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ग्रुप सेक्स का ऑफर देने वाले पाटर्नर को इटली की PM ने छोड़ा, 10 साल से रिश्ते में थीं जियोर्जिया मेलोनी

                                     इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी (फोटो साभार: EWN)
इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने अपने बॉयफ्रेंड एंड्रिया जियाम्ब्रुनो के साथ रिश्ते को खत्म करने की घोषणा की है। उनके बॉयफ्रेंड जियाम्ब्रुनो पत्रकार हैं और महिला विरोधी टिप्पणी की वजह से पिछले कुछ समय से चर्चा में हैं। वे इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी के परिवार द्वारा चलाए जा रहे एमएफई मीडिया समूह के लिए काम करते हैं।

कुछ समय पहले जियाम्ब्रुनो एक महिला सहकर्मी से ‘तुम मुझे पहले क्यों नहीं मिली’ कहते सुने गए थे। यही नहीं, उन्होंने अपनी एक महिला सहकर्मियों को ‘ग्रुप सेक्स’ के लिए भी कहा था। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर वो लोग ‘ग्रुप सेक्स’ में शामिल होती हैं, तभी उनके साथ काम कर सकती हैं। ये स्पष्ट तौर पर कार्यस्थल पर यौन शोषण का मामला है।

जियाम्ब्रुनो इटली के वरिष्ठ पत्रकार हैं और मेलोनी के साथ पिछले 10 साल से रिलेशनशिप में थे। दोनों की एक 7 साल की बच्ची भी है, जिसका नाम गिनेवरा है। वो मीडियासेट टीवी चैनल के लिए काम करते हैं। उन्होंने कई बार ऑन एयर महिलाओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है।

इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री के तौर पर एक साल का कार्यकाल पूरा करने वाली 46 वर्षीया जियोर्जिया मेलोनी से पत्रकारों ने इस मामले पर उनसे सवाल किया था। इस पर जियोर्जिया मेलोनी ने कहा था कि वो अपने पार्टनर की टिप्पणियों के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। इसलिए उनसे इस बारे में कोई सवाल न पूछा जाए।

महिलाओं पर अभद्र टिप्पणियाँ बनीं अलगाव की वजह

रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, एमएफई मीडिया समूह की मीडियासेट चैनल पर एंड्रिया जियाम्ब्रुनो एक शो होस्ट करते हैं। उस शो की होस्टिंग के दौरान जब ब्रेक हुआ था, तब उन्होंने महिला सहकर्मियों पर गलत टिप्पणी की थी। यही नहीं, उन्होंने कुछ समय पहले कहा था कि महिलाएँ ज्यादा शराब न पीकर ‘गैंगरेप’ से बच सकती हैं।
जियाम्ब्रुनो ने कहा था, “अगर आप डांस करने जाते हैं तो आपको नशे में होने का पूरा हक है, लेकिन नशे में होने के बावजूद आपको खुद को भुलाना नहीं है, वरना भेड़ियों के चंगुल में फँसने का खतरा रहेगा।” ऐसे ही एक अन्य सहकर्मी से उन्होंने कहा था कि ‘तुम मुझे पहले क्यों नहीं मिली’। उनके कहने का मतलब साफ था कि वो उसकी तरफ आकर्षित थे।

मेलोनी ने एक्स पर की अलगाव की घोषणा

इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर अपनी और एंड्रिया जियाम्ब्रुनो के रिश्ते के खत्म होने की घोषणा की। मेलोनी ने ट्वीट में लिखा कि वह जियाम्ब्रुनो के साथ बिताए अच्छे समय के लिए आभारी हैं और उन्होंने उन्हें जिंदगी की सबसे महत्वपूर्ण चीज दी है, जो कि उनकी बेटी है।
हालाँकि, मेलोनी ने यह भी स्वीकार किया कि अब 42 वर्षीय एंड्रयू जियाम्ब्रुनो के साथ उनके रास्ते अलग हो गए हैं और यह समय है कि इसे स्वीकार कर लिया जाए। मेलोनी ने लिखा कि वह अपने रिश्ते, अपनी दोस्ती और अपनी बेटी की रक्षा करेंगी।
मेलोनी ने उन लोगों को एक संदेश भेजा जो उनके निजी जीवन पर हमला करके उन्हें कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह मजबूत और लचीली हैं और उनके हमलों से वह नहीं टूटेंगी। मेलोनी का ट्वीट उनके रिश्ते के अंत के बारे में एक स्पष्ट और दिल की बात है।
जियोर्जिया मेलोनी और उनके बॉयफ्रेंड की मुलाकात साल 2014 में एक टीवी शो के दौरान ही हुई थी। एंड्रिया जियाम्ब्रुनो तब चैनल के शो की स्क्रिप्ट लिखते थे। इसके बाद दोनों करीब आए। दोनों ने शादी नहीं की थी, लेकिन साथ रह रहे थे। हालाँकि अब दोनों के रास्ते अलग हो चुके हैं।

लिंग को बताता ‘मैजिक फ्लूट’ खुद को ‘लिंगों का पादरी’, महिलाओं का ‘सेक्स’ से करता इलाज: अधनंगा पकड़ा गया तो कहा- शोध कर रहा था

बीमार महिलाओं को इलाज के लिए डॉक्टर देता था ‘सेक्स’ का ऑफर (साभार: Dailymail)
इटली में सेक्स के जरिए बीमारी ठीक करने का दावा करने वाले डॉक्टर को एक होटल से अर्द्धनग्न अवस्था में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के वक्त आरोपित डॉक्टर एक ‘बीमार मरीज’ से सेक्स करने के लिए कपड़े खोल रहा था। इटली के इस डॉक्टर का दावा है कि वह सेक्स के माध्यम से बीमारियों को ठीक करने की पद्धति पर रिसर्च कर रहा है।

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. मैजिक फ्लूट के नाम से पहचाने जाने वाले इस डॉक्टर का असली नाम डॉ. जियोवानी मिनिएलो है और इसकी उम्र 60 साल है। होटल से पकड़े जाने के बाद डॉ. मैजिक फ्लूट ने इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने से पहले जो दावे इस डॉक्टर ने किए हैं, उसे सुनकर बड़े-बड़े डॉक्टर अपना माथा पीट रहे हैं। डॉक्टर ने दावा किया है कि वह होटल के कमरे में महिला के साथ सेक्स कर उसकी गुप्त बीमारी का इलाज कर रहा था। वह अपने लिंग (Penis) को ‘मैजिक फ्लूट’ और ‘पाड्रे पियो ऑफ पेनिसेस’ कहता था। बता दें कि पाड्रे पियो 20वीं सदी का एक पादरी था, जो चमत्कार से ‘इलाज’ के लिए जाना जाता था।

डॉक्टर की हरकत उस वक्त सामने आई, जब एक 33 वर्षीय महिला मरीज अन्ना मारिया ने इतालवी अखबार ‘ला रिपब्लिका’ और इन्वेस्टिगेटिव टीवी शो ‘ले लेने’ से संपर्क किया। महिला ने आरोप लगाया कि गर्भधारण नहीं होने को लेकर उसने डॉक्टर को बताया। इसके बाद डॉक्टर ने मारिया को बुलाया और उसके स्तनों (breast) को अनुचित तरीके से छूते हुए कहा कि उसे छोटे स्तनों वाली महिलाएँ पसंद हैं। महिला के अनुसार, डॉक्टर ने बताया कि उसके गर्भाशय पर ‘सफेद धब्बे’ हैं, जो एचपीवी की उपस्थिति के संकेत हैं। इसके बाद उसने उसके साथ सेक्स करने की पेशकश की। डॉक्टर ने यह भी दावा किया कि उसके साथ यौन संबंध बनाने के बाद उसके शरीर में वायरस ले लड़ने वाले एंटी बॉडी पहुँच जाएँगे, जिससे उसकी बीमारी ठीक हो जाएगी।

इसकी पड़ताल के लिए चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन करने का फैसला किया और एक एक्ट्रेस को हायर कर उसे मरीज के रूप में डॉक्टर के पास भेजा। उसने चैनल द्वारा भेजी गई एक्ट्रेस से कहा कि उसे ह्यूमन पेपिलोमावायरस (HPV) है और इससे कैंसर हो सकता है। जबकि अभिनेत्री का टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव था। डॉक्टर ने कहा कि वह उसके साथ यौन संबंध बनाकर उसे वायरस के लिए इम्यूनिटी दे सकता है, क्योंकि उसे टीका लग गया है। लेकिन उसके शरीर में वैक्सीन तभी जा पाएगी, जब वो उसके साथ संबंध बनाएगी। 

डॉक्टर इस बात से बेखबर था कि जिस ‘मरीज’ से वो बात कर रहा है, असल में वह न्यूज चैनल की ओर से भेजी गई एक्ट्रेस है। मरीज बनने का नाटक करने वाली अभिनेत्री डॉक्टर के साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो गई। वह उसे होटल में ले गया और इस बात से अनजान की उसकी सारी हरकतें कैमरे में रिकॉर्ड हो रही हैं, उसने अपने कपड़े उतार दिए। वहीं, अंडरकवर अभिनेत्री ने जब डॉक्टर को कंडोम लगाने के लिए कहा तो डॉक्टर ने कहा कि अगर वो कंडोम पहनकर सेक्स करेगा तो उसके शरीर में वायरस से लड़ने वाले एंटी बॉडी नहीं जाएगा।

इससे पहले कि डॉक्टर अभिनेत्री के साथ कुछ कर पाता, चैनल के पत्रकार वहाँ पहुँच गए। कमरे में रिपोर्टर को देखकर डॉक्टर के पैरों तले जमीन खिसक गई और वो कहने लगा कि वो रिसर्च के लिए सेक्स कर रहा है और वो महिलाओं की जान बचाने की कोशिश कर रहा है। डॉक्टर ने कहा- “मैं यह अपनी स्टडी के लिए कर रहा हूँ। मैंने कई लोगों को बचाया है।” लेकिन अगले ही पल जब उसे पता चला कि वो स्टिंग ऑपरेशन में बेनकाब हो गया है, तो चौंक उठा।

पकड़े जाने के बाद अपने वकील के माध्यम से डॉक्टर ने कहा, ”मैंने पिछले 40 सालों से ज्यादा के करियर में सैकड़ों महिलाओं का सफलतापूर्वक इलाज किया है और इस वैकल्पिक उपचार के अच्छे परिणाम सामने आए हैं।” डॉक्टर ने कहा कि उसने कभी भी महिलाओं को अपने साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर नहीं किया। स्टिंग ऑपरेशन के बाद 15 और महिलाएँ सामने आईं हैं, जिन्होंने डॉक्टर पर बीमारी के इलाज के नाम पर सेक्स करने का आरोप लगाया है। खुलासा होने के बाद कई महिलाएँ ने उसकी शिकायत दर्ज करवाई है और अब सरकार ने आरोपित डॉक्टर के खिलाफ जाँच के आदेश दे दिए हैं।

CARA में ईसाई मिशनरी गिरोह : कोरोना के दौरान भारत से अनाथ बच्चों को इटली, माल्टा, जॉर्डन भेजा गया

दीपक कुमार, CARA, ईसाई, स्मृतिअनाथ बच्चों के दत्तक प्रक्रिया का नियमन करने वाली संस्था केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के सीईओ/मेंबर सेक्रेटरी दीपक कुमार को पद से हटाने के निर्णय के बाद कई खुलासे हो रहे हैं। ऑपइंडिया के सूत्रों का कहना है कि दीपक कुमार की अगुवाई में कारा में एडॉप्शन प्रक्रिया की धज्जियाँ उड़ाने की अनेक सूचनाएँ प्राप्त हुई हैं। ईसाई मिशनरियों का बोलबाला रहा। इनकी तानाशाही और अवैधानिक कार्यशैली के तमाम किस्से हैं जो अबतक दबाए जाते रहे हैं।
ईसाई मिशनरीज से दीपक कुमार की सांठगांठ  
मंत्रालय में दीपक कुमार के खिलाफ मिली दर्जनों शिकायतों को नजरअंदाज करने में वहाँ के एक शीर्ष ईसाई अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। यह भी जानकारी मिली है कि उसी बड़े अधिकारी ने दीपक कुमार का कार्यकाल बढ़ाने के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने की कोशिश भी की लेकिन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने दीपक कुमार का कार्यकाल बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया और हटाने का फरमान सुना दिया।
आश्चर्य की बात है कि मंत्रालय के उक्त तथाकथित ईसाई अधिकारी ने दीपक कुमार के रिलिविंग लेटर को भी रोक रखा था। आमतौर पर किसी प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी को तीस दिन पूर्व रिलीव होने की सूचना दे दी जाती है लेकिन यहाँ दीपक कुमार के मामले में उन्हें मात्र एक सप्ताह पूर्व पत्र जारी किया गया। ऑपइंडिया के हाथ लगे दस्तावेजों के अनुसार, दीपक कुमार के कार्यकाल में प्रवासी भारतीयों (NRI) को बच्चा गोद लेने के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ता है।
ऐसे भारतीयों को कारा से बच्चा गोद लेने के लिए तीन से सात साल तक प्रतीक्षा सूची में रहना पड़ता है लेकिन विदेशी ईसाई परिवारों को बहुत कम समय में बच्चा मिल जाता है। ईसाई मिशनरियों के प्रभाव का आलम यह है कि कारा के सीईओ दीपक कुमार ने कोरोना संकट और लॉकडाउन के समय भी बच्चों को विदेश भेजा। अप्रैल माह में भी विशेष विमान से ये बच्चे इटली, अमेरिका, माल्टा और जॉर्डन भेजे गए।
हैरान करने वाली बात यह भी है कि जिस समय विशेष विमान से इटली बच्चे भेजे गए, उस समय इटली में कोरोना से मौतों का कोहराम मचा हुआ था। कोरोना से वहाँ दुनिया में सर्वाधिक मौतें हो रही थीं और स्थिति ये थी कि लाशें उठाने वाले भी लोग नहीं थे। अमेरिका की भी यही स्थिति थी। प्रवासी भारतीयों को प्रतीक्षासूची में रखना और इटली वाले ईसाईयों को विशेष विमान से कोरोना काल में बच्चे भेजने की व्यवस्था करने में दीपक कुमार की मंशा सवालों के घेरे में है।
ऑपइंडिया ने अंदरूनी सूत्रों से बात कर के पाया है कि विदेशी एडॉप्शन कराने वाली एजेंसियाँ अप्रत्यक्ष रूप से कारा के उच्च अधिकारियों को आर्थिक फायदा पहुँचाती हैं और मनमाने तरीके से काम करवाने में सफल हो जाती हैं। कहने को यह मामला मानवीय दृष्टि से सही जताया जा सकता है लेकिन जिस प्रकार की तेजी विदेशियों के मामले में दीपक कुमार द्वारा दिखाई जाती है वह उनकी कार्यशैली को संदेहास्पद बनाती है।
वर्ष 2016 में दीपक कुमार के कारा में कार्यभार संभालने के बाद से अप्रत्याशित रूप से विदेशी एडॉप्शन में बढ़ोत्तरी हुई है। आँकड़े बयान करते हैं कि दीपक कुमार के आने के बाद देश के भीतर गोद लेने की संख्या घटी और विदेशों में बच्चे भेजने की संख्या बढ़ गई। दिलचस्प यह है कि ज्यादातर बच्चों को ‘विशेष आवश्यकता (Special Need)’ की केटेगरी में डाल कर फॉरेन एडॉप्शन का खेल जारी है।
ऐसे ही एक मामले में CARA में बच्चों के हित के विरुद्ध कार्यशैली पर दीपक कुमार के विरुद्ध बाम्बे हाइकोर्ट में याचिका सं FAP-41-19 (फ़रवरी 17, 2020) तथा जबलपुर हाइकोर्ट द्वारा Writ Petition No. 28071/2018 (मार्च 19, 2020) में कोर्ट ने फटकार भी लगाई थी। दीपक कुमार ने अपनी एक टीम बना रखी थी, जिसमें दर्जन भर ऐसी महिलाओं की संविदा पर नियुक्ति कर रखी है जिनमें से अधिकांश ईसाई समुदाय से आती हैं और ‘Young Women’s Christian Association’ से किसी न किसी रूप में जुड़ी हैं।
CARA में ईसाई महिलाओं का बोलबाला 
इनमें Cecilia Maria और Libia Marium Paul जैसी कई ईसाई महिलाएँ हैं जो दत्तक प्रक्रिया को मनमाने ढंग से अंजाम दे रही हैं। गौरतलब है कि Cecilia Maria को अज्ञात कारणों से दो माह के भीतर ही जूनियर से सीनियर प्रोफेशनल के पद पर प्रमोट कर दिया गया। आश्चर्य है कि इनका दत्तक कार्यों से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। बताया जाता है कि ये पहले किसी मिशनरी स्कूल में कार्यरत थीं।
सूत्रों का कहना है कि दीपक कुमार की यह संविदा टीम केवल मिशनरियों, दक्षिण भारतीय या भावी ईसाई दत्तक माता-पिता (Missionaries & South Indian or Christian Prospective Adoptive Parents) को ही संरक्षण देते हैं और ईसाई मिशनरी के अनुयायियों के रूप में काम करते हैं। इनके कारण लगभग 70% दत्तक माता-पिता दक्षिण भारत से आते हैं। विदेशी के रूप में वे केवल ईसाई दम्पति का चयन करते हैं।
आश्चर्यजनक रूप से CARA के अंदर संविदा पर नियुक्त इन सभी महिलाओं के पास ही दत्तक प्रक्रिया का प्रभार है। दीपक कुमार ने कारा में कार्यरत नियमित व स्थाई महिला अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दत्तक मामलों से दूर रखा है। हमारे पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, कारा में मिन्नी जार्ज (Minnie George) नामक इसाई महिला संविदा पर कार्यरत हैं जो कि इसी मंत्रालय के अधीन दूसरे संगठन NIPCCD में ज्वाइंट डायरेक्टर केसी जार्ज की पत्नी हैं।
केसी जार्ज भी स्वयं CARA में संयुक्त निदेशक रह चुके हैं। उनके प्रभाव से ही इस महिला ने इस संस्था में नियुक्ति हासिल की। हाल ये है कि मिन्नी जार्ज के इशारे के बिना कोई भी विदेशी दत्तक प्रक्रिया (Foreign Adoption Process) पूरी नहीं हो सकती। आंतरिक सूत्रों का कहना है कि वह विदेशी ईसाई दम्पतियों को बच्चे दिलाने में अधिक रुचि रखती हैं। ये संविदा कर्मचारी गोद प्रक्रिया में गुप्त रूप से बेईमानी के खेल में शामिल हैं, जिसमें बच्चों को वर्षों तक रोकना भी शामिल है।
अपर्णा शर्मा और मिन्नी जार्ज ने दत्तक मामलों पर अपना एकाधिकार विकसित किया है। मिन्नी जॉर्ज के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं, लेकिन CEO दीपक कुमार ने दबा दिया। अपर्णा शर्मा को भी बच्चों के आँकड़ों को गुप्त रखने/रोकने का दोषी पाया गया है। हैरानी की बात है कि ऑनलाइन सिस्टम में बच्चों की संख्या ब्लॉक करके रखा जाता है और गुप्त रूप से केवल ईसाई मिशनरियों को इसकी जानकारी दी जाती है अथवा उन देशों को ही ऑनलाइन बच्चे दिखाई देंगे जिनको ये लोग दिखाना चाहते हैं। हाल ही में ऐसे कई विदेशी पेरेंट्स लॉकडाउन के कारण भारत में ही फँस गए थे।
अपर्णा शर्मा को इसी मामले में कारा प्रशासन ने जनवरी 22, 2020 को दोषी पाया था लेकिन CEO दीपक कुमार ने वह फाइल दबा ली और काफी निचले स्तर के कुछेक कर्मचारियों को निकालकर खानापूर्ति कर दी। बताया जाता है कि ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में दीपक कुमार ने एक नियम बनवा लिया है कि कोई भी विदेशी एजेंसी भारत में अपना एजेंट नियुक्त कर सकती है और उसी एजेंट के माध्यम से वह विदेशी दत्तक (Foreign Adoption) की प्रक्रिया को सम्पन्न कर सकती है।
ईसाई एजेंटों को दी जाती थी भारीभरकम रकम 
इसका मतलब ये है कि उन्हें प्रत्यक्ष उपस्थित न होने की छूट मिल गई। गौरतलब है कि जो भारत में एजेंट कार्यरत हैं, वे सभी ईसाई संगठनों के एजेंट हैं जिन्हें वेतन के रूप में बड़ी रकम दी जाती है। कारा के सूत्रों का कहना है कि दीपक कुमार तानाशाही प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं जिन्होंने अपने कार्यकाल में उन सभी लोगों को बर्बाद कर दिया जिसने उनके विरुद्ध थोड़ी भी आवाज उठाई। कारा में ही कार्यरत एक स्थाई महिला सहकर्मी ने दीपक कुमार पर प्रताड़ना की शिकायत की थी लेकिन मंत्रालय के कुछ अधिकारियों ने उन्हें बचा लिया।
इसके बाद उल्टा उस महिला का ही शोषण शुरू कर दिया गया था। हमें ये भी पता चला है कि ICMR के पूर्व वैज्ञानिक एसकेडी विश्वास ने कारा में प्रतिनियुक्ति के दौरान दीपक कुमार की कार्य़शैली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका गाँधी तथा गृह मंत्री को पत्र लिखकर दीपक कुमार के कारनामों को उजागर किया था। लेकिन, अंततः वे इतने प्रताड़ित किए गए थे कि उन्होंने कारा छोड़ने का फैसला किया।
दीपक कुमार के नेतृत्व में विगत कुछ वर्षों में साजिश के तहत अनेक राष्ट्रवादी संस्थाओं पर जानबूझकर जुर्माना ठोका गया है और उनकी फंडिंग रोकी गई हैं ताकि ईसाई मिशनरियों को लाभ मिले तथा ये संस्थाएँ बदनाम हों जाएँ। पता चला है कि राष्ट्रवादी संस्थाओं को बदनाम कर के वनवासी क्षेत्रों में सक्रिय मिशनरियों को लाभ पहुँचाया गया है। दीपक कुमार ने अपने मूल विभाग के उच्च अधिकारियों की घर में बैठी पत्नियों को भी CARA में नौकरी दे रखा है।
शालिनी पीयूष उनके बॉस की पत्नी हैं जिनको दत्तक कार्य का कोई अनुभव नहीं है लेकिन CARA में वह अच्छे वेतन पर नौकरी कर रही हैं। मिन्नी जार्ज महाराष्ट्र की प्रभारी हैं। उन्होंने एक संस्था से एक बच्चे को बेल्जियम के एक अस्वस्थ ईसाई दंपत्ति को गोद लेने हेतु विभाग से अनापत्ति पत्र (NOC) जारी करवा दिया था। महाराष्ट्र की उस संस्था ने इसके विरुद्ध बाम्बे हाइकोर्ट में याचिका (संख्या FAP-41-19) दाखिल की थी।
उच्च न्यायालय ने उक्त प्रकरण मे CARA के निदेशक व ज्वाइंट डायरेक्टर को बुलाकर फटकार लगाई थी व इस संदर्भ मे दिनांक फ़रवरी 17, 2020 को आदेश पारित कर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए थे। न्यायालय ने अपने उक्त आदेश में CARA द्वारा बच्चे के भविष्य की परवाह न करने तथा अन्य अनियमितताओं का उल्लेख किया है। दीपक कुमार के इस रवैये पर मीडिया क्यों शांत है, ये भी चर्चा का विषय है।
ईसाई मिशनरियों के साथ दीपक कुमार के संबंधों का खुलासा 
इससे पहले ऑपइंडिया ने खुलासा किया था कि जब से दीपक कुमार ने कारा (CARA) के सीईओ का प्रभार सँभाला, तभी से नियमों को ताक पर रख कर बच्चों को गोद दिए जाने की प्रक्रिया अपनाई जाने लगी। सूत्रों का ये भी कहना है कि दीपक कुमार ने अनियमितताएँ बरतते हुए अपने करीबियों को CARA में बिठाया और इसका एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह संचालन शुरू कर दिया। मंत्रालय को काफी शिकायतें मिलीं कि एडॉप्शन की प्रक्रिया में संविदा कर्मचारियों द्वारा रक़म की वसूली की जा रही है।
दीपक कुमार को इतना बड़ा पद दिए जाने के पीछे भी कुछ बड़े अधिकारियों की मिलीभगत थी। सूत्रों के अनुसार, एक साजिश के तहत 2016 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के ही कुछ बड़े अधिकारी उन्हें लेकर आए थे। वो आर्मी के सिग्नल कोर में फाइबर इंजिनियर थे और उनकी शिक्षा-दीक्षा भी इंजीनियरिंग में ही हुई है। CARA के कामकाज का जो तरीका है, उसे लेकर उन्हें न कोई अनुभव था और ही कोई ज्ञान।
मनमाफिक कामकाज की प्रक्रिया अपनाने के लिए दीपक कुमार ने कारा के कई नियमों को बदल भी दिया था। उन्होंने अपने सम्बन्धियों को कारा में घुसाने के लिए भी बड़ी चालाकियाँ की। सबसे पहले तो उन्हें चपरासी के रूप में नियुक्ति दी और फिर धीरे-धीरे उनको कारा में एडवाइजर बना कर मोटी रकम देनी शुरू कर दी। भर्ती किए गए संविदाकर्मी फिर विदेशी एजेंसियों के साथ साँठगाँठ कर ख़ुद भी कमाई करने लगे।
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CARA को मिशनरियों का अड्डा बनाने वाले दीपक कुमार केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण अथवा ‘सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर...
इसमें भारतीय पेरेंट्स को जम कर इंतजार कराया गया और उनकी सीनियोरिटी को धता बताते हुए विदेशियों को प्राथमिकता दी गई। भारतीय पेरेंट्स इंतजार करते रहे। भारत में अगर किसी को इस प्रक्रिया में लाभ पहुँचाया भी गया तो उन्हें ही जो काफी संपन्न थे। मानसिक व शारीरिक रूप से कमजोर बच्चों को भी ख़ासी परेशानी हो रही है, जिन्हें उन संस्थाओं में रहने को मजबूर किया उनके देखरेख और पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की गई।

चीन का सबसे बड़ा ‘कोरोना कवर-अप’ : इटली-अमेरिका पर आरोप

Image result for चीन कोरोनाकोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में कोहराम मचा हुआ है। अब तक इसके 3 लाख से भी अधिक मामले आ चुके हैं और 19,600 से भी अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इस सवाल का उठना जायज है कि आख़िर चीन ने शुरुआत में इसे कवर-अप क्यों किया? यहाँ तक कि ‘वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन’ की आँखों में भी धूल झोंका गया, जिसके बाद उसने भी इसे बड़ा ख़तरा नहीं माना। यहाँ हम इन्हीं चीजों पर बात करेंगे और जानेंगे कि कैसे चीन ने शुरुआती दिनों में इस वायरस के ख़तरों से दुनिया को अनजान रखा। एक अध्ययन के अनुसार, अगर चीन ने 3 सप्ताह पहले भी एक्शन लिया होता तो इस ख़तरे को 95% कम किया जा सकता था।
कब क्या हुआ?
दिसंबर 10, 2019 को ही चीन में कोरोना का पहला मरीज बीमार पड़ने लगा था। इसके एक दिन बाद वुहान के अधिकारियों को बताया गया कि एक नया कोरोना वायरस आया है, जो लोगों को बीमार कर दे रहा है। वुहान सेन्ट्रल हॉस्पिटल के डायरेक्टर ने 30 दिसंबर को इस वायरस के बारे में वीचैट पर सूचना दी। उन्हें जम कर फटकार लगाई गई और आदेश दिया गया कि वो इस वायरस के बारे में किसी को कुछ भी सूचना न दें। इसी तरह डॉक्टर ली वेलिआंग ने भी इस बारे में सोशल मीडिया पर विचार साझा किए। उन्हें भी फटकार लगाई गई और बुला कर पूछताछ की गई। इसी दिन वुहान हेल्थ कमीशन ने एक ‘अजीब प्रकार के न्यूमोनिया’ के होने की जानकारी दी और ऐसे किसी भी मामले को सूचित करने को कहा।
इसके बाद 2020 के शुरूआती हफ्ते में 2 जनवरी को ही चीन के सूत्रों और वैज्ञानिकों ने इस कोरोना वायरस के जेनेटिक इनफार्मेशन के बारे में सब कुछ पता कर लिया था लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। एक सप्ताह तक इसे यूँ ही अटका कर रखा गया। जनवरी 11-17 तक वुहान में हेल्थ सेक्टर के अधिकारियों की बैठकें चलती रहीं। जनवरी 18 को नए साल के जश्न के दौरान हज़ारों-लाखों लोगों ने जुट कर सेलिब्रेट किया। इसके एक दिन बाद बीजिंग से विशेषज्ञों को वुहान भेजा गया। जनवरी 20 को दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आया और उसी दिन चीन ने घोषणा की कि ये ह्यूमन टू ह्यूमन ट्रांसफर होने वाला वायरस है।

जनवरी 21 को चीन के सरकारी अख़बार ने इस बीमारी को लेकर राष्ट्रपति शी जिनपिंग के एक्शन प्लान के बारे में बताया। इसके 2 दिन बाद वुहान के कुछ शहरों में लॉकडाउन की घोषणा की गई। लेकिन, इन सबके बावजूद 24-30 जनवरी तक चीन में नए साल का जश्न मनाया गया, लोगों ने अपने सम्बन्धियों के यहाँ यात्राएँ की और सारे सेलिब्रेशन ऐसे ही चलते रहे। इसी बीच चीन लॉकडाउन का क्षेत्र भी बढ़ाता रहा और वुहान में इस वायरस से लड़ने के लिए एक नया अस्पताल तैयार किया गया। अब वही चीन ये दावे कर रहा है कि उसने इस आपदा को नियंत्रित कर के एक उदाहरण पेश किया है। वही चीन जो महीनों तक दुनिया की आँखों में धूल झोंकता रहा।
चीन की इस करनी से न सिर्फ़ उसे नुकसान हुआ बल्कि आज 100 से ज्यादा देश हलकान हैं। सेलिब्रेशनों की अनुमति देकर और जश्न पर रोक न लगा कर उसने लोगों की आवाजाही जारी रखी, जिससे इस वायरस के फैलने की रफ़्तार बढ़ गई। अगर सही समय पर इस पर लगाम लगाया गया होता तो आज पूरी दुनिया में तबाही का ये आलम नहीं देख रहे होते हम। इसके बावजूद कुछ लोग इस बात पर आपत्ति जता रहे हैं कि इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ‘चाइनीज वायरस’ क्यों कहते हैं? ये वुहान से ऑरिजिनेट हुआ लेकिन WHO जानबूझ कर इसके नामकरण में वुहान या चीन जैसे शब्द नहीं लाया।
चीन अपनी कमियों को छुपाने में माहिर 
चीन का ये सब करने का पुराना इतिहास रहा है। उसने 2003 में SARS वायरस (Severe acute respiratory syndrome) के सामने आने के बाद भी कुछ ऐसा ही किया था। अबकी कोरोना वायरस के सामने आने के बाद भी चीन ने एक्शन लिए लेकिन वायरस को रोकने के लिए नहीं बल्कि इसकी सूचना सार्वजनिक करने वालों के ख़िलाफ़। वायरस के सामने आने के 7 सप्ताह बाद कुछ शहरों को लॉकडाउन करना और इस वायरस को लेकर चीन द्वारा ऐसा जताना कि ये कोई छोटी-मोटी चीज है, दुनिया को भारी पड़ा। ख़ुद चीन के प्रशासन ने स्वीकार किया है कि लॉकडाउन से पहले ही क़रीब 50 लाख लोग वुहान छोड़ चुके थे।
2019 में लिखे एक लेख में ‘चाइनीज एक्सप्रेस’ ने SARS या फिर MERS की तरह कोई खतरनाक वायरस के सामने आने की शंका जताई थी और कहा था कि इसकी वजह चमगादड़ ही होंगे लेकिन बावजूद इसके लगातार लापरवाही बरती गई। उस लेख में ये भी कहा गया था कि ये वायरस चीन से ही आएगा। 2019 तो छोड़िए, 2007 में ही एक जर्नल में प्रकाशित हुए आर्टिकल में बताया गया था कि साउथ चीन में चमगादड़ जैसे जानवरों को खाने का प्रचलन सही नहीं है क्योंकि उनके अंदर खतरनाक किस्म के वायरस होते हैं। उस लेख में इस आदत को ‘टाइम बम’ की संज्ञा दी गई थी। चीन में जनता बड़े स्तर पर इससे प्रभावित हुई है लेकिन दोष वहाँ की सरकार व प्रशासन का है।

इटली और अमेरिका को ज़िम्मेदार ठहराया 
एक तो चीन ने इस वायरस के प्रसार को नहीं रोका और बाद में ‘उलटा चोर कोतवाल को डाँटे’ की तर्ज पर अमेरिका और इटली को दोष देने में भी देरी नहीं की। चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई ऐसे लेख वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि ये वायरस चीन नहीं बल्कि इटली से आया। इसके बाद तब हद हो गई जब चीन ने अमेरिकी सेना पर आरोप मढ़ दिया कि अमेरिका ही इस वायरस को चीन तक लाया है। एक तरह से एक प्रोपेगंडा कैम्पेन चलाया गया, ताकि किसी और को दोष दिया जा सके। चीनी मीडिया ने इटली के एक डॉक्टर का इंटरव्यू खूब चलाया और उसके आधार पर ही इटली को दोष देना तेज कर दिया।
उस डॉक्टर के बयान के आधार पर दावे किए गए कि इटली में बुजुर्गों में न्यूमोनिया की तरह कुछ फ़ैल रहा था, जो बताता है कि ये वायरस वुहान में पहली बार नहीं आया। इस लेख को चीनी सोशल मीडिया पर 50 करोड़ लोगों ने देखा और इसे ‘एक्सपर्ट की राय’ कह कर पेश किया गया। यानी चीन पूरी तरह उस थ्योरी पर चल रहा है कि किसी भी चीज को लेकर इतने अफवाह फैला दो कि लोगों को सच्चाई पता ही न चले। हज़ार ‘कांस्पीरेसी थ्योरी’ फैला कर एक सच्चाई को ढक दो। वुहान और इटली के बीच कई फ्लाइट्स चलते हैं, जिससे चीनी वायरस तेजी से यूरोप में फैला। आज स्थिति ये है कि इटली में 6000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।
ट्रम्प द्वारा इसे ‘चाइनीज वायरस’ कहने से बौखलाए चीनी अधिकारियों ने इसे अमेरिकी सेना की साजिश करार दिया और कहा कि अमेरिका में इसे स्टोर कर के रखा गया था ताकि समय आने पर चीन को तबाह किया जा सके। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजान ने इसे अमरीका की साजिश करार दिया और पूछा कि अमेरिका में इससे कितने लोग प्रभावित हैं, वो डेटा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है? उन्होंने उलटा अमेरिका से ही कहा कि वो चीन को सब कुछ एक्सप्लेन करे।
जिसने आवाज़ उठाई उसे ही चुप करवा दिया 
चीन में 5-6 लोग ऐसे हैं जो कोरोना वायरस के बारे में सूचना सार्वजनिक करने या सवाल उठाने के बाद गायब हो गए या कर दिए गए। चीन के प्रोफेसर झु झिंग्रन ने इस बारे में बहुत कुछ बताया था। कुछ दिनों बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया और सारे सोशल मीडिया वेबसाइट्स से उनके एकाउंट्स गायब हो गए। ऐसे ही एक वीडियो ब्लॉगर का कुछ अता-पता नहीं चला। इन सभी को कोरोना वायरस के बारे में सवाल पूछना या सूचना देने की सज़ा मिली। डॉक्टर ली वेलिआंग ने जब स्थानीय पुलिस को कोरोना के बारे में बताया, उलटा उन्हें ही चुप करा दिया गया। कोरोना वायरस के कारण ही उनकी मौत हो गई।
चीन में ख़बरों का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है, सब कुछ सरकार द्वारा नियंत्रित किया जाता है। जब भी कोई ऐसी परिस्थिति आती है, चीन सभी सोशल मीडिया साइट्स और मीडिया की ख़बरों को खँगालने में तेज़ी कर देता है, ताकि कहीं कुछ ऐसा सार्वजनिक न हो जाए जो वहाँ की सरकार छिपाना चाहती हो। ‘ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स’ ने आँकड़ा गिनाते हुए बताया कि चीन के विभिन्न शहरों में 350 ऐसे लोग हैं, जिन्हें कोरोना के बारे में कुछ भी बोलने की सज़ा दी गई। एक युट्यूबर फांग ने कुछ लाशों के बारे में वीडियो बनाया था और उसे सार्वजनिक किया था, जिसके बाद उन्हें गायब कर दिया गया। उसके परिवार वाले कहते हैं कि ये सब कम्युनिस्ट पार्टी की करनी है।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार वर्ष 2020 की शुरुआत एक ऐसी त्रासदी से हुई है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की होगी। चीन के वुह...
कुल मिला कर बात ये है कि इसे चीनी वायरस कहना कोई रेसिज्म नहीं है। इसका अर्थ हुआ कि जिस जगह से ये वायरस पहली बार निकल कर आया, उस स्थान पर इसका नामकरण हो। ऊपर से जब चीन ने इसे ढकने की गलती करके दुनिया भर को परेशानी में डाला है तो फिर इसमें उन्हें क्यों दोष दिया जा रहा, जो इस वायरस के ऑरिजिनेट होने के स्थान के नाम पर इसे सम्बोधित कर रहे हैं? भारत-चीन की सीमा लगती है, भारत में कई लोग चीनी की तरह दिखते भी हैं और चीन से आवाजाही भी कम नहीं रही है। इसे ‘चीनी वायरस’ या ‘वुहान वायरस’ कहना ग़लत कैसे है, इसका किसी के पास कोई जवाब नहीं।

क्वारंटाइन में भेजे गए इटली से लाए गए 263 भारतीय

भारतीय छात्र
इटली से लाए गए भारतीय छात्र (साभार: बिजनेस स्टैंडर्ड )
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को बताया कि देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 327 हो चुकी है।दिल्ली में ही कोरोना वायरस के मामले बढ़कर 27 तक पहुँच गए हैं। इस लड़ाई में आज प्रधानमंत्री द्वारा बुलाया गया ‘जनता कर्फ्यू’ एक अहम पड़ाव साबित हो सकता है। इन सबके बीच कोरोना की मार से बेहाल इटली से आज 263 भारतीय छात्रों को लेकर एयर इंडिया का एक विशेष जहाज भारत पहुँच चुका है।
इटली से भारतीय छात्रों को ला रही फ्लाइट रविवार सुबह दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरी। थर्मल स्क्रीनिंग और इमिग्रेशन के बाद इन सभी छात्रों को आईटीबीपी छावला कैंप में क्वारेंटाइन फैसिलिटी में भेज दिया गया है। स्वास्थ्य सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि अब तक दूसरे देशों से 1600 भारतीयों की देश वापसी हो चुकी है। इन्हें हम अपने क्वारंटाइन सेंटर में सेवाएँ दे चुके हैं। आज रोम से आने वाले 263 यात्रियों को भी हम क्वारंटाइन सेंटर में रखेंगे। इनमें से अधिकतर छात्र हैं।

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में केंद्र व राज्य सरकारें कोई भी कसर बाकी नहीं छोड़ रहीं। उड़ीसा और महाराष्ट्र द्वारा कुछ शहरों को लॉक डाउन किए जाने और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस तरह के कदम उठाने के संकेत के मध्य राजस्थान और पंजाब ने 31 मार्च तक टोटल लॉकडाउन का निर्णय लिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने राज्य की जनता से कोरोना वायरस से लड़ने में प्रशासन की मदद करने की भी अपील की है।



पंजाब को पूरी तरह लॉक डाउन करने का निर्णय लेने के पहले अमरिंदर सरकार ने राज्य के कुछ जिलों जालंधर, संगरूर आदि को बंद करने का फैसला लिया था। लेकिन कोरोना संक्रमण के फैलते जाने के बाद राज्य सरकार ने 31 मार्च तक के लिए पूरे राज्य को लॉकडाउन करने का फैसला लिया है। खबरों के अनुसार इस दौरान सब्जी, दूध की दुकानों के साथ-साथ मेडिकल स्टोर आदि दैनिक जरूरतों की दुकानें खुली रहेंगी।
पंजाब में अब तक कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 13 हो चुकी है, जिसमें से एक मरीज की मौत भी हो चुकी है। शनिवार को नवांशहर के पहले कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत होने के साथ ही उसके परिवार के छह लोगों का टेस्ट भी पॉजिटिव आया है। सभी मरीजों को नवांशहर के सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करवाया गया है।
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ये है दिल्ली का जामा मस्जिद क्षेत्र आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारतीय राजनीतिक दलों और मीडिया को चीन से सीखना चा....
पंजाब के साथ साथ राजस्थान की गहलोत सरकार ने भी कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए रविवार से 31 मार्च तक टोटल लॉकडाउन का ऐलान कर दिया है। इस लॉकडाउन के दौरान सभी सरकारी और निजी दफ्तर, मॉल, फैक्ट्री, पब्लिक ट्रांसपोर्ट आदि बंद रहेंगे जबकि सब्जी, दूध जैसी रोज की जरूरत की दुकानें और मेडिकल स्टोर खुले रहेंगे।

627 मौत इटली में सिर्फ एक दिन में, भारत द्वारा उठाए गए कदम की US ने की प्रशंसा

कोरोना वायरसचीन के वुहान शहर से निकला कोरोना वायरस का कहर पूरे विश्व में जारी है। हर देश इसकी रोकथाम के लिए अपने-अपने स्तर पर घोषणाएँ करने में लगा हुआ है। वहीं पिछले दिनों सार्क देशों के बीच कोरोना पर हुई वीडियो कॉन्फ्रेसिंग पर अमेरिकी रक्षा सचिव ने भारत के पहल की प्रशंसा की है।
दरअसल पेंटागन ने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क ओशो ने टेलीफोन पर बातचीत की और सार्क देशों के लिए भारत की COVID-19 के लिए उठाए गए पहल की प्रशंसा की है। उन्होंने बताया कि फोन कॉल के दौरान, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रक्षा प्राथमिकताओं पर भी चर्चा की, जिसमें रक्षा व्यापार को बढ़ाने के लिए चल रहे क्षेत्रीय सहयोग और पहल शामिल हैं। पेंटागन ने आगे कहा कि कोरोना महामारी के चलते दोनों ने संचार को बंद करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया, जो कि व्यापक वैश्विक साझेदारी को सुदृढ़ करता है।
पेंटागन ने यह भी बताया कि दक्षिण एशियाई देशों के बीच कोविड​​-19 से संबंधित राहत प्रयासों के समन्वय में भारत के नेतृत्व के लिए एरिज़ोना ने प्रशंसा व्यक्त की है और जल्द से जल्द अवसर पर भारत आने का अपना इरादा व्यक्त किया है। वहीं कोरोनो वायरस संकट के चलते एरिजोना ने इस महीने भारत में अपनी निर्धारित यात्रा को स्थगित कर दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस पर रविवार को सार्क देशों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा करते हुए कहा था कि कोरोना वायरस को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। इस चर्चा में श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी, मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम सोली, भूटान के प्रधानमंत्री, नेपाल के प्रधानमंत्री शामिल रहे थे। भारत की इस पहल की ही अमेरिकी रक्षा सचिव ने प्रशंसा की है।
वहीं कोरोना वायरस से मुकाबला करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कड़े कदम उठाए हैं। दरअसल अमेरिका में कोरोना की चपेट में आने से मरने वालों की संख्या 230, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 13000 के पार हो गई है। वहीं चीन के बाद कोरोना का इटली में तैजी से फैला है। शुक्रवार को इटली में एक दिन के अंदर कोरोना की वजह से 627 लोगों की जान चली गई, जबकि कोरोना वायरस के संक्रमण के 5986 नए मामले भी सामने आ गए। इसी के साथ इटली में मरने वालों की संख्या 4032 हो चुकी है। वहीं कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या भी बढ़कर 47021 हो गई है।
भारत में भी कोरोना से मरने वालों की संख्या 5 हो गई है, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 200 के पार हो गई है। इसी की रोकथाम के लिए भारत सरकार ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की अपील की है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता से अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की अपील की है।

कोरोना वायरस : मोदी सरकार पिता के साए जैसी: इटली से लौटी युवती के पिता

नरेंद्र मोदी
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कोरोना वायरस का प्रसार रोकने के लिए भारत की तैयारियों और प्रभावित देशों से अपने नागरिकों को लाने की केंद्र सरकार की कोशिशों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है। जबकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी भले इस वैश्विक महामारी को मोदी सरकार पर हमले के मौके की तरह तलाश कर रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया में सरकार की तारीफ करते हुए कुछ लोगों ने जो आपबीती शेयर की है वह बेहद मार्मिक है। इटली से लाई गई एक युवती के पिता ने अपनी भावना साझा करते हुए कहा है कि वो सालों से सरकार की आलोचना कर रहे थे। लेकिन, अब उन्हें एहसास हो रहा है कि मोदी सरकार पिता के साए (fatherly figure) जैसी है। विदेश से लाए गए एक युवक ने कहा है कि ऐसी व्यवस्था तो उसने जर्मनी जैसे यूरोपीय मुल्कों में भी नहीं देखी है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार रोहन दुआ ने इटली से लौटी युवती के पिता का पत्र शेयर किया है। इस पत्र में उन्होंने इंडियन एंबेसी, भारत सरकार और विशेषत: नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया है। पिता के मुताबिक उनकी बेटी मास्टर की पढ़ाई करने इटली के मिलान गई थी। वहॉं हालात बिगड़ने पर उसे वापस लौटने को कहा। जब वह लौटने लगी तो उससे भारत वापस जाने का सर्टिफिकेट माँगा गया। उन्होंने खुद इंडियन एंबेसी को संपर्क करने की कोशिश की। मगर मिलान में एंबेसी का कार्यालय बंद होने के कारण ऐसा नहीं हो पाया। उन्होंने इंडियन एंबेसी के अन्य लोगों को मेल के जरिए संपर्क किया और रात के 10:30 बजे उनकी बेटी ने फोन पर बताया कि उसकी बात दूतावास में हो गई है और वह अगली फ्लाइट से भारत लौट रही है।
पिता के मुताबिक, वे सालों से भारतीय सरकार को कोस रहे थे। लेकिन मोदी सरकार में पिता का चेहरा है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी 15 मार्च को भारत आई और आईटीबीपी अस्पताल में उसकी स्वास्थ्य संबंधी, खान-पान संबंधी सभी जरूरतों का ख्याल रखा गया। गौरतलब है कि इटली उन देशों में शामिल है जो कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित हैं।


भारत सरकार इन दिनों लगातार विदेशों से लौटने वाले अपने नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाने में प्रयासरत है। सोशल मीडिया में वायरल हुए एक विडियो में विदेश से लौटा शख्स मिली सुविधाओं के बारे में बता रहा है। इस विडियो को रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी शेयर किया था। इसमें व्यक्ति बता रहा है कि सरकार ने करीब 70 किलोमीटर दूर सभी पैसेंजर को कोरोन्टाइन किया है। बिल्डिंग को लगातार सैनेटाइज किया जा रहा है। बड़े-बड़े अधिकारी मौक़े पर तैनात हैं। उन्हें 24 घंटे की देखरेख में रखा है। साथ ही जहाँ उन्हें रखा गया है वहाँ सरकार ने बहुत अच्छी व्यवस्था की है। सबको अलग से रूम मिले हैं। इसमें उन्हें पानी, चप्पल, बेड, खाना, नई तौलिया सब मुहैया कराया जा रहा है। इसलिए वे नरेंद्र मोदी, स्वास्थ्य मंत्री समेत पुलिस प्रशासन और डॉक्टरों का धन्यवाद करते हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कोरोना वायरस के संक्रमण से निबटने के लिए सरकार ने 400 बेड का कोरोन्टाइन वार्ड तैयार करवाया है। यहाँ विदेश से लौटने वालों को सीधे दिल्ली एयरपोर्ट से लेकर जाया जाएगा। यहाँ इन सभी लोगों की 14 तक की निगरानी होगी और अगर इनमें कोरोना के लक्षण मिलते हैं तो इन्हें आइसोलेट कर छोड़ा जाएगा। ये कोरोन्टाइन वार्ड नोयडा के सेक्टर 39 में स्थित जिला अस्पताल की नई बिल्डिंग में बना है। यहाँ पर्याप्त संख्या में पैरामेडिकल स्टॉफ तैनात हैं।
नरेंद्र मोदी, जम्मू कश्मीर, कोरोना वायरसमोदी ने वो कर दिखाया, जो हमारे लिए किसी ने नहीं किया : वुहान से लौटी कश्मीरी छात्रा  जम्मू-कश्मीर के कई छात्र चीन में फँसे हुए थे। इन्हें मोदी सरकार सकुशल देश वापस लाने में सफल रही। कोरोना वायरस से प्रभावित इलाक़ों से वापस लौटने के बाद कश्मीरी छात्रों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं है। वे सभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को धन्यवाद देते नहीं थक रहे। ऐसी ही एक छात्र ने मीडिया से बातचीत के दौरान अपने मन की बात साझा की। कश्मीरी छात्रा ने कहा कि बचपन से लेकर अब तक वो हिंसा की कई वारदातों को देख चुकी थीं, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है जब भारत सरकार ने उनके लिए इतना बड़ा क़दम उठाया।
चैनल ‘सीएनएन न्यूज़ 18’ से बातचीत करते हुए कश्मीरी छात्रा ने कहा कि चीन में फँसे भारतीय छात्रों को वापस लेकर आना कोई साधारण बात नहीं थी। ये बहुत बड़ी बात है। उसने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है जब बाहर फँसे कश्मीरियों के लिए भारत सरकार ने इतना बड़ा काम किया है। उसने कहा कि मोदी ने वो कर दिखाया है, जो आज तक किसी ने नहीं किया। जम्मू कश्मीर के कुछ अन्य छात्रों ने भी मोदी सरकार की तारीफ़ की, जिन्हें वहाँ से बचा कर लाया गया।

चीन के हुबेई प्रान्त की राजधानी वुहान में कोरोना वायरस का संक्रमण सबसे ज्यादा है। वहाँ कई भारतीय छात्र फँसे हुए थे, जिनमें से कई कश्मीरी भी थे। जनवरी के अंतिम हफ्ते में जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री अल्ताफ बुखारी ने पीएम मोदी से गुहार लगाई थी कि कश्मीरी छात्रों को वहाँ से वापस लाया जाए। इसके बाद मोदी सरकार ने उन्हें वापस लाने में सफलता प्राप्त की। जम्मू-कश्मीर से वापस लाए गए छात्र-छात्रों का दिल्ली एयरपोर्ट पर और फिर कश्मीर में चेक-अप किया गया। उनमें कोई संक्रमण नहीं दिखा।
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अब तक ईरान से 389 भारतीय नागरिकों को वापस लाया जा चुका है। सोमवार (मार्च 16, 2020) को 53 भारतीय नागरिकों का चौथा जत्था ईरान से भारत पहुँचा। केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर के इस सम्बन्ध में जानकारी दी। यह समाचार उन सभी नागरिक संशोधन बिल के विरोधियों पर इतने जोर का थप्पड़ है, जिसकी गूंज तक विरोधी सुन नहीं पा रहे कि जिस मोदी सरकार पर मुसलमानों को भारत से निकालने का दुष्प्रचार किया जा रहा है, वही मोदी सरकार अपने भारतीय मुस्लिम नागरिकों को वापस भारत ला रही है। क्या जरुरत है उन्हें वापस लाने की, लेकिन मोदी सरकार आसानी से किसी भी भारतीय को मरने नहीं देना चाहती।

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भारतीय मुसलमानों को विशेष विमान से ईरान से लाया जा रहा है आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारत में कुछ कट्टरपंथी कोरो....
जहाँ तक कोरोना वायरस की बात है, अब तक इससे चीन में 1868 लोगों की जान जा चुकी है। यूरोप के फ्रांस में भी कोरोना से पहली मौत की पुष्टि हुई है। स्थिति इतनी भयंकर है कि वुहान में एक हॉस्पिटल के डायरेक्टर की ही इस वायरस से मौत हो गई, जिसके अस्पताल में बड़े पैमाने पर कोरोना से पीड़ित मरीज भर्ती थे। अब तक इस खतरनाक वायरस से 72,436 लोगों के संक्रमित होने की ख़बर है। इस वायरस से प्रभावित हो चुके 12,522 मरीज ठीक भी हो चुके हैं। अब तक 25 देशों में इसके फैलने की रिपोर्ट आई है।

पाकिस्तान हम पर भी हमले प्लान करवाता है: यूरोपीय संसद के नेता

यूरोपियन यूनियन (प्रतीकात्मक चित्र, e-Syndicate Network से साभार)
                                                                                    प्रतीकात्मक चित्र 
मोदी सरकार से पूर्व रहीं सरकारों ने भारत ही नहीं, विश्व में पाकिस्तान का हौवा बनाया हुआ था, लेकिन मोदी सरकार ने जब से पाकिस्तान की जेहादी और आतंकवादी गतिविधियों को उजागर करना शुरू किया है, विश्व के कान खड़े हो गए। आज हर देश भारत के समर्थन और पाकिस्तान के विरोध में बोल रहा है। जबकि भारत में पल रहे पाकिस्तानी समर्थक पार्टियां और नेता पाकिस्तान की बोली बोल उसका साथ दे रहे हैं। इस्लामिक आतंकवाद को बचाने "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम से हिन्दुओं को बदनाम करते रहे। 
यूरोपियन यूनियन की संसद में भी पाकिस्तान के विरोध और हिंदुस्तान के समर्थन के स्वर मुखर हो रहे हैं। कश्मीर मुद्दे पर यूरोपियन संसद के सदस्यों ने एक तरफ पाकिस्तान को लताड़ते हुए आरोप लगाया कि वह अपनी ज़मीन जेहादियों को यूरोप की ज़मीन पर हमले की तैयारी के लिए मुहैया कराता है, वहीं हिंदुस्तान को महान लोकतंत्र बताया। साथ ही कहा कि कश्मीर में जिहादी चाँद से नहीं टपक रहे, बल्कि पाकिस्तान से आ रहे हैं।
करना चाहिए भारत का समर्थन 
2008 के बाद पहली बार कश्मीर मुद्दे पर यूरोपीय संसद में चर्चा हुई। चर्चा में यूरोप के जिन कद्दावर नेताओं ने हिंदुस्तान का समर्थन किया, उनमें स्पेन के हावी लोपेज़, फ़्रांस की जूली लेशेंतौं और गिलेस लेबेरतौं, पोलैंड के राइज़ार्ड ज़ारनेकी, ब्रिटेन के दिनेश धमीजा प्रमुख हैं। राइज़ार्ड ज़ारनेकी, जो पोलैंड के European Conservatives & Reformists Group के सदस्य हैं, ने कहा, “हिंदुस्तान दुनिया का एक महान लोकतंत्र है। हमें जम्मू-कश्मीर, हिंदुस्तान (न कि विवादित स्थल), में हो रहे जिहादी कृत्यों पर नज़र दौड़ानी चाहिए। ये जिहादी चाँद से नहीं टपक रहे। यह पड़ोसी मुल्क (पाकिस्तान) से आ रहे हैं। हमें हिंदुस्तान का समर्थन करना चाहिए।”
परमाणु धमकी देता है पाकिस्तान 
इटली की Group of European People’s Party (Christian Democrats) के फुल्विओ मरतूसिएलो ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी देता है। पाकिस्तान ऐसी जगह है जहाँ से जिहादी यूरोप पर दहशतगर्दी के लिए योजनाएँ बना सकते हैं।