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सैन्य ठिकाने ही नहीं, अब अस्पतालों से लेकर मंदिरों की भी सुरक्षा में ‘सुदर्शन कवच’ रहेगा तैनात: PM मोदी ने कहा- श्रीकृष्ण के सुदर्शन से मिली प्रेरणा; क्या हिन्दू राष्ट्र का शंखनाद हो गया?

                                                                                                                        साभार - ग्रोक/एआइ
आज स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने कहा कि अगले दस साल, यानी 2035 तक, भारत के हर अहम सामरिक और नागरिक ठिकाने को ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत हाई-टेक सुरक्षा कवच से लैस किया जाएगा।

यह सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि अस्पताल, रेलवे स्टेशन, धार्मिक स्थल, बड़े बाजार और सार्वजनिक भीड़-भाड़ वाले सभी प्रमुख स्थान इसमें शामिल होंगे। पीएम मोदी ने कहा कि इस मिशन की प्रेरणा भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से ली गई है। जैसे वह चक्र दुश्मन के वार को रोककर तुरंत पलटवार करता था, वैसे ही यह आधुनिक सुरक्षा कवच भी काम करेगा।

क्या है मिशन सुदर्शन चक्र और कैसे करेगा काम

मिशन सुदर्शन चक्र एक अत्याधुनिक बहु-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली है, जिसका उद्देश्य किसी भी हवाई, ड्रोन, मिसाइल या रॉकेट हमले को पहले ही पहचानकर उसे निष्क्रिय करना है। इसकी खासियत यह होगी कि यह ‘डिटेक्ट डिफेंड काउंटर अटैक’ के सिद्धांत पर काम करेगा।

इस सिद्धांत के तहत पहले खतरे का पता लगेगा, फिर उसे नष्ट किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर हमलावर पर जवाबी कार्रवाई भी होगी। इसमें रडार नेटवर्क, हाई-स्पीड डेटा प्रोसेसिंग, इंटरसेप्टर मिसाइलें और लेजर डिफेंस सिस्टम शामिल होंगे।

मिशन के तहत देश भर में एकीकृत सुरक्षा ग्रिड बनाया जाएगा, जो सभी बड़े शहरों, संवेदनशील क्षेत्रों और सीमा इलाकों को आपस में जोड़ेगा। जैसे ही किसी भी दिशा से हमला करने वाली मिसाइल, ड्रोन या हवाई जहाज का संकेत मिलेगा, यह ग्रिड तुरंत सक्रिय हो जाएगी।

सेकंडों में खतरे की पहचान होगी, लक्ष्य का ट्रैकिंग होगा और फिर उसे नष्ट करने के आदेश जारी होंगे। इस पूरी प्रक्रिया में AI और मशीन लर्निंग तकनीक का बड़ा योगदान होगा, जो पिछले हमलों के पैटर्न के आधार पर भविष्य के खतरों को भी भांप लेगी।

एस-400 – सुदर्शन से मिली प्रेरणा

इस मिशन की अवधारणा भारतीय वायुसेना के पास मौजूद एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के अनुभव से आई है। भारत ने रूस से 2018-19 में 35,000 करोड़ रुपए  में पाँच एस-400 स्क्वाड्रन खरीदने का समझौता किया था।

अब तक तीन स्क्वाड्रन भारत को मिल चुके हैं और बाकी दो 2026 तक आ जाएँगे। इस सिस्टम को भारतीय वायुसेना ने ‘सुदर्शन’ नाम दिया है। एस-400 की ताकत का सबसे बड़ा प्रदर्शन मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुआ, जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई ठिकानों को निशाना बनाया।

इस ऑपरेशन में सुदर्शन ने 300 किलोमीटर दूर से पाँच पाकिस्तानी लड़ाकू विमान और एक AEW&C की निगरानी विमान को मार गिराया। यह सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का अब तक का सबसे लंबी दूरी का सफल हमला था।

इसके अलावा, इस सिस्टम ने दर्जनों ड्रोन और मिसाइल हमलों को भी नाकाम किया। पाकिस्तान के कई कमांड सेंटर, रडार स्टेशन और आतंकी ठिकाने तबाह हुए। इस घटना ने साबित कर दिया कि लंबी दूरी की और तेज प्रतिक्रिया देने वाली एयर डिफेंस प्रणाली देश की सुरक्षा के लिए कितनी अहम है।

2035 तक का लक्ष्य

पीएम मोदी के अनुसार, मिशन सुदर्शन चक्र का लक्ष्य अगले दस सालों में पूरा होगा। इस अवधि में देश के सभी रणनीतिक और संवेदनशील स्थानों पर यह सुरक्षा कवच लगाया जाएगा।

पहले चरण में सेना के ठिकाने, वायुसेना स्टेशन, नौसेना के बेस, परमाणु संयंत्र, रॉकेट लॉन्च स्टेशन और रक्षा उद्योग केंद्रों को जोड़ा जाएगा। इसके बाद रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, एयरपोर्ट, अस्पताल, धार्मिक स्थल, बड़े स्टेडियम और भीड़-भाड़ वाले बाजारों को भी इस प्रणाली से कवर किया जाएगा।

इस मिशन के लिए बड़े पैमाने पर घरेलू रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग की जाएगी। इसके लिए सरकार ने ‘प्लस वन नीति’ अपनाने का फैसला किया है, जिसमें हर विदेशी तकनीक के साथ एक भारतीय तकनीक का विकास अनिवार्य होगा।

यानी अगर कोई उपकरण बाहर से खरीदा जाएगा, तो उसका एक स्वदेशी संस्करण भी तैयार किया जाएगा। इससे तकनीकी आत्मनिर्भरता के साथ-साथ निर्यात की संभावनाएँ भी बढ़ेंगी।

क्यों जरूरी है यह मिशन

भारत की भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा चुनौतियाँ इस मिशन को बेहद अहम बनाती हैं। एक ओर पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देश हैं, जिनसे सैन्य तनाव बना रहता है, वहीं दूसरी ओर ड्रोन और मिसाइल तकनीक का प्रसार आतंकवादी संगठनों तक भी पहुँच चुका है।

हाल के वर्षों में पाकिस्तान की ओर से कई बार ड्रोन के जरिये हथियार और विस्फोटक भेजे गए हैं। 2021 में जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर ड्रोन हमला इसका उदाहरण है। इसके अलावा, देश के भीतर भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा खतरे बढ़ते जा रहे हैं।

ऐसे में सिर्फ फिजिकल सुरक्षा इंतजाम काफी नहीं हैं। एक ऐसी ऑल-इन-वन तकनीक की जरूरत है जो खतरे को दूर से भांपकर तुरंत प्रतिक्रिया दे सके। मिशन सुदर्शन चक्र इस कमी को पूरा करेगा और देश को एक आधुनिक सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।

बिहार में बनेगा मखाना बोर्ड: किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज की लिमिट बढ़ी, आएगी प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना : निर्मला सीतारमण


वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बजट पेश कर दिया है। उन्होंने इस बजट में कृषि क्षेत्र के लिए एक नई योजना का ऐलान किया है। इसका नाम प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना होगा। वित्त मंत्री ने कहा हिया कि इससे 1.7 करोड़ किसानों को फायदा होगा।

वित्त मंत्री ने शनिवार (1 फरवरी, 2025) को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश किया है। वित्त मंत्री ने कहा है कि इस योजना में राज्यों की सहायता से कृषि पर काम होगा। यह योजना सबसे पहले चरण 100 जिलों में चालू की जाएगी। यह वो जिले होंगे जहाँ कृषि क्षेत्र का विकास नहीं हुआ है।

इसके लिए पहले से चल रही कृषि योजनाओं को भी शामिल किया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा है कि इससे कृषि क्षेत्र में रोजगार के मौके पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि इससे पलायन केवल एक विकल्प के रूप में रह जाएगा, ना कि मजबूरी होगा। इस योजना में फोकस महिलाओं और युवाओं पर होगा।

वित्त मंत्री ने तिलहन के क्षेत्र के लिए भी नए प्रावधान लाने का ऐलान किया है। सरकार अब दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए एक मिशन लॉन्च करेगी। यह 6 वर्षों में पूरा किया जाएगा। इसमें तुअर, उड़द और मसूर की डाल पर मुख्य फोकस होगा। केन्द्रीय एजेंसियाँ इन दालों की पूरी उपज की खरीद करेंगी।

इसके अलावा सरकार सब्जियों तथा फलों के लिए भी योजना लाएगी। इसके लिए भी एक नया प्रोग्राम चालू किया जाएगा। वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि बिहार के भीतर मखाना बोर्ड का गठन होगा। यह मिथिला क्षेत्र को सबसे अधिक फायदा देगा।

मखाना पैदा करने वालों को संगठित किया जाएगा। उनका किसान संगठन (FPO) बनाया जाएगा। अच्छे बीजों के लिए भी काम किया जाएगा। वित्त मंत्री ने बजट में ऐलान किया है कि मत्स्य उत्पादन के लिए भी सरकार काम करेगी, सबसे अधिक फोकस अंडमान निकोबार तथा लक्षद्वीप पर रहेगा।

सरकार किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा भी ₹3 लाख से बढ़ा कर ₹5 लाख कर देगी। इसके अलावा यूरिया का एक नया प्लांट असम में भी लगाया जाएगा।

हर मंदिर को 10 लाख रूपए, पुजारियों को हर महीने 15 हजार रूपए : आंध्र प्रदेश में सत्ता बदलते ही ‘तुष्टिकरण’ बंद, बोले CM चंद्रबाबू नायडू- मंदिरों में गैर हिंदुओं को नहीं मिले नौकरी

                                                  चंद्रबाबू नायडू (साभार: टाइम्स नाऊ)
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि राज्य के मंदिरों में केवल हिंदुओं को ही काम पर रखा जाएगा। उन्होंने मंदिरों के पुजारियों के वेतन में 50 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की है। इसके साथ ही ‘नाई ब्राह्मणों’ (मंदिरों में काम करने वाले नाई) के लिए न्यूनतम मासिक वेतन 25,000 रुपए दिया जाएगा। वेद विद्या प्राप्त करने वाले बेरोजगार युवाओं को भी 3,000 रुपए मासिक भत्ता दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने राज्य भर के विभिन्न मंदिरों में काम कर रहे 1683 अर्चकों (पुजारियों) का वेतन 10,000 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए महीना करने की घोषणा की है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने ‘धूप दीप नैवेद्यम योजना’ के तहत छोटे मंदिरों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को 5,000 रुपए से बढ़ाकर 10,000 रुपए प्रति माह करने का निर्णय लिया है।

बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि मंदिर ट्रस्ट में दो और बोर्ड सदस्य जोड़े जाएँगे। बता दें कि 20 करोड़ रुपए या उससे अधिक राजस्व वाले मंदिरों के ट्रस्ट बोर्ड में 15 सदस्य होते हैं। अब यह संख्या बढ़ाकर 17 की जाएगी। इसके अलावा, यह भी स्पष्ट किया गया कि ट्रस्ट बोर्ड में एक ब्राह्मण और एक नाई ब्राह्मण सदस्य होंगे। एनडीए ने चुनाव से ये पहले वादा किया था।

बैठक के दौरान सीएम नायडू ने कहा, “हिंदू मंदिरों में गैर-हिंदुओं को कोई नौकरी नहीं दी जानी चाहिए। आंध्र प्रदेश में 1,110 मंदिरों के लिए ट्रस्टी नियुक्त किए जा रहे हैं।” नायडू ने यह भी घोषणा की कि वर्तमान में अवैध रूप से कब्जा की गई 87,000 एकड़ मंदिर भूमि को कानूनी माध्यम से फिर से प्राप्त किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में जबरन धर्मांतरण नहीं होना चाहिए।

सीएम नायडू ने घोषणा की कि श्रीवाणी ट्रस्ट के तहत प्रत्येक मंदिर को 10 लाख रुपए दिए जाएँगे। यदि आवश्यक हुआ तो उन कार्यों की समीक्षा पूरी होने के बाद और अधिक धनराशि प्रदान की जाएगी। अधिकारियों से कहा गया कि वे उन मंदिरों के लिए प्रस्ताव भेजें, जहाँ 10 लाख रुपए से अधिक की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने श्रीवाणी ट्रस्ट फंड के लिए जवाबदेही की आवश्यकता पर बल दिया और अधिकारियों को मंदिरों और उनकी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी मंदिरों के लिए एक ऑनलाइन प्रणाली लागू करने को कहा। धर्मस्व विभाग के अधिकारियों को कृष्णा और गोदावरी नदी को पुनर्जीवित करने का भी निर्देश दिया।

हिंदू धार्मिक बंदोबस्ती विभाग के अधिकारियों के साथ मंगलवार (27 अगस्त 2024) को बैठक के दौरान सीएम नायडू ने राज्य के हर मंदिर में आध्यात्मिकता को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि मंदिरों और उनके आसपास के इलाकों को पूरी तरह से साफ-सुथरा रखा जाना चाहिए, ताकि वहाँ आध्यात्मिक माहौल बना रहे।

मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग, हिंदू धर्मार्थ विभाग और वन विभाग के अधिकारियों की एक समिति के गठन की भी घोषणा की। यह समिति मंदिरों, विशेष रूप से वन क्षेत्रों में स्थित मंदिरों के विकास की देखरेख करेगी। समिति इन स्थलों की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व को संरक्षित रखते हुए इसे अधिक से अधिक पर्यटकों के लिए सुलभ बनाएगी।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा, “आंध्र प्रदेश के हर मंदिर में आध्यात्मिकता प्रस्फुटित होनी चाहिए। आध्यात्मिक कार्यक्रम इस तरह से आयोजित किए जाने चाहिए कि श्रद्धालु मंदिर में वापस आएँ और उन्हें ये ना लगे कि उनसे पैसे ऐंठे जा रहे हैं। यह भी जरूरी है कि मंदिर और उनके आसपास के इलाकों को बेहद साफ-सुथरा रखा जाए।”

बैठक के दौरान नायडू ने पिछले वाई एस जगन मोहन रेड्डी प्रशासन के दौरान हिंदू मंदिरों पर हमलों की घटनाओं की कड़ी निंदा की, जिसमें मंदिर के रथ को जलाना भी शामिल है। उन्होंने ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आह्वान किया और इस बात पर जोर दिया कि आंध्र प्रदेश में जबरन धर्म परिवर्तन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मोदी की सख्ती का असर, कनाडा ने पहली बार सुनाया दो खालिस्तानियों के खिलाफ फैसला

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सख्त नेतृत्व का असर कनाडा में दिखने लगा है। कनाडा के एक कोर्ट ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को बड़ा झटका देते हुए खालिस्तान समर्थकों पर हवाई यात्रा बैन को सही करार दिया है। खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के आरोपों पर भारत के सख्त रुख अपनाने और उनके दावे को खारिज करने के बाद से ही कनाडा बैकफुट पर है। अब पहली बार कनाडा की एक अदालत ने देश की ‘उड़ान-प्रतिबंधित’ सूची से बाहर किए जाने की 2 खालिस्तानियों की अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने दो सिख चरमपंथियों के प्रयास को यह कहते हुए नाकाम कर दिया कि यह संदेह करने के लिए ‘पुख्ता आधार’ हैं कि वे आतंकवादी घटना को अंजाम देने के वास्ते परिवहन सुरक्षा या हवाई यात्रा के लिए खतरा होंगे। काबिले जिक्र है कि एक तरफ कनाडा की संसद खालिस्तानी आतंकी की बरसी पर उसे श्रद्धांजलि दे रही है, वहीं दूसरी तरफ कनाडा की कोर्ट ने माना है कि निज्जर के दो सहयोगी को प्लेन में नहीं चढ़ने देने का फैसला सही है। खालिस्तानी नेताओं द्वारा प्लेन को हाईजैक करने जैसी आशंका वाली रिपोर्ट के बाद कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है।

 कनाडा में खालिस्तान समर्थकों ने लगाई ‘अपनी अदालत’, कनाडा उच्चायोग को नोटिस

खालिस्तान समर्थकों के सिर उठाने के बावजूद कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन वहां के कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह खालिस्तानी समर्थकों को किसी भी तरह की छूट देने के पक्ष में नहीं है। पिछले दिनों कनाडा के वैंकूवर में भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर एक बार फिर खालिस्तानी आतंकियों ने भारत के खिलाफ कथित ‘जन अदालत’ आयोजित की थी। इस अदालत के आयोजन के बाद प्रधानमंत्री का पुतला भी फूंका गया। इसको लेकर भारत ने सख्त ऐतराज जताया है। कनाडा में खालिस्तान समर्थकों की निरंतर बढ़ती गतिविधियों को भारत ने बेहद गंभीरता से लेते हुए दिल्ली स्थित कनाडा उच्चायोग को राजनयिक नोटिस जारी किया है। यह घटना उस समय हुई है, जब पिछले सप्ताह इटली में G7 Summit के दौरान पीएम मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की मुलाकात के बाद दोनों देशों के संबंध सुधरने की उम्मीद जगी थी। हालांकि इसके बावजूद कनाडाई संसद ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की याद मे मौन रखकर शोक जताया था।
कनाडा की धरती पर खालिस्तानी आतंकवादियों को लगातार दी जा रही शह
भारत ने वैंकूवर की कथित जन अदालत के बाद कनाडाई उच्चायोग को राजनयिक नोटिस जारी किया है। इस मौखिक नोटिस में कनाडा की धरती पर खालिस्तानी आतंकवादियों को लगातार दी जा रही शह पर गंभीर आपत्ति और नाराजगी जताई गई है। भारत ने कनाडा को साफ कहा है कि उसकी धरती पर खालिस्तानी आतंकियों के प्रदर्शन और जन अदालत लगाना दोनों देशों के संबंधों में भारी गतिरोध ला सकता है। भारत ने खालिस्तानी आतंकियों को जस्टिन ट्रूडो की सरकार द्वारा बढ़ावा दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है और इस पर आपत्ति जताई गई है। भारत ने गुरुवार को वैंकूवर में भारतीय वाणिज्य दूतावास के सामने खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों द्वारा ‘नागरिक अदालत’ आयोजित करने के बाद संयुक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने दिल्ली में कनाडाई उप उच्चायुक्त को तलब किया और कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसके साथ ही भारत ने जस्टिन ट्रूडो सरकार द्वारा खालिस्तानियों को खुली छूट दिए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई।
दो खालिस्तानियों के खिलाफ फैसला, हवाई यात्रा पर रोक को सही ठहराया
इस बीच कनाडा की एक ‘संघीय अपीलीय अदालत’ ने खालिस्तान समर्थक भगत सिंह बराड़ और पर्वकर सिंह दुलाई की अपील खारिज कर दी है। इन दोनों का नाम कनाडा के सुरक्षित विमान यात्रा अधिनियम के तहत ‘उड़ान प्रतिबंधित’ सूची में शामिल किया गया था। इससे पहले दोनों सिख चरमपंथियों ने इस सूची की संवैधानिकता को चुनौती दी थी और उनकी याचिका निरस्त हो गयी थी। इसके बाद उन्होंने अपीलीय अदालत का दरवाजा खटखटाया था। दोनों को 2018 में वैंकूवर में विमानों में चढ़ने की अनुमति नहीं दी गयी थी। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि यह अधिनियम सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री को लोगों को उड़ान भरने से प्रतिबंधित करने का अधिकार देता है, बशर्ते ‘‘यह संदेह करने का उचित आधार हो कि वे परिवहन सुरक्षा को खतरा पहुंचाएंगे या आतंकवादी घटना को अंजाम देने के लिए हवाई यात्रा करेंगे।’’ नई दिल्ली में सूत्रों ने बताया कि दुलाई प्रतिबंधित संगठन ‘बब्बर खालसा’ का सदस्य है। दुलाई विपक्षी ‘न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी’ के नेता जगमीत सिंह का करीबी है। दुलाई सरे से ‘चैनल पंजाबी’ और चंडीगढ़ से ‘ग्लोबल टीवी’ चैनलों का संचालन करता है। दोनों चैनल खालिस्तानी दुष्प्रचार करते हैं।
कनाडा की संसद ने निज्जर की स्मृति में एक मिनट का मौन रखा
भारत द्वारा यह कूटनीतिक कदम कनाडा की संसद द्वारा खालिस्तान टाइगर फोर्स के आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की स्मृति में एक मिनट का मौन रखने के एक दिन बाद उठाया गया है। निज्जर को पिछले साल 18 जून को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में गोली मार दी गई थी। वह खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) के आतंकवादी गुरदीप सिंह उर्फ दीपा हेरनवाला का पुराना साथी था, जो 1980 और 1990 के दशक की शुरुआत में पंजाब में 200 से अधिक हत्याओं में शामिल था। कनाडाई खुफिया एजेंसियों ने लगातार निज्जर के बारे में यह कहानी गढ़ने की कोशिश की है कि वह कनाडा के सरे में गुरु नानक गुरुद्वारा का एक निर्दोष और धार्मिक विचारों वाला प्रमुख था।
कनाडाई प्रधानमंत्री भारत विरोधी प्रचार पर जान बूझकर कोई नकेल नहीं कस रहे
इस महीने की शुरुआत में इटली में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और ट्रूडो के बीच संक्षिप्त मुलाकात हुई। ट्रूडो अपनी धरती से खालिस्तानियों द्वारा चलाए जा रहे भारत विरोधी प्रचार पर जान बूझकर कोई नकेल नहीं कस रहे हैं। पिछले साल कनाडा की संसद में ट्रूडो ने निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की भूमिका का आरोप लगाया था, लेकिन अभी तक अपने आरोपों को पुख्ता करने के लिए कोई सबूत नहीं दिया है। पिछले महीने विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि सरकार ने प्रत्यर्पण के लिए 25 लोगों के नाम दिए हैं, लेकिन ट्रूडो की सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। इस सूची में कुख्यात गैंगस्टर और कनाडा में शरण लिए हुए खालिस्तान समर्थक आतंकवादी शामिल हैं। पिछले साल सितंबर में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सिख आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की “संभावित” संलिप्तता का आरोप लगाया था। भारत ने ट्रूडो के आरोपों को “बेतुका और प्रेरित करने वाला” बताते हुए सिरे से ही खारिज कर दिया। दरअसल, खालिस्तान समर्थन की आड़ में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं। वे खालिस्तान से जुड़ी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन से अल्पमत की सरकार चला रहे हैं, जिसे भारत विरोधी जगमीत सिंह चलाते हैं।
पहले भी पीएम जस्टिन ट्रूडो की मौजूदगी में लगे खालिस्तान जिंदाबाद के नारे
गौरतलब है कि गत अप्रैल माह में भी कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो की मौजूदगी में खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे थे। दरअसल, कनाडा की राजधानी में खालसा दिवस पर एक आयोजन किया गया था, जिसमें ट्रूडो भी शामिल थे। जैसे ही ट्रूडो संबोधन के लिए आगे बढ़े, भीड़ में खड़े लोगों ने खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस घटना के बाद भारत सरकार ने सख्ती दिखाई थी। अब विदेश मंत्रालय ने इस मामले में भारत में कनाडा के उप उच्चायुक्त को तलब किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत सरकार ने इस मामले में गहरी चिंता जताई है और कहा है कि कार्यक्रम में ऐसे तत्वों अनुमति देना बहुत गलत है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह कनाडा में अलगाववाद, उग्रवाद, हिंसा को दिए गए राजनीतिक समर्थन को दर्शाता है।

UCC की दिशा में बढ़ा असम: मुस्लिम निकाह- तलाक रजिस्ट्रेशन वाला कानून निरस्त, बोले CM सरमा- बाल विवाह पर लगेगी रोक

                                साभार: Lenardo AI Generated & The Statesman
असम ने वर्ष 1935 में बनाए गए मुस्लिम विवाह और तलाक रजिस्ट्रेशन अधिनियम (Muslim Marriages and Divorces Registration Act 1935) को रद्द कर दिया है। इसकी जानकारी सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर दी है। उन्होंने कहा है कि इससे अंतर्गत शादी की कानूनी आयु ना पूरी करने वालों का भी निकाह हो रहा था।

सीएम हिमंता ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “23 फरवरी, 2024 को असम कैबिनेट ने दशकों पुराने असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम को निरस्त करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। भले ही दूल्हा और दुल्हन की उम्र 18 और 21 ना हुई हो, जैसा कि कानूनन होना चाहिए, के विवाह का पंजीकरण भी इसके अंतर्गत हो रहा था। यह निर्णय असम में बाल विवाह पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

इससे पहले असम सरकार में मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने इस विषय में मीडिया से बात की। उन्होंने मीडिया को बताया, “असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम 1935, जिसके आधार पर अब तक 94 मुस्लिम रजिस्ट्रार राज्य में मुस्लिम निकाहों का पंजीकरण कर रहे थे और तलाक का निर्णय कर रहे थे, उसे निरस्त कर दिया गया है। आज की कैबिनेट बैठक में इस अधिनियम को हटा दिया है।”

उन्होंने आगे बताया, “इसके परिणामस्वरूप आज के बाद इस अधिनियम के जरिए मुस्लिम विवाह या तलाक का पंजीकरण नहीं हो सकेगा। हमारे राज्य में एक विशेष विवाह अधिनियम है, इसलिए हम चाहते हैं कि सभी विवाह, विशेष विवाह अधिनियम के तहत हों।” बरुआ ने इस कानून को औपनिवेशिक काल का कानून बताया और कहा कि इससे राज्य में बाल विवाह पर रोक लगेगी। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से असम में बाल विवाह पर एक्शन चल रहा है, इसके अंतर्गत 1000 से अधिक गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।

क्या था मुस्लिम विवाह अधिनियम?

यह अधिनियम वर्ष 1935 में अंग्रेजों द्वारा लाया गया था। यह अधिनियम वर्ष 1935 में अंग्रेजों द्वारा लाया गया था। यह असम के मुस्लिमों के लिए विवाह पंजीकरण और तलाक के नियम बनाता था। इसके अंतर्गत कोई भी मुस्लिम व्यक्ति, जिसे सरकार अधिकृत कर दे, मुस्लिम निकाह को पंजीकृत कर सकता था। इसी के साथ वह तलाक का पंजीकरण भी कर सकता था। इसके लिए वह एक शुल्क भी ले सकता था। इस अधिनियम के तहत एक इलाके में दो मुस्लिम रजिस्ट्रार नियुक्त किए जाने थे, जिनमें से एक सुन्नी और एक शिया होता।
असम सरकार का मानना है कि इस नियम का लाभ उठा कर ऐसे निकाह भी पंजीकृत हो रहे थे, जो कि कानूनी मान्यता पूरी नहीं करते। चूंकि इस अधिनियम में निकाह की न्यूनतम आयु का जिक्र नहीं था, ऐसे में 18 वर्ष से कम की बच्चियों का निकाह भी हो रहा था।
हालाँकि, अब सरकार ने इस पर रोक लगा दी है। वर्तमान में असम के भीतर 94 ऐसे मुस्लिम रजिस्ट्रार हैं, जो कि निकाह और तलाक का पंजीकरण करते हैं। सरकार अब इनका रजिस्ट्रार का पद खत्म कर देगी। असम सरकार ने कहा है कि इन सभी को एक बार ₹2 लाख का मुआवजा भी दिया जाएगा।

UCC की दिशा में एक बड़ा कदम

असम सरकार का यह निर्णय समान नागरिक संहिता (UCC) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। गौरतलब है कि हाल ही में उत्तराखंड में UCC को विधानसभा की मंजूरी मिली है। इसके अंतर्गत सभी धर्मों के लोगों के विवाह, तलाक और विरासत जैसे मुद्दों को लेकर नियम बनाए गए हैं। इसमें भी बहुविवाह जैसे मामलों पर रोक लगाई गई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पहले ही कहते आए हैं कि वह राज्य में UCC लागू करेंगे।
ऐसे में मुस्लिमों के लिए अलग से बनाया कानून खत्म करना UCC का रास्ता साफ़ करता है। CM सरमा राज्य में बाल विवाह, बहुविवाह और तीन तलाक के धुर विरोधी रहे हैं। इसके खिलाफ वह लगातार बोलते रहे हैं। अब असम में मुस्लिम निकाह का पंजीकरण विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत होगा।