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नोएडा हिंसा : ‘X Storm’ से निकली चिंगारी, पुलिस को मिला फर्जी खबरें फैलाने वाला 274 लोगों का वॉट्सऐप ग्रुप

                                                                                                                    साभार: इंडियन एक्सप्रेस
राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में हुए हिंसक प्रदर्शनों की जाँच कर रही पुलिस ने दावा किया है कि सोशल मीडिया के जरिए एक संगठित नेटवर्क ने तनाव बढ़ाने और हिंसा भड़काने का काम किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘X Storm’ नाम का एक वॉट्सऐप ग्रुप सामने आया है जिसमें 274 लोग शामिल थे। पुलिस का कहना है कि यह ग्रुप खास तौर पर मजदूरों के आंदोलन के दौरान भड़काऊ वीडियो और गलत जानकारी फैलाने के लिए बनाया गया था। आदित्य आनंद को इस ग्रुप का एडमिन और बनाने वाला बताया जा रहा है।

इस वॉट्सऐप ग्रुप के बारे में पुलिस को तब पता चला जब वह 13 अप्रैल की हिंसा के मुख्य आरोपित आदित्य आनंद से पूछताछ कर रही थी। शुरुआत में यह प्रदर्शन मजदूरों की बेहतर वेतन की माँग को लेकर शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में यह तेजी से हिंसक हो गया। इस दौरान आगजनी, पत्थरबाजी और हमले की घटनाएँ हुईं जिसमें कई औद्योगिक इकाइयों और दफ्तरों पर हमला किया गया और वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया।

पुलिस ने कहा है कि ‘X Storm’ वॉट्सऐप ग्रुप ने बिना पुष्टि वाले कंटेंट को फैलाने और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को भड़काने में अहम भूमिका निभाई। अधिकारियों को शक है कि कई वॉट्सऐप ग्रुप मिलकर संगठित तरीके से भड़काऊ सामग्री फैलाने और बड़े स्तर पर अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे थे। इस ग्रुप के अन्य सदस्यों की भी पहचान की जा रही है और डिजिटल सबूतों की जाँच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस हिंसा की योजना और साजिश में कोई बाहरी तत्व शामिल थे या नहीं।

अवलोकन करें:-

फर्जी वीडियो शेयर करने से नोएडा हिंसा में RJD नेताओं का भी हाथ, प्रियंका भारती और कंचना यादव के खि
फर्जी वीडियो शेयर करने से नोएडा हिंसा में RJD नेताओं का भी हाथ, प्रियंका भारती और कंचना यादव के खि
 

नोएडा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने शनिवार (18 अप्रैल 2026) को आदित्य आनंद को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट और उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त टीम ने की थी।

हापुड़ में सपा नेता अब्दुल रेहान के घर पुलिस का छापा, 55 भरे गैस सिलेंडर बरामद: 2000 रुपए में कालाबाजारी का आरोप

                                  सपा नेता अब्दुल रेहान के घर मिले 55 गैस सिलेंडर (फोटो साभार : NBT)
उत्तर प्रदेश में गैस सिलेंडरों की किल्लत के बीच कालाबाजारी करने वालों पर पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। हापुड़ के गाँव असौड़ा में समाजवादी पार्टी के नेता अब्दुल रेहान के घर पर पुलिस और जिला पूर्ति विभाग ने छापेमारी की। इस कार्रवाई में रेहान के घर से 55 भरे हुए और कई खाली गैस सिलेंडर बरामद हुए हैं। छापेमारी की भनक लगते ही आरोपित नेता मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी है।

सरकार और पुलिस को सिलेंडर सप्लाई करने वाली एजेंसी पर सख्त कार्यवाही कर उसका लाइसेंस तुरंत कैंसिल कर उसके बैंक अकाउंट और दुकान को भी सील कर देना चाहिए। 

महँगे दामों पर बेच रहे थे सिलेंडर

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अब्दुल रेहान मजबूरी का फायदा उठाकर जरूरतमंदों को एक सिलेंडर 2000 रुपए तक में बेच रहा था। पुलिस को सूचना मिली थी कि पंचायती घर के पास रहने वाला रेहान अपने घर में अवैध रूप से सिलेंडरों का बड़ा स्टॉक जमा किए हुए है। सूचना मिलते ही टीम ने दबिश दी और सभी सिलेंडरों को जब्त कर लिया।

प्रदेश में सिलेंडरों की कमी के बीच इस तरह की कालाबाजारी को योगी सरकार को बदनाम करने की साजिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध भंडारण के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा। साथ ही जनता से अपील की गई है कि यदि कहीं भी ऐसी कालाबाजारी दिखे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

मनुस्मृति के पन्ने फाड़ना एक अपराध, नहीं होगी कोई FIR रद्द: Allahabad High Court ने RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती को फटकारा, गिरफ्तारी पर रोक लगाने से भी किया इनकार

    प्रियंका भारती को इलाहाबाद हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है (साभार: Priyanka Bharati/FB & Livelaw)
वोट बैंक को साधने विपक्ष द्वारा सनातन को अपमानित किया जाता है। जब तक इन सभी को कानून द्वारा दण्डित नहीं किया जाएगा, ऐसी हरकतें बंद नहीं होंगी। ये तो हिन्दू है जो कोर्ट पहुँच गया अगर स्थिति विपरीत होती "सिर तन से जुदा" गैंग मैदान में आ चुका होता और पूरा INDI गंठबंधन 
राष्ट्रीय जनता दल की प्रवक्ता प्रियंका भारती को बचाने नहीं आता।   

राष्ट्रीय जनता दल की प्रवक्ता प्रियंका भारती की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लाइव टीवी पर हिन्दू ग्रन्थ मनुस्मृति के पन्ने फाड़ने के मामले में उन पर दर्ज FIR रद्द नहीं होगी। ऐसा करने से इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मना कर दिया है। हाई कोर्ट ने इसे एक संज्ञेय अपराध करार दिया है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 28 फरवरी को सुनवाई में कहा, “हमें लगता है कि हैं कि दो टीवी चैनल ‘इंडिया टीवी’ और ‘टीवी 9 भारतवर्ष’ द्वारा आयोजित लाइव टीवी बहस में एक विशेष धर्म की पवित्र पुस्तक ‘मनुस्मृति’ के पन्नों को फाड़ने का कृत्य और कुछ नहीं बल्कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के दुर्भावनापूर्ण भावना का प्रदर्शन था और इसे बिना किसी वैध कारण के किया गया।”

 इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रियंका भारती को फटकार लगाते हुए कहा, “हम इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि याचिकाकर्ता एक पढ़ी-लिखी और उच्च योग्यता वाली महिला हैं और वह बहस में एक राजनीतिक दल के प्रवक्ता के रूप में भाग ले रहीं थी। ऐसे में यह बात नहीं मानी जा सकती कि यह कार्य अनजाने में किया गया।”

मनुस्मृति के पन्ने फाड़ने के को इसके बाद हाई कोर्ट ने एक अपराध करार दिया। हाई कोर्ट ने कहा, “वर्तमान मामले में एक राजनीतिक दल के प्रवक्ता द्वारा लाइव टीवी बहस में एक विशेष धर्म की पवित्र पुस्तक ‘मनुस्मृति’ के कुछ पृष्ठ फाड़ने का कृत्य, प्रथम दृष्टया यह दर्शाता है कि एक संज्ञेय अपराध किया गया है।”

प्रियंका भारती की याचिका इसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रद्द कर दी और कोई भी राहत देने से मना कर दिया। यह याचिका प्रियंका भारती ने अलीगढ़ में उनके खिलाफ दर्ज एक मुकदमे के बाद के बाद दायर की थी। उन्होंने माँग की थी कि उनके खिलाफ FIR को रद्द कर दिया जाए।

प्रियंका भारती ने मनुस्मृति पर चालू बवाल के बीच दो टीवी चैनल पर उसके कुछ पन्ने फाड़ दिए थे। इसके बाद उनके खिलाफ कीई जगह विरोध प्रदर्शन हुए थे। अलीगढ़ में उनके खिलाफ FIR राष्ट्रीय स्वर्ण परिषद के संगठन मंत्री भरत तिवारी की तरफ से 28 दिसंबर, 2024 को दर्ज करवाई गई थी।

भरत तिवारी ने कहा था कि प्रियंका भारती की करतूत देश में सामजिक वैमन्यस्यता फैलाने वाली है। उन्होंने इंडिया TV के मालिक रजत शर्मा और TV9 चैनल के मालिक वरुण दास पर भी TRP की नीयत से प्रियंका भारती की हरकतों को बढ़ावा दिए जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि इस कृत्य के चलते उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।

उत्तर प्रदेश : चित्रकूट में ईसाई धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़, बजरंग दल की सूचना पर 2 गिरफ्तार, तीसरा फरार: लालच में धर्म परिवर्तन करने वाले हिन्दुओं का सामाजिक बहिष्कार हो

    जबरन धर्मांतरण की जाँच के दौरान चित्रकूट पुलिस ने घुनुवा गाँव में छापा मारा और ईसाई धार्मिक साहित्य जब्त किया (साभार - दैनिक भास्कर)
जब तक बिकाऊ और लालची हिन्दुओं का सामाजिक बहिष्कार होगा हिन्दू समाज का भला नहीं हो सकता। ये लालची ही सनातन को संकट डालते हैं। आर्थिक तंगहाली का रोने वाले शराब के ठेकों पर भीड़ लगाए होते हैं। इस कटु सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। ये नंगा सच है। जब तक इन लालचियों का सामाजिक बहिष्कार नहीं होगा मजहब बदलने वाला समाज भी कुछ समय बाद इनको दुत्कारेगा। इस बात को वो भी समझते हैं जो अपने धर्म का नहीं हुआ किसी का नहीं हो सकता। दूसरे, कोई मजहब ज़िंदगी भर का ठेका नहीं लेता। लोहे को लोहा ही काटता है।  

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में शनिवार (11 अक्टूबर 2025) को पुलिस ने रायपुरा थाना क्षेत्र के घुनुवा गाँव में एक ईसाई धर्मांतरण रैकेट को नाकाम किया। यह कार्रवाई तब हुई जब विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इलाके में हो रहे जबरन धर्मांतरण की सूचना पुलिस को दी।

पुलिस ने दो पुरुषों को गिरफ्तार किया, जबकि एक आरोपित फरार हो गया। मौके से ईसाई धार्मिक साहित्य भी जब्त किया गया। बजरंग दल के जिला सह-समन्वयक शिवेंद्र प्रताप सिंह ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि इलाके में करीब 40% गरीब हिंदू पहले ही ईसाई मजहब में परिवर्तित हो चुके हैं।

घुनुवा गाँव में धर्मांतरण गतिविधि की सूचना

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बजरंग दल के जिला सह-समन्वयक शिवेंद्र प्रताप सिंह को जानकारी मिली कि घुनुवा गाँव में एक भारत वर्मा के घर पर धर्मांतरण बैठकें हो रही हैं। शिवेंद्र और उनके साथी कार्यकर्ताओं ने विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के साथ गाँव पहुँचकर रायपुरा पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तुरंत घर पर छापा मारा, जिससे कई लोग मौके से भाग गए।

शुरुआत में पुलिस ने पूछताछ के लिए सात लोगों को हिरासत में लिया। शुरुआती पूछताछ के बाद चार ग्रामीणों को छोड़ दिया गया। तीन लोगों पर स्थानीय लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए पैसे देने का आरोप लगा। मौके से पुलिस ने कई नोटबुक और ईसाई मजहब से संबंधित धार्मिक सामग्री जब्त की।

ग्रामीणों ने आर्थिक प्रलोभन और हिंदू देवी-देवताओं के अपमान का आरोप लगाया

छापे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने घुनुवा गाँव के भारत वर्मा और रामविशाल तथा मौ थाना क्षेत्र के हटवा गाँव के महेश पर आरोप लगाया कि वे करीब एक साल से उन्हें जबरन ईसाई मजहब अपनाने के लिए मजबूर कर रहे थे। आरोपितों ने पैसे देने के साथ-साथ हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ भी कीं। आरोपित गरीब हिंदू परिवारों को प्रभावित करने के लिए प्रार्थना बैठकें और बाइबल की कहानियाँ सुनाने के कार्यक्रम आयोजित कर रहे थे।

बजरंग दल के शिवेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं, ‘40% गरीब हिंदुओं ने धर्म परिवर्तन किया।’

बजरंग दल के शिवेंद्र सिंह और अश्विनी तिवारी ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई, जिसे ऑपइंडिया ने देखा। शिकायत में उन्होंने बताया कि भारत वर्मा रामविशाल और महेश की मदद से एक साल से अधिक समय से प्रार्थना बैठकें आयोजित कर रहा था। आरोप है कि उन्होंने गरीब हिंदू परिवारों को पैसे देकर ईसाई मजहब में परिवर्तित किया। बैठकों के दौरान वे हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते और ईसा मसीह की तारीफ करते थे।
ऑपइंडिया से खास बातचीत में शिवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि चित्रकूट में कई ईसाई और इस्लामिक समूह धर्मांतरण रैकेट में शामिल हैं। उन्होंने बताया की “स्थानीय गरीब हिंदू आबादी का लगभग 40% हिस्सा पहले ही ईसाई धर्म में परिवर्तित हो चुका है। हम उनके लिए घर वापसी का प्रयास कर रहे हैं,”
शिवेंद्र ने कहा, “बजरंग दल इन समूहों और व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। जब हमें सूचना मिलती है, तो हम पहले पुष्टि करते हैं कि हिंदुओं को ईसाई मत में बदलने के लिए प्रार्थना बैठकें हो रही हैं। पुष्टि होने पर हम तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन से संपर्क करते हैं। ज्यादातर मामलों में पुलिस तुरंत कार्रवाई कर इन रैकेट को बंद कर देती है। केवल ईसाई समूह ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समूह भी हिंदुओं को इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि केवल बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ही फर्क नहीं कर सकते। “हम धर्मांतरण रोकने के लिए व्यापक रूप से काम कर रहे हैं, लेकिन अकेले हम सबको रोक नहीं सकते। यह हर स्थानीय हिंदू का कर्तव्य है कि वे मिलकर इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाएँ।” शिवेंद्र ने पुष्टि की कि मामले में रविवार (12 अक्तूबर 2025) की सुबह FIR दर्ज की गई है और तीसरे आरोपित की तलाश जारी है।

पुलिस जाँच जारी

मीडिया से बात करते हुए रायपुरा थाना के थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर विनोद शुक्ला ने पुष्टि की कि दो आरोपितों भारत वर्मा और रामविशाल सविता को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। तीसरा आरोपित महेश फरार हो गया है और उसे पकड़ने के लिए तलाश शुरू कर दी गई है। जब्त किए गए मजहबी साहित्य की जाँच की जा रही है और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए गए हैं।
अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जाँच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने स्थानीय लोगों में चिंता पैदा कर दी है और दक्षिणपंथी समूह जिले में गैरकानूनी धर्मांतरण गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश : 61000 रूपए में इमाम अकबर अली ने खरीदा अवैध पिस्टल, पैसे लेकर डेविड सोनी ने थमा दिया तमंचा: ठगे जाने से दुखी होकर पहुँचा पुलिस के पास तो खुली गैंग की पोल, 5 गिरफ्तार

                                    अवैध तमंचे के साथ इमाम गिरफ्तार ( फोटो साभार- आज तक)
उत्तर प्रदेश के इटावा में अवैध असलहा की सौदेबाजी करते पुलिस ने मस्जिद के इमाम अकबर अली समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से तीन तमंचे, एक बाइक और एक मोबाइल बरामद किए गए हैं।

मुरादाबाद का रहने वाला है इमाम अकबर अली

पकड़े गए आरोपितों में इमाम अकबर अली के अलावा डेविड सोनी, सूरज उर्फ रुद्रा, अरविंद और एकलव्य शर्मा का नाम शामिल है। अकबर अली मुरादाबाद का रहने वाला है और सैफई के कुम्हावर की मस्जिद में इमाम है। पुलिस की पूछताछ में उसने बताया है कि उसे जान का खतरा है। गाँव के कुछ लोग और ससुराल पक्ष से उसे जान से मारने की धमकी दी है। इसलिए उसने 2 अगस्त को 61 हजार रुपए में पिस्टल का सौदा किया था, लेकिन उसे तमंचा दिया जा रहा था। इसको लेकर उसने सिविल लाइन थाने में ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी।

इस बीच पुलिस को सूचना मिली कि रेलवे स्टेशन के पास मौजूद मजार में कुछ लोग अवैध तरीके से असलहों की खरीद फरोख्त कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस वहाँ पहुँची और 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

अवैध असलहे की खरीद-फरोख्त

पुलिस ने जाँच में पाया कि इमाम अकबर अली अवैध तरीके से पिस्टल खरीद रहा था। उसने आरोपी डेविड सोनी के साथ सौदा किया था। डेविड सोनी पर हत्या की कोशिश, डकैती, गैंगस्टर और आर्म्स एक्ट के तहत कई मामले दर्ज हैं। पुलिस ने डेविड के तीन दोस्तों को भी गिरफ्तार किया। इनकी तलाशी के दौरान दो तमंचे, तीन हजार रुपए और एक मोबाइल बरामद किया गया। जबकि इमाम के पास से एक तमंचा और दो कारतूस बरामद किया गया है।
स्थानीय सीओ सिटी अभय नारायण राय के मुताबिक पूछताछ में चारों ने माना है कि अकबर अली ने पिस्टल खरीदने के लिए उन लोगों को 61 हजार रुपए दिए थे। पुलिस ने अब ठगी की जगह आर्म्स एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कर लिया है। अकबर अली समेत सभी को जेल भेज दिया गया है।


आतंकियों के sleeper cell लगे हैं काम पर : दलित बच्ची को इस्लामी आतंकी बनाने के लिए प्रयागराज से उठा केरल ले गई दरकशा बानो, करवाया धर्मांतरण

                                          दलित बच्ची किसी तरह वापस अपने घर पहुँची
उत्तर प्रदेश में एक माह के भीतर द केरल स्टोरी की तरह का एक दूसरा मामला सामने आया है। प्रयागराज की एक नाबालिग दलित लड़की का धर्मांतरण करवा के उसे जिहाद में झोंका गया। यह काम एक मुस्लिम महिला ने किया, जिसने लड़की का ब्रेन वॉश किया। बच्ची किसी तरह बच के अपने घर पहुँची।

क्या है मामला?

 प्रयागराज की रहने वाली एक दलित नाबालिग बीते दिनों गायब हो गई थी। उसकी माँ पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुँची थी। महिला ने बताया था कि उसकी बेटी को दरकशा बानो नाम की एक महिला ने ब्रेनवॉश किया है। मामले में पुलिस ने आगे जाँच की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए।

पता चला कि दरकशा बानो दलित नाबालिग लड़की को इस्लाम अपनाने के लिए ब्रेनवॉश किया और हिन्दू धर्म के प्रति जहर भरती रही। दरकशा बानो ने दलित लड़की को पैसों का लालच दिया और झाँसे में लेकर केरल चली गई।

दरकशा बानो ने दलित बच्ची को केरल ले जाकर उसका इस्लाम में धर्मांतरण करवा भी दिया। इसके बाद दरकशा ने उसे जिहाद में झोंकने का प्रयास किया। दलित बच्ची को आतंकवादी बनाने की साजिश थी। बताया गया कि दरकशा की सहायता मोहम्मद कैफ नाम के एक युवक ने की। पीड़िता किसी तरह बच कर केरल से निकली और प्रयागराज पहुँची।

पुलिस ने दरकशा बानो और कैफ को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया है कि दरकशा बानो पहले भी कई नाबालिगों को जिहादी नेटवर्क में शामिल करवा चुकी है। मामले में अब जाँच चल रही है। जाँच के लिए तीन टीमें लगाई गई हैं।

आगरा में गायब हुईं थी दो लड़कियाँ

आगरा के परिवार ने भी हाल ही में अपनी दो बेटियों के इस्लामी धर्मांतरण गैंग में फंसने की शिकायत दर्ज करवाई थी। पीड़ित परिवार ने बताया था कि उनकी बड़ी बेटी 2021 में गायब हो गई थी। पीड़ित परिवार ने बताया था कि यह बेटी आगरा के दयालबाग एजुकेशनल इंस्टिट्यूट से पढ़ी हुई है। इस लड़की की दोस्ती एक मुस्लिम लड़की से थी।
पीड़ित परिवार ने पुलिस को बताया था कि उनकी बेटी की दोस्ती सायमा नाम की एक लड़की से थी जो कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर के उधमपुर की रहने वाली थी। इस सायमा उर्फ़ खुशबू ने हिन्दू लड़की का ‘ब्रेनवॉश’ किया था। गायब हो चुकी बड़ी लड़की के पिता ने बताया कि इसी के चलते वह 2021 में गायब हुई थी।
गायब हुई लड़की के पिता ने बताया था कि उनकी बड़ी बेटी सायमा के चलते दूसरे मजहब के प्रभाव में थी।

दूसरी का भी किया ब्रेनवॉश

पीड़ित परिवार ने यह भी बताया था कि उनकी बड़ी बेटी इस कदर प्रभाव में आ गई कि उसने घर आने के बाद अपनी छोटी बहन का ही ब्रेनवॉश करना चालू कर दिया और इसमें सफल भी रही। इसके बाद 25 मार्च, 2025 को दोनों लडकियाँ आगरा स्थित घर से गायब हो गईं थी।
उनका कोई भी पता नहीं लगा। वह किसके साथ गईं और कहाँ गईं, इस संबंध में एक भी जानकारी परिवार के पास नहीं आई है। थक हार कर यह परिवार पुलिस के पास पहुँचा। पुलिस ने दोनों लड़कियों के बालिग़ होने को लेकर कार्रवाई करने में शुरुआत में ढिलाई बरती। हालाँकि, इस मामले में 4 मई, 2025 को FIR दर्ज हो गई।
ऑपइंडिया के पास इस मामले में दर्ज FIR कॉपी मौजूद है। FIR में पीड़ित पिता ने बताया था कि सायमा ही उनकी दोनों बेटियों को ले गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि सायमा उनकी लड़कियों की शादी करवाने के लिए ले गई है।
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केरल के ‘इस्लामी अड्डे’ में कैद हैं कई लड़कियाँ, लंबी दाढ़ी वाले मर्द दे रहे जिहाद की ट्रेनिंग

पुलिस जाँच में धर्मांतरण गैंग का खुलासा

मामले में FIR दर्ज होने के बाद जाँच चालू की गई थी। पुलिस की शुरूआती जाँच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस को पता चला था कि यह मामला फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ जैसा है। पुलिस ने बताया कि यह दोनों बहने अब इस्लामी धर्मांतरण गिरोह का हिस्सा बन गईं हैं।
पुलिस ने इस मामले में यह भी पता किया कि इस केस के तार जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-NCR से भी जुड़े हैं। पुलिस आगे और भी जानकारियाँ निकाल रही हैं। इसके अलावा मामले को आगरा की सायबर पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया है।

केरल के ‘इस्लामी अड्डे’ में कैद हैं कई लड़कियाँ, लंबी दाढ़ी वाले मर्द दे रहे जिहाद की ट्रेनिंग

दलित बच्ची का धर्मांतरण करवाने वाली दरकशा (बाएँ) और कैफ (दाएँ) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है (फोटो साभार: Dainik Bhaskar & AI)
प्रयागराज की एक 15 साल की दलित लड़की को एक मुस्लिम महिला केरल लेकर गई। यहाँ उसका इस्लाम में धर्मांतरण करवाया गया। उसको जिहादी ट्रेनिंग देने का भी प्रयास हुआ। लड़की किसी तरह बच कर वापस पहुँची। पुलिस की जाँच में सामने आया कि मुस्लिम महिला के गैंग में और भी लोग शामिल हैं और उसका काम दलित एवं गरीब बच्चों को आतंकी नेटवर्क में शामिल करवाना है। अब इस मामले में मुस्लिम महिला और उसका साथी गिरफ्तार हो गए हैं।

प्रयागराज की दलित बच्ची को फँसाया

पूरा मामला प्रयागराज के फूलपुर थाने से जुड़ा हुआ है। यहाँ लिलहट गाँव में एक दलित विधवा महिला और उसकी बेटी रहती है। बेटी की आयु मात्र 15 वर्ष है। उसके पड़ोस में ही दरकशा नाम की मुस्लिम लड़की रहती है। दरकशा बानो कथित तौर पर इस हिन्दू बच्ची की सहेली है।

दरकशा हिन्दू बच्ची के साथ रहती है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दरकशा हिन्दू बच्ची को इस्लाम के बारे में ब्रेनवॉश किया करती थी। वह हिन्दू धर्म के प्रति जहर भी भरती थी। 8 मई, 2025 को दरकशा बानो रात 10 बजे हिन्दू बच्ची को एक शादी से लेकर फूलपुर की एक मस्जिद के पास गई।

दरकशा बानो का मददगार मोहम्मद कैफ यहाँ बाइक लेकर खड़ा था। दरकशा ने हिन्दू बच्ची को इस दौरान पाने जाल में फँसा लिया था। कैफ ने इन दोनों को प्रयागराज जंक्शन छोड़ा। रास्ते में कैफ ने हिन्दू बच्ची से छेड़छाड़ भी की। दरकशा प्रयागराज से बाद हिन्दू बच्ची को प्रयागराज से लेकर दिल्ली चली गई।

दरकशा की मंजिल लेकिन दिल्ली नहीं थी। यहाँ से वह हिन्दू बच्ची को लकर केरल के त्रिशूर चली गई। यहाँ हिन्दू बच्ची के साथ प्रताड़नाओं का दौर चालू हो गया। उसका धर्मांतरण करवाया गया। उसे आतंकी ट्रेनिंग की बात भी हुई। बच्ची किसी तरह बच के पुलिस के पास पहुँची, जहाँ से प्रयागराज सूचना परिवार के पास पहुँची। बच्ची वापस इसके बाद आ सकी।

हिन्दू पीड़िता बोली- दाढ़ी वाले जिहाद की बात करते थे

हिन्दू बच्ची ने बरामद होने के बाद बताया कि त्रिशूर में उसे एक ऐसे घर में ले जाया गया था जहाँ और भी कई नाबालिग लड़कियाँ मौजूद थीं। हिन्दू बच्ची ने यह भी बताया कि इसी घर में कई ‘बड़ी दाढ़ी वाले’ मौजूद थे। इन लोगों ने बच्ची पर इस्लाम में धर्मांतरण करने का दबाव बनाया।

बच्ची के अनुसार, ‘बड़ी दाढ़ी वालों’ ने उसको जिहादी ट्रेनिंग देने की बातें भी की। इस दौरान दरकशा वहाँ से गायब हो गई। डरी सहमी बच्ची किसी तरह यहाँ से भाग निकली। यहाँ वाल रेलवे स्टेशन पहुँची जहाँ पुलिस ने उससे जानकारी ली। इसके बाद बच्ची का प्रयागराज लौटना संभव हो पाया।

UP पुलिस बोली- केरल मॉड्यूल से जुड़ी है दरकशा

इस मामले में 28 जून, 2025 को प्रयागराज के फूलपुर थाने में FIR दर्ज करवाई गई है। FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। पुलिस से पीड़िता की माँ ने पूरी घटना बताई है, इसके साथ ही कहा है कि उसे अब फोन पर धमकियाँ मिल रही हैं। FIR में पुलिस ने दरकशा, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद ताज समेत 4 लोगों को आरोपित बनाया गया है।

इनके खिलाफ BNS की कई धाराओं में मामला दर्ज हुआ है। इसके अलावा आरोपितों पर SC/ST एक्ट की धाराएँ लगाई गई हैं। पुलिस ने मामले दरकशा और कैफ को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को जाँच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य पता चले हैं।

प्रयागराज के DCP कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया है कि बानो एक संगठित गिरोह का हिस्सा है जो गरीब और दलित लड़कियों को बहला-फुसलाकर, उनका ब्रेनवॉश करके और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करके आतंकवादी और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल करता है।

उन्होंने शक जताया है कि दरकशा बानो केरल के एक मॉड्यूल से जुड़ी हुई है। अब इसकी जाँच 3 टीमें कर रही हैं।

उत्तर प्रदेश : कहाँ है "सिर तन से जुदा' फिरकापरस्त गैंग? कुरान फाड़ने वाला मुसलमान इसलिए चुप है? नजीम ने खुलेआम कुरान फाड़ कर हवा में उड़ाए पन्ने, पुलिस ने उपद्रवी मुस्लिम भीड़ को खदेड़ा: आरोपित हिरासत में

                  शाहजहाँपुर में कुरान फाड़ने की घटना (प्रतीकात्मक फोटो साभार: Islam Online)
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद कस्बे में गुरुवार (3 अप्रैल, 2025) रात कुरान के पन्ने फाड़ने की घटना सामने आई। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपित युवक को हिरासत में ले लिया है। घटना जलालाबाद थाना क्षेत्र में तहसील रोड पर हुई, जो थाना परिसर से मात्र 50 मीटर की दूरी पर है।

गुरुवार रात करीब 9 बजे कुछ स्थानीय मुस्लिमों ने कुरान के कुछ पन्ने फटे हुए देखे, जिसके बाद क्षेत्र में हंगामा मच गया। देखते ही देखते घटनास्थल पर हजारों मुस्लिमों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजेश द्विवेदी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। इसके बाद उन्होंने आक्रोशित मुस्लिम भीड़ को शांत करने का प्रयास किया। बार-बार चेताने के बाद भी शांत न होने पर पुलिस ने उन्हें लाठियाँ भाँजकर खदेड़ा और हालात को नियंत्रित किया।

अगर यही घिनौनी हरकत किसी हिन्दू ने की होती "सिर तन से जुदा" गैंग और इसके समर्थक सड़क पर उतर चुका होता। जो साबित करता है कि इस गैंग का काम साम्प्रदायिकता और देश का माहौल ख़राब करना है। मजे की बात सारा मीडिया भी नशे में टुल पड़ा है। अगर किसी हिन्दू ने ये घ्रणित काम किया होता तब देखते सारा मीडिया और कोर्ट कितना शोर मचा रहे होते।    

सीसीटीवी फुटेज से आरोपित की पहचान

पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जाँच की, जिसमें एक युवक कुरान के पन्नों को हवा में उड़ाता हुआ नजर आया। फुटेज के आधार पर आरोपित की पहचान नजीम के रूप में हुई, जो जलालाबाद कस्बे का ही निवासी है। पुलिस ने आरोपित को रात में ही हिरासत में ले लिया।

पुलिस का बयान

एसपी राजेश द्विवेदी ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा, “घटना के तुरंत बाद पुलिस ने मौके पर पहुँचकर भीड़ को शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। सीसीटीवी फुटेज की जाँच में आरोपित की पहचान हुई, जिसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।”

आरोपित की मानसिक स्थिति पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपित नजीम मानसिक रूप से अस्वस्थ है। हालाँकि, पुलिस इस दावे की सत्यता की जाँच कर रही है। एसपी द्विवेदी ने बताया कि इलाके में शांति बनी हुई है और पुलिस हर स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है।

माहौल शांत, पुलिस सतर्क

घटना के बाद से इलाके में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन की अपील है कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। पुलिस इस मामले में आगे की जाँच कर रही है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विदेश में भी कुरान के साथ छेड़छाड़ की घटनाएँ होती रही रही है। स्वीडन में कुरान जलाने वाले इराकी व्यक्ति सलवान मोमिका की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

नहाती हुई महिला, कपड़े बदलती हुई महिला… महाकुंभ की फोटो-वीडियो बता बेच रहे थे डार्क बेव पर: UP पुलिस हुई सख्त तो कई अकाउंट हुए बंद, ‘पत्रकार’ कामरान पहुँचा हवालात

महाकुंभ को बदनाम करने के क्रम में सोशल मीडिया पर हिंदू लड़कियों की इज्जत उछालने का मामला प्रकाश में आया है। पता चला है कि सोशल मीडिया पर कुछ अकॉउंटों से लड़कियों की नदियों में नहाते हुए फोटो-वीडियो साझा की जा रही है। इसके अलावा ये भी जानकारी सामने आई कि लड़कियों के नहाने की वीडियो को डार्क वेब पर बेचा जा रहा है। उन्हें टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर कुछ हजार रुपयों में वायरल करने का काम हो रहा है।

पुलिस ने अब इन शिकायतों की जाँच करनी शुरू कर दी है। वीडियोज डार्क वेब पर बेची गईं या नहीं, इसकी जाँच के लिए पुलिस ने इंस्टाग्राम के हेडऑफिस कैलिफोर्निया को एक ईमेल भेजकर अकाउंट की डिटेल्स माँगी है। साथ ही जिन अकॉउंट ने लड़कियों के नहाने की फोटो साझा करते हुए महाकुंभ को बदनाम करने की कोशिश की है उनके ऊपर भी पुलिस ने एक्शन लेना शुरू कर दिया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने कामरान अलवी नाम के कथित पत्रकार को गिरफ्तार किया है। उसने महिलाओं की नदी में नहाने की एक वीडियो को शेयर किया हुआ था और लिखा था- संगम घाट का भव्य नजारा। पुलिस ने इस वीडियो को देखने के बाद कामरान अलवी को अरेस्ट कर लिया है।

वहीं अन्य लोगों की भी छानबीन कर रही है जिन्होंने महिलाओं की ऐसी वीडियो प्रसारित करने का काम किया। जानकारी के मुताबिक इस मामले में कुंभ मेला प्रयागराज के साइबर थाने में सब इंस्पेक्टर पूजा रायकवार ने एक इंस्टाग्राम अकाउंट के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा–79, 353, IT एक्ट की धारा–67 में 17 फरवरी को FIR कराई है। एफआईआर में बताया गया है कि आईडी में महिलाओं के नहाने के वीडियो डाले गए हैं। अब पुलिस इस केस की जाँच कर रही है।

ये भी कहा जा रहा है कि इन वीडियोज को बनाने के बाद टेलीग्राम ग्रुप पर 1900 से 4000 रुपए तक में बेचा जा रहा है। इसकी सच्चाई क्या है पुलिस लगातार इसे जानने का प्रयास कर रही है। वहीं जो कोई भी महाकुंभ पर झूठ फैलाने का या महिलाओं की इज्जत से छेड़छाड़ करने का काम कर रहा है उनपर कार्रवाई हो रही है। जानकारी के मुताबिक कुंभ में अब तक सोशल मीडिया से जुड़ी 12 एफआईआर दर्ज हो चुकी है। एक टेलीग्राम चैनल ‘सीसीटीवी चैनल 11’ पर भी कार्रवाई हुई है।

9 मुस्लिम, 90 लाख रूपए का फ्रॉड, अग्रिम जमानत पर सवाल… उत्तर प्रदेश पुलिस ने गाजियाबाद कोर्ट में क्यों भाँजी लाठियाँ, क्यों हड़ताल पर वकील?

                        गाजियाबाद कोर्ट में पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में अलीगढ़ में वकीलों का प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के वकील 4 नवंबर 2024 को हड़ताल पर हैं। दिल्ली बार एसोसिएशन भी इसका समर्थन कर रहा है। यह पूरा विवाद 29 अक्टूबर को गाजियाबाद जिला कोर्ट में हुए लाठीचार्ज से पैदा हुआ है। कथित तौर पर जालसाजी के एक मामले में मुस्लिम आरोपितों की अग्रिम जमानत को लेकर जज अनिल कुमार और वकीलों के बीच बहस हुई। फिर पुलिस की एंट्री हुई। अब यह मामला लाठीचार्ज की SIT जाँच को लेकर हाई कोर्ट में याचिका से हड़ताल तक पहुँच चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने भी पुलिस लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा है कि जिला जज अनिल कुमार के आदेश पर वकीलों पर लाठीचार्ज किया गया। SCBA ने एक प्रस्ताव पारित कर जिला जज अनिल कुमार के आचरण की जाँच इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में कराने की माँग की है। गाजियाबाद बार एसोसिएशन लाठीचार्ज की SIT जाँच की माँग कर रहा है। इसको लेकर एडवोकेट जवाहिर यादव ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका घटनास्थल के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और FIR में नामजद वकीलों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाने की अपील की गई है।

गाजियाबाद जिला कोर्ट में वकीलों पर लाठीचार्ज

29 अक्टूबर को दोपहर के समय जिला जज अनिल कुमार की अदालत में कई वकीलों का जमावड़ा हो गया था। कुछ ही देर में कोर्ट परिसर में शोर-शराबा मच गया। तभी अचानक कैम्पस में पुलिस की एंट्री हुई। घटना के वायरल वीडियो में से कुछ में पुलिसकर्मी वकीलों पर बल प्रयोग करते दिख रहे हैं। वकीलों को भी कुर्सियाँ उठा कर फेंकते देखा जा सकता है।

वकीलों के मुताबिक लाठीचार्ज के लिए जिला जज जिम्मेदार

इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले एडवोकेट जवाहिर यादव का दावा है कि एक मामले में जमानत को लेकर घटना की कुछ वकील जिला जज अनिल कुमार की अदालत में बहस कर रहे थे। इसी दौरान किसी बात पर वकीलों और जज में गर्मागर्म बहस हो गई। आरोप है कि जज अनिल कुमार ने अपना आपा खो दिया और डायस पर खड़े हो कर वकीलों को गंदी-गंदी गालियाँ देने लगे।
एडवोकेट जवाहिर यादव के अनुसार थोड़ी देर बाद जज अनिल कुमार के आदेश पर पुलिस कोर्ट रूम में घुसी और वकीलों को पीटना शुरू कर दिया। जज पर आरोप है कि वे पुलिस को बार-बार वकीलों को गोली मारने के लिए उकसा रहे थे। घटना के बाद में कोर्ट कैम्पस में CRPF की टुकड़ी तैनात कर दी गई। इसके पीछे भी वकील जज अनिल कुमार को ही बता रहे हैं।

पुलिस की FIR में क्या?

पुलिस द्वारा दर्ज करवाई गई FIR में वकीलों को हिंसा का जिम्मेदार बताया गया है।सब इंस्पेक्टर संजय कुमार ने कवि नगर थाने में केस दर्ज करवाया है। अपनी तहरीर में उन्होंने बताया है कि 29 अक्टूबर को वे साथी सिपाहियों के साथ कचहरी में ड्यूटी पर थे। तभी एक अदालत में करीब 50 वकीलों के इकट्ठा हो कर हंगामा करने की सूचना मिली।
संजय कुमार की शिकायत के अनुसार हंगामे के दौरान वकील कुर्सियाँ फेंकते हुए गंदी-गंदी गालियाँ दे रहे थे। उन्होंने अन्य पुलिसकर्मियों के साथ हंगामा कर रहे वकीलों को अदालत से बाहर निकाला। इसके बाद नीचे आकर वकीलों ने पुलिस बल पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। कचहरी में बनी पुलिस चौकी में आग लगा दी। वकीलों की भीड़ ने चौकी के आसपास लगे CCTV कैमरे भी तोड़ दिए।
सब इंस्पेक्टर संजय कुमार ने बताया है कि वकीलों की पत्थरबाजी में कोर्ट परिसर के लगे कई शीशे टूट गए। दारोगा राजेश कुमार के सिर पर चोटें आईं हैं। इस हंगामे से कचहरी में भगदड़ मच गई। हालत संभालने के लिए कोर्ट कैम्पस में CRPF के साथ PAC की टुकड़ी तैनात करनी पड़ी।
संजय कुमार की तहरीर पर लगभग 50 अज्ञात वकीलों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 191 (3), 121 (1) और 121 (2), 131, 352, 324 (4), 326 (G), 61 (2), 3 (5) और 118 (1) के साथ आपराधिक कानून 1932 की धारा 7 व सार्वजनिक सम्पत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के सेक्शन 3/4 के तहत केस दर्ज हुआ है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है।
गाजियाबाद पुलिस के एडिशनल कमिश्नर दिनेश कुमार ने बताया है कि जिला जज के चैंबर की तरफ बढ़ रही हमलावर वकीलों की भीड़ को पुलिस ने जैसे-तैसे काबू किया था। उन्होंने बताया कि जब पुलिस जिला जज को सुरक्षित करने में जुटी थी तभी वकीलों ने नीचे उतर कर आगजनी की है। बकौल एडिशनल सीपी सबूत और तथ्य जुटाए जा रहे हैं जिनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

न्यायिक कर्मचारी की FIR में भी वकील ही हिंसा के जिम्मेदार

पुलिस के अलावा एक दूसरी FIR न्याय विभाग के कर्मचारी संजीव गुप्ता ने दर्ज करवाई है। गाजियाबाद कचहरी में नाजिर के पद पर तैनात संजीव गुप्ता की तहरीर में बताया गया है कि 29 अक्टूबर को एडवोकेट नाहर सिंह यादव, उनके बेटे अभिषेक यादव तथा उनके रिश्तेदार दिनेश यादव ने कोर्ट परिसर में साजिशन हंगामा किया। हंगामे में 40 से 50 अन्य अराजक लोग भी शामिल थे।
संजीव की शिकायत के अनुसार अराजक भीड़ ने कोर्ट रूम में घुस कर न्यायिक कार्य में बाधा डाली। खिड़कियों और शीशों को तोड़ दिया। फर्नीचरों को उठा कर फेंक दिया। सर्वर मशीन को तहस-नहस कर दिया।

जिस मामले में जमानत से शुरू हुआ विवाद, उसमें मुस्लिम आरोपित, हिंदू वकील पीड़ित

जिस मामले में जमानत को लेकर वकीलों और जज के बीच बहस की बात कही जा रही है वह एक जालसाजी से जुड़ा केस है। इस जालसाजी के शिकार वकील जितेंद्र सिंह हैं। उनकी शिकायत पर इस मामले में गुलरेज आलम, रिजवान अली, हसमुद्दीन, मोहम्मद फहीम, नसरुद्दीन, फातिमा परवीन, जफरुद्दीन, ख़ुर्शीदन और हाजी आरिफ अली नामजद हैं।
इन सभी पर जमीन के सौदे के नाम पर जितेंद्र सिंह से 90 लाख रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है। अदालत के आदेश पर यह FIR 2 अक्टूबर 2024 को दर्ज हुई थी। आरोपितों पर IPC की धारा 420, 406, 467, 468, 471 और 120 बी लगाई गई है। ऑपइंडिया के पास इस FIR की कॉपी भी मौजूद है।
ऑपइंडिया से बात करते हुए वकील जितेंद्र सिंह ने बताया कि नियमों के विरुद्ध जाते हुए जिला जज अनिल कुमार ने आरोपितों को अग्रिम जमानत दी थी। वकील इस केस पर सुनवाई की माँग कर रहे थे। लेकिन अनिल कुमार इसके लिए तैयार नहीं थे। उनके यह भी दावा है कि यही जज पूर्व में 18 लाख की एक अन्य धोखाधड़ी केस में अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज कर चुके हैं।

उत्तर प्रदेश : प्रयागराज के मदरसे में छापे जा रहे थे जाली नोट: कोई मौलवी, कोई आलिम… सब फेक करेंसी से कर रहे थे ‘मजहब’ मजबूत, 100 रूपए देने पर मिलते थे 3 नकली नोट

मदरसे में नकली नोट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर के प्रयागराज पुलिस ने मौलवी सहित 4 को दबोचा (चित्र साभार- X/@UPkesari)
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में बुधवार (28 अगस्त 2024) को पुलिस ने नकली नोट बनाने के एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह एक मदरसे से ऑपरेट हो रहा था जहाँ 100-100 रुपए के जाली नोट छापे जा रहे थे। पुलिस ने मदरसे में छापा मार कर 1 लाख 30 हजार रुपए के नकली नोट बरामद किए हैं। इस केस में ओडिशा के जाहिर खान सहित कुल 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपितों में मदरसे का मौलवी तफसीरुल भी शामिल है। पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना प्रयागराज जिले के अतरसुइया इलाके की है। यहाँ पर एक मदरसा है जिसका नाम जामिया हबीबिया मस्जिद-ए-आज़म है। पुलिस को पिछले कई दिनों से यहाँ पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। यहाँ पर कई बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहता था। पुलिस ने इस मदरसे पर बारीक नजर रखनी शुरू कर दी। जब पुलिस को इत्मीनान हो गया कि मदरसे में सब सही नहीं चल रहा तब बुधवार (28 अगस्त) को यहाँ दबिश दी गई।

पुलिस मदरसे के अंदर घुसी तब वहाँ एक प्रिंटिंग मशीन पर 3 लोग कुछ छापते नजर आए। जाँच के बाद पता चला कि तीनों नकली नोटों की छपाई कर रहे थे। इन तीनों से पूछताछ हुई तो इन्होंने इस गैरकानूनी काम में मदरसे के प्रिंसिपल की भी मिलीभगत बताई। 25 वर्षीय प्रिंसिपल का नाम मोहम्मद तफसीरुल है जो पेशे से मौलवी है। पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए अन्य आरोपितों में 18 वर्षीय मोहम्मद अफ़ज़ल, 18 वर्षीय मोहम्मद शाहिद और 23 वर्षीय जाहिर खान का नाम है।

ज़ाहिर खान उर्फ़ अब्दुल ज़ाहिर मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला है। वह मदरसे में आलिम है। पढ़ाई के बाद जाहिर मदरसे में ही पढ़ाने लगा था। वहीं हाईस्कूल पास मोहम्मद अफ़ज़ल के अब्बा मोईद अहमद कपड़े की दुकान पर काम करते हैं। कक्षा 8 पास मोहम्मद शाहिद मदरसे में मौलवी बनने आया था लेकिन बाद में वह नकली नोट छापने वाले रैकेट से जुड़ गया। हाईस्कूल पास मौलवी तफसीरुल के अब्बा भी मदरसे में पढ़ाते थे। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वो पिछले 3 महीनों से नकली नोटों के इस काले कारोबार को संचालित कर रहे थे।

मदरसे की तलाशी ली गई तो वहाँ से 1 लाख 30 हजार रुपए के नकली नोट बरामद हुए। नकली नोट बनाने के लिए प्रिंटर और अन्य मशीनें ओडिशा के भद्रक निवासी अब्दुल ज़ाहिर ने अपने भाई से मँगवाई। ज़ाहिर का भाई भी पहले प्रयागराज में आधार कार्ड बनवाने का काम कर चुका है। 100 रुपयों के नोट में लोग ज्यादा जाँच पड़ताल नहीं करते, यही सोच कर आरोपितों ने इसे छापना शुरू किया था। अधिकतर नोटों को प्रयागराज के अलग-अलग हिस्सों में दुकानरों को धोखे से दिया जाता था।

आरोपितों ने बाजार में कितनी नकली नोट चलाए हैं इसकी जाँच पुलिस कर रही है। अनुमानित राशि लगभग 5 लाख रुपए बताई जा रही है। पकड़े गए आरोपित अपने काले कारोबार को चलाने के लिए युवाओं को अपने साथ जोड़ रहे थे। उनको 100 रुपए असली देने पर 300 रुपए नकली दिए जाते थे। अब पुलिस टीमें इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पड़ताल कर रही है। नकली नोट छापने वाले प्रिंटर व अन्य मशीनों को जब्त कर लिया गया है। पुलिस मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

इन सभी आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा सिविल लाइंस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 178, 179, 180, 181 और 182 (1) के तहत कार्रवाई की गई है। इस मामले की जाँच के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की टीम भी पहुँच गई है।

पत्रकार अजीत भारती को ‘नोटिस’ देने के लिए चोरों की तरह आई कर्नाटक पुलिस, UP पुलिस ले गई अपने साथ: बेंगलुरु में FIR दर्ज कर राष्ट्रवादी आवाज को दबाना चाहती है कांग्रेस

सादे कपड़ों में मौजूद कर्नाटक पुलिस के जवान (बाएँ) उनसे पूछताछ करती यूपी पुलिस (वर्दी में) और पत्रकार अजीत भारती (टीशर्ट में, दाएँ)
कॉन्ग्रेस सरकारे राष्ट्रवादी आवाजों को दबाने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। अब कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने पत्रकार अजीत भारती के घर पुलिस भेजी है। कर्नाटक पुलिस के कुछ जवान सादी वर्दी में बिना किसी पूर्व सूचना के अजीत भारती के घर पहुँचे हैं।

जानकारी के अनुसार, कर्नाटक पुलिस के तीन जवान गुरुवार (20 जून, 2024) को नोएडा स्थित अजीत भारती के आवास पर पहुँचे। यहाँ वह लोग कुछ देर खड़े रहे। इसके बाद उन्होंने एक नोटिस अजीत भारती को दिया। कर्नाटक पुलिस के जवानों के साथ स्थानीय पुलिस भी नहीं थी।

इस विषय में ऑपइंडिया को अजीत भारती ने बताया कि कर्नाटक पुलिस के इन जवानों ने स्थानीय यूपी पुलिस के थाने को सूचना दी थी लेकिन बिना साथ लिए ही वह उनके आवास पर पहुँच गए थे। यह तीनों अजीत भारती के घर एक कैब से पहुँचे थे और उन्होंने वर्दी भी नहीं पहन रखी थी। अपने घर के आसपास अजीत भारती और उनके परिवार ने संदिग्ध गतिविधि देख कर स्थानीय पुलिस थाने को सूचना दी।

इसके बाद स्थानीय पुलिस यहाँ पहुँची और कर्नाटक पुलिस के इन तीनों जवानों को अपने साथ ले गई। कर्नाटक पुलिस के इन जवानों ने अजीत भारती को हाल ही में उनके खिलाफ दर्ज किए गए मामले में एक नोटिस भी थमाया है। यह नोटिस बेंगलुरु के हाई ग्राउंड थाने से जारी किया गया है।

                                      अजीत भारती को कर्नाटक पुलिस ने यह नोटिस दिया है

नोटिस में कहा गया है कि अजीत भारती ने समाज में घृणा और शत्रुता बढ़ाने के उद्देश्य से राहुल गाँधी को लेकर एक वीडियो बनाया है। इसी को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है। अजीत भारती को कर्नाटक पुलिस ने आदेश दिया है कि वह नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर हाई ग्राउंड थाने में पेश हों।

अजीत भारती के खिलाफ यह FIR 15 जून, 2024 को दर्ज करवाई गई थी। ये एफआईआर कॉन्ग्रेस कर्नाटक के कॉग्रेस कमेटी के लीगल सेल सचिव और सचिव बेके बोपन्ना ने कराई थी। FIR दर्ज कराते समय दावा किया गया था कि अजीत भारती ने 13 जून, 2024 को राहुल गाँधी को लेकर एक झूठा वीडियो बनाया जबकि गुरूवार (20 जून, 2024) को उनको दिए गए नोटिस में कहा गया है उनका वीडियो घृणा फैला रहा है इसलिए FIR दर्ज हुई है।