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मौनी अमावस्या पर 10 करोड़ श्रद्धालु प्रयागराज में जुटे, स्नान के लिए संगम घाट जाने की होड़ से मची अफरातफरी: बोले CM योगी- नियंत्रण में हैं हालात, अफवाहों पर न दें ध्यान


प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में बुधवार (29 जनवरी 2025) को अफरा-तफरी में कुछ लोगों के मौत की बात कही जा रही है। हालाँकि, आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर दुख जताया है और घायल हुए लोगों को जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। उन्होंने बताया इनमें से कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज कराया जा रहा है।

योगी ने कहा, “प्रयागराज महाकुंभ में श्रद्धालुजनों की भारी भीड़ है। लगभग 8-10 करोड़ श्रद्धालु इस समय प्रयागराज में मौजूद हैं। कल भी 5.5 करोड़ श्रद्धालुजनों ने महाकुंभ का स्नान किया था। ये भारी दबाव श्रद्धालुजनों और उनके संगम नोज पर जाने के कारण बना हुआ है, लेकिन पूरा प्रशासन वहाँ मौके पर पूरी मुस्तैदी के साथ मौजूद है।”

घटना को लेकर उन्होंने बताया, “रात्रि को 1 बजे से 2 बजे के बीच में अखाड़ा मार्ग पर अमृत स्नान के लिए बैरिकेड लगाए गए थे। वहाँ बैरिकेड्स को फाँदकर आने में कुछ श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्हें तत्काल हॉस्पिटल में पहुँचाकर उनके उपचार आदि की व्यवस्था की गई है। प्रशासन मौनी अमावस्या के मुहूर्त प्रारंभ होने के बाद से ही श्रद्धालुओं को कुशल स्नान कराने में लगा हुआ है।”

सीएम योगी ने बताया, “श्रद्धालुओं के कुशलक्षेम के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी सुबह से चार बार फोन किया है। माननीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी, माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा श्री जेपी नड्डा जी और प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी ने भी फोन करके सबकी कुशलक्षेम और सबके सकुशल स्नान कराने के बारे में जानकारी ली। यहाँ प्रमुख सचिव और डीजीपी के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक हो रही है।”

हालात को सामान्य बताते हुए CM ने कहा, “प्रयागराज में हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन भीड़ का दबाव बहुत बना हुआ है। अखाड़ा परिषद से जुड़े हुए पदाधिकारियों के साथ मैंने स्वयं भी बातचीत की है। आचार्य महामंडलेश्वरों और संतों से भी मेरी बातचीत हुई है। संतों ने बहुत विनम्रता के साथ कहा है कि पहले श्रद्धालु जन स्नान करेंगे और उनका दबाव जब कम होगा और वे वहाँ से निकल जाएँगे, तब हम लोग संगम की तरफ स्नान करने के लिए जाएँगे।”

उन्होंने देश के कोने-कोने से आए लोगों और संतों से किसी अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील है। सीएम योगी ने कहा, “संयम से काम लें। यह आयोजन लोगों का है। प्रशासन उनकी सेवा के लिए पूरी तत्परता के साथ लगा हुआ है। प्रदेश और केंद्र सरकार वहाँ पर हर तरह का सहयोग करने के लिए वहाँ पर तत्पर है। जो व्यक्ति अफवाह फैलाने की कोशिश करेगा, उससे नुकसान हो सकता है।”

अवलोकन करें:-

उत्तर प्रदेश : बीती रात महाकुंभ प्रयाग में हुई दुर्घटना पर मोदी ने जताया दुःख ; प्रयागराज से चल र
उत्तर प्रदेश : बीती रात महाकुंभ प्रयाग में हुई दुर्घटना पर मोदी ने जताया दुःख ; प्रयागराज से चल र
 

उन्होंने कहा, “लगभग 15 से 20 किलोमीटर के दायरे में अस्थायी घाट बनाए गए हैं। जो जहाँ पर है, वो कहीं भी स्नान कर सकता है। आवश्यक नहीं है कि संगम नोज की तरफ ही आएँ। सब गंगाजी के ही घाट हैं। वहाँ भी उन्हें वही पुण्य प्राप्त होगा। स्नान का महत्व है। सभी लोगों को प्रशासन के निर्देश का पालन करना चाहिए। इससे सभी लोग सकुशल स्नान कर सकेंगे। मेरी सबसे अपील है कि शासन और प्रशासन को इसमें मदद करें।”

मणिपुर : मुख्यमंत्री बिरेन सिंह ने कांग्रेस को दिखाया आईना, कहा- आपके पाप ही आज के लिए जिम्मेदार: 1992-97 के बीच हुई सैकड़ों मौत को लेकर माँगा जवाब


मणिपुर में हिंसा की हालत को लेकर पीएम मोदी को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रही कांग्रेस को मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने आईना दिखाया है। बिरेन सिंह ने जयराम रमेश को जवाब देते हुए बताया है कि कैसे कांग्रेस ने राज्य में लगातार म्यांमार के घुसपैठियों को बसने दिया और साथ म्यांमार में अड्डा बनाकर भारत में आतंक फैलाने वाले आतंकी समूहों से भी समझौते किए। उन्होंने कांग्रेस से कहा है कि वह राज्य की स्थिति पर राजनीति करना छोड़ कर मुद्दे सुलझाने में सहायता करे।

मणिपुर की स्थिति कांग्रेस सरकार के दौरान क्या थी, यह बताते हुए बिरेन सिंह ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “आप और बाकी सारे लोग जानते हैं कि में मणिपुर के आज उथल पुथल में होने का कारण कांग्रेस के अतीत के पाप हैं। जैसे कि मणिपुर में बर्मी (म्यांमार) शरणार्थियों को लगातार बसाना और म्यांमार के लड़कों के साथ SOO समझौते पर हस्ताक्षर करना, इसकी अगुवाई पी चिदंबरम ने भारत के गृह मंत्री रहते हुए अपने कार्यकाल में की थी।”

बिरेन सिंह ने आगे लिखा, “आज मैंने जो माफी माँगी है, वह उन लोगों के लिए है जो जिन्हें इस हिंसा जो विस्थापित हो गए हैं और बेघर हुए हैं। एक मुख्यमंत्री के रूप में मेरी यह अपील थी कि जो हुआ उसे भोऊ जाएँ और माफ़ कर दें। हालाँकि, आप इसमें भी राजनीति घसीट लाए।”

इसके बाद बिरेन सिंह ने जयराम रमेश को याद दिलाया कि कैसे कांग्रेस के राज के दौरान मणिपुर जलता रहा था। उन्होंने लिखा, “मैं आपको याद दिला दूँ कि मणिपुर में नागा-कुकी संघर्ष के चलते लगभग 1,300 लोग मारे गए और हज़ारों लोग बेघर हुए थे। यह हिंसा कई सालों तक जारी रही थी। 1992 और 1997 के बीच समय-समय पर हिंसा भड़कती रही थी। सबसे ज्यादा हिंसा 1992-93 के दौरान हुई थी। यह पूरी हिंसा 1992 में शुरू हुई थी और लगभग पाँच वर्षों 1992-1997 तक जारी रही थी।”

उन्होंने आगे लिखा, “यह दौर पूर्वोत्तर भारत में सबसे हिंसक संघर्षों में से एक था। इसके चलते मणिपुर में नागा और कुकी समुदायों के बीच संबंधों प्रभावित हुए। क्या पीवी नरसिम्हा राव, जो 1991 से 1996 तक भारत के प्रधानमंत्री थे और इस दौरान कांग्रेस के अध्यक्ष भी थे, तब माफी माँगने मणिपुर आए थे? कुकी-पाईते की लड़ाई में राज्य में 350 लोगों की मौत हुई थी। कुकी-पाईते हिंसा (1997-1998) के दौरान, आई के गुजराल भारत के प्रधानमंत्री थे। क्या उन्होंने मणिपुर का दौरा किया और लोगों से माफ़ी माँगी?"

बिरेन सिंह ने पूछा कि कांग्रेस मणिपुर मामले को हल करने में प्रयास करने के बजाय इस पर राजनीति क्यों कर रही है। बिरेन सिंह का यह जवाब जयराम रमेश के उस सवाल पर आया जिसमें उन्होंने पूछा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मणिपुर आकर माफी क्यों नहीं माँगते। जयराम रमेश ने दावा किया था पीएम मोदी जानबूझकर मणिपुर नहीं जा रहे। उन्होंने यह बात सीएम बिरेन सिंह के राज्यवासियों से माफी माँगने के बाद कही थी। बिरेन सिंह ने 31 दिसम्बर, 2024 को वर्ष 2024 में हुई हिंसा के लिए दुख जताया था और माफ़ी माफी माँगी थी।

कुकी और नागा समुदाय के बीच वर्ष 1990 के दशक से लड़ाई चल रही है। यह लड़ाई कुकी समुदाय की कुकीलैंड को पाने के लिए चालू किए गए आंदोलन के बाद शुरू हुई थी। इस कथित कुकीलैंड का बड़ा हिस्सा मणिपुर की पहाड़ियों में है, यहाँ पर नागाओं का कब्जा था। रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह लड़ाई तब चालू हुई जब जब कुकी लड़ाकों ने नागाओं पर हमला किया, उनके गाँव जलाए और नागा समुदाय के सैकड़ों लोगों को मार डाला या उन्हें बेघर कर दिया।”

तब नागाओं ने कूकी समुदाय को चेतावनी भी दी थी कि वह हिंसा बंद कर दें लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद, नागाओं ने कूकी समुदाय पर हमले करना शुरू कर दिया और अगले 3 वर्षों में, कुकी समुदाय के 230 से अधिक लोग मारे गए। कई हजार लोग नागा इलाके से बाहर भी कर दिए गए। यह संघर्ष 1997 में जाकर रुका जब कूकी और पाईते के बीच लड़ाई चालू हुई। कुकी और पैती एक ही समूह से संबंधित हैं, लेकिन दोनों अपनी भाषा के आधार पर खुद को अलग करते हैं।

1992 में जब नागाओं ने जबरदस्ती बस रहे कूकी समुदाय के लोगों को भगाया तो वह पाईते के इलाकों में बसने लगे। इनमें से एक चुराचांदपुर भी है जो पाईते का मूलनिवास रहा है। कुकी मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में बसने लगे, जो पैतियों का गृहस्थान है। यहाँ आकर बसने वाले लोगों को कूकी उग्रवादियों ने समर्थन दिया और पाईते को परेशान करना चालू कर दिया। उन्हें अपने ही इलाके छोड़ने को कहा गया। बाद में पाईते ने सुरक्षा के लिए एक उग्रवादी समूह भी बनाया।

इसके बाद यहाँ हालात लगातार खराब होते रहे। कूकी उग्रवादी समूह ने जून 1997 में सैकुल नामक पाईते के गाँव पर हमला किया और 13 पाईते को मार डाला। इसके बाद दोनों के बीच बड़े पैमाने पर हिंसा हुईं, जिसमें लगभग 15000 लोग मारे गए और बेघर हुए। दोनों समुदाय के बीच शान्ति तब आई जब अक्टूबर 1998 में एक ‘शांति समझौते’ पर हस्ताक्षर हुए। इसके तहत 2 अलग-अलग संप्रदायों कुकी और ज़ोमिस को मान्यता मिली।

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने जिस समझौते के विषय में बात की वह 2005 में कांग्रेस सरकार ने किया था। यह समझौता कूकी लड़ाकों और भारतीय सेना के बीच सस्पेंशन ऑफ़ ऑपरेशन था। इसके तहत कूकी लड़ाकों को संघर्ष रोकना था। इसके अलावा केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और 25 कूकी लड़ाका संगठनों के बीच एक और समझौता हुआ था। शांति समझौते के अनुसार लड़ाका समूहों को हथियार और गोला-बारूद का इस्तेमाल न करने के लिए कहा गया था, लेकिन इसके बाद भी कई बार झड़प और वसूली के चलते चिंता की स्थिति बनी रही।