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माध्यम आय वालो को मोदी सरकार का बड़ा तोहफा, अब 12 लाख रूपए तक की कमाई तो नहीं देना होगा कोई टैक्स

चुनावों में फ्री की रेवड़ियों पर वेतनभोगी सबसे ज्यादा दुःखी है, उसका कहना है कि जिस पार्टी को फ्री की रेवड़ियां देनी है अपने फण्ड से दे, हमारे टैक्स से नहीं। क्योकि वेतनभोगी के पास अपनी आय छुपाने का कोई रास्ता नहीं। जबकि व्यापारी-छोटे दुकानदार, सब्जी-फल विक्रेता से लेकर बड़ा व्यापार करने वाले- के पास अपनी आय छुपाने के हज़ार रास्ते होते हैं। दूसरे, यह कि जब हर ग्राहक किसी भी पदार्थ को खरीदने पर GST(राज्य और केंद्र) देती है फिर टैक्स क्यों? क्या चुनावी मौसम में पेश बजट में वेतनभोगियों का गुस्सा न झेलने सरकार के डर ये कदम उठाया है? लोक सभा चुनाव में सरकारी कर्मचारियों के क्षेत्रों में पार्टियों को झटका लग चुका है। इस कटु सच्चाई को कोई इंकार नहीं कर सकता। अब देखना यह होगा महंगाई स्थिर रहती है या तेजी से बढ़ती है।      
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने मिडिल क्लास को एक बड़ा तोहफा दिया है। इनकम टैक्स के मोर्चे पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मिडिल क्लास को खुश कर दिया है। केंद्रीय बजट में आज 01 फरवरी, 2025 को आयकर दाताओं को एक बड़ी सौगात देते हुए उन्होंने इनकम टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपये करने की घोषणा की है।

वित्त मंत्री की घोषणा के बाद अब हर महीने 1 लाख रुपये की सैलरी पाने वाले लोगों को कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा। इससे आयकर दाताओं को भारी बचत होगी और वे पहले से ज्यादा पैसा बचा पाएंगे। इस पैसे को वे अन्य कार्यों या बाजार में खर्च पाएंगे। जिससे बाजार में बूस्ट आने के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

वित्त मंत्री ने लोकसभा में बजट पेश करते हुए न्यू टैक्स स्लैब में बदलाव का एलान किया। न्यू टैक्स रिजीम में आयकर दाताओं को फायदा देते हुए उन्होंने ओल्ड टैक्स रिजीम में कोई बदलाव नहीं किया है। उसमें नौकरीपेशा लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा 50 हजार से बढ़ाकर 75 हजार रुपये कर दी गई है। इससे उन्हें 12.75 लाख रुपये तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं देना होगा।

मोदी सरकार की इस बजट ने मिडिल क्लास की मन मांगी मुराद पूरी कर दी है। खजाने में 1 लाख करोड़ रुपये की कमी आने की परवाह न करते हुए वित्तमंत्री में इनकम टैक्स देने वाले देश के एक बड़े हिस्से को बड़ी राहत दी है। करदाताओं को खुशखबरी देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि “नई कर व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई आयकर देय नहीं होगा। 75,000 रुपये की मानक कटौती के कारण वेतनभोगी आयकरदाताओं के लिए सीमा 12.75 लाख रुपये की होगी।”

निर्मला सीतारमण की घोषणा से नौकरीपेशा लोगों की बल्ले-बल्ले हो गई है। पहले उन्हें 7 लाख की कमाई पर कोई टैक्‍स नहीं देना होता था। अब 12 लाख रुपये तक की सालाना इनकम पर उन्हें कोई टैक्स नहीं देना होगा। इनकम टैक्‍स के इतिहास में सबसे बड़ी राहत देते हुए मोदी सरकार ने पूरा टैक्‍स स्‍लैब ही बदल दिया है। उन्होंने कहा कि स्लैब दरों में कटौती के कारण मिलने वाले लाभों के अलावा कर में छूट इस ढंग से प्रदान की जा रही है कि उनके द्वारा कर का कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।

श्रीमती सीतारमण ने कहा, “नई कर संरचना मध्यम वर्ग के लिए व्यापक रूप से करों के बोझ को कम करेगी और उनके हाथों में ज्यादा धन उपलब्ध कराएगी, जिससे घरेलू उपभोग, बचत और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।” नई कर व्यवस्था के तहत, वित्त मंत्री ने टैक्स स्लैब का जो प्रस्ताव दिया है वो इस तरह से है-

4 लाख रुपये तक: 0% टैक्स
4 लाख से 8 लाख रुपये तक: 5% टैक्स
8 लाख से 12 लाख रुपये तक: 10% टैक्स
12 लाख से 16 लाख रुपये तक: 15% टैक्स
16 लाख से 20 लाख रुपये तक: 20% टैक्स
20 लाख से 24 लाख रुपये से तक: 25% टैक्स
24 लाख से ऊपर: 30% टैक्स

यानी नई टैक्स रिजीम के तहत 0-4 लाख रुपये की आय पर टैक्स शून्य होगा। वहीं, 4-8 लाख रुपये की आय पर 5 प्रतिशत, 8-12 लाख रुपये की आय पर 10 प्रतिशत, 12-16 लाख रुपये की आय पर 15 प्रतिशत, 16-20 लाख रुपये की आय पर 20 प्रतिशत, 20-24 लाख रुपये की आय पर 25 प्रतिशत और 24 लाख से अधिक की आय पर टैक्स की दर 30 प्रतिशत होगी।

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बिहार में बनेगा मखाना बोर्ड: किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज की लिमिट बढ़ी, आएगी प्रधानमंत्री धन धान
बिहार में बनेगा मखाना बोर्ड: किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज की लिमिट बढ़ी, आएगी प्रधानमंत्री धन धान
 

इसके साथ ही वित्त मंत्री ने बजट में वरिष्ठ नागरिकों को राहत देते हुए टीडीसी की सीमा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की घोषणा की है।

बिहार में बनेगा मखाना बोर्ड: किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज की लिमिट बढ़ी, आएगी प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना : निर्मला सीतारमण


वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बजट पेश कर दिया है। उन्होंने इस बजट में कृषि क्षेत्र के लिए एक नई योजना का ऐलान किया है। इसका नाम प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना होगा। वित्त मंत्री ने कहा हिया कि इससे 1.7 करोड़ किसानों को फायदा होगा।

वित्त मंत्री ने शनिवार (1 फरवरी, 2025) को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश किया है। वित्त मंत्री ने कहा है कि इस योजना में राज्यों की सहायता से कृषि पर काम होगा। यह योजना सबसे पहले चरण 100 जिलों में चालू की जाएगी। यह वो जिले होंगे जहाँ कृषि क्षेत्र का विकास नहीं हुआ है।

इसके लिए पहले से चल रही कृषि योजनाओं को भी शामिल किया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा है कि इससे कृषि क्षेत्र में रोजगार के मौके पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि इससे पलायन केवल एक विकल्प के रूप में रह जाएगा, ना कि मजबूरी होगा। इस योजना में फोकस महिलाओं और युवाओं पर होगा।

वित्त मंत्री ने तिलहन के क्षेत्र के लिए भी नए प्रावधान लाने का ऐलान किया है। सरकार अब दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए एक मिशन लॉन्च करेगी। यह 6 वर्षों में पूरा किया जाएगा। इसमें तुअर, उड़द और मसूर की डाल पर मुख्य फोकस होगा। केन्द्रीय एजेंसियाँ इन दालों की पूरी उपज की खरीद करेंगी।

इसके अलावा सरकार सब्जियों तथा फलों के लिए भी योजना लाएगी। इसके लिए भी एक नया प्रोग्राम चालू किया जाएगा। वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि बिहार के भीतर मखाना बोर्ड का गठन होगा। यह मिथिला क्षेत्र को सबसे अधिक फायदा देगा।

मखाना पैदा करने वालों को संगठित किया जाएगा। उनका किसान संगठन (FPO) बनाया जाएगा। अच्छे बीजों के लिए भी काम किया जाएगा। वित्त मंत्री ने बजट में ऐलान किया है कि मत्स्य उत्पादन के लिए भी सरकार काम करेगी, सबसे अधिक फोकस अंडमान निकोबार तथा लक्षद्वीप पर रहेगा।

सरकार किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा भी ₹3 लाख से बढ़ा कर ₹5 लाख कर देगी। इसके अलावा यूरिया का एक नया प्लांट असम में भी लगाया जाएगा।

बजट 2024 : 63000 गाँवों का विकास, कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल, छोटे कारीगरों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार; करदाताओं के लिए, 3 लाख रूपए तक की आय पर 0% टैक्स, स्टैंडर्ड डिडक्शन रूपए 50000 से रूपए 75000 हुआ: TDS भरने में देरी अपराध नहीं


केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार (23 जुलाई, 2024) को संसद में बजट 2024 पेश किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आम लोगों के लिए टैक्स को सिंपल रखना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कैंसर के रोगियों को राहत देते हुए उनसे जुड़ी 3 दवाओं पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म किया जाएगा। मोबाइल फोन के उत्पादन में भारत में 3 गुना बढ़ोतरी हुई है, इस पर पहले से कम कर के 15% कस्टम ड्यूटी लगाई जाएगी।

साथ ही अंतरिक्ष और रक्षा से जुड़े 25 मिनरल्स पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म की जाएगी। चमड़ा और टेक्सटाइल के एक्सपोर्ट पर भी बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) कम की जाएगी। उन्होंने कॉम्प्रिहेंसिव इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की समीक्षा का भी ऐलान किया। फाइनेंस बिल के तहत चैरिटी के लिए टैक्सेशन के रेट को कम किया जाएगा। TDS भरने में देरी पर अब आपराधिक मामला नहीं बनेगा। ई-कॉमर्स ऑपरेटरों को भी TDS में बड़ी छूट प्रदान की गई है। ये अब 1% से सीधा 0.1% हो जाएगा।

अब वेतन के TDS में ही TCS (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) को समायोजित किया जा सकेगा। स्टार्टअप निवेशकों को फायदा देते हुए एंजेल टैक्स को खत्म कर दिया गया है। ये गैर-सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा शेयर जारी करने के माध्यम से जुटाई गई पूंजी पर लगाया जाता है। दो तिहाई करदाताओं ने ‘न्यू टैक्स रिजाइम’ के तहत विकल्प चुना है। स्टैण्डर्ड डिडक्शन को 50,000 रुपए से 75,000 रुपए तक बढ़ा दिया गया है। साथ ही नए टैक्स स्लैब की भी घोषणा की गई है।

3 लाख रुपए तक की आय पर 0%, 7 लाख तय की आय पर 5%, 10 लाख तक की आय पर 10%, 12 लाख तक की आय पर 15%, 15 लाख तक की आय पर 20% और इससे ऊपर की आय पर 30% टैक्स लगेगा। वहीं कुछ फाइनेंसियल असेट्स पर शॉर्ट टर्म गेन पर 20% टैक्स लगेगा। 1 साल से अधिक रखे गए फाइनेंसियल असेट्स को अब लॉन्ग टर्म माना जाएगा। सोना और चाँदी पर भी कस्टम ड्यूटी अब 6% कर दिया गया है।

63000 गाँवों का विकास, कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल, छोटे कारीगरों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार

‘विकसित भारत’ के लिए मोदी सरकार 9 प्राथमिकताएँ तय की हैं, जिनसे सबको मौका मिले – कृषि में उत्पादकता एवं लचीलापन, रोजगार एवं कौशल, समावेशी मानव संसाधन विकास एवं सामाजिक न्याय, विनिर्माण एवं सेवाएँ, शहरी विकास, आपातकालीन सुरक्षा, बुनियादी ढाँचा, नवाचार अनुसंधान एवं विकास, अगली पीढ़ी के सुधार। शिक्षा, रोजगार एवं कौशल के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

कृषि अनुसन्धान के क्षेत्र में मोदी सरकार ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु के हिसाब से फसलों को विकसित करने के लिए एग्रीकल्चर रिसर्च सेटअप की व्यापक समीक्षा की जाएगी। सरकार और बाहर से विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी, प्राइवेट सेक्टर को भी फंडिंग मिलेगी। 1 करोड़ किसानों को नेचुरल फार्मिंग के लिए तैयार किया जाएगा। साथ ही 10,000 बायो इनपुट रिसॉर्स सेंटर स्थापित किए जाएँगे।

दालों एवं तिलहन की उत्पादकता, रख-रखाव और बाज़ार के लिए रणनीति बनाई जा रही है। रोजगार एवं कौशल विकास में महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कामकाजी महिला हॉस्टलों एवं शिशु गृहों की स्थापना की जाएगी। प्रतिवर्ष 25,000 छात्रों के लिए 7.50 लाख रुपए ऋण की व्यवस्था कौशल विकास के लिए की जाएगी। घरेलू संस्थानों में उच्चतर शिक्षा के लिए 10 लाख रुपए तक के ऋण पर 3% वार्षिक ब्याज छूट की व्यवस्था की जाएगी।

महिलाओं एवं कन्याओं से संबंधित योजनाओं के लिए 3 लाख करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। उत्तर-पूर्व में भारतीय डाक के 100 से अधिक शाखाएँ खोली जाएँगी। आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी पर बन रहे पोलावरम सिंचाई परियोजना के पूरी होने के बाद देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। विशाखापत्तनम-चेन्नई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए कोप्पार्थी और हैदराबाद-बेंगलुरु इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए ओरवाकल नोड में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जाएगा।

‘पूर्वोदय’ के तहत बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल का विकास किया जाएगा। पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे, बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे, बोधगया-राजगीर-दरभंगा सड़क के लिए निधि उपलब्ध कराई जाएगी और बक्सर में गंगा नदी पर 26,000 करोड़ रुपए की लागत से पुल बनाया जाएगा। भागलपुर के पीरपैंती में 2400 MW का पॉवर प्लांट 21,400 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जाएगा। ‘प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम योजना’ की घोषणा भी की गई है।

इसके तहत जनजातीय बहुल गाँवों के विकास के लिए कदम उठाए जाएँगे। इससे 63,000 गाँवों में जनजातीय समाज के 5 करोड़ लोग लाभान्वित होंगे। MSME सेक्टर को बैंक लोन में आसानी के लिए नई व्यवस्था लाई जाएगी। मुद्रा लोन को 10 से अब 20 लाख रुपए तक बढ़ाया जाएगा। 50 मल्टी-प्रोडक्ट फ़ूड इरेडिएशन इकाइयाँ स्थापित की जाएँगी। पारंपरिक कारीगरों के लिए ई-कॉमर्स निर्यात केंद्र PPP मोड में स्थापित किए जाएँगे, ताकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार मिले।

तमिलनाडु : राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के लाइव टेलीकास्ट पर बैन! BJP बोली – मंदिरों को धमकी, पूजा और विशेष प्रसाद पर भी प्रतिबंध

तमिलनाडु में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के लाइव टेलीकास्ट पर बैन के बाद निशाने पर CM एमके स्टालिन की सरकार
तमिलनाडु में 22 जनवरी को होने वाले अयोध्या राम मंदिर कार्यक्रमों के लाइव टेलीकास्ट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार (21 जनवरी, 2024) को इसे लेकर ट्वीट कर डीएमके सरकार पर हमला बोला है। हालाँकि, इसे लेकर अभी सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं आया है।

माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म एक्स पर सीतारमण ने कहा, “TN सरकार ने 22 जनवरी को अयोध्या राम मंदिर के कार्यक्रमों के लाइव प्रसारण को देखने पर प्रतिबंध लगा दिया है। TN में श्री राम के 200 से अधिक मंदिर हैं। HR&CE प्रबंधित मंदिरों में श्री राम के नाम पर किसी भी पूजा/भजन/प्रसादम/अन्नदानम की अनुमति नहीं है। पुलिस निजी तौर पर संचालित मंदिरों को भी कार्यक्रम आयोजित करने से रोक रही है। वे आयोजकों को धमकी दे रहे हैं कि वे पंडाल तोड़ देंगे। इस हिंदू विरोधी, घृणित कार्रवाई की कड़ी निंदा करती हूँ।”

सीतारमण ने अपने एक्स थ्रेड में आगे लिखा कि लोगों को भजन आयोजित करने, गरीबों को खाना खिलाने, मिठाइयाँ बाँटने और जश्न मनाने से रोका और धमकाया जा रहा है, जबकि वे केवल अयोध्या में राम मंदिर अभिषेक समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी को देखना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “तमिलनाडु सरकार अनौपचारिक लाइव टेलीकास्ट प्रतिबंध को उचित ठहराने के लिए कानून व्यवस्था के बिगड़ने का दावा कर रही है। यह एक झूठी और फर्जी कहानी है! अयोध्या फैसले के दिन कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं थी। देश-भर यह समस्या उस दिन भी नहीं थी जब माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने राम मंदिर का शिलान्यास किया था। तमिलनाडु में प्रभु श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा उत्सव मनाने के लिए लोगों में उमड़े स्वैच्छिक भागीदारी और भावना ने हिंदू विरोधी DMK सरकार को बेहद परेशान कर दिया है!”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि केबल टीवी ऑपरेटरों को बताया गया है कि लाइव टेलीकास्ट के दौरान बिजली कटौती की संभावना है। वित्त मंत्री सीतारमण ने इसे I.N.D.I. गठबंधन के प्रमुख सहयोगी DMK का हिंदू विरोधी कदम बताया है।

वहीं तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष के अन्नामलाई ने एक ट्वीट में कहा, “ऐसा लगता है कि धर्मनिरपेक्ष सरकार चलाने के नाम पर हिंदू विरोधी गतिविधियों में लगी डीएमके सरकार ने तमिलनाडु के मंदिरों में विशेष पूजा और भोजन प्रसाद पर प्रतिबंध लगा दिया है।”

उन्होंने इशारा किया, “द्रमुक सरकार को मंदिर प्रथाओं में हस्तक्षेप करने का क्या अधिकार है? इसके अलावा पुलिस को कहा गया है कि श्री राम की मूर्ति की स्थापना के मद्देनजर तमिलनाडु में मंदिर प्रशासन या जनता की ओर से कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं करने देना चाहिए और जनता के देखने के लिए बड़ी स्क्रीन के माध्यम से सीधा प्रसारण नहीं करना चाहिए।”

दरअसल रविवार सुबह ही पीएम मोदी धनुषकोडि के नजदीक अरिचल मुनई प्वाइंट गए हैं। कहा जाता है कि यहीं से राम सेतु का निर्माण हुआ था। इसके बाद वे श्री कोठंडारामा स्वामी मंदिर में पूजा और दर्शन किया। धनुषकोडी के कोठंडारामा नाम का मतल धनुषधारी राम है।

ऐसा कहा जाता है कि यहीं पर पहली बार विभीषण ने श्री राम से मिले उनसे शरण माँगी थी। कुछ किंवदंतियाँ हैं वहीं जगह जहाँ श्री राम ने विभीषण का राज्याभिषेक किया था।

तमिलनाडु में हिंदूओं और सनातन धर्म को लेकर इस तरह की घृणित राजनीति पहली बार नहीं हुई है। खुद तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन के बेटे और मंत्री एमके उदयनिधि और सरकार के मंत्री सनातन के खिलाफ अभद्र बयानबाजी कर चुके हैं। सनातन को मिटाने का आह्वान कर चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ एचआर एंड सीई ने स्पष्टीकरण जारी किया है कि यह गलत सूचना फैलाई गई है कि धर्मार्थ विभाग ने तमिलनाडु के मंदिरों में कल राम के नाम पर पूजा करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।


निर्मला सीतारमण को अमेरिका में बैन कराने के लिए विज्ञापन: कांग्रेस सरकार की डील और भारत को 9900 करोड़ रूपए का नुकसान

                   आर्थिक भगोड़े रामचंद्रन विश्वनाथन ने भारत सरकार के खिलाफ अमेरिकी में दिया विज्ञापन
भारतीय मूल का अमेरिकी नागरिक रामचंद्रन विश्वनाथन भारत सरकार से इतना नाराज़ है कि उसने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को अमेरिका में बैन कराने की माँग करते हुए एक पूरे पन्ने का विज्ञापन वहाँ की अख़बार में छपवा दिया। साथ ही उसने 10 अन्य को भी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन प्रशासन से बैन करवाने की सिफारिश की है। ED (प्रवर्तन निदेशालय) रामचंद्रन विश्वनाथन को पहले ही आर्थिक अपराधी और भगोड़ा घोषित कर चुका है।

उसने इस विज्ञापन में जिन लोगों को बैन कराने की माँग की है, उनमें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन, सुप्रीम कोर्ट के जज हेमंत गुप्ता व वी रामसुब्रमन्यन के अलावा ED के डायरेक्टर, अस्सिस्टेंट डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर भी शामिल हैं। अब इस आर्थिक अपराधी ने 2016 के ‘Global Magnitsky Human Rights Accountability’ कानून को आधार बनाते हुए ये माँग की है।

ज्ञात हो, गुजरात दंगों के बाद मोदी विरोधियों ने भी अमेरिका से नरेंद्र मोदी को वीसा देने के लिए पत्र लिखा। लेकिन अमेरिका ने भी नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही अमेरिका आने का निमंत्रण देकर इन विरोधियों पर ऐसा करारा प्रहार किया जिसे ज़िंदगी भर भूल नहीं पाएंगे। इतना ही नहीं, कुछ लिबरल पत्रकार भी प्रधानमंत्री मोदी के प्रथम दौरे में माहौल ख़राब करने पहुंचे, विश्व ने इन लिबरलों की हो रही दुर्गति को भी घरों में बैठ अपने टीवी पर देखा। देखना यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति कितनी कारगर सिद्ध होती है। 

इस कानून के तहत अमेरिका की सरकार को अधिकार है कि वो किसी विदेशी अधिकारी या नेता की संपत्ति को जब्त कर सके, उस पर प्रतिबंध लगा सके और यहाँ तक कि देश में उसके घुसने पर भी रोक लगा सके। मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाते हुए ऐसा किया जा सकता है। इसी साल अगस्त में ‘Frontiers of Freedom’ नामक संस्था ने रामचंद्रन विश्वनाथन की तरफ से याचिका दायर कर के ऐसी माँग की थी और एक अख़बार में फुल पेज एड भी चलाया।

                                                अमेरिका के अख़बार में छपवाया गया विज्ञापन

निर्मला सीतारमण व इन 10 लोगों को संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘Magnitsky 11’ करार दिया था। इसमें दावा किया गया है कि मोदी सरकार ने संवैधानिक संस्थाओं को हथियार बना कर कानून के राज को बर्बाद किया है और राजनीतिक व औद्योगिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ इसका इस्तेमाल कर के भारत को निवेशकों के लिए असुरक्षित बनाया है। इसमें डराया गया है कि भारत निवेशकों के लिए खतरनाक हो चुका है और अगर आप अगले निवेशक हैं तो अगला नंबर आपका भी हो सकता है।

इन सबके बीच में UPA काल के एक करार की चर्चा करनी ज़रूरी है। वो 2004 का समय था, जब रामचंद्रन विश्वनाथन ने सैटेलाइट मल्टीमीडिया सेवाएँ देने के लिए बेंगलुरु में ‘Devas Multimedia Private Limited’ नामक एक कंपनी की स्थापना की। इसके बाप इस कंपनी ने ISRO के कमर्शियल और मार्केटिंग विभाग ‘Antrix Corporation’ के साथ एक करार पर हस्ताक्षर किए। Antrix को इसके तहत 2 सैटेलाइट बनाने थे।

जहाँ Antrix को GSAT 6 and 6A सैटेलाइट्स बनाने थे, वहीं Devas को इन कम्युनिकेशन सैटेलाइट्स के S-band ट्रांसपोंडर बनवाने थे। इससे भारतीय मोबाइल सब्सक्राइबर्स को मल्टीमीडिया सेवाएँ मिलतीं। इस डील को जर्मनी की ‘Deutsche Telekom’ के अलावा मारीशस की 3 अन्य कंपनियों ने भी समर्थन दिया था। Antrix-Devas की इस डील में भ्रष्टाचार और अनियमितताएँ सामने आई थीं। Devas पर इनसाइडर सूचनाओं को बेचने के आरोप लगे और 2G घोटाले ने आग में घी का काम किया।

2011 में डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने इस करार को रद्द कर दिया। जुलाई 2010 में ही ये निर्णय लिया जा चुका था, लेकिन अगले साल फरवरी में इसकी घोषणा हुई। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मारीशस और जर्मनी की कंपनियों ने भारत के खिलाफ शिकायत की। ये ‘Bilateral Investment Treaty (BIT)’ के तहत किया गया, जिसके अंतर्गत निवेशकों के हितों को सुरक्षित रखा जाता है। संस्था ने भारत के खिलाफ फैसला दिया।

2020 में भारत को जर्मन निवेशकों को 16 करोड़ डॉलर (1318.69 करोड़ रुपए) और मारीशस के निवेशकों को 13.2 करोड़ डॉलर (1087.92 करोड़ रुपए) देने के आदेश दिए गए। इसके अलावा ‘International Chamber of Commerce (ICC)’ ने Antrix को कहा कि वो Devas के 562.5 मिलियन डॉलर (4636.03 करोड़ रुपए) के नुकसान की भरपाई करे। यानी, भारत को कुल 1.2 बिलियन डॉलर (9890.20 करोड़ रुपए) का घाटा लगा।

इसके बाद भले ही भारत में यूपीए सरकार का दौर ख़त्म हो गया हो, लेकिन रामचंद्रन विश्वनाथन द्वारा सह-स्थापित ‘Devas Multimedia Private Limited’ ने बदला लेने के इरादे से भारत विरोधी रवैया जारी रखा। कनाडा, फ़्रांस और अमेरिका में Antrix और भारत सरकार की संपत्तियों को जब्त कराने के लिए प्रयास किए जाने लगे। कई देशों में संपत्ति जब्त भी की गई। रामचंद्रन की कंपनी को कंगाल घोषित करते हुए भंग कर दिया गया, जिससे वो और बहदाक उठा।