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स्मृति ईरानी ने कर दिया नंगा: निर्भया फंड का एक पैसा खर्च नहीं किया UPA सरकार; मोदी सरकार को घेरने चले थे जयराम रमेश

केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस सांसद जयराम रमेश को करारा जवाब दिया है। जयराम रमेश ने उनके मंत्रालय की आलोचना में एक लंबा पोस्ट लिखा था। मंत्री ईरानी ने भाजपा सरकार की उपलब्धियां और UPA की कमियाँ गिना दी।

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोमवार (25 मार्च, 2024) को एक्स (ट्विटर) पर एक लंबा सा पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि मोदी सरकार में 10 वर्षों में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने काम नहीं किया। उन्होंने इसके नीचे तमाम मुद्दे गिनवाए जिसमें आंगनबाड़ी सेविकाओं से लेकर NCRB के आँकड़े थे।

उनके इस दावे को केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने ध्वस्त कर दिया। उन्होंने ट्विटर पर ही जवाब देते हुए लिखा, “जब मूर्ख दूसरों को मूर्ख बनाने का प्रयास करते हैं तो वह खुद की मूर्खता का ज्यादा प्रदर्शन करते हैं। एक दरबारी एक राजकुमार की बड़ाई के चक्कर में अपनी ही नाकामी प्रदर्शित कर दी।”

इसके बाद केन्द्रीय मंत्री ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के कामों को गिनाया। उन्होंने बताया कि महिलाओं के विशेष रूप से स्थापित किए गए निर्भया फंड का एक रुपया भी 2014 में UPA सरकार के अंत तक खर्च नहीं किया गया था। मंत्री ईरानी ने बताया कि मोदी सरकार में निर्भया फंड से 40 प्रोजेक्ट चालू हुए हैं। इसके लिए 7215 करोड़ रूपए का आवंटन हुआ है।

उन्होंने जयराम रमेश पर हमला बोलते हुए कहा कि UPA सरकार में एक इमरजेंसी हेल्पलाइन भी नहीं जारी की जा सकी थी। उन्होंने कहा कि जबसे 2015 में निर्भया हेल्पलाइन बनी है, तब से इससे 70 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता मिली है। इसके अलावा भी उन्होंने कई प्रोजेक्ट गिनाए।

केन्द्रीय मंत्री ईरानी ने आगे बताया कि 2014-15 के बाद महिलाओं के लिए जारी किया जाने वाला बजट काफी बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि इस दौरान बजट में 215% की वृद्धि हुई है। उन्होंने कई योजनाओं के बढ़ाए गए बजट के आँकड़े सामने रखे।

जयराम रमेश ने आंगनवाडी कार्यकार्ताओं की हालत पर भी प्रश्न उठाए थे। केन्द्रीय मंत्री ईरानी ने बताया कि सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 1500 रूपए बढ़ाया है। उन्होंने आंगनवाडी कार्यकर्ताओं के हितों को लेकर किए गए और भी काम गिनाए जिसमें पीएम गरीब कल्याण योजना और आयुष्मान योजना में इनका शामिल किया जाना था।

केन्द्रीय मंत्री ईरानी ने स्पष्ट किया कि बीते कुछ सालों में महिलाओं की देश की वर्कफोर्स में भी वृद्धि हुई है। मुद्रा लोन जैसी योजनाओं की सबसे बड़ी लाभार्थी वही हैं। स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी का नाम लिखे बगैर उन्हें राजकुमार बताया और कहा कि वह जमीन से अपना सम्बन्ध खो चुके हैं। केन्द्रीय मंत्री के जवाब के बाद जयराम रमेश ने इस विषय पर कोई ट्वीट नहीं किया। 


नरेंद्र मोदी ने “जालीदार टोपी” नहीं पहनी, और स्मृति ईरानी को हिज़ाब पहनाना चाहते हो; सभी हिन्दू दरगाहों मज़ारों पर जाना बंद करें

सुभाष चन्द्र

मुझे याद है जब सितंबर 2011 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की सद्भावना यात्रा के दौरान एक मौलाना ने उन्हें “इस्लामिक जालीदार टोपी” पहनाने की कोशिश की थी लेकिन मोदी ने उसे पहनने से मना कर दिया था। इस बात को लेकर कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष और Left Liberal Echo fraud system पागलों की तरह मोदी के पीछे पड़ गया था जैसे उसने कोई अपराध कर दिया हो। अब जिन्हें आदत है ऐसी इस्लामिक टोपी पहन कर मौलाना बनने की, तो उनके लिए क्या कह सकते हैं लेकिन मोदी नहीं पहनना चाहता था तो उससे पेट में मरोड़ क्यों हुई।

लेखक 
अब हाल ही में केंद्रीय महिला, बाल कल्याण एवं अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री स्मृति ईरानी सऊदी अरब के मदीना में एक गैर मुस्लिम प्रतिनिधि मंडल को लेकर गई और वहां उसका और उसके दल का स्वागत सऊदी अरब सरकार के मंत्रियों ने किया। स्मृति ईरानी पहली ऐसी महिला थी जो गैर मुस्लिम दल को लेकर गई और उसके खुद साड़ी पहन कर और बिना हिज़ाब के सिर ढके मदीना जैसी “पवित्र” जगह पर जाने से पाकिस्तान के लोगों में जैसे आग ही लग गई है।
एक के बाद एक कट्टरपंथी पाकिस्तान में आम लोगों के साथ साथ सऊदी अरब के खिलाफ आग उगल रहे हैं कि सऊदी अरब ने इस्लाम की पाक जमीन को गैर मुस्लिमों को बुला कर “नापाक” कर दिया। ये लोग कह रहे हैं कि सऊदी अरब को भारत के साथ केवल बिज़नेस से पैसा दिखाई देता है जिसके लिए वो इस्लाम को बर्बाद करने में लगा है। 

 

पाकिस्तानी भूल रहे हैं कि स्मृति ईरानी मुस्लिमों की प्रतिनिधि बन कर नहीं गई थी बल्कि भारत के मंत्री की हैसियत से गई थी और अपने देश भारत के मुसलमानों के फायदे की बात करके आई है। 

स्मृति ईरानी तुम पाकिस्तानियों के बाप की नौकर है क्या जो तुम्हारे कहने से पोशाक पहनेगी। तुम लोग हिजाब पहना कर अपनी औरतों के साथ कैसे कैसे कुकर्म कर लेते हो, ये तुम जानते हो और तुम्हारा मुल्क तो ऐसी हालत में है जिसके लोग हज पर  जाने के लिए पैसे भी नहीं जुटा पाते और जिसकी वजह से पाकिस्तान ने अपना हज कोटा वापस करना शुरू कर दिया है जबकि भारत का कोटा इस साल बढ़ा कर पौने दो लाख कर दिया है सऊदी अरब ने।

अपने गिरेबान में झाँक कर देखो पाकिस्तानियों। सऊदी अरब और इराक सरकारों का कहना है कि पाकिस्तान के लोग जियारत के बहाने उनके देशों में आ कर चोरी और अन्य अपराधों में शामिल होते हैं जिसकी वजह से उनकी जेलें भरी रहती हैं।

सऊदी अरब के एक व्यक्ति ने पाकिस्तान के लोगों को ठोकते हुए लिखा था - हमारा देश है, हमारी जमीन है, हमारे कानून हैं, तुम कौन होते हो दखल देने वाले, तुम केवल इसलिए दखल दे रहे हो कि तुम्हारे बाप दादा ने इस्लाम काबुल कर तुम्हे अरबी नाम दे दिया, इससे क्या तुम असली मुसलमान हो गए जो हमें ज्ञान देने चल पड़े। इस बेचारे को इतनी धमकी मिलीं कि अपना ट्वीट डिलीट करना पड़ गया।

पाकिस्तान के ही नहीं ये अधिकांश कट्टरपंथी मुस्लिमों की सोच होगी कि एक गैर मुस्लिम भारतीय महिला नेता कैसे मदीना चली गई। फिर ऐसे कट्टरपंथी लोगों को एक नियम दुनियाभर के लिए बनाना चाहिए कि किसी इस्लामिक मस्जिद, मज़ार या दरगाह में कोई “गैर मुस्लिम” प्रवेश नहीं कर सकता।

इसलिए जितना प्रचार हो करना चाहिए कि हिन्दू मज़ारों और दरगाहों पर जाना पूरी तरह बंद कर दें। फिर चाहे वह अजमेर की चिश्ती की दरगाह हो या हाजी अली की, अलबत्ता राहुल “कालनेमि” अपने दादा फ़िरोज़ गांधी का मकबरा भुला कर “बाबर” की कब्र पर रोने जा सकता है।

अवलोकन करें:-

जिस दिन से हिन्दू मजारों पर जाना छोड़ देगा, वह आतंकवाद और आतंकवाद समर्थकों पर बहुत जबरदस्त चोट होगी। अपने देवी-देवताओं पर विश्वास करने का प्रमाण धारावाहिक "रामायण" निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर का देखना चाहिए, जिन्होंने प्रभु राम के बाल रूप में काक(कौए) के साथ क्रीड़ा करते दृश्य को फिल्मांकन करने प्रभु राम से प्रार्थना की थी, देखिए वीडियो: 


‘मुस्लिम बन गए इसका मतलब ये नहीं हमारे मामले में बोलो’ : स्मृति ईरानी के मदीना जाने पर गाली बक रहे कट्टरपंथियों को सऊदी वालों ने दिखा दी औकात

मदीना में स्मृति ईरानी (तस्वीर साभार: India Today)
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी मदीना गईं थीं। उनके साथ गैर-मुस्लिमों का प्रतिनिधिमंडल था जिसमें कश्मीरी हिंदू IRS अधिकारी निरुपमा कोतरू भी शामिल थे। इस प्रतिनिधिमंडल ने वहाँ हज तैयारियों का जायजा लिया। सऊदी के नेताओं से बात की। जेद्दाह में उमराह कॉन्फ्रेंस को अटेंड किया।

इस दौरान उनकी एक फोटो वायरल हुई जिसमें वह अल-मस्जिद अल-नबावी के सामने सामान्य परिधान साड़ी में खड़ीं थीं। उनकी फोटोज देख पाकिस्तान, बांग्लादेश, और भारत के इस्लामी कट्टरपंथी बिगड़ गए और अपशब्द कहने लगे। लेकिन, उन्हें सऊदी वालों से ही करारा जवाब मिल गया।

पाकिस्तानी मीडिया चिढ़ा

भारतीय प्रतिनिधिमंडल की फोटो देख पाकिस्तानी न्यूज पोर्टल ‘द न्यूज’ ने तो इसे हिंदू प्रतिनिधिमंडल बताया। वह लोग इस बात से भी नाराज दिखे कि आखिर भारतीय मंत्री मुरलीधरण ने मस्जिद के सामने धोती और भगवा कुर्ता क्यों पहना था और ईरानी ने अपना सिर क्यों नहीं ढका था।
कुछ लोगों ने स्मृति ईरानी को ‘काफिर खातून और काफिर औरत’ कहा। इसी क्रम में उजैर नाम के इस्लामी कट्टरपंथी ने सऊदी वालों को बेवकूफ बताया और कहा कि आखिर किस बिनाह पर मदीना में गैर मुस्लिमों को एंट्री दी गई।
यूजर ने कहा स्मृति ईरानी मदीना में इसलिए आईं ताकि वो और महिलाओं के सिर से स्कॉर्फ को हटवा सकें। यूजर ने एक पोस्ट में ये भी बद्दुआ की थी कि जो बुद्धिजीवी सऊदी के इस निर्णय का समर्थन कर रहे हैं उन पर भी अल्लाह का कहर बरसे।
इस पर इससे पहले कोई भारतीय जवाब देता, सऊदी यूजर ने उन्हें लताड़ दिया। देख सकते हैं पोस्ट में लिखा है- “हमारी जमीन हमारी मर्जी। सिर्फ इसलिए कि तुम्हारे पूर्वज इस्लाम में परिवर्तित हो गए थे और तुम्हें अरबी नाम मिल गया इसका मतलब ये नहीं कि तुम इसमें अपनी ज्ञान दो। तुम अप्रांसगिक हो और हम लोग एक जैसे नहीं हैं।”
दिलचस्प बात ये है कि सिर्फ सऊदी के मुसलमान ही इन कट्टरपंथियों को नहीं गाली देते, हाल में ईरानी मुस्लिम भी इनपर पारसी धर्म का मखौल उड़ाने के लिए बरसे थे। एक यूजर ने पाकिस्तान में डॉल्फिन की रेप वाली खबर दिखाकर उन्हें कहा गया था- “तुम चुप रहो, तुम पाकिस्तानी हो। तुम्हारी राय अप्रासंगिक है।”

जो लड़की/औरत नहीं उसको भी मिले माहवारी पर छुट्टी: मनोज झा LGBTQIA पर हुए स्खलित, स्मृति ईरानी ने ‘पीरियड के प्रचार’ पर धो डाला

माहवारी के नाम पर कार्यस्थलों पर महिलाओं को पेड छुट्टी मिले या नहीं… ये इन दिनों बहस का मुद्दा है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने हाल में ऐसे किसी भी विचार का विरोध किया था। अब एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया है कि वो नहीं चाहतीं कि कार्यस्थलों पर महिलाओं को भेद-भाव महसूस करना पड़े इसलिए उन्होंने इस नीति को लाने का विरोध किया था।

याद दिला दें कि ईरानी ने माहवारी पर पेड लीव के मुद्दे पर कहा था कि ये कोई दिव्यांग होने जैसा नहीं है कि इसके लिए अलग से पेड लीव दी जाए।

अब उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा है कि वो इस मुद्दे पर और भी बहुत बोल सकती थीं, लेकिन जिन्होंने (राजद सांसद मनोज झा) सवाल किए थे उनका मकसद महिलाओं की परेशानियों का समाधान ढूँढना नहीं था। ईरानी ने इंटरव्यू में बताया कि संसद में उन्होंने जो कुछ भी बोला वो निजी अनुभव झेलने के बाद बोला ताकि और किसी महिला के साथ भेदभाव न हो।

उन्होंने कहा कि अगर ऐसी नीति आ जाती है तो एक महिला को अपनी लीव के लिए पहले अपने बॉस और एचआर को बताना होगा कि उसके पीरियड्स हैं इसलिए छुट्टी चाहिए। ईरानी पूछती हैं कि आखिर महिलाओं को क्यों फोर्स किया जा रहा है कि वो अपने पीरियड के दिनों को प्रचार करें? क्यों आखिर आपको नौकरी देने वाले को आपके पीरियड्स की जानकारी क्यों होनी चाहिए? वह कहती हैं कि क्या कोई इस बात की कल्पना कर सकता है कि महिलाओं को कितना ज्यादा भेदभाव झेलना पड़ेगा। उन्हें काम करने में कितनी बाधाएँ आएँगी।

माहवारी के दौरान महिलाओं को छुट्टी देने का मुद्दा पिछले दिनों संसद में राजद सांसद मनोज झा ने उठाया था। उन्होंने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने जो सवाल किए उनकी लिस्ट आप नीचे देख सकते हैं।

झा को शायद नहीं मालूम कि कई महिलाएं तो माहवारी के बारे में अपने पति तक को पता नहीं होने देती, और सार्वजनिक करने की बात कर रहे हैं। कैसी मानसिकता हो गयी है हमारे नेताओं की सोंच? जिन मुद्दों पर संसद में चर्चा करनी चाहिए उन पर करते नहीं, फालतू के मुद्दों पर संसद का समय बर्बाद करने संसद पहुँच जाते हैं। 

यहाँ पूछा गया है कि क्या सरकार मेंस्ट्रुअल हाइजीन पॉलिसी लाने के विचार में है? अगर है जो विवरण दे ; क्या उस नीति में LGBTQIA कम्युनिटी के लोगों के मेंस्ट्रुअल हाइजिन के लिए भी प्रावधान हैं? क्या सरकार इस मुद्दे से जुड़े अभियान स्कूल-कॉलेजों में चला रही है? अगर है तो विवरण है और नहीं है तो कारण दें।

संसद में मुद्दे को उठाने के बाद मनोज झा ने कहा था कि लालू सरकार में 1992-93 में बिहार में ये लीव देने का प्रावधान बिहार में लाया गया था। जिसे ईरानी ने इंटरव्यू के दौरान फर्जी दावा बताया और कहा कि किसी प्राइवेट सेक्टर में ऐसा रूल नहीं चालू हुआ।

इसके अलावा उन्होंने मुख्य रूप से उस तीसरे प्रश्न को उठाया जिसमें मनोझ झा ने LGBTQIA समुदाय का जिक्र किया था। उन्होंने कहा, “झा जी ने मौखिक उत्तरों के लिए प्रश्नों की सूची में मुझसे LGBTQIA प्लस समुदाय के लिए मासिक धर्म स्वच्छता के उपायों के बारे में पूछा। अब मुझे बताएँ, LGBTQIA समुदाय जिसके लिए माननीय सदस्य प्रतिक्रिया चाहते थे, किस समलैंगिक पुरुष को गर्भाशय के बिना मासिक धर्म होता है?”


‘चित्रा त्रिपाठी मोदी की लैला, स्मृति ईरानी क्या लगती है?’: आयुषी शुक्ला, कांग्रेस की गालीबाज महिला नेता

            चित्रा त्रिपाठी (बाएँ) और स्मृति ईरानी (दाएँ) पर आयुषी शुक्ला (बीच में) की आपत्तिजनक टिप्पणी
कांग्रेस की एक महिला नेता द्वारा सोशल मीडिया पर भाजपा की महिला नेताओं एवं महिला पत्रकारों पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गई हैं। 
कांग्रेस की नेता आयुषी शुक्ला उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर की रहने वाली हैं। उनके ‘X (ट्विटर)’ हैंडल से महिला एवं बाल विकास और अल्पसंख्यक मामलों की केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की तस्वीर लगा कर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। आयुषी शुक्ला ने ‘X’ पर स्मृति ईरानी की तस्वीर पोस्ट करते हुए कैप्शन में लिखा – “मोदी की ये क्या लगती है? जो सही बताएगा, उसे तुरंत फॉलो करूँगी।”
                                           आयुषी शुक्ला ने स्मृति ईरानी पर की आपत्तिजनक टिप्पणी

इतना ही नहीं, आयुषी शुक्ला ने ‘आज तक’ की पत्रकार चित्रा त्रिपाठी को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की। न्यूज़ एंकर चित्रा त्रिपाठी की तस्वीर लगाते हुए आयुषी शुक्ला ने लिखा, “मोदी की लैला।” इतना ही नहीं, उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा की तस्वीर लगा कर कैप्शन में उन्हें ‘मोदी का गोबर’। आयुषी शुक्ला ने ‘X’ पर अपनी कवर फोटो राहुल गाँधी के साथ लगाई हुई है। उन्होंने बायो में बता रखा है कि वो उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटी की सदस्य हैं।

साथ ही उन्होंने अपनी विचारधारा ‘नेहरूवादी’ बता रखी है। आयुषी शुक्ला ने बता रखा है कि उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से स्नातक कर रखा है। साथ ही वो उत्तर प्रदेश महिला कांग्रेस की संयोजक (कोऑर्डिनेटर) के पद पर भी हैं। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को अपने ‘सुपरहीरो’ बता रखा है। वो जुलाई 2017 से ही ट्विटर पर सक्रिय हैं। कांग्रेस की एक महिला नेता द्वारा सोशल मीडिया को माध्यम बना कर इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणियाँ किए जाने के बाद लोग यूपी पुलिस से माँग कर रहे हैं कि उन पर कार्रवाई की जाए।

                       कांग्रेस की महिला नेता आयुषी शुक्ला राहुल गाँधी को मानती हैं अपनी ‘सुपरहीरो’

आयुषी शुक्ला ने अपने ट्वीट्स वायरल होने के बाद वीडियो बना कर सफाई भी दी और माफ़ी माँगने की बजाए अपनी करतूतों को जायज ठहराया। उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ कुछ भी बोल देना आजकल अमर्यादित हो जाता है। उन्होंने संबित पत्र पर टीवी पर सोनिया गाँधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने और भाजपा पर ‘गंदे-गंदे वीडियो’ डालने का आरोप लगाया। आयुषी शुक्ला ने दावा किया कि उन्होंने ‘छोटी सी बात’ कही है। साथ ही उन्होंने ‘बोलने के अधिकार’ की बात करते हुए संविधान का रोना रोया।

                                   अंजना ओम कश्यप पर भी आयुषी शुक्ला की आपत्तिजनक टिप्पणी

इसी तरह आयुषी शुक्ला ने ‘आज तक’ की एक अन्य महिला एंकर अंजना ओम कश्यप पर भी विवादित टिप्पणी करते हुए लिखा, “ये पत्रकार नही, मोदी की दलाल हैं।” वहीं विरोध होने के बाद अब वो कह रही हैं कि भाजपा ब्राह्मण होने की वजह से उन्हें परेशान कर रही हैं। साथ ही उन्होंने ‘आज तक’ के एक अन्य पत्रकार सुधीर चौधरी के तिहाड़ जेल जाने की कामना भी की, जिन पर कर्नाटक में FIR हुई है। साथ ही उन्होंने ‘मोदी’ सरनेम पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की।

अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति सबसे बड़ा घोटाला : 2007-2008 में 22000 करोड़ रूपए: इनमें 97% मदरसा, एक मोबाइल नंबर से 22 लड़कों को स्कॉलरशिप

आखिर भाजपा का विरोध क्यों हो रहा है, उसका कारण है कि हर बीतते समय एक से बढ़कर एक घोटाला उजागर हो रहा है। पिछली सरकारें किस तरह अल्पसंख्यक छात्रों के नाम पर घोटाले कर रही थी, जिससे हर आम मुस्लिम बिल्कुल अनजान है। लेकिन छद्दम धर्म-निरपेक्षों के मकड़जाल में फंस मुसलमान भाजपा को मुस्लिम विरोधी समझ गुमराह है। ऐसे में हर मुस्लिम को इन छद्दम धर्म-निरपेक्षों से पूछना चाहिए कि उनके नाम पर किये घोटाले में कमाए रूपए कहाँ गए?  
अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। इसके बाद केंद्रीय मंत्रालय ने इस मामले की जाँच CBI को सौंप दिया है। घोटाले में सामने आया है कि फर्जी संस्थानों के नाम पर सरकार से करोड़ों रुपए लिए गए। सरकार से छात्रवृत्ति लेने वाले इन अल्पसंख्यक संस्थानों में करीब 53 प्रतिशत यानी आधे से अधिक फर्जी हैं।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा की गई एक आंतरिक जाँच में ऐसे 830 संस्थानों में गहरे भ्रष्टाचार का पता चला। इन फर्जी संस्थानों के जरिए पिछले 5 वर्षों में 144.83 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने मामले को आगे की जाँच के लिए केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) के पास भेज दिया है।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर 10 जुलाई 2023 को इस मामले में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। जाँच के तहत 34 राज्यों के 100 जिलों में पूछताछ की गई। जाँच में 1572 संस्थानों में से 830 को धोखाधड़ी में शामिल पाया गया। ये संस्थान 34 में से 21 राज्यों के हैं, जबकि बाकी राज्यों में संस्थानों की जाँच अभी भी चल रही है।

फिलहाल, अधिकारियों ने इन 830 संस्थानों से जुड़े खातों को फ्रीज करने का आदेश दिया है। मंत्रालय का कहना है कि यह घोटाला 2007-08 से ही चल रहा है। अब तक करीब 22,000 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। बीते चार साल से सालाना 2,239 करोड़ रुपए की छात्रवृत्तियाँ दी गई हैं।

सीबीआई इन फर्जी संस्थानों के उन जिला नोडल अधिकारियों की भी जाँच करेगी, जिन्होंने फर्जी संस्थानों का सत्यापन किया और अपनी अनुमोदन रिपोर्ट दी। इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मंत्रालय ने यह भी सवाल उठाया है कि बैंकों ने फर्जी आधार कार्ड और केवाईसी दस्तावेजों के साथ लाभार्थियों के लिए फर्जी खाते खोलने की अनुमति कैसे दी।

इतना ही नहीं, जिन संस्थानों का अस्तित्व ही नहीं था या जिनका परिचालन नहीं हो रहा था, ऐसे फर्जी संस्थान जाँच के बाद राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल और शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई) दोनों पर पंजीकृत होने में कामयाब रहे। इसमें भी संलिप्त अधिकारी जाँच के दायरे में रहेंगे।

राज्य के अनुसार विवरण

  • छत्तीसगढ़: जाँच में सभी 62 संस्थान फर्जी या निष्क्रिय पाए गए।
  • राजस्थान: जाँच के दौरान 128 संस्थानों में से 99 फर्जी या गैर-परिचालन वाले थे। यानी 77 प्रतिशत संस्थान फर्जी हैं।
  • असम: यहाँ के 68 प्रतिशत संस्थान फर्जी पाए गए।
  • कर्नाटक: 64 फीसदी संस्थान फर्जी पाए गए।
  • उत्तर प्रदेश: 44 फीसदी संस्थान फर्जी पाए गए।
  • पश्चिम बंगाल: 39 फीसदी संस्थान फर्जी पाए गए।

जाँच के दौरान कई खामियाँ मिलीं

  • केरल के मलप्पुरम में एक बैंक की शाखा ने 66,000 छात्रवृत्तियाँ वितरित कीं। यह छात्रवृत्ति के लिए पंजीकृत संख्या से अधिक है।
  • जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में 5,000 पंजीकृत छात्रों वाले एक कॉलेज ने 7,000 छात्रवृत्ति दी गई।
  • एक अभिभावक का मोबाइल नंबर 22 विद्यार्थी से जुड़ा था। ये सभी छात्र नौवीं कक्षा में थे।
  • एक अन्य संस्थान में छात्रावास नहीं था, लेकिन प्रत्येक छात्र ने छात्रावास छात्रवृत्ति लिया।
  • पंजाब में अल्पसंख्यक छात्रों को स्कूल में नामांकित नहीं होने के बावजूद छात्रवृत्ति मिलती थी।
  • असम में एक बैंक शाखा में कथित तौर पर 66,000 लाभार्थी सूचीबद्ध थे। जब इन लाभार्थियों का सत्यापन करने के लिए पहुँची तो एक मदरसे में टीम को धमकी दी गई।
मंत्रालय का छात्रवृत्ति कार्यक्रम से लगभग 1,80,000 संस्थान जुड़े हुए हैं। इनमें 1.75 लाख मदरसे हैं, जिनमें सिर्फ 27,000 मदरसे ही पंजीकृत हैं और छात्रवृत्ति के पात्र हैं। इसमें कक्षा 1 से लेकर उच्च शिक्षा तक के छात्र शामिल हैं। इसे शैक्षणिक वर्ष 2007-2008 में शुरू की गई थी।
अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति भले ही केंद्र सरकार देती है, लेकिन उसका सत्यापन और अन्य प्रक्रिया राज्य सरकार करती है। संस्थानाें का पंजीकरण जिला स्तर पर अल्पसंख्यक विभाग में होता है। छात्रवृत्ति के खाते स्थानीय बैंकों में खोले जाते हैं। विद्यार्थियों और संस्थानाें का सत्यापन भी राज्य सरकार का अल्पसंख्यक विभाग करता है।

राहुल गांधी की ओछी हरकत: लोकसभा में महिला सांसदों को दिया फ्लाइंग किस

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी ने आज 9 अगस्त को संसद में एक ओछी हरकत कर दी। जिसको लेकर उनकी थू-थू हो रही है। राहुल की इस हरकत से हैरान वाली कोई बात नहीं, इस कटु सच्चाई को जानने के लिए हमें मोती लाल और जवाहर लाल के इतिहास को जानना होगा। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर जारी चर्चा के बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी अपना संबोधन पूरा करने के बाद सदन से रवाना हो गए। लेकिन रवाना होने से पहले वो एक छिछोरी हरकत कर गए। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी ने संसद से बाहर जाते समय महिला सांसदों को लक्ष्य करके फ्लाइंग किस के इशारे किए। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने उनपर अभद्र इशारे करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अध्यक्ष जी एक बात पर मैं आपत्ति जाहिर करना चाहती हूं। जिनको आज मुझसे पहले बोलने का अधिकार दिया गया, उन्होंने जाते-जाते एक अभद्र लक्षण के दर्शन दिए। यह कोई अभद्र शख्स ही महिला सांसदों को फ्लाइंग किस दे सकता है। ऐसे गरिमाविहीन आचरण को इस देश के सदन में कभी नहीं देखा गया। यह उस खानदान के लक्षण हैं ये आज देश को पता चल गया।

संसद में राहुल गाँधी अपनी बात कह कर चलते बने, उनके उत्तर में स्मृति ईरानी ने क्या कहा इसे सुनने के लिए वो सदन में मौजूद नहीं थे। जहाँ राहुल गाँधी ने ‘मणिपुर में भारत माता की हत्या’ और ‘हनुमान ने लंका नहीं जलाई थी’ जैसी बातें की, वहीं स्मृति ईरानी ने उन्हें जवाब देते हुए कश्मीर में गिरिजा टिक्कू और बेंगलुरु में स्नेहलता रेड्डी के साथ हुई क्रूरता की याद दिलाई। इस दौरान स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी को महिला विरोधी भी करार दिया।

‘राहुल गाँधी महिला विरोधी हैं’: बिना नाम लिए स्मृति ईरानी ने साधा निशाना

स्मृति ईरानी ने कहा, “जिनको आज मुझसे पहले वक्तव्य देने का अधिकार दिया गया, उन्होंने जाते-जाते एक अभद्र लक्षण के दर्शन कराए। वो एक महिला विरोधी व्यक्ति हैं, जो संसद में फ़्लाइंग किस दे सकते हैं, वो भी जहाँ 6 महिला संसदें बैठी हुई हों। ऐसी गरिमा-विहीन आचरण को इस सदन में कभी नहीं देखा गया। ये उस खानदान के लक्षण हैं, ये आज सदन में देश को पता चल गया। लेकिन वो जहाँ गए हैं, वहाँ पर क्या हालात हैं?”
राहुल गाँधी संसद में अपना भाषण खत्म कर सीधे राजस्थान गए, जहाँ वो एक ट्राइबल रैली में शामिल हो रहे हैं। स्मृति ईरानी ने राजस्थान की मीडिया रिपोर्ट्स के हवाला देते हुए कहा कि वहाँ की कांग्रेस की सरकार देश की तिजोरी से पैसा लूट रही है। स्मृति ईरानी ने कहा कि इनका सरकार महिला-उत्थान से नहीं है, महिलाओं के बारे में वो क्या सोचते हैं इस बारे में उनके नेता ने जाते-जाते बता दिया है।
स्मृति ईरानी ने कहा कि कांग्रेस के नेता का सरोकार चीन से है। केंद्रीय मंत्री ने ये भी कहा कि चीन में कांग्रेस पार्टी के नेता बहुत रुचि लेते हैं। उन्होंने इस दौरान बताया कि चीन में आयोजित ’31st यूनिवर्सिटी गेम्स’ में भारत को इस बार 26 (11 स्वर्ण, 5 रजत पदक) मेडल मिले और ये रिकॉर्ड हिंदुस्तान के बच्चों ने स्थापित किया। 1959 से अब तक मात्र 18 मेडल ही मिल पाए थे। स्मृति ईरानी ने कहा कि भारत माता के टुकड़ों के लिए ताली बजाने वाले भारत की उपलब्धि पर तो ताली बजा दें।

संसद में स्मृति ईरानी का पलटवार

उन्होंने कहा कि भारत माँ की हत्या पर कांग्रेस ने ताली पीट कर बता दिया है कि गद्दारी किसके मन में है। उन्होंने कहा – मणिपुर खंडित नहीं है, देश का अंग है। उन्होंने पूछा कि कांग्रेस अपने गठबंधन साथी डीएमके के हटा द्वारा भारत पर दिए बयान का खंडन करे, कश्मीर पर रेफरेंडम की बात करने वाले कांग्रेस नेता की निंदा करें। उन्होंने कहा कि आप भारत नहीं हैं, क्योंकि आप भ्रष्टाचार और अयोग्यता का प्रतीक हैं। स्मृति ईरानी के अनुसार, यूपीए के नेता ने तमिलनाडु में भारत विरोधी बयान दिया।
उन्होंने याद दिलाया कि कश्मीर में राहुल गाँधी अपने परिजनों के साथ बर्फ खेल रहे थे, ये इसीलिए संभव हुआ क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद-370 को निरस्त किया। उन्होंने कहा कि इसी की वजह से कश्मीर की बेटियों को दहेज़ के लिए प्रताड़ित किया जाता था तो उन्हें कानून का सहारा नहीं मिलता था। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बाहर ब्याही जाने पर उन बेटियों को पैतृक संपत्ति पर हक़ नहीं मिलता था। 14 से कम उम्र की बच्चियों का विवाह होता था तो उन्हें कानून का संरक्षण नहीं मिलता था।
स्मृति ईरानी ने इस दौरान कश्मीर में पंडितों पर अत्याचार और गिरिजा टिक्कू के साथ हुई वारदात को भी याद किया। इस दौरान राहुल गाँधी सदन से निकल कर राजस्थान से निकल गए। स्मृति ईरानी ने याद दिलाया कि कैसे कश्मीर में गिरिजा टिक्कू को आड़ी से काट डाला गया था, राजस्थान के भीलवाड़ा में बच्ची के साथ गैंगरेप कर के उसे काटा गया और भट्ठी में डाल दिया गया। उन्होंने पूछा कि आज जो जोर-चोर से चिल्ला रहे हैं, तब उन्होंने न्याय की गुहार नहीं लगाई जब पश्चिम बंगाल में 60 साल की महिला का गैंगरेप हुआ।