Showing posts with label parliament. Show all posts
Showing posts with label parliament. Show all posts

फर्जी आधार कार्ड के साथ कासिम, मोनिस और शोएब… संसद में घुसपैठ करते CISF ने पकड़ा : पूछताछ में जुटी दिल्ली पुलिस

लोकसभा चुनावों में नतीजे आने के बाद संसद में घुसपैठ की कोशिश का मामला सामने आया है। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि संसद परिसर में प्रवेश करने का प्रयास करते हुए तीन मजदूरों को CISF कर्मियों ने पकड़ा और बाद में इनकी गिरफ्तारी हुई।

पुलिस को इन्हे फर्जी आधार कार्ड बनाने और कार्ड बनवाने वालों को भी गिरफ्त में लेना चाहिए। ऐसे पता नहीं कितनों को फर्जी आधार कार्ड दिए होंगे। यह बहुत गंभीर मामला है। 

इन तीनों के नाम कासिम, मोनिस और सोएब है। इनके खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी से संबंधित आईपीसी धाराएँ लगाई गई हैं। खबरों के अनुसार, इन तीनों की गिरफ्तारी उस समय हुई जब तीनों नियमित सुरक्षा और पहचान जाँच के दौरान संसद भवन के फ्लैप गेट एंट्री से घुस रहे थे। इसी बीच सीआईएसएफ कर्मियों को इनकी एक्टिविटी संदिग्ध लगी।

सीआईएसएफ कर्मियों ने तीनों को रोका और हिरासत में लिया जाँच हुई तो ये भी सामने आया कि उन लोगों के आधार कार्ड जाली थे और तीनों ही डीवी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड में कार्यरत थे, जिसे संसदर परिसर के अंदर सांसदों के लिए लाउंज बनाने का ठेका दिया गया है।

 सीआईएसएफ ने तीनों को दिल्ली पुलिस को सौंप दिया है। उन्होंने इनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली है और आईपीसी की धाराओं 465, 419, 120 बी, 471, 468 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

साल 2023 में भी संसद में सुरक्षा चूक का मामला सामने आया था, जिस पर हाल की खबरें बताती हैं कि उस केस के 6 आरोपितों के विरुद्ध गैरकानूनी गतिविधिया रोकथाम अधिनियम के तहत केस चलेगा। इन 6 आरोपितों के नाम  ललित झा, सागर शर्मा, मनोरंजन डी, अमोल धनराज शिंदे, नीलम रानोलिया और महेश कुमावत हैं।

इन लोगों ने संसद में उपद्रव मचाने के लिए कई समय से प्लानिंग की थीं। इसके अलावा इन्होंने एक मोची से विशेष जूते बनवाए थे जिनके तलवे में 2.5 इंच गहरी जगह थी। ये लोग धुएँ के केन इसी स्पेस में छिपाकर संसद में लाए थे। हालाँकि सांसदों की तेजी के बाद ये सारे पकड़ लिए गए और इनके पास से पर्चे बरामद हुए थे जिनपर प्रधानमंत्री के लापता होने जैसी बात लिखी थी।

‘मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराएँ बांग्लादेशी घुसपैठिए, जाकिर भाई से जाकर मिलें’: TMC नेता का वीडियो वायरल; चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट संज्ञान ले

                   ममता बनर्जी और रत्ना बिस्वास (साभार: The Telegraph and Sangbad Pratidin)

भारत में आगामी लोकसभा चुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक नेता के बयान ने विवाद पैदा कर दिया है। टीएमसी नेता रत्ना बिस्वास ने पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की मतदाता सूची में बांग्लादेशियों को शामिल करने की बात कही है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस वीडियो का केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और समस्त स्वयंसेवी हिन्दू संस्थाएं  संज्ञान ले। यह देश में अति गंभीर समस्या पैदा होने का स्पष्ट संकेत दे रहा है। यदि इन समय व्यर्थ किये बिना कोई कार्यवाही नहीं की गयी, वह दिन दूर नहीं कहीं भारत दूसरा पाकिस्तान, फिलिस्तीन और गाज़ा न बन जाए। जिन नेताओं और पार्टियों को जनहितैषी समझ इनकी चिकनीचुपड़ी बातों में आकर वोट दे देते हैं, ये लोग जनहितैषी नहीं जनविरोधी है जो घुसपैठियों को मतदाता सूची में शामिल कर अपने वर्चस्व बनाकर देश को भ्रमित कर रहे हैं। 

वीडियो में टीएमसी नेता एवं पूर्व पंचायत प्रधान रत्ना कह रही हैं, “इस क्षेत्र में कई बांग्लादेशी रहते हैं। जो लोग बांग्लादेश से यहाँ आए हैं और उन्हें मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने में दिक्कत आती है तो उन्हें जाकिर भाई से संपर्क करना चाहिए। ऐसे सभी लोगों को इस कार्यालय से संपर्क करना चाहिए… यह काम तेजी से किया जाना चाहिए।”

यह वीडियो वायरल होने के बाद विवाद हो गया है। विवाद के बाद स्थानीय पंचायत समिति के पूर्व अध्यक्ष जाकिर हुसैन ने दावा किया, “रत्ना बिस्वास का यह मतलब नहीं था। मेरे क्षेत्र में रहने वाले अधिकांश लोग 1960-65 से पहले यहाँ आए थे। 1990 के बाद कई लोगों को मतदाता सूची से हटा दिया गया है। इनके नाम पहले मतदाता सूची में थे।”

जाकिर हुसैन ने आगे कहा, “दरअसल उन्होंने (रत्ना बिस्वास ने) इन्हीं लोगों की मदद करने की बात कही है। हम निश्चित रूप से आम लोगों को मतदाता सूची में सुधार सहित सेवाएँ निःशुल्क प्रदान करते हैं और यह सब कानून के अनुसार किया जाता है। उन्होंने गलत तरीके से उन सभी को बांग्लादेशी बताया है।”

मतदाता सूची में बांग्लादेशियों के नाम जोड़ने की कोशिश पर भाजपा ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पर हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा, “सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस पहले से ही ऐसे मतदाता पहचान पत्र बनाने का काम कर रही है। घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाते हैं।” उन्होंने इस मामले की जाँच की माँग की है।

पिछले साल मई में पता चला कि बनगाँव दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद अलो रानी सरकार बांग्लादेश की नागरिक हैं। यह खुलासे तब हुए जब उन्होंने चुनाव परिणाम और उक्त निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा नेता स्वपन मजूमदार की जीत को कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी। याचिका पर न्यायमूर्ति बिबेक चौधरी ने सुनवाई की।

इस पर कोर्ट ने कहा था कि नामांकन दाखिल करने की तारीख, चुनाव की तारीख और परिणाम की घोषणा की तारीख पर अलो रानी सरकार बांग्लादेश की नागरिक थीं। कोर्ट ने आगे कहा, “याचिकाकर्ता के स्वयं के दस्तावेज़ को देखने से पता चलता है कि याचिकाकर्ता को 2021 का विधानसभा चुनाव लड़ने का कोई अधिकार नहीं था।”

मामले की सुनवाई करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा था, “चूँकि वह भारत की नागरिक नहीं हैं, इसलिए वह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 के साथ पढ़े गए संविधान के अनुच्छेद 173 के संदर्भ में किसी राज्य की विधायिका में चुने जाने के योग्य नहीं होगी।” लो रानी ने दावा किया था कि बांग्लादेश में उनके पति के पैतृक स्थान के वोटर लिस्ट में गलत तरीके से उनका नाम शामिल हो गया था।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा था कि टीएमसी नेता अलो रानी सरकार की शादी 1980 के दशक में बांग्लादेश के नागरिक हरेंद्र नाथ सरकार से हुई थी, जिसके बाद वो कुछ वक्त के लिए बांग्लादेश गई थीं। हालाँकि, जब पति से नहीं बनी तो वो फिर से भारत चली आईं। अपने हलफनामे में अलो रानी ने 5 नवंबर 2020 को वोटर लिस्ट और बांग्लादेश के राष्ट्रीय पहचान पत्र (एनआईसी) से अपना नाम कैंसिल कराने के लिए अप्लाई किया था। 29 जून 2021 को वरिष्ठ जिला चुनाव अधिकारी (बरिसाल) ने बांग्लादेश की वोटर लिस्ट से उनका नाम हटाने की सिफारिश की थी।

आलो रानी सरकार ने 31 मार्च 2021 को बनगाँव दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल किया था। इसके लिए मतदान 22 अप्रैल 2021 को हुआ था और 2 मई को इसके रिजल्ट आए। चुनाव के दौरान टीएमसी की नेता बांग्लादेशी नागरिक थीं। भारत में दोहरी नागरिकता वाले लोग चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। 

‘हम जानते हैं क्यों दाखिल की है ये याचिका, शुक्र मनाओ जुर्माना नहीं लगा रहे’: सुप्रीम कोर्ट

                                                      राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और नया संसद भवन
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (26 मई 2023) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा नए संसद भवन का उद्घाटन कराने के लिए लोकसभा सचिवालय को निर्देश देने की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि शुक्र मनाओ पर कोर्ट जुर्माना नहीं लगा रहा है।

जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की सुप्रीम कोर्ट की अवकाश पीठ ने कहा कि याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता सीआर जया सुकिन के पास इस तरह की याचिका दायर करने का कोई अधिकार नहीं है। पीठ ने कहा कि उन्हें आभारी होना चाहिए कि अदालत उन पर जुर्माना नहीं लगा रही है।

बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा, “आपका उद्देश्य क्या है? हम जानते हैं कि आपने ये याचिका क्यों दायर की है। हम अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं।” इस पर याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने की कोर्ट से अनुमति माँगी, कोर्ट ने उसे इसकी अनुमति नहीं दी।

अदालत में केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “याचिका वापस लेने की अनुमति देने से उन्हें उच्च न्यायालय जाने की स्वतंत्रता मिलेगी। ये न्यायसंगत नहीं है। अदालत को इस पर ध्यान देना चाहिए।” कोर्ट ने कहा, “काफी समय तक बहस करने के बाद याचिकाकर्ता इसे वापस लेने की माँग कर रहा है, लेकिन हम याचिका को खारिज करते हैं।”

दरअसल, अधिवक्ता सीआर जया सुकिन द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि 18 मई 2023 को लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी बयान और लोकसभा के महासचिव द्वारा नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए जारी किया गया निमंत्रण भारतीय संविधान का उल्लंघन है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 79 का हवाला देते हुए कहा गया है कि राष्ट्रपति संसद के अभिन्न अंग हैं। इसलिए उन्हें उद्घाटन से दूर नहीं रखा जाना चाहिए।

याचिका में कहा गया है, “राष्ट्रपति भारत के पहले नागरिक हैं और संसद की संस्था के प्रमुख हैं। इसलिए देश के बारे में सभी महत्वपूर्ण निर्णय भारतीय राष्ट्रपति के नाम पर लिए जाते हैं। संसद में राष्ट्रपति और दोनों सदन- राज्यसभा और लोकसभा शामिल हैं। राष्ट्रपति के पास संसद को बुलाने और सत्रावसान करने या लोकसभा को भंग करने का अधिकार है।”

बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई 2023 को नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे। इस समारोह का कॉन्ग्रेस सहित 21 विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा संसद भवन का उद्घाटन करना राष्ट्रपति का अपमान है।

जो था भारत का राजदंड, उसे बना दिया नेहरू की ‘स्वर्ण छड़ी’: मोदी की नजर में आया ‘सेंगोल’ का गुमनाम इतिहास


नए संसद भवन के उद्घाटन की खबर के साथ चर्चा में आए ‘सेंगोल’ को कुछ समय पहले कोई जानता तक नहीं था। मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से अब इसकी महत्वता और इसका इतिहास सब मुख्यधारा मीडिया में है। साल 1947 में स्वतंत्रता के समय आखिरी वायसराय माउंटबेटन ने सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के तौर पर ‘सेंगोल’ पंडित नेहरू को सौंपा था। इसके बाद इसे इलाहाबाद संग्राहलय में ‘नेहरू को तोहफे में मिली स्वर्ण छड़ी’ बताकर रख दिया गया।

आज जनता संसद के नए भवन के उद्घाटन पर हो रहे विरोध की वास्तविकता को समझना होगा, विरोध इसलिए नहीं हो रहा कि उद्घाटन नरेंद्र मोदी कर रहे हैं, बल्कि देश की सत्ता हस्तांतरण धरोहर को बताया गया उपहार किसी म्यूज़ियम से निकालना है। यह किसी की व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्र की धरोहर है। क्यों 'सत्ता हस्तांतरण प्रतीक' को 'नेहरू को तोहफे में मिली स्वर्ण छड़ी' बताकर जनता को सनातन धर्म की सच्चाई से छुपाकर गुमराह किया गया। और सच्चाई सामने आने पर इन समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्षों की रोटी-पानी हराम हो गया है। इन छद्दमों से पूछा जाए कि क्या नंदी अंकित मात्र एक छड़ी है? देश का वास्तविक इतिहास बाहर आना शुरू हो चुका है। जैसे-जैसे पृष्ठ खुलते जाएंगे, आन्दोलनजीवियों के माध्यम से अशांति फैलाते रहेंगे।  

प्रश्न ये नहीं होना चाहिए की कौन करेगा नए संसद भवन का उद्घाटन! बल्कि प्रश्न होना चाहिए 1947 से इसे क्यों छुपाया गया? बाद में परंपरा का पालन क्यों नहीं किया जाता है? इसे गायब किसने किया? क्या यह विशेष पंथों को खुश करने के लिए है? ऐसी और कितनी बातें छिपी हैं? और क्यों?

प्नधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी सूचना कुछ साल पहले एक वीडियो से लगी। 5 फीट लंबे सेंगोल पर वीडियो ‘वुम्मिडी बंगारू ज्वेलर्स (VBJ)’ ने बनाई थी। इसके मैनेजिंग डायरेक्टर आमरेंद्रन वुम्मिडी ने कहा कि उन्हें सेंगोर के बारे में खुद भी नहीं पता था। वो तो 2018 में एक मैग्जीन में इसका जिक्र देखा और जब खोजा तो 2019 में उन्हें ये इलाहाबाद के एक म्यूजियम में रखा हुआ पाया।

इसके बाद उन्होंने म्यूजियम के अधिकारियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की सोची। हालाँकि महामारी के कारण ऐसा नहीं हो पाया, और सेंगोल पर एक वीडियो बनाई गई। बाद में यह वीडियो पीएम मोदी के संज्ञान में आई। पीएम कार्यालय ने एक टीम नियुक्त की जिसने वुमुड्डी ग्रुप से संपर्क किया। खोजबीन में सामने आया कि ये सेंगोल को बंगलौर के फेमस वुम्मिडी बंगारू चेट्टी एंड सन्स ज्वैलर्स एंड डायमंड मर्चेंट्स ने ही तैयार किया था। उनके परिवार के पास सेंगोर की एक तस्वीर भी है।

इस दौरान यह भी पता चला कि 1947 में सत्ता के हस्तांतरण को दर्शाने के लिए सी राजगोपालाचारी के अनुरोध पर तमिलनाडु (तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी) में तिरुववदुथुरई अधिनाम द्वारा राजसी 5 फीट लंबा सेंगोल का निर्माण किया गया था। इसे बनाने के लिए वुम्मिदी बंगारू चेट्टी को मिली थी।

बंगारू चेट्टी द्वारा सेंगोल को 100 से अधिक सोने के गहनों से बनाया गया था। जिन्होंने उस समय इसे बनाने के केवल 15000 रुपए लिए थे और 30 दिन से भी कम का समय में इसे तैयार कर दिया था। उनके साथ इसे बनाने में इसे बनाने में उनके बेटों वुम्मिदी एथिराजुलू और वुम्मिदी सुधाकर ने एक प्रमुख भूमिका निभाई थी। लेकिन इनका परिवार वक्त के साथ सेंगोल को भूल गया।

आमरेंद्रन कहते हैं कि उन्हें नहीं पता था कि सेंगोल कैसा दिखता है और उसे कैसे बनाया गया। वुम्मिडी परिवार की मानें तो वो खुद उस सेंगोल को भुला चुके थे। ये भी नहीं पता था सेंगोल लंबे समय से कहा था। सेंगोल सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक है। इसकी प्रथा तमिलनाडु में शासन करने वाले चोल, पांडियार, पल्लव राजवंशों के समय से है। उन्होंने सेंगोर को नेहरू की स्वर्ण छड़ी बताने पर कहा कि हाँ मैंने म्यूजियम में रखे सेंगोर की कुछ तस्वीरें देखीं, गलती हुई है।

वहीं इंडिया टुडे से बातचीत में वुम्मिदी एथिराजुलू के बेटे उजय वुम्मिदी ने बताया वो कहते हैं कि उन्हें नहीं पता था सेंगोल लंबे समय से कहाँ था। अगर आज ये दोबारा मिला तो इसके लिए मीडिया और पीएम मोदी का आभार। पीएम मोदी ने हमें ढूँढकर इसके बारे में पूछा और हमारी स्मृतियों को जिंदा किया। वैसे ये सेंगोल कहीं खोया नहीं था। बस यादों से धूमिल हो गया था। कुछ समय पहले उनके मार्केटिंग हेड को ये छड़ी के रूप में इलाहाबाद म्यूजियम में मिला। इसे बॉक्स में रखा गया था और लिखा कि ये स्वर्ण छड़ी नेहरू को तोहफे में मिली थी।

सेंगोल 1947 में नेहरू को मिलने के बाद से गायब हो गया था। लेकिन 15 अगस्त 1978 में कांचीपुरम के कांची कामकोटि पीतम के 68वें संत श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती स्वामिगल जिन्हें महा पेरियावा नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने इसके बारे में एक आयोजन में अपने अनुयायी डॉ बी आर सुब्रमण्यम को बताया और उन्होंने इसका जिक्र अपनी किताब में किया। इसके बाद इसी किताब के हवाले से मीडिया में लेख प्रकाशित हुए और उन्हीं लेखों की बदौलत आजाद भारत में पंडित नेहरू को मिले सेंगोल की कहानी हमारे सामने है।

मीडिया में यह भी बताया जा रहा है कि सेंगोर की जानकारी पीएम मोदी को प्रसिद्ध डांसर पद्मा सुब्रमण्यम ने एक चिट्ठी के जरिए भी दी गई थी। उन्होंने अपनी चिट्ठी में एक तमिल मैग्जीन ‘तुगलक’ में प्रकाशित एक लेख का हवाला देते हुए ‘सेंगोल’ के बारे में पीएम को बताया। साथ ही माँग उठाई की पीएम इस बारे में जानकारी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सभी देशवासियों के साथ साझा करें।

पीएम मोदी कार्यालय में ये चिट्ठी रिसीव होने के बाद भी सेंगोल की खोजबीन शुरू हुई। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने इंदिरा गाँधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स के विशेषज्ञों की मदद ली और राष्ट्री अभिलेखागार से लेकर उस वक्त तमाम अखबारों और डॉक्यूमेंट्स में इसके बारे में खँगाला गया। हालाँकि बाद में पता चला कि ये सेंगोल प्रयागराज के आनंद भवन में है।

भारत की स्वतंत्रता से जुड़ा है नंदी: नई संसद में स्थापित होगा Sengol, भारत का वह इतिहास जो नेहरू ने सत्ता पाते ही भुला दिया

चोल राजा शिवभक्त हुआ करते थे, इसीलिए 'सेंगोल' में ये भी साफ़ झलकता है (फाइल फोटो)
भाजपा विरोधी कुर्सी की भूखी और तुष्टिकरण पर चलने वाली छद्दम धर्म-निरपेक्ष अपनाने वाली 19 पार्टियों द्वारा संसद के नए भवन के प्रवेश कार्यक्रम का बहिष्कार करने से अपनी सनातन विरोधी मानसिकता को जाहिर कर दिया है। आने वाले चुनावों इन सभी सनातन विरोधियों को जनता को धूल चटानी होगी। भाजपा को वोट नहीं देना चाहते कोई बात नहीं, NOTA को दे दो वोट, लेकिन इन सनातन विरोधियों को नहीं। 28 मई को भारत में चोल साम्राज्य की पुनः वापसी होने से तुष्टिकरण के कारण धूमिल हुई भारतीय संस्कृति उजागर होगी। यह देश का दुर्भाग्य है कि अधिकांश भारतवासियों को चोल साम्राज्य का ज्ञान नहीं। 

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (28 मई, 2023) को संसद के नए भवन के लोकार्पण के शुभ अवसर पर भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर पवित्र ‘सेंगोल’ को ग्रहण कर नए भवन में इसकी स्थापना करेंगे। साथ ही उन्होंने ‘सेंगोल’ को न्याय और निष्पक्षता का प्रतीक बताते हुए एक वीडियो भी शेयर किया। आप ज़रूर सोच रहे होंगे कि ये ‘सेंगोल’ क्या है और भारत सरकार से इसका क्या संबंध है।

‘सेंगोल’ का इतिहास जानने के लिए हमें सबसे पहले स्वतंत्रता के समय जाना होगा, जब भारत आज़ादी की लड़ाई जीत चुका था और सत्ता के हस्तांतरण के लिए कार्यक्रम होने वाला था। उस समय तमिलनाडु ‘मद्रास प्रेसिडेंसी’ के अंतर्गत आता था। पीयूष गोयल ने जो वीडियो शेयर किया, उसमें उस समय कुछ कलाकारों को दिल्ली के लिए कूच करने की तैयारी करते हुए देखा जा सकता है। उन्हें एक महत्वपूर्ण कार्य के लिए बुलाया गया था।

सत्ता के हस्तांतरण को पवित्रता प्रदान करते और उसकी वैधता स्थापित करने के लिए इन लोगों को बुलाया गया था। सत्ता एक शासक से दूसरे के पास जा रही थी, विदेशियों से स्वदेशियों के पास। भारत के अंतिम वायसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन को अंग्रेजी सरकार की तरफ से सत्ता हस्तांतरण का कार्य पूरा करने के लिए भेजा गया था। इस दौरान उनके मन में सवाल था कि इस कार्यक्रम, या इस क्षण को कैसे प्रदर्शित किया जाना चाहिए?

हाथ मिलाने से भी काम चल सकता था, लेकिन वो इसे एक विशेष प्रतीकात्मकता देना चाहते थे। इस दौरान उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू से भी ये सवाल पूछा। जवाहरलाल नेहरू खुद को सेक्युलर दिखाने में विश्वास रखते थे और शायद यही कारण रहा होगा कि जब लॉर्ड माउंटबेटन ने उनसे पूछा कि सत्ता हस्तांतरण की भारतीय परंपरा क्या है, तो उन्हें कोई जवाब नहीं सूझा। उन्होंने चक्रवर्ती राजगोपालचारी से इस संबंध में प्रश्न किया, जो भारतीय इतिहास और संस्कृति की गहरी समझ रखते थे।

राजाजी तमिलनाडु से ताल्लुक रखते थे और भारतीय संस्कृति-सभ्यता को लेकर उनके ज्ञान का सभी सम्मान करते थे। उन्होंने सत्ता हस्तांतरण की प्रतीकात्मकता की समस्या का हल भी इतिहास में निकाला। चोल राजवंश में, जो भारत के सबसे प्राचीन और सबसे लंबे समय तक चलने वाला शासन था। उस समय एक चोल राजा से दूसरे चोल राजा को ‘सेंगोल’ देकर सत्ता हस्तांतरण की रीति निभाई जाती थी। ये एक तरह से राजदंड था, शासन में न्यायप्रियता का प्रतीक।

चोल राजवंश भगवान शिव को अपना आराध्य मानता था। इस ‘सेंगोल’ को राजपुरोहित द्वारा सौंपा जाता था, भगवान शिव के आशीर्वाद के रूप में। इस पर शिव की सवारी नंदी की प्रतिमा भी है। इसी तरह के समारोह और रिवाज की सलाह राजाजी ने दी, जिस पर नेहरू तैयार हो गए। इसके बाद राजाजी ने मयिलाडुतुरै स्थित ‘थिरुवावादुठुरै आथीनम’ से संपर्क किया, जिसकी स्थापना आज़ादी से 500 वर्ष पूर्व हुई थी। मठ के तत्कालीन महंत अम्बालवाना देशिका स्वामी उस समय बीमार थे, लेकिन उन्होंने ये कार्य अपने हाथ में लिया।
उन्होंने ‘सेंगोल’ के निर्माण के लिए ‘वुम्मिडी बंगारू चेट्टी’ के आभूषण निर्माताओं को दिया। ‘सेंगोल’ के ऊपर नंदी का होना शक्ति, न्यायप्रियता और सत्य का प्रतीक है। वुम्मिडी एथिराजुलू ने ‘सेंगोल’ के निर्माण के बारे में जानकारी देते हुए बताया था कि उनके पास ‘सेंगोल’ की ड्रॉइंग लाई गई थी। ये गोल था और साथ में एक पोल का आकार था। उन्हें काफी सावधानी और उच्च गुणवत्ता के साथ इसे बनाने को कहा गया और बताया गया कि ये बहुत ही महत्वपूर्ण जगह जाने वाला है।
उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता के समय वो लोग इसका निर्माण करने में काफी खुश थे। समारोह के आयोजन के लिए महंत ने अपने शिष्य कुमारस्वामी, एक बड़े गायक और ‘नादसुर’ विशेषज्ञ को दिल्ली भेजा। 14 अगस्त, 1947 की रात को कुमारस्वामी श्रीला श्री कुमारस्वामी तम्बीरान ने ‘सेंगोल’ लॉर्ड माउंटबेटन को दिया। इसे जल से पवित्र किया गया था। इस दौरान तमिल संत ‘कोलारु पथिगम’ का गान किया गया, जो शैव कविता ‘थेवारम’ का हिस्सा है।
इसकी रचना तमिल कवि तिरुगन संबंदर ने की थी। संयासियों ने नेहरू को पीतांबर ओढ़ाया और मंत्रोच्चारण किया गया। इस दौरान जो पंक्ति पढ़ी गई, उसका अर्थ है – ‘हमारा आदेश है कि भगवान के अनुयायी राजा उसी तरह से शासन करेंगे, जैसे स्वर्ग के शासक।’ ये समारोह भारत के उत्तरी और दक्षिणी हिस्से के संगम का भी प्रतीक बना। डॉ राजेंद्र प्रसाद भी उस सामरोह में मौजूद थे। अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘Time’ ने भी इस संबंध में खबर प्रकाशित की थी।

नई संसद के उद्घाटन का 19 विपक्षी दलों द्वारा बहिष्कार करने की क्यों हो रही राजनीति?

विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 28 मई 2023 को किए जाने वाले नए संसद भवन (New Parliament House) के उद्घाटन का बहिष्कार करने की घोषणा की है। विपक्षी दलों ने भवन का उद्घाटन विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर कराने और उद्घाटन में राष्ट्रपति को नहीं बुलाने को लेकर आलोचना कर रहे हैं।

नेताओं का कहना है कि नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हाथों न कराकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कराना राष्ट्रपति का अपमान है। AAP के नेता संजय सिंह ने कहा कि यह भारत के दलित आदिवासी और वंचित समाज का अपमान है। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कहा कि नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति जी को ही करना चाहिए।

मोदी विरोधी वर्तमान युवा पीढ़ी को मोदी सरकार के विरुद्ध भड़का सकते हैं, लेकिन जब इसी युवा पीढ़ी को इनके इतिहास को दिखाया जाएगा, आइने में इनकी देखने वाली होगी। चलिए दो ही बातें बताते हैं: 1. जब सोमनाथ मन्दिर का जीणोद्धार के बाद उद्घाटन के लिए तत्कालीन प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किस अधिकार से वहां जाने से रोका था? 2. तत्कालीन महामहिम डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ राजन बाबू के निधन होने पर पटना जाने से जवाहरलाल नेहरू ने क्यों मना किया था? आदि आदि बहुत लम्बी सूची है, जो कांग्रेस द्वारा राष्ट्रपति के अपमान को चीख-चीखकर बता रही है। 

इस संबंध में कांग्रेस, शिवसेना (UBT), आम आदमी पार्टी, TMC, राजद, जदयू सहित 19 विपक्षी दलों ने एक संयुक्त बयान भी जारी किया है। अपने बयान में विपक्षी दलों ने कहा है, “जब संसद से लोकतंत्र की आत्मा को चूस लिया गया और सरकार डेमोक्रेसी के लिए खतरा बन गई है तो नए भवन का कोई मूल्य नहीं है।”

अपने संबोधन में विपक्षी दलों ने कहा कि अनुच्छेद 79 में संविधान कहता है कि संघ के लिए एक संसद होगा, जिसमें राष्ट्रपति और दो सदन होंगे। इन सदनों को राज्यसभा और लोकसभा के नाम से जाना जाता है। राष्ट्रपति भारतीय संघ की ना सिर्फ प्रमुख होते/होती हैं, बल्कि संसद के अभिन्न हिस्सा भी होते/होती हैं।

अपने बयान में विपक्षी दलों ने आगे कहा कि राष्ट्रपति के बिना संसद की कार्यवाही नहीं चल सकती। इसके बाद भी प्रधानमंत्री ने इसके भवन का उद्घाटन खुद ही करने का निर्णय लिया है। यह राष्ट्रपति का अपमान है और संविधान की मूल आत्मा का उल्लंघन करता है।

शिवसेना ठाकरे गुट के संजय राउत ने कहा, “सबसे पहले हमने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर कहा था। जब देश की आर्थिक स्थिति खराब है, तब लाखों-करोड़ों… सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च करने की क्या जरूरत थी? जिस तरह से इस प्रोजेक्ट को सिर्फ प्रधानमंत्री की इच्छा के लिए बनाया, क्या उसकी जरूरत थी?”

राउत ने कहा, “आज जो देश की इमारत है, पार्लियामेंट हाउस है, वो और 100 साल चल सकती है। इस देश की जो इमारत है, उससे भी पुरानी इमारतें इटली, ब्रिटेन, फ्रांस में हैं और वो अब तक चल रही हैं। इसको बनाने की इसलिए जरूरत पड़ी कि ये संसद भवन ऐतिहासिक है और इस ऐतिहासिक संसद भवन से ना RSS और ना ही बीजेपी का कोई रिश्ता है।”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजपी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “जो क्रांतिकारी काम हुए हैं, उससे RSS और बीजेपी का कोई रिश्ता नहीं है। एक इमारत बनाकर हम एक वो शिला लगाएँगे कि इनॉगरेटेड बाय प्राइम मिनिस्टर श्री नरेंद्र मोदी। इसके लिए ये खर्चा हो रहा है। इनके हाथों से नए संंसद भवन का उद्घाटन करना, ये प्रोटोकॉल है?”

संजय राउत ने कहा कि राष्ट्रपति सैद्धांतिक रूप से देश के प्रमुख होते हैं। वे संविधान के कस्टोडियन होते हैं और आप उन्हें नहीं बुलाया जा रहा है। यह उनका अपमान है। राउत ने कहा कि इसी आधार पर 19 विपक्षी दलों ने इस समारोह का बहिष्कार किया है।

MI5 ने किया अलर्ट : कहीं कैश तो कहीं सेक्स, औरतों को हथियार बना विदेशी नेताओं को फाँस रहा चीन: ब्रिटिश संसद में भी ‘चीनी घुसपैठ’

                                       अमेरिका के बाद अब ब्रिटेन में भी चीनी जासूस का खुलासा
दुनिया भर में ‘औरतों’ को हथियार बना कर जासूसी करने वाला चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। कुछ समय पहले अमेरिका की मीडिया रिपोर्ट्स ने खुलासा किया था कि वहाँ ‘चीनी जासूस’ नेताओं से रिश्ते बनाकर गोपनीय सूचनाएँ निकलवा रही है। अब ऐसी ही खबर ब्रिटेन से आई है। ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI5 ने हाल में चीन की घटिया करतूत से पर्दा उठाते हुए बताया कि कैसे लेबर पार्टी को करोड़ों का चंदा देने वाली चीनी महिला पर जासूसी के शक हैं।

 MI5 ने अलर्ट जारी कर कहा है कि चीन सरकार की एजेंट ब्रिटेन की संसद में एक्टिव है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस चीनी महिला का नाम क्रिस्टीन ली है। एजेंसी के दावे के मुताबिक कई ब्रिटिश सांसद इस चीनी जासूस के जाल में फँसे हैं और एक पूर्व सांसद से उसके नजदीकी संबंध भी रहे हैं। अलर्ट में कहा गया है,  “ली ने सीसीपी के यूनाइटिड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट के साथ समन्वय में गुप्त रूप से काम किया और उसके ब्रिटेन में राजनीतिक हस्तक्षेप गतिविधियों में शामिल होने का अनुमान लगाया गया है।”

ली ने कथिततौर पर कई बार में लेबर पार्टी को सैकड़ों हजारों पाउंड का दान दिया है। इसके अलावा उसके कंजर्वेटिव पार्टी से भी संबंध रहे हैं। वह डेविड कैमरन के पीएम रहते हुए उनसे मिली थी। मालूम हो कि ब्रिटिश खुफिया एजेंसी ने इस बात को भी साफ किया कि इस चीनी जासूस को अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है और न ही उसे देश से निकाला गया है। लेकिन इस संबंध में ब्रिटिश संसद के स्पीकर की सुरक्षा टीम ने सभी सांसदों को संदेश भेज दिया है। ली के बारे में जानकारी है कि वो पेश से एक वकील है और लंदन में चीनी दूतावास की पूर्व मुख्य कानूनी सलाहकार भी। इसके अतिरिक्त वह इंटर पार्टी चाइना ग्रुप सचिव भी है।

अमेरिका और नेपाल में चीन का हनीट्रैप

उल्लेखनीय है कि साल 2020 में खबर आई थी कि चीनी जासूस क्रिस्टीन फेंग उर्फ फेंग फेंग (Fang Fang) ने अमेरिकी नेताओं से जिस्मानी रिश्ते बनाकर उनसे गोपनीय सूचनाएँ निकालने की कोशिश की। Axios डॉटकॉम ने खुलासा किया था कि चीन की जासूस मानी जाने वाली क्रिस्टीन फेंग ने कैलिर्फोनिया के नेताओं को निशाना बनाया था।

इनमें प्रतिष्ठित डेमोक्रेटिक सांसद और संसद की इंटेलीजेंस कमिटी के सदस्य एरिक स्वैलवेल (Eric Swalwell) भी थे। कथिततौर पर फेंग के 2015 में अमेरिका छोड़ने से पहले स्वैलवेल के साथ अंतरंग संबंध थे। हालाँकि स्वैलवेल लगातार इस सवाल से बचते रहे थे कि उन्होंने सेक्स के बदले उन्होंने फेंग के साथ ‘गोपनीय जानकारी’ साझा की थी या नहीं।

ब्रिटेन अमेरिका के अलावा चीन ने महिला के बूते नेपाल पर भी अपना दबदबा कायम करने का प्रयास किया था। नेपाल में चीन की राजदूत होऊ यांगी को लेकर खबरें आईं थी कि उन्होंने वहाँ की सरकार में जबर्दस्त प्रभाव बनाया था। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और आर्मी चीफ जनरल पूर्ण चंद्र थापा उनकी कठपुतली थे।

‘महिलाएँ सजावट की वस्तु नहीं,वे सांसद हैं और आप अपमान कर रहे हैं।” ’

कांग्रेस सांसद शशि थरूर की 6 महिला सांसदों के साथ एक तस्वीर खूब वायरल हो रही है। इस तस्वीर को खुद शशि थरूर ने अपने ट्विटर पर शेयर किया है। यह तस्वीर संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन का है। इस तस्वीर को लेकर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। खासतौर पर कई लोगों ने शशि थरूर की सोच पर सवाल उठा दिया है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने तस्वीर को शेयर करते हुए कहा, “कौन कहता है कि लोकसभा काम करने के लिए आकर्षक जगह नहीं है? आज की सुबह मेरे छह साथी सांसदों के साथ।” इस तस्वीर में कांग्रेस सांसद परनीत कौर और जोथिमनी, टीएमसी सांसद नुसरत जहाँ और मिमी चक्रवर्ती, एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले, डीएमके सांसद थमिज़ाची थंगापांडियन मौजूद हैं।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर की इस तस्वीर की लोग खिंचाई कर रहे हैं। तस्वीर पर कमेंट करते हुए वकील करुणा नंदी ने कहा, “शशि थरूर ने चुने गए राजनेताओं को उनके लुक तक सीमित करने की कोशिश की और खुद को केंद्र में दिखाया है।”

शशि थरूर की तस्वीर पर एक ट्विटर यूजर मोनिका ने लिखा, “मुझे यकीन है कि इस खुलेआम सेक्सिज्म पर वामपंथी उदारवादियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आएगी, जैसी उत्तराखंड के सीएम तीरथ रावत के फटे जींस विवाद पर आई थी।”

वहीं ट्विटर यूजर विद्या ने कहा, “महिलाएँ लोकसभा को आकर्षक बनाने की सजावटी सामान नहीं हैं, वे सांसद हैं और आप अपमान कर रहे हैं।”

राष्‍ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने लिखा, “आप संसद और राजनीति में उनके (महिला सांसदों) योगदान को आकर्षण की वस्तु बनाकर नीचा दिखा रहे हैं। संसद में महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाई करना बंद करें।”

एक यूजर ने लिखा, “ज़िंदगी का असली मज़ा तू ही ले रहा है दोस्त।”

फरीदाबाद के तिगांव विधानसभा क्षेत्र से विधायक राजेश नागर ने कहा, “मिस्टर थरूर, लोकसभा महिलाओं के साथ सेल्फी लेने और उन्हें “आकर्षक” कहने के लिए नहीं, कानून बनाने के लिए है। आप भावी सांसदों के लिए गलत मिसाल कायम कर रहे हैं।”

सोशल मीडिया पर ट्रोल होने के बाद शशि थरूर ने सफाई देते हुए कहा, “सेल्‍फी मजाकिया अंदाज में ली गई थी और उन्‍होंने (महिला सांसदों) ने मुझसे उसी अंदाज में ट्वीट करने को कहा था। आई एम सॉरी अगर कुछ लोगों को बुरा लगा हो लेकिन मैं वर्कप्‍लेस पर ऐसे मेल-मिलाप के प्रदर्शन में शामिल होकर खुश था। बस इतनी सी बात है।”

पार्लियामेंट पर खालिस्तानी झंडा फहराओ, 93+ लाख रूपए का ईनाम पाओ : गुरुपवंत सिंह पन्नू, सिख फॉर जस्टिस (SFJ)

गुरुपवंत सिंह पन्नू (फोटो साभार: इंडिया टीवी)
मोदी सरकार ने तीनों को कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला ले लिया है। बावजूद इसके प्रदर्शनकारी किसान आंदोलन को जारी रखने पर अड़े हुए हैं। इस बीच प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ एक बार फिर से इसका फायदा उठाने की फिराक में है और अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए वह लगातार युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे मामले सामने आए हैं, जहाँ सिख फॉर जस्टिस का चीफ गुरुपवंत सिंह पन्नू किसानों के संसद मार्च की खबर को ध्यान में रखते हुए रिकॉर्डेड ऑडियो संदेश भेजकर लाल किले की तरह ही 29 नवंबर को देश की संसद पर खालिस्तान के झंडे लगाने के लिए उकसा रहा है। इस ऑडियो में गुरुपवंत सिंह पन्नू को यह कहते सुना जा सकता है कि देश को आजाद कराने के लिए भगत सिंह ने पार्लियामेंट में बम फेंका था। ट्रैक्टर को हथियार बनाकर तुम 29 नवंबर को खालिस्तान के केसरी झंडे को भारत की संसद पर चढ़ा दो। सिख फॉर जस्टिस सवा लाख डॉलर (93,81,625 भारतीय रुपए) का ईनाम देगी। 29 नवंबर को खालिस्तान केसरी चढ़ा दो भारत की संसद पर। पंजाब, किसान, हल खालिस्तान।

इस बीच दिल्ली के पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर प्रतिबद्धता जताते हुए कहा है कि किसी भी हाल में लॉ एन्ड ऑर्डर को खराब करने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने ये भी कहा है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध पर कोई आपत्ति नहीं है। किसानों के साथ हमारा एक समझौता है और उसी के आधार पर काम किया जाएगा। अस्थाना ने ये भी कहा कि बीट पेट्रोलिंग को और अधिक मजूबत किया गया है।

29 नवंबर का ट्रैक्टर मार्च स्थगित

हालाँकि, किसानों ने 29 नवंबर को होने वाला ट्रैक्टर मार्च स्थगित कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में शनिवार (27 नवंबर 2021) को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की बैठक में इस पर फैसला लिया गया। संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि वह 4 दिसंबर को अपनी अगली बैठक में सरकार के रुख की समीक्षा करके आगे की रणनीति बनाएँगे।
इससे पहले बीते दिनों संयुक्त किसान मोर्चा की 9 सदस्यीय कमिटी ने फैसला लिया गया था कि 29 नवंबर को गाजीपुर बॉर्डर और टीकरी बॉर्डर से 500-500 किसान ट्रैक्टर पर संसद भवन की ओर कूच करेंगे।

‘चेहरे के ऊपर घमंड है, तेजाब फेंक देंगे, कहीं घूमने के लायक नहीं रहोगी’: सांसद नवनीत राणा को संसद में शिवसैनिक ने धमकाया

आज कल सड़क से लेकर संसद तक हो रही गुंडागर्दी को देख, 2014 चुनाव के दौरान बस में यात्रा कर रहे दो व्यक्तियों की बात स्मरण हो रही है कि "अगर बीजेपी पावर में आ गयी, देखना संसद में गोलियां चलेंगी, मिर्च पाउडर उड़ाया जाएगा, एक-दूसरे को धमकाया जाएगा...." आदि आदि, जो आज पूर्णरूप से चरितार्थ हो रहा है। अभी तक तो विधान सभाओं में माइक तोडना, आदि गुंडागर्दी अब संसद भी पहुँच चुकी है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह की हरकत के बाद अब शिव सेना के सांसद की अपने ही प्रदेश की सांसद को धमकी सिद्ध कर रहा है कि अब सफ़ेदपोश में गुंडे नेता बन रहे हैं। 

जहाँ तक पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने गृह मंत्री अनिल देशमुख द्वारा 100 करोड़ रूपए वसूलने का आरोप है, अगर गंभीरता से जाँच की जाए तो कई प्रदेशों की पुलिस लपेटे में आएगी। यह कोई आरोप नहीं कटु सत्य है। कोरोना काल में जरुरी सामान लेकर जाने वाले दुकानदारों से सीमा में घुसने के लिए वसूली की जाती थी, सड़क पर रेडी वाले से लेकर सड़क पर सब्जी बेचने वाले से पुलिस रोज कितना वसूलती है, कोई घर में एक ईंट लगाता है, लैंटर डलने पर कितना वसूलती है और चौराहे पर किसी ट्रक एवं विक्रम से कितनी वसूली की जाती है, किसे नहीं मालूम? कौन मांगेगा हिसाब?

इसी सन्दर्भ में लगभग 48 वर्ष पुरानी रपट स्मरण आती है, जब दिल्ली में चर्चित मीना टंडन केस के दौरान 'नवभारत टाइम्स' ने अपने प्रथम पृष्ठ पर एक रपट प्रकाशित की थी, जिसने पुलिस में होते कारोबार की पोल खोल दी थी। क्या कारोबार बंद हुआ? नहीं, क्यों? फिर चुनावों में देखो हर सियासतखोर भ्रष्टाचार दूर करने की बात करता नज़र आता है। देश में पता नहीं कितने परमबीर और वाजे हैं, सब जानते हैं, लेकिन मुंह नहीं खोल सकते। मुद्दा केवल राजनीतिक प्रेरित होने पर चर्चा में आता है, अन्यथा सड़क से लेकर गृह मंत्रालय तक चुप्पी साढ़े रहती है। पहले घर में होने वाली मरम्मत आदि पर पुलिस हस्तक्षेप नहीं करती थी, परन्तु आज कमेटी से पहले पुलिस वसूली के पहुँचती है। किसी काम को रुकवाने में तो वसूली और उसी काम को शुरू करने में दुगनी वसूली।      

महाराष्ट्र के अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत कौर राणा ने शिवसेना सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद सावंत पर धमकी देने का आरोप लगाया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजे गए पत्र में सावंत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राणा ने एंटीलिया बम प्रकरण में निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे का वाला मामला संसद में उठाया था। आरोप है कि इसी पर सावंत भड़क गए।

मुकेश अंबानी की मुंबई स्थित 27 मंजिला इमारत एंटीलिया के बाहर बम लदी स्कॉर्पियो मिली थी। बाद में पता चला कि सचिन वाजे ने ही इसकी पूरी साजिश रची थी। वो गिरफ्तार भी किया जा चुका है। जाँच एजेंसियों को शक है कि भेद खुलने के डर से वाजे ने ही स्कॉर्पियो के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या कर दी। इसके बाद मुंबई के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर कई आरोप लगाए।

संसद में भी ये मामला उठा और मनसुख हिरेन की हत्या, सचिन वाजे के शिवसेना कनेक्शन और परमबीर सिंह के पत्र को लेकर कई सांसदों ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार पर प्रश्न खड़े किए। नवनीत राणा ने लिखा है कि उन्होंने एक महिला सांसद होने के नाते महाराष्ट्र में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का मामला सदन में उठाया और उद्धव ठाकरे सरकार का विरोध किया, जिसके बाद अरविंद सावंत ने लोकसभा की लॉबी में उन्हें धमकाया।

बकौल नवनीत राणा, सावंत ने उनसे कहा, “तू महाराष्ट्र में कैसे घूमती है, मैं देखता हूँ। तेरे को भी जेल में डालेंगे।” नवनीत राणा ने आरोप लगाया कि इससे पूर्व भी शिवसेना के लेटर हेड और फोन कॉल के माध्यम से उनके चेहरे पर तेजाब फेंकने की धमकी दी जा चुकी है। उन्होंने सावंत के बयान को न सिर्फ अपना, बल्कि पूरे देश की महिलाओं का अपमान करार दिया। साथ ही शिवसेना सांसद पर कड़ी से कड़ी पुलिसिया कार्रवाई की माँग की।

नवनीत राणा ने कहा कि गरीब पहले से ही परेशान है क्योंकि कोरोना और लॉकडाउन की मार तो उस पर पड़ी ही है, साथ ही उसके पेट पर भी मार पड़ी है। उन्होंने कहा कि वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र में 100 करोड़ रुपए की वसूली की आग लगी है, जबकि लोगों की जेब में 100 रुपए भी नहीं हैं। इस पूरे प्रकरण पर उन्होंने कहा कि सचिन वाजे 17 वर्षों से उद्धव ठाकरे के लिए काम कर रहा था और पूरे मुंबई की वसूली को देख रहा था।

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री बनते सचिन वाजे को उद्धव ने क्राइम यूनिट में भेजा। इस पर मैंने सदन में जनता और संविधान द्वारा दिए गए अधिकार के तहत बात की तो अरविंद सावंत को मिर्ची लग गई। मुझे कोई पुरुष बताएगा कि मेरी बॉडी लैंग्वेज कैसी होगी? मेरे तरफ से गुजरते हुए उन्होंने मुझे जेल भेजने की धमकी दी। मैंने बगल में बैठे एक साथी सांसद ने भी उनकी धमकी को सुना। मुझे पहले भी कहा जाता रहा है कि चेहरे पर इतना घमंड है, इस पर तेजाब फेंक देंगे। कहीं घूमने के लायक नहीं रहोगी।”

नवनीत राणा ने कहा कि वो महाराष्ट्र के महिलाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और जब सदन में उन्हें धमकाया जाता है तो महाराष्ट्र की स्थिति समझ लीजिए। उन्होंने शिवसेना को ‘गुंडे विचारधारा वाली पार्टी’ बताते हुए कहा कि महिलाओं को डराने की साजिश कामयाब नहीं होगी और वो लोगों के लिए बोलती रहेंगी। उन्होंने कहा कि उनमें हिम्मत है तो आज ही उन्हें जेल में डाल दिया जाए। उन्होंने संसदीय कार्यमंत्री को भी इस घटना से अवगत कराया।

वहीं अरविंद सावंत ने इसे सरासर झूठ करार देते हुए कहा कि एक तो वो महिला हैं और उन्हें भैया कह कर पुकारती हैं, ऐसे में कोई शिवसैनिक महिलाओं को धमकाने का काम नहीं सकता। उन्होंने नवनीत राणा के बात करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके हर बयान की वीडियो क्लिपिंग में उनकी बॉडी लैंग्वेज और सीएम ठाकरे के लिए उनके शब्दों को सुना जा सकता है। सावंत ने कहा कि मैं उन्हें क्यों धमकाऊँगा?

उन्होंने कहा कि नवनीत राणा अच्छी तरह से बात नहीं कर रही हैं और ये ठीक नहीं है। उन्होंने राणा पर सीएम ठाकरे के अपमान का आरोप लगाया। भाजपा सांसद रमा देवी ने नवनीत राणा का समर्थन करते हुए कहा, “इस मामले में नवनीत राणा ने मुझसे बात की है। एक सांसद होने के नाते अरविंद सावंत को इस तरह की बात नहीं कहनी चाहिए थी। मैं लोकसभा स्पीकर से कहूँगी कि वे इस मामले को गंभीरता से लें।”

नवनीत राणा तेलुगु की कई फिल्मों में काम कर चुकी हैं। हालाँकि, 2010 के बाद उनकी कोई फिल्म रिलीज नहीं हुई है। कन्नड़ फिल्म ‘दर्शन’ उनकी डेब्यू मूवी थी, जो 2004 में रिलीज हुई थी। उन्होंने तेलुगु अभिनेताओं जूनियर NTR और बालाकृष्णा की फिल्मों में काम किया है। हालाँकि, उन फिल्मों में उनका किरदार बड़ा नहीं रहा। 2008 में आई मलयालम फिल्म ‘लव इन सिंगापुर’ में उन्हें दिग्गज अभिनेता ममूटी के साथ काम करने का मौका मिला था।

उधर पता चला है कि परमबीर सिंह के पत्र लिखने से दो महीने पहले ही वाजे रेस्ट्रॉं और बार मालिकों से पैसा इकट्ठा कर चुका था। होटल मालिकों में से एक ने बताया कि वाजे क्रॉफोर्ड मार्केट में पुलिस आयुक्त कार्यालय के परिसर के अंदर CIU कार्यालय में होटल व्यवसायियों से पैसे निकालने की अपनी दुकान चला रहा था। वाजे उद्यमियों को बुलाता था और उन्हें इस बात के लिए आश्वस्त करता था कि SSB के अधिकारी उनके प्रतिष्ठानों पर छापेमारी नहीं करेंगे, मगर इसके बदले में वे उन्हें हर महीने पैसे देंगे।

आतंकी संगठन SFJ का ऐलान : 1 फरवरी को संसद पर कब्जा, ‘खालिस्तानी’ झंडा फहराने वाले को 2.5 करोड़ रुपए

                       खालिस्तानी संगठन SFJ ने आगामी 1 फरवरी को संसद पर कब्ज़ा करने की धमकी दी है
गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसान आन्दोलनकारियों के लाल किले पर उपद्रव के बाद अब प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) ने आगामी 1 फरवरी को संसद पर कब्ज़ा और घेराव की धमकी दी है। इतना ही नहीं, खालिस्तानी संगठन SFJ ने लाल किले पर झंडा फहराने वाले व्यक्ति को $350,000 इनाम देने का भी एलान किया है। SFJ ने कनाडा से सात मिनट का एक वीडियो जारी करते हुए लाल किले पर ‘खालिस्तानी’ झंडा फहराने की बात भी स्वीकार की है।

1 फरवरी को संसद में बजट भी पेश किया जाना है। इस दौरान सभी लोगों की निगाहें समाचार चैनल्स पर रहेंगी। ऐसे में इसी दिन को संसद घेराव के लिए चुना गया है।

राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मौके पर ‘किसान’ दंगाइयों ने ऐतिहासिक लाल किले पर सिखों के धार्मिक झंडे निशान साहब को फहरा दिया और राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का अपमान भी किया। पूरे दिन ये तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया और समाचार चैनल्स पर छाई रहीं।

यही नहीं, दंगाइयों ने राम मंदिर और केदारनाथ मंदिर को निशाना बनाते हुए राम मंदिर की झाँकी के कुछ हिस्सों को तोड़ दिया। दंगाइयों ने अयोध्या श्रीराम मंदिर की झाँकी के लिए बनाए गए राम मंदिर के गुम्बद को निशाना बनाकर उसे तोड़ दिया। ये दोनों झाँकी कल गणतंत्र दिवस की परेड में दिखाई गई थीं।

गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में हुई हिंसा में एक्शन लेते हुए दिल्ली पुलिस ने करीब 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है। इन पर हिंसा करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने का आरोप लगा है।

मंगलवार को हुए इन ‘किसान दंगों’ में अब तक कुल 22 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस ने कहा कि वे सत्यापन करने के बाद गिरफ्तारी कर रहे हैं। दंगों में 230 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है।

राष्ट्रीय राजधानी में लाल किले और किसान विरोध स्थलों पर कई स्थानों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। मंगलवार के दिन ट्रैक्टर परेड के लिए निर्धारित मार्ग से दूर, सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सीमाओं पर बैरिकेड्स को तोड़ दिया और पुलिस के साथ भिड़ गए। उन्होंने कई जगहों से दिल्ली में प्रवेश किया और गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर धावा बोल दिया।

संसद भवन निर्माण ठेके में जताई घोटाले की आशंका पर डॉ सुब्रमण्यम स्वामी पर भाजपा प्रवक्ता बग्गा का कुठाराघात

               सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा घोटाले की आशंका पर प्रवक्ता तजिंदर पल सिंह बग्गा का प्रहार 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नए संसद भवन निर्माण के भूमिपूजन ने सिर्फ सत्ता विरोधियों और वामपंथियों को ही नहीं बल्कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी भी जख्म दिए हैं। यही वजह है कि भाजपा के ही राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने संसद भवन निर्माण की जिम्मेदारी टाटा समूह (टाटा प्रोजेक्ट्स) को दिए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। यही नहीं, स्वामी ने इसमें यूपीए काल के कुख्यात 2G स्पैक्ट्रम घोटाले का जिक्र करते हुए ट्वीट किया है।

राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि कहीं नए संसद भवन के निर्माण के ठेके में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले जैसा तो कुछ नहीं हुआ है? भाजपा नेता ने अपने ट्वीट में लिखा, “क्या किसी को पता है कि टाटा को नए संसद परिसर के निर्माण के लिए कैसे चुना गया था? क्या इसके लिए निविदा आमंत्रित की गई थीं या फिर इसे 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की तरह पहले आओ पहले पाओ के आधार पर दे दिया गया?”

स्वामी ने एक ट्वीट करते हुए लिखा, “उत्तर प्रदेश सरकार के राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड ने भी नए संसद भवन के लिए बोली लगाई थी, लेकिन वह जीत नहीं पाई। उनसे पता करेंगे कि ऐसा क्यों हुआ?”

भाजपा के राज्यसभा सांसद के इस ट्वीट का जवाब भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने दिया है। तजिंदर पाल ने स्वामी को अपने ट्वीट में टैग करते हुए लिखा, “हैलो गद्दार!”

इसके साथ ही तजिंदर पाल ने कुछ खबरों के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं। इन्हीं में से एक स्क्रीनशॉट में समाचार पत्र इकोनॉमिक टाइम्स की भी एक खबर दी गई है जिसमें बताया गया है कि आखिर किस तरह टाटा प्रोजेक्ट्स ने ‘लार्सन एंड टर्बो’ (L&T) को हराकर 861.90 करोड़ रुपए की बोली लगाने के साथ ही भारत के नए संसद भवन के निर्माण का ठेका जीत लिया।

भाजपा के प्रवक्ता और सांसद के बीच हुए इस घमासान पर लोगों की प्रक्रियाएं, विचारणीय हैं, प्रवक्ता बग्गा ने किस आवेश में आकर सच्चाई जाने बिना प्रहार किया, वह भी मनन करनी चाहिए:-

इस खबर के अनुसार, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने सितंबर 16, 2020 को नए संसद भवन के निर्माण के लिए वित्तीय बोलियाँ खोली थीं। टाटा प्रोजेक्ट्स ने सबसे कम बोली 861.90 करोड़ रुपए लगाई थी, जबकि लार्सन एंड टर्बो की बोली 865 करोड़ रुपए थी, जो कि लार्सन एंड टर्बो की 865 करोड़ रुपए की बोली से केवल 3.1 करोड़ रुपए कम है।

इस प्रोजेक्ट के लिए शुरुआत में सात कंपनियों ने ठेका हासिल करने के लिए बोली लगाई थी। आखिरी चरण में तीन कंपनियों को चुना गया, जिसमें लार्सन एंड टर्बो, टाटा प्रोजेक्ट्स और एक अन्य कंपनी शामिल थी।

टाटा प्रोजेक्ट को सबसे कम बोली (861 करोड़) लगाने के कारण यह प्रोजेक्ट दिया गया। यह नए संसद भवन का निर्माण कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की महत्वाकांक्षी ‘सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना’ का ही एक हिस्सा है।

मजदूरों को मुफ्त ट्रेन नहीं… सांसदों को मिलेगा 49000 रूपए महीना भत्ता : योगेंद्र यादव

योगेंद्र यादव सांसद भत्ता
झूठ फ़ैलाने में सिद्धहस्त 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जैसाकि सर्वविदित है कि 2014 में मोदी लहर को रोकने के लिए आम आदमी पार्टी के गठन से पूर्व योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, संजय सिंह, मनीष सिसोदिया से लेकर अरविन्द केजरीवाल तक सभी तत्कालीन एवं वर्तमान कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी की राष्ट्रीय सलाहकार समिति के सदस्य थे। जिसका उल्लेख उन दिनों एक हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते पहले शीर्षक "कांग्रेस के गर्भ से निकली आप" और फिर अरविन्द केजरीवाल के विरुद्ध न छापने की धमकी के बाद शीर्षक "कांग्रेस और आप का Positive DNA" लेखों में विस्तार से लिख चुका हूँ। जनता ने देखा कि जिस तरह चुनावों में कांग्रेस को भला-बुरा कहा जाता था, तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के विरुद्ध 370 सबूत चुनावी रैलियों में दिखाए जाते थे, लेकिन सत्ता हाथ आते ही सब आरोप छूमंतर हो गए और कांग्रेस पवित्र। यानि जिस तरह कांग्रेस नितरोज जनता को भ्रमित करती रहती है, उसी भांति यही ग्रुप आज तक जनता को भ्रमित कर अपनी रोटियां सेंक रहा है। 
योगेंद्र यादव को चाहिए ये था कि 70,000 रूपए से कम हुए 49,000 रूपए को बढ़ावा बताकर जनता को गुमराह कर सरकार के विरुद्ध आक्रोश खड़ा करने की बजाए, भूतपूर्व और वर्तमान पार्षद से लेकर सांसद को मिलने वाली पेंशन को बंद करने का मुद्दा उठाना था। इस समय देश को धन की जरुरत भी है, क्योकि इस पेंशन में हर माह करोड़ों बर्बाद होता है। दूसरे यह कि जनसेवकों को वेतन एवं पेंशन क्यों? यह खुली लूट है। इसे बंद होना चाहिए।   
योगेंद्र यादव ने दावा किया है कि सरकार ने ‘चुपचाप’ सांसदों के निर्वाचन क्षेत्र भत्ते (Salary Allowance) में बढ़ोतरी कर दी है। ‘स्वराज इंडिया’ के संस्थापक ने आदेश की प्रति शेयर करते हुए ऐसा दावा किया। उन्होंने लिखा कि जब सरकार को मजदूरों के लिए मुफ्त में ट्रेनें चलानी चाहिए थी, उसने ‘चुपके से’ सांसदों को मिलने वाले निर्वाचन क्षेत्र भत्ते को बढ़ा कर 49,000 रुपए कर दिया है। ये आदेश अप्रैल 7, 2020 को आया।
हालाँकि, इस दौरान योगेंद्र यादव ये बताना भूल गए कि सांसदों के भत्ते को कितने रुपए से बढ़ा कर 49,000 रुपए किया गया है। अगर वो ये बात बता देते तो उनकी पोल खुल जाती। इसीलिए, उन्होंने आदेश की एक कॉपी शेयर कर दी और लोगों को भ्रम की स्थिति में डालने के उद्देश्य से झूठ फैलाया। योगेंद्र यादव इससे पहले भी सीएए और एनआरसी को लेकर ऐसी हरकतें कर चुके हैं। अजीबोगरीब पोल प्रेडिक्शन तो उनका पेशा ही है, जो सच ही नहीं होता।
दरअसल, सांसदों को पहले निर्वाचन क्षेत्र भत्ता (Salary Allowance) के रूप में 70,000 रुपए मिलते थे, जिसमें 30% की कटौती की गई। कटौती के बाद उनका भत्ता 21,000 रुपए कम हो गया और अब ये 49,000 रुपए प्रति महीने आएगा। संसद की जॉइंट कमिटी ने ये सिफारिश की थी, जिसे राज्यसभा अध्यक्ष वेंकैया नायडू और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वीकार कर लिया था।

इस आदेश को ‘Members of Parliament (Constituency Allowance) Amendment Rules, 2020’ नाम दिया गया है। अब आते हैं इससे पहले के भी एक फ़ैसले पर। कंस्टिटूएंसी अलाउंस से पहले MPLADS फण्ड (सांसद निधि) को भी सस्पेंड कर दिया गया था। अगले दो साल तक ये सस्पेंड रहेगा। यानी 2020-21 और 2021-22 में सांसदों को सांसद निधि की रकम नहीं दी जाएगी। ये रकम कोविड-19 से लड़ने में ख़र्च होगी। कई लोगों द्वारा ध्यान दिलाए जाने के बावजूद योगेंद्र यादव ने अपना ट्वीट डिलीट नहीं किया।
इससे सरकार के पास 7900 करोड़ रुपए बचेंगे, जिसे कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया में डाला जाएगा। ये रकम कोरोना आपदा के बीच जनता की भलाई के लिए ख़र्च होगी। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और सभी राज्यों के राज्यपालों से स्वेच्छा से ‘पे कट’ का फ़ैसला लिया और इसे सामाजिक दायित्व बताया। एक ख़बर के अनुसार, सरकार हर महीने एक सांसद पर औसतन 2.7 लाख रुपए ख़र्च करती है। संसद में फिलहाल कुल 795 सदस्य हैं, जिनमें से 545 लोकसभा में हैं और 250 राज्यसभा में।
फ़रवरी 2020 में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ एक इवेंट में मंच साझा करते हुए मंच से ही योगेंद्र यादव ने यह कह सनसनी फैला दी थी कि, “भारत हिंदी, हिन्दू , हिन्दुस्तान से नहीं बनेगा, हिंदी हिन्दू हिन्दुस्तान देश को तोड़ देगा… आज यह करने की कोशिश हो रही है।” राम मंदिर पर फ़ैसले को लेकर उन्होंने कहा था कि राम मंदिर कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों के साथ भारत में सेक्युलर पॉलिटिक्स की परीक्षा होगा। 

संसद में जबरदस्ती घुसने की कोशिश कर रहे शख्स को सुरक्षाबलों ने पकड़ दिल्ली पुलिस के हवाले किया

संसद में जबरदस्ती घुसने की कोशिश कर रहा था शख्स, सुरक्षाबलों ने पकड़ासंसद के शीत सत्र में सोमवार(दिसम्बर 9) को बेहद ही महत्वपूर्ण नागरिकता संशोधन बिल पर चर्चा जारी है. वहीं इसी बीच खबर मिली है कि एक शख्स ने सोमवार शाम को संसद के परिसर में जबरदस्ती घुसने की कोशिश की. सुरक्षाबलों ने समय रहते इस शख्स को पकड़ लिया और उसे दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया.
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक ये शख्स खुद को पहले सांसद, फिर पूर्व सांसद बताकर संसद भवन लाइब्रेरी बिल्डिंग रिसेप्शन गेट से घुसने की कोशिश कर रहा था. शक होने पर संसद भवन सुरक्षा कर्मियों ने रोककर पूछताछ की.पूछताछ के बाद संसद भवन सुरक्षाकर्मियों ने आगे की पूछताछ के लिए इस शख्स को दिल्ली पुलिस को सौंप दिया.
दिल्ली का रहने वाला है शख्स
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक संदिग्ध युवक का नाम वरुण माथुर है. इस शख्स की उम्र करीब 39 वर्ष बताई जा रही है. बताया जा रहा है कि वरुण माथुर दिल्ली के जनकपुरी इलाके के गणेश नगर में रहता है. इस शख्स से स्थानीय पुलिस के साथ-साथ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, आईबी की टीम भी पूछताछ कर रही है.