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कांग्रेस को आईना दिखाना रास नहीं आया, राहुल-वाड्रा की सच्चाई बताई तो दिग्विजय के भाई लक्ष्मण सिंह को कांग्रेस से निकाला; चापलूस कांग्रेस को डुबोकर ही रहेंगे

यह कहना कि कांग्रेस पार्टी में सब कुछ भगवान भरोसे चल ही रहा है और भविष्य में भी भगवान भरोसे ही चलता रहेगा। ऐसा कुछ नहीं है।  वास्तविकता यह है कि कांग्रेस में सब कुछ चापलूसों और चमचों के भरोसे चल रहा है। राहुल गांधी के इर्द-गिर्द इन लोगों के गुट ने ऐसा घेरा बना लिया है, जिसके कारण वरिष्ठ नेताओं सहित पार्टी कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी से दूरी बना ली है। यदि कभी-कभार कांग्रेस का कोई नेता हिम्मत करके राहुल गांधी को सच्चाई का आईना दिखाता है तो उसकी बात पर विचार-मंथन किए बिना ही उसको पार्टी से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। इसके एक नहीं, अनेक उदाहरण हैं। अगर कांग्रेस में तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग ने परिवार को ऐसा करने से नहीं रोका बहुत जल्दी कांग्रेस की हैसियत किसी क्षेत्रीय पार्टी से भी नीचे चली जाएगी। जिस पार्टी में चापलूसों की भरमार होगी उस पार्टी को डूबने से कोई नहीं बचा सकता। 
कांग्रेस परिवारभक्ति में इतना ज्यादा डूब चुकी है, उससे बाहर निकलना मुश्किल दिखाई पड़ता है। आज कांग्रेस में राष्ट्रप्रेम की भी जरुरत से ज्यादा कमी आ गयी है। 2014 चुनावों से पहले देश में होते आतंकी हमलों को "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" से जोड़ हिन्दू को बदनाम करने वाली कांग्रेस आज वर्तमान की मोदी सरकार द्वारा आतंकियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देने पर पाकिस्तान से ज्यादा परेशान कांग्रेस है। Operation Sindoor होने पर पाकिस्तान ने हमारे कितने राफेल गिराए पूछ पाकिस्तान की बोली बोलना। इससे पहले एयर और सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत। आखिर कांग्रेस क्यों पाकिस्तान के आगे घुटने टेके हुए है? लगता है पाकिस्तान ने कांग्रेस की कोई नस पकड़ी हुई है। जिसे देख शंका होती है कि कांग्रेस आतंकवाद के सहारे भारत में राज कर रही थी। असलियत सामने आने में कांग्रेस में जो भगदड़ मची है उसे देख समझा जा सकता है, कुछ कहने की जरुरत नहीं।
दूसरे, देश में होते हिन्दू विरोधी दंगों में हिन्दुओं पर होते जानलेवा हमले होने पर चुप्पी साध ली जाती है, लेकिन इजराइल द्वारा गाज़ा पर हमले होने पर बेशर्म प्रियंका वाड्रा संसद में फिलिस्तीन का थैला लेकर पहुँच जाती है। मुर्शिदाबाद, संदेशखली और 24 परगना में हिन्दुओं के होते नरसंहार पर चुप्पी क्यों?             
 

ऐसा ही ताजा मामला अब मध्य प्रदेश से आया है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई और कांग्रेस के दिग्गज नेता लक्ष्मण सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। उनका भी कुसूर सिर्फ इतना ही था कि उन्होंने राहुल गांधी एंड कंपनी को वास्तविकता का आईना दिखाने के लिए नसीहत देने की कोशिश की थी।

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में गांधी परिवार के ना शामिल होने को गलत बताया
मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी एक बाद फिर घमासान को लेकर सुर्खियों में आ गई है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह को पार्टी से बाहर कर दिया है। लक्ष्मण सिंह 5 बार के सांसद, 3 बार के विधायक रहे हैं। इसके साथ ही वह वर्तमान विधायक और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह के चाचा हैं। लक्ष्मण सिंह को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। ऐसे में हर तरफ यह सवाल तैर रहे हैं कि यह दिग्विजय सिंह और जयवर्धन के लिए भी बड़ा झटका साबित हो सकता है। क्या राघोगढ़ के छोटे राजा लक्ष्मण सिंह को पार्टी से बाहर करना पूरी राघोगढ़ रियासत का अपमान नहीं है? विधानसभा चुनाव में चाचौड़ा विधानसभा सीट से हारने के बाद से लक्ष्मण सिंह पार्टी की गलत नीतियों को लेकर हमलावर थे। लक्ष्मण सिंह राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में गांधी परिवार के ना शामिल होने को गलत ठहराया था।

राहुल गांधी को सोच-समझकर बोलने की भी दी नसीहत
कांग्रेस नेता लक्ष्मण सिंह पहलगाम आतंकी हमले पर भी राहुल गांधी और पार्टी के रुख की आलोचना कर चुके हैं। सत्तर वर्षीय पार्टी नेता एक बार फिर साफगोई से बयान दिए हैं, जो कांग्रेस के दिल्ली दरबार में बैठ नेताओं को असहज लग रहे हैं। इससे पहले लक्ष्मण सिंह को तब कारण बताओ नोटिस दिया गया था, जब उन्होंने राहुल गांधी और उनके बहनोई रॉबर्ट वाड्रा को लेकर पहलगाम आतंकी हमले के संदर्भ में टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, ‘गांधी और वाड्रा अपरिपक्व हैं। देश उनकी अपरिपक्वता को भुगत रहा है।’ उन्होंने आरोप लगाया था कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आतंकवादियों से मिले हुए हैं। पार्टी को वहां से समर्थन वापस लेना चाहिए। लक्ष्मण सिंह ने राहुल गांधी को भी सोच समझकर बात करने की नसीहत देते हुए कहा था कि पार्टी को मुझे निकालना हो तो आज निकाल दे। हमारी पार्टी के नेता सोच समझकर बोले, नहीं तो उन्हें चुनाव में परिणाम भुगतना पड़ेंगे।

राहुल गांधी और रॉबर्ट वाड्रा का बचपना कब तक झेलेंगे
पार्टी की अनुशासन समिति ने उनके बयानों को अनुशासनहीनता माना। अनुशासन समिति के अध्यक्ष सांसद तारिक अनवर ने बयान के लिए कारण बताओ नोटिस दिया था। जवाब संतोषजनक नहीं होने के चलते उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित किया गया। इससे पहले दिसंबर 2023 में भी लक्ष्मण सिंह ने कह दिया था कि राहुल गांधी महज एक पार्टी कार्यकर्ता और सांसद हैं। इसके अलावा वह कुछ भी नहीं। राहुल गांधी को ज्यादा तवज्जो नहीं देनी चाहिए। लक्ष्मण सिंह ने राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा पर भी निशाना साधा था। उन्होंने कहा था- ‘ये हमारा रॉबर्ट वाड्रा, जीजा जी राहुल गांधी का, कहता है कि मुसलमानों को सड़क पर नमाज नहीं पढ़ने देते इसलिए आतंकवादियों ने हमला किया। इन दोनों का ये बचपना हम कब तक झेलेंगे। राहुल गांधी भी थोड़ा सोच समझकर बात करें। इनकी नादानियों की वजह से इस तरह की घटनाएं हो रही हैं।’

भाई का निष्कासन पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय के लिए बड़ा झटका
दिग्विजय सिंह को राघोगढ़ का राजा माना जाता है। गुना जिले की यह सीट हमेशा दिग्विजय सिंह और बाद में उनके बेटे के नाम रही, जबकि लक्ष्मण सिंह जिले की चाचौड़ा विधानसभा से विधायक रहे। इस बार 2023 के चुनाव में हार गए। माना जाता है कि दिग्विजय सिंह के लिए भाई का पार्टी से निष्कासन बड़ा झटका साबित हो सकता है। काबिले जिक्र है कि लक्ष्मण सिंह ने रैली में साफ कहा था कि चाहे मुझे पार्टी से निकाल दें, लेकिन हमारी पार्टी के नेता सोच समझकर बोले, नहीं तो उन्हें चुनाव में परिणाम भुगतना पड़ेंगे।
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पाकिस्तान का भारत में सबसे बड़ा स्लीपर सेल : कांग्रेस पार्टी है; पाकिस्तान और कांग्रेस का तो सही
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सुभाष चन्द्र कांग्रेस पार्टी को पाकिस्तान का सबसे बड़ा स्लीपर सेल कहा जा सकता है और उससे भी सही कहा जाए तो पाकिस्ता..... 

कांग्रेस को आज नहीं तो कल सवालों का जवाब देना ही पड़ेगा
कांग्रेस पार्टी के लक्ष्मण सिंह के खिलाफ एक्शन पर बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने कहा- लक्ष्मण सिंह मेरे वर्षों पुराने मित्र हैं। जब उनके भाई मुख्यमंत्री थे तब से आज तक लक्ष्मण सिंह और हम मित्र हैं। बेबाकी से बोलते हैं। आज की तारीख में वे जो सवाल उठा रहे हैं। वो समयानुकूल हैं। इन प्रश्नों का जवाब कांग्रेस को आज नहीं तो कल देना ही पड़ेगा। अगर जवाब नहीं देंगे। तो जनता और कार्यकर्ता उन्हें इतना घेरेंगे कि वो लक्ष्मण सिंह का नाम लेकर पानी पिएंगे। उन्होंने लक्ष्मण सिंह को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आप सच्चाई की अपनी लाइन को मत छोड़िएगा। सच कहना अगर बगावत है तो समझो हम भी बागी हैं। आप और हम इसी लाइन पर चलते रहेंगे।

पाकिस्तान और ईरान ने 12000 अफगानों को देश से निकाला: भारत में CAA में मुस्लिमों को जोड़ने की पैरवी करने वाला गिरोह इस्लामी मुल्कों की करनी पर चुप क्यों?

ईरान और पाकिस्तान ने हाल ही में लगभग 12,000 अफगान प्रवासियों को अपने-अपने देशों से निर्वासित किया है। अफगानिस्तान के शरणार्थी और प्रत्यावर्तन मंत्रालय ने बताया कि सभी अफगान वापस अफगानिस्तान लौट आए हैं। हालाँकि, भारत में पड़ोसी देशों के मुस्लिमों को लेकर चिंतित रहने वाले कथित सेक्युलर इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। एक इस्लामी देश में ही मुस्लिमों के लिए जगह नहीं है।


ऐसा नहीं है कि ऐसा सिर्फ अफगानिस्तान के लोगों के साथ हो रहा है। जो काम पाकिस्तान अफगान लोगों के साथ करता है, वही काम अरब देश पाकिस्तान-बांग्लादेश या एशिया के अन्य इस्लामी देशों के साथ करते हैं। ऐसे में समय में देश के ये सेक्युलर जमात चुप्पी साध लेता है। इनके पास कहने को ना शब्द होते हैं और ना ही इसके पीछे देने के लिए तर्क होता है।

देश में नागरिकता संशोधन कानून लागू हुआ तो यही जमात पड़ोसी देशों के मुस्लिमों को लेकर चिंतित हो रहे थे। उनके लिए ऐसे तर्क दे रहे थे, जैसे मानवाधिकार के ये कितने बड़े रहनुमा हों। सायमा, राना अयूब, आरफा खानुम शेरवानी जैसे लोग CAA का यह कहकर विरोध कर रहे थे, जब भारत पड़ोसी इस्लामी मुल्कों के पीड़ित हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, ईसाई आदि को अपने यहाँ आश्रय दे सकता है तो मुस्लिमों को क्यों नहीं।

अब जब पाकिस्तान अफगानिस्तान के मुस्लिमों को अपने यहाँ से जबरन निकाल रहा है तो ये जमात ना ही पाकिस्तान की भर्त्सना कर पा रहा है और ना ही ईरान का। एक इस्लामी मुल्क जब अन्य इस्लामी मुल्क के गरीब, पीड़ित मुस्लिमों को ही आश्रय नहीं दे रहा है तो भारत जैसे विविधता वाले देश से इस तरह की माँग किस तरह पर की जा सकती है, जबकि हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध जैसे धर्मों के लोगों को आश्रय लेने के लिए दुनिया में और कहीं जगह नहीं है।

चुनिंदा और अपनी सहूलियत के हिसाब से मुद्देे को रंग देने के कारण ही आज भारत में मुस्लिमों से जुड़े हर सवाल पर लोगों को संदेह होने लगा। इस संदेह में आरफा-सायमा जैसे नैरेटिव गढ़ने वालों का बहुत बड़ा योगदान है। वर्ना भारत में तो दुनिया भर के सताए हुए लोगों के आश्रय देने की प्राचीन परंपरा रही है। चाहे वो पारसी हों, यहूदी हों या यहीद के शासन काल के मुस्लिम ही क्यों ना हों, जिन्हें सिंध के राजा दाहिर ने अपने यहाँ शरण दिया था।

भारत में शरण पाने के बाद सारे समुदाय एवं पथ के लोग भारत की संस्कृति में समाहित हो गए, रच-बस गए लेकिन इस्लाम हमेशा खुद को अलग-थलग रखा। वह खुद को विशेष महसूस कराने के दायित्व दूसरे पर डालता रहा। परिणाम ये रहा है कि वे स्थानीय समुदाय के मन-मस्तिष्क में ऐसे लोगों की वजह से अपना स्थान नहीं बना पाए, जो आज के सेक्युलर बिरादरी जैसे कारामात उस दौरान के कुछ कथित लोग भी करते रहे होंगे।

इसमें आखिरकार नुकसान गरीब मुस्लिम वर्ग का ही हुआ। लेकिन, इन लोगों के लिए ये कभी मुद्दा रहा ही नहीं कि गरीब मुस्लिमों के बीच शिक्षा और विकास को तवज्जो दी जाए। अगर ऐसा होता तो ये सीरिया, लेबनान, इराक जैसे हिंसा ग्रस्त मुल्कों के आवाज उठाते। वहाँ के आतंकियों और सरकारों को कोसते। विश्व समुदाय के लोगों से उनके बीच शांति बहाल करने की कोशिश करते। हालाँकि, ऐसी माँग करते हुए उन्हें कभी देखा नहीं गया।

जब ईरान और पाकिस्तान की सरकारों ने अफगानिस्तान के हिंसा प्रभावित लोगों को देश से बाहर निकाल दिया तो हैदराबाद के सांसद ओसदुद्दीन ओवैसी भी चुप्पी साधे बैठे हैं। वे शपथ ग्रहण करते हुए जय फिलिस्तीन के नारे लगा सकते हैं, पाकिस्तान के मुस्लिमों को CAA के तहत भारत में बसने के अधिकार की माँग कर सकते हैं लेकिन अफगानिस्तान के अपने मुस्लिम भाइयों के लिए आवाज नहीं उठा सकते।

ये सारा कुछ इस्लाम की वैश्विक भाईचारा का नतीजा है कह लें, देश की राजनीति में मुस्लिमवाद को बढ़ावा देने की कोशिश, ताकि खुद को पीड़ित शोषित दिखाकर विशेष रियायतों की माँग की सके। दुनिया को यह बताया जा सके कि देखो कि भारत किस तरह मुस्लिमों की अनदेखी करता है। इस तरह नैरेटिव ग़ढ़ने में यहाँ का बुद्धिजीवी, राजीनतिक और समाज का एक बड़ा तबका आक्रामक ढंग से काम कर रहा है।


ईरान और पाकिस्तान द्वारा अफगान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजे जाने के बाद अफ़गानिस्तान में मानवीय संकट और भी बढ़ गया है। इनमें से कई निर्वासित अफ़गानिस्तान लौटने के बाद अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं, क्योंकि देश आर्थिक अस्थिरता और बुनियादी सेवाओं की कमी का सामना कर रहा है। इसके अलावा, इन्हें नस्लीय भेदभाव एवं उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है।

दुनिया भर के मानवाधिकार समूहों और संगठनों ने सामूहिक निर्वासन की निंदा की है और अफ़गान निर्वासितों की सुरक्षा और भलाई के बारे में चिंता व्यक्त की है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयाँ अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती हैं। इसके तहत शरणार्थियों को ऐसे देशों में जबरन वापस लौटने पर प्रतिबंध है, जहाँ उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है।

देश दुनिया के तमाम मानवाधिकार संगठनों द्वारा पाकिस्तान और ईरान सरकार की निंदा की जा रही है, लेकिन भारत के बुद्धिजीवी खामोश हैं। उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ रहा है कि इन देशों से वापस भेजे गए अफगान प्रवासी किस तरह अपना जीवन यापन करेंगे। ये भी पता नहीं है कि उनके साथ उनके देश में किस तरह का सलूक होगा।

इस तरह आरफा-सायमा और ओवैसी जैसे लोगों के लिए दो मुस्लिम देशों के बीच उनका आंतरिक मामला बन जाता है, जबकि वे भारत से चाहते हैं कि बांग्लादेशी मुस्लिम ही नहीं, म्यांमार के रोहिंग्या, पाकिस्तान के शिया-सुन्नी और अफगानिस्तान के मुस्लिमों को भी भारत अपने यहाँ शरण दें।

सांसदी खत्म होते ही ‘मुस्लिम मुस्लिम’ चिल्लाई महुआ मोइत्रा, पैसे लेकर अडानी के खिलाफ करती थी सवाल; मिलने वाली पेंशन भी ख़त्म हो

TMC सांसद महुआ मोइत्रा
संसद में प्रश्न पूछने के बदले नकदी और महँगे-महँगे तोहफे लेने की आरोपित महुआ मोइत्रा की संसद सदस्यता चली गई है। जाँच के बाद एथिक्स कमिटी ने उनके खिलाफ रिपोर्ट लोकसभा की टेबल पर पेश की थी। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें संसद से निकालने का फैसला सुनाया। महुआ मोइत्रा पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से 2019 में TMC (तृणमूल कांग्रेस) के टिकट पर सांसद बनी थीं। अब संसद ने उन्हें ‘कैश फॉर क्वेरी’ घोटाले का दोषी माना है।

ऐसे में प्रश्न यह भी खड़ा होता है कि क्या संसद मोइत्रा को मिलने वाली पेंशन भी बंद करेगी? यदि नहीं तो क्यों? क्या ऐसे जनप्रतिनिधि पेंशन के हक़दार है?

इस फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए महुआ मोइत्रा भड़क गईं। उन्होंने दावा किया कि कहीं किसी भी प्रकार के कैश या गिफ्ट लेने का कोई सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ इस आधार पर निकाला गया है कि उन्होंने संसद की अपनी लॉगिन आईडी-पासवर्ड शेयर किया जबकि संसद में इस संबंध में कोई नियम-कानून नहीं है। उन्होंने संसद को ‘कंगारू कोर्ट’ बताते हुए कहा कि ये दिखाता है कि मोदी सरकार के लिए अडानी कितने महत्वपूर्ण हैं, एक महिला सांसद की आवाज़ दबाई जा रही है।

उन्होंने इस दौरान कथित कोयले घोटाले का जिक्र करते हुए गौतम अडानी को घेरा और आरोप लगाया कि वो सभी पोर्ट्स को खरीद रहे हैं और इसके लिए उन्हें क्लियरेंस भी मिल रहा है। इस दौरान उन्होंने रमेश बिधूड़ी द्वारा दानिश अली पर टिप्पणी का मामला भी उठाया और कहा कि भाजपा ने एक भी मुस्लिम को संसद में नहीं भेजा है। महुआ मोइत्रा ने भाजपा पर अल्पसंख्यकों और महिलाओं का विरोधी बताते हुए कहा कि उनकी उम्र 49 साल है और अगले 30 वर्षों तक वो भाजपा के साथ लड़ाई लड़ेंगी।

संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने महुआ मोइत्रा की संसद सदस्यता खत्म किए जाने का प्रस्ताव लोकसभा में पेश किया। उससे पहले एथिक्स कमिटी के अध्यक्ष विनोद कुमार सोनकर ने लोकसभा में रिपोर्ट टेबल की। कांग्रेस और TMC के सदस्यों ने इस रिपोर्ट की कॉपी पढ़ने के लिए हंगामा भी किया। इससे पहले तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिख कर माँग की थी कि वो रिपोर्ट पढ़ने के लिए सांसदों को 48 घंटे का समय दें।

संसद सदस्यता खत्म किए जाने के दौरान बताया गया कि महुआ मोइत्रा ने न सिर्फ संसद का अपमान किया है, बल्कि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ किया है। उन्हें विशेषाधिकार हनन और अनैतिक कृत्य का दोषी भी पाया गया। वहीं कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सरकार जल्दबाजी कर रही है। वहीं महुआ मोइत्रा का कहना है कि उन्हें झुकाने के लिए हर नियम तोड़ दिया गया। इस पूरे मामले में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे खासे मुखर रहे थे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि महुआ मोइत्रा ने बुरा आचरण किया है, जिसके लिए उन्हें कड़ी सज़ा दी जानी चाहिए। उनकी करतूतों को गंभीर रूप से आपत्तिजनक, अनैतिक और घृणास्पद और आपराधिक माना गया है। साथ ही भारत सरकार से अनुरोध किया गया है कि वो एक समय सीमा तय कर के उनके खिलाफ जाँच पूरी करवाए। महुआ मोइत्रा के पूर्व पार्टनर देहाद्राई ने बताया था कि कैसे कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के इशारों पर महुआ मोइत्रा ने संसद में अडानी समूह को निशाना बनाया।

राजस्थान : अगर लाल डायरी में कांग्रेसियों के काले चिट्ठे नहीं होते तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जलवाते ही क्यों?


जब चोर ही 'चिल्लाये पकड़ो-पकड़ो, चोर-चोर' का शोर मचाने लगे, तब असली चोर को पकड़ना बहुत कठिन हो जाता है, असली चोर भाग निकलता है और बेगुनाह अपने-आपको बेकसूर ज़िंदगी बर्बाद कर देता है। यही घिनौना खेल कुछ वर्षों से देश में चल रहा है, जिस कारण कानून एक मजाक बनकर रह गया है। जनता है कि चोर को साहूकार और साहूकार को चोर समझने की गलती कर रही है। जनता ने भी अब इस बात को समझना शुरू कर दिया है कि भाजपा विरोधी भाजपा शासित राज्यों में घटित होने वाली किसी भी अप्रिय घटना पर चीखा चिल्ली करने वाले अन्य राज्यों में होने वाली उन्ही घटनाओं पर क्यों मुंह में दही जमाकर बैठ जाते हैं? किसी को बंगाल, राजस्थान, झाड़खंड और बिहार आदि में हो रहे महिला शोषण पर किसी का मुंह नहीं खुलता। 
राजस्थान की गहलोत सरकार महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को तो रोक नहीं पा रही, इस बारे में आवाज उठाने वाले अपनी ही पूर्व मंत्री की अभिव्यक्ति की आजादी पर जरूर रोक लगा रही है। राजस्थान के पूर्व मंत्री राजेन्द्र गुढ़ा को कैबिनेट से बर्खास्त किए जाने को लेकर गहलोत सरकार की आलोचना हो ही रही है। अब न सिर्फ गुढ़ा को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया, बल्कि सदन में सदन में ‘लाल डायरी’ के बारे में बोलने की अनुमति नहीं दी गई और कांग्रेस के मंत्रियों ने उन्हें घसीट कर, लात मारकर सदन से बाहर निकाल दिया। आरोप है कि इस लाल डायरी राज्यसभा चुनाव में खरीद-फरोख्त, राजस्थान क्रिकेट एसोसिएसन चुनाव में प्रलोभन के काले चिठ्ठे हैं। राजेंद्र सिंह गुढ़ा का आरोप है कि सदन में लगभग 25-30 लोगों ने उनपर हमला किया। उन्हें मुक्के-लात मारे और कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा से बाहर खींच लिया। पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने रोते हुए मीडिया के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मैं 40 साल से कांग्रेस में काम कर रहा हूं। पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया के समय से पार्टी को देख रहा हूं। लेकिन सच्ची बात कहने पर सरकार और पार्टी मेरे साथ बदसुलूकी कर रही है। मैं सदन में आखिर यही तो जानना चाहता था कि मेरी गलती क्या है?

सत्ता के साथ ही कांग्रेस संगठन से बेदखली की पटकथा भी पहले ही लिख दी
राजस्थान के सैनिक कल्याण मंत्री रहे राजेंद्र गुढ़ा ने विधानसभा में प्रदेश में बढ़ते महिला अपराधों को लेकर आईना दिखाया था। उन्होंने तीन दिन पहले कहा था कि मणिपुर की बजाए हमें अपने गिरेबां में झांकना चाहिए। हम राजस्थान में महिलाओं को सुरक्षित नहीं रख पा रहे हैं। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोक नहीं पा रहे हैं। लेकिन सरकार को अपने ही मंत्री की सच्चाई इतनी कड़वी लगी कि आनन-फानन में ही मुख्यमंत्री ने राज्यपाल कलराज मिश्र से गुढ़ा को मंत्री पद से बर्खास्त करने की अनुशंसा कर दी। देर शाम से अनुशंसा स्वीकार हो गई। सत्ता के साथ ही कांग्रेस संगठन ने भी राजेंद्र गुढ़ा के खिलाफ घोड़े खोल दिए। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने गुढ़ा के खिलाफ जांच की जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को सौंप दी। जांच के परिणाम की पटकथा पहले से ही लिख दी गई और आज जैसा कि माना जा रहा था, कांग्रेस पार्टी ने नैतिकता की सारी सीमाएं लांघते हुए अपने पूर्व मंत्री को संगठन से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया।

मंत्री-विधायकों ने सदन में गिराकर लात-घूंसों से पूर्व मंत्री की पिटाई की
सीएम गहलोत की कैबिनेट में मंत्री पद से हटाए जाने के बाद सोमवार (24 जुलाई) को कांग्रेस नेता राजेंद्र सिंह गुढ़ा को राजस्थान विधानसभा के बाहर रोका गया। कांग्रेस के ही मंत्रियों ने उन्हें सदन में प्रवेश न करने के लिए बाध्य किया, लेकिन गुढ़ा विधानसभा के अंदर पहुंच गए और उन्होंने अध्यक्ष से बोलने की अनुमति मांगी, जो उन्हें नहीं दी गई। राजेंद्र गुढ़ा का कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी। राज्य में दुष्कर्म के नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं, लेकिन इस बारे में बोलने तक नहीं दिया गया। राजेंद्र गुढ़ा का आरोप है कि 25-30 लोगों ने मिलकर उनपर हमला कर दिया। यूडीएच मिनिस्टर शांति धारीवाल पर संगीन आरोप लगाते हुए गुढ़ा ने कहा कि धारीवाल ने उन्हें गिराकर लात मारी। अन्य कांग्रेस विधायकों ने उनको गिराकर लात-घूंसे मारे। उन्होंने कहा कि वह सीएम गहलोत की रिक्वेस्ट पर साथ आए थे, अब लड़ाई लड़ेंगे। उनसे पार्टी ने कहा है कि माफी मांगो। ऐसे में राजेंद्र गुढ़ा का सवाल है कि वह किस बात की माफी मांगें? गुढ़ा का कहना है कि जब तक उनके शरीर में सांस है, तब तक राजस्थान की बहनों-बेटियों के लिए बोलते रहेंगे।

‘अगर लाल डायरी में कांग्रेसियों के काले चिट्ठे नहीं होते तो सीएम जलवाते ही क्यों?’
इससे पहले गत दिवस राजेंद्र गुढ़ा ने झुंझुनू में एक जनसभा के दौरान सीएम अशोक गहलोत पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि आरटीडीसी चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ के घर पर ईडी और इनकम टैक्स ने छापा मारा था। उस वक्त मुझे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुलाकर कहा था कि कुछ भी हो गुढ़ा, वहां से ‘लाल डायरी’ निकलाकर लाओ। सीएम के कहने पर मैं लाल डायरी वहां से किसी तरह निकलाकर लाया। इसके बाद उस डायरी को जलवा दिया। अगर उसमें काले चिट्ठे नहीं होते तो सीएम जलवाते ही क्यों?’ उन्होंने कहा कि तब सीएम ने कहा था कि लाल डायरी यदि किसी जांच एजेंसी के हाथ लग गई तो हम सबके लिए मुश्किल हो जाएगी। गुढ़ा ने कहा कि अगर तब मैं सैकड़ों पुलिस जवानों के बीच में से जाकर नौवीं मंजिल से गेट तोड़कर वो लाल डायरी नहीं निकालता सीएम गहलोत जेल में होते। और राजस्थान का मुख्यमंत्री कोई और ही होता।

गुढ़ा तुमने तो सर्जिकल स्ट्राइक कर दी, तुमको को हॉलीवुड में होना चाहिए- गहलोत
पूर्व मंत्री ने कहा कि तब तो लाल डायरी लाने पर सीएम गहलोत ने कहा था कि गुढ़ा तुमने तो सर्जिकल स्ट्राइक कर दी। तुमको को हॉलीवुड में होना चाहिए। अब अपने मंत्रियों से पिटवा रहे हैं। जैसे फिल्म डॉन में लाल डायरी सुर्खियों में रही और तब उसमें प्राण का डॉयलाग था, ‘काका, इसमें नारंग और उसकी सिंडिकेट के एक-एक मैंबर का नाम और पता है।’ राजेंद्र गुढ़ा के बयान के बाद अब राजस्थान में ‘रेड डायरी’ की चर्चा है, जिसे सभी खोज रहे हैं। जानना चाह रहे हैं कि इसमें किस-किस मंत्री-विधायक का नाम है और उसके आगे कितने करोड़ की रकम लिखी हुई है। कहा जा रहा है कि इस रेड डायरी में अशोक गहलोत और उनकी सरकार के काले कारनामों की जानकारी हो सकती है। गुढ़ा के इस खुलासे के बाद, बीजेपी ने तुरंत पलटवार किया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ट्वीट करते हुए कहा ‘सीएम साहब के बड़े खास रहे लेकिन सच बोलने की वजह से तुरंत ही बर्खास्त होने वाले राजेंद्र गुढ़ा जी जिस लाल डायरी की बात कर रहे हैं, उसमें न जाने कितने काले चिट्ठे होंगे। नाम तो एक दिन सभी भ्रष्टाचारियों के सामने आएंगे, अगले विधानसभा चुनाव परिणाम आने का इंतजार करें।’

गहलोत पर तंज…बहन-बेटियों की सुरक्षा पर बोलना गुनाह कैसे हो गया?
गहलोत पर तंज कसते हुए गुढ़ा ने कहा कि आपने मुझे विधानसभा में भेजा भी इसलिए था कि मैं सच बोलूं। उसके बाद आप जब हमारी बहन-बेटियों की सुरक्षा नहीं कर पाए तो मैं बोल गया, यह गुनाह हो गया? मैं मरते दम तक राजस्थान की, उदयपुरवाटी, शेखावटी की जनता के लिए लड़ता रहूंगा। गौरतलब है कि गुढ़ा ने शुक्रवार को सदन में महिलाओं के बढ़ते अपराधों को लेकर कहा था कि ‘ये स्वीकार करना चाहिए, ये सच्चाई है कि हम महिलाओं की सुरक्षा में असफल हो गए. राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ जिस तरह से अत्याचार बढ़े हैं, मणिपुर की चिंता करने की बजाय हमें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि मुझे तो दूसरा काम भी नहीं आता। मुझे आदत पड़ गई है सच बोलने की। मैंने बस इतना कहा था कि मणिपुर हिंसा पर बात कर रहे हो तो राजस्थान में बढ़ते अत्याचार पर भी देखो। इसमें गलत क्या है। गुढ़ा ने बर्खास्त किए जाने के फैसले पर हमला बोलते हुए कहा कि मुझसे इस्तीफा मांग लेते तो मैं इस्तीफा दे देता। जब मुकदमा होता है तो भी समय दिया जाता है और फिर जज फैसला करता है, लेकिन मुझे तो साजिश के साथ सीधे ही उड़ा दिया गया।

जनता जानना चाहती है कि लाल डायरी की दाल में क्या काला है- शेखावत
इस बीच केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि गहलोत सरकार महिलाओं की सुरक्षा नहीं कर पाई, ये विषय साहस के साथ विधानसभा के पटल पर रखा तो राजेंद्र गुढ़ा को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया। आज राजेंद्र गुढ़ा विधानसभा में एक लाल डायरी लेकर पहुंचे थे। कल उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से ये बताया था कि इस लाल डायरी से सरकार धराशायी हो जाएगी। और आज जब राजेंद्र गुढ़ा उस डायरी को लेकर पहुंचे तो कांग्रेस के नेताओं में उस डायरी को छीनने और फाड़ने की होड़ मच गई। इससे पता चलता है कि दाल में कुछ काला है। आज राजस्थान की जनता ये जानना चाहती है कि लाल डायरी में किस-किसके काले कारनामे छिपे हैं। राजस्थान की जनता ये जानना चाहती है कि गरीब जनता के पैसों से कौन-कौन गुलछर्रे उड़ा रहा था और कौन-कौन अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए उन पैसों का उपयोग कर रहा था।

राजस्थान में हम असफल, मणिपुर के बजाए अपने गिरेबां में झांकना चाहिए-गुढ़ा

अपने खरे-खरे बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहने वाले सैनिक कल्याण मंत्री राजेन्द्र सिंह गुढ़ा ने एक बार फिर अपनी ही कांग्रेस सरकार की आंखें खोल दी हैं। उन्होंने विधानसभा में कहा कि राजस्थान में जिस तरह से महिलाओं पर अत्याचार हुए हैं और लगातार बढ़ रहे हैं, हमें मणिपुर के बजाए अपने गिरेबां में झांकना चाहिए। सैनिक कल्याण मंत्री गुढ़ा की सच्चाई को सीएम गहलोत सह नहीं पाए और उन्होंने 21 जुलाई को देर शाम राज्यपाल से राज्यमंत्री को बर्खास्त करने की अनुशंसा कर दी। राज्यपाल कलराज मिश्र ने सीएम  इस अनुशंसा को तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया है। गुढ़ा पहले भी सरकार के भ्रष्टाचार पर सार्वजनिक रूप से खरी-खरी सुना चुके हैं। पायलट की जनसंघर्ष यात्रा के दौरान गुढ़ा ने कहा था कि हमारी सरकार का एलाइनमेंट खराब हो गया है। सरकार में जो काम होना चाहिए, वह नहीं हो पा रहा है। सरकार भ्रष्टाचार के उन सभी मानकों को पूरा कर चुकी है, जो देश में हो चुके हैं। गहलोत सरकार 40 परसेंट कि करप्शन से बहुत आगे जा चुकी हैं। हालात यह हैं कि शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल के ऑफिस से तो कोई भी फाइल बिना भ्रष्टाचार के आगे नहीं खिसक पाती है।

सरकार के एक मंत्री ने ही सरकार की कलई खोलकर रख दी है- राठौड़

गहलोत सरकार के राज में प्रदेश लगातार महिलाओं से दुष्कर्म के मामले में नंबर वन बना हुआ है। इतना ही नहीं दलित महिलाओं से ज्यादती की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। खुद मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र जोधपुर में दलित युवती से गैंग रेप और चार लोगों को नृशंस हत्या हाल ही में हो चुकी है। यही वजह है कि सैनिक कल्याण मंत्री ने विधानसभा में साफ तौर पर कहा कि यह मान लेना चाहिए कि प्रदेश में हम महिलाओं की सुरक्षा के मामले में असफल रहे हैं। इस पर नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने पाइंट ऑफ ऑर्डर में कहा कि सरकार कलेक्टिव रेस्पॉन्सिबिलिटी से चलती है। संविधान के मुताबिक यदि सरकार का एक मंत्री बोलता है तो इसका मतलब है पूरी सरकार बोलती है। सरकार के एक मंत्री ने सरकार की ही कलई खोलकर रख दी है।

मणिपुर मामले में टिप्पणी का गुढ़ा ने दिया करारा जवाब
राठौड़ ने कहा कि ये बहुत शर्मनाक बात है मर्दों के प्रदेश वाले मंत्री जी। बता दें कि संसदीय कार्य मंत्री धारीवाल ने ही इससे पहले के विधानसभा सत्र में महिलाओं पर रेप के मामले में अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने प्रदेश में बढ़ते रेप के मामलों पर कहा था, रेप के मामले बढ़ तो रहे हैं। मगर क्या करें…राजस्थान मर्दों का प्रदेश है। विपक्ष ने जब इस बयान पर धारीवाल को आड़े हाथों लिया तो उनको माफी तक मांगनी पड़ी थी। दूसरी ओर सैनिक कल्याण मंत्री गुढ़ा का बयान उस संदर्भ में भी देखा जा रहा है, जिसमें सीएम गहलोत ने मणिपुर के मामले में टिप्पणी की थी। राजस्थान के रेपिस्तान के रूप में कुख्यात होने के बावजूद सीएम ने कहा हमारे लिए महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से बढ़कर कुछ भी नहीं है। जोधपुर में भयानक गैंग रेप के बाद तीन आरोपियों को महज दो घंटे में गिरफ्तार कर लिया गया, वहीं मणिपुर की शर्मनाक घटना में सिर्फ एक आरोपी को पकड़ने में 77 दिन लग गए।

दलित महिलाओं से दुष्कर्म और दलितों के खिलाफ अपराधों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। पुलिस-प्रशासन इन्हें रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। पिछले कुछ माह की वारदातों पर एक नजर…

करौली: दलित युवती के साथ हैवानियत की हदें पार
करौली में हाल ही में एक दलित युवती के साथ दरिंदों की कारगुजारी की ऐसी वारदात सामने आई, जिसे सुनकर किसी का भी दिल कांप जाएगा। जिले के नादौती उपखंड की दलित युवती के साथ न सिर्फ गैंगरेप किया गया, बल्कि इसके बाद उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। गैंगरेप करने वाले आरोपियों ने इसके बाद दलित युवती की पहचान छिपाने के लिए चेहरे को एसिड डालकर जला दिया। इसके बाद दरिंदों ने उसको एक कुएं में फेंक दिया। घटना की जानकारी के बाद सांसद किरोडी लाल मीणा हिंडौन सिटी के राजकीय अस्पताल पहुंचे और सरकार को बेपरवाह बताते हुए पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए धरने पर बैठे।

बाड़मेर: दलित महिला को रेप के बाद जिंदा जलाया
राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा में इसी साल अप्रैल माह में एक दलित महिला को बलात्कार के बाद आरोपियों ने जिंदा जला दिया गया। साठ फीसदी झुलसी महिला ने इलाज के दौरान जोधपुर के सरकारी अस्पताल में दम तोड़ दिया। मृतका के पति राजू राम का आरोप है कि उनकी पत्नी के साथ शकूर ख़ान ने बलात्कार किया और थिनर डालकर जिंदा जला दिया। इस बर्बर घटना के खिलाफ मृतका के परिजनों और ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर बालोतरा एसडीएम ऑफिस के सामने धरना भी दिया।

भरतपुर: सगे भाइयों ने किया दलित महिला से गैंगरेप
पूर्वी राजस्थान में दलितों के खिलाफ अपराधों में निरंतर वृद्धि हो रही है। भरतपुर जिले में इसी माह दलित महिला के साथ गैंगरेप की वारदात को दो सगे भाइयों ने ही अंजाम दिया। सेवर थाना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला बाजार में चश्मा सही कराने दुकान पर गई थी। वहां पर मौजूद दो भाई काम कराने के बहाने से उसके घर के अंदर ले गए, जहां दोनों ने दलित महिला के साथ गैंगरेप किया। सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद महिला को किसी को भी बताने पर जान से मरने की धमकी दी।

बीकानेर: रक्षक पुलिस ही बनी भक्षक, रेप के बाद मारा
गत जून माह में बीकानेर के खाजूवाला में एक दलित युवती के साथ पहले रेप करने और बाद में उसकी हत्या करने का सनसनीखेज आरोप भक्षक बनी पुलिस पर ही लगा है। महज बीस साल की इस युवती से एक घर में पहले रेप किया गया और बाद में वहीं मारकर फैंक दिया गया। महिला के पिता ने आरोप लगाया है कांस्टेबल मनोज और भागीरथ एक अन्य युवक के साथ उसे कमरे में ले गए। जहां पहले दुष्कर्म किया और इसके बाद मार दिया। एफआईआर में दो पुलिसकर्मियों के भी नाम आने के बाद पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने दोनों को सस्पेंड कर दिया है।

समाजवादी पार्टी में हिन्दुओं की आस्था से खिलवाड़ करने की पूरी छूट

यह देश की बड़ी विडंबना है कि आज विपक्ष अपनी भूमिका को भूल विभाजनकारी नीतिओं को अपनाकर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहा है। देश में अशांति फैलाकर माहौल ख़राब करने, हर होने वाले चुनाव से पहले #not in my name, #metoo, #intolerance, #award vapsi, #mob lynching, #freedom of expression, #rape, #CAA protest, # farmer protest हिन्दू त्योहारों होली, दीपावली, करवाचौथ और शिवलिंग पर दूध अर्पित करने को अपमानित कर हिन्दू और हिन्दुत्व को बदनाम करने वाले गैंग को समर्थन देकर भाजपा को हराने के असफल प्रयास किए। इन गैंगस्टरों ने विपक्ष को धरातल पर ही पटका है। 

उसका मूल कारण है, क्योकि जो धर्म-निरपेक्षता को ताक पर तुष्टिकरण कर गंगा जमुनी तहजीब के धूर्तपूर्ण नारों को आधार बनाकर अपने देश के गौरवशाली इतिहास को भूल मुग़ल आक्रांताओं को महान बताकर राज करते रहे, लेकिन 2014 चुनाव ने उस पुरानी परिपाटी को पलट दिया है। जिसे तुष्टिकरण पुजारी समझने में पूर्णरूप से असफल हैं। अब चर्चा यह है कि नूपुर शर्मा ने जिस अध्याय को खोला है, वह कट्टरपंथियों और तुष्टिकरण पुजारियों के लिए इस्लाम विरोधी हो सकता है, लेकिन आम मुसलमान के लिए नहीं; क्योकि वह जानते हैं कि नूपुर ने वही बोला जो इस्लामिक किताबों में लिखा है और जिसका अक्सर मौलाना भी अपने प्रवचनों में जिक्र करते रहते हैं। दूसरे, जितना यह विवाद बढ़ेगा, उतनी जल्दी आम मुसलमान इन कट्टरपंथी मुल्लाओं के चुंगल से मुक्त होगा। विवाद केवल इस लिए हो रहा है कि बात एक हिन्दू ने कही है। देखिए वीडियो। दूसरे वीडियो में जो बात मौलाना शब्बीर अली वारसी ने कही है, अगर वही किसी गैर-मुस्लिम  बोल दे, कट्टरपंथी इस्लाम पर हमला बोल हंगामा कर रहे होते, जैसाकि नूपुर शर्मा यानि हिन्दू के विरुद्ध हो रहा है।  

 

समाजवादी पार्टी का हिन्दू विरोधी चेहरा फिर बेनकाब हुआ है। मुस्लिम तुष्टिकरण की वजह से अंधी हो चुकी इस पार्टी में हिन्दू धर्म और हिन्दुओं के पक्ष में बोलना गुनाह है। अगर कोई कार्यकर्ता और नेता हिन्दू और हिन्दुओं के पक्ष में खड़ा होता है, तो उसे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी को लेकर बीजेपी से निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा मुस्लिम कट्टरपंथियों के निशाने पर है। इसी बीच सपा के एक नेता अंकुर यादव ने नूपुर शर्मा के पक्ष में बयान देकर अखिलेश यादव को नाराज कर दिया।

अंकुर को नूपुर को समर्थन देने की मिली सजा

यूपी के बागपत जिले में सपा छात्र सभा के जिलाध्यक्ष अंकुर यादव ने फेसबुक पर अपने पोस्ट में नूपुर का साथ देने की बात कही थी। अंकुर ने अपने पोस्ट में लिखा, ”किसी पार्टी को समर्थन देने या विरोध करने की बात अलग है। हालांकि, नूपुर शर्मा को मेरा पूरा समर्थन है और हर हिंदू को बहन नूपुर के साथ खड़ा होना चाहिए। वह महादेव के खिलाफ भी कैसे सुनेगी? कोई भी धर्म या शास्त्र आपको मुसीबत के समय अपने घर की महिलाओं को अकेला छोड़ना नहीं सिखाता है।”

अंकुर को बिना कारण बताये पार्टी से निकाला

नूपुर शर्मा को एक हिन्दू बहन मानकर समर्थन देने की बात अखिलेश यादव को नागवार गुजरी। उनके निर्देश पर सपा छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह देव ने अंकुर को सपा से निकालने का फरमान जारी कर दिया। जिसमें लिखा गया, “जिला बागपत के ग्राम शंकरनगर निवासी श्री अंकुर यादव को पार्टी में उनके पद से मुक्त कर दिया गया है।” इसमें अंकुर के खिलाफ कार्रवाई का कारण नहीं बताया गया। अंकुर ने खुद निलंबन पत्र साझा करते हुए ट्वीट किया,”पद से दूर रहें। आपको धन्यवाद।”  

हिन्दुओं के पक्ष में बोलने पर रुबीना खानम पर गिरी गाज

ये पहली बार नहीं है, जब अखिलेश यादव ने किसी हिंदू या हिंदुओं का साथ देने की बात पर पार्टी के किसी नेता को निकाल बाहर किया हो। कुछ दिन पहले उन्होंने सपा की महिला मुस्लिम नेता रुबीना खानम को पार्टी से निकाल दिया था। रुबीना ने इतना कहा था कि अगर ये बात साबित हो जाती है कि ज्ञानवापी मस्जिद को मंदिर को तोड़कर बनाया गया, तो हमारे कौम को वो जमीन हिंदुओं को दे देनी चाहिए। इससे पहले हिजाब और लाउड स्पीकर को लेकर रुबीना खानम ने भड़काऊ बयान दिया था, तब अखिलेश यादव ने कोई कार्रवाई नहीं की थी।

सपा में हिन्दुओं की आस्था से खिलवाड़ करने की पूरी छूट

style="font-weight: 400;">समाजवादी पार्टी में हिन्दू धर्म और हिन्दुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने की पूरी छूट है। पार्टी के नेता मुस्लिमों को खुश करने के लिए देवी-देवताओं का खुलकर अपमान करते हैं। लेकिन पार्टी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती है। सपा के एमएलसी और पेशे से शिक्षक लाल बिहारी यादव ने शिव लिंग पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। लेकिन समाजवादी पार्टी ने उनके खिलाफ कर्रवाई न कर साबित कर दिया है कि वो हिन्दू विरोधी है।

उत्तर प्रदेश : टिकट बँटवारे पर घमासान: गाँधी परिवार के करीबी के साथ बलरामपुर में मारपीट

प्रियंका गाँधी के साथ पटेल (फोटो साभार: आजतक)
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के हलचल के बीच कांग्रेस के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी के साथ उनकी ही की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मारपीट और अभद्रता की। इस पर कांग्रेस ने कार्रवाई करते हुए चार कार्यकर्ताओँ को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

प्रदेश के बलरामपुर में वीआईपी गेस्ट हाउस में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सत्य नारायण पटेल के साथ मारपीट करने के मामले में पार्टी ने जिलाध्यक्ष अनुज सिंह, जिला उपाध्यक्ष अख्तर हुसैन, जिला महासचिव विनय मिश्रा और सेवा दल के अध्यक्ष दीपक मिश्रा को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है। वहीं, अनुज सिंह ने इन आरोपों को निराधार बताया है।

कांग्रेस ने जिले के सभी विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी तय कर दिए हैं। बलरामपुर से बविता आर्य, उतरौला से धीरेन्द्र प्रताप सिंह धीरू, तुलसीपुर से दीपेन्द्र सिंह दीपांकर और गैसड़ी से डॉ. इस्तियाक अहमद खाँ को टिकट दिया है। बताया जाता है कि इसी सिलसिले में 4 फरवरी 2022 को श्रावस्ती स्थित वीआईवी गेस्ट हाउस में पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सत्य नारायण पटेल कार्यकर्ताओं, आवेदकों और प्रत्याशियों के साथ अलग-अलग विचार विमर्श कर रहे थे। इसी दौरान ये सभी आरोपी वहाँ पहुँच गए और उनके साथ मारपीट की।

कांग्रेस अनुशासन समिति का कहना है कि इन लोगों ने राष्ट्रीय सचिव के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन पर हमला किया और मारपीट की। यह घटना घोर अनुशासनहीनता है। अनुज कुमार सिंह ने अपने आवास पर पत्रकारों को बताया कि उनके ऊपर लगाए सारे आरोप निराधार हैं। उन्होंने कोई अनुशासनहीनता नहीं की है। टिकट बँटवारे को लेकर कार्यकर्ताओं में थोड़ी बहुत नाराजगी जरूर थी।

अनुज ने कहा, “30 साल से मैं पार्टी का अनुशासित सिपाही रहा हूँ। मेरे खिलाफ लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद हैं। उनसे मारपीट नहीं की गई, बल्कि उनसे कुछ लोग अभद्रता कर रहे थे और वे उन्हें बचाने के प्रयास कर रहे थे। मैंने अपनी बात पार्टी फोरम पर रखी है और सोनिया गाँधी जी के समक्ष भी अपनी बात रखूँगा।”

कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सत्यनारायण पटेल मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से दो बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक रहे हैं। उन्हें सोनिया गाँधी और प्रियंका गाँधी का बेहद खास माना जाता है।

कांग्रेस लता मंगेशकर का ‘भारत रत्न’ छीनना चाहती थी, वीर सावरकर की कविता पर भाई को निकाला था AIR से

सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर अब इस दुनिया में नहीं रहीं। 6 फरवरी, 2022 को उनका निधन हो गया। ये तो कई लोगों को पता है कि मंगेशकर परिवार के वीर विनायक दामोदर सावरकर से काफी अच्छे रिश्ते थे। लेकिन, ये कम ही लोगों को पता है कि कैसे ‘ऑल इंडिया रेडियो (AIR)’ ने लता मंगेशकर के भाई हृदयनाथ मंगेशकर को सिर्फ इसीलिए निकाल दिया था, क्योंकि उन्होंने वीर सावरकर द्वारा लिखी एक कविता गाई थी। वीर सावरकर ने इंग्लैंड में ही ‘सागरा प्राण तळमळला’ नामक ये कविता लिखी थी।

इस कविता में वीर सावरकर समुद्र से गुहार लगा रहे हैं कि वो उन्हें उनकी मातृभूमि तक ले जाए, क्योंकि अब यहाँ उनका जीना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने भारत की सुंदरता का वर्णन करते हुए लिखा है कि कैसे समुद्र को उन्होंने भारत माता के पाँव धोते हुए देखा है। वो समुद्र से कह रहे हैं कि उसने उनसे वादा किया था कि बाहर की दुनिया दिखाने के बाद वो उन्हें वापस अपनी मातृभूमि ले जाएगा। इस कविता में अपनी जन्मभूमि से अलगाव की पीड़ा है। एक परदेशी को उसकी मातृभूमि की याद सताती है, उसे इसमें दर्शाया गया है।

एक समय में हृदयनाथ और उनकी बहनें, लता मंगेशकर और उषा मंगेशकर वीर सावरकर की कविता को संगीतबद्ध कर चुके थे। लेकिन कांग्रेस को यह चीज नहीं पसंद आई और उन्होंने पंडित हृदयनाथ को AIR से निकलवा दिया। इस बात को स्वयं हृदयनाथ मंगेशकर ने कई सालों बाद एबीपी माझा को दिए इंटरव्यू में कहा था। उन्होंने 53 मिनट के इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें एक बार AIR की नौकरी से हाथ धोना पड़ा था, सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने वीर सावरकर की प्रतिष्ठित कविता का एक संगीतमय गायन बनाने का साहस किया था जिसमें उन्होंने उन्हें मातृभूमि में वापस ले जाने के लिए समुद्र की प्रशंसा की थी।

अपने मराठी इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “मैं उस समय ऑल इंडिया रेडियो में काम कर रहा था। मैं 17 साल का था और मेरी तनख्वाह 500 रुपए प्रति माह थी। यह आज मूंगफली भर हो सकती है, लेकिन उस समय 500 रुपए एक बड़ा मोटा वेतन माना जाता था … संक्षेप में कहूँ तो मुझे ऑल इंडिया रेडियो से निकाल दिया गया था क्योंकि मैंने वीर सावरकर की प्रसिद्ध कविता ‘ने मजसी ने परत मातृभूमि, सागर प्राण’ के लिए एक संगीत रचना बनाने का विकल्प चुना था।”

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लता मंगेशकर का 92 साल की उम्र में निधन

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लता मंगेशकर का 92 साल की उम्र में निधन
बॉलीवुड की मशहूर गायिका और स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshk

एक ऐसा समय भी आया था, जब कांग्रेस पार्टी ने लता मंगेशकर को दिए गए ‘भारत रत्न’ अवॉर्ड छीनने की माँग की थी। ये सभी को पता है कि जनवरी 1963 में लता मंगेशकर ने जब ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाना शुरू किया, तब नेहरू की आँखों में आँसू आ गए। 2013 में लता मंगेशकर ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की थी। जनार्दन चांदुरकर उस समय मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष थे। उन्होंने तत्काल केंद्र सरकार से माँग कर दी थी कि लता मंगेशकर को दिया गया ‘भारत रत्न’ अवॉर्ड छीन लेना चाहिए।