Showing posts with label #Rubina Khanum. Show all posts
Showing posts with label #Rubina Khanum. Show all posts

समाजवादी पार्टी में हिन्दुओं की आस्था से खिलवाड़ करने की पूरी छूट

यह देश की बड़ी विडंबना है कि आज विपक्ष अपनी भूमिका को भूल विभाजनकारी नीतिओं को अपनाकर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहा है। देश में अशांति फैलाकर माहौल ख़राब करने, हर होने वाले चुनाव से पहले #not in my name, #metoo, #intolerance, #award vapsi, #mob lynching, #freedom of expression, #rape, #CAA protest, # farmer protest हिन्दू त्योहारों होली, दीपावली, करवाचौथ और शिवलिंग पर दूध अर्पित करने को अपमानित कर हिन्दू और हिन्दुत्व को बदनाम करने वाले गैंग को समर्थन देकर भाजपा को हराने के असफल प्रयास किए। इन गैंगस्टरों ने विपक्ष को धरातल पर ही पटका है। 

उसका मूल कारण है, क्योकि जो धर्म-निरपेक्षता को ताक पर तुष्टिकरण कर गंगा जमुनी तहजीब के धूर्तपूर्ण नारों को आधार बनाकर अपने देश के गौरवशाली इतिहास को भूल मुग़ल आक्रांताओं को महान बताकर राज करते रहे, लेकिन 2014 चुनाव ने उस पुरानी परिपाटी को पलट दिया है। जिसे तुष्टिकरण पुजारी समझने में पूर्णरूप से असफल हैं। अब चर्चा यह है कि नूपुर शर्मा ने जिस अध्याय को खोला है, वह कट्टरपंथियों और तुष्टिकरण पुजारियों के लिए इस्लाम विरोधी हो सकता है, लेकिन आम मुसलमान के लिए नहीं; क्योकि वह जानते हैं कि नूपुर ने वही बोला जो इस्लामिक किताबों में लिखा है और जिसका अक्सर मौलाना भी अपने प्रवचनों में जिक्र करते रहते हैं। दूसरे, जितना यह विवाद बढ़ेगा, उतनी जल्दी आम मुसलमान इन कट्टरपंथी मुल्लाओं के चुंगल से मुक्त होगा। विवाद केवल इस लिए हो रहा है कि बात एक हिन्दू ने कही है। देखिए वीडियो। दूसरे वीडियो में जो बात मौलाना शब्बीर अली वारसी ने कही है, अगर वही किसी गैर-मुस्लिम  बोल दे, कट्टरपंथी इस्लाम पर हमला बोल हंगामा कर रहे होते, जैसाकि नूपुर शर्मा यानि हिन्दू के विरुद्ध हो रहा है।  

 

समाजवादी पार्टी का हिन्दू विरोधी चेहरा फिर बेनकाब हुआ है। मुस्लिम तुष्टिकरण की वजह से अंधी हो चुकी इस पार्टी में हिन्दू धर्म और हिन्दुओं के पक्ष में बोलना गुनाह है। अगर कोई कार्यकर्ता और नेता हिन्दू और हिन्दुओं के पक्ष में खड़ा होता है, तो उसे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी को लेकर बीजेपी से निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा मुस्लिम कट्टरपंथियों के निशाने पर है। इसी बीच सपा के एक नेता अंकुर यादव ने नूपुर शर्मा के पक्ष में बयान देकर अखिलेश यादव को नाराज कर दिया।

अंकुर को नूपुर को समर्थन देने की मिली सजा

यूपी के बागपत जिले में सपा छात्र सभा के जिलाध्यक्ष अंकुर यादव ने फेसबुक पर अपने पोस्ट में नूपुर का साथ देने की बात कही थी। अंकुर ने अपने पोस्ट में लिखा, ”किसी पार्टी को समर्थन देने या विरोध करने की बात अलग है। हालांकि, नूपुर शर्मा को मेरा पूरा समर्थन है और हर हिंदू को बहन नूपुर के साथ खड़ा होना चाहिए। वह महादेव के खिलाफ भी कैसे सुनेगी? कोई भी धर्म या शास्त्र आपको मुसीबत के समय अपने घर की महिलाओं को अकेला छोड़ना नहीं सिखाता है।”

अंकुर को बिना कारण बताये पार्टी से निकाला

नूपुर शर्मा को एक हिन्दू बहन मानकर समर्थन देने की बात अखिलेश यादव को नागवार गुजरी। उनके निर्देश पर सपा छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह देव ने अंकुर को सपा से निकालने का फरमान जारी कर दिया। जिसमें लिखा गया, “जिला बागपत के ग्राम शंकरनगर निवासी श्री अंकुर यादव को पार्टी में उनके पद से मुक्त कर दिया गया है।” इसमें अंकुर के खिलाफ कार्रवाई का कारण नहीं बताया गया। अंकुर ने खुद निलंबन पत्र साझा करते हुए ट्वीट किया,”पद से दूर रहें। आपको धन्यवाद।”  

हिन्दुओं के पक्ष में बोलने पर रुबीना खानम पर गिरी गाज

ये पहली बार नहीं है, जब अखिलेश यादव ने किसी हिंदू या हिंदुओं का साथ देने की बात पर पार्टी के किसी नेता को निकाल बाहर किया हो। कुछ दिन पहले उन्होंने सपा की महिला मुस्लिम नेता रुबीना खानम को पार्टी से निकाल दिया था। रुबीना ने इतना कहा था कि अगर ये बात साबित हो जाती है कि ज्ञानवापी मस्जिद को मंदिर को तोड़कर बनाया गया, तो हमारे कौम को वो जमीन हिंदुओं को दे देनी चाहिए। इससे पहले हिजाब और लाउड स्पीकर को लेकर रुबीना खानम ने भड़काऊ बयान दिया था, तब अखिलेश यादव ने कोई कार्रवाई नहीं की थी।

सपा में हिन्दुओं की आस्था से खिलवाड़ करने की पूरी छूट

style="font-weight: 400;">समाजवादी पार्टी में हिन्दू धर्म और हिन्दुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने की पूरी छूट है। पार्टी के नेता मुस्लिमों को खुश करने के लिए देवी-देवताओं का खुलकर अपमान करते हैं। लेकिन पार्टी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती है। सपा के एमएलसी और पेशे से शिक्षक लाल बिहारी यादव ने शिव लिंग पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। लेकिन समाजवादी पार्टी ने उनके खिलाफ कर्रवाई न कर साबित कर दिया है कि वो हिन्दू विरोधी है।

‘हिजाब पर हाथ डाला तो काट देंगे हाथ’ : सपा की महिला नेता रुबिना खानुम

                                                                      रुबिना खानुम 
कर्नाटक के पी यू कॉलेज से शुरू हुए हिजाब विवाद पर धीरे-धीरे कट्टरपंथी बयानों का ढेर लगता जा रहा है। समाजवादी पार्टी की नेता रुबिना खानुम (रुबिना खानम) ने हाल में बयान दिया था कि अगर किसी ने हिजाब पर हाथ डालने की कोशिश की तो वह उस व्यक्ति का हाथ काट देंगी।

अपनी वीडियो में उन्होंने कहा था,

“मैं रुबिना खानुम, अलीगढ़ की वरिष्ठ सपा नेता हूँ। कर्नाटक हिजाब प्रकरण का जो मुद्दा है ये हमारे देश की बहन-बेटियों पर हमला है। हमारे हिजाब पर, आंचल पर हाथ डालने वालों के हम हाथ काट देंगे। भारत विभिन्नताओं का देश है। यहाँ पर माथे का तिलक हो, पगड़ी हो, हिजाब हो… ये सब भारत की संस्कृति का हिस्सा हैं। इस पर राजनीति करना मतलबीपन की पराकाष्ठा है। अब ये कलयुगी रावण हमारे आंचल का, हिजाब का चीरहरण करेंगे। मैं इनसे कहना चाहती हूँ महिलाओं को कमजोर समझने की भूल न करें। अरे सरकार जिस पार्टी की भी हो। अगर महिलाओं के आँचल या हिजाब पर हाथ डालने का प्रयास करोगे तो हम झांसी की रानी और रजिया सुल्तान बनकर तुम्हारे हाथ काट डालेंगे।”

माफी माँगने से रुबिना खानुम ने किया मना

अब इन्हीं रुबिना ने टाइम्स नाऊ से बात करते हुए अपने इस विवादित बयान का जमकर समर्थन किया है। रुबिना से जब मीडिया चैनल ने बात की तो एंकर ने उनसे कहा कि ये शब्द उन्होंने आवेश में तो नहीं कहे, लेकिन रुबिना अपनी बात पर कायम रहीं और हिजाब छूने वाले के हाथ को तन से जुदा करने की बात पर डटी रहीं। उन्होंने कहा कि ये सोचा-समझा बयान था।
हालाँकि, जब बाद में एंकर ने रुबिना की बातों को दोहराना शुरू किया तो फौरन वो उससे पलटने लगीं और दावा किया कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मैं बस कह रही थी कि अगर हजारों लड़कों की भीड़ ने सिर से पर्दा हटाने का प्रयास किया तो मैं उनके हाथ काटूँगी।” एंकर ने ये सुन फिर से सपा नेत्री को समझाया कि उनके साथ यदि ऐसी कोई घटना हो तो उन्हें थाने जाना चाहिए न कि किसी के तन से उसके हाथ जुदा करने की बातें कहनी चाहिए। इस पर रुबिना ने कहा कि उन्होंने कोई भी गलत बातें नहीं कहीं। उन्होंने सिर्फ भारत की बहन बेटियों की इज्जत और सम्मान में आवाज उठाई है।
कर्नाटक से शुरू हुआ हिजाब विवाद मामला फिलहाल कर्नाटक हाईकोर्ट में है। बहस इस बात को लेकर है कि आखिर शैक्षणिक संस्थान जहाँ पर समानता के गुण सिखाने के लिए एक यूनिफॉर्म को लागू किया जाता है, वहाँ आखिर मजहबी लिबाज में क्लास लेना कितना उचित है कितना नहीं। रुबिना से पहले महाराष्ट्र में एक बुर्काधारी महिला ने पीएम मोदी पर इस मुद्दे को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और कहा था कि उन्हें जिंदा जलाया जाना चाहिए।