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‘घुसपैठियों को खुश करना बंद करो’: कर्नाटक हाई कोर्ट की दो टूक, अवैध बांग्लादेशियों की पोल खोलने वाले डॉक्टर पर FIR करने पर पुलिस को फटकार

कर्नाटक हाई कोर्ट (फोटो साभार : Bar & Bench
कर्नाटक हाई कोर्ट ने अवैध बांग्लादेशी की पहचान कराने वाले डॉक्टर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नागेंद्र के खिलाफ दर्ज 2 आपराधिक मामलों पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने दोनों मामलों की आगे की जाँच पर अंतरिम रोक लगा दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य पुलिस और गृह विभाग के कामकाज पर सवाल उठाए।

कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि घुसपैठियों को रोकने पर ध्यान दिया जाना चाहिए, न कि ऐसे लोगों को संरक्षण देने पर। कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को पहली नजर में आपराधिक प्रक्रिया के दुरुपयोग का मामला माना है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को होगी।

डॉक्टर ने दी थी घुसपैठियों की जानकारी

 याचिकाकर्ता डॉ नागेंद्र की ओर से अदालत में बताया गया कि वह पेशे से डॉक्टर और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह लंबे समय से बेंगलुरु में रह रहे कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान करने में पुलिस की मदद कर रहे थे।

वकील ने बताया कि 22 जुलाई 2026 को डॉ नागेंद्र ने जाँच अधिकारी को बांग्लादेशी घुसपैठियों की मौजूदगी की जानकारी दी थी। यह सूचना विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को भी भेजी गई। लेकिन इसके कुछ ही मिनट बाद घटनाक्रम पूरी तरह बदल गया।

15 मिनट बाद डॉक्टर के खिलाफ दर्ज हो गई FIR

कोर्ट में बताया गया कि FRRO को सूचना भेजे जाने के करीब 15 मिनट बाद ही एक कथित अवैध प्रवासी ने डॉ नागेंद्र के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज करा दी। इतना ही नहीं, उसी दिन बाद में डॉ नागेंद्र की ओर से की गई दूसरी शिकायत के बाद भी दूसरे थाने में उनके खिलाफ एक और आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया। उन्हें गिरफ्तार किया गया, न्यायिक हिरासत में भेजा गया और अगले ही दिन जमानत मिल गई।

सुनवाई के दौरान जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने पूछा कि यदि कोई व्यक्ति घुसपैठियों की जानकारी देता है तो उसी घुसपैठी की शिकायत के आधार पर उसके खिलाफ मामला कैसे दर्ज किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि शिकायत में खुद बांग्लादेश का पता दर्ज है। ऐसे में पुलिस ने बिना प्रारंभिक जाँच के एफआईआर कैसे दर्ज कर ली। कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।

‘घुसपैठ रोकिए, दूसरी बातों में समय मत गँवाइए’

सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य के गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले अवैध घुसपैठ को नियंत्रित किया जाए। कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस इस तरह अवैध प्रवासियों के पक्ष में काम करेगी तो यह देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी व्यवस्था को किसी भी हालत में बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए।

विशेष लोक अभियोजक बीएन जगदीश ने अदालत को बताया कि जिन लोगों को अवैध प्रवासी बताया गया है, उन्हें पहले ही FRRO के सामने पेश किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि फिलहाल उन लोगों को डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। अभियोजन पक्ष का कहना था कि शिकायतकर्ता ने डॉ नागेंद्र पर मारपीट का आरोप लगाया है। वहीं कोर्ट ने FRRO को भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया और उसकी ओर से पूरी स्थिति रिपोर्ट माँगी है।

‘घरों में जगह देने वालों पर भी हो कार्रवाई’

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उन लोगों पर भी चिंता जताई जो बिना वैध दस्तावेज वाले विदेशी नागरिकों को किराए पर मकान देते हैं। कोर्ट ने कहा कि कुछ लोग थोड़े ज्यादा पैसे के लालच में ऐसे लोगों को रहने की जगह दे देते हैं। अगर लालच देश की सुरक्षा पर भारी पड़ने लगे तो यह गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने कहा कि ऐसे मकान मालिकों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

मध्य प्रदेश : खंडहर को मदरसा बता डकारी लाखों की स्कॉलरशिप, मुस्लिम छात्रों के नाम पर 27 मदरसे-स्कूल मिले संदिग्ध: इंदौर में रफीक, शबनम, शहनाज समेत 5 घोटालेबाजों पर FIR

                                    मदरसे में पढ़ते छात्र, प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI Grok)
मध्य प्रदेश के इंदौर में मुस्लिम छात्रों के नाम से मिलने वाली छात्रवृत्ति में बड़ा घोटाला सामने आया है। इस मामले में 27 मदरसों और स्कूलों को घोटाले के लिए संदिग्ध माना गया है और 5 के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। क्राइम ब्रांच की जाँच में सामने आया है कि मदरसों और स्कूलों के संचालक खंडहर और खाली मैदान को ही शिक्षण संस्थान बताकर लाखों रुपए की छात्रवृत्ति ले रहे थे।

नई दुनिया की खबर के मुताबिक, क्राइम ब्रांच ने फर्जीवाड़ा करने वाले संचालकों की तलाश शुरू कर दी है और सरकार को इस मामले की रिपोर्ट भेजी जा रही है। दरअसल, क्राइम ब्रांच ने पिछड़ा वर्ग एवँ अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सहायक संचालक अनिल कुमार सोनी की शिकायत पर 17 जून 2025 को केस दर्ज किया था और इस मामले की जाँच कर रही थी।

रिपोर्ट में डीसीपी(क्राइम) राजेश कुमार त्रिपाठी के हवाले से बताया गया है कि पुलिस ने जब एक आरोपित आफताब खान के ठिकाने पर दबिश दी पर वह मोबाइल बंद कर फरार हो गया। आफताब का सेंट जेवियर कॉन्वेंट नाम से सब्जी मंडी खजराना में स्कूल था और उसने 7 लाख से ज्यादा की स्कॉलरशिप ली थी। हालाँकि, जब इस स्कूल की जाँच करने टीम पहुँची तो उस जगह पर कुछ नहीं मिला।

शिकायत के बाद निरीक्षक माधवसिंह भदौरिया ने जाँच की और केयर वेल स्कूल के संचालक मोहम्मद रफीक खान, मदरसा साफिया की संचालिक शबनम शाह, मदरसा उस्मानिया की संचालिका शहनाज खानम, सेंट जेवियर कान्वेंट के संचालक आफताब खान और जेआर डीआरडी मेमोरियल स्कूल के संचालक आफताब के खिलाफ केस दर्ज किया है।

माधवसिंह भदौरिया ने इस मामले को लेकर बताया कि 9वीं और 10वीं के लिए अपात्र विद्यार्थियों का सबसे पहले पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किया गया फिर संस्थाओं ने अपने लॉग-इन का इस्तेमाल कर अपात्र छात्रों का रजिस्ट्रेशन आगे भी बढ़ा दिया था। इस जाँच में कुल 27 शिक्षण संस्थानों को संदिग्ध बताया गया है। इस फर्जीवाड़े की जाँच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर इन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।