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अमेरिकी मुस्लिमों जिहाद छेड़ो, ‘कचरा’ साफ करो : कौन है ‘किल लिस्ट’ जारी करने वाला अलकायदा आतंकी आतिफ अवलाकी? भारत, रूस और इजराइल तो कमर कसे हुए है, देखो अमेरिका आतंकवाद के विरुद्ध कब शंखनाद करता है?

                                           जेडी वेंस, डोनाल्ड ट्रंप, एलन मस्क (फोटो साभार: NYT)
इतिहास लिखा नहीं जाता दोहराया जाता है, इस कटु सच्चाई को कोई झुठला नहीं सकता। अभी कुछ ही दिन पहले बौखलाहट में पाकिस्तान बोल गया कि सोवियत संघ(Soviet Union) को तोड़ने जिस आतंकवाद के लिए पाकिस्तान से मदद ली थी। आज वही आतंकवाद अमेरिका को आग में झोंक रहा है। भारत आतंकवाद के विरुद्ध पाकिस्तान के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहा है उसके बावजूद IMF द्वारा पाकिस्तान को अनुदान दिए जाने का विरोध नहीं किया। ट्रम्प साहब आतंकवाद आतंकवाद ही होता है। मालूम है कि पाकिस्तान आतंकवाद की फैक्ट्री है फिर भी अप्रत्यक्ष समर्थन दिया। अब आतंकवाद के विरुद्ध भारत की तरह आतंकवाद पर हमला बोलोगे या नहीं? यह अमेरिका की अग्नि-परीक्षा की घडी है। देखो अमेरिका आतंकवाद के विरुद्ध कब शंखनाद करता है?

       

यमन बेस्ड आतंकी संगठन अल-कायदा इन द अरेबियन पेनिनसुला (AQAP) के सरगना साद बिन आतिफ अल-अवलाकी ने एक 34 मिनट का वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में उसने अमेरिका में रहने वाले मुस्लिमों से जिहाद छेड़ने और वहाँ के बड़े-बड़े लोगों जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और टेस्ला कंपनी के मालिक एलन मस्क की हत्या करने की खुलेआम अपील की है। इस वीडियो का नाम है “इंसाइटिंग द बिलीवर्स”। इसे AQAP के समर्थक ऑनलाइन प्रोपेगेंडा का हथियार बनाकर सर्कुलेट कर रहे हैं।

साद ने इस वीडियो में कहा कि अमेरिका इजरायल और हमास के बीच चल रही जंग में इजरायल का साथ दे रहा है और इसके लिए उसका बदला लेना जरूरी है। उसने अमेरिका में रहने वाले करीब 45 लाख मुस्लिमों से कहा, “तुम्हें किसी से सलाह लेने की जरूरत नहीं, बस बदला लो! बदला लो! उन काफिर अमेरिकियों को मारो।” उसने ट्रंप, वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेग्सेथ और एलन मस्क को ‘धरती का कचरा’ और ‘सबसे बड़े अपराधी’ बताया। उसने इन नेताओं, उनके परिवारों और व्हाइट हाउस से जुड़े लोगों को निशाना बनाने की बात कही।

साद ने गाजा में जारी जंग का जिक्र करते हुए कहा कि वहाँ मुस्लिमों पर हो रहे जुल्मों के बाद अब कोई सीमा नहीं बची। उसने कहा, “गाजा में हमारे लोगों के साथ जो हो रहा है, उसका बदला लेना जरूरी है।” उसने यहूदियों के खिलाफ भी हिंसा भड़काने की कोशिश की और कहा, “यहूदियों के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं छोड़नी चाहिए, जैसे उन्होंने फलस्तीनियों के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी।” उसने गाजा में अस्पतालों पर हो रही बमबारी का हवाला दिया और मुस्लिमों से बदला लेने की अपील की।

इसके साथ ही साद ने हाल के कुछ हमलों की तारीफ भी की। उसने जुलाई 2024 में ट्रंप पर हमले की कोशिश और मई 2025 में वाशिंगटन डीसी में इजरायली दूतावास के कर्मचारियों पर हुए हमले का जिक्र किया। उसने इन हमलों को सही ठहराया और कहा कि ऐसे और हमले होने चाहिए।

साद ने सिर्फ लोगों पर हमले की बात नहीं की, बल्कि उसने अमेरिकी अर्थव्यवस्था और सरकार को भी नुकसान पहुँचाने की बात कही। उसने हैकर्स से कहा कि वो अमेरिका और खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को निशाना बनाएँ। उसने माइक्रोसॉफ्ट और एलन मस्क की कंपनियों जैसे टेस्ला को भी ‘वैध निशाना’ बताया। उसने AQAP की पत्रिका ‘इंस्पायर’ का जिक्र करते हुए लोगों को बम बनाने की तकनीक सीखने की सलाह दी, ताकि वो हमले कर सकें।

ये वीडियो ऐसे समय में आया है, जब AQAP को पिछले कुछ सालों में काफी कमजोर माना जा रहा है। अमेरिका के ड्रोन हमलों और संगठन के अंदर आपसी झगड़ों की वजह से इसकी ताकत कम हुई है। फिर भी संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, AQAP के पास अभी भी 3,000 से 4,000 सदस्य हैं। अमेरिका ने AQAP को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है। ये संगठन 2009 में यमन और सऊदी अरब के अल-कायदा ग्रुपों के गठजोड़ (विलय) के बाद बना था।

विशेषज्ञों का मानता है कि साद गाजा का मुद्दा उठाकर यमन के हूती विद्रोहियों की बढ़ती लोकप्रियता को चुनौती देना चाहता है। हूती विद्रोही भी इजरायल के खिलाफ हमले कर रहे हैं, और साद को लगता है कि हूतियों की लोकप्रियता से AQAP की अहमियत कम हो रही है। जानकारों का मानना है कि ये वीडियो AQAP की तरफ से अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश है।

साद बिन आतिफ अल-अवलाकी कौन है?

साद बिन आतिफ अल-अवलाकी यमन के शबवा प्रांत के अल-शुबाह इलाके की अल-अवालिक जनजाति से है। वो 2024 में AQAP का नेता बना, जब संगठन का पुराना सरगना खालिद अल-बतरफी मर गया। इससे पहले साद AQAP की शूरा परिषद का हिस्सा था और हमलों की योजना बनाने में शामिल था। वो अनवर अल-अवलाकी का रिश्तेदार है, जो एक कुख्यात आतंकी था और 2011 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया था। अमेरिका ने साद पर 60 लाख डॉलर का इनाम रखा है, क्योंकि उसने पहले भी अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर हमले की बात कही थी।

साद का जन्म यमन में हुआ था और वो अल-कायदा की विचारधारा को फैलाने में हमेशा सक्रिय रहा है। 2023 में भी वो एक वीडियो में दिखा था, जिसमें उसने यमन की दक्षिणी जनजातियों से संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिणी परिषद के खिलाफ लड़ने को कहा था। उसका संगठन अपने खर्चे चलाने के लिए बैंक लूट, हथियार तस्करी और फिरौती जैसे अपराध करता है।

व्हाइट हाउस में एलन मस्क और अमेरिका के वित्त मंत्री के बीच हुई थी हाथापाई, इसके बाद ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बढ़ी दूरियाँ: वाशिंगटन पोस्ट का दावा; कहीं सोरोस का तो हाथ नहीं?


अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और DOGE के प्रमुख रहे एलन मस्क के बीच चल रहे विवाद के मध्य वाशिंगटन पोस्ट ने एक नई जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन और मस्क के बीच विवाद एक हाथापाई वाली घटना के बाद बढ़ा।

चर्चा है, हालाँकि इसकी पुष्टि नहीं हो पायी है, कि इस विवाद के पीछे जॉर्ज सोरोस का हाथ है। क्योकि ट्रम्प ने जिस तरह Deep State पर शिकंजा कसा है सोरोस बहुत बैचेन था। वैसे भी सोरोस को सरकारें गिराने में महारत हासिल है जो भारत में नरेंद्र मोदी की सरकार को गिराने में हर स्तर पर फेल रहे। ट्रम्प को अपनी सरकार बचाने के लिए सोरोस के हाथ बने कठपुतलियों से सावधान रहना होगा।    

ये हाथापाई कथित रूप से व्हाइट हाउस में एलन मस्क और अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के बीच हुई थी। वॉशिंगटन पोस्ट रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ही आंतरिक राजस्व सेवा (IRS) के प्रमुख पद के लिए अपने-अपने पसंदीदा उम्मीदवार को चाहते थे जिसके लिए दोनों ही लॉबिंग भी कर रहे थे।

इसी बातचीत के दौरान बहस इतनी बढ़ गई कि मस्क और बेसेंट एक-दूसरे को अपशब्द कहने लगे। रिपोर्ट में ट्रंप के सहयोगी स्टीव बैनन के हवाले से बताया गया है कि, बात इतनी बढ़ गई की मस्क ने गुस्से में बेसेंट की पसलियों पर कंधे से टक्कर मार दी,  जिसके जवाब में बेसेंट ने भी मस्क को मारा। इसी घटना के बाद ट्रंप और मस्क के रिश्तों में दरार और बढ़ गई। 

‘बिग ब्यूटीफुल बिल’ जिसे लेकर आमने-सामने आ गए दो ‘जिगरी’? मस्क को क्यों सता रहा अमेरिका के दिवालिया होने का डर, ट्रंप क्यों हैं इसे लेकर बेफिक्र

     टेस्ला के मालिक एलन मस्क (बाएँ), अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (दाएँ) प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार : Grok)
डोनाल्ड ट्रंप और टेस्ला तथा स्पेस एक्स के मालिक एलन मस्क के बीच का विवाद अब बढ़ता जा रहा है। मस्क ने ट्रंप के ‘बिग ब्यूटीफुल बिल’ के खिलाफ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर खुले तौर पर विरोध जताया। मस्क ने इस बिल को कॉन्ग्रेस के खर्च से भरा, बेतुका और शर्मनाक बताया और इसे सरकारी खर्च कम करने के अपने मिशन के खिलाफ करार दिया। इस बिल का ट्रंप की प्राथमिकता के विपरीत प्रभाव पड़ा है, जिसमें सरकारी खर्च में कटौती का वादा किया गया था।

विवाद का कारण

इस विवाद का पहला कारण ‘बिग ब्यूटीफुल बिल’ है। यह बिल उन नीतियों को लेकर मस्क की चिंता को दर्शाता है, जो उनकी कंपनियों, खासकर टेस्ला पर असर डाल सकती हैं। मस्क का मानना है कि इस बिल के तहत इलेक्ट्रिक कारों के लिए जो सब्सिडी मिलती थी, उसमें कमी आएगी, जो उनके बिजनेस मॉडल को नुकसान पहुँचा सकता है।

इस बिल में संशोधन के कारण टेस्ला की बिक्री पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि इससे इलेक्ट्रिक वाहन (EV) के लिए दी जाने वाली फाइनेंशियल मदद में कटौती हो सकती है। मस्क ने इस बिल को कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘अमेरिका को दिवालिया बनाने वाला’ बताया और अपने 20 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स से इसे खत्म करने की अपील की। उन्होंने कहा, “अमेरिका को दिवालिया बनाना ठीक नहीं है।”

‘बिग ब्यूटीफुल बिल’ क्या है?

‘बिग ब्यूटीफुल बिल’ में विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और परियोजनाओं के लिए बड़ी मात्रा में धन शामिल है। मस्क और अन्य क्रिटिक्स का मानना है कि यह बिल अनावश्यक और अत्यधिक खर्च को बढ़ावा देता है, जिससे राष्ट्रीय ऋण बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विशेष रूप से, यह बिल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कर क्रेडिट को प्रभावित करता है, जिससे एलन मस्क की टेस्ला जैसी कंपनियों को नुकसान होगा।

  • अत्यधिक सरकारी खर्च: यह बिल सरकारी खर्च को बेतहाशा बढ़ाता है, जो सरकारी खर्च में कटौती के ट्रंप प्रशासन के वादों के खिलाफ है।
  • टेस्ला सब्सिडी में कटौती: यह इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए टैक्स क्रेडिट को कम करता है, जिससे टेस्ला जैसी कंपनियों को मिलने वाली सब्सिडी में कमी आएगी। मस्क का मानना है कि इससे टेस्ला की बिक्री प्रभावित होगी।
  • मंदी का खतरा: मस्क ने चेतावनी दी है कि ट्रंप की टैरिफ नीतियाँ, बिल के साथ मिलकर, इस साल के अंत में अमेरिका को मंदी में धकेल सकती हैं।
इसके जवाब में, ट्रंप ने मस्क की कंपनियों के सभी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट और सब्सिडी को रद्द करने की धमकी दी है, जिसमें टेस्ला, स्पेसएक्स और स्टारलिंक जैसी प्रमुख कंपनियाँ शामिल हैं। ट्रंप का तर्क है कि मस्क इसलिए नाराज हैं क्योंकि बिल ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कर क्रेडिट को खत्म कर दिया है, जो उनके लिए एक बड़ी राशि थी।

ट्रंप-मस्क के रिश्ते में बदलाव

मस्क और ट्रंप के बीच यह विवाद उस समय हुआ है जब दोनों का आपसी संबंध पहले काफी अच्छा था। मस्क ने 2024 के चुनाव अभियान में ट्रंप का समर्थन किया था और लगभग 300 मिलियन डॉलर का योगदान दिया था। इसके बाद मस्क को ट्रंप के प्रशासन में सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) का प्रमुख बनाया गया था, जहाँ मस्क ने सरकारी विभागों में सुधार करने के प्रयास किए थे।
लेकिन अब मस्क ने ट्रंप की नीतियों पर आलोचना करना शुरू कर दिया, खासकर उनके ‘बिग ब्यूटीफुल बिल’ और ‘टैरीफ पॉलिसी’ के खिलाफ। मस्क ने यह भी कहा कि यह बिल ‘सरकारी खर्च में कटौती के उनके प्रयासों के खिलाफ है।’

ट्रंप का जवाब

ट्रंप ने मस्क के खिलाफ प्रतिक्रिया देते हुए इलेक्ट्रॉनिक सब्सिडी और सरकारी अनुबंधों को खत्म करने की धमकी दी है। ट्रंप ने टेस्ला के खिलाफ किसी तरह की प्रतिक्रिया को लेकर मस्क पर आक्रमण किया और कहा कि मस्क अब उनके प्रशासन में विश्वासघात कर रहे हैं।
इसके अलावा, ट्रंप ने मस्क पर आरोप लगाया कि वह ‘एप्स्टीन फाइल्स‘ से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करने के बजाय उसे छिपा रहे हैं, जिससे यह आरोप और भी गंभीर हो गया।
मस्क के ‘एप्स्टीन फाइल्स’ वाले आरोप ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया। मस्क ने कहा कि ट्रंप का ‘एप्स्टीन के मामलों से गहरा संबंध’ है और इसका सार्वजनिक होना बाकी है। इस आरोप ने ट्रंप और मस्क के रिश्ते में और तल्खी ला दी। ट्रंप ने इस आरोप को खारिज किया, हालाँकि मस्क ने इसे लेकर अपनी आलोचना जारी रखी।

भविष्य में क्या हो सकता है

यह विवाद ट्रंप और मस्क के बीच एक राजनीतिक और व्यक्तिगत संघर्ष में बदलता जा रहा है। मस्क ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर ट्रंप के समर्थक और रिपब्लिकन सांसदों ने इस बिल का समर्थन किया, तो वह अगले चुनाव में इन राजनेताओं को निकाल देंगे। इसके साथ ही, मस्क ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ट्रंप के खिलाफ ‘इंपीचमेंट’ की प्रक्रिया का समर्थन करते हैं।
यह विवाद अमेरिका की राजनीति और उद्योगों में गहरे असर डाल सकता है। ‘टेस्ला और स्पेस एक्स’ जैसे बड़े व्यापारों को सरकारी सब्सिडी और अनुबंधों पर निर्भर रहने के कारण, यह आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकता है।
एलन मस्क और डोनाल्ड ट्रंप के बीच बढ़ता विवाद केवल व्यक्तिगत आरोपों और सरकार से संबंधित मुद्दों तक सीमित नहीं है। यह अमेरिकी राजनीति, उद्योग और अर्थव्यवस्था पर गहरे प्रभाव डाल सकता है। यह स्थिति दिखाती है कि कैसे बड़े उद्योगपति और राजनीतिक नेता एक-दूसरे के साथ सामंजस्य बनाए रखने में विफल हो सकते हैं, खासकर जब उनके आपसी हितों में टकराव होता है।

बड़बोले ट्रंप को लग रहे झटके, कोर्ट ने टैरिफ पर आदेश पर लगाई रोक: भारत-पाक लड़ाई वाली दलील भी काम न आई, एलन मस्क ने भी छोड़ा साथ


अमेरिकी ट्रेड कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ‘लिबरेशन डे’ आयात शुल्क को प्रभावी होने से रोक दिया। कोर्ट का कहना है कि राष्ट्रपति ने उन देशों पर व्यापक शुल्क लगाकर अपने प्राधिकार का अतिक्रमण किया है, जो अमेरिका को खरीदने से अधिक सामान बेचते हैं।

कोर्ट ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (आईईईपीए) के तहत वैश्विक टैरिफ निर्धारित करने के लिए व्यापक अधिकार की बात कही है। लेकिन इस अधिनियम का उद्देश्य राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान “असामान्य और असाधारण” खतरों से निपटना है।

तीन न्यायाधीशों के पैनल ने कहा, “अदालत राष्ट्रपति द्वारा टैरिफ के उपयोग की बुद्धिमत्ता या संभावित प्रभावशीलता पर विचार नहीं करती है। यह उपयोग अनुचित है, इसलिए नहीं कि यह नासमझी या अप्रभावी है, बल्कि इसलिए कि (संघीय कानून) इसकी अनुमति नहीं देता है।”

न्यायाधीशों ने ट्रम्प प्रशासन को 10 दिनों के भीतर नए आदेश जारी करने का भी आदेश दिया। ट्रम्प प्रशासन ने कुछ ही मिनटों बाद अपील की अर्जी दायर की और न्यायालय के अधिकार पर सवाल उठाया। ये मामला अब अमेरिका की राजनीति, व्यापार नीति और वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने वाला बनता जा रहा है।

टैरिफ के बचाव में ट्रंप ने कहा भारत-पाक सीजफायर की बात

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कोर्ट में टैरिफ लगाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि एक प्रतिकूल फैसला परमाणु शक्तियों भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर को खतरे में डाल सकता है। उन्होने राष्ट्रपति द्वारा मध्यस्थता कराए जाने की बात भी की। हालाँकि उनका तर्क कोर्ट ने नहीं माना और ट्रंप के टैरिफ को प्रभावी होने से रोक दिया। उनका मानना था कि टैरिफ और इंडो-पाक लड़ाई का कोई मेल नहीं। 

चर्चा है कि नरेंद्र मोदी के भारत के प्रधानमंत्री बनने के लगभग 16/17 महीने बाद ही CIA ने Pentagon को दी अपनी रपट में कहा था कि अब तक पाकिस्तान भारत पर हमला करता रहा है, लेकिन अब हमला हुआ तो भारत की तरफ से होगा और मोदी पाकिस्तान को उसके परमाणु इस्तेमाल करने की नौबत ही नहीं देंगे। जो सच साबित हो गया। भारत में होते आतंकी हमले होने पर भारत अमेरिका के आगे गिड़गिड़ाने नहीं आता बल्कि पाकिस्तान को उसी भाषा में जवाब देकर पाकिस्तान के बिस्तर में कांटे बिछा दिए हैं।     

दरअसल टैरिफ में बदलाव कर राष्ट्रपति ट्रंप ने विदेशी देशों से आने वाले सामानों पर अमेरिकी आयातकों से टैरिफ वसूलना शुरू किया जिसने अंतरराष्ट्रीय व्यापार की गति को बुरी तरह बाधित किया है और वित्तीय बाजारों को हिलाकर रख दिया है।

सभी आकार की कंपनियाँ ट्रम्प द्वारा टैरिफ लगाने और अचानक उलटफेर करने से परेशान हैं, क्योंकि उनका उत्पादन, स्टाफिंग और कीमतों पर इसका काफी प्रभाव देखा जा रहा है।

बुधवार को व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा कि अन्य देशों के साथ अमेरिकी व्यापार घाटा “एक राष्ट्रीय आपातकाल है जिसने अमेरिकी समुदायों को तबाह कर दिया है, हमारे श्रमिकों को पीछे छोड़ दिया है, और हमारे रक्षा औद्योगिक आधार को कमजोर कर दिया है – ऐसे तथ्य जिन पर न्यायालय ने विचार नहीं किया।”

प्रवक्ता कुश देसाई ने एक बयान में कहा, “यह तय करना अनिर्वाचित न्यायाधीशों का काम नहीं है कि राष्ट्रीय आपातकाल को कैसे ठीक से संबोधित किया जाए।”

वित्तीय बाजारों ने इस फैसले का स्वागत किया। न्यायालय के आदेश के बाद अमेरिकी डॉलर में तेजी आई, विशेष रूप से यूरो, येन और स्विस फ्रैंक जैसी मुद्राओं के मुकाबले इसमें उछाल आया। वॉल स्ट्रीट वायदा में तेजी आई और एशिया भर में इक्विटी में भी तेजी आई।

                   डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन से बाहर हुए एलन मस्क

इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक और निराश करने वाली खबर आई। एलन मस्क ने बुधवार (27 मई 2025) को घोषणा की कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शीर्ष सलाहकार के रूप में अपनी भूमिका से हट रहे हैं।

टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ ने अपने स्वामित्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह खबर साझा की। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रम्प के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होने कहा वह संघीय नौकरशाही को सुव्यवस्थित करने और सुधारने की कोशिश में लगे थे। सरकारी दक्षता विभाग के साथ एक विशेष सरकारी कर्मचारी के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

मस्क ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब एक दिन पहले ही उन्होंने ट्रम्प के विधायी एजेंडे की आलोचना की थी और कहा था कि वे राष्ट्रपति द्वारा “बड़े आकर्षक विधेयक” कहे जाने से “निराश” हैं।

20 जनवरी से ही पहले ट्रम्प काम पर :एलन मस्क ने की व्यापार जगत के भारतीय दिग्गजों से मुलाकात, कहा- पॉजिटिव डायरेक्शन में भारत- अमेरिका संबंध


दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क ने टेक्सास के अपने स्पेसएक्स स्टारबेस फैसिलिटी में व्यापार जगत के भारतीय दिग्गजों से मुलाकात की है। इंड‍िया ग्‍लोबल फोरम (India Global Forum) के तत्वाधान में हुई इस मुलाकात में टेस्ला और स्पेसएक्स प्रमुख एलन मस्क ने उनसे भारत-अमेरिकी संबंधों के साथ तमाम मुद्दों पर बात की।

टेस्ला सीइओ ने बातचीत के दौरान कहा कि भारत और अमेरिका के बीच का संबंध पॉजिटिव डायरेक्शन में आगे बढ़ रहा है। भारतीय व्यापारियों और स्टार्टअप जगत के प्रमुख हस्तियों के साथ मुलाकात में एलन मस्क ने भारत को प्राचीन सभ्यता और जटिलता का अद्भुत मिश्रण बताते हुए दोनों देशों के बीच मजबूत सहयोग की वकालत की।

इस मुलाकात से आने वाले दिनों में भारत- अमेरिका के बीच संबंधों में और मजबूती आने की संभावना और बढ़ गई है। स्पेसएक्स के सीईओ अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के काफी करीबी हैं। उन्हें आगामी ट्रंप सरकार में एक अहम पद के लिए भी चुना गया है। निर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप ने उनका चयन कामकाज में दक्षता बढ़ाने के लिए सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) के सह-अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया है।

एलन मस्क की भारतीय व्यापारिक हस्तियों के साथ यह मुलाकात दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी और स्पेस इनोवेशन के क्षेत्र में साझेदारी की नई संभावनाओं को जन्म दे सकती है। ऐसा इसलिए भी है कि बातचीत में उन्होंने भारत को वैश्विक नवाचार में एक अहम देश बताते हुए स्पेस साइंस में भारत की प्रगति की सराहना की।

इंड‍िया ग्‍लोबल फोरम के नेतृत्व में मस्क से मिलने वालों में भारत के दूसरे सबसे बड़े को-वर्किंग प्लेटफॉर्म Innova के संस्थापक रितेश मलिक, ओयो के संस्थापक रितेश अग्रवाल, फ्लिपकार्ट के सीईओ कल्याण रमन, आदित्य बिड़ला ग्रुप के निदेशक आर्यमन बिड़ला, एस्सार कैपिटल के निदेशक प्रशांत रुइया, कोटक811 के सह-प्रमुख जय कोटक, बेस्टसेलिंग लेखक अमीश त्रिपाठी जैसे नाम शामिल थे। इन व्यापारिक हस्तियों ने एलन मस्क के साथ टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में संभावनाओं पर चर्चा की।

अब तक 60 से ज्यादा स्टार्ट-अप्स में निवेश कर चुके रितेश मलिक ने कहा कि हमें सहस्राब्दी के व्यक्ति एलन मस्क के साथ समय बिताने का एक अविश्वसनीय सम्मान मिला। इसके लिए उन्हें धन्यवाद। रितेश मलिक ने कबा कि फ्लाइट 7 का प्रक्षेपण देखना और दुनिया के बारे में एलन के विचारों के बारे में बात करना अविश्वसनीय था।

इंडिया ग्लोबल फोरम के संस्थापक मनोज लाडवा ने कहा कि यह आयोजन बेहद अहम था। अमेरिका में ट्रंप के राष्ट्रपति बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में पहले बातचीत काफी मायने रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज का भारत प्रतिभाशाली लोगों से भरा हुआ है। इंडिया ग्लोबल फोरम में हमारा उद्देश्य दुनिया भर की सरकारों और व्यवसायों के माध्यम से इन अवसरों को वैश्विक समुदाय तक पहुंचाना है।

डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ता संभालने से पहले ही अडानी को निशाना बनाने वाले हिंडनबर्ग रिसर्च ने बाँधा बोरिया-बिस्तर, Deep state संकट में; दुनिया ले रही राहत की साँस, भारतीय विपक्ष में भी बौखलाहट

       हिंडनबर्ग को फाउंडर नेट (बाएँ) ने बंद करने का ऐलान (साभार: Gulf Indian, FT & Indian Express)
भारतीय कारोबारी अडानी ग्रुप को लगातार निशाना बनाने वाले अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपना बोरिया बिस्तर बाँध लिया है। इसके फाउंडर ने ऐलान किया है कि हिंडनबर्ग को अब बंद कर दिया गया है। इसके फाउंडर ने बताया है कि हिंडनबर्ग को बंद करने का प्लान लम्बे समय से चल रहा था।

हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट पर भारतीय भी बहुत उछल रहा था। खूब संसद में हंगामा कर रहा था, लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ता संभालने से पहले ही जॉर्ज सोरोस समेत deep state भी अमेरिका से भागने शुरू हो चुके हैं। इन लोगों ने कई देशों की अर्थव्यवस्था को चौपट किया है। भारत में भी बिकाऊ विपक्ष के माध्यम से चोट पहुंचा रहा था। गौतम अडानी और अम्बानी को राहुल गाँधी समेत सारा विपक्ष पानी पी-पीकर कोसता आ रहा है, लेकिन अपनी ही पार्टियों के राज्यों में इन दोनों द्वारा निवेश करने पर चुप्पी साधे रहते हैं, क्यों? अब इसे भारतीय विपक्ष का दोगलापन नहीं कहा जाये तो क्या जाये?      

15 जनवरी, 2025 को फाउंडर नेट एंडरसन ने यह घोषणा की। इसको लेकर उन्होंने हिंडनबर्ग की वेबसाइट पर पूरा बयान छापा। इसमें उन्होंने लिखा, “मैंने पिछले साल के आखिर समय में ही अपने परिवार, दोस्तों और अपनी टीम के साथ हिंडनबर्ग को साझा करने की बात बताई थी। योजना यह थी कि हम जिन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे थे, उन्हें पूरा होने के बाद इसे बंद कर दिया जाएगा। और अब हमने पोंजी स्कीम वाला काम पूरा कर लिया है, ऐसे में वह दिन आज है।”

नेट ने इस बयान में हिंडनबर्ग पर ताला लगाने के पीछे कोई एक कारण होने से इनकार किया है। नेट ने कहा, “आखिर हम भी अपनी कम्पनी क्यों बंद कर रहे हैं? इसका कोई ख़ास एक कारण नहीं है, ना ही कोई खतरा है, ना कोई स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या है और ना ही कोई बड़ी व्यक्तिगत समस्या।” नेट ने हिंडनबर्ग को एक लव स्टोरी जैसा बताया है।

हिंडनबर्ग रिसर्च फर्म को नेट एंडरसन ने 2017 में शुरू किया था। यह फर्म बड़ी कंपनियों के विषय में महीनों तक रिसर्च करती थी। इस दौरान मिली गड़बड़ियों या फिर आरोपों को इकट्ठा करती थी और एक बड़ी रिपोर्ट तैयार करती थी।

इसी दौरान यह उस कम्पनी के शेयर स्टॉक मार्केट में शॉर्ट (किसी शेयर पर यह दांव लगाना कि इसका भाव गिरेगा) करती थी। सही मौका देख कर यह रिपोर्ट सनसनीखेज तरीके से जारी की जाती थी। इसके बाद जब उस कंपनी के शेयर का दाम गिरता तो यह लोग करोड़ों डॉलर कमाते थे।

भारत के अडानी समूह के मामले में हिंडनबर्ग ने यही किया था। इसके चलते भारतीय निवेशकों को लाखों करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा था। हालाँकि, अडानी पर हिंडनबर्ग ने जो आरोप लगाए उनमें से अधिकांश हवा हवाई थे और उनके बारे में पहले से ही जानकारी सार्वजनिक थी।

बाद में हुई जाँच में भी अडानी समूह के खिलाफ कोई अपराध सामने नहीं आए थे। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद भारत में सियासी बवाल भी हुआ था। हालाँकि, अडानी समूह वापस पटरी पर आ चुका है लेकिन हिंडनबर्ग को बंद करने की नौबत आ गई है।

हिंडनबर्ग को बंद करने का फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में निजाम बदल रहा है। नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 20 जनवरी, 2025 को पदभार संभालेंगे। ट्रम्प प्रशासन में टेस्ला और स्पेसएक्स जैसी कंपनियों के मालिक एलन मस्क काफी ताकतवर होंगे। हिंडनबर्ग बायडेन प्रशासन के दौरान एलन मस्क के भी पीछे पड़ गया था।

ट्विटर डील में मस्क के खिलाफ कार्रवाई होने के कयास लगाते हुए इसने ट्विटर पर पैसा लगाया था। अब जब मस्क के समर्थन वाली सरकार सत्ता में आ रही है, तो यह कामधाम समेट रहा है।एलन मस्क, जॉर्ज सोरोस के खिलाफ भी रहे हैं। जॉर्ज सोरोस की ही संस्थाएँ हिंडनबर्ग को फंडिंग दिया करती थी।

ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ जाँच नहीं चाहते ब्रिटिश सांसद, सदन में 364 ने विरोध में दिया वोट: एलन मस्क बोले- PM स्टार्मर को करो बर्खास्त

                                              ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ नहीं होगी जाँच
ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ जाँच शुरू हो ये ब्रिटेन की सत्ताधारी पार्टी को मंजूर नहीं है। यही वजह है कि ब्रिटिश संसद में जब विधेयक में संशोधन को लेकर ये माँग उठाई गई कि कि ग्रूमिंग गैंग के विरुद्ध राष्ट्रीय जाँच शुरू हो तो ब्रिटेन के सांसदों ने इसके विरुद्ध वोटिंग की।

 सामने आई जानकारी के अनुसार केवल 111 सांसदों ने माँग के पक्ष में वोट किया जबकि 364 ने खिलाफ में मतदान किया। इसी के साथ लेबर पार्टी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वो बच्चों की सुरक्षा और कल्याण विधेयक को खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं।

लेबर पार्टी का कहना है कि यह संशोधन बच्चों की सुरक्षा और कल्याण से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधानों को कमजोर करेगा। सांसदों ने चेतावनी दी है कि यदि यह संशोधन पारित होता है, तो इससे बच्चों की शिक्षा और उनके विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

ग्रूमिंग गैंग का मुद्दा पिछले एक हफ्ते से सुर्खियों में खुद दुनिया के सबसे अमीर आदमी इस गैंग का पक्ष लेने वाले लोगों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं व ब्रिटेन की पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं।

वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर ने इस मुद्दे पर बात रखते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मस्क का नाम लिए बिना कहा कि जो लोग झूठ और गलत सूचनाओं को फैला रहे हैं, उन्हें पीड़ितों में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्हें सिर्फ खुद में दिलचस्पी है।

उन्होंने ये भी कहा कि वे 2008 से 2013 के बीच प्रॉसिक्यूशन सर्विस के डायरेक्टर थे तभी ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ पहला मामला दर्ज किया गया था। स्टार्मर ने कहा कि उन्होंने जिस भी मामले को हाथ में लिया, वह अदालत तक पहुंचा और उसमें पर्याप्त कार्रवाई हुई।

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ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग की हैवानियत खोल रहे एलन मस्क : मुँह में ठूंसी गेंद, Anal गैंगरेप के लिए 13 सा
ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग की हैवानियत खोल रहे एलन मस्क : मुँह में ठूंसी गेंद, Anal गैंगरेप के लिए 13 सा
 

वहीं मस्क का कहना है कि स्टार्मर जाँच कर रही समिति के अध्यक्ष थे लेकिन फिर भी उन्होंने आरोपितों के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी नहीं दी और अब प्रधानमंत्री के रूप में भी स्टार्मर इस घटना पर पर्दा डाल रहे हैं। मस्क ने इस पूरे मामले में ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स से हस्तक्षेप कर स्टार्मर को बर्खास्त करने की अपील की। साथ ही सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए उन्हें जेल भेजने की माँग की।

ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग की हैवानियत खोल रहे एलन मस्क : मुँह में ठूंसी गेंद, Anal गैंगरेप के लिए 13 साल की बच्ची पर 5-6 मर्दों को छोड़ा: चश्मदीदों को जिंदा जलाने की दी जाती थी धमकी

                                               ग्रूमिंग गैंग की हैवानियत (फोटो साभार: bbc)
ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ इन दिनों मुखर होकर बोलने वाले एलन मस्क ने हाल में ग्रूमिंग गैंग की दरिंदगी को बताने के लिए कुछ घटनाओं की डिटेल को साझा किया है। इस क्रम में एक 13 साल की बच्ची के साथ हुई हैवानियत की डिटेल भी है।

एलन मस्क के ट्वीट में एक इस्लामी कट्टरपंथी मोहम्मद करार के कुकर्मों का जिक्र है जिसने एक 13 साल की बच्ची को एनल गैंग रेप के लिए तैयार किया था और बाद में 5 से 6 लोग उसपर टूट पड़े। इस दौरान बच्ची के गुदाद्वार को फैलाने के लिए पंप तक का इस्तेमाल किया और उसके बाद एक टाइम तो ऐसा भी आया कि चार-चार मर्दों ने उसके भीतर एक साथ लिंग डाला हुआ था।। वो दर्द से चिल्लाए न इसलिए उसके मुँह में लाल रंग की गेंद डाल दी गई थी।

इतना ही नहीं, मोहम्मद करार ने सिर्फ दूसरों से उसका गैंगरेप नहीं कराया बल्कि खुद भी उसका रेप किया। ये सब उसी समय हुआ जब वो 13 साल की पूरी भी नहीं हुई थी। उसके साथ न केवल ओरल सेक्स किया गया बल्कि वेजाइनल सेक्स भी किया गया।

एलन मस्क द्वारा साझा किया गया ये स्क्रीनशॉट www.judiciary.uk पर मौजूद लीगल दस्तावेज का है जिसमें ग्रूमिंग गैग के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसके अनुसार ग्रूमिंग गैंग से जुड़े इस्लामी कट्टरपंथी चश्मदीदों को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की धमकी देते थे, उन्हें बंदूक दिखाकर डराया धमकाया जाता था। ग्रूमिंग गैंग चश्मदीदों को ये कहकर चुप कराते थे कि अगर उन्होंने किसी को कुछ भी कहा था उनके साथ भी वही होगा तो पीड़िताओं के साथ हो रहा है यानी कई मर्द मिलकर रेप करेंगे। बता दें कि साल 2019 में इसी मोहम्मद करार को इसके 2 भाइयों सहित कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

मौजूदा दस्तावेज ये भी बताते हैं कि कैसे ग्रूमिंग गैंग को पुलिस ने संरक्षण दिया हुआ था। दो ऐसे मामले थे जहाँ लड़कियों के पिता को उनकी बेटियों के बारे में पता भी चला और वो उन्हें बचाने भी गए, लेकिन हुआ क्या? जिस जगह पहुँचकर पुलिस को पिता की मदद करनी चाहिए थी, उन्हीं जगहों पर पहुँचकर पुलिस ने लाचार पिता को अरेस्ट कर लिया और आरोपितों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई।

एलन मस्क ऐसे केसों को आधार बनाकर कहते हैं कि सोचकर देखिए कि आप पिता हैं और बेटी को गैंगरेप और हत्या से बचाने के लिए कहीं पहुँचे हैं, लेकिन पुलिस ने उलटा आपको ही गिरफ्तार कर लिया।

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ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग की समस्या आज की नहीं है। सालों से इस गैंग का शिकार हुई पीड़िताओं की कहानी लोगों को चौंकाती रही है। इस गैंग का कनेक्शन सीधा पाकिस्तान के इस्लामी कट्टरपंथियों से था जो चुन-चुन कर छोटी उम्र की गोरी और गैर मुस्लिम लड़कियों को अपना शिकार बनाते, फिर उनका शोषण करते, उनसे अप्राकृतिक रूप से बलात्कार करते, उनकी तस्करी करते और उन्हें हिंसक धमकियाँ देते थे। 2013 के बाद इस गैंग के बारे में दुनिया को पता चला और फिर एक टास्कफोर्स बनी जिसने पिछले वर्ष तक 550 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया था और 4000 से अधिक पीड़ितों की पहचान की थी।

मुस्लिम, इस्लाम और पैगंबर को लेकर गंदी-गंदी बात करने वाले कौन हैं टॉमी रॉबिन्सन: दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क भी आए उनके सपोर्ट में

                                                                                          टॉमी रॉबिनसन ( फोटो साभार: forbes)
ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ मुखर होकर बोलने के बाद अब दुनिया के सबसे अमीर आदमी एलन मस्क ने ब्रिटेन के एक दक्षिणपंथी टॉमी रॉबिनसन के पक्ष में आवाज उठाई है। उनके ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर लोग टॉमी रॉबिनसन के बारे में जानना चाहते हैं कि आखिर उन्होंने ऐसा किया क्या है जो ब्रिटेन सरकार ने उन्हें जेल में डाला हुआ है।

 जानकारी के मुताबिक टॉमी रॉबिनसन (असली नाम स्टीफन याक्सली लेनन) दक्षिणपंथी विचारधारा की मुखर आवाज रहे हैं। टॉमी रॉबिन्सन का असली नाम स्टीफन याक्सली-लेनन है। उन्हें ब्रिटिश इंग्लिश डिफेंस लीग (EDL) नामक संगठन के संस्थापक के रूप में जाना जाता है, जो खुलकर अप्रावासी मुस्लिमो के खिलाफ, इस्लाम के खिलाफ और पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ बोलने के लिए जाना जाता है।

इतना ही नहीं यह संगठन अक्सर इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा के खिलप विरोध प्रदर्शन करता है और इसके सदस्यों पर हिंसक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया जाता रहा है। स्वयं रॉबिनसन इस मुखर रवैये के कारण इस्लामी कट्टपंथियों के निशाने पर काफी समय तक थे। फिर बाद में उनके ऊपर सीरियाई लड़के से जुड़े मामले में अदालत की अवमानना करने का आरोप लगाकर जेल में डाल दिया गया।

रॉबिनसन पिछले 18 महीने से जेल की सजा काट रहे हैं। जानकारी के मुताबिक उन्होंने अदालती मनाही के बावजूद एक डॉक्यूमेंट्री प्रसारित की थी, जिसमें मुस्लिम युवक के साथ यौन अपराध को दिखाया गया था। ब्रिटिश अदालत ने इस डॉक्यूमेंट्री में किए गए दावों को आधारहीन करार दिया था।

वामपंथी और इस्लामी कट्टरपंथी टॉमी रॉबिनसन का हर प्रकार से विरोध करते रहे हैं, लेकिन एलन मस्क ने हाल में रॉबिन्सन को रिहा करने का आह्वान किया है। मस्क ने रॉबिन्सन की विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री को सोशल मीडिया पर साझा किया और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिसने रॉबिनसन को जेल मे डाला है उन्हें जेल में होना चाहिए।

ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग का काला सच : गोरी लड़कियाँ कचरा और वेश्या, इनका कैसे भी यूज करो…, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल: एलन मस्क ने कहा- सरकार के लोगों को भी जेल में डालो

फिर से चर्चा में आया ग्रूमिंग गैंग
ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग की समस्या आज की नहीं है। सालों से इस गैंग का शिकार हुई पीड़िताओं की कहानी लोगों को चौंकाती रही है। इस गैंग का कनेक्शन सीधा पाकिस्तान के इस्लामी कट्टरपंथियों से था जो चुन-चुन कर छोटी उम्र की गोरी और गैर मुस्लिम लड़कियों को अपना शिकार बनाते, फिर उनका शोषण करते, उनसे अप्राकृतिक रूप से बलात्कार करते, उनकी तस्करी करते और उन्हें हिंसक धमकियाँ देते थे। ग्रूमिंग गैंग चलाने वाले दरिंदों का साफ मानना था कि श्वेत लड़कियाँ कचरा और वेश्या हैं इनका इस्तेमाल कैसे भी हो सकता है।

मानवाधिकार से लेकर यूएनओ तक सब खामोश क्यों? क्या मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा महिलाओं का इसी तरह शोषण होता रहेगा? क्या महिलाओं का कोई आत्म-सम्मान नहीं? आखिर कब तक महिलाएं इन जेहादियों का शिकार होती रहेंगी? इस गंभीर समस्या पर विश्व को एकजुट होकर महिलाओं के सम्मान की रक्षा करनी होगी।     

हैरानी की बात ये है कि लड़कियों को टारगेट करने वाले अपना धंधा एक दशक तक ब्रिटेन के अलग-अलग शहरों (लंदन, ब्रिस्टल, बर्मिंघम, रोशडेल, रोदरहैम आदि) में चलाते रहे लेकिन पुलिस प्रशासन ने इस पर कोई एक्शन तक नहीं लिया। नतीजतन 1997 से 2013 तक एशियाई देशों (मुख्यत: पाकिस्तान) के इस्लामी कट्टरपंथी 1400 लड़कियों को अपने निशाना बना चुके थे। मामले का खुलासा आखिर में तब हुआ कुछ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर ध्यान दिया। इन्हीं लोगों की पहल से इस मामले में एक स्वतंत्र रिपोर्ट आई जिसने इस मुद्दे को उठाया।

पीड़ितों की आपबीती

आज एक बार फिर अगर ये मामला दोबारा चर्चा में है तो इसलिए क्योंकि सोशल मीडिया पर रॉदरहैम बाल यौन शोषण कांड की रिपोर्ट शेयर हो रही है। लोगों को फिर बताया जा रहा है कि कैसे इस्लामी कट्टरपंथियों ने पीड़िताओं को अलग-अलग ढंग से प्रताड़ित किया और जब वो अपनी शिकायतें लेकर पुलिस के पास गईं तो उनकी कोई सुनवाई तक नहीं हुई। यहाँ तक पीड़िताओं के अभिभावकों के साथ भी अभद्रता की गई।
रिपोर्ट में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए एक पीड़िता का बयान है। इस बयान के अनुसार 15 साल की उम्र में लड़की किसी बशरत हुसैन के साथ रिश्ते में थी। इस रिश्ते के दौरान ही उसे पता चला था कि बशरत के भाइयों के बीच और साउथ योर्कशायर पुलिस थाने के अधिकारियों का आपस में उठना-बैठना है।
इसी तरह एक अन्य मामले में एक रेप पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी बेटी के साथ जो हुआ उसके बाद उसे सर्जरी तक करवानी पड़ी थी, लेकिन न्याय की माँग लेकर जब वो पुलिस के पास गए तो एक अधिकारी ने कार्रवाई करने की बजाय उन्हें कहा कि इस घटना से उनकी बेटी को सबक मिलेगा।
अन्य मामले में एक लापता हुई लड़की के पिता को अधिकारी द्वारा कहा गया था कि रोथरहैम में तो अपनी उम्र से बड़े एशियाई बॉयफ्रेंड बनाने को लड़कियों ने फैशन बना लिया है। घबराने की बात नहीं है लड़की खुद आ जाएगी।
एक वीडियो भी वायरल है जिसमें एक पीड़ित पिता अपनी आपबीती बता रहा है। सुन सकते हैं कि पीड़ित पिता कहता है कि एक बार उन्हें कॉल आई कि उनकी बेटी को कहाँ रखा गया है। वो चूँकि उस जगह के करीब ही थे तो वो उस अपार्टमेंट में गए। उन्होंने दरवाजा खटखटाया और फिर अंदर देखा तो कुछ लोग पर्दे के पीछे थे। इसके बाद पुलिस भी वहाँ 5 मिनट के भीतर आ गई लेकिन उन्होंने आरोपितों को पकड़ने की बजाय उन्हें ही गिरफ्तार कर लिया और सवाल पूछा- “तुम यहाँ क्या कर रहे हो।” इसके बाद पुलिस फिर उस पिता को उनके घर लेकर गई और वहाँ भी उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

ग्रूमिंग गैंग पर बोले एलन मस्क और जेके रॉलिंग

इन्हीं ग्रूमिंग गैंग की रिपोर्ट देखकर मामले पर प्रतिक्रिया एलन मस्क से लेकर हैरी पॉटर को लिखने वाली जे के रॉलिंग तक ने दी है। एलन मस्क ने इस पर ट्वीट करते हुए कहा है कि ब्रिटेन में तो सत्ता के सभी स्तरों के बहुत से लोगों को इसके लिए जेल में होना चाहिए। उन्होंने खुलेआम ये प्रतिक्रिया ब्रिटिश लेबर पार्टी की मंत्री रही जेस फिलिप्स को लेकर दी जिन्होंने एक समय में मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ जाँच का विरोध किया था। वहीं जेके रॉलिंग भी कहती हैं कि इस पूरे मामले में पुलिस का भ्रष्टाचार विश्वास से भी परे है। उन्होंने इस गैंग का नाम ग्रूमिंग गैंग रखे जाने पर भी सवाल उठाए।

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के संदिग्धों पर कार्रवाई

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ की गई कार्रवाई में पिछले वर्ष तक 550 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई एक विशेष पुलिस टास्कफोर्स द्वारा की गई, जिसे अप्रैल 2023 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक द्वारा स्थापित किया गया था। इस टास्कफोर्स का उद्देश्य बाल यौन शोषण और ग्रूमिंग से संबंधित मामलों की जाँच को बेहतर बनाना और बच्चों को सुरक्षा प्रदान करना था।

यह टास्कफोर्स इंग्लैंड और वेल्स के सभी 43 पुलिस बलों के साथ मिलकर काम कर रही है। इसमें विशेषज्ञ अधिकारी और डेटा विश्लेषक शामिल हैं, जो ग्रूमिंग गैंग के मामलों की जाँच पहले भी कर चुके हैं। इस टास्कफोर्स की वजह से 4,000 से अधिक पीड़ितों की पहचान हो चुकी है और उन्हें सुरक्षा भी प्रदान की जा चुकी है। 

‘झूठा और बेईमान है जस्टिन ट्रूडो’: डोनाल्ड ट्रंप का पुराना पोस्ट वायरल, बोले मस्क- चुनाव में इनका सफाया होगा; ‘The Australian Today’ पर बैन से भी घिरा कनाडा; पाकिस्तान के बाद बदनाम होने वाला दूसरा देश कनाडा

                                              एलन मस्क और जस्टिन ट्रुडो (फोटो साभार: matrabhumi)
जिस तरह आतंकवाद को संरक्षण देने की वजह से पाकिस्तान विश्व में बदनाम हो चुका है, ठीक उसी राह पर खालिस्तान को समर्थन और संरक्षण देने की वजह से जस्टिन ट्रुडो कनाडा को ले गए हैं। जो कनाडा के लिए अच्छे संकेत नहीं है। संभावनाएं लगाई जा रही है कि कनाडा की पाकिस्तान से भी ज्यादा दुर्गति होने वाली है। पाकिस्तान को गुप्त रूप से आर्थिक मदद कई मुस्लिम देश दे रहे हैं, लेकिन कनाडा को कौन देगा?    

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो शुरुआत से अपनी हरकतों के कारण घिरते आए हैं। 2018 में कभी ट्रंप ने उन्हें स्पष्ट रूप से बेईमान और झूठा कहा था और अब कनाडाई लोग भी सोशल मीडिया पर ऐसी बातें लिख रहे हैं। हाल में कनाडा ने ‘द ऑस्ट्रेलियन टुडे’ को अपने देश में बैन किया तो इस मीडिया आउटलेट ने भी ट्रुडो को लताड़ लगाई है।

दरअसल, द ऑस्ट्रेलियन टुडे ने हाल में विदेशी मंत्री एस जयशंकर और ऑस्ट्रेलियाई विदेशी मंत्री पेनी वोंग की प्रेस कॉन्फ्रेंस को दिखाया था जिसके बाद कनाडा ने उन्हें अपने देश में ब्लॉक कर दिया। इसके बाद द ऑस्ट्रेलिया टुडे के प्रबंध संपादक जितार्थ जय भारद्वाज ने इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने पूछा कि अगर कनाडा की समस्या भारत से है तो वो हमें निशाना बना रहा है।

उन्होंने कहा, “हमारा पब्लिकेशन आजाद मीडिया की वकालत करना जारी रखेगा। हम अपने समुदाय की ओर से दिखाई गई एकजुटता का महत्व समझते हैं। सूचना की स्वतंत्रता और दर्शकों के विविध दृष्टिकोणों तक पहुँचने के अधिकार को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

सिर्फ ‘द ऑस्ट्रेलियन टुडे’ ने ही नहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कनाडा की ऐसी कार्रवाई से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति पाखंड की बू आती है।

वहीं, एक्स के मालिक एलन मस्क तो खुलेआम उनका विरोध कर रहे हैं। किसी ने एक ट्वीट में एलन मस्क से कहा कि वो अपने देश कनाडा में ट्रुडो से मुक्ति चाहते हैं तो एलन मस्क ने जवाब दिया कि चिंता न की जाए अगले चुनावों में ट्रुडो का सत्ता से हटना निश्चित है।

इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप के कुछ पुराने ट्वीट भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। अपने ट्वीट में उन्होंने बताया था कि किस तरह जी7 में ट्रुडो का रवैया अलग था और बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस के समय अलग। उन्होंने ट्रुडो को उस समय पोस्ट में बेईमान और बहुत धरा हुआ व्यक्ति बताया था।

क्या जॉर्जिया मेलोनी को डेट कर रहे एलन मस्क? क्यों कहा- ये जितनी बाहर से सुंदर, उससे कहीं अधिक भीतर से…

        फोटो पर दोनों के डेटिंग करने की बात कही गई (फोटो साभार: X/@SawyerMerritt/@iam_smx)
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की हाल ही में अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क ने काफी प्रशंसा की। इटली की प्रधानमंत्री की प्रशंसा एलन मस्क ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम में की। इसका एक वीडियो भी जॉर्जिया मेलोनी ने अपने एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किया।

इस वीडियो में एलन मस्क मस्क, मेलोनी के इटली में किए गए कामों और उससे आए परिणामों को बताते हैं। इसके बाद मस्क ने यह भी कहा कि मेलोनी जितनी बाहर से सुंदर हैं, उससे ज्यादा अंदर से सुंदर हैं। दोनों की एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई।

इस तस्वीर में दोनों एक डिनर में एक साथ बैठे हैं और एक दूसरे की तरफ देख रहे हैं। यह फोटो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। इस तस्वीर के बाद लोगों ने इस बात को लेकर चर्चा की क्या एलन मस्क और जॉर्जिया मेलोनी एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं।

एलन मस्क ने डेटिंग के इस सवाल का खुद ही जवाब दे दिया है। उन्होंने डेटिंग के कयास को लेकर एक्स पर की गई एक पोस्ट के जवाब में साफ किया कि वह डेट नहीं कर रहे। उन्होंने लिखा, “हम डेट नहीं कर रहे हैं।” उनका यह जवाब भी अब वायरल है। यह ऐसा पहला मौका नहीं है जब जॉर्जिया मेलोनी चर्चाओं में बनी हुई हैं, इससे पहले भी वह कई बार कई मामलों को लेकर इंटरनेट पर छाई रही है।

जॉर्जिया मेलोनी

जॉर्जिया मेलोनी का जन्म 15 जनवरी 1977 को हुआ। प्रधानमंत्री बनने से पहले वह एक इतालवी पत्रकार और पॉलिटिशियन थीं। सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी के समर्थकों ने एक आंदोलन शुरू किया था। इसे इटालियन सोशल मूवमेंट नाम दिया गया था। 15 साल की उम्र में मेलोनी ने इसके यूथ विंग में काम किया। मेलोनी के पिता अकाउंटेंट थे। रोम में जन्मीं मेलोनी अंग्रेजी, स्पेनिश और फ्रेंच बोलती हैं। उनकी एक बेटी है, जिसका जन्म 2006 में हुआ।

इटली की पहली दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री

जॉर्जिया मेलोनी साल 2008 में 31 साल की उम्र में इटली की सबसे युवा मंत्री बनी थीं। वहीं साल 2012 में उन्होंने ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी की स्थापना की। इसके बाद 2021 में मेलोनी की किताब आई ‘आइ एम जॉर्जिया’, जिसमें उनके विजन और विचारों पर खूब बात हुई है। 
जॉर्जिया मेलोनी के बारें में एक तथ्य ये भी है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद इटली में ये पहली बार हुआ है जब राइट विंग कि कोई नेता प्रधानमंत्री की गद्दी पर बैठी हों। ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी की नेता मेलोनी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले ही मुस्लिम अप्रवासियों को शरण देने का खुलकर विरोध किया था और इसके साथ ही समलैंगिकों (LGBT) का भी उन्होंने जमकर विरोध किया था।

कट्टरपंथी इस्लाम, आतंकवाद और समलैंगिकता की मुखर विरोधी 

25 सितंबर, 2022 को अपनी जीत के बाद से ही मेलोनी समर्थक जहाँ खुश हैं वहीं उनके आलोचक उनकी दक्षिणपंथी ब्रदर्स ऑफ़ इटली पार्टी के उदय के बाद से ही लगातार हमले कर रहे हैं। मेलोनी जिन मुद्दों पर चुनाव जीतकर आईं थीं, उन्होंने प्रधानमंत्री बनते ही स्पष्ट कर दिया है कि वह एलजीबीटी लॉबी, जेंडर आइडियोलॉजी और कट्टरपंथी इस्लाम का विरोध करती हैं, इसके साथ अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोप की वह नव-फासीवादी हैं, उन्होंने साफ़ मना कर दिया था।