिन अकॉउंट ने लड़कियों के नहाने की फोटो साझा करते हुए महाकुंभ को बदनाम करने की कोशिश की है उनके ऊपर भी पुलिस ने एक्शन लेना शुरू कर दिया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने कामरान अलवी नाम के कथित पत्रकार को गिरफ्तार किया है। उसने महिलाओं की नदी में नहाने की एक वीडियो को शेयर किया हुआ था और लिखा था- संगम घाट का भव्य नजारा। पुलिस ने इस वीडियो को देखने के बाद कामरान अलवी को अरेस्ट कर लिया है।

वहीं अन्य लोगों की भी छानबीन कर रही है जिन्होंने महिलाओं की ऐसी वीडियो प्रसारित करने का काम किया। जानकारी के मुताबिक इस मामले में कुंभ मेला प्रयागराज के साइबर थाने में सब इंस्पेक्टर पूजा रायकवार ने एक इंस्टाग्राम अकाउंट के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा–79, 353, IT एक्ट की धारा–67 में 17 फरवरी को FIR कराई है। एफआईआर में बताया गया है कि आईडी में महिलाओं के नहाने के वीडियो डाले गए हैं। अब पुलिस इस केस की जाँच कर रही है।

ये भी कहा जा रहा है कि इन वीडियोज को बनाने के बाद टेलीग्राम ग्रुप पर 1900 से 4000 रुपए तक में बेचा जा रहा है। इसकी सच्चाई क्या है पुलिस लगातार इसे जानने का प्रयास कर रही है। वहीं जो कोई भी महाकुंभ पर झूठ फैलाने का या महिलाओं की इज्जत से छेड़छाड़ करने का काम कर रहा है उनपर कार्रवाई हो रही है। जानकारी के मुताबिक कुंभ में अब तक सोशल मीडिया से जुड़ी 12 एफआईआर दर्ज हो चुकी है। एक टेलीग्राम चैनल ‘सीसीटीवी चैनल 11’ पर भी कार्रवाई हुई है।

बांग्लादेश की हिंदू महिलाओं ने बताई दुर्दशा, कहा- मुँह बाँधकर किया रेप, काटना चाहते थे गला: बेटियों को बचाने के लिए हमने अपना सब कुछ दे दिया

हिंदू वॉयस द्वारा एक्स पर साझा किए गए वीडियो का स्क्रीनशॉट
बांग्लादेश में सत्ता विरोधी प्रदर्शन हिंदू विरोधी हिंसा में तब्दील हो चुके हैं। हिंदुओं के घरों और मंदिरों को खास तौर पर दुश्मनी में हमले हो रहे हैं। शेख हसीना के इस्तीफे के बाद, हिंदुओं के घरों में लूटपाट, तोड़फोड़ और हिन्दू महिलाओं के साथ रेप की कई घटनाएँ भी सामने आई हैं। बांग्लादेश में हिन्दुओं की हत्याएँ और मंदिरों में तोड़फोड़ बड़े स्तर पर जारी है।

ढाका के नाटोरे, धामराई, पटुआखाली के कालापारा, शरीयतपुर और फरीदपुर में हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया है। इसके साथ ही जेसोर, नोआखाली, मेहरपुर, चाँदपुर और खुलना में भी हिन्दू घरों को भी निशाना बनाया गया है। दिनाजपुर में 40 हिंदू दुकानों में तोड़फोड़ की गई है।

बांग्लादेश की कई हिंदू महिलाएँ इस्लामी भीड़ के हाथों हुए अत्याचार की कहानी बताने के लिए आगे आई हैं। गुरुवार (8 अगस्त, 2024) को हिंदू वॉयस द्वारा एक वीडियो साझा किया गया है। यह वीडियो बांग्लादेश के पिरोजपुर जिले के विभिन्न इलाकों में रहने वाली कई हिंदू महिलाओं का है। इसमें उन हिन्दू महिलाओं को अपनी दुर्दशा बताते हुए सुना जा सकता है। 

इस्लामी कट्टरपंथियों के हाथों हिंसा का शिकार हुई एक हिंदू महिला ने बताया, “वह तलवारों और धारदार हथियारों के साथ आए थे। उन्होंने सब कुछ लूट लिया। अपनी बेटियों को बचाने के लिए, हमने उन्हें अपना सब कुछ दे दिया।”

एक अन्य हिंदू महिला ने रोते हुए बताया, “रात में वो लोग आए। उन्होंने हमारे घरों में तोड़फोड़ की और सब कुछ लूट लिया। हम इस दौरान छिप गए थे। उन्होंने मेरे साले की पत्नी को पकड़ लिया और उसे दूसरे कमरे में ले गए। उन्होंने उसके साथ रेप किया। बाद में, हमें वह मिली। उसका चेहरा कपड़ों से बंधा हुआ था। वह उसका गला भी काटना चाहते थे। उसे बचाने के लिए, हमने उन्हें सारे सोने के जेवर दे दिए।”

एक दूसरी पीड़ित महिला ने बताया, “उन्होंने हमें चेतावनी देते हुए कहा कि हमारे पचास लोगों ने तुम्हारे घर को घेर लिया है, तुम्हारे पास भागने का कोई रास्ता नहीं है। इसके बाद उन्होंने सब कुछ लूट लिया। उन्होंने मुझे पकड़ लिया और बिस्तर पर ले गए। उन्होंने जान से मारने की धमकी दी। मैंने उनसे विनती की कि या तो मुझे छोड़ दें या मुझे मार दें। दंगाइयों ने मुझसे कहा कि मेरे पास जो भी कीमती सामान है, उन्हें दे दूँ। इसके बाद मैंने उन्हें अपने सारे गहने दे दिए, इसलिए वह सभी मुझे छोड़कर चले गए।”

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले लगातार जारी

इससे पहले, ऑपइंडिया ने कुछ बांग्लादेशी हिंदुओं से बात की थी। उन्होंने हमें बताया कि हिंदुओं के लिए स्थिति और लगतार खराब होती जा रही है। ऑपइंडिया से बात करते हुए बांग्लादेश के हिंदुओं ने बताया कि शेख हसीना के इस्तीफे के बाद से जमात-ए-इस्लामी के सदस्य हिंदू व्यवसायों और हिंदू घरों की लिस्ट बना रहे हैं।
अपनी सुरक्षा के लिए डरते हुए उन्होंने नाम ना बताने की शर्त पर बताया कई लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने में असमर्थ हैं। उन्होंने बताया कि जमात-ए-इस्लामी और अन्य इस्लामी कट्टरपंथी बंदूकों के साथ सड़कों पर घूम रहे हैं, इससे उनके लिए सुरक्षित स्थानों पर जाना असंभव हो गया है।
5 अगस्त को बताया गया था कि जिहादियों ने शेख हसीना सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की आड़ में बांग्लादेश में हिंदुओं के घरों, दुकानों और मंदिरों पर हमला किया था। प्रधानमंत्री पद से हसीना के इस्तीफे के बावजूद, विरोध प्रदर्शन जारी रहे और हिंदुओं पर हमले भी हुए।

पश्चिम बंगाल की ‘शरिया अदालत’ : मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे सर झुका चुकी ममता: महिला मुख्यमंत्री होते भीड़ के सामने महिला को जमीन पर पटक कर पीटता ताजेमुल उर्फ़ JCB: TMC विधायक हमीदुर रहमान का है करीबी

                                   पश्चिम बंगाल के चोपरा में महिला की खुलेआम पिटाई
पश्चिम बंगाल से हिंसा का एक और वीडियो सामने आया है। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान यहाँ TMC (तृणमूल कांग्रेस) के गुंडों द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा की खबरें आई थीं। कइयों को पलायन करना पड़ा था, भाजपा ने एक जाँच समिति बना कर भी वहाँ भेजा था जिसकी रिपोर्ट पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा को भी सौंपी जा चुकी है। अब नया वीडियो सामने आने के बाद पार्टी के IT सेल के मुखिया व राज्य में प्रभारी अमित मालवीय ने निशाना साधा है।

उन्होंने इस वीडियो को शेयर करते हुए कहा है कि पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासन का ये एक एक भयावह चेहरा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ के बीच एक महिला और एक पुरुष को जमीन पर पटक कर पीटा जा रहा है। आरोपित की पहचान ताजेमुल के रूप में हुई है, जिसे स्थानीय लोग JCB नाम से बुलाते हैं। वो ‘त्वरित न्याय’ देने के लिए जाना जाता है, उसकी नज़र में पुलिस-कोर्ट की कोई हैसियत नहीं। अमित मालवीय ने बताया है कि चोपरा के विधायक हमीदुर रहमान का वो करीबी है।

अमित मालवीय ने कहा, “भारत को TMC द्वारा संचालित पश्चिम बंगाल में शरिया अदालतों की वास्तविकता से अवगत होना चाहिए। हर गाँव में एक संदेशखाली है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी महिलाओं के लिए अभिशाप हैं। पश्चिम बंगाल में कानून और व्यवस्था का कोई नामोनिशान नहीं है। क्या ममता बनर्जी इस राक्षस के खिलाफ कार्रवाई करेंगी या उसका बचाव करेंगी जैसे उन्होंने शेख शाहजहाँ के लिए खड़ी हुई थीं?” बता दें कि संदेशखाली में जनजातीय समाज की महिलाओं का यौन शोषण करने वाले शेख शाहजहाँ और उसके गुर्गों को बचाने के लिए बंगाल सरकार ने दिन-रात एक कर दिया था।

ये घटना पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर स्थित चोपरा के लक्ष्मीकांतपुर की बताई जा रही है। ‘राष्ट्रीय महिला आयोग’ (NCW) को भी इससे अवगत करा दिया गया है। पश्चिम बंगाल में इस तरह से एक इस्लामी कट्टरपंथी द्वारा ‘कंगारू कोर्ट’ चलाए जाने का वीडियो आने के बाद एक बार फिर से राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। भाजपा के कई कार्यकर्ता अब तक पार्टी दफ्तर में परिवार के साथ रहने को मजबूर हैं। गाँव के गाँव खाली हो गए हैं।

‘अभिव्यक्ति की आज़ादी के बहाने झूठ फैला कर किसी को बदनाम नहीं कर सकते’: हटाओ रजत शर्मा वाला वीडियो: दिल्ली हाईकोर्ट से कॉन्ग्रेस नेताओं को झटका : बीजेपी को सीख लेनी चाहिए


न्यूज़ चैनल ‘India TV’ के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा को मानहानि के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने राहत दी है। साथ ही कांग्रेस नेताओं को रजत शर्मा के खिलाफ किए गए ट्वीट्स डिलीट करने के लिए कहा गया है। ‘आप की अदालत’ इंटरव्यू शो के लिए लोकप्रिय रजत शर्मा पर कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि पार्टी की प्रवक्ता रागिनी नायक को उन्होंने बीच शो में धीमे से गाली दी। हालाँकि, वीडियो में गाली सुनाई नहीं दे रही है।

रजत के इस प्रकरण से बीजेपी को सीख लेनी चाहिए। इसी चुनाव के दौरान कांग्रेस द्वारा बीजेपी के विरुद्ध इतना दुष्प्रचार किया गया, जनता द्वारा चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करवाई जा रही है, लेकिन बीजेपी को कोर्ट जाना था, कांग्रेस विजेताओं को अयोग्य घोषित करवाना चाहिए। क्या कर रहे गौरव भाटिया, निमेष पाठक और रवि शंकर प्रसाद और विधि प्रकोष्ठ आदि? 

कांग्रेस के कम्युनिकेशन विभाग के सेक्रेटरी इंचार्ज जयराम रमेश, मीडिया एवं पब्लिसिटी डिपार्टमेंट के चेयरमैन पवन खेड़ा और पार्टी के विदेश मामलों की संयोजक रागिनी नायक को अब रजत शर्मा के खिलाफ किए गए ट्वीट्स हटाने पड़ेंगे। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने इसके लिए तीनों नेताओं को एक सप्ताह का समय दिया है। Google को आदेश दिया गया है कि जो वीडियो सार्वजनिक हो चुके हैं उन्हें प्राइवेट किया जाए, बिना न्यायिक आदेश के उन्हें सार्वजनिक न किया जाए।

साथ ही इन तीनों नेताओं ने YouTube और X (पूर्व में ट्विटर) पर इस संबंध में जो भी पोस्ट किए, उनके URLs को हटाने के लिए भी दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है। मामला लोकसभा चुनाव 2024 की मतगणना के दिन चल रहे डिबेट शो का है। तीनों नेताओं ने एक एडिटेड वीडियो को ये कह कर पोस्ट किया कि ये इंडिया टीवी के डिबेट शो के रॉ फुटेज हैं। कोर्ट ने टी डिबेट का फुटेज देख कर कहा कि प्रारंभिक रूप से लगता है कि रजत शर्मा ने किसी गाली का इस्तेमाल नहीं किया।

हाईकोर्ट ने कहा कि अगर ये वीडियो सार्वजनिक मीडिया में मौजूद रहते हैं तो इससे रजत शर्मा को भविष्य में बदनाम किए जाने की आशंका बनी रहेगी और उनकी प्रतिष्ठा को देखते हुए व्यावहारिक रूप से नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकेगी। कोर्ट ने कहा कि मानहानि और आलोचना के बीच एक पतली सी रेखा है। उच्च न्यायालय ने कहा कि अभिव्यक्ति एवं बोलने की आज़ादी के तहत किसी की प्रतिष्ठा को ठेस नहीं पहुँचाई जा सकती।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने ‘रजत शर्मा ने गाली दी’ वाक्य का इस्तेमाल किया, जो तथ्यों को पूरी तरह गलत तरीके से पेश करने के बराबर है। कोर्ट ने कहा कि रजत शर्मा की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने के लिए ये सब किया गया। इंडिया टीवी ने पहले भी बताया था कि रजत शर्मा पर लगाए गए आरोप गलत हैं और इस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रागिनी नायक अक्सर टीवी डिबेट्स में हल्ला-गुल्ला करने के लिए जानी जाती हैं। जयराम रमेश पहले भी कई बार झूठ फैला चुके हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि अत्यधिक सनसनी बनाने के लिए कॉन्ग्रेस नेताओं ने झूठ फैलाया।

उत्तर प्रदेश : कांग्रेस दफ्तर के बाहर लगी मुस्लिम महिलाओं की लंबी लाइन, हाथ में ‘गारंटी कार्ड’ लेकर माँग रहीं 1 लाख रूपए : कहा – अपने लोगों को मोटी-मोटी गड्डियाँ बाँट रहे, हमें नहीं दे रहे

उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कांग्रेस  मुख्यालय में मुस्लिम महिलाओं की लगी लंबी कतार (फोटो साभार: India Today)
लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम घोषित हो गए हैं और कांग्रेस पार्टी भले ही तिहाई अंक तक नहीं पहुँच पाई लेकिन उसने ऐसा माहौल बना रखा है जैसे उसने भाजपा को हरा दिया है। इस चुनाव में राहुल गाँधी ने संपत्ति के बँटवारे समेत कई बड़े-बड़े वादे किए। अब उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय के बाहर मुस्लिम महिलाओं की लंबी कतार लग गई है। ये सभी 1 लाख रुपए की माँग कर रही हैं, साथ ही कह रही हैं कि उन्हें वित्तीय लाभ दिया जाए।

मुस्लिम महिलाएँ अपना-अपना पहचान-पत्र समेत अन्य दस्तावेज लेकर कांग्रेस के दफ्तर पहुँची हैं। इन महिलाओं ने अपने हाथों में कांग्रेस का ‘गारंटी कार्ड’ भी थाम रखा है, जिसमें एक लाख रुपए के वेतन के अलावा हर शिक्षित युवा को पक्की नौकरी देने का वादा किया गया है। ‘इस गारंटी कार्ड’ में कर्ज माफी का भी वादा है। मुस्लिम महिलाओं ने इन कार्ड्स को भर भी रखा है। उन्होंने बताया कि यहीं से उन्हें ये कार्ड्स मिले थे। हालाँकि, कइयों का जमा नहीं किया जा रहा और कहा जा रहा है कि लंबी प्रक्रिया है इसकी।

‘India Today’ की रिपोर्ट में आप देख सकते हैं कि तस्लीम नाम की एक महिला ने बताया कि अभी उन्हें कांग्रेस दफ्तर की तरफ से कुछ नहीं बताया गया है। कई फॉर्म्स जमा कर लिए गए हैं। जमा करने के बाद उन्हें स्लिप भी दी गई है। कई महिलाओं ने कहा कि उन्हें कार्ड नहीं मिले, कइयों को दोपहर बाद आने के लिए कहा गया। लाइन में लग कर मुस्लिम महिलाएँ इंतज़ार करती रहीं, 12 बजे के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला। कांग्रेस दफ्तर के बाहर खिड़की के पास इंतज़ार करती रहीं।

एक मुस्लिम महिला ने कहा कि ये अपने एरिया में मोटी-मोटी गड्डियाँ बाँट रहे हैं और उन्हें कुछ नहीं दे रहे। एक महिला ने कहा कि वो छोटे बच्चे को घर में छोड़ कर आई हैं, वहीं एक मुस्लिम युवती ने कहा कि अगर पैसे नहीं मिलेंगे तो इन लोगों को स्पष्ट बोल देना चाहिए। महिलाएँ बार-बार दूसरों को गड्डी दिए जाने की बात कहती रहीं। कांग्रेस की प्रोपेगंडा मशीनरी ने इस चुनाव में किस तरह काम किया, ये इसका एक उदाहरण है। इसी तरह ‘मोदी सरकार आरक्षण खत्म कर देगी’ जैसे झूठ फैलाए गए।

हैदराबाद : क्या ‘सालार के बेटे’ के खिलाफ चुनाव भी नहीं लड़ सकती एक हिंदू बेटी? AIMIM समर्थक भीड़ ने माधवी लता को दी 'चल निकल, माँ की $# तेरी’, देखती रही पुलिस

माधवी लता को गंदी गालियाँ देता शख्स

लोकसभा चुनाव 2024 के चौथे चरण में सोमवार (13 मई, 2024) को 96 सीटों पर मतदान हुआ, जिनमें से एक हैदराबाद भी था। तेलंगाना की राजधानी को AIMIM का गढ़ माना जाता है, जहा पिछले 40 वर्षों से ओवैसी परिवार का कब्ज़ा है। इस बार असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ भाजपा ने कोम्पेल्ला माधवी लता को उतारा है। उनका आरोप है कि बड़ी मात्रा में फर्जी मतदान हुआ है और पुलिस ने बुर्कानशीं महिलाओं की फोटो उनके पहचान-पत्र से मिलान नहीं किया।

अब एक वीडियो सामने आया है, जिसमें AIMIM समर्थक भीड़ जुटा कर माधवी लता को गाली देते हुए दिख रहे हैं। एक शख्स ‘चल निकल, माँ की $# तेरी’ चीख रहा है। उक्त शख्स ने नीले रंग की शर्ट पहन रखी है और ब्लैक गॉगल्स लगा रखा है। इस दौरान माधवी लता वहाँ शांत खड़ी रहीं और उन्होंने पलट कर जवाब भी नहीं दिया। बड़ी बात ये है कि ये सब हैदराबाद पुलिस के सामने हुआ। पुलिसकर्मियों ने गंदी-गंदी गालियाँ देने वाले उस व्यक्ति को गिरफ्तार भी नहीं किया।

वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस उसे समझा रही है और पीछे जाने को कह रही है, लेकिन वो लगातार माँ की गालियाँ देते हुए चीख रहा है। माधवी लता उस दौरान फोन पर किसी से बात कर रही थीं, उन्हें उनके सुरक्षाकर्मियों ने अपने घेरे में ले लिया। वहाँ इकट्ठी भीड़ उन्हें वहाँ से निकलने को कह रही थी। पुलिस के हस्तक्षेप के बावजूद भीड़ वहाँ से तितर-बितर नहीं हुई। बता दें कि पोलिंग बूथ पर बुर्कानशीं महिलाओं का चेहरा उनके पहचान-पत्र से मिलाने को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी

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माधवी लता ने इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि क्या ऐसी गालियाँ दिए जाने से वो डर जाएँगी? उन्होंने कहा कि वो भी इस पाता बस्ती की गलियों में खेलते हुए बड़ी हुई हैं। भाजपा उम्मीदवार ने कहा कि एक महिला वहाँ लड़ने आ गई और जनता को भी पसंद आ गई, इससे विरोधी डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि विपक्ष का हर चमचा रो रहा है। माधवी लता अपने हिन्दुवत्ववादी चेहरे के लिए जानी जाती हैं और राष्ट्रीय मीडिया में भी उन्हें अच्छी कवरेज मिली है।

बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी ने अपने भाई अकबरुद्दीन को ‘सालार का बेटा’ बताया था। वो अकबरुद्दीन ही है, जिसने 15 मिनट के लिए पुलिस हटा देने के बाद अंजाम देखने की धमकी हिन्दुओं को दी थी। बता दें कि ओवैसी भाइयों के अब्बा सुल्तान सलाहुद्दीन को ‘सालार-ए-मिल्लत’ कहा जाता था, इसका अर्थ है – जननेता। सलाहुद्दीन के अब्बा अब्दुल वहीद ने AIMIM की स्थापना की थी। सलाहुद्दीन ने 4 दशक के अपने राजनीतिक करियर में अखंड आंध्र प्रदेश के मुस्लिम वोटरों को अपने साथ रखा, अपने मनमुताबिक पाले में उन्हें झुकाया।


‘आपको कितने पैसे मिले थे लड़की को बदनाम करने के लिए’: जब पत्रकारों के सवाल से हुआ अजीत अंजुम का सामना तो चिचियाकर भागे, Video वायरल

अजीत अंजुम अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ YouTube पर प्रोपेगंडा फैलाने के लिए जाने जाते हैं। वो उस गिरोह का हिस्सा हैं, जो पीएम मोदी को ‘तानाशाह’ बता कर अपनी प्रासंगिता बनाए रखने की चेष्टा करता रहता है। हालाँकि, जब इस गिरोह के लोगों का खुद सवालों से सामने होता है तो वो भाग निकलते हैं। अजीत अंजुम से जब किसी पत्रकार ने सवाल पूछा तो उन्होंने उस पर ही जेल में बंद आसाराम से पैसे लेने का आरोप लगा दिया।

ये वह दौर था जब सारा मीडिया कांग्रेस/यूपीए के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं कर पता था, तत्कालीन सरकार के इशारे पर सारा मीडिया नचा करता था। आज तो जिसे देखो गोदी मीडिया कह सकता है, लेकिन उस समय सब भीगी बिल्ली बने रहते थे। जिसका फायदा मीडिया भी अपनी TRP बढ़ाने के लिए उल्टे-सीधे स्टिंग ऑपरेशन करते रहते थे। 

याद करिये, दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास एक सरकारी स्कूल की अध्यापिका की होती दुर्गति। बेचारी इतना ज्यादा बेइज्जत हुई थी कि निर्दोष साबित होने के बावजूद नौकरी पर वापस करने की हिम्मत नहीं कर पायी। कौन महिला पब्लिक द्वारा बुरी तरह पीटते कपडे चिथड़े कर दिए जाएँ, लेकिन वही बेशर्म पत्रकार आज भी बहुत निर्भीक पत्रकार बन टीवी पर आता है। काश, ऐसा उसके परिवार की किसी महिला के साथ हुआ होता। कहाँ सो गया था मानव अधिकार और महिला आयोग? 

उन्होंने सवाल पूछने वाले पत्रकार को ‘आसाराम का चेला’ बता दिया। बदले में पत्रकारों ने भी उनसे पूछा कि उन्हें कितने पैसे मिले थे? एक पत्रकार ने पूछा, “आपको कितने पैसे मिले थे लड़की को बदनाम करने के लिए?” इस दौरान अजीत अंजुम पत्रकारों के सवालों का जवाब देने से इनकार करते हुए लगातार उँगली बता-बता कर कुछ कुछ उलटा-सीधा बोलते रहे। इसके बाद वो कार में बैठ गए और ड्राइवर ने गाड़ी आगे बढ़ा दी। इस तरह बार-बार पीएम मोदी से सवालों के जवाब की अपेक्षा रखने वाले अजीत अंजुम खुद एक सवाल से भाग खड़े हुए।

एक तरह से 2-4 पत्रकारों ने मिल कर अजीत अंजुम को वास्तविकता का भान करा दिया। ये वीडियो कब का है, ये अभी तक सामने नहीं आया है। हालाँकि, ऐसा लग रहा है जैसे ये हाल का ही वीडियो है। एक ट्विटर यूजर ने तो दावा कर दिया कि अजीत अंजुम को चिकेन-पकौड़ा की दुकान से खदेड़ दिया गया। असल में अजीत अंजुम का एक अपुष्ट ट्वीट वायरल होता है जिसमें उन्होंने योगी आदित्यनाथ के दोबारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन जाने के बाद पत्रकारिता छोड़ चिकेन-पकौड़ा का दुकान खोलने की बात कही थी।

हालाँकि, अजीत अंजुम दावा करते हैं कि उन्होंने कभी इस तरह का ट्वीट किया ही नहीं। लोगों ने उनके ताज़ा वीडियो को ‘पकौड़ी माफिया पर जनता की स्ट्राइक’ कह कर भी चलाया। 2020 में भी एक वीडियो सामने आया था, जिसके आधार पर दावा किया गया था कि किसान आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने अजीत अंजुम की पिटाई की। नवंबर 2023 में मध्य प्रदेश विधानसभा मतदान के दौरान उन्होंने एक महिला से जबरन अपने सवाल का जवाब लेना चाहा, जिसके बाद लोगों ने उन्हें खदेड़ा था।


बंगाल : ममता ने हिन्दू महिलाओं के लिए बना दिया नर्क ; कुँवारी या शादीशुदा… कम उम्र वाली सुंदरी को चुनते हैं, वासना तृप्त होने पर ही छोड़ते है: मीडिया में भी मातम, क्यों? देखिए वीडियो

                      संदेशखाली में प्रदर्शन करते स्थानीय लोग (फोटो साभार : X_Debjanibhatta20)
आज एक महिला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के होते हुए हिन्दू महिलाओं के लिए बंगाल किसी नर्क से कम नहीं, और ममता खामोश है, क्यों?  यदि यही शोचनीय स्थिति मुस्लिम महिलाओं की होती सभी सियासतखोर चीख-पुकार कर रहे होते। लेकिन हिन्दू महिलाओं की दुर्गति होने पर सब को सांप सूंघ गया, सबके घरों में शायद कोई मातम का माहौल है? वैसे जब से ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी है, तभी से 24 परगना सुलग रहा है। जिसकी विस्तृत रपट कुछ वर्ष पूर्व एक हिंदी  पाक्षिक को सम्पादित करते मुख्य समाचार बनाया था। लेकिन आज तक किसी भी पार्टी ने हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाई, कहीं उनका मुस्लिम वोट बैंक नाराज़ न हो जाए। 

उत्तर 24 परगना के संदेशखाली से टीएमसी गुंडों के भयावह कारनामे सामने आ रहे हैं। यहाँ टीएमसी के गुंडों के लिए रेप और गैंगरेप आम बात है। वो टीएमसी की महिला कार्यकर्ताओं को भी नहीं छोड़ते। मीटिंग में सिर्फ महिलाओं को बुलाते हैं। पति को मरने से बचाना है तो पार्टी के दफ्तर में आना पड़ेगा, वहाँ टीएमसी के गुंडे यौन शोषण करते हैं, लेकिन महिलाओं को चुप रहना पड़ता है। टीएमसी के गुंडे जमीनों पर कब्जा करते हैं, विरोध करने वालों को गैंगरेप की धमकी देते हैं। यही नहीं, उन्हें जो भी महिला पसंद आ गई, उसे वो रात भर उठाकर ‘भोगते’ हैं और मन भर जाने पर सुबह घर भेज देते हैं। पश्चिम बंगाल की पुलिस टीएमसी के गुंडों के लिए सहायक का काम करती है। वो पीड़ितों को ही दबाती है।

ये सब उसी संदेशखाली की पीड़ित महिलाएँ कह रही हैं, जिन्होंने अब इन अत्याचारों के खिलाफ उठ खड़े होने के ऐलान कर दिया है और पूरे संदेश खाली में टीएमसी के फरार नेता और ममता बनर्जी के खास शेख शाहजहाँ और उनके गुर्गों शिबू हाजरा और उत्तम सरदार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 8 फरवरी 2024 से संदेशखाली की महिलाएँ अब टीएमसी के गुंडों का सामना लाठी-डंडों के साथ कर रही हैं। इन्हें कंट्रोल करने के लिए 10 फरवरी 2024 को प्रशासन ने धारा-144 तो लगाई, लेकिन टीएमसी गुंडों को अत्याचार करने की पूरी छूट दी। हम मीडिया संस्थानों से उन्हीं पीड़ित महिलाओं की बातचीत सामने रख रहे हैं, जिसमें वो टीएमसी के गुंडों की करतूतों को सामने रख रही हैं।

इसी कड़ी में टीवी9 बांग्ला से बातचीत में संदेशखाली की महिलाओं ने बताया है कि कैसे शिबू हाजरा और उत्तर सरदार की अगुवाई टीएमसी के गुंडों ने लोगों की जमीनों पर कब्जा किए। एक महिला ने बताया कि बीडीओ और स्थानीय पुलिस के जवान टीएमसी के पार्टी काडर की तरह काम करते हैं। यही नहीं, स्थानीय लोगों ने बताया कि टीएमसी के गुंडों को ‘कट मनी’ का भुगतान करना पड़ता है और अगर किसी वजह से ‘कट मनी’ नहीं दे सके, तो फिर टीएमसी के गुंडे उनकी पिटाई करते हैं। बीजेपी सांसद दिलीप घोष ने ये वीडियो एक्स पर शेयर किया है।

एक महिला ने टीवी9 बांग्ला को बताया कि कैसे टीएमसी के गुंडे युवा लड़कों की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं और उन्हें आपराधिक गतिविधियों में शामिल कर रहे हैं। उसने बताया कि टीएमसी के गुंडे नए और पढ़ाई लिखाई वाले बच्चों को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल करते हैं। महिला ने बताया, “बच्चों से कहा जाता है कि ‘दीदी’ उनका पेट भरती हैं। वो राजनीतिक काम नहीं करेंगे तो खाने के लिए मर जाएँगे। टीएमसी के गुंडे उन बच्चों से विपक्षी कार्यकर्ताओं के घरों पर हमला करवाते हैं, लोगों को परेशान कराते हैं और लूट जैसी वारदात कराते हैं। वो बच्चों को शराब और हथियार देकर बर्बाद कर रहे हैं। वो शाहजहाँ की पसंद की औरतों को उठाने के लिए दबाव डालते हैं।”

रिपब्लिक बांग्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी कार्यकर्ता और उनके गुंडों ने शेख शाहजहाँ, उत्तर सरदार और शिबू हाजरा के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर हमला किया और उनका उत्पीड़न किया, तो पुलिस ने उनका हाथ दिया। एक महिला ने पूरी बात बताते हुए कहा, “हम रात में नींद की एक झपकी तक नहीं ले सके। भारी संख्या में पुलिस वाले बाइकों और कारों पर सवार होकर पहुँचे। वो रात में जोर-जोर से हम सबको धमका रहे थे। हमारे परिवार के मर्द भाग गए थे, क्योंकि उन्हें पुलिस उठा लेती।”

बजरंग दल के कार्यकर्ता की पत्नी ने बताया, “पुलिस हमारे घर में रात 3 बजे घुसी। पुलिस वालों ने मेरे पति को गालियाँ दी और मेरा उत्पीड़न करने की कोशिश की। उन्होंने मेरा पोला (शादीशुदा बंगाली महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला कड़ा) तोड़ दिया। पुलिस ने मेरी बेटी को दूर फेक दिया। वो पुलिस वाले इतने नशे में थे कि वो सही से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे।”

संदेशखाली की एक अन्य महिला ने स्थानीय पुलिसकर्मियों की बदतमीजियों के बारे में बताया। एक महिला ने कहा, “पुलिस वाले ने मुझसे पूछा कि मैं दूसरे मर्दों के सोती हूँ? वो कैसे ये सवाल पूछ सकते हैं। मुझे जवाब चाहिए। मैंने क्या गलत किया है कि मुझे ‘मादर**’ जैसी गालियाँ दी गई?” महिला ने आगे बताया, “पुलिस वालों ने मेरे पति को ‘सुवर का बच्चा’ कहा। वो मेरे पति को घसीटकर घर से बाहर ले गए। उन्होंने क्या गलत किया था? हमें न्याय चाहिए। क्या पुलिस वाले किसी को भी इस तरह गालियाँ दे सकते हैं?”

संदेशखाली में एक महिला ने कहा, “टीएमसी के गुंडे हमारे पतियों को जबरदस्ती पकड़ कर अपने साथ ले जाते हैं। वो उनसे काम कराते हैं और पैसे भी नहीं देते। अगर कोई पैसों की माँग करता है, तो उसे बेहरमी के साथ पीटा जाता है।”

एक महिला ने एबीपी आनंदा से बातचीत में कहा, “हम कानून को अपने हाथों में नहीं लेना चाहते। उत्तम सरदार ने हमें डंडे उठाने पर मजबूर कर दिया। वो पिछले 4 साल से हमारा उत्पीड़न कर रहा है। अब हम इसे और बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। इसी वज से हम यहाँ प्रदर्शन कर रहे है। हम अगर टीएमसी की बैठकों में जाते हैं, तो हमारे पतियों को उठा लिया जाता है। संदेशखाली कभी शांत माहौल वाली जगह हुआ करती थी, लेकिन उसे नष्ट कर दिया गया। हम फिर से संदेशखाली में शांति चाहते हैं।”

संदेशखाली की एक महिला ने ममता बनर्जी को निशाने पर लिया और कहा कि सरकार ने लोखिर भंडार योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी को 500 रुपए प्रति माह से बढ़ाकर 1000 रुपए प्रति माह कर दिया है। क्या सरकार पार्टी की कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न के बदले ‘आर्थिक सहायता’ के तौर पर ऐसा कर रही है?

रिपब्लिक बाँग्ला से बात करते हुए पीड़ित महिला ने कहा, “क्या हम अपने सम्मान के बदले पैसे पा रहे हैं? क्या हमें इस लिए पैसे दिए जा रहे हैं कि टीएमसी कार्यकर्ताओं को रात में ‘कंपनी’ दें? क्या मुख्यमंत्री हमें अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए पैसे दे रही हैं?”

संदेशखाली में प्रदर्सन के दौरान एक महिला ने बताया, “तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता बाइक पर 20-30 के ग्रुप में आते हैं और वे इलाके की हर महिला की जाँच करते हैं। वे सबसे कम उम्र की और सबसे अच्छी दिखने वाली महिला को चुनते हैं और उसे अपने साथ ले जाते हैं। वह कहती हैं, वे रात-रात भर उसके साथ संबंध बनाते हैं, और उसे तभी छोड़ते हैं जब वे “संतुष्ट” हो जाते हैं।”

महिला शेख शाहजहाँ और उसके आदमियों की ओर से फैलाए गए आतंक और डर को बयान करती है। महिला ने कहा कि “जिस भी महिला पर इन गुंडों की नजर पड़ गई, भले ही वो कुँवारी हो या शादीशुदा, वो उसे उठा ले जाते हैं। यही नहीं, शादीशुदा महिलाओं के पति को भी उसपर कोई हक नहीं होता। बस उन्हें महिला पसंद आनी चाहिए, इसके बाद सबकुछ उनकी मर्जी।” इस बात को वहाँ मौजूद एक महिला ने भी दोहराया।

एबीवी आनंदा से बात करते हुए एक पीड़ित ने बताया, “हम सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं। टीएमसी के गुंडों ने हमें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है। यहाँ तक कि उन्होंने ग्रामीणों द्वारा बनवाई गई कंक्रीट की सड़क को भी नष्ट कर दिया।” एक महिला ने बताया है कि उन्हें पीने का साफ पानी तक उपलब्ध नहीं है।

एक महिला ने रिपब्लिक बाँग्ला के साथ अपनी आपबीती साझा की। महिला ने कहा, “टीएमसी के गुंडों ने मेरी खिड़की तोड़ दी। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ खींचा और बाहर को कहा। उन्होंने कहा कि वो उसका (महिला का) गैंगरेप करेंगे। ये सब पुलिस की मौजूदगी में हो रहा था। वहाँ एक और महिला को बाल पकड़ कर खींचा गया और उसकी साड़ी खींचकर अलग कर दी गई। संदेशखाली में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं। वो मेरे पति के सामने ही मुझसे बदतमीजी करते रहे। हम शांति चाहते हैं। मुझे लगता है कि ऐसी जिल्लत भरी जिंदगी जीने से बेहतर है मर जाना।”

एक महिला ने रोते हुए बताया, “टीएमसी के कार्यकर्ता सिर्फ महिलाओं को ही पार्टी में बुलाते हैं और उनका शोषण करते हैं। हमें अपने पतियों की जान बचाने के लिए उनकी बात माननी (यौन उत्पीड़न के लिए हाँ) पड़ती है।” महिला ये बात कहती हुई रो पड़ती है और कहती है कि टीएमसी के गुंडे ये भी नहीं सोचते कि वो पार्टी सपोर्टर है।

संदेशखाली में आखिर चल क्या रहा है?

पश्चिम बंगाल में उत्तर 24 परगना जिला है। यहाँ संदेशखाली नाम की जगह है। इस साल की शुरुआत में इसी जगह के टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ पर रेड करने की गई ईडी की टीम पर जानलेवा हमले हुए थे। यहाँ गुरुवार (8 फरवरी 2024) को केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल को फंड न देने को लेकर टीएमसी नेताओं ने संदेशखाली के त्रिमोहानी बाजार में लोगों के साथ मिलकर रैली निकाली थी। इस रैली में शाहजहाँ शेख के नारे लगाने पर बवाल मच गया।
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संदेशखाली की महिलाओं और पुरुषों ने लाठी-डंडे लेकर टीएमसी के गुंडों को दौड़ा लिया। इस दौरान दोनों ओर से मारपीट शुरू हो गई। इसके अगले दिन शाहजहाँ शेख के गुंडों ने पलटवार किया, तो ग्रामीणों ने कई जगहों पर उत्पात कर दिया। इस बवाल में कई लोग घायल भी हो गए। इसके बाद ही पुलिस ने इलाके में धारा 144 लागू करने के साथ ही इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थी। हालाँकि ऊपर के वीडियो में पीड़ित महिलाएँ उन्हीं अत्याचारों को बयान कर रही हैं, जो इस दौरान महिलाओं ने झेला।