Showing posts with label conferred. Show all posts
Showing posts with label conferred. Show all posts

21 तोपों की सलामी के साथ पीएम नरेंद्र मोदी को मिला ‘ऑर्डर ऑफ द स्टार’ सम्मान: घाना में ‘हरे राम हरे कृष्ण’ से हुआ स्वागत

              प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा की तस्वीर (फोटो साभार : X_@narendramodi)
भारत में भारत विरोधी विदेशियों के इशारों पर विपक्ष अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाने 
"मुन्नी बाई" की तरह नाच मोदी का नहीं अपना ही अपमान कर रहे हैं। इन "मुन्नी बाइयों" को नहीं मालूम कि जनता को पागल बनाकर सत्ता हथियाकर अपनी तिजोरी भरना ही सबकुछ नहीं होता। आत्मसम्मान भी किसी चीज का नाम है। ये खुद मानते हैं कि मोदी ने भारत को जिस ऊंचाई पर पहुँचाया है कोई प्रधानमंत्री नहीं पहुंचा पाया। इतना ही नहीं खुद ही "भारत रत्न" पर इतराने वालों से कहीं ज्यादा विदेशी पुरस्कारों से मोदी को अलंकृत किया जा चूका है शायद ही भविष्य में कोई दूसरा प्रधानमंत्री इस मुकाम पर पहुँच सके।   

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (2 जुलाई 2025) को पाँच देशों की महत्वपूर्ण यात्रा पर है। इसका मुख्य उद्देश्य अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में भारत की साझेदारी को मजबूत करना है। यह यात्रा घाना से शुरू हुई।

पीएम मोदी तीन दशकों में घाना का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने हैं। घाना में उन्हें ‘ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना’ से भी सम्मानित किया गया और घाना के बच्चों ने ‘हरे राम हरे कृष्ण’ का मंत्रोच्चार कर स्वागत किया गया।

घाना में ऐतिहासिक शुरुआत

मोदी का घाना में शानदार स्वागत हुआ। घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। पीएम मोदी को ‘गार्ड ऑफ ऑनर‘ मिला। 21 तोपों की सलामी भी दी गई। पीएम मोदी की घाना की पहली सरकारी यात्रा थी। वह घाना जाने वाले तीसरे भारतीय प्रधानमंत्री हैं। उनसे पहले जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी गए थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने घाना में कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात की। इसमें निवेश, ऊर्जा, स्वास्थ्य और सुरक्षा शामिल हैं। पीएम मोदी ने घाना की संसद को संबोधित किया और इसे बड़ा सम्मान बताया। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश मजबूत लोकतंत्र हैं। जानकारी के अनुसार, घाना में 15,000 से ज्यादा भारतीय रहते हैं, कुछ परिवार सात दशकों से वहाँ हैं।

आगे की यात्रा

घाना के बाद पीएम मोदी अपनी यात्रा जारी रखेंगे और त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया जाएँगे। 3 से 4 जुलाई 2025 को वह त्रिनिदाद और टोबैगो में संसद में भाषण देंगे और देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ग्रहण करेंगे।

इसके बाद 4 से 5 जुलाई 2025 को पीएम मोदी अर्जेंटीना में राष्ट्रपति जेवियर माइली से मिलेंगे, जहाँ व्यापार, ऊर्जा, निवेश और नवीकरणीय ऊर्जा पर चर्चा होगी। 5 से 8 जुलाई 2025 तक पीएम मोदी ब्राजील के रियो डी जनेरियो में 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और ब्राजील के राष्ट्रपति सहित कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

आखिर में 8 से 9 जुलाई 2025 को नरेंद्र मोदी नामीबिया का दौरा करने वाले भारत के पहले पीएम होंगे, जहाँ वह राष्ट्रपति नंदी-एनडाइटवाघ से मिलेंगे और खनिज व ऊर्जा साझेदारी पर बातचीत करेंगे। यह पूरी यात्रा दिखाती है कि भारत दुनिया के दक्षिणी देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करना चाहता है और खास क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहता है।

रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान- ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ से सम्मानित कर पुतिन ने मोदी विरोधियों का दिया करारा जवाब ; अमेरिका भी हुआ मुरीद, कहा- भारत खत्म करवा सकता है यूक्रेन से युद्ध: ऑस्ट्रिया के चांसलर ने पोस्ट की सेल्फी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने से रोकने भारत विरोधी ताकतों की कठपुतली बन विपक्ष ने क्या-क्या हत्कण्ठे नहीं अपनाए, लेकिन मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बन गए। इन सभी में कौतुहल करने रूस के राष्ट्रपति ने मोदी को 9 जुलाई 2024 को रूस के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ से सम्मानित किया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने देश के अत्यंत प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान से आधिकारिक रूप से सम्मानित किया। पीएम मोदी को मिला यह पुरस्कार इस बात का प्रमाण है कि रूस और भारत के बीच एक खास रणनीतिक साझेदारी विकसित करने और दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने में उन्होंने विशेष योगदान दिया है। पीएम मोदी का एक ग्लोबल लीडर के तौर पर ओहदा लगातार बढ़ता जा रहा है। विदेशी धरती पर उन्हें कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से नवाजा है। बीते 10 सालों में लगभग 15 देशों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया है। इसमें कई मुस्लिम देश भी शामिल हैं।
         राष्ट्रपति पुतिन और ऑस्ट्रिया के चांसलर नेहमार के साथ पीएम मोदी (चित्र साभार: Narendra Modi/X)

यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को दिए गए शीर्ष राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों और सम्मानों की श्रृंखला में एक और बड़ी उपलब्धि है। इसके पहले ग्रीस ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर (Grand Cross of the Order of Honour) से सम्मानित किया। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने पीएम मोदी को अपने देश के सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द नाइल’ से सम्मानित किया था। फिजी ने अपने देश के सर्वोच्च सम्मान ‘कम्पैनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी’ और पापुआ न्यू गिनी ने ‘द ग्रैंड कम्पैनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगोहु’ से सम्मानित किया था। 

इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी को संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार चैंपियंस ऑफ अर्थ, बहरीन के शीर्ष पुरस्कार किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां, यूएई के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ जायेद, मालदीव के सर्वोच्च सम्मान निशान इज्जुद्दीन, रूस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल, दक्षिण कोरिया के सियोल शांति पुरस्‍कार, फिलिस्तीन का सर्वोच्च ग्रैंड कॉलर सम्मान, सऊदी अरब के सर्वोच्च सैश ऑफ किंग अब्दुल अजीज सम्मान, अफगानिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान आमिर अमानुल्लाह खान अवार्ड के साथ प्रथम फिलिप कोटलर प्रेशिडेंशियल पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

रूस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान- ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंगलवार (9 जुलाई 2024) को रूस के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ से सम्मानित किया गया। ये रूस का सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने देश के अत्यंत प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान से आधिकारिक रूप से सम्मानित किया। 2019 में रूस ने उनको इस सम्मान को देने का ऐलान किया था। यह पुरस्कार रूस और भारत के बीच एक विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी विकसित करने और दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने के पीएम मोदी के विशिष्ट योगदान के लिए दिया गया है। इस पुरस्कार की अहमियत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि ये 326 साल पुराना है। 1698 में जार पीटर द ग्रेट ने रूस के संरक्षक संत सेंट एंड्रयू के सम्मान में ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ को शुरू किया था। ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ मूल रूप से उत्कृष्ट नागरिक और सैन्य योग्यता के सम्मान और देश की असाधारण सेवा के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार के प्रतीक चिन्ह में एक नीला सैश, सेंट एंड्रयू के क्रॉस वाला एक बैज और छाती पर पहना जाने वाला एक सितारा शामिल होता है। बैज सेंट एंड्रयू का एक सुनहरा क्रॉस है, जिसमें एक एक्स-आकार के क्रॉस पर यीशु की छवि है। 1917 में रूसी क्रांति के बाद इस पुरस्कार को समाप्त कर दिया गया था लेकिन सोवियत काल के बाद इसे फिर से शुरू किया गया। पीएम मोदी ने इस सम्मान को भारत के 140 करोड़ लोगों का सम्मान बताया। 

भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रूस यात्रा के बाद अमेरिका ने भी भारतीय विदेश नीति का लोहा माना है। अमेरिका ने कहा है कि भारत अपनी रूस के साथ पुरानी दोस्ती के सहारे यूक्रेन-रूस संघर्ष खत्म करवा सकता है। अमेरिका के व्हाइट हाउस ने यह टिप्पणी की है।

अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रेस सचिव जीन पियरे ने मंगलवार (9 जुलाई, 2024) को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “भारत हमारा रणनीतिक साझेदार है और हम उसके साथ सभी मुद्दों पर एकदम खुलेपन से बात करते हैं, इन मुद्दों में उसके रूस के साथ रिश्ते भी शामिल हैं। हमने इस मामले पर पहले भी बातचीत की है। हमें लगता है कि यह जरूरी है कि भारत समेत सभी देश यूक्रेन के मामले में स्थायी शांति हासिल करने के प्रयासों को समर्थन दें।”

आगे उन्होंने भारत के इस मामले में सहयोग करने को लेकर कहा, “भारत के रूस के साथ उसके पुराने रिश्ते उसे यह क्षमता भी देते हैं कि वह रूसी राष्ट्रपति पुतिन से युद्ध हो खत्म करने की बात कह सके।” अमेरिका ने कहा कि युद्ध रूस द्वारा चालू किया गया था और इसे उसके द्वारा ही खत्म किया जाएगा।

अमेरिका की यह टिप्पणी पीएम मोदी के रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत में यूक्रेन-रूस संघर्ष को उठाने के बाद आई है। पीएम मोदी ने मंगलवार (9 जुलाई, 2024) को राष्ट्रपति पुतिन के साथ आधिकारिक बातचीत में कहा था कि दोनों देशों के विवाद का समाधान युद्धभूमि पर नहीं निकलने वाला है। उन्होंने कहा था कि बम, बंदूकों और गोलीबारी के बीच बातचीत नहीं हो सकती है।

मोदी ने इस बातचीत के दौरान कहा था कि भारत शांति बहाली के लिए हर सहयोग को तैयार है। उन्होंने कहा था भारत स्वयं भी शांति के पक्ष में है और विश्व समुदाय को यह बात जाननी चाहिए। पीएम मोदी ने इस दौरान यह भी कहा था कि राष्ट्रपति पुतिन का शांति के विषय में बात करना उन्हें आशान्वित कर रहा है।

राष्ट्रपति पुतिन ने भी इस दौरान पीएम मोदी के शांति प्रयासों की सराहना की थी। उन्होंने इस दौरान भारत और रूस के मजबूत रिश्तों पर भी बात की थी। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पीएम मोदी को रूस का सर्वोच्च सम्मान दिया था।

मोदी तीन दिवसीय विदेश (8-10 जुलाई) दौरे पर हैं। वह रूस में विदेश यात्रा पूरी करने के बाद मंगलवार को ऑस्ट्रिया पहुँचे थे। यहाँ ऑस्ट्रिया के विदेश मंत्री ने उनके एयरपोर्ट पर स्वागत किया था। पीएम मोदी ने ऑस्ट्रिया के चांसलर कार्ल नेहमार से भी मुलाक़ात की है। वह उनके साथ अब आधिकारिक बातचीत में शामिल होंगे।


96 वर्षीय लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न: PM मोदी बोले – राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में उनका प्रयास अद्वितीय

भाजपा के 96 वर्षीय लालकृष्ण आडवाणी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने का फैसला किया गया है। राम मन्दिर के लिए जनमानस को जागृत करने का श्रेय आडवाणी को ही जाता है। इन्होने ही पाञ्चजन्य-आर्गेनाइजर की संयुक्त सम्पादकीय मीट में कहा था कि "जब तक केंद्र और उत्तर प्रदेश में बहुमत में भाजपा नहीं आती अयोध्या में श्रीराम मंदिर शायद स्वप्न ही रहेगा। क्योकि तथ्यों को छुपाने और सच्चाई सार्वजनिक होने से रोकने वाला कोई नहीं होगा।" वास्तव में आज हुआ भी वही। जिन डाक्यूमेंट्स को अनुवाद करने में उत्तर प्रदेश सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से टालती रही, जिस कारण कोई भी कोर्ट निर्णय देने में असमर्थ होने के कारण तारीख-पर-तारीख देने के अलावा कुछ नहीं कर सकती थी। उत्तर प्रदेश में बहुमत वाली भाजपा सरकार बनने के बाद निर्णय में अवरोध कर रहे सबसे बड़े रोड़े को ठोकर मारते ही निर्णय सबके सामने है। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर इसकी घोषणा करते हुए उन्हें बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने एक्स पर लालकृष्ण आडवाणी के साथ अपनी दो तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा है कि मुझे यह बताते हुए काफी खुश हो रही है कि श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। मैंने उनसे बात की और इस सम्मान से सम्मानित किए जाने के लिए उन्हें बधाई दी। वह हमारे समय के सबसे बड़े और सम्मानित राजनेताओं में से एक हैं। देश के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उनका जीवन जमीनी स्तर पर काम करने से शुरू होकर देश के उप-प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने तक का है। उन्होंने गृह मंत्री और सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनके संसदीय कार्य हमेशा अनुकरणीय रहे हैं और समृद्ध अंतर्दृष्टि से भरे रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने अगले ट्वीट संदेश में लिखा है कि उन्होंने दशकों तक देश के लोगों की सेवा की। पारदर्शिता, अखंडता और राजनीतिक नैतिकता के मामले में आडवाणी जी ने कई अनुकरणीय मानक स्थापित किए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान को आगे बढ़ाने की दिशा में अद्वितीय प्रयास किए हैं। उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना मेरे लिए बहुत भावुक क्षण है। मैं इसे हमेशा अपना सौभाग्य मानता हूं कि मुझे उनके साथ काम करने और उनसे सीखने के कई मौके मिले हैं।

पद्म विभूषण से सम्मानित लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर, 1927 को पाकिस्तान के कराची में हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार पाकिस्तान छोड़कर भारत आ गया था।

आडवाणी जी बीजेपी के अकेले राजनेता हैं जो तीन पार्टी पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं। आडवाणी एनडीए की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उप प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। वे चार बार राज्यसभा और पांच बार लोकसभा सांसद रहे हैं।

अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण अभियान में इनकी अहम भूमिका रही है। 1990 में उन्होंने सोमनाथ से अयोध्या तक रामरथ यात्रा निकाली। वैसे यात्रा के बीच में ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।