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नया भारत घर में घुसकर मारता है- मोदी के बयान से डरे पाकिस्तान ने UN में लगाई गुहार

2014 चुनाव से पहले जिस पाकिस्तान का हौआ दिखाकर विपक्ष जनता को डराता था, कहीं इस्लामिक आतंकी हमला होने पर अमेरिका के आगे रोना-रोया जाता कि 'पाकिस्तान ने ये कर दिया या वो कर दिया', अगर कोई आतंकवादी अपनी छवि बनाए रखने के पकड़ लिया जाता था, उसे 'दामाद' की तरह जेल में रखा जाता था, कालचक्र घुमा यानि आज वही भारत है जो 2014 चुनाव के बाद से पाकिस्तान पर हावी है। कांग्रेसी आज भी पाकिस्तान जाकर मोदी को हराने उसके आगे नाक रगड़ते देखे जा सकते हैं। कांग्रेस और पाकिस्तान का क्या रिश्ता है, वह तो कांग्रेस ही बता सकती है। 

लेकिन इतना जरूर है, पाकिस्तान को ख़त्म करने किसी युद्ध की जरुरत नहीं, भारत में कांग्रेस जितनी कमजोर होगी, उससे ज्यादा पाकिस्तान कमजोर होगा। अंजाम सबके सामने है, 10 साल पहले पाकिस्तान की क्या हालत थी और 10 साल के देख लो क्या से क्या हो रहा है पाकिस्तान का। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले पाकिस्तान को सुधरने के लिए अनेक मौके दिए, लेकिन आतंकियों के इशारे पर चलने वाली सरकार की समझ में नहीं आया, नतीजा मोदी ने विश्व में उसी पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करवा दिया। पहले किसी आतंकवादी हमला होने पर कोई हमारी नहीं सुनता था, आज वही विश्व है वो पाकिस्तान की नहीं सुन रहा। क्योकि 10 साल पहले आतंकवादी हमला होने पर पिछली सरकारें 'हिन्दू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' का नाम देकर बेकसूर साधु/संत और साध्वियों को जेलों में डाल हिन्दुओं को बदनाम करने की खतरनाक साज़िश पर काम किया जा रहा था। आज वही सनातनी है, जिसे डराने कट्टरपंथियों की बाढ़ आयी हुई है। हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने पर 'सर तन से जुदा' करने वाले गैंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

ये नया भारत है और घर में घुसकर मारता है- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस बयान से पड़ोसी पाकिस्तान खौफ में है। प्रधानमंत्री मोदी के बयान से डरे पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में कहा है कि नया भारत घर में घुसकर मारता है। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी राजदूत मुनीर अकरम ने कहा कि भारत उसके देश पाकिस्तान में घुसकर लोगों को मार रहा है। उन्होंने कहा कि ‘आज भारत के दुश्मन भी जानते हैं कि यह मोदी है। यह नया भारत है। यह नया भारत आपके घर आता है और आपको मारता है। ये नया भारत एक खतरनाक इकाई है। यह सुरक्षा नहीं, बल्कि असुरक्षा की गारंटी देता है।’ इसके पहले उन्होंने यह भी कहा कि ‘दो दिन पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने सुरक्षा परिषद के साथ की संयुक्त राष्ट्र महासचिव और महासभा के अध्यक्ष को पाकिस्तान में भारत द्वारा निशाना बनाकर की गई हत्याओं के बारे में जानकारी दी थी। दूसरे क्षेत्र में घुसकर की जाने वाली ये हत्याएं सिर्फ पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं हैं। ये कनाडा में राजनीतिक विरोधियों की हत्या और अमेरिका में हत्या के प्रयास के साथ ही अन्य देशों तक पहुंच गई हैं।’ संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि मुनीर अकरम के इस बयान की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। 



UNO, अमेरिका या अन्य कोई भी देश, जितने चाहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी भारत से ले जाएं, परंतु हमारे कानून CAA पर ज्ञान देना बंद करें; अमेरिका अपना कानून देखे; चीन को कुछ कहने की हिम्मत करो -

 सुभाष चन्द्र

अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी आयोग ने भारत के नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) लागू करने के भारत सरकार द्वारा जारी नियमों की अधिसूचना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि “धर्म या आस्था के आधार पर किसी को भी नागरिकता से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। 

आयोग के अध्यक्ष स्टीफन स्नेक ने कहा कि “पड़ोसी देशों से भागकर भारत में शरण लेने आए लोगों के लिए तो CAA में धार्मिक अनिवार्यता का प्रावधान है और हिंदुओं, पारसियों, सिखों, बौद्धों, जैनियों और ईसाइयों के लिए तो त्वरित नागरिकता का मार्ग प्रशस्त है लेकिन मुसलमानों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है

स्टीफन स्नेक ने कहा कि इस कानून का मकसद यदि धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा करना होता तो इसमें बर्मा के रोहिंग्या मुसलमान, पाकिस्तान के अहमदिया मुसलमान और अफगानिस्तान के हज़ारा शिया भी शामिल होते। भारत सरकार अतीत में भारत के मानवाधिकारों के रिकॉर्ड पर टिप्पणी करने के लिए USIRF के क्षेत्राधिकार को खारिज कर चुका है

एक कहावत है - “तू कौन, मैं खामखां” और यह अमेरिकी संस्था का रोल ऐसे ही “खामखां” का रोल है भारत के लिए। स्टीफन इतने शातिर हैं कि उन्होंने इन पड़ोसी देशों का नाम नहीं लिया और यह नहीं बताया कि ये तीनो इस्लामिक देश हैं, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान और केवल इतना कहा कि लोग वहां से भाग कर आए हैं लेकिन जानबूझकर कहना भूल गए कि उन देशों से “प्रताड़ित” होकर भागना पड़ा

अमेरिका को कभी यह दिखाई नहीं दिया कि इन तीनों देशों में अल्पसंख्यकों (हिंदुओं, पारसियों, सिखों, बौद्धों, जैनियों और ईसाइयों) की क्या हालत है खासकर हिंदुओं की जो पाकिस्तान में 1947 के 22% से घटकर 2% रह गए। इन अल्पसंख्यकों को भारत के सिवाय कौन शरण दे सकता है। ये इस्लामिक देश होते हुए मुसलमानों को भी ठीक से नहीं रख सकते तो फिर तो साफ़ है इन्होने अल्पसंख्यकों की क्या दुर्दशा की होगी, वह कल्पना से परे है

भारत कोई धर्मशाला नहीं है जहां सभी देशों से मुसलमान आकर भारत में बस जाएं। अमेरिका को यदि लगता है रोहिंग्या, पाकिस्तान के अहमदिया और अफगानिस्तान के हज़ारा मुस्लिम पीड़ित हैं तो अमेरिका समेत सभी देश और UNO जिनकों उनसे हमदर्दी हैं, उन्हें अपने अपने देश में शरण दे सकते हैं। भारत में तो बांग्लादेशी और रोहिंग्या करोड़ों हैं, जितने मर्जी ले जाए अमेरिका क्योंकि भारत की आबादी तो 140 करोड़ है और अमेरिका की मात्र 34 करोड़ जिसके पास बहुत भूभाग है जहां उन्हें रखा जा सकता है

अमेरिका ने इन तीन इस्लामिक देशों को छोड़िए कभी चीन को भी मुसलमानों की रक्षा के लिए प्रवचन नहीं दिए और आज ही खबर है कि ईरान ने अल्पसंख्यक बहाई समुदाय के लोगों पर बंद कमरों में भी पूजा पर प्रतिबंध लगा दिया है। जाहिर है यह सभी अल्पसंख्यकों पर लागू होगा

अमेरिका हमें उपदेश देने से पहले अपने गिरेबान में झाँक कर देखो। क्या अमेरिका ने  भारत के कानून CAA से मिलता जुलता कानून नहीं बनाया है। अमेरिका ने कानून बनाया है “The Spectrum Amendment और The Lautenberg Amendment”  जिसके अनुसार ईरान में रहने वाले ईसाइयों को कहा गया है कि यदि वे ईरान छोड़ कर आना चाहते हैं तो अमेरिका आ सकते हैं परंतु मुसलमानों को आने की छूट नहीं है

CAA पर छातियां पीटने से पहले अमेरिका अपना कानून देखे। खुद मुसलमानों को नहीं लेना चाहता और हमें कहते हैं कि हर देश के मुसलमानों को शरण दे दो। कितना दोगलापन है?

युग परिवर्तन का समय चल रहा है : OIC और पाकिस्तान भारत की मुस्लिम कौम को न भड़काएं

सुभाष चन्द्र

कुछ दिन पहले हुई श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर इस्लामिक देशों के संगठन OIC ने बवाल काटने की कोशिश की है और कहा है कि “भारतीय शहर अयोध्या में जिस जगह पर पहले बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी, वहीँ राम मंदिर का निर्माण और इसकी प्राण प्रतिष्ठा गंभीर चिंता का विषय है”

जिस तरह आज मुस्लिम देशों में किसी न किसी कारण उपद्रव हो रहे हैं, क्या उसी तर्ज पर इस्लामिक देशों के संगठन और पाकिस्तान वही स्थिति भारत में कर भारतीय मुसलमानों को बलि का बकरा बनाकर उनकी लाशों पर सियासत कर अपनी तिजोरियां भरने की तैयारियां कर रहे हैं? भारत सरकार के साथ-साथ भारतीय मुसलमानों को भी इस मुद्दे पर गंभीरता से सोंचना होगा।  

इसके साथ ही पाकिस्तान के राजदूत मुनीर आलम ने 27 जनवरी को UNO को पत्र लिख कर राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा पर आपत्ति जताते हुए कहा कि “मंदिर निर्माण से भारत के मुसलमानों के सामाजिक,आर्थिक और राजनीतिक हितों पर चोट पहुंची है जिससे इस क्षेत्र में सौहार्द और शांति भंग हो सकती है और इसलिए UNO को भारत में Islamic Heritage sites की रक्षा के लिए दखल देना चाहिए। यह कोई अकेला मामला नहीं है क्योंकि इसके अलावा ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा की मस्जिद पर भी टूटने का खतरा मंडरा रहा है”

सरकार को फरवरी 2, 2024 को मुस्लिम पर्सनल बोर्ड में कानून की किताबों को आग लगाए जाने की बात का संज्ञान लेकर सख्ती से पेश आना चाहिए, अन्यथा इनकी भड़काऊ हरकतें रुकने का नाम नहीं लेंगी और देश को दंगों की आग में झोंक कर लाशों पर मालपुए खाने बैठ जायेंगे।  

लेखक 
इसका मुख्य कारण है, भारतीयों का भारत के वास्तविक गौरवशाली इतिहास से अज्ञान होना। जब तक पाठ्य पुस्तकों से भ्रमित इतिहास को दूर नहीं किया जाएगा, जनता को भड़काया जाता रहेगा। 2024 में वापस आने पर मोदी सरकार इस अति गंभीर मुद्दे पर काम करना होगा, गलत इतिहास लिखने वाले इतिहासकारों पर कार्यवाही करनी होगी। उनको मिली समस्त सरकारी सुविधाओं को वापस लेना होगा, और इसका विरोध करने वालों पर कानूनी कार्यवाही करनी होगी। दूसरे, पत्थरबाजों पर blind firing और जिस स्थान से पत्थरों के जमावड़े के सबूत मिलते ही उस जगह पर बुलडोज़र चलवाकर उस स्थान को कुछ समय अपने अधिकार में लेकर नीलम कर पुलिस और अन्य सुरक्षा बल को लगाए जाने का खर्च की भरपाई करने का कानून बनाए।  

इसके अलावा भारत के कट्टरपंथी संगठनों ने आल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख डॉ उमर अहमद इलियासी के खिलाफ उनके प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने के खिलाफ “फतवा” जारी किया है। यानी इमामों के इमाम को भी बताया जा रहा है कि उन्हें इस्लाम की जानकारी नहीं है, कुछ समय पहले इलियासी साहब ने संघ प्रमुख को “राष्ट्रपिता” कह दिया था जिस पर भागवत जी ने उन्हें रोक दिया था कि ऐसा कहना ठीक नहीं है

इलियासी साहब को मुस्लिमों ने फतवे में कहा कि “एक मुस्लिम को किसी अन्य धर्म के मंदिर में नहीं जाना चाहिए और इन संगठनों को लगा कि इलियासी का अयोध्या जाना इस्लाम के सिद्धांतो के खिलाफ है यानी हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे का नारा एक फ्रॉड है क्योंकि यह फतवा बता रहा है कि इस्लाम में दूसरे धर्मों के लिए कोई सहिष्णुता है ही नहीं हिंदुओं का फिर मस्जिदों और दरगाहों पर जाना भी बंद करो

इमाम इलियासी ने फतवे पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ़ शब्दों में कहा कि जो लोग मेरे अयोध्या जाने से मुझसे नफरत करते हैं, वो पाकिस्तान चले जाएँ, मैंने प्यार का पैगाम दिया है और न मैं माफ़ी माँगूँगा और न इस्तीफा दूंगा

OIC और पाकिस्तान और भारतीय मुस्लिम समुदाय को एक बात समझ आनी चाहिए कि हिंदू बहुल देश होते हुए भी हिन्दू समुदाय कानूनी तौर पर मुगलों द्वारा तोड़े गए मंदिरों को वापस लेने के कोशिश कर रहा है जबकि ऐसा इस्लामिक देश में सम्भव नहीं था 

OIC और पाकिस्तान केवल भारत की केवल एक जबरन बनी हुई मस्जिद पर बने मंदिर की बात क्यों करते हैं जबकि वे कभी चीन में वामपंथी सरकार द्वारा तोड़ी गई 1500 मस्जिदों के लिए नहीं बोलते और कभी हाल के युद्ध में गाजा में ध्वस्त हुई 200 मस्जिदों की बात नहीं करते OIC ने कभी पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अन्य इस्लामिक देशों में तोड़े गए मंदिरों, गुरुद्वारों या बौद्ध प्रतिमाओं के लिए आवाज़ नहीं उठाई

पाकिस्तान को भारत के मुसलमानों की चिंता छोड़ अपने घर को संभालना चाहिए अपना मुल्क लेकर भी उस समय के मुसलमानों ने क्या पा लिया जो पूरा मुल्क आज कटोरा हाथ में लिए घूम रहा है फिर भी यदि पाकिस्तान को भारत के मुसलमानों की चिंता है तो जितने मर्जी यहां से ले जाए, अपने मुल्क में रखने की हिम्मत भी होनी चाहिए OIC पहले अपने इस्लामिक देशों के झगड़े तो सुलझा ले जहां हर मुल्क अपने तरह का इस्लाम चला रहा है

आज समय बदल रहा है, आज के मुस्लिम समाज का मुगलों से किसी तरह का कोई लगाव रखने का कोई औचित्य नहीं है मुस्लिम समाज को सच्चाई से रूबरू होकर अपने को बदलना चाहिए वरना समय उसे बदल देगा

UNO का इज़रायल के खिलाफ पक्षपात निंदनीय है - बंधक छुड़ाने के लिए UN ने क्या किया ?

सुभाष चन्द्र

कल यदि The Kashmir Files की तरह The Israel Files फिल्म बना कर हमास की निर्दोष इज़रायली बच्चों और महिलाओं पर की गई बर्बरता दिखाई जाए तो उसे हमारे देश के “सेकुलर” ही नहीं दुनिया के बहुत लोग Propaganda फिल्म बता देंगे जैसे एक महीने पहले कुछ हुआ ही नहीं - आज वह हमास सुरंगों में घुसा हुआ जान बचा रहा है, अस्पतालों / शरणार्थी शिविरों में छुप कर उन्हें ढाल बना रहा है और जब इज़रायल उन्हें खदेड़ने के लिए हमला कर रहा है तो उसे बदनाम कर रहा है -

एक तरफ हमास ने युद्ध शुरू किया वहशी दरिंदों की तरह इज़रायल ने निर्दोष नागरिकों पर हमला करके तो दूसरी तरफ हिज़्बुल्लाह भी कूद पड़ा है जबकि लेबनान कह रहा है कि वह इज़रायल से युद्ध नहीं चाहता - इतना ही नहीं दूर बैठे यमन के हुती विद्रोही भी इज़रायल से लड़ने आगे आ रहे हैं जो पहले ही सऊदी अरब से उलझे हुए हैं - ऐसे में सऊदी अरब हूती का साथ देगा या इज़रायल के साथ रहेगा, यह भी सवाल है 

तुर्किये का NATO में क्या रोल है -कितने आतंकी लड़ेंगे इजराइल से

उधर वैसे तो नॉर्वे समेत कुछ NATO सदस्य इज़रायल का विरोध कर रहे हैं परंतु तुर्किये तो ईरान की तरह मौका मिलते ही युद्ध में कूदने को तैयार है - NATO देशों पर यदि कोई हमला होता है तो सभी सदस्य देश उस NATO सदस्य पर हमला करने वाले देश के खिलाफ युद्ध करते हैं - लेकिन यदि तुर्किये इज़रायल के साथ युद्ध में उलझता है तो क्या NATO देश इज़रायल से युद्ध करेंगे जबकि अमेरिका और यूरोप के अनेक NATO सदस्य  देश इज़रायल के साथ खड़े हैं - ऐसे में तुर्किये का NATO में क्या रोल है, यह समझ से परे है - 

The United Nations General Assembly has passed a resolution calling for an immediate humanitarian truce between Israel and Hamas and demanding aid access to Gaza - 

इस प्रस्ताव में भारत ने वोट नहीं किया और इसमें भारत ने कुछ गलत भी नही किया क्योंकि UNO युद्ध शुरू होने से ही इज़रायल के विरुद्ध पक्षपात कर रहा है - इस प्रस्ताव में एक तरह से इज़रायल को हमास के बराबर बता दिया गया जबकि युद्ध की स्तिथि हमास ने खड़ी की और उसकी बर्बरता की कड़े शब्दों में एक बार भी UN ने निंदा नहीं की -

किस Humanitarian Truce की बात कर रहा है UN जब हमास ने 240 निर्दोष नागरिकों को बंधक बनाया हुआ है - उन बंधकों को रिहा कराने के लिए UN ने क्या कदम उठाए हैं, कोई नहीं जानता जबकि उसकी मंशा केवल इज़रायल को कटघरे में खड़े करने की है -

एक बात निश्चित है कि जिस दिन इज़रायल बंधकों को रिहा कराने में सफल हो गया, उस दिन “हमास” को क़यामत झेलनी पड़ेगी क्योंकि फिर हर सुरंग में छिपे हमास के आतंकियों को मारने के लिए इज़रायल कुछ भी कर सकता है -

ये सुरंग बनाने का धंधा जो हमास ने शुरू किया है, उसके लिए भारत को भी पाकिस्तान की हरकतों पर ध्यान रखना होगा क्योंकि यह शरारत पाकिस्तान ने भी की हो सकती है -