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असम : आखिर क्यों बदरुद्दीन अजमल 700 मदरसे खुलवाने की चुनौती दे रहे हैं? मदरसे खुलवाने के पीछे क्या कोई गहरा षड़यंत्र है? वीडियो : Nazia-Arzoo ने मिलकर मुल्ले-मौलवियों को जमकर लताड़ा, सुनने के बाद कट्टरपंथी कांप जाएंगे !

                          लोकसभा चुनाव जीतने के बाद असम में 700 मदरसे खुलवाएँगे बदरुद्दीन अजमल 
अपने विवादित बयानों के लिए कुख्यात ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल का एक और बयान सामने आया है। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को 700 नए मदरसे खोलने की चुनौती दे डाली है। इन मदरसों को लोकसभा चुनाव 2024 में जीत के बाद खोलने का चैलेंज दिया गया है। बदरुद्दीन अजमल ने यह बयान शनिवार (20 अप्रैल 2024) को नगाँव में एक चुनावी रैली के दौरान दिया।

गैर-मुस्लिमों को धोखा देने पार्टी का नाम रखा ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, लेकिन काम कट्टरपंथी। आखिर मदरसे ही क्यों खुलवाना चाहते हैं? क्या इस्लाम घर के बड़े नहीं सीखा सकते? 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल शनिवार को नगाँव से अपने उम्मीदवार अमीनुल इस्लाम का प्रचार कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने लोगों के एक जमावड़े को सम्बोधित किया। सामने मौजूद भीड़ को देख कर बदरुद्दीन अजमल जोश में आ गए। इसी जोश में उन्होंने असम के मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा: “लोकसभा चुनाव के बाद असम के करीमगंज और नगाँव के AIUDF सांसदों के साथ हम 700 नए मदरसे खोलेंगे। हिमंत बिस्व सरमा सुनिए, अपनी डायरी में लिखिए, बदरुद्दीन अजमल संसद में आ रहे हैं। 700 मदरसे हम तीनों भाई खोलेंगे।”

कुछ ही देर बाद बदरुद्दीन अजमल के स्थानीय प्रत्याशी अमीनुल इस्लाम ने भी चुनावी जनसभा को सम्बोधित किया। अमीनुल ने कॉन्ग्रेस प्रत्याशी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कॉन्ग्रेस को झूठी पार्टी करार दिया है। AIUDF प्रत्याशी ने कॉन्ग्रेस प्रत्याशी से उनके द्वारा मुस्लिमों के हितों में किए गए कामों को बताने के लिए कहा।

बदरुद्दीन अजमल ने भी भाजपा के साथ कॉन्ग्रेस को निशाने पर लिया। उन्होंने कॉन्ग्रेस का मुस्लिमों के प्रति झुकाव और लगाव को महज दिखावा करार दिया। हालाँकि कॉन्ग्रेस प्रत्याशी पियूष हजारिका ने बदरूदीन अजमल पर पलटवार किया है। उन्होंने अजमल को भारतीय जनता पार्टी का समर्थक बताया है।

पियूष के मुताबिक बदरुद्दीन अजमल बीजेपी को फायदा पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। बताते चलें कि असम में लोकसभा की कुल 14 सीटें हैं। इस पर 19 और 26 अप्रैल के अलावा 7 मई को वोट डाले जाएँगे। यहाँ भाजपा और INDI गठबंधन में सीधा मुकाबला है। बदरुद्दीन अजमल की पार्टी यहाँ कुछ सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती है।

ज्ञात हो कि असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की सरकार ने मदरसों पर सख्त कार्रवाई करते हुए सैकड़ों की संख्या में उन्हें बंद करवाया। इन मदरसों की जगह असम राज्य सरकार ने अंग्रेजी स्कूल खोले ताकि बच्चों को आधुनिक शिक्षा मिल सके।

IAS-IPS, डाॅक्टर… कुछ भी बने मुस्लिम औरत पर रहे हिजाब में ही: खुले बाल को बताया ‘शैतान की रस्सी’, मेकअप लगाने से भी मना किया: सांसद बदरुद्दीन अजमल

असम के मुस्लिम नेता और सांसद बदरुद्दीन अजमल ने मुस्लिम महिलाओं के पहनावे को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अच्छे पेशों वाली महिलाओं को हिजाब पहनना चाहिए वरना उन्हें कोई मुस्लिम के तौर पर नहीं पहचानेगा। उनके इस बयान पर विवाद हो गया है।
पिछले वर्ष मार्च 16, 2023 को शीर्षक "महिला द्वारा खुले बाल रखना शोक और अशुद्धि की प्रतीक",(देखिए नीचे दिए लिंक को) जिसमे हिन्दू संस्कृति में महिलाओं द्वारा केश(बाल) का खुले रखने के दुष्प्रभाव पर रौशनी डालने का प्रयास किया, लेकिन उसी बात को बदरुद्दीन द्वारा इस्लामिक तरीके से बताया। यानि कहने का तात्पर्य यह कि हिन्दू संस्कृति जिस बात को सत(सत्य) युग से निर्देश दिए जा रहे है।   

AIUDF सुप्रीमो बदरुद्दीन ने यह बयान असम के करीमगंज में एक जनसभा में दिया। उन्होंने कहा कि अच्छे पेशे में लगी महिलाएँ जैसे कि IAS, IPS और डॉक्टरों के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य किया जाना चाहिए। इससे उनकी मुस्लिम पहचान का पता लगेगा।

उन्होंने कहा, “अगर मुस्लिम महिलाएँ अपने बाल नहीं ढकेंगी या हिजाब नहीं पहनेंगी तो उन्हें मुस्लिम के तौर पर कैसे पहचाना जाएगा?”

उन्होंने बताया कि हिजाब मुस्लिम महिलाओं के लिए एक विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि खुले बाल शैतान की रस्सी होते हैं और महिलाओं का मेकअप लगाना शैतानों वाला काम है।

बदरुद्दीन अजमल ने कहा, “मैं जब बाहर जाता हूँ तो देखता हूँ कि मुस्लिम लडकियाँ हिजाब पहने हुए होती हैं और सर नीचे की तरफ करके आँखे झुका कर चलती हैं। असम में मुस्लिम लड़कियाँ ऐसा नहीं करती, सर के बाल छुपा के रखना इस्लाम में है।”

अजमल ने करीमगंज में एक मस्जिद और कब्रिस्तान का शिलान्यास करने के दौरान यह विवादित बयान दिया। इससे पहले उन्होंने एक बयान में कहा था, “ज्यादातर मुसलमान आपराधिक प्रवृति के पृष्ठभूमि के क्यों हैं? डकैती, बलात्कार, लूट जैसे अपराधों में मुसलमान नंबर वन क्यों हैं? हम जेल जाने में नंबर वन क्यों हैं? क्योंकि ज्यादातर मुस्लिम पढ़ाई नहीं करना चाहते हैं।”

अवलोकन करें:-

महिला द्वारा खुले बाल रखना शोक और अशुद्धि की प्रतीक

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महिला द्वारा खुले बाल रखना शोक और अशुद्धि की प्रतीक
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इस मामले में इंडिया टुडे से बातचीत में बदरुद्दीन अजमल ने बाद में अपनी सफाई पेश की थी। उन्होंने कहा था, “मैंने दुनिया भर के मुसलमानों में शिक्षा की कमी देखी है। मुझे बहुत दुख है कि मुस्लिम पढ़ाई नहीं करते, उच्च शिक्षा के लिए नहीं जाते। यहाँ तक कि मैट्रिक की परीक्षा तक पास नहीं कर पाते। इसीलिए वो अपराध की दुनिया में निकल जाते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मैं चाहता हूँ कि मुस्लिम बच्चे ज्यादा से ज्यादा पढ़ाई करें और अच्छे रास्ते पर चलें।”

‘मुस्लिम नहीं देगा हर बार कुर्बानी’ : राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा से पहले ‘छद्दम सेकुलर’ नेता लगा रहे कट्टरपंथ की आग

                                              राम मंदिर से पहले मुस्लिम नताओं का जहर
अयोध्या में होने वाले राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर जहाँ देश भर में खुशी का माहौल है। हर समुदाय उल्लास में डूबा है। मुस्लिम महिलाएँ तक भगवा वस्त्र पहन पहनकर अयोध्या के लिए रवाना हो रही हैं। ऐसे समय में खुद को सेकुलर बताने वाले कट्टरपंथी नेताओं ने भड़काऊ बयानबाजी की है। किसी ने मुस्लिमों को बाबरी के नाम पर भड़काया है तो किसी ने उन्हें राम मंदिर के नाम पर डराया है।

इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा ने राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर बार मुसलमान कुर्बानी नहीं देगा। उन्होंने कहा, “हमसे हमारी मस्जिद छीनी जा रही है। इस बात को हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। ये बात किसी से छिपी नहीं है कि भाजपा को हमारी अजान से भी दिक्कत है।”

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, “सुप्रीम कोर्ट का फैसला पहले से तय था, जिसने ये निर्णय दिया उसे राज्यसभा भेज दिया गया।”

इसी तरह असम के बारपेटा के ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल ने भी मुस्लिम युवाओं में डर फैलाते हुए कहा कि 20 से 25 जनवरी तक सारे मुसलमानों को अपने घर में रहना होगा।

उन्होंने कहा, “हमें सतर्क रहना होगा। मुसलमानों को 20 से 25 जनवरी तक यात्रा करने से बचना चाहिए। पूरी दुनिया राम जन्मभूमि में रामलला की मूर्ति स्थापित होते देखेगी। लाखों लोग बसों, ट्रेनों, हवाई जहाज आदि से यात्रा करेंगे। शांति बनाए रखनी होगी।” अजमल ने कहा, “इस दौरान हमें यात्रा करने से बचना होगा और घर ही रहना होगा। भाजपा मुसलमानों की सबसे बड़ी दुश्मन है। यह हमारे जीवन, आस्था, मस्जिदों, इस्लामी कानूनों और अजान की दुश्मन है।”

आखिर कट्टरपंथी और छद्दम सेक्युलरिस्ट्स कब तक इतिहास की सच्चाई से मुंह मोड़ते रहेंगे? आखिर क्यों बेगुनाहों को बलि का बकरा बना रहे हो? ये लोग भूल रहे हैं कि काशी, मथुरा और कम से कम 3/4 विवादित स्थलों के हिन्दू धर्म में वापस आने पर कोई मुसलमान इनकी भड़काऊ बातों में आना वाला नहीं। इनकी दुकानें बंद होने के कगार पर पहुँच रही है। ये बदलते कालचक्र को पढ़ने एवं समझने में या तो असमर्थ हैं या फिर धमकियों से सच्चाई को बाहर आने से रोकने का असफल प्रयास कर रहे हैं। आखिर सच्चाई सामने आने से क्यों डर रहे हैं? इन्हे यह भी नहीं भूलना चाहिए कि आज जब इनकी मस्जिदें अथवा दरगाह अपने असली रूप यानि मंदिर में परिवर्तित होने का दर्द हो रहा है, हिन्दुओं से पूछो, कितने वर्षों से अपने सीने में दबाए बैठे थे। सरकार को उन सभी इतिहासकारों को ब्लैकलिस्ट करना चाहिए जिन्होंने चंद चांदी के सिक्कों के लालच में सच्चाई को छुपाकर गलत इतिहास लिखा।  

जहाँ ये नेता राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा पर माहौल बिगाड़ने के प्रयास में लगे हैं। वहीं काशी की मुस्लिम महिलाएँ अयोध्या पहुँच रही हैं। कल ही खबर आई थी कि नाजनीन अंसारी नाम की महिला ने कहा कि धर्म परिवर्तन कर लेने से पुरखे नहीं बदल जाते। भगवान श्रीराम ही मुस्लिमों के पूर्वज हैं। नाजनीन ने कहा है कि वो मुस्लिमों से अपील करेंगी कि वो लोग भी राम ज्योति प्रजवलित करें।