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दिल्ली ब्लास्ट के बाद UP सरकार का बड़ा कदम, मदरसों के बाहरी मौलाना-छात्रों का डेटा ATS को देना अनिवार्य

                 मदरसों के लिए बना नया नियम, ATS को देनी होगी जरूरी जानकारी (साभार: इंडिया टीवी)
कहते हैं "जहां न पहुंचे रवि, कहां पहुंचे कवि" जिसे 1958 में चरितार्थ किया कवि प्रदीप ने। प्रदीप के रचित इस गीत "कहनी है एक बात हमें इस देश के पहरेदारों से, संभल के रहना अपने घर में छिपे हुए गद्दारों से..." से तत्कालीन नेहरू सरकार इतनी भयभीत हो गयी कि इसके प्रसारण पर प्रतिबन्ध लगा दिया। लेकिन उस प्रतिबंध को 1965 में हुए इंडो-पाक युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने। दूसरे, भारत में पल रहे गद्दारों को पकड़ने का शंखनाद शास्त्री जी ने कर दिया था। लेकिन उनके निधन के बाद मुस्लिम कट्टरपंथी और पाकिस्तानपरस्त नेताओं ने इस देशहित काम को ठन्डे बस्ते में डाल दिया। 

अगर शास्त्री जी द्वारा देशहित के काम पर काम होता देश आतंकवाद, पत्थरबाज़ी और अब हुए दिल्ली ब्लास्ट नहीं होते। मुस्लिम कट्टरपंथियों को मालूम था कि हमारी हरकतों को बचाने हमारी गुलाम सियासती पार्टियां है। ये मुस्लिम कट्टरपंथियों की गुलाम पार्टियां जो पहलगाम में धर्म पूछकर महिलाओं को विधवा बनाने पर Operation Sindoor होने पर हत्यारों को पकडे जाने पर पूछने वाले आज दिल्ली ब्लास्ट करने वाले डॉक्टरों को भटका हुआ, गुमराह और बेगुनाह बताने वालों पर भी सरकार को कार्यवाही करनी चाहिए। इतना ही नहीं, पत्थरबाज़ी करने वालों में शामिल बच्चों को भी बच्चा समझ नहीं छोड़ना चाहिए। इन पर भी उसी तरह कार्यवाही करनी चाहिए जिस तरह बड़ों पर की जाती है। इन्हें आतंकवादियों का स्लीपर सेल मान कार्यवाही करनी होगी।         

दिल्ली में हाल ही में हुए धमाके और इसमें फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी का कनेक्शन सामने आने के बाद पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट मोड पर हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम कदम उठाते हुए मदरसों की निगरानी को और मजबूत करने का फैसला किया है।

अब प्रदेश के सभी मदरसों, चाहे वे मान्यता प्राप्त हों या बिना मान्यता के, उसको अपने कर्मचारियों, मौलानाओं और छात्रों का पूरा विवरण ATS (Anti-Terrorism Squad) को उपलब्ध कराना होगा।

15 नवंबर 2025 को जारी एक पत्र में UP ATS ने प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशांबी, फतेहपुर, बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों (DWO) को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों के सभी मदरसों के छात्रों और शिक्षकों का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराएँ।

सरकार के अनुसार यह केवल सर्वे या साधारण जानकारी एकत्रित करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि व्यापक सुरक्षा ऑडिट है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मदरसे या मजहबी संस्थान में कोई संदिग्ध व्यक्ति छिपकर आतंकी गतिविधियाँ न चला सके।

इस कदम की पृष्ठभूमि में है अल-फलाह यूनिवर्सिटी का मामला, जिसमें विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों को यह दिख चुका है कि एक निजी विश्वविद्यालय कैसे आतंक-संबंधी गतिविधियों के नेटवर्क के केंद्र के रूप में उभर सकता है।

यूपी सरकार ने मदरसों के लिए क्या नया नियम बनाया?

उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश के अनुसार, राज्य के सभी मदरसों, चाहे वो मान्यता प्राप्त हों या मान्यता प्राप्त ना हो, उसे यह सुनिश्चित करना है कि उन संस्थाओं में पढ़ने वाले सभी छात्रों तथा वहाँ कार्यरत मौलानाओं और शिक्षकों की व्यक्तिगत पृष्ठभूमि, मोबाइल नंबर, आधार-संख्या, स्थायी पता आदि की जानकारी UP ATS को समय-बद्ध रूप से उपलब्ध कराई जाए।
इसमें छात्रों के नाम, उनके पिता के नाम, पते और मोबाइल नंबर जैसी जानकारियाँ शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मदरसे का इस्तेमाल असामाजिक या आतंकी गतिविधियों के लिए न हो सके। फिलहाल यह आदेश सिर्फ इन आठ जिलों के लिए लागू किया गया है।
प्रयागराज के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कृष्ण मुरारी ने बताया कि जिले के लगभग 206 मदरसों की जानकारी ATS को भेज दी गई है और अब इन जानकारियों का जमीनी सत्यापन शुरू हो चुका है।
इस आदेश को लेकर यूपी पंचायती राज और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बताया कि पहले भी प्रदेश के कई मदरसों में अवैध गतिविधियों के मामले सामने आए हैं, इसलिए यह निगरानी जरूरी है।

 उन्होंने कहा, “समय-समय पर मदरसों से अलग-अलग मामले सामने आते रहते हैं। जैसे, प्रयागराज में करेंसी छापने के मामले सामने आए, और इसी तरह कुशीनगर में भी। बहराइच में विदेशियों और बाहरी लोगों के मदरसों में रहने का इंतजाम पाया गया। इसी तरह, हाल ही में दिल्ली में हुए बम धमाके में एक डॉक्टर का नाम सामने आया और उसके आधार पर जाँच शुरू हुई।”

इस आदेश में यह स्पष्ट कहा गया है कि यह सिर्फ डेटा जमा करने की प्रक्रिया नहीं है बल्कि एक सुरक्षा-ऑडिट है, ताकि किसी भी मदरसे में बाहरी राज्यों या देशों से आने वाले छात्रों-मौलानाओं की आवाजाही, संदिग्ध गतिविधियाँ व सुरक्षा-रिस्क पहले-से पकड़ी जा सके।

मदरसों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार की कोशिशें

इस दिशा में यूपी सरकार का दृष्टिकोण सिर्फ सुरक्षा-निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यह प्रयास भी करने लगी है कि मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक स्वीकार्यता के साथ जोड़ा जाए।
मदरसों में पढ़ने-वाले छात्रों व वहाँ पढ़ाने-वाले मौलानाओं की जानकारी जुटाना और ATS को उपलब्ध कराना: इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होगा कि मदरसे सिर्फ मजहबी शिक्षा का केंद्र न बनें बल्कि उनकी संरचना, छात्र-छात्राओं की पृष्ठभूमि और भविष्य-संभावनाएँ भी ज्ञात हों।
बाहर-राज्यों या विदेशी छात्रों की आवाजाही पर विशेष ध्यान देना: यह देखा जा रहा है कि कुछ मदरसों में बाहरी राज्यों से आए छात्रों की संख्या काफी अधिक है, जिसे अब खुफिया एजेंसियों ने सन्देह के घेरे में लिया है।
मदरसों को आधुनिक पाठ्यक्रम अपनाने, मान्यता प्राप्त करने, मुख्यधारा की शिक्षा-संस्थाओं से तालमेल बिठाने की दिशा में प्रेरित करना: ताकि मदरसे सामाजिक और शैक्षणिक रूप से स्वीकार्य बने और उनके छात्र आगे-व्यावसायिक या विश्वविद्यालय-स्तर पर भी सहजता से आगे बढ़ सकें।

अवैध मदरसों पर कार्रवाई और दिल्ली ब्लास्ट के बाद जाँच-तेजी

मदरसों पर निगरानी पहले से चल रही थी, लेकिन हाल के में सामने आई घटनाओं, विशेष रूप से 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुए ब्लास्ट ने जाँच-प्रक्रिया को और अधिक तीव्र कर दिया है।
इस ब्लास्ट के बाद राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों ने निर्देश दिया कि मजहबी और शैक्षणिक संस्थानों में आने-जाने वालों की पहचान और आवाजाही पर विशेष नजर रखी जाए। इसी सिलसिले में यूपी ATS ने मदरसों से डेटा जमा करने का अभियान शुरू किया है।
इसका मतलब यह है कि अब मदरसों के कार्य-प्रभावों के साथ-साथ, सुरक्षा-विचारों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है, ताकि कोई भी संस्थान अनियंत्रित रूप से आतंकी गतिविधियों का माध्यम न बने।
दिल्ली के लालकिले धमाके के बाद से सुरक्षा एजेंसियों की नजर फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी पर टिकी हुई है। इस यूनिवर्सिटी को संदेह के घेरे में रखा गया है क्योंकि यहाँ कई ऐसे प्रोफेसर और बाहरी लोग सक्रिय पाए गए हैं, जिन पर आतंकियों को पनाह देने और उनके साथ मिलकर खुफिया तौर पर गतिविधियाँ करने का शक है।

मुस्लिम और विपक्ष कर रहा नए नियम का विरोध

मदरसों के लिए बनाए गए इन नियमों का मुस्लिम लगातार विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे सरकार उनकी प्रोफाइलिंग करने की कोशिश कर रही है। जबकि एजेंसियाँ पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी हैं कि यह सब कुछ केवल सुरक्षा की दृष्टि से किया जा रहा है।
वहीं इस कार्रवाई पर विपक्ष ने भी नाराजगी जताई है। कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शहजाद आलम ने कहा कि सरकार सुरक्षा के नाम पर डर पैदा कर रही है और हर मुस्लिम को शक की निगाह से देखा जा रहा है। उनका कहना है कि अगर ATS इतनी जाँच कर रही है तो उसे अपने मामलों के नतीजों पर भी श्वेत पत्र जारी करना चाहिए, क्योंकि कई मामलों में कोर्ट में दोष सिद्ध नहीं हुआ है।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जामेई ने भी कहा कि देश आतंकवाद के खिलाफ पूरी तरह एकजुट है, लेकिन मदरसों को ATS से जाँच के दायरे में लाना अनावश्यक कदम है और इससे भ्रम और माहौल खराब होगा।
इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि जब एक मकान मालिक किसी नए किराएदार को घर में रहने की अनुमति देता है तो उससे पहले उससे न सिर्फ उसकी जानकारी लेता है बल्कि कुछ जरूरी दस्तावेज भी अपने पास जमा करवाता है। जाहिर सी बात है कि अगर मदरसों में देश के नहीं बल्कि बाहरी छात्रों की संख्या भी अधिक देखने मिल रही है, तो ऐसे में उनकी जानकारी आवश्यक है।
उस पर अल-फलाह जैसे विश्वविद्यालयों से सामने आ रही कश्मीरी छात्रों की संख्या, विश्वविद्यालय के अंदर पढ़ा रहे जिहादी प्रोफेसर इन नियमों को लागू करना और भी आवश्यक बना देते हैं।

मध्य प्रदेश : खंडहर को मदरसा बता डकारी लाखों की स्कॉलरशिप, मुस्लिम छात्रों के नाम पर 27 मदरसे-स्कूल मिले संदिग्ध: इंदौर में रफीक, शबनम, शहनाज समेत 5 घोटालेबाजों पर FIR

                                    मदरसे में पढ़ते छात्र, प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI Grok)
मध्य प्रदेश के इंदौर में मुस्लिम छात्रों के नाम से मिलने वाली छात्रवृत्ति में बड़ा घोटाला सामने आया है। इस मामले में 27 मदरसों और स्कूलों को घोटाले के लिए संदिग्ध माना गया है और 5 के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। क्राइम ब्रांच की जाँच में सामने आया है कि मदरसों और स्कूलों के संचालक खंडहर और खाली मैदान को ही शिक्षण संस्थान बताकर लाखों रुपए की छात्रवृत्ति ले रहे थे।

नई दुनिया की खबर के मुताबिक, क्राइम ब्रांच ने फर्जीवाड़ा करने वाले संचालकों की तलाश शुरू कर दी है और सरकार को इस मामले की रिपोर्ट भेजी जा रही है। दरअसल, क्राइम ब्रांच ने पिछड़ा वर्ग एवँ अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सहायक संचालक अनिल कुमार सोनी की शिकायत पर 17 जून 2025 को केस दर्ज किया था और इस मामले की जाँच कर रही थी।

रिपोर्ट में डीसीपी(क्राइम) राजेश कुमार त्रिपाठी के हवाले से बताया गया है कि पुलिस ने जब एक आरोपित आफताब खान के ठिकाने पर दबिश दी पर वह मोबाइल बंद कर फरार हो गया। आफताब का सेंट जेवियर कॉन्वेंट नाम से सब्जी मंडी खजराना में स्कूल था और उसने 7 लाख से ज्यादा की स्कॉलरशिप ली थी। हालाँकि, जब इस स्कूल की जाँच करने टीम पहुँची तो उस जगह पर कुछ नहीं मिला।

शिकायत के बाद निरीक्षक माधवसिंह भदौरिया ने जाँच की और केयर वेल स्कूल के संचालक मोहम्मद रफीक खान, मदरसा साफिया की संचालिक शबनम शाह, मदरसा उस्मानिया की संचालिका शहनाज खानम, सेंट जेवियर कान्वेंट के संचालक आफताब खान और जेआर डीआरडी मेमोरियल स्कूल के संचालक आफताब के खिलाफ केस दर्ज किया है।

माधवसिंह भदौरिया ने इस मामले को लेकर बताया कि 9वीं और 10वीं के लिए अपात्र विद्यार्थियों का सबसे पहले पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किया गया फिर संस्थाओं ने अपने लॉग-इन का इस्तेमाल कर अपात्र छात्रों का रजिस्ट्रेशन आगे भी बढ़ा दिया था। इस जाँच में कुल 27 शिक्षण संस्थानों को संदिग्ध बताया गया है। इस फर्जीवाड़े की जाँच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर इन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उत्तर प्रदेश : श्रावस्ती के मदरसे में नकली नोट की छपाई, अपनी 5 बीवियों से मार्केट में खपाने का धंधा करवाता था मुबारक अली: यूट्यूब से सीख बहराइच तक फैलाया काला कारोबार

                                   मदरसा संचालक गिरफ्तार (फोटो साभार: Aajtak & aAMRUJALA)
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में एक मदरसा संचालक अपनी पाँच बीवियों के जरिए नकली नोट का धंधा चला रहा था। वह प्रिंटर से ही मदरसे के भीतर नकली नोट छापता था और फिर अपनी बीवियों को पकड़ा देता था। इसके यह जगह-जगह यह नोट खपा देती थीं। उसके गैंग में 4 और लोग शामिल थे। पुलिस ने उनके पास से नकली नोट छापने की मशीन और हजारों के नकली नोट बरामद किए थे। उनके पास से अवैध हथियार भी बरामद हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रावस्ती के हरदत्त नगर इलाके में लक्ष्मणपुर इलाके में चल रहे एक मदरसे में हाल ही में छापा मारा। यहाँ से मदरसे के संचालक मुबारक अली और उसके गुर्गे पकड़े गए। इनके पास से ₹34500 नकली नोट बरामद किए। इसके अलावा इनके पास से एक प्रिंटर भी बरामद हुआ। साथ ही नोट छापने की और सामग्री भी मिली। इनके पास से एक तमंचा भी मिला। पुलिस ने इनसे पूछताछ की तो असलियत का खुलासा हुआ।

पुलिस ने बताया कि मदरसा संचालक मुबारक अली इस गैंग का सरगना था, यही नोट छापने का पूरा काम देखता था। यह नोट पहले प्रिंटर से मदरसे के एक कमरे में छापे जाते और फिर इनको असली नोट जैसा दिखाने के लिए तैयार किया जाता। नोट छापने के लिए अच्छे क्वालिटी का कागज भी यूज होता था। यह ₹500 के अलावा छोटे नोट भी छापते थे ताकि किसी को शक ना हो। मुबारक अली की पाँच बीवियाँ हैं। इनमें से दो अलग-अलग जगह मदरसों में ही पढ़ाती हैं। मुबारक अली फर्जी नोट छाप कर इन पाँचों को देता था।

इसके बाद यह बाजार में यह नोट खपा देती थीं, इसके लिए यह रात के अँधेरे का फायदा उठाती थी। उसकी बीवियों पर पुलिस ने अभी कार्रवाई नहीं की है। गैंग में शामिल बाकी लोग भी यही काम करते थे। मुबारक अली ने यह नोट छापना यूट्यूब से सीखा था। उसके गैंग में जलील, धर्मराज, अवधेश और रामसेवक हैं। इनमें से कुछ पर आपराधिक मुकदमे भी दर्ज हैं। इनके पास से ₹500, ₹200 और ₹100 के नकली नोट पाए गए हैं। इनके पास ₹14500 के असली नोट भी मिले हैं।

 यह सिर्फ नकली नोट छाप कर खुद नहीं चलाते थे बल्कि दूसरों को भी इस धंधे में शामिल होने को लेकर झाँसा देते थे। यह उन्हें ₹1000 के बदले ₹2000 के बकली नोट देने का वादा करते थे। पुलिस अब इस मामले में जाँच कर रही है। वह पता लगा रही है कि इस धंधे में और कौन शामिल रहा है।

मदरसों के बाद अब मकतब की बारी, UP ATS खँगाल रही रिकॉर्ड-फंडिंग की जुटा रही जानकारी

        मदरसों के बाद अब ATS के रडार पर UP के सैकड़ों मकतब (चित्र साभार- alwahabfoundation.org)
उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने राज्य में मदरसों की जाँच के बाद अब मकतबों पर भी नज़र डालना शुरू कर दिया है। मौजूदा जानकारी के अनुसार, UP ATS ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के 473 मकतबों की जाँच शुरू की है, जिनमें से कई बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। इस बाबत अल्पसंख्यक विभाग से संबंधित दस्तावेज़ और रिकॉर्ड मंगवाए गए हैं।

इन मकतबों में से अधिकांश मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर और शामली जिलों में स्थित हैं, और UP ATS इन संस्थानों की फंडिंग और उनके संचालन के स्रोतों की जाँच कर रही है। मकतब एक प्रकार का स्थान है, जहाँ इस्लामी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मुस्लिम बच्चों को दीनी शिक्षा प्रदान की जाती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ATS की जाँच में अब तक सबसे अधिक 190 मकतब शामली में पाए गए हैं। इसके बाद मुज़फ्फरनगर में 165 और सहारनपुर में 118 मकतब संचालित हो रहे हैं। जाँच में ATS ने कई बिंदु तय किए हैं, जिनमें मकतबों की मान्यता न होने के कारण, फंडिंग के स्रोत, संचालन का समय, बच्चों की संख्या, सुरक्षा प्रबंध, रजिस्ट्रेशन की स्थिति और संबद्धता के स्रोत प्रमुख हैं। मकतबों की जाँच के लिए ATS ने सहारनपुर मंडल के तीन जिलों के अल्पसंख्यक अधिकारियों से रिकॉर्ड मंगवाए हैं।

शुरुआती जाँच में कई मकतबों में खामियाँ पाई गई हैं, साथ ही उनके वित्तीय लेन-देन में भी संदेहजनक गतिविधियाँ देखी गई हैं। ATS ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है। इससे पहले, उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में मदरसों का व्यापक सर्वेक्षण कराया था, जिसके तहत कई गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद कर दिया गया था।

सहारनपुर मंडल के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश में आने वाले गोंडा जिले में भी कई मकतब चलते पाए गए हैं। यहाँ के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने अपने जिले में चल रहे 20 मकतबों को बंद करने की सिफारिश शासन को भेजी है। यहाँ कुल 286 मकतब चलते पाए गए हैं जिसमें 19 गैर मान्यता प्राप्त हैं। मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश ATS मुख्यालय से प्रदेश के हर जिले में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों से मकतबों की जाँच में सहयोग करने के लिए कहा गया है।

                                                                      शासनादेश

क्या होता है मकतब

ऑपइंडिया ने मकतब के बारे में गाजियाबाद के मौलवी अब्दुल सलाम से जानकारी ली। उनके अनुसार, मकतब एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है ‘पढ़ाई-लिखाई का स्थान’। उन्होंने बताया कि मकतब और मदरसे में अंतर है। मदरसे में पढ़ाई के बाद एक औपचारिक डिग्री प्राप्त होती है, जबकि मकतब में ऐसी कोई डिग्री नहीं दी जाती। अब्दुल सलाम ने मकतब को एक तरह का ‘कोचिंग सेंटर’ बताया, जहाँ आस-पास के मुस्लिम बच्चों को दीनी तालीम दी जाती है। उन्होंने कहा कि देश की लगभग 95% मस्जिदों में मकतब चलते हैं।
अब्दुल सलाम ने आगे बताया कि मकतब खासतौर से मुस्लिम बच्चों के लिए होते हैं, जहाँ कुरान और हदीस की तालीम दी जाती है। मकतब संचालित करने वाले मौलवी, मौलाना या हाफिज आमतौर पर कोई शुल्क नहीं लेते, लेकिन कहीं-कहीं मेहनताना के लिए धन इकट्ठा किया जाता है। मौलवी के अनुसार, मकतब में पढ़ने वालों की उम्र सीमा नहीं होती, लेकिन सामान्यतः नाबालिग बच्चे ही इनमें पढ़ते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई मकतब इस्लामी जानकारों के घरों में भी संचालित होते हैं।

प्रयागराज के जिस मदरसे में छपते थे जाली नोट, उसे तुर्की-अरब से करोड़ों की फंडिंग: फर्जी आधार कार्ड का भी धंधा, 630 छात्रों की तलाश

प्रयागराज के जिस मदरसे में बरामद हुए नकली नोट उसे विदेश से हुई है करोड़ों रुपयों की फंडिंग (चित्र साभार- दैनिक भास्कर)
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के जिस मदरसे में नकली नोट छापने की मशीन पकड़ी गई थी वहाँ के बारे में जाँच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। जाँच एजेंसियों को अब उन 630 छात्रों की तलाश है जो यहाँ से पढ़ाई कर के निकले हैं। आशंका जताई जा रही है कि मौलवी तफसीरुल इन इन सभी का ब्रेनवॉश किया होगा। इस मदरसे को हर साल लगभग 48 लाख रुपए विदेशों में फंडिंग मिलने की भी जानकारी सामने आई है। मामले की पड़ताल में पुलिस के अलावा ATS और IB की टीमें भी जुट गईं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस मदरसे में नकली नोट छापने के साथ RSS को आतंकी संगठन बताया जाता था वहाँ से अब तक लगभग 630 छात्र पढ़ाई कर के निकल चुके हैं। मौलवी तफसीरुल मदरसे में लगभग 6 साल से पढ़ा रहा था। प्रतिवर्ष औसतन 105 छात्र मदरसे से पढ़ाई कर के निकले हैं। जाँच एजेंसियों को आशंका है कि मौलवी तफसीरुल ने इन्हें भी कट्टरपंथ का पाठ पढ़ाया होगा। ये छात्र देश के अलग-अलग राज्यों में हैं। ऐसे में स्थानीय पुलिस के साथ ATS और IB की टीमें भी इनकी खोज में 6 प्रदेशों में गईं हैं।

ATS ने बुधवार (4 सितंबर, 2024) को प्रयागराज पहुँच कर जाँच शुरू की है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की टीम 28 अगस्त को ही प्रयागराज पहुँच चुकी थी। अब तक हुई जाँच में यह सामने आया है कि मदरसे में हर साल विदेशों से लाखों रुपए भेजे जाते थे। तुर्की और सऊदी अरब मिला कर प्रतिवर्ष 48 लाख रुपए भेजे जाने के प्रमाण भी मिले हैं। अब तक हुई कुल फंडिंग 2 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। मदरसा कमिटी के मैनेजर शाहिद के मुताबिक, ये पैसे दूसरे देशों से मदद के तौर पर भेजी जाती है।

इसी से मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों की तालीम से ले कर उनके रहने आदि के खर्च व मेंटेनेंस का हिसाब-किताब किया जाता है।

जाँच एजेंसियों ने पैसे भेजने वालों की पहचान उजागर नहीं की है लेकिन उनके पाकिस्तान ने कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं। ATS और IB की टीमें यह पता लगाने में भी जुटी हैं कि जिस खाते में विदेशों से पैसे आते थे उन्हें हैंडल कौन करता था। विदेशों से पैसे मँगाने के मामले में अब तक 12 बैंक खाते रडार पर हैं। मदरसे के प्रिंसिपल मौलवी तफसीरुल के परिजनों और रिश्तेदारों के भी खातों की डिटेल तलब की गई है। अन्य खातेदारों में अधिकतर मदरसा कमेटी से जुड़े हुए लोग हैं। इस बावत संबंधित बैंकों से भी लेन-देन का ब्यौरा तलब किया गया है।

इसी केस में मौलवी के साथ पकड़े गए ओडिशा के अब्दुल जहीर के पास मिला आधार कार्ड फर्जी बताया जा रहा है। उसे नकली नोट की ही तरह जाली आधार कार्ड बनाने का एक्सपर्ट माना जा रहा। IB की पूछताछ में अब्दुल जहीर ने कबूल किया है कि फर्जी आधार कार्ड बनाने के रैकेट में ओडिशा में मौजूद उसका भाई भी शामिल है। मदरसे से जुड़े कुछ लोगों का पिछले 5 वर्षों से अलग-अलग देशों में आना-जाना लगा हुआ है। इनके साथ कुछ अन्य राज्यों से भी मदरसे का कनेक्शन पाया गया है। जाँच एजेंसियाँ इन सभी लोगों की पड़ताल में जुटी हैं।

उत्तर प्रदेश : प्रयागराज के मदरसे में छापे जा रहे थे जाली नोट: कोई मौलवी, कोई आलिम… सब फेक करेंसी से कर रहे थे ‘मजहब’ मजबूत, 100 रूपए देने पर मिलते थे 3 नकली नोट

मदरसे में नकली नोट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर के प्रयागराज पुलिस ने मौलवी सहित 4 को दबोचा (चित्र साभार- X/@UPkesari)
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में बुधवार (28 अगस्त 2024) को पुलिस ने नकली नोट बनाने के एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह एक मदरसे से ऑपरेट हो रहा था जहाँ 100-100 रुपए के जाली नोट छापे जा रहे थे। पुलिस ने मदरसे में छापा मार कर 1 लाख 30 हजार रुपए के नकली नोट बरामद किए हैं। इस केस में ओडिशा के जाहिर खान सहित कुल 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपितों में मदरसे का मौलवी तफसीरुल भी शामिल है। पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना प्रयागराज जिले के अतरसुइया इलाके की है। यहाँ पर एक मदरसा है जिसका नाम जामिया हबीबिया मस्जिद-ए-आज़म है। पुलिस को पिछले कई दिनों से यहाँ पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। यहाँ पर कई बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहता था। पुलिस ने इस मदरसे पर बारीक नजर रखनी शुरू कर दी। जब पुलिस को इत्मीनान हो गया कि मदरसे में सब सही नहीं चल रहा तब बुधवार (28 अगस्त) को यहाँ दबिश दी गई।

पुलिस मदरसे के अंदर घुसी तब वहाँ एक प्रिंटिंग मशीन पर 3 लोग कुछ छापते नजर आए। जाँच के बाद पता चला कि तीनों नकली नोटों की छपाई कर रहे थे। इन तीनों से पूछताछ हुई तो इन्होंने इस गैरकानूनी काम में मदरसे के प्रिंसिपल की भी मिलीभगत बताई। 25 वर्षीय प्रिंसिपल का नाम मोहम्मद तफसीरुल है जो पेशे से मौलवी है। पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए अन्य आरोपितों में 18 वर्षीय मोहम्मद अफ़ज़ल, 18 वर्षीय मोहम्मद शाहिद और 23 वर्षीय जाहिर खान का नाम है।

ज़ाहिर खान उर्फ़ अब्दुल ज़ाहिर मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला है। वह मदरसे में आलिम है। पढ़ाई के बाद जाहिर मदरसे में ही पढ़ाने लगा था। वहीं हाईस्कूल पास मोहम्मद अफ़ज़ल के अब्बा मोईद अहमद कपड़े की दुकान पर काम करते हैं। कक्षा 8 पास मोहम्मद शाहिद मदरसे में मौलवी बनने आया था लेकिन बाद में वह नकली नोट छापने वाले रैकेट से जुड़ गया। हाईस्कूल पास मौलवी तफसीरुल के अब्बा भी मदरसे में पढ़ाते थे। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वो पिछले 3 महीनों से नकली नोटों के इस काले कारोबार को संचालित कर रहे थे।

मदरसे की तलाशी ली गई तो वहाँ से 1 लाख 30 हजार रुपए के नकली नोट बरामद हुए। नकली नोट बनाने के लिए प्रिंटर और अन्य मशीनें ओडिशा के भद्रक निवासी अब्दुल ज़ाहिर ने अपने भाई से मँगवाई। ज़ाहिर का भाई भी पहले प्रयागराज में आधार कार्ड बनवाने का काम कर चुका है। 100 रुपयों के नोट में लोग ज्यादा जाँच पड़ताल नहीं करते, यही सोच कर आरोपितों ने इसे छापना शुरू किया था। अधिकतर नोटों को प्रयागराज के अलग-अलग हिस्सों में दुकानरों को धोखे से दिया जाता था।

आरोपितों ने बाजार में कितनी नकली नोट चलाए हैं इसकी जाँच पुलिस कर रही है। अनुमानित राशि लगभग 5 लाख रुपए बताई जा रही है। पकड़े गए आरोपित अपने काले कारोबार को चलाने के लिए युवाओं को अपने साथ जोड़ रहे थे। उनको 100 रुपए असली देने पर 300 रुपए नकली दिए जाते थे। अब पुलिस टीमें इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पड़ताल कर रही है। नकली नोट छापने वाले प्रिंटर व अन्य मशीनों को जब्त कर लिया गया है। पुलिस मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

इन सभी आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा सिविल लाइंस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 178, 179, 180, 181 और 182 (1) के तहत कार्रवाई की गई है। इस मामले की जाँच के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की टीम भी पहुँच गई है।

‘हिन्दू काफिर और मुशरिक, बहुदेववादियों को मिलेगी सजा’: बिहार सरकार से फंडिंग पा रहे मदरसों में पढ़ाई जा रहीं पाकिस्तान में छपी किताबें; आखिर पाकिस्तानी किताबें कैसे आ रही हैं ?

बिहार सरकार से पैसे पा रहे कई मदरसों में पढ़ाया जा रहा है कि काफिर हिन्दुओं को मिलेगी सजा (चित्र - X/@KanoongoPriyank)
बिहार के कुछ मदरसों में मज़हबी कट्टरपंथ की शिक्षा दिए जाने का मामला सामने आया है। रविवार (18 अगस्त, 2024) को यह खुलासा राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने किया है। उन्होंने बताया कि इन मदरसों में हिन्दुओं को काफिर बताया जाता है। यहाँ पढ़ाई जाने वाली कई पुस्तकें तो पाकिस्तान में छपी पाई गईं हैं। खास बात तो ये है कि इन मदरसों को राज्य सरकार पैसे भी दे रही है। प्रियांक कानूनगो ने मदरसा बोर्ड को भंग करने की भी माँग उठाई है।

प्रियांक कानूनगो ने रविवार को अपने ‘X’ हैंडल पर कई स्क्रीनशॉट शेयर किए। इन स्क्रीनशॉट के साथ उन्होंने कैप्शन के तौर पर लिखा, “बिहार राज्य में सरकारी फ़ंडिंग से चलने वाले मदरसों में तालिमुल इस्लाम व ऐसी ही अन्य किताबें पढ़ाई जा रहीं हैं। इस किताब में ग़ैर इस्लामिकों को काफ़िर बताया गया है। इन मदरसों में हिंदू बच्चों को भी दाख़िला दिए जाने की सूचना मिली है परंतु बिहार सरकार संख्या अनुपात की अधिकारिक जानकारी नहीं दे रही है।”

प्रियांक कानूनगो ने बिहार मदरसा बोर्ड के हवाले से आगे बताया कि मदरसे का पाठ्यक्रम यूनिसेफ ने तैयार किया है। उन्होंने इसे यूनिसेफ और मदरसा बोर्ड द्वारा किए जा रहे तुष्टिकरण की पराकाष्ठा करार दिया है। बकौल प्रियांक बच्चों के संरक्षण के नाम पर दान और सरकारों से मिले अनुदान से कट्टरवादी पाठ्यक्रम बनाना यूनिसेफ़ का काम नहीं है। उन्होंने यह हरकत भारत के संविधान के खिलाफ बताते हुए मामले की जाँच और निगरानी संयुक्त राष्ट्र द्वारा कराए जाने की माँग उठाई है।”

प्रियांक कानूनगो के मुताबिक बिहार में मौजूद मदरसों के पाठ्यक्रम में शामिल अनेक किताबें पाकिस्तान में छपवाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि मदरसा किसी भी रूप में बच्चों की बुनियादी शिक्षा की जगह नहीं हैं। बच्चों की पढ़ाई स्कूलों में कराए जाने की वकालत करते हुए उन्होंने कम से कम हिन्दू बच्चों को मदरसरों में न पढ़ाने की अपील की है। अंत में प्रियांक कानूनगो ने मदरसा बोर्ड भंग करने की माँग की है। अपने इस ट्वीट में उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के साथ उनके कार्यालयों व संयुक्त राष्ट्र संघ को टैग किया है।

क्या छपा है किताबों में

प्रियांक कानूनगो ने जो स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं उसके ऊपर तालीम उल इस्लाम (इस्लाम की शिक्षा) हेडलाइन दी गई है। इसके पहले सवाल में ‘तुम्हें किसने बनाया है’ के जवाब में लिखा है ‘अल्लाह ने मुझे और दुनिया की हर चीज बनाई’। एक अन्य सवाल था कि अल्लाह ने दुनिया कैसे बनाई जिसके जवाब में लिखा गया है कि अपनी ताकत और हुक्म से। जो अल्लाह को नहीं मानते उन्हें इस किताब में ‘काफिर’ और किसी और को पूजने वाले लोगों को मुशरिक बताया गया है।
इसी किताब में एक और सवाल कर के पूछा गया है कि क्या बहुदेववादी (एक से ज्यादा देवताओं को मानने वाले) मोक्ष को प्राप्त होते हैं? इसके जवाब में लिखा गया है कि ‘कभी नहीं’। साथ ही कहा गया है कि बहुदेववादियों को सजा मिलती है। इसके अलावा किताबों के कई पन्नों पर इस्लामी प्रतीक छपे हुए हैं। इन प्रतीकों में सऊदी अरब की मस्जिद अल नवाबी भी शामिल है।

हिंदू गंदे हैं, इसलिए उनका पुनर्जन्म होता है… हाफिज जन्नत ले जाता है: दरभंगा के इरफान-अफगान चला रहे थे अवैध मदरसा, जकात के पैसे से खरीद रहे अपने लिए जमीन


उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दुबग्गा स्थित एक अवैध मदरसे से 21 बच्चों को बचाया गया है। बच्चों ने बताया कि वहाँ पढ़ाने वाला हाफिज या मौलवी उनका ब्रेनवॉश करता था। वह बच्चों को जन्नत पाने से संबंधित तालीम देता था। मौलवी कहता था कि एक हाफिज अपने साथ 10 बच्चों को जन्नत ले जाता है। वहीं, हिंदुओं में गंदा काम करने वालों का पुनर्जन्म होता है।

मदरसे से रेस्क्यू किए गए 7 से 15 साल इन बच्चों को मोहान रोड स्थित राजकीय बालगृह में रखा गया है। राज्य बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉक्टर शुचिता चतुर्वेदी का कहना है कि जिस तरह से इन बच्चों का ब्रेनवॉश किया जा रहा था, वह किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। जो बच्चे ठीक से हिंदी तक नहीं बोल पाते, वे पुनर्जन्म बोल रहे हैं। हिंदू धर्म और इस्लाम में अंतर बता रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इन बच्चों को दीन (इस्लाम मजहब) की शिक्षा दी जा रही थी और जन्नत के सपने दिखाए जाते थे। उन्हें पढ़ाई-लिखाई से दूर रखा जा रहा था। चतुर्वेदी ने राज्य के मुख्य सचिव को एक पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने एक कमिटी बनाकर इसकी जाँच करने और ऐसे मदरसों पर रोक लगाने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसे सैकड़ों मदरसे संचालित किए जा रहे हैं।

जाँच में पता चला है कि बिहार के दरभंगा के रहने वाले इरफान और अफसान दुबग्गा में अवैध मदरसा चला रहे थे। बाल आयोग के सदस्यों का कहना है कि अवैध मदरसा चलाने वाले ये लोग मुस्लिम समाज से जकात (दान) के नाम पर पैसे लेते थे। जकात के पैसे से निजी संपत्ति बनाने का भी खुलासा हुआ है। जकात में मिले पैसों से एक ट्रस्ट का गठन कराया गया, जिसमें 3.5 लाख रुपए जमा हुए हैं।

इतना ही नहीं, इन पैसों से दोनों निजी जमीन भी खरीदी है। यह मदरसा आवासीय शिक्षा के नाम पर खोला गया था और इसमें बच्चों को इस्लाम की शिक्षा दिया जा रहा था। इनके पास बच्चों के माता-पिता का सहमति पत्र भी नहीं है। जिस मकान में मदरसा संचालित हो रहा था उसका एग्रीमेंट भी नहीं है। मकान में शौचालय तक नहीं है। इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी की गई है।

वहीं, जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास सिंह ने शुक्रवार (3 मई 2024) को राजकीय बालगृह का निरीक्षण किया और बच्चों से बात की। इस दौरान सात साल के एक बच्चे ने कहा, “अंकल जी, अब्बा-अम्मी की बहुत याद आ रही है। उन्हें बुला दीजिए।” इस अधिकारी ने कहा कि वे जल्दी आने वाले हैं। बच्चों ने यह भी बताया कि वे 15 दिन पहले मदरसे में आए थे।

लखनऊ के दुबग्गा में अवैध तरीके से घर में एक मदरसे का संचालन हो रहा था। इसके बारे में सूचना मिलते ही 1 मई 2024 को 23 बच्चों (कुछ रिपोर्ट में 21 बच्चे) को बचाया गया था। इसके बाद इन बच्चों को बाल संरक्षण गृह में रखा गया है। ये सारे बच्चे बिहार के रहने वाले हैं। अभी तक इन बच्चों के अभिभावकों ने अपने बच्चों की खोज खबर नहीं ली है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ में पंजीकृत मदरसों की कुल संख्या 131 है, जबकि 111 मदरसे अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। पंजीकृत मदरसों में कुल 18 ऐसे मदरसे हैं, जिन्हें सरकार की तरफ से अनुदान मिलता है। वहीं, अधिकांश मदरसे सिर्फ मान्यता के आधार पर चलते हैं।

असम : आखिर क्यों बदरुद्दीन अजमल 700 मदरसे खुलवाने की चुनौती दे रहे हैं? मदरसे खुलवाने के पीछे क्या कोई गहरा षड़यंत्र है? वीडियो : Nazia-Arzoo ने मिलकर मुल्ले-मौलवियों को जमकर लताड़ा, सुनने के बाद कट्टरपंथी कांप जाएंगे !

                          लोकसभा चुनाव जीतने के बाद असम में 700 मदरसे खुलवाएँगे बदरुद्दीन अजमल 
अपने विवादित बयानों के लिए कुख्यात ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल का एक और बयान सामने आया है। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को 700 नए मदरसे खोलने की चुनौती दे डाली है। इन मदरसों को लोकसभा चुनाव 2024 में जीत के बाद खोलने का चैलेंज दिया गया है। बदरुद्दीन अजमल ने यह बयान शनिवार (20 अप्रैल 2024) को नगाँव में एक चुनावी रैली के दौरान दिया।

गैर-मुस्लिमों को धोखा देने पार्टी का नाम रखा ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, लेकिन काम कट्टरपंथी। आखिर मदरसे ही क्यों खुलवाना चाहते हैं? क्या इस्लाम घर के बड़े नहीं सीखा सकते? 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल शनिवार को नगाँव से अपने उम्मीदवार अमीनुल इस्लाम का प्रचार कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने लोगों के एक जमावड़े को सम्बोधित किया। सामने मौजूद भीड़ को देख कर बदरुद्दीन अजमल जोश में आ गए। इसी जोश में उन्होंने असम के मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा: “लोकसभा चुनाव के बाद असम के करीमगंज और नगाँव के AIUDF सांसदों के साथ हम 700 नए मदरसे खोलेंगे। हिमंत बिस्व सरमा सुनिए, अपनी डायरी में लिखिए, बदरुद्दीन अजमल संसद में आ रहे हैं। 700 मदरसे हम तीनों भाई खोलेंगे।”

कुछ ही देर बाद बदरुद्दीन अजमल के स्थानीय प्रत्याशी अमीनुल इस्लाम ने भी चुनावी जनसभा को सम्बोधित किया। अमीनुल ने कॉन्ग्रेस प्रत्याशी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कॉन्ग्रेस को झूठी पार्टी करार दिया है। AIUDF प्रत्याशी ने कॉन्ग्रेस प्रत्याशी से उनके द्वारा मुस्लिमों के हितों में किए गए कामों को बताने के लिए कहा।

बदरुद्दीन अजमल ने भी भाजपा के साथ कॉन्ग्रेस को निशाने पर लिया। उन्होंने कॉन्ग्रेस का मुस्लिमों के प्रति झुकाव और लगाव को महज दिखावा करार दिया। हालाँकि कॉन्ग्रेस प्रत्याशी पियूष हजारिका ने बदरूदीन अजमल पर पलटवार किया है। उन्होंने अजमल को भारतीय जनता पार्टी का समर्थक बताया है।

पियूष के मुताबिक बदरुद्दीन अजमल बीजेपी को फायदा पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। बताते चलें कि असम में लोकसभा की कुल 14 सीटें हैं। इस पर 19 और 26 अप्रैल के अलावा 7 मई को वोट डाले जाएँगे। यहाँ भाजपा और INDI गठबंधन में सीधा मुकाबला है। बदरुद्दीन अजमल की पार्टी यहाँ कुछ सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती है।

ज्ञात हो कि असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की सरकार ने मदरसों पर सख्त कार्रवाई करते हुए सैकड़ों की संख्या में उन्हें बंद करवाया। इन मदरसों की जगह असम राज्य सरकार ने अंग्रेजी स्कूल खोले ताकि बच्चों को आधुनिक शिक्षा मिल सके।

उत्तर प्रदेश : लड़की के कपड़े उतारते इमाम का Video… कहा – अल्लाह से करो तौबा वरना तुम्हें मुसलमान मार देंगे

  लड़की से रेप की कोशिश और तौबा न करने पर कत्ल की धमकी देते हुए रामपुर की मस्जिद के इमाम का वीडियो वायरल
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में साल भर पहले हिन्दू धर्म में घर वापसी करने वाली मुस्लिम लड़की ने अपने रिश्तेदारों पर गैंगरेप की FIR दर्ज करवाई है। इसी के साथ पीड़िता ने रामपुर शहर के बेगम बाग़ इलाके में पड़ने वाली एक मस्जिद की भी शिकायत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से की है। इस मस्जिद में न सिर्फ छोटी बच्चियों के गैंगरेप बल्कि हथियारों की तस्करी होने का भी आरोप लगाया गया है। मस्जिद का इमाम रईस बताया जा रहा है जिसके कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

इन वीडियो में इमाम रईस कथित तौर पर न सिर्फ हथियारों और अश्लील किताबों के आगे बैठा नजर आ रहा है बल्कि वो ‘घर वापसी’ करने वाली लड़की को अल्लाह का डर भी दिखा रहा है।

आरोप – अफसरों में औरतें सप्लाई करके कमाई

सोशल मीडिया के माध्यम से ऑपइंडिया को मिले कई वीडियो में से एक में कथित तौर पर रईस इमाम नग्न हालत में किसी लड़की से बात करता दिखाई दे रहा है। उसके आगे कुछ अवैध हथियार और कारतूस बिखरे दिखाई दे रहे हैं। सामने कंडोम और अश्लील किताबें भी दिखाई दे रहीं हैं जिसमें मॉडल्स की अधनंगी तस्वीरें छपी हुई हैं। इस वीडियो में मौलाना बोल रहा, “ये सप्लाई करते हैं औरतें। ले कर जाते हैं अफसरों में। इसी तरीके से ये पैसा कमा रहे हैं। बाकी इन्होंने ही मर्डर करा था ये तो सबको पता है। सारी दुनिया जानती है। मेरे कहने का काम है, मैं कह दूँगा। जिस जगह जरूरत पड़े वहाँ मुझ से कहलवा लियो।”
इसी दौरान स्पीकर पर चल रहे फोन में कोई पूछता है कि क्या इमाम रईस कोर्ट में बोलेगा? जवाब में रईस ने 2 बार कहा कि वह ये तमाम बातें कोर्ट में भी बोलने को तैयार है। एक अन्य वीडियो में मौलाना के आगे बैठी लड़की ने मस्जिद में बच्चियों के रेप की बात कही तो इमाम रईस ने कहा कि वो सब कुछ बताने को तैयार है। वह किसी चमरौआ गाँव में हुई हत्या और फिर जमीन कब्ज़े की बात भी उसके द्वारा कही जा रही है। रोते हुए वीडियो बना रही लड़की ने अपनी माँ के साथ 14 साल तक रेप की वजह पूछी तो इमाम रईस बोला, “पहले कह देती तो मैं सब बता देता। किस जगह मैंने साथ नहीं दिया तुम्हारा।”
ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया कि मर्डर उसके सगे मामा का हुआ था। यह हत्या 350 बीघे जमीन को कब्ज़ा करने के लिए हुई थी। पीड़िता ने हत्या का आरोपित अपने मृतक मामा के चचेरे भाइयों पर लगा था जिसमें मुख्य आरोपित इम्तियाज है। आरोप है कि लड़की के मामा को मार कर फिर उसकी माँ को 14 वर्षों तक बंधक बनाए रखा गया। इस दौरान इमाम रईस वाली मस्जिद में ही लड़की की माँ का 5 साल तक बलात्कार किए जाने का आरोप है। पीड़िता के पिता की साल 2012 में ही मौत हो चुकी थी।

धमकी – ‘तौबा करो वरना मुसलमान मार देंगे तुम्हें’

ऑपइंडिया को मिले एक अन्य वीडियो में पीड़िता और इमाम रईस आमने-सामने बैठे हैं। पीड़िता ने पूछा कि क्या मुस्लिम उसे मार देंगे? इमाम ने कहा, “हाँ, बिलकुल मार देंगे। मकसद यही है कि अल्लाह से तौबा करो। ये करो कि अल्लाह मुझ से जो गलती हो गई उसे माफ़ कर देना। धोखे से या किसी डर की वजह से मैं बनी इसलिए अल्लाह मुझे माफ़ कर दे। कबर का अजीब बहुत सख्त है। अल्लाह बन्दों पर रहम करने वाला है।”

मुस्लिमों से छिप रहा वसीम रिज़वी

वीडियो बना रही लड़की ने आगे पूछा कि जो हिन्दू पैदा हुए हैं क्या अल्लाह उन्हें भी माफ़ नहीं करेगा? इस पर इमाम रईस ने जवाब दिया, “उन्हें क्यों करेगा माफ़? जो कलमे का शरीक नहीं है उसे कोई भी हो। ऐसे-ऐसे लोगों का क़त्ल कर दिया गया है जिनके डंके बजते थे।” इमाम रईस ने नाम लिए बिना वसीम रिज़वी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ का वो शिया मुस्लिमों के डर से छिपा फिर रहा है जो कहता था कि मैं तो हिन्दू हो गया। इमाम रईस इसी वीडियो में आगे बोला, “जो कलमा पढ़ा होगा वो दोजख (नरक) में ज़रूर जाएगा लेकिन अल्लाह निकाल देगा उसमें से उन्हें।”
लड़की ने सामने बैठे इमाम रईस से पूछा कि अगर वो पूजा कर ले तो क्या होगा? इस सवाल पर इमाम बोला, “जब अल्लाह ने मुसलमान बनाया है तो उसमें हर जगह फतवा दिया है कि कत्ल गैर-मुस्लिमों का क़त्ल कर दो। ये फतवा निकला हुआ है। ये हदीस है।”

दूर-दूर की बच्चियाँ हैं मदरसे में

इमाम रईस का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो में इमाम किसी मदरसे का जिक्र कर रहा है। रईस बोला कि उसमें दूर-दूर से आईं 800-900 बच्चियाँ हैं। जब वीडियो बना रही लड़की पूछती है कि उन बच्चियों को बाहर क्यों नहीं निकलने दिया जाता तो रईस बोला कि अगर ये छूट मिली तो कई भाग जाएँगी। इमाम रईस ने यह भी दावा किया कि पहले एकाध केस भागने के हो गए तब से अंदर से बहुत सख्ती कर दी गई है। बकौल इमाम, लड़कियों को आपस में साथ बैठने और बोलने भर की छूट है लेकिन बाहर निकलने पर मनाही है।
इमाम रईस इसी वीडियो में आगे कह रहा है कि भारत में अलीगढ़ के बाद ऐसा दूसरा मदरसा यही है। उसने बताया कि यहाँ से फ़ाज़िला हो कर लड़कियों को अलीगढ़ भेजा जाता है। दावा किया गया कि रामपुर में बने इस मदरसे में कम से कम 200 कमरे हैं और सबमें लड़कियाँ भरी हैं। इमाम रईस ने विकल्प के तौर पर यह भी बताया कि अगर लड़की मदरसे न रहना चाहे और सिर्फ वहाँ पढ़ने के मकसद से आए तो वो किसी मकसूद भाई के यहाँ उसके रहने का इंतजाम करवा देगा। इमाम रईस ने अपनी फीस 6 हजार रुपए बताया।
ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया कि यह मदरसा रामपुर जिले के सिविल लाइंस क्षेत्र में मौजूद है। पीड़िता ने यह भी कहा कि वह चाहती है कि वहाँ से बच्चियों को मुक्त करवाया जाए क्योंकि वो इमाम रईस जैसे कई लोगों के चंगुल में फँसी हुई हैं।

रेप की कोशिश करता दिखा इमाम

ऑपइंडिया को 2 अन्य वीडियो भी मिले हैं। इन दोनों वीडियो में इमाम रईस किसी लड़की से रेप का प्रयास करता दिख रहा है। वह नींद में लग रही किसी लड़की के कपड़े उतार कर पहले उसे नंगा करता है और बाद में उस से रेप की कोशिश करता है। थोड़ी देर बाद एक अन्य वीडियो में इमाम रईस पाजामा बाँधने की कोशिश करता दिख रहा है। वह पॉलीथिन में कुछ छिपाने की भी कोशिश करता दिख रहा है। एक अन्य वीडियो में इमाम रईस को तमाम साम्प्रदायिक बातों वाली वीडियो भी स्क्रॉल कर के सुनते देखा जा सकता है।
अवलोकन करें:- 
ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया कि उसकी माँ को इमाम रईस ने अपनी मस्जिद में लगभग 5 साल तक रखा था। आरोप है कि इस दौरान उसने कई लोगों के साथ मिल कर पीड़िता की माँ का गैंगरेप किया था। पीड़िता का दावा है कि ये तमाम वीडियो फरवरी 2024 महीने के हैं। बकौल पीड़िता वह रिश्तेदारों और इमाम की वजह से 14 साल तक बंधक बन कर गैंगरेप झेली अपनी माँ को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रही है। (साभार: राहुल पाण्डेय,  http://www.opindia.com)

ब्रिटेन : ‘मदरसे में पढ़ा हूँ, मुझे पता नहीं ये(बलात्कार) अपराध है’: 13 साल की बच्ची से बलात्कार कर सजा से बच गया आदिल

                   ब्रिटेन में 13 साल की लड़की से संबंध बनाने वाला आदिल राशिद (फोटो साभार: Dailymail)
सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हो रही है, जिसमें आदिल राशिद नाम के युवक ने 13 साल की एक नाबालिग लड़की से रेप किया। जब पुलिस ने उसे पकड़ा तो उसने कहा कि उसे जानकारी नहीं थी कि रेप करना अपराध है। उसने कहा कि वह मदरसे में पढ़ा है और वहाँ उसे महिलाओं को बेकार और सड़क पर फेंके गए लॉलीपॉप की तरह बताया जाता था।

राशि की दलील को सुनते हुए कोर्ट ने उसकी सजा को खत्म कर दिया और कहा, “आप 18 वर्ष के हैं, लेकिन रिपोर्ट से स्पष्ट है कि जब यौन मामलों की बात आती है तो आप बहुत अनुभवहीन और अपरिपक्व हैं।” जज ने कहा कि चूँकि वह निष्क्रिय था और उसमें मुखरता की कमी थी, इसलिए जेल भेजना नुकसानदायक हो सकता है।

राशिद ने कहा कि लड़की ने उसे ऑनलाइन बहकाया था, इसके बाद उसने नाबालिग से यौन संबंध बनाए थे। यौन संबंध बनाने से पहले दोनों ने लगभग दो महीने तक फेसबुक पर चैटिंग की थी और उसके बाद फोन पर एक दूूसरे से बातें की थीं। इसके बाद वे दोनों एक स्थान पर मिले और होटल का एक कमरा बुक किया।

13 साल की नाबालिग लड़की ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि वे दो घंटे तक होटल में रुके। वहाँ राशिद बाथरूम गया और कंडोम पहनकर बाहर आया। इसके बाद दोनों ने सेक्स किया। इस घटना के बाद राशिद सीधा मस्जिद गया और वहाँ नमाज पढ़ी। इसके बाद वह अपने घर लौट आया। उसी सप्ताह पुलिस ने राशिद को गिरफ्तार कर लिया।

इस खबर का स्क्रीनशॉट शेयर कर लोग न्यायिक व्यवस्था पर हमला बोल रहे हैं, जिसमें आदिल राशिद को नाबालिग लड़की से रेप के लिए बेहद कम सजा दी गई। दरअसल, यह मामला ब्रिटेन का है और जनवरी 2013 में सामने आया था। हालाँकि, सोशल मीडिया यूजर्स इस खबर को अब शेयर कर रहे हैं। एश्लिया सिमोन नाम की महिला ने एक्स पर लिखा, “ये ब्रिटेन का हाल है। ये बदमाश फाँसी का हकदार है, लेकिन उसे आजादी दे गई।”

ये मामला ब्रिटेन के नॉटिंघम का है, जहाँ आदिल रशीद नाम के युवक ने 13 साल की बच्ची के साथ यौन संबंध बनाए थे। इस मामले की सुनवाई के दौरान उसने कोर्ट में कहा कि उसे ब्रिटेन के कानून की जानकारी नहीं है, क्योंकि वो मदरसे में पढ़ा है। मदरसे में उसे बताया गया है कि महिलाओं की औकात सड़क पर फेंके गए लॉलीपॉप से ज्यादा की नहीं होती है।

इसके बाद उसके वकील ने उसे ‘सेक्स को लेकर भोला या अनजान’ साबित कर दिया। इस मामले में न्यायाधीश माइकल स्टोक्स ने राशिद को 9 महीने की जेल की सजा और 2 साल की निलंबित सजा सुनाई थी। कोर्ट ने कहा था कि कानून लड़कियों की सुरक्षा के लिए है, भले ही इसमें उसमें मर्जी शामिल हो। इससे पहले नॉटिंघम क्राउन कोर्ट ने कहा था कि ऐसे अपराधों के लिए आमतौर पर चार से सात साल की जेल की सजा होती है।

पूछताछ में राशिद ने बताया था कि वो लड़की 13 की है, इस बारे में उसे पता था। वो शुरू में सेक्स संबंध नहीं बनाना चाहता था, लेकिन लड़की को देखकर बहक गया और सेक्स संबंध भी बनाए। पुलिस के अनुसार, इसके बारे में नाबालिग लड़की ने इसके बारे में स्कूल में अपनी सहेली को बताया था। इसके बाद उस लड़की ने शिक्षक को जानकारी दी थी। फिर शिक्षक ने पुलिस को बताया था। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।

केरल : मदरसे में बच्चों से कुकर्म, 3 उस्ताद गिरफ्तार; 1 साल से बच्चे का यौन उत्पीड़न

                 मदरसे में अप्राकृतिक दुष्कर्म के मामले में तीन मौलवी गिरफ्तार (साभार-केरला कौमुदी)
केरल में मौलानाओं के हाथों बच्चों के यौन शोषण और कुकर्म के दो चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। पहली घटना में, तीन मदरसा शिक्षकों को, जिनमें से एक उत्तर प्रदेश का है, नेदुमंगड पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं दूसरा मामला भी यौन शोषण का ही है। दरअसल, अधिकारियों ने बताया कि नाबालिग छात्रों पर यौन उत्पीड़न के मामले में 18 नवंबर, 2023 को ही मदरसा शिक्षक को गिरफ्तार कर 
लिया गया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पहले मामले में आरोपितों की पहचान कडक्कल कांजीराथुम्मुडु बिस्मी भवन के 24 वर्षीय एल सिद्दीकी, करीबा ऑडिटोरियम के पास जैस्मीन विला के 28 वर्षीय एस मुहम्मद शमीर और उत्तर प्रदेश के खीरी जिले के गणेशपुर के 30 वर्षीय मुहम्मद रसलाल हक के रूप में हुई। तीनों पर आरोप है कि मदरसे में किशोरों के साथ अप्राकृतिक सेक्स किया।

इस मामले में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए किशोर न्याय अधिनियम, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम और प्रासंगिक भारतीय दंड संहिता की धाराएँ लागू की गईं।

रिपोर्ट के अनुसार, तीनों आरोपित पिछले एक साल से नेदुमंगड (Nedumangad) में एक मदरसा चला रहे थे। वहीं शिकायत के बाद कट्टक्कडा के पुलिस उपाधीक्षक (डीवाईएसपी) एन शिबू, नेदुमंगड स्टेशन हाउस अधिकारी (एसएचओ) ए सुनील, उप-निरीक्षक (एसआई) सुरेश कुमार, सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई), जिला पुलिस अधीक्षक किरण नारायणन ने अपराधियों की गिरफ्तारी को सुनिश्चित किया।

दरअसल, वरिष्ठ सिविल पुलिस अधिकारी (एससीपीओ) सी बीजू, दीपा और सिविल पुलिस अधिकारी (सीपीओ) अजीत मोहन को सीडब्ल्यूसी से आरोपितों के खिलाफ उनके भयानक अपराधों के बारे में एक पीड़ितों द्वारा की गई एक शिकायत की सूचना मिली, जो दीनी तालीम के लिए मदरसे में आए थे। फ़िलहाल,अब तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के बाद रिमांड पर भेज दिया गया।

इस बीच, वाज़िकादावु पुलिस ने 22 नवंबर, 2023 को मलप्पुरम में पुथुक्कादावु मुहम्मद शाकिर नामक एक मौलवी को भी गिरफ्तार किया है, जिसे शाकिर बाक्वावी ममपाद के नाम से भी जाना जाता है, उस पर भी एक साल तक एक बच्चे से छेड़छाड़ करने का आरोप था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित ने 21 नवंबर, 2023 को अपने मदरसा शिक्षक को दुर्व्यवहार के बारे में बताया और शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में वाज़िकादावु पुलिस स्टेशन के हाउस ऑफिसर, मनोज परायट्टा ने बताया, “हमें मंगलवार को शाकिर के खिलाफ शिकायत मिली। लड़के ने अपने शिक्षक शाकिर के दुर्व्यवहार के बारे में पुलिस को बताया। और हमने बिना देर किए आरोपित को उसके घर से पकड़ लिया था।”

हालाँकि, यौन उत्पीड़न के इस मामले में मदरसे के शिक्षक द्वारा करीब एक साल से बच्चे का यह उत्पीड़न चल रहा था। मदरसे के शिक्षकों ने पीड़ितों को द्वारा इस मामले के बारे में खुलासा करने पर भयंकर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। इसके अलावा, जाँच दल इस एंगल से भी जाँच कर रही है कि और कितने समय से इन आरोपितों ने मदरसे के बच्चों को शिकार बनाया। 

इस्लामी प्रचारक यौन उत्पीड़न के आरोपित मुहम्मद शाकिर के फेसबुक पेज पर 23,000 से अधिक फेसबुक फॉलोअर्स और 8,000 से अधिक यूट्यूब सब्सक्राइबर्स है। उसके ज़्यादातर वीडियो इस्लामी प्रचार से जुड़े हैं। 

कर्नाटक : अवैध यतीमखाना में जानवरों की तरह ठूँसे हुए अनाथ : दीनी तालीम के नाम पर तालिबानी जीवन जीते बच्चे

NCPCR के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने बेंगलुरु के दारूल उलूम सैय्यादिया यतीमखाने में जाँच में पाई अनियमितताएँ (फोटो साभार: प्रियंक कानूनगो X हैंडल @KanoongoPriyank)
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में अवैध तरीके से एक यतीमखाना चल रहा था। इस दारूल उलूम सैय्यादिया नाम के यतीमखाने में खुलेआम बाल अधिकारों का उल्लघंन कर बच्चों को मानसिक यातना दी जा रही थी।

आलम ये है कि यहाँ रहने वाले बच्चे मौलवी से इतना खौफ खाए हुए थे कि उसके आते ही हिलना-डुलना बंद कर आँखें बंद कर लेते है। यहाँ बच्चों को पूरे दिन बगैर किसी खेलकूद के मस्जिद में रखा जाता है।

ये खुलासा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की औचक निरीक्षण में सामने आई हैं। एनसीपीसीआर ने इस मामले में संज्ञान लेकर कर्नाटक सरकार के चीफ़ सेक्रेटरी को नोटिस जारी किया है।

NCPCR के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने बेंगलुरू में अवैध तरीके से चलाए जा रहे दारूल उलूम सैय्यादिया यतीम खाना का औचक निरीक्षण किया था। इस ग़ैरपंजीकृत निरीक्षण के दौरान यहाँ कई अनियमितताएँ पाई गई। इसका सारा ब्यौरा NCPCR के अध्यक्ष ने अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया है।

 100 वर्ग फ़िट के कमरे में 8 बच्चे

यहाँ क़रीब 200 यतीम यानी अनाथ बच्चों को रखा गया है। जानवरों की तरह 100 वर्ग फ़िट के कमरे में 8 बच्चों को रखा गया है। इस तरह के 5 कमरों में 40 बच्चे रहते हैं तो कॉरिडोर में 16 बच्चे रहते हैं।

बाक़ी बचे 150 बच्चों को मस्जिद के नमाज़ पढ़ने वाले 2 अलग-अलग हाल में रात को सुलाया जाता हैं। ये सभी बच्चे दिन भर इन्हीं नमाज़ वाले हाल में रहकर मदरसे की इस्लामिक दीनी तालीम लेते हैं।

न स्कूल न खेल का सामान

इस यतीमखाने में रहने वाले बच्चे बेहद छोटे हैं। इन मासूमों के लिए यहाँ न कोई खेल का सामान है और न ही ये बच्चे टेलीविजन देख सकते हैं। ये बच्चे इतने डरे हुए हैं कि मौलवी को आता देख सारे के सारे वहीं खड़े होकर आँख बंद कर लेते हैं।
तड़के सुबह 3:30 पर जगा कर उन्हें मदरसे की दीनी तालीम में लगा दिया जाता है। इनको दोपहर में सोने को कहा जाता है। इसके बाद फिर शाम से रात तक इनकी तालीम शुरू हो जाती है।
पूरे दिन में नमाज़ के लिए बस छोटे ब्रेक दिए जाते हैं। न इन बच्चों के खाने का ठिकाना है, न आराम का और न मनोरंजन के लिए कोई इंतजाम है। बस इन्हें सारे वक्त मस्जिद के अंदर रखा जाता है। एक तरह से ये बच्चे मध्ययुगीन तालिबानी जीवन जी रहे हैं। इनके हिस्से में जैसे संविधान में लिखा जीवन है ही नहीं।

यतीमखाने की इमारत में चल रहा स्कूल

जानकारी के मुताबिक, करोड़ों की वफ़्फ़ की सम्पत्ति वाले इस यतीमखाने की बिल्डिंग अलग है, लेकिन यहाँ इन बच्चों को न रखकर इसमें स्कूल चलाया जा रहा है। लेकिन इस स्कूल में भी इन यतीम बच्चों को जाने और तालीम लेने की इजाज़त नहीं है।
NCPCR ने इस मामले में कर्नाटक सरकार की क्लास लगाई है। उनका कहना है कि ये राज्य सरकार की लापरवाही का सुबूत और देश के संविधान का उल्लंघन है। आयोग ने इस पर संज्ञान लेते हुए राज्य के चीफ़ सेक्रेटरी को नोटिस जारी कर दिया है।

डॉन बॉस्को मिशनरी स्कूल में भी मिली थी अनियमितताएँ

इस मामले से पहले भी NCPCR ने बेंगलुरु के डॉन बॉस्को मिशनरी के एक चिल्ड्रेन होम के निरीक्षण में अनियमितताएँ पाई गई थी। NCPCR अध्यक्ष कानूनगो ने यहाँ राजस्थान के जोधपुर का एक बच्चा मिला था। ये बच्चा घर से भटक कर यहाँ आ गया था। इसे यहाँ अवैध तरीके से कई महीनों से रखा गया है।
NCPCR अध्यक्ष ने मामला प्रकाश में आने के तुरंत बाद इस बच्चे को वापस जोधपुर भेजने का निर्देश दिया। NCPCR अध्यक्ष ने बताया कि नियमों के मुताबिक बच्चे को घर भेजा जाना चाहिए था, लेकिन बाल गृह ने इसका पालन नहीं किया।

‘जहाँ हो रहा G20 समिट, वहाँ बढ़ रहा विस्फोटक-हथियार लदा ऑटो’, जामा मस्जिद में भी बम : जिस फोन कॉल के बाद पुलिस महकमे में मची खलबली, वो निकली फर्जी


दिल्ली के भलस्वा डेयरी और जामा मस्जिद इलाकों से पुलिस को फर्जी कॉल कर के गड़बड़ी की सूचना दी गई। पुलिस ने दोनों मामलों की जाँच की और सूचनाओं को अफवाह बताया। भलस्वा डेयरी से बंदूक और विस्फोटक वाले संदिग्ध की अफवाह उड़ाने वाला 21 वर्षीय एक युवक निकला। जामा मस्जिद इलाके से इसी तरफ की अफवाह उड़ाने वाला मदरसे का एक नाबालिग छात्र। पुलिस ने शुक्रवार (8 सितंबर, 2023) को भलस्वा डेयरी के आरोपित को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है।

पहले मामले में शुक्रवार को दिल्ली पुलिस को फोन पर एक अज्ञात कॉलर ने एक संदिग्ध ऑटो रिक्शा के प्रगति मैदान की तरफ बढ़ने की जानकारी दी। इसी जगह पर G 20 के सम्मेलन का एक हिस्सा आयोजित हो रहा है जिसमें देश-विदेश की कई बड़ी हस्तियाँ मौजूद हैं। कॉलर ने आगे बताया कि ऑटो में संदिग्ध विस्फोटक और हथियारों के साथ मौजूद है। मामले की सूचना पर पुलिस फ़ौरन हरकत में आई। पुलिस ने कॉलर के बताए रास्तों की तलाशी ली तो सूचना झूठी पाई गई। अंत में कॉलर की लोकेशन ट्रेस की गई तो वो भलस्वा डेयरी की निकली।

पुलिस ने शुक्रवार को ही संदिग्ध आरोपित को हिरासत में ले कर पूछताछ की। आरोपित ने झूठी सूचना देना कबूल किया। पुलिस ने उसे समुचित धाराओं में गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। साथ ही मामले में आगे की जाँच की जा रही है।

                                                                       दिल्ली पुलिस प्रेसनोट

मदरसा छात्र ने भी उड़ाई अफवाह

दूसरा मामला जामा मस्जिद इलाके से सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ,घटना शुक्रवार (8 सितंबर, 2023) की है। इस दिन सुबह 7:50 पर दिल्ली पुलिस के कंट्रोल रूम में एक अनजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले कॉलर ने जामा मस्जिद के आगे एक संदिग्ध व्यक्ति के मूवमेंट की जानकारी दी। कॉलर ने संदिग्ध के पास बंदूक होने का भी दावा किया। साथ ही जामा मस्जिद में बम होने की भी सूचना दी। आनन-फानन में सक्रिय हुआ पुलिस दस्ता घटनास्थल पर पहुँचा और चप्पे-चप्पे की तलाशी ली। पुलिस को गहन छानबीन के बावजूद कुछ नहीं मिला।
बाद में सूचना देने वाले मोबाइल नंबर को ट्रेस किया गया। कॉलर का नंबर मदरसे में पढ़ रहे एक 14 साल के नाबालिग का निकला। यह मदरसा जामा मस्जिद के पास ही है। कॉल करने वाले छात्र से पूछताछ की गई तब उसने इस करतूत में अपने एक साथी और उसी मदरसे के छात्र के भी शामिल होने की सूचना दी। दोनों ने बताया कि वो मदरसे में छुट्टी करवाना चाह रहे थे इसलिए उन्होंने फर्जी कॉल पुलिस को की। दोनों नाबालिगों से पुलिस के साथ इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने भी पूछताछ की। हालाँकि इस पूछताछ में कुछ भी संदिग्ध निकल कर नहीं आया।
पुलिस इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। बताते चलें कि G20 सम्मेलन को देखते हुए प्रशसन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। जमीन से आसमान तक नजर रखने के साथ सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी की जा रही है। पुलिस बार-बार लोगों को अफवाहों से बचने की अपील भी जारी कर रही है।

अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति सबसे बड़ा घोटाला : 2007-2008 में 22000 करोड़ रूपए: इनमें 97% मदरसा, एक मोबाइल नंबर से 22 लड़कों को स्कॉलरशिप

आखिर भाजपा का विरोध क्यों हो रहा है, उसका कारण है कि हर बीतते समय एक से बढ़कर एक घोटाला उजागर हो रहा है। पिछली सरकारें किस तरह अल्पसंख्यक छात्रों के नाम पर घोटाले कर रही थी, जिससे हर आम मुस्लिम बिल्कुल अनजान है। लेकिन छद्दम धर्म-निरपेक्षों के मकड़जाल में फंस मुसलमान भाजपा को मुस्लिम विरोधी समझ गुमराह है। ऐसे में हर मुस्लिम को इन छद्दम धर्म-निरपेक्षों से पूछना चाहिए कि उनके नाम पर किये घोटाले में कमाए रूपए कहाँ गए?  
अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। इसके बाद केंद्रीय मंत्रालय ने इस मामले की जाँच CBI को सौंप दिया है। घोटाले में सामने आया है कि फर्जी संस्थानों के नाम पर सरकार से करोड़ों रुपए लिए गए। सरकार से छात्रवृत्ति लेने वाले इन अल्पसंख्यक संस्थानों में करीब 53 प्रतिशत यानी आधे से अधिक फर्जी हैं।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा की गई एक आंतरिक जाँच में ऐसे 830 संस्थानों में गहरे भ्रष्टाचार का पता चला। इन फर्जी संस्थानों के जरिए पिछले 5 वर्षों में 144.83 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने मामले को आगे की जाँच के लिए केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) के पास भेज दिया है।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर 10 जुलाई 2023 को इस मामले में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। जाँच के तहत 34 राज्यों के 100 जिलों में पूछताछ की गई। जाँच में 1572 संस्थानों में से 830 को धोखाधड़ी में शामिल पाया गया। ये संस्थान 34 में से 21 राज्यों के हैं, जबकि बाकी राज्यों में संस्थानों की जाँच अभी भी चल रही है।

फिलहाल, अधिकारियों ने इन 830 संस्थानों से जुड़े खातों को फ्रीज करने का आदेश दिया है। मंत्रालय का कहना है कि यह घोटाला 2007-08 से ही चल रहा है। अब तक करीब 22,000 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। बीते चार साल से सालाना 2,239 करोड़ रुपए की छात्रवृत्तियाँ दी गई हैं।

सीबीआई इन फर्जी संस्थानों के उन जिला नोडल अधिकारियों की भी जाँच करेगी, जिन्होंने फर्जी संस्थानों का सत्यापन किया और अपनी अनुमोदन रिपोर्ट दी। इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मंत्रालय ने यह भी सवाल उठाया है कि बैंकों ने फर्जी आधार कार्ड और केवाईसी दस्तावेजों के साथ लाभार्थियों के लिए फर्जी खाते खोलने की अनुमति कैसे दी।

इतना ही नहीं, जिन संस्थानों का अस्तित्व ही नहीं था या जिनका परिचालन नहीं हो रहा था, ऐसे फर्जी संस्थान जाँच के बाद राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल और शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई) दोनों पर पंजीकृत होने में कामयाब रहे। इसमें भी संलिप्त अधिकारी जाँच के दायरे में रहेंगे।

राज्य के अनुसार विवरण

  • छत्तीसगढ़: जाँच में सभी 62 संस्थान फर्जी या निष्क्रिय पाए गए।
  • राजस्थान: जाँच के दौरान 128 संस्थानों में से 99 फर्जी या गैर-परिचालन वाले थे। यानी 77 प्रतिशत संस्थान फर्जी हैं।
  • असम: यहाँ के 68 प्रतिशत संस्थान फर्जी पाए गए।
  • कर्नाटक: 64 फीसदी संस्थान फर्जी पाए गए।
  • उत्तर प्रदेश: 44 फीसदी संस्थान फर्जी पाए गए।
  • पश्चिम बंगाल: 39 फीसदी संस्थान फर्जी पाए गए।

जाँच के दौरान कई खामियाँ मिलीं

  • केरल के मलप्पुरम में एक बैंक की शाखा ने 66,000 छात्रवृत्तियाँ वितरित कीं। यह छात्रवृत्ति के लिए पंजीकृत संख्या से अधिक है।
  • जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में 5,000 पंजीकृत छात्रों वाले एक कॉलेज ने 7,000 छात्रवृत्ति दी गई।
  • एक अभिभावक का मोबाइल नंबर 22 विद्यार्थी से जुड़ा था। ये सभी छात्र नौवीं कक्षा में थे।
  • एक अन्य संस्थान में छात्रावास नहीं था, लेकिन प्रत्येक छात्र ने छात्रावास छात्रवृत्ति लिया।
  • पंजाब में अल्पसंख्यक छात्रों को स्कूल में नामांकित नहीं होने के बावजूद छात्रवृत्ति मिलती थी।
  • असम में एक बैंक शाखा में कथित तौर पर 66,000 लाभार्थी सूचीबद्ध थे। जब इन लाभार्थियों का सत्यापन करने के लिए पहुँची तो एक मदरसे में टीम को धमकी दी गई।
मंत्रालय का छात्रवृत्ति कार्यक्रम से लगभग 1,80,000 संस्थान जुड़े हुए हैं। इनमें 1.75 लाख मदरसे हैं, जिनमें सिर्फ 27,000 मदरसे ही पंजीकृत हैं और छात्रवृत्ति के पात्र हैं। इसमें कक्षा 1 से लेकर उच्च शिक्षा तक के छात्र शामिल हैं। इसे शैक्षणिक वर्ष 2007-2008 में शुरू की गई थी।
अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति भले ही केंद्र सरकार देती है, लेकिन उसका सत्यापन और अन्य प्रक्रिया राज्य सरकार करती है। संस्थानाें का पंजीकरण जिला स्तर पर अल्पसंख्यक विभाग में होता है। छात्रवृत्ति के खाते स्थानीय बैंकों में खोले जाते हैं। विद्यार्थियों और संस्थानाें का सत्यापन भी राज्य सरकार का अल्पसंख्यक विभाग करता है।