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UNO का इज़रायल के खिलाफ पक्षपात निंदनीय है - बंधक छुड़ाने के लिए UN ने क्या किया ?

सुभाष चन्द्र

कल यदि The Kashmir Files की तरह The Israel Files फिल्म बना कर हमास की निर्दोष इज़रायली बच्चों और महिलाओं पर की गई बर्बरता दिखाई जाए तो उसे हमारे देश के “सेकुलर” ही नहीं दुनिया के बहुत लोग Propaganda फिल्म बता देंगे जैसे एक महीने पहले कुछ हुआ ही नहीं - आज वह हमास सुरंगों में घुसा हुआ जान बचा रहा है, अस्पतालों / शरणार्थी शिविरों में छुप कर उन्हें ढाल बना रहा है और जब इज़रायल उन्हें खदेड़ने के लिए हमला कर रहा है तो उसे बदनाम कर रहा है -

एक तरफ हमास ने युद्ध शुरू किया वहशी दरिंदों की तरह इज़रायल ने निर्दोष नागरिकों पर हमला करके तो दूसरी तरफ हिज़्बुल्लाह भी कूद पड़ा है जबकि लेबनान कह रहा है कि वह इज़रायल से युद्ध नहीं चाहता - इतना ही नहीं दूर बैठे यमन के हुती विद्रोही भी इज़रायल से लड़ने आगे आ रहे हैं जो पहले ही सऊदी अरब से उलझे हुए हैं - ऐसे में सऊदी अरब हूती का साथ देगा या इज़रायल के साथ रहेगा, यह भी सवाल है 

तुर्किये का NATO में क्या रोल है -कितने आतंकी लड़ेंगे इजराइल से

उधर वैसे तो नॉर्वे समेत कुछ NATO सदस्य इज़रायल का विरोध कर रहे हैं परंतु तुर्किये तो ईरान की तरह मौका मिलते ही युद्ध में कूदने को तैयार है - NATO देशों पर यदि कोई हमला होता है तो सभी सदस्य देश उस NATO सदस्य पर हमला करने वाले देश के खिलाफ युद्ध करते हैं - लेकिन यदि तुर्किये इज़रायल के साथ युद्ध में उलझता है तो क्या NATO देश इज़रायल से युद्ध करेंगे जबकि अमेरिका और यूरोप के अनेक NATO सदस्य  देश इज़रायल के साथ खड़े हैं - ऐसे में तुर्किये का NATO में क्या रोल है, यह समझ से परे है - 

The United Nations General Assembly has passed a resolution calling for an immediate humanitarian truce between Israel and Hamas and demanding aid access to Gaza - 

इस प्रस्ताव में भारत ने वोट नहीं किया और इसमें भारत ने कुछ गलत भी नही किया क्योंकि UNO युद्ध शुरू होने से ही इज़रायल के विरुद्ध पक्षपात कर रहा है - इस प्रस्ताव में एक तरह से इज़रायल को हमास के बराबर बता दिया गया जबकि युद्ध की स्तिथि हमास ने खड़ी की और उसकी बर्बरता की कड़े शब्दों में एक बार भी UN ने निंदा नहीं की -

किस Humanitarian Truce की बात कर रहा है UN जब हमास ने 240 निर्दोष नागरिकों को बंधक बनाया हुआ है - उन बंधकों को रिहा कराने के लिए UN ने क्या कदम उठाए हैं, कोई नहीं जानता जबकि उसकी मंशा केवल इज़रायल को कटघरे में खड़े करने की है -

एक बात निश्चित है कि जिस दिन इज़रायल बंधकों को रिहा कराने में सफल हो गया, उस दिन “हमास” को क़यामत झेलनी पड़ेगी क्योंकि फिर हर सुरंग में छिपे हमास के आतंकियों को मारने के लिए इज़रायल कुछ भी कर सकता है -

ये सुरंग बनाने का धंधा जो हमास ने शुरू किया है, उसके लिए भारत को भी पाकिस्तान की हरकतों पर ध्यान रखना होगा क्योंकि यह शरारत पाकिस्तान ने भी की हो सकती है -

‘अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए ममता बनर्जी कर रहीं The Kashmir Files को बदनाम’ – विवेक अग्निहोत्री ने भेजा लीगल नोटिस

सुदीप्तो सेन की फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) का कट्टरपंथी इस्लामियों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। इस बीच  ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) को भी निशाना बनाया जा रहा। इसी कारण डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को एक कानूनी नोटिस भेजा है।

विवेक अग्निहोत्री ने मंगलवार (9 मई 2023) को अपने ट्विटर हैंडल पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने ट्वीट में लिखा: “मैंने, अभिषेक अग्रवाल और पल्लवी जोशी के साथ मिलकर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कानूनी नोटिस भेजा है। उन्होंने हमें और हमारी फिल्मों ‘द कश्मीर फाइल्स’ और अपकमिंग फिल्म ‘द दिल्ली फाइल्स’ को बदनाम करने के इरादे से झूठे और अपमानजनक बयान दिए हैं।”

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बात करते हुए विवेक अग्निहोत्री ने कहा, “पिछले कई वक्‍त से मैं खामोश था। कोई भी मुख्‍यमंत्री, चाहे वो दिल्‍ली के चीफ मिनिस्‍टर हों, या बड़े-बड़े जर्नलिस्ट हों, नेता हों, ये कभी भी उठ कर कह देते थे कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) एक प्रोपेगेंडा फिल्‍म है। अब मुझे लगा कि बहुत हो चुका है। जिसे भी लगता है कि यह प्रोपेंगेडा फिल्म है, वह आकर यह साबित करे कि इसमें कौन सा डायलॉग, कौन सा सीन, कौन सा फैक्‍ट है, जो प्रोपेगेंडा है। मैं, फिल्‍म के प्रोड्यूसर अभ‍िषेक अग्रवाल और पल्‍लवी जोशी जी अपनी तरफ से एक बहुत ही सख्‍त और लीगल कार्रवाई करेंगे।”

विवेक अग्‍न‍िहोत्री ने आगे कहा, “कल (8 मई 2023) को बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने ‘द कश्‍मीर फाइल्‍स’ और मेरी अगली फिल्‍म, जो बंगाल के नरसंहार पर आधारित है, उस पर आरोप लगाए। उन्‍होंने कहा कि मुझको ‘द कश्‍मीर फाइल्‍स’ बनाने के लिए या अगली फिल्‍म बनाने के लिए बीजेपी स्‍पॉन्‍सर करती है। फंड करती है। यह मेरे मन को आहत करने वाली, मेरे रोजगार को प्रभावित करने वाली और पूरी तरह से झूठ व बेबुनियाद बात है, जो पॉलिट‍िकल एजेंडा के तहत अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए ममता जी ने कही है।”

लीगल नोटिस क्यों भेजा, इस पर बात करते हुए विवेक अग्‍न‍िहोत्री ने आगे कहा: “मैंने, मेरे प्रोड्यूसर अभ‍िषेक अग्रवाल जी ने, पल्‍लवी जोशी जी ने तय किया है कि हम उनके (ममता बनर्जी) खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। हमने उनको लीगल नोटिस भेजा है। वह इस बात का जवाब दें कि उन्‍होंने जो बातें कहीं है, उसका तथ्‍य क्‍या है। अन्‍यथा यह मानहानि है। मेरी नजर में यह एक आदमी की रोजी-रोटी को प्रभावित करने के लिए गलत इरादे से दिया गया बयान है।”

विवेक अग्रिहोत्री के निर्देशन में बनी ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार पर आधारित है। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने फिल्म की सराहना की है।


‘The Kerala Story’ का स्टेटस लगाने पर बजरंग दल कार्यकर्ता को सिर कलम करने की धमकी

पीड़ित अभिषेक सरगरा (फोटो साभार: पत्रिका)
पहलवान, अभिनेता,निर्माता-निर्देशक दारा सिंह की फिल्म 'भक्ति में शक्ति' के लगभग 40 वर्षों बाद The Kashmir Files और The Kerala Story ऐसी फिल्में प्रदर्शित हुई हैं जिनमें इस्लामिक जुल्मों को परदे पर दिखाया है। सच हमेशा कड़वा होता है। अगर दारा सिंह की 'भक्ति में शक्ति' अगर आज प्रदर्शित होती, उसे भी कट्टरपंथियों की जेहादी हरकतों का सामना करना पड़ता। इस फिल्म को उन मंदबुद्धि और अशिक्षित बने शिक्षितों को देखनी चाहिए जो अकबर को महान बताते हैं।

    

राजस्थान के जोधपुर में फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ (The Kerala Story) का स्टेटस लगाने पर अभिषेक सरगरा नामक व्यक्ति के साथ कथित रूप से मारपीट की गई है। उसे सिर कलम करने की भी धमकी दी गई। अभिषेक बजरंग दल का कार्यकर्ता है। पीड़ित ने आरोपित अली, अमन और पिंटू के खिलाफ नामजद एफआईआर कराई है।

जब तक न्याय पालिकाएं, राज्य और केंद्र सरकारें इस 'सर तन से जुदा' करने वाले गैंग और इनको प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देने वालों पर पहाड़ बन नहीं टूटेंगे, देश में जेहादी हरकतें बंद नहीं होगी। इन लोगों को मिलने वाली हर सरकारी सुविधा से वंचित किया जाए। 

मामला जोधपुर के उदयपुर थाना क्षेत्र का है। भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित अभिषेक सरगरा का कहना है कि वह शुक्रवार (5 मई 2023) को ‘द केरला स्टोरी’ देखने के लिए थिएटर गया था। फिल्म देखने के बाद उसने फिल्म का पोस्टर अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर लगाया था। फिल्म की सराहना करते हुए उसने लिखा कि यह बहुत अच्छी फिल्म है और (इस्लामिक) धर्मांतरण से सुरक्षित रहने के लिए दुनिया की हर लड़की को इसे देखना चाहिए।

6 मई 2023 की रात वह अपने घर जा रहा था। इसी दौरान काली टंकी, मेड़ती गेट के पास अली, अमन और पिंटू ने उसका रास्ता रोक लिया। उन लोगों ने अभिषेक से कहा, “तुमने स्टेटस क्यों लगाया? तुम हमारे महजब को बदनाम कर रहे हो?” इस पर अभिषेक ने कहा कि उसने जो स्टेटस लगाया है, उस पर गलत क्या है? पीड़ित अभिषेक ने आगे कहा है कि उन लोगों ने फोन दिखाने के लिए कहा। उस समय उसका फोन घर पर चार्ज हो रहा था। इसलिए वह अपना स्टेटस दिखाने के लिए उन लोगों को घर ले आया।

इसके बाद जब उसने अपना स्टेस्ट आरोपितों को दिखाया तो उन लोगों ने अभिषेक के साथ मारपीट करनी शुरू कर दी। यही नहीं अली, अमन और पिंटू ने उसे सिर कलम करने की भी धमकी दी। पीड़ित का कहना है कि उसके स्टेटस में कुछ भी गलत नहीं था। किसी की मजहबी भावनाओं को ठेस पहुँचाने का भी उसका इरादा नहीं था। स्टेस्ट में सभी को ‘The Kerala Story’ देखने के लिए कहा गया था।

विहिप, बजरंग दल ने थाने पहुँच की कार्रवाई की माँग

इस घटना के बाद विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उदय मंदिर थाने पहुँचकर आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की। विहिप नेता जितेंद्र शर्मा ने कहा है कि वह आरोपितों को उन्हीं की भाषा में जवाब देंगे। वहीं, पुलिस मामले की जाँच कर कार्रवाई करने की की बात कर रही है। अब तक तीनों ही आरोपित पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

‘तब मेरे गाने तक से कश्मीर हटा दिया गया था’ : गीतकार संतोष आनंद ने बयां किया पुराना दर्द

आज विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) छद्दम सेक्युलरिस्टों को ही बेनकाब नहीं कर रही, बल्कि कश्मीर के माध्यम से भारत में उस वास्तविक इतिहास को उजागर करने के लिए मजबूर कर रही है, जिससे भारतवासियों विशेषकर वर्तमान युवा पीढ़ी को अँधेरे में रखा गया। जिसे कुर्सी के भूखे नेताओं ने पहले मुग़ल आक्रांताओं को महान भारतीय इतिहास को धूमिल किया, फिर इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने 'हिन्दू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' के नाम पर देश को भ्रमित किया गया।    
विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) की रिलीज के साथ ही जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) से 1990 के दौरान पलायन के लिए मजबूर हुए कश्मीरी हिंदुओं की बात हर कोई कर रहा है, लेकिन प्रख्यात गीतकार संतोष आनंद (Santosh Anand) ने खुलासा किया है कि 90 के दशक में आतंकवाद इस कदर अपने चरम पर था कि उनके गाने तक से कश्मीर का नाम हटा दिया गया था। वो कहते हैं कि कश्मीर में हुआ नरसंहार ऐसा सच है, जिसे न तो दबाया जा सकता है और न ही छुपाया जा सकता है।

प्रख्यात गीतकार और कवि संतोष आनंद ने यह बात 29 मार्च 2022 को प्रयागराज में कही। वो यहाँ कीडगंज में आयोजित ‘काव्य चकल्लस-2022’ के तहत हो रहे अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में शामिल होने के लिए आए थे। उन्होंने बताया कि 1992 में सुपरहिट फिल्म ‘तहलका’ आई थी। इसका एक गाना था ‘दिल दीवाने का डोला दिलदार के लिए …’ इस गाने को संतोष आनंद ने ही लिखा था। उन्होंने बताया कि ये गाना असली नहीं है। इसके असली बोल थे, ‘दिल दीवानों का डोला कश्मीर के लिए..हर देशभक्त ये बोला कश्मीर के लिए..मेरा रंग दे बसंती चोला कश्मीर के लिए।’

संतोष आनंद कहते हैं कि उस वक्त घनघोर आतंकवाद था। उस दौरान कश्मीर का नाम लेना भी मुनासिब नहीं था। मेरे गाने को रोक दिया गया। इसकी न्यूज तक नहीं आई। वो बताते हैं कि उनके गाने को लेकर एक समाचार के वरिष्ठ संवाददाता ने बुलाकर दिखाया था कि एक पेज की खबर बनी थी, लेकिन पूरे पेज पर विज्ञापन लगा दिया गया। उन्होंने ये भी कहा कि वो एक राष्ट्रवादी विचारधारा वाले व्यक्ति हैं।

द कश्मीर फाइल्स का पहला शो देखता

संतोष आनंद द कश्मीर फाइल्स को सच बताते हुए कहा, “मैं व्हील चेयर पर हूँ और थिएटर में शो देखने नहीं जा सकता। लेकिन हाँ मैं इसकी कल्पना अवश्य कर सकता हूँ। फिल्म अच्छी है, तभी चर्चित है। अगर मैं जा सकता तो इस फिल्म का पहला शो देखता मैं।”
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93 में गढ़ी मस्जिद में धमाके की ‘कहानी’, अब कश्मीरी हिंदुओं का नरंसहार लग रहा BJP का ‘प्रोपेगेंडा’
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विवेक अग्निहोत्री की फिल्म "द कश्मीर फाइल्स" ने
प्रख्यात गीतकार संतोष आनंद शोर, रोटी कपड़ा और मकान, क्रांति और प्रेम रोग समेत कई फिल्मों के लिए गीत लिख चुके हैं। वो फिल्मों के लिए 109 गीत लिख चुके हैं।

93 में गढ़ी मस्जिद में धमाके की ‘कहानी’, अब कश्मीरी हिंदुओं का नरंसहार लग रहा BJP का ‘प्रोपेगेंडा’

विवेक अग्निहोत्री की फिल्म "द कश्मीर फाइल्स" ने केवल कश्मीरी हिन्दुओं पर हुए अत्याचारों का पर्दाफाश किया है, बल्कि इस बात को भी साबित कर दिया है कि छद्दम सेक्युलरिस्ट्स सेकुलरिज्म के नाम पर किस तरह हिन्दुओं को अँधेरे में रखे हुए थे, जिसमें सबसे हाथ कुर्सी के भूखे हिन्दुओं का ही रहा है। जिस दिन हिन्दू इस छद्दम सेक्युलरिस्टों के जुंगल से बाहर आ जाएगा, इन कुर्सी के भूखे छद्दम सेक्युलरिस्ट हिन्दुओं को कहीं मुंह छुपाने की जगह नहीं मिलेगी।  

साल था 1993। तारीख थी 12 मार्च की। मुंबई में 12 सीरियल ब्लास्ट हुए। लेकिन तब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे शरद पवार ने 13वें ब्लास्ट की कहानी गढ़ी। कहा कि एक धमाका मस्जिद बंदर में भी हुआ है। मकसद था इस्लामी कट्टरपंथियों पर पर्दा डालना, क्योंकि असली धमाके ​हिंदू बहुल इलाकों को निशाना बनाकर किए थे। इतना ही नहीं उन्होंने इस्लामी आतंकियों को बचाने के लिए बम को ‘साउथ इंडियन आतंकियों’ वाला भी बताया था। अब इन्हीं शरद पवार को नब्बे के दशक में कश्मीर में हिंदुओं के नरसंहार पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ बीजेपी का प्रोपेगेंडा लग रही है। उनका यह भी कह​ना है कि इस फिल्म को प्रदर्शन के लिए पास ही नहीं किया जाना चाहिए था।

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुुख शरद पवार गुरुवार (31 मार्च 2022) को पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। यहाँ उन्होंने कहा कि बीजेपी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ के जरिए घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन को लेकर झूठा प्रोपेगेंडा फैलाकर देश में जहरीला माहौल बना रही है। पवार ने कहा कि ऐसी फिल्मों के प्रदर्शन की मँजूरी नहीं दी जानी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने इसे टैक्स फ्री कर दिया। जिन लोगों के पास देश को एक रखने की जिम्मेदारी है, वही लोगों को ऐसी फिल्म देखने को कह रहे हैं ताकि लोगों में गुस्सा भड़के।

पवार ने कहा कि यह सच है कि कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़नी पड़ी थी, लेकिन मुस्लिमों को भी उसी तरह से निशाना बनाया गया था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान स्थित आतंकी समूह कश्मीरी पंडितों और मुसलमानों पर हमले के लिए जिम्मेदार हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर मोदी सरकार सच में कश्मीरी पंडितों की परवाह करती है तो, उसे उनके पुनर्वास के लिए हर कोशिश करनी चाहिए। अल्पसंखकों को लेकर गुस्सा नहीं भड़काना चाहिए।

इसके अलावा राकांपा प्रमुख ने चर्चा में देश के पहले पीएम जवाहरलाल नेहरू को घसीटने पर भी बीजेपी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों को तब घाटी छोड़नी पड़ी थी, जब विश्वनाथ प्रताप सिंह पीएम थे। उन्होंने कहा कि उस समय वीपी सिंह की सरकार का समर्थन भाजपा कर रही थी। तब जगमोहन जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे। बाद में जगमोहन ने बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़े थे। इन्होंने ही कश्मीरी पंडितों की कश्मीर घाटी से निकलने में मदद की।

उन्होंने द कश्मीर फाइल्स फिल्म पर टिप्पणी के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घेरने के लिए भी बीजेपी की आलोचना की। पवार ने कहा कि राजनीतिक आंदोलनों का स्वागत है, लेकिन अल्पसंख्यकों के बारे में बोलने पर केजरीवाल की आलोचना की गई। भाजपा देश को एक अलग मार्ग पर ले जा रही है। वह देश की एकता को नष्ट कर रही है।

पवार ने इससे पहले 29 मार्च को एक ट्वीट करते हुए लिखा था, “आज देश में नफरत और झूठ की राजनीति के दौर में युवाओं का एकजुट होना बहुत जरूरी है। कश्मीरी पंडितों के समाधान की जगह राजनैतिक फायदा खोजने वाले लोगों से और सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग करने वाली सरकार से युवाशक्ति ही सच्चाई और एकता के दम पर मुकाबला कर सकती है।”

शुक्रवार (1 अप्रैल 2020) को निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “माननीय शरद पवार जी, भारत जैसे गरीब राष्ट्र में आपके हिसाब से एक राजनेता के पास अपनी क़ाबिलियत से कमाई, ज़्यादा से ज़्यादा कितनी संपत्ति होनी चाहिए? भारत में इतनी ग़रीबी क्यों है, यह आपसे बेहतर कौन जनता है। ईश्वर आपको लंबी आयु दे, सदबुद्धि दे।”

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी मोदी सरकार पर फिल्म के जरिए समाज में नफरत फैलाने का प्रयास करने का आरोप लगाया था। वहीं केरल कॉन्ग्रेस ने अपने ट्वीट में दावा किया था कि 1990 से 2007 के बीच आतंकियों ने 399 कश्मीरी पंडितों को मारा, लेकिन इस दौरान 15000 मुस्लिम भी आतंकियों द्वारा मारे गए।

‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म कश्मीरी पंडितों के कश्मीर से पलायन, नरसंहार और उस दौरान उन पर हुए अत्याचारों की कहानी पर बनी है। बॉक्स ऑफिस पर तो फिल्म शानदार प्रदर्शन कर ही रही है, कई राज्य इसे कर मुक्त कर चुके हैं।

‘मेरे पिता को 12 गोली मारी, लाश देखने की हिम्मत नहीं हुई’: कश्मीरी पंडित ने केजरीवाल से पूछा- क्या ये झूठी कहानी है?

                    अरविंद केजरीवाल के संवेदनहीन बयान के खिलाफ दिल्ली में सड़क पर उतरे कश्मीरी पंडित
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के बाहर कश्मीरी पंडितों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बारे में हम आपको बता चुके हैं। इसका सबसे मुख्य कारण था विधानसभा में सीएम द्वारा नब्बे के दशक में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बनी फिल्म ‘The Kashmir Files’ को टैक्स फ्री करने से इनकार करते हुए उनके और उनके विधायकों द्वारा इस पर ठहाके लगाना। यहाँ हम आपको उस विरोध प्रदर्शन के अन्य पहलुओं के बारे में भी बताएँगे।

इस विरोध प्रदर्शन को ‘India 4 Kashmir’ के बैनर तले आयोजित किया गया था। इस विरोध प्रदर्शन के बाद संस्था ने बयान भी जारी किया है और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार का मजाक बनाने का आरोप लगाया है। संगठन ने बुधवार (30 मार्च, 2022) को हुए विरोध प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बताते हुए कहा कि ‘I4K’ सीएम केजरीवाल के इस बयान की कड़ी निंदा करती है। ये संगठन कश्मीर में हिन्दुओं को उनकी खोई जमीन वापस दिलाने और साथ ही उन्हें सम्मान के साथ वहाँ बसाने के लिए अभियान चलाता है।

संगठन ने कहा कि इस विरोध प्रदर्शन में उसके कार्यकर्ताओं के अलावा सिविल सोसाइटी के कई लोग और कश्मीरी पंडित समाज के लोग भी शामिल थे। संगठन ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने जैसे पूर्ण रूप से कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का मजाक बनाया, उस पर प्रदर्शनकारियों ने आपत्ति जताई। बयान में ये भी कहा गया है कि उनके द्वारा इस नरसंहार को झूठा बताना कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए एक शॉक की तरह आया है और इस नरसंहार के पीड़ितों और सर्वाइवर्स का ये खुला अपमान है।

अपने बयान में ‘I4K’ ने कहा, “ये विरोध प्रदर्शन कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के पीड़ितों और बचे हुए लोगों के साथ समर्थन दिखाने का एक शांतिपूर्ण माध्यम था। ऐसे लोग, जिन्हें 1990 के बाद इस्लामी आतंकवाद ने बेघर कर दिया। आईपी कॉलेज से लेकर फ्लैगस्टाफ़ रोड तक प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर-बैनरों के साथ नारेबाजी करते हुए मार्च किया। अरविंद केजरीवाल के लिए गुलाब के फूल लाए गए थे और उनके लिए ‘Get Well Soon (जल्दी ठीक हो जाओ)’ के हस्तलिखित नोट्स भी छोड़े गए।”

           कश्मीरी पंडितों ने AAP विधायक राखी बिड़ला की सदन में ठहाके का भी पोस्टर के जरिए किया विरोध

‘I4K’ के नेशनल कोऑर्डिनेटर रोहित कचरू ने अरविंद केजरीवाल के बयान से दुःखी होकर कहा, “नरसंहार को नकारने का अर्थ हुआ कि आप इसे सक्रिय कर रहे हैं। ये एक अंतरराष्ट्रीय अपराध है और उससे भी ज्यादा ये अरविंद केजरीवाल ने इस नरसंहार को अंजाम देने वालों का साथ देते हुए पूरी ‘The Kashmir Files’ फिल्म को झूठा बता दिया। हम लोकतंत्र के मंदिर में इस तरह का बयान दिए जाने की कड़ी निंदा करते हैं।”

साथ ही उन्होंने कहा कि जिस दिन ये बयान दिया गया, वो दिल्ली विधानसभा के इतिहास का ‘काला दिन’ था। संगठन के जम्मू-कश्मीर कोऑर्डिनेटर विकास रैना ने बताया कि उनके पिता की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। उन्हें 12 गोलियाँ लगी थीं। उन्होंने याद किया कि वो अपने पिता के पार्थिव शरीर को भी देखना की हिम्मत नहीं कर पाए थे, जिन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया था। विकास रैना ने पूछा कि क्या ये एक ‘झूठी कहानी’ है?

‘कश्मीरी पंडितों का कसाई’ कहे जाने वाले बिट्टा कराटे के खिलाफ मामला अदालत में खुलवाने के लिए विकास रैना ने ही याचिका डाली है। कश्मीर में मारे गए हिन्दुओं को न्याय दिलाने के लिए वो आगे रहते हैं और कानूनी लड़ाई लड़ते हैं। इस विरोध प्रदर्शन में भाग लेने जयपुर से दिल्ली आईं ‘I4K’ की राजस्थान कोऑर्डिनेटर पूर्णिमा कौर ने भावुक होकर कहा कि एक माँ होने के नाते वो अरविंद केजरीवाल के इस बयान और उनकी हँसी से खासी आहत हैं।

उन्होंने कहा कि ये नरसंहार एक गंभीर मुद्दा है और इस पर इस तरह की हरकतें शोभा नहीं देतीं। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद से उन्हें ठीक से नींद भी नहीं आ रही है। ‘I4K’ ने स्पष्ट किया कि नरसंहार को नकारने का अर्थ है नरसंहार करना और संगठन हमेशा सच की आवाज़ उठाता रहेगा। साथ ही चेताया कि नरसंहार को नकारने के बाद इसे फिर दोहराया जाता है। साथ ही भारत सरकार से गुहार लगाई कि वो इसे नरसंहार का दर्जा देते हुए एक बिल संसद में पास करे।

विरोध प्रदर्शन में शामिल लोग ‘कुछ काटे गए कुछ जलाए गए, अपने घर से भगाए गए’ और ‘गिरिजा/टपलू जी पर हँसने वालों, शर्म करो-शर्म करो’ जैसे नारे भी लगा रहे थे। साथ ही ‘जिस कश्मीर को खून से सिंचा, वो कश्मीर हमारा है’ जैसे नारे भी लगे। साक्षी मट्टू ने कहा कि ये विरोध प्रदर्शन सिर्फ एक संगठन का नहीं है, बल्कि कश्मीरी पंडित समुदाय और सिविल सोसाइटी के लोग इकट्ठे हुए हैं। विरोध प्रदर्शन में लोगों ने राखी बिड़ला की तस्वीर भी लगाई हुई थी, जो सदन में अरविंद केजरीवाल के पीछे बैठ कर ठहाके लगा रही थीं।

कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार पर ठहाके लगाने वाली राखी बिड़ला की फैमिली फाइल्स : पिता पर रेप केस, भाई पर घरेलू हिंसा

'द कश्मीर फाइल्स' पर ठहाके लगाने वाली राखी बिड़ला 
आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने गुरुवार (24 मार्च, 2022) को विधानसभा में कश्मीरी हिंदुओं का मजाक उड़ाया। उन्होंने ‘द कश्मीर फाइल्स‘ (The Kashmir Files) को झूठी फिल्म बताते हुए राज्य में टैक्स फ्री करने से इनकार कर दिया। साथ ही उन्होंने फिल्म को टैक्स फ्री करने की बजाय यूट्यूब पर डालने की सलाह भी दी और भाजपा नेताओं पर कटाक्ष करते हुए उन्हें सुझाव दिया कि वह इस ‘झूठी’ फिल्म का प्रमोशन न करें। ऐसा करते हुए वह गंदे लगते हैं।

जिस समय अरविंद केजरीवाल कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार का खुले तौर पर माखौल उड़ा रहे थे, डिप्टी स्पीकर राखी बिड़ला उनके पीछे की सीट पर बैठी थीं। उन्हें  केजरीवाल के भाषणों पर खुलकर हँसते हुए देखा गया। बता दें कि राखी एक समय में कैबिनेट में महिला और सामाजिक न्याय का विभाग सँभाल चुकी हैं। इसके अलावा राखी ने अरविंद केजरीवाल द्वारा स्वतंत्र फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री को फिल्म को YouTube पर डालने की खुली चुनौती को ट्विटर पर भी शेयर किया।

हालाँकि विधानसभा में हँसी के जोरदार ठहाकों के साथ अरविंद केजरीवाल की हर बात की तारीफ करने वाली राखी बिड़ला के परिवार कितने शरीफ और सभ्य हैं, यह बात सबके सामने आ गई है। 

राखी बिड़ला के पिता पर रेप का केस दर्ज

2016 में, दिल्ली एमसीडी चुनावों के लिए 24 वर्षीय विवाहित महिला को टिकट देने के लिए लुभाने के आरोप में राखी बिड़ला के पिता भूपिंदर बिडलान और स्थानीय AAP नेता राम प्रताप गोयल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। महिला ने दोनों नेताओं पर रेप का आरोप लगाया था। बिडलान और गोयल के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 डी (गैंगरेप) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायत के मुताबिक आरोपित नेताओं ने MCB चुनाव में AAP से टिकट दिलाने का वादा करते हुए महिला से शारीरिक संबंध बनाया था।
पीड़िता ने गोयल पर कई जगहों पर शोषण करने का आरोप लगाया। इसके साथ महिला ने बताया कि गोयल ने उसे 5 नवंबर, 2016 को कनॉट प्लेस के एक होटल में भूपिंदर बिडलान के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। आरोप ये भी था कि आरोपितों ने पीड़िता का जीवन बर्बाद करने के लिए उसका MMS वीडियो भी बनाया।

राखी बिड़ला के भाई पर घरेलू हिंसा का आरोप

इससे पहले 2015 में, राखी बिड़ला की भाभी ने दिल्ली के रोहिणी (दक्षिण) पुलिस स्टेशन में अपने पति विक्रम बिडलान के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई थी और आरोप लगाया था कि उसने उसके साथ मारपीट की और बेल्ट से पीटा। अगले दिन राखी की भाभी प्रियंका बिडलान ने यह कहते हुए अपनी शिकायत वापस ले ली कि अगर भविष्य में ये बातें बढ़ीं, तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएँगी। उसी वर्ष मई में, राखी ने सार्वजनिक रूप से अपने भाइयों – विक्रम और वीरेंद्र बिडलान के साथ एक सार्वजनिक नोटिस में सभी संबंधों को तोड़ने का दावा किया है।
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‘चंद मुस्लिम वोटों के लिए.. महिलाओं-बच्चों की लाशों पर बेशर्म हँसी… केजरीवाल की करतूत अपनी माँ क
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राखी बिड़ला की विवादास्पद राजनीतिक पारी उनके परिजनों के ऊपर लगे आरपों पर खासी चर्चा चल रही है, खासकर उन्हें घाटी में कश्मीरी हिंदुओं की दुर्दशा पर ठहाके लगाते हुए देखने के बाद। नरसंहार में कई असहाय महिलाएँ भी शामिल थीं। केजरीवाल की विवादित टिप्पणी पर राखी बिड़ला की हँसी को देख नेटिज़न्स काफी हैरान थे।

‘The Kashmir Files को केजरीवाल ने टैक्स फ्री करने से किया इनकार, स्वरा-तापसी की फिल्मों को किया था TAX FREE

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और पलायन पर बनी फिल्म ‘The Kashmir Files’ को प्रदेश में टैक्स फ्री करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा में विपक्षी भाजपा द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने पर कहा कि निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को इस फिल्म को YouTube पर डाल देना चाहिए, ये फ्री ही फ्री हो जाएगी। उन्होंने पूछा कि फिल्म को टैक्स फ्री क्यों करा रहे हो?

उन्होंने कहा, “निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को इतना ही शौक है तो बोलो यूट्यूब पर डाल देगा, वहाँ सब कुछ फ्री है और सारे लोग देख लेंगे एक ही दिन के अंदर। टैक्स फ्री कराने की ज़रूरत ही क्या है?” AAP विधायकों ने अपनी पार्टी के सुप्रीमो के इस बयान का स्वागत करते हुए विधानसभा में मेज थपथपाए। सभी भाजपा शासित राज्यों ने संवेदनशील मुद्दे पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को टैक्स फ्री किया है।

हालाँकि, इस बयान के बाद अब दिल्ली के मुख्यमंत्री को लोग पुराने फैसले याद दिलाते हुए घेर रहे हैं। बता दें कि 22 अप्रैल, 2016 को उन्होंने स्वरा भास्कर की फिल्म ‘नील बटे सन्नाटा’ को टैक्स फ्री करने की घोषणा करते हुए कहा था कि सभी लोगों को ये मूवी ज़रूर देखनी चाहिए। इतना ही नहीं, उन्होंने तापसी पन्नू की फिल्म ‘साँड की आँख’ को भी 25 अक्टूबर, 2019 को टैक्स फ्री करने की घोषणा करते हुए कहा था कि सभी उम्र और जेंडर के लोगों को ये देखनी चाहिए। केजरीवाल की विचारधारा वालों की फिल्म होने के कारण इन फिल्मों को टैक्स फ्री किया गया था। 

‘द कश्मीर फाइल्स’ ने भारत में 200 करोड़ रुपए से भी अधिक कमा लिए हैं। दुनिया भर में इस फिल्म का प्रदर्शन शानदार रहा है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, असम, कर्नाटक, बिहार, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और त्रिपुरा जैसे राज्यों में इसे टैक्स फ्री का दर्जा दे दिया गया है। फिल्म की धुआँधार कमाई अब भी जारी है। इस फिल्म में अनुपम खेर, दर्शन कुमार, मिथुन धकरवर्ती, पल्लवी जोशी और पुनीत इस्सर मुख्य भूमिकाओं में हैं। 

‘द कश्मीर फाइल्स’ से डरी कांग्रेस सरकार: राजस्थान के कोटा में 1 महीने के लिए धारा 144, 5 से अधिक के जमा होने पर पाबंदी

The Kashmir Files प्रदर्शन से जनता के सामने सच्चाई आने से कांग्रेस सहित जितने भी छद्दम सेक्युलरिस्ट्स हैं, सब की नींद, रोटी और पानी तक हराम हो चूका है। देश में साम्प्रदायिकता और गंगा-जमुनी तहजीब खतरे में नज़र आने लगी है, लेकिन जब कश्मीर में मस्जिदों तक के इस्तेमाल कर हिन्दुओं पर अत्याचार किया जा रहा था, तब साम्प्रदायिक एकता और गंगा-जमुनी तहजीब कहाँ थी? जब इस्लामिक आतंकवाद को बचाने के लिए 'हिन्दू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' को बदनाम किया जा रहा था, तब सेकुलरिज्म और हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा कहाँ था? इतना ही नहीं, जब CAA विरोध प्रदर्शन एवं धरने में fuck Hindutva के नारे लगाए जा रहे थे, तब गंगा-जमुनी तहजीब किस बिल में घुस आराम कर रही थी? आखिर कब तक इन ढोंगी नारों से हिन्दुओं को छला जाता रहेगा? 

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राजस्थान के कोटा जिले के सिनेमाघरों में ‘द कश्मीर फाइल्स’ की स्क्रीनिंग के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर अधिकारियों ने 22 मार्च से 21 अप्रैल तक जिले भर में CRPC की धारा 144 लगाने का सोमवार (21 मार्च, 2022) को आदेश दिया है। कोटा के जिलाधिकारी ने एक आदेश में कहा कि द कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंगलवार 22 मार्च से 21 अप्रैल तक धारा 144 लागू है। जिसके तहत कहीं भी 5 लोगों से ज्यादा लोग जमा नहीं हो सकते हैं।

राजस्थान सरकार के अधिकारियों द्वारा कहा जा रहा है कि यह कदम कई त्योहारों से पहले सावधानी बरतने के लिए उठाया गया है। साथ ही नए आदेश के मुताबिक यह भी कहा गया है कि फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखने के लिए भीड़ नहीं जुटनी चाहिए।

जिला कलेक्टर एवं जिलाधिकारी (कार्यवाहक) राजुकमार सिंह की ओर से जारी आदेश में भीड़ के जमा होने, विरोध-प्रदर्शन करने, जुलूस और मार्च निकालने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। हालाँकि, इस दौरान चेती चंद, महावीर जयंती, गुड फ्राइडे, बैसाखी, जुमा-तुल-विदा के त्योहार भी पड़ेंगे। आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि यह आदेश सरकारी कामों जैसे कोविड टीकाकरण और पुलिस कार्यक्रमों पर लागू नहीं होगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस पाबंदी को लेकर फिल्म डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने भी अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ के डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से इस मामले में दखल देने की माँग की है।

वहीं इस मामले को लेकर बीजेपी विधायक रामलाल शर्मा ने कहा, “राजस्थान सरकार का मानसिक दिवालियापन निकल चुका है। जिस तरह के सरकारी आदेश आ रहे हैं उनकी पालना होगी या अवहेलना? ऐसे आदेश राजस्थान सरकार की मानसिकता का परिचय दे रहे हैं। धारा 144 लगा कर क्या साबित कर रहा प्रशासन? क्या केवल कोटा में ही मनाए जाएँगे त्योहार?”

रामलाल ने राजस्थान सरकार से माँग करते हुए कहा, “अगर कॉन्ग्रेस की अशोक गहलोत सरकार कश्मीर फाइल को प्रतिबंधित करना चाहती है तो अपनी मंशा साफ करे और अगर ऐसा नहीं है तो सरकार इस आदेश को वापस ले।”

यही नहीं बीजेपी से कोटा उत्तर पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजाल ने भी धारा 144 लागू करने के राजस्थान सरकार के आदेश पर निशाना साधा और कहा, “मंगलवार को कोटा उत्तर विधानसभा क्षेत्र में एक विशाल ‘चंडी मार्च’ निकाला जाएगा। इसलिए धारा 144 लगाई गई थी और ‘द कश्मीर फाइल्स’ सिर्फ एक बहाना है।”

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The Kashmir Files : ‘दोबारा शुरू हो कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार की जाँच’: राष्ट्रपति को पहुँची याचिका

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The Kashmir Files : ‘दोबारा शुरू हो कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार की जाँच’: राष्ट्रपति को पहुँची याचिका

11 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘द कश्मीर फाइल्स’ को मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, त्रिपुरा, गोवा, उत्तराखंड में टैक्स फ्री कर दिया गया है। फिल्म 1990 में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर है और इसे डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित किया गया है। फिल्म की मुख्य भूमिकाओं में अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी हैं।

The Kashmir Files : विवेक अग्निहोत्री को ऐसी धमकी ‘बेटे-बहू-बच्चे… श्रीनगर आओ, सबको मार डालेंगे’ देने वाले को तुरंत गिरफ्तार किया जाए

                                 विवेक अग्निहोत्री ने शेयर किया कश्मीरी पंडित को भेजा गया धमकी भरा पत्र
‘द कश्‍मीर फाइल्‍स’ (The Kashmir Files) ने कश्मीर में हिंदुओं के नरसंहार की कई दबी कहानियों को स्वर देने का काम किया है। विवेक अग्निहोत्री की इस फिल्म के रिलीज होने के बाद लोग खुद सामने आकर दुनिया के साथ आपबीती साझा कर रहे हैं। इस बीच अग्निहोत्री ने एक लेटर ट्विटर पर शेयर किया है। इसके जरिए उन्होंने यह बताने की कोशिश है कि उस वक्त कश्मीर के हिंदुओं को किस तरह धमकाया जा रहा था।

कश्मीर में कश्मीरी हिन्दू पंडितों पर हुए अत्याचार को सार्वजनिक करने पर परिवार सहित मारने की धमकी देने का मतलब है कि कट्टरपंथी अपनी काली करतूतों के सामने आने पर जिस तरह निर्माता विवेक को धमकाने वाले और उनके समर्थन में आने वालों पर भी नकेल डालनी समय की मांग है। ऐसे उपद्रवियों पर अगर समय रहते कार्यवाही नहीं की, कश्मीर पुनः दोहराया जा सकता है। 

विवेक अग्निहोत्री द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किए गए पत्र में लिखा है, “तुम आईबी हो। तुम्हारी पत्नी आईबी है। हम सभी को मार डालेंगे। तुम्हारे 3 बेटे, 2 बहू और उनके बच्चे। श्रीनगर आओ, तुम्हारी हत्या कर दी जाएगी। सावधान रहो, तुम दुश्मन हो।” बता दें कि ये पत्र उस वक्त का है जब कश्मीर में पंडितों पर अत्याचार हो रहा था। लोगों को सरेआम धमकियाँ दी जा रही थी। उन्हें भारत सरकार का जासूस बताया जा रहा था।

 

इस लेटर को शेयर करते हुए अग्निहोत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार जताया है। उन्होंने लिखा है, “शुक्रिया पीएमओ इंडिया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भारत के सबसे बड़े मूल्य– सत्य के बारे में सभी को याद दिलाने के लिए। यही कश्मीर की सच्चाई है। अगर कोई इस पर विवाद करता है, तो मैं इस तरह के हजारों मूल दस्तावेज पेश कर सकता हूँ। सत्यमेव जयते।” 

मोदी भी इस फिल्म की तारीफ कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि ऐसी फिल्में कई बार बनाई जानी चाहिए। बीजेपी संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ का जिक्र करते हुए इसके डायरेक्टर को न‍िडर भी बताया था। पीएम ने कहा था कि जो लोग हमेशा फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के झंडे लेकर घूमते हैं, वह पूरी जमात बौखला गई है। इस फ‍िल्म की तथ्यों और आर्ट के आधार पर विवेचना करने के बजाय उसको हतोत्साह‍ित करने की मुह‍िम पूरे इको-स‍िस्टम ने चला रखी है।

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The Kashmir Files : इस्लामी आतंकियों के बचाव में उतरी कांग्रेस ;‘399 कश्मीरी पंडित मरे, मुस्लिम तो 15000 मारे गए’

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The Kashmir Files : इस्लामी आतंकियों के बचाव में उतरी कांग्रेस ;‘399 कश्मीरी पंडित मरे, मुस्लिम तो 15000 मारे गए’

द कश्मीर फाइल्स में आतंकी कमांडर फारूक मलिक डार उर्फ बिट्टा कराटे की भूमिका निभाने वाले चिन्मय मंडेलकर ने कहा था, “जब मैंने पहली बार स्क्रिप्ट पढ़ी तो चौंक गया था। द कश्मीर फाइल्स को देखने के बाद लोग अब जो महसूस कर रहे हैं, वही मैंने स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद अनुभव किया। मैंने विवेक से पूछा- क्या यह सब सच है? क्या वास्तव में ऐसा हुआ है? उन्होंने बहुत ही शांत स्वर में मुझसे कहा- स्क्रिप्ट में जो कुछ भी लिखा गया है वह वास्तव में जो हुआ है उसका सिर्फ 35 प्रतिशत है, क्योंकि वास्तव में जो हुआ है वह कहीं अधिक क्रूर है।”