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केरल के ‘इस्लामी अड्डे’ में कैद हैं कई लड़कियाँ, लंबी दाढ़ी वाले मर्द दे रहे जिहाद की ट्रेनिंग

दलित बच्ची का धर्मांतरण करवाने वाली दरकशा (बाएँ) और कैफ (दाएँ) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है (फोटो साभार: Dainik Bhaskar & AI)
प्रयागराज की एक 15 साल की दलित लड़की को एक मुस्लिम महिला केरल लेकर गई। यहाँ उसका इस्लाम में धर्मांतरण करवाया गया। उसको जिहादी ट्रेनिंग देने का भी प्रयास हुआ। लड़की किसी तरह बच कर वापस पहुँची। पुलिस की जाँच में सामने आया कि मुस्लिम महिला के गैंग में और भी लोग शामिल हैं और उसका काम दलित एवं गरीब बच्चों को आतंकी नेटवर्क में शामिल करवाना है। अब इस मामले में मुस्लिम महिला और उसका साथी गिरफ्तार हो गए हैं।

प्रयागराज की दलित बच्ची को फँसाया

पूरा मामला प्रयागराज के फूलपुर थाने से जुड़ा हुआ है। यहाँ लिलहट गाँव में एक दलित विधवा महिला और उसकी बेटी रहती है। बेटी की आयु मात्र 15 वर्ष है। उसके पड़ोस में ही दरकशा नाम की मुस्लिम लड़की रहती है। दरकशा बानो कथित तौर पर इस हिन्दू बच्ची की सहेली है।

दरकशा हिन्दू बच्ची के साथ रहती है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दरकशा हिन्दू बच्ची को इस्लाम के बारे में ब्रेनवॉश किया करती थी। वह हिन्दू धर्म के प्रति जहर भी भरती थी। 8 मई, 2025 को दरकशा बानो रात 10 बजे हिन्दू बच्ची को एक शादी से लेकर फूलपुर की एक मस्जिद के पास गई।

दरकशा बानो का मददगार मोहम्मद कैफ यहाँ बाइक लेकर खड़ा था। दरकशा ने हिन्दू बच्ची को इस दौरान पाने जाल में फँसा लिया था। कैफ ने इन दोनों को प्रयागराज जंक्शन छोड़ा। रास्ते में कैफ ने हिन्दू बच्ची से छेड़छाड़ भी की। दरकशा प्रयागराज से बाद हिन्दू बच्ची को प्रयागराज से लेकर दिल्ली चली गई।

दरकशा की मंजिल लेकिन दिल्ली नहीं थी। यहाँ से वह हिन्दू बच्ची को लकर केरल के त्रिशूर चली गई। यहाँ हिन्दू बच्ची के साथ प्रताड़नाओं का दौर चालू हो गया। उसका धर्मांतरण करवाया गया। उसे आतंकी ट्रेनिंग की बात भी हुई। बच्ची किसी तरह बच के पुलिस के पास पहुँची, जहाँ से प्रयागराज सूचना परिवार के पास पहुँची। बच्ची वापस इसके बाद आ सकी।

हिन्दू पीड़िता बोली- दाढ़ी वाले जिहाद की बात करते थे

हिन्दू बच्ची ने बरामद होने के बाद बताया कि त्रिशूर में उसे एक ऐसे घर में ले जाया गया था जहाँ और भी कई नाबालिग लड़कियाँ मौजूद थीं। हिन्दू बच्ची ने यह भी बताया कि इसी घर में कई ‘बड़ी दाढ़ी वाले’ मौजूद थे। इन लोगों ने बच्ची पर इस्लाम में धर्मांतरण करने का दबाव बनाया।

बच्ची के अनुसार, ‘बड़ी दाढ़ी वालों’ ने उसको जिहादी ट्रेनिंग देने की बातें भी की। इस दौरान दरकशा वहाँ से गायब हो गई। डरी सहमी बच्ची किसी तरह यहाँ से भाग निकली। यहाँ वाल रेलवे स्टेशन पहुँची जहाँ पुलिस ने उससे जानकारी ली। इसके बाद बच्ची का प्रयागराज लौटना संभव हो पाया।

UP पुलिस बोली- केरल मॉड्यूल से जुड़ी है दरकशा

इस मामले में 28 जून, 2025 को प्रयागराज के फूलपुर थाने में FIR दर्ज करवाई गई है। FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। पुलिस से पीड़िता की माँ ने पूरी घटना बताई है, इसके साथ ही कहा है कि उसे अब फोन पर धमकियाँ मिल रही हैं। FIR में पुलिस ने दरकशा, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद ताज समेत 4 लोगों को आरोपित बनाया गया है।

इनके खिलाफ BNS की कई धाराओं में मामला दर्ज हुआ है। इसके अलावा आरोपितों पर SC/ST एक्ट की धाराएँ लगाई गई हैं। पुलिस ने मामले दरकशा और कैफ को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को जाँच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य पता चले हैं।

प्रयागराज के DCP कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया है कि बानो एक संगठित गिरोह का हिस्सा है जो गरीब और दलित लड़कियों को बहला-फुसलाकर, उनका ब्रेनवॉश करके और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करके आतंकवादी और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल करता है।

उन्होंने शक जताया है कि दरकशा बानो केरल के एक मॉड्यूल से जुड़ी हुई है। अब इसकी जाँच 3 टीमें कर रही हैं।

प्रयागराज के जिस मदरसे में छपते थे जाली नोट, उसे तुर्की-अरब से करोड़ों की फंडिंग: फर्जी आधार कार्ड का भी धंधा, 630 छात्रों की तलाश

प्रयागराज के जिस मदरसे में बरामद हुए नकली नोट उसे विदेश से हुई है करोड़ों रुपयों की फंडिंग (चित्र साभार- दैनिक भास्कर)
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के जिस मदरसे में नकली नोट छापने की मशीन पकड़ी गई थी वहाँ के बारे में जाँच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। जाँच एजेंसियों को अब उन 630 छात्रों की तलाश है जो यहाँ से पढ़ाई कर के निकले हैं। आशंका जताई जा रही है कि मौलवी तफसीरुल इन इन सभी का ब्रेनवॉश किया होगा। इस मदरसे को हर साल लगभग 48 लाख रुपए विदेशों में फंडिंग मिलने की भी जानकारी सामने आई है। मामले की पड़ताल में पुलिस के अलावा ATS और IB की टीमें भी जुट गईं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस मदरसे में नकली नोट छापने के साथ RSS को आतंकी संगठन बताया जाता था वहाँ से अब तक लगभग 630 छात्र पढ़ाई कर के निकल चुके हैं। मौलवी तफसीरुल मदरसे में लगभग 6 साल से पढ़ा रहा था। प्रतिवर्ष औसतन 105 छात्र मदरसे से पढ़ाई कर के निकले हैं। जाँच एजेंसियों को आशंका है कि मौलवी तफसीरुल ने इन्हें भी कट्टरपंथ का पाठ पढ़ाया होगा। ये छात्र देश के अलग-अलग राज्यों में हैं। ऐसे में स्थानीय पुलिस के साथ ATS और IB की टीमें भी इनकी खोज में 6 प्रदेशों में गईं हैं।

ATS ने बुधवार (4 सितंबर, 2024) को प्रयागराज पहुँच कर जाँच शुरू की है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की टीम 28 अगस्त को ही प्रयागराज पहुँच चुकी थी। अब तक हुई जाँच में यह सामने आया है कि मदरसे में हर साल विदेशों से लाखों रुपए भेजे जाते थे। तुर्की और सऊदी अरब मिला कर प्रतिवर्ष 48 लाख रुपए भेजे जाने के प्रमाण भी मिले हैं। अब तक हुई कुल फंडिंग 2 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। मदरसा कमिटी के मैनेजर शाहिद के मुताबिक, ये पैसे दूसरे देशों से मदद के तौर पर भेजी जाती है।

इसी से मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों की तालीम से ले कर उनके रहने आदि के खर्च व मेंटेनेंस का हिसाब-किताब किया जाता है।

जाँच एजेंसियों ने पैसे भेजने वालों की पहचान उजागर नहीं की है लेकिन उनके पाकिस्तान ने कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं। ATS और IB की टीमें यह पता लगाने में भी जुटी हैं कि जिस खाते में विदेशों से पैसे आते थे उन्हें हैंडल कौन करता था। विदेशों से पैसे मँगाने के मामले में अब तक 12 बैंक खाते रडार पर हैं। मदरसे के प्रिंसिपल मौलवी तफसीरुल के परिजनों और रिश्तेदारों के भी खातों की डिटेल तलब की गई है। अन्य खातेदारों में अधिकतर मदरसा कमेटी से जुड़े हुए लोग हैं। इस बावत संबंधित बैंकों से भी लेन-देन का ब्यौरा तलब किया गया है।

इसी केस में मौलवी के साथ पकड़े गए ओडिशा के अब्दुल जहीर के पास मिला आधार कार्ड फर्जी बताया जा रहा है। उसे नकली नोट की ही तरह जाली आधार कार्ड बनाने का एक्सपर्ट माना जा रहा। IB की पूछताछ में अब्दुल जहीर ने कबूल किया है कि फर्जी आधार कार्ड बनाने के रैकेट में ओडिशा में मौजूद उसका भाई भी शामिल है। मदरसे से जुड़े कुछ लोगों का पिछले 5 वर्षों से अलग-अलग देशों में आना-जाना लगा हुआ है। इनके साथ कुछ अन्य राज्यों से भी मदरसे का कनेक्शन पाया गया है। जाँच एजेंसियाँ इन सभी लोगों की पड़ताल में जुटी हैं।

इस्लामी देश मलेशिया में ‘रद्द’ हुए शरिया के 16 कानून

                           मलेशिया में कोर्ट ने शरिया कानून किया रद्द (तस्वीर साभार: Reuters)
मलेशिया की सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए केलंतन राज्य में शरिया आधारित आपराधिक कानूनों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह संघीय सरकार का अधिकार है और इस तरह के कानून उस पर अतिक्रमण करते हैं। इस फैसले के बाद मलेशिया में इस्लामी कट्टरपंथी नाराज हो रखे हैं।

जानकारी के मुताबिक, कोर्ट में यह केस 2022 में दो मुस्लिम महिलाओं की ओर से दायर किया गया था जिस पर सुनवाई करते हुए 9 फरवरी 2024 को नौ सदस्यीय संघीय न्यायालय ने 8-1 के बहुमत से फैसला सुनाया। फैसले में 16 कानूनों को अमान्य करार दिया गया।

इन कानूनों में कुकर्म, यौन उत्पीड़न, अनाचार और ‘क्रॉस ड्रेसिंग’ (विपरीत लिंग से संबंधित कपड़े पहनना) से लेकर झूठे सबूत देने तक के अपराधों के लिए दंड का प्रावधान किया गया था। कोर्ट ने इन कानूनों को रद्द करते हुए कहा कि इन (उक्त) विषयों के लिए इस्लामी कानून नहीं बना सकते, क्योंकि ये विषय मलेशियाई संघीय कानून के अंतर्गत आते हैं।

इस फैसले को सुनाते वक्त कोर्ट के बाहर सिक्योरिटी टाइट थी क्योंकि इस्लामी कट्टरपंथी इस केस के विरोध में पहले से थे। द स्ट्रेट टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि निर्णय आने के वक्त 1000 से अधिक कट्टरपंथी लोग पुतराज्य में कोर्ट के बाहर प्रदर्शन करने के लिए कोर्ट के बाहर थे। निर्णय आने के बाद वह सब नाराज हो गए।

उन्होंने कहा, “इस तरह का निर्णय इस्लामी मुल्क में नहीं लिया जाना चाहिए। ये हमारी आँखों के आगे हो रहा है। हम मुस्लिमों को लग रहा है कि हमें चुनौती दी जा रही है। अगर हमारे मुल्क में कानून नहीं होगा तो मुश्किल हो सकती है। देश मुश्किल में पड़ जाएगा।”

कुछ प्रदर्शनकारियों ने इस फैसले के लिए नेताओं को दोषी बताया। वहीं कुछ ने माँग की कि शरिया को वापस से वैसे ही राज्य में लागू किया जाए जैसे वो पहले था। उसमें कोई बदलाव न हो।

गौरतलब है कि मलेशिया में 1990 से कट्टरपंथी पैन मलेशियाई इस्लामिक पार्टी या PAS का राज है। वहाँ दो स्तरीय कानून प्रणाली चलती है। इसके तहत शरिया के तहत मुस्लिमों के व्यक्तिगत और पारिवारिक मामले आते हैं और साथ ही यहाँ सिविल कानून भी चलता है। जिस राज्य की अदालत ने इस फैसले को सुनाया है वहाँ की 97 फीसद आबादी मुस्लिमों की है।