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हिम्मत है तो सैयदा घुसपैठिया बन बांग्लादेश में रहकर दिखाए ; ‘यहाँ रह सकते हैं बांग्लादेशी’: कांग्रेस सरकार में योजना आयोग की सदस्य रहीं सैयदा हमीद घुसपैठियों के समर्थन में उतरीं, कहा- अल्लाह ने इंसानों के लिए बनाई है धरती

                                                    सैयदा हमीद बनीं घुसपैठियों को नई पैरोकार

भारत में घुसपैठियों के नए-नए पैरोकार सामने आ रहे हैं। खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाली सैयदा हमीद का कहना है कि बांग्लादेशियों को भारत में रहने का पूरा हक है। सैयदा इससे पहले मनमोहन सिंह सरकार के समय योजना आयोग की सदस्य रही थीं। सैयदा का यह बयान उनके असम दौरे के समय आया है। असम सरकार इन दिनों सरकारी जमीनों से अवैध कब्जा हटाने और बांग्लादेश से आए घुसपैठियों को वापस भेजने की कोशिशों में जुटी हुई है।

सैयदा हमीद पूरे वामपंथी गिरोह के साथ असम दौरे पर पहुँची हैं। इस दौरे पर उनके साथ जाने-माने वामपंथी प्रशांत भूषण, हर्ष मंदर, जवाहर सरकार और अन्य लोग शामिल हैं। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि असम सरकार ने वहाँ के मुसलमानों पर आफत ला दी है और उन्हें बांग्लादेशी कहकर निशाना बनाया जा रहा है।

सैयदा ने कहा, “अगर वे (घुसपैठिए) बांग्लादेशी भी हैं तो इसमें गलत क्या है? बांग्लादेशी भी इंसान हैं। धरती इतनी बड़ी है, बांग्लादेशी यहाँ भी रह सकते हैं।” उन्होंने यह भी दावा किया कि यह कहना कि अवैध घुसपैठिए असली नागरिकों का हक छीन रहे हैं, बहुत ही परेशान करने वाली बात है। सैयदा ने इसे भ्रामक है और इंसानियत के लिए पूरी तरह नुकसानदायक बताया है।

सैयदा हमीद ने आगे कहा, “अल्लाह ने यह धरती इंसानों के लिए बनाई है, हैवानों के लिए नहीं। अगर कोई इंसान जमीन पर खड़ा है और उसे वहाँ से खदेड़ा जाता है, तो यह मुसलमानों के लिए कयामत जैसा है।” उन्होंने यह भी कहा कि सबको मिलकर गंगा-जमुनी तहजीब और भारत की मिली-जुली संस्कृति के लिए खड़ा होना होगा।

सैयदा हमीद ने एक और जहाँ यह माना कि असम सरकार बांग्लादेश से आए अवैध लोगों को वापस भेज रही है। वहीं, प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि भारत के मुसलमानों को बांग्लादेश भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह साफ है कि हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई वाली असम सरकार हर तरह की गैरकानूनी हरकत कर रही है। खासकर नागरिकों को जबरन बांग्लादेश और देश से बाहर धकेल रही है, उनको जमीन से बेदखल कर रही है और उनके घर गिरा रही है।”

यह टीम असम नागरिक सम्मेलन नामक एक मंच के निमंत्रण पर असम आई थी। इस मंच के सदस्य और राज्यसभा सांसद अजीत कुमार भुइयां का कहना है कि वे बाहर से जानी-मानी हस्तियों को बुलाते हैं ताकि वे ताजा हालात पर अपनी राय दे सकें।

इस टीम के दौरे को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि जमतीय द्वारा उनका इस्तीफा माँगे जाने के बाद दिल्ली से आई एक टीम असम में डेरा डाले हुए है। उन्होंने कहा, “इस टीम में हर्ष मंदर, वजाहत हबीबुल्लाह, फैयाज शाहीन, प्रशांत भूषण और जवाहर सरकार शामिल हैं।”

सरमा ने आगे कहा कि इस टीम एक ही मकसद है कि किसी तरह कानूनी तौर पर की जा रही बेदखली को तथाकथित ‘मानवीय संकट’ बताकर बदनाम किया जाए। उन्होंने कहा, “यह अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ हमारी लड़ाई को कमजोर करने की सोची-समझी कोशिश है। हम सतर्क हैं और मजबूती से खड़े हैं, कोई भी प्रोपेगेंडा या दबाव हमें अपनी जमीन और संस्कृति की रक्षा करने से रोक नहीं पाएगा।”

रोहिंग्या-बांग्लादेशी नहीं ले पाएँगे दिल्ली में मुफ्त राशन और फ्री की बिजली, रेखा गुप्ता सरकार बनाएगी डाटा हब


दिल्ली सरकार ने सरकारी योजनाओं में हो रही धाँधली से बचने के लिए यूनिफाइड डेटा हब (UDH) बनाने करने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य लाभार्थियों का एक रिकॉर्ड बनाना है। इसमें तमाम विभागों से डेटा इकट्ठा किया जाएगा। इससे यह पता लग सकेगा कि केवल पात्र लोग ही योजनाओं का लाभ लें।

काफी समय से दिल्ली में यह मांग की जा रही है कि झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वालों के आधार कार्डों की गंभीरता से पुष्टि की जाए। इन लोगों ने सिर्फ दिल्ली ही नहीं दिल्ली से बाहर बंगाल और राजस्थान आदि राज्यों में भी आधार कार्ड बनवाकर सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। उदाहरण पूनम(काल्पनिक) ने दिल्ली में हिन्दू के नाम से आधार कार्ड और वोटर कार्ड बनवाया रखा है लेकिन दिल्ली से बाहर मुस्लिम नाम परवीन(काल्पनिक) के नाम से आधार कार्ड बनवा रखा है। ये बहुत बड़ा जाल है जिसका भंडाभोड़ होना बहुत जरुरी है। 

दूसरे, BPL कार्ड धारकों की भी आर्थिक स्थिति की जाँच होनी चाहिए। ताकि जरूरतमंद लोगों को सरकारी सहायता का लाभ मिल सके। भीख मांगना कोई मजबूरी नहीं एक व्यापार है। यह आरोप नहीं कटु सत्य है। एक भिखारिन जो सिर्फ शाम को ही भीख मांगती थी उसकी 2 टैक्सियां किराये पर चल रही थी और जब उसका निकाह हुआ तो महावीर वाटिका दरिया गंज में शानदार दावत और कार दहेज़ में। इतना ही नहीं, बेरोजगारी के दिनों में रजिस्ट्री करने वाले बाबू से पूछा कि सुबह मनीऑर्डर की खिड़की पर भिखारियों की ही लम्बी लाइन देखता हूँ। इस पर बाबू ने जवाब दिया “बेटा जिसने एक महीने जामा मस्जिद पोस्ट ऑफिस ड्यूटी दे दी वह कभी किसी भिखारी को एक पैसा नहीं देगा, जिसका अनुभव सेवानिर्वित होने के लगभग 2 साल के बाद उपरोक्त भिखारिन से हुआ। वेतनभोगी और व्यापारी पर तो हर कोई हाथ डाल देता है लेकिन इन पर नहीं। आज एक रिक्शा चालक से लेकर ठेला चलाने वाला भी हर महीने 20 से लेकर 25/30,000 रूपए कमा रहा है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट 2025-26 के भाषण में भी इसका जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि बीजेपी सरकार वेरिफिकेशन प्रकिया शुरु करेगी, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र दिल्लीवासियों तक पहुँच सके। इस डाटा से फ्री बिजली या मुफ्त राशन जैसी चीजें भी घुसपैठियों को नहीं मिलेंगी।

उन्होंने यह भी कहा था इस बात को भी सुनिश्चित किया जाएगा कि दिल्ली से बाहर से आने वाले लोग या रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए इस योजनाओं का लाभ न ले सकें। अधिकारियों के अनुसार, यह डेटा हब सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ाने के लिए डिजिटल स्तर पर रिकॉर्ड एकत्र करना होगा।

बीजेपी सरकार जल्द ही ‘दिल्ली यूनिफाइड सिटीजन डेटा प्लेटफ़ॉर्म’ विकसित करने के लिए एक टेंडर भी जारी करेगी।

राजस्थान : जयपुर में पकड़े 500 रोहिंग्या-बांग्लादेशी: शरणार्थियों वाले ग्रीन कार्ड भी मिले


बीजेपी शासित राजस्थान में पुलिस घुसपैठियों के खिलाफ अभियान चला रही है। इसी कड़ी में 27 जनवरी 2025 को जयपुर में अवैध तरीके से रह रहे करीब 500 बांग्लादेशी और रोहिंग्या पकड़े गए हैं। पुलिस को शरणार्थियों को मिलने वाले ग्रीन कार्ड भी मिले हैं। माना जा रहा है कि ये कार्ड फर्जी तरीके से बनवाए गए हैं।

देश में अवैध घुसपैठियों के दम पर अपनी सरकारें बनाने वाली देश की जनता के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ करती रही है। चुनाव परिणाम आने पर जनता इन जनविरोधी पार्टियों को अपना हितैषी मानने की भूल कर लेती है। सरकार को चाहिए कि किन नेताओं और अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज बनवाने में सहायता की है जब तक उन पर कार्यवाही कर पूछना चाहिए कि कितना पैसा लेकर कितनों के फर्जी दस्तावेज बनवाए।  

 रिपोर्ट के अनुसार पकड़े गए रोहिंग्या-बांग्लादेशी में कई दुर्दांत बदमाश भी हैं। डीसीपी (साउथ) दिगंत आनंद ने बताया है कि यह अभियान जयपुर के सभी थाना क्षेत्रों में चलाया जा रहा है। सोडाला थाना क्षेत्र से 394 रोहिंग्या पकड़े गए हैं। इनके पास से ग्रीन कार्ड भी मिले हैं। इसके अलावा सांगानेर सदर थाना क्षेत्र से बांग्लादेशी घुसपैठिए पकड़े गए हैं।

अक्टूबर 2024 में भी पुलिस ने 12 बांग्लादेशियों के एक परिवार को पकड़ा था। इनके पास से आधार कार्ड सहित अन्य फर्जी दस्तावेज मिले थे। इन्हें पहले डिटेंशन सेंटर में रखा गया। फिर भारत सरकार ने नवंबर 2024 में इन्हें बांग्लादेश को सौंप दिया था।

जनसंख्या 13.8 लाख, आधार कार्ड बने 14.53 लाख… बांग्लादेशियों की घुसपैठ के लिए बदनाम झारखंड में एक और ‘कमाल’


झारखंड के संथाल परगना समेत बाकी इलाकों में बांग्लादेशी घुसपैठ के संकेत लगातार मिल रहे हैं। एक रिपोर्ट में सामने आया है कि झारखंड के कई जिलों में जनसंख्या से कहीं अधिक आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसका आँकड़ा भी मौजूद है। इससे पहले वोटरों की संख्या में असामान्य बढ़ोतरी की बात भी सामने आई थी।

जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के संथाल परगना के हिस्से साहिबगंज और पाकुड़ में अनुमानित जनसंख्या से कहीं अधिक आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं। रिपोर्ट में आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसी UIDAI और अनुमानित जनसंख्या के आँकड़ों की तुलना की गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि साहिबगंज की अक्टूबर, 2024 तक अनुमानित जनसंख्या 13.8 लाख थी जबकि यहाँ 14.53 लाख आधार कार्ड बन चुके हैं। इसी तरह पाकुड़ में भी अनुमानित जनसंख्या 10.89 लाख है लेकिन यहाँ 11.36 लाख आधार कार्ड बन चुके हैं। यानि इन दोनों जिलों में जनसंख्या किए मुकाबले 104% आधार कार्ड बने हैं।

इसी तरह का मामला लोहरदगा से भी सामने आया है। यहाँ 5.58 लाख की जनसंख्या पर 6.08 लाख आधार कार्ड बन चुके हैं। यानी यहाँ जनसंख्या के मुकाबले 108% आधार बने हैं। कमोबेश यही मामला कुछ और जिलों में हैं। इन आँकड़ों पर अब चिंता जताई गई है।

यह भी प्रश्न उठे हैं कि जब इन जिलों की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा खुद बाहर काम करने के लिए रहता है तो यहाँ आधार कार्ड में कैसे बढ़ोतरी हो गई। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सीधी सुई बांग्लादेशी घुसपैठियों की तरफ जा रही है। साहिबगंज और पाकुड़ जैसे इलाके पश्चिम बंगाल से सटे हुए हैं और यहाँ से बांग्लादेश भी दूर नहीं है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र सरकार ने खुफिया एजेंसियों की एक टीम को संथाल परगना के जिलों में हाल ही में कुछ दिन के लिए भेजा था। यह टीम यहाँ से बांग्लादेशी घुसपैठ के सबूत लेकर लौटी है। इसने साहिबगंज के कई इलाकों का दौरा भी किया है।

यह पहला मामला नहीं है जब सरकारी आँकड़ों में असामान्य वृद्धि हुई हो। इससे पहले वोटर लिस्ट में भी असामान्य वृद्धि की बात कही गई थी। भाजपा ने इसको लेकर एक रिपोर्ट भी पेश की थी। भाजपा ने पाया था कि झारखंड की 10 विधानसभा सीटों के कुछ बूथ पर (विशेष कर मुस्लिम आबादी वाले बूथ) पर वोटरों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि पाँच वर्षों में हुई है।

भाजपा की रिपोर्ट में सामने आया था कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में वोटरों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़त 20% से 123% तक की है। यह बढ़त इन 10 विधानसभा के कुल 1467 बूथ पर हुई है। भाजपा ने कहा है कि सामान्यतः पाँच वर्षों में 15% से 17% की वृद्धि होती है, इसीलिए यह वृद्धि असामान्य है। भाजपा ने हिन्दू बूथों पर आबादी घटने की बात भी कही थी।

झारखंड में होने वाली अवैध घुसपैठ को लेकर हाई कोर्ट में एक मामला भी चल रहा है। दान्याल दानिश की याचिका पर हाई कोर्ट राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठियों के सर्वे और उनको बाहर निकले जाने के निर्देश तक दे चुका है। हालाँकि, राज्य की हेमंत सोरेन सरकार किसी भी प्रकार की घुसपैठ से इनकार करती आई है।

हेमंत सोरेन की सरकार ने इसको लेकर लीपापोती का प्रयास किया है। हाल ही में हाई कोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान पूरे राज्य में सत्यापन का आदेश दिया था। सोरेन सरकार ने आनन-फानन में इस संबंध में समितियाँ बनाई और कुछ ही दिनों के भीतर हलफनामा दायर कर दिया कि राज्य कोई घुसपैठिया नहीं है।

उत्तर प्रदेश : 52000 फर्जी सर्टिफिकेट… बांग्लादेशियों-पाकिस्तानियों को बसाने के लिए: रायबरेली के 11 गाँवों में मिला ‘असली’ दिखने वाला जन्म प्रमाण पत्र, मोहम्मद जीशान और रियाज समेत 4 गिरफ्तार

रायबरेली में मिले पाकिस्तानी, नेपाली और बांग्लादेशी नागरिकों के 52 हजार से ज्यादा फर्जी जन्म प्रमाण पत्र (चित्र साभार- Newstrack & AFP)
उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में 18 जुलाई 2024 में हजारों रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के जन्म प्रमाण पत्रों को बनाने का खुलासा हुआ था, तब इस मामले में जाँच बिठा दी गई थी जो अब पूरी हो चुकी है। कुल 52 हजार से अधिक प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। इस फर्जीवाड़े में भारत के कई राज्यों सहित पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल तक के लोगों के प्रमाण पत्र शामिल हैं। शासन ने इन सभी फर्जी प्रमाण पत्रों को निरस्त करने का ऐलान किया है।

प्रमाण पत्र सिर्फ निरस्त ही नहीं किये जाएं, इन्हें बनवाने वाले नेता और अधिकारियों को भी नामजद किया जाए। क्योकि कोई अधिकारी बिना किसी नेता के संरक्षण मिले बिना इस काम को नहीं कर सकता।  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों से सलोन ब्लॉक के कुल 11 गाँव बुरी तरह प्रभावित हैं। इन 11 गाँवों को मिला कर कुल 52,594 जन्म प्रमाण पत्र फर्जी निकले हैं। ये जन्म प्रमाण पत्र बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, तमिलनाडु, केरल व पंजाब राज्यों के साथ बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल तक के नागरिकों के नाम पर बनाए गए थे। उप-निदेशक पंचायती राज सास्वत आनंद सिंह ने इन सभी फर्जी प्रमाणपत्रों को निरस्त करने के आदेश दिए हैं।

इसी के साथ जिले के DPRO को भविष्य में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने में खास सावधानी बरतने के निर्देश मिले हैं। जाँच में पता चला है कि कई गाँवों में तो जालसाजों ने एक ही दिन के अंदर 500 से लेकर 1000 तक फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बना डाले थे जबकि एक कंप्यूटर से 24 घंटे में 100 प्रमाणपत्र से अधिक नहीं निकल सकते हैं। माना जा रहा है कि एक ही आईडी और पासवर्ड से एक दिन में इतने ज्यादा प्रमाण पत्र बनाने के लिए कई प्रदेशों में बैठे साजिशकर्ताओं ने मिल कर काम किया था।

जिन 11 गाँवों में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र पाए गए हैं जिसमें सबसे अधिक प्रभावित पाल्हीपुर है। यहाँ 13707 फर्जी प्रमाण पत्र पाए गए हैं। दूसरे नंबर पर नुरुद्दीनपुर है जहाँ मिले प्रमाण पत्रों की संख्या 10151 है। तीसरा नंबर पृथ्वीपुर का है। यहाँ 9393 फर्जी प्रमाण पत्र मिले हैं। इसके अलावा सांडा सैदन में 4897, माधौपुर निनैया में 3746, लहुरेपुर में 3780, गढ़ी इस्लामनगर में 2255, औनानीश में 1665, गोपालपुर उर्फ अनंतपुर में 225 और दुबहन में 2 फर्जी प्रमाण पत्र खोजे गए हैं।

इस फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपित मोहम्मद जीशान है जो रायबरेली के ही सलोन का निवासी है। उसके साथ साजिश में शामिल रियाज, सुहेल खान और वीडीओ विजय सिंह यादव को भी दबोच लिया गया है। मामले की जाँच में ATS के साथ NIA को भी लगाया गया है। जाँच एजेंसियाँ इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य आरोपितों की मिलीभगत की पड़ताल में जुटी हैं।

मामले का खुलासा तब हुआ जब जुलाई 2024 में कुछ गाँवों की आबादी से अधिक जन्म प्रमाण पत्र बना डाले गए। शुरुआत में इस साजिश की भनक गाँवों के कई प्रधानों तक को नहीं लगी थी। खुद को पाक-साफ दिखाने के लिए विजय यादव ने ही इस फर्जीवाड़े की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई थी। पुलिस की जाँच में यह आया कि विजय यादव ने अपना सरकारी CUG नंबर जीशान को दे रखा था। इसी नंबर पर हर जन्म प्रमाण को एप्रूवल देने वाली OTP आती थी। 

बांग्लादेशी-रोहिंग्या बदल रहे मुंबई की डेमोग्राफी, TISS की रिपोर्ट से घुसपैठ पर छिड़ी बहस

                                                 अवैध घुसपैठिया मुस्लिम (साभार: Bing AI)
बांग्लादेश और म्यामांर से आने वाले अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों का घुसपैठ मुंबई में बड़े पैमाने पर सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक बदलाव ला रहा है। इसके कारण साल 2051 तक इस महानगर में हिंदू आबादी घटकर 54 प्रतिशत से भी कम हो जाएगी। मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) ने अपनी एक खोजपरक रिपोर्ट में ये भयावह बातें कही हैं।

ज्वलंत प्रश्न यह है कि घुसपैठियों का मुद्दा चुनावों में ही क्यों खड़ा होता है? इतने वर्षों तक इस गंभीर मुद्दे पर कार्यवाही नहीं होती? घुसपैठियों को संरक्षण देने वाले कौन नेता और पार्टियां है, क्यों नहीं उन पर कार्यवाही होती? बॉर्डर केंद्र सरकार के अधीन होने के बावजूद घुसपैठ होना केंद्र सरकार पर ही प्रश्नचिन्ह लगा कोई बड़ी बात नहीं। आतंकवादियों का बराबर आना और उनके पास हथियारों का होना भी केंद्र सरकार की कार्यशैली और कार्यक्षमता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।     

TISS ने ‘मुंबई में अवैध आप्रवासी: सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिणामों का विश्लेषण’ शीर्षक 118 पृष्ठों की अपनी अंतरिम रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ राजनीतिक संस्थाएँ अपने वोट बैंक की राजनीति के लिए इन अवैध अप्रवासियों का इस्तेमाल कर रही हैं। अवैध रूप से आने वाले आप्रवासी मुंबई में आसानी से वोटर कार्ड पा जा रहे हैं और मतदान कर रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के दशकों में मुंबई में भारी डेमोग्राफिक बदलाव हुए हैं। साल 1961 में मुंबई की हिंदू आबादी 88 प्रतिशत थी, जो घटकर साल 2011 में 66 प्रतिशत रह गई। वहीं, इस दौरान मुस्लिम आबादी 8 प्रतिशत से बढ़कर 21 प्रतिशत हो गई। एक अनुमान के मुताबिक, साल 2051 तक यहाँ हिंदुओं की संख्या 54 प्रतिशत रह जाएगी, जबकि मुस्लिम 30 प्रतिशत से अधिक हो जाएँगे।

रिपोर्ट के अनुसार, एक जटिल नेटवर्क बांग्लादेशियों एवं रोहिंग्याओं की घुसपैठ में मदद करता है। अवैध आप्रवासियों की आमद ‘वोट बैंक की राजनीति’ को बढ़ावा देती है। जाली दस्तावेजों के ज़रिए वोटर कार्ड बनवाकर चुनावों में घुसपैठियों की भागीदारी हो जाती है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि मुंबई के 12 विधानसभा क्षेत्रों में आप्रवासी आबादी बहुसंख्यक है, जो मतदान पैटर्न को प्रभावित करती है।

घुसपैठियों की बढ़ती संख्या के कारण देश में वोट बैंक की राजनीति और आश्रय राजनीति की शुरुआत होती है। इसके कारण देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ-साथ देश की अखंडता को भी नुकसान पहुँचता है। घुसपैठियों की संख्या ने मूल निवासियों की संस्कृति एवं उनके अस्तित्व के लिए भी खतरा उत्पन्न कर दिया है। यह सामाजिक एवं आर्थिक के साथ-साथ राजनैतिक भी है।

अध्ययन में शामिल महिलाओं में 50 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की तस्करी की गई थी और वो देह व्यापार में लगी हुई थीं। इनमें से 40 प्रतिशत आप्रवासी महिलाएँ बांग्लादेश स्थित अपने घर पैसे भेज रही हैं। यह रकम 10,000 रुपए से लेकर 1,00,000 रुपए मासिक तक है। इतना ही नहीं, ये आप्रवासी महानगर की बुनियादी ढाँचे पर भार भी बढ़ा रहे हैं। अवैध आप्रवासियों के कारण झुग्गियों में भारी भीड़ बढ़ी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि गोवंडी, कुर्ला और मानखुर्द जैसी झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों में घुसपैठियों की भीड़ के कारण बिजली और पानी की आपूर्ति का संकट पैदा हो गया है। इससे सोशल वेलफेयर को खतरा हो रहा है। पहले से ही भारी दबाव वाले मुंबई में बुनियादी ढाँचों पर असहनीय दबाव पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक प्रभाव स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और स्वच्छता जैसी सार्वजनिक सेवाओं पर पड़ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, घुसपैठियों के कारण इन बुनियादी सेवाओं तक स्थानीय निवासियों की पहुँच कम हो गई है। आप्रवासियों की बढ़ती संख्या ने स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों में प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ा दिया है। बांग्लादेशी मुस्लिमों और रोहिंग्याओं द्वारा बेहद कम दर पर काम किया जाता है। इससे स्थानीय श्रमिकों के वेतन पर असर पड़ा है। उनमें नाराजगी बढ़ाती है। इसका फायदा राजनीतिक दल उठाते हैं।

इतना ही नहीं, आप्रवासी के कारण स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर आर्थिक असमानताएँ भी बढ़ी हैं, जिसके कारण सामाजिक तनाव और हिंसक झड़पें लगातार बढ़ रही हैं। साल 1965 से मुंबई में बढ़ रही घुसपैठियों की संख्या के कारण पर मराठी पहचान पर संकट बढ़ा है। स्थानीय लोगों में अपनी संस्कृति को लेकर भी असुरक्षा बढ़ती हैं। इसके कारण समाज में तनाव और सामाजिक विभाजन बढ़ा है।

रिपोर्ट के ‘सारांश, निष्कर्ष और निहितार्थ’ शीर्षक में कहा गया है कि मुंबई में अवैध मुस्लिम घुसपैठ से जुड़ी चुनौतियों के कारण बुनियादी क्षेत्रों की स्थिति चरमरा गई है। बांग्लादेशियों एवं रोहिंग्याओं की घुसपैठ को कम करने के लिए प्रभावी नीतिगत हस्तक्षेप लागू करने की सख्त जरूरत है। इन चुनौतियों में शहर में सुरक्षा, रोजगार, चिकित्सा और सामुदायिक स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण हैं।

TISS के असिस्टेंट प्रोफेसर सौविक मंडल का कहना है कि यह एक चिंताजनक स्टडी है। बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिये आप्रवासी के तौर पर मुंबई में बसे हुए हैं। ये हवाई रास्ते से नहीं, बल्कि बॉर्डर पार करके आए हैं। उन्होंने कहा, “हमने तरीका समझा तो पाया की पहले परिवार का कोई सदस्य आता है, फिर पूरा परिवार। इस तरह अवैध तरीके से गाँव बसाया जाता है। ये डार्क नेटवर्क की तरह काम करता है।”

इस मुद्दे पर दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में आयोजित एक सेमिनार में प्रमुख अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने कहा कि अवैध आप्रवासन एक वैश्विक मुद्दा है, जो दुनिया भर में राजनीति, सुरक्षा और जनसांख्यिकी को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि स्थिति ऐसी हो गई कि आज चुनाव अवैध आप्रवासन के विषय पर लड़े जा रहे हैं।

ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला देते हुए सान्याल ने अनियंत्रित जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के परिणामों के बारे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद से लाहौर और कराची जैसे शहर कैसे नाटकीय रूप से बदल गए हैं और वहाँ हिंदू एवं सिख आबादी में गिरावट आई है। उन्होंने आगे कहा, “आज बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध और ईसाई अल्पसंख्यकों को दैनिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।”

सेमिनार में JNU की वीसी शांतिश्री पंडित ने अवैध आप्रवासन के जोखिमों को पहचानने का आग्रह किया। उन्होंने घुसपैठ के खतरों को लेकर कहा, “बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा भारत को दिए गए संवैधानिक अधिकार और महिलाओं के अधिकार खतरे में पड़ जाएँगे, क्योंकि जो लोग आते हैं वे उस संविधान को स्वीकार नहीं करते हैं। वे भारत के संविधान से ऊपर अपना कानून चाहते हैं।”

वहीं, TISS प्रो वीसी शंकर दास ने घुसपैठ से भाषा और संस्कृति पर उत्पन्न खतरों के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अवैध आप्रवासन केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसमें कट्टरपंथ के जोखिम भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “भारत और बांग्लादेश में एजेंटों के बीच एक बड़ी साँठ-गाँठ है।” उन्होंने कहा कि कुछ एजेंट अपंजीकृत एनजीओ या मजहबी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं।

शौहर पाकिस्तानी, बीवी बांग्लादेशी… कर्नाटक में हिंदू नाम रख YouTube पर देता था इस्लामी ज्ञान

                     गाजियाबाद और बेंगलुरु से 3-3 गिरफ्तार (फोटो साभार: आजतक/इंडिया टीवी)
उत्तर प्रदेश और कर्नाटक की दो अलग-अलग घटनाओं ने एक बार फिर अवैध प्रवासियों और मजहबी पहचान छिपाकर भारत में रहने वालों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रामलीला के मंच पर हिंदू पहचान लेकर काम कर रहे मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया, तो दूसरी ओर कर्नाटक में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुस्लिमों के एक ग्रुप को भी गिरफ्तार किया गया जो हिंदू नाम और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में रह रहे थे।

गाजियाबाद में गलत पहचान बताकर रामलीला, हिंदू नामों से आधार कार्ड

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाजियाबाद में पुलिस ने तीन मुस्लिमों वजीर खान, राहुल (जिसका असली नाम सामने नहीं आया), और नानक को देवी मंदिर में प्रवेश करते समय गिरफ्तार किया। इन तीनों पर आरोप है कि ये अपनी असल पहचान छिपाकर रामलीला में हिंदू पात्रों का अभिनय कर रहे थे और मंदिर में घुसने की कोशिश कर रहे थे। यह गिरफ्तारी उस समय हुई, जब तीनों आरोपित गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, जहाँ महंत नरसिंहा नंद गिरी ने धर्म विशेष के लोगों के प्रवेश पर रोक लगा रखी है। पुलिस ने इनके पास से हिंदू नाम और पहचान के आधार कार्ड बरामद किए, जो इनके वास्तविक नाम से मेल नहीं खाते थे।
पुलिस जाँच के दौरान इन युवकों ने बताया कि उनका परिवार पुश्तैनी रूप से रामलीला मंचन से जुड़ा हुआ है। ये लोग रामलीला में कैकई, मंथरा जैसे किरदार निभाते हैं और ढोलक बजाने तथा नृत्य का भी कार्य करते हैं। गिरफ्तार युवकों का दावा है कि वे मथुरा के रहने वाले हैं और रामलीला मंचन करना उनकी आजीविका का हिस्सा है। हालाँकि, पुलिस ने यह साफ किया कि मामले की जाँच जारी है और तब तक कुछ ठोस कहा नहीं जा सकता।
डासना देवी मंदिर का यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहाँ हमेशा पुलिस बल तैनात रहता है, खासकर महंत नरसिंहानंद गिरी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए। महंत का कहना है कि धर्म विशेष के लोगों के मंदिर में प्रवेश को रोकने के पीछे उनका धार्मिक और सुरक्षा से जुड़ा कारण है।

कर्नाटक में हिंदू पहचान के साथ पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिक

दूसरी घटना कर्नाटक के पीन्या इलाके की है, जहाँ तीन और पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें सैयद तारिक और उसकी पत्नी अनीला शामिल हैं, जबकि उनकी 17 वर्षीय बेटी को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, यह परिवार पिछले आठ साल से भारत में गैरकानूनी तरीके से रह रहा था और हिंदू नामों का इस्तेमाल कर अपनी असली पहचान छिपा रहा था। तारिक अपने यूट्यूब चैनल पर इस्लामिक उपदेश देता था, जबकि उसकी पत्नी घरेलू महिला है। इन लोगों के पास से पुलिस ने आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट बरामद किए हैं, जो सभी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए थे।
इस परिवार के बारे में जानकारी तब मिली जब पहले गिरफ्तार किए गए अन्य पाकिस्तानी नागरिकों ने इनके बारे में पुलिस को बताया। पुलिस ने शंकर शर्मा के नाम से रह रहे राशिद अली सिद्दिकी को भी हाल ही में गिरफ्तार किया था, जो अपनी बांग्लादेशी पत्नी और ससुरालवालों के साथ फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में रह रहा था। राशिद का मामला भी तारिक से जुड़ा हुआ पाया गया है। अकेले कर्नाटक में ही कुल 11 पाकिस्तानी-बांग्लादेशियों को फर्जी हिंदू पहचान के साथ गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस की शुरुआती जाँच से पता चला है कि यह परिवार पहले कोच्चि में रह रहा था और चार साल पहले बेंगलुरु आया था। तारिक को हर महीने 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद मेहदी फाउंडेशन इंटरनेशनल के माध्यम से मिलती थी, जिसका मुख्य उद्देश्य इस्लामी तकरीरें करनी थी। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि इन अवैध पाकिस्तानी नागरिकों को पैसा कैसे और कहाँ से मिल रहा था, और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।
कर्नाटक पुलिस अब इस बात की भी जाँच कर रही है कि राज्य में और कितने पाकिस्तानी फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहे हैं। हाल ही में बेंगलुरु के बाहरी इलाके जिगानी में भी चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो इसी प्रकार फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि कर्नाटक और देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसे कई लोग हो सकते हैं जो अवैध रूप से रह रहे हों और अपनी मजहबी और राष्ट्रीय पहचान छिपाकर काम कर रहे हों।

सावधान करने वाली हैं दोनों घटनाएँ

इन दोनों घटनाओं में एक चीज समान है: आरोपितों द्वारा अपनी मजहबी पहचान को छिपाना। गाजियाबाद में गिरफ्तार आरोपित मुस्लिम युवक हिंदू नामों के साथ रामलीला में काम कर रहे थे और मंदिर में घुसने की कोशिश कर रहे थे, जबकि कर्नाटक में पकड़े गए पाकिस्तानी नागरिक हिंदू नाम और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भारत में अवैध रूप से रह रहे थे। दोनों ही मामलों में मजहबी पहचान को छिपाकर अवैध कार्यों को अंजाम देने का प्रयास किया गया।

 

उत्तर प्रदेश : 20 हजार की आबादी वाले गाँव में 19184 फर्जी दस्तावेज : रोहिंग्या-बांग्लादेशी मुस्लिमों का सर्टिफिकेट बनाता जीशान, विजय यादव करता मदद: ATS की जाँच में चौंकाने वाले खुलासे

                            बांग्लादेशी-रोहिंग्या का फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाला जीशान (साभार: भास्कर)
उत्तर प्रदेश के कई जिले रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों के पनाहगाह बन गए हैं। कानपुर के बाद उन्नाव एवं रायबरेली में रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने वाले तंत्र के खुलासे के बाद शासन-प्रशासन और खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। करीब 20,000 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने के मामले में गिरफ्तार जीशान और ग्राम विकास अधिकारी विकास यादव ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

उत्तर प्रदेश ATS की जाँच में अभी तक पता चला है कि पकड़ा गया सीएससी संचालक जीशान बस मोहरा है। इस पूरे खेल का असली सूत्रधार कोई और है। सूत्रधार के इशारे पर ही ये सारा खेल हुआ है। भाजपा के स्थानीय विधायक अशोक कुमार ने इसे आतंकी साजिश बताया है। वहीं, हिंदू संगठन भी इन मामलों में आतंकियों के शामिल होने का आरोप लगाकर अपना रोष बताया है।

यूपी के अलग-अलग जिलों में फैला है नेटवर्क

दरअसल, 18 जुलाई को यूपी एटीएस ने जनसेवा केंद्र संचालक जीशान खान, सुहैल, रियाज खान और VDO विजय यादव से अलग-अलग पूछताछ की थी। इस दौरान ATS को एक बड़े नेटवर्क की जानकारी मिली। यह नेटवर्क बांग्लादेशियों और रोहिंग्या मुस्लिमों को जगह-जगह बसाने में लगा हुआ है। कानपुर, उन्नाव, प्रयागराज, लखनऊ में भी इस तरह का खेल चल रहा है।
एटीएस इस मामले में बिहार, असम, कर्नाटक, केरल, मुंबई तक के तार जोड़ने में लगी हुई है। पुलिस को पता चला है कि इन लोगों को 20 हजार से अधिक बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाकर अलग-अलग जगहों पर बसाया है। रायबरेली का सलोन इलाका शुरू से ही संवेदनशील रहा है और यहाँ एक से बढ़कर एक आतंकी हुए हैं।
उधर, सलोन के प्रखंड विकास अधिकारी ने कहा है कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले ग्राम विकास अधिकारी विजय यादव के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। इसके अलावा, यादव को निलंबित करके उनके खिलाफ विभागीय जाँच शुरू की गई है। कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। विजय यादव की आईडी से दो साल में 20 हजार से अधिक जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।

कस्बे की जनसंख्या 20 हजार, 19 हजार से अधिक फर्जी प्रमाण पत्र बनाए

रायबरेली के पलाही गाँव की कुल जनसंख्या 4500 है और यहाँ सिर्फ एक मुस्लिम परिवार है, लेकिन इस गाँव के पते पर 819 मुस्लिमों के जन्म प्रमाण पत्र बना दिए गए। इसी तरह एक अन्य गाँव नूरुद्दीनपुर की जनसंख्या 8,000 है लेकिन यहाँ के पते पर 12,000 से अधिक मुस्लिमों के जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए हैं। ये लोग कुछ लोगों के हिंदू नाम से प्रमाण पत्र देते थे, ताकि शंका ना हो।
वहीं, 20 हजार की आबादी वाले सलोन कस्बे में 19,184 जन्म प्रमाण पत्र बना दिए गए।स्थानीय जन्म प्रमाण पत्र के लिए 3 से 5 हजार और बिहार, बंगाल एवं झारखंड आदि जगहों के लिए 5 से 10 हजार रुपए तक लिए जाते थे। बांग्लादेशी-रोहिंग्या मुस्लिमों से मिले इन पैसों का बँटवारा रोज शाम को विजय यादव, जीशान, रियाज और सुहैल के बीच होता था।
स्थानीय लोगों रायबरेली ये बानगी हैं। इनका नेटवर्क प्रयागराज, कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी, अमेठी, लखनऊ सहित तमाम जिलों में फैला हुआ है। माना जा रहा है कि दूसरे राज्यों में भी इनका नेटवर्क होगा। दरअसल, रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों को बसाने के लिए एक गैंग रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों के नामों की सूची देता था और जीशान उनका जन्म प्रमाण पत्र बनाकर देता था।
अभी दो दिन पहले लखनऊ से नजमा नाम की बांग्लादेशी महिला को दो अन्य महिलाओं के साथ गिरफ्तार किया था। उसके घर से आधार कार्ड मिला है, जिसमें उसे मध्य प्रदेश की इंदौर का पता है। वहीं, उसके साथ की एक महिला आखी ने अपना नाम मधु सिंह रखा था। उसका भी पता इंदौर का है। रिपोर्ट के मुताबिक, असम में भी बांग्लादेशियों का प्रमाण पत्र बनाया जाता है।

PFI आतंकी का भी जीशान ने बनाया था प्रमाण पत्र

जीशान ने प्रतिबंधित इस्लामी आतंकी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के एक सदस्य का भी प्रमाण पत्र बनाया था। PFI के एक आतंकी को सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार किया था। उसके पास से दस्तावेज बरामद किए गए थे। उसके सभी दस्तावेज रायबरेली के पलाही गाँव के पते पर ही बने थे। इन प्रमाण पत्रों को जीशान ने अपने जन सुविधा केंद्र से जारी किए गए थे।
गिरफ्तार PFI के आतंकी ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने यह बात कबूल की थी कि सिर्फ केरल ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और गुजरात के उसके कई साथियों के जन्म प्रमाण पत्र भी यहीं से बनवाए गए थे। अगर यहाँ की विस्तृत जाँच की जाए तो और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। वैसे भी सलोन आतंकियों से संबंधित रहा है।

आतंकियों और दाऊद के गैंग से कनेक्शन

रायबरेली 90 के दशक में लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन और दाऊद इब्राहिम के गैंग के लिए सुरक्षित पनाहगाह रहा है। साल 1992 में आतंकी अब्दुल करीम टुंडा रायबरेली आया था। इसी तरह हिजबुल मुजाहिद्दीन का एरिया कमांडर बिलाल अहमद भी रायबरेली के खिन्नी तल्ला में शरण लिया था।
इसी तरह सलोन में लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर इमरान अंसारी सक्रिय रहा। साल 2006 में ATS ने उसे पकड़ा था। बछरावाँ दाऊद गैंग का सेंटर रहा है। इसके अलावा भी समय-समय पर अन्य देश विरोधी एवं समाज विरोधी तत्व यहाँ से सक्रिय रहा। यहाँ आतंकियों से लेकर इन माफियाओं तक को किसने पनाह दिया, इसका खुलासा आज तक नहीं हो पाया है।

भाजपा विधायक ने बताया ISI का हाथ

सलोन के भाजपा विधायक अशोक कुमार ने कहा कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को भारत में बसाने और उन्हें नागरिकता दिलाने के लि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए जा रहे थे।
उन्होंने कहा कि इन सबके पीछे विदेशी ताकतों का हाथ और उनकी फंडिंग है। उन्होंने कहा कि फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट के जरिए वोटर आईडी समेत अन्य दस्तावेज तैयार कराए गए और इसके जरिए फर्जी लोगों ने रायबरेली-अमेठी जिले के लोकसभा चुनाव में वोटिंग भी की है। उन्होंने इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

जिधर मुस्लिम आबादी उस बूथ पर 5 साल में ही 117% बढ़ गए वोटर… हाई कोर्ट को भी कहना पड़ा- झारखंड की जमीन पर बस कर सुविधा भोग रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए


झारखंड हाई कोर्ट राज्य में बढ़ रही घुसपैठ को लेकर सख्त हो गया है। उसने बांग्लादेशी घुसपैठियों से को राज्य से बेदखल करने को लेकर एक्शन का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान घुसपैठियों की राज्य में उपस्थिति के ऊपर भी रिपोर्ट माँगी है।

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की पीठ ने बुधवार (3 जुलाई 2024) को ये निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर राज्य में मौजूद घुसपैठियों का पता लगाए, उनको चिन्हित करे और उन पर क्या कार्रवाई की गई, इसको लेकर रिपोर्ट दाखिल करे। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी रिपोर्ट माँगी है।

हाई कोर्ट की यह सख्ती डानियल दानिश की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिखी है। याचिका में अदालत को बताया गया था कि राज्य के संताल परगना के जो भी जिले बांग्लादेश से सटे हुए हैं, उनमें बांग्लादेश के प्रतिबंधित संगठन सुनियोजित तरीके से झारखंड की जनजातीय लड़कियों से शादी करके उनका धर्मांतऱण करवा रहे हैं। नए मदरसे भी खुल रहे हैं। यहाँ 46 नए मदरसे खुले हैं। संताल परगना में गोड्डा, देवघर, दुमका, जामताड़ा, साहिबगंज और पाकुड़ जिले शामिल हैं।

हाई कोर्ट की यह टिप्पणी झारखंड की उस समस्या को दर्शाती है जो धीरे-धीरे नासूर बन चुकी है। संताल परगना के जिले पश्चिम बंगाल से सीमाएँ साझा करते हैं। पहले घुसपैठिए बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल में आते हैं और यहाँ से फैलते हुए वह झारखंड में आ जाते हैं।

नई नहीं है डेमोग्राफी बदलने की बात

झारखंड हाई कोर्ट की टिप्पणी को रेखांकित करने वाली काफी सारी घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं। इससे पहले मार्च, 2024 में आजतक की एक रिपोर्ट में याचिका में बताई गई समस्या को लेकर ही बात की गई थी। आजतक की रिपोर्ट में बताया गया था कि यहाँ बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठिए, पश्चिम बंगाल के रास्ते आते हैं। इसके बाद वह बस जाते हैं। इनमें से कुछ आदिवासियों की लड़कियों को निशाना बनाते हैं। जब लडकियाँ उनके दिखावे में फंस जाती हैं तो उनसे शादी कर ली जाती है।
शादी के बाद लड़की की कागजों में पहचान आदिवासी के तौर पर ही रहने दी जाती है। इसके बाद उस लड़की के नाम पर जमीन ली जाती है या फिर उसकी ही जमीन कब्जा ली जाती है। रिपोर्ट में बताया गया था कि यह सब करने के लिए बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठियों को फंडिंग मिलती है। लड़की की पहचान आदिवासी रखने के पीछे सरकारी फायदे लेने के मकसद रहता है। इसके अलावा कई जगह उन लड़कियों को चुनाव भी लड़वाया गया, जिन्होंने मुस्लिमों से शादी की।
आजतक की रिपोर्ट में यह तक बताया गया था कि यहाँ घुसपैठ करने वाले बांग्लादेशी इस जमीन में खनन के लिए भी ऐसा कर रहे हैं। कुल मिलाकर धीमे-धीमे इस इलाके की पहचान बदली जा रही है। बांग्लादेशी घुसपैठिए झारखंड में घुसते ही फर्जी पहचान पत्र भी बनवा लेते हैं। इसमें इनकी मदद पहले से आकर बस चुके लोग भी करते हैं।

सिर्फ जमीन ही नहीं चुनाव में भी घुसपैठ

बांग्लादेशी घुसपैठियों की यह समस्या शादी करने और जमीन हथियाने तक सीमित नहीं रही है। इसका कनेक्शन लोकसभा चुनाव तक से जुड़ा है। इसके लिए आपको संताल के बड़े जिले साहिबगंज की राजमहल विधानसभा का रुख करना होगा। कुछ दिन पहले राजमहल के विधायक अनंत ओझा ने ऑपइंडिया को बताया था कि उनके इलाके में कुछ गाँवों में बेतहाशा मुस्लिम वोट बढ़े हैं। उन्होंने बताया था कि यह काम पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे गाँवों में हुआ है।
अनंत ओझा के अनुसार, उनकी विधानसभा के 187 नंबर बूथ पर 2019 में 672 वोट थे। 2024 में यह बढ़ कर 1461 हो गए। यानी इसमें लगभग 117% की वृद्धि हुई। इसी के साथ सरकारी मदरसा बूथ पर 754 वोट बढ़ कर 1189 हो गए। ऐसे कम से कम 73 बूथ इस विधानसभा के भीतर हैं जहाँ की वोटर वृद्धि असामान्य है।
विधायक अनंत ओझा ने ऑपइंडिया को बताया था कि यह सभी बूथ मुस्लिम आबादी के बीच स्थित हैं। इसी इलाके में हिन्दू आबादी वाले 17 बूथ पर इसी दौरान आबादी कम हो गई है। उन्होंने इस संबंध में राज्य चुनाव आयोग से भी शिकायत की थी। राज्य चुनाव आयोग ने इस मामले में एक टीम बनाकर एक्शन लेने को कहा है।
अवलोकन करें:-
इस इलाके में मतदाताओं के भौतिक सत्यापन पर भी विचार हो रहा है। हालाँकि, इस बीच समस्या का दायरा बढ़ रहा है। ऐसे में अब कोर्ट को भी इस मामले में उतरना पड़ा है। कोर्ट के आदेश के बाद राज्य की सरकार इन बांग्लादेशी घुसपैठियों पर क्या कार्रवाई करती है, यह देखने वाला होगा।

UNO, अमेरिका या अन्य कोई भी देश, जितने चाहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी भारत से ले जाएं, परंतु हमारे कानून CAA पर ज्ञान देना बंद करें; अमेरिका अपना कानून देखे; चीन को कुछ कहने की हिम्मत करो -

 सुभाष चन्द्र

अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी आयोग ने भारत के नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) लागू करने के भारत सरकार द्वारा जारी नियमों की अधिसूचना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि “धर्म या आस्था के आधार पर किसी को भी नागरिकता से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। 

आयोग के अध्यक्ष स्टीफन स्नेक ने कहा कि “पड़ोसी देशों से भागकर भारत में शरण लेने आए लोगों के लिए तो CAA में धार्मिक अनिवार्यता का प्रावधान है और हिंदुओं, पारसियों, सिखों, बौद्धों, जैनियों और ईसाइयों के लिए तो त्वरित नागरिकता का मार्ग प्रशस्त है लेकिन मुसलमानों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।

स्टीफन स्नेक ने कहा कि इस कानून का मकसद यदि धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा करना होता तो इसमें बर्मा के रोहिंग्या मुसलमान, पाकिस्तान के अहमदिया मुसलमान और अफगानिस्तान के हज़ारा शिया भी शामिल होते। भारत सरकार अतीत में भारत के मानवाधिकारों के रिकॉर्ड पर टिप्पणी करने के लिए USIRF के क्षेत्राधिकार को खारिज कर चुका है।

एक कहावत है - “तू कौन, मैं खामखां” और यह अमेरिकी संस्था का रोल ऐसे ही “खामखां” का रोल है भारत के लिए। स्टीफन इतने शातिर हैं कि उन्होंने इन पड़ोसी देशों का नाम नहीं लिया और यह नहीं बताया कि ये तीनो इस्लामिक देश हैं, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान और केवल इतना कहा कि लोग वहां से भाग कर आए हैं लेकिन जानबूझकर कहना भूल गए कि उन देशों से “प्रताड़ित” होकर भागना पड़ा।

अमेरिका को कभी यह दिखाई नहीं दिया कि इन तीनों देशों में अल्पसंख्यकों (हिंदुओं, पारसियों, सिखों, बौद्धों, जैनियों और ईसाइयों) की क्या हालत है खासकर हिंदुओं की जो पाकिस्तान में 1947 के 22% से घटकर 2% रह गए। इन अल्पसंख्यकों को भारत के सिवाय कौन शरण दे सकता है। ये इस्लामिक देश होते हुए मुसलमानों को भी ठीक से नहीं रख सकते तो फिर तो साफ़ है इन्होने अल्पसंख्यकों की क्या दुर्दशा की होगी, वह कल्पना से परे है।

भारत कोई धर्मशाला नहीं है जहां सभी देशों से मुसलमान आकर भारत में बस जाएं। अमेरिका को यदि लगता है रोहिंग्या, पाकिस्तान के अहमदिया और अफगानिस्तान के हज़ारा मुस्लिम पीड़ित हैं तो अमेरिका समेत सभी देश और UNO जिनकों उनसे हमदर्दी हैं, उन्हें अपने अपने देश में शरण दे सकते हैं। भारत में तो बांग्लादेशी और रोहिंग्या करोड़ों हैं, जितने मर्जी ले जाए अमेरिका क्योंकि भारत की आबादी तो 140 करोड़ है और अमेरिका की मात्र 34 करोड़ जिसके पास बहुत भूभाग है जहां उन्हें रखा जा सकता है।

अमेरिका ने इन तीन इस्लामिक देशों को छोड़िए कभी चीन को भी मुसलमानों की रक्षा के लिए प्रवचन नहीं दिए और आज ही खबर है कि ईरान ने अल्पसंख्यक बहाई समुदाय के लोगों पर बंद कमरों में भी पूजा पर प्रतिबंध लगा दिया है। जाहिर है यह सभी अल्पसंख्यकों पर लागू होगा।

अमेरिका हमें उपदेश देने से पहले अपने गिरेबान में झाँक कर देखो। क्या अमेरिका ने  भारत के कानून CAA से मिलता जुलता कानून नहीं बनाया है। अमेरिका ने कानून बनाया है “The Spectrum Amendment और The Lautenberg Amendment”  जिसके अनुसार ईरान में रहने वाले ईसाइयों को कहा गया है कि यदि वे ईरान छोड़ कर आना चाहते हैं तो अमेरिका आ सकते हैं परंतु मुसलमानों को आने की छूट नहीं है।

CAA पर छातियां पीटने से पहले अमेरिका अपना कानून देखे। खुद मुसलमानों को नहीं लेना चाहता और हमें कहते हैं कि हर देश के मुसलमानों को शरण दे दो। कितना दोगलापन है?

‘मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराएँ बांग्लादेशी घुसपैठिए, जाकिर भाई से जाकर मिलें’: TMC नेता का वीडियो वायरल; चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट संज्ञान ले

                   ममता बनर्जी और रत्ना बिस्वास (साभार: The Telegraph and Sangbad Pratidin)

भारत में आगामी लोकसभा चुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक नेता के बयान ने विवाद पैदा कर दिया है। टीएमसी नेता रत्ना बिस्वास ने पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की मतदाता सूची में बांग्लादेशियों को शामिल करने की बात कही है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस वीडियो का केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और समस्त स्वयंसेवी हिन्दू संस्थाएं  संज्ञान ले। यह देश में अति गंभीर समस्या पैदा होने का स्पष्ट संकेत दे रहा है। यदि इन समय व्यर्थ किये बिना कोई कार्यवाही नहीं की गयी, वह दिन दूर नहीं कहीं भारत दूसरा पाकिस्तान, फिलिस्तीन और गाज़ा न बन जाए। जिन नेताओं और पार्टियों को जनहितैषी समझ इनकी चिकनीचुपड़ी बातों में आकर वोट दे देते हैं, ये लोग जनहितैषी नहीं जनविरोधी है जो घुसपैठियों को मतदाता सूची में शामिल कर अपने वर्चस्व बनाकर देश को भ्रमित कर रहे हैं। 

वीडियो में टीएमसी नेता एवं पूर्व पंचायत प्रधान रत्ना कह रही हैं, “इस क्षेत्र में कई बांग्लादेशी रहते हैं। जो लोग बांग्लादेश से यहाँ आए हैं और उन्हें मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने में दिक्कत आती है तो उन्हें जाकिर भाई से संपर्क करना चाहिए। ऐसे सभी लोगों को इस कार्यालय से संपर्क करना चाहिए… यह काम तेजी से किया जाना चाहिए।”

यह वीडियो वायरल होने के बाद विवाद हो गया है। विवाद के बाद स्थानीय पंचायत समिति के पूर्व अध्यक्ष जाकिर हुसैन ने दावा किया, “रत्ना बिस्वास का यह मतलब नहीं था। मेरे क्षेत्र में रहने वाले अधिकांश लोग 1960-65 से पहले यहाँ आए थे। 1990 के बाद कई लोगों को मतदाता सूची से हटा दिया गया है। इनके नाम पहले मतदाता सूची में थे।”

जाकिर हुसैन ने आगे कहा, “दरअसल उन्होंने (रत्ना बिस्वास ने) इन्हीं लोगों की मदद करने की बात कही है। हम निश्चित रूप से आम लोगों को मतदाता सूची में सुधार सहित सेवाएँ निःशुल्क प्रदान करते हैं और यह सब कानून के अनुसार किया जाता है। उन्होंने गलत तरीके से उन सभी को बांग्लादेशी बताया है।”

मतदाता सूची में बांग्लादेशियों के नाम जोड़ने की कोशिश पर भाजपा ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पर हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा, “सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस पहले से ही ऐसे मतदाता पहचान पत्र बनाने का काम कर रही है। घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाते हैं।” उन्होंने इस मामले की जाँच की माँग की है।

पिछले साल मई में पता चला कि बनगाँव दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद अलो रानी सरकार बांग्लादेश की नागरिक हैं। यह खुलासे तब हुए जब उन्होंने चुनाव परिणाम और उक्त निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा नेता स्वपन मजूमदार की जीत को कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी। याचिका पर न्यायमूर्ति बिबेक चौधरी ने सुनवाई की।

इस पर कोर्ट ने कहा था कि नामांकन दाखिल करने की तारीख, चुनाव की तारीख और परिणाम की घोषणा की तारीख पर अलो रानी सरकार बांग्लादेश की नागरिक थीं। कोर्ट ने आगे कहा, “याचिकाकर्ता के स्वयं के दस्तावेज़ को देखने से पता चलता है कि याचिकाकर्ता को 2021 का विधानसभा चुनाव लड़ने का कोई अधिकार नहीं था।”

मामले की सुनवाई करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा था, “चूँकि वह भारत की नागरिक नहीं हैं, इसलिए वह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 के साथ पढ़े गए संविधान के अनुच्छेद 173 के संदर्भ में किसी राज्य की विधायिका में चुने जाने के योग्य नहीं होगी।” लो रानी ने दावा किया था कि बांग्लादेश में उनके पति के पैतृक स्थान के वोटर लिस्ट में गलत तरीके से उनका नाम शामिल हो गया था।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा था कि टीएमसी नेता अलो रानी सरकार की शादी 1980 के दशक में बांग्लादेश के नागरिक हरेंद्र नाथ सरकार से हुई थी, जिसके बाद वो कुछ वक्त के लिए बांग्लादेश गई थीं। हालाँकि, जब पति से नहीं बनी तो वो फिर से भारत चली आईं। अपने हलफनामे में अलो रानी ने 5 नवंबर 2020 को वोटर लिस्ट और बांग्लादेश के राष्ट्रीय पहचान पत्र (एनआईसी) से अपना नाम कैंसिल कराने के लिए अप्लाई किया था। 29 जून 2021 को वरिष्ठ जिला चुनाव अधिकारी (बरिसाल) ने बांग्लादेश की वोटर लिस्ट से उनका नाम हटाने की सिफारिश की थी।

आलो रानी सरकार ने 31 मार्च 2021 को बनगाँव दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल किया था। इसके लिए मतदान 22 अप्रैल 2021 को हुआ था और 2 मई को इसके रिजल्ट आए। चुनाव के दौरान टीएमसी की नेता बांग्लादेशी नागरिक थीं। भारत में दोहरी नागरिकता वाले लोग चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। 

भारत में मस्जिदें बनाने के लिए विदेशी फंडिंग, महानगरों में रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने की साजिश: देवबंद से जुड़े आतंकियों के तार

               दारुल उलूम देवबंद से जुड़े हैं UP ATS द्वारा भारत विरोधी साजिश में गिरफ्तार अधिकतर साजिशकर्ता
राहुल पाण्डेय

उत्तर प्रदेश पुलिस की आतंकवाद निरोधक शाखा (ATS) ने 11 अक्टूबर, 2023 को 10 संदिग्ध आतंकियों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। इनके नाम आदिल उर रहमान अशरफी, अबू हुरैरा गाज़ी, शेख नज़ीबुल हक, मोहम्मद राशिद, कफीलुद्दीन, अज़ीम, अब्दुल अव्वल, अबु सालेह, अब्दुल गफ्फार और अब्दुल्ला गाजी हैं। इन सभी पर विदेशों से अवैध तौर पर पैसे मँगवा कर भारत में मस्जिदें बनवाने, रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में अवैध तौर पर बसाने और देश विरोधी गतिविधियाँ चलाने का आरोप है।

इस पूरे मामले में खास बात ये है कि यूपी ATS द्वारा गिरफ्तार अधिकतर साजिशकर्ता देवबंद के दारुल उलूम से जुड़े पाए गए। इन 10 आरोपितों में दिल्ली निवासी अब्दुल अव्वल अवैध तरीके से उत्तर प्रदेश, दिल्ली और असम के निवासियों के कागजात को हासिल कर के बैंक खाते खुलवाता है। बाद में वो खाते दिल्ली के ही अब्दुल गफ्फार को सौंप देता है। गफ्फार इन खातों में विदेशों से पैसे मँगवाता है। ये पैसे मँगवाने में अबु सालेह भी गफ्फार की मदद करता है।

विदेशों और देश के कई अन्य हिस्सों में मँगवाया गया ये धन हवाला के जरिए नजीबुल शेख तक पहुँचाया जाता था। नजीबुल शेख की सहारनपुर में दारुल उलूम देवबंद के पास टोपी और परफ्यूम की दुकान हैं।

बंगाल का नजीबुल, दारुल उलूम के सामने सेंट-टोपी की दुकान

ATS के मुताबिक, मूल रूप से पश्चिम बंगाल और अस्थाई तौर पर देवबंद में रह रहे नजीबुल ने बांग्लादेशी अतीक उर रहमान को अपने सहयोगी के रूप में रखा हुआ था। अतीक उर रहमान ने फर्जी कागजात से भारत का आधार व पैन कार्ड आदि बनवा रखा था। ये सभी एक गैंग के तौर पर काम कर रहे थे जो बांग्लादेशियों व रोहिंग्या नागरिकों को भारत में घुसपैठ करवाते थे और उनके भारतीय कागजात बनवाया करते थे। इन बांग्लादेशियों को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पूर्वोत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में बसाया जा रहा था।
11 अक्टूबर, 2023 को ATS को मुखबिर से सूचना मिली कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ संदिग्ध लखनऊ के चारबाग स्टेशन पर मौजूद हैं। ATS ने दबिश दे कर आदिलुर रहमान अशर्फी को दबोच लिया। इधर इसी दिन ATS की सहारनपुर यूनिट ने अबू हुरैरा और नजीबुल शेख को दबोच लिया। इन सभी से ATS मुख्यालय लखनऊ ला कर पूछताछ की गई। नजीबुल ने खुद को पश्चिम बंगाल का निवासी बताया जो फिलहाल देवबंद में दारुल उलूम के सामने परफ्यूम और टोपी की दुकान चला रहा था।
पूछताछ में नजीबुल ने कबूल किया कि उसे हवाला से पैसे मिलते थे। वहीं आदिलुर रहमान ने अपना असल नाम आदिल अहमद अशरफी बताया जो मूलतः बांग्लादेश का रहने वाला है। फर्जी कागजात से भारतीय बना आदिल अहमद फ़िलहाल देवबंद दारुल उलूम में पढ़ाई कर रहा था। इस नेटवर्क ने हाल में ही एक बांग्लादेशी महिला को अवैध तौर पर बॉर्डर पार करवा कर किसी इब्राहिम नाम के भारतीय पुरुष को 70,000 रुपए में बेच दिया था। महिला को बरामद करने के बाद इब्राहिम सहित गिरफ्तार कर लिया गया है, उसके कागजात फर्जी पाए गए हैं। पश्चिम बंगाल के रहने वाले वाले तीसरे आरोपित अबू हुरैरा ने बताया कि वो फिलहाल दारुल उलूम में देवबंद की छत्ता मस्जिद में रहता था।
UP ATS ने इन सभी से इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल उपकरण, मोबाइल, ATM कार्ड, संयुक्त अरब अमीरात की मुद्रा, भारतीय कैश, सिमकार्ड, आधार कार्ड, मदरसे का कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट बरामद किया। इन सभी आरोपितों पर IPC की धारा 120- बी, 419, 420, 467, 468, 471, 370 और विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 14 के तहत कार्रवाई की है। इसमें से 3 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनके नाम आदिल उर रहमान, नजीबुल शेख और हुरैरा गाज़ी हैं। बाकी सभी फरार चल रहे हैं। फिलहाल इस केस की विवेचना ATS के मेरठ यूनिट प्रभारी इंस्पेक्टर धर्मेंद्र यादव कर रहे हैं। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।
ऑपइंडिया को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, विदेशी पैसों से मस्जिदों का निर्माण पहले चरण में पाकिस्तान सीमा से लगे पंजाब और बांग्लादेश बॉर्डर के पास पश्चिम बंगाल में होना था। हालाँकि, ATS फिलहाल इस आतंकी नेटवर्क की जड़ और इसके आर्थिक स्रोतों का पता लगाने में जुटी हुई है। साथ ही अभी इन मस्जिदों के निर्माण का मकसद भी सामने आना बाकी है।

दारुल उलूम में लगातार की जा रही थी बांग्लादेशी घुसपैठियों की मदद

उत्तर प्रदेश ATS की जाँच में आदिल उर रहमान अशरफी के पास से दारुल उलूम देवबंद का पहचान पत्र मिला था। वह मूलतः बांग्लादेश का रहने वाला बताया गया। हालाँकि, बाद में दारुल उलूम ने आदिल उर रहमान को अपना छात्र मानने से इनकार कर दिया था। यद्यपि ऑपइंडिया को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आदिल उर रहमान अक्सर देवबंद के अंदर आया-जाया करता था। वह यहाँ कई बार नमाज़ पढ़ते और पढ़ाते हुए भी देखा गया था।
इसी केस में पकड़ा गया एक अन्य आरोपित भी देश विरोधी कृत्यों में शामिल था। वो खुद को गाज़ी बताता था। उसका नाम अबू हुरैरा है जो भले ही पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले का रहने वाला था लेकिन फिलहाल वो दारुल उलूम देवबंद की छत्ता मस्जिद में रहता था। बांग्लादेशी घुसपैठियों का पैसा अपने खाते में मँगवाने वाला पश्चिम बंगाल में 24 परगना निवासी शेख नजीबुल दारुल उलूम देवबंद के सामने ही लम्बे समय से परफ्यूम और टोपी बेचने की दुकान चला रहा था।
इस से पहले 19 जुलाई, 2023 को UP ATS ने एक अन्य FIR दर्ज की थी। तब ATS ने हबीबुल्लाह मिस्बाह और अहमदुल्लाह को गिरफ्तार किया था। हबीबुल्लाह मूल रूप से बांग्लादेश के दिनाजपुर का रहने वाला निकला था जिसके पास दारुल उलूम देवबंद का परिचय पत्र बरामद हुआ था। वह दारुल उलूम देवबंद के पास रुखसाना बिल्डिंग में रहता था। हबीबुल्लाह कुछ समय तक आदिल उर रहमान का रूम पार्टनर भी रह चुका है। इन अवैध घुसपैठियों ने भी फर्जी तरीके से भारतीय पहचान पत्र बनवा रखे थे।
इन सभी के अलावा ATS ने 28 अप्रैल 2022 को भी एक FIR दर्ज करवाई थी। तब तलहा तालुकदार बिन फारुख नाम के आतंकी को गिरफ्तार किया गया था। तलहा मूलतः बांग्लादेश का रहने वाला था जो फर्जी कागजातों से भारतीय बन कर दारुल उलूम देवबंद की बिल्डिंग दर ए जदीद के कमरा नंबर 61 में रहता था। ATS को तलहा तालुकदार के पास से दारुल उलूम देवबंद के वजीफे की रसीद भी बरामद हुई थी। पूछताछ में तलहा तालुकदार ने कबूल किया था कि उसके साथ सलाउद्दीन सालिम और इफ्तकार नाम के 2 अन्य बांग्लादेशी भी अवैध तौर पर दारुल उलूम में रह कर अरबी पढ़ रहे थे। (साभार)

उत्तर प्रदेश : काम कुछ नहीं, खर्चा हर महीना 2 लाख रूपए

                               करोड़ों का मालिक है घुसपैठिया रिज़वान (फोटो साभार एएनआई)
उत्तर प्रदेश के कानपुर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी रिजवान और उसके परिवार को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जाँच में पता चला है कि रिजवान और उसका परिवार महीने के लाखों रुपए खर्च कर रहा था, जबकि उसके पास कमाई का कोई साधन नहीं है।

पुलिस ने जब रिजवान और उसके परिवार का बैंक डिटेल खंगाला तो पता चला कि परिवार के पास चार बैंक खाते हैं। रिजवान के बैंक खाते में नवंबर महीने में 8 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे। रुपए किसने भेजे थे, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। फिलहाल पुलिस उसके और उसके परिवार के अन्य लोगों के डिटेल खंगाल रही है।

वहीं, जाँच में यह भी पता चला है कि रिजवान का परिवार महीने के 2 लाख रुपए खर्च कर रहा था, जबकि परिवार के पास आमदनी का कोई जरिया नहीं है। उसने पुलिस को बताया था कि वह हवाला का कारोबार करता है। हालाँकि, वह यह नहीं बताया कि पैसे कहाँ लगाता (investment) है। पुलिस को सबूतों के बिना इसे साबित करना मुश्किल होता जा रहा है।

 पुलिस को रिजवान के घर छापेमारी के दौरान लगभग 14 लाख रुपए नकद मिले थे। उसके अलावा उसके घर से विदेशी करेंसी और महँगे गहने भी मिले थे। जाँच में तो यह बात भी सामने आई है कि रिजवान ने बांग्लादेश में करोड़ों रुपए की संपत्ति बनाई है। ऐसे में सवाल है कि जब रिजवान कोई काम नहीं करता तो उसके पास इतना रुपया कहाँ से आया। उसके खाते में रुपए कहाँ से आ रहे थे और कौन भेज रहा था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कानपुर पुलिस ने पहले ही इंटेलिजेंस एजेंसियों को पत्र लिखा था। इंटेलिजेंस ने भी इस परिवार को देश की सुरक्षा के लिए खतरा माना है। उसके पास से फर्जी दस्तावेज और बांग्लादेश समेत भारतीय पासपोर्ट मिले हैं। रिजवान पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल भी जा चुका है। ऐसे में यह मामला देश-विरोधी गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह परिवार साल 2016 से अवैध तौर पर भारत में रह रहा है। उसने कानपुर में ही हिना नाम की लड़की से निकाह भी कर लिया, जिससे उसे एक बेटा और दो बेटियाँ हैं। पुलिस की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक, पकड़े गए आरोपितों के कागजात कानपुर से समाजवादी पार्टी के विधायक हाजी इरफ़ान सोलंकी ने वेरिफाई किए थे।

पुलिस ने बताया कि सपा विधायक इरफ़ान ने न सिर्फ पकड़े गए आरोपितों को अपने आधिकारिक लेटर हेड पर भारतीय होने का सर्टिफिकेट दिया था, बल्कि उनके कागजातों को लगातार सत्यापित भी किया था। इससे उसने सभी का आधार कार्ड बनवाया था। इसके अलावा सपा पार्षद मन्नू रहमान ने साल 2019 में इन बांग्लादेशियों के भारतीय होने का प्रमाण पत्र जारी किया था।

रिजवान ने पुलिस को बताया था कि वह मूल रूप से बांग्लादेश के खुलना जिले का निवासी है। उसके घर से गिरफ्तार किए गए संदिग्धों की पहचान 79 साल के ख़ालिद माज़िद, 53 साल के रिज़वान मोहम्मद, 45 साल की हिना खालिद और 21 साल की रुखसार के तौर पर हुई। एक अन्य नाबालिग भी पुलिस हिरासत में है जो इसी परिवार का है।

रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए आधार कार्ड बनवा रहा है PFI

                                                                                          प्रतीकात्मक तस्वीर/साभार: नवभारत टाइम्स
कट्टरपंथी संगठन पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (Popular Front of India) देश की सम्प्रभुता और एकता को तोड़ने के लिए अलग-अलग तरीके से काम करता रहा है। देश में दंगे भड़काने से लेकर देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता पाए जाने के बाद अब पीएफआई की एक और करतूत का खुलासा हुआ है।

दरअसल, पटना पुलिस की जाँच के बाद यह सामने आया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) अपने संगठन में भर्ती करने के लिए रोहिंग्या मुस्लिमों (Rohingya) और बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए आधार कार्ड बनवा रहा है।

PFI यदि घुसपैठियों के आधार कार्ड, वोटर कार्ड और राशन कार्ड बनवा रहा है, केवल किसी सरकारी बाबू को रिश्वत देकर यह काम नहीं किया जा रहा, इसकी एक लम्बी कड़ी है, जिसमे दलाल और संविधान की शपथ लेकर निर्वाचित(सत्ता अथवा विपक्ष) में बैठे नेता भी शामिल होते हैं, क्योकि बिना सियासतखोर की छत्रसाया के यह काम नहीं हो सकता, पुलिस भी कार्यवाही के नाम पर या तो दलाल को पकड़ लेती है या सिर्फ बाबू को। लेकिन भ्रष्टाचार को पनाह देने वाले बेफिक्र आज़ाद घूमते रहते हैं। 

पटना पुलिस ने अपनी इस जाँच में कहा है कि हमें आशंका है कि पीएफआई आधार कार्ड बनवाने के लिए तस्करों द्वारा फर्जी कागजात तैयार करवाने के साथ ही ऐसे तरीके अपना रहा है जिससे घुसपैठियों की पहचान होना बेहद मुश्किल है।

पुलिस ने यह भी कहा कि पीएफआई रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी घुसपैठियों को कर्नाटक और समेत अन्य राज्यों में मज़दूर के रूप में भेज रहा है ताकि इनकी नई पहचान बनाई जा सके।

न्यूज़ 18 की रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र खासतौर से किशनगंज, दरभंगा, कटिहार, मधुबनी, सुपौल और पूर्णिया जिलों को टारगेट किया जा रहा है।

मुस्लिम परिवार कर रहे हैं फर्जी दस्तावेज बनवाने में सहयोग

इस रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से यह भी कहा गया है कि फर्जी आधार कार्ड बनवाने के लिए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) द्वारा भारतीय मुस्लिम परिवारों का उपयोग किया जा रहा है। इसके लिए, पीएफआई इन मुस्लिम परिवारों को विभिन्न प्रकार के लालच देते हुए कुछ पैसे भी देती है। जिसके बाद, मुस्लिम परिवार रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी घुसपैठियों को अपने परिवार का हिस्सा बताते हैं।
जिस व्यक्ति के फर्जी दस्तावेज तैयार कराने होते हैं उसके लिए इन मुस्लिम परिवारों द्वारा यह कहा जाता है कि जब यह छोटा था तो इसे रिश्तेदार के यहाँ भेज दिया था और किसी कारण से उसका वहाँ आधार कार्ड नहीं बन सका है। लेकिन, अब यह हमारे साथ रहने के लिए वापस आ गया है इसलिए इसके आधार कार्ड की आवश्यकता है।
रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर बिहार पुलिस के अधिकारी इस बात की भी आशंका जताते हैं कि बंगाल-असम सीमा पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी है इसलिए अब घुसपैठिए भारत-नेपाल बॉर्डर से घुसपैठ कर रहे हैं। यही कारण है कि भारत-नेपाल सीमा पर कई अवैध कालोनियाँ बस चुकीं हैं।
बिहार पुलिस के अधिकारी ने बताया है कि एक अनुमान के मुताबिक 2018 के बाद से अब तक नेपाल बॉर्डर पर लगभग 500 करोड़ रुपए की लागत से 700 के करीब नए मदरसों और मस्जिदों का निर्माण कराया गया है। बॉर्डर पर हुए इस अवैध निर्माण के लिए यूएई, कतर और तुर्की जैसों देशों द्वारा फंडिंग का अंदेशा भी जताया जा रहा है।

बच्चे खेल-खेल में पत्थर चला देंगे… बखेड़ा खड़ा हो जाएगा… इसलिए जुमे की नमाज में न आएँ: जहाँगीरपुरी की जामा मस्जिद का ऐलान

हनुमान जयंती की शोभायात्रा में हुई हिंसा के बाद दिल्ली के जहाँगीरपुरी स्थित जामा मस्जिद ने बच्चों को लेकर ऐलान किया है। मस्जिद प्रबंधन ने आज शुक्रवार (22 अप्रैल 2022) को होने वाली जुमे की नमाज़ में बच्चों को न आने के लिए कहा है। उधर दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कुछ क्षेत्रों में अभी भी बुलडोजर की कार्रवाई जारी रखने की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाँगीरपुरी की जामा मस्जिद द्वारा बच्चों के जुमे की नमाज़ में न आने की वजह एहतियात बताया जा रहा है। बताया गया है कि मस्जिद के प्रबंधक नहीं चाहते कि कोई छोटा बच्चा खेल-खेल में पत्थर आदि चला दे और उससे बखेड़ा खड़ा हो जाए। फिलहाल मौके पर मस्जिद के आस-पास पुलिस और पैरामिलिट्री के जवानों के साथ-साथ मीडियकर्मियों भी मौजूद हैं।

‘बुलडोजर जारी रखें’ – दिल्ली भाजपा अध्यक्ष का पत्र

भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने दिल्ली के पूर्वी और दक्षिणी मेयर को अतिक्रमण के खिलाफ पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कुछ क्षेत्रों के नाम देकर वहाँ बुलडोजर की कार्रवाई जारी रखने की माँग की है।

लोगों में चर्चा है कि इतने वर्षों से नगर निगम में भाजपा क्या कर रही थी? अवैध निर्माण, अतिक्रमण और अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और रोहिंग्या को क्यों नहीं निकाला गया? चुनाव आने पर या यूँ कहा जाए कि हनुमान जयंती शोभा यात्रा पर हुए पत्थराव के बाद ही क्यों याद आयी? दूसरे, नगर निगम से भ्रष्टाचार तक 1% भी दूर नहीं हुआ, विपरीत इसके बढ़ा है, क्यों? 

आदेश गुप्ता के मुताबिक, “दिल्ली में अतिक्रमण ज्यादातर बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों ने किया है। इन सभी को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का संरक्षण प्राप्त है। यह अतिक्रमण लगभग 8 साल पुराना है।” 20 अप्रैल 2022 (बुधवार) को जारी हुए इस पत्र में आदेश गुप्ता ने अतिक्रमण करने वालों को ‘असामाजिक तत्व’ कहा है।

रोहिंग्या, बांग्लादेशियों को भगाने के लिए आंदोलन

एक अन्य ट्वीट में आदेश गुप्ता ने दिल्ली में रोहिंग्या और बांग्लादेशी समस्या के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी को दोषी ठहराया है। उनके मुताबिक, “कॉन्ग्रेस द्वारा बसाए गए घुसपैठियों का भरण पोषण मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कर रहे हैं। दिल्ली में घुसपैठियों के लिए कोई जगह नहीं है। इन्हें भगाने के लिए भाजपा आंदोलन करेगी।”