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उत्तर प्रदेश : मोदी ने शायद विपक्ष की गठरी मार रखी है इसीलिए गाली देने का सिलसिला नहीं रुक रहा, अब सपा नेता ने कहा ‘मोदी छुल-छुल कर…’

भारत में मोदी-विरोधी विपक्ष चुनाव परिणाम आने के बाद भी अपनी रैलियों में मोदी को गाली देने से बाज नहीं आ रहे, जैसे मोदी ने इनकी कोई गठरी मार ली हो। नरेंद्र मोदी पहला ऐसा प्रधानमंत्री है, जो थोक के भाव में गालियां खाने के बाद भी विचलित होने की बजाए बराबर जनहित में कार्यरत है। जिसका सबसे ज्यादा फायदा एकजुट होकर मोदी के हराने वाले उठा रहे हैं। इस बात से कोई हराम फरमोश इंकार नहीं कर सकता।   

देश के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विपक्षी नेताओं की ओर से गाली देने का सिलसिला जारी है। विपक्षी नेताओं की ओर से लगातार विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब अखिलेश यादव के करीबी समाजवादी पार्टी नेता हाजी रजा ने उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया है। सपा नेता हाजी रजा ने पार्टी सांसद नरेश उत्तम पटेल के स्वागत कार्यक्रम के दौरान कहा कि जिस समय हमारा सांसद लोकसभा में शेर की तरह दहाड़ेगा मोदी छुल-छुल करके मूतेगा। बोलने वाले को अपनी बात रखने वाला चाहिए। सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो फतेहपुर जिले के सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। सुल्तानपुर घोष थाने में सपा नेता के खिलाफ इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है।


सपा नेता हाजी रजा- छुल-छुल करके…
अखिलेश यादव के करीबी समाजवादी पार्टी नेता हाजी रजा ने उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। सपा नेता हाजी रजा ने पार्टी सांसद नरेश उत्तम पटेल के स्वागत कार्यक्रम के दौरान कहा, “हम आपको इस मंच के माध्यम से बताना चाहते हैं और सांसद जी तरफ से भी आश्वस्त करना चाहते हैं कि अब ये फतेहपुर जनपद में नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश में नहीं चलने वाले। जिस समय हमारा सांसद लोकसभा में शेर की तरह दहाड़ेगा ना मोदी छुल-छुल करके मूतेगा। बोलने वाला चाहिए। अपनी बात रखने वाला चाहिए।”

औरंगजेब से तुलना कर दी जमीन में गाड़ने की धमकी
शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत ने महाराष्ट्र के अहमदनगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को जमीन में गाड़ने की धमकी दी। प्रधाममंत्री पद और भाषा की मर्यादा भूल राउत तू-तड़ाक भी करने लगे। उद्धव ठाकरे के करीबी संजय राउत ने प्रधानमंत्री मोदी की तुलना औरंगजेब से करने के साथ मराठी में दिए गए भाषण में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म महाराष्ट्र में हुआ और औरंगजेब का जन्म गुजरात में हुआ। आप इतिहास देखिए, औरंगजेब का जन्म नरेन्द्र मोदी के गांव में हुआ है। अहमदाबाद के बगल में दाहोद नाम का गांव है, जहां औरंगजेब का जन्म हुआ था। गुजरात में औरंगजेब का जन्म हुआ, यही कारण है कि वह हमारे साथ औरंगजेब की तरह बर्ताव कर रहे हैं। लेकिन याद रहे कि एक औरंगजेब को हमने इस महाराष्ट्र की धरती में गाड़ा है। हमने उस औरंगजेब को महाराष्ट्र की धरती में गाड़ दी। मोदी तू क्या चीज है? मोदी तू कौन है?

मुकेश साहनी ने कहा- हिजड़ा

विकासशील इंसान पार्टी के नेता और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी, इतना झूठ बोलते हैं हम लोगों को शर्म आ रहा है कि देश का प्रधानमंत्री सिर्फ चुनाव जीतने के लिए इतना झूठ नहीं बोलना चाहिए। उनको पहले बताना चाहिए कि उन्होंने वादा किया उस पर काम करना चाहिए। कल उन्होंने कहा कि मंडल कमीशन को बदलने वाला…. आप 10 साल से ताली बजा रहे थे क्या ? 10 साल से आप सरकार में क्यों नहीं आपने मंडल कमीशन को आपने लागू कर दिया… आप 10 साल हिजड़ा बनकर ताली बजा रहे थे क्या?

अलका लांबा ने रावण से की तुलना
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की करीबी नेता अलका लांबा ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति विवादित बयान दिया है। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने पीएम मोदी की तुलना रावण से की है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अलका लांबा ने कहा कि रावण को तो बहुत बड़ा ब्राह्मण मानते हैं। पूजा होती है इस देश में। मुझे लगता है रावण में 10 कमियां थी। मां सीता का उसने अपहरण किया, पुरुषोत्तम राम एक मां सीता के लिए पूरी लंका से, रावण से अपना सब कुछ त्याग कर लड़े। प्रधानमंत्री जी कुछ त्याग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने सीता हरण की थी, प्रधानमंत्री देश के गरीब मजदूर के अधिकार का हनन कर अपने पूंजीपति मित्रों को सौंप रहे हैं। फर्क आप खुद देख लीजिएगा।

एलन मस्क आपके देश में वोटिंग के लिए उपयोग होने वाली Electronic Machines पर सवाल उठ सकता है; भारत की EVM में कोई दोष नहीं निकाल सका ; हम अमेरिका से बहुत आगे हैं ; चुनाव आयोग को एलन मस्क पर 50 करोड़ का मानहानि मुकदमा ठोक देना चाहिए

सुभाष चन्द्र

बुजुर्गों की एक कहावत है कि जो परिवार अपने सदस्यों पर यकीन नहीं करने की बजाए परिवार से बाहर के लोगों पर ज्यादा यकीन करता है, उस परिवार में 24 घंटे कलेश रहता है जो एक सुखद परिवार के अच्छे लक्षण नहीं। वह परिवार आर्थिक और आत्म-सम्मान में किसी गिनती में नहीं रहता। ठीक वही हालत हमारे विपक्ष की है। जो अपने संसाधनों पर विश्वास करने की बजाए भारत विरोधी विदेशियों के हाथ कठपुतली बना हुआ है। 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
राहुल गाँधी ने एक बार कहा था कि देश में मिट्टी का तेल फैला हुआ है बस एक माजिस दिखाने की जरुरत है। गलत नहीं कहा था, बिल्कुल ठीक कहा था; क्योकि तेल फ़ैलाने वाला यही विदेशियों के हाथ की कठपुतली और माजिस दिखाने वाला भी यही। सबूत सबके सामने हैं, तरस आता है बुद्धिविहीन विपक्ष को वोट देने वालों पर। 

टेस्ला के CEO और अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने कहा है कि हम लोगों को EVM को हटा देना चाहिए क्योंकि इसे मानव के अलावा Artificial Intelligence (AI) से हैक किया जा सकता है। बस इतना सुन कर विपक्ष की तो बांछें खिल गईं राहुल गांधी उछल पड़ा कि हमारे EVM में पारदर्शिता की कमी है, EVM हमारा Black Box है अखिलेश यादव फ़ैल गया कि बैलट बॉक्स से चुनाव होने चाहियें

विपक्ष बैलेट क्यों चाह रहा है, आज की युवा पीढ़ी को मालूम हो कि EVM से पहले विपक्ष बूथ कैप्चरिंग कर अंधाधुंध बैलेट पर अपने चुनाव चिन्ह पर मोहर लगाकर जीत जाते थे, इसीलिए विदेशी भीख पर आश्रित विपक्ष EVM का विरोध कर रहा है। राहुल से पूछा जाये कि नेहरू ने हारे हुए मौलाना आज़ाद को विजयी कैसे घोषित करवा, हिन्दू महासभा के विजयी उम्मीदवार विशन सेठ की वोटों को आज़ाद की मिलवाकर हारे हुए आज़ाद को विजयी घोषित करवा दिया। अगर उस समय EVM होती नेहरू को धूल ही चाटनी होती।   

कांग्रेस के राशिद अल्वी ने कहा कि एलन मस्क बड़े आदमी हैं, सबसे अमीर उद्योगपति हैं, उन्होंने EVM पर कुछ बोला है तो ठीक ही होगा एक भाई ने कहा कि जिस system पर उंगली उठे, उसे बंद कर देना चाहिए फिर तो गांधी परिवार के कांग्रेस पर कब्जे पर भी उंगली उठती है, उन्हें भी कांग्रेस से बाहर करो

यानी अमेरिकी मस्क कहे तो ठीक है, BBC कहे मोदी के खिलाफ तो वो भी ठीक है और जो भी विदेशी भारत के खिलाफ बोलते हैं, उनका कहा तो पत्थर की लकीर मान लेते हैं

अब चुनाव आयोग ने एलन मस्क को चुनौती दी है कि भारत में आकर हमारी EVM को हैक  करके दिखाइए एक अख़बार के खिलाफ आयोग ने मुकदमा भी दर्ज किया है

एलन मस्क, कांग्रेस और विपक्ष को इतना भी अहसास नहीं है कि कांग्रेस की सीटें करीब दोगुनी हो गई, सपा की सीट 5 से 37 हो गई और 10-12 दिन तक EVM पर किसी ने सवाल नहीं उठाया अगर EVM में गड़बड़ होती तो भाजपा की सीट 400 ही होती, 303 से 240 नहीं रहती और कांग्रेस समेत विपक्ष की सीटें न बढ़ती बस मुंह उठा कर EVM का चरित्र हनन करने से मतलब है

एलन मस्क को पता नहीं भारत में अनेक लोगों ने EVM में छेड़छाड़ होने का दावा किया और जब चुनाव आयोग ने उन्हें आयोग में आकर छेड़छाड़ करके आरोप साबित करने को कहा तो कोई नहीं कर सका केजरीवाल का सौरभ भारद्वाज आयोग में जाकर फेल होकर आया एलन मस्क और कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष को पता है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में 40 याचिकाएं लगाईं थी EVM में दोष निकाल कर उसे हटाने के लिए लेकिन सभी याचिकाएं अदालत ने ख़ारिज की और EVM में किसी प्रकार की त्रुटि मानने से मना कर दिया अब मस्क भारत आएं और चुनाव आयोग की चुनौती स्वीकार करें। चुनाव आयोग को मास्क पर कम से कम 50 करोड़ रूपए मानहानि का मुकदमा दर्ज करना चाहिए। 

एलन मस्क, यह हो सकता है कि अमेरिका में उपयोग होने वाली Electronic Machines सफल ना हो रही हों लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमारी मशीन भी गलत है। भारत Technology में अमेरिका से कम नहीं है और कांग्रेस को याद रखना चाहिए कि EVM सबसे पहले इंदिरा गांधी के समय में 1982 में शुरू हुई थी

हम अमेरिका से कितने आगे हैं, एलन मस्क को यह भी पता होना चाहिए भारत में महिलाओं को वोट देने का अधिकार आज़ादी मिलते ही मिल गया था जबकि अमेरिका में 1776 में आज़ादी मिलने के बाद 1920 यह अधिकार पहले White Women को मिला यानी 144 वर्ष बाद और अश्वेत महिलाओं को यह अधिकार उसके भी 50 वर्ष के बाद मिला इसलिए भारत आपसे कहीं पीछे है, तो कहीं बहुत आगे भी है

मोदी को कांग्रेस की 100 गालियों से भद्दी है भागवत जी और इंद्रेश कुमार की गाली ; संघ की मर्यादाएं तोड़ कर बोले और विपक्ष को खुश कर दिया दोनों ने; अपने घर को आग लगाने से पड़ोसी ही खुश होते हैं

 सुभाष चन्द्र

दो दिन पहले संघ प्रमुख माननीय मोहन भागवत जी ने जो बयान दिया उसने हारी हुई कांग्रेस और विपक्ष को मोदी पर वार करने का हथियार दे दिया सारे नेता मोदी पर बरस पड़े केवल इस बात पर कि भागवत जी ने कह दिया कि मणिपुर एक साल से शांति की राह देख रहा है।  जयराम रमेश, कपिल सिब्बल, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले और भूपेश बघेल सबको खुजली हुई कि भागवत का तो मोदी को कहना मानना चाहिए और मणिपुर जाना चाहिए

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चर्चित YouTuber 
राममंदिर के बाद बाद काशी पर हो रहे विवाद पर भी भागवत ने कहा कि 'हमें हर मस्जिद में शिवलिंग नहीं देखना चाहिए।' ये बात कहने का क्या मतलब था? भागवत क्या अपना प्रमुख साप्ताहिक Organiser नहीं पढ़ते? या इतिहासिक प्रवचन देने वाले भागवत लगभग 30+वर्ष पूर्व, संपादक प्रो वेद प्रकाश भाटिया के कार्यकाल में इस साप्ताहिक में प्रकाशित डॉ गणेशी लाल वर्मा लिखित श्रृंखला "Conversion of Hindu Temples" भूल गए? तब तो कोई विरोध नहीं किया, क्यों?

मोहन भागवत की मणिपुर पर कही बात तो बड़ी पसंद आ रही है विपक्ष को लेकिन वो तो बहुत कुछ कहते हैं, कभी आप भी तो उनकी बातें माना करो लेकिन कांग्रेस ने अगले दिन कह दिया कि RSS अब अप्रासंगिक हो गया है भागवत जी ने कहा कि “जो मर्यादा का पालन करे, अहंकार न करे, वही सच्चा सेवक है इस मानसिकता से छुटकारा पाना होगा कि सिर्फ हमारा विचार सही है, दूसरे का नहीं चुनाव प्रचार में झूठ फैलाया गया, झूठ पर आधारित मुकाबला थाआपसी सहमति बनाएं, विपक्ष को विरोधी नहीं, प्रतिपक्ष कहें” क्या इसका मतलब यह था कि मोदी प्रधान सेवक तो क्या “सेवक” भी नहीं है?

इसके बाद आज संघ के वरिष्ठ नेता जो “मुस्लिम राष्ट्रीय मंच” चलाते हैं, इंद्रेश कुमार ने आग में घी डालने का काम किया और कहा कि “जिस पार्टी ने भक्ति की और जिसे पूरी शक्ति मिलनी चाहिए थी, उसे अहंकार के कारण भगवान ने 241 पर रोक दिया और जिनकी श्रद्धा राम में नहीं थी उन्हें 234 पर रोका और बताया कि तुम सफल नहीं हो सकते”

इंद्रेश कुमार 'हाँ' अहंकार टूटा है। नरेंद्र मोदी का नहीं तुम्हारा, संघ का, सनातन विरोधियों का, मोदी को हराने विदेशी भीख पर पलने वालों का, अहंकार टूटा है भारत विरोधी विदेशियों और एक मुश्त मोदी के विरुद्ध वोट करने वालों का। 

इंद्रेश कुमार "मुस्लिम राष्ट्रीय मंच" चलाकर अपनी दुकान चमकाते रहो, दुनिया को पागल बनांते रहो कि मुस्लिम संघ से जुड़ रहा है। लेकिन ये लोग संघ और बीजेपी दोनों को पागल बनाकर अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं, तिजोरी भर रहे हैं लेकिन बीजेपी को वोट नहीं दे रहे। इंद्रेश जिस दिन सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आया था, उसी दिन मुस्लिम समाज ने बीजेपी को वोट नहीं देने का इरादा कर लिया था। चलाते मुस्लिम मंच और मुस्लिम में क्या चल रहा है, उससे बेखबर हुए बैठ, प्रधानमंत्री पर कटाक्ष कर रहे हैं।

इन दोनों महानुभावों की बातें सुनकर मैं सदमे में हूं क्योंकि उन्होंने बोलते हुए एक बार भी नहीं सोचा कि ये क्या कह रहे हैं और इसका मतलब क्या निकल सकता है लगता है ये नड्डा जी के बयान से आहत थे जिसमें उन्होंने कह दिया था कि भाजपा अब सक्षम है और अपना कार्य स्वयं कर सकती है, संघ एक cultural और social organisation है ये बात 18 मई को कही थी और शायद इसलिए ही मोदी जी नड्डा जी को मंत्री बना कर भाजपा के अध्यक्ष पद से हटने का तो इशारा कर दिया फिर भी मोदी में “अहंकार” कह कर आप उसे कांग्रेस की 100 गालियों से भी बड़ी गाली दे गए 

भागवत जी ने 2023 के विजयदशमी के संबोधन में खुलकर कहा था कि मोदी सरकार हर क्षेत्र में अच्छा काम कर रही है मणिपुर के बारे में भी विस्तार से विचार रखे थे जब मणिपुर मामला जोरों से चल रहा था लेकिन सरकार पर कोई उंगली नहीं उठाई आज उसी मणिपुर के लिए मोदी को दोष दे दिया भागवत जी को शायद आभास भी नहीं है कि कांग्रेस मोदी को मणिपुर जाने के लिए क्यों जिद पकड़े हुए है पंजाब में मोदी पर हमला होने को था और मणिपुर में शायद कांग्रेस और विदेशी ताकतों ने (जो मणिपुर कलेश को प्रायोजित किए हुए हैं कांग्रेस के साथ) मोदी की हत्या की कोई साजिश रच रखी हो यदि मोदी को मार दिया गया तो कौन जिम्मेदार होगा?

इंद्रेश कुमार से मैं पूछना चाहता हूं कि उनके मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के 10,000 सदस्यों ने कितने मुस्लिम वोट मोदी को दिलवाए जो आज आप अहंकार की बातें छौंक रहे हो

भागवत जी आप विपक्ष को विरोधी न कह कर प्रतिपक्ष कहने की वकालत कर रहे हो जबकि वे लोग “घोर विरोधी” हैं मोदी के ही नहीं, संघ के भी क्योंकि उनका बच्चा बच्चा संघ को केवल एक नज़र से देखता है कि “संघ ने गांधी की हत्या की” और आप उनका सम्मान करने को कह रहे हो आपके घर में आग लगी हो तो बाहर वाले ही तापते हैं

ऐतिहासिक जीत, क्यों? मोदी को रोकने मुस्लिमों द्वारा एकमुश्त विरोध में वोट, आरएसएस का विरोध और भारत विरोधी विदेशी ताकतों द्वारा अरबों खर्च करने के बावजूद जीत ; आखिर कब तक खतरों के खिलाडी मोदी को अग्नि-परीक्षा देनी होगी?

आज(जून 9) नरेंद्र मोदी पहली बार लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री की शपथ ले रहे हैं। मोदी को नेता चुने जाने पर अपने सम्बोधन में बीजेपी जीत को ऐतिहासिक बताया। क्यों? इस रहस्य को समझना होगा। स्पष्ट है जिस मोदी को सत्ता से हटाने मुस्लिम एकमुश्त विरोध में वोट, भारत विरोधी विदेशी ताकतों द्वारा विपक्ष पर अरबों खर्च करना आदि जीत को ऐतिहासिक बनाता है। इस सबसे अधिक जीत के ऐतिहासिक बनने का कारण है आरएसएस विरोध। 

आखिर क्यों संघ मोदी के विरोध में खड़ा हुआ? क्या मोदी देश और सनातन के विरुद्ध काम कर रहे थे? क्या डॉ हेडगवार ने आरएसएस का गठन सनातन और देशहित के विरुद्ध किया था? यदि नहीं, फिर संघ ने क्यों मोदी का विरोध किया? यह पहली बार नहीं हुआ है, यह विरोध तब से चल रहा है जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। मोदी और संघ के बीच मनमुटाव की कहानी से YouTube पर भरमार है। क्या संघ अपनी दादागिरी चलाता रहेगा? यदि संघ ने अपना रवैया नहीं बदला, फिर वह दिन भी अधिक दूर नहीं होगा जब जनता ही इसे उस स्थान पर पहुंचा देगी जहां जवाहरलाल नेहरू से लेकर वर्तमान विपक्ष तक पहुँचाना जा रहा है। आरएसएस को डॉ हेडगवार का सपना साकार करने मोदी विरोध त्याग मोदी के साथ खड़ा होना चाहिए। देखिए संघ विरोध का वीडियो, बहुत हैं ऐसे वीडियो :-

 

मेरा अपना व्यक्तिगत अनुभव है कि नरेंद्र मोदी हर पीड़ित के साथ है, चाहे वह किसी भी संस्था और समुदाय से हो। ऑफिस में मेरे एक वरिष्ठ सहयोगी को सेवानिर्वित होने पर ग्रेचुटी के नाम पर रूपए देने की बजाए 40,000 रूपए कंपनी को देने को कहा। क्या कभी किसी की ग्रेचुटी minus में हो सकती है? हम दो महीने पहले रिटायर हो गए थे। सब तरफ हाथ-पैर मारने के बाद कुछ नहीं होने पर जब मुझसे संपर्क किया, तुरन्त नरेंद्र मोदी को शिकायत भेजने को कहने पर जवाब मिला कि 'मोदी विरुद्ध कुछ नहीं करेंगे।' मैंने कहा ऐसी बात नहीं, मोदी हर पीड़ित के साथ है। यह मेरा पत्रकारिता अनुभव कहता है। जो शत-प्रतिशत सही साबित भी हुआ। संक्षेप में, जो कंपनी कर्मचारी से 40,000 रूपए मांग रही थी, उल्टे उसी कंपनी को कर्मचारी को लगभग 3,50,000 रूपए का चैक दिया। केवल उसी कर्मचारी को ही नहीं, मुझ सहित पहले रिटायर हो चुके कर्मचारियों को बुला-बुलाकर बाकी राशि दी। कंपनी इतनी शर्मसार हुई कि किसी को ऑफिस के अंदर नहीं, बल्कि स्वागत कक्ष में रोक, लेखाधिकारी द्वारा नीचे आकर चैक दिए। क्योकि कार्यवाही होने के कारण ऑफिस में प्रवेश की अनुमति नहीं। और बाद में रिटायर होने वालों को उचित ग्रेचुटी दी गयी। ये है मोदी की नियत और नीति।  

लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम सबके सामने हैं। देश ने NDA की गठबंधन सरकार को जनमत दिया है और भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। भाजपा को इन चुनावों में 240 सीटें हासिल हुई हैं। वह अकेले दम पर बहुमत नहीं पा सकी है। उसका वोट प्रतिशत भी देश में 37.3% से 36.6% हो गया है। भाजपा के वोट शेयर में तो मात्र 0.6% की गिरावट है लेकिन उसकी सीटों का आँकड़ा इससे गड़बड़ा गया है। भाजपा 2019 में 303 सीटें आईं थी जबकि 2024 में उसकी सीटें घट कर 240 हो गईं, यानि उसे 63 सीटों का नुकसान हुआ।

चुनाव जैसे-जैसे बढ़ा, भाजपा को हुआ नुकसान

लोकसभा चुनाव में एक ट्रेंड देखने को मिला है, भाजपा को अधिकांश चुनाव के अंतिम चरणों में नुकसान हुआ है। इसके लिए बिहार और उत्तर प्रदेश का उदाहरण लिया जाना चाहिए। भाजपा को भी सबसे बड़ा नुकसान उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है। भाजपा को उत्तर प्रदेश में 33 सीट हासिल हुई हैं जबकि सपा यहाँ 38 और कॉन्ग्रेस 6 सीटें जीतने में सफल रही है। चुनाव के बढ़ने के साथ ही भाजपा और सपा की जीत का फासला भी उत्तर प्रदेश में बढ़ता गया है।
वोटिंग के चरणों के हिसाब से देखा जाए तो पहले चरण में हुए चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा को 8 में से 3 जबकि दूसरे चरण में सभी 8 सीटों पर जीत मिली है। भाजपा पहले चरण में मुस्लिम बहुल सीटों पर ही पिछड़ी है। भाजपा को तीसरे चरण में भी काफी नुकसान हो गया। 10 में से 6 सीट तीसरे चरण में भाजपा हार गई, यह सीटें सपा ले गई। चौथे चरण में भाजपा को 13 में से 8 सीटों पर विजय श्री मिली। इसमें भी यादव परिवार की सीटों पर ही SP जीत हासिल कर सकी।
वहीं सबसे अधिक नुकसान भाजपा को पाँचवे और छठे चरण में हुआ। पाँचवे चरण में सपा-कॉन्ग्रेस गठबंधन ने 14 में से 10 सीट जीती। छठे चरण में सपा कॉन्ग्रेस गठबंधन ने 14 में से 11 सीट जीती। आखिरी सातवें चरण में 13 में से 6 सीट सपा जीत गई। ऐसे में उत्तर प्रदेश ने जहाँ चौथे चरण तक भाजपा का प्रदर्शन ठीक रहा, वहीं इसके बाद उसको बड़े झटके लगे। सपा-कॉन्ग्रेस गठबंधन की 60% से अधिक सीटें पाँचवे, छठे और सातवें चरण से आई हैं।

बिहार में भी यही कहानी

बिहार में NDA को भी सबसे बड़ा नुकसान अंतिम चरम में ही हुआ है। बिहार में NDA गठबंधन ने 40 में से 30 सीट जीती हैं। बाक़ी की 10 सीटों में 9 विपक्षी INDI गठबंधन को मिली हैं। बिहार में सातवें चरण में 8 सीटों पर चुनाव हुआ था जिसमें विपक्ष को 6 सीट मिलीं।
अंतिम चरण में राजद को पाटलिपुत्र, बक्सर और जहानाबाद की सीट मिली। कॉन्ग्रेस को अंतिम चरण में सासाराम और कम्युनिस्ट पार्टी को सीट मिली। INDI गठबंधन को मिलने वाली बाकी तीन सीटों में दो मुस्लिम प्रभाव वाले इलाकों में थी जबकि एक सीट उसे पहले चरण में ही मिल गई थी। तीसरे, चौथे और पाँचवे चरण में INDI गठबंधन का खाता तक बिहार में नहीं खुला।

देश में भी यही ट्रेंड

शुरूआती चरणों में अच्छा प्रदर्शन और अंतिम चरणों में खराब प्रदर्शन की यह कहानी मात्र उत्तर प्रदेश और बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश में भाजपा के साथ घटित होती दिखाई दे रही है। देश भर में भाजपा को पहले और दूसरे चरण में 189 में से 76 सीटें मिली हैं। तीसरे और चौथे चरण में भाजपा को सबसे अधिक फायदा देश में हुआ है। तीसरे और चौथे चरण में देश की 190 सीटों पर चुनाव हुआ था और इसमें भाजपा को 96 सीटों पर जीत मिली।
पाँचवे और छठे चरण से भाजपा को बड़ा नुकसान होना चालू हुआ। पाँचवे और छठे चरण में देश में 107 सीट पर चुनाव हुए, इसमें भाजपा 50 सीट जीत पाई। अंतिम चरण में भी भाजपा का प्रदर्शन कुछ खास अच्छा नहीं रहा। अंतिम चरण की 57 सीटों पर हुए मतदान में भी भाजपा को केवल 17 सीटें मिली। ऐसे में भाजपा को देशव्यापी नुकसान आखिरी तीन चरणों में हुआ।

क्या-क्या फैक्टर रहे?

पहले चरण से अंतिम चरण की तरफ जाते हुए भाजपा को यह चुनावी नुकसान क्यों हुआ, इसके कई कयास लगाए जा रहे हैं। एक कयास यह है कि शुरूआती चरणों में देश में गर्मी कम पड़ रही थी और तब वोटर बाहर निकल रहे थे जिससे भाजपा को फायदा हुआ। बाद के चरणों में देश में गर्मी बढ़ गई और वोटर निकलने से कतराने लगे जिससे भाजपा को नुकसान हुआ। इसके अलावा एक कयास यह है कि पहले चरण में भाजपा के पास फीडबैक पहुँचा और उसने अपना चुनावी अभियान दुरुस्त किया जिसका फायदा तीसरे और चौथे चरण में मिला।
यह सुधार की गति बाद के चरणों में नहीं बनी रही जिसके कारण इन चरणों में नुकसान हुआ। चुनाव प्रचार की दिशा और हर चरण में बदलते मुद्दे भी इसका एक कारण माने जा रहे हैं। हालाँकि, यह सभी केवल कयास हैं और इनको प्रमाणित करने वाले तथ्य अभी नहीं पुष्ट हो पाए हैं, ऐसे में अभी यह नहीं कहा जा सकता कि भाजपा को शुरूआती चरणों में फायदा और बाद के चरणों में फायदा क्यों हुआ।

मोदी को सत्ता से हटाने का मंसूबा रखने वालों को निराशा

अपने पिछले लेखों में स्पष्ट लिखा था कि नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने विदेशों में मोदी विरोधियों की हालत ख़राब होगी, जिन्होंने मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए भारत में करोड़ों रुपये स्वाहा कर दिए।
भारत में मोदी विरोधी मोदी सरकार को 400+ के जादुई आंकड़े से दूर रखने में ख़ुशी मना रही है, लेकिन
देश और दुनियाभर की निगाहें अब भारत में 4 जून को आने वाले
विदेश में मोदी विरोधी मातम के माहौल में पहुँच गया है। जॉर्ज सोरोस आदि मोदी विरोधियों ने मोदी से सत्ता छीनने के करोडो रूपए खर्च किया, सब पर मोदी ने पानी फेर दिया।
हिन्दू जाति में बंट गयी, सनातन को अपमानित करने वालों की चाशनी में डूब गए, जबकि मुस्लिम समाज में भाजपा के विरुद्ध जो गुप्त मंत्रणा चली, लेकिन हिन्दू सनातन विरोधियों के चुंगल में फंस सनातन विरोधियों को बलशाली कर दिया।

जिस तरह 1977 में कम्युनिस्टों को छोड़ समस्त विपक्ष ने इंदिरा सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था, लेकिन 2024 में विपक्ष एकजुट हुआ लेकिन मोदी को सत्ता मुक्त करने में पूर्णरूप से असफल है। दूसरे, I.N.D.I.गठबंधन के कुछेक घातक प्रधानमंत्री बनने का सपना देखते हुए अपने राज्य में बैनर देखे जा सकते हैं। यानि अगर किसी कारणवश का खेला खेल विपक्ष सरकार बना भी लेता है, धराशाही होगी, क्योकि महत्वकांशी सारे हैं।

लोकसभा चुनाव 2024 के रिजल्ट पर टिकी है। हालांकि चुनाव संपन्न होने के बाद एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आ चुके हैं, जिनके मुताबिक देश में पीएम मोदी की वापसी हो रही है और तीसरी बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है। लगभग सभी एग्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन 350 सीटों से ज्यादा जीत सकती है। चीन और पाकिस्तान समेत दुनिया के कई देश जो उम्मीद लगाए बैठे हैं कि भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ से सत्ता छूट जाए और भारत में मजबूत सरकार नहीं बने, उनके लिए ये एग्जिट पोल निराशा भरा है। पाकिस्तान के पूर्व विदेश सचिव एजाज चौधरी ने कहा कि नरेंद्र मोदी सत्ता में लौटे तो इस बार भारत और पाक में जंग जैसे हालात भी बन सकते हैं। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक,चीनी एक्सपर्ट्स ने भारत और चीन के बीच सहयोग पर जोर दिया। उन्हें उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए खुला संवाद बना रहेगा। वहीं अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स ने लिखा कि मोदी की ताकत बढ़ती जा रही है।

विदेशी मीडिया में किसी ने नकारात्मक तो किसी ने संतुलित रुख अपनाया
लोकसभा चुनाव 2024 के एग्जिट पोल को लेकर विदेश के मीडिया संस्थानों में से कुछ का नकारात्मक भाव रहा तो किसी ने संतुलित रुख अपनाया और कुछ ने भारतीय लोकतंत्र के महापर्व को जमकर सराहा। लोकसभा चुनाव के अधिकांश एग्जिट पोल ने ‘फिर एक बार मोदी सरकार’ की भविष्यवाणी कर दी है। एग्जिट पोल की मानें तो भारत में तीसरी बार मोदी सरकार बनने जा रही है। कई एग्जिट पोल ने तो भाजपा के ‘अबकी बार 400 पार’ के नारे पर भी मुहर लगा दी है। अब सभी की निगाहें 4 जून को आने वाले लोकसभा चुनाव के फाइनल नतीजे पर टिकी है।

मोदी की ताकत बढ़ती जा रहीः न्यूयार्क टाइम्स
अमेरिका के प्रमुख अखबार न्यूयार्क टाइम्स ने लिखा कि मोदी की ताकत बढ़ती जा रही है और भारत के लोग उन्हें और मजबूत बनाते हुए दिख रहे हैं। अखबार ने भाजपा के इस चुनाव में अपने हिंदू राष्ट्रवादी एजेंडे के साथ उतरने और अपनी कल्याणकारी योजनाओं का जोर-शोर से प्रचार करने की बात लिखी है। लेख में लिखा है कि भाजपा के समर्थक उससे काफी खुश हैं और लगातार दो बार सत्ता में रहने के बाद भी मोदी लोकप्रिय बने हुए हैं।

भारत के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण चुनावः वाशिंगटन पोस्ट
अमेरिका के एक अन्य अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा कि भारत का 6 सप्ताह तक चलने वाला राष्ट्रीय चुनाव शनिवार को समाप्त हो गया, जिसमें अधिकांश एग्जिट पोल में अनुमान लगाया गया कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी लगातार तीसरे कार्यकाल के साथ सत्ता में अपने दशक का विस्तार करने के लिए तैयार हैं। अखबार ने लिखा है कि यह चुनाव भारत के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण चुनावों में से एक माना जाता है। यदि मोदी जीतते हैं, तो वह देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बाद तीसरी बार सत्ता बरकरार रखने वाले दूसरे भारतीय नेता होंगे।

सुप्रीम कोर्ट में एक “काल्पनिक केस”, मीलार्ड मोदी को रोको, पागल कर दिया हम सबको उसने, हमें “बाबरी मस्जिद” दे दो

सुभाष चन्द्र 

रात को सुप्रीम कोर्ट खुलवाने वकील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध फिर कोर्ट पहुँच गए। लेकिन इस बार  सुप्रीम कोर्ट खचाखच वकीलों से भरा हुआ था आज जब करीब 50 वकील एकसाथ खड़े हो गए चीखते हुए। मीलार्ड हमें बचा लो, मोदी से बचा लो, उसे रोको, उसने हम सबको पागल कर दिया है, राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को रोक दो जनाब, चुनाव के बाद होना चाहिए जो कुछ होना है, हम कहीं के नहीं रहेंगे, अपना फैसला बदल दो जनाब, हमें हमारी “बाबरी मस्जिद” वापस दे दो अगर मस्जिद वापस नहीं मिली तो मीलॉर्ड हम भूखे मर जाएंगे। हमारी दुकानें बंद हो जाएँगी। हमारे परिवारों और ऐशोआराम पर रहम करिये। रहम करिये महाराज, रहम करिये महाराज। 

जज साहब भड़क गए, मोदी को हम कैसे रोक सकते हैं, वो क्या कोई illegal काम कर रहा है, उसने जो किया हमारे आदेश के बाद किया। और तुम लोग पागल हो रहे हो तो उसमे हम क्या करें, यहां क्यों आये हो, पागलखाने जाइए

जनाब उन्होंने हमारे “बाबर” की बनाई मस्जिद तोड़ी जिस पर मंदिर बनाया है उन्होंने, हमें हमारे “बाबर” की मस्जिद लौटा दो

अच्छा, तो वो तुम्हारा “बाबर” था जिसने रामजन्मभूमि मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनाई थी और मंदिर वापस पाने के लिए हिन्दू 500 साल से लड़ाई लड़ रहे थे तो एक बात बताइए, आपका “बाबर” से क्या रिश्ता है, कहां से आया था और क्यों आया था हिन्दुस्थान

जनाब वो तो अफगानिस्तान का था, हिन्दुस्थान को लूटने की मंशा से आया था लेकिन मुसलमानों के लिए उसने जो मस्जिद बनाई थी, हम तो वो मांग रहे हैं, मंदिर तो हिन्दू कहीं भी बना सकते हैं लेकिन जब कोई मस्जिद शहीद होती है तो दुनिया भर कर मुसलमान दुखी होता है

यानी एक लुटेरे से तुम्हे इतनी मोहब्बत है उसने क्या हिन्दुस्थान में “मोहब्बत की दुकान” खोली थी और अगर मंदिर कहीं भी बन सकता है तो मस्जिद भी कहीं और बना सकते हो, हमने तुम्हे उसकी भी इज़ाज़त दी थी जो न भी देते तो कुछ गलत नहीं होता

अब आगे जज साहब और तैश में आ गए, तुम कहते हो मस्जिद टूटने से दुनियाभर के मुसलमान दुखी होते हैं तो भैय्या ये बताओ, चीन ने 1500 मस्जिद ख़ाक में मिला दी और इज़रायल ने गाज़ा में 200 मस्जिद तोड़ दी, कभी कोई उनके लिए बोलता है और क्या तुम कभी उन मस्जिदों के लिए लड़ने चीन या गाज़ा जाओगे? बोलो बोलो, जवाब दो हमें समझ नहीं आता जब “बाबर” से ऐसी मोहब्बत है तो आप लोग भारत में क्या कर रहे हैं, किस अधिकार से रहते हो?

हमने तो सुना है जहां इस्लाम शुरू हुआ, उस सऊदी अरब सरकार ने तो पैगम्बर साहब और उनके रिश्तेदारों की भी कब्र उखाड़ दी सड़कें बनाने के लिए, कई मस्जिदें भी गिरा दी, कभी कोई बोला क्या ?

एक बात सोच कर बता दो कि यदि किसी इस्लामिक देश में ऐसे मस्जिद का मामला होता जैसा भारत में राम मंदिर का था, तब क्या मुसलमान 500 साल प्रतीक्षा करते जबकि वो तो दूसरे धर्म के मंदिरों को विदेशों में तो ध्वस्त करते ही रहे हैं अपने मुल्कों में भी करते रहे हैं बामियान के बुद्ध के मंदिर याद होंगे?

लेखक 

सारे वकील खामोश सन्नाटे में आ गए!

आगे जनाब ने कहा, तुम तो पहले भी आए थे कि मुक़दमे की सुनवाई 2019 चुनाव के बाद कीजिए, अब कह रहे हो 2024 चुनाव तक सब कुछ रोक दो हम क्या किसी के बाप के नौकर हैं? 

हमें पता चला है एक पार्टी जिसने हमारे सामने हलफनामा दाखिल करके भगवान राम को काल्पनिक कहा था, उसके 3 नेता खुद अफगानिस्तान में “बाबर” की कब्र पर जा चुके हैं फूल चढ़ाने जबकि अपने रिश्तेदार की कब्र पर इलाहबाद नहीं जाते

एक वकील बोला, जनाब सुना तो हमने भी है कि उनके एक नेता ने “बाबर” की कब्र पर कहा था कि हम आपके वंशज हैं, अभी भी भारत हमारे कब्जे में है

फिर हमसे या अदालत से क्या उम्मीद रखते हो? जैसे आए हो वैसे ही वापस लौट जाओ, तुम्हारी याचिका हम खारिज करते हैं जो कूड़ेदान में डालने के काबिल है - Get Lost 

अब विपक्ष के साथ फिर लाया जासूसी का भूत

राहुल गांधी को “पप्पू” कहने से बेहतर होगा Soros और Jinping का पालतू कहा जाए क्योंकि उन्हीं की रोज रोज फेंकी हुई हड्डियां चबाता है राहुल गांधी एक हमला करता है मोदी/अडानी पर और उधर से Soros सीधा जेब में पैसा डालता है।  

George Soros के ही प्रोजेक्ट चला रहा है राहुल गांधी भारत में और उसके पैसों से ही देश भर में केरोसिन छिड़क दिया है राहुल गांधी कहता है कि बिजली का बटन दबाते हो तो उससे मिलने वाली बिजली का पैसा सीधा अडानी को जाता है किसान बिल सरकार लाइ थी किसानों की जमीनें हड़पने के लिए

लेखक सुभाष चंद्र 
लेकिन सच तो कुछ और ही है, Soros की ही फंडिंग थी जिसके सहारे किसान कानूनों के खिलाफ आंदोलन चला कर अंबानी / अडानी को देश से उखाड़ने के लिए खेल खेला गया था जो Soros 100 बिलियन डॉलर मोदी को उखाड़ने के लिए खर्च कर रहा है, उसमें कितना राहुल गांधी के पास आ रहा है, यह उसे ही पता है यही Soros है जिसने इज़रायल के विरोध के लिए फिलिस्तीन गुटों को 15 मिलियन डॉलर दे दिए और आज राहुल गांधी, उसकी कांग्रेस और विपक्ष उसी फिलिस्तीन / हमास के साथ खड़े हैं 

अब कल हड्डी चबाने के लिए लगता है Soros ने और फेंकी है  कि एक बार फिर शोर मचा दो कि हमारे फ़ोन hack कर रही है सरकार, जासूसी कर रही है राहुल गांधी हल्ला ठोक रहा है मेरा फ़ोन ले लो, जांच करा लो महुआ मोइत्रा भी चीख रही है कि उसका फ़ोन भी हैक हुआ है, यह वह Lady है जिसके सारे पत्ते दर्शन हीरानंदानी के साथ खुल चुके हैं

आज राहुल गांधी कह रहा है उसका फ़ोन ले लो वाह बेटा, बहुत श्याणा है, जब पेगासस जांच में सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति ने फ़ोन मांगे थे तो क्यों नहीं दिया था शिकायत करने वाले 26 लोगों में केवल 2 ने अपने फ़ोन दिए थे

एप्पल कंपनी का Alert 2021 का है और उन्होंने iOS update करने की सलाह दी थी यह update कराने में क्या प्रॉब्लम है और आज 2 साल बाद क्यों चिल्लपों क्यों कर रहे हो

सरकार यदि विपक्ष के नेताओं पर नज़र नहीं रख रही तो रखनी चाहिए राहुल गांधी तो समांथा पवार से गुपचुप उज्बेकिस्तान में मिलकर भारत के 8 नेवी के अधिकारियों को फांसी दिलवा सकता है तो फिर वह Soros, ओबामा jinping या पाकिस्तान के अपने साथियों से फ़ोन पर  कुछ भी निर्देश ले सकता है कौन जाने कांग्रेस का या विपक्ष का कौन नेता “हमास” से सांठगांठ कर देश में दंगे करने के साजिश कर रहा हो किसी ने तो हमास के पूर्व अध्यक्ष से बात की होगी जो उसने केरल की रैली को संबोधित किया

आज विपक्ष ने खासकर राहुल गांधी और कांग्रेस ने जिस स्थिति में देश को लाकर खड़ा कर दिया है, उससे बचाव के लिए विपक्ष पर ही नहीं न्यायपालिका पर भी नज़र रखनी जरूरी है

‘सनातन खत्म होना ही चाहिए’: अब शरद पवार की पार्टी के नेता ने खोला हिन्दू विरोधी घृणा का पिटारा, पूछा – अचानक कहाँ से हो गया इस धर्म का जन्म?

                                  उद्धव ठाकरे और शरद पवार के साथ पूर्व मंत्री जितेंद्र आव्हाड
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया के मच्छर की तरह खत्म करने की अपील की थी। इसके बाद से सनातन धर्म के खिलाफ बयान देने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। अब शरद पवार की पार्टी के नेता और उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री रहे जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि सनातन धर्म को खत्म हो जाना चाहिए। उन्होंने पूछा है कि सनातन धर्म अचानक से कहाँ से पैदा हुआ है?

मोदी विरोध में हुए गठबंधन का सनातन विरोध करने से ऐसा आभास हो रहा कि इनकी बुद्धि भ्रष्ट हो गयी है। जनता में अब चर्चा है कि सनातन विरोधियों का केंद्र सरकार को इनका डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए। शंका है ये लोग मुग़ल काल में बने हरम में कैद महिलाओं की तो संतानें नहीं। पहले मुगलों को सम्मान, और विश्व में भारत ही एक ऐसा एकलौता देश है जहाँ आतताई मुगलों का गुणगान किया जाता है। डीएनए टेस्ट करवाने की चर्चा होने में दम भी नज़र आता है, क्योकि आतताई मुग़ल भी सनातन विरोधी थे। इन सनातन विरोधियों को शायद यह नहीं मालूम कि सनातन विरोधियों का दुनियां में कोई नाम लेने वाला नहीं। जितना विरोध करना है, कर लें, फिर वह दिन भी अधिक दूर, जब इनके परिवार वाले भी इनका नाम लेने में लज्जा महसूस करेंगे। ये सनातन विरोधी तो आतताई मुगलों का नाम ले रहे हैं लेकिन इनका कोई नहीं होगा। जनता में यह भी चर्चा हो रही है कि इन सनातन के विरुद्ध किसी पुलिस या न्यायालय की शरण में जाने की बजाए इनका परिवार सहित सामाजिक बहिष्कार कर देना चाहिए, जो किसी पुलिस या न्यायालय द्वारा दी जाने वाली सजा से कहीं अधिक घातक होगी। समय इन चर्चाओं के चरितार्थ होने की उसी तरह प्रतीक्षा कर रहा है, जिस तरह भगवान श्रीकृष्ण ने शिशु पाल द्वारा दी जाने वाली 100 वीं गाली की प्रतीक्षा की थी। तब अंतिम समय पता चलेगा, सनातन धर्म क्या है, कितने युगों से है। जो नेता एवं पार्टी कुर्सी की खातिर अपने ही धर्म के विरुद्ध बोले, जनता का क्या भला करेगा?    

एनसीपी (शरद पवार गुट) नेता जितेंद्र आव्हाड ने मीडिया से बात करते हुए कहा है, “सनातन धर्म खत्म होना ही चाहिए। यह तो बाबा साहब आंबेडकर की माँग थी। इसलिए ही तो उन्होंने मनुस्मृति जलाई। इतने दिन कहाँ था सनातन धर्म। हमारे प्रधानमंत्रियों के पिछले कई सालों के भाषण निकालिए, वह तो हिंदू धर्म की ही बात करते थे। अचानक से सनातन धर्म का कहाँ से जन्म हो गया?”

उन्होंने आगे कहा है, “सनातन धर्म के लोग सिर्फ और सिर्फ धर्म की ही राजनीति करते हैं। अपने धर्म में ही दो शाखाएँ तैयार कर दीं। हम तो मोहन भागवत जी का समर्थन करते हैं। इस मामले में आरएसएस का समर्थन कर रहा हूँ मैं। वह कहते हैं कि यहाँ पर कुछ लोगों ने कुछ लोगों को पिछड़ा रखा। अब उन पिछड़े लोगों को आगे लाने के लिए हमें हिम्मत दिखानी चाहिए। इसके लिए हमें काम करना चाहिए। इन लोगों को पीछे रखने वाले लोग सनातनी थे।”

महाराष्ट्र के स्थानीय मीडिया पोर्टल ‘लय भारी’ के अनुसार, जितेंद्र आव्हाड ने यह भी कहा, “सनातन धर्म का समर्थन करने वाले लोगों के कुछ सवाल हैं, उन्हें इनका जवाब देना चाहिए। चार्वाक को किसने मारा? छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक को किसने अस्वीकार कर दिया? हत्यारों को महात्मा ज्योतिराव फुले के पास किसने भेजा?”

आव्हाड ने आगे कहा, “सती प्रथा के खिलाफ लड़ने वाले राजा राममोहन राय के खिलाफ तलवार उठाने वाला कौन था? राजर्षि शाहू महाराज को बदनाम करने और उनकी हत्या करने वाले षड्यंत्रकारी कौन थे? वे कौन थे जिन्होंने एक विशेष जाति समूह को पानी पीने से रोका? इन सभी चीजों के अपराधी सनातनी धर्म के अनुयायी थे। हम उनका विरोध जारी रखेंगे।”

इससे पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया के मच्छर की तरह खत्म करने की अपील की थी। उदयनिधि ने कहा था, “मच्छर, डेंगू, मलेरिया, कोरोना ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा, “सनातन ​​क्या है? सनातन ​​नाम संस्कृत से आया है। सनातन ​​समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन ​​का अर्थ ‘स्थायित्व’ के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता। कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। सनातन ​​का यही अर्थ है।”

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तमिलनाडु : हिंदू कारीगरों की मूर्ति बनाने वाली इकाई सील, 4 दिन बाद है गणेश चतुर्थी: मुख्यमंत्री क

उदयनिधि के बयान का कांग्रेस ने भी समर्थन किया था। तमिलनाडु कॉन्ग्रेस की महासचिव लक्ष्मी रामचंद्रन ने सनातनियों को जातिवादी और नफरत फैलाने वाला बता दिया। उन्होंने कहा था कि हिंदुत्व और सनातन आदि उत्तर भारत की उपज है। दक्षिण भारत के लोग शांतिप्रिय हैं। लक्ष्मी रामचंद्रन ने कहा था, “नफरत फैलाने वाले सनातन जातिवादी हिंदुत्व का दूसरा नाम है, जिसकी उत्पत्ति उत्तर में हुई है। दक्षिण में हमारा हिंदू धर्म शांतिप्रिय है और समावेशी होने का प्रयास करता है। रामानुजार, वल्लालर और नारायण गुरु प्रकार का हिंदू धर्म ही हमारा हिंदू धर्म है।”

भाजपा मोदी से पहले और मोदी के बाद: क्या मोदी डॉलर के विरुद्ध ? देखिए वीडियो

भारत में छद्दम धर्म-निरपेक्ष मोदी और योगी पर प्रहार करते नहीं थक रहे, विदेशी भारत विरोधियों के हाथों की कठपुतली बन भारतीय जनता को गुमराह कर रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन सब पर एक और कुठाराघात करने का मन बना चुके हैं। जिस कारण उन पर मोदी पर छद्दम देशप्रेमी गैंग और जहर उगलेगा। परन्तु जनता को संयम से काम करना होगा। चर्चा है, एंकर सुशांत सिन्हा ने अपने शो न्यूज़ की पाठशाला में बताया कि मोदी दुनिया में डॉलर की दादागिरी को ख़त्म कर भारतीय रूपए का बोलबोला करवाने के लिए प्रयत्नशील हैं। यानि आयात-निर्यात में लेन-देन डॉलर में होने की बजाए दोनों देशों की मुद्रा में ही हो। रिज़र्व फण्ड में डॉलर रखने की बजाए अपने देश की मुद्रा को ही रखा जाए। जिसदिन मोदी अपने इस उद्देश्य में सफल हो गए, डॉलर नीचे गिरना शुरू हो जाएगा।
 

केवल हिन्दू ही नहीं बल्कि हर देशप्रेमी को India Today Conclave में एक ऑस्ट्रेलियाई प्रोफेसर की बात पर ठन्डे और खुले दिमाग से विचार करना होगा।(नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें) बहुत हो गया हिन्दू-मुसलमान का राजनीतिकरण। धोखे से संविधान में Secular शब्द डालने से Secularism नहीं आता। Secular शब्द के भावार्थ को खुद समझने के साथ-साथ जनता को समझाना होगा। तुष्टिकरण को पाले रखने की बजाए चूल्हे में जलाना होगा। 

कहते हैं, द्वितीय विश्व युद्ध  से पहले ब्रिटिश पौंड का ही बोलबाला था, जिस कारण पौंड की कीमत विश्व में आज भी डॉलर से अधिक है, क्योकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने अपनी मनमानी करते हर अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में डॉलर को प्राथमिकता  दिए जाने के कारण डॉलर की कीमत अधिक है,(पौंड आज भी डॉलर के मुकाबले महंगा है) लेकिन अमेरिका की इस दादागिरी को ख़त्म करने के लिए इसका श्रीगणेश भी कर दिया है। स्वाभाविक है भारत विरोधी विदेशी ताकतें भारत में रह रहे अपने गुलामों को और अधिक धन देकर मोदी के विरुद्ध जनता को गुमराह कर देश में अराजकता फ़ैलाने में लग जाएंगे। गुजरात दंगा, CAA विरोध, किसान आंदोलन, हिजाब विवाद और नूपुर शर्मा विवाद आदि इनकी सच्चाई को जानना होगा। नूपुर शर्मा की सच्चाई मुस्लिम देशों के सामने आने के बाद हो गए सब चुप। लेकिन ढोंगी गंगा-जमुनी तहजीब का नारे से देश को गुमराह करने वाले कहते हैं देश का नाम डुबो दिया। जबकि सच्चाई यह है कि तोड़मरोड़ प्रस्तुत कर देश को बदनाम कर साबित का दिया, गुलामों को पैसा दो, कुछ भी करवा लो। 

खैर, अब बात करते हैं भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहले और अब में कितना अंतर है। अंधभक्त नहीं बनना चाहिए। विरोध करना चाहिए, लेकिन विरोध का आधार होना चाहिए। वर्तमान भाजपा तत्कालीन भारतीय जनसंघ ने कांग्रेस की नेहरू सरकार को शेख अब्दुल्ला द्वारा कश्मीर और शेष भारत के दूसरे प्रधानमंत्री, अनुच्छेद 370 और कश्मीर जाने के लिए परमिट प्रथा समाप्त करने बिना परमिट कश्मीर जाने पर डॉ श्यामा प्रसाद मुख़र्जी को गिरफ्तार को जेल में हत्या करवा दी थी। यदि तत्कालीन जनसंघ नेताओं ने डॉ मुखर्जी को मुद्दा बना आंदोलन कर जवाहर नेहरू और शेख अब्दुल्ला के खिलाफ आंदोलन किया होता, निश्चित रूप से नेहरू सरकार सत्ता से बाहर हो गयी होती। कश्मीर को विशेष दर्जा और अनुच्छेद 370 भी समाप्त हो गया होता। लेकिन मुसलमानों में जहर फैला दिया कि जनसंघ मुसलमानों के विरुद्ध है और यह जहर आज भी मौजूद है। खैर, डॉ मुखर्जी की हत्या से देश में दो प्रधानमंत्री और कश्मीर जाने के लिए परमिट लेने की प्रथा समाप्त हो गयी, नासूर बना अनुच्छेद 370 फिर भी रहा। जो अब मोदी राज में समाप्त हुआ।   

जब तक भाजपा वाजपेयी जी की विचारधारा पर चलती रही, वो राम के बताये मार्ग पर चलती रही। मर्यादा, नैतिकता, शुचिता इनके लिए कड़े मापदंड तय किये गये थे। परन्तु कभी भी पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सकी!


जहाँ करोड़ों रुपये के घोटाले-घपले करने के बाद भी, कांँग्रेस बेशर्मी से अपने लोगों का बचाव करती रही, वहीं पार्टी फण्ड के लिए मात्र एक लाख रुपये ले लेने पर भाजपा ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्षमण  को हटाने में तनिक भी विलंब नहीं किया!

परन्तु चुनावों में नतीजा ?

वही ढाक के तीन पात...

झूठे ताबूत घोटाला के आरोप पर तत्कालीन रक्षामंत्री जार्ज फर्नांडिस का इस्तीफा, परन्तु चुनावों में नतीजा ?

वही ढाक के तीन पात...

कर्नाटक में येदियुरप्पा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते ही येदियुरप्पा को भाजपा ने निष्कासित करने में कोई विलंब नहीं किया.....

परन्तु चुनावों में नतीजा ?

वही ढाक के तीन पात...

साबरमती ट्रेन में 59 रामभक्तों को जिन्दा जलाए के बाद गुजरात में हुए दंगों की जड़ को दरकिनार कर मोदी को राष्ट्रधर्म का पाठ पढ़ाने वाले अटल बिहारी का क्या हुआ...

चुनावों में नतीजा? 

वही ठाक के तीन पात...

खैर ! फिर होता है नरेन्द्र मोदी  का पदार्पण! मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के चरण चिन्हों पर चलने वाली भाजपा को वो कर्मयोगी श्री कृष्ण की राह पर ले आते हैं !

श्री कृष्ण अधर्मी को मारने में किसी भी प्रकार की गलती नहीं करते हैं। छल हो तो छल से, कपट हो तो कपट से, अनीति हो तो अनीति से , अधर्मी को नष्ट करना ही उनका ध्येय होता है! मोदी और इनकी पार्टी भी आज वही कहती है कि जो जिस बोली में समझना चाहता है, उसे उसी बोली में समझाया जाएगा। 

इसीलिए वो अर्जुन को केवल कर्म करने की शिक्षा देते हैं! लेकिन कांग्रेस नेता शिवराज पाटिल को भागवत गीता में जेहाद दिखता है। केंद्र में मंत्री भी रह चुके हैं। 

कुल मिलाकर सार यह है कि अभी देश दुश्मनों से घिरा हुआ है, नाना प्रकार के षडयंत्र रचे जा रहे हैं ! इसलिए अभी हम नैतिकता को अपने कंधे पर ढोकर नहीं चल सकते हैं ! 

नैतिकता को रखिये ताक पर, और यदि इस देश को बचाना चाहते हैं, तो सत्ता को अपने पास ही रखना होगा! वो चाहे किसी भी प्रकार से हो - साम, दाम, दंड, भेद - किसी भी प्रकार से!

बिना सत्ता के आप कुछ भी नहीं कर सकते हैं ! इसलिए भाजपा के कार्यकर्ताओं को चाहिए कि कर्ण का अंत करते समय कर्ण के विलापों पर ध्यान ना दें! केवल ये देखें कि अभिमन्यु की हत्या के समय उनकी नैतिकता कहाँ चली गई थी ?

कर्ण के रथ का पहिया जब कीचड़ में धंँस गया, तब भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा: पार्थ, देख क्या रहे हो ? इसे समाप्त कर दो!

संकट में घिरे कर्ण ने कहा: यह अधर्म है !

भगवान श्री कृष्ण ने कहा: अभिमन्यु को घेर कर मारने वाले, और द्रौपदी को भरी दरबार में वेश्या कहने वाले के मुख से आज अधर्म की बातें शोभा नहीं देती !!

आज राजनीतिक गलियारा जिस तरह से संविधान की बात कर रहा है, तो लग रहा है जैसे हम पुनः महाभारत युग में आ गए हैं !

विश्वास रखो, जिस तरह महाभारत का अर्जुन नहीं चूका था! आज का अर्जुन भी नहीं चूकेगा !

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारतः!

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानम सृजाम्यहम !

चुनावी जंग में अमित शाह जो कुछ भी जीत के लिए पार्टी के लिए कर रहे हैं, वह सब उचित है!

अटल बिहारी वाजपेयी जी  की तरह एक वोट का जुगाड़ न करके आत्मसमर्पण कर देना, क्या एक राजनीतिक चतुराई थी ?

अटलजी ने अपनी व्यक्तिगत नैतिकता के चलते, एक वोट से अपनी सरकार गिरा डाली, और पूरे देश को चोर लुटेरों के हवाले कर दिया !

साम, दाम, दण्ड , भेद ,राजा या क्षत्रिय द्वारा अपनाई जाने वाली नीतियाँ हैं, जिन्हें उपाय-चतुष्टय (चार उपाय) कहते हैं!

राजा को राज्य की व्यवस्था सुचारु रूप से चलाने के लिये सात नीतियाँ वर्णित हैं!

उपाय चतुष्टय के अलावा तीन अन्य हैं - माया, उपेक्षा तथा इन्द्रजाल !!

राजनीतिक गलियारे में ऐसा विपक्ष नहीं है जिसके साथ नैतिक-नैतिक खेल खेला जाए सीधा धोबी पछाड़ आवश्यक है! क्योकि विपक्ष जनहित नहीं असली मुद्दों से भटक अपनी तुष्टिकरण गन्दी सियासत कर रहा है। एक बात और!

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अनजाना इतिहास

बात 1955 की है! सउदी अरब के बादशाह "शाह सऊद" प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू के निमंत्रण पर भारत आए थे! वे 4 दिसम्बर 1955 को दिल्ली पहुँचे जहाँ उनका पूरे शाही अन्दाज़ में स्वागत किया गया शाह सऊद दिल्ली के बाद, वाराणसी भी गए!

सरकार ने दिल्ली से वाराणसी जाने के लिए "शाह सऊद" के लिए एक विशेष ट्रेन में विशेष कोच की व्यवस्था की शाह सऊद जितने दिन वाराणसी में रहे उतने दिनों तक बनारस के सभी सरकारी इमारतों पर "कलमा तैय्यबा" लिखे हुए झंडे लगाए गए थे!

वाराणसी में जिन-जिन रास्तों-सडकों से "शाह सऊद" को गुजरना था उन सभी रास्तों-सड़कों में पड़ने वाले मंदिर और मूर्तियों को परदे से ढक दिया गया था!इस्लाम की तारीफ़, और हिन्दुओं का मजाक बनाते हुए शायर "नज़ीर बनारसी" ने एक शेर कहा था: -

अदना सा ग़ुलाम उनका,

गुज़रा था बनारस से,

मुँह अपना छुपाते थे, 

काशी के सनम-खाने!

अब खुद सोचिये कि क्या आज मोदी और योगी के राज में किसी भी बड़े से बड़े खान के लिए, ऐसा किया जा सकता है? आज ऐसा करना तो दूर कोई करने की सोच भी नहीं सकता!

हिन्दुओं,उत्तर दो,तुम्हें और कैसे अच्छे दिन देखने की तमन्ना थी?

आज भी बड़े बड़े ताकतवर देशों के प्रमुख भारत आते हैं और उनको वाराणसी भी लाया जाता है लेकिन अब मंदिरों या मूर्तियों को छुपाया नहीं जाता है बल्कि उन विदेशियों को गंगा जी की आरती दिखाई जाती है और उनसे पूजा कराई जाती है! 

ये था कांग्रेसियों का हिंदुत्व दमन! ये है मोदी योगी से पहले का भारत और आज का भारत।