कुछ दिन पहले हुई श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर इस्लामिक देशों के संगठन OIC ने बवाल काटने की कोशिश की है और कहा है कि “भारतीय शहर अयोध्या में जिस जगह पर पहले बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी, वहीँ राम मंदिर का निर्माण और इसकी प्राण प्रतिष्ठा गंभीर चिंता का विषय है”।
जिस तरह आज मुस्लिम देशों में किसी न किसी कारण उपद्रव हो रहे हैं, क्या उसी तर्ज पर इस्लामिक देशों के संगठन और पाकिस्तान वही स्थिति भारत में कर भारतीय मुसलमानों को बलि का बकरा बनाकर उनकी लाशों पर सियासत कर अपनी तिजोरियां भरने की तैयारियां कर रहे हैं? भारत सरकार के साथ-साथ भारतीय मुसलमानों को भी इस मुद्दे पर गंभीरता से सोंचना होगा।
इसके साथ ही पाकिस्तान के राजदूत मुनीर आलम ने 27 जनवरी को UNO को पत्र लिख कर राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा पर आपत्ति जताते हुए कहा कि “मंदिर निर्माण से भारत के मुसलमानों के सामाजिक,आर्थिक और राजनीतिक हितों पर चोट पहुंची है जिससे इस क्षेत्र में सौहार्द और शांति भंग हो सकती है और इसलिए UNO को भारत में Islamic Heritage sites की रक्षा के लिए दखल देना चाहिए। यह कोई अकेला मामला नहीं है क्योंकि इसके अलावा ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा की मस्जिद पर भी टूटने का खतरा मंडरा रहा है”।
सरकार को फरवरी 2, 2024 को मुस्लिम पर्सनल बोर्ड में कानून की किताबों को आग लगाए जाने की बात का संज्ञान लेकर सख्ती से पेश आना चाहिए, अन्यथा इनकी भड़काऊ हरकतें रुकने का नाम नहीं लेंगी और देश को दंगों की आग में झोंक कर लाशों पर मालपुए खाने बैठ जायेंगे।
इसका मुख्य कारण है, भारतीयों का भारत के वास्तविक गौरवशाली इतिहास से अज्ञान होना। जब तक पाठ्य पुस्तकों से भ्रमित इतिहास को दूर नहीं किया जाएगा, जनता को भड़काया जाता रहेगा। 2024 में वापस आने पर मोदी सरकार इस अति गंभीर मुद्दे पर काम करना होगा, गलत इतिहास लिखने वाले इतिहासकारों पर कार्यवाही करनी होगी। उनको मिली समस्त सरकारी सुविधाओं को वापस लेना होगा, और इसका विरोध करने वालों पर कानूनी कार्यवाही करनी होगी। दूसरे, पत्थरबाजों पर blind firing और जिस स्थान से पत्थरों के जमावड़े के सबूत मिलते ही उस जगह पर बुलडोज़र चलवाकर उस स्थान को कुछ समय अपने अधिकार में लेकर नीलम कर पुलिस और अन्य सुरक्षा बल को लगाए जाने का खर्च की भरपाई करने का कानून बनाए। लेखक
इसके अलावा भारत के कट्टरपंथी संगठनों ने आल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख डॉ उमर अहमद इलियासी के खिलाफ उनके प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने के खिलाफ “फतवा” जारी किया है। यानी इमामों के इमाम को भी बताया जा रहा है कि उन्हें इस्लाम की जानकारी नहीं है, कुछ समय पहले इलियासी साहब ने संघ प्रमुख को “राष्ट्रपिता” कह दिया था जिस पर भागवत जी ने उन्हें रोक दिया था कि ऐसा कहना ठीक नहीं है।
इलियासी साहब को मुस्लिमों ने फतवे में कहा कि “एक मुस्लिम को किसी अन्य धर्म के मंदिर में नहीं जाना चाहिए और इन संगठनों को लगा कि इलियासी का अयोध्या जाना इस्लाम के सिद्धांतो के खिलाफ है। यानी हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे का नारा एक फ्रॉड है क्योंकि यह फतवा बता रहा है कि इस्लाम में दूसरे धर्मों के लिए कोई सहिष्णुता है ही नहीं। हिंदुओं का फिर मस्जिदों और दरगाहों पर जाना भी बंद करो।
इमाम इलियासी ने फतवे पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ़ शब्दों में कहा कि जो लोग मेरे अयोध्या जाने से मुझसे नफरत करते हैं, वो पाकिस्तान चले जाएँ, मैंने प्यार का पैगाम दिया है और न मैं माफ़ी माँगूँगा और न इस्तीफा दूंगा।
OIC और पाकिस्तान और भारतीय मुस्लिम समुदाय को एक बात समझ आनी चाहिए कि हिंदू बहुल देश होते हुए भी हिन्दू समुदाय कानूनी तौर पर मुगलों द्वारा तोड़े गए मंदिरों को वापस लेने के कोशिश कर रहा है जबकि ऐसा इस्लामिक देश में सम्भव नहीं था।
OIC और पाकिस्तान केवल भारत की केवल एक जबरन बनी हुई मस्जिद पर बने मंदिर की बात क्यों करते हैं जबकि वे कभी चीन में वामपंथी सरकार द्वारा तोड़ी गई 1500 मस्जिदों के लिए नहीं बोलते और कभी हाल के युद्ध में गाजा में ध्वस्त हुई 200 मस्जिदों की बात नहीं करते। OIC ने कभी पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अन्य इस्लामिक देशों में तोड़े गए मंदिरों, गुरुद्वारों या बौद्ध प्रतिमाओं के लिए आवाज़ नहीं उठाई।
पाकिस्तान को भारत के मुसलमानों की चिंता छोड़ अपने घर को संभालना चाहिए। अपना मुल्क लेकर भी उस समय के मुसलमानों ने क्या पा लिया जो पूरा मुल्क आज कटोरा हाथ में लिए घूम रहा है। फिर भी यदि पाकिस्तान को भारत के मुसलमानों की चिंता है तो जितने मर्जी यहां से ले जाए, अपने मुल्क में रखने की हिम्मत भी होनी चाहिए। OIC पहले अपने इस्लामिक देशों के झगड़े तो सुलझा ले जहां हर मुल्क अपने तरह का इस्लाम चला रहा है।
आज समय बदल रहा है, आज के मुस्लिम समाज का मुगलों से किसी तरह का कोई लगाव रखने का कोई औचित्य नहीं है। मुस्लिम समाज को सच्चाई से रूबरू होकर अपने को बदलना चाहिए वरना समय उसे बदल देगा।
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