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'पिछले 9 सालों से मेरे खिलाफ षड़यंत्र रचा जा रहा है' : नायक गोबिंदा

बॉलीवुड एक्टर गोविंदा ने उनकी फिल्म ‘रंगीला राजा’ में सेंसर बोर्ड द्वारा कैंची चलाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि फिल्म उद्योग में लोगों का एक समूह है, जो उनकी फिल्मों को रिलीज न होने देने के लिए षड़यंत्र रच रहा है. केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा 20 कट लगाए जाने की खबर के बाद संवाददाता सम्मेलन में गोविंदा ने यह बात कही. इस फिल्म का निर्माण सीबीएफसी के पूर्व प्रमुख और फिल्मकार पहलाज निहलानी ने किया है. गोविंदा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह पिछले 9 साल से हो रहा है, यहां फिल्म उद्योग में लोगों का एक समूह मेरे खिलाफ षड़यंत्र रच रहा है और मेरी फिल्मों को किसी अच्छे मंच पर रिलीज नहीं होने दे रहा है.’’
उन्होंने कहा ‘‘या तो मेरी फिल्में रिलीज न हों या फिर उन्हें अच्छे थिएटर या स्क्रीन न मिलें. इसका ताजा उदाहरण ‘फ्राइडे’ है जो कुछ ही सप्ताह पहले रिलीज हुई. इसे मीडिया से बेहतर रिव्यू मिला, लेकिन फिल्म थिएटरों से हटा ली गई.’’ हाल ही में सेंसर बोर्ड के पूर्व प्रमुख और फिल्मकार पहलाज निहलानी ने बंबई उच्च न्यायालय का रुख कर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के एक आदेश को चुनौती दी. सीबीएफसी यानी सेंसर बोर्ड ने अपने इस आदेश में निहलानी की जल्द ही रिलीज होने जा रही फिल्म ‘रंगीला राजा’ से 20 दृश्य हटाने को कहा था.
निहलानी ने अपनी याचिका में कहा कि सेंसर बोर्ड का सुझाव सही ठहराने लायक नहीं है, क्योंकि उनका मानना है कि फिल्म किसी भी तरह से अश्लील नहीं है. फिल्मकार ने सेंसर बोर्ड के मौजूदा अध्यक्ष प्रसून जोशी पर भी निशाना साधा और कहा कि वह ‘‘राजनीतिक तौर पर प्रेरित हैं’’. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि जब एक फिल्म को प्रमाणन के लिए बोर्ड के पास भेजा जाता है तो बोर्ड की स्क्रीनिंग कमेटी ने फैसला करने में 21 दिन का वक्त लगता है, लेकिन इस मामले में फैसला करने में उसे 40 दिन लग गए. बीते दो नवंबर को कमिटी ने आदेश पारित कर फिल्म से कई दृश्य हटाने को कहा था. 
सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर निहलानी का कार्यकाल काफी विवादों में रहा था. कई फिल्मकारों ने उन पर आरोप लगाए थे कि वह उनकी फिल्मों में मनमाने तरीके से दृश्य हटाने को कहते थे. इस विवाद के बाद निहलानी को पद से हटाकर प्रसून जोशी को सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष बना दिया गया था. ‘रंगीला राजा’ के जरिए करीब 25 साल बाद निहलानी और गोविंदा साथ काम कर रहे हैं. इससे पहले पहलाज निहलानी की फिल्म 'इल्जाम' से अपने अभिनय की शुरुआत करने वाले गोविंदा ने उनके साथ 'शोला और शबनम' और 'आंखें' में काम किया है और दोनों ही फिल्में सुपरहिट रहीं. 

उत्तराखंड भाजपा मीडिया रिलेशन : बैन की जाए लव जिहाद को प्रमोट करती फिल्म केदारनाथ

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
7 दिसंबर को रिलीज होनी वाली फिल्म केदारनाथ विवादों में फंस गई है। ताजा मामला उत्तराखंड की बीजेपी मीडिया रिलेशन टीम से जुड़ा है। राज्य में भाजपा की मीडिया रिलेशंस टीम से जुड़े अजेंद्र अजय ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी को नवम्बर 10 को लिखा कि सबसे खराब मानवीय आपदाओं में से एक की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म हिन्दुओं की भावनाओं का मजाक बनाती है। एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में अजय ने कहा कि सबसे दुर्भाग्य पूर्ण मानव त्रासदी के बैकड्रॉप में डायरेक्टर अभिषेक कपूर ने लव स्टोरी बनाकर हिन्दू भावनाओं का मजाक उड़ाया है।
लव जिहाद बढ़ाती है फिल्म : अजय ने कहा कि फिल्म के जरिए न सिर्फ आस्था अाहत हो रही है बल्कि लव जिहाद को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। अजय ने बोर्ड से फिल्म पर बैन लगाने की मांग की है। उन्होंने फिल्म के रिलीज होने की कंडीशन में बड़े पैमाने पर विरोध करने की चेतावनी दी है। 
पहले पुजारियों ने किया विरोध : फिल्म टीजर लॉन्च के बाद केदारनाथ तीर्थ के पुरोहितों ने इस फिल्म को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी। पंडितों का कहना है कि यह फिल्म हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है इसलिए इस पर बैन लगाया जाना चाहिए।
शूटिंग के वक्त भी हुआ था विरोध : हिंदुस्तान टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक केदारनाथ में पुजारियों के संगठन केदार सभा के चेयरमैन विनोद शुक्ला का कहना है- अगर फिल्म को बैन नहीं किया गया तो हम आंदोलन करेंगे। हमें पता चला है कि यह फिल्म लव जिहाद को बढ़ावा देती है और इससे हिन्दू भावनाएं आहत हो रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक शुक्ला ने कहा कि पुजारियों ने उस वक्त भी कड़ा विरोध किया था, जब केदारनाथ के पास इस फिल्म के अश्लील गाने की शूटिंग की गई थी।
विवादों में ‘केदारनाथ’ पर प्रतिबंध की मांग, Love Jihad को बढ़ावा देने का फिल्म पर आरोप
बैकग्राउंड में बोल्ड सीन पर आपत्ति : रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ लोगों ने उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में केदारनाथ फिल्म का विरोध किया था। वैसे फिल्म का विरोध तो तभी से शुरू हो गया था, जब फिल्म के पोस्टर रिलीज हुए थे। स्थानीय नेता अजेंद्र अजय ने अपने एक ट्वीट में सीबीएफसी (सेंसर बोर्ड) के चेयरमैन प्रसून जोशी से इस फिल्म पर बैन लगाने की मांग की है। अजय ने ट्वीट में लिखा- फिल्म में कपल को बाढ़ के उस बैकग्राउंड में बोल्ड सीन करते दिखाया गया है, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे। फिल्म के टीजर में मुख्य कलाकार सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान के बीच एक चुंबन दृश्य दिखाया गया है और इसके पोस्टरों में टैगलाइन है ‘लव इज ए पिलग्रिमेज’। 
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अजय ने फिल्म के पोस्टर्स पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि इसमें एक मुस्लिम लड़के को हिंदू लड़की को पीठ पर ले जाते दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि यह टेक्निकली गलत है क्योंकि केदारनाथ के रास्ते पर आप किसी भी मुस्लिम शख्स को ढुलाई करते नहीं देखेंगे।
टैगलाइन को लेकर भी हो रहा विरोध : फिल्म की टैगलाइन 'Love is Pilgrimage' पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है। अजय ने कहा कि सारा अली खान इस पोस्टर को इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते वक्त एक कदम और आगे निकल गईं जब उन्होंने लिखा- "No Tragedy, No Wrath of Nature, No Act of God Can Defeat the Power of Love.’।
'केदारनाथ' 2013 में आई केदारनाथ आपदा पर बेस्ड एक लव स्टोरी है। अभिषेक कपूर के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान लीड रोल में हैं।