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जस्टिन ट्रूडो के जाते ही कनाडा की जनता ने बाँध दिया खालिस्तानियों का बोरिया-बिस्तर: जगमीत सिंह खुद चुनाव हारे

                                   कनाडा के पूर्व पीएम ट्रूडो और खालिस्तानी जगमीत सिंह का फाइल फोटो 
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी ने सोमवार को संघीय चुनाव में जीत हासिल की है। वहीं पियरे पोलिएवरे की कंजर्वेटिव पार्टी ने हार स्वीकार कर ली है। चुनाव के नतीजों से सबसे बड़ी बात ये रही कि लिबरल पार्टी जो कुछ महीने पहले तक प्रधानमंत्री रहे जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व में भारी हार का सामना कर रही थी, उसने जीत हासिल की है।

इस चुनाव में खालिस्तानी नेता जगमीत सिंह की पार्टी एनडीपी को करारी शिकस्त मिली है। न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जगमीत सिंह भी खुद ब्रिटिश कोलंबिया के बर्नाबी सेंट्रल से चुनाव हार गया है। इतना ही नहीं उसकी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी का नेशनल पार्टी का दर्जा भी छिन गया है। राष्ट्रीय पार्टी के लिए कम से कम 12 सीटों की जरूरत थी लेकिन उसे सिर्फ 7 सीटें हासिल हुई हैं। करारी हार का जिम्मा उठाते हुए जगमीत सिंह ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। जगमीत सिंह पिछले 8 सालों से पार्टी प्रमुख था।

हार स्वीकार करते हुए जगमीत सिंह ने कहा, ” मैं निराश हूँ कि हम ज्यादा सीटें नहीं जीत सके लेकिन हमारी पार्टी को लेकर मैं आशावादी हूँ।“

हालाँकि जगमीत सिंह की पार्टी की करारी हार को कनाडा में खालिस्तानियों को करारा झटका के तौर पर देखा जा रहा है। उसकी हार से भारत और कनाडा के बीच राजनयिक और व्यापारिक संबंधों को फिर से स्थापित करने में मदद मिलेगी। हाल के वर्षों में जगमीत सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की गठजोड़ ने भारत के साथ कूटनीतिक रिश्ते खराब किए। इनलोगों ने आतंकवादी हरदीप निज्जर की हत्या में भारत के शामिल होने का आरोप भी लगाया। यही नहीं प्रधानमंत्री ट्रूडो ने 2020 में भारत में किसान आंदोलन के पक्ष में बयान दिया था। ऐसा करने वाले वो दुनिया के एकमात्र नेता थे। भारत ने ट्रूडो प्रशासन पर खालिस्तानियों के प्रति नरम रूख अपनाने का आरोप भी लगाया था। अब नए हालात में भारत-कनाडा के रिश्ते में सुधार हो सकता है। पीएम मोदी ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को जीत की बधाई दी है।

कनाडा चुनाव के नतीजों को ट्रंप की नीतियों से प्रभावित भी माना जा रहा है। देश के पब्लिक ब्रॉडकास्टर सीबीसी के मुताबिक लिबरल पार्टी की यह वापसी राष्ट्रपति ट्रम्प की टैरिफ नीतियों और कनाडा पर हमलों के कारण हुई है क्योंकि कुछ दिनों पहले तक पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व में पार्टी भारी हार का सामना कर रही थी। अपने विजय भाषण में भी कार्नी ने अमेरिका की आलोचना की है।

उन्होंने कहा, ” हम अमेरिकी विश्वासघात के सदमे से उबर चुके हैं, लेकिन हमें सबक कभी नहीं भूलना चाहिए। जैसा कि मैं महीनों से चेतावनी दे रहा हूं, अमेरिका हमारी जमीन, हमारे संसाधन, हमारा पानी, हमारा देश चाहता है। ये बेकार की धमकियाँ नहीं हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प हमें तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अमेरिका हम पर कब्ज़ा कर सके। ऐसा कभी नहीं होगा। लेकिन हमें इस वास्तविकता को भी पहचानना चाहिए कि हमारी दुनिया मौलिक रूप से बदल गई है।”

कनाडा : महँगाई, भारत से लड़ाई, मंत्रियों की रुसवाई… तय थी जस्टिन ट्रूडो की विदाई: प्रधानमंत्री बनने की रेस में भारतवंशी अनीता आनंद, क्या ‘खालिस्तानी प्रेम’ पर लगेगा ब्रेक?

                  जस्टिन ट्रूडो की जगह के लिए अनीता आनंद भी दौड़ में थीं (फोटो साभार: Financial Express)
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 6 जनवरी, 2025 को इस्तीफ़ा देने का ऐलान कर दिया है। ट्रूडो ने कहा कि वह आगामी आम चुनावों में लिबरल पार्टी का चेहरा बनने के लिए पसंदीदा उम्मीदवार नहीं हैं। लिबरल पार्टी से प्रधानमंत्री पद के लिए नए नेता का चयन होने के बाद जस्टिन ट्रूडो अपना इस्तीफ़ा दे देंगे। ट्रूडो के इस इस्तीफे की पटकथा बीते लगभग एक वर्ष से लिखी जा रही थी। इस खबर के बाद अब लिबरल पार्टी के नेताओं में प्रधानमंत्री पद की दौड़ शुरू हो गई है। इस दौड़ में एक भारतवंशी अनीता आनंद भी शामिल हैं।

क्यों ट्रूडो को जाना पड़ा?

जस्टिन ट्रूडो 2015 में पहली बार कनाडा के प्रधानमंत्री बने थे। इस चुनाव में उन्होंने लिबरल पार्टी को बड़ी जीत दिलाई थी। इसके बाद उन्होंने 2019 और 2021 में भी जीत हासिल की। 2021 की सरकार के लिए उन्हें जोड़-तोड़ करना पड़ा। वह 2013 से ही लिबरल पार्टी के नेता का रोल निभाते आ रहे हैं। जस्टिन ट्रूडो जब प्रधानमंत्री बने थे. तब उनकी लोकप्रियता चरम पर थी। लेकिन समय के साथ उनके फैसलों और उनकी सरकार की विफलताओं के चलते अब इस्तीफे की नौबत आई है।
ट्रूडो की लोकप्रियता का जायजा लेने वाले एक ट्रैकर के मुताबिक, 2015-16 में लगभग 65% लोग उन्हें पसंद करते थे। 2025 आते-आते 75% लोग उन्हें नापसंद करने लगे हैं। मात्र 22% लोग अभी उनका समर्थन करते हैं। ट्रूडो का विरोध 2020 की कोविड महामारी के बाद तेजी से बढ़ा है। कनाडा में 2020 के बाद घरों की किल्लत, महंगाई, बढ़ता कट्टरपंथ, सुरक्षा चिंताएँ और रोजगार ऐसे मुद्दे रहे हैं, जिन्हें वह नहीं सुलझा पाए। इसके अलावा ट्रूडो की सदारत में लिबरल पार्टी अपने गढ़ रहे चुनाव भी हार गई।
ट्रूडो की सरकार से कुछ दिनों पहले जगमीत सिंह की NDP ने भी समर्थन वापस ले लिया था। इसी के साथ कुछ सांसदों ने उनको पद से हटाने के लिए कोशिश चालू कर दी। जनवरी आते-आते उन पर दबाव बढ़ गया और अब उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा। जस्टिन ट्रूडो ने 2023 के बाद से ही भारत से भी लड़ाई मोल ले ली। उन्होने खालिस्तानियों को खुश करने के लिए भारत से लड़ाई मोल ले ली और आतंकी निज्जर की हत्या का आरोप भारतीय एजेंसियों पर ठोंक दिया। इसके चलते उनकी और थू-थू हुई।

कौन अब रेस में?

कनाडा के नए प्रधानमंत्री की रेस में अब कई लिबरल नेता हैं। कनाडा की पूर्व वित्त मंत्री क्रिश्टिया फ्रीलैंड, बड़े नेता मार्क कारने, वित्त मंत्री डोमिनिक लीब्लांक, पूर्व विदेश मंत्री मेलीना जोली, पूर्व रक्षा मंत्री अनीता आनंद समेत जोनाथन विलकिंसन, करीना गौल्ड आदि प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हैं। इनमें से कई नेताओं ने अपने समर्थन में लोगों को जुटाना भी चालू कर दिया है। उनका नाम सबसे आगे हैं, जिन्होंने दिसम्बर महीने में ट्रूडो की कैबिनेट से इस्तीफ़ा दिया था और ट्रूडो के भी इस्तीफे की माँग की थी।

अनीता आनंद कौन हैं?

ट्रूडो की जगह कनाडा के प्रधानमंत्री पद के लिए अनीता आनंद का भी नाम चल रहा है। अनीता आनंद 2019 में पहली बार सरकार में शामिल हुई थीं। ट्रूडो ने उन्हें 2019 में एक कम चमकधमक वाला मंत्रालय थमाया था। वह कनाडा की पहली हिन्दू कैबिनेट मंत्री थीं। उनको प्रोक्योरमेंट मंत्रालय मिला था, जो कनाडा के लिए बाकी जगह से आपूर्ति जुटाने का काम करता है। इस मंत्रालय का महत्व 2020 में तब और बढ़ गया जब पूरी दुनिया से वैक्सीन जुटानी थीं। इसके चलते अनीता आनंद को काफी प्रसिद्धि मिली।
इसी के चलते 2021 में उन्हें कनाडा का रक्षा मंत्री बना दिया गया। वह यूक्रेन-रूस संघर्ष के मौके पर रक्षा मंत्री रहीं। उन्हें कुछ दिनों के लिए कैबिनेट से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्हें दिसम्बर, 2024 में दोबारा कैबिनेट में शामिल करके परिवहन और व्यापार मामलों का मंत्री बना दिया गया। अनीता आनंद भारतवंशी है और उनके माता-पिता नाइजीरिया से कनाडा पहुँचे थे। वह कनाडा में ही जन्मी थीं। वकालत की पढ़ाई पढ़ने वाली अनीता आनंद 2013 से ही सांसद हैं। वह ट्रूडो के करीबियों में से एक मानी जाती हैं।

भारत से रिश्तों पर क्या असर?

जस्टिन ट्रूडो के जाने की खबर भारत से रिश्तों के संबंध में बहुत मायने रखती है। भारत पर वह खुले तौर पर दखलअंदाजी और कनाडाई नागरिकों की हत्या के हवा-हवाई आरोप जड़ चुके हैं। भारत भी उन पर राजनीतिक फायदे के लिए राजनयिक रिश्तों की बलि चढ़ाने का आरोप लगाता आया है। हाल ही में दोनों ने एक-दूसरे ने शीर्ष राजनयिकों को भी वापस बुला लिया था। ट्रूडो के जाने के बाद भारत से रिश्तों में कोई बड़ा बदलाव आने की कोई ख़ास उम्मीद नहीं है, लेकिन हाँ नया प्रधानमंत्री कौन होगा, इस आधार पर थोड़े परिवर्तन हो सकते हैं।
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इससे पहले जब उन्होंने भारत पर आरोप लगाए थे तब भी उनके खिलाफ कनाडा के अंदर से ही आवाजें उठी थीं। कनाडा के कई पत्रकार और नेताओं ने उन्हें लताड़ा था। ट्रूडो ने कोई सबूत भी नहीं दिखाए थे। इसको लेकर भी उन पर प्रश्न उठे थे।

औकात में आया कनाडा: जस्टिन ट्रूडो के सलाहकार ने कहा- निज्जर की हत्या में PM मोदी और अजीत डोवाल को जोड़ना निराधार, इसके कोई सबूत नहीं


कनाडियन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अपने निजी राजनीतिक स्वार्थ और खालिस्तानियों को खुश करने के चक्कर में भारत-कनाडा के रिश्तों में खाई खोदने का काम लगातार कर रहे हैं। अपने पीएम को खुश करने के लिए अब इसी काम को कनाडा का मीडिया आगे बढ़ा रहा है। हालांकि जिस तरह जस्टिन ट्रूडो की दाल पीएम मोदी से पंगा लेने की कोशिश के बावजूद नहीं गली थी। वही हाल कनाडा के मीडिया का भी हो रहा है। दरअसल, कनाडा के प्रमुख अखबार द ग्लोब एंड मेल ने अपनी के विशेष रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि भारत के प्रधानमंत्री को खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की साजिश के बारे में पता था। हालांकि भारत सरकार ने कनाडाई अखबार की रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया है। साथ ही इसे भारत को बदनाम करने की साजिश करार दिया है। कनाडा के पीएम ने भी पहले इसी तरह के आरोप भारत सरकार पर लगाए थे, लेकिन अपनी तीखी आलोचनाओं के बीच उनको यहां तक खुद कबूलना पड़ा है कि निज्जर हत्याकांड को लेकर उनकी सरकार ने भारत को कोई ठोस सबूत नहीं दिया है। अब कनाडाई मीडिया में भारत को बदनाम करने वाली रिपोर्ट पर नई दिल्ली की फटकार के बाद कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार लाइन पर आ गई है। कनाडा सरकार ने बयान जारी कर उस रिपोर्ट को खारिज किया है, जिसमें कनाडा में (निज्जर हत्याकांड) आपराधिक गतिविधि के मामले में पीएम मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का नाम लिया गया था।

भारत को बदनाम करने वाले ट्रूडो की पोल खुलने के बाद हो रही आलोचना
प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की अगुवाई वाली कनाडा की सरकार ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर पहले भी मढ़ा है। लेकिन पीएम की कुर्सी बचाने और चुनाव जीतने की कोशिश में भारत को बदनाम करने वाले ट्रूडो की पोल खुल गई थी। इस पूरे विवाद को लेकर जस्टिन ट्रूडो की काफी आलोचना हुई। कनाडा में अब लोग उनसे ऊब चुके हैं। कनाडा में चुनाव से पहले ही उनके इस्तीफे की मांग बहुत जोर पकड़ने लगी है। भारत और कनाडा में जारी कूटनीतिक विवाद के बीच कनाडा के एक लिबरल सांसद ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से अगले चुनाव से पहले पार्टी नेता के पद से इस्तीफा देने को कहा है। कनाडा के सांसद सीन केसी का कहना है कि देश के लोग जस्टिन ट्रूडो को अब और बर्दाश्त नहीं कर सकते।

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार बैकफुट पर आ गई है। कनाडा सरकार ने कहा कि भारत में वांछित निज्जर की हत्या में भारत के होने का उसके पास कोई सबूत नहीं है। ट्रूडो सरकार ने एक बयान जारी कर कहा कि उसने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवाल पर कभी कोई आरोप नहीं लगाया।

प्रिवी काउंसिल के डिप्टी क्लर्क और प्रधानमंत्री ट्रूडो के राष्ट्रीय सुरक्षा एवं खुफिया सलाहकार नथाली जी ड्रौइन ने कहा, “सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण और जारी खतरे के कारण RCMP (रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस) और अधिकारियों ने 14 अक्टूबर को कनाडा में भारत सरकार के एजेंटों द्वारा की गई गंभीर आपराधिक गतिविधि के सार्वजनिक आरोप लगाने का असाधारण कदम उठाया।”

प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने आगे कहा, “कनाडा सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर या NSA डोवाल को कनाडा के भीतर गंभीर आपराधिक गतिविधि से जोड़ने के बारे में कभी नहीं कहा है और ना ही इससे जुड़े सबूतों की उसे जानकारी है। इसके विपरीत, कोई भी सुझाव काल्पनिक और ग़लत दोनों है।”

ट्रूडो सरकार का ये स्पष्टीकरण कनाडा के एक अखबार ‘द ग्लोब एंड मेल’ में छपी रिपोर्ट के बाद आया है। उस अखबार में भारत पर आरोप लगाते हुए कहा गया था कि खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या की साजिश केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रची थी। इसमें यह भी कहा गया था कि प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल को इस योजना की जानकारी थी।

अखबार में यह रिपोर्ट एक अनाम कनाडाई अधिकारी के हवाले से छापी गई थी। हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इसको लेकर कनाडा के पास प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। इस मीडिया रिपोर्ट को विदेश मंत्रालय ने 20 नवंबर को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस तरह के बेतुके बयानों को खारिज कर देना चाहिए।

इससे पहले 14 अक्टूबर 2024 को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार पर अपमानजनक आरोप लगाए थे और कनाडा की धरती पर हत्याओं को अंजाम देने का दावा किया था। RCMP के हवाले से उन्होंने कनाडा में दक्षिण एशियाई समुदाय, खालिस्तान समर्थक आंदोलन से जुड़े लोगों को निशाना बनाने वाले हिंसक खतरों की एक श्रृंखला खोज निकालने का दावा किया था।

द ग्लोब एंड मेल ने अपनी एक खास रिपोर्ट में अनर्गल आरोप लगाए
कनाडा का मीडिया भी आंखें बंद करके अपने पीएम की हां में हां मिलाने में लगा है। कनाडा के प्रमुख अखबार द ग्लोब एंड मेल ने अपनी एक रिपोर्ट में अनर्गल आरोप लगाए हैं। इस अखबार ने एक लेख में कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री को खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की साजिश के बारे में पहले से ही पता था। यहां तक कि कनाडाई मीडिया ने दावा किया कि इस साजिश की जानकारी गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, और एनएसए अजीत डोभाल को भी थी। हालांकि रिपोर्ट में हैरतअंगेज दावे के समर्थन में की सबूत नहीं दिए गए हैं। लेकिन भारत और कनाडा के बीच जारी तनाव और तल्खी को वहां के मीडिया ने झूठ फैलाकर बढ़ा जरूर दिया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने आरोप को बेतुका और हास्यास्पद बताया
भारत सरकार ने कनाडाई अखबार की रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया है। साथ ही इसे भारत को बदनाम करने की साजिश करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा- हम आमतौर पर मीडिया रिपोर्ट पर टिप्पणी नहीं करते हैं, लेकिन इस तरह के ‘बेतुके’ और हास्यास्पद बयानों को उसी तरह खारिज किया जाना चाहिए, जिसके वे हकदार हैं। जायसवाल ने ये भी कहा कि इस तरह की गलतबयानी, मनगढ़ंत रिपोर्ट हमारे पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को और नुकसान पहुंचाएगी। गौरतलब है कि पिछले साल कनाडा में आतंकी निज्जर की हत्या हुई थी। तब से ही कनाडा इसके लिए भारत पर साजिश के गंभीर आरोप लगाता रहा है। हालांकि, वह अब तक अपने दावों के बारे में कोई सुबूत नहीं दे पाया है।

रिपोर्ट में दावा- एनएसए डोभाल और जयशंकर को भी जानकारी थी
निज्जर की हत्या के मामले में यह पहली बार है, जब सीधे भारत के प्रधानमंत्री पर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इसे लेकर कनाडा सरकार के पास कोई ठोस सबूत नहीं हैं। कनाडाई अखबार की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कनाडा की सिक्योरिटी एजेंसियों को शक है कि भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर को भी इस साजिश के बारे में पहले से जानकारी थी।

ट्रूडो सरकार ने भारत आने वाले यात्रियों की सुरक्षा जांच को बढ़ाया
इससे पहले ब्राजील में G20 समिट के दौरान PM मोदी और कनाडाई PM जस्टिन ट्रूडो की साथ में तस्वीर आई थी, जिसके बाद माना जा रहा था कि इससे दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने की शुरुआत हो सकती है। हालांकि इस मुलाकात के अगले दिन ही ट्रूडो सरकार ने भारत आने वाले यात्रियों की सुरक्षा जांच को बढ़ा दिया। इस वजह से यात्रियों को एयरपोर्ट पर कड़ी सुरक्षा जांच से होकर गुजरना पड़ रहा है। कनाडाई न्यूज एजेंसी CBC के मुताबिक अधिकारियों ने सुरक्षा जांच बढ़ाने की वजह नहीं बताई।

कनाडा उन लोगों को वीजा देता है, जो भारत में वांटेड हैं- जयशंकर
बता दें कि पिछले साल 18 जून की शाम को सरे शहर के एक गुरुद्वारे से निकलते समय निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रूडो ने भारत सरकार पर निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया था, जिसे भारत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद दोनों देशों के आपसी रिश्तों में काफी तल्खी आ गई थी। विदेश मंत्री जयशंकर ने आरोप लगाया था कि कनाडा उन लोगों को वीजा देता है, जो भारत में वांटेड हैं। उन्होंने कहा था, ‘पंजाब में संगठित अपराधों से जुड़े लोगों का कनाडा में स्वागत किया जाता है।’ वहीं, कनाडा की संसद ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के एक साल पूरे होने पर उसे श्रद्धांजलि दी थी। इसके लिए संसद में एक मिनट का मौन रखा गया था।

सख्ती के बाद कनाडा सरकार ने भी मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया
कनाडाई अखबार द ग्लोब एंड मेल की मनगढ़ंत रिपोर्ट की भारत समेत चहुंओर आलोचना होने के बाद कनाडा की सरकार अब जागी है। कनाडा सरकार ने रिपोर्ट को ‘अटकलबाजी और गलत’ बताते हुए कहा है कि उसे ऐसे किसी सबूत की जानकारी नहीं है कि भारत के पीएम मोदी को ऐसी किसी गंभीर आपराधिक गतिविधि की जानकारी थी। कनाडा सरकार ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री मोदी को खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की प्लानिंग की जानकारी थी। ट्रूडो सरकार की तरफ से शुक्रवार को बयान जारी करके साफ किया गया कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि कनाडा में आपराधिक गतिविधियों से भारत के प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और NSA का लिंक है। कनाडा में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इंटेलिजेंस एडवाइजर की तरफ से जारी बयान में कहा गया, ’14 अक्टूबर को नागरिकों की सुरक्षा को खतरे की वजह से अफसरों ने कनाडा में जारी आपराधिक गतिविधियों के पीछे भारत सरकार के एजेंटों का हाथ होने की बात कही थी।

‘झूठा और बेईमान है जस्टिन ट्रूडो’: डोनाल्ड ट्रंप का पुराना पोस्ट वायरल, बोले मस्क- चुनाव में इनका सफाया होगा; ‘The Australian Today’ पर बैन से भी घिरा कनाडा; पाकिस्तान के बाद बदनाम होने वाला दूसरा देश कनाडा

                                              एलन मस्क और जस्टिन ट्रुडो (फोटो साभार: matrabhumi)
जिस तरह आतंकवाद को संरक्षण देने की वजह से पाकिस्तान विश्व में बदनाम हो चुका है, ठीक उसी राह पर खालिस्तान को समर्थन और संरक्षण देने की वजह से जस्टिन ट्रुडो कनाडा को ले गए हैं। जो कनाडा के लिए अच्छे संकेत नहीं है। संभावनाएं लगाई जा रही है कि कनाडा की पाकिस्तान से भी ज्यादा दुर्गति होने वाली है। पाकिस्तान को गुप्त रूप से आर्थिक मदद कई मुस्लिम देश दे रहे हैं, लेकिन कनाडा को कौन देगा?    

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो शुरुआत से अपनी हरकतों के कारण घिरते आए हैं। 2018 में कभी ट्रंप ने उन्हें स्पष्ट रूप से बेईमान और झूठा कहा था और अब कनाडाई लोग भी सोशल मीडिया पर ऐसी बातें लिख रहे हैं। हाल में कनाडा ने ‘द ऑस्ट्रेलियन टुडे’ को अपने देश में बैन किया तो इस मीडिया आउटलेट ने भी ट्रुडो को लताड़ लगाई है।

दरअसल, द ऑस्ट्रेलियन टुडे ने हाल में विदेशी मंत्री एस जयशंकर और ऑस्ट्रेलियाई विदेशी मंत्री पेनी वोंग की प्रेस कॉन्फ्रेंस को दिखाया था जिसके बाद कनाडा ने उन्हें अपने देश में ब्लॉक कर दिया। इसके बाद द ऑस्ट्रेलिया टुडे के प्रबंध संपादक जितार्थ जय भारद्वाज ने इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने पूछा कि अगर कनाडा की समस्या भारत से है तो वो हमें निशाना बना रहा है।

उन्होंने कहा, “हमारा पब्लिकेशन आजाद मीडिया की वकालत करना जारी रखेगा। हम अपने समुदाय की ओर से दिखाई गई एकजुटता का महत्व समझते हैं। सूचना की स्वतंत्रता और दर्शकों के विविध दृष्टिकोणों तक पहुँचने के अधिकार को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

सिर्फ ‘द ऑस्ट्रेलियन टुडे’ ने ही नहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कनाडा की ऐसी कार्रवाई से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति पाखंड की बू आती है।

वहीं, एक्स के मालिक एलन मस्क तो खुलेआम उनका विरोध कर रहे हैं। किसी ने एक ट्वीट में एलन मस्क से कहा कि वो अपने देश कनाडा में ट्रुडो से मुक्ति चाहते हैं तो एलन मस्क ने जवाब दिया कि चिंता न की जाए अगले चुनावों में ट्रुडो का सत्ता से हटना निश्चित है।

इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप के कुछ पुराने ट्वीट भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। अपने ट्वीट में उन्होंने बताया था कि किस तरह जी7 में ट्रुडो का रवैया अलग था और बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस के समय अलग। उन्होंने ट्रुडो को उस समय पोस्ट में बेईमान और बहुत धरा हुआ व्यक्ति बताया था।

कनाडा : खालिस्तानियों के पैरों में प्रधानमंत्री पद की गरिमा रखने वाले जस्टिन ट्रूडो खालिस्तानियों से सुरक्षा का भरोसा देने में नाकाम, भारतीय दूतावास को रद्द करने पड़े कई कार्यक्रम

ट्रूडो ने काउंसिलर कैम्प (दाएं) कार्यक्रमों को सुरक्षा नहीं देने का फैसला किया है (साभार: ABC & India In Ottawa)
कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार खालिस्तानियों के पैरों में लोटते हुए और भी नीचता पर उतर आई है। कनाडा ने भारत के अस्थायी काउंसिलर कैम्प कार्यक्रमों को सुरक्षा देने से मना कर दिया है। यह जानकारी भारत के टोरंटो स्थित वाणिज्य दूतावास ने दी है। यह कैम्प कनाडा में रहने वाले भारतीयों को जीवन प्रमाण पत्र समेत बाकी सुविधाएँ देने के लिए लगाए जाते रहे हैं।

टोरंटो स्थित भारत के वाणिज्य दूतावास ने एक्स (पहले ट्विटर) पर जानकारी देते हुए लिखा, “सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कम्युनिटी कैम्प आयोजकों को थोड़ी भी सुरक्षा प्रदान करने में अपनी असमर्थता जताने के बाद वाणिज्य दूतावास ने पहले से निर्धारित वाणिज्य दूतावास कैम्प को रद्द करने का निर्णय लिया है।”

भारतीय दूतावासों के काम को इससे पहले भी रोका गया है। खालिस्तानी कट्टरपंथी लगातार ऐसे कैम्पों के बाहर हंगामा करते आए हैं और कनाडा की पुलिस उनको सुरक्षा देने के बजाय खालिस्तानियों को ही प्रश्रय दे रही है। इसी कारण से आगामी कार्यक्रम रोकने पड़े हैं।

इससे पहले कनाडा में स्थित भारतीय हाई कमीशन ने भी 3 नवम्बर, 2024 को उसके कामकाज में डाली गई बाधा के बारे बताया था। हाई कमीशन ने बताया था कि टोरंटो में हिन्दू सभा मंदिर में आयोजित किए गए एक ऐसे ही कैम्प में हिंसक खालिस्तानियों ने हंगामा किया और हमला किया।

भारतीय हाई कमीशन ने बताया था कि वह हर साला इस तरह के कैम्प आयोजित करता है और इस बार उसने ऐसी ही योजनाई थी। हाई कमीशन ने बताया कि इसके कनाडा की पुलिस से सुरक्षा भी माँग ली गई थी एल्किन फिर भी टोरंटो में यह हंगामा हुआ। हाई कमीशन ने बताया था कि इससे पहले 2-3 नवंबर को वैंकूवर और सरे में आयोजित कैम्प में भी हंगामा किया गया था।

हाई कमीशन ने बताया था कि वह इन कैम्प जीवन प्रमाण पत्र देता है और इससे हजारों लोग लाभान्वित होते हैं। हाई कमीशन ने बताया था कि उसने हंगामे के दिन भी 1000 अधिक जीवन प्रमाण पत्र जारी किए। उसने कहा है कि आगे वह सुरक्षा ना होने के चलते ऐसी सुविधाएँ नहीं दे पाएगा जिससे भारतीय और कनाडाई, दोनों ही जगह के नागरिकों को असुविधा होगी।

हिन्दू सभा मंदिर के बाहर प्रदर्शन कर रहे खालिस्तानियों ने बाद में हिन्दुओं पर हमला भी कर दिया था। उन्होंने मंदिर में आए हुए श्रद्धालुओं पर लाठी डंडे से वार किया था। इस हमले के बाद पुलिस ने खालितानियों पर कार्रवाई करने के बजाय हिन्दुओं को ही मारना पीटना चालू कर दिया था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस हमले की निंदा की थी। कनाडा इससे पहले भी भारतीय राजनयिकों को लेकर लापरवाह रवैया अपनाता रहा है। आए दिन कनाडा में स्थित भारतीय हाई कमीशन और दूतावास के बाहर खालिस्तानी प्रदर्शन करते हैं और कई बार हिंसक भी हो जाते हैं, उनके खिलाफ भी कनाडाई प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है।

कनाडा का यह रवैया प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की खीझ को दिखाते हैं। उनके द्वारा भारत पर लगाए निज्जर की हत्या समेत बाकी आरोप धराशायी हो चुके हैं और वह स्वयं कह चुके हैं कि उनके पास इस संबंध में कोई सबूत नहीं है। इसके बाद वह अब भारती राजनयिकों और दूतावासों को निशाना बना रहे हैं।

मंदिर में घुसे खालिस्तानी, हिंदुओं को दौड़ा-दौड़ा कर लाठी-डंडे से पीटा: कनाडा में हमले के बाद घिरे जस्टिन ट्रूडो, भारतवंशी MP बोले- कट्टरपंथियों ने पार की लक्ष्मण रेखा; कनाडा पुलिस ने खालिस्तानियों को करने दिया हमला: भारतीय उच्चायोग नाराज, गुरुद्वारा परिषद ने भी की निंदा

                                                          खालिस्तानियों ने कनाडा पर किया हमला
बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से होंगे। अगर समय रहते कनाडा की सरकार और विपक्ष ने इन उपद्रवी खालिस्तानियों के विरुद्ध जल्द कोई सख्त उठाकर इन्हें अपनी जमीन से नहीं खदेड़ा संपन्न कनाडा को बर्बाद होने से कोई नहीं बचा सकता। खालिस्तान और आतंकवाद ऐसे अंतरराष्ट्रीय गंभीर मुद्दे हैं, अगर इनको समर्थन देने वालों देशों ने इनके विरुद्ध कार्यवाही नहीं की निश्चितरूप से वो देश अपनी बर्बादी को अपनी आँखों से देख रहे हैं। भारत में खालिस्तान पनपा केवल पंजाब में, पंजाब कितना बर्बाद हुआ ये तो भारत सरकार ने पंजाब को पुनः खुशहाली प्रदान करा दी, लेकिन यहाँ तो खालिस्तान पूरे कनाडा पर हावी हो रहे हैं। पाकिस्तान, फिलिस्तीन, गाज़ा, इराक और ईरान जीवित उदाहरण है। इजराइल की किसी मुस्लिम या मुस्लिम देश से नहीं बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई है। लेकिन आतंकवाद समर्थक इसे मुस्लिम विरोधी बताकर इजराइल को बदनाम कर रहे हैं।   

कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में हिंदू मंदिर में श्रद्धालुओं पर खालिस्तानी समर्थकों की भीड़ द्वारा हमला किया गया। इस दौरान, मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं पर लाठी-डंडे बरसाए गए और महिलाओं व बच्चों को भी नहीं बख्शा गया। हमला तब हुआ जब सारे श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना कर रहे थे।

घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वीडियो में खालिस्तानी समर्थक लाठी-डंडे लेकर हिंदू श्रद्धालुओं को मारते और उन्हें दौड़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी वीडियो में पुलिस इलाके को घेरकर स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है।

हमले के बाद पील रीजनल पुलिस चीफ निशान दुरईप्पा ने लोगों से संयम बरतने को कहा है और कहा है कि हिंसा और अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि वे इस मामले की जाँच करेंगे और दोषियों को जवाबदेह ठहराने के लिए आवश्यक कदम उठाएँगे।

इसके अलावा कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि हर कनाडाई नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है और ऐसी हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता। कनाडा के एमपी चंद्र आर्या ने भी कहा कि खालिस्तानियों द्वारा आज सीमा पार कर दी गई। उनके द्वारा हिंदू-कनाडाई लोगों पर हिंदू सभा में हमला दिखाता है कि ये लोग कितने कट्टरपंथी होते जा रहे हैं।

वहीं ब्रैम्पटन के हिंदू सभा मंदिर में खालिस्तानियों के हमले की कड़ी निंदा कनाडा संसद में विपक्ष के नेता पियरे पोलीएवर ने भी की। उन्होंने इस घटना को ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ बताया। उन्होंने कहा कि सभी कनाडाई नागरिकों के लिए शांति से अपने धर्म का पालन करने का अधिकार जरूरी है।

कनाडा पुलिस ने खालिस्तानियों को करने दिया हमला: भारतीय उच्चायोग नाराज, गुरुद्वारा परिषद ने भी की निंदा

कनाडा के ब्रैम्पटन में हिंदुओं पर हुए हमले के बाद हर जगह खालिस्तानियों की निंदा हो रही है। कनाडाई सरकार के नेताओं ने जहाँ इस घटना के विरोध में खालिस्तानियों पर निशाना साधा है तो ओटावा में भारतीय उच्चायोग और ओंटारियो में सिख और गुरुद्वारा परिषद ने भी इस घटना पर प्रेस रिलीज करके अपनी चिंता जाहिर की है।

भारतीय उच्चायोग ने तो इस तरह के हमलों को बेहद निराशाजनक बताया। साथ ही कहा कि हिंदू सभा मंदिर के सहयोग से उन्होंने कांसुलर कैंप आयोजित किया था लेकिन वहाँ व्यवधान डाला गया। उच्चायोग ने कहा कि भारत विरोधी तत्वों ने जो भी किया वह उसे लेकर बहुत ज्यादा चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि आगे से कोई भी कार्यक्रम स्थानीय अधिकारियों की सुरक्षा के आधार पर आयोजित होगा। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के लिए भी पुलिस सुरक्षा माँगी गई थी।

वहीं OSGC ने जहाँ अपनी रिलीज में स्थानीय नागरिकों से इस मामले की गहन जाँच करने की माँग की। उन्होंने कहा कि प्रार्थना के स्थल को पवित्र रहने दिया जाना चाहिए। वहाँ हिंसा और अराजकता नहीं होती नहीं है। जो भी ब्रैम्पटन में हुआ वो बहुत परेशान करने वाला है। हमें एक दूसरे के धर्मों का सम्मान करना चाहिए।

भारत को घुड़की देने वाले जस्टिन ट्रूडो की कुर्सी पर संकट, कनाडा के सांसदों का अल्टीमेटम- 4 दिन के भीतर PM पद से इस्तीफा दो; क्या विपक्ष भारत विरोधियों की कठपुतली बनने की बजाए देशहित में खड़े होंगे?

भारत में विपक्ष भारत विरोधी विदेशी ताकतों के दम पर देश को बांग्लादेश बनाने का सपना देख रहे हैं, उन्हें कनाडा से सीखना चाहिए कि बिना किसी सबूत के खालिस्तानियों के दबाव में भारत को धमकी देना बहुत भारी पड़ रहा है। एक तरफ हमारा विपक्ष है जो टूलकिट के हाथ कठपुतली बने हुई है। यहाँ गलती जनता की भी है जो सच्चाई को नज़रअंदाज कर इन उपद्रवियों की चालों में फंस रहे हैं। जनता को आंखे खोलनी होंगी। कांग्रेस द्वारा पंजाब में न बन सकने वाली सरकार बनाने के लिए संत भिंडरावाला से सौदा किया और सरकार बनने पर जब मांगे पूरी करने को बोला तो एक संत को आतंकवादी बना दिया। और आज वही खालिस्तान देश के लिए खतरा बन रहा है।   
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उनकी कुर्सी पर भी अब संकट गहरा गया है। विपक्षियों के हमले के बीच उनकी खुद की ही पार्टी के सांसदों ने उन्हें इस्तीफा देने का अल्टीमेटम थमा दिया है। इस्तीफा ना देने पर उनके खुलाफ विद्रोह की चेतावनी भी दी गई है।

कनाडाई मीडिया के अनुसार, जस्टिन ट्रूडो का विरोध करने वाले लिबरल पार्टी के सांसदों ने उन्हें 28 अक्टूबर, 2024 तक पद छोड़ देने को कहा है। पद ना छोड़ने पर इन सांसदों ने खुली बगावत की चुनौती दी है। ट्रूडो के खिलाफ इस मुहिम में कम से कम 30 सांसद शामिल हैं।

ट्रूडो को हटाने को लेकर एक पत्र भी यह सांसद अपने साथियों को थमा रहे हैं। इस पत्र पर कई सांसदों के हस्ताक्षर भी करवाए गए हैं। बुधवार (23 अक्टूबर, 2024) को कनाडाई संसद के भीतर हुई एक बैठक में विरोध करने वाले सांसदों ने जस्टिन ट्रूडो को इस्तीफा देने को कह दिया। उनके सामने विरोध वाला पत्र भी पढ़ा गया।

लिबरल पार्टी के सांसद सीन केसी ने कहा कि यह कनाडा के हित में होगा कि जस्टिन ट्रूडो अपना इस्तीफा सौंप दें। उन्होंने कहा कि इसी से लिबरल पार्टी की सरकार बच सकती है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता होता तो कंजर्वेटिव पार्टी आसानी से जीत दर्ज कर लेगी।

लिबरल पार्टी के सांसदों ने कहा है कि ट्रूडो के इस्तीफे के बाद नए नेता की तलाश की जाएगी, इससे पार्टी के खिलाफ देश में बने माहौल को ठंडा करने में मदद मिलेगी। एक सांसद केन मैकडोनाल्ड ने कहा है कि ट्रूडो को अब लोगों की बात सुननी ही पड़ेगी।

कनाडा की संसद में लिबरल पार्टी के लगभग 150 सांसद हैं और इनमें से लगभग 30 खुले तौर पर ट्रूडो के विरोध में उतर आए हैं। यदि यह संख्या बढ़ती है तो ट्रूडो को कुर्सी छोड़नी पड़ सकती है। ट्रूडो की सरकार पहले बैसाखियों के सहारे चल रही है।

वहीं दूसरी तरफ ट्रूडो के कई कैबिनेट मंत्रियों ने भी दोबारा चुनाव ना लड़ने का मन बना लिया है। उनके चुनाव ना लड़ने के पीछे ट्रूडो के चलते लिबरल पार्टी की अलोकप्रियता कारण बताई जा रही है। कनाडा के सर्वे भी ट्रूडो और उनकी पार्टी की बुरी हालत बयाँ कर रहे हैं।

कनाडा के सरकारी चैनल CBC के सर्वे में लगातार एक वर्ष से कंजर्वेटिव नेतृत्व, लिबरल पार्टी से 19% आगे चल रहा है। जहाँ 42% लोग कंजर्वेटिव पार्टी और पियरे पोलिवर को पसंद कर रहे हैं तो वहीं मात्र 23% की पसंद लिबरल पार्टी और ट्रूडो हैं। सर्वे से यह भी पता चल रहा है कि आगामी चुनावों में 95% संभावना है कि वह कंजर्वेटिव पार्टी बहुमत हासिल कर लेगी।

इसके उलट इस बात की केवल 1% संभावना है कि लिबरल पार्टी सत्ता में आए। प्रधानमंत्री के तौर पर भी ट्रूडो की अप्रूवल रेटिंग रसातल को जा रही हैं। ट्रूडो को वर्तमान में कनाडा के प्रधानमंत्री के तौर 65% लोग पसंद नहीं करते हैं। इसमें सुधार भी नहीं हो रहा है।

प्रधानमंत्री ट्रूडो की यह मुश्किलें भारत से राजनयिक झगड़ा मोल लेने के बाद और बढ़ गई हैं। उन्होंने हाल ही में अपने पुराने आरोप दोहराए थे कि भारत ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या करवाई। इसको लेकर भारत ने अपने राजनयिक भी कनाडा से वापस बुला लिए थे और कनाडाई राजनयिकों को देश से निकलने को कहा था।

प्रधानमंत्री ट्रूडो ने यह आरोप लगाने के बाद संसद की एक कमिटी की सुनवाई में खुद कबूला था कि उनके पास भारत के खिलाफ कोई सबूत मौजूद नहीं हैं। इस बीच कनाडा में इस मामले में सबूत दिखाने की माँग भी उठ चुकी है। ऐसे में ट्रूडो के लिए यह नया राजनीतिक संकट और बड़ी चुनौती है और अगर वह इससे पार नहीं पाते तो उनके राजनीतिक करियर का अंत भी हो सकता है।

जस्टिन ट्रूडो के कार्यालय से SFJ का कनेक्शन, आतंकी पन्नू ने खुद किया खुलासा


प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) जस्टिन ट्रूडो के कार्यालय के संपर्क में था। यह खुलासा खालिस्तानी आतंकवादी और SFJ के मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कनाडाई सरकारी न्यूज चैनल CBC न्यूज को दिए इंटरव्यू में किया।

भारत और कनाडा के बीच जारी राजनयिक विवाद को लेकर गुरपतवंत सिंह पन्नू ने बताया, “सिख फॉर जस्टिस पिछले 2-3 साल से जस्टिन ट्रूडो कार्यालय से संपर्क में है।” पन्नू के इस खुलासे से भारत के वह आरोप पुख्ता हो गए हैं कि कनाडा लगातार खालिस्तानी आतंकियों को खाद-पानी दे रहा है और उन्हें भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है।

कनाडा और भारत भारत के संबंध इस समय काफी निचले स्तर पर जा चुके हैं। भारत ने कनाडा के हाई कमिश्नर को देश से निकाल दिया है और अपने हाई कमिश्नर को भी वापस बुला लिया है। भारत ने कनाडा जस्टिन ट्रूडो पर राजनीति चमकाने के लिए रिश्तों की बलि चढ़ाने का आरोप लगाया है।

वोट बैंक के लिए हिंदुओं-भारत से रिश्ते बिगाड़ रहे जस्टिन ट्रूडो ; चीन-पाकिस्तान का दखल, कमजोर राजनीतिक जमीन, घटती लोकप्रियता


खालिस्तानियों से हमदर्दी दिखाने और भारत से कूटनीतिक रिश्ते खराब करने के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो घरेलू राजनीति में भी अलग-थलग पड़ गए हैं। कनाडा की राजनीतिक और पत्रकार बिरादरी भी ट्रूडो की नीतियों ने कतई सहमत नहीं है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत विरोध का यह झंडा ट्रूडो ने अपने वोटबैंक को ठीक करने के लिए उठाया है। यह भी कहा जा रहा है कि कनाडा के चुनावों में चीन के हस्तक्षेप से लोगों का ध्यान भटकाने को लेकर ट्रूडो भारत का नाम उछाल रहे हैं।

जिस तरह भारत में मोदी विरोधी सनातन विरोध कर जनता को गुमराह करते रहते हैं, ठीक उसी तर्ज पर कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो चल निकले हैं। वैसे बीजेपी भी तुष्टिकरण कर रही है, जिसका उदाहरण महाराष्ट्र में बीजेपी समर्थित शिवसेना सरकार ने चुनावों मुस्लिम वोट लेने खजाना खोल दिया, उसके बावजूद बीजेपी और शिवसेना को मुस्लिम वोट नहीं मिलने वाला।   

अपनी ही पार्टी के निशाने पर ट्रूडो

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अपनी ही पार्टी में अलग-थलग पड़ गए हैं। उनकी लिबरल पार्टी के कई सांसदों ने ट्रूडो सरकार की नाकामियों के चलते जस्टिन ट्रूडो से प्रधानमंत्री पद छोड़ने को कहा है। कई सांसद मुखर होकर यह बात उठा रहे हैं। कनाडाई मीडिया बता रहा है कि लिबरल पार्टी के सांसद एक साथ आकर ट्रूडो पर दबाव बना रहे है कि वह आगामी चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद छोड़ दें। उन पर यह दबाव हालिया टोरंटो उपचुनाव में हार के बाद और बढ़ा है।
CBC की एक रिपोर्ट बताती है कि सांसद सीन केसी ने जस्टिन ट्रूडो से खुले तौर पर पद छोड़ने को कहा है। इसके अलावा बाकी सांसद संख्याबल जुटा रहे हैं ताकि वह ट्रूडो को किनारे लगा सकें। ट्रूडो के विरोधी सांसद तब तक इस पूरी प्रक्रिया को चुपचाप कर रहे हैं। कई सांसदों से एक ऐसे कागज पर दस्तखत करने को कहा जा रहा है जिसमें ट्रूडो को हटाने की बात कही गई है। ट्रूडो को हटाने की यह कोशिश अकारण ही नहीं हो रही है। कनाडा में 2025 में आम चुनाव होने हैं।
चुनाव से पहले जस्टिन ट्रूडो की जनता में लोकप्रियता रसातल को चली गई है। जनता की पसंद-नापसंद बताने वाली अप्रूवल रेटिंग में भारी गिरावट हुई है। सितम्बर, 2024 में ट्रूडो की अप्रूवल रेटिंग मात्र 30% थी। यानी 100 में से 70 लोग ट्रूडो को पसंद नहीं करते। जब ट्रूडो प्रधानमंत्री बने थे, तब उनको पसंद करने वालों का आँकड़ा 60% के पार था। युवा वर्ग और पुरुषों में तो ट्रूडो की रेटिंग 25% पर पहुँच गई है। उनकी लोकप्रियता घटने का सबसे बड़ा कारण कनाडा में बढती महंगाई और बेरोजगारी है।
अपनी पार्टी के विरोध से बचने को ट्रूडो भारत विरोध का पैंतरा अपना रहे हैं। उन्हें लगता है कि राजनयिक बखेड़ा खड़ा करने से कुछ समय के लिए उनकी कुर्सी बच जाएगी। वह अपनी पार्टी को देश के संकट में फंसे होने का बहाना दे सकेंगे। हालाँकि, उनकी कुर्सी बचाने की यह तरकीब कनाडा को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में भारी पड़ने वाली है।

मुस्लिम-सिख वोटबैंक भी है कारण

जस्टिन ट्रूडो के खुले भारत विरोध का एक कारण वोटबैंक भी है। वह यूँ ही खालिस्तानियों का समर्थन नहीं कर रहे हैं। दरअसल, सिख कनाडा की आबादी का लगभग 2% हैं। उनके वोट ब्रैम्पटन जैसे इलाकों में निर्णायक हैं। कनाडा में सिखों का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकांश नेता भी खालिस्तान के समर्थक हैं। जगमीत सिंह इसका एक उदाहरण हैं। कई बड़े गुरुद्वारों में भी खालिस्तानियों का प्रभाव है। इन सब परिस्तिथियों में सिख वोट ट्रूडो के लिए काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
वह खालिस्तानियों को खुश करके सिख समुदाय का वोट चाहते हैं। इसके अलावा कनाडा में हिन्दू वोट भी 2.3% है। ट्रूडो जानते हैं कि भारत का विरोध करने से उनको हिन्दू वोट का नुकसान होगा। हालाँकि, वह इस वोट का नुकसान करने को तैयार हैं और इसकी भरपाई वह सिख-मुस्लिम वोट मिलाकर करना चाहते हैं। कनाडा की आबादी में लगभग 5% हिस्सा मुस्लिमों का है। इनमें से भी बड़ा हिस्सा उन मुस्लिमों का है, जो पाकिस्तानी हैं।
इस मुस्लिम वोटबैंक को साधने के लिए ट्रूडो ने कनाडा के भीतर पाकिस्तान की गतिविधियों को खुला छूट दे दी है। सितम्बर, 2024 में ही कनाडा की खुफिया और सुरक्षा एजेंसी CSIS प्रमुख वनेसा लॉयड ने स्पष्ट तौर पर विदेशी दखल की जाँच करने वाली कमिटी को बताया था कि पाकिस्तान कनाडा के भीतर दखल दे रहा है। उन्होंने बताया था कि पाकिस्तान कनाडा के भीतर खालिस्तान समर्थकों को मदद करता है और साथ ही चुनावों में भी दखल देता है। पाकिस्तान यहाँ लोगों को दबाता भी है।
जस्टिन ट्रूडो ने इस खुलासे के ऊपर आँखे मूँद रखी हैं। उन्होंने पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी के ऊपर एक भी शब्द बोलने से इनकार कर दिया है। कनाडा के भीतर खालिस्तानियों को पाकिस्तान के साथ मिल कर भारत तोड़ने की साजिश रचने की पूरी छूट दी जा रही है। यह सब इसलिए ताकि ट्रूडो लगभग 7%-8% वोटबैंक बढ़ा सकें। चुनावी फायदे के लिए ट्रूडो ने अपने देश के रिश्तों को ताक पर रख दिया है। वह कनाडा की शिक्षा व्यवस्था का भी इससे बड़ा नुकसान करने वाले हैं।

चीन का दखल छुपाने का भी प्रयास

जस्टिन ट्रूडो का भारत विरोधी रवैये का एक और कारण है। यह कारण चीन का कनाडा की राजनीति और उसके चुनाव में दखल है। चीन के प्रभाव कनाडा में प्रभाव को ट्रूडो छुपाना चाहते हैं। कनाडाई चुनाव में दखल को लेकर एक जाँच चल रही है। जून, 2024 में आई एक रिपोर्ट बताती है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थक कुछ चीनी नागरिक, कनाडा के शासन और अर्थव्यवस्था में घुसपैठ करने और उसे प्रभावित करने के प्रयासों में लगे हुए हैं और लगे हुए हैं।
इस रिपोर्ट में बताया गया था कि कनाडा के चुनावों में दखल के लिए चीन सबसे बड़ा खतरा है। एक रिपोर्ट में तो यहाँ तक बताया गया था कि चीन ने कनाडा के भीतर अपने पुलिस स्टेशन तक बना लिए हैं। कनाडा में 7 चीनी पुलिस स्टेशन होने की बात कही गई थी। यह भी सामने आया था कि चीन ने कनाडा में कंजर्वेटिव पार्टी के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास किया। चीन ने कनाडा में सांसदों और कई नेताओं को धमकाने तक को लेकर प्रयास किए हैं। यहाँ तक कि जस्टिन ट्रूडो को जिताने में भी चीन का योगदान बताया जाता है।
चीन का कनाडा में दखल यहाँ राजनीति में बड़ा मुद्दा है। इसे दबाने को लेकर भी जस्टिन ट्रूडो भारत को निशाने पर ले रहे हैं। भारत लगातार कनाडा से खालिस्तानियों पर कार्रवाई की माँग करता आया है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भारत की चिंताओं को लगातार नजरअंदाज करते आए हैं और साथ ही भारत विरोधियों को प्रश्रय देते रहे हैं। स्थानीय राजनीति चमकाने के लिए आतंकियों को बसाना कभी भी फायदे का सौदा नहीं होता है, जस्टिन ट्रूडो जितनी जल्दी यह समझेंगे, उतना ही कनाडा का नुकसान कम होगा।

मोदी की सख्ती का असर, कनाडा ने पहली बार सुनाया दो खालिस्तानियों के खिलाफ फैसला

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सख्त नेतृत्व का असर कनाडा में दिखने लगा है। कनाडा के एक कोर्ट ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को बड़ा झटका देते हुए खालिस्तान समर्थकों पर हवाई यात्रा बैन को सही करार दिया है। खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के आरोपों पर भारत के सख्त रुख अपनाने और उनके दावे को खारिज करने के बाद से ही कनाडा बैकफुट पर है। अब पहली बार कनाडा की एक अदालत ने देश की ‘उड़ान-प्रतिबंधित’ सूची से बाहर किए जाने की 2 खालिस्तानियों की अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने दो सिख चरमपंथियों के प्रयास को यह कहते हुए नाकाम कर दिया कि यह संदेह करने के लिए ‘पुख्ता आधार’ हैं कि वे आतंकवादी घटना को अंजाम देने के वास्ते परिवहन सुरक्षा या हवाई यात्रा के लिए खतरा होंगे। काबिले जिक्र है कि एक तरफ कनाडा की संसद खालिस्तानी आतंकी की बरसी पर उसे श्रद्धांजलि दे रही है, वहीं दूसरी तरफ कनाडा की कोर्ट ने माना है कि निज्जर के दो सहयोगी को प्लेन में नहीं चढ़ने देने का फैसला सही है। खालिस्तानी नेताओं द्वारा प्लेन को हाईजैक करने जैसी आशंका वाली रिपोर्ट के बाद कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है।

 कनाडा में खालिस्तान समर्थकों ने लगाई ‘अपनी अदालत’, कनाडा उच्चायोग को नोटिस

खालिस्तान समर्थकों के सिर उठाने के बावजूद कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन वहां के कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह खालिस्तानी समर्थकों को किसी भी तरह की छूट देने के पक्ष में नहीं है। पिछले दिनों कनाडा के वैंकूवर में भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर एक बार फिर खालिस्तानी आतंकियों ने भारत के खिलाफ कथित ‘जन अदालत’ आयोजित की थी। इस अदालत के आयोजन के बाद प्रधानमंत्री का पुतला भी फूंका गया। इसको लेकर भारत ने सख्त ऐतराज जताया है। कनाडा में खालिस्तान समर्थकों की निरंतर बढ़ती गतिविधियों को भारत ने बेहद गंभीरता से लेते हुए दिल्ली स्थित कनाडा उच्चायोग को राजनयिक नोटिस जारी किया है। यह घटना उस समय हुई है, जब पिछले सप्ताह इटली में G7 Summit के दौरान पीएम मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की मुलाकात के बाद दोनों देशों के संबंध सुधरने की उम्मीद जगी थी। हालांकि इसके बावजूद कनाडाई संसद ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की याद मे मौन रखकर शोक जताया था।
कनाडा की धरती पर खालिस्तानी आतंकवादियों को लगातार दी जा रही शह
भारत ने वैंकूवर की कथित जन अदालत के बाद कनाडाई उच्चायोग को राजनयिक नोटिस जारी किया है। इस मौखिक नोटिस में कनाडा की धरती पर खालिस्तानी आतंकवादियों को लगातार दी जा रही शह पर गंभीर आपत्ति और नाराजगी जताई गई है। भारत ने कनाडा को साफ कहा है कि उसकी धरती पर खालिस्तानी आतंकियों के प्रदर्शन और जन अदालत लगाना दोनों देशों के संबंधों में भारी गतिरोध ला सकता है। भारत ने खालिस्तानी आतंकियों को जस्टिन ट्रूडो की सरकार द्वारा बढ़ावा दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है और इस पर आपत्ति जताई गई है। भारत ने गुरुवार को वैंकूवर में भारतीय वाणिज्य दूतावास के सामने खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों द्वारा ‘नागरिक अदालत’ आयोजित करने के बाद संयुक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने दिल्ली में कनाडाई उप उच्चायुक्त को तलब किया और कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसके साथ ही भारत ने जस्टिन ट्रूडो सरकार द्वारा खालिस्तानियों को खुली छूट दिए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई।
दो खालिस्तानियों के खिलाफ फैसला, हवाई यात्रा पर रोक को सही ठहराया
इस बीच कनाडा की एक ‘संघीय अपीलीय अदालत’ ने खालिस्तान समर्थक भगत सिंह बराड़ और पर्वकर सिंह दुलाई की अपील खारिज कर दी है। इन दोनों का नाम कनाडा के सुरक्षित विमान यात्रा अधिनियम के तहत ‘उड़ान प्रतिबंधित’ सूची में शामिल किया गया था। इससे पहले दोनों सिख चरमपंथियों ने इस सूची की संवैधानिकता को चुनौती दी थी और उनकी याचिका निरस्त हो गयी थी। इसके बाद उन्होंने अपीलीय अदालत का दरवाजा खटखटाया था। दोनों को 2018 में वैंकूवर में विमानों में चढ़ने की अनुमति नहीं दी गयी थी। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि यह अधिनियम सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री को लोगों को उड़ान भरने से प्रतिबंधित करने का अधिकार देता है, बशर्ते ‘‘यह संदेह करने का उचित आधार हो कि वे परिवहन सुरक्षा को खतरा पहुंचाएंगे या आतंकवादी घटना को अंजाम देने के लिए हवाई यात्रा करेंगे।’’ नई दिल्ली में सूत्रों ने बताया कि दुलाई प्रतिबंधित संगठन ‘बब्बर खालसा’ का सदस्य है। दुलाई विपक्षी ‘न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी’ के नेता जगमीत सिंह का करीबी है। दुलाई सरे से ‘चैनल पंजाबी’ और चंडीगढ़ से ‘ग्लोबल टीवी’ चैनलों का संचालन करता है। दोनों चैनल खालिस्तानी दुष्प्रचार करते हैं।
कनाडा की संसद ने निज्जर की स्मृति में एक मिनट का मौन रखा
भारत द्वारा यह कूटनीतिक कदम कनाडा की संसद द्वारा खालिस्तान टाइगर फोर्स के आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की स्मृति में एक मिनट का मौन रखने के एक दिन बाद उठाया गया है। निज्जर को पिछले साल 18 जून को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में गोली मार दी गई थी। वह खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) के आतंकवादी गुरदीप सिंह उर्फ दीपा हेरनवाला का पुराना साथी था, जो 1980 और 1990 के दशक की शुरुआत में पंजाब में 200 से अधिक हत्याओं में शामिल था। कनाडाई खुफिया एजेंसियों ने लगातार निज्जर के बारे में यह कहानी गढ़ने की कोशिश की है कि वह कनाडा के सरे में गुरु नानक गुरुद्वारा का एक निर्दोष और धार्मिक विचारों वाला प्रमुख था।
कनाडाई प्रधानमंत्री भारत विरोधी प्रचार पर जान बूझकर कोई नकेल नहीं कस रहे
इस महीने की शुरुआत में इटली में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और ट्रूडो के बीच संक्षिप्त मुलाकात हुई। ट्रूडो अपनी धरती से खालिस्तानियों द्वारा चलाए जा रहे भारत विरोधी प्रचार पर जान बूझकर कोई नकेल नहीं कस रहे हैं। पिछले साल कनाडा की संसद में ट्रूडो ने निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की भूमिका का आरोप लगाया था, लेकिन अभी तक अपने आरोपों को पुख्ता करने के लिए कोई सबूत नहीं दिया है। पिछले महीने विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि सरकार ने प्रत्यर्पण के लिए 25 लोगों के नाम दिए हैं, लेकिन ट्रूडो की सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। इस सूची में कुख्यात गैंगस्टर और कनाडा में शरण लिए हुए खालिस्तान समर्थक आतंकवादी शामिल हैं। पिछले साल सितंबर में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सिख आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की “संभावित” संलिप्तता का आरोप लगाया था। भारत ने ट्रूडो के आरोपों को “बेतुका और प्रेरित करने वाला” बताते हुए सिरे से ही खारिज कर दिया। दरअसल, खालिस्तान समर्थन की आड़ में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं। वे खालिस्तान से जुड़ी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन से अल्पमत की सरकार चला रहे हैं, जिसे भारत विरोधी जगमीत सिंह चलाते हैं।
पहले भी पीएम जस्टिन ट्रूडो की मौजूदगी में लगे खालिस्तान जिंदाबाद के नारे
गौरतलब है कि गत अप्रैल माह में भी कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो की मौजूदगी में खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे थे। दरअसल, कनाडा की राजधानी में खालसा दिवस पर एक आयोजन किया गया था, जिसमें ट्रूडो भी शामिल थे। जैसे ही ट्रूडो संबोधन के लिए आगे बढ़े, भीड़ में खड़े लोगों ने खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस घटना के बाद भारत सरकार ने सख्ती दिखाई थी। अब विदेश मंत्रालय ने इस मामले में भारत में कनाडा के उप उच्चायुक्त को तलब किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत सरकार ने इस मामले में गहरी चिंता जताई है और कहा है कि कार्यक्रम में ऐसे तत्वों अनुमति देना बहुत गलत है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह कनाडा में अलगाववाद, उग्रवाद, हिंसा को दिए गए राजनीतिक समर्थन को दर्शाता है।

कनाडा : जस्टिन ट्रुडो गए मस्जिद में अपनापन दिखाने, कट्टर मुस्लिम ने दी गालियाँ, बेइज्जती के बाद मुँह लटका कर बाहर निकले

              मस्जिद में कनाडा के PM के खिलाफ कट्टर मुस्लिमों की नारेबाजी (चित्र साभार- X/@AhmarSKhan)
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो शुक्रवार (20 अक्टूबर 2023) को अपने देश की एक मस्जिद में लोगों से औपचारिक मुलाकात के लिए गए थे। इस दौरान वहाँ मौजूद मुस्लिम समुदाय के लोगों के भारी विरोध का सामना उन्हें करना पड़ा। मस्जिद में मौजूद भीड़ ने इजरायल-हमास युद्ध में ट्रूडो के रुख और बयान की आलोचना की। इस दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री से उनका बयान वापस लेने की माँग भी की गई।

कनाडा की न्यूज़ एजेंसी द टोरंटो सन के मुताबिक शुक्रवार को एक मस्जिद में जाने के दौरान जस्टिन ट्रूडो को ‘शर्म करो-शर्म करो’ जैसी नारेबाजी का सामना करना पड़ा। इस दौरान मस्जिद में मौजूद और विरोध में शामिल एक व्यक्ति को कार्यक्रम के आयोजकों से यह माँग करते भी सुना गया कि जस्टिन ट्रुडो को माइक पर बोलने की अनुमति न दी जाए। हालाँकि जस्टिन ट्रुडो को माइक दिया गया। अपने सम्बोधन में कनाडा के PM ने कहा, “इस कठिन समय में अपने साथ प्रार्थना की अनुमति देने का धन्यवाद।”

इस घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में हिजाब पहनी एक महिला को हाथ में तख्ती लिए देखा जा सकता है। तख्ती में ‘गाजा में नरसंहार रोको’ लिखा हुआ है। साथ ही कई अन्य लोग भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद जस्टिन ट्रुडो को चिढ़ाते भी दिखे।

कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय ने जस्टिन ट्रुडो के दौरे की पुष्टि की है। कनाडा के मुस्लिम संगठनों द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम फिलिस्तीनी मुस्लिमों के प्रति अपनापन दिखाने के मकसद से था।

                                               चित्र साभार- X/@AhmarSKhan

कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक जस्टिन ट्रुडो इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को लेकर काफी चिंतित हैं। इसी के साथ ही शांति स्थापना में कनाडा द्वारा अधिकतम सहयोग का भी एलान किया गया है।

 कनाडा ने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के दौरान देश में मौजूद इस्लामी कट्टरपंथियों को संतुष्ट करने के लिए तमाम कदम उठाए हैं। इसमें कनाडा की मीडिया को हमास के लड़ाकों को आतंकी न कहने के निर्देश भी शामिल हैं। इसी साल अक्टूबर के महीने में ही यहाँ के ओंटारियो के मिसिसॉगा में सेलिब्रेशन स्क्वायर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान फिलिस्तीनी और तालिबानी आपस में भिड़ गए थे।

भारत नहीं, पाकिस्तान ने कनाडा में कराई आतंकी निज्जर की हत्या, आईएसआई ने एक तीर से दो निशाने साधे

कनाडाई प्रधानमंत्री ट्रूडो के झूठ शीशे की तरह साफ हो गए हैं। इंटेलिजेंस एजेंसी को इसके पुख्ता सुबूत मिले हैं कि खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या असल में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कराई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद अमेरिका की ओर से कनाडा को खुफिया जानकारी मुहैया कराई गई थी, लेकिन कनाडा ने जानकारी का कुछ और ही मतलब निकाल लिया। इसके बाद कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो के जरिए भारत पर निज्जर की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा दिया गया। खुफिया एजेंसी की मुताबिक निज्जर की हत्या में कनाडा स्थित आईएसआई के दो एजेंट राहत राव और तारिक कियानी का हाथ है। ये दोनों आतंकी भारत की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल हैं।

ट्रूडो कनाडा के प्रधानमंत्री या खालिस्तानी समर्थकों के प्रवक्ता हैं?
दरअसल, खालिस्तान का विवाद में आग में घी का काम कनाडाई प्रधानमंत्री ट्रूडो के बयान ने किया था। लेकिन यह पीएम नरेन्द्र मोदी का नया भारत है। भारत का अपमान या बदनाम करने वालों को करारा जवाब देकर सबक सिखाने में अब जरा-सी भी देर नहीं होती। यही वजह है कि बारह घंटे के अंदर ही कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को न सिर्फ झुकना पड़ा, बल्कि खालिस्तानी आतंकी पर अपने बयान के लेकर भारत को सफाई भी देनी पड़ी। ट्रूडो को अपनी गलतबयानी पर कहना पड़ा कि उनका मकसद भारत को उकसाने या तनाव बढ़ाने का नहीं, बल्कि निज्जर की हत्या पर भारत से सहयोग मांगना था। ट्रूडो के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर लिखा गया कि ट्रूडो कनाडा के प्रधानमंत्री हैं या फिर खालिस्तानी समर्थकों के प्रवक्ता हैं? इस बीच भारत ने खालिस्तानियों के समर्थन पर कनाडा को करारा जवाब देते हुए कनाडाई उच्चायुक्त कैमरून मैके को 5 दिन में ही देश छोड़ने के लिए कह दिया था।

पाकिस्तान ने निज्जर की हत्या कराकर एक तीर से दो निशाने साधे

इंटेलिजेंस एजेंसी के मुताबिक पाकिस्तान ने निज्जर की हत्या करा करके एक तीर से दो निशाने साधे हैं। पहला उसने कनाडा और भारत के बीच दरार पैदा कर दी। दूसरा, उसने ड्रग्स तस्करी की कमाई पर पकड़ और मजबूद कर ली। दरअसल, आतंकी निज्जर इतनी महफूज जगह पर रहता था कि किसी अनजान व्यक्ति का निज्जर के पास पहुंचना नामुमकिन था। लेकिन दोनों हेंडलर उससे मिलते थे। इसी कारण जहां निज्जर के कोई करीब भी नहीं जा सकता, उस जगह उसकी हत्या हो गई। वह आईएसआई के समर्थन से ही खालिस्तानी एजेंडा चलाता था। आईएसआई की मदद से खालिस्तानी आतंकी और गैंगस्टर पंजाब में ड्रग्स तस्करी के गिरोह चला रहे हैं। कमाई का हिस्सा आतंकियों व आईएसआई को भी मिलता है। इस नेटवर्क पर आईएसआई की पकड़ ढीली होने से आतंकी अपनी मर्जी से पैसे का उपयोग करने लगे, इसी कारण निज्जर को रास्ते से हटाना उनके लिए जरूरी हो गया।

 निज्‍जर की हत्‍या आईएसआई की साजिश का नतीजा– अमेरिकी मीडिया

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर निज्‍जर की हत्‍या का आरोप लगाया था। ट्रूडो ने बिना किसी सबूत के भारत को अपने देश की संसद में दोषी बता दिया। लेकिन अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स (एनवाईटी) में जो जानकारी दी गई, उसके बाद से यह सारा मामला पेचीदा हो गया है। अखबार ने निज्‍जर की हत्‍या के वीडियो के हवाले से कुछ सनसनीखेज दावे किए हैं। वहीं अब यह कहा जा रहा है कि निज्‍जर की हत्‍या पाकिस्‍तान की इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई की साजिश का नतीजा है। जुलाई 2020 में भारत ने उसे ‘आतंकवादी’ घोषित किया था। इस बात की भी संभावना है कि आईएसआई ने शार्प शूटर्स की मदद से निज्‍जर की हत्‍या करवाई। ऐसे में कनाडा में मौजूद आईएसआई के एजेंट्स को हत्‍या के लिए प्रयोग किया गया। इसके अलावा अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्‍ट की तरफ से भी वीडियो के हवाले से बताया जानकारी दी गई कि आतंकी निज्‍जर पर दो लोगों ने गोलियां बरसाई थीं।
भारत की मोस्ट वांटेड की सूची में शामिल दो आतंकियों पर हत्या का शक
काबिले जिक्र है कि इस साल 18 जून को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर निज्‍जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। निज्जर भारत से अलग एक खालिस्तानी देश की मांग करता आ रहा था। इंटेलिजेंस एजेंसी और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईएसआई भारत को बैकफुट पर लाने के लिए निज्जर को खत्म करना चाहती होगी। उनके मुताबिक, राहत राव और तारिक कियानी कनाडा में आईएसआई के दो एजेंट्स हैं जो पाकिस्तानी एजेंसी के लिए सबसे ज्यादा काम कर रहे हैं। वे कथित तौर पर उन आतंकवादियों के भी हैंडलर हैं, जो भारत से आ रहे हैं और मोस्ट वांटेड की सूची में हैं। सूत्रों के मुताबिक, संभावित व्यावसायिक कारणों से और नए ड्रग पेडलर्स से अधिक फिरौती पाने के लिए, राव और कियानी निज्जर की हत्या के काम में शामिल हो सकते हैं।
आतंकी निज्जर के पड़ोसी हैं आईएसआई के कई पूर्व अधिकारी
यह भी जानकारी में आया है कि हरदीप सिंह निज्जर के पड़ोस में मेजर जनरल से लेकर हवलदार तक कई पूर्व आईएसआई अधिकारी रहते हैं। निज्जर को खत्म करने की साजिश में इन्हीं लोगों में से कुछ मदद भी ली जा सकती है, ताकि स्थानीय ड्रग कारोबार पर राव और कियानी का सीधा नियंत्रण हो सके। सूत्रों ने कहा कि निज्जर समय के साथ शक्तिशाली होता जा रहा था और स्थानीय कनाडाई समुदाय में भी लोकप्रियता हासिल कर रहा था। दूसरी ओर राहत राव, तारिक कियानी और अलगाववादी नेता गुरचरण पुन्नुन की तिकड़ी ड्रग और इमीग्रेशन बिजनेस को नियंत्रित करना चाहती थी। अपनी आय के प्रमुख स्रोत्र को बरकरार रखने के लिए वे इस ऑपरेशन में शामिल हुए। सूत्रों ने कहा कि वधावा सिंह और रणजीत सिंह नीता जैसे पाकिस्तान स्थित कम्युनिटी लीडर्स के साथ भी हरदीप सिंह निज्जर की निकटता भी आईएसआई के लिए एक समस्या थी।
87 देशों के सिखों तक खालिस्तान की मुहिम फैलाने की साजिश
खालिस्तान को लेकर खतरनाक मंसूबों वाली एक बड़ी बैठक सितंबर के पहले सप्ताह में अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में की गई। इस बैठक में दुनिया के चौदह देशों के 40 खालिस्तानी चरमपंथियों ने शिरकत की। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में 87 देश में अपनी खतरनाक खालिस्तान मुहिम को बढ़ावा देने के लिए ‘मिशन सिख जॉइंट’ को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक में मौजूद चरमपंथियों ने तय किया कि खालिस्तान की आवाज उठाने और जनमत संग्रह में सिखों को शामिल करने के लिए जो खतरनाक कदम उठाने होंगे वे उठाए जाएंगे।
कनाडा में हिंदू फोरम की मांग, खालिस्तानी पन्नू पर लगे प्रतिबंध
हिंदू फोरम कनाडा ने खालिस्तानी आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू की तरफ से अल्पसंख्यक हिंदुओं को कनाडा छोड़ने की धमकी देने के मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की है। फोरम के वकील पीटर थॉर्निंग ने आव्रजन मंत्री मार्क मिलर से पन्नू के कनाडा में प्रवेश पर पाबंदी लगाने का अनुरोध करते हुए पत्र लिखा है। थॉर्निंग ने मिलर को बताया है कि पन्नू की धमकियों के चलते कनाडाई हिंदू समाज भयभीत है। पन्नू के वीडियो की वजह से खासतौर पर स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले बच्चों पर असर पड़ रहा है। थॉर्निंग ने कहा कि भारत-कनाडा मित्र देश हैं। भारत ने पन्नू को आतंकी घोषित कर रखा है, ऐसे में कनाडा को भी पन्नू पर कार्रवाई करते हुए उसके संगठन सिख फॉर जस्टिस पर रोक लगाना चाहिए।
कनाडा में हो रहे भारत विरोधी और खालिस्तान समर्थक प्रदर्शन
केंद्र की मोदी सरकार शुरू से ही आतंकियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए हुए है। केंद्र सरकार ने खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नु को आतंकी घोषित कर रखा है। वो सिक्ख फॉर जस्टिस (एसएफजे) नामक संगठन कनाडा से चलाता है। पन्नु कनाडा में चल रहे भारत विरोधी प्रदर्शनों में कई बार शामिल हो चुका है। वो कई बार सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड कर भारतीयों और भारत सरकार को धमकियां देता है। दो दिन पहले ही पन्नु ने कनाडा में बसे हिन्दुओं को कनाडा छोड़ जाने की धमकी दी है। पन्नु ने ही खालिस्तान नामक देश भारत से अलग करने की मुहिम चलाई हुई है, जिसमें कनाडा में हजारों लोग जुड़े हुए हैं। उन्होंने खालिस्तान देश का अलग ही नक्शा भी जारी किया है। पन्नु को वहां शरण देने के संबंध में भारत सरकार अपनी आपत्ति कनाडा सरकार को दर्ज करवा चुकी है।
खालिस्तान के नक्शे में प्रदेश के इन सरहदी जिलों को किया शामिल
इतनी ही नहीं खालिस्तान का ऐसा एक नक्शा इन दिनों सोशल मीडिया पर फिर से वायरल है। इसमें भारत के कुछ राज्यों के कई जिले शामिल हैं।  इस नक्शे में राजस्थान के भी 10 जिलों को शामिल किया गया है। राजस्थान की बात करें तो नक्शे में पंजाब से सटे श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर, जोधपुर, अलवर, खैरथल, भरतपुर, डीग, बूंदी और कोटा को दिखाया गया है। हालांकि हाल ही में बने अनूपगढ़, खैरथल और डीग जिले को अलग से मेंशन नहीं किया गया है। क्योंकि ये नक्शा कुछ पुराना है, तब ये जिले अस्तित्व में ही नहीं आए थे। खास बात ये है कि 2 साल पहले भी ये नक्शा सामने आया था। अब कनाडाई प्रधानमंत्री ट्रूडो के खुलकर खालिस्तानियों के समर्थन में आने के कारण खालिस्तान मूवमेंट बढ़ने के बाद एक बार फिर ये नक्शा चर्चा में है। इस नक्शे में पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली सहित उत्तरप्रदेश और राजस्थान के हिस्सों को दिखाया गया है।
खालिस्तानियों ने किया मंत्री पुत्र का अपहरण, भैरोसिंह सरकार ने बचाया था
पंजाब का पड़ोसी राज्य होने से राजस्थान में खालिस्तानी आतंक का खतरा पहले भी बना रहा है। वर्ष 1995 में इंदिरा गांधी के करीबी रह चुके केंद्रीय मंत्री और राजस्थान के दिग्गज नेता रामनिवास मिर्धा के बेटे राजेंद्र मिर्धा को खालिस्तानी आतंकियों ने फरवरी 1995 में किडनैप कर लिया था। उन्होंने राजेंद्र मिर्धा को छोड़ने के बदले जनवरी, 1995 में पकड़े गए खालिस्तान समर्थक भुल्लर को छोड़ने की मांग की थी। राजेन्द्र मिर्धा के अपहरण के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री भैंरोसिंह शेखावत सरकार ने कई टीमें इस केस के लिए गठित कीं। उनमें से एक इंटेलीजेंस टीम में शामिल रहे अफसर हुकुम सिंह के मुताबिक मिर्धा का अपहरण खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) और अन्य 27-28 संगठनों से जुड़े लोगों ने किया था। जयपुर में हुए पुलिस एनकाउंटर में एक खालिस्तान समर्थक नवनीत सिंह कादिया मारा गया और राजेंद्र मिर्धा को सुरक्षित बचा लिया गया। एनकाउंटर में तीन खालिस्तानी समर्थक दया सिंह लाहौरिया, हरनेक सिंह भप और सुमन सूद भागने में कामयाब हो गए।
खालिस्तानी नक्शे में पाकिस्तानी पंजाब का जिक्र नहीं
खालिस्तान का जो नक्शा दिखाया गया है, उसमें भारतीय पंजाब से सटे हुए पाकिस्तानी पंजाब का जिक्र तक नहीं है। ये हैरान करने वाला इसलिए है कि क्योंकि पाकिस्तानी पंजाब भारतीय पंजाब से भी करीब 30 प्रतिशत बड़ा है। राजस्थान के जो जिले नक्शे में दिखाए गए हैं, खालिस्तानियों का दावा है कि उनमें खालिस्तान मूवमेंट से सहानुभूति रखने वाले कुछ लोग हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर, फलोदी, बीकानेर व जोधपुर सरहदी इलाके हैं। इनकी सरहद उत्तर में पंजाब और पश्चिम में पाकिस्तान से सटी हुई है। पाकिस्तान से सटी बार्डर पर अक्सर ड्रग्स व हथियारों की तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं। कई बार बीएसएफ ने वहां ड्रोन, प्रशिक्षित कबूतर और बाज जैसे पक्षियों को पकड़ा है जो पाकिस्तान से भारत की तरफ आते हैं।
पहले केवल सरहदी जिले खालिस्तानी नक्शे में थे, अब पांच और शामिल
राजस्थान में पुलिस महानिदेशक रहे बी. एल. सोनी के मुताबिक 1990-92 के बीच पंजाब में खालिस्तानी आतंक चरम पर था। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत ने 15 फरवरी 1992 को एसपी एंटी टेरेरिस्ट ऑपरेशन राजस्थान (कैम्प श्रीगंगानगर) पोस्ट बनाई थी। इसका ऑफिस श्रीगंगानगर में था और इसके पहले एसपी वो खुद थे। उन्होंने भास्कर को बताया कि तब जयपुर से वाहन, संसाधन, फोर्स, हथियार आदि श्रीगंगानगर भेजे गए। बाद में पंजाब में खालिस्तानी आतंक के खात्मे के साथ ही यह पोस्ट और यह कैम्प ऑफिस मर्ज हो गए। इसके बाद राजस्थान में एटीएस (एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाएड) बनाई गई। सोनी का कहना है कि खालिस्तानी आतंकी उस दौर में भी राजस्थान के सरहदी जिलों को अपने नक्शे में दिखाते थे। लेकिन अब तो बूंदी, कोटा, जोधपुर, अलवर व भरतपुर जैसे जिलों को खालिस्तान के नक्शे में दिखाया जा रहा है। इन जिलों को उस दौर के खालिस्तानी नक्शे में नहीं दिखाया गया था।