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वामपंथी और विपक्षी दल कैसे कर रहे छात्रों के आंदोलन का इस्तेमाल? विदेशी फंडिंग और खालिस्तानी कनेक्शन पर भी सवाल

CAA प्रोटेस्ट से लेकर अब NEET पेपर लीक तक विपक्ष ने जितने भी धरने/प्रदर्शन हुए हैं सभी अपने असली मुद्दे से भटके हैं। दूसरे विपक्ष का किसी न किसी बहाने संसद को बाधित करना रहा है। तीसरे, अगर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मुग़ल आक्रांताओं के गुणगान की बजाए उनकी असलियत पुस्तकों में लाई गयी होती कोई प्रधान का इस्तीफा नहीं मांगता। सभी धरनों में भोजन मिलना पहली बार देखा गया है। जो इस बात को साबित करता है कि हमारा विपक्ष भारत विरोधियों के हाथों बिका हुआ है। जनता समझती है ये नेता जनता के हित में काम कर रहे हैं जबकि संसद से लेकर सड़क तक जो भी उपद्रव हो रहा है सब विदेशी फंडिंग से हो रहा है। जिसका तक़रीबन हर चैनल पर जिक्र किया जा रहा है। चुनावों में जनता से मदद मांगी जाती है लेकिन धरनों में भारत विरोधियों की शरण में, ये क्या तमाशा है?     
राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर एक बार फिर तमाशे, उपद्रव और घिनौनी राजनीति का गवाह बन रहा है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम के शुरू हुए एक व्यंग के मंच और तथाकथित छात्र संगठन के बैनर तले जो कुछ भी पिछले दिनों से रचा जा रहा है, उसने देश के जागरूक नागरिकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

परीक्षा सुधारों, रोजगार और छात्रों के निष्पक्ष भविष्य की जिन माँगों को लेकर यह आंदोलन शुरू होने का दावा किया गया था, वह असली मुद्दा अब बहुत पीछे छूट चुका है। https://www.facebook.com/share/r/1F4fka4oWh/

आज जंतर-मंतर का मंच छात्रों की समस्याओं का समाधान खोजने की जगह विपक्षी दलों का ‘राजनीतिक लॉन्चपैड’ और ‘मोदी विरोधी बैटलग्राउंड’ बन गया है। लोकतंत्र में जनता द्वारा बार-बार खारिज की जा चुकी और अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने की हताशा में झुलस रही कॉन्ग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) जैसी पार्टियाँ इस मंच का इस्तेमाल केवल अपनी-अपनी राजनीति चमकाने के लिए कर रही हैं।

इतना ही नहीं, बांग्लादेश, कतर से लेकर खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) जैसे भारत विरोधी तत्वों का इस आंदोलन में दिलचस्पी लेना और वित्तीय सहायता फंडिंग का ऐलान करना यह साफ दिखाता है कि इस पूरे ड्रामे के तार कितने खतरनाक और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।

पृष्ठभूमि और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का उभार: व्यंग्य से शुरू हुआ खेल अब अराजकता का औजार

शुरुआत में जिस ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को सोशल मीडिया पर एक मजाकिया या व्यंग्यात्मक ग्रुप की तरह पेश किया गया था, वह रातों-रात विरोध प्रदर्शन का चेहरा कैसे बन गई? इस संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके सहयोगियों ने जब NEET परीक्षा में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाकर जंतर-मंतर पर धरना देना शुरू किया, तो पूरे देश के आम छात्रों को लगा कि शायद यह उनकी आवाज है। लेकिन महज कुछ ही दिनों में इस पूरे आंदोलन की दिशा मोड़ दी गई।

छात्रों के जायज सवालों को किनारे करके मंच से नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ भड़काऊ नारेबाजी, राजनीतिक भाषणबाजी और व्यवस्था को अपाहिज बनाने की धमकियाँ दी जाने लगीं। व्यंग्य का चोला पहनकर उतरी CJP दरअसल वामपंथी इकोसिस्टम और मोदी विरोधी लॉबी का ही नया अवतार बनकर उभरी है, जिसका मकसद केवल देश में अशांति और अस्थिरता का माहौल बनाना है।

जो छात्र केवल निष्पक्ष परीक्षाओं और रोजगार के अवसर तलाश रहे थे, उन्हें समझने ही नहीं दिया गया कि उनके पीछे से एक सुनियोजित राजनीतिक और विचारधारात्मक एजेंडा चलाया जा रहा है।

राजनीति चमकाने की होड़: कॉन्ग्रेस, आप, सपा और TMC ने छात्रों के मंच पर डाला डेरा

जैसे ही जंतर-मंतर पर भीड़ जुटने लगी, वैसे ही अपनी खोई साख तलाश रहे विपक्षी दलों ने इस मौके को भुनाने में जरा भी देर नहीं की। शिक्षा और छात्रों के हित का ढोंग रचने वाली राजनीतिक पार्टियों में इस बात की होड़ मच गई कि कौन जंतर-मंतर जाकर CJP का सबसे बड़ा हमदर्द दिखेगा।
कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी और उनके तमाम नेताओं ने संसद में काले कपड़े पहनने से लेकर सड़कों पर प्रदर्शन का नाटक करके इस मुद्दे को तुरंत भुनाने की कोशिश की और इसे अपनी डूबती नैया पार लगाने का जरिया बना लिया।

इसी होड़ में समाजवादी पार्टी भी पूरे तामझाम के साथ कूद पड़ी। मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव खुद जंतर-मंतर पहुँचीं और CJP के प्रदर्शनकारियों के बीच बैठकर अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई।

यही नहीं अखिलेश यादव और सपा के अन्य बड़े नेताओं से लेकर सपा छात्र सभा के कार्यकर्ताओं तक, पूरी पार्टी ने CJP के इस आंदोलन को खुला राजनीतिक और नैतिक समर्थन देने का ऐलान कर दिया।

जो समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में लगातार चुनावों में हार के बाद अपनी जमीन तलाश रही है, उसने छात्रों के इस मंच का इस्तेमाल केवल केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोलने और अपनी पार्टी का राजनीतिक कद चमकाने के लिए किया।

उधर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल और उनके नेता खुद को चमकाने सीधे जंतर-मंतर के मंच पर पहुँच गए। जो आम आदमी पार्टी दिल्ली के युवाओं को रोजगार देने और अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने में नाकाम रही, वही आज छात्रों के कंधे पर हाथ रखकर सरकार को घेरने की नाकाम कोशिश कर रही है।

वहीं दूसरी ओर बंगाल में चुनावी हिंसा पर मौन रहने वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और महुआ मोइत्रा जैसी नेताओं ने भी इस मंच का पूरा इस्तेमाल अपनी राजनीति चमकाने के लिए किया।

इन तमाम राजनीतिक दलों के बड़े-बड़े चेहरों का अचानक जंतर-मंतर पर जमावड़ा होना यह साबित करता है कि इन्हें छात्रों के भविष्य की जरा भी चिंता नहीं है, बल्कि इन्हें केवल अपने चुनाव के लिए एक गरमा-गरम मुद्दा चाहिए।

भटक गया असली मुद्दा: छात्रों का दर्द पीछे छूटा, एजेंडा हावी हुआ

जो छात्र दूर-दराज के इलाकों से इस उम्मीद में दिल्ली आए थे कि उनकी परीक्षाओं की निष्पक्षता, NEET लीक मामलों और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर सरकार से गंभीर संवाद होगा, वे आज खुद को पूरी तरह ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

राजनीतिक नेताओं की एंट्री होते ही पूरा ध्यान छात्रों की वास्तविक माँगों से हटकर अरविंद केजरीवाल के भाषणों, राहुल गाँधी के आरोपों और ममता बनर्जी के समर्थनों पर केंद्रित हो गया। मंच से अब परीक्षा प्रणाली में सुधार की नहीं, बल्कि केंद्र सरकार को उखाड़ फेंकने, संसद घेरने और प्रशासनिक व्यवस्था को ठप करने की धमकियाँ दी जा रही हैं।

वास्तविक और निर्दोष छात्र अब इस भीड़ में पूरी तरह गायब हो चुके हैं और उनकी जगह पेशेवर प्रदर्शनकारियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के नए चेहरों ने ले ली है। छात्रों के कंधों को ढाल बनाकर अपने राजनीतिक मंसूबों को पूरा करना और असली मुद्दों को दबा देना ही इन राजनीतिक आकाओं का असली मकसद बन चुका है।

लाइमलाइट बटोरने की होड़: छात्रों के दर्द पर अभिनय करते फिल्मी कलाकार

राजनीतिक दलों के साथ-साथ इस आंदोलन में खुद को ‘क्रांतिकारी’ दिखाने और खोई हुई लाइमलाइट वापस पाने की होड़ फिल्मी गलियारों के कुछ चुनिंदा चेहरों में भी साफ देखी जा रही है।
स्वरा भास्कर, इमरान खान,हुमा कुरैशी, सोनाक्षी सिन्हा और प्रकाश राज जैसे अभिनेता, जिनका फिल्मी करियर लंबे समय से ढलान पर है या जो मुख्यधारा के सिनेमा से लगभग गायब हो चुके हैं, वे अब जंतर-मंतर के इस मंच को अपने पब्लिसिटी स्टंट का जरिया बना रहे हैं।
सोशल मीडिया पर लंबे-चौड़े ज्ञान देने वाले ये कलाकार अब छात्रों के हक की आड़ में अपनी ढहती साख को बचाने की नाकाम कोशिशों में जुटे हैं। प्रकाश राज और स्वरा भास्कर जैसे चेहरे, जो हर सरकारी नीति के विरोध में कूदने के लिए जाने जाते हैं, वे एक बार फिर ‘मोदी विरोध’ के अपने पुराने एजेंडे को चमकाने आ गए हैं।
वहीं लंबे समय से बड़े पर्दे से दूर इमरान खान और हाल ही में सुर्खियों में रहने की कोशिश कर रहीं सोनाक्षी सिन्हा जैसे लोग भी छात्रों की वास्तविक समस्याओं से दूर, केवल कैमरे के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर खुद को ‘जनता का मसीहा’ साबित करने का खेल खेल रहे हैं।

विदेश से फंडिंग और ऑनलाइन सप्लाई: कतर, बांग्लादेश और खालिस्तानी एंगल

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम पर चल रहे इस तथाकथित ‘गरीब और पीड़ित छात्र आंदोलन’ का असली चेहरा तब बेनकाब हुआ, जब इसके पीछे चल रहे संदिग्ध फंडिंग और सप्लाई नेटवर्क की परतें खुलीं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जंतर-मंतर पर विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के लिए बांग्लादेश और कतर जैसे अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के संदिग्ध खातों से भारी मात्रा में ऑनलाइन खाना और महंगे फूड डिलीवरी ऑर्डर्स भेजे गए। सवाल उठता है कि विदेशों में बैठे इन आकाओं को भारत के छात्रों के खाने-पीने की इतनी चिंता क्यों अचानक सताने लगी?

आंदोलन की देशविरोधी साँठगाँठ उस समय पूरी तरह उजागर हो गई जब अमेरिका में बैठे प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) ने CJP आंदोलनकारियों के लिए 1 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता देने का खुला ऐलान कर दिया। यह सीधे तौर पर भारत में खालिस्तानी एजेंडे को घुसाने और युवाओं को भड़काकर हिंसा फैलाने की अंतर्राष्ट्रीय साजिश का हिस्सा है।

यह साबित करने के लिए काफी है कि यह आंदोलन केवल भारत के अंदर की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत विरोधी वैश्विक ताकतें इसे ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) की टूलकिट के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं।

हिंसा, बैरिकेडिंग तोड़ना और पुलिस पर हमला: ‘बांग्लादेशी मॉडल’ की खतरनाक पुनरावृत्ति

जंतर-मंतर पर हो रही गतिविधियों की तुलना अगर आप पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुए तख्तापलट से करेंगे, तो आपको एक जैसा पैटर्न साफ दिखाई देगा। बांग्लादेश में भी इसी तरह छात्रों के आंदोलन की आड़ में उग्र तत्वों ने हिंसा फैलाकर चुनी हुई सरकार को निशाना बनाया था और अराजकता पैदा की थी।

जंतर-मंतर पर CJP के उपद्रवियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का नकाब उतारकर जब ‘चलो संसद’ का आह्वान किया, तो दिल्ली पुलिस के लगाए बैरिकेड्स को तोड़ा गया और कानून-व्यवस्था में तैनात सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी और बोतलें फेंकी गईं।

इस हिंसा में उत्तरी दिल्ली के DCP, पंजाबी बाग के ACP समेत 118 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। जब-जब पुलिस और प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कानून के मुताबिक कदम उठाते हैं, तब-तब यह पूरा राजनीतिक इकोसिस्टम ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने लगता है।

ऑन-ड्यूटी जवानों और महिला पुलिसकर्मियों का खून बहाने वाले उग्र तत्वों के बचाव में उतरना यह दिखाता है कि इस आंदोलन का उद्देश्य संवाद नहीं, बल्कि केवल हिंसा और टकराव है।

मोदी विरोध की आड़ में देश को अस्थिर करने का टूलकिट: युवाओं को होना होगा सावधान

शाहीन बाग से लेकर लाल किले पर हिंसा वाले किसान आंदोलन और अब जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम से जारी यह प्रदर्शन सब एक ही सिक्के के पहलू हैं। जब-जब देश में मोदी सरकार के खिलाफ जनता का जनादेश नहीं मिलता, तब-तब ये हताश ताकतें सड़कों पर अराजकता का माहौल बनाकर देश को बंधक बनाने की रणनीति अपनाती हैं।

निजी स्वार्थों से प्रेरित राजनीतिक दल अपनी चमक खो चुकी राजनीति को चमकाने के लिए मासूम छात्रों को ह्यूमन शील्ड बना रहे हैं। देश का युवा अगर आज भी यह नहीं समझ पाया कि परीक्षा सुधार के नाम पर उसके कंधों का इस्तेमाल खालिस्तानी समर्थकों, विदेशी फंडिंग एजेंसियों और मोदी-विरोधी नेताओं द्वारा देश विरोधी मंसूबों को पूरा करने के लिए किया जा रहा है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होगा।

देश के छात्रों को इस राजनीतिक टूलकिट से खुद को तुरंत अलग कर लेना चाहिए ताकि उनका भविष्य, उनकी मेहनत और देश की सुरक्षा तीनों सुरक्षित रह सकें।

पेपर लीक पर PM मोदी का बड़ा ऐलान, फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई

इन सब के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट ऐलान किया है कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द और सख्त सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा।

PM मोदी ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर कहा कि युवाओं का कल्याण और उनका भविष्य हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में तुरंत आवश्यक कदम उठाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रधानमंत्री ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। सरकार विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा के लिए लगातार फैसले ले रही है।

पीएम मोदी ने कहा कि पेपर लीक के मामलों में शामिल लोगों को जल्द से जल्द सख्त सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएँगे। इससे मामलों का जल्दी निपटारा होगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

मोदी ने अपने संदेश में साफ कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगी।

उन्होंने आगे कहा कि संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। सरकार चाहती है कि छात्रों का भरोसा परीक्षा व्यवस्था पर बना रहे।

यह स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति नहीं है, रफाह के लिए आंसू बहाने वालों को वहां छोड़ आना चाहिए; Bollywood गद्दारों की जमात बन गया है

नुसरत भरुचा 
सुभाष चन्द्र

फिल्म ‘लव, सेक्स और धोखा’ (2010) से चर्चा में आईं अभिनेत्री नुसरत भरुचा ने भी कई अन्य सेलेब्स की तरह फिलिस्तीन के लिए इंस्टाग्राम स्टोरी लगाई है। ‘All Eyes On Rafah’ वाली इस इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए गाजा पट्टी में स्थित रफ़ा में इजरायल के हमले की निंदा की गई है। हम यहाँ नुसरत भरुचा का जिक्र इसीलिए कर रहे हैं, क्योंकि जब अक्टूबर 2023 में फिलिस्तीन स्थित हमास के आतंकियों ने इजरायल में घुस कर 1100 निर्दोषों को मार डाला था और यहूदी मुल्क पर 5000 रॉकेटों से हमला किया गया था, तब वो इजरायल में ही थीं।

लेखक 
चर्चित Youtuber 
अभिनेत्री नुसरत भरूचा, एक दाउदी बोहरा मुस्लिम, उसी म्यूजिक फेस्टिवल में थी जहां हमास ने इज़रायल में बर्बर हमला किया था जिसमें 1400 निर्दोष इज़राइली नागरिक मारे गए थे और यह लड़की 2 दिन तहखाने में छुपी रही। इसके परिवार ने भारत सरकार से मदद मांगी और इज़रायल ने इसे इसे ढूंढ कर भारत सकुशल भेजा। वापस आकर इसने खुद बयान किया किस मुश्किल में थी ये और बच कर आना कठिन था।

होटल के बेसमेंट में ही वो शेल्टर बना हुआ था। होटल से 2 किलोमीटर की ही दूरी पर भारतीय दूतावास स्थित था, लेकिन उस समय ये दूरी तय करनी भी खतरे से खाली नहीं थी। नुसरत भरुचा होटल के शेल्टर से ही मदद के लिए लोगों को फोन कॉल कर रही थीं। उनका कहना था कि उस दौरान इजरायल और भारत के दूतावासों ने उनकी मदद की। इजरायल के एक टैक्सी ड्राइवर ने उनकी मदद की, वहाँ के फ़िल्मी लोगों ने कॉल किया, होटल के कर्मचारियों ने उनका ख्याल रखा।

जब नुसरत भरुचा वहाँ से लौटी थीं, तब उन्हें टैग कर के मुंबई स्थित इजरायली दूतावास ने लिखा भी था कि हम आपको अकेले नहीं छोड़ेंगे। नुसरत भरुचा को उस दौरान एयरपोर्ट ले जाया गया था और किसी अन्य देश की फ्लाइट में उन्हें बिठाया गया। उन्होंने खुद बताया था कि उस दौरान कई बार वो रोने लगती थीं। उन्होंने भारत सरकार के साथ-साथ तब इजरायल को भी धन्यवाद दिया था। ‘सोनू के टिट्टू की स्वीटी’ (2018) और ‘राम सेतु’ (2022) में काम कर चुकीं अभिनेत्री अब इजरायल के विरोधी फिलिस्तीन के लिए इंस्टाग्राम पर स्टोरी लगा रही हैं।

ये अहसानफरामोश नुसरत आज हमास के समर्थन में खड़ी है और पोस्ट लिख रही है। अगर इसका काम तमाम हो गया होता तो इसके परिवार को कैसा लगता जो आज इसकी हरकतों पर खामोश हैं। इसे नहीं भूलना चाहिए कि कल ऐसी हालत फिर खड़ी हो गई, तब सरकार भी कुछ नहीं करेगी।

कांग्रेस ने अपने manifesto में हमास को समर्थन देने की बात कही थी और राहुल गांधी की भाजपा जीत के बाद देश को आग लगाने की धमकी को देख कर लगता है, गृह युद्ध की तैयारी हो चुकी या देश को दंगों के आग में झुलसाने की तैयारी है। ऐसा इसलिए लग रहा है क्योंकि Bollywood और Cricket जगत के कुछ सिरफिरे देश में दंगे भड़काने की लिखी गई इबारत को पूरा करने में लगे हैं। ये निर्लज्ज कश्मीर में हुए हिंदुओं के नरसंहार पर खामोश थे और फिल्म The Kashmir Files को मनघडंत कहानी बता रहे थे लेकिन आज ये आतंकी हमास के साथ खड़े हैं और रफाह के लिए टसुए बहा रहे हैं।

Bollywood के इन निर्लज्जों में शामिल हैं माधुरी दीक्षित, वरुण धवन, सोनम कपूर, सोनाक्षी सिन्हा, मलाइका अरोड़ा, यो यो हनी सिंह, नोरा फतेही, कृति खरबंदा, रश्मिका मंधाना, रकुल प्रीत, काजल अग्रवाल, सैफ अली का बेटा इब्राहिम अली और क्रिकेट जगत के चहल की बीवी धनश्री वर्मा, रोहित शर्मा की बीवी रितिका सजदेह और यहां तक मनोज तिवारी की बेटी रीति तिवारी और कई अन्य और, इन सभी ने इंस्टाग्राम स्टोरी पोस्ट करते हुए एक ही तरह की फोटो शेयर की है।

भारत सरकार जिस संगठन को आतंकी मानती है, उसके साथ जाने का कोई औचित्य नहीं है। इस बेशर्म लोगों ने उस दिन एक आंसू नहीं बहाया था जब हमास ने इजरायल पर हमला किया था, हमास के दरिंदों ने अल्लाहु अकबर का नारा लगाते हुए 40 बच्चों की गर्दन रेतकर हत्या कर दी, दर्जनों बच्चों को जिन्दा जला दिया, एक महिला को दो दिन भूखा रख कर बाद में मांस भात खाने को दिया और फिर उसे बताया कि जो मांस उसने खाया, वो उसके अपने बच्चे का था। इन्हें याद नहीं हमासी दरिंदों ने एक महिला को अर्धनग्न हालत में खुले ट्रक में रेप करके सड़कों पर घुमाते रहे।

ये Bollywood के लोग हमास के समर्थन में खड़े होकर खुद दरिंदे बन गए हैं। इन्हे गाज़ा के लिए आंसू बहाने हैं या रफाह के लिए, कुछ भी करें लेकिन वहां जाकर करें। अब भारत सरकार को चाहिए इन सबकों प्लेन में बिठाकर रफाह भेज दे। या मोसाद को चाहिए इन्हे उठा कर ले जाए। अब देश को ऐसी गद्दारी सहन नहीं करनी चाहिए। किसी को इन Bollywood वालों को sound कर देना चाहिए कि सरकार तुम्हे रफाह भेजने पर विचार कर सकती है।

चुनाव नतीजे आने के बाद यदि कहीं भी दंगे भड़काए जाते हैं तो सबसे पहले राहुल गांधी को UAPA में बंद कर देना चाहिए उसके बयान के आधार पर और सभी दलों के प्रमुख नेताओ पर हंटर चला देना चाहिए। गृह युद्ध की कोशिस की जाए तो सेना लगा कर कुचल देना चाहिए। CAA और किसान आंदोलन की तरह अब सहन नहीं होना चाहिए।

बीजेपी सांसद और अभिनेता ‘रवि किशन उसकी बेटी के बाप’ का दावा करने वाली महिला पर 20 करोड़ रूपए की रंगदारी माँगने की FIR: यूट्यूबर खुर्शीद खान और सपा नेता का भी नाम

     अपर्णा ठाकुर और शिनोवा (बाएँ) और रवि किशन (दाएँ ) (चित्र साभार: News9Live & Indian Express
सांसद और अभिनेता रवि किशन को अपनी बेटी का बाप बताने वाली महिला अपर्णा सोनी के विरुद्ध उत्तर प्रदेश के लखनऊ में FIR दर्ज की गई है। यह FIR रवि किशन की पत्नी ने दर्ज करवाई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अपर्णा सोनी उनसे ₹20 करोड़ वसूलना चाहती हैं, इसीलिए उन्होंने आरोप लगाए हैं।

लखनऊ के हजरतगंज थाने में रवि किशन की पत्नी प्रीती शुक्ला ने अपर्णा ठाकुर, अपर्णा के पति राजेश सोनी, बेटी शिनोवा सोनी, सपा नेता विवेक पाण्डेय और एक यूट्यूबर खुर्शीद खान के विरुद्ध कई धाराओं में FIR दर्ज करवाई है। प्रीती शुक्ला ने इस FIR में कहा है कि अपर्णा सोनी उर्फ़ अपर्णा ठाकुर पर आरोप लगाया है कि वह उन्हें धमका रही हैं।

प्रीती शुक्ला ने कहा है कि अपर्णा उनके पति रवि किशन को बलात्कार के फर्जी मामले में फँसाने की धमकी दे रही हैं और ₹20 करोड़ की माँग कर रही हैं। उन्होंने अपर्णा पर आरोप लगाया कि उनके अंडरवर्ल्ड के साथ सम्बन्ध हैं। प्रीती शुक्ला ने कहा कि इस संबंध में मुंबई में भी एक शिकायत दर्ज की गई थी लेकिन फिर भी 15 अप्रैल को अपर्णा ने लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने अनर्गल आरोप लगाए।

प्रीती शुक्ला ने कहा कि वह इस महिला से डरी हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अपर्णा का 35 वर्ष पहले ही विवाह हो चुका है और पति का नाम राजेश सोनी है। अपर्णा के बेटी शिनोवा और बेटा भी है। प्रीती शुक्ला ने आरोप लगाया कि इस साजिश में समाजवादी पार्टी के एक नेता विवेक पाण्डेय और एक पत्रकार खुर्शीद खान भी शामिल हैं।

प्रीती शुक्ला ने आरोप लगाया कि उनके परिवार को जान से मारने, उनकी छवि धूमिल करने और उनके पति को राजनीतिक नुकसान पहुँचाने की साजिश रची जा रही है। पुलिस ने इस मामले में अपर्णा ठाकुर, उनके परिवार और सपा नेता तथा यूट्यूबर के विरुद्ध कई धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस इस मामले में की जाँच कर रही है।

अपर्णा ठाकुर ने 15 अप्रैल, 2024 को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उन्होंने दावा किया था कि भाजपा सांसद और अभिनेता रवि किशन उनकी 25 वर्षीय बेटी शिनोवा के पिता हैं। अपर्णा का आरोप था कि वह अपनी कथित बेटी को पूरे अधिकार नहीं दे रहे। अपर्णा ने दावा किया था कि उनकी रवि किशन से 1996 में शादी हुई थी। अब इस मामले में उनके खिलाफ FIR दर्ज हो गई है।

निकाह मुफ़्ती से, बेटे का नाम हूरों का बखान करने वाले तबलीगी नेता मौलाना पर…, कहता है- कोरोना का कारण महिलाओं की नग्नता

                       सना खान और पाकिस्तानी मौलाना तारिक जमील (साभार: यूट्यूब/सना खान इंस्टा)
बॉलीवुड को अलविदा कहकर दीन की खिदमत के लिए एक मौलाना से निकाह करने वाली पूर्व अभिनेत्री सना खान ने पाकिस्तान के एक कट्टरपंथी मौलाना के नाम पर अपने बच्चे का नाम रखा है। सना और उसके शौहर अनस ने पाकिस्तानी मौलाना तारिक जमील के नाम पर अपने बच्चे का नाम रखा है। ये वही मौलाना जमील हैं, जिन्होंने जन्नत की हूरों की शारीरिक ढाँचे को परिभाषित किया था।

सना खान ने 5 जुलाई 2023 को एक बेटे को जन्म दिया था। हाल ही में सना खान और उनके शौहर मुफ्ती अनीस ने “तारिक जमील से मुलाकात की थी। सना खान ने अपने बेटे के साथ मौलाना तारिक जमील से मुलाकात का वीडियो भी शेयर किया है।

इस वीडियो में सना खान ने लिखा है, जूनियर तारिक जमील का सीनियर हजरात मौलाना तारिक जमील साब से मुलाकात। मौलाना को देखकर वाकई अल्लाह याद आते हैं। वह अंदर से खूबसूरत इंसान हैं। अल्लाह हमेशा उनकी रक्षा करें और उन्हें अच्छा स्वास्थ्य दें।”

सना ने आगे लिखा, “उन्होंने मुझे हमेशा बेटी कहा है और अपने ज्ञान के शब्दों से मुझे बहुत कुछ दिया है। लोग आपको तोड़ने की कोशिश कर सकते हैं और अपने मफ़ाद के लिए आपको निशाना बना सकते हैं, लेकिन हमें मजबूत होना होगा और यह अल्लाह की ओर से एक परीक्षा भी है।”  

ये वही मौलाना तारिक हैं, जिनकी उटपटांग और महिला विरोधी बातों को लेकर दुनिया भर में उनकी मजम्मत हो चुकी है। इस साल जून में मौलाना तारिक का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह जन्नत के हूरों के बारे में बता रहे थे। उस वीडियो में उन्होंने कहा था कि जन्नत में हूरें एक नहर से पैदा होती हैं और उनकी लंबाई 130 फीट होती हैं।

वीडियो में जमील कहते हैं, “जन्नत में मोतियों से ढँकी एक नहर है। उसके अंदर मुश्क और जाफरान बहता है। जब अल्लाह जन्नत की किसी लड़की को बनाता है तो उस पर अपना नूर डालता है और 130 फीट की लड़की निकलकर बाहर आ जाती है। जन्नत हूरें माँ की पेट से पैदा नहीं होतीं। तुम पाँच फीट के जन्नत में चले गए तो हूरें तुम्हें अपनी जेब में डाल लेंगी। लिहाजा, अल्लाह हमें भी 130 फीट का बना देगा।”

हूरों के बारे में बताते हुए कट्टरपंथी तबलीगी जमात के सदस्य तारिक जमील ने आगे कहा था, “अल्लाह के हुक्म पर हूरें जन्नत में गीत सुनाती हैं। जब हूरें अपनी जुल्फें बिखराती हैं तो रंग-बिरंगी रौशनी जलने लगती हैं और पूरी जन्नत रौशनी से भर जाती है।”

उन्होंने जन्नत में मिलने वाली शराब का भी खूब वर्णन किया था। वायरल एक अन्य वीडियो में मौलाना ने कहा था, “जन्‍नत में शराब पीने के तीन दर्जे होते हैं। पहले दर्जे में लोग खुद के हाथों से शराब निकालकर पीते हैं। यह सबसे निचला दर्जा होता है। दूसरा दर्जा किसी मिडिल क्लास की तरह होता है, जिनको शराब परोसने के लिए नौकर, पत्‍नी, हूरें और फरिश्‍ते होते हैं।”

जन्नत के सबसे ऊँचे दर्जे के बारे में बताते हुए मौलाना ने कहा था, “यह किसी VVIP की तरह होता है। इस दर्जे में अल्‍लाह खुद शराब पिलाते हैं। अगर इस धरती पर लोग शराब को न कर दें तो जन्नत में खुद अल्लाह उन्हें शराब पिलाते हैं।”

साल 2020 में जब देश-दुनिया में कोरोना महामारी फैला था, तब भी मौलाना जमील ने कहा था कि कोरोना वायरस के रूप में दुनिया अल्लाह के कोप का सामना कर रही है। इस कोप की वजह बढ़ती अश्लीलता और नग्नता है। जब समाज में अश्‍लीलता आम बात हो गई है तो अल्लाह नाराज हो गए हैं। उन्होंने कहा था, “जहाँ लड़कियाँ नाच रही हों और कम कपड़े पहनती हों, उस पर कोरोना जैसी विपत्ति आनी ही है।”

भारत के विभाजन के लिए जिम्मेवार मुहम्मद अली जिन्ना को लेकर एक बार उन्होंने कहा था, “एक दफा मैंने ख्वाब में देखा तो मैंने (जिन्ना से) पूछा कि आपका क्या हाल है। कहने लगे कि मैं बड़ी ‘राहत’ में हूँ। उन्होंने अपनी दो उँगलियाँ मेरी तरफ कीं कि ये चूस लो। उनकी दो उँगलियाँ मैंने मुँह में डाली तो उसमें से गाढ़ा-मीठा शहद निकल-निकल कर मेरे मुँह में आना शुरू हुआ। उसके साथ ही मेरी आँख खुली तो उसकी मिठास मेरे मुँह में बाकी थी।”

तारिक जमील तब्लीगी जमात का सदस्य है। तब्लीगी जमात भले ही खुद को सुन्नी मुसलमानों का सबसे बड़ा संगठन बताता हो, लेकिन दिसंबर 2021 में सऊदी अरब ने इसे ‘आतंकवाद का एंट्री गेट’ करार देते हुए बैन कर दिया था। वहीं, भारत में कोरोना महामारी के दौरान जमात लगाने और पुलिसकर्मियों पर थूकने की घटनाओं के बाद यह संगठन चर्चा में आया था।

‘दिवाली पर एक-दूसरे को उपहार मत दें, इससे बहुत कचरा पैदा होता है’: लोगों को पसंद नहीं आया ‘ज्ञान’; सनातन विरोधियों का सामाजिक बहिष्कार ही उपचार है

जैसे ही हिन्दू पर्व-त्योहार आते हैं, वैसे ही बॉलीवुड और क्रिकेट की हस्तियाँ ज्ञान देने लगती हैं। ताज़ा मामला दीया मिर्जा का है। दीया मिर्जा ने दीवाली पर वीडियो जारी कर के कुछ ऐसा ज्ञान दिया है, जो लोगों को पसंद नहीं आ रहा है। दीया मिर्जा इस वीडियो में कह रही हैं कि इस दिवाली पर मुझे गिफ्ट्स न दें, मुझे कुछ मत दें। उन्होंने कहा कि उन्हें महसूस होता है कि दिवाली पर लोग एक-दूसरे को कई ऐसी चीजें देते हैं जिनकी कोई ज़रूरत ही नहीं होती।

ईद-क्रिसमस पर कहाँ सोई रहती हो?

वीडियो में दीया मिर्जा आगे कहती हैं, “कुछ ज़्यादा ही पैकेजिंग हो जाती है और काफी कचरा पैदा हो जाता है। इस दिवाली मुझे कुछ मत दीजिए। आप बस मुझे अपना समय दीजिए। अपने घर में कचरों को अलग-अलग कर के मेरा समर्थन कीजिए। आप इस दिवाली पर मुझे सबसे अच्छा गिफ्ट ये दे सकते हैं कि आप उन संगठनों का समर्थन करें तो पर्यावरण के स्वास्थ्य के लिए काम कर रहे हैं।” दीया मिर्जा ईद-बकरीद या क्रिसमस पर इस तरह के ज्ञान देती नहीं दिखती हैं।

‘वोकफ्लिक्स’ नाम के ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘वोकिज्म’ के झंडाबरदारों और इस्लामवादियों ने दिवाली को बदनाम करने का एक नया रास्ता खोज लिया है – ज़्यादा तोहफे देने से कचरा पैदा होता है। उक्त ट्विटर हैंडल ने ये भी लिखा कि दीया मिर्जा जैसे बॉलीवुड सेलेब्रिटी पर्यावरणविद होने के नाम पर घोटाला हैं। ‘जेम्स ऑफ बॉलीवुड’ नामक हैंडल ने भी दीया मिर्जा को एक फ्लॉप अभिनेत्री करार देते हुए कहा कि वो दिवाली पर ही अपना ‘वोक’ ज्ञान देती हैं।

दीया मिर्जा ने 33 फ़िल्में की हैं, जिनमें उनकी मात्र 2 फ़िल्में ही हिट हुई हैं और वो दोनों ही राजकुमार हिरानी की फ़िल्में थीं जिनमें दीया मिर्जा का कोई योगदान नहीं था। यही कारण है कि उन्हें फ्लॉप अभिनेत्री कहा जाता है। ‘जेम्स ऑफ बॉलीवुड’ ने पूछा कि दीया मिर्जा क्रूरता मुक्त ईद या फिर पटाखा मुक्त क्रिसमस की बात क्यों नहीं करतीं? साथ ही याद दिलाया कि बॉलीवुड के लोग जो महँगे मेकअप और शूटिंग के लिए बनाए गए जिस सेट का इस्तेमाल करे हैं, उससे भी काफी कचरा पैदा होता है।


मुंबई : सेक्स से मना करने पर फोड़ डाली खोपड़ी

दीपक मालाकार (साभार: हिंदुस्तान टाइम्स)
शारीरिक संबंध बनाने से मना करने पर 18 साल की एक लड़की को प्रताड़ित करने के मामले में मुंबई पुलिस ने एक कास्टिंग डायरेक्टर दीपक मालाकार को गिरफ्तार किया है। 26 वर्षीय मालाकार की प्रताड़ना के कारण लड़की की मौत हो गई है। पुलिस के अनुसार, उसकी खोपड़ी कई जगह से टूट गई है।

आरोपित मालाकार बिहार का रहने वाला है और 11 अगस्त 2023 को घटना को अंजाम देने के बाद मुंबई से फरार हो गया था। मुंबई से फरार होने के बाद वह गुजरात के सूरत में जाकर छिपा हुआ था। सूचना के आधार पर मुंबई पुलिस सूरत पहुँचकर दीपक मालाकर को सोमवार यानी 14 अगस्त 2023 को गिरफ्तार कर लिया।

घटना के दौरान लड़की के सिर पर कई बार हमला होने के कारण वह बेहोश होकर गिर गई। इसके बाद मालाकर को लगा कि लड़की मर गई और वह वहाँ से भाग गया। कुछ समय के बाद लड़की को होश आया है और उसने मदद माँगी। इसके बाद उसे अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ वह दो दिनों तक ICU में भर्ती रही।

B.Sc प्रथम वर्ष में पढ़ने वाली 18 साल की इस लड़की की दोस्ती पिछले साल मालाकार से सोशल मीडिया साइट फेसबुक के जरिए हुई थी। दो महीने पहले वह लड़की से शादी करने के इरादे थे उसके माँ-बाप से मिला था। लड़की के परिजन इसके लिए तैयार हो गए। इसके बाद मालाकर लड़की के 1 BHK घर में ही रहने लगा।

इस दौरान मालाकार लड़की से शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करने लगा। लड़की इसके लिए तैयार नहीं हुई और उसने कहा कि वह पहले अपनी पढ़ाई पूरी करनी चाहती है। फिर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में वह अपना भाग्य अजमाएगी। इसके बाद वह शादी करेगी। इससे मालाकार लड़की पर गुस्सा हो गया।

दीपक मालाकार 11 अगस्त 2023 को लड़की को लेकर वर्सोवा स्थित अपने दोस्त के फ्लैट पर गया और वहाँ उसने लड़की का यौन शोषण करने की कोशिश की। इस दौरान लड़की ने उसका विरोध किया था। खुद को फिल्म एडिटर और कास्टिंग डायरेक्टर बताने वाला मालाकार गुस्से से लाल हो गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दीपक मालाकार ने लड़की का सिर दीवार पर दे मारा और उसके चेहरे पर तब तक वार करता रहा, जब तक वह गिर नहीं गई। जब उसे लगा कि वह वह मर चुकी है तो वह घबरा गया और फ्लैट को बाहर से बंद कर करके शहर से भाग गया। लड़की को जब होश आया तो वह मदद के लिए चिल्लाई। इसके बाद पड़ोसियों ने उसकी मदद की।

पुलिस के अनुसार, मालाकार ने स्वीकार किया है कि वह लड़की को मार डालना चाहता था, क्योंकि वह उसकी इच्छा की पूर्ति करने नहीं दे रही थी। सूरत भागने के बाद मालाकार ने मोबाइल को स्वीच ऑफ कर लिया। हालाँकि, लोकल नंबर से वह अपने दोस्त के संपर्क में था।

उसने सूरत में स्थित एक ATM से पैसे निकाले। इसके बाद पुलिस को उसके लोकेशन के बारे में जानकारी मिली। जानकारी मिलते ही मुंबई पुलिस सूरत पहुँचकर उसे गिरफ्तार कर ली। मालाकार के खिलाफ IPC की धारा 307, 342, 354 और 354D के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

‘अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए ममता बनर्जी कर रहीं The Kashmir Files को बदनाम’ – विवेक अग्निहोत्री ने भेजा लीगल नोटिस

सुदीप्तो सेन की फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) का कट्टरपंथी इस्लामियों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। इस बीच  ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) को भी निशाना बनाया जा रहा। इसी कारण डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को एक कानूनी नोटिस भेजा है।

विवेक अग्निहोत्री ने मंगलवार (9 मई 2023) को अपने ट्विटर हैंडल पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने ट्वीट में लिखा: “मैंने, अभिषेक अग्रवाल और पल्लवी जोशी के साथ मिलकर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कानूनी नोटिस भेजा है। उन्होंने हमें और हमारी फिल्मों ‘द कश्मीर फाइल्स’ और अपकमिंग फिल्म ‘द दिल्ली फाइल्स’ को बदनाम करने के इरादे से झूठे और अपमानजनक बयान दिए हैं।”

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बात करते हुए विवेक अग्निहोत्री ने कहा, “पिछले कई वक्‍त से मैं खामोश था। कोई भी मुख्‍यमंत्री, चाहे वो दिल्‍ली के चीफ मिनिस्‍टर हों, या बड़े-बड़े जर्नलिस्ट हों, नेता हों, ये कभी भी उठ कर कह देते थे कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) एक प्रोपेगेंडा फिल्‍म है। अब मुझे लगा कि बहुत हो चुका है। जिसे भी लगता है कि यह प्रोपेंगेडा फिल्म है, वह आकर यह साबित करे कि इसमें कौन सा डायलॉग, कौन सा सीन, कौन सा फैक्‍ट है, जो प्रोपेगेंडा है। मैं, फिल्‍म के प्रोड्यूसर अभ‍िषेक अग्रवाल और पल्‍लवी जोशी जी अपनी तरफ से एक बहुत ही सख्‍त और लीगल कार्रवाई करेंगे।”

विवेक अग्‍न‍िहोत्री ने आगे कहा, “कल (8 मई 2023) को बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने ‘द कश्‍मीर फाइल्‍स’ और मेरी अगली फिल्‍म, जो बंगाल के नरसंहार पर आधारित है, उस पर आरोप लगाए। उन्‍होंने कहा कि मुझको ‘द कश्‍मीर फाइल्‍स’ बनाने के लिए या अगली फिल्‍म बनाने के लिए बीजेपी स्‍पॉन्‍सर करती है। फंड करती है। यह मेरे मन को आहत करने वाली, मेरे रोजगार को प्रभावित करने वाली और पूरी तरह से झूठ व बेबुनियाद बात है, जो पॉलिट‍िकल एजेंडा के तहत अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए ममता जी ने कही है।”

लीगल नोटिस क्यों भेजा, इस पर बात करते हुए विवेक अग्‍न‍िहोत्री ने आगे कहा: “मैंने, मेरे प्रोड्यूसर अभ‍िषेक अग्रवाल जी ने, पल्‍लवी जोशी जी ने तय किया है कि हम उनके (ममता बनर्जी) खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। हमने उनको लीगल नोटिस भेजा है। वह इस बात का जवाब दें कि उन्‍होंने जो बातें कहीं है, उसका तथ्‍य क्‍या है। अन्‍यथा यह मानहानि है। मेरी नजर में यह एक आदमी की रोजी-रोटी को प्रभावित करने के लिए गलत इरादे से दिया गया बयान है।”

विवेक अग्रिहोत्री के निर्देशन में बनी ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार पर आधारित है। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने फिल्म की सराहना की है।


‘The Kerala Story बनाने वाले को सरेआम फाँसी देनी चाहिए’: शहीद इशरत जहाँ एंबुलेंस सेवा की शुरु करने वाले NCP नेता जितेंद्र आव्हाड

             निर्माता विपुल अमृतलाल शाह, निर्देशक सुदीप्तो सेन और एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड (बीच में)
शरद पवार को अपनी पार्टी की ओर ध्यान देना चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि 
विधायक जितेंद्र आव्हाड की वजह से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी क्षेत्रीय पार्टी भी न रहे। राष्ट्रीय दर्जा तो समाप्त हो ही चूका है। पार्टी के नेता ऐसी ऊल-जलूल बात करते रहे, फिर वह दिन भी दूर नहीं होगा, जब पार्टी केवल नाम की ही रह जाएगी। जनता की नब्ज को पढ़ लो। तुष्टिकरण और छद्दम धर्म-निरपेक्षता के दिन लदने शुरू हो गए हैं। जितना The Kerala Story का विरोध किया जाता रहेगा, जनता उनको आतंकवाद समर्थक की सूची में डाल चुनावों में उस नेता को ही नहीं बल्कि पार्टी को धूल चटाने का मन बना रही है। 

शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक जितेंद्र आव्हाड (Jitendra Awhad) ने फिल्म द केरल स्टोरी (The Kerala Story) के निर्माता को सार्वजनिक तौर पर फाँसी देने की डिमांड की है। अतीत में हिंदू त्योहारों को दंगों का कारण बता चुके आव्हाड ने कभी आतंकी इशरत जहाँ के नाम पर एंबुलेंस सेवा की शुरुआत भी की थी। हाल में जब पवार ने एनसीपी अध्यक्ष पद छोड़ने का ऐलान किया था तो उनके समर्थन में इस्तीफा देने वालों में भी आव्हाड थे।

जितेंद्र आव्हाड ने कहा है, “द केरल स्टोरी के नाम पर एक राज्य और वहाँ की महिलाओं को बदनाम किया जा रहा। आधिकारिक आँकड़ा 3 का था, लेकिन इसे 32000 के तौर पर पेश किया गया। इस काल्पनिक फिल्म को बनाने वाले को सार्वजिनक रूप से फाँसी देना चाहिए।” उल्लेखनीय है कि द केरल स्टोरी का निर्देशन सुदीप्तो सेन ने किया है जबकि इसके निर्माता विपुल अमृतलाल शाह हैं।

इससे पहले जितेंद्र आव्हाड ने एक ट्वीट में केरल की साक्षरता समेत अन्य मुद्दों का जिक्र करते ‘द केरल स्टोरी’ को ‘झूठी फिल्म’ करार दिया था। उन्होंने लिखा था फिल्म में जैसा दिखाया गया है, सच्चाई उसके उलट है। 32000 महिलाओं का आँकड़ा फिल्म चलाने के लिए बताया जा रहा है। इस फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि महिलाएँ मूर्ख हैं और उन्हें कुछ भी समझ नहीं आता। फिल्म में महिलाओं को पुरुषों से कमजोर दिखाया गया है। यही फिल्म की सच्चाई है। इस तरह की फिल्में नफरत और हिंसा फैलाकर चुनाव जीतने के लिए बनाई जाती हैं।

2016 में मुंबई में लश्कर-ए-तैयबा आतंकी इशरत जहाँ के नाम पर एंबुलेंस सेवा शुरू की गई थी। इसकी लॉन्चिंग में भी आव्हाड भी शामिल हुए थे। यही नहीं, आव्हाड हिंदुओं के प्रमुख त्योहार राम नवमी और हनुमान जयंती को दंगों की वजह भी करार दे चुके हैं। न्होंने कहा था कि लगता है जैसे रामनवमी और हनुमान जयंती सिर्फ दंगों के लिए ही मनाई जाती है।

पश्चिम बंगाल में ‘द केरल स्टोरी’ बैन

उत्तर प्रदेश में ‘द केरल स्टोरी’ टैक्स फ्री हो गई है। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फिल्म को राज्य में बैन कर दिया है। ममता ने कहा है कि यह फैसला राज्य में नफरत और हिंसा को रोकने तथा शांति बरकरार रखने के लिहाज से लिया गया है।
अवलोकन करें:-
‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) फिल्म की कहानी ISIS में शामिल की जाने वाली लड़कियों के साथ घटित घटनाओं पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक एजेंडे के तहत दूसरे धर्म की लड़कियों को बहलाकर इस्लाम कबूल करवाया जाता है, फिर उन्हें आतंकी बनाकर ISIS में भेज दिया जाता है। फिल्म में अदा शर्मा ने शालिनी उन्नीकृष्णन का रोल निभाया है।

‘कम्युनिस्टों ने मेरी जिंदगी के 20 साल बर्बाद कर दिए’: पीयूष मिश्रा, पूर्व कॉमरेड

सच्चाई को सात तालों में भी कैद नहीं किया जा सकता। कभी कभी बाहर आ ही जाती है। यह एक कटु सच्चाई है कि कांग्रेस और कम्युनिस्ट गठजोड़ ने कितनी बेदर्दी से भारत के गौरवशाली इतिहास का चीर हरण किया, जिसका नंगा नाच अपने आपको कहलाने वाला हर बुद्धिजीवी धृतराष्ट्र बन देखता रहा। यही कारण है कि कट्टरपंथी और अराजकतत्व देश में अराजकता फैलाते रहते हैं। और वास्तविक इतिहास बताने वालों को साम्प्रदायिक कहा जाता है। यदि देश के इतिहास को बिगाड़ने का साहस भारत से बाहर कहीं किया जाता, उसे तुरन्त जेल में धकेल दिया जाता, लेकिन यहाँ उन्हें सम्मान दिया जाता रहा है। 

खैर, 1962 इंडो-चीन युद्ध के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ने स्पष्ट कहा था कि 'पार्टी का कोई वर्कर फौजियों के लिए खून नहीं देगा।' फिर पार्टी कहती है कि 'हम देश के प्रति वफादार है' और अज्ञानी सच मानकर इनका अनुसरण करने लगते हैं। और एक और सच्चाई सामने आयी है जिसे किसी अन्य ने नहीं बल्कि वर्षों तक कामरेड बने रहे चरित्र अभिनेता ने कि कम्युनिस्टों की परिवार के प्रति कोई सम्मान नहीं। जिस पार्टी का परिवार के लिए कोई सम्मान नहीं होगा, उसका जनता अथवा देश के लिए क्या होगा? जिन माँ और बाप के ही कारण ये लोग दुनिया में आये उन्हें ही गन्दा बताया जा रहा है।  

फिल्मों के चरित्र अभिनेता पीयूष मिश्रा ने कहा कि वामपंथी बनकर उन्होंने अपनी जिंदगी बर्बाद कर ली। उन्होंने कहा कि कॉमरेड बनकर उन्होंने अपनी ऐसी-तैसी करा ली। कम्युनिस्टों ने उन्हें दबोच रखा था। बहुत मुश्किल के बाद वे उनके चंगुल से निकले हैं।

पीयूष मिश्रा ने कहा, “कम्युनिस्टों ने 20 साल मेरी जिंदगी के बर्बाद कर दिए। वे कहते- परिवार गंदी चीज है, माँ गंदी चीज है, बाप गंदी चीज है…. तुम्हें समाज के लिए काम करना है। ये सब समाज के हिस्से नहीं हैं क्या? वे कहते- नहीं… नहीं… समाज के हिस्से अलग होते हैं। क्रांति कहीं से आएगी। लाल बत्ती पर ठहरी हुई है।”

उन्होंने आगे कहा, “वे लगातार 20 साल तक मुझसे काम करवाते रहे। वे कहते- पैसा कमाना पाप है। जो पैसा कमाता है, वो पूँजीपति कहलाता है, कैपिटलिस्ट हो जाता है। पैसा कभी मत कमाना। फिर मैंने कहा- नहीं कमाऊँगा सर। मैंने सबको छोड़ दिया जिंदगी में… माँ-बाप, बीवी को।”

कॉमरेड बनने के अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा, “जब मुझे अहसास हुआ कि मैं खराब बाप हो गया, मैं खराब बेटा साबित हो गया। मुझे लगा अब खराब बाप साबित नहीं होऊँगा। तब मेरा बड़ा बेटा छोटा था। मुझे अहसास हुआ कि पीयूष तुम तो गलती कर रहे हो। उन लोगों ने मेरा सब कुछ ले लिया। परिवार की कतई चिंता नहीं थी मुझे।”

उन्होंने कहा, “ये जूनियर कैडेट से इतना खराब काम लेते हैं कि कुछ कह नहीं सकते। स्टालिन का भूत था। कम्युनिस्ट का मतलब स्टालिन होता है। एक बंदा होता है, जो सबका सिरमौर होता है और सारे बंदे जूनियर होते हैं। जूनियर बंदा उसका मुँह देखता है कि अब हमें क्या करना है, क्या खाना है, क्या पीना है। तो मैं भी लगातार काम करता रहा इनके लिए… लगातार।”

पीयूष ने अपनी हालत के बारे में बताते हुए कहा, “मैं टूट गया था उनके लिए काम करते-करते। मेरी फिजिकल हालत खराब हो गई थी। मेंटल हालत खराब हो चुकी थी। इमोशनली मैं ड्रेन हो चुका था।” उन्होंने बताया कि अच्छा बाप बनने के लिए उन्होंने सिनेमा में जाने का फैसला कर दिया।

शेखर कपूर और कबीर बेदी ने BBC को बताया ‘गटर पत्रकारिता’

                                                                              साभार: India Taoday
गुजरात दंगों पर आधारित बीबीसी की प्रोपेगंडा डॉक्यूमेंट्री पर विवाद जारी है। मशहूर फिल्म निर्देशक शेखर कपूर और बॉलीवुड अभिनेता कबीर बेदी ने इस विवादित डॉक्यूमेंट्री पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कई ट्वीट किए हैं। कबीर के ट्वीट पर सहमति जताते हुए 23 जनवरी, 2023 को डायरेक्टर शेखर कपूर (Shekhar Kapur) ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कबीर बेदी (Kabir Bedi) को टैग करते हुए लिखा, “आप ठीक कह रहे हैं कबीर। मैं भारत को अस्थिर करने के प्रयासों को लगातार देख रहा हूँ… ऐसा लगता है जैसे अब कोई भारत को महाशक्ति बनने से नहीं रोक सकता।”

कहते हैं कि इतिहास लिखा नहीं जाता दोहराया जाता है। देखिए, जब भी भारत में कोई विदेशी मेहमान आता है, मोदी विरोधी किसी न किसी बहाने जैसे CAA विरोध में शाहीन बाग, कृषि कानूनों की आड़ में किसान आंदोलन आदि लेकिन विरोधी न मोदी और न ही भारत की प्रतिष्ठा को कलंकित करने में सफल हुए, बल्कि इन लोगों ने अपने आपको बेनकाब कर, भारत के उस इतिहास को जीवित कर रहे हैं कि किस तरह से बिकाऊ गद्दारों की वजह से एक मजबूत भारत पर मुग़ल आक्रांताओं ने राज किया। मोदी विरोधी जिस गुजरात दंगे के जिन्न को पुनः जीवित करने का प्रयास करने की भयंकर भूल कर रहे हैं, नहीं जानते कि जनता भी सोंच रही कि जिस साबरमती ट्रैन में रामभक्तों को जिन्दा जलाये जाने के कारण हुए दंगे हुए थे कि उस नीच हरकत को करने में इस गैंग ने परदे के पीछे खेल खेला हो? 

इससे पहले 22 जनवरी 2023 को भी शेखर कपूर ने ट्वीट करके बीबीसी पर निशाना साधा था। उन्होंने लिखा था, “मुझे आश्चर्य है कि क्या बीबीसी के पास कभी ब्रिटेन के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्ति विंस्टन चर्चिल के बारे में सच्चाई बताने का साहस था, जो बंगाल के अकाल के लिए काफी हद तक जिम्मेदार था। जिसके कारण भुखमरी से लाखों लोगों की मौत हो गई थी। वह उन जनजातीय समाज के लोगों, कुर्दों पर रासायनिक बम गिराने वाला पहला व्यक्ति है।”

इतना ही नहीं, दिग्गज अभिनेता कबीर बेदी ने बीबीसी की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया। कबीर ने बीबीसी की ‘इंडिया : द मोदी क्वेश्चन’ शीर्षक से दो पार्ट में बनाई गई डॉक्यूमेंट्री सीरीज को लेकर अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “बीबीसी डॉक्यूमेंट्री एक मौलिक तथ्य पर प्रकाश डालती है: कॉन्ग्रेस शासन के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक विशेष जाँच दल ने पीएम मोदी को इस मामले में बरी कर दिया था। 2002 की ब्रिटिश जाँच की उतनी ही विश्वसनीयता है, जितनी कि इराक में जनसंहार के हथियारों की रिपोर्ट की।”

इससे पहले अभिनेता ने 20 जनवरी, 2023 को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर बीबीसी को आड़े हाथों लिया था। उन्होंने बीबीसी की प्रोपेगंडा डॉक्यूमेंट्री ‘द मोदी क्वेश्चन’ को पक्षपाती डॉक्यूमेंट्री बताते हुए दावा किया था कि मोदी के भारत में ‘धार्मिक अशांति है’, यह दशकों पुराने आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों को अदालतों ने काफी समय पहले ही सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा था कि यह गटर पत्रकारिता है। सनसनीखेज खबर चलाने के नाम पर सभी अंधे हो चुके हैं।

सरकार के आदेश के बाद ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब वीडियो के लिंक वाले 50 से ज्यादा ट्वीट्स को ब्लॉक किया गया है। आईटी नियम, 2021 के तहत इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने यह कार्रवाई की है। बीबीसी की ‘इंडिया : द मोदी क्वेश्चन’ शीर्षक से दो पार्ट में बनाई गई डॉक्यूमेंट्री सीरीज में गुजरात दंगों को लेकर पीएम मोदी के कार्यकाल पर हमला किया गया है।

दंगों के दौरान मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जारी इस विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री की निंदा की थी। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने की कोशिश करार दिया था। इस डॉक्यूमेंट्री में गोधरा कांड में इस्लामवादियों की भूमिका पर पर्दा डालने की कोशिश की गई है। गोधरा कांड में 59 हिंदू मारे गए थे।

#boycott मेघना गुलजार : फिल्म 'राजी' में पीठ पर छुरा घोंप ‘तिरंगा निकाल पाकिस्तानी झंडे दिखाए, राष्ट्रभक्ति के सीन गायब’

                                            मेघना गुलजार पर भड़के कॉलिंग सहमत के लेखक
साल 2018 में पर्दे पर आई मेघना गुलजार की ‘राजी’ फिल्म हरिंदर सिक्का की किताब ‘कॉलिंग सहमत’ पर बनाई गई थी। अब उन्हीं हरिंदर सिक्का ने भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल में बात करते हुए मेघना पर धोखा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने ‘बॉक्स ऑफिस फ्रॉम बुक्स’ विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने मेघना गुलजार को अपनी किताब (कॉलिंग सहमत) के राइट्स देकर सबसे बड़ी गलती की।

आलिया भट्ट स्टारर फिल्म राज़ी एक ऐसी लड़की की कहानी है जो पाकिस्तान के आर्मी ऑफिसर से शादी करती है और बाद में वहां की जासूसी भी। इस फिल्म के पाकिस्तान में इस फिल्म के रिलीज़ न होने को लेकर कोई अचरज तो नहीं होना चाहिए और इस फिल्म की डायरेक्टर मेघना गुलज़ार भी ऐसा ही मानती हैं।

पाकिस्तान में फिल्म रिलीज़ करने की खातिर पाकिस्तान समर्थक मेघना गुलज़ार ने भारतीय तिरंगे का अपमान करने में लेशमात्र भी संकोच नहीं किया, फिर बेशर्मों की तरह बॉलीवुड वाले कहते हैं, कि हम देशभक्ति की फिल्में बनाते हैं। मेघना से पूछो कि फिल्म में तिरंगा निकाल पाकिस्तानी झंडे क्यों दिखाए?

मेघना ने कहा कि हालांकि उन्हें लगता है कि जब ये फिल्म रिलीज़ होगी तो भारत और पाकिस्तान के बीच के रिश्ते को देखने के नजरिये में फ़र्क आ सकता है क्योंकि इसमें ऐसा कुछ नहीं है कि फिल्म को पाकिस्तान में रिलीज़ नहीं किया जा सकता। हालांकि फिल्म रिलीज़ हो या न हो इससे इस बात का फ़र्क नहीं पड़ता कि राज़ी भारत पाकिस्तान के विषय को लेकर बनाई गई है। वैसे भी हमारी फिल्में पाकिस्तान में रिलीज़ होती ही कहां है, और ये दुखद बात है। मेघना ने इस बात पर जोर दिया कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान, राजनीतिक नजरिये से तय नहीं होना चाहिए।

हरिंदर सिक्का को मेघना से शिकायत इस बात की है कि उन्होंने अपनी फिल्म राजी में सहमत के किरदार को बहुत डिप्रेस दिखाया। उन्होंने कहा कि फिल्म में डायरेक्टर ने एक हीरो को ऐसे दिखाया है, जैसे उसने देश के लिए लड़कर कोई गुनाह किया हो।

सिक्का के अनुसार, सहमत तिरंगे को पूजती थीं। मगर मेघना ने फिल्म से तिरंगे को ही निकाल दिया और फिल्म में पाकिस्तान के झंडे दिखाए। इसके अलावा फिल्म से राष्ट्रभक्ति के सीन ही हटा दिए गए, भारतीय एजेंट्स पर सवाल खड़ा किया गया और पाकिस्तानी आर्मी को नर्म दिल दिखाया, जबकि ऐसा नहीं है, वो लोग इसके उलट हैं।

लेखक ने कहा कि फिल्म में सहमत को ऐसे दिखाया गया जैसे वो एक डिप्रेस इंसान हों जबकि ऐसा नहीं था। जब सहमत लौटी थीं तो उन्होंने तिरंगे को सैल्यूट किया था। बैंड ‘जय भारती’ बजा रहा था, मगर वहाँ उन्होंने राष्ट्रगान बजवाया।

हरिंदर आरोप लगाते हैं कि इस फिल्म में नैरेटिव दिखाया गया कि कश्मीरी मुस्लिम देश के खिलाफ हैं, जिससे कराची और दुबई के लोग खुश हुए होंगे। इस किताब को 8 साल में पूरा करने वाला शख्स और सहमत की आत्मा खुश नहीं हैं।

उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि मेघना को राइट्स बेचकर बहुत बड़ी गलती हो गई। वह बताते हैं, “मैंने गुलजार साहब को जबान दी थी। उन्होंने मुझसे गुजारिश की थी कि 4 साल से उसे किसी ने डायरेक्टर का काम नहीं दिया है। आप दे दो। मैंने बात रखने के लिए उसे डायरेक्टर बनाया। मगर उसने तो मेरी ही पीठ में छुरा घोंपा”

वह कहते हैं कि लेखक गुलजार ने तो उन्हें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में जाने से मना कर दिया था। आयोजको से उन्होंने मना किया था। बाद में आर्मी परिवार के एक बेटे ने मुझे बुला लिया। सिक्का के मुताबिक उनकी किताब को आइफा अवार्ड मिलने वाला था, लेकिन वो भी उन्हीं की वजह से नहीं मिला।

अपना दर्द साझा करते हुए उन्होंने कहा कि वो ये सब सिर्फ इसलिए बता रहे हैं ताकि कभी किसी और के साथ ये सब न हो। कॉलिंग सहमत 8 साल देकर लिखी गई थी। कोई ऐसी कहानियों को कम दाम पर लेता है और फिर उसके हाल राजी जैसे कर देता है। आगे किसी के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने जानकारी दी कि 8 साल में वह लगातार सहमत के घर जाकर उनसे मिलते। कभी 5 मिनट कभी 10 मिनट बात होती और इस तरह ये किताब लिखी गई। शुरुआत में सहमत ये सब बताने में सहज नहीं थीं, पर जोर देने पर वह तैयार हो गईं और किताब पूरी हो सकी। सिक्का की अगली किताब एक नेवी ऑफिसर के जीवन पर है। इस किताब का नाम गोविंद होगा।

रणबीर कपूर ने सऊदी अरब में पाकिस्तान के साथ काम करने पर भरी ‘हाँ’,

                                                 रणबीर कपूर (तस्वीर साभार: इंडियन एक्सप्रेस)
सऊदी अरब में हुए ‘रेड सी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ में रणबीर कपूर ने भी शिरकत की। इस कार्यक्रम में उन्हें ‘वैरायटी इंटरनेशनल वैनगार्ड एक्टर अवार्ड’ दिया गया। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान की ब्लॉकबस्टर रही ‘द लीजेंड ऑफ मौला जट’ फिल्म की काफी तारीफ की। साथ ही बोला कि उन्हें पाकिस्तानी क्रू के साथ काम करने में काफी खुशी होगी।

दरअसल, रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्यक्रम में ऑडियंस में से एक सदस्य ने उनसे पूछा था, “आज हमारे पास सऊदी अरब जैसे प्लेटफॉर्म हैं जहाँ मिलकर फिल्में की जा सकती हैं। मुझे आपको अपनी फिल्म के लिए साइन करवाकर खुशी होगी। क्या आप अपनी टीम के साथ मिलकर पाकिस्तानी टीम के साथ सऊदी अरब में काम करना चाहेंगे?”

इस सवाल पर रणबीर कपूर ने कहा, "बिलकुल सर। मुझे लगता है कि कलाकारों के लिए कोई सीमा नहीं होती, खासकर कला में ऐसा नहीं होता। पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री को द लीजेंड ऑफ मौला जट के लिए बहुत-बहुत शुभकामानाएँ। ये पिछले कुछ सालों की सबसे बड़ी हिट है जैसा कि हमने देखा। बिलकुल मुझे साथ काम करने में खुशी होगी।"

उनके इस बयान के बाद भारतीयों की सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया आ रही है। एक यूजर ने गुस्से में लिखा, “सारी की सारी टेंशन तो सेना को लेनी है। ये %$# तो पैसे कमाएँगे। अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता। लोगों को उर्दूवुड की ये गंदगी साफ करनी होगी।”

एक यूजर ने कहा, अगर ये आदमी पाकिस्तान के साथ काम करता है तो भारत में तो इसका करियर चौपट हो जाएगा।

इसी तरह एक ट्विटर यूजर ने कहा, “जब देश की,देश की सुरक्षा,सम्मान की बात आती है तो वहां ये बात कहना गलत है कि “नो बाउंड्री फॉर आर्टिस्ट्स।” इसका मतलब ये होता है कि वो खुद को देश के सम्मान से ऊँचा मानते हैं। एक सैनिक की भी किसी दूसरे देश से व्यक्तिगत शत्रुता नहीं है लेकिन वो देश के सम्मान और सुरक्षा को महत्व देते हैं।”

अविनाश झा लिखते हैं, “इसका परदादा पृथ्वीराज कपूर जान बचा के पाकिस्तान से भारत आया था और इसका पाकिस्तान प्रेम देखो फिर भी लोग इसकी फिल्म देखने जाते है।”

रणबीर कपूर पिछले दिनों अपनी ब्रह्मास्त्र फिल्म के कारण काफी सुर्खियों में रहे थे। उनके बीफ वाले बयान के वायरल होने के बाद उनके बॉयकॉट की माँगें उठीं थीं। इसके बाद वे और आलिया शादी के 6 महीने बाद माता-पिता बनने के कारण मीडिया की हेडलाइन्स में आए और अब उनका ये बयान लोगों में चर्चा का कारण है। उन्होंने द मौला जट्ट के हीरो फवाद खान के साथ अपनी आखिरी फिल्म 2016 में ‘ए दिल है मुश्किल’ की थी। इसके बाद उरी अटैक से भारतीय लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा उमड़ा और उनकी भावनाओं को देखते हुए पाकिस्तानी एक्टर-एक्ट्रेस के साथ फिल्में करना बंद कर दिया गया।