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मुस्लिम बना लें उर्दूस्तान, तमिल बनाएँ द्रविड़स्तान: खालिस्तानी आतंकी पन्नू मणिपुर को अलग-थलग करने की रच रहा था साजिश, भारत सरकार ने SFJ पर 5 साल बैन और बढ़ाया

भारत से मणिपुर को अलग करने के लिए खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू का संगठन सिख फॉर जस्टिस मणिपुर के तमिलों, मुस्लिमों और ईसाइयों को भड़काने में जुटा था। ये जानकारी गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश के बाद सामने आई है। गृह मंत्रालय ने पन्नू के खालिस्तानी संगठन पर 5 साल के लिए बैन को बढ़ा दिया है। इससे पहले SFJ कोल आतंकी संगठन घोषित करते हुए बैन साल 2020 में लगा था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, खुफिया नोट में कहा गया है कि सिख फॉर जस्टिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के खिलाफ धमकियों सहित आतंकी कृत्यों की योजना बनाई थी। इसके अलावा इसमें ये भी कहा गया कि ये संगठन अल्पसंख्यक समुदायों को दूसरे समुदायों के खिलाफ भड़काकर सांप्रदायिक आधार पर लोगों को बाँटकर अपने भारत विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाता है।

आगे नोट में कहा गया कि आतंकी संगठन ईसाइयों को भड़काकर कहता है कि उनको अपना अलग देश बनाना चाहिए। इसी तरह मुस्लिमों को भड़काकर उर्दूस्तान बनाने को कहता है और तमिलों को उकसाकर द्रविड़स्तान बनाने को कहता है।

रिपोर्ट में ये भी जानकारी दी गई है कि कैसे सिख फॉर जस्टिस संगठन भारत में किसानों को भड़काने में शामिल था और कैसे वो दलित समुदायों को भड़काता है। SFJ दलितों को कहता था कि भारत सरकार ने उनका उत्पीड़न किया है इसलिए उन्हें अपना अलगाववादी अभियान शुरू करना चाहिए।

सिख फॉर जस्टिस का उद्देश्य भारत के अल्पसंख्यकों को भड़काने और भारत में हिंसा कराना रहता है। संगठन को पाकिस्तान से समर्थन प्राप्त है और वह आतंकवादियों, गैंगस्टरों तथा कश्मीरी अलगाववादियों के साथ संपर्क में रहता है। यह संगठन विदेशों में रह रहे सिखों को भी अपने उद्देश्यों के लिए प्रेरित करने का प्रयास करता है। इन्हीं सब बिंदुओं को देखते हुए सरकार ने इस संगठन पर एक्शन लेते हुए इस पर पाँच साल तक प्रतिबंध बनाए रखने का निर्णय लिया।

मणिपुर : मुख्यमंत्री बिरेन सिंह ने कांग्रेस को दिखाया आईना, कहा- आपके पाप ही आज के लिए जिम्मेदार: 1992-97 के बीच हुई सैकड़ों मौत को लेकर माँगा जवाब


मणिपुर में हिंसा की हालत को लेकर पीएम मोदी को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रही कांग्रेस को मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने आईना दिखाया है। बिरेन सिंह ने जयराम रमेश को जवाब देते हुए बताया है कि कैसे कांग्रेस ने राज्य में लगातार म्यांमार के घुसपैठियों को बसने दिया और साथ म्यांमार में अड्डा बनाकर भारत में आतंक फैलाने वाले आतंकी समूहों से भी समझौते किए। उन्होंने कांग्रेस से कहा है कि वह राज्य की स्थिति पर राजनीति करना छोड़ कर मुद्दे सुलझाने में सहायता करे।

मणिपुर की स्थिति कांग्रेस सरकार के दौरान क्या थी, यह बताते हुए बिरेन सिंह ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “आप और बाकी सारे लोग जानते हैं कि में मणिपुर के आज उथल पुथल में होने का कारण कांग्रेस के अतीत के पाप हैं। जैसे कि मणिपुर में बर्मी (म्यांमार) शरणार्थियों को लगातार बसाना और म्यांमार के लड़कों के साथ SOO समझौते पर हस्ताक्षर करना, इसकी अगुवाई पी चिदंबरम ने भारत के गृह मंत्री रहते हुए अपने कार्यकाल में की थी।”

बिरेन सिंह ने आगे लिखा, “आज मैंने जो माफी माँगी है, वह उन लोगों के लिए है जो जिन्हें इस हिंसा जो विस्थापित हो गए हैं और बेघर हुए हैं। एक मुख्यमंत्री के रूप में मेरी यह अपील थी कि जो हुआ उसे भोऊ जाएँ और माफ़ कर दें। हालाँकि, आप इसमें भी राजनीति घसीट लाए।”

इसके बाद बिरेन सिंह ने जयराम रमेश को याद दिलाया कि कैसे कांग्रेस के राज के दौरान मणिपुर जलता रहा था। उन्होंने लिखा, “मैं आपको याद दिला दूँ कि मणिपुर में नागा-कुकी संघर्ष के चलते लगभग 1,300 लोग मारे गए और हज़ारों लोग बेघर हुए थे। यह हिंसा कई सालों तक जारी रही थी। 1992 और 1997 के बीच समय-समय पर हिंसा भड़कती रही थी। सबसे ज्यादा हिंसा 1992-93 के दौरान हुई थी। यह पूरी हिंसा 1992 में शुरू हुई थी और लगभग पाँच वर्षों 1992-1997 तक जारी रही थी।”

उन्होंने आगे लिखा, “यह दौर पूर्वोत्तर भारत में सबसे हिंसक संघर्षों में से एक था। इसके चलते मणिपुर में नागा और कुकी समुदायों के बीच संबंधों प्रभावित हुए। क्या पीवी नरसिम्हा राव, जो 1991 से 1996 तक भारत के प्रधानमंत्री थे और इस दौरान कांग्रेस के अध्यक्ष भी थे, तब माफी माँगने मणिपुर आए थे? कुकी-पाईते की लड़ाई में राज्य में 350 लोगों की मौत हुई थी। कुकी-पाईते हिंसा (1997-1998) के दौरान, आई के गुजराल भारत के प्रधानमंत्री थे। क्या उन्होंने मणिपुर का दौरा किया और लोगों से माफ़ी माँगी?"

बिरेन सिंह ने पूछा कि कांग्रेस मणिपुर मामले को हल करने में प्रयास करने के बजाय इस पर राजनीति क्यों कर रही है। बिरेन सिंह का यह जवाब जयराम रमेश के उस सवाल पर आया जिसमें उन्होंने पूछा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मणिपुर आकर माफी क्यों नहीं माँगते। जयराम रमेश ने दावा किया था पीएम मोदी जानबूझकर मणिपुर नहीं जा रहे। उन्होंने यह बात सीएम बिरेन सिंह के राज्यवासियों से माफी माँगने के बाद कही थी। बिरेन सिंह ने 31 दिसम्बर, 2024 को वर्ष 2024 में हुई हिंसा के लिए दुख जताया था और माफ़ी माफी माँगी थी।

कुकी और नागा समुदाय के बीच वर्ष 1990 के दशक से लड़ाई चल रही है। यह लड़ाई कुकी समुदाय की कुकीलैंड को पाने के लिए चालू किए गए आंदोलन के बाद शुरू हुई थी। इस कथित कुकीलैंड का बड़ा हिस्सा मणिपुर की पहाड़ियों में है, यहाँ पर नागाओं का कब्जा था। रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह लड़ाई तब चालू हुई जब जब कुकी लड़ाकों ने नागाओं पर हमला किया, उनके गाँव जलाए और नागा समुदाय के सैकड़ों लोगों को मार डाला या उन्हें बेघर कर दिया।”

तब नागाओं ने कूकी समुदाय को चेतावनी भी दी थी कि वह हिंसा बंद कर दें लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद, नागाओं ने कूकी समुदाय पर हमले करना शुरू कर दिया और अगले 3 वर्षों में, कुकी समुदाय के 230 से अधिक लोग मारे गए। कई हजार लोग नागा इलाके से बाहर भी कर दिए गए। यह संघर्ष 1997 में जाकर रुका जब कूकी और पाईते के बीच लड़ाई चालू हुई। कुकी और पैती एक ही समूह से संबंधित हैं, लेकिन दोनों अपनी भाषा के आधार पर खुद को अलग करते हैं।

1992 में जब नागाओं ने जबरदस्ती बस रहे कूकी समुदाय के लोगों को भगाया तो वह पाईते के इलाकों में बसने लगे। इनमें से एक चुराचांदपुर भी है जो पाईते का मूलनिवास रहा है। कुकी मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में बसने लगे, जो पैतियों का गृहस्थान है। यहाँ आकर बसने वाले लोगों को कूकी उग्रवादियों ने समर्थन दिया और पाईते को परेशान करना चालू कर दिया। उन्हें अपने ही इलाके छोड़ने को कहा गया। बाद में पाईते ने सुरक्षा के लिए एक उग्रवादी समूह भी बनाया।

इसके बाद यहाँ हालात लगातार खराब होते रहे। कूकी उग्रवादी समूह ने जून 1997 में सैकुल नामक पाईते के गाँव पर हमला किया और 13 पाईते को मार डाला। इसके बाद दोनों के बीच बड़े पैमाने पर हिंसा हुईं, जिसमें लगभग 15000 लोग मारे गए और बेघर हुए। दोनों समुदाय के बीच शान्ति तब आई जब अक्टूबर 1998 में एक ‘शांति समझौते’ पर हस्ताक्षर हुए। इसके तहत 2 अलग-अलग संप्रदायों कुकी और ज़ोमिस को मान्यता मिली।

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने जिस समझौते के विषय में बात की वह 2005 में कांग्रेस सरकार ने किया था। यह समझौता कूकी लड़ाकों और भारतीय सेना के बीच सस्पेंशन ऑफ़ ऑपरेशन था। इसके तहत कूकी लड़ाकों को संघर्ष रोकना था। इसके अलावा केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और 25 कूकी लड़ाका संगठनों के बीच एक और समझौता हुआ था। शांति समझौते के अनुसार लड़ाका समूहों को हथियार और गोला-बारूद का इस्तेमाल न करने के लिए कहा गया था, लेकिन इसके बाद भी कई बार झड़प और वसूली के चलते चिंता की स्थिति बनी रही।

राहुल गाँधी और कांग्रेस द्वारा हिंदुओं को भड़काकर मुस्लिम युवकों को अग्निवीर बनाने की गहरी साजिश! मस्जिदों से एलान- मुस्लिम युवक ज्यादा से ज्यादा अग्निवीर बनें


2024 लोक सभा के दौरान यह चर्चा थी कि मोदी सरकार को हटाने भारत विरोधी अरबों खर्च कर रहे हैं। लेकिन बीजेपी का Legal Cell बिलकुल खामोश है, क्यों? चुनाव में हुए दुष्प्रचारों के सबूत होने के बावजूद क्यों नहीं मुक़दमे दर्ज किए जाते? जिस दिन 
बीजेपी का Legal Cell हरकत में आ गया, कांग्रेस हाशिए से भी नीचे आ जाएगी। कल(जुलाई 8) News18 पर एंकर लुबिका लियाकत के शो 'गूंज' में मणिपुर की असलियत सामने आयी। विपक्ष संसद में तो मणिपुर पर चर्चा चाहता है, लेकिन मणिपुर विधान सभा में आज तक सवाल नहीं उठाना, एक और गहरे  षड़यंत्र को उजागर करता है। इतना ही नहीं, 
राहुल की प्रेस वार्ता में जब मणिपुर पर समाधान पर प्रश्न करने पर कह दिया don't divert the issue. दूसरे, अगर अग्निवीर योजना गलत है फिर मस्जिदों से मुसलमानों से अग्निवीर बनने के लिए क्यों एलान किया जा रहा है? कांग्रेस और अन्य विपक्षियों को इसका जवाब देना होगा।  

अग्निवीर पर कांग्रेस पार्टी का प्रोपेगेंडा जारी है। पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस विषय पर एक के बाद एक झूठ बोले, हालांकि सच्चाई सामने आने के बाद उनका झूठ बेनकाब हो गया। इसके बाद अब कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता रिटायर्ड विंग कमांडर अनुमा आचार्य ने कहा कि अग्निवीर जवान के पास हथियार होता है, तो वह या तो आत्महत्या करेगा या किसी और को मारेगा। यानी कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता ने देश के वीर सैनिकों को उकसा कर उसकी तुलना आतंकवादी से कर दिया। कांग्रेस पार्टी जोर-शोर से अग्निवीर को लेकर देश में भ्रम फैलाने में जुटी है। ऐसा प्रतीत होता है कि चीन और कांग्रेस पार्टी के बीच हुए गुप्त समझौते में एक प्रमुख बिंदू शायद भारतीय सेना को कमजोर करने की है। इसी एजेंडे के तहत कांग्रेस पार्टी सेना के शौर्य पर सवाल उठाती रही है और अब अग्निवीर मुद्दा उठाकर विवाद पैदा करना चाहती है। अग्निवीर मुद्दा उछालने के पीछे कांग्रेस की एक छुपी मंशा भी नजर आती है। कांग्रेस अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के लिए देश में भ्रम का माहौल पैदा कर हिंदुओं को अग्निवीर योजना से दूर रखना चाहती है और चाहती है कि मुस्लिम युवा ज्यादा से ज्याद इसमें हिस्सा लें। यह अनायास नहीं है कि राहुल गांधी अग्निवीर योजना को बंद करने की बात करते हैं वहीं जुमे की नमाज के बाद मस्जिदों से एलान किया जा रहा है कि अग्निवीर योजना मुसलमानों के हित में है,ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम युवा अग्निवीर बनें। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर राहुल गांधी को अग्निवीर योजना इतनी ही बुरी लगती है तो वे मुस्लिम युवाओं से अपील क्यों नहीं करते कि वे अग्निवीर योजना से दूर रहें।

वीर सैनिक की तुलना आतंकवादी से
राहुल गांधी के बाद कांग्रेस की एक प्रवक्ता रिटायर्ड विंग कमांडर अनुमा आचार्य ने एक टीवी चैनल डिबेट के दौरान कहा कि अग्निवीर जवान के पास हथियार होता है, तो वह या तो आत्महत्या करेगा या किसी और को मारेगा। यानी देश के वीर सैनिक को उकसा कर उसकी तुलना आतंकवादी से की जा रही है। सेना में काम करने के बाद भी कांग्रेस से जुड़ने के बाद अनुमा आचार्य अग्निवीर को किस तरह देश में भ्रम फैला रही हैं यह देख लीजिए। वह कह रही हैं- ”20-22 साल का युवा, जिसकी इतनी समझ नहीं होती है, अवसाद में जाएगा। उसके पास लाइव आर्म्स होते हैं। या तो आत्महत्या कर लेगा या मारे गुस्से से, ईश्वर ना करें… हमने अपनी 25 साल की सर्विस में एक भी आत्महत्या कभी देखी हो।” एक साजिश के तहत हिंदुओं को भड़काने के लिए वह ऐसा बयान दे रही हैं।

अग्निवीर यूज एंड थ्रो मजदूरः राहुल गांधी
राहुल गांधी ने एक अग्निवीर की शहादत का जिक्र करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी उसे शहीद नहीं कहते। उसके परिजनों को पेंशन नहीं मिलेगी। आम जवान को पेंशन मिलेगी, सरकार उसकी मदद करेगी लेकिन अग्निवीर को जवान नहीं कहा जा सकता। अग्निवीर यूज एंड थ्रो मजदूर है। राहुल गांधी ने कहा कि आप जवान और जवान के बीच में फूट डालते हो और फिर अपने आपको देशभक्त कहते हो। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरहद पर अगर कोई अग्निवीर मारा जाता है, उसे एक करोड़ रुपये मिलता है। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि सच्चाई क्या है, ये अग्निवीर जानता है। अमित शाह ने इस पर कहा कि इसका सत्यापन किया जाना चाहिए और अगर वह साबित नहीं करते हैं तो सदन और देश से इसकी माफी मांगनी चाहिए।

मस्जिदों से एलान, मुस्लिम युवक ज्यादा से ज्यादा अग्निवीर बनें
मुसलमान के लिए मस्जिदों से जुम्मे की नमाज के बाद ऐलान किया जा रहा है कि मुसलमान लोग ज्यादा से ज्यादा अग्निवीर बनें और वहीं कांग्रेस हिंदुओं को भड़का रही है कि तुम लोग अग्निवीर मत बनो। यूपी के कानपुर में मुस्लिम समाज ने केंद्र सरकार की अग्निवीर योजना का समर्थन किया है। कानपुर में 300 से ज्यादा मस्जिदों से जुमे की नमाज के बाद तकरीर में एलान किया गया कि अग्निवीर योजना देश के मुसलमानों के हित में है। इस योजना में उन्हें देशभक्ति दिखाने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही वीर अब्दुल हमीद की तरह देश की सेवा करने का मौका मिल रहा है। मुस्लिम युवाओं से कहा गया है कि अग्निवीर बनकर देश के लिए कुर्बानी देने से पीछे नहीं हटें। शहर काजी मुफ्ती साकिब अदीब ने कहा कि मुस्लिम नौजवानों को बढ़चढ़ कर इस योजना का फायदा उठाना चाहिए। कानपुर की नारामऊ, रानीगंज, ओमपुरवा समेत अन्य मस्जिदों में जुमें की नमाज के बाद मस्जिदों से दी गई तकरीरों में अग्निवीर योजना की तारीफ की गई।

अग्निवीर पर राहुल गांधी ने फिर फैलाया झूठ
राहुल गांधी ने 1 जुलाई को संसद में बोलने के बाद 3 जुलाई को ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट कर अग्निवीर पर फिर से झूठ फैलाने का काम किया। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा- ”सत्य की रक्षा हर धर्म का आधार है! लेकिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शहीद अग्निवीर के परिवार को सहायता मिलने के बारे में संसद में झूठ बोला। उनके झूठ पर शहीद अग्निवीर अजय सिंह के पिता जी ने खुद सच्चाई बताई है। रक्षा मंत्री को संसद, देश, सेना और शहीद अग्निवीर अजय सिंह जी के परिवार से माफी मांगनी चाहिए।” ट्वीट के साथ जो वीडियो पोस्ट किया गया है कि उससे ऐसा लगता है कि कांग्रेस ने राहुल गांधी को फिर रिलांच किया है।

किसके फायदे के लिए सेना के बारे में इतना झूठ फैलाया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर सेना में भर्ती को लेकर सरासर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए 2 जुलाई को संसद में सवाल किया कि आखिर किसके फायदे के लिए सेना के बारे में इतना झूठ फैलाया जा रहा है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सेना में भर्ती को लेकर कांग्रेस की ओर से सरासर झूठ फैलाया जा रहा है ताकि नौजवान सेना में न जाएं। उन्होंने कहा कि युवाओं को सेना में जाने से रोकने के लिए झूठ फैलाया जा रहा है। मैं जानना चाहता हूं कि आखिर किसके लिए कांग्रेस हमारी सेनाओं को कमजोर करना चाहती है। किसके फायदे के लिए सेना के बारे में इतना झूठ फैला रही है।

सेना ने राहुल गांधी के झूठ का किया पर्दाफाश
अग्निवीर पर राहुल गांधी के झूठ का अब सेना ने पर्दाफाश किया है। सेना ने ट्विटर पर एक पोस्ट में लिखा कि “कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया है कि ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाने वाले अग्निवीर अजय कुमार के परिजनों को मुआवजा नहीं दिया गया है। ऐसे दावे बिल्कुल निराधार हैं। भारतीय सेना अग्निवीर अजय कुमार के सर्वोच्च बलिदान को सलाम करती है। उनका पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अग्निवीर अजय के परिवार को कुल देय राशि में से 98.39 लाख रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है।”

अग्निवीर अजय को दी गई राशि के सबूत
अग्निवीर अजय कुमार को फंड ट्रांसफर के दस्तावेजी साक्ष्य। 10 जून 24 को बीमा कंपनी ने 48 लाख रुपये का भुगतान किया। इसी तरह डीएसपी बीमा यानी गैर-अंशदायी बीमा के 50 लाख रुपये 13 फरवरी 24 को दिए गए। ये इस बात का सबूत है कि सेना सच बोल रही है। राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के 10 साल से सत्ता से बाहर होने की खीझ को मिटाने के लिए झूठ बोलकर राजनीतिक रोटी सेंकना चाहते हैं। लेकिन अब उनके इस झूठ का ढोल फट गया है।

रक्षा मंत्री ने संसद में राहुल के झूठ की पोल खोली
लोकसभा में राहुल गांधी के अग्निवीर योजना पर दिए बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर गलत बयान देकर लोकसभा को गुमराह करने का आरोप लगाया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “राहुल गांधी को गलत बयान देकर सदन को गुमराह करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, “युद्ध के दौरान या देश की सुरक्षा के दौरान अगर हमारा कोई अग्निवीर का जवान शहीद होता है, तो उसे केंद्र सरकार द्वारा एक करोड़ रुपये की धनराशि उसके परिवार की सहायता के रूप में दी जाती है।” राहुल गांधी अग्निवीरों पर गलत बयान न दें, वे सदन को गुमराह करने का काम कर रहे हैं।

पहले शहीद अग्निवीर पर भी राहुल ने फैलाया था झूठ
राहुल गांधी ने अक्टूबर 2023 में पहले शहीद अग्निवीर लक्ष्मण गावते को लेकर झूठ फैलाने का काम किया था और देश युवाओं को गुमराह कर सेना के खिलाफ भड़काने का काम किया था। सियाचिन में तैनात अग्निवीर जवान अक्षय लक्ष्मण गावते की ड्यूटी के दौरान निधन हो गया था। लक्ष्मण गावते पहले अग्निवीर थे, जिनकी ड्यूटी के दौरान मौत हुई थी। वहीं एक आरटीआई से खुलासा हुआ था कि अक्षय लक्ष्मण गावते के परिजनों को सरकार ने एक करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक मदद प्रदान की है। लक्ष्मण भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर (14 कोर) का हिस्सा थे, जो लद्दाख में तैनात है। अग्निपथ योजना को लागू करने के दौरान सरकार ने कहा था कि ड्यूटी के दौरान अगर किसी अग्निवीर का निधन हो जाता है, तो उन्हें बीमा की रकम मिलेगी।

राहुल गांधी ने कहा था- देश में ‘दो तरह के सैनिक’
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी कहा था कि पीएम मोदी ने देश में ‘दो तरह के सैनिक’ पैदा कर दिए हैं। उन्होंने कहा, “…एक गरीब, दलित, अल्पसंख्यक का बेटा है और दूसरा अमीर परिवार से है। उन्होंने गरीब के बेटे को नया नाम दिया है अग्निवीर, जिसे पेंशन, कैंटीन जैसी कोई सुविधा नहीं मिलेगी… लेकिन, अगर आप वरिष्ठ अधिकारी हैं या इन चारों में से कोई एक हैं, तो आपको ये सभी चीजें मिलेंगी। सेना में उन्होंने ‘दो-भारत’, दो तरह के ‘शहीद’ बनाए हैं।”

भारतीय सेना को ताकतवर होते नहीं देख सकते
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के लोग कभी भी भारतीय सेनाओं को ताकतवर होते नहीं देख सकते। उन्होंने कहा कौन नहीं जानता कि पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय देश की सेना कितनी कमजोर होती थी। हमारी सेनाओं में कांग्रेस ने लाखों करोड़ों रुपये के घोटाले किए, जिसने देश की सेना को कमजोर किया। जब से देश आजाद हुआ तब से कांग्रेस ने जल, थल और वायु सेनाओं में भ्रष्टाचार की परम्परा बनाई। जीप घोटाले से लेकर पनडुब्बी और बोफोर्स घोटाले का हवाला देते हुए कहा कि इन घोटालों ने देश की ताकत बढ़ने से रोकी।

मतई लोगों की भारत भक्ति और सेकुलर राजनीति

 
डॉ राकेश कुमार आर्य, प्रमुख संपादक, उगता भारत, गाज़ियाबाद

आज मणिपुर जल रहा है। सचमुच यह चिंता का विषय है। इसकी वर्तमान स्थिति पर विचार करने से पहले इसके इतिहास पर थोड़ा विचार किया जाए। मणिपुर आर्यावर्त कालीन भारत का एक अभिन्न अंग रहा है। कभी पूरे असम प्रांत को (जिसमें मणिपुर भी सम्मिलित था) प्रागज्योतिषपुर कहा जाता था। यहां के राजा बाण की पुत्री उषा कृष्ण जी के बेटे अनिरुद्ध के लिए ब्याही गई थी। राजा बाण के साथ जहां पर कृष्ण की लड़ाई हुई थी अर्थात जहां पर युद्ध में रक्त बहाया गया था, वहीं पर शोणितपुर नगर बसाया गया शोणित का अर्थ रक्त ही होता है। इसी स्थान पर तेजपुर बसाया गया जो आज भी मिलता है। तेज का अभिप्राय भी स्थानीय भाषा में रक्त ही है। यहां पर महाभारत कालीन अवशेष आज भी हैं ।अनिरुद्ध की पत्नी उषा के नाम पर ही द्वारिका के पास उषा मंडल बसाया गया था। जिसे आजकल ओखामंडल कहते हैं। यह सारा क्षेत्र अब समुद्र मय हो गया है। 

नीलांचल पर कामाख्या का मंदिर है। यहां पर नरकासुर नाम के राक्षस का श्री कृष्ण जी ने अंत किया था। 16000 कन्याओं को इस राक्षस ने हरण करके अपने यहां रखा हुआ था। उन सब की मुक्ति श्री कृष्ण जी ने कराई थी।

उसी समय अर्जुन ने पाशुपतास्त्र पाने की तपस्या भी आज के मणिपुर में ही की थी। उन्होंने इस अस्त्र को शिवजी से प्राप्त किया था और यहां की राजकुमारी चित्रांगदा से विवाह किया था। जिससे अर्जुन को एक पुत्र भी प्राप्त हुआ था । उसे मणिपुर में ही छोड़ दिया गया था और जन्मेजय के काल में संपूर्ण पूर्वोत्तर का ही नहीं बल्कि आज के बर्मा और चीन तक का क्षेत्र इसके अधीन छोड़ दिया गया था। मणिपुरी नृत्य यदि आपने देखा हो तो उसे हमारी बेटियां आज भी कृष्ण जी की गोपिकाओं वाली नृत्य शैली में ही प्रस्तुत करती हैं। इन सब बातों से पता चलता है कि मणिपुर के लोगों ने अपनी प्राचीन ऐतिहासिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने में सफलता प्राप्त की है। भारत और भारतीयता के प्रति अपनी आत्मीयता को प्रकट करते हुए पहले मुसलमानों से और फिर अंग्रेजों से यहां के लोगों ने डटकर मुकाबला किया था। 

आज यहां पर मतई वर्ग को हिंसा का जिम्मेदार माना जा रहा है। ये वही लोग हैं जो इस देश की मूल संस्कृति से जुड़े रहे हैं और अपने आपको भारतीय कहने पर गर्व की अनुभूति करते हैं। इनके सामने यहां पर कूकी लोगों को म्यांमार से एक षड्यंत्र के अंतर्गत लाकर बसाया गया। यह बात विचारणीय है कि जो कुछ कूकी वर्ग की महिलाओं के साथ हुआ है, क्या वैसा कभी पहले मतई वर्ग की महिलाओं के साथ नहीं हुआ ? जब ये घटनाएं अबसे पूर्व में हो रही थीं तब यह सेकुलरिज्म की नपुंसक राजनीति क्या कर रही थी? आज वोटों की राजनीति करने निकला सेकुलर राजनीतिक दलों का टोल क्या इस बात का कोई सटीक उत्तर दे सकता है?

अबसे पहले ऐसी अनेक घटनाएं हुई हैं जब कूकी संप्रदाय ने मतई लोगों के साथ ज्यादती करते हुए उनके धर्म स्थलों को क्षतिग्रस्त किया है , उनकी महिलाओं के साथ अपमानजनक व्यवहार किया है, उनकी संपत्तियों को छीना है और उन पर अनेक प्रकार के अमानवीय अत्याचार किए हैं। 

याद रखें यदि यह सेकुलर हिजड़ो का टोल कभी फूलन देवी को सही समय पर न्याय दे देता तो वह हथियार लेकर उठ खड़ी नहीं होती। जब उसने अन्याय का प्रतिशोध करने के लिए अपने आप हथियार उठा लिए तो वह "बदमाश" हो गई और जब उसे बदमाश बदमाशी करने के लिए प्रेरित या उत्तेजित कर रहे थे, तब किसी ने नहीं देखा कि बदमाशी कहां हो रही है? हमारे देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य ही यह है कि यहां सही समय पर सही व्यक्ति के साथ कोई खड़ा नहीं होता और जब सही व्यक्ति गलत रास्ते पर आ जाता है तो फिर सबकी नैतिकता जाग जाती है।

आज कोई यह नहीं देख रहा कि जो घटना मई में घटित हो गई थी उसकी वीडियो बनाकर इतने दिन पश्चात उसे किन लोगों ने घुमाया ? और उस वीडियो को इस प्रकार घुमाने का उद्देश्य क्या था? उसके पीछे किसका मस्तिष्क काम कर रहा था !  आज हमारा परंपरागत शत्रु चीन, इसके साथ ही साथ भारत की सामाजिक सद्भाव की परंपरागत नीति का शत्रु चर्च और दीर्घकाल तक भारत पर शत्रु भाव से शासन करने वाला ब्रिटेन जिस प्रकार पूर्वोत्तर में पीछे से काम कर रहे हैं उन पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। सेकुलर राजनीति करने वाले ड्रामेबाज  राजनीतिज्ञों के पास तो इस बात के लिए समय नहीं है पर केंद्र की मोदी सरकार इस ओर अवश्य ध्यान दे सकती है। 

न्याय होना चाहिए पर न्याय करते समय उन लोगों को भी दंडित किया जाना चाहिए जिन्होंने अबसे पूर्व में मतई लोगों के साथ अत्याचार किए हैं। दंड उन लोगों को भी मिलना चाहिए जो वहां से भारत और भारतीयता से प्रेम करने वाले लोगों को खदेड़ने की योजना बनाते हैं। इससे भी आगे हम यह कहना चाहेंगे कि उन लोगों को ही यहां से खदेड़ा जाए जो भारतीयता से प्रेम करने वाले लोगों को खदेड़ने के मंसूबे बनाते हैं।

पंथनिरपेक्ष राजनीति यदि वास्तव में अत्याचारी को दंड देने की इच्छुक है और भारत के सेकुलर राजनीतिज्ञ  नहीं चाहते कि देश में वोटों की राजनीति हो तो न्याय को न्याय के दृष्टिकोण से ही आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए। कानून को अपना काम करने देना चाहिए और किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप न्यायिक प्रक्रिया में नहीं होना चाहिए। जब राष्ट्रीय एकता और अखंडता की बात हो तो पापी लोगों के साथ कड़ाई से पेश आना समय की आवश्यकता होती है। जो देश को तोड़ने की गतिविधियों में लगे हों, या जनसांख्यिकीय आंकड़ों को गड़बड़ा कर अपने अपने संप्रदाय के लोगों की संख्या बढ़ाकर देश की मुख्यधारा में विश्वास रखने वाले लोगों का उत्पीड़न करते हों, न्याय करते समय दंड उनको भी मिलना चाहिए। 

आज सारे देश की नजरें प्रधानमंत्री मोदी की ओर लगी है। सारे पूर्वोत्तर का ईसाईकरण करने वाली मदर टेरेसा को भारत रत्न  दिलाने वाली सोनिया गांधी आज उस आप पार्टी के साथ जा खड़ी हुई हैं जिससे उनका ३६ का आंकड़ा था। इसके पीछे राजनीति केवल एक है कि कूकी लोगों को फिर प्रोत्साहित किया जाए और वहां के मतई लोगों को न्याय नहीं मिलना चाहिए। देखना यह है कि प्रधानमंत्री मोदी अब मतई लोगों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं ? प्रधानमंत्री के बोलने को लेकर देश की संसद ही नहीं पूरा देश उनकी ओर देख रहा है।

देश के जागरूक और देशभक्त लोगों को इस समय धैर्य से काम लेने की आवश्यकता है। इस बात को समझने की आवश्यकता है कि धर्मांतरण से मर्मांतरण और मर्मांतरण  से राष्ट्रांतरण होता है। जिन लोगों के धर्म बदल गए, उनके मर्म बदल गए और वही देश में आग लगाने की बात करते हैं। इस सच को राजनीति न्याय करते समय यदि स्वीकार नहीं करेगी तो फिर अन्याय होगा। जिधर क्षेत्र खाली पड़ा होता है उधर हवा अपने आप भागती है। यह प्रकृति का नियम है। पर जब उस खाली क्षेत्र की ओर भागती है तो अपने साथ कुछ वायरस भी लेकर आती है। मणिपुर में जिन लोगों को बाहर से लाकर बसाया गया था उन्हें इसी दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है।

रोहिंग्या मुसलमान भी इसी श्रेणी में रखे जा सकते हैं।

  ( सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं। )

राजस्थान : अगर लाल डायरी में कांग्रेसियों के काले चिट्ठे नहीं होते तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जलवाते ही क्यों?


जब चोर ही 'चिल्लाये पकड़ो-पकड़ो, चोर-चोर' का शोर मचाने लगे, तब असली चोर को पकड़ना बहुत कठिन हो जाता है, असली चोर भाग निकलता है और बेगुनाह अपने-आपको बेकसूर ज़िंदगी बर्बाद कर देता है। यही घिनौना खेल कुछ वर्षों से देश में चल रहा है, जिस कारण कानून एक मजाक बनकर रह गया है। जनता है कि चोर को साहूकार और साहूकार को चोर समझने की गलती कर रही है। जनता ने भी अब इस बात को समझना शुरू कर दिया है कि भाजपा विरोधी भाजपा शासित राज्यों में घटित होने वाली किसी भी अप्रिय घटना पर चीखा चिल्ली करने वाले अन्य राज्यों में होने वाली उन्ही घटनाओं पर क्यों मुंह में दही जमाकर बैठ जाते हैं? किसी को बंगाल, राजस्थान, झाड़खंड और बिहार आदि में हो रहे महिला शोषण पर किसी का मुंह नहीं खुलता। 
राजस्थान की गहलोत सरकार महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को तो रोक नहीं पा रही, इस बारे में आवाज उठाने वाले अपनी ही पूर्व मंत्री की अभिव्यक्ति की आजादी पर जरूर रोक लगा रही है। राजस्थान के पूर्व मंत्री राजेन्द्र गुढ़ा को कैबिनेट से बर्खास्त किए जाने को लेकर गहलोत सरकार की आलोचना हो ही रही है। अब न सिर्फ गुढ़ा को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया, बल्कि सदन में सदन में ‘लाल डायरी’ के बारे में बोलने की अनुमति नहीं दी गई और कांग्रेस के मंत्रियों ने उन्हें घसीट कर, लात मारकर सदन से बाहर निकाल दिया। आरोप है कि इस लाल डायरी राज्यसभा चुनाव में खरीद-फरोख्त, राजस्थान क्रिकेट एसोसिएसन चुनाव में प्रलोभन के काले चिठ्ठे हैं। राजेंद्र सिंह गुढ़ा का आरोप है कि सदन में लगभग 25-30 लोगों ने उनपर हमला किया। उन्हें मुक्के-लात मारे और कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा से बाहर खींच लिया। पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने रोते हुए मीडिया के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मैं 40 साल से कांग्रेस में काम कर रहा हूं। पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया के समय से पार्टी को देख रहा हूं। लेकिन सच्ची बात कहने पर सरकार और पार्टी मेरे साथ बदसुलूकी कर रही है। मैं सदन में आखिर यही तो जानना चाहता था कि मेरी गलती क्या है?

सत्ता के साथ ही कांग्रेस संगठन से बेदखली की पटकथा भी पहले ही लिख दी
राजस्थान के सैनिक कल्याण मंत्री रहे राजेंद्र गुढ़ा ने विधानसभा में प्रदेश में बढ़ते महिला अपराधों को लेकर आईना दिखाया था। उन्होंने तीन दिन पहले कहा था कि मणिपुर की बजाए हमें अपने गिरेबां में झांकना चाहिए। हम राजस्थान में महिलाओं को सुरक्षित नहीं रख पा रहे हैं। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोक नहीं पा रहे हैं। लेकिन सरकार को अपने ही मंत्री की सच्चाई इतनी कड़वी लगी कि आनन-फानन में ही मुख्यमंत्री ने राज्यपाल कलराज मिश्र से गुढ़ा को मंत्री पद से बर्खास्त करने की अनुशंसा कर दी। देर शाम से अनुशंसा स्वीकार हो गई। सत्ता के साथ ही कांग्रेस संगठन ने भी राजेंद्र गुढ़ा के खिलाफ घोड़े खोल दिए। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने गुढ़ा के खिलाफ जांच की जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को सौंप दी। जांच के परिणाम की पटकथा पहले से ही लिख दी गई और आज जैसा कि माना जा रहा था, कांग्रेस पार्टी ने नैतिकता की सारी सीमाएं लांघते हुए अपने पूर्व मंत्री को संगठन से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया।

मंत्री-विधायकों ने सदन में गिराकर लात-घूंसों से पूर्व मंत्री की पिटाई की
सीएम गहलोत की कैबिनेट में मंत्री पद से हटाए जाने के बाद सोमवार (24 जुलाई) को कांग्रेस नेता राजेंद्र सिंह गुढ़ा को राजस्थान विधानसभा के बाहर रोका गया। कांग्रेस के ही मंत्रियों ने उन्हें सदन में प्रवेश न करने के लिए बाध्य किया, लेकिन गुढ़ा विधानसभा के अंदर पहुंच गए और उन्होंने अध्यक्ष से बोलने की अनुमति मांगी, जो उन्हें नहीं दी गई। राजेंद्र गुढ़ा का कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी। राज्य में दुष्कर्म के नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं, लेकिन इस बारे में बोलने तक नहीं दिया गया। राजेंद्र गुढ़ा का आरोप है कि 25-30 लोगों ने मिलकर उनपर हमला कर दिया। यूडीएच मिनिस्टर शांति धारीवाल पर संगीन आरोप लगाते हुए गुढ़ा ने कहा कि धारीवाल ने उन्हें गिराकर लात मारी। अन्य कांग्रेस विधायकों ने उनको गिराकर लात-घूंसे मारे। उन्होंने कहा कि वह सीएम गहलोत की रिक्वेस्ट पर साथ आए थे, अब लड़ाई लड़ेंगे। उनसे पार्टी ने कहा है कि माफी मांगो। ऐसे में राजेंद्र गुढ़ा का सवाल है कि वह किस बात की माफी मांगें? गुढ़ा का कहना है कि जब तक उनके शरीर में सांस है, तब तक राजस्थान की बहनों-बेटियों के लिए बोलते रहेंगे।

‘अगर लाल डायरी में कांग्रेसियों के काले चिट्ठे नहीं होते तो सीएम जलवाते ही क्यों?’
इससे पहले गत दिवस राजेंद्र गुढ़ा ने झुंझुनू में एक जनसभा के दौरान सीएम अशोक गहलोत पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि आरटीडीसी चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ के घर पर ईडी और इनकम टैक्स ने छापा मारा था। उस वक्त मुझे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुलाकर कहा था कि कुछ भी हो गुढ़ा, वहां से ‘लाल डायरी’ निकलाकर लाओ। सीएम के कहने पर मैं लाल डायरी वहां से किसी तरह निकलाकर लाया। इसके बाद उस डायरी को जलवा दिया। अगर उसमें काले चिट्ठे नहीं होते तो सीएम जलवाते ही क्यों?’ उन्होंने कहा कि तब सीएम ने कहा था कि लाल डायरी यदि किसी जांच एजेंसी के हाथ लग गई तो हम सबके लिए मुश्किल हो जाएगी। गुढ़ा ने कहा कि अगर तब मैं सैकड़ों पुलिस जवानों के बीच में से जाकर नौवीं मंजिल से गेट तोड़कर वो लाल डायरी नहीं निकालता सीएम गहलोत जेल में होते। और राजस्थान का मुख्यमंत्री कोई और ही होता।

गुढ़ा तुमने तो सर्जिकल स्ट्राइक कर दी, तुमको को हॉलीवुड में होना चाहिए- गहलोत
पूर्व मंत्री ने कहा कि तब तो लाल डायरी लाने पर सीएम गहलोत ने कहा था कि गुढ़ा तुमने तो सर्जिकल स्ट्राइक कर दी। तुमको को हॉलीवुड में होना चाहिए। अब अपने मंत्रियों से पिटवा रहे हैं। जैसे फिल्म डॉन में लाल डायरी सुर्खियों में रही और तब उसमें प्राण का डॉयलाग था, ‘काका, इसमें नारंग और उसकी सिंडिकेट के एक-एक मैंबर का नाम और पता है।’ राजेंद्र गुढ़ा के बयान के बाद अब राजस्थान में ‘रेड डायरी’ की चर्चा है, जिसे सभी खोज रहे हैं। जानना चाह रहे हैं कि इसमें किस-किस मंत्री-विधायक का नाम है और उसके आगे कितने करोड़ की रकम लिखी हुई है। कहा जा रहा है कि इस रेड डायरी में अशोक गहलोत और उनकी सरकार के काले कारनामों की जानकारी हो सकती है। गुढ़ा के इस खुलासे के बाद, बीजेपी ने तुरंत पलटवार किया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ट्वीट करते हुए कहा ‘सीएम साहब के बड़े खास रहे लेकिन सच बोलने की वजह से तुरंत ही बर्खास्त होने वाले राजेंद्र गुढ़ा जी जिस लाल डायरी की बात कर रहे हैं, उसमें न जाने कितने काले चिट्ठे होंगे। नाम तो एक दिन सभी भ्रष्टाचारियों के सामने आएंगे, अगले विधानसभा चुनाव परिणाम आने का इंतजार करें।’

गहलोत पर तंज…बहन-बेटियों की सुरक्षा पर बोलना गुनाह कैसे हो गया?
गहलोत पर तंज कसते हुए गुढ़ा ने कहा कि आपने मुझे विधानसभा में भेजा भी इसलिए था कि मैं सच बोलूं। उसके बाद आप जब हमारी बहन-बेटियों की सुरक्षा नहीं कर पाए तो मैं बोल गया, यह गुनाह हो गया? मैं मरते दम तक राजस्थान की, उदयपुरवाटी, शेखावटी की जनता के लिए लड़ता रहूंगा। गौरतलब है कि गुढ़ा ने शुक्रवार को सदन में महिलाओं के बढ़ते अपराधों को लेकर कहा था कि ‘ये स्वीकार करना चाहिए, ये सच्चाई है कि हम महिलाओं की सुरक्षा में असफल हो गए. राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ जिस तरह से अत्याचार बढ़े हैं, मणिपुर की चिंता करने की बजाय हमें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि मुझे तो दूसरा काम भी नहीं आता। मुझे आदत पड़ गई है सच बोलने की। मैंने बस इतना कहा था कि मणिपुर हिंसा पर बात कर रहे हो तो राजस्थान में बढ़ते अत्याचार पर भी देखो। इसमें गलत क्या है। गुढ़ा ने बर्खास्त किए जाने के फैसले पर हमला बोलते हुए कहा कि मुझसे इस्तीफा मांग लेते तो मैं इस्तीफा दे देता। जब मुकदमा होता है तो भी समय दिया जाता है और फिर जज फैसला करता है, लेकिन मुझे तो साजिश के साथ सीधे ही उड़ा दिया गया।

जनता जानना चाहती है कि लाल डायरी की दाल में क्या काला है- शेखावत
इस बीच केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि गहलोत सरकार महिलाओं की सुरक्षा नहीं कर पाई, ये विषय साहस के साथ विधानसभा के पटल पर रखा तो राजेंद्र गुढ़ा को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया। आज राजेंद्र गुढ़ा विधानसभा में एक लाल डायरी लेकर पहुंचे थे। कल उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से ये बताया था कि इस लाल डायरी से सरकार धराशायी हो जाएगी। और आज जब राजेंद्र गुढ़ा उस डायरी को लेकर पहुंचे तो कांग्रेस के नेताओं में उस डायरी को छीनने और फाड़ने की होड़ मच गई। इससे पता चलता है कि दाल में कुछ काला है। आज राजस्थान की जनता ये जानना चाहती है कि लाल डायरी में किस-किसके काले कारनामे छिपे हैं। राजस्थान की जनता ये जानना चाहती है कि गरीब जनता के पैसों से कौन-कौन गुलछर्रे उड़ा रहा था और कौन-कौन अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए उन पैसों का उपयोग कर रहा था।

राजस्थान में हम असफल, मणिपुर के बजाए अपने गिरेबां में झांकना चाहिए-गुढ़ा

अपने खरे-खरे बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहने वाले सैनिक कल्याण मंत्री राजेन्द्र सिंह गुढ़ा ने एक बार फिर अपनी ही कांग्रेस सरकार की आंखें खोल दी हैं। उन्होंने विधानसभा में कहा कि राजस्थान में जिस तरह से महिलाओं पर अत्याचार हुए हैं और लगातार बढ़ रहे हैं, हमें मणिपुर के बजाए अपने गिरेबां में झांकना चाहिए। सैनिक कल्याण मंत्री गुढ़ा की सच्चाई को सीएम गहलोत सह नहीं पाए और उन्होंने 21 जुलाई को देर शाम राज्यपाल से राज्यमंत्री को बर्खास्त करने की अनुशंसा कर दी। राज्यपाल कलराज मिश्र ने सीएम  इस अनुशंसा को तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया है। गुढ़ा पहले भी सरकार के भ्रष्टाचार पर सार्वजनिक रूप से खरी-खरी सुना चुके हैं। पायलट की जनसंघर्ष यात्रा के दौरान गुढ़ा ने कहा था कि हमारी सरकार का एलाइनमेंट खराब हो गया है। सरकार में जो काम होना चाहिए, वह नहीं हो पा रहा है। सरकार भ्रष्टाचार के उन सभी मानकों को पूरा कर चुकी है, जो देश में हो चुके हैं। गहलोत सरकार 40 परसेंट कि करप्शन से बहुत आगे जा चुकी हैं। हालात यह हैं कि शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल के ऑफिस से तो कोई भी फाइल बिना भ्रष्टाचार के आगे नहीं खिसक पाती है।

सरकार के एक मंत्री ने ही सरकार की कलई खोलकर रख दी है- राठौड़

गहलोत सरकार के राज में प्रदेश लगातार महिलाओं से दुष्कर्म के मामले में नंबर वन बना हुआ है। इतना ही नहीं दलित महिलाओं से ज्यादती की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। खुद मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र जोधपुर में दलित युवती से गैंग रेप और चार लोगों को नृशंस हत्या हाल ही में हो चुकी है। यही वजह है कि सैनिक कल्याण मंत्री ने विधानसभा में साफ तौर पर कहा कि यह मान लेना चाहिए कि प्रदेश में हम महिलाओं की सुरक्षा के मामले में असफल रहे हैं। इस पर नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने पाइंट ऑफ ऑर्डर में कहा कि सरकार कलेक्टिव रेस्पॉन्सिबिलिटी से चलती है। संविधान के मुताबिक यदि सरकार का एक मंत्री बोलता है तो इसका मतलब है पूरी सरकार बोलती है। सरकार के एक मंत्री ने सरकार की ही कलई खोलकर रख दी है।

मणिपुर मामले में टिप्पणी का गुढ़ा ने दिया करारा जवाब
राठौड़ ने कहा कि ये बहुत शर्मनाक बात है मर्दों के प्रदेश वाले मंत्री जी। बता दें कि संसदीय कार्य मंत्री धारीवाल ने ही इससे पहले के विधानसभा सत्र में महिलाओं पर रेप के मामले में अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने प्रदेश में बढ़ते रेप के मामलों पर कहा था, रेप के मामले बढ़ तो रहे हैं। मगर क्या करें…राजस्थान मर्दों का प्रदेश है। विपक्ष ने जब इस बयान पर धारीवाल को आड़े हाथों लिया तो उनको माफी तक मांगनी पड़ी थी। दूसरी ओर सैनिक कल्याण मंत्री गुढ़ा का बयान उस संदर्भ में भी देखा जा रहा है, जिसमें सीएम गहलोत ने मणिपुर के मामले में टिप्पणी की थी। राजस्थान के रेपिस्तान के रूप में कुख्यात होने के बावजूद सीएम ने कहा हमारे लिए महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से बढ़कर कुछ भी नहीं है। जोधपुर में भयानक गैंग रेप के बाद तीन आरोपियों को महज दो घंटे में गिरफ्तार कर लिया गया, वहीं मणिपुर की शर्मनाक घटना में सिर्फ एक आरोपी को पकड़ने में 77 दिन लग गए।

दलित महिलाओं से दुष्कर्म और दलितों के खिलाफ अपराधों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। पुलिस-प्रशासन इन्हें रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। पिछले कुछ माह की वारदातों पर एक नजर…

करौली: दलित युवती के साथ हैवानियत की हदें पार
करौली में हाल ही में एक दलित युवती के साथ दरिंदों की कारगुजारी की ऐसी वारदात सामने आई, जिसे सुनकर किसी का भी दिल कांप जाएगा। जिले के नादौती उपखंड की दलित युवती के साथ न सिर्फ गैंगरेप किया गया, बल्कि इसके बाद उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। गैंगरेप करने वाले आरोपियों ने इसके बाद दलित युवती की पहचान छिपाने के लिए चेहरे को एसिड डालकर जला दिया। इसके बाद दरिंदों ने उसको एक कुएं में फेंक दिया। घटना की जानकारी के बाद सांसद किरोडी लाल मीणा हिंडौन सिटी के राजकीय अस्पताल पहुंचे और सरकार को बेपरवाह बताते हुए पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए धरने पर बैठे।

बाड़मेर: दलित महिला को रेप के बाद जिंदा जलाया
राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा में इसी साल अप्रैल माह में एक दलित महिला को बलात्कार के बाद आरोपियों ने जिंदा जला दिया गया। साठ फीसदी झुलसी महिला ने इलाज के दौरान जोधपुर के सरकारी अस्पताल में दम तोड़ दिया। मृतका के पति राजू राम का आरोप है कि उनकी पत्नी के साथ शकूर ख़ान ने बलात्कार किया और थिनर डालकर जिंदा जला दिया। इस बर्बर घटना के खिलाफ मृतका के परिजनों और ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर बालोतरा एसडीएम ऑफिस के सामने धरना भी दिया।

भरतपुर: सगे भाइयों ने किया दलित महिला से गैंगरेप
पूर्वी राजस्थान में दलितों के खिलाफ अपराधों में निरंतर वृद्धि हो रही है। भरतपुर जिले में इसी माह दलित महिला के साथ गैंगरेप की वारदात को दो सगे भाइयों ने ही अंजाम दिया। सेवर थाना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला बाजार में चश्मा सही कराने दुकान पर गई थी। वहां पर मौजूद दो भाई काम कराने के बहाने से उसके घर के अंदर ले गए, जहां दोनों ने दलित महिला के साथ गैंगरेप किया। सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद महिला को किसी को भी बताने पर जान से मरने की धमकी दी।

बीकानेर: रक्षक पुलिस ही बनी भक्षक, रेप के बाद मारा
गत जून माह में बीकानेर के खाजूवाला में एक दलित युवती के साथ पहले रेप करने और बाद में उसकी हत्या करने का सनसनीखेज आरोप भक्षक बनी पुलिस पर ही लगा है। महज बीस साल की इस युवती से एक घर में पहले रेप किया गया और बाद में वहीं मारकर फैंक दिया गया। महिला के पिता ने आरोप लगाया है कांस्टेबल मनोज और भागीरथ एक अन्य युवक के साथ उसे कमरे में ले गए। जहां पहले दुष्कर्म किया और इसके बाद मार दिया। एफआईआर में दो पुलिसकर्मियों के भी नाम आने के बाद पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने दोनों को सस्पेंड कर दिया है।