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इजरायल से बदला लेने की तैयारी कर रहा था तैयारी, तभी आसमान से बरसीं मिसाइलें: यमन पर कब्जा जमाए हूतियों का प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी मंत्रियों समेत ढेर

                    इजरायली हवाई हमले में अहमद अल-रहावी मारा गया। (साभार - एपी और द इकोनॉमिस्ट)
यमन की राजधानी सना में बीते 28 अगस्त को हुए इजरायली हवाई हमले ने मध्य पूर्व की राजनीति में नया मोड़ ला दिया। इस हमले में हूती विद्रोहियों की सरकार के प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी की मौत हो गई है, जिसकी पुष्टि खुद हूतियों ने दो दिन बाद की है।

यह सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि इजरायल के लिए एक बड़ी जीत थी, जिसने सबसे वरिष्ठ हूती नेता को निशाना बनाया। अल-रहावी को पिछले साल ही प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था और अल-रहावी की मौत इजरायल-हूती संघर्ष की दिशा को बदल सकती है।

 हमले के वक्त अल-रहावी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी सना के बाहरी इलाके में सरकारी सेमिनार में मौजूद थे। उसी दौरान टीवी पर उनके नेता अब्दुल-मलिक अल-हौती का पहले से रिकॉर्ड किया गया भाषण चलाया जा रहा था, जिसमें वे गाजा संघर्ष पर इजरायल से बदला लेने की धमकी दे रहे थे।

हवाई हमले ने हूती नेतृत्व की कमजोरियों को उजागर किया और यह स्पष्ट कर दिया कि इजराइल अब केवल बुनियादी ढाँचे पर नहीं बल्कि नेतृत्व पर सीधे वार करने की रणनीति अपना रहा है। अहमद अल-रहावी कभी यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के करीबी रहे थे और 2014 में हूतियों के साथ जुड़े।

हाल ही में उन्होंने इजराइल पर हमलों का समर्थन करते हुए कहा था कि यमन फिलिस्तीनी संघर्ष के लिए बहुत कुछ सहने को तैयार है। उनकी हत्या के बाद हूती नेतृत्व में गहरा आघात है। सर्वोच्च राजनीतिक परिषद के प्रमुख महदी अल-मशात ने बदला लेने की घोषणा की और विदेशी कंपनियों को इजरायल छोड़ने की धमकी दी।

इजराइली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने इसे हूतियों पर ‘करारा झटका’ बताया और कहा कि यह तो बस शुरुआत है। विश्लेषकों के अनुसार, यह हमला इजरायल की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह अब हमास और हिज़्बुल्लाह की तरह हूतियों के नेतृत्व को भी सीधे निशाना बना रहा है।

क्राइसिस ग्रुप के वरिष्ठ विश्लेषक अहमद नागी ने कहा कि यह बदलाव हूतियों के कमांड ढाँचे को भारी खतरे में डालता है। हूती अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से ही सक्रिय हैं। उन्होंने लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय शिप्स को निशाना बनाया और इजरायल पर मिसाइलें दागीं, जिससे वैश्विक व्यापार मार्ग बाधित हुआ।

हाल ही में उन्होंने इजरायल की ओर क्लस्टर हथियारों से लैस बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जो 2023 के बाद अपनी तरह का पहला हमला था लेकिन अल-रहावी पर हुआ ताजा हमला दिखाता है कि इजरायल अब केवल हमास या लेबनान के हिज़्बुल्लाह तक सीमित नहीं है।

सीरिया में असद सरकार के ठिकाने, ईरान समर्थक मिलिशिया और अब यमन के हूती सब इजरायली निशाने पर हैं। मानो इजरायल अपने आखिरी बड़े दुश्मनों तक का सफाया करने की ओर बढ़ रहा हो। गाजा से लेकर बेरूत, दमिश्क से लेकर सना तक, इजरायल एक साथ कई मोर्चों पर लड़ रहा है और धीरे-धीरे हर दुश्मन की रीढ़ तोड़ने की कोशिश में है।

11 एयरबेस तबाह करवा के जीत का दम भर रहे शाहबाज़ शरीफ: चायनीज और तुर्की माल फेल फिर भी चीन को थैंक्यू, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के फर्जी दावों का सच

                                                                                                                     साभार 
पाकिस्तानी फौज ने 10 मई को एक तरफ सीजफायर का उल्लंघन किया और दूसरी तरफ मुल्क के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ कैमरे पर झूठ बोलकर खूब शेखी झाड़ते दिखाई दिए। उन्होंने दावा किया उन्होंने जंग में उनके मुल्क ने जीत हासिल कर ली है।

पीएम शरीफ ने अपनी मुल्क की आवाम को ऐसे बताया जैसे युद्ध विराम का उल्लंघन भारत ने किया था और उन्होंने तो बस जवाब दिया, हकीकत जबकि यह है कि 10 मई को सीजफायर के बाद जो अटैक किए गए वो पाकिस्तान की ओर से किए गए थे।

शरीफ और पाकिस्तान भूल गया कि अगर भारतीय DGMO ने तुम्हारे DGMO के फोन को 2/3 दिन टाल दिया होता, आतंकवाद को संरक्षण देने पर पाकिस्तान की इतनी दुर्दशा हो गयी होती बलूच सेना ही तुम्हारी सेना पर हावी हो गयी होती।     

शहबाज शरीफ बयान में यहीं नहीं रुके। लगातार भारत से मुँह की खाने वाले पाकिस्तान को लेकर उन्होंने दावा किया, कि उनकी फौज भारत पर भारी पड़ी। उन्होंने ये जताया कि भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों को निशाना बनाया है, जबकि सच्चाई ये है कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत पहली कार्रवाई के बाद ही भारत ने साफ कर दिया था कि उन्होंने सिर्फ आतंकी ठिकानों को टारगेट किया है।

खुद को पाक साफ बताने वाला पाकिस्तान जो LOC पर लगातार गोलियाँ और मोर्टार दागकर कश्मीर के लोगों को मारता रहा, उस पर शहबाज शरीफ ने एक शब्द नहीं बोला।

उनका कहना था कि पाकिस्तानी फौज ने भारत को ऐसा घाव दिया है जो कभी नहीं भर पाएगा, लेकिन भारत की कार्रवाई अगर देखेंगे तो पता चलेगा कि भारत ने पाकिस्तान 11 एयरबेस तबाह किए हैं, जिनमें नूरखान, रफ़ीकी, मुरीद, सुक्कुर, सियालकोट, पसरूर, चूनियाँ, सरगोधा, सकरदु, भोलारी और जैकोबाबाद का नाम शामिल है।

इसके अलावा शहबाज शरीफ ने अपने बयान में खास तौर पर चीन को ‘धन्यवाद’ बोला और इस मुश्किल घड़ी में पाकिस्तान का साथ देने के लिए आभार जताया। ये सब उन्होंने केवल चीन को खुश करने के लिए किया, क्योंकि ये स्पष्ट है कि कि पाकिस्तान के एयरबेसों को जो नुकसान हुआ उसके पीछे एक कारण चीनी सैन्य प्रणाली HQ-9 का विफल होना भी है।

मणिपुर : मुख्यमंत्री बिरेन सिंह ने कांग्रेस को दिखाया आईना, कहा- आपके पाप ही आज के लिए जिम्मेदार: 1992-97 के बीच हुई सैकड़ों मौत को लेकर माँगा जवाब


मणिपुर में हिंसा की हालत को लेकर पीएम मोदी को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रही कांग्रेस को मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने आईना दिखाया है। बिरेन सिंह ने जयराम रमेश को जवाब देते हुए बताया है कि कैसे कांग्रेस ने राज्य में लगातार म्यांमार के घुसपैठियों को बसने दिया और साथ म्यांमार में अड्डा बनाकर भारत में आतंक फैलाने वाले आतंकी समूहों से भी समझौते किए। उन्होंने कांग्रेस से कहा है कि वह राज्य की स्थिति पर राजनीति करना छोड़ कर मुद्दे सुलझाने में सहायता करे।

मणिपुर की स्थिति कांग्रेस सरकार के दौरान क्या थी, यह बताते हुए बिरेन सिंह ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “आप और बाकी सारे लोग जानते हैं कि में मणिपुर के आज उथल पुथल में होने का कारण कांग्रेस के अतीत के पाप हैं। जैसे कि मणिपुर में बर्मी (म्यांमार) शरणार्थियों को लगातार बसाना और म्यांमार के लड़कों के साथ SOO समझौते पर हस्ताक्षर करना, इसकी अगुवाई पी चिदंबरम ने भारत के गृह मंत्री रहते हुए अपने कार्यकाल में की थी।”

बिरेन सिंह ने आगे लिखा, “आज मैंने जो माफी माँगी है, वह उन लोगों के लिए है जो जिन्हें इस हिंसा जो विस्थापित हो गए हैं और बेघर हुए हैं। एक मुख्यमंत्री के रूप में मेरी यह अपील थी कि जो हुआ उसे भोऊ जाएँ और माफ़ कर दें। हालाँकि, आप इसमें भी राजनीति घसीट लाए।”

इसके बाद बिरेन सिंह ने जयराम रमेश को याद दिलाया कि कैसे कांग्रेस के राज के दौरान मणिपुर जलता रहा था। उन्होंने लिखा, “मैं आपको याद दिला दूँ कि मणिपुर में नागा-कुकी संघर्ष के चलते लगभग 1,300 लोग मारे गए और हज़ारों लोग बेघर हुए थे। यह हिंसा कई सालों तक जारी रही थी। 1992 और 1997 के बीच समय-समय पर हिंसा भड़कती रही थी। सबसे ज्यादा हिंसा 1992-93 के दौरान हुई थी। यह पूरी हिंसा 1992 में शुरू हुई थी और लगभग पाँच वर्षों 1992-1997 तक जारी रही थी।”

उन्होंने आगे लिखा, “यह दौर पूर्वोत्तर भारत में सबसे हिंसक संघर्षों में से एक था। इसके चलते मणिपुर में नागा और कुकी समुदायों के बीच संबंधों प्रभावित हुए। क्या पीवी नरसिम्हा राव, जो 1991 से 1996 तक भारत के प्रधानमंत्री थे और इस दौरान कांग्रेस के अध्यक्ष भी थे, तब माफी माँगने मणिपुर आए थे? कुकी-पाईते की लड़ाई में राज्य में 350 लोगों की मौत हुई थी। कुकी-पाईते हिंसा (1997-1998) के दौरान, आई के गुजराल भारत के प्रधानमंत्री थे। क्या उन्होंने मणिपुर का दौरा किया और लोगों से माफ़ी माँगी?"

बिरेन सिंह ने पूछा कि कांग्रेस मणिपुर मामले को हल करने में प्रयास करने के बजाय इस पर राजनीति क्यों कर रही है। बिरेन सिंह का यह जवाब जयराम रमेश के उस सवाल पर आया जिसमें उन्होंने पूछा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मणिपुर आकर माफी क्यों नहीं माँगते। जयराम रमेश ने दावा किया था पीएम मोदी जानबूझकर मणिपुर नहीं जा रहे। उन्होंने यह बात सीएम बिरेन सिंह के राज्यवासियों से माफी माँगने के बाद कही थी। बिरेन सिंह ने 31 दिसम्बर, 2024 को वर्ष 2024 में हुई हिंसा के लिए दुख जताया था और माफ़ी माफी माँगी थी।

कुकी और नागा समुदाय के बीच वर्ष 1990 के दशक से लड़ाई चल रही है। यह लड़ाई कुकी समुदाय की कुकीलैंड को पाने के लिए चालू किए गए आंदोलन के बाद शुरू हुई थी। इस कथित कुकीलैंड का बड़ा हिस्सा मणिपुर की पहाड़ियों में है, यहाँ पर नागाओं का कब्जा था। रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह लड़ाई तब चालू हुई जब जब कुकी लड़ाकों ने नागाओं पर हमला किया, उनके गाँव जलाए और नागा समुदाय के सैकड़ों लोगों को मार डाला या उन्हें बेघर कर दिया।”

तब नागाओं ने कूकी समुदाय को चेतावनी भी दी थी कि वह हिंसा बंद कर दें लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद, नागाओं ने कूकी समुदाय पर हमले करना शुरू कर दिया और अगले 3 वर्षों में, कुकी समुदाय के 230 से अधिक लोग मारे गए। कई हजार लोग नागा इलाके से बाहर भी कर दिए गए। यह संघर्ष 1997 में जाकर रुका जब कूकी और पाईते के बीच लड़ाई चालू हुई। कुकी और पैती एक ही समूह से संबंधित हैं, लेकिन दोनों अपनी भाषा के आधार पर खुद को अलग करते हैं।

1992 में जब नागाओं ने जबरदस्ती बस रहे कूकी समुदाय के लोगों को भगाया तो वह पाईते के इलाकों में बसने लगे। इनमें से एक चुराचांदपुर भी है जो पाईते का मूलनिवास रहा है। कुकी मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में बसने लगे, जो पैतियों का गृहस्थान है। यहाँ आकर बसने वाले लोगों को कूकी उग्रवादियों ने समर्थन दिया और पाईते को परेशान करना चालू कर दिया। उन्हें अपने ही इलाके छोड़ने को कहा गया। बाद में पाईते ने सुरक्षा के लिए एक उग्रवादी समूह भी बनाया।

इसके बाद यहाँ हालात लगातार खराब होते रहे। कूकी उग्रवादी समूह ने जून 1997 में सैकुल नामक पाईते के गाँव पर हमला किया और 13 पाईते को मार डाला। इसके बाद दोनों के बीच बड़े पैमाने पर हिंसा हुईं, जिसमें लगभग 15000 लोग मारे गए और बेघर हुए। दोनों समुदाय के बीच शान्ति तब आई जब अक्टूबर 1998 में एक ‘शांति समझौते’ पर हस्ताक्षर हुए। इसके तहत 2 अलग-अलग संप्रदायों कुकी और ज़ोमिस को मान्यता मिली।

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने जिस समझौते के विषय में बात की वह 2005 में कांग्रेस सरकार ने किया था। यह समझौता कूकी लड़ाकों और भारतीय सेना के बीच सस्पेंशन ऑफ़ ऑपरेशन था। इसके तहत कूकी लड़ाकों को संघर्ष रोकना था। इसके अलावा केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और 25 कूकी लड़ाका संगठनों के बीच एक और समझौता हुआ था। शांति समझौते के अनुसार लड़ाका समूहों को हथियार और गोला-बारूद का इस्तेमाल न करने के लिए कहा गया था, लेकिन इसके बाद भी कई बार झड़प और वसूली के चलते चिंता की स्थिति बनी रही।

96 वर्षीय लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न: PM मोदी बोले – राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में उनका प्रयास अद्वितीय

भाजपा के 96 वर्षीय लालकृष्ण आडवाणी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने का फैसला किया गया है। राम मन्दिर के लिए जनमानस को जागृत करने का श्रेय आडवाणी को ही जाता है। इन्होने ही पाञ्चजन्य-आर्गेनाइजर की संयुक्त सम्पादकीय मीट में कहा था कि "जब तक केंद्र और उत्तर प्रदेश में बहुमत में भाजपा नहीं आती अयोध्या में श्रीराम मंदिर शायद स्वप्न ही रहेगा। क्योकि तथ्यों को छुपाने और सच्चाई सार्वजनिक होने से रोकने वाला कोई नहीं होगा।" वास्तव में आज हुआ भी वही। जिन डाक्यूमेंट्स को अनुवाद करने में उत्तर प्रदेश सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से टालती रही, जिस कारण कोई भी कोर्ट निर्णय देने में असमर्थ होने के कारण तारीख-पर-तारीख देने के अलावा कुछ नहीं कर सकती थी। उत्तर प्रदेश में बहुमत वाली भाजपा सरकार बनने के बाद निर्णय में अवरोध कर रहे सबसे बड़े रोड़े को ठोकर मारते ही निर्णय सबके सामने है। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर इसकी घोषणा करते हुए उन्हें बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने एक्स पर लालकृष्ण आडवाणी के साथ अपनी दो तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा है कि मुझे यह बताते हुए काफी खुश हो रही है कि श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। मैंने उनसे बात की और इस सम्मान से सम्मानित किए जाने के लिए उन्हें बधाई दी। वह हमारे समय के सबसे बड़े और सम्मानित राजनेताओं में से एक हैं। देश के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उनका जीवन जमीनी स्तर पर काम करने से शुरू होकर देश के उप-प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने तक का है। उन्होंने गृह मंत्री और सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनके संसदीय कार्य हमेशा अनुकरणीय रहे हैं और समृद्ध अंतर्दृष्टि से भरे रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने अगले ट्वीट संदेश में लिखा है कि उन्होंने दशकों तक देश के लोगों की सेवा की। पारदर्शिता, अखंडता और राजनीतिक नैतिकता के मामले में आडवाणी जी ने कई अनुकरणीय मानक स्थापित किए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान को आगे बढ़ाने की दिशा में अद्वितीय प्रयास किए हैं। उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना मेरे लिए बहुत भावुक क्षण है। मैं इसे हमेशा अपना सौभाग्य मानता हूं कि मुझे उनके साथ काम करने और उनसे सीखने के कई मौके मिले हैं।

पद्म विभूषण से सम्मानित लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर, 1927 को पाकिस्तान के कराची में हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार पाकिस्तान छोड़कर भारत आ गया था।

आडवाणी जी बीजेपी के अकेले राजनेता हैं जो तीन पार्टी पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं। आडवाणी एनडीए की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उप प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। वे चार बार राज्यसभा और पांच बार लोकसभा सांसद रहे हैं।

अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण अभियान में इनकी अहम भूमिका रही है। 1990 में उन्होंने सोमनाथ से अयोध्या तक रामरथ यात्रा निकाली। वैसे यात्रा के बीच में ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

स्वीडन : ‘मस्जिदों को कर दो ध्वस्त, इस्लाम से लड़ने का यही उपाय’: घुसपैठियों पर भी बरसे जिम्मी अकेस्सन, सत्ताधारी नेता

                                   एक टूटी मस्जिद और जिम्मी अक्केसन (चित्र साभार: India TV & SVT)
स्वीडन के दक्षिणपंथी नेता जिम्मी अकेस्सन ने कहा है कि पुलिस को उन मस्जिदों में खोज अभियान चलाना चाहिए और उन मस्जिदों को ध्वस्त कर देना चाहिए जहाँ लोकतंत्र विरोधी बातें की जा रही है। उनके इस बयान का देश के प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टरसन ने विरोध किया है।

जिम्मी अकेस्सन का कहना है कि मस्जिदों को तोड़ना और उनमें खोज अभियान के जरिए ही बढ़ते इस्लामीकरण से लड़ा जा सकता है। जिम्मी अकेस्सन का कहना है कि नई मस्जिदों को बनाने की अनुमति बिल्कुल भी नहीं दी जानी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि देश में बाहर से आने वाले अवैध घुसपैठियों को मस्जिदें बनाने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए।

अकेस्सन ने कहा, “हमारे लिए यह आवश्यक है कि हम न मस्जिदों को तोड़ना और सीज करना चालू करें जहाँ से सर्वाधिक लोकतंत्र-विरोधी, स्वीडन-विरोधी, सेमेटिक विरोधी, होमोफोबिक-विरोधी और स्वीडिश समाज विरोधी प्रोपेगंडा निकलता है।”

जिम्मी अकेस्सन स्वीडन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी स्वीडन डेमोक्रेट के नेता हैं। वह सरकार के साथ गठबंधन में भी शामिल हैं। उनकी पार्टी के पास स्वीडन की संसद रिक्स्दाग में 72 सीटें हैं। उनके बयान का स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टरसन ने विरोध किया है।

प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टरसन ने कहा है कि अकेस्सन का ‘असम्माननीय’ है। उल्फ़ क्रिस्टरसन ने कहा है कि स्वीडन के अंदर हम इबादतगाहों को गिराते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जो अकेस्सन ने कहा है वह स्वीडिश मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। उन्होंने कहा है कि हमें कट्टरपंथ से लड़ना चाहिए लेकिन लोकतांत्रिक फ्रेमवर्क में रहकर लड़ना चाहिए।

प्रधानमंत्री अकेस्सन ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि ये हमारे NATO में शामिल होने के मौके भी कम करता है। गौरतलब है कि स्वीडन NATO में शामिल होना चाहता है लेकिन तुर्की उसे समर्थन नहीं दे रहा है। तुर्की का कहना है कि स्वीडन में इस्लामोफोबिया बढ़ रहा है इसलिए हम उसका समर्थन नहीं करेंगे। स्वीडन में इससे पहले कुरान जलाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

गाजा पट्टी पहुँचे इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू, ‘हमास का खात्मा हमारा लक्ष्य, कोई रोक नहीं सकता’: ‘युद्ध विराम’ बढ़ाने के लिए गिड़गिड़ाया इस्लामी आतंकी संगठन

गाजा पट्टी में घुसे इजरायली पीएम नेतन्याहू (तस्वीर साभार: CNN)
इजरायल और हमास के बीच तकरीबन डेढ़ महीने तक चले युद्ध पर 4 दिन का विराम था। इस बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी का दौरा किया। अपनी फौज से मिलकर उन्होंने यह साफ कर दिया कि भले ही अभी सीजफायर हो गया, लेकिन ये युद्ध आतंक के खात्मे तक जारी रहेगा।

इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम समझौते की शुरुआत शुक्रवार (24 नवंबर 2023) से हुई थी। पहले दिन हमास द्वारा 24 बंधकों को रिहा किया गया। जिनमें 13 इजरायली, थाईलैंड के 10 और फिलीपिंस का एक नागरिक शामिल था।

इसके बाद तीसरे दिन 17 लोग हमास आतंकियों की चंगुल से रिहा हुए। इनमें 14 इजरायली और 3 थाईलैंड के नागरिक थे। हमास ने गाजा के एक अस्पताल में इन बंधकों को रेड क्रॉस इंटरनेशनल सोसायटी के वॉलंटियर्स के हवाले किया, जिन्होंने बाद में सभी को बंदियों को इजरायली सुरक्षा बलों को सौंप दिया।

इनकी रिहाई देखकर हमास से बचाए गए सैंकड़ों लोग खुशी मनाते दिखे। उन्होंने एक हॉल में पूरी रिहाई की खबर देश जश्न मनाया, जिसकी वीडियो भी सामने आई है।

इजरायल और हमास के बीच हुए युद्धविराम में कतर ने बिचौलिए की भूमिका निभाई। फैसला हुआ कि हमास 50 बंधकों को रिहा करेगा और फिलीस्तीन के भी 150 कैदी छोड़े जाएँगे। इस डील के बाद भले ही कुछ लोग घर लौट आए हैं, लेकिन अब भी खबर है कि 183 लोग अभी भी हमास द्वारा बंदी बनाकर रखे गए हैं। इनमें 18 बच्चे जबकि 43 तो महिलाएँ ही हैं।

हमास ने रविवार (26 नवंबर 2023) को एक बयान में सीजफायर बढ़ाने की भी माँग की। हालाँकि इजरायल ने शर्त रखी कि अगर हमास रोज 10 बंधक छोड़ेगा तो वह इस बात को मान लेंगे। इसी बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर ऐसे माहौल में गाजा पट्टी का दौरा किया। उन्होंने अपने सैनिकों से मुलाकात करने के बाद यह साफ कर दिया कि गाजा पट्टी पर अब इजरायल का कब्जा है। उन्होंने सैनिकों की हौसला अफजाही करते हुए यहाँ तक कहा कि जब तक आतंक का सफाया नहीं होगा तब तक युद्ध नहीं रुकेगा।

सैनिकों के साथ खड़े होकर उन्होंने कहा, “हम अपने बंदियों को वापस लाने के लिए हर प्रयास करेंगे और अंततः हम उन सभी को वापस लाएँगे। नेतन्याहू ने कहा, “इस युद्ध में हमारे तीन लक्ष्य हैं- सभी बंधकों की वापसी, हमास का खात्मा और यह सुनिश्चित करना कि गाजा फिर कभी इजरायल के लिए खतरा ना बने।” उन्होंने आगे कहा, “कोई भी हमें नहीं रोक सकता है। हमारे पास ताकत है और हम लक्ष्यों को पाकर रहेंगे।”

ये चार दिन के युद्ध विराम के बाद और बेंजामिन नेतन्याहू की बातें सुनकर ऐसा लगता है जैसे बंधकों की अदला-बदली का काम पूरा होने के बाद हमास आतंकियों के खिलाफ इजरायल अपनी लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने पहले भी कहा था और अब भी इशारा किया है कि जब तक हमास है तब तक वो अपना युद्ध नहीं रोकेंगे।


ब्रिटेन : प्रधानमंत्री ऋषि सुनक द्वारा दीवाली मनाने पर कट्टरपंथी बोले- एक और मोदी आ गया

ब्रिटेन प्रधानमंत्री ने मनाई आधिकारिक निवास पर दीवाली (तस्वीर साभार: यूके पीएम का एक्स हैंडल)
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अपने आधिकारिक निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट में दीवाली से पहले हिंदू समुदाय के लोगों के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन करवाया। इस दौरान पीएम सुनक और उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति के साथ कई हिंदू लोग दिखाई दिए।

कार्यक्रम की तस्वीरें एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई हैं। इन तस्वीरों में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति दीप प्रज्वलित करती दिख रही हैं। इस दौरान उनके आसपास कई सारे लोग हैं जिन्होंने भारतीय परिधान धारण किए हुए हैं।

पोस्ट में लिखा गया है- आज प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने दीवाली- (अंधकार पर प्रकाश की विजय) के शुभ अवसर पर हिंदू समुदाय के लोगों का स्वागत किया। आगे पोस्ट में लिखा गया- ब्रिटेन या फिर विश्व में सबको शुभ दीवाली।

दीवाली इस वर्ष 12 नवंबर को मनाई जानी है। ऐसे में सुनक के आवास पर ये आयोजन 9 नवंबर को हुआ। कई भारतीय यूजर्स ने उनके द्वारा आयोजित करवाए गए इस आयोजन पर खुशी जाहिर की। वहीं कुछ कट्टरपंथियों ने इस पर भी सवाल उठाए और घृणा दिखाते हुए लिखा कि आखिर गाजा पर प्रधानमंत्री ऋषि सुनक क्यों नहीं बोलते। जबकि हमास और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध पर सुनक स्पष्ट रूप से आतंकवाद के विरुद्ध अपना समर्थन दे चुके हैं। कोई गाज़ा से यह नहीं कहता कि अपने यहाँ से आतंकियों को बाहर करो, इनकी लड़ाई में बेगुनाहों को अपनी जान खोनी पड़ रही। क्यों स्कूलों, मस्जिद और हॉस्पिटलों में अपने अड्डे बना रहे हैं। इजराइल अड्डों पर हमला कर रहा है, जिस कारण बेगुनाह मारे जा रहे हैं। 

एक ने कहा- शायद ये ब्रिटेन के पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने संसद की और उसके लोगों की न सुनकर इनका अपमान किया है। ब्रिटेन ने एक और मोदी को प्रधानमंत्री चुन लिया है जो अपने देश में अल्पसंख्यकों को नहीं देखना चाहता। ये सबसे गंदा दौर है।

भारतीय मूल के ऋषि सुनक जब से ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने हैं तभी से वो अक्सर पूजा-पाठ करने, मंदिर जाने, गौसेवा करने, जय श्रीराम का नारा लगाने आदि के लिए चर्चा में आते रहते हैं। एक बार उन्होंने बताया था कि उनके डेस्क पर हमेशा गणेश भगवान रहते हैं।

इसके अलावा जी20 के वक्त जब वो अपनी पत्नी अक्षता मूर्ति के साथ नई दिल्ली आए थे तब भी उन्होंने अक्षरधाम मंदिर में पूजा-अर्चना की थी और उनकी तस्वीरें खूब वायरल हुई थीं। उन्होंने बिना हिचकिचाए ये भी कहा था कि उन्हें हिंदू होने पर गर्व हैं, उनकी परवरिश इसी तरह हुई है और वो भी ऐसे ही हैं। हिंदू त्योहारों को धूमधाम से मनाने की बात भी उन्होंने बताई थी।

Khalistan पर जनमत संग्रह फेल, कनाडा के पीएम ट्रूडो की सिख वोट बैंक की राजनीति को फिर झटका, नए नक्शे में दिल्ली भी

कनाडा के पीएम ट्रूडो की सिख वोट बैंक की राजनीति को फिर एक बार करारा झटका लगा है। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में लंबे समय से प्रतीक्षित भारत विरोधी जनमत संग्रह को आधिकारिक तौर पर विफल घोषित कर दिया गया है। जनमत संग्रह के लंबे-चौड़े दावों के बावजूद इसमें मुठ्ठीभर लोग ही जमा हो पाए। जनमत संग्रह का आयोजित करने वाले भारत में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन एसएफजे ने भारत की राजधानी दिल्ली को खालिस्तान के हिस्से के रूप में शामिल करते हुए एक नया विवादित नक्शा भी जारी किया। खालिस्तानी आतंकवादी पन्नू ने वाशिंगटन डी.सी. में कहा, “यह पंजाब और भारत के बीच एक युद्ध है जिसमें कब्ज़ा करने वाली सेना हिंसा का उपयोग कर रही है, जबकि सिख वोटों का उपयोग कर रहे हैं।”

हरदीप निज्जर को जहां गोली मारी, उसी गुरुद्वारे में किया गया जनमत
कनाडा के जनमत संग्रह के बारे में सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक यह सरे के उसी गुरुद्वारे में पर्याप्त पुलिस तैनाती के बीच आयोजित किया गया था, जहां जून में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने दावा करते हुए आरोप लगाया था कि निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता की संभावना है। वहीं भारत सरकार ने खालिस्तानी उग्रवादी की मौत के आरोपों का दृढ़ता से खंडन किया, जिसे नई दिल्ली ने पहले ही ‘आतंकवादी’ करार दिया था। भारत ने कनाडा से अपने उन दावों के लिए सबूत पेश करने के लिए भी कहा। ऐसा न होने पर राजनयिक को निष्कासित कर दिया था।

जनमत संग्रह में दो हजार से भी कम वोटों के चलते फ्लॉप घोषित
खालिस्तान के लिए सरे में हुए मतदान में 2000 से भी कम लोगों ने शिरकत की। स्थानीय स्रोतों से प्राप्त रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि इस बार पिछले जनमत संग्रह में भाग लेने वाले लोगों का केवल वही समूह सामने आया, जिसमें मुख्य रूप से छात्र प्रतिभागी शामिल थे। इस बार जनमत संग्रह में कोई नया समूह शामिल नहीं हुआ। जनमत संग्रह प्रक्रिया में नई भागीदारी में कमी के चलते इसे फ्लॉप करार दिया गया।इसी साल 10 सितंबर को हुए पिछले जनमत संग्रह में एक लाख से अधिक वोटों का दावा किया गया था, लेकिन वास्तविकता में मतदान महज 2398 वोट था।

देशविरोधी गतिविधियों रोकने के लिए भारत लगातार बना रहा है कनाडा पर दबाव
सरे में निराशाजनक प्रतिक्रिया मिलने के बाद अगले साल एबॉट्सफ़ोर्ड, एडमॉन्टन, कैलगरी और मॉन्ट्रियल में जनमत संग्रह आयोजित करने की चर्चा हो रही है। वहीं कभी-कभी ‘सिख फॉर जस्टिस’ जैसे अलगाववादी संगठन इन अनौपचारिक ‘खालिस्तान जनमत संग्रह’ का आयोजन करते हैं। दूसरी ओर, भारत इस मामले में लंबे समय से कनाडाई सरकार पर दबाव बना रहा है और उनसे अपने देश में स्थित व्यक्तियों और समूहों द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों को रोकने का आह्वान किया है, जिन्हें भारतीय कानून के तहत आतंकवादी घोषित किया गया है।

कनाडा में उच्चायुक्त की गिरफ्तारी पर एक लाख डॉलर इनाम देने की घोषणा की
खालिस्तान जनमत संग्रह के दूसरे चरण के समापन पर, कट्टरपंथी सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) समूह ने कनाडा में उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा की गिरफ्तारी पर एक लाख डॉलर इनाम देने की घोषणा की। चरमपंथी समूह वर्मा को सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए जिम्मेदार मानता है। एसएफजे के कानूनी सलाहकार और घोषित आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने आईएएनएस से कहा कि भारत में सिखों के लिए एक अलग मातृभूमि के लिए समर्थन देने के लिए कई लोग सरे के गुरुद्वारे में आए। मतदान के समापन पर सभा द्वारा दो प्रस्ताव पारित किए गए, जिसमें “निज्जर की हत्या की साजिश रचने और निर्देशित करने” के लिए वर्मा की गिरफ्तारी और मुकदमा चलाने की मांग की गई। जनमत संग्रह का आयोजित करने वाले भारत में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन एसएफजे ने भारत की राजधानी दिल्ली को खालिस्तान के हिस्से के रूप में शामिल करते हुए एक नया नक्शा भी जारी किया। पन्‍नू ने वीज़ा रोकने और ओसीआई कार्ड रद्द करने के भारत के हालिया कदमों की भी आलोचना की।

कनाडा में खालिस्तान समर्थकों ने किया पीएम मोदी और तिरंगे का अपमान
जनमत संग्रह का पहला चरण पिछले महीने आयोजित किया गया था, जब प्रधानमंत्री मोदी ने जी 20 नेताओं के शिखर सम्मेलन में अपने समकक्ष जस्टिन ट्रूडो को कनाडा में भारत विरोधी गतिविधियों को जारी रखने के बारे में नई दिल्ली की चिंताओं से अवगत कराया था। लेकिन पहला चरण भी बुरी तरह फ्लॉप रहा तो आयोजकों को 29 अक्तूबर को दूसरे चरण की घोषणा करनी पड़ी। एसएफजे के एक प्रवक्ता ने कहा कि पहले और दूसरे चरण के संयुक्त मतदान में खालिस्तानी समर्थकों ने मतदान किया है। उन्होंने दावा का कि 2024 में कनाडाई शहरों एबॉट्सफ़ोर्ड, एडमॉन्टन, कैलगरी, मॉन्ट्रियल में जनमत संग्रह का आयोजन किया जाएगा। निज्जर की मौत के बाद कनाडा में पोस्टर युद्ध छिड़ गया, जिसमें भारतीय राजनयिकों और प्रतिष्ठानों को धमकी दी गई। कई खालिस्तान समर्थकों ने सितंबर के अंत में कनाडाई शहरों वैंकूवर, ओटावा और टोरंटो में भारतीय राजनयिक मिशनों के बाहर रैली की, भारतीय तिरंगे और पीएम मोदी का अपमान किया।

कनाडा में हिंदुओं को धमकी देते हुए भारत वापस जाने की दी धमकी
ऑनलाइन सामने आए वीडियो की एक श्रृंखला में, उन्होंने कनाडा में हिंदुओं को धमकी देते हुए उन्हें भारत वापस जाने के लिए कहा और पीएम मोदी से इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध से सीखने को कहा, ताकि भारत में भी इसी तरह की “प्रतिक्रिया” न हो। ट्रूडो के आरोपों के बाद भारत और कनाडा के बीच तनाव बढ़ गया, जिसे भारत ने “बेतुका और प्रेरित” बताते हुए खारिज कर दिया। इस साल की शुरुआत से, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में खालिस्तानी जनमत संग्रह का आह्वान कर रहे हैं, हिंदू मंदिरों और भारतीय मिशनों और प्रतिष्ठानों को भारत-विरोधी भित्तिचित्रों के साथ तोड़-फोड़ कर रहे हैं।

खालिस्तान के पहले वायरल हुए नक्शे में राजस्थान के भी 10 जिले
पाकिस्तान के बाद खालिस्तान समर्थकों का गढ़ बन रहे कनाडा में आतंकियों के सरपरस्तों ने खालिस्तान की आग को भड़काने के लिए खालिस्तान का नक्शा वायरल किया है। इस नक्शे में हिंदुस्तान के राज्यों के कई जिले हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान के हिस्से वाला पंजाब इसमें शामिल नहीं है, जबकि वो भारत के हिस्से वाले पंजाब से बड़ा है। इसके अलावा खालिस्तान के इस नक्शे में राजस्थान के भी 10 सरहदी जिलों को शामिल किया गया है। लेकिन गहलोत सरकार ने इस पर चुप्पी साधी हुई है और कोई एक्शन अब तक नहीं लिया है। दूसरी ओर नब्बे के दशक में एक भैरोंसिंह शेखावत की सरकार थी, तब खालिस्तानी आतंकियों ने राजस्थान में कांग्रेस के मंत्री के बेटे का अपहरण कर लिया था। तब शेखावत ने न सिर्फ तत्काल टीम का गठन किया, बल्कि मंत्री के बेटे को अपहृर्ताओं से मुक्त कराया और आतंकी को टीम ने एनकाउंटर में मार गिराया था।

कनाडा में हो रहे भारत विरोधी और खालिस्तान समर्थक प्रदर्शन
केंद्र की मोदी सरकार शुरू से ही आतंकियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए हुए है। केंद्र सरकार ने खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नु को आतंकी घोषित कर रखा है। वो सिक्ख फॉर जस्टिस (एसएफजे) नामक संगठन कनाडा से चलाता है। पन्नु कनाडा में चल रहे भारत विरोधी प्रदर्शनों में कई बार शामिल हो चुका है। वो कई बार सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड कर भारतीयों और भारत सरकार को धमकियां देता है। दो दिन पहले ही पन्नु ने कनाडा में बसे हिन्दुओं को कनाडा छोड़ जाने की धमकी दी है। पन्नु ने ही खालिस्तान नामक देश भारत से अलग करने की मुहिम चलाई हुई है, जिसमें कनाडा में हजारों लोग जुड़े हुए हैं। उन्होंने खालिस्तान देश का अलग ही नक्शा भी जारी किया है। पन्नु को वहां शरण देने के संबंध में भारत सरकार अपनी आपत्ति कनाडा सरकार को दर्ज करवा चुकी है।

खालिस्तानी आतंकियों की राजस्थान पर बुरी नजर तो नहीं?
खालिस्तान का ऐसा ही एक नक्शा इन दिनों सोशल मीडिया पर फिर से वायरल है। इस नक्शे में राजस्थान के भी 10 जिलों को शामिल किया गया है। हैरान और परेशान करने वाली बात ये है कि इस पर सरकार ने कई एक्शन नहीं लिया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या खालिस्तान को लेकर चल रही गतिविधियों से राजस्थान को भी सतर्क होने की जरूरत नहीं है। क्या कनाडा और खालिस्तानी गतिविधियों के तार राजस्थान से भी जुड़े हैं? क्या 28 साल पहले की तरह एक बार फिर खालिस्तानी आतंकियों की बुरी नजर राजस्थान पर तो नहीं? राजस्थान की बात करें तो नक्शे में पंजाब से सटे श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर, जोधपुर, अलवर, खैरथल, भरतपुर, डीग, बूंदी और कोटा को दिखाया गया है। हालांकि हाल ही में बने अनूपगढ़, खैरथल और डीग जिले को अलग से मेंशन नहीं किया गया है। क्योंकि ये नक्शा कुछ पुराना है, तब ये जिले अस्तित्व में ही नहीं आए थे। खास बात ये है कि 2 साल पहले भी ये नक्शा सामने आया था। अब कनाडाई प्रधानमंत्री ट्रूडो के खुलकर खालिस्तानियों के समर्थन में आने के कारण खालिस्तान मूवमेंट बढ़ने के बाद एक बार फिर ये नक्शा चर्चा में है। इस नक्शे में पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली सहित उत्तरप्रदेश और राजस्थान के हिस्सों को दिखाया गया है।

खालिस्तानियों ने किया मंत्री पुत्र का अपहरण, भैरोसिंह सरकार ने बचाया था
पंजाब का पड़ोसी राज्य होने से राजस्थान में खालिस्तानी आतंक का खतरा पहले भी बना रहा है। वर्ष 1995 में इंदिरा गांधी के करीबी रह चुके केंद्रीय मंत्री और राजस्थान के दिग्गज नेता रामनिवास मिर्धा के बेटे राजेंद्र मिर्धा को खालिस्तानी आतंकियों ने फरवरी 1995 में किडनैप कर लिया था। उन्होंने राजेंद्र मिर्धा को छोड़ने के बदले जनवरी, 1995 में पकड़े गए खालिस्तान समर्थक भुल्लर को छोड़ने की मांग की थी। राजेन्द्र मिर्धा के अपहरण के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री भैंरोसिंह शेखावत सरकार ने कई टीमें इस केस के लिए गठित कीं। उनमें से एक इंटेलीजेंस टीम में शामिल रहे अफसर हुकुम सिंह के मुताबिक मिर्धा का अपहरण खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) और अन्य 27-28 संगठनों से जुड़े लोगों ने किया था। जयपुर में हुए पुलिस एनकाउंटर में एक खालिस्तान समर्थक नवनीत सिंह कादिया मारा गया और राजेंद्र मिर्धा को सुरक्षित बचा लिया गया। एनकाउंटर में तीन खालिस्तानी समर्थक दया सिंह लाहौरिया, हरनेक सिंह भप और सुमन सूद भागने में कामयाब हो गए।

खालिस्तानी नक्शे में पाकिस्तानी पंजाब का जिक्र नहीं
खालिस्तान का जो नक्शा दिखाया गया है, उसमें भारतीय पंजाब से सटे हुए पाकिस्तानी पंजाब का जिक्र तक नहीं है। ये हैरान करने वाला इसलिए है कि क्योंकि पाकिस्तानी पंजाब भारतीय पंजाब से भी करीब 30 प्रतिशत बड़ा है। राजस्थान के जो जिले नक्शे में दिखाए गए हैं, खालिस्तानियों का दावा है कि उनमें खालिस्तान मूवमेंट से सहानुभूति रखने वाले कुछ लोग हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर, फलोदी, बीकानेर व जोधपुर सरहदी इलाके हैं। इनकी सरहद उत्तर में पंजाब और पश्चिम में पाकिस्तान से सटी हुई है। पाकिस्तान से सटी बार्डर पर अक्सर ड्रग्स व हथियारों की तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं। कई बार बीएसएफ ने वहां ड्रोन, प्रशिक्षित कबूतर और बाज जैसे पक्षियों को पकड़ा है जो पाकिस्तान से भारत की तरफ आते हैं।

खालिस्तानी आतंकियों की पनाहगाह बनता जा रहा है कनाडा
कनाडा दरअसल, खालिस्तानियों आतंकियों का गढ़ बनता जा रहा है। गुरपतवंत सिंह पन्नू से लेकर पंजाबी सिंगर सिद्ध मूसेवाला की हत्या का आरोपी गोल्डी बराड़ तक फिलहाल कनाडा में ही पनाह लिए हैं। खासकर गुरपतवंत सिंह पन्नू पिछले दिनों खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर खासा चर्चा में रहा है। इसके अलावा गोल्डी बराड़, लखबीर सिंह उर्फ लांडा, चरणजीत सिंह उर्फ रिंकू रंधावा, अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला, रमनदीप सिंह उर्फ रमन जज, गुरपिंदर सिंह उर्फ बाबा डल्ला और सुखदुल सिंह उर्फ सुखा भी कनाडा में है। कनाडा के राजनेताओं में खालिस्तानियों के प्रति नरम रुख चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है। मौजूदा कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो के पिता पियरे टूडो साल 1984 में कनाडा के पीएम थे और उस वक्त भी उन पर खालिस्तानियों को समर्थन देने का आरोप लगा था और दोनों देशों के संबंध बिगड़े थे।

गाजा में ‘स्थायी युद्धविराम’ के पैरोकार सांसद की ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने की छुट्टी

                       ब्रिटिश सांसद पॉल ब्रिस्टो की सरकारी पद से छुट्टी (फोटो साभार: न्यूजस्काई)
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अपनी ही पार्टी (कंजरवेटिव) के सांसद पॉल ब्रिस्टो को उनके पद से बर्खास्त कर दिया है। पीटरबरो से सांसद ब्रिस्टो विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विभाग के मंत्री के सहयोगी की भूमिका में थे। उन्होंने पिछले सप्ताह पीएम सुनक को लिखे एक पत्र में गाजा में ‘स्थायी युद्धविराम’ का समर्थन किया था। प्रधानमंत्री से इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध पर अपने स्टैंड में बदलाव लाने का आग्रह किया था।

ब्रिटेन की सरकार गाजा में मानवीय सहायता के पक्ष में है। लेकिन वह युद्ध विराम का समर्थन नहीं करती है। उसका कहना है कि इजरायल को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। हमास के हमलों के बाद पीएम सुनक ने इजरायल की यात्रा भी की थी।

ऐसे में ब्रिस्टो का पत्र सरकार की सोच के ठीक विपरीत था। अब उन्हें उनके पद से मुक्त भी कर दिया गया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 10 डा​उनिंग स्ट्रीट के प्रवक्ता ने कहा है कि ब्रिस्टो की टिप्पणियाँ ‘सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थी’।

बर्खास्तगी के बाद ब्रिस्टो ने फैसले पर निराशा जताई है। कहा है कि वे अपनी जिम्मेदारी का आनंद ले रहे थे। निराशा के साथ इसे छोड़ रहे हैं। साथ ही यह भी कहा कि अब वे उस मुद्दे पर खुलकर बात कर पाएँगे जिसकी उनकी मतदाताओं को परवाह है।

ब्रिस्टो ने पीएम सुनक को दो पन्नों का लेटर लिखा था। इसमें कहा था कि स्थायी युद्धविराम से जिंदगियाँ बचाई जा सकेंगी और उन लोगों तक मदद पहुँच सकेगी जिन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत है। गाजा के हालात का जिक्र करते हुए उन्होंने यह भी कहा था कि इससे उनके कुछ मतदाता सीधे ‘प्रभावित’ हुए हैं।

आइसलैंड : प्रधानमंत्री हड़ताल पर, कामकाज किया बंद: लैंगिक समानता की माँग और घरेलू हिंसा के विरोध में आईं महिलाएँ

                                                                                                                                       साभार 
उत्तर-पश्चिम यूरोप का एक छोटा-सा देश है आइसलैंड। इस देश की जनसंख्या महज 3.80 लाख है। मंगलवार (24 अक्टूबर 2023) को इस देश में कामकाज ठप हो गया। दरअसल, हजारों औरतों के साथ देश की प्रधानमंत्री कैतरीना कोस्तोत्रई (Katrín Jakobsdóttir) भी हड़ताल पर चली गईं।

इस मुल्क की नारी शक्ति का ये विरोध यहाँ मर्दों और औरतों के वेतन में असमानता और लैंगिक हिंसा को लेकर था। कोस्तोत्रई दुनिया में हड़ताल पर जाने वाली किसी देश की पहली प्रधानमंत्री कही जा सकती हैं।

पीएम कोस्तोत्रई ने पहले ही आइसलैंड की मीडिया को बताया था कि ‘क्या आप इसे समानता कहते हैं?’ स्लोगन वाली हड़ताल के तहत काम पर नहीं जाने का प्लान बनाया था। इसके साथ ही मंगलवार को ‘वीमेन्स डे ऑफ’ के दिन देश की हजारों महिलाओं के साथ पीएम भी इस हड़ताल में शामिल हो गईं।

इसे लेकर पीएम कोस्तोत्रई ने कहा, “मैं इस दिन काम नहीं करूँगी और मुझे उम्मीद है कि सभी महिलाएँ (कैबिनेट में) भी ऐसा ही करेंगी। मैंने कल कैबिनेट की बैठक नहीं करने का फैसला किया है। आइसलैंड की संसद में केवल पुरुष मंत्री सवालों का जवाब देंगे। हम इस तरह से एकजुटता दिखाते हैं।”

हड़ताल के आयोजकों ने अभियान की आधिकारिक वेबसाइट पर कहा है, “24 अक्टूबर को आइसलैंड में आप्रवासी सहित सभी महिलाओं को भुगतान और अवैतनिक (घरेलू कामों सहित) दोनों तरह के काम बंद करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। पूरे दिन महिलाएँ समाज में अपने योगदान के अहमियत को दिखाने के लिए हड़ताल करेंगी।”

दरअसल, इस देश में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही महिलाओं को वेतन में असमानता को लेकर रोष है। इस वजह से महिलाओं ने ‘वीमेन्स डे ऑफ’ के दिन केवल बाहर का ही नहीं, बल्कि घर का काम भी नहीं किया। स्टाफ की कमी के कारण आइसलैंड के स्कूल-अस्पताल, ट्रांसपोर्ट आदि बुरी तरह प्रभावित रहे।

ये तब है, जब यह देश लैंगिक समानता के मामले में बीते 14 सालों से टॉप पर है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मुताबिक, वेतन सहित अन्य कारकों में आइसलैंड के मुकाबले अन्य किसी भी देश ने समानता हासिल नहीं की है। फोरम ने इस देश को 91.2 फीसदी का स्कोर दिया है। इस देश को ‘फैमिनिस्ट हेवन’ के नाम से भी जाना जाता है।

कोस्तोत्रई ने 19 अक्टूबर 2023 के एक ट्वीट में कहा था, “हमें लैंगिक वेतन के अंतर को कम करने और लैंगिक समानता तक पहुँचने के लिए महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की जरूरत है। हमें ऐसी परिस्थितियों वाले समाज की जरूरत है, जहाँ बेहतरीन खुशहाली, माता-पिता की छुट्टी, डे-केयर और एक संस्कृति में बदलाव संभव हो।”

इस देश में ये पहली बार नहीं है, जब ‘वीमेन्स डे ऑफ’ मनाया गया। यहाँ ये दिन लगभग 50 साल पहले यानी 1975 में हुई पहली बार हड़ताल के बाद आया है। तब आइसलैंड की 90 फीसदी महिलाओं ने केवेनफ्री यानी वीमेन्स डे ऑफ के हिस्से के तौर पर काम करने से इनकार कर दिया था। इस हड़ताल के कारण आइसलैंड में अहम बदलाव हुए।

आइसलैंड में जो प्रमुख बदलाव हुए, उनमें दुनिया के किसी देश की पहली महिला राष्ट्रपति का चुनाव भी शामिल है। साल 1975 के बाद इस हड़ताल को 1985, 2005, 2010, 2016 और 2018 में दोहराया गया है। 1975 की हड़ताल में भाग लेने वालों में से कुछ ने इस हड़ताल को आयोजित करने में मदद की। उनका मानना है कि मकसद पूरा नहीं हुआ है।

इसे लेकर आइसलैंडिक फेडरेशन फॉर पब्लिक वर्कर्स के हड़ताल आयोजक फ़्रीजा ने कहा, “हम इस बात की तरफ ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं कि हमें समानता का स्वर्ग कहा जाता है, लेकिन अभी भी लैंगिक असमानताएँ हैं। कार्रवाई की तत्काल जरूरत है। स्वास्थ्य सेवाओं और बच्चों की देखभाल जैसी महिलाओँ के नेतृत्व वाले काम को अभी भी कम अहमियत दी जाती है और बहुत कम भुगतान किया जाता है।”

आइसलैंड के सांख्यिकी विभाग ने कहा है कि वहाँ कुछ नौकरियों में औरतें अभी भी अपने पुरुष सहकर्मियों के मुकाबले कम-से-कम 20 फीसदी कम कमाती हैं। वहीं आइसलैंड विश्वविद्यालय की एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि यहाँ की 40 फीसदी औरतों को अपने जीवनकाल में लिंग-आधारित और यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है।

ग्रुप सेक्स का ऑफर देने वाले पाटर्नर को इटली की PM ने छोड़ा, 10 साल से रिश्ते में थीं जियोर्जिया मेलोनी

                                     इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी (फोटो साभार: EWN)
इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने अपने बॉयफ्रेंड एंड्रिया जियाम्ब्रुनो के साथ रिश्ते को खत्म करने की घोषणा की है। उनके बॉयफ्रेंड जियाम्ब्रुनो पत्रकार हैं और महिला विरोधी टिप्पणी की वजह से पिछले कुछ समय से चर्चा में हैं। वे इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी के परिवार द्वारा चलाए जा रहे एमएफई मीडिया समूह के लिए काम करते हैं।

कुछ समय पहले जियाम्ब्रुनो एक महिला सहकर्मी से ‘तुम मुझे पहले क्यों नहीं मिली’ कहते सुने गए थे। यही नहीं, उन्होंने अपनी एक महिला सहकर्मियों को ‘ग्रुप सेक्स’ के लिए भी कहा था। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर वो लोग ‘ग्रुप सेक्स’ में शामिल होती हैं, तभी उनके साथ काम कर सकती हैं। ये स्पष्ट तौर पर कार्यस्थल पर यौन शोषण का मामला है।

जियाम्ब्रुनो इटली के वरिष्ठ पत्रकार हैं और मेलोनी के साथ पिछले 10 साल से रिलेशनशिप में थे। दोनों की एक 7 साल की बच्ची भी है, जिसका नाम गिनेवरा है। वो मीडियासेट टीवी चैनल के लिए काम करते हैं। उन्होंने कई बार ऑन एयर महिलाओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है।

इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री के तौर पर एक साल का कार्यकाल पूरा करने वाली 46 वर्षीया जियोर्जिया मेलोनी से पत्रकारों ने इस मामले पर उनसे सवाल किया था। इस पर जियोर्जिया मेलोनी ने कहा था कि वो अपने पार्टनर की टिप्पणियों के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। इसलिए उनसे इस बारे में कोई सवाल न पूछा जाए।

महिलाओं पर अभद्र टिप्पणियाँ बनीं अलगाव की वजह

रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, एमएफई मीडिया समूह की मीडियासेट चैनल पर एंड्रिया जियाम्ब्रुनो एक शो होस्ट करते हैं। उस शो की होस्टिंग के दौरान जब ब्रेक हुआ था, तब उन्होंने महिला सहकर्मियों पर गलत टिप्पणी की थी। यही नहीं, उन्होंने कुछ समय पहले कहा था कि महिलाएँ ज्यादा शराब न पीकर ‘गैंगरेप’ से बच सकती हैं।
जियाम्ब्रुनो ने कहा था, “अगर आप डांस करने जाते हैं तो आपको नशे में होने का पूरा हक है, लेकिन नशे में होने के बावजूद आपको खुद को भुलाना नहीं है, वरना भेड़ियों के चंगुल में फँसने का खतरा रहेगा।” ऐसे ही एक अन्य सहकर्मी से उन्होंने कहा था कि ‘तुम मुझे पहले क्यों नहीं मिली’। उनके कहने का मतलब साफ था कि वो उसकी तरफ आकर्षित थे।

मेलोनी ने एक्स पर की अलगाव की घोषणा

इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर अपनी और एंड्रिया जियाम्ब्रुनो के रिश्ते के खत्म होने की घोषणा की। मेलोनी ने ट्वीट में लिखा कि वह जियाम्ब्रुनो के साथ बिताए अच्छे समय के लिए आभारी हैं और उन्होंने उन्हें जिंदगी की सबसे महत्वपूर्ण चीज दी है, जो कि उनकी बेटी है।
हालाँकि, मेलोनी ने यह भी स्वीकार किया कि अब 42 वर्षीय एंड्रयू जियाम्ब्रुनो के साथ उनके रास्ते अलग हो गए हैं और यह समय है कि इसे स्वीकार कर लिया जाए। मेलोनी ने लिखा कि वह अपने रिश्ते, अपनी दोस्ती और अपनी बेटी की रक्षा करेंगी।
मेलोनी ने उन लोगों को एक संदेश भेजा जो उनके निजी जीवन पर हमला करके उन्हें कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह मजबूत और लचीली हैं और उनके हमलों से वह नहीं टूटेंगी। मेलोनी का ट्वीट उनके रिश्ते के अंत के बारे में एक स्पष्ट और दिल की बात है।
जियोर्जिया मेलोनी और उनके बॉयफ्रेंड की मुलाकात साल 2014 में एक टीवी शो के दौरान ही हुई थी। एंड्रिया जियाम्ब्रुनो तब चैनल के शो की स्क्रिप्ट लिखते थे। इसके बाद दोनों करीब आए। दोनों ने शादी नहीं की थी, लेकिन साथ रह रहे थे। हालाँकि अब दोनों के रास्ते अलग हो चुके हैं।

‘मंत्री को देख PM मोदी गुस्से में, प्लेन से नहीं उतरे… उपराष्ट्रपति से हुए खुश’ – जेहादी पत्रकार मोहम्मद जुबैर ने फैलाई फर्जी खबर

                                                        मोहम्मद जुबैर है फर्जी खबरों की फैक्ट्री
प्रधानमंत्री मोदी जब BRICS समिट में हिस्सा लेने दक्षिण अफ्रीका पहुँचे तो वहाँ का कोई छोटा मंत्री उनकी स्वागत में एयरपोर्ट पर आया। पीएम मोदी को गुस्सा आ गया। वो प्लेन से उतरे ही नहीं। जब दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने उपराष्ट्रपति को एयरपोर्ट भेजा तो प्रधानमंत्री मोदी प्लेन से नीचे उतरे।

यह एक खबर है। खबर फेक है। एक आदमी है, नाम है – मोहम्मद जुबैर। खुद को फैक्ट चेकर कहता है। इसने ही यह फेक खबर भारत में फैलाई। अपने चंटू-बंटू को खुश करने के लिए दक्षिण अफ्रीका के एक झंडु से वेबसाइट Daily Maverick का लिंक और उसकी बनाई खबर को भी शेयर किया।

ऐसे जेहादी पत्रकारों पर सूचना प्रसारण और गृह मंत्रालय कब सख्ती से पेश आएगा? नूपुर शर्मा के जीवन के पहले ही खिलवाड़ करने के चक्कर समस्त भारतीय मुसलमानों को विश्व में बदनाम कर चूका है। क्यों नहीं इसके बैंक खातों की जाँच की जाती? अब मामला देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है। यह देश के प्रधानमंत्री का अपमान है। आखिर किन कट्टरपंथियों के इशारे पर फेक खबरे चला कर कब तक देश में अराजकता फैलाता रहेगा? कार्यवाही करने पर इसका समर्थन करने वाली पार्टियों और नेताओं पर भी सख्ती से पेश आना होगा, क्योकि बिना किसी के समर्थन से फेक न्यूज़ फैक्ट्री नहीं चल सकती।  

मोहम्मद जुबैर जो नहीं कर पाया, वो था फैक्ट चेक। ना तो भारत का सरकारी पक्ष जानने की कोशिश की, ना ही दक्षिण अफ्रीका का… लेकिन कहलाता है वो फैक्ट चेकर।

मोदी प्लेन से कब और कैसे उतरे?

भारत सरकार से जुड़ी खबर है तो देखते हैं कि प्रधानमंत्री के ऑफिस ने क्या कुछ कहा है, इस घटना को लेकर। 22 अगस्त को 6 बजकर 27 मिनट पर प्रधानमंत्री ऑफिस ने जो ट्वीट किया है, उसके अनुसार दक्षिण अफ्रीका के उप-राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी का एयरपोर्ट पर स्वागत किया।
कट्टर इस्लामी मानसिकता के कारण अपने ही देश भारत और यहाँ की सरकार से नफरत करने वाला मोहम्मद जुबैर शायद इस ट्वीट को न देख पाया हो। पूरे दिन की 5 बार नमाज पढ़ने में ज्यादा समय लग गया होगा, इसलिए शायद 23 अगस्त को किए अपने ट्वीट में भी उसने बिना फैक्ट चेक किए ही फेक न्यूज फैला दी।
घटना चूँकि दक्षिण अफ्रीका में हुई है, इसलिए वहाँ की सरकार का भी जरा पक्ष जान लेते हैं। दक्षिण अफ्रीकी उपराष्ट्रपति के प्रवक्ता वुकानी एमडे ने Daily Maverick वेबसाइट में छपी खबर को फेक खबर बताया। फैक्ट को चेक करने के लिए मोहम्मद जुबैर यहाँ तक भी नहीं पहुँच पाया।

AltNews: फैक्ट चेकर नहीं, फेक न्यूज प्रचारक

जहाँ की घटना है, वहाँ से कोई आई सूचना को क्रॉस चेक नहीं किया। जिससे संबंधित घटना है, उससे बात करने या उसका पक्ष जानने की कोशिश नहीं की। फिर किस आधार पर फैक्ट चेक करते हो? इस्लाम की कट्टर विचारधारा में ऐसी ही ट्रेनिंग होती होगी शायद – अपने ही देश से नफरत करो, अपने ही लोगों को मूर्ख बनाओ, अपने ही लोगों को टोपी पहना कर उनसे पैसे ऐंठ लो, खुद उनके पैसे पर ऐश करो।
“हम AltNews हैं, हम फैक्ट चेक करते हैं, हमें पैसा दो” – हर महीने ऐसा रोना रोने वाला मोहम्मद जुबैर खुद कितना बड़ा फेक न्यूज प्रचारक है, यह खबर एक छोटा सा उदाहरण भर है। गिनती कितना करे कोई? 2 साल पहले ऑपइंडिया ने इसके 35 फेक खबरों की लिस्ट बनाई थी। कट्टर इस्लामी मानसिकता और वामपंथी कौम वाले चंटू-बंटू अगर इस लिस्ट को पढ़ लेते तो इसके बहकावे में नहीं आते, अपनी गाढ़ी कमाई इस पर नहीं लुटाते।

‘नरेंद्र मोदी, मेरे अब्बू को कुछ हुआ तो तुम जिम्मेदार होगे’: यासीन मलिक की 11 साल की बेटी का जहरीला Video

आतंकी यासीन मलिक की बेटी रजिया सुल्तान ने भारत के खिलाफ उगला ज़हर
आतंकी यासीन मलिक की 11 साल की बेटी ने जम्मू कश्मीर को लेकर ज़हर उगला है। अपने अब्बा के नक्शेकदम पर ही चलते हुए उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी कोसा। यासीन मलिक फ़िलहाल जेल में बंद है। रजिया सुल्तान ने दावा किया कि उसके अब्बा बीमार हैं और उसे उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है। 57 वर्षीय आतंकी की बेटी ने मुजफ्फराबाद में रिजनल लेजिस्लेटिव असेंबली में बोलते हुए ये बातें कहीं। उसने कहा, “मेरे अब्बा कश्मीर के हित की लड़ाई के दीप-स्तंभ हैं।”

यासीन की बेटी को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि उसके अब्बू ने कितने हिन्दुओं को मौत के घाट उतरवाया, घाटी छोड़ने को मजबूर किया और हिन्दू लड़कियों और महिलाओं का बलात्कार करवाने के लिए लोगों को उकसाया। यदि यही स्थिति तुम्हारे, तुम्हारी अम्मी और बहनों के साथ होता, तब क्या प्रतिक्रिया होती तुम्हारी?

उसने कहा कि अगर उसके अब्बा को कुछ भी नुकसान पहुँचता है तो वो इसका दोष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देगी। उसने कहा कि उसके अब्बा को फर्जी मामले में फँसाया गया है और उसे उम्मीद है कि जल्द ही वो जेल से निकलेंगे। उसने कहा, “मैं अपने अब्बा से मिलूँगी और उनके साथ अच्छा समय व्यतीत करूँगी। जब मैं उनसे मिली थी, तब मेरी उम्र मात्र 2 साल थी। अब मैं 11 साल की हो गई हूँ। मैं उन्हें बहुत याद करती हूँ। मैं उनकी आवाज़ सुनने के लिए बेचैन हूँ।”

यासीन मलिक की बेटी ने दावा किया कि वो जल्द ही जेल से निकल कर पाकिस्तानियों के बीच में होगा। यासीन मलिक 1088 में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चला गया था और वहाँ से भारत के खिलाफ सशस्त्र आतंक चला रहा था। इसके बाद वो वापस आ गया और अलगाववादी बन कर रहने लगा। उसके ऊपर वायुसेना जवानों की हत्या समेत 60 मामले दर्ज हैं। 2009 में पाकिस्तान जाकर उसने मुशैल हुसैन से निकाह कर ली थी।

इस दौरान यासीन मलिक की बेटी ने ‘जम्मू कश्मीर की आज़ादी’ वाले पाकिस्तान के नैरेटिव का भी समर्थन किया। पाकिस्तान एक तरह से अब नाबालिग लड़की के सहारे वैश्विक स्तर पर भारत विरोधी प्रोपेगंडा खेल रहा है। यासीन मलिक की बेटी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरे अब्बू का अपहरण कर लिया है।” साथ ही उसने संयुक्त राष्ट्र समेत अन्य वैश्विक संगठनों से भी अपील की कि वो उसके अब्बू को छुड़ाने के लिए प्रयास करें।

अवलोकन करें:-

‘घरों पर लेटर लगा बताते थे आज किसकी होगी हत्या’: अब ‘कश्मीर फाइल्स’ की वेब सीरीज, पीड़ित खुद बताए

यासीन मलिक वो आतंकी है, जो कश्मीर में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार में सीधे तौर पर शामिल था। इसके बावजूद मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री रहते उससे मुलाकात की थी और उससे हाथ मिलाया था। उस पर ‘अलगाववादी नेता’ के मुखौटे में कश्मीर में आतंकवाद का समर्थन करने का भी आरोप है। साथ ही उसे भारत में टेरर फंडिंग समेत दूसरे अपराधों के मामले में हिरासत में भी लिया गया था। यासीन मलिक पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण का भी आरोप है।

भारत का कायल हुआ ‘मुस्लिम वर्ल्ड लीग’, उधर जावेद अख्तर बोले – UCC लागू करना संभव नहीं

मोदी से मिलते अल-ईसा और जावेद अख्तर (साभार: सोशल मीडिया, आजतक)
मुस्लिम वर्ल्ड लीग के महासचिव शेख डॉक्टर मोहम्मद बिन अब्दुल करीम अल-ईसा भारत दौरे पर हैं। उन्होंने बुधवार (12 जुलाई 2023) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। ईसा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और अन्य धार्मिक नेताओं से मुलाकात पर खुशी जताते हुए भारत के लोकतंत्र एवं बहुलतावाद की जमकर तारीफ की। उधर, बॉलीवुड अभिनेता जावेद अख्तर को अलग तरह का दुख है।

अल-ईसा ने संबोधित करते हुए कहा, “मैं भारतीय लोकतंत्र को तह-ए-दिल से सलाम करता हूँ। मैं भारत के संविधान को सलाम करता हूँ। मैं दुनिया को सद्भावना सिखाने वाले भारतीय दर्शन और परंपरा को भी नमन करता हूँ। भारत में जो मैंने शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व देखा, वह भी अपने आप में यूनिक है।”

‘Harmony of Dialogue among Religions’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “जब भी संवाद की कमी होती है तो दो लोगों के बीच में गलतफहमी और समस्या खड़ी होती है। इसलिए संवाद का पुल बनाना आवश्यक है। सांस्कृतिक टकराव (Clash of Civilisation) को रोकने के लिए हमें अगली पीढ़ी का बचपन से ही मार्गदर्शन करना होगा और उन्हें इससे बचाना होगा।”

आतंकवाद पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “गलतफहमी, घृणा और गलत अवधारणाओं ने कट्टरपंथ फैलाकर आतंकवाद बढ़ाने में सहयोग दिया है। अपनी ताकत को बढ़ाने वाले बहुत से नेता हेट नैरेटिव का प्रयोग करते हैं और अपनी प्रासंगिकता एवं नियंत्रण सुनिश्चित करते हैं।” उन्होंने कहा कि कुछ ही संस्थाएँ इस तरह की गलत विचार परोसते हैं।

इससे पहले 11 जुलाई 2023 को सऊदी अरब के पूर्व न्याय मंत्री अल-ईसा ने कहा था, “भारत ने हिंदू बहुल राष्ट्र होने के बाद भी धर्मनिरपेक्ष संविधान अपनाया। विभिन्न संस्कृतियों में संवाद स्थापित करना समय की माँग है। सहनशीलता जीवन का हिस्सा है। इस्लाम प्यार और संवाद के लिए खुला है।”  

अल-ईसा ने कहा, “भारत के बारे में पाकिस्तान दुष्प्रचार किया करता है। भारत में मुस्लिम और उनके मज़हब को कोई खतरा नहीं है। मुस्लिम देश इंडोनेशिया को छोड़ दें तो भारत में विश्व की सर्वाधिक मुस्लिम आबादी रहती है। इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के 33 सदस्य देशों के बराबर मुसलमान भारत में रहते हैं।”

एक तरफ सऊदी अरब के नेता भारत की तारीफ कर रहे हैं तो दूसरी तरफ जावेद अख्तर का अपना रोना है। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता (यानी अलग-अलग धर्म के लोगों के रहने की वजह से) देखते हुए भारत में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करना संभव नहीं है।

उन्होंने कहा, “भारत एक औसत यूरोपीय देश की तरह नहीं है जहाँ एक धर्म, एक संस्कृति और एक परंपरा है। यहाँ संस्कृतियों, उप-संस्कृतियों, रीति-रिवाजों, परंपराओं की विविधता है। यह विविधता इतनी अधिक है कि यह कल्पना करना बहुत मुश्किल हो जाता है कि इसे कैसे हासिल किया जा सकता है।”

भारत में अलग-अलग रीति-रिवाजों का हवाला देते हुए अख्तर ने कहा, “दक्षिण भारतीय राज्यों में एक लड़की अपने मामा से शादी कर सकती है। उत्तर भारत में यह अकल्पनीय है। इसे अनाचार माना जाएगा। समान नागरिक संहिता के तहत इन चीजों को कैसे संतुलित किया जा सकता है?”