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सांसद साध्वी प्रज्ञा को जिस कांग्रेसी MLA ने जिंदा जलाने की दी थी धमकी, कोरोना वायरस से हुई मौत

गोवर्धन डांगी साध्वी प्रज्ञामध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक गोवर्धन डांगी का गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में देहांत हो गया। मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस ने ट्वीट किया कि ब्यावरा के विधायक गोवर्धन डांगी ने कोरोनो वायरस संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया।
संस्कृत में कहते हैं "ईश्वरम यत करोति, शोभनम एव करोति", हिन्दी में कहते हैं "भगवान जो करता है, अच्छा ही करता है" और अंग्रेजी में कहते हैं "It's all for the best", कहने का अभिप्राय यह है कि इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने बेकसूर साधु-संतों को जेलों में डाल, उनकी सात्विकता भंग करने का परिणाम पहले भी 2019 चुनाव के दौरान आया था और दूसरा अब। चुनाव के दौरान साध्वी ने जब एक प्रेस वार्ता में ATS अधिकारी करकरे की मृत्यु पर उनकी प्रसन्नता का कारण पूछने पर मिले जवाब पर विपक्ष तिलमिला कर चुनाव आयोग के पास भागा और जनता में एक मृतक के लिए प्रसन्नता व्यक्त करने पर साध्वी के विरुद्ध माहौल बनाने का असफल प्रयास किया था। लेकिन तब साध्वी ने बेकसूर होते हुए जो यातनाएं झेली थी, उन सबका जिम्मेदार करकरे ही था। दूसरे, अब जिस साध्वी को कांग्रेस विधायक जिन्दा जलाने को बेचैन थे, कोरोना के कारण वह भी हट गए। विधि के विधान को कोई नहीं बदल सकता।     
मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सैद जाफ़र ने कहा,
“डांगी कुछ दिन पहले कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए थे। उन्हें भोपाल के चिरायु मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। तबीयत खराब होने के बाद उन्हें गुरुग्राम के एक अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था। मंगलवार (15 सितंबर, 2020) सुबह उनका निधन हो गया।”

साध्वी प्रज्ञा को जिन्दा जलाने की दी थी धमकी 
दिवंगत कांग्रेस विधायक गोवर्धन डांगी ने भारतीय जनता पार्टी की सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को जिंदा जलाने की खुलेआम धमकी दी थी। नवंबर 2019 में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को ‘आतंकवादी’ कहे जाने के एक दिन बाद, ब्यावरा कांग्रेस के विधायक, गोवर्धन डांगी ने भोपाल के सांसद को धमकी देते हुए कहा था कि वह उन्हें जिंदा जला देंगे।
ब्यावरा के विधायक गोवर्धन डांगी ने तब कहा था:
“अगर वो मध्य प्रदेश की धरती पर कदम रखेंगी तो हम सिर्फ उनका पुतला नहीं जलाएँगे… हम उन्हें भी जिंदा जलाएँगे।”
इस धमकी के बाद, भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा भोपाल में एक पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठी थीं। उनकी माँग थी कि कांग्रेस के विधायक गोवर्धन डांगी के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। लेकिन तब राज्य में कमलनाथ की सरकार थी और सांसद की माँग को थाने में अनसुना कर दिया गया था।

झाड़खंड : 111 दिन से क्वारंटाइन, हिरासत में : गर्भवती निकली 3 तबलीगी महिलाएँ

गर्भवती तबलीगी महिलाएँ
                                                                                                                                                             प्रतीकात्मक 
राँची के एक क्वारंटाइन सेंटर और उसके बाद जेल में 111 दिनों से प्रशासन व पुलिस की निगरानी में रह रहीं तबलीगी जमात की 3 विदेशी महिलाएँ गर्भवती पाई गई हैं। मंगलवार (जुलाई 21, 2020) को यह मामला तब सामने आया, जब तीनों तबलीगी महिलाएँ और उनके पति समेत कुल 17 विदेशी जेल से बाहर निकले।
तबलीगी जमात से जुड़े 17 विदेशियों को झारखंड हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद गत बुधवार (जुलाई 15, 2020) को सुनवाई के बाद सभी को जमानत प्रदान करने का निर्देश दिया गया। इन्हें राँची पुलिस ने हिंदपीढ़ी की एक मस्जिद से गिरफ्तार किया था। इनमें मलेशिया, हॉलैंड, इंग्लैंड, जांबिया की चार महिला और 13 पुरुष शामिल थे।
राँची पुलिस ने मार्च के माह में सभी को गिरफ्तार करने के बाद खेलगाँव के क्वारंटाइन सेंटर में रखा था। इसके बाद एक विदेशी महिला कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गई थी। इन सभी की क्वारंटाइन की अवधि पूरी होने के बाद निचली अदालत में पेश किया गया, जिसके बाद सभी को जेल भेज दिया गया था।
इनमें पाँच विदेशी महिलाएँ, उनके पति और बाकी पुरुष गत 17 मार्च को दिल्ली स्थित निजामुद्दीन मरकज से होकर वापस राँची गए थे। इसके बाद, 30 मार्च को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। ऐसे में लोगों का सवाल है कि क्वारंटाइन सेंटर और पुलिस हिरासत में आखिर यह कारनामा कैसे सम्भव हुआ?






अब करीब तीन माह से ज्यादा समय के बाद तीन महिलाओं के गर्भवती होने की खबर ने सबको हैरान कर दिया है। इन महिलाओं ने गत 30 मार्च से 20 जुलाई तक कुल 111 दिन पुलिस हिरासत में जेल में ही बिताए हैं। मई 20, 2020 को लगभग 50 दिनों के बाद इन सभी को खेलगाँव के क्वारंटाइन सेंटर से जेल भेज दिया गया था।
जागरण की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जेल और क्वारंटाइन सेंटर में सख्त पाबंदियों के बावजूद यह हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से एक महिला का गर्भ अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह से लेकर मई माह के पहले सप्ताह के बीच का बताया गया है है। जबकि, दो महिलाएँ इनसे कुछ दिनों पहले की गर्भवती हैं, लेकिन इनमें से किसी का भी गर्भ 3 माह से अधिक नहीं पाया गया है।
इनकी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में भी यह तथ्य सामने आया है कि इन्हें कोरोना वायरस के दौरान क्वारंटाइन सेंटर में ही गर्भ ठहरा था। रिपोर्ट के अनुसार, इन महिलाओं को जेल भेजने से पूर्व उनकी मेडिकल जाँच और प्रेगनेंसी टेस्ट की गई थी, जिसमें इन तीनों महिलाओं ने एक माह का गर्भ होने की बात कही थी। ध्यान देने की बात है कि ये महिलाएँ इससे ठीक 50 दिनों पहले क्वारंटाइन सेंटर में थीं।

दिल्ली : कोरोना से 398 या 1036 मौतें? बीजेपी, कांग्रेस नेताओं ने केजरीवाल सरकार पर उठाए सवाल

cm arvind kejriwal told many requests to central government on ...
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली में कोरोना मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन तेजी से बढ़ती चली जा रही है। इस बीच कोरोना से मरने वाले मरीजों की संख्या को लेकर एक बार फिर केजरीवाल सरकार पर विपक्षियों ने सवाल खड़े किए हैं। साथ ही केजरीवाल सरकार पर मौतों के आँकड़ों को छिपाने का आरोप भी लगाया है।
मई 30 को TV9 पर साक्षात्कार देते हुए कोरोना पर हुई मौतों पर विपक्ष पर झूठ बोलने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं भाजपा पर आरोप लगाते कहा, "नगर निगम के कितने हॉस्पिटल्स में कोरोना का इलाज हो रहा है?" केजरीवाल के झूठ की परतें उस दिन खुलनी शुरू हो गयीं थी, जब दिल्ली में मौत का आंकड़ा 76 दिया जा रहा था, जबकि विपक्ष कह रहा था कि "जब आई टी ओ कब्रिस्तान में ही 91 शव आ चुके हैं, फिर सरकार 76 मौत क्यों बता रही है?" 
अब दिल्ली में कोरोना से मौतों के आँकड़ों को लेकर दिल्ली प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष अजय माकन ने ट्वीट करते हुए अरविंद केजरीवाल सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। माकन ने ट्वीट करते हुए लिखा, “कल रात तक दिल्ली में 1036 का दाह संस्कार कोविड प्रोटोकॉल से हुआ है। परंतु मृत्यु का सरकारी आँकड़ा 392 है। असलियत- निगम बोध-439, पंजाबी बाग-389, आईटीओ-164, मंगोल पुरी-22, बुलंद मस्जिद-22”
अजय माकन ने केजरीवाल सरकार पर आरोप लगाते हुए आगे लिखा कि देर रात को सरकार की ओर से मौतों के आँकड़े जारी किए जा रहे हैं। ताकि कोई अखबार न छाप सके। साथ ही उन्होंने लिखा कि सरकार चुपके-चुपके जो जानकारी दे रही, वो भी आधी-अधूरी है

29 फरवरी के हेल्थ बुलेटिन को दिल्ली सीएमओ ने शेयर किया है। इसमें बताया गया है कि दिल्ली में कोरोना के अब तक 17 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, ऐक्टिव केस की संख्या 9,142 है, जबकि इससे मरने वालों की संख्या 398 हो गई है।
दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा है कि दिन-प्रतिदिन जिस तरह कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं इससे लोगों के सामने अरविंद केजरीवाल सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत उजागर हो गई है।
अखबारों में विज्ञापन देने के लिए सरकार पर सवाल उठाते हुए तिवारी ने कहा, “यह साफ है कि विज्ञापन पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने के लिए केजरीवाल सरकार के पास कोई रणनीति नहीं है।’
वहीं बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने भी एक ट्वीट करते हुए अपना ही एक वीडियो शेयर किया, जिसमें कपिल मिश्रा को दिल्ली में कोरोना से होने वाली मौतों के आँकड़ों को लेकर केजरीवाल सरकार पर आँकड़े छिपाने का आरोप लगाया और दावा किया कि कई डाटा के मुताबिक दिल्ली में अभी तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 1000 से अधिक हो गई है, जबकि सरकार गलत आँकड़ों को पेश कर लगातार दिल्ली की जनता से झूठ बोल रही है।

इससे पहले कोरोना के मामलों की जानकारी देते हुए दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि दिल्ली में अब तक 398 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, सिसोदिया ने कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि दिल्ली में स्वस्थ होने का प्रतिशत करीब 50 फीसदी तक है।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने लोकनायक अस्पताल में शवों की बदत्तर स्थिति का जायजा लेने के बाद दिल्ली सरकार और तीनों नगर निगमो...
उन्होंने आगे कहा कि जब तक लोगों में संक्रमण के लक्षण नहीं दिखते हैं तब तक अस्पताल आने की कोई जरूरत नहीं है और ऐसे करीब 80-90 फीसदी मरीज घर में ही आइसोलेशन में रहकर स्वस्थ हुए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी MCD के नेताओं ने दिल्ली सरकार पर आँकड़ें छिपाने का आरोप लगाया था।
अभी फेसबुक पर अपने सहयोगी पत्रकार जितेंद्र तिवारी का मार्मिक लेख आपके साथ शेयर कर रहा हूँ:

(यह मन का दर्द है, कृपया लाइक न करें। पूरा पढ़े और हकीकत को समझें। फेसबुक पर लाइक की गिनती के लिए नहीं, सच सामने लाने के लिए लिखा है।)
श्मशान भूमि को इंतजार है शवों का?
ऐसा मंजर जीवन में पहले कभी नहीं देखा था। नई दिल्ली के पंजाबी बाग श्मशान घाट जब पहुंचा तो अजब नजारा था। कोविड-19 यानि कोरोना से हुई मृत्यु के लिए अलग से एक स्थान निर्धारित किया गया था। यह तो ठीक था। पर अंतिम क्रिया के लिए निर्धारित स्थान पर पहले से ही लकड़िया सजा कर रखी गई थीं। क्यों, इसलिए कि कोरोना से हुई मृत्यु के शवों की अंतिम क्रिया के साथ आप अपनी परम्पराओं का निर्वहन भी नहीं कर सकते। नहलाना, नए कपड़े पहनाना, पिंड रखना...... सब भूल जाइये, अंतिम समय में चेहरा भी नहीं देख सकते।
सामने मेरे प्रिय अश्वनी शर्मा के पिता के.के. शर्मा जी का शव एक प्लास्टिक में लिपटा रखा था। दूसरी ओर अश्वनी और उसका भाई तुलसी भी प्लास्टिक की सीट, जिसे पीपीई किट कहते हैं, में लिपटे बैठे थे। दो दिन पहले, गुरूवार को जब मंगोलपुरी के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल गया था तो भी रोते हुए अश्वनी को सीने से लगाकर चुप नहीं करा पाया था। कोरा आश्वासन देकर चला आया कि जल्द ही पापा ठीक होकर घर आ जाएंगे। पर कल शुक्रवार की सुबह ही पंजाब केसरी के वरिष्ठ पत्रकार केके शर्मा जी के निधन का समाचार आया। कहते हैं अचानक से बढ़ी शुगर ने उनकी जान ले ली। कोरोना पॉजिटिव थे या निगेटिव, इसकी रिपोर्ट आने में अभी कई दिन लग सकते थे। इसलिए पॉजिटिव मानकर ही शव लेने का दावा किया गया, ताकि अंतिम संस्कार तो जल्द ही किया जा सके, वरना शवगृहों में अपने प्रियजन की देह की दुर्गति की खबरों ने पहले ही डरा रखा था।
पता चला कि दो दिन पहले ही दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश पर कोरोना पॉजिटिव का लकड़ियों से अंतिम संस्कार शुरू हुआ। उससे पहले तो आपको अनिवार्यता सीएनजी से अंतिम संस्कार करना था। पर वहां लम्बी लाइन लग गई। केवल निगम बोध घाट और पंजाबी बाग में ही सीएनजी से अंतिम संस्कार की सुविधा है, जहां एक दिन में अधिकतम 30-35 लोगों की ही अंतिम क्रिया सम्पन्न हो सकती थी। इसलिए शवों को अपनी अंतिम क्रिया का इंतजार करना पड़ रहा था। इसलिए परम्परागत हिन्दू रीति नीति से भी अंतिम क्रिया की अनुमति दी गई। वैसे भी सीएनजी में तो इधर आपके प्रिय की देह अंदर भेजी गई और उधर आपसे अपेक्षा की घर जाइये। क्योंकि आपको विसर्जन के लिए न अस्थियां मिलेंगी और न राख।
पर हिन्दू रीति नीति भी क्या और काहे की अंतिम क्रिया... बस यूं समझिए कि लकड़ियां सजाते दिल भारी हो रहा था। आस पास के ढूलों पर पहले से बेस बनाकर रखा गया था, ताकि प्लास्टिक में लिपटा शव जैसे ही आए सीधे उसे लिटाया जाए और ऊपर से लकड़िया लाद दी जाएं। अंतिम समय में मुख दर्शन भी भूल जाइये। बस, जैसे तैसे एक चादर ऊपर से और चढ़ा दी थी। अग्नि संस्कार हुआ तो इंतजार था कि कपाल क्रिया हो तो ऊं नमः शिवाय बोलकर जाएंगे। पर वाह रे मन के बहम। एक बांस के सहारे दूर से कपाल क्रिया कराने को भी तथाकथित पंडित या कहें कि महापंडित तैयार नहीं। बोला कोरोना बाले को बांस से छूने की मनाही है। वैसे भी आप अर्थी पर कहां लाए, जिससे बांस निकाल कर कपाल क्रिया होती। कोरोना से होने वाली मृत्यु के साथ अस्पताल के दो यमदूत भी साथ ही आते हैं, ताकि कोई रस्मोअदायगी न कर सके। सीधे श्मसान भूमि और बस काम खत्म।
आप इसे अंतिम संस्कार भी कह सकते हैं। पर कोरोना का यही दंश है.. सब सीखे हुए और सिखाए हुए संस्कार बदलने पड़ रहे हैं। रोते हुए को दिलासा देने के लिए अपने कंधे का सहारा नहीं दिया, मृतक को अपने कंधे पर नहीं ढ़ोया, न पिंड दान न कपाल क्रिया.. और रास्ते में मांगने वाले को भी कहा दूर ही रहो, जो जेब में था, एक तरह से फेंक कर दिया...। आंखों के सामने वही चित्र बसा था.. पहले से तैयार अर्थियों का, जो याद दिला रही थीं कि एक दिन तुम्हें भी यहीं आना है। पर हे देव, ऐसे नहीं जैसे मेरे प्रिय अश्वनी के पिता केके शर्मा जी को जाना पड़ा। इतना तो करना मेरे प्रभु, उनको अपने चरणों में आसरा देना।

ट्रंप के ताबड़तोड़ फैसले : चीन के पर कतरने के साथ WHO से रिश्ते तोड़े, हांगकांग का विशेष दर्जा छीना जाएगा

डोनाल्ड ट्रंपअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई सख्त फैसले लिए हैं। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से सारे संबंध खत्म करने का ऐलान किया है। चीन पर कई पाबंदियॉं लगाई गई है। हांगकांग का विशेष दर्जा भी वापस लिया जाएगा।
ट्रंप ने मई 29, 2020 को WHO की फंडिंग वापस लेने के साथ ही सभी सम्बन्ध तोड़ने की घोषणा की। हांगकांग का विशेष व्यापार स्टेट्स समाप्त करने और ऐसे चीनी स्नातक छात्रों के वीजा को निलंबित करने का भी ऐलान किया है, जो उनकी सरकार की नजर में संदेहास्पद शोध में शामिल हैं।
कोरोना वायरस को फैलाने को लेकर चीन का संरक्षण करने को लेकर अमेरिका निरंतर WHO की निंदा कर रहा है। इसके पहले ट्रंप ने WHO की फंडिंग रोकने की भी धमकी दी थी।
ट्रंप ने पिछले साल के अंत में चीन के वुहान प्रांत से पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने वाले कोरोना वायरस को लेकर WHO की अपर्याप्त प्रतिक्रिया पर रोष व्यक्त किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ अमेरिका के संबंधों को समाप्त करने की घोषणा करते हुए WHO पर कोरोना वायरस संकट के प्रबंधन में चीन समर्थक और पूर्वाग्रही होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसके पहले WHO से सुधर को लेकर सिफारिशें की गईं, लेकिन संगठन ने इस पर ध्यान नहीं दिया और सुधार के लिए किसी भी सुझाव को नहीं माना।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने हृवाइट हाउस में कहा कि चीनी अधिकारियों ने डब्ल्यूएचओ के लिए अपने रिपोर्टिंग दायित्वों को ‘नजरअंदाज’ किया और संगठन पर दबाव बनाया कि वह इस महामारी के बारे में जनता को गुमराह करे जिसने अब 1 लाख से अधिक अमेरिकियों को मार दिया है।
उन्होंने कहा कि चीन WHO को साल भर में 40 मिलियन डॉलर का अनुदान देकर अपने नियंत्रण में रखता है, तो वहीं अमेरिका हर साल स्वास्थ्य संगठन को करीब 450 मिलियन डॉलर का अनुदान देता है।
ट्रम्प ने पहले भी कई बार नाराजगी जताते हुए WHO को दी जाने वाली सहायता राशि पर भी रोक लगा दी थी। इसके साथ उन्होंने संस्था के डायरेक्टर को पत्र लिखकर 30 दिन के अंदर बड़े बदलाव करने के सुझाव दिए थे। ऐसा न किए जाने पर फंडिंग रोकने की धमकी भी दी थी।
इसके साथ ही चीन और हांगकांग को लेकर अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कल ही अहम बयान में बताया कि अमेरिका ने बुधवार (मई 27, 2020) को अमेरिकी कानून के तहत हांगकांग के विशेष दर्जे को निरस्त कर दिया।
अमेरिका ने चीन पर हांगकांग की स्वायत्तता का हनन करने का आरोप लगाया और कहा कि अब इसे चीन से स्वायत्त नहीं कहा जा सकता है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने अमेरिकी संसद में कहा कि हांगकांग अब अमेरिकी कानून के तहत अपनी विशेष स्थिति के लिए योग्य नहीं है।
उन्होंने ट्वीट के जरिए बताया कि अमेरिका के विशेष दर्जे से हांगकांग को लाभ मिलता है और अब अमेरिका को लगता है कि वास्तव में चीन इसका फायदा उठा रहा है। दरअसल चीन की संसद में नेशनल पीपुल्स कॉन्ग्रेस ने हांगकांग पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के प्रस्ताव को मँजूरी दे दी है। अब इस विधेयक को चीन के वरिष्ठ नेतृत्व के पास भेजा जाएगा। इस नए कानून के लागू हो जाने से हांगकांग अपनी स्वायतत्ता खो सकता है और हांगकांग का विशेष दर्जा खत्म हो जाएगा।
साल 1997 में ब्रिटेन ने जब हांगकांग चीन को सौंपा था, उस समय कुछ कथित कानून बनाए गए जिनके तहत हांगकांग में कुछ खास तरह की आजादी थी जो आम चीनी लोगों को हासिल नहीं है। चीन का यह प्रस्ताव इतना विवादित है कि संसद से मंजूरी मिलने के बाद दुनियाभर में कई देश चीन के खिलाफ बोलते नजर आ रहे हैं। इस नए कानून के खिलाफ हांगकांग में काफी पहले से विरोध-प्रदर्शन चल रहा है। इससे पहले बुधवार को सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच कई झड़पें हुई।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात के संकेत दिए हैं कि अगर यह कानून लागू हो जाएगा तो अमेरिका और हांगकांग के बीच होने वाले विशेष व्यापार का अंत हो सकता है।

हॉस्टल खाली करो और घर जाओ : जामिया इस्लामिया का फरमान

जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने तत्काल प्रभाव से छात्रों को हॉस्टल (गर्ल्स और ब्यॉयज) खाली करने का आदेश दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से छात्रों को निर्देश देते हुए कहा गया है कि सरकार द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइंस का पालन करते हुए छात्र अपने घर जा सकते हैं। बता दें कि विश्वविद्यालय ने यह आदेश शुक्रवार (मई 1, 2020) को जारी किया।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्रों के लिए सरकार की नई गाइडलाइंस में ट्रांसपोर्ट और ट्रैवल प्रोटोकॉल है। गौरतलब है कि लॉकडाउन घोषित किए जाने के कारण कई छात्र अपने घर नहीं जा सके थे और हॉस्टल में ही रुके हुए हैं। 
लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में फँसे लोगों को घरों तक पहुँचाने के लिए राज्य सरकारों की अपील के बाद भारतीय रेलवे स्पेशल ट्रेनें भी चला रही हैं। वहीं कई राज्य सरकारों ने विशेष बसों के माध्यम से अपने राज्यों के छात्रों की वापसी सुनिश्चित करवाई है। 
इन व्यवस्थाओं के शुरू होने के बाद जामिया विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों से हॉस्टल खाली करने को कहा है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ए.पी. सिद्धकी ने शुक्रवार देर रात एक पत्र जारी करते हुए कहा, “जो विद्यार्थी हॉस्टल में रह गए थे, उन्हें अब हॉस्टल खाली करने का निर्देश दिया जाता है। विश्वविद्यालय के आसपास का क्षेत्र पहले ही हॉटस्पॉट घोषित किया जा चुका है। ऐसे में विश्वविद्यालय द्वारा आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना कठिन होगा।”
विश्वविद्यालय प्रशासन ने हॉस्टल में मौजूद छात्रों से कहा, “आप सभी को मालूम है कि कोरोना वायरस के कारण विश्वविद्यालय बंद है। यहाँ लाइब्रेरी समेत सभी शैक्षणिक गतिविधियाँ पूरी तरह से बंद हैं। विश्वविद्यालय जुलाई में परीक्षाएँ लेगा और इसी के साथ नया सत्र सितंबर 2020 से शुरू होगा।”
गृह मंत्रालय ने राज्यों को अपने निवासियों को बसों में वापस लाने की अनुमति दे दी है। इसके बाद केंद्र सरकार ने फँसे हुए प्रवासियों को घर पहुँचाने के लिए ‘श्रमिक स्पेशल ट्रेन’ की शुरुआत की है। इन ट्रेनों में प्रवासी मजदूरों के अलावा विभिन्न राज्यों में फंसे स्टूडेंट्स, शरणार्थी, टूरिस्ट को भी घर भेजा जा रहा है।
यात्रा से पहले सभी यात्रियों की स्कीनिंग की जा रही है और केवल उन्हीं लोगों को भेजा जा रहा है, जिनमें कोरोना वायरस के कोई लक्षण नहीं दिखाई नहीं दे रहे। इसके साथ ही मास्क पहनना अनिवार्य है। साथ ही यात्रियों को ट्रेन में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इंडियन रेलवे ने साफ कर दिया है कि टिकट खरीदने के लिए कोई भी पैसेंजर रेलवे स्टेशन नहीं जाएगा। पैसेंजर ट्रेन का परिचालन अभी शुरू नहीं किया गया है।
इन ट्रेनों में केवल राज्य सरकार द्वारा चिन्हित किए गए और ​रजिस्टर किए गए लोगों को ही ट्रैवल करने का मौका मिलेगा। गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस के मुताबिक, राज्यों द्वारा ही इन यात्रियों को टिकटों की व्यवस्था की जाएगी। व्यक्तिगत तौर पर किसी को भी रेलवे टिकट नहीं जारी करेगा।

बंगाल: क्या ममता चीन की तर्ज पर कोरोना मृतकों की संख्या छुपाने की कोशिश रही है?

बंगाल कोरोनापश्चिम बंगाल भाजपा ट्विटर अकाउंट से 3 मिनट का एक वीडियो शेयर किया गया है। इस वीडियो में स्थानीय लोगों द्वारा स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति पर ऐतराज जताते हुए सुना जा सकता है, क्योंकि कथित तौर पर ये स्वास्थ्यकर्मी रात के अँधेरे में कोरोना संक्रमित मरीजों के शव को ठिकाने लगाने की कोशिश कर रहे थे।
चीन के वुहान से फैली कोरोना संक्रामक बीमारी ने विश्व को स्थिर कर दिया है। सभी देश पीड़ित और मृतकों की संख्या बता रहे हैं, लेकिन चीन से वास्तविकता बाहर नहीं आ रही, ठीक उसी तर्ज पर बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी काम रही हैं। वरना रिहाइशी इलाकों में मृतकों को ठिकाने लगाने की क्या जरुरत है?  
पश्चिम बंगाल की भाजपा इकाई ने राज्य सरकार पर सरकारी दिशा-निर्देशों की धज्जियाँ उड़ाकर रिहायशी इलाकों में कोरोना संक्रमण से जान गॅंवाने वालों के शव को ठिकाने लगाने का आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा, “रात के अँधेरे में बेखौफ होकर शवों को ठिकाना क्यों लगाया जा रहा है? क्या मृतकों की कोई गरिमा नहीं होती है? सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर इन शवों को आवासीय क्षेत्रों में क्यों ले जाया जा रहा है? समझा जा सकता है कि इस समय बंगाल की स्थिति कितनी डरावनी है। क्या ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए कुछ ‘ममता’ दिखाएँगी?”


इसी ट्वीट को रीट्वीट करते हुए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने लिखा, “इतनी अमानवीयता!!! कोरोना से हुई मौतों को छुपाने के लिए शवों को अँधेरे में ठिकाने लगाया जा रहा है। शवों का ये अपमान है और परंपरा के विपरीत भी है, रिहायशी इलाके में शवों के अंतिम संस्कार से संक्रमण फैलने का भी खतरा है! समझा जा सकता है कि इस समय राज्य की स्थिति कितनी भयावह है।”
वीडियो की शुरुआत में एक स्वास्थ्यकर्मी कहता है, “हम कुछ भी लोड या अनलोड नहीं कर रहे हैं।” इसके बाद वीडियो में कुत्तों की भौंकने की आवाज के साथ ही बैकग्राउंड में स्थानीय लोगों द्वारा जताए जा रहे ऐतराज को सुना जा सकता है। स्थानीय लोग लगातार स्वास्थ्यकर्मियों पर चिल्ला रहे थे, क्योंकि उन्होंने रहस्यमय तरीके से एक रहवासी कॉलोनी में अपनी एंबुलेंस खड़ी की थी।
वीडियो बनाने वाले को स्वास्थ्यकर्मियों से कहते हुए सुना जा सकता है कि वो लाश लेकर लेकर आए हैं। इसके साथ ही एक स्थानीय को आक्रोश में बोलते हुए देखा जा सकता है कि लाश को वहाँ से ले जाए, वरना वो अस्पताल को जला देंगे। स्थानीय लोग लगातार उनकी उपस्थिति पर आपत्ति जता रहे थे और PPE पहने स्वास्थ्यकर्मी सड़क के बीचों-बीच खड़े थे।
एक शख्स की दूर से आती आवाज को सुना जा सकता है, जिसमें वो पूछता है कि यहाँ क्या हो रहा है? वहीं एक अन्य शख्स बोलता है कि यहाँ से चले जाओ वरना हम तुम्हारी गाड़ी को जला देंगे। तभी एक और आवाज सुनाई देती है जो उसे गाड़ी के साथ वहाँ से चले जाने के लिए कहता है।
वीडियो में ठीक 3 मिनट पर, दो स्वास्थ्य कर्मचारियों को एंबुलेंस से काले रंग के एक भारी बैग को निकालते और फिर से वापस एंबुलेंस में लोड करते हुए देखा जा सकता है। यहाँ पर ध्यान देने वाली बात है कि शुरुआत में एक स्वास्थ्यकर्मी ने किसी भी चीज को लोड या अनलोड करने से इनकार किया था। वीडियो में इनकी बातों और कामों में विरोधाभास साफ दिख रहा है।
तभी एक आदमी बैग की तरफ इशारा करते हुए कहता है, “ये देखो बॉडी उठा रहा है।” एक स्वास्थ्यकर्मी को लोगों की तरफ देखकर हाथ हिलाते हुए यह बताने की कोशिश करते हुए देखा जा सकता है कि वे लोग कॉलोनी से जा रहे हैं। इसी बीच एक आदमी सवाल करता है कि उसे यहाँ आने के लिए किसने बोला था?
इससे पहले पश्चिम बंगाल में आसनसोल के भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो ने कोरोना संक्रमितों के लिए किए गए इंतजाम की पोल-पट्टी खोलते हुए ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में दिखाया गया था कि किस तरह टोलीगंज के एमआर बंगूर अस्पताल में बने आइसोलेशन वार्ड के नाम पर कोरोना संदिग्धों को बदइंतजामी के साथ रखा जा रहा है। उन्होंने इस वीडियो पर ममता बनर्जी का ध्यान आकर्षित करवाते हुए पूरे मामले पर इंक्वायरी करवाने की अपील की थी।
वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने इसमें एक डेड बॉडी की तरफ कैमरा किया हुआ था और करीब 45 सेकेंड तक उसे दिखाया कि कैसे वहाँ पड़े शव को कोई अटेंड करने नहीं आ रहा और उसके आस-पास लोग बिना सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किए घूम रहे थे। वीडियो में शख्स कहता है कि यहाँ ऐसे लोग हैं, जिनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, लेकिन फिर भी राज्य में तेजी से जाँच के लिए कोई प्रावधान नहीं है। यहाँ टेस्ट का रिजल्ट भी कम से कम 4 से 5 दिनों के बाद आता है। 
इस वीडियो में सबसे चिंताजनक बात ये देखने को मिली कि प्रशासन जिंदा लोगों के प्रति तो लापरवाही बरत ही रहा, मगर जो मर गए हैं उन्हें भी वहाँ से निकालने काम नहीं कर रहा। उनके शव कोरोना संदिग्धों के बीच में ही पड़े हुए हैं।
इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव राजीव सिन्हा ने राज्य के अस्पतालों में मोबाइल फोन ले जाने पर पांबदी लगाए जाने के फैसले के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ, मरीज या तीमारदार कोई भी अस्पताल के भीतर मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेंगे। मुख्य सचिव ने बताया कि संक्रमित जगहों पर मोबाइल के इस्तेमाल से कोरोना वायरस फैलने का खतरा होता है। हालाँकि बाबुल सुप्रियो के वीडियो शेयर करने के बाद आए इस फैसले सवाल उठने लगे कि क्या राज्य की ममता बनर्जी सरकार कोरोना संक्रमण पर जमीनी हकीकत को दबाने की कोशिश कर रही है।

लॉकडाउन में सपा नेता शमशाद रिजवी की शराब पार्टी, डांस कर रही लड़की पर संशय: नेता सहित तहसीम, शोएब, वसीम गिरफ्तार

लॉकडाउन शराब सपा नेता
शराब पार्टी करते सपा नेता समेत 4 गिरफ्तार (फोटो साभार: पत्रिका)
उत्तर प्रदेश के मेरठ में लॉकडाउन के उल्लंघन के आरोप में समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता शमशाद रिजवी समेत चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। चारों आरोपितों के खिलाफ धारा 144 और लॉकडाउन उल्लंघन के तहत केस भी दर्ज किया गया है। आरोपितों में लावड़ गाँव निवासी शमशाद रिजवी, तहसीम, शोएब, वसीम का नाम शामिल है। ये सभी वसीम के ढाबे पर शराब पी रहे थे, पार्टी कर रहे थे। 
कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर पूरे देश में लॉकडाउन है। लोगों से घरों में रहने और सोशल डिस्टेंसिंग के पालन करने की अपील की जा रही है। मगर इसके बावजूद लोग समय की नजाकत को नहीं समझ रहे हैं और खुलेआम शराब पार्टियाँ कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये शराब पार्टी की महफिल सपा नेता शमशाद रिजवी ने जमाई थी और बताया जा रहा है कि इसमें नाचने के लिए लड़की को भी बुलाया गया था। 
जब पुलिस वहाँ पर पहुँची तो सभी लोग शराब के नशे में लड़की को गानों पर नचाकर मस्ती कर रहे थे। सूचना पर मौके पर पहुँची पुलिस ने ढाबे को चारों ओर से घेर लिया। पुलिस शराब के नशे में झूम रहे सपा नेता समेत चारों लोगों को गिरफ्तार कर थाने ले आई। कहा जा रहा है कि पुलिस के पहुँचते ही लड़की मौके से भाग निकली। हालाँकि सदर देहात के एसएसपी अखिलेश का कहना है कि मौके पर लड़की के होने की बात सही नहीं है।

पुलिस ने बताया कि सपा नेता शमशाद रिजवी पूर्व में सांसद मुनव्वर हसन का प्रतिनिधि भी रह चुका है। बड़े-बड़े अधिकारियों के साथ अपनी मित्रता की बात बताकर कस्बे में रौब गालिब करना भी इसकी हर दिन की दिनचर्या है। 
मध्य प्रदेश के राजस्व अधिकारी निलंबित 
मध्य प्रदेश में तीन राजस्व अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। राज्य के रायसेन जिले में महंगी शराब की बोतलों के साथ सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करने को लेकर तीन राजस्व विभाग के अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। तीनों ने शराब की बोतलें दिखाते हुए एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की थी, जिसके बाद वो वायरल हो गई। बरेली सब डिविजनल मजिस्ट्रेट ने तीनों अधिकारियों- अजय धाकड़, धर्मेन्द्र मेहरा और दयाराम वर्मा पर कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। 
क्यों है  सपा नेताओं की ख़राब छवि 
आए दिन जो हम क्राइम की खबरें पढ़ते हैं, उसमें हर हफ्ते उत्तर प्रदेश में होने वाली क्राइम पर नजर डालें तो कम से कम एक सपा नेता से संबंधित निकल ही आती है। उदाहरण के लिए 8 बच्चों का बाप सपा नेता आफाक़ अहमद ने बंदूक के बल पर 5 साल तक एक महिला का यौन शोषण किया था। एक दूसरी खबर देखें तो बीजेपी नेता डॉ. बीएस तोमर की हत्या की साजिश रचने के आरोप में गाजियाबाद पुलिस ने सपा के एक नेता को गिरफ्तार किया है। उसका नाम मेहताब कुरैशी है।
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वैश्विक महामारी कोरोना से लड़ाई के दौरान दुनिया के देशों की समय पर मदद करने और अपने देश को संभालने के प्रधानमंत्री...

तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के 250 हॉटस्पॉट का ताल्लुक तबलीगी जमातियों से

कोरोना वायरस
                                                           प्रतीकात्मक 
तेलंगाना में लगभग 130 कोरोना वायरस हॉटस्पॉट (लगभग 90%) तबलीगी जमात के सदस्यों से जुड़े हैं, जो 13 मार्च से 15 मार्च के बीच दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में आयोजित मजहबी सभा में शामिल हुए थे। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश में लगभग 120 हॉटस्पॉट तबलीगी जमात के सदस्यों और उनके सहयोगियों से जुड़े हुए हैं। द संडे गार्डियन ने ये रिपोर्ट की है।
तेलंगाना के स्वास्थ्य मंत्री इटेला राजेंदर ने कहा कि राज्य जमातियों के न रहने से चीनी वायरस से मुक्त होगा। जमातियों से जुड़े लगभग 15 हॉटस्पॉट हैदराबाद में हैं, जबकि बाकी 115 राज्य के अन्य जिलों में हैं। सभी कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीजों का इलाज हैदराबाद के 3 अस्पतालों में किया जा रहा है। पुलिस और मेडिकल स्टाफ की 1300 टीमों की एक टास्क फोर्स को ऐसे 130 कंटेनमेंंट ज़ोन में तैनात किया गया है।
ICMR दिशानिर्देशों के अनुसार, बुखार, खाँसी और सर्दी के लक्षणों वाले लोगों का परीक्षण कोरोना वायरस कंटेनमेंट ज़ोन में किया जाएगा। इससे पहले यह लैब केवल साँस की बीमारियों वाले मरीज के साथ विदेशी मरीज और उनके संपर्क में आने वाले संक्रमित रोगियों का परीक्षण कर रही थीं। यदि ऐसे क्षेत्र से कोरोना वायरस के नए मामले सामने आते हैं, तो हॉटस्पॉट्स में लॉकडाउन बढ़ाया जाएगा।
दरअसल इन इलाकों को इसलिए निरगानी में रखा गया है, क्योंकि यहाँ से संक्रमित लोगों के खिलाफ काफी शिकायतें मिली थीं, ये लोग संक्रमण फैलाने के लिए जानबूझकर इधर-उधर घूमते रहते थे। इन समूहों की पहचान करने से पुलिस और सरकार को लॉकडाउन को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिली। इससे लोगों को होने वाली असुविधा से निपटना काफी आसान हो गया।
इसके साथ ही पुलिस ने युवा लड़कों और लड़कियों के ग्रुप ‘Gully Warriors’ की मदद माँगी है, जिन्होंने पुलिस को उन बदमाशों की सूचना दी थी, जो प्रतिबंधित क्षेत्रों से बाहर निकलते थे।
हैदराबाद के मेयर बोंथू राम मोहन ने ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए आवश्यक वस्तुओं की डोर-टू-डोर डिलीवरी के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने फिर से इस बात को दोहराते हुए कहा था, “किसी भी चिकित्सा आपातकाल के लिए यहाँ के लोगों को एम्बुलेंस सेवाओं के लिए 100 या 104 डायल करना चाहिए।”
इसके अलावा मुस्लिम बहुल इलाकों में बड़े पैमाने पर पुलिस की तैनाती की गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मस्जिदों में शुक्रवार की नमाज अदा करने के लिए कोई भी अपने घरों से बाहर न निकले।
दिल्ली में कोरोना वायरस के 712 मामले भी जमातियों से जुड़े हैं। वे राजधानी में 11 अप्रैल तक कुल 1069 मामलों में से दो तिहाई के लिए भी जिम्मेदार हैं। नए 128 मामलों में से लगभग 77% निजामुद्दीन मरकज से जुड़े हैं।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार कोरोना संक्रामक बीमारी में भी दिल्ली मुख्यमंत्री सेकुलरिज्म का खेल खेलेंगे ऐसी संभ.....
दिल्ली सरकार ने तबलीगी जमात से संबंधित चीनी वायरस के मामलों को “Special Operations” के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया है। वहीं तमिलनाडु सरकार ने भी इससे पहले जमातियों को “single source” के रूप में संदर्भित करना शुरू कर दिया था।

कोरोना संक्रमित पिता के जनाजा में शामिल 200 लोग हुए क्वारंटाइन

तमिलनाडु, कोरोना
                                                                                                                                                                     प्रतीकात्मक 
कुछ समय पहले दुबई से लौटे 70 वर्षीय व्यक्ति एक व्यक्ति की मौत की खबर चेन्नई से आई थी। उन्हें 2 अप्रैल को स्टैन्ली मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया और 2 घंटे बाद मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने इस बीच कोविड-19 की जाँच के लिए उनका सैंपल लिया और शव परिजनों को सौंप दिया। परिवारवालों से डॉक्टरों ने कहा कि मृतक कोरोना संक्रमित हो सकते हैं इसलिए तय दिशा-निर्देशों के तहत ही उनका दाह संस्कार करें।
बावजूद इसके मृतक के परिवार ने लोगों को इकट्ठा कर जनाजा निकाला। डॉक्टरों की सलाह नकारते हुए सभी रिवाज़ पूरे किए। 4 मार्च को जब मृतक की रिपोर्ट आई तो पता चला की वे कोरोना पॉजिटिव थे। इसके बाद उनके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का इल्जाम लगा दिया। अस्पताल प्रशासन ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि इस संबंध में मृतक के बच्चों को सब अच्छे से समझाया था।
अब इस मामले में पुलिस ने मृतक के दो बेटों पर मामला दर्ज किया है। न्यू इंडियन एक्प्रेस के मुताबिक, कीलाकरई पुलिस ने मृतक के दो बेटों को “सच्चाई दबाने” के लिए हिरासत में लिया है। इन पर महामारी रोग अधिनियम, तमिलनाडु सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल ने शव WHO प्रोटोकॉल के तहत सील बॉडी बैग में सौंपा था। लेकिन मृतक के बेटों ने इसकी अनदेखी करते हुए बैग से शव निकाल स्नान कराया। लोगों को जुटाकर जनाजा निकाला और पूरे रीति-रिवाज के साथ शव को दफनाया।
कीलाकरई गाँव के प्रशासनिक ऑफिसर मरिमुत्थु ने सोमवार(अप्रैल 6) को कीलाकरई पुलिस थाने में इन दोनों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया। दोनों भाइयों ने अपने पिता का अंतिम संस्कार इस प्रकार किया जिससे कोरोना वायरस का संक्रमण फैल सकता था। दोनों के ख़िलाफ़ सच्चाई छिपाई के मामले में केस दर्ज हुआ है। रामनाथपुरम के एसपी वी. वरुण कुमार ने बताया कि मृतक को कोरोना वायरस वाले वार्ड में भर्ती किया गया था और उन्हें कोरोना संदिग्ध बताया गया था।
मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने उनसे जानकारी छिपाई। इसलिए उन्होंने शव को दफनाते हुए कोई एहतियात नहीं बरता। जानकारी के अनुसार, मृतक के शव को उसी दिन एंबुलेंस से ले जाया गया था और अगले दिन करीब 10 बजे उन्हें दफना दिया गया। बताया जा रहा है कि जनाजे में रामनाथपुरम के विधायक और पूर्व मंत्री एम मणिकंदन सहित कई लोग शामिल हुए थे। इसे देखते हुए करीब 200 लोगों को क्वारंटाइन किया गया है। इसकी सूचना राज्य की स्वास्थ्य सचिव बीला राजेश ने मंगलवार(अप्रैल 7) को दी।
सारी स्थिति साफ होने के बाद परिजन अब भी दावा कर रहे हैं कि अस्पताल में न तो उन्हें उनके पिता के कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी दी गई और न ही उनका सैंपल लिया गया। इसके अलावा उनका कहना है कि शव भी उन्हें एक हरे कपड़े में मिला। उनके मुताबिक शनिवार को जब रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो इसकी सूचना उन्हें दी गई। अस्पताल प्रशासन ने परिजनों के सभी इल्जामों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मृतक का शव COVID-19 प्रोटोकॉल के अनुसार लपेटा गया था और चेतावनी के साथ सौंपा गया था कि वे संक्रमित हो सकते हैं।
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तबलीगी जमात का सरगना मौलाना साद, जिसने दावा किया था कि वो कोरोना संक्रमण के चलते एहतियात बरतते हुए क्वारंटीन में ह.....