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लोकसभा में TMC सांसद द्वारा E-Ciggrette पीने पर हुआ बवाल: भारत समेत 37 देशों में है बैन, फूँकने से सिर्फ फेफड़े नहीं दिमाग भी होता है खराब

प्रतिकात्मक तस्वीर ( साभार- chatgpt )
ई सिगरेट पर प्रतिबंध लगा हुआ है, लेकिन सदन में टीएमसी के सांसद पर इसे पीने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि टीएमसी के 3 सांसद हैं, जो सदन में ई सिगरेट पी रहे थे। हालाँकि इनका नाम उजागर नहीं किया गया है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में स्पीकर के सामने ये मुद्दा उठाया है। हालाँकि इस दौरान उन्होंने टीएमसी सांसद के ई सिगरेट पीने की बात कही। किसी का नाम नहीं लिया। स्पीकर ने लिखित शिकायत देने के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया है।

लोकसभा में गूँजा ई-सिगरेट पीने का मामला

टीएमसी के सांसद पर संसद परिसर में ई सिगरेट पीने का सांसद अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया। लोकसभा में ई-सिगरेट पीने का मुद्दा उठाते हुए सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि “देशभर में ई सिगरेट बैन है, क्या संसद में सिगरेट पीना अलाउ कर दिया गया है।” इस पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने ‘ना’ कहा। तब अनुराग ठाकुर ने कहा कि टीएमसी के सांसद कई दिनों से बैठकर पी रहे हैं। सदन में ई-सिगरेट पी जा रही है। इसकी जाँच करवाएँ।’ उन्होंने कहा कि लाखों लोग संसद की सीधी कार्रवाई देखते हैं, ये संसद की गरिमा के खिलाफ है।

पूरे मामले पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि ‘हमें संसदीय परंपराओं और संसदीय नियमों का अनुपालन करना चाहिए। ऐसा कोई विषय मेरे पास आएगा तो कार्रवाई करेंगे।’

न्यूज 18 के मुताबिक, पिछले कई दिनों में सांसदों के बीच ये मुद्दा गरम है। बीजेपी का कहना है कि टीएमसी के 3 सांसद संसद भवन के भीतर ई-सिगरेट का सेवन कर रहे थे। सांसद अनुराग ठाकुर ने सांसद शब्द का जिक्र किया, उनकी संख्या नहीं बताई और न ही नाम उजागर किया।

क्या होता है ई सिगरेट

ई-सिगरेट यानी वेप पेन या वेप्स, बैटरी से चलने वाला डिवाइस है जो एक लिक्विड को गर्म करके भाप बनाता है। इसे इस्तेमाल करने वाला यूजर साँस के जरिए शरीर के अंदर लेता है। इस लिक्विड में आमतौर पर निकोटीन, फ्लेवरिंग और दूसरे केमिकल होते हैं।

शुरुआत में इन्हें आमतौर पर सिगरेट पीने वाले लोग ‘सुरक्षित’ विकल्प के तौर पर देख रहे थे। इसके बनाने की प्रक्रिया में निकोटीन, फ्लेवरिंग, प्रोपलीन ग्लाइकॉल और दूसरे पदार्थ डाले जाते हैं और गर्म करने पर ये एरोसोल में बदल जाता है। इससे साँस लेने में समस्या पैदा होती है।

फेफड़ों समेत शरीर के दूसरे अंगों को नुकसान पहुँचता है। ये सिगरेट पीने जैसा ही है। बस तम्बाकु को जलाने के बजाए यहाँ लिक्विड को गर्म किया जाता है और उसके भाप का सेवन किया जाता है।

दुनियाभर में इससे होने वाले नुकसान को देखते हुए जागरुकता फैलाया जा रहा है। लोगों से इसे नहीं पीने की अपील की जा रही है। दुनिया के 37 देशों ने इस पर प्रतिबंध लगा रखा है, उनमें भारत भी एक है।

भारत सरकार ने 2019 में ई-सिगरेट की बिक्री, इसे बनाने, बाँटने या आयात करने पर रोक लगा दी थी। सरकार को चिंता थी कि ये युवा पीढ़ी को नुकसान पहुँचा रही हैं और नशे का आदी बना रही है।

क्यों लगा है बैन

ई-सिगरेट से तंबाकू नहीं जलता, लेकिन फिर भी इसके इस्तेमाल से गंभीर खतरे हैं। ज्यादातर वेपिंग लिक्विड में निकोटीन होता है, जो बहुत ज़्यादा एडिक्टिव होता है और टीनएजर्स और युवा पीढ़ी के ब्रेन डेवलपमेंट पर असर डालता है। वेपर में ऐसे केमिकल भी होते हैं, जो फेफड़ों में जलन पैदा कर सकते हैं। सांस लेने में दिक्कत पैदा कर सकते हैं और शायद लंबे समय तक सांस की समस्या का कारण बन सकते हैं।

कई स्टडीज़ से पता चला है कि वेपिंग से दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है, नसों को नुकसान पहुँचता है और फेफड़े सिकुड़ने लगते हैं। विदेशों में, ई-सिगरेट के इस्तेमाल से फेफड़ों को नुकसान पहुँचने के कई मामले सामने आए हैं, यानी वेपिंग से खतरा है इस पर पूरी दुनिया सहमत है।

ई सिगरेट के प्रकार

ई सिगरेट कई तरह की होती है। वेप्स, वेप पेन या स्टिक, हुक्का, ई-हुक्का, मॉड्स, पर्सनल वेपोराइजर यानी पीवी। पूरे को मिलाकर इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम यानी ईएनडी कहते हैं।

किसी भी ई सिगरेट में एक टैंक या पॉड होता है, जिसमें लिक्विड भरा जाता है।

लिक्विड को गरम करने के लिए उपकरण लगा होता है। उसे चलाने के लिए बैटरी लगी होती है। साथ में एक कंट्रोल बटन होता है।

इसमें इस्तेमाल होने वाले लिक्विड को ई जूस या वेप जूस भी कहते हैं। लेकिन ये कोई ‘जूस’ नहीं होता। इसमें पानी भी नहीं होता है। भाप पैदान करने के लिए प्रोपिलीन ग्लाइकॉल और ग्लिसरीन का इस्तेमाल किया जाता है। फ्लेवरिंग के लिए अलग अलग सामग्री इस्तेमाल की जाती है।

ई सिगरेट से होने वाली बीमारियाँ

इससे सांस की तकलीफें, अस्थमा, फेफड़े में सूजन, जकड़न और सिकुड़न हो सकता है। फेफड़े में हमेशा के लिए निशान पड़ सकता है या छोटे कण गहराई से घुस सकते हैं, जिससे कैंसर हो सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ़ नॉर्थ कैरोलिना की एक स्टडी के अनुसार ई-सिगरेट में पाए जाने वाले दो मुख्य इंग्रीडिएंट्स- प्रोपलीन ग्लाइकॉल और वेजिटेबल ग्लिसरीन शरीर के लिए घातक होते हैं।
इनका सबसे बुरा प्रभाव कोशिकाओं पर पड़ता है। ब्रेन के विकास पर असर डालता है। इसलिए टीनएजर्स और जेनजी के लिए खास तौर पर खतरनाक है। ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है। भारी धातु जैसे निकेल, लेड कैडमियन खून में घुलकर नसों को नुकसान पहुँचा सकता है।
इतने नुकसान और प्रतिबंध के बावजूद लोकतंत्र के मंदिर संसद में सांसदों द्वारा ई सिगरेट का सेवन करना काफी आश्चर्यजनक है। टीएमसी के सांसदों के खिलाफ लिखित शिकायत के बाद कार्रवाई का आश्वासन लोकसभा स्पीकर ने दिया है। लेकिन ये सिर्फ अनुशासनहीनता का मामला नही है। जनता के प्रतिनिधि का आचरण अनुसरणीय होनी चाहिए। जनता संसद की सीधी कार्रवाई देखती है। ऐसे में ये सांसद जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं।
सांसदों पर संसदीय मर्यादा को भंग करने का आरोप भी है। संसद तो इसके लिए कार्रवाई करेगी ही। अच्छा होता, अगर टीएमसी भी अपने सांसदों की जाँच के बाद आरोप साबित होने पर कार्रवाई करती। ये दूसरे सांसदों के लिए सीख होती और पार्टियों के लिए अनुकरणीय होता। आखिर जनता का नुमाइंदा इस तरह से सार्वजनिक तौर पर अनुशासनहीनता और अमर्यादित काम करे, तो जनता को ये क्या शिक्षा देंगे।

गोमांस खाने पर साथ आए कांग्रेसी सांसद गोगोई और AIDUF विधायक रफीकुल इस्लाम: हिमंता सरकार के गोमांस खाने पर सार्वजनिक बैन; विवादों की जननी कांग्रेस फिर दिखा रही अपना रंग


असम की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार के सार्वजनिक जगहों पर गोमांस परोसे जाने के बैन पर कॉन्ग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF गुस्सा हो गई है। कांग्रेस की तरफ से असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे और सांसद गौरव गोगोई ने गोमांस पर बैन की आलोचना का जिम्मा संभाला है।

असम सरकार के इस फैसले को लेकर AIUDF के विधायक रफीकुल इस्लाम ने कहा, “मैं समझता हूँ इसका ज्यादा महत्व नहीं है। भाजपा ने गोवा और नार्थईस्ट में बीफ पर बैन नहीं जबकि सब जगह उनकी सरकार है, वहाँ लोग बीफ खाते और खिलाते हैं… किसके घर में क्या पकेगा, कौन क्या खाएगा और कौन क्या पहनेगा यह कैबिनेट का विषय नहीं है।”

रफीकुल इस्लाम ने इस मामले में कांग्रेस पर भी निशाना साधा है। गोमांस के सार्वजनिक खाए जाने पर जाने पर बैन से नाराज कांग्रेस के एक विधायक शेरमन अली ने आरोप लगा दिया कि असम सरकार आरएसएस के एजेंडे पर चल रही है। उन्होंने इसे संविधान पर हमला बता दिया। वहीं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इसे झारखंड के चुनाव से जोड़ दिया।

गोमांस पर बैन को लेकर गोगोई ने कहा, “झारखंड में भाजपा को करारी शिकस्त दिलाने के बाद असम के मुख्यमंत्री अपने फेल्यर को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। झारखंड की समझदार जनता की तरह असम की जनता भी अगले चुनाव में असम के भाजपा नेताओं के भ्रष्टाचार, कुशासन और उनके द्वारा अर्जित बेहिसाब संपत्ति की सजा देगी।”

असम कैबिनेट ने बुधवार (4 दिसम्बर, 2024) को राज्य के भीतर रेस्टोरेंट और होटल में गोमांस परोसे जाने पर बैन लगा दिया। सार्वजनिक जगहों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी इसे नहीं खाया जा सकेगा। यह फैसला हाल ही में भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच गोमांस को लेकर चली जुबानी जंग के बाद सामने आया है।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा था कि वह समर्थन दे तो उनकी सरकार राज्य में पूर्ण रूप से गोमांस पर पाबंदी लगा देगी। असल में सामागुरी में बीजेपी की जीत के बाद कांग्रेस नेता रकीबुल हुसैन ने गोमांस बाँटने के आरोप लगाए थे। कहा था कि इसी कारण बीजेपी को इस सीट पर जीत मिली है।

रकीबुल हुसैन पिछले लगभग ढाई दशक से सामागुरी से विधायक थे। लोकसभा चुनाव में वे धुबरी से सांसद बन गए थे। इसके बाद उपचुनावों में इस सीट से कांग्रेस ने उनके बेटे तंजील हुसैन को मैदान में उतारा था। लेकिन करीब 60 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाली इस सीट को कांग्रेस बचा नहीं सकी।

रकीबुल हुसैन के आरोपों पर मुख्यमंत्री सरमा ने पूछा था कि क्या कांग्रेस अब तक गोमांस बाँट कर सामागुरी में जीत रही थी? उन्होंने कहा था, क्या सामागुरी सीट गोमांस बाँट कर जीती जा सकती है। अगर ऐसा है तो क्या कांग्रेस अब तक सामागुरी सीट गोमांस बाँट कर जीत रही थी? कांग्रेस नेता रकीबुल हुसैन सामागुरी सीट को अच्छी तरह से जानते हैं, इसलिए उन्हें पता होगा।

साथ ही उन्होंने कहा था कि वे राज्य में गोमांस पर बैन लगाने को तैयार हैं, बशर्ते इसके लिए असम कांग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा सहमत हों। उन्होंने कहा कि अगर रिपुन बोरा सहमत हों तो अगली विधानसभा की बैठक में ही गोमांस पर बैन लगा दिया जाएगा।

दिल्ली : AAP सरकार के पटाखा प्रतिबंध की लोगों ने उड़ा दी धज्जियाँ

                       केजरीवाल सरकार के बैन के बावजूद लोगों ने धड़ाधड़ शेयर की पटाखा फोड़ने की तस्‍वीरें
देश भर में दिवाली का जश्न जारी है और हिंदुओं के इस प्रमुख त्‍योहार में पटाखा फोड़ने की परंपरा रही है। हालाँकि, गत कई वर्षों से पटाखों पर बैन है ओर इस संबंध में कई याचि‍काएं कोर्ट में यह कहकर खारिज की जाती रहीं हैं क‍ि इससे प्रदूषण में बढ़ोतरी होगी। जबकि दिवाली से पहले ही प्रदुषण लगभग 300 तक पहुँच चूका था। प्रदुषण हो या कोरोना केजरीवाल कुछ करने की बजाए भाजपा या उपराज्यपाल पर ही दोषारोपण करते रहे हैं। केजरीवाल भाषण के अलावा कुछ काम करने में पूर्णरूप से असमर्थ होने के कारण ही अपने पास एक भी मंत्रालय नहीं रखा, क्यों? वैसे हमारा मीडिया भी कुछ कम नहीं। दिवाली पर आतिशबाज़ी से बड़े प्रदुषण पर चीख-पुकार करने वाला मीडिया बकरा ईद पर कहाँ था? जब बकरे अथवा भैसे के गंद को न उठाए जाने के कारण घरों में बैठना मुश्किल हो रहा था। लेक‍िन, आम जनमानस ने सरकार और कोर्ट का फैसला पूरी तरह मान ल‍िया, ऐसा होता तो बिल्‍कुल भी नहीं दिख रहा। सोशल मीडिया यूजर्स अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली  सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध की अवहेलना करते हुए दिल्ली में पटाखे जलाने के वीडियो और तस्वीरें अपलोड कर रहे हैं।

जिस तरह देर रात तक दिल्ली में आतिशबाज़ी हुई है, ऐसा नहीं कि इसमें भाजपाई ही थे, हर तरफ होती आतिशबाज़ी से साफ़ दिख रहा है, इसमें सभी शामिल थे। जबकि सोशल मीडिया पर केजरीवाल समर्थक सारा दोष भाजपा पर डाल अपना बचाव करते हुए बच्चों को आगे करने पर आपत्ति भी कर रहे हैं। लेकिन बच्चों और महिलाओं को आगे कर सियासत करने का रास्ता दिखाने वाली भी आम आदमी पार्टी है। CAA विरोध हो या किसान आंदोलन, दुनियां ने देखा। CAA धरने में तो कड़कती ठंठ में दूध पीते बच्चों तक को लेकर ड्रामा किया गया था। 

ट्विटर पर यूजर्स ने हैशटैग #DhuaHuaKejriwal का इस्तेमाल किया और तस्वीरें और वीडियो शेयर किए। शेयर किए गए विजुअल दिल्ली के लग रहे हैं, लेक‍िन ऑपइंडिया समय की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं कर सका। एक यूजर श्रवण बिश्नोई ने लिखा, “कथित तौर पर दिल्ली आज धमाल मचा रही थी…हर हर महादेव।”

एक अन्य यूजर गौरव ने लिखा, “औरंगजेब के बेटे को अपना साहस दिखाने के लिए दिल्ली का धन्यवाद ।” इसके साथ ही गौरव ने आकाश में आतिशबाजी का एक वीडियो साझा किया।

ट्विटर यूजर मयंक सिंह ने लिखा, ”#CrackerBan my foot अरविंद केजरीवाल, एक दिन दिवाली सेलेब्रेशन के बदले पराली और दिल्ली वाहन प्रदूषण पर अपना ज्ञान दें।” मयंक ने #DhuaHuaKejriwal हैशटैग के साथ पटाखे फोड़ते हुए एक वीडियो ट्वीट किया।

एक यूजर अनुश्री ने पटाखा फोड़ते हुए वीडियो शेयर क‍िया और लिखा, “हैप्‍पी दिवाली। अरविंद केजरीवाल और दोस्तों को समर्पित!”

भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी ट्विटर पर केजरीवाल पर तंज कसते हुए लिखा, “अरविंद केजरीवाल कह रहे थे कि फुलझड़ियाँ जलाने पर हिंदुओं के बच्चों को 6 महीने के लिए जेल भेज दिया जाएगा, बच्चों ने धज्जियाँ उड़ा दी केजरीवाल की।”

दिल्ली सरकार ने खराब वायु गुणवत्ता का हवाला देते हुए राज्य में सभी प्रकार के पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने 19 अक्टूबर को कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी में पटाखों का निर्माण, भंडारण और बिक्री एक दंडनीय अपराध है। उन्होंने आगे कहा कि इन गतिविधियों में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को 5,000 रुपये का जुर्माना और छह महीने की जेल की सजा हो सकती है। यहां तक कि दिवाली पर पटाखे खरीदने और फोड़ने पर 200 रुपये का जुर्माना और छह महीने की जेल हो सकती है।

जहां तक पटाखों से वायु प्रदूषित होने की थ्‍योरी है, दिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता के लिए केवल एक दिन पटाखा फोड़े जाने को जिम्‍मेदार नहीं ठहराया जा सकता। पड़ोसी राज्यों, विशेषकर पंजाब में पराली जलाने की वजह से यह समस्‍या विकराल रूप लेती है। अक्टूबर के मध्य में होने वाली कटाई के बाद पराली जलाने से वायू प्रदूषक कण राष्ट्रीय राजधानी की ओर आ जाते हैं जिससे दिवाली के आसपास वायु की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रदूषित हो जाती है।

दिल्ली : दिवाली पटाखों पर बैन, पर AAP कार्यकर्ता ‘नए मंत्री’ के लिए करें आतिशबाजी, निवास पर सरकारी चिन्ह "शेर" क्यों? देखिए वीडियो


दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने आदेश जारी कर पटाखे फोड़ने और इसकी बिक्री पर रोक लगाते हुए जुर्माने के साथ ही सजा का भी ऐलान किया था। हालाँकि, 20 अक्टूबर 2022 को आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता आतिशबाजी करते नजर आए हैं। आप (AAP) कार्यकर्ताओं ने यह आतिशबाजी पटेल नगर से विधायक राजकुमार आनंद को केजरीवाल सरकार में मंत्री बनाए जाने के बाद की है। जिस पर, भाजपा केजरीवाल सरकार पर हमलावर हैं।

दरअसल, धर्मांतरण विवाद और हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले राजेंद्र पाल गौतम को हटाए जाने के बाद राजकुमार आनंद को केजरीवाल सरकार में मंत्री बनाया गया है। 

आम आदमी पार्टी के मंत्री द्वारा ही अपनी सरकार के बनाए कानून की धज्जियाँ उड़ाना तो समझ आता, लेकिन अपने निवास पर सरकारी चिन्ह "शेर" के साथ "राज निवास" लिखना क्या संवैधानिक है? जिसका खुलासा "TimesNowनवभारत" के शो 'सवाल पब्लिक का' पर हुआ। एंकर द्वारा इस पर प्रश्न करने पर आप पार्टी समर्थक श्रीवास्तव ने प्रश्न को ही गाली बता महिला एंकर का अपमान किया।  देखिए वीडियो: 

अरविंद केजरीवाल के नए-नवेले मंत्री बने राजकुमार आनंद के समर्थकों द्वारा आतिशबाजी किए जाने के बाद भाजपा नेताओं ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल को सिर्फ हिंदुओं के त्योहारों में समस्या होती है। दिवाली में पटाखे जलाने से प्रदूषण फैलता है लेकिन उनके पार्टी नेताओं की आतिशबाजी से नहीं।

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता हरीश खुराना ने केजरीवाल सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा है “हम हिंदू दिवाली पर पटाखे जलाएँ तो प्रदूषण फैलेगा। तुम्हारे कार्यकर्ता मंत्री बनने पर पटाखे जलाएँ तो ठीक। वैसे मंत्री जी द्वारा जलाए पटाखे तो स्पेशल होंगे इससे प्रदूषण नहीं फैलेगा क्यों? सारे कानून वैसे हिंदुओं के त्यौहारों के लिए होते हैं।”

वहीं, भाजपा नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने ट्वीट कर कहा है, “हिंदू दिवाली पर पटाखे जलाते है तो प्रदूषण होगा। अरविंद केजरीवाल उन्हें जेल भेजेगा। लेकिन, मंत्री बनने की खुशी में अगर पटाखे जलाए जाते हैं तो उसमें से ऑक्सीजन निकलेगा। केजरीवाल तुम्हारा हिंदू विरोधी चेहरा आज फिर सामने आ गया, तुम्हें दिक्कत दिवाली से है पटाखों से नहीं।”

इसके अलावा, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा है, “प्रदूषण के कारण हिंदुओं द्वारा दिवाली पर पटाखे जलाने पर प्रतिबंध। लेकिन, अगर आप (AAP) के राजकुमार आनंद के चमचे उनके मंत्री पद का जश्न मनाने के लिए पटाखे फोड़ते हैं तो यह धर्मनिरपेक्ष प्रदूषण है? वैसे, आप के शासन वाले पंजाब में पराली जलाने से एक्यूआई 9 दिनों में 3 गुना बढ़ गया, जबकि दिल्ली में एक्यूआई घट गया है।

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दिल्ली : केजरीवाल सरकार का ऐलान : दिवाली पर पटाखे फोड़े तो होगी 6 महीने जेल, बेचने पर 3 साल की सजा

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दिल्ली : केजरीवाल सरकार का ऐलान : दिवाली पर पटाखे फोड़े तो होगी 6 महीने जेल, बेचने पर 3 साल की सजा

दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने 19 अक्टूबर 2022 को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि दिल्ली में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा रहा है। इस दौरान जो लोग पटाखों के पूर्ण प्रतिबंद्ध (उत्पादन/भंडारण/बिक्री) का उल्लंघन करते पाए जाएँगे उनके खिलाफ एक्प्लोसिव एक्ट के सेक्शन 9 B के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। जिसमें, 5 हजार रूपए का जुर्माना और 3 साल की सजा का प्रावधान है साथ ही जो व्यक्ति पटाखे जलाते हुए पाए जाएँगे उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 268 के तहत कार्रवाई की जाएगी जिसमें 200 रूपए का जुर्माना और 6 महीने की सजा का प्रावधान है।

निर्मला सीतारमण को अमेरिका में बैन कराने के लिए विज्ञापन: कांग्रेस सरकार की डील और भारत को 9900 करोड़ रूपए का नुकसान

                   आर्थिक भगोड़े रामचंद्रन विश्वनाथन ने भारत सरकार के खिलाफ अमेरिकी में दिया विज्ञापन
भारतीय मूल का अमेरिकी नागरिक रामचंद्रन विश्वनाथन भारत सरकार से इतना नाराज़ है कि उसने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को अमेरिका में बैन कराने की माँग करते हुए एक पूरे पन्ने का विज्ञापन वहाँ की अख़बार में छपवा दिया। साथ ही उसने 10 अन्य को भी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन प्रशासन से बैन करवाने की सिफारिश की है। ED (प्रवर्तन निदेशालय) रामचंद्रन विश्वनाथन को पहले ही आर्थिक अपराधी और भगोड़ा घोषित कर चुका है।

उसने इस विज्ञापन में जिन लोगों को बैन कराने की माँग की है, उनमें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन, सुप्रीम कोर्ट के जज हेमंत गुप्ता व वी रामसुब्रमन्यन के अलावा ED के डायरेक्टर, अस्सिस्टेंट डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर भी शामिल हैं। अब इस आर्थिक अपराधी ने 2016 के ‘Global Magnitsky Human Rights Accountability’ कानून को आधार बनाते हुए ये माँग की है।

ज्ञात हो, गुजरात दंगों के बाद मोदी विरोधियों ने भी अमेरिका से नरेंद्र मोदी को वीसा देने के लिए पत्र लिखा। लेकिन अमेरिका ने भी नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही अमेरिका आने का निमंत्रण देकर इन विरोधियों पर ऐसा करारा प्रहार किया जिसे ज़िंदगी भर भूल नहीं पाएंगे। इतना ही नहीं, कुछ लिबरल पत्रकार भी प्रधानमंत्री मोदी के प्रथम दौरे में माहौल ख़राब करने पहुंचे, विश्व ने इन लिबरलों की हो रही दुर्गति को भी घरों में बैठ अपने टीवी पर देखा। देखना यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति कितनी कारगर सिद्ध होती है। 

इस कानून के तहत अमेरिका की सरकार को अधिकार है कि वो किसी विदेशी अधिकारी या नेता की संपत्ति को जब्त कर सके, उस पर प्रतिबंध लगा सके और यहाँ तक कि देश में उसके घुसने पर भी रोक लगा सके। मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाते हुए ऐसा किया जा सकता है। इसी साल अगस्त में ‘Frontiers of Freedom’ नामक संस्था ने रामचंद्रन विश्वनाथन की तरफ से याचिका दायर कर के ऐसी माँग की थी और एक अख़बार में फुल पेज एड भी चलाया।

                                                अमेरिका के अख़बार में छपवाया गया विज्ञापन

निर्मला सीतारमण व इन 10 लोगों को संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘Magnitsky 11’ करार दिया था। इसमें दावा किया गया है कि मोदी सरकार ने संवैधानिक संस्थाओं को हथियार बना कर कानून के राज को बर्बाद किया है और राजनीतिक व औद्योगिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ इसका इस्तेमाल कर के भारत को निवेशकों के लिए असुरक्षित बनाया है। इसमें डराया गया है कि भारत निवेशकों के लिए खतरनाक हो चुका है और अगर आप अगले निवेशक हैं तो अगला नंबर आपका भी हो सकता है।

इन सबके बीच में UPA काल के एक करार की चर्चा करनी ज़रूरी है। वो 2004 का समय था, जब रामचंद्रन विश्वनाथन ने सैटेलाइट मल्टीमीडिया सेवाएँ देने के लिए बेंगलुरु में ‘Devas Multimedia Private Limited’ नामक एक कंपनी की स्थापना की। इसके बाप इस कंपनी ने ISRO के कमर्शियल और मार्केटिंग विभाग ‘Antrix Corporation’ के साथ एक करार पर हस्ताक्षर किए। Antrix को इसके तहत 2 सैटेलाइट बनाने थे।

जहाँ Antrix को GSAT 6 and 6A सैटेलाइट्स बनाने थे, वहीं Devas को इन कम्युनिकेशन सैटेलाइट्स के S-band ट्रांसपोंडर बनवाने थे। इससे भारतीय मोबाइल सब्सक्राइबर्स को मल्टीमीडिया सेवाएँ मिलतीं। इस डील को जर्मनी की ‘Deutsche Telekom’ के अलावा मारीशस की 3 अन्य कंपनियों ने भी समर्थन दिया था। Antrix-Devas की इस डील में भ्रष्टाचार और अनियमितताएँ सामने आई थीं। Devas पर इनसाइडर सूचनाओं को बेचने के आरोप लगे और 2G घोटाले ने आग में घी का काम किया।

2011 में डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने इस करार को रद्द कर दिया। जुलाई 2010 में ही ये निर्णय लिया जा चुका था, लेकिन अगले साल फरवरी में इसकी घोषणा हुई। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मारीशस और जर्मनी की कंपनियों ने भारत के खिलाफ शिकायत की। ये ‘Bilateral Investment Treaty (BIT)’ के तहत किया गया, जिसके अंतर्गत निवेशकों के हितों को सुरक्षित रखा जाता है। संस्था ने भारत के खिलाफ फैसला दिया।

2020 में भारत को जर्मन निवेशकों को 16 करोड़ डॉलर (1318.69 करोड़ रुपए) और मारीशस के निवेशकों को 13.2 करोड़ डॉलर (1087.92 करोड़ रुपए) देने के आदेश दिए गए। इसके अलावा ‘International Chamber of Commerce (ICC)’ ने Antrix को कहा कि वो Devas के 562.5 मिलियन डॉलर (4636.03 करोड़ रुपए) के नुकसान की भरपाई करे। यानी, भारत को कुल 1.2 बिलियन डॉलर (9890.20 करोड़ रुपए) का घाटा लगा।

इसके बाद भले ही भारत में यूपीए सरकार का दौर ख़त्म हो गया हो, लेकिन रामचंद्रन विश्वनाथन द्वारा सह-स्थापित ‘Devas Multimedia Private Limited’ ने बदला लेने के इरादे से भारत विरोधी रवैया जारी रखा। कनाडा, फ़्रांस और अमेरिका में Antrix और भारत सरकार की संपत्तियों को जब्त कराने के लिए प्रयास किए जाने लगे। कई देशों में संपत्ति जब्त भी की गई। रामचंद्रन की कंपनी को कंगाल घोषित करते हुए भंग कर दिया गया, जिससे वो और बहदाक उठा।

‘UPA के समय ही IB ने किया था आगाह, फिर भी PFI को बढ़ने दिया गया’: पूर्व मेजर जनरल का बड़ा खुलासा, कहा – इसी के दबाव में नीतीश ने छोड़ा BJP का साथ

        PFI को देश के लिए खतरा बताते हुए रक्षा विशेष्ज्ञ व पूर्व सैन्य अधिकरी एस पी सिन्हा ने बैन का स्वागत किया
केंद्र की मोदी सरकार ने 27 सितम्बर, 2022 को पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) पर देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण प्रतिबंध लगा दिया। उससे पहले देश भर में हुई छापेमारी में NIA, ATS और पुलिस बल ने सामूहिक रूप से PFI के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया था। ऑपइंडिया ने इस मुद्दे पर प्रसिद्ध रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल एस पी सिन्हा (रिटायर्ड) से बात की।

ऑपइंडिया से बात करते हुए मेजर जनरल एस पी सिन्हा (रिटायर्ड) ने कहा कि PFI की संदिग्ध हरकतों के बारे में IB ने साल 2011 में दिल्ली के विज्ञान भवन में सरकार को बाकायदा प्रेजेंटेशन दे कर आगाह किया था। सिन्हा ने दावा किया कि जानबूझ कर लगभग 11 साल इन संगठन को सिर्फ वोटबैंक के लिए पनपने दिया गया और अब ये बहुत बड़ा संगठन बन चुका था जिसकी जड़ें विदेश तक में जम चुकी थीं।

भारतीय सेना के समांतर खड़ी कर रहा था अपनी सेना

मेजर जनरल सिन्हा का दावा है कि जिस प्रकार से भारतीय फ़ौज में कई कैडर और बटालियन आदि होती हैं, उसी प्रकार PFI भी अपने संगठन को खड़ा कर रहा था। उन्होंने बताया कि PFI में भर्ती से ले का लड़ने वालों का पूरा पैटर्न सेना की नकल जैसा था। सिन्हा ने दावा किया कि इसे खड़ा करने में बहुत व्यापक फंडिंग हुई है, जिसमें देश और विदेश के लोग शामिल हैं।

नीतीश ने PFI के दबाव में छोड़ा BJP का साथ

खुद को मूलतः बिहार का बताते हुए मेजर जनरल सिन्हा ने दावा किया कि नीतीश कुमार के अचानक ही भाजपा का साथ छोड़ कर RJD से गठबंधन कर लेने के पीछे PFI का ही दबाव था। उनकी मानें तो जब से फुलवारी शरीफ के अंदर सुरक्षा एजेंसियों ने PFI के ‘मिशन 2047’ का पर्दाफाश किया था, तभी से नीतीश कुमार पर भाजपा का साथ छोड़ने के लिए काफी दबाव था। सिन्हा के मुताबिक, बिहार में हुई छापेमारी से ही PFI को लग गया था कि अगर कुछ नहीं किया गया तो पूरे देश में उसका नेटवर्क खतरे में पड़ जाएगा।
अपने दावे को पुख्ता करने के लिए नीतीश कुमार पर सवाल खड़े करते हुए मेजर जनरल सिन्हा ने सवाल किया कि बिहार के मुख्यमंत्री पाकितान की यात्रा क्यों करते हैं? उन्होंने कहा कि बिहार तो पाकिस्तान का बॉर्डर नहीं है और न ही नीतीश का ऐसा पद है कि उनका पाकिस्तान जाना जरूरी है।

PFI जैसे संगठन ही हैं ढाई मोर्चा

पूर्व CDS दिवंगत जनरल विपिन रावत के ‘ढाई मोर्चे पर लड़ाई’ वाले बयान की याद दिलाते हुए जनरल एस पी सिन्हा ने कहा कि यही PFI जैसे संगठन ही चीन और पाकिस्तान के बाद वो आधा मोर्चे हैं जो देश के अंदर ही देश के दुश्मन हैं। उन्होंने बताया कि अगर वर्तमान हालत की बात की जाए तो अभी देश इस आधे मोर्चे से लड़ने के लिए तैयार नहीं हो पाया है।

हामिद अंसारी का पद भारत माँ से बड़ा नहीं

कभी हामिद अंसारी के PFI के मंच पर दिखने के सवाल पर मेजर जनरल सिन्हा ने कहा कि वो कोई भी हों या उनका पद कितना भी बड़ा हो, लेकिन कोई भी भारत माता के कद से बड़ा नहीं हो सकता। हामिद अंसारी की जाँच की माँग करते हुए जनरल सिन्हा ने कहा कि यदि वो दोषी पाए जाएँ तो उन्हें कठोरतम दंड दिया जाए।
मेजर जनरल सिन्हा का मानना है कि देश के अंदर ऐसे सगंठन को फलने और फूलने के लिए कुछ तथाकथित सेक्युलर और वोटबैंक की लालच वाले नेता ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने मनमोहन सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी सरकार में वक्फ बोर्ड जो जो खाद-पानी मिली है, उसी का प्रतिफल ऐसे संगठनों का उभार है।                             (साभार)

सऊदी अरब द्वारा तबलीगी जमात पर प्रतिबंध लगाने से नाराज़ हुआ दारुल उलूम देवबंद, कहा – किया जा रहा बदनाम

दारुल उलूम देवबंद ने इस्लामिक मिशनरी आंदोलन तबलीगी जमात (tablighi Jamat) को ‘आतंकवाद का प्रवेश द्वार’ बताते हुए उस पर प्रतिबंध लगाने के सऊदी अरब सरकार के फैसले का विरोध किया है। देवबंद के मुख्य मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी ने सऊदी अरब से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए कहा कि इससे मुस्लिमों के लिए गलत संदेश जाएगा। 

भारत में इस्लामिक आतंकवाद के पैर पसारने के बाद से ही तब्लीग और मदरसों पर आतंकवाद को प्रोत्साहित करने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन छद्दम सेक्युलरिस्ट्स इसे इस्लाम पर हमला करने का आरोप लगाकर तुष्टिकरण की सियासत करते रहे। लेकिन अब उसी काम को सऊदी अरब द्वारा अंजाम देने से राष्ट्रप्रेमियों के आरोप को सत्य सिद्ध कर दिया है। अब भारत में पल रहे छद्दम सेक्युलरिस्ट्स क्यों चुप हैं? देवबंद के सिवाए किसी ओर से कोई विरोध नहीं हो रहा, क्यों?  कहाँ गए समस्त कट्टरपंथी? क्या सऊदी अरब द्वारा तब्लीग पर प्रतिबन्ध लगाने से इन छद्दमों के इस्लाम पर खतरा नज़र नहीं आ रहा?  

यह पहली बार है जब देवबंद के इस्लामिक मदरसा ने सऊदी सरकार की खुलेआम निंदा की है। नोमानी ने तबलीगी जमात पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है। साथ ही दावा किया कि जमात दीन (विश्वास) फैलाने का काम करने का काम करता है। इसके साथ ही देवबंद ने सऊदी सरकार के फैसले को पश्चिमी देशों की साजिश करार दिया है। उसका आरोप है कि जमात को बदनाम किया जा रहा है।

वहीं इस मामले में दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मुख्यालय ने इस मामले में कहा है कि सऊदी का निर्णय प्रभावशाली पश्चिमी ताकतों के द्वारा लिया गया है, जो कि रियाद की मुस्लिम उम्मा से सदियों पुराने जुड़ाव को खत्म करना चाहता है। तब्लीगी जमात के प्रवक्ता समीरुद्दीन कासमी ने अपने सदस्यों का बचाव किया और कहा कि हमारा आतंकवाद से कोई सम्बन्ध नहीं है।

100 पहले आया अस्तित्व में

देवबंद के मोहतमिम अब्दुल कासिम नोमानी का कहना है कि दारुल उलूम के उस्ताद रहे हजरत मौलाना हसन के शिष्य मौलाना मोहम्मद इलयास ने 100 साल पहले तबलीगी जमात की स्थापना की थी।
सऊदी सरकार का फैसला 
11 दिसंबर 2021 को सऊदी अरब ने तबलीगी जमात और दाबा को ‘आतंकवाद का द्वार’ करार देते हुए अपने यहाँ की मस्जिदों के मौलानाओं को शुक्रवार को दिए जाने वाले उपदेश के दौरान इन दोनों संगठनों के बारे में जनता को चेताने को कहा था। सऊदी के इस्लामिक मंत्रालय ने तबलीगी जमात को समाज के लिए खतरा माना है।

निजामुद्दीन मरकज व तबलीगी ज़मात पर लगे पूर्ण प्रतिबन्ध : डॉ सुरेन्द्र जैन

नई दिल्ली। अप्रेल 05, 2020। तबलीगी जमात व उसके निजामुद्दीन मरकज की देश व्यापी करतूतों के कारण सम्पूर्ण भारत आज गम्भीर संकट में है. विश्व हिन्दू परिषद् ने इसे इस्लामिक कट्टरपंथी व आतंक का पोषक बताते हुए इस पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने की मांग की है. विहिप के केन्द्रीय संयुक्त महा-सचिव डॉ सुरेन्द्र जैन ने कहा है कि हम सभी भारतीयों का जीवन संकट में डालने वाले तब्लीकी जमात के आर्थिक श्रोतों का पता लगाकर उसके बेंक खातों, कार्यालयों व कार्यकलापों पर अबिलम्ब विराम लगाया जाए.  
        उन्होंने कहा कि 8 दिन के लाकडाउन के कठिन परिश्रम के बाद पूरा देश राहत की सांस ले रहा था। कोरोना पीड़ितों की वृद्धि दर मात्र 2.8 रह गई थी। तभी 30 मार्च को मरकज निजामुद्दीन में एक भयंकर विस्फोट हुआ। वहां से 2300 से अधिक तब्लीगियों को निकाला गया जिनमें से 500 कोरोना पीड़ित थे और 1800 को क्वारंटाइन करना पड़ा। 9 हजार से अधिक तबलीगी  पूरे देश में कोरोना वायरस फैला रहे हैं। 31 तारीख को वृद्धि दर अचानक बढ़कर 43.02% हो गई। सारा देश सकते में आ गया। मस्जिदों मदरसों में छिपे हुए देशी-विदेशी संक्रमित मौलवियों की धरपकड़ होने लगी। इनके कारण सामुदायिक संक्रमण की संभावनाएं बढ़ गई। 14-15 मार्च को मुंबई में 2 से 3 लाख तबलीगीयों का इज्तेमा होना वाला था। विहिप के विरोध के कारण उसे रोक दिया गया। अगर वह हो जाता तो पहले से ही कोरोना में नंबर एक पर महाराष्ट्र के साथ पूरे देश की स्थिति क्या होती इसकी आज कल्पना भी नहीं की जा सकती !
        डॉ जैन ने कहा कि अपने इस घोर अपराध के लिए शर्मिंदगी महसूस करने की जगह इन संक्रमित मौलवियों को छुपाने के लिए पुलिस-कर्मियों व स्वास्थ्य कर्मियों को देश की पचासियों बस्तियों में दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। इनकी ही जान बचाने गए डॉक्टरों पर हमले किए गए। क्वॉरेंटाइन किए गए तब्लीगी नर्सों के साथ अश्लील हरकतें करने लगे और डॉक्टरों पर थूकने लगे। नरेला के क्वॉरेंटाइन सेंटर में तो सेना के चिकित्सकों और सैनिकों को ही बुलाना पड़ा।  केवल निजामुद्दीन में ही नहीं, देश भर में मौलवियों ने मुस्लिम समाज को भड़काने वाले भाषण भी दिए। बंगाल के एक मौलवी अब्बास सिद्दीकी ने तो नमाजियों को भड़काते हुए यहां तक कह दिया कि अल्लाह ऐसा वायरस भेजें जिससे 50 करोड़ हिंदू खत्म हो जाए। 
        विहिप के संयुक्त महा सचिव ने यह भी कहा कि कोरोना पीड़ित व्यक्तियों की संख्या में से आधे से अधिक संख्या तबलीगी, मौलवी या उनसे संक्रमित लोगों की है। संपूर्ण देश तब्लीगियों और उनसे प्रभावित कट्टरपंथियों के इस व्यवहार से बहुत आश्चर्यचकित व खिन्न है। ऐसा लग रहा है कि कोरोना संक्रमण को हथियार के रूप में प्रयोग कर इनमें आत्मघाती बम बनने की होड़ लगी है.  
         1926 में निजामुद्दीन से प्रारंभ तबलीग, हरियाणा के मेवात में धर्मांतरण की सफलता से उत्साहित होकर आज विश्व के 80 से अधिक देशों में कम से कम 8 करोड़ लोगों को अपनी कुत्सित मानसिकता से संक्रमित कर चुका है। आज इसके निजामुद्दीन मुख्यालय से प्रशिक्षित होकर लाखों तबलीगी संपूर्ण विश्व में कट्टरता व आतंक फैला रहे हैं। विश्व के अधिकांश आतंकी संगठनों को प्रारंभ करने वाले भी तबलीग से जुड़े रहे हैं। अमेरिकी ट्रेड सेंटर के हत्यारों से लेकर गोधरा में 59 हिंदुओं को जिंदा जलाने वालों तक के सम्बन्ध मरकज से रहे हैं।
विहिप की मांग है कि ;
1.     भारत में तब्लीगियों और इज्तिमा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
2.     निजामुद्दीन मरकज के भवन और इससे जुड़े बैंक खातों को अविलंब सील किया जाए।
3.     इन के आर्थिक स्रोतों का पता लगाकर इन को बंद कर देना चाहिए।
4.     इज्तेमा में भाग लेने वाले विदेशियों की सूची विदेश व गृह मंत्रालय को देकर क्या मरकज ने इसकी स्वीकृति ली थी ?
टूरिस्ट वीजा पर जेहादी प्रशिक्षण व कट्टर इस्लाम का प्रचार करने वाले मौलवीयों पर निगरानी क्यों नहीं रखी गई ? संबंधित दोषी अधिकारियों पर भी विभागीय कार्यवाही होनी चाहिए।

जारीकर्ता
विनोद बंसल
राष्ट्रीय प्रवक्ता, विश्व हिंदू परिषद

जमात-ए-इस्लामी प्रतिबंध

केंद्र सरकार की ओर से गठित गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिकरण (यूएपीटी) 19 जून से यहां तीन दिनों के लिए बैठकों का आयोजन करेगा. केंद्र ने इस अधिकरण का गठन यह निर्णय लेने के लिए किया है कि जमात-ए-इस्लामी को गैरकानूनी संगठन घोषित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं या नहीं.
एक आधिकारिक प्रवक्ता ने यहां बताया कि यूएपीटी 19, 20 और 21 जून को श्रीनगर के उच्च न्यायालय परिसर में बैठकों का आयोजन करेगा. उन्होंने बताया कि अधिकरण की अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति चंद्र शेखर करेंगे.
प्रवक्ता ने बताया कि जो लोग सबूत देने के इच्छुक हों वे नयी दिल्ली में दिल्ली उच्च न्यायालय के गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिकरण के रजिस्ट्रार के समक्ष अपना हलफनामा दायर कर सकते हैं और पूछताछ के लिए अधिकरण के समक्ष उन्हें उक्त तिथियों पर व्यक्तिगत तौर पर मौजूद रहना होगा.

उत्तराखंड भाजपा मीडिया रिलेशन : बैन की जाए लव जिहाद को प्रमोट करती फिल्म केदारनाथ

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
7 दिसंबर को रिलीज होनी वाली फिल्म केदारनाथ विवादों में फंस गई है। ताजा मामला उत्तराखंड की बीजेपी मीडिया रिलेशन टीम से जुड़ा है। राज्य में भाजपा की मीडिया रिलेशंस टीम से जुड़े अजेंद्र अजय ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी को नवम्बर 10 को लिखा कि सबसे खराब मानवीय आपदाओं में से एक की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म हिन्दुओं की भावनाओं का मजाक बनाती है। एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में अजय ने कहा कि सबसे दुर्भाग्य पूर्ण मानव त्रासदी के बैकड्रॉप में डायरेक्टर अभिषेक कपूर ने लव स्टोरी बनाकर हिन्दू भावनाओं का मजाक उड़ाया है।
लव जिहाद बढ़ाती है फिल्म : अजय ने कहा कि फिल्म के जरिए न सिर्फ आस्था अाहत हो रही है बल्कि लव जिहाद को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। अजय ने बोर्ड से फिल्म पर बैन लगाने की मांग की है। उन्होंने फिल्म के रिलीज होने की कंडीशन में बड़े पैमाने पर विरोध करने की चेतावनी दी है। 
पहले पुजारियों ने किया विरोध : फिल्म टीजर लॉन्च के बाद केदारनाथ तीर्थ के पुरोहितों ने इस फिल्म को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी। पंडितों का कहना है कि यह फिल्म हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है इसलिए इस पर बैन लगाया जाना चाहिए।
शूटिंग के वक्त भी हुआ था विरोध : हिंदुस्तान टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक केदारनाथ में पुजारियों के संगठन केदार सभा के चेयरमैन विनोद शुक्ला का कहना है- अगर फिल्म को बैन नहीं किया गया तो हम आंदोलन करेंगे। हमें पता चला है कि यह फिल्म लव जिहाद को बढ़ावा देती है और इससे हिन्दू भावनाएं आहत हो रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक शुक्ला ने कहा कि पुजारियों ने उस वक्त भी कड़ा विरोध किया था, जब केदारनाथ के पास इस फिल्म के अश्लील गाने की शूटिंग की गई थी।
विवादों में ‘केदारनाथ’ पर प्रतिबंध की मांग, Love Jihad को बढ़ावा देने का फिल्म पर आरोप
बैकग्राउंड में बोल्ड सीन पर आपत्ति : रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ लोगों ने उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में केदारनाथ फिल्म का विरोध किया था। वैसे फिल्म का विरोध तो तभी से शुरू हो गया था, जब फिल्म के पोस्टर रिलीज हुए थे। स्थानीय नेता अजेंद्र अजय ने अपने एक ट्वीट में सीबीएफसी (सेंसर बोर्ड) के चेयरमैन प्रसून जोशी से इस फिल्म पर बैन लगाने की मांग की है। अजय ने ट्वीट में लिखा- फिल्म में कपल को बाढ़ के उस बैकग्राउंड में बोल्ड सीन करते दिखाया गया है, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे। फिल्म के टीजर में मुख्य कलाकार सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान के बीच एक चुंबन दृश्य दिखाया गया है और इसके पोस्टरों में टैगलाइन है ‘लव इज ए पिलग्रिमेज’। 
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अजय ने फिल्म के पोस्टर्स पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि इसमें एक मुस्लिम लड़के को हिंदू लड़की को पीठ पर ले जाते दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि यह टेक्निकली गलत है क्योंकि केदारनाथ के रास्ते पर आप किसी भी मुस्लिम शख्स को ढुलाई करते नहीं देखेंगे।
टैगलाइन को लेकर भी हो रहा विरोध : फिल्म की टैगलाइन 'Love is Pilgrimage' पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है। अजय ने कहा कि सारा अली खान इस पोस्टर को इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते वक्त एक कदम और आगे निकल गईं जब उन्होंने लिखा- "No Tragedy, No Wrath of Nature, No Act of God Can Defeat the Power of Love.’।
'केदारनाथ' 2013 में आई केदारनाथ आपदा पर बेस्ड एक लव स्टोरी है। अभिषेक कपूर के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान लीड रोल में हैं।