Showing posts with label #Ram Mandir. Show all posts
Showing posts with label #Ram Mandir. Show all posts

राम मंदिर में बुलडोजर क्यों नहीं चला? अब डिंपल यादव ने उगला जहर; मुलायम परिवार की आँखों में खटक रहा राम मंदिर, ससुर ने कारसेवकों का कराया नरसंहार-पति ने चंदाचोरी पर फैलाई नफरत


अपने मुस्लिम वोटबैंक को खुश करने अयोध्या में राममन्दिर का समाजवादी पार्टी शुरू से विरोध करती रही है। इतना ही नहीं मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में रहने वाले हिन्दू 11 बजे के बाद होली तक नहीं खेल सकते थे। 84 कोसी परिक्रमा पर पाबन्दी आदि आदि इतना सबकुछ होने के बाद भी समझ में नहीं आता हिन्दू क्यों समाजवादी पार्टी को वोट देता है? समाजवादी पार्टी में जितने भी हिन्दू हैं क्या वह कालनेमि हिन्दू हैं? यदि नहीं तो खुलकर डिम्पल ने जो राममन्दिर के विरुद्ध जहर उगला है उसका विरोध करो। अगर दुर्भाग्यवश उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बन गयी PDA यानि Phir Darayega Ali हरकत में आ जाएगा।   

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव इन दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा सुधार और नीट (NEET) पेपर लीक के मुद्दे को लेकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरी हुई हैं। जंतर-मंतर पहुँचकर डिंपल यादव ने वांगचुक का समर्थन तो किया, लेकिन इस दौरान मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी मामले को लेकर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर तीखा हमला बोला। डिंपल यादव ने राम मंदिर और बुलडोजर कार्रवाई को लेकर एक ऐसा विवादित बयान दे दिया है, जिसने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक की सियासत में भूचाल ला दिया है।

राम मंदिर पर डिंपल का ‘बुलडोजर’ राग और पुराना इतिहास

डिंपल यादव ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि देश में इस समय ‘बुलडोजर सरकार’ चल रही है, जो छात्रों के भविष्य पर बुलडोजर चला रही है। उन्होंने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी मामले का जिक्र करते हुए सवाल उठाया। डिंपल ने कहा, “जब राम मंदिर में इतनी बड़ी चोरी हो गई तो वहाँ पर बुलडोजर थक गया है। तो आखिर बुलडोजर क्यों थम गया, सवाल इस बात का है।”

इस बयान के बाद अब डिंपल यादव खुद चौतरफा घिर गई हैं। आलोचक और राजनीतिक विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि क्या एक कर्मचारी पर लगे कथित चोरी के आरोप के आधार पर पवित्र राम मंदिर की तुलना किसी अवैध निर्माण से करना जरा भी उचित है? इतिहास गवाह है कि मुलायम सिंह यादव के समय में अयोध्या में कारसेवकों पर गोलियाँ चलवाई गई थीं, जिसे लोग नरसंहार तक कहते हैं।

इसके बाद अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चंदे को लेकर बयानबाजी की थी। अब डिंपल यादव के इस बयान के बाद लोग पूछ रहे हैं कि क्या डिंपल भी राम मंदिर पर बुलडोजर चलवाकर वहाँ पुराना बाबरी ढांचा वापस देखना चाहती हैं? पूरा यादव परिवार ही राम विद्रोही बनकर सामने आ रहा है।

अखिलेश का पुराना बयान और पूरा परिवार घेरे में

अखिलेश यादव ने भी पहले राम मंदिर के संदर्भ में एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि हमें सांचा नहीं, बल्कि ‘ढांचा बदलना’ होगा। उनके इस पुराने बयान को डिंपल यादव के ताजा बयान से जोड़कर देखा जा रहा है। देश जानता है कि पूरा मुलायम परिवार शुरू से ही राम विरोधी रहा है और डिंपल का यह बयान उसी सोच को आगे बढ़ाता है। अब जंतर-मंतर के बहाने इनके अंदर की कड़वाहट भी बाहर आ रही है। मुद्दा पेपर लीक मामले का है, लेकिन निशाना राम मंदिर पर आकर रूक जाता है।

अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर का निर्माण होने के बाद से ही यह मंदिर मुलायम परिवार की आँखों में और ज्यादा खटकने लगा है। राम मंदिर में सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़े एक कर्मचारी पर चोरी का आरोप क्या लगा, डिंपल यादव ने सीधे पूरे मंदिर परिसर पर बुलडोजर चलाने की माँग जैसी भाषा का इस्तेमाल कर दिया। जनता के बीच अब यह सवाल तेजी से गूँज रहा है कि क्या एक कथित चोरी के बहाने पूरे राम मंदिर को निशाना बनाना और वहाँ बुलडोजर की बात करना तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा नहीं है?

सपा सांसदों का जमावड़ा

इस पूरे सियासी घमासान की शुरुआत सोनम वांगचुक के धरने से जुड़ी हुई है। सोनम वांगचुक शिक्षा में बड़े सुधार, नीट पेपर लीक मामले में सख्त एक्शन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर कड़े धरने पर बैठे हैं। वे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले यह बड़ा आंदोलन चला रहे हैं। इतने दिनों से लगातार अनशन पर रहने के कारण वांगचुक की तबीयत काफी बिगड़ चुकी है और शनिवार (18 जुलाई) सुबह ही अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य के बीच समाजवादी पार्टी के सांसदों का एक बड़ा दल लगातार जंतर-मंतर पहुँच रहा है। इससे पहले सपा सांसद प्रिया सरोज भी वांगचुक के अनशन स्थल पर पहुँची थीं और उन्होंने संसद से लेकर सड़क तक उनके मुद्दों को उठाने का वादा किया था। खुद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोनम वांगचुक से अपना अनशन समाप्त करने की अपील की थी। लेकिन अब इस आंदोलन के मंच का इस्तेमाल राजनीतिक बयानों के लिए होने लगा है।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती करने वाले 23 कर्मचारियों ने दिया सामूहिक इस्तीफा


अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के बीच दान की गणना करने वाले 23 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। कर्मचारियों के काम पर नहीं पहुँचने के कारण गुरुवार (9 जुलाई 2026) को केवल 13 गणनाकर्मियों से चढ़ावे की गिनती कराई गई। अचानक हुए इस घटनाक्रम से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, भारतीय स्टेट बैंक और कर्मचारियों की व्यवस्था करने वाली एजेंसी के सामने परेशानी खड़ी हो गई है।

हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्तीफा देने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि पहले मंदिर में चढ़ावे की गणना दो शिफ्टों में होती थी। प्रत्येक कर्मचारी से करीब छह घंटे काम लिया जाता था। चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद कई कर्मचारियों को हटा दिया गया और सुरक्षा के मद्देनजर दोनों शिफ्टों का काम एक ही शिफ्ट में कर दिया गया। इसके बाद कर्मचारियों की ड्यूटी सुबह नौ बजे से शाम छह बजे तक, यानी नौ घंटे कर दी गई।

कर्मचारी का दावा है कि पहले सभी को 14,755 रुपए मासिक वेतन मिलता था लेकिन बाद में इसे घटाकर अलग-अलग कर दिया गया। किसी कर्मचारी को 8,000 रुपए तो किसी को 11,000 रुपए प्रतिमाह दिए जाने लगे। महीने में मिलने वाली छुट्टियों की संख्या भी कम कर दी गई है।

जुलाई 8 को शाम काम समाप्त होने के बाद कर्मचारियों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया। उन्होंने काम के घंटे, वेतन और छुट्टियों की व्यवस्था पहले की तरह करने की माँग रखी। एसबीआई की तुलसी उद्यान शाखा के अधिकारियों और सैनिक सिक्योरिटी के सुपरवाइजर जयराम यादव से भी शिकायत की गई लेकिन माँगें स्वीकार नहीं हुईं। इसके बाद 23 कर्मचारियों ने हस्ताक्षरयुक्त सामूहिक इस्तीफा और मांगपत्र सौंप दिया।

जुलाई 9 की सुबह इस्तीफा देने वाला कोई कर्मचारी काम पर नहीं पहुँचा तो बैंक, ट्रस्ट और एजेंसी के अधिकारी सक्रिय हो गए। बैंक के अनुसार केवल 13 कर्मचारियों ने गणना की जिससे काम प्रभावित हुआ है। नए कर्मचारियों की भर्ती की तैयारी है लेकिन चोरी के मामले के बाद पूरी तरह सत्यापन के बिना किसी को नियुक्त नहीं किया जा सकता।

वहीं, बैंक के एक कर्मचारी ने दावा किया कि कर्मचारियों को हटाया गया है और अब इतने कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं है। इसी बीच ट्रस्ट के कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन ने अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास से मुलाकात की। करीब एक घंटे चली इस बैठक को भी इस्तीफा प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।

मीडिया और विपक्ष बेनकाब: सोने की रामचरितमानस, चाँदी की ईंटें, हार और काकभुशुंडि… राम मंदिर में ‘चोरी’ के दावे के बाद ट्रस्ट ने दिया पाई-पाई का हिसाब, कोषाध्यक्ष बोले- 2800 चीजें पूरी तरह सुरक्षित

              राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद ट्रस्ट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाया सबूत (फोटो साभार : Aajtak)
राममन्दिर चढ़ावे की चोरी का जब से मुद्दा उठा है मीडिया विपक्ष द्वारा प्रायोजित खबरे प्रसारित कर सनातन विरोधी एजेंडा चलाकर अपनी TRP  बढ़ाने में लगी रही। लेकिन कल(जुलाई 6) को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सबको बेनकाब कर दिया है। अभी जितनी परतें खुलेंगी सारे राम विरोधी चारों खाने चित होंगे। लेकिन इतनी मुस्तैदी से अजमेर शरीफ में हुए घोटाले पर चर्चा करने किसी ने माँ का दूध नहीं पिया। सिर्फ अजमेर शरीफ ही नहीं जितनी भी दरगाहें और मस्जिदें कोई ऐसी नहीं जहाँ घोटाला नहीं हो। 
 
अयोध्या के राम मंदिर में दान का सामान गायब होने के आरोपों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने करारा जवाब दिया है। ट्रस्ट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में 5 करोड़ रुपए की सोने की रामचरितमानस, चाँदी की ईंटें और भगवान के चरण चिन्ह सबके सामने रख दिए।

कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने साफ कहा कि दान का एक-एक सामान पूरी तरह सुरक्षित है और चोरी की बातें झूठी हैं। दान में मिली सभी 2800 वस्तुओं का रजिस्टर गोविंद देव जी ने दिखाया। पूर्व IAS अधिकारी एस लक्ष्मीनारायणन ने आरोप लगाया था कि उनकी दी हुई सोने की रामचरितमानस गायब है।

इसकी कीमत करीब 5 करोड़ रुपए है। ट्रस्ट ने इस विवाद को खत्म करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस कीमती रामचरितमानस को सबके सामने रख दिया। साथ ही भगवान के सोने के चरण चिन्ह, हार और काकभुशुंडि को भी मीडिया को दिखाया गया।

SIT जाँच में सच आया सामने

सोशल मीडिया पर अफवाहें उड़ने के बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने इस मामले की जाँच की। जाँच की शुरुआती रिपोर्ट में सामने आया कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई करीब 38 किलो और 22.5 किलो चाँदी की ईंटें ट्रस्ट के रिकॉर्ड में बिल्कुल सही सलामत दर्ज हैं।

जाँच रिपोर्ट के मुताबिक, दान में मिली चाँदी की ईंटों को बाद में गला दिया गया था। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए ‘सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिन्टिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ भेजा गया था। इसका पूरा कानूनी रिकॉर्ड मौजूद है। इसी तरह मुंबई के कारोबारी और सिंधी समाज द्वारा दी गई 200 किलो चाँदी भी ट्रस्ट के पास पूरी तरह सुरक्षित पाई गई है।

चंपत राय का इस्तीफा मंजूर, नए चेहरे शामिल

राम मंदिर परिसर में करीब 3 घंटे तक ट्रस्ट की अहम बैठक चली। इस बैठक में महामंत्री चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। अब कृष्ण मोहन को अंतरिम महामंत्री बनाया गया है। बैठक में कुल 9 में से 7 स्थाई सदस्य मौजूद थे, लेकिन इसमें चंपत राय और अनिल मिश्रा शामिल नहीं हुए।

ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को बुलाई गई है। तब तक SIT की फाइनल रिपोर्ट भी आ जाएगी। इस अगली बैठक में मंदिर के लिए नए प्रशासनिक अधिकारियों, नए पदाधिकारियों और कुछ नए न्यासियों की नियुक्ति पर आखिरी फैसला लिया जाएगा।

अयोध्या राममन्दिर चढ़ावा : चोरों के घर बाबा के बुलडोज़र तैयार : 20000 रूपए की नौकरी, राम मंदिर में चोरी… लवकुश ने चंदे के पैसों से खड़ा कर दिया 1.5 करोड़ रूपए का आलीशान महल

     मंदिर से चंदा चोरी करके लवकुश ने बनाया करोड़ों का महल, अब चलेगा बुलडोजर (फोटो साभार : X_@Bhupend29375158)
प्रभु श्रीराम के चढ़ावे की चोरी करने वालों को यह सोंचना था कि उत्तर प्रदेश में अब मुलायम सिंह/अखिलेश यादव की नहीं योगी आदित्यनाथ की सरकार है। जहां अपराध भी जितनी मुस्तैदी से होता है उसी मुस्तैदी से योगी का बुलडोज़र भी हरकत में आने को तड़पने लगते हैं। चोर खेल तो खेल गए लेकिन प्रभु श्रीराम के प्रकोप से नहीं बच सकते। प्रभु ने सैकड़ों वर्ष संघर्ष किया। अब उनको भव्य स्थान मिलने पर जो चढ़ावा आया उसमे चोरी। कोई चोर और इनके आका किसी भूल में नहीं रहे। प्रभु जब अपने आशीर्वाद से देते हैं तो झोलियां छोटी पड़ जाती हैं, लेकिन छल से उनके भंडारे को लूटने वालों(किसी बीमारी, बेटी की शादी या फिर किसी असहाय स्थित आदि में कोई सहायता नहीं मिलने पर स्थिति ठीक होने पर वापस करने की शर्त पर क्षमा) को क्षमा नहीं दंड देते हैं। 

चोरों को 80 के दशक में संजीव कुमार की बहुचर्चित फिल्म "यही है जिन्दगी" में घर के मन्दिर से शर्त के साथ चोरी करने पर प्रभु किस रूप में वापस लेते हैं प्राणी को पता तक नहीं होता। दूसरे, आज सनातन विरोधियों की क्या हालत हो रही है, उसे देख कर भी अगर किसी की आंखें नहीं खुलती उस हालत में कोई कुछ नहीं कर सकता।       

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोपित लवकुश मिश्रा पर अब प्रशासन का बड़ा हंटर चलने वाला है। लवकुश मिश्रा की पत्नी के नाम पर बन रहे एक करोड़ से ज्यादा के आलीशान मकान को अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी ने ढहाने को नोटिस थमा दिया है।

परिवार के पास जवाब देने के लिए सिर्फ एक हफ्ते का समय मिला है, वरना मकान पर सीधे बुलडोजर चला दिया जाएगा। राम मंदिर में हुए इस महा-घोटाले के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अंदर भी आपसी लड़ाई शुरू हो गई है। ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज ने खुलकर इस पर नाराजगी जताई है।

महंत दिनेंद्र ने इसके लिए सीधे तौर पर ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी गोपाल राव को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गोपाल राव राम परंपरा को नहीं मानते हैं और उन्हीं की लापरवाही के कारण इतनी बड़ी चोरी हुई।

20 हजार की नौकरी और डेढ़ करोड़ का निवेश

चोरी के आरोपित लवकुश मिश्रा की असलियत देखकर हर कोई हैरान है। वह महज 20 हजार रुपए की नौकरी करता था। लेकिन उसने अयोध्या के शहादतगंज इलाके में जयपुरिया स्कूल के पास करीब डेढ़ करोड़ रुपए का निवेश कर डाला। उसने अक्टूबर 2025 में अपनी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर 25 लाख रुपए की जमीन खरीदी थी। इसके बाद उसने वहाँ बड़ी तेजी से आलीशान मकान बनवाना शुरू कर दिया।

पड़ोसियों के मुताबिक लवकुश इस मकान को बनाने में अब तक 80 से 90 लाख रुपए पानी की तरह बहा चुका है। यह तीन मंजिला मकान अगले 3-4 महीनों में बनकर तैयार होने वाला था। इस मकान के पहले फ्लोर पर एक बड़ा किचन, चार कमरे और बकायदा लिफ्ट लगाने की जगह छोड़ी गई थी। दूसरे फ्लोर पर पाँच कमरे बनाए जा रहे थे और तीसरे फ्लोर को भी खड़ा करने की पूरी तैयारी थी।

पुलिस रेड के बाद से पूरा परिवार फरार

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का खुलासा होने के बाद पुलिस ने लवकुश के घर पर छापेमारी की थी। पुलिस ने वहाँ से 14 लाख 25 हजार रुपए कैश बरामद किए थे। लवकुश की गिरफ्तारी होते ही उसका पूरा परिवार घर पर ताला लगाकर फरार हो गया है। फिलहाल वहाँ चल रहा निर्माण कार्य पूरी तरह से बंद है और प्रशासन अब उसकी पूरी संपत्ति की कुंडली खंगाल रहा है।

श्रद्धालुओं का दान और सिस्टम के भीतर सेंध पर शोर मचाने को क्या मस्जिदों और दरगाहों में घोटाला नहीं दिखता?

 
मीडिया को अपनी TRP की चिंता तो नेताओं को अपने वोटबैंक की। पुरुषोत्तम श्रीराम मन्दिर में चढ़ावे में हुई चोरी पर मीडिया और विपक्ष ने फर्श से लेकर अर्श तक को सर पर उठा रखा है। इनमें से कोई ईमानदारी से बताए क्या किसी मजहबी जगह पर घोटाले नहीं। दिल्ली के ही एक स्थानीय मुस्लिम ने कई बार मस्जिदों और दरगाहों में हो रहे घोटाले को सरकार और वक़्फ़ बोर्ड के सामने लाने की कोशिश की जबकि वक़्फ़ बोर्ड तो क्या सभी जानते हैं लेकिन किसी की हिम्मत नहीं। राममन्दिर की तरह जिस दिन दूसरे मजहबों पर हाथ डाला सबकी आंखें फटी रह जाएँगी। चोरी चोरी ही है चाहे वह मंदिर में हो या मस्जिद में।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और हैंडलिंग में कथित गड़बड़ी का मामला अब जाँच के सबसे अहम दौर में पहुँच गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर इस मामले में FIR दर्ज हुई है। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में अब तक 8 आरोपितों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि मंदिर में आने वाले दान की गिनती, रखरखाव और उससे जुड़ी व्यवस्था में बड़े स्तर पर अनियमितताएँ हुईं।

यह मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद यूपी सरकार ने 13 जून को SIT का गठन किया। SIT ने 23 जून को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी गृह संजय प्रसाद को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। इसी रिपोर्ट के दो दिन बाद कार्रवाई तेज हुई और मंदिर से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपितों में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। इस रिपोर्ट में जानेंगे कि ये 8 लोग कौन हैं इन पर क्या आरोप हैं।

                                                            FIR की कॉपी का एक हिस्सा

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव इस पूरे विवाद का सबसे चर्चित चेहरा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पूर्व ड्राइवर बताया जाता है और VHP के कारसेवकपुरम से भी जुड़ा रहा है। बताया गया है कि मंदिर की व्यवस्थाओं में उसका हस्तक्षेप रहता था और दानपात्रों की निगरानी से लेकर उन्हें बेसमेंट तक पहुँचाने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका थी।

आरोप है कि दानपात्रों की चाबियाँ भी उसी के पास रहती थीं और ट्रस्ट के लोगों से करीबी होने के कारण वह मनमाने तरीके से काम करता था। FIR और रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी शुरुआती चरण में चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी हुई और उससे अयोध्या व आसपास के जिलों में संपत्तियाँ बनाने के आरोप लगे। हालाँकि, टिन्नू यादव ने कैश काउंटिंग में अपनी भूमिका से इनकार किया है और आरोपों के पीछे कुछ ‘जलने वाले लोगों‘ को जिम्मेदार बताया है।

रामशंकर मिश्रा

रामशंकर मिश्रा भी दान की रकम गिनने वाली टीम से जुड़े बताए गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन पर दूसरे कर्मचारियों के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप है। यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने बेटे अनुकल्प मिश्रा और दामाद लवकुश मिश्रा को भी चढ़ावा गिनने के काम में लगवाया।

पुलिस के हवाले से आई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि रामशंकर मिश्रा अन्य आरोपितों के साथ मिलकर दान की रकम में कथित हेराफेरी करते थे और कैश सॉर्टिंग प्रक्रिया के दौरान CCTV फुटेज में भी दिखे। जाँच एजेंसियों का दावा है कि उन्होंने तय वित्तीय प्रक्रिया को दरकिनार करने में भूमिका निभाई और लंबे समय तक कथित गड़बड़ी को आसान बनाया।

अनुकल्प मिश्रा

अनुकल्प मिश्रा, रामशंकर मिश्र का बेटा है और वह भी दान की रकम गिनने और संभालने की प्रक्रिया में शामिल था। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह अयोध्या के मिल्कीपुर क्षेत्र के बसावन गाँव का निवासी है। उसका संबंध ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा से भी बताया गया है।

अनुकल्प की ड्यूटी चढ़ावा गिनने के काम में लगती थी। जाँच एजेंसियों का आरोप है कि कैश काउंटिंग के दौरान रकम में कथित हेराफेरी की गई और अनुकल्प के घर से चोरी की रकम बरामद होने का दावा भी किया गया है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि CCTV फुटेज और बरामदगी के आधार पर उसकी भूमिका की जाँच की जा रही है।

लवकुश मिश्रा

लवकुश मिश्रा भी दान की रकम गिनने वाली टीम का हिस्सा था। आरोप है कि चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी के बाद उसके निपटान यानी ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी लवकुश पर थी। कहा गया है कि उसने मंदिर से चोरी कर करोड़ों रुपए की संपत्ति बनाई है।

शुरुआती जाँच में उसके घर से रकम बरामद होने के दावे सामने आए थे। कुछ रिपोर्ट्स में उसके घर से करीब 12 लाख रुपए कैश मिलने की बात कही गई है। जाँच एजेंसियाँ इस रकम के स्रोत की जाँच कर रही हैं और आरोप है कि वह अनुकल्प मिश्रा के साथ मिलकर दान की रकम की हेराफेरी में सक्रिय रूप से शामिल था।

अविनाश शुक्ला

अविनाश शुक्ला को मंदिर की व्यवस्था और दान की रकम से जुड़ी प्रक्रिया में शामिल व्यक्ति बताया गया है। रिपोर्ट्स में उसे मंदिर का अटेंडेंट या काउंटिंग टीम से जुड़ा सदस्य बताया गया है। आरोप है कि वह दान की रकम को सुरक्षित तरीके से काउंटिंग रूम तक पहुँचाने और गिनती की प्रक्रिया में शामिल था।

पुलिस सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि वह उस कथित सिंडिकेट का अहम सदस्य था, जिस पर चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी का आरोप है। उसके बैंक खाते से करीब 5 लाख रुपए बरामद होने की चर्चा भी रिपोर्ट्स में सामने आई है। उस पर दान की रकम के कथित दुरुपयोग और उससे संपत्ति बनाने के आरोप लगाए गए हैं।

मनीष कुमार यादव

मनीष कुमार यादव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का भतीजा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह टिन्नू यादव के छोटे भाई बलराम यादव का बेटा है। पुलिस के हवाले से कहा गया है कि मनीष मंदिर में दान की रकम गिनने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल था।

रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उसके घर से भी चोरी की रकम बरामद हुई थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान उसके घर से करीब 36 लाख रुपए नकद मिलने का दावा किया गया है। जाँच एजेंसियाँ अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह रकम कहाँ से आई और इसका संबंध कथित गबन से किस तरह जुड़ता है।

सुभाष चंद्र श्रीवास्तव

सुभाष चंद्र श्रीवास्तव पूर्व बैंक कर्मचारी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें राम मंदिर में कैश काउंटिंग स्टाफ का प्रभारी बनाया गया था। उनकी जिम्मेदारी दान की रकम की गिनती करने वाले कर्मचारियों की निगरानी और पूरी काउंटिंग प्रक्रिया को देखना था। बैंकिंग पृष्ठभूमि के कारण उन्हें इस काम की निगरानी के लिए रखा गया था।

FIR और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन पर निगरानी में कथित लापरवाही और अनियमितताओं में संलिप्तता के आरोप हैं। जाँच एजेंसियाँ यह देख रही हैं कि उनके प्रभारी रहते हुए दान की रकम की गिनती में कथित गड़बड़ी कैसे हुई।

करुणेश पांडेय

करुणेश पांडेय पर दान की रकम से जुड़ी रसीदों और वित्तीय रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी का आरोप है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा के साथ पूरी साजिश में शामिल था। जाँच एजेंसियों का दावा है कि वह श्रद्धालुओं के चढ़ावे को संभालने वाली कोर टीम का हिस्सा थे।

एक रिपोर्ट के अनुसार, उनकी जिम्मेदारी दान की रकम को गिनती वाले कमरे तक पहुँचाने से भी जुड़ी थी। उन पर आरोप है कि उन्होंने रकम और रिकॉर्ड की हेराफेरी में भूमिका निभाई और कथित गड़बड़ी से संपत्ति अर्जित की।

न गीता का श्लोक सुन पा रही, न भक्ति भजन… आरफा खानम आपका ये दर्द कैसे होगा कम? खतना पर खामोश लेकिन मुस्लिम-मुस्लिम करो पर राम मंदिर, भगवा और हिंदुओं से चिढ़ क्यों


अपनी इस्लामी पत्रकारिता के लिए कु्ख्यात आरफा खानम शेरवानी एक बार फिर सोशल मीडिया पर रोना-धोना मचाए हुए हैं। आरफा खानम का दुख ये है कि आखिर ये जो टीवी पर दिखने वाले पत्रकार हैं इनका चेहरा क्यों बदल रहा है? क्यों ये लोग हिंदू त्योहारों पर भारतीय परिधान पहन पहनकर टीवी कार्यक्रम करने लगे हैं? क्यों इनके माथे पर तिलक, हाथ में कलावा दिखाई देता है…? आदि आदि 
देखिए(फोटो में) पाखंडी भड़काऊ अरफ़ा खानम को। ये अरफ़ा खानम वही मुस्लिम महिला है जो मुस्लिम महिलाओं को बुर्का और हिजाब पर भड़काने का कोई मौका नहीं चुकती लेकिन खुद बिना हिजाब और बुर्के के मस्त होकर घूमती है। औरों को नसीहत अपने आपको फजीयत। अब इसको भड़काऊ नहीं कहा जाए तो क्या कहा जाए?   

आरफा ने अपने दुख के बारे में अब तक कई लोगों के साथ साझा कर दिया है। वो खुलकर बता रही हैं कि पत्रकारों का ‘हिंदू’ रूप देखकर उन्हें कितनी पीड़ा है। कभी वो संविधान की तस्वीर साझा करके अपने जख्म पर मलहम लगा रही हैं। कभी वामपंथी ‘बुद्धिजीवियों’ से चर्चा करके।

दिलचस्प बात ये है कि आरफा खानम जिन्हें समस्या इस बात से है कि अन्य पत्रकार आखिर क्यों हिंदुत्व की ओर झुकाव दिखाने लगे हैं, उन आरफा को ये एहसास ही नहीं है कि उनकी पत्रकारिता कितनी एकतरफा है। पिछले कुछ सालों में अगर आरफा खानम द्वारा उठाए मुद्दों का विश्लेषण किया जाए तो समझ आएगा कि आरफा खानम सोते-जागते सिर्फ इस्लाम और मुसलमान करती हैं। और ऐसा करता देख जो लोग उनपर सवाल उठाते हैं उन्हें वो कम्युनल मानती है, उनके सेकुलर होने पर सवाल उठाती हैं।

आप आरफा का एक्स हैंडल देखेंगे तो पता चलेगा कि इस बार वह राम मंदिर के ध्वजारोहण कार्यक्रम की कवरेज देखकर बिलबिलाई हैं। उनकी प्रतिक्रिया देखकर समझ ये नहीं आ रहा कि उनकी समस्या मुसलमानों का दुख है या हिंदुओं के प्रति घृणा।

देख सकते हैं कि शुभांकर मिश्रा के एक पोस्ट जिसमें उन्होंने बताया था कि अयोध्या में 500 वर्ष बाद राम मंदिर पर केसरिया फहरा है। उन्होंने खुशी जताई थी कि वो उस युग में जन्मे हैं जब रामललाल को टेंट से निकलकर सिंहासन पर बैठते देखा गया। इस ट्वीट ने आरफा को ऐसा जख्म दिया कि उन्होंने शुभांकर के लिए लानत भेज दी। उन्होने लिखा “और देखते-ही-देखते हिंदी पत्रकारिता, ‘हिंदू पत्रकारिता’ में बदल गई। पत्रकार, क़लम के सिपाहियों से धर्म के सैनिक बन बैठे। और देखते-ही-देखते… लानत है!”

इसके बाद द वायर का एक वीडियो देखिए। आरफा रोने वाले अंदाज में भारतीय नागरिकों को बता रही हैं कि देखिए अयोध्या में ध्वाजारोहण हो रहा है लेकिन हमेशा इस बात को याद रखा जाए कि भारत का झंडा केसरिया नहीं बल्कि तिरंगा है। और संविधान की प्रस्तावना वो कसम है जो हम लोगों ने खाई थी जब देश आजाद हुआ था।

एक अन्य वायरल होती क्लिप में आरफा हिंदी मीडिया को टारगेट करती इसलिए नजर आ रही हैं क्योंकि वो राममंदिर की कवरेज करता है। वह सिद्धार्थ वरदराजन और सीमा चिश्ती से बात करते हुए अपनी पीड़ा जाहिर करती हैं। उनका कहना कि जो महिला पत्रकार स्टूडियो में कोट पेंट पहनकर आती थीं वो भगवा पहनकर और तिलक लगाकर क्यों आ रही हैं। वो गीता के श्लोक और भक्ति के भजन पढ़ रही हैं।

वह इस वीडियो में साफ बोल रही हैं कि जो कुछ हो रहा है उनसे वो देखा नहीं जा रहा। उनसे भजन श्लोक नहीं सुने जा रहे। उन्हें पता नहीं चल रहा कि वो कैसे इस वक्त को काटें। आरफा के ये चेहरे के भाव हो सकता है उन लोगों को भावुक कर रहे हों जिनके लिए असल में वह पत्रकारिता करती हैं, मगर बाकियों के लिए ये सब सिर्फ हास्यासपद है। कारण- आरफा की पत्रकारिता ही है।

आज आपको संविधान की प्रस्तावना पढ़कर सुनाने वाली आरफा खानम के बारे में कोई सेकुलर राय बनाने से पहले याद रखिएगा कि आरफा सालों से इस्लामी की कुरीतियों को मजहबी अधिकार दिखाकर उन्हें सपोर्ट करती रही हैं। उनके लिए पत्रकारिता निष्पक्ष सिर्फ तब तक है जब वो इस्लामी पक्ष रखे, अगर देश की हिंदू आबादी की कोई चर्चा होगी तो उससे हिंदी पत्रकारिता के हिंदू पत्रकारिता में तब्दील हो जाने का डर रहेगा।

उनके लिए हलाला, पॉलीगेमी और तीन तलाक जैसे मुद्दे कभी भी चर्चा लायक नहीं लगे। उन्हें दिक्कत हुई तो सिर्फ अयोध्या में राम मंदिर से, वहाँ फहराते केसरिया झंडे से और भगवा कपड़ों में वहाँ पहुँचे भक्तों। अजीब बात ये है कि अपने आपको निष्पक्ष प याद करिए यही वो आरफा खानम हैं जिन्होने कर्नाटक में जब स्कूलों में हिजाब पहनने का मुद्दा गरमाया था उस समय स्कूल के यूनिफॉर्म कोड की जगह हिजाब पहनने वाली लड़कियों का समर्थन किया था। जो जायरा वसीम के एक्टिंग छोड़ने के फैसले पर सवाल उठाने वालों पर भड़की थीं।

क्या उस समय पर उन्हें याद नहीं आया कि देश का शैक्षणिक संस्थान अपने नियम मानने को अगर कह भी रहा है तो उसमें समस्या क्या है। तब क्यों नहीं आरफा ने ये रोना रोया मुस्लिम छात्राएँ क्यों हिजाब पहन-पहनकर स्कूल-कॉलेज को मदरसा जैसा बनाने का प्रयास कर रही हैं।

इसी तरह राम मंदिर पर जो आरफा रह रहकर अपना दुख बयान करती हैं क्या आप जानते हैं कि यही आरफा बामियान बुद्ध के विनाश को जस्टिफाई कर चुकी हैं। साल 2021 में आरफा ने ये बताना चाहा था कि तालिबान ने ‘हिन्दुत्व के गुंडों’ से प्रेरित होकर बामियान बुद्ध की विशाल मूर्ति को विस्फोटक से उड़ा दिया था। शेरवानी ने ट्वीट में लिखा कि बाबरी मस्जिद के विध्वंस ने ही अफगानिस्तान में बौद्ध स्मारक के तालिबान द्वारा विनाश को प्रेरित किया था।

सोचकर देखिए कि जिन आरफा को बामिया बुद्ध की मूर्ति उड़ाने वालों के कृत्य का बचाव करने के लिए तक तर्क मिल रहा है। उन्हें कभी ये समझ क्यों नहीं आया कि राम मंदिर हिंदू के लिए क्या था? उनके लिए बाबरी का वह ढाँचा देश में सेकुलरिज्म,लोकतंत्र और संविधान के होने का प्रतीक था जिसे करोड़ों सनातनियों की भावना रौंदते हुए खड़ा किया गया था। हैरानी नहीं है कि आज जब उसी जगह, एक लंबी कानूनी लड़ाई जीतकर हिंदुओं ने अपने रामलला का मंदिर बना लिया है तो आरफा को क्यों सेकुलरिज्म,लोकतंत्र और संविधान खतरे में लगते हैं।

राम मंदिर ध्वजारोहण होते ही भारत में पाकिस्तानपरस्त और वामपंथी से लेकर पाकिस्तान तक सब परेशान: सता रही मुस्लिम वोट बैंक की चिंता

                                  राम मंदिर के धर्म ध्वज समारोह में PM मोदी (फोटो: narendramodi.in)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राम मंदिर के मुख्य शिखर पर धर्म ध्वज की स्थापना एक रस्म से आगे बढ़कर एक ऐतिहासिक घटना है। यह वह क्षण है, जिसमें सदियों की प्रतीक्षा, संघर्ष और करोड़ों-करोड़ राम भक्तों की भावनाएँ एक प्रतीक के रूप में आसमान में लहरा उठीं।

भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के उद्घोष इस ध्वज को देश का बड़ा वर्ग गर्व, आस्था और सभ्यता के पुनरुत्थान के रूप में देख रहा है तो वहीं तथाकथित लिबरल वर्ग इससे दुखी है। वामपंथी गुटों से लेकर लिबरल्स और पाकिस्तान तक सब परेशान हैं।

इनकी परेशानी का असली कारण है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जब फैसला दिया गया था तब मस्जिद बनाने के लिए भी मिली जमीन पर मस्जिद के नाम पर नींव तक खुदी जबकि हिन्दुओं ने अपने पुरुषोत्तम श्रीराम का मन्दिर बना लिया। मन्दिर बनने से पहले ये ही लोग मन्दिर चंदे में हेराफेरी का आरोप लगाने वाले मस्जिद पर जमा हुए चन्दे का कहां इस्तेमाल हो रहा है क्यों नहीं बताते? मुसलमानों को एकजुट होकर कट्टरपंथियों से पूछना चाहिए कि हिन्दुओं ने तो भव्य मन्दिर निर्मित कर लिया तुम्हारी मस्जिद का क्या हुआ? हकीकत में बाबरी मस्जिद पर चल रही दुकान बंद होने की परेशानी इन्हे चैन से नहीं रहने दे रही।      

लिबरल्स की एक जमात इस बात से दुखी हो गई है कि राम मंदिर पर ध्वज फहराने के लिए खुद प्रधानमंत्री क्यों चले गए। जब प्रधानमंत्री मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुँचे थे, तब भी इस जमात के पेट में मरोड़ उठने लगी थीं। वामपंथी पार्टी CPI के महासचिव डी राजा भी इन दुखी लोगों की जमात में शामिल हैं। राजा ने इसके विरोध में X पर एक लंबा पोस्ट लिखा है।

राजा ने लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी देश के सामने अयोध्या में भगवा झंडा फहरा रहे हैं और इसे ‘भारतीय सभ्यता के पुनरुत्थान’ का प्रतीक बता रहे हैं। यह सिर्फ संशोधनवाद नहीं है बल्कि यह एक संकीर्ण, बहिष्कारवादी विचारधारा के साथ हमारे संवैधानिक इतिहास को फिर से लिखने का एक बेशर्म प्रयास है। यह बेहद चिंताजनक है कि देश के सर्वोच्च पद का इस्तेमाल हमारे संविधान में निहित बहुलवाद का जश्न मनाने के बजाय RSS के वैचारिक एजेंडे को वैध बनाने के लिए किया जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि हम सबका झंडा तिरंगा है और इस घटना को तमाशा बताया है। यकीनन तिरंगा इस राष्ट्र की पहचान है जो आजादी के बाद आया है। उसका सम्मान है और पूरा राष्ट्र उसके सम्मान में नतमस्तक है। पर डी राजा ये क्यों भूल गए कि भगवा झंडा और राम राज्य का प्रतीक ध्वज हजारों वर्ष पुराने इस राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतिनिधि है। हिंदुओं के मन में उसके लिए अपार श्रद्धा है।

डी राजा हिंदुओं की आस्था की तुलना तमाशे से कर सकते हैं, उन्हें कोई कुछ नहीं कहने वाला है। क्योंकि इस देश का बहुसंख्यक हिंदू समाज सहिष्णुता को अपने मन में, अपनी आत्मा में आत्मसात किए हुए है। डी राजा को समझने की जरूरत है कि क्या वो ऐसा किसी और मजहब के प्रतीक के लिए कहने की हिम्मत जुटा पाएँगे। जवाब सीधा सा है नहीं, और इसकी वजह आप-हम सब जानते हैं। डी राजा ऐसे कहने वाले अकेले नहीं है।

वामपंथी प्रोपेगेंडा फैलाने वाले ‘द हिंदू’ की पत्रकार सुहासिनी हैदर भी इससे दुखी हैं और लोगों को भी भ्रम में डालने की कोशिश कर रही हैं। हैदर ने X पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा, “विचित्र विरोधाभास – पिछले कुछ वर्षों से अन्य सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों पर राष्ट्रीय तिरंगा फहराने के लिए कहा गया है लेकिन संविधान की शपथ लेने वाले प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आज धार्मिक ध्वज फहराएँगे।”

सुहासिनी हैदर जिस संविधान की दुहाई दे रही हैं क्या वो प्रधानमंत्री को अपना धर्म मानने से रोकता है? क्या वो देश के हर नागरिक को अपना धर्म मानने की आजादी का अधिकार नहीं देता है। सुहासिनी को मतलब ना संविधान से ना धर्म उन्हें बस मतलब अपने प्रोपेगेंडा से है। जाहिर है कि राष्ट्रीय पर्वों पर तिरंगा सभी जगह फहराया जाता है, खुद राम मंदिर के परिसर में भी बीते 15 अगस्त 2025 को तिरंगा फहराया गया था।

इन वामपंथियों द्वारा तिरंगे को भगवा का विरोधी साबित करने की कोशिशें की जा रही हैं लेकिन वो भूल गए हैं कि भगवा हमेशा से इस राष्ट्र कि चेतना का आधार था, है और रहेगा। हालाँकि, इसके होने से तिरंगा की शान में ना कमी आती है और ना होगी।

सोशल मीडिया पर एक बड़ा तबका कथित ‘बाबरी मस्जिद’ को फिर से बनाए जाने की वकालत भी कर रहा है। अयोध्या से करीब 850 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में तो सत्तारूढ़ TMC के एक विधायक हुमायूँ कबीर ने 6 दिसंबर 2025 को बाबरी नाम की मस्जिद बनाने का एलान भी कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी ऐसे स्वर दिखे हैं। ‘इंडियन मुस्लिम आर्काइव’ नाम के एक हैंडल ने फिर ‘बाबरी’ बनाने की बात कही है।

राम मंदिर के धर्म ध्वज से जुड़ी एक पोस्ट पर जवाब देते हुए हैंडल ने लिखा, “बाबरी का विनाश न तो हिंदुओं के लिए कोई सभ्यतागत उपलब्धि है और न ही व्यापक उम्माह के लिए, यह तो बस एक प्रतीक है जिसे हागिया सोफिया की तरह उलटा जा सकता है।” हैंडल से आगे लिखा गया, “इस बीच, पंजाब, सिंध, बंगाल और कश्मीर जैसे हिंदू सभ्यता के उद्गम स्थलों से हिंदू धर्म का सफाया हो चुका है, जिसे उलटा नहीं जा सकता।”

राजीव निगम नाम के एक यूजर ने धर्म ध्वज की स्थापना को नौटंकी बताया है। अभिनेता अनुपम खेर ने X पर एक पोस्ट में लिखा कि हमारे जीते जी अयोध्या में हमें श्री राम मंदिर पर ध्वजारोहण समारोह का शुभ अवसर प्राप्त हुआ इससे बड़े सौभाग्य की बात क्या हो सकती है। इस पर राजीव निगम से लिखा, “फुल नौटंकी चालू आहे” यानी पूरी तरह से नौटंकी चल रही है।

सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट की भरमार है जो प्रभु राम के धर्म ध्वज की स्थापना किए जाने से दुखी हैं। भारत में वामपंथी और लिबरल तो दुखी हैं ही, साथ में ही पड़ोसी देश पाकिस्तान भी रो रहा है। वो भारत पर आरोप लगाते हुए UN तक से गुहार लगाने पहुँच गया है।

पाकिस्तान भी परेशान, UN तक लगाई गुहार

देश में तो प्रोपेगेंडा फैलाने वाले परेशान हैं हीं, पड़ोसी देश पाकिस्तान भी परेशान है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बाकायदा बयान जारी कर राम मंदिर के धर्म ध्वज की स्थापना पर सवाल उठाए हैं।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, “पाकिस्तान ने अयोध्या में ऐतिहासिक बाबरी मस्जिद की जगह पर बने तथाकथित ‘राम मंदिर’ पर झंडा फहराने पर गहरी चिंता जताई है। सदियों पुरानी इबादत गाह बाबरी मस्जिद को 6 दिसंबर 1992 को फासीवादी सोच से प्रेरित कट्टरपंथी भीड़ ने गिरा दिया था।”

पाकिस्तान ने आगे कहा, “भारत में बाद की कानूनी प्रक्रिया, जिसमें जिम्मेदार लोगों को बरी कर दिया गया और गिराई गई मस्जिद की जगह पर मंदिर बनाने की इजाज़त दी गई, अल्पसंख्यकों के प्रति भारतीय सरकार के भेदभाव वाले रवैये के बारे में बहुत कुछ बताती है।” पाकिस्तान ने कहा, “भारतीय मुसलमान लगातार बढ़ते सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हाशिए पर धकेले जाने का सामना कर रहे हैं।”

पाक ने कहा, “UN और संबंधित इंटरनेशनल संस्थाओं को इस्लामिक विरासत की सुरक्षा और सभी माइनॉरिटीज के धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की सुरक्षा पक्का करने में एक कंस्ट्रक्टिव भूमिका निभानी चाहिए। पाकिस्तान भारत सरकार से अपील करता है कि वह मुसलमानों समेत सभी धार्मिक समुदायों की सुरक्षा पक्का करे।”

पाकिस्तान के दुख को समझा भी जा सकता है। वो खुद भुखमरी और गृह युद्ध जैसी स्थितियों से जूझ रहा है और फौज हर तरफ से पिट रही है। ऐसे में आवाम का ध्यान भटकाने के लिए ऐसी हरकतों का सहारा लेना पड़ रहा है। भारत के वामपंथियों की आदत ही खराब हो गई है। इस वर्ग को हर ऐसे क्षण में खामी तलाशने की आदत सी हो गई है, जैसे उन्हें भारत की आत्मा को समझना ही नहीं बल्कि उससे स्वयं को अलग रखना है।

यह वही विचारधारा है जिसने 2019 में राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी निराशा ही जताई थी। तब भी तर्कों की लंबी फेहरिस्त पेश की गई कभी सेक्युलरिज्म खतरे में है, कभी राजनीति धर्म के बिना भी चल सकती है और कभी इतिहास मिटाया जा रहा है। पर सच यह है कि जो इतिहास मिटाया गया था, वह अब फिर से स्थापित हुआ है। जिनकी स्मृति सैकड़ों वर्षों तक दबा दी गई थी, आज वह फिर सबके हृदय में प्रफुल्लित हो रही है। यह धर्म ध्वज उसी स्मृति का प्रत्यक्ष रूप है।

आज जब ध्वज फहरा रहा है, तभी यह सदा पीड़ित लिबरल समूह उसमें भी राजनीति, बहुसंख्यक वर्चस्व, राजनीतिक हिंदुत्व जैसी चीजें ढूँढ रहा है। सवाल यह है कि जब किसी समुदाय की सांस्कृतिक जड़ों का सम्मान होता है तो यह वर्ग असंतोष क्यों महसूस करता है?

ऐसा लगता है कि भारत की प्राचीन पहचान को स्वीकार करना उन्हें असुविधाजनक लगता है। यह वर्ग भूल जाता है कि राम मंदिर का निर्माण किसी सत्ता की इच्छा से कहीं आगे बढ़कर समाज की सामूहिक स्मृति और सैकड़ों वर्षों के संघर्ष का परिणाम है। आज राम मंदिर पर स्थापित धर्म ध्वज से कुछ लोगों को समस्या है, क्योंकि उन्हें यह मानना मुश्किल लगता है कि भारत का सांस्कृतिक चरित्र जाग रहा है और वह भी आत्मविश्वास के साथ। यह काल भारत के स्व: के बोध का काल है। राम मंदिर के शिखर पर फहराया यह ध्वज ‘भारत माँ’ के मस्तक पर तिलक की तरह है।

राम मंदिर में घुस गई मुस्लिम महिला, सिर और चेहरे को नीले कपड़े से ढँक रखा था: परिवार ने बताया ‘मानसिक विक्षिप्त’

                                राम मंदिर में नीले कपड़े से ढँकी महिला (प्रतीकात्मक तस्वीर) 
यूपी पुलिस ने राम मंदिर से एक मुस्लिम महिला को हिरासत में लिया है। उसकी गतिविधियाँ संदिग्ध लग रही थीं। उक्त महिला का नाम इरिम है, जो श्रद्धालुओं के साथ दर्शन के बहाने भीतर जा रही थी। जाँच एजेंसियाँ उसके बारे में खँगाल रही हैं।

उक्त महिला मंदिर के भीतर भी चली गई थी, लेकिन लौटते समय एग्जिट पर पुलिस ने उसे रोक लिया। उसने सिर और चेहरे पर नीले रंग का कपड़ा बाँध रखा था, वो पुलिस को भी पलट कर जवाब दे रही थी। महाराष्ट्र के वर्धा की रहने वाली उस महिला के परिजनों का कहना है कि वो मानसिक बीमार है और इधर-उधर घूमती रहती है। उसे महिला थाने में रखकर परिजनों को सूचित किया गया।

इससे पहले 6 जनवरी को कैमरे वाले चश्मे से तस्वीर खींचकर जासूसी करते हुए एक शख्स को गिरफ्तार किया गया था। गुजरात का व्यापारी जयकुमार ऐसा करते हुए सभी चेकपॉइंट्स को पार कर चुका था। इसी तरह 3 मार्च को अब्दुल नामक एक आतंकी धराया था, जो हैण्ड ग्रेनेड से राम मंदिर पर हमले की साजिश रच रहा था।

वहीं ताज़ा मामले में फ़िलहाल महिला के बारे में कुछ आपत्तिजनक पता नहीं चला है। बता दें कि अयोध्या का राम मंदिर आतंकियों के निशाने पर रहा है, पाकिस्तान तक से इसे लेकर कई बयान आ चुके हैं। जब सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी ढाँचे वाली जगह पर राम मंदिर बनाए जाने का फ़ैसला बनाया था, क्योंकि ये साबित हो गया था कि वहाँ बाबर के सेनापति मीर बाकी ने राम मंदिर को ध्वस्त करके मस्जिद बनवाई थी।

राम मंदिर पर फैसले को ‘न्याय का मजाक’ बताने वाले ‘पादरी’ से बने सुप्रीम कोर्ट जज, हिन्दू विरोधी जस्टिस रामासुब्रमण्यन को NHRC का अध्यक्ष बनवाना चाहती थी कांग्रेस

                    कांग्रेस चाहती थी कि राम मंदिर विरोधी रोहिंटन नरीमन NHRC के मुखिया बनें 
कांग्रेस ने एक बार फिर से एक ऐसे व्यक्ति की देश के महत्वपूर्ण पद के लिए वकालत की है, जिसने हाल ही में हिन्दुओं को लेकर आपत्तिजनक बातें कही थीं। इसी व्यक्ति ने राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गलत बताया था। यह व्यक्ति जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन हैं। रोहिंटन नरीमन सुप्रीम कोर्ट में जज रहे हैं। कांग्रेस ने उनकी वकालत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के मुखिया तौर पर हाल ही में की। उनको नियुक्त ना किए जाने पर कांग्रेस ने एक डिसेंट नोट(असहमति पत्र) भी लिखा है। यह पत्र अब सामने आया है।

NHRC के मुखिया के तौर पर सोमवार (23 दिसम्बर, 2024) को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज वी रामासुब्रमण्यन को नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति उस कमिटी की सिफारिश पर की गई है, जो NHRC के मुखिया और सदस्यों के नामों पर मुहर लगाती है।

इस कमिटी में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के साथ ही संसद के दोनों सदनों में नेता प्रतिपक्ष और राज्यसभा के उपसभापति भी होते हैं। इसी कमिटी की बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी और कांग्रेस मुखिया तथा राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रोहिंटन नरीमन के नाम की वकालत की थी।

यह बैठक 18 दिसम्बर, 2024 को संसद भवन में हुई थी। इस बैठक में जस्टिस रोहिंटन नरीमन के नाम पर सहमति ना बनने के कारण राहुल गाँधी और खरगे ने एक असहमति का नोट लिखा। इस असहमति नोट में उन्होंने कहा है कि वह जस्टिस फली नरीमन को इसलिए NHRC का मुखिया बनाना चाहते थे क्योंकि वह अल्पसंख्यक पारसी समुदाय से आते हैं।

इसके अलावा उन्होंने नरीमन को बौद्धिक गहराई और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए प्रसिद्ध बताया है। इन्हीं फली नरीमन ने हाल ही में जस्टिस AM अहमदी मेमोरियल लेक्चर में हिन्दुओं को लेकर काफी अशोभनीय बातें कही थी।

उन्होंने राम मंदिर को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट को कोसा था और मस्जिद ना बनाने पर दुख जाहिर किया था। रोहिंटन नरीमन ने कहा था कि 1984 में विश्व हिन्दू परिषद की राम मंदिर बनाने की माँग ‘तानाशाही’ और ‘अत्याचारी’ थी। उन्होंने कहा राम मंदिर के मामले में हिन्दू पक्ष को हमेशा कानून के खिलाफ रहने वाला भी करार दिया था।

रोहिंटन नरीमन ने इसी वक्तव्य में इस बात पर भी निराशा जताई थी कि बाबरी गिराने के एवज में उसी राम जन्मभूमि के सीने पर मस्जिद दुबारा क्यों नहीं खड़ी की गई। मस्जिद ना तामीर किए जाने को नरीमन ने ‘न्याय के साथ भद्दा मजाक‘ बताया था और कहा था कि यह एक भरपाई होती।

जिन रोहिंटन नरीमन ने देश की लगभग 100 करोड़ हिन्दू आबादी के लिए श्रद्धेय राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त करने वाले फैसले को गलत बताया, उन्हें मानवाधिकार आयोग का मुखिया बनाना चाहती थी। जिस मानवाधिकार आयोग का काम देश के सभी लोगों को सर उठा कर जिन्दगी जीने के अधिकार को सुरक्षित करना है, उसका मुखिया कांग्रेस उस रोहिंटन नरीमन को बनाना चाहती थी जो राम मंदिर मामले में हिन्दुओं को कानून के खिलाफ मानते हैं। विचारणीय बात यह है कि रोहिंटन नरीमन यदि इसके अध्यक्ष बनते तो उनके हिन्दुओं के प्रति क्या विचार रहते।

रोहिंटन नरीमन के पिता फली नरीमन ने भी हिन्दू संत योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने को लेकर भी अपनी खीझ दिखाई थी। उन्होंने यह तब किया था जब अपने बेटे रोहिंटन नरीमन को पारसी समुदाय का पादरी बनाया था।

बंगाल में बनेगा अयोध्या जैसा भव्य राम मंदिर, 22 जनवरी से ही होगी शुरुआत: 10 करोड़ रूपए का शुरुआती फंड तैयार, भाजपा ने की घोषणा

                                               अयोध्या में भव्य राम मंदिर (फोटो साभार: India TV)
पश्चिम बंगाल में भाजपा ने धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुर्शिदाबाद जिले के बरहामपुर में भाजपा ने 10 करोड़ रुपये की लागत से भव्य राम मंदिर बनाने की घोषणा की है। भाजपा ने ऐलान किया है कि यह मंदिर अयोध्या के राम मंदिर के उद्घाटन की पहली वर्षगाँठ पर 22 जनवरी 2025 को शिलान्यास के साथ बनना शुरू होगा।

भाजपा के बरहामपुर संगठनात्मक जिला अध्यक्ष शाखाराव सरकार ने बताया कि मंदिर निर्माण के लिए जमीन पहले ही चिन्हित कर ली गई है। यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से भाजपा की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाएगा और क्षेत्र में हिंदू समुदाय की भावनाओं का सम्मान करेगा।

भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर बनाने का फैसला तृणमूल कांग्रेस  (टीएमसी) के विधायक हुमायूँ कबीर के बाबरी मस्जिद निर्माण की घोषणा से जुड़ा नहीं है। उन्होंने कहा, “राम मंदिर हिंदुओं की आस्था और हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। मस्जिद बनाए जाने की बात से इसे जोड़ना गलत होगा। लेकिन हुमायूं कबीर जैसे नेता पहले भी हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ बयान दे चुके हैं।”

भाजपा नेता शंकर घोष ने कहा, “राम मंदिर हमारी संस्कृति की पहचान है। यह एक सकारात्मक संदेश देगा। हमें अपने धर्म और आस्था पर गर्व होना चाहिए। यह किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज के संतुलन और विकास का कदम है।” मुर्शिदाबाद में भाजपा इस कदम को हिंदू समुदाय के समर्थन को मजबूत करने के रूप में देख रही है। भाजपा का कहना है कि राम मंदिर का निर्माण समाज में सकारात्मकता और सांस्कृतिक गर्व लाने का प्रयास है।

राम मंदिर निर्माण की घोषणा से पश्चिम बंगाल में भाजपा ने एक बड़ा संदेश दिया है। यह फैसला भाजपा के सांस्कृतिक एजेंडे का विस्तार करता है और चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

कुछ समय पहले टीएमसी के विधायक हुमायूँ कबीर ने पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने का ऐलान किया था। हालाँकि टीएमसी ने इस विचार को हुमायूँ का निजी विचार बताया था। 

राम मंदिर को उड़ाने और मुख्यमंत्री योगी की हत्या की धमकी: बिहार के भागलपुर से मकसूद अंसारी गिरफ्तार, जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी से था संपर्क


अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने बिहार के भागलपुर से मोहम्मद मकसूद को गिरफ्तार किया है। मकसूद ने इस साल 14 जून को राम मंदिर को उड़ाने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी दी थी। इसके पुलिस ने बड़ी खंजरपुर में छापेमारी करके उसे गिरफ्तार कर लिया और कागजी प्रक्रिया पूरी करके उसे यूपी ले आई।

जिस समय पुलिस ने मोहम्मद मकसूद अंसारी को गिरफ्तार किया, उस समय वह अपने बहन के ससुराल से आ रहा था। इसी दौरान उसका मोबाइल नम्बर ट्रेस करके पुलिस ने उसे भागलपुर के गुरहट्टा चौक से दबोच लिया। वहीं, कुछ रिपोर्ट में उसकी गिरफ्तारी भागलपुर के बरारी थाना क्षेत्र के बड़ी खंजरपुर स्थित मस्जिद गली स्थित उसके घर से गिरफ्तार करने की बात कही जा रही है।

पिछले कुछ दिनों से पुलिस उसके घर पर पहुँचकर उसकी माँ से पूछताछ कर रही थी। हालाँकि, उसका सुराग नहीं मिल पा रहा था। मोहम्मद मकसूद के पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’ से भी जुड़े होने की बात सामने आ रही है। पुलिस ने उसके पास से चार मोबाइल फोन बरामद किया है। इनमें से एक मोबाइल वह भी है, जिसके फेसबुक से धमकी दी गई थी।

यह बात भी सामने आई है कि मकसूद जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आमिर के संपर्क में था। उसका देश विरोधी पोस्ट भी मकसूद शेयर किया करता था। इतना ही नहीं, साइबर ठगी में भी उसकी संलिप्तता सामने आई है। संगठन के नाम पर भी लाखों रुपए इकट्ठा करने और नए लड़कों की संगठन में भर्ती को लेकर कई चौंकाने वाली जानकारी मिली है। बरामद मोबाइल से आमिर से जुड़ी जानकारी भी मिली है।

मकसूद की अम्मी का कहना है कि वह कैंसर की मरीज है और उसका बेटा उसकी देखभाल करता था। उसने अपने बेटे को निर्दोष बताया है। उसकी अम्मी का कहना है कि उसके बेटे का फोन कुछ दिन उसके साला के पास था। उसके साले ने उस फोन से क्या किया, क्या नहीं किया, इसके बारे में उसे जानकारी नहीं है। फिलहाल पुलिस उसके संभावित साथियों की भी तलाश कर रही है।

उसकी अम्मी ने यह भी कहा कि मकसूद अंसारी अपनी नौकरी के लिए फोन पर बातें किया करता था। उसने नौकरी के लिए चंडीगढ़ में आवेदन भी दिया था। वहाँ से उसका वीजा बनाने की बात हो रही थी। वीजा बन जाने के बाद वह विदेश जाने वाला था। उसकी अम्मी का कहना है कि मकसूद के विदेश जाने से पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में पता चला कि हुसैनाबाद के सकरुल्ला चक में रहने वाले 26 साल के मोहम्मद मकसूद अंसारी के साला अमन का मोबाइल खराब हो गया था। उसने बताया कि अमन ने इस दौरान उसके मोबाइल से क्या किया उसे इसकी जानकारी नहीं है। पुलिस इस मामले में उसके साले अमन की संलिप्ता की भी जाँच कर रही है।

इस साल 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर का उद्घाटन हुआ था। इसके बाद 14 जून 2024 को राम मंदिर को उड़ाने की धमकी दी गयी थी। इसके साथ ही सीएम योगी को भी जान से मारने की धमकी दी गई थी। धमकी भरे मैसेज मिलने के बाद यूपी पुलिस सहित देश की सुरक्षा एजेंसी अलर्ट हो गई थीं। इस धमकी में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का नाम सामने आया था।

ऑडियो मैसेज सामने आने के बाद अयोध्या के राम जन्मभूमि थाना में केस दर्ज किया गया था। यूपी पुलिस को उस मोबाइल के बारे में जानकारी हासिल की तो पता चला कि यह मोबाइल किसी मकसूद अंसारी नाम के शख्स का है और वह बिहार के भागलपुर जिले का रहने वाला है। फिलहाल इस मामले में पुलिस खुलकर कुछ भी बताने से परहेज कर रही है।

उत्तर प्रदेश : ‘इंशाअल्लाह, राम मंदिर को गिराना हमारी जिम्मेदारी बन चुकी है’: 2005 में भी जैश ने बोला था हमला

अयोध्या स्थित राम मंदिर को बम से उड़ाने की आतंकी धमकी
बीजेपी को वोट न देने वाले हिन्दुओं आंखे खोलो, हमेशा लालची मत बनो। संघ के इंद्रेश कुमार को अपना राष्ट्रीय मुस्लिम मंच तुरन्त बंद कर देना चाहिए। इंद्रेश बताये कि आम मुसलमानों को छोड़ो तुम्हारे मुस्लिम मंच ने वोट क्यों नहीं दिया? इंद्रेश न पागल बनो और न बनाने की कोशिश करो। इतने वृद्ध होने पर भी मुस्लिम मानसिकता नहीं समझे तो अपने आपको नेता कहलाने का कोई अधिकार नहीं। इतने सालों से मुस्लिम मंच चला रहे हो, उन्हें मुख्यधारा से नहीं जोड़ नहीं पाए, तो क्या फायदा इस मंच का? जवाब दो जब सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद से मुस्लिमों ने बीजेपी के विरुद्ध मन बना चुके थे, मुस्लिम मंच के सरगना होने पर भी सोते रहे, शर्म करों। अगर राममंदिर पर किसी भी रूप में क्षति पहुँचती है, इंद्रेश कौन जिम्मेदार होगा, बताओ? इंद्रेश कुमार के इस मुस्लिम मंच को वित्तीय सहायता देने वालों को भी तुरंत इस पाखंडी मंच को एक पैसा नहीं देना चाहिए।  

आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी है। अयोध्या का राम मंदिर का हाल ही में निर्माण हुआ है और अभी भी इसमें कई कार्य जारी हैं। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन करते हैं। इससे संबंधित एक ऑडियो जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अलर्ट जारी किया है। अयोध्या में तैनात सुरक्षाकर्मियों को अतिरिक्त सुरक्षा बरतने के लिए कहा गया है।

अयोध्या में रामकोट के सभी बैरियरों पर सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, पुलिस जाँच में जुट गई है। जिस मार्ग से रामलला का दर्शन करने के लिए श्रद्धालु जाते हैं, वहाँ भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सामने आए ऑडियो में जैश-ए-मुहम्मद का आतंकी कहता है, “बाबरी मस्जिद की जगह तुम्हारा मंदिर बना हुआ है और वहाँ हमारे 3 साथी शहीद हुए हैं। इंशाअल्लाह, इस मंदिर को गिराना हमारी जिम्मेदारी बन गई है।” जैश-ए-मुहम्मद का गढ़ पाकिस्तान में है।

पाकिस्तान से ही इसे पोषण मिलता रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को इस ऑडियो की जाँच के लिए लगाया गया है। केंद्र और प्रदेश सरकार की सुरक्षा एजेंसियाँ मिल कर काम कर रही हैं। जैश-ए-मुहम्मद 2005 में राम मंदिर पर हमला भी कर चुका है। तब रामलला टेंट में विराजमान थे और मंदिर बना नहीं था। बस अड्डों पर भी संदिग्ध वस्तुओं की जाँच चल रही है। अयोध्या में NSG (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड्स) का हब भी बनाया जा रहा है। ये देश का छठा ऐसा हब होगा।

अयोध्या देश के सबसे संवेदनशील और व्यस्त स्थलों में से एक बन गया है, ऐसे में NSG का हब यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने का काम करेगा। 5 जुलाई, 2005 को जैश के 5 आतंकियों ने यहाँ हमला बोला था, CRPF ने इन सभी को मार गिराया था। 2023 में भी राम मंदिर पर हमले की धमकी दी गई थी, जो फर्जी निकली थी। भारत के कट्टर मुस्लिम भी अक्सर ‘बाबरी ज़िंदा है’ का नारा लगाते हैं, जिसे असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता भी हवा देते रहे हैं।

मोदी को कांग्रेस की 100 गालियों से भद्दी है भागवत जी और इंद्रेश कुमार की गाली ; संघ की मर्यादाएं तोड़ कर बोले और विपक्ष को खुश कर दिया दोनों ने; अपने घर को आग लगाने से पड़ोसी ही खुश होते हैं

 सुभाष चन्द्र

दो दिन पहले संघ प्रमुख माननीय मोहन भागवत जी ने जो बयान दिया उसने हारी हुई कांग्रेस और विपक्ष को मोदी पर वार करने का हथियार दे दिया सारे नेता मोदी पर बरस पड़े केवल इस बात पर कि भागवत जी ने कह दिया कि मणिपुर एक साल से शांति की राह देख रहा है।  जयराम रमेश, कपिल सिब्बल, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले और भूपेश बघेल सबको खुजली हुई कि भागवत का तो मोदी को कहना मानना चाहिए और मणिपुर जाना चाहिए

लेखक 
चर्चित YouTuber 
राममंदिर के बाद बाद काशी पर हो रहे विवाद पर भी भागवत ने कहा कि 'हमें हर मस्जिद में शिवलिंग नहीं देखना चाहिए।' ये बात कहने का क्या मतलब था? भागवत क्या अपना प्रमुख साप्ताहिक Organiser नहीं पढ़ते? या इतिहासिक प्रवचन देने वाले भागवत लगभग 30+वर्ष पूर्व, संपादक प्रो वेद प्रकाश भाटिया के कार्यकाल में इस साप्ताहिक में प्रकाशित डॉ गणेशी लाल वर्मा लिखित श्रृंखला "Conversion of Hindu Temples" भूल गए? तब तो कोई विरोध नहीं किया, क्यों?

मोहन भागवत की मणिपुर पर कही बात तो बड़ी पसंद आ रही है विपक्ष को लेकिन वो तो बहुत कुछ कहते हैं, कभी आप भी तो उनकी बातें माना करो लेकिन कांग्रेस ने अगले दिन कह दिया कि RSS अब अप्रासंगिक हो गया है भागवत जी ने कहा कि “जो मर्यादा का पालन करे, अहंकार न करे, वही सच्चा सेवक है इस मानसिकता से छुटकारा पाना होगा कि सिर्फ हमारा विचार सही है, दूसरे का नहीं चुनाव प्रचार में झूठ फैलाया गया, झूठ पर आधारित मुकाबला थाआपसी सहमति बनाएं, विपक्ष को विरोधी नहीं, प्रतिपक्ष कहें” क्या इसका मतलब यह था कि मोदी प्रधान सेवक तो क्या “सेवक” भी नहीं है?

इसके बाद आज संघ के वरिष्ठ नेता जो “मुस्लिम राष्ट्रीय मंच” चलाते हैं, इंद्रेश कुमार ने आग में घी डालने का काम किया और कहा कि “जिस पार्टी ने भक्ति की और जिसे पूरी शक्ति मिलनी चाहिए थी, उसे अहंकार के कारण भगवान ने 241 पर रोक दिया और जिनकी श्रद्धा राम में नहीं थी उन्हें 234 पर रोका और बताया कि तुम सफल नहीं हो सकते”

इंद्रेश कुमार 'हाँ' अहंकार टूटा है। नरेंद्र मोदी का नहीं तुम्हारा, संघ का, सनातन विरोधियों का, मोदी को हराने विदेशी भीख पर पलने वालों का, अहंकार टूटा है भारत विरोधी विदेशियों और एक मुश्त मोदी के विरुद्ध वोट करने वालों का। 

इंद्रेश कुमार "मुस्लिम राष्ट्रीय मंच" चलाकर अपनी दुकान चमकाते रहो, दुनिया को पागल बनांते रहो कि मुस्लिम संघ से जुड़ रहा है। लेकिन ये लोग संघ और बीजेपी दोनों को पागल बनाकर अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं, तिजोरी भर रहे हैं लेकिन बीजेपी को वोट नहीं दे रहे। इंद्रेश जिस दिन सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आया था, उसी दिन मुस्लिम समाज ने बीजेपी को वोट नहीं देने का इरादा कर लिया था। चलाते मुस्लिम मंच और मुस्लिम में क्या चल रहा है, उससे बेखबर हुए बैठ, प्रधानमंत्री पर कटाक्ष कर रहे हैं।

इन दोनों महानुभावों की बातें सुनकर मैं सदमे में हूं क्योंकि उन्होंने बोलते हुए एक बार भी नहीं सोचा कि ये क्या कह रहे हैं और इसका मतलब क्या निकल सकता है लगता है ये नड्डा जी के बयान से आहत थे जिसमें उन्होंने कह दिया था कि भाजपा अब सक्षम है और अपना कार्य स्वयं कर सकती है, संघ एक cultural और social organisation है ये बात 18 मई को कही थी और शायद इसलिए ही मोदी जी नड्डा जी को मंत्री बना कर भाजपा के अध्यक्ष पद से हटने का तो इशारा कर दिया फिर भी मोदी में “अहंकार” कह कर आप उसे कांग्रेस की 100 गालियों से भी बड़ी गाली दे गए 

भागवत जी ने 2023 के विजयदशमी के संबोधन में खुलकर कहा था कि मोदी सरकार हर क्षेत्र में अच्छा काम कर रही है मणिपुर के बारे में भी विस्तार से विचार रखे थे जब मणिपुर मामला जोरों से चल रहा था लेकिन सरकार पर कोई उंगली नहीं उठाई आज उसी मणिपुर के लिए मोदी को दोष दे दिया भागवत जी को शायद आभास भी नहीं है कि कांग्रेस मोदी को मणिपुर जाने के लिए क्यों जिद पकड़े हुए है पंजाब में मोदी पर हमला होने को था और मणिपुर में शायद कांग्रेस और विदेशी ताकतों ने (जो मणिपुर कलेश को प्रायोजित किए हुए हैं कांग्रेस के साथ) मोदी की हत्या की कोई साजिश रच रखी हो यदि मोदी को मार दिया गया तो कौन जिम्मेदार होगा?

इंद्रेश कुमार से मैं पूछना चाहता हूं कि उनके मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के 10,000 सदस्यों ने कितने मुस्लिम वोट मोदी को दिलवाए जो आज आप अहंकार की बातें छौंक रहे हो

भागवत जी आप विपक्ष को विरोधी न कह कर प्रतिपक्ष कहने की वकालत कर रहे हो जबकि वे लोग “घोर विरोधी” हैं मोदी के ही नहीं, संघ के भी क्योंकि उनका बच्चा बच्चा संघ को केवल एक नज़र से देखता है कि “संघ ने गांधी की हत्या की” और आप उनका सम्मान करने को कह रहे हो आपके घर में आग लगी हो तो बाहर वाले ही तापते हैं

दिल्ली : मथुरा-काशी के लिए चाहिए 400 पार सीटें: हिमंता बिस्वा सरमा, असम के मुख्यमंत्री, कहा- बनेंगे भव्य मंदिर, PoK में भी दिखने लगा है तिरंगा; जिसका लाभ हिन्दुओं से अधिक मुसलमानों के पक्ष में होगा


असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बड़ा दावा किया है। हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि लोकसभा में एनडीए के 400 पार सीटों के लक्ष्य को प्राप्त करने का मतलब है कि अयोध्या के बाद अब काशी और मथुरा में भव्य मंदिरों का निर्माण किया जाएगा। हिमंता बिस्वा सरमा पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट पर बीजेपी प्रत्याशी हर्ष मल्होत्रा के लिए लक्ष्मी नगर में चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे, जब उन्होंने ये बातें कही।

मोदी के 400+ सीटें मांगने की मंशा विपक्ष अच्छी तरह समझ चुका है कि 400 सीटों का क्या महत्व होता है। 400 सीटें या उसके आसपास होने से अधिकतर विपक्षियों की दुकानें और देश-विरोधियों की दुकानें बंद होने के कगार होंगी। हिन्दुओं से ज्यादा यह मुसलमानों के पक्ष में होंगी। अब तक जितनी भी योजनाएं शुरू हुई समस्त भारतवासियों के हुई है, केवल एक धर्म के लिए नहीं। मुसलमानों को मालूम होगा कि इन नेताओं ने हमें केवल वोटबैंक तक ही सीमित रखा, कभी मुख्य धारा से नहीं जुड़ने दिया। भारतीय जनसंघ से लेकर बीजेपी तक मुसलमानों को इसका डर दिखाया गया।  

हिमंता बिस्वा सरमा ने आगे कहा कि लोकसभा चुनाव में जब भाजपा 400 के पार जाएगी तो मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनेगा और काशी में ज्ञानवापी मस्जिद की जगह पर बाबा विश्‍वनाथ का भव्य मंदिर बनेगा। उन्होंने कहा कि मुगलों ने जो-जो कारनामे किए थे, उसमें से अभी बहुत कुछ साफ करना बाकी है। असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने का अपना वादा पूरा कर दिया है, इसलिए इस बार जीत भी बड़ी होनी चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि PoK में भी भारत का झंडा दिख रहा है, जबकि कांग्रेस के शासन में अपने जम्मू-कश्मीर में भी पाकिस्तानी झंडा दिखता था। हिमंता ने कहा कि संसद में पहले कश्मीर की चर्चा नहीं होती थी, लेकिन अब PoK में भी लोग भारत का झंडा थामे दिख रहे हैं।

दिल्ली के विकास को लेकर आम आदमी पार्टी को घेरा

हिमंता बिस्वा सरमा ने दिल्ली में विकास को लेकर आम आदमी पार्टी को घेरा। हिमंता ने कहा, “पहले दिल्ली आने पर लालकिला और कुतुबमीनार देखने के लिए बोला जाता था और अब मोहल्ला क्लीनिक देखने के लिए कहा जाता है, लेकिन आज जब मोहल्ला क्लीनिक देखने गया तो आश्चर्य हुआ कि अगर दिल्ली की पहचान मोहल्ला क्लीनिक है तो फिर देश का सम्मान कहाँ है? असम में हर जिले में मेडिकल कॉलेज बन रहा है और दिल्ली में जब भाजपा की सरकार आएगी तो मोहल्ला क्लीनिक की बजाय यहां सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज बनाएँगे।

कांग्रेस की गोद में बैठ गए केजरीवाल

लक्ष्मी नगर में जनसभा के बाद हिमंता ने मीडिया से भी बातचीत की। उन्होंने कहा, “कभी कांग्रेस के साथ हाथ नहीं मिलाने की बात कहने वाले केजरीवाल अब कांग्रेस की गोद मे जाकर बैठ गए हैं और कांग्रेस के साथ इलू-इलू कर रहे हैं।” केजरीवाल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि परिवारवाद का विरोध करने वाले अरविंद केजरीवाल अब अपनी पत्‍नी को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। केजरीवाल खुद आलीशान बँगले में रहते हैं। उन्होंने कहा कि केजरीवाल जो भी बोलते हैं, ठीक उसके उल्टा करते हैं और अब वह मानसिक संतुलन खो चुके हैं और जब तक वह ठीक होंगे तब तक दोबारा जेल जाने का समय हो जाएगा।

स्वाति मालीवाल को क्यों पीटा गया? उपराष्ट्रपति से कार्रवाई की माँग

इस दौरान हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ हुई मार-पीट के लिए केजरीवाल को घेरा। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के सभापति एवं उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ जी को स्वतः संज्ञान लेकर दिल्ली के सीएम के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुनीता केजरीवाल को भी यह बताना चाहिए कि स्वाति मालीवाल की पिटाई क्यों की गई? 
जब मुख्यमंत्री आवास में महिला सुरक्षित नहीं, फिर कहाँ होगी?
माना अपने वकील को राज्य सभा भेजने के लिए इस्तीफा चाहिए था, इसका ये मतलब नहीं कि घसीट-घसीट कर मारोगे या मरवाओगे। वो भी उस महिला को जो तुम्हारी एक आवाज़ पर कुछ भी किसी भी हद तक जाने को तैयार रहती थी। जिस पीठ ने जमानत दी उसे केजरीवाल के criminal background को भी देखना था। दिल्ली के लोगों ने ऐसे आदमी को अपना मुख्यमंत्री चुना जिसने गणतंत्र के अवसर पर सेना भवन के पास धरने पर बैठ गणतंत्र दिवस में बाधा पहुँचाने का दुस्साहस किया था। बीजेपी को आम आदमी पार्टी में हुए सारे कांडों जैसे कोली हत्याकांड को जनता के सामने लाना चाहिए।  

 अवलोकन करें:-

Criminal प्रवित्ति के केजरीवाल से स्वाति मालीवाल की जान को खतरा… CM के घर महिला की पिटाई साजिश के तहत ह