दो दिन पहले संघ प्रमुख माननीय मोहन भागवत जी ने जो बयान दिया उसने हारी हुई कांग्रेस और विपक्ष को मोदी पर वार करने का हथियार दे दिया। सारे नेता मोदी पर बरस पड़े केवल इस बात पर कि भागवत जी ने कह दिया कि मणिपुर एक साल से शांति की राह देख रहा है। जयराम रमेश, कपिल सिब्बल, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले और भूपेश बघेल सबको खुजली हुई कि भागवत का तो मोदी को कहना मानना चाहिए और मणिपुर जाना चाहिए।
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लेखक चर्चित YouTuber |
मोहन भागवत की मणिपुर पर कही बात तो बड़ी पसंद आ रही है विपक्ष को लेकिन वो तो बहुत कुछ कहते हैं, कभी आप भी तो उनकी बातें माना करो लेकिन कांग्रेस ने अगले दिन कह दिया कि RSS अब अप्रासंगिक हो गया है। भागवत जी ने कहा कि “जो मर्यादा का पालन करे, अहंकार न करे, वही सच्चा सेवक है। इस मानसिकता से छुटकारा पाना होगा कि सिर्फ हमारा विचार सही है, दूसरे का नहीं। चुनाव प्रचार में झूठ फैलाया गया, झूठ पर आधारित मुकाबला था।आपसी सहमति बनाएं, विपक्ष को विरोधी नहीं, प्रतिपक्ष कहें”। क्या इसका मतलब यह था कि मोदी प्रधान सेवक तो क्या “सेवक” भी नहीं है?
इसके बाद आज संघ के वरिष्ठ नेता जो “मुस्लिम राष्ट्रीय मंच” चलाते हैं, इंद्रेश कुमार ने आग में घी डालने का काम किया और कहा कि “जिस पार्टी ने भक्ति की और जिसे पूरी शक्ति मिलनी चाहिए थी, उसे अहंकार के कारण भगवान ने 241 पर रोक दिया और जिनकी श्रद्धा राम में नहीं थी उन्हें 234 पर रोका और बताया कि तुम सफल नहीं हो सकते”।
इंद्रेश कुमार 'हाँ' अहंकार टूटा है। नरेंद्र मोदी का नहीं तुम्हारा, संघ का, सनातन विरोधियों का, मोदी को हराने विदेशी भीख पर पलने वालों का, अहंकार टूटा है भारत विरोधी विदेशियों और एक मुश्त मोदी के विरुद्ध वोट करने वालों का।
इंद्रेश कुमार "मुस्लिम राष्ट्रीय मंच" चलाकर अपनी दुकान चमकाते रहो, दुनिया को पागल बनांते रहो कि मुस्लिम संघ से जुड़ रहा है। लेकिन ये लोग संघ और बीजेपी दोनों को पागल बनाकर अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं, तिजोरी भर रहे हैं लेकिन बीजेपी को वोट नहीं दे रहे। इंद्रेश जिस दिन सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आया था, उसी दिन मुस्लिम समाज ने बीजेपी को वोट नहीं देने का इरादा कर लिया था। चलाते मुस्लिम मंच और मुस्लिम में क्या चल रहा है, उससे बेखबर हुए बैठ, प्रधानमंत्री पर कटाक्ष कर रहे हैं।
इन दोनों महानुभावों की बातें सुनकर मैं सदमे में हूं क्योंकि उन्होंने बोलते हुए एक बार भी नहीं सोचा कि ये क्या कह रहे हैं और इसका मतलब क्या निकल सकता है। लगता है ये नड्डा जी के बयान से आहत थे जिसमें उन्होंने कह दिया था कि भाजपा अब सक्षम है और अपना कार्य स्वयं कर सकती है, संघ एक cultural और social organisation है। ये बात 18 मई को कही थी और शायद इसलिए ही मोदी जी नड्डा जी को मंत्री बना कर भाजपा के अध्यक्ष पद से हटने का तो इशारा कर दिया। फिर भी मोदी में “अहंकार” कह कर आप उसे कांग्रेस की 100 गालियों से भी बड़ी गाली दे गए।
भागवत जी ने 2023 के विजयदशमी के संबोधन में खुलकर कहा था कि मोदी सरकार हर क्षेत्र में अच्छा काम कर रही है। मणिपुर के बारे में भी विस्तार से विचार रखे थे जब मणिपुर मामला जोरों से चल रहा था लेकिन सरकार पर कोई उंगली नहीं उठाई। आज उसी मणिपुर के लिए मोदी को दोष दे दिया। भागवत जी को शायद आभास भी नहीं है कि कांग्रेस मोदी को मणिपुर जाने के लिए क्यों जिद पकड़े हुए है। पंजाब में मोदी पर हमला होने को था और मणिपुर में शायद कांग्रेस और विदेशी ताकतों ने (जो मणिपुर कलेश को प्रायोजित किए हुए हैं कांग्रेस के साथ) मोदी की हत्या की कोई साजिश रच रखी हो। यदि मोदी को मार दिया गया तो कौन जिम्मेदार होगा?
इंद्रेश कुमार से मैं पूछना चाहता हूं कि उनके मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के 10,000 सदस्यों ने कितने मुस्लिम वोट मोदी को दिलवाए जो आज आप अहंकार की बातें छौंक रहे हो।
भागवत जी आप विपक्ष को विरोधी न कह कर प्रतिपक्ष कहने की वकालत कर रहे हो जबकि वे लोग “घोर विरोधी” हैं मोदी के ही नहीं, संघ के भी क्योंकि उनका बच्चा बच्चा संघ को केवल एक नज़र से देखता है कि “संघ ने गांधी की हत्या की” और आप उनका सम्मान करने को कह रहे हो। आपके घर में आग लगी हो तो बाहर वाले ही तापते हैं।
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