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जूनागढ़ के AAP अध्यक्ष गोपाल इटालिया के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत FIR, पुलिस स्टेशन में किया महिला अफसर के पैरों में गिरने का ड्रामा

                                          गोपाल इटालिया का ड्रामा (साभार: ऑपइंडिया गुजराती)
गुजरात के जूनागढ़ जिले के विसावदर तालुका स्थित मंडावद में मूंगफली खरीद केंद्र पर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं और केंद्र पर काम कर रहे श्रमिकों के बीच तीखा झड़प हो गया। इस घटना के बाद एक मजदूर की पत्नी के साथ कथित तौर पर जातिसूचक गाली-गलौज, मारपीट और उत्पीड़न के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोपितों में AAP के जिला अध्यक्ष हरेश सावलिया का नाम भी शामिल है।

मामले में पुलिस द्वारा निर्देश दिए जाने के बाद AAP विधायक गोपाल इटालिया पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ रविवार (28 दिसंबर 2025) को पुलिस थाने पहुँचे। दरअसल, हरेश और अन्य आरोपितों को अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। इसी दौरान थाने में एक महिला पुलिस अधिकारी और गोपाल इटालिया के बीच तीखी बहस हो गई। AAP समर्थकों ने भी हंगामा किया जिसके चलते स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

पुलिस अधिकारी ने इटालिया और उनके समर्थकों से शांत और सम्मानजनक तरीके से बात करने का आग्रह किया लेकिन इटालिया काफी आक्रोशित हो गए। इस दौरान वे पार्टी कार्यकर्ताओं के उकसाने पर महिला पुलिस अधिकारी के पैरों में गिर पड़े। महिला अधिकारी ने इस व्यवहार पर आपत्ति जताई और वहाँ से चली गईं। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। वीडियो में गोपाल इटालिया बार-बार यह कहते सुने जा सकते हैं कि ‘झूठी शिकायत दर्ज की गई है’ और वे पुलिस से सबूत दिखाने की माँग करते नजर आए।

इस मामले पर मीडिया से बात करते हुए विसावदर के ASP रोहित डागर ने बताया कि संबंधित मूंगफली खरीद केंद्र पर उस समय खरीद प्रक्रिया चल रही थी जब AAP के नेता और कार्यकर्ता वहाँ पहुँचे। मूंगफली को बोरियों में भरने जैसे किसी छोटे मुद्दे को लेकर वहाँ मौजूद श्रमिकों से उनकी बहस शुरू हो गई। बहस धीरे-धीरे हिंसक रूप लेती चली गई। आरोप है कि इस दौरान एक मजदूर के साथ मारपीट की गई, उसकी पत्नी को धक्का दिया गया और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस के अनुसार, इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।

उत्पीड़न और छेड़छाड़ जैसी गंभीर धाराओं में FIR दर्ज होने के बाद MLA गोपाल इटालिया ने हरेश सावलिया और दूसरे आरोपितों को माला पहनाई और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ रैली के रूप में पुलिस स्टेशन पहुँचे। शिकायत दर्ज होने के बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता इटालिया की देखरेख में नाटक करने के लिए पुलिस स्टेशन पहुँचे। शिकायत दर्ज होने के बाद इटालिया ने थाने में प्रदर्शन किया और वहाँ पहुँचकर BJP पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा मामला किसानों की आवाज उठाने वालों को जेल में डालने की साजिश है, जिसे BJP ने रचा है।

हालाँकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मजदूरों के खिलाफ अपराध करने वालों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। वहीं, गोपाल इटालिया का आरोप है कि कानून का गलत इस्तेमाल कर झूठे अत्याचार और उत्पीड़न के मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

इस मामले में जूनागढ़ के पुलिस अधीक्षक (SC/ST सेल) रविसेज सिंह परमार ने आरोपितों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए पेश होने को कहा है। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 75(2), 115(2), 296(B), 351(33) और 54 के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(R)(S) भी लगाई गई हैं। पुलिस ने हरेश सहित तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है और मामले की आगे की जाँच जारी है।

2020 में अंकुरित हुआ था जो वामपंथी विष बेल, उसे 5 साल में ही बिहार ने फिर से किया दफन; केजरीवाल पार्टी को भी किया चारों खाने चित


बिहार विधानसभा चुनाव 2025 कई दूरगामी राजनीतिक संदेश देने वाला रहा है। सत्तारूढ़ NDA को मिले स्पष्ट बहुमत ने जहाँ एक और दिखाया कि मतदाता अभी भी नीतीश कुमार की साफ छवि और विकासवादी राजनीति के साथ खड़े हैं। वहीं, RJD के खराब प्रदर्शन ने दिखाया कि उनका कोर वोट बैंक MY (मुस्लिम-यादव) भी उनसे छिटक रहा है। AIMIM को मिली 5 सीटों से उनके मुस्लिम बहुल इलाकों में पैठ बनाने की पुष्टि हुई तो बिहार ने एक बार फिर वामपंथ की ‘विषैली राजनीति’ को नकार दिया।

बिहार चुनाव ने घोटालेबाज़ अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को भी उसकी औकात दिखा दी, जिसे कोई मीडिया नहीं बता रहा। मीडिया को डर है कहीं पंजाब से विज्ञापन मिलने बंद न हो जाए। वामपंथियों के साथ-साथ केजरीवाल को भी बिहार ने पानी की एक बून्द तक नहीं दी। बिहार नहीं चाहता लालू के बाद केजरीवाल जैसे घोटालेबाज़ आए।   

गुणा-गणित से 3 सीटों तक पहुँचीं लेफ्ट पार्टियाँ

इस विधानसभा चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट-लेनिनिस्ट) (लिबरेशन) को जहाँ 2 सीटें मिलीं तो वहीं कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट) के हाथ केवल एक सीट लगी। इन तीनों सीटों पर भी लेफ्ट के विचार से ज्यादा असर निर्दलीय उम्मीदवारों के गुणा-गणित का दिखाई पड़ा।

काराकाट सीट पर CPI (ML) (L) को 2,836 वोटों से जीत मिली तो इस सीट पर निर्दलीय चुनाव लड़ रहीं भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह को 23,469 वोट मिले। कमोबेश यही स्थिति लेफ्ट को मिली अन्य 2 सीटों पर दिखाई पड़ी। यानी अगर सीधा मुकाबला होता तो शायद लेफ्ट के हाथ ये सीटें भी ना आतीं।

जब बिहार ने RJD को किया था खारिज

दिलचस्प यह है कि यह पहली बार नहीं है जब वामपंथी दलों या RJD को बिहार ने इस तरह से नकारा हो। 2010 में RJD की ऐतिहासिक हार के बाद माना गया कि बिहार ने जंगलराज को प्रश्रय देने वाली पार्टी को जमीदोज कर दिया था। उसके उस स्मृति से हमेशा के लिए दूरी बना ली है जो उसके पिछड़ेपन का प्रतीक बनी हुई थी। नीतीश कुमार के सुशासन मॉडल ने उस जनमत को और मजबूत किया। RJD को उस चुनाव में केवल 22 सीटें मिली थीं।

                                2010 बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम (साभार: ECI)

हालाँकि, 2015 आते-आते नीतीश कुमार के राजनीतिक प्रयोगों के कारण RJD फिर जिंदा दिखाई देने लगी और उसकी नीतीश कुमार के साथ सत्ता में वापसी हो गई। इसके अगले चुनाव में भी हालात RJD के अनूकुल दिखाई दिए लेकिन उसके पीछे की बड़ी वजह चिराग पासवान थे। चिराग पासवान 2020 के चुनावों के दौरान नीतीश कुमार से नाराज थे और उनकी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए थे।

इसके कारण RJD को मदद मिली और पार्टी एक बार फिर ताकतवार बनकर वापस लौटी। हालाँकि, कॉन्ग्रेस-RJD की जीत फिर भी इतनी बड़ी नहीं थी कि उन्हें सत्ता दिला पाती। इसी चुनाव में वामपंथी दलों ने भी वापसी की थी। 2020 के चुनावों में CPI (ML) (L) को 12 तो CPI और CPI (M) को 2-2 सीटें मिलीं। यानी लंबे वक्त पहले जिस वामपंथ को बिहार ने खारिज कर दिया था वो 16 सीटों के साथ उसके फिर से वापसी करने की अटकलें लगने लगी थीं।

                                   2015-2020 बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे (फोटो: PRS India)

2024 में लोकसभा चुनावों में भी CPI (ML) (L) ने बिहार में 2 सीटों पर जीत दर्ज की और लगने लगा की लेफ्ट की पार्टियाँ बिहार में एक बार फिर दम दिखा रही हैं। CPI-ML ने यह संकेत दिया कि बिहार के कुछ हिस्सों में उसकी जमीन अब भी सुरक्षित है।

                                                2024 बिहार लोकसभा चुनाव परिणाम (ECI)

चिराग द्वारा दी गई ऑक्सीजन जब इस वार वामपंथियों और RJD से हटी तो उन्हें अपनी असलियत दिख गई। बिहार की जनता से RJD और वामंपथी दलों की एक बार फिर से सूपड़ा साफ कर दिया। जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर अपना विश्वास और पुख्ता किया है। जिस तरह से एकजुट होकर NDA ने चुनाव लड़ा उससे अगर वोटरों के मन में कोई शंका थी भी तो वो भी दूर हो गई। जनता ने स्पष्ट और एक तरफा मत दिया, वोटों की इस सुनामी में वामपंथी दल साफ हो गए।

फिर से ना पनपे ‘विष बेल’: अब NDA की जिम्मेदारी

अब NDA के सामने भी चुनौती है कि वो इस जनादेश का सम्मान करे। जनता ने उसे सिर्फ ‘विकल्प’ नहीं बनाया है बल्कि पूर्ण ‘विश्वास’ भी दिया है। यह विश्वास इस बात पर आधारित है कि NDA बिहार को उन पुराने दौरों में वापस नहीं ले जाएगा जिनमें वामपंथी उग्रवाद, जातीय हिंसा, आपराधिक राजनीति और संस्थागत दुर्बलता हावी रहती थी।

NDA को भी यह समझना होगा कि आगे वो ऐसे किसी भी राजनीतिक प्रयोग से बचें जिससे वामपंथी दलों को फिर से ताकत मिल सके। यह जनमत अतीत को दफन करने का विश्वासमत है। यह जनमत दिखाता है कि बिहार के लोग अपने सुरक्षित भविष्य के लिए NDA पर भरोसा कर रहे हैं। PM मोदी और नीतीश कुमार पर भरोसा कर रहे हैं।

जनता ने स्थिरता और विकास के नाम पर फैसला सुनाया है। यह फैसला सिर्फ NDA के पक्ष में नहीं है बल्कि यह फैसला उस बिहार के पक्ष में है जो आगे बढ़ना चाहता है, जो अपने युवा को अवसर देना चाहता है और जो किसी भी कीमत पर अराजकता के दौर में वापसी नहीं चाहता। 

दिल्ली : अरविन्द केजरीवाल के घड़ियालू आँसू कब तक? 266 करोड़ रूपए /km से सड़क बनाने वाली AAP सरकार 251 करोड़ रूपए /km के द्वारका एक्सप्रेसवे पर कर रही राजनीति

द्वारका एक्सप्रेसवे (Dwarka Expressway) और उसकी लागत को लेकर आम आदमी पार्टी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। आम आदमी पार्टी की मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि यह इतना बड़ा घोटाला है, जिसे खुद केंद्रीय एजेंसी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG: Comptroller and Auditor General) भी नहीं दबा पाई। इस बारे में बात करते हुए उन्होंने 18 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर और 251 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर जैसे आँकड़े गिनाए।

AAP की प्रियंका कक्कड़ ने 16 अगस्त 2023 को समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि द्वारका एक्सप्रेसवे की लागत को बिना अप्रूवल के ही बढ़ा दिया गया। आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल का उदाहरण देते हुए उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि दिल्ली में कई सड़कें, कई फ्लाईओवर तय लागत से कम कीमत पर बना डाले।

द्वारका एक्सप्रेसवे को लेकर 251 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर की लागत पर आम आदमी पार्टी जो राजनीति कर रही है, दिल्ली में उसके खुद के आँकड़े कितने कम हैं – यह एक सवाल है। इस सवाल का जवाब दिल्ली में AAP सरकार द्वारा बनाई गई सड़क/ब्रिज/फ्लाइओवर में छिपा है।

प्रियंका कक्कड़ ने शायद सिग्नेचर ब्रिज (signature bridge) का नाम नहीं सुना होगा। 2004 में इस प्रोजेक्ट के बारे में घोषणा की गई, बजट था – 887 करोड़ रुपए। 2007 में दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार की कैबिनेट ने इसका बजट किया – 1131 करोड़ रुपए। 2015 में अरविंद केजरीवाल की सरकार थी। प्रियंका कक्कड़ को इसी सिग्नेचर ब्रिज के 2015 के बजट को याद करना चाहिए – 1594 करोड़ रुपए।

675 मीटर लंबी है सिग्नेचर ब्रिज। ब्रिज को कनेक्ट करने वाली सड़क सहित इस पूरे प्रोजेक्ट की लंबाई है लगभग 6 किलोमीटर। 1594 करोड़ रुपए को 6 से भाग देने पर प्रति किलोमीटर लागत बैठती है – 266 करोड़ रुपए। जिस आम आदमी पार्टी की सरकार ने 266 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर की लागत से साल 2018 में सड़क बनाई, उसकी राष्ट्रीय प्रवक्ता साल 2023 में 251 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर की लागत से बने द्वारका एक्सप्रेसवे को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं, यह हास्यास्पद है।

द्वारका एक्सप्रेसवे की लागत, राजनीति, सड़क मंत्रालय का जवाब

द्वारका एक्सप्रेसवे की लागत से संबंधित नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आने के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 14 अगस्त 2023 को ही आँकड़ों सहित विस्तृत जवाब दे दिया था। मंत्रालय ने बताया था कि भारतमाला परियोजना के तहत 18.2 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर की लागत का आँकड़ा पूरी परियोजना के लिए था न कि सिर्फ द्वारका एक्सप्रेसवे के लिए।
मंत्रालय ने यहाँ तक बताया था कि 18.2 से बढ़ कर 251 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर का जो आँकड़ा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने दिया, वो तथ्यात्मक तौर पर सही नहीं है।
मंत्रालय ने हालाँकि स्वीकार किया है कि CAG के सुझाव पर ग्रेड आधारित निर्माण अगर किया जाता तो द्वारका एक्सप्रेसवे बनाने की औसत लागत 1200 करोड़ रुपए तक कम हो सकती थी। लेकिन इसमें एक बाधा थी। निर्माण की गति में कमी होती। इसके लिए मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग-48 का उदाहरण भी दिया।
द्वारका एक्सप्रेसवे दिल्ली के द्वारका और हरियाणा के गुरुग्राम के बीच देश का पहला 8-लेन एलिवेटेड शहरी एक्सप्रेसवे होगा। 29 किलोमीटर लंबे द्वारका एक्सप्रेसवे का 18.9 किलोमीटर हिस्सा गुरुग्राम में और 10.1 किलोमीटर दिल्ली में पड़ता है। इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई में से 23 किलोमीटर एलिवेटेड (जमीन से ऊपर) है जबकि लगभग 4 किलोमीटर सुरंग है।

क्या है भारतमाला परियोजना

मोटा-मोटी इसे आप देश भर में राष्ट्रीय राजमार्गों का वृहद स्तर पर निर्माण समझ सकते हैं। 74942 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए 2017 में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने भारतमाला परियोजना को मंजूरी दी थी। उस समय 34800 किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के लिए 535000 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था।
भारतमाला परियोजना और इसके लिए शुरुआत में जो बजट कैबिनेट समिति ने आवंटित की थी, उसके साथ द्वारका एक्सप्रेसवे को जोड़ कर देखने से समस्या होगी। अभी हो रही राजनीति भी इसी कारण से है। जमीन पर सड़क बनाने के औसत बजट को पूरी तरीके से एलिवेटेड और सुरंगों वाली प्रोजेक्ट (द्वारका एक्सप्रेसवे) के साथ कॉम्पेयर करना आम और संतरे की तुलना के बराबर है। तुलना अगर करनी ही है तो दिल्ली के सिग्नेचर ब्रिज और उसमें लगे बजट के साथ कीजिए (2018 और 2023 के बीच 5 साल में लागत के बढ़ते आँकड़ों को अगर दरकिनार कर भी दिया जाए तो)।

भारत का सबसे घटिया राजनेता कौन है?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गिरगिट से भी ज्यादा तेजी से रंग बदलते हैं। कोरोना महामारी के संकट के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि दिल्ली के अस्पतालों में सिर्फ और सिर्फ दिल्लीवासियों का इलाज होगा लेकिन तब दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने हस्तक्षेप करते हुए एनसीआर और दूसरे राज्यों के लोगों को राहत दी थी। अब पंजाब और दूसरे राज्यों में आगामी चुनाव को देखते हुए अरविंद केजरीवाल ने फिर से पैतरा लेना लेना शुरू कर दिया है। अरविंद केजरीवाल अब कर रहे हैं कि चारों तरफ कोरोना बहुत ज्यादा फैल गया है। पंजाब में भी कोरोना काफी फैल गया है। अब सभी लोगों को साथ लेना पड़ेगा। आम आदमी पार्टी ने तय किया है कि लोगोें के साथ मिलकर हम ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाने की कोशिश करेंगे।
अरविंद केजरीवाल की दोगली नीति का वीडियो देखिए …….
दिल्ली बनती पाकिस्तान 
कल(सितम्बर 6) रात फिर ओखला में मुस्लिमो ने हिन्दू मां,बाप, लड़कियों को चाकुओं से गोदा और बाप का पैर तोड़ दिया। एक लड़की जो बोल सुन नहीं सकती उसकी कमर पर धारदार हथियार से वार किया जिसमे लड़की के कमर पर काफी गम्भीर चोट आई 
इसी लड़की की बड़ी बहन के माथे पर भी धारदार हथियार से वार करके गम्भीर चोट पहुंचाई गई। इसी लड़की के पिताजी की टांग तोड़ दी जेहादियों ने जिसमे अब डॉक्टर प्लेट डालने के लिए कह रहे है। और वहीं मां का सर फाड़ दिया आंख पर बुरी तरीके से मारा गया और दूसरी आंख भी चोट लगने के कारण बिल्कुल काली पड़ हुई है और वही ये महिला भी खून से लथपथ हो गई। ऐसा सुनाई में आया है पुलिस को वहां से एक पिस्टल भी बरामद हुई है
जी बिल्कुल ठीक सुना आपने ये सब हिंदुस्तान का दिल कहे जाने वाली दिल्ली में हो रहा है। अब दिल्ली में जेहादी मुस्लिमों को हौसले कुछ ज्यादा ही बुलन्द है
सच में "केजरी खान" की आप सरकार राज में इस प्रकार जेहादी मुसलामानों को बढ़ावा मिल रहा है। वहीं पीड़ित को इंसाफ की जगह सिर्फ झूठा आश्वासन ही दिया जा रहा है













दिल्ली : आप ने उत्तराखंड की इष्ट देवी नंदा देवी की तुलना कूड़े के ढेर से

अरविन्द केजरीवाल की पार्टी ने उत्तराखंड की
इष्ट देवी का किया अपमान
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आम आदमी पार्टी कितनी हिन्दू विरोधी हो सकती है, दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के अलावा इसके गरीब, मजलूम शांतिदूतों द्वारा राजौरी गार्डन, विकासपुरी और लाल कुआँ में हुए हिन्दुओं पर हमलों पर ख़ामोशी साध दंगाइयों को संरक्षण दिया जाता रहा है। 
अरविन्द केजरीवाल माफ़ी मांगो 
अरविन्द केजरीवाल जो चुनावों में हनुमान चालीसा पढ़ते हैं, लेकिन यह नहीं जानते की हनुमान राक्षसों और धर्म का अपमान करने वालों के घोर विरोधी थे। लेकिन चुनाव उपरांत उनकी हरकतों से उनके हिन्दू होने पर ही संदेह होने लगता है।
जिस तरह आप के अधिकारित ट्वीट से गाज़ीपुर के कूड़े के ढेर की भारत के सबसे ऊँचे पहाड़ों से करने पर भी बेशर्मों की तरह चुप्पी साधे होने का क्या अर्थ निकाला जाए। क्या केजरीवाल सहित पार्टी में जितने भी हिन्दू हैं उन सबको राष्ट्र से माफ़ी मांगनी चाहिए। क्या इन आपी हिन्दुओं को नहीं मालूम की हमारे हिन्दुओं के अधिकतर तीर्थ जैसे : वैष्णो देवी, भैरों, शिव खोडी, अमरनाथ, माँ नन्दा देवी आदि पहाड़ों पर ही हैं। क्या गाज़ीपुर कूड़े का ढेर इन पहाड़ों से ऊँचा है? यदि नहीं, फिर किस आधार पर अधिकृत ट्विटर पर इसे भारत का सबसे ऊँचा पहाड़ बताया? क्या लोकप्रियता या चर्चा में रहने का कोई और अन्य तरीका नहीं था, जो हिन्दू तीर्थों का अपमान कर किया जा रहा है? अगर अरविन्द केजरीवाल में लेशमात्र भी शर्म है, तो तुरंत माफ़ी मांगे। 
मोदी विरोध करने में कांग्रेस और वामपंथी तो बेनकाब हो गयी है, अगला नंबर केजरीवाल पार्टी का है, जो आगामी नगर निगम चुनाव के कारण हिन्दू विरोधी प्रचार कर मुस्लिम वोट बैंक को खुश कर रहे हैं। 
दिल्ली को संयुक्त राष्ट्र भी ‘पॉल्यूशन कैपिटल’ के रूप में देखता है लेकिन अरविन्द केजरीवाल की सरकार इस छवि को बदलने की बजाए आरोप-प्रत्यारोप में लगी हुई है, भले ही इससे देश की बदनामी ही क्यों न हो। ईस्ट दिल्ली के गाजीपुर में भारत का सबसे बड़ा कूड़ा-करकट का पहाड़ है, देश का सबसे बड़ा कचरे का ढेर। केजरीवाल की पार्टी ने इसकी तुलना उन पवित्र पर्वतों से की है, जिसकी लोग पूजा करते हैं। इसी क्रम में AAP ने गाजीपुर के कचरे के ढेर की तुलना उत्तराखंड की नंदा देवी से कर दी, जो राज्य की इष्ट देवी भी हैं।
आगे बढ़ने से पहले उस कचरे के पहाड़ के बारे में बता दें कि वो 40 फुटबॉल पिच से भी अधिक के क्षेत्र में फैला हुआ है। आवारा कुत्ते और गाय वहाँ घुमते रहते हैं। जानवर बीमार पड़ते हैं। 1 साल पहले ही इसकी ऊँचाई 213 फ़ीट थी। ऊँचाई में ये इस्लामी आक्रांताओं द्वारा बनाए गए ताजमहल और कुतुब मीनार को टक्कर दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट तो यहाँ तक कह चुका है कि कुछ दिनों बाद वहाँ से गुजरने वाले हवाई जहाजों के लिए अलर्ट जारी करना पड़ेगा।
आते हैं आम आदमी पार्टी (AAP) की करतूत पर, जिसने गाजीपुर के उस कुड़े के पहाड़ की तुलना तीन पवित्र पर्वतों से की। उसने लिखा कि सिक्किम में कंचनजंघा सबसे बड़ा पर्वत है। इसके बाद उसने तस्वीरें डालते हुए लिखा कि इसी तरह उत्तराखंड में नंदा देवी और कामेट पर्वत शहर सबसे ऊँचा है। लेकिन इन तीनों के साथ ही उसने गाजीपुर के कचरे के पहाड़ की तस्वीर भी डाल दी और लिखा कि इसे भाजपा के एमसीडी ने बनाया है।
आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक हैंडल से ऐसा किया। इसके बाद सोशल मीडिया में आलोचना का दौर शुरू हो गया। बता दें कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने जिन पर्वतों का जिक्र किया, वो न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए पवित्र हैं बल्कि पूरा देश उन पर गर्व करता है और उन्हें पूजता है। भारत में हिमालय को भी देवता माना गया है, जिसके घर माँ पार्वती का जन्म हुआ था। ऐसे में AAP का ये मजाक लोगों को नागवार गुजरा। उत्तराखंड में तो नंदा देवी का विशेष महत्व है।

भारतीय जनता युवा मोर्चा की राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी नेहा जोशी ने कहा कि AAP और अरविन्द केजरीवाल ने हमेशा उत्तराखंड और यहाँ के निवासियों का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि नंदा देवी उत्तराखंड की इष्ट देवी हैं और उनके अपमान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने केजरीवाल से इस मामले में माफ़ी माँगने को कहा। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे सीएम केजरीवाल ने बाटला हाउस एनकाउंटर में बलिदान हुए मोहन चंद्र शर्मा के शौर्य पर सवाल उठाया था।
नेहा जोशी ने आरोप लगाया कि सस्ती लोकप्रियता के लिए केजरीवाल और उनकी पार्टी ने जो दुस्साहस किया है, उन्हें उस हर एक व्यक्ति से माफ़ी माँगनी चाहिए, जो माँ नंदा की उपासना करते हैं। वहीं उत्तराखंड के एक अन्य ट्विटर हैंडल ‘सनातन टाइम्स’ ने पूछा कि जिन माँ नंदा देवी की हम पूजा करते हैं, उनका अपमान करना कहाँ तक उचित है? उसने AAP को सलाह दी कि वो देवभूमि को अपनी गन्दी राजनीति से दूर रखे।

नंदा देवी का अर्थ है वो देवी, जो आनंद प्रदान करती हैं। 1983 में ही नंदा देवी और इसके चारों तरफ की पहाड़ियों को पर्वतारोहण के लिए बंद कर दिया था, क्योंकि स्थानीय लोगों के लिए इसका बड़ा ही धार्मिक महत्व है। नंदा देवी नेशनल पार्क तो यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में आता है। इसे उत्तराखंड में सुनंदा देवी के नाम से भी पुकारते हैं। पूरे उत्तराखंड के लोग नंदा देवी को अपना इष्ट मानते हैं।

भाजपा नेता बग्गा का अरविन्द केजरीवाल पर गरीबों का अनाज चोरी का आरोप

CM केजरीवाल बग्गा
भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने दिल्ली में AAP सरकार के खिलाफ अनाज घोटाले का आरोप लगाया है। बग्गा ने कहा है कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के हरि नगर विधायक राजकुमारी ढिल्लों इस घोटाले में शामिल हैं। इसके साथ ही उन्होंने विधायक के इस्तीफे की माँग की है।
भाजपा नेता के अनुसार, आप सरकार ने दिल्ली के हरिनगर इलाके के मायापुरी रोड पर स्थित प्रतिभा विकास विद्यालय की कक्षाओं में हजारों टन अनाज रखा है। उन्होंने कहा कि ये सारे खाद्यान्न लॉकडाउन के दौरान लोगों के बीच बाँटा जाना था, लेकिन इसे बाँटा नहीं गया और इसे स्कूल बिल्डिंग में बंद करके रखा गया है।

तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने स्कूल के अंदर रखे अनाज के बोरों को दिखाते हुए वीडियो साझा किया हैं। बता दें इस वीडियो को कक्षाओं की खिड़कियों के माध्यम से शूट किया गया है। उन्होंने कहा कि स्कूल परिसर में हजारों टन अनाज सड़ रहा है। कक्षाओं के कमरे बंद हैं और जब स्कूल को कमरे खोलने के लिए कहा गया तो उन्होंने कहा कि फ़ूड इंस्पेक्टर की अनुमति के बिना कमरों नहीं खोला जा सकता है। बग्गा ने बताया कि अधिकारी मीडिया को परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं।  
तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने स्कूल में खाद्यान्न भंडार के बारे में जानकारी प्राप्त करने के बाद अन्य भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ स्कूल का दौरा किया और सबूत इक्कठा करने के लिए वहाँ संग्रहीत खाद्यान्नों का वीडियो बनाया। कोरोना वायरस की वजह से चल रहे लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद है। जिसका उपयोग राज्य सरकार द्वारा खाद्यान्न रखने के लिए एक गोदाम के रूप में किया गया है।
जब स्कूल प्रशासन ने भाजपा कार्यकर्ताओं को कक्षाओं में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी तो वे स्कूल के सामने AAP सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। भाजपा कार्यकर्ताओं ने “केजरीवाल चोर है” कहते हुए नारे भी लगाए और सीएम और स्थानीय विधायक से इस्तीफे की माँग की। बग्गा ने कहा कि राजकुमारी ढिल्लों ने गरीबों का भोजन चुराया है, उन्हें एक मिनट भी सत्ता में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने माँग की कि विधायक को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।

दिल्ली की सल्तनत मांग रही नए किस्म का ऑड-ईवन


दिल्ली सल्तनत इसलिए कहा जा रहा है कि लगता है की अरविन्द केजरीवाल की सरकार अकबर के दीन-ए-इलाही पर काम रही है, जिसे हिन्दू की मौत नज़र नहीं आती, लेकिन इनके गरीब, मजलूम, शांतिप्रिय की मौत होने पर दिल्ली से बाहर कहीं भी पहुँच जाते हैं, वोट और समर्थन हिन्दू का चाहिए। हिन्दू होने के नाते इनको मालूम है कि इसे मुफ्त की रेवड़ियां दे दो, पिटने के बावजूद जी-हजूरी करता रहेगा। दिल्ली में लाल कुआँ और पश्चिम दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगे होने पर दंगाइयों को बचाने में लगे हैं। आरोपियों पर देशद्रोही मुकदमा चलाने के लिए दिल्ली पुलिस को इजाजत देने में आनाकानी कर रहे हैं। मुस्लिम वोट बैंक का सवाल है भाई, कैसे जाने दूँ, कांग्रेस या किसी और के हाथ में।  
दिल्ली के विवादित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सुर्खियों में बने रहने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। देश में कोरोना महामारी का प्रकोप जारी है, ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से तमाम तरह की सावधानियां बरती जा रही हैं। लेकिन केजरीवाल और उनकी सरकार इसमें भी मसखरी करने से बाज नहीं आ रही है। आपने देखा होगा कि दिल्ली में प्रदूषण खत्म करने को लेकर इन्हीं केजरीवाल साहब ने ऑड-ईवन का फॉर्मूला लागू किया था। लगता है अब कोरोना की रियायतों को लेकर भी वे ऑड-ईवन फार्मूले पर ही चल रहे हैं।
23 अगस्त यानि ऑड डे पर केजरीवाल ने केंद्र सरकार से दिल्ली में मेट्रो चलाने की मांग कर डाली। उन्होंने कहा कि दिल्ली में चरणबद्ध तरीके से मेट्रो चलाई जाए।
26 अगस्त यानि ईवन डे पर दिल्ली सरकार में डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने मांग की कोविड को देखते हुए NEET/JEE की परीक्षा स्थगति कर दी जाए। और किसी अन्य तरीके से परीक्षा ली जाए।
देखिए जब मेट्रो चलाने की मांग करते हैं तो कोरोना का खौफ खत्म हो जाता है, लेकिन जब परीक्षा स्थगित करने की मांग करते हैं, इन्हें कोरोना वायरस का डर सताता है। यह वो दोगलापन है केजरीवाल की सरकार जो दिल्लीवालों को कदम-कदम पर देखने को मिल रहा है।

दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगा : ताहिर हुसैन की दिल्ली नगर निगम ने निरस्त की सदस्यता; पेंशन भी समाप्त होनी चाहिए

ताहिर हुसैन पार्षद सदस्यता रद्द
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद और दिल्ली दंगों के आरोपित ताहिर हुसैन के मामले में बड़ी ख़बर आई है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम (EDMC) ने ताहिर हुसैन की सदस्यता रद्द कर दी है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए मामले की जानकारी दी। नगर निगम के बयान के अनुसार 26 अगस्त को यह निर्णय लिया गया था। 
वार्ड संख्या 59-ई के पार्षद की सदस्यता निरस्त की जा रही है। दिल्ली नगर निगम ने इस मामले में आदेश जारी करते हुए कई अहम बातें कहीं। आदेश के मुताबिक़ दिल्ली नगर निगम अधिनियम की धारा 33 की उपधारा 2 में यह प्रावधान है। यदि कोई सदस्य लगातार सदन की 3 बैठकों में बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहता है, तो सदन उक्त पार्षद की सदस्यता समाप्त करके वार्ड के प्रतिनिधि पद को रिक्त घोषित कर सकता है। 
इसके बाद आदेश में यह भी लिखा है कि यह पार्षद का कर्तव्य है वह लंबी अवधि की अनुपस्थिति हेतु पूर्व सूचना माननीय महापौर अथवा निगम सचिव कार्यालय को दे। ताहिर हुसैन वार्ड संख्या 59 ई का प्रतिनिधित्व कर रहा था। वो जनवरी 2020, फरवरी 2020 (मार्च 2020, अप्रैल 2020 और मई 2020 में कोविड 19 के चलते बैठक हुई नहीं), जून 2020 तथा जुलाई 2020 की बैठक में बिना सूचना अनुपस्थित था। 
पूर्वी दिल्ली नगर निगम का आदेश – 
वार्ड 59 के 
पार्षद की सदस्यता
समाप्ति का घोषणा – संख्या 5
पूर्वी दिल्ली नगर निगम का आदेश
क्या बीजेपी गुप्तरुप से ताहिर का समर्थन कर रही है?
लेकिन सदन से उसकी सदस्यता खत्म करने की पूरी प्रक्रिया में दिल्ली हिंसा का कहीं कोई जिक्र नहीं किया गया है। ताहिर हुसैन की सदस्यता खत्म करने की सूचना उपराज्यपाल अनिल बैजल को भेज दी गई है।
दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में ताहिर हुसैन पर आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या करने, हत्या की साजिश रचने, हिंसा के लिए लोगों को उकसाने और हिंसा के लिए अवैध तरीके से धन एकत्रित करने का आरोप लगाया है। 
भाजपा शासित नगर निगम ने क्यों सदस्यता समाप्त करने में उसके दंगों में शामिल होने का कोई जिक्र तक नहीं किया? क्या भाजपा भी गुप्त रूप से उसकी सहायता कर रही। हिन्दू विरोधी दंगे करवाने के आरोपी ताहिर की सदस्यता समाप्त होने के साथ-साथ उसको मिलने वाली पेंशन भी समाप्त होनी चाहिए। जिसका सदन की शपथ लेते ही किसी भी सदन का सदस्य अधिकारी हो जाता है। अगर पेंशन समाप्त नहीं होती का सीधा-सा स्पष्ट प्रमाण होगा कि बीजेपी गुप्त रूप से ताहिर को समर्थन दे रही है। 
लेकिन वे इनमें से एक में भी उपस्थित नहीं हुए। नगर निगम एक्ट के नियम 33(2) के मुताबिक निगम की लगातार तीन बैठकों में बिना सूचना के अनुपस्थित होने सदस्यता खत्म करने का आधार होता है। इसी नियम के तहत उनकी सदस्यता खत्म की गई है।
इन सदस्यों ने उठाया मुद्दा 
भाजपा दिल्ली प्रदेश के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर और कृष्णा नगर से निगम पार्षद संदीप कपूर ने ताहिर हुसैन की सदस्यता को खत्म करने के लिए सबसे पहले आवाज उठाई थी। इन नेताओं ने आरोप लगाया था कि ताहिर हुसैन दिल्ली हिंसा के मुख्य आरोपी हैं। नेताओं ने आरोप लगाया है कि ताहिर हुसैन के कारण पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़के थे, जिनके कारण 53 निर्दोष लोगों की जान चली गई।
आम आदमी पार्टी ने किया ताहिर का बचाव 
हालांकि, आम आदमी पार्टी ने यह कहते हुए दिल्ली हिंसा के आरोपी ताहिर हुसैन का बचाव किया था कि उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया जा रहा है और वे हिंसा में शामिल नहीं थे। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया था कि दिल्ली हिंसा की जांच के दौरान पुलिस एक खास समुदाय के लोगों को निशाना बना रही है। दिल्ली हाईकोर्ट और दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने भी दिल्ली पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
इस मामले में 11 अगस्त को भी ख़बर प्रकाशित हुई थी कि पार्षद ताहिर हुसैन की सदस्यता ख़तरे में पड़ सकती है। जिसमें पूर्वी दिल्ली के महापौर निर्मल जैन ने कहा था ताहिर हुसैन ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की साजिश रचने की बात स्वीकार कर ली थी। ताहिर हुसैन और पूर्व पार्षद इशरत जहां के खिलाफ़ सदन में निंदा प्रस्ताव भी पारित हुआ था। अब कानूनी प्रक्रिया समझी जा रही है कि किस तरह ताहिर हुसैन की सदस्यता रद्द हो सकती है? महापौर ने यह भी बताया था कि दिल्ली पुलिस की तरफ से नगर निगम को कोई जानकारी नहीं मिली थी। मगर ताहिर हुसैन ने लगातार कई बैठकों में हिस्सा नहीं लिया था।
 
दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार (21 अगस्त, 2020) को फरवरी में हुए हिंदू विरोधी दंगों में शामिल AAP के पूर्व नेता ताहिर हुसैन के खिलाफ दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए कहा कि ताहिर हुसैन के उकसावे पर मुस्लिम हिंसक हो गए और हिंदू समुदाय पर पथराव शुरू कर दिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत ने फरवरी में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुए हिंदु विरोधी दंगों के दौरान खुफिया (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से संबंधित मामले और दंगों को भड़काने में हुसैन की भूमिका के खिलाफ दायर आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए यह टिप्पणी की थी। अदालत ने आरोपितों के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट भी जारी किया और उन्हें 28 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश करने का निर्देश दिया।
पूर्व AAP नेता ताहिर हुसैन, जो इस साल की शुरुआत में राष्ट्रीय राजधानी में हुए भीषण हिंदू-विरोधी दंगों के प्रमुख अभियुक्त है, से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूछताछ की थी। टाइम्स नाउ द्वारा प्रकाशित एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ताहिर हुसैन से दिल्ली हिंसा की फंडिंग को लेकर पूछताछ की जा रही थी। इसके साथ ही, निजामुद्दीन मरकज और दिल्ली दंगों के बीच सम्बन्ध की भी अब जाँच की जा रही है। हुसैन ने दिसंबर, 2019 से फरवरी, 2020 तक दंगा करने वालों और दंगाइयों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वालों को 1.02 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने के लिए कई शेल कंपनियाँ बनाई थीं।
दंगों कि साजिश ने बारे में भी उसने कई हैरान करने वाली बातें कही थीं। उसने पूछताछ के दौरान कहा “मेरा घर इलाके में सबसे ऊँचा था। CAA समर्थकों को सबक सिखाने के लिए मैंने अपने सहयोगियों के साथ पहले ही साजिश रच ली थी। घर में कन्स्ट्रक्शन का काम भी चल रहा था, ऐसे में ईंट-पत्थर इत्यादि समान पहले ही जमा कर लिए गए थे। मेरी लाइसेंसी पिस्टल थाने में जमा थी, जिसे मैं दंगों के 2-3 दिन पहली ही छुड़ा कर लाया था। पुलिस के हाथ सबूत न लगे, इसीलिए मैंने पहले ही क्षेत्र के सारे सरकारी व प्राइवेट CCTV कैमरे तोड़वा दिए थे। मैंने अपने समर्थकों को हर तरीके से तैयार रहने कह दिया था।”

AAP को शेल कम्पनी के जरिए 2 करोड़ रूपए ‘चंदे’ के नाम पर ट्रासंफर

आप-केजरीवाल
AAP के खाते में 2 करोड़ रूपए  चंदे के नाम पर ट्रांसफ़र करने के
आरोप में मुकेश कुमार और सुधांशु बंसल गिरफ़्तार
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एक शेल कंपनी के माध्यम से अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) को 2 करोड़ रूपए ‘दान’ करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स द्वारा यह जानकारी शुक्रवार (अगस्त 21, 2020) को जारी की गई है। दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए दो में से एक की पहचान दिल्ली के व्यवसायी मुकेश कुमार के रूप में की गई है। दूसरे की पहचान सुधांशु बंसल के रूप में की गई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, आम आदमी पार्टी (AAP) को 4 फर्जी कंपनियों के जरिए चंदा देने का मामला फ़रवरी 2014 का है, जब ROC (रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज) ने 4 फ़र्ज़ी कंपनियों के जरिए आम आदमी पार्टी में 2 करोड़ रूपए आने की शिकायत पुलिस को दी थी। ये पैसा देहरादून की एक कंपनी ने शैल कंपनियों के जरिए दिया था।





अगस्त 20 को ही आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
मार्च 31, 2014 को डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP को कथित रूप से चंदा देने के आरोप में दोनों को गिरफ्तार किया गया है। मुकेश शर्मा दिल्ली में स्थित एक प्रॉपर्टी डीलर और तंबाकू व्यापारी हैं।
जब तत्कालीन दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा को बर्खास्त कर दिया गया था, तभी कपिल मिश्रा ने एक आरोप लगाया था कि एक शेल कंपनी द्वारा AAP को पैसे का भुगतान किया गया था। कपिल मिश्रा, जो कि अब भाजपा नेता हैं, ने AAP की फंडिंग में ‘भारी अनियमितता’ का भी आरोप लगाया था और 2 करोड़ रूपए के संदिग्ध ‘दान’ के बारे में सवाल उठाए थे। उन्होंने यह भी दावा किया था कि कई शेल कंपनियों ने AAP को पैसे दिए थे और पार्टी को इसका पता था।
शेल कॉर्पोरेशन एक ऐसा संगठन होता है, जो बिना सक्रिय व्यवसाय या महत्वपूर्ण संपत्ति के होते हैं। इस प्रकार के कॉर्पोरेशन आवश्यक रूप से अवैध नहीं होते, लेकिन उन्हें कभी-कभी अवैध रूप से इस्तेमाल किया जाता है, जैसे कि कानून या जनता की नजरों से बचने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है।

AAP की आरती ने ‘नाजी सैल्यूट’ से की ‘वन्दे मातरम्’ की तुलना

वन्दे मातरम्, अरविन्द केजरीवाल
आरती चड्ढा ने की पुष्टि- केजीरवाल ने 'वन्दे मातरम' पर नहीं उठाया हाथ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किला पर ध्वजारोहण किया और उसके बाद देश को सम्बोधित किया। इस दौरान केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई सदस्यों के साथ-साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी वहाँ उपस्थित थे। भाजपा नेताओं का आरोप है कि जब पीएम मोदी ने जब ‘वन्दे मातरम्’ का उद्घोष किया तो, केजरीवाल ने न इसे दोहराया और न हाथ उठाया।
लेकिन ट्विटर पर केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भी यह ट्वीट खूब चल रहा है: 

आदेश गुप्ता, मीनाक्षी लेखी, तजिंदर बग्गा, कपिल मिश्रा, मनोज तिवारी और प्रवेश साहिब सिंह वर्मा जैसे नेताओं ने इस आरोप को आगे बढ़ाया और भाजपा के दिल्ली व बिहार के आधिकारिक ट्विटर हैंडलों से इसे ट्वीट किया गया। अब खुद आम आदमी पार्टी (AAP) ही इसकी पुष्टि कर रही है कि दिल्ली सीएम ने उस समय बाकियों से अलग रुख अपनाया, जिसका अर्थ है कि उन्होंने ‘वन्दे मातरम्’ को न तो दोहराया और न ही हाथ उठाया।
आम आदमी पार्टी की नेशनल सोशल मीडिया टीम का हिस्सा आरती चड्ढा ने ट्विटर पर भारत के राष्ट्रगीत के उद्घोष की तुलना जर्मनी में नाजी युग के सैल्यूट यानी हैल हिटलर (Heil Hitler) के साथ की। उन्होंने दो तस्वीरें साझा की जिसमें एक जर्मनी का है और जहाँ सारे लोग ‘हैल हिटलर’ पर हाथ उठा कर सम्मान देते हुए नज़र आते हैं, वहीं एक व्यक्ति है जो भीड़ में खड़ा है, कोई मूवमेंट नहीं कर रहा। इसकी तुलना आरती ने कल के केजरीवाल के वायरल फोटो के साथ की।



आरती का कहना है कि जिस तरह नाजी जर्मनी में ‘ हैल हिटलर’ पर हाथ उठा कर सम्मान नहीं दिया, ठीक वैसा ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में ‘वन्दे मातरम्’ के साथ किया। साथ ही आरती ने ये भी लिखा कि एक ऐसा व्यक्ति को बाकियों से अलग खड़ा होने की हिम्मत रखता है। आरती ने अरविन्द केजरीवाल को जन्मदिन विश करते हुए ऐसा कहा।
अब पूरा माजरा समझते हैं। सबसे पहले भाजपा नेता तजिंदर बग्गा ने ट्विटर पर इस वीडियो को शेयर करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री की आलोचना की। दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तजिंदर बग्गा द्वारा शेयर किए गए वीडियो में दिख रहा है कि जब पीएम मोदी ‘वन्दे मातरम्’ का उद्घोष करते हैं तो वहाँ उपस्थित सभी लोग अपने दोनों हाथ उठा कर इसे दोहराते हैं, लेकिन अरविन्द केजरीवाल चुपचाप मास्क लगा कर बैठे हुए हैं और उन्होंने कोई मूवमेंट नहीं की।
भाजपा नेता ने ट्विटर पर इस वीडियो को शेयर करते हुए आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो से पूछा कि बाटला हाउस एनकाउंटर के आतंकवादियो के लिए तो आपके हाथ बड़ी जल्दी खड़े हुए थे, सर्जिकल स्ट्राइक के समय सेना से सबूत माँगने के लिए तो आपके हाथ बड़ी जल्दी खड़े हुए थे, तो आज आपको कौन सी बीमारी हो गई कि आपने ‘वन्दे मातरम्’ पर आपने हाथ खड़े करने से मना कर दिया?
तजिंदर बग्गा ने केजरीवाल से यह भी पूछा कि क्या ‘वन्दे मातरम्’ का सम्मान करने से उनका वोट-बैंक नाराज़ हो जाएगा? सोशल मीडिया पर इस ट्वीट की रिप्लाई में कई लोग भी दिल्ली सीएम से नाराज़ दिखे और लोगों इसका कारण पूछा कि आखिर उन्होंने भारत के राष्ट्रीय गीत से लिए गए उद्घोष का सम्मान नहीं किया? जबकि उनके आसपास बैठे बाकी सभी लोगों ने इस उद्घोष को पूरे जोश में दोहराया।
वहीं पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि 0.01% ऐसे रह जाते हैं, जो डिटॉल से भी नहीं जाते। वहीं अरविन्द केजरीवाल ने जब खुद झंडा फहराया तो उन्होंने अपने मंच से ‘इंकलाब ज़िंदाबाद’ के साथ-साथ ‘वन्दे मातरम्’ का नारा भी लगवाया। इस पर भाजपा सांसद मिनाक्षी लेखी ने कहा कि जब पीएम मोदी ने ये उद्घोष किया तो केजरीवाल शांत बैठे रहे और जब उन्होंने खुद ये नारा लगाया तो उनके पार्टी के नेताओं ने इसे नहीं दोहराया।
वहीं सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा कि ‘सड़ जी’ के वंदे मातरम कहने पर उनके पार्टी के मंत्री-कार्यकर्ता चुप्पी लगा गए। साथ ही उन्होंने ‘बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए’ वाली कहावत का जिक्र करते हुए पूछा कि कैसे लोग हैं ये? उन्होंने कहा कि जब यही नारा पीएम मोदी ने लगवाया तो केजरीवाल के मुँह से कुछ नहीं फूटा। वहीं बिहार भाजपा ने भी चुटकी लेते हुए कहा, “पहले लगा था कि केजरीवाल बिहार से दिल्ली जाने वाले श्रमिकों के खिलाफ हैं, लेकिन ये तो ‘वंदे मातरम’ बोलने के भी खिलाफ हैं जी!
नोट करने वाली बात है कि जब दिल्ली का मुख्यमंत्री नारा लगाता है, दूसरी तरफ से वह जवाब नहीं मिलता, जो राष्ट्रीय पर्व पर मिलना चाहिए


दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी इस वीडियो को ट्वीट करते हुए कहा कि आज लाल किले की प्राचीर से भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी ने भारत माँ का जयघोष करवाया, लेकिन पता नही इस एक शख़्स को भारत माता की जय से क्या तकलीफ है? इसके बाद उन्होंने पूछा कि कहीं ये आप तो नहीं अरविन्द केजरीवाल जी? वहीं दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता भी नाराज़ नज़र आए।
आदेश गुप्ता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ‘वन्दे मातरम्’ ना बोलकर कौन सी धर्मनिरपेक्ष होने की राजनीति कर रहें हैं, ऐसा करके किसे खुश करना चाहते हैं? हर एक दिल्लीवासी आपकी इस राजनीति को देखकर दुखी होगा। इसके बाद उन्होंने पूछा कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश ‘वन्दे मातरम्’ के नारे से गूँज रहा है तो केजरीवाल खामोश क्यों हैं? कई लोग भी इससे नाराज़ नज़र आए।
इस पर जनता की ट्विटर पर प्रतिक्रियाएं


इस पर पार्टी का कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। लेकिन, अब आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय सोशल मीडिया टीम की सदस्य आरती ने ही इसकी पुष्टि कर दी है।

दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगे : जकात के फंड से भड़काए दंगे: जामिया के मीरान हैदर का कबूलनामा

मीरान हैदरजामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्र मीरान हैदर ने दिल्ली में फरवरी में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के सिलसिले में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। हैदर लालू यादव की पार्टी राजद के युवा विंग की दिल्ली इकाई का अध्यक्ष भी है। उसे दिल्ली पुलिस ने दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
जी न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार, हैदर ने जाँचकर्ताओं को बताया है कि जामिया हिंसा के बाद पूर्वोत्तर दिल्ली में सांप्रदायिक दंगों की योजना बनाई गई थी। उसने पुलिस को बताया कि केंद्र सरकार के अनुच्छेद 370 हटाने, सुप्रीम कोर्ट द्वारा बाबरी मस्जिद के फैसले और फिर CAA के लागू होने से उसके मन में गुस्सा और नफरत भर गया था और उसने सरकार के खिलाफ मुसलमानों को एकजुट करने के बारे में सोचा।
अनुच्छेद 370, CAA और बाबरी का गुस्सा 
जरूरत पड़ने पर उसने केंद्र के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों के लिए तैयार रहने का भी आह्वान किया। आरोपित मीरान हैदर ने पुलिस को बताया कि वह खुद सभी राज्यों में सहायता जुटाने और सीएए-एनआरसी के खिलाफ लोगों को उकसाने के लिए गया था।
मीरान हैदर के अनुसार, दिसंबर 15, 2019 को JCC (जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी) का गठन किया गया। फिर इसी JCC के नाम से ही व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया, जिस पर आगे की प्लानिंग होने लगी। इसी ग्रुप में AAJMI ( Allumani Association of Jamia Milliya islamaiya) और कई छात्र संगठन भी शामिल थे।
मीरान हैदर ने दिल्ली पुलिस को बताया था कि जामिया विश्वविद्यालय के परिसर में भड़की हिंसा के बाद दंगों को लेकर साजिश रची गई थी। मीरान को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन और दंगों के लिए भीड़ इकट्ठा करने के साथ ही अन्य व्यवस्थाओं की देखरेख करने का काम सौंपा गया था।
मुस्लिम बहुल क्षेत्र को चुना 
उसने खुलासा किया कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने दिल्ली में सांप्रदायिक दंगों के लिए फंड उपलब्ध कराया था। हैदर ने खुद दंगों के लिए लगभग 5 लाख रूपए इकट्ठा किए थे। हैदर ने दिल्ली पुलिस को बताया कि दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाकों जाफराबाद और सीलमपुर को पहले दंगों के लिए चुना गया था, जिसके लिए मीरान और अन्य लोगों ने चाकू, पेट्रोल और पत्थर आदि इकट्ठा किए थे।
मीरान हैदर, जिसे UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था और न्यायिक हिरासत में है, ने दंगों से पहले एक रजिस्टर तैयार किया था, जिसमें उसने इस उद्देश्य के लिए एकत्रित किए जा रहे सभी फंड्स का रिकॉर्ड रखा था।
मीरान हैदर के मुताबिक दिल्ली में दंगा करवाने के लिए सबसे पहले दिल्ली के नॉर्थ-ईस्ट सीलमपुर और जाफराबाद को ही चुना गया था, क्योंकि मुस्लिम बाहुल्य इलाके में ऐसी गतिविधियाँ चलाना उन्हे ज्यादा आसान लगा। खुद हैदर ने लोगों से चाकू, पेट्रोल और पत्थर इकठ्टा करने के लिए कहा था।
जकात के धन से किए दिल्ली में दंगे 
फंड्स की मदद से उसके निर्देश पर गैजेट्स खरीदे गए। हैदर ने बताया कि ‘ज़कात’ के रूप में जुटाए गए धन का उपयोग उसने पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए दंगों के लिए किया गया था। 
जकात से इकट्ठे किए धन से उपद्रव मचाने से एक बात उजागर हो रही है कि 'जकात सुंनते थे कि गरीब, असहाय और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को दिया है, लेकिन अब यह भ्र्म भी दूर हो गया और मालूम हुआ कि इसका उपयोग देश में अराजकता फ़ैलाने के लिए भी होता है।' इसका मतलब है कि गरीब और मजलूम कहे जाने वालों का दिमाग कितना शातिर है। आरोप सिद्ध हो रहे हैं मीरान हैदर के बयान से। अब देखना यह भी होगा कि जकात देने वालों ने तो जकात दे दी, और जेबों में कितना गया, यह जकात जमा करने वालों का ईमान। क्योकि ऐसे लोग बिना स्वार्थ के पत्ता भी नहीं छूने वाले। 
रिपोर्ट्स के अनुसार, मीरान हैदर ने खुलासा किया कि दंगे की स्क्रिप्ट को 3 हिस्सो में बाँटा गया था- पहला प्रोटेस्ट, दूसरा रोड ब्लॉक और आखिर में भयानक दंगे। दिल्ली पुलिस को दिए अपने बयान में आरोपित मीरान हैदर ने बताया की वो दंगों के पहले से ही जेनयू (JNU) के पूर्व छात्र उमर खालिद और खालिद सैफी को जानता था।
मीरान हैदर ने दिल्ली पुलिस को बताया कि वह भी 2014 से 2017 तक आम आदमी पार्टी में था, लेकिन नगर निगम चुनाव लड़ने के लिए टिकट ना मिलने पर उसने 2017 में पार्टी छोड़ दी और राजद में शामिल हो गया।

दिल्ली : ‘राम नहीं अल्लाह बोलो, हिन्दू महिलाओं से छेड़छाड़’: भूमिपूजन की खुशी मनाते परिवार ने अमानतुल्लाह के करीबियों पर लगाया आरोप

मदनपुर खादर हिंसा
वीडियो से लिए गए स्क्रीनशॉट
राम मंदिर भूमि पूजन के बाद 5 अगस्त का दिन पूरे देश में दीपावली की तरह मनाया गया। हर हिंदू ने इस बहुप्रतीक्षित अवसर पर अपने घर में दीया जलाकर इस दिन की खुशियाँ मनाईं। लेकिन इस बीच कुछ क्षेत्र ऐसे भी रहे जहाँ खुशियाँ मनाते-मनाते हिंसा भड़क गई। दिल्ली के कालिंदी कुंज के पास मदनपुर खादर इलाके की गली नंबर 4 में भी कुछ ऐसा ही हुआ।
यहाँ 5 अगस्त के दिन एक आपसी झड़प की खबर मीडिया में सामने आई। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यह बच्चों की लड़ाई का मामला था। जो बाद में बड़ों के बीच विवाद का कारण बन गया और देखते ही देखते वहाँ ईंट, लोहे की रॉड और तलवारें तक चल गईं। खबर में यह भी बताया गया कि पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इनका नाम गगन, मुकेश और दीपक है।
रिपोर्ट्स से यह भी सूचना मिली कि इस मामले को सुलझाने आए मिन्नतुल्लाह खान को दूसरे पक्ष के लोगों द्वारा तलवार से मारा गया, जिसके कारण वह बेहोश हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बाद में इस संबंध में पुलिस को सूचना दी गई।
ऑपइंडिया के संज्ञान में जब यह मामला आया तो हमने पूरी घटना को जानने का प्रयास किया। हमें इस बीच मिन्नतुल्लाह खान द्वारा कालिंदी कुंज थाने में कराई गई एफआईआर की कॉपी मिली और साथ ही दूसरे पक्ष की शिकायत की प्रति भी मिली।
दोनों पक्षों के अपने-अपने मत थे। लेकिन हैरानी इस बात की थी कि मिन्नतुल्लाह खान की ओर से की गई एफआईआर पर त्वरित कार्रवाई हो चुकी थी। जबकि दूसरा पक्ष अब भी अपनी एफआईआर के लिए जद्दोजहद कर रहा है और घटना के एक हफ्ते बाद भी उनकी कोई सुनवाई नहीं है।
हमने पूरा मामला समझते हुए दूसरे पक्ष से संपर्क किया और उस परिवार से बात की जिनका झगड़ा 5 अगस्त के ही दिन अपने इलाके में रहने वाले दूसरे समुदाय के कुछ लोगों से हुआ था।
परिवार के सदस्य जीतेंद्र ने हमें बताया, “5 अगस्त के दिन राम मंदिर भूमिपूजन की खुशी के अवसर पर हमारे परिवार के बच्चे घर के बाहर दीया जलाकर खुशियाँ मना रहे थे। तभी घर के पास रहने वाले मिन्नतुल्लाह खान उर्फ बुच्ची की ओर से 3-4 लोग आए और बच्चों को धमका कर दीये में लात मार दी। ये सब देख कर हमारे घर की औरतें बीच-बचाव करने पहुँची। लेकिन वह लोग उनसे ही उलझ गए। तभी घर के दो पुरूष (मुकेश और गगन) भी वहाँ गए और उन 4-5 लोगों ने उन पर भी हमला बोल दिया। जब पूरा मामला बढ़ गया तो यह लोग वहाँ से चले गए और कुछ मिनट बाद 30-40 की संख्या के साथ वापस आए।”
जीतेंद्र के अनुसार, “भीड़ ने दोबारा आते ही बगल वाले घर से ईंट उठा कर हमारे घर पर हमला बोल दिया और जो दीया बाहर रखा था उसे भी घर में फेंक कर बाइक में आग लगाने की कोशिश की। जब हमने इस संबंध में पुलिस को संपर्क किया तो पुलिस आई और मुकेश के साथ गगन को भी थाने में ले गई। जब सवाल किया गया तो पता चला कि दूसरे ओर से शिकायत दर्ज हुई है।”
ऑपइंडिया ने यह जानने के बाद जीतेंद्र से पूछा कि आखिर किन कारणों से मुकेश और गगन को गिरफ्तार किया गया? जिस पर जीतेंद्र ने हमें बताया, “दरअसल, उस दिन जब वह लोग हमारी माँ बेटियों के साथ दुर्व्यव्हार कर रहे थे तब मिन्नतुल्लाह खान नलके के हत्थे से हमारे घर की बेटी वर्षा को मारने जा रहा था। लेकिन तभी वर्षा ने अपने सिर पर हाथ लगा लिया जिससे वह बच गई। मगर गगन को यह सब देखकर गुस्सा आया और वह अपनी शादी की तलवार उठाकर ले आया। उसने तलवार के उसके हैंडल से मिन्नतुल्लाह खान के सिर पर मार दिया।” 
जीतेंद्र ने हमें इस पूरी घटना की वीडियो उपलब्ध करवाई। साथ ही यह भी कहा कि दूसरे पक्ष ने पुलिस का ध्यान केवल तलवार वाली घटना पर गौर दिलवाकर मुकेश-गगन को गिरफ्तार करवा दिया है। हमसे कोई बातचीत नहीं की। इनके अलावा एक दीपक नाम का साथी भी जेल में डाल दिया गया। जिसकी कोई गलती भी नहीं थी। वह घटनास्थल पर भी बाद में आया था। मगर, तब भी वह मुकेश और गगन के साथ तिहाड़ में डाल दिया गया।
जीतेंद्र के अनुसार, मिन्नतुल्लाह खान आम आदमी पार्टी नेता व इलाके के विधायक अमानतुल्लाह खान का खास है। जिसके ऊपर पहले से कई आपराधिक केस दर्ज हैं। लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही। उनके मुताबिक पुलिस से पूछने पर पुलिस उनसे कहती है कि दूसरे पक्ष की ओर से इस मामले में एफआईआर दर्ज है इसलिए कार्रवाई चल रही है। हमारी तरफ से अभी नहीं हुई है। इसलिए मामले में इंक्वायरी हो रही है।
घर की महिलाओं का क्या कहना है 
गगन की पत्नी बबीता बताती हैं कि 5 अगस्त के दिन उनके घर के बच्चे दीया जलाकर खुशियाँ मना रहे थे। तभी वह लोग बाहर लड्डू लेने गए। लेकिन मुसलमानों के बच्चों ने उनसे कहा कि राम-राम मत बोलो अल्लाह-अल्लाह बोलो। बबीता के मुताबिक, “हमारे बच्चों ने अल्लाह-अल्लाह बोलने से मना कर दिया जिसके कारण वह बच्चे मारपीट करने लगे। हमारे बच्चों ने हमसे शिकायत की। लेकिन तब तक पीछे से वह लोग आ गए और मारपीट करने लगे। इस बीच हमारी भांजी पर हमला कर दिया गया। हम उसे बचाने भी गए, पर तब भी मारपीट होती रही। वह लोग हमारे घर पर पत्थर बरसा कर गए।”
बबीता के अनुसार, दूसरे पक्ष की भीड़ ने इस दौरान उनका हाथ पकड़ा और उनकी छाती में हाथ भी डाला। उनसे कहा गया कि वह सब मिलकर उनकी जिंदगी बर्बाद कर देंगे और कोई कुछ कर भी नहीं पाएगा।
बबीता के बाद दीपक की माताजी ने इस पूरे मामले के लिए मिन्नतुल्लाह खान को जिम्मेदार ठहराया। वहीं भांजी वर्षा भी बताती हैं कि उस दिन उनके भाइयों के साथ जब बदसलूकी हुई तो वह बाहर गईं। लेकिन उन लोगों ने उनके प्राइवेट पार्ट्स पर हाथ मारे और मुँह पर भी मारा।
वे कहती हैं कि उनकी बस यही माँग है कि उनके मामले में मिन्नतुल्लाह खान के ख़िलाफ़ जल्द से जल्द कार्रवाई हो और आने वाले समय में यदि कोई उनके छोटे भाई-बहनों को कुछ भी करे तो उसके जिम्मेदार भी उन्हें ही माना जाए।
सुदर्शन वाहिनी संगठन के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष सागर 
सुदर्शन वाहिनी संगठन के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष सागर भी इस मुद्दे पर इस समय पुलिस से कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सब साम्प्रदायिक हिंसा भड़काने के लिहाज से हुआ है। हिंदू पक्ष ने जो कुछ भी किया वो अपनी बहन-बेटियों की रक्षा में किया। गगन ने जो बिन धार वाली तलवार को मिन्नतुल्लाह खान के सिर पर मारा वह भी बचाव में ही था। 
इसलिए उनके हिसाब से इस मामले में दोनों हिसाब से केस दर्ज होना चाहिए था। लेकिन तब भी एक ही पक्ष की शिकायत पर कार्रवाई हुई और गगन के अलावा मुकेश व दीपक भी थाने में बुला कर जेल में डाल दिए गए।
सागर कहते हैं कि इस मामले में राजनीतिक दबाव के कारण हिंदू पक्ष की शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो रही और उन्हीं के लोगों को जेल में डाला गया है।
पुलिस से संपर्क 
ऑपइंडिया ने इस संबंध में कालिंदी कुंज थाने में अपडेट जानने के लिए संपर्क किया था। लेकिन पुलिस ने इस मामले पर डीएसपी से बात करने को कह दिया। इसके बाद डीएसपी से हमारा संपर्क नहीं हो पाया। अगर आगे कोई भी जानकारी हमें मिलेगी तो हम इस खबर को अपडेट करेंगे।
मिन्नतुल्लाह खान की ओर से दायर करवाई गई एफआईआर
मिन्नतुल्लाह खान की ओर से दायर करवाई गई एफआईआर में उन्होंने खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि 5 अगस्त को राम मंदिर भूमि पूजन के बाद कुछ लोग दीया जला रहे थे। तभी उनके बड़े बेटे का फोन आया कि उनके छोटे बेटे को गगन ने चांटा मार दिया है और जब वह उसे बचाने गया तो उस पर भी हथौड़े से वार हुआ है।
मिन्नतुल्लाह खान के अनुसार, इसी कारण वह गगन से पूछने गए कि उसने बच्चों की आपसी लड़ाई में उनके बड़े लड़के को क्यों मारा।
मिन्नतुल्लाह खान की एफआईआर
लेकिन, तभी मुकेश ने नल के हत्थे से उनपर वार कर दिया और खुद को बचाने में उनके बाएँ हाथ में चोट आ गई। इसके बाद गगन भी घर से तलवार ले आया और जान से मारने के इरादे से हमला किया। फिर दीपक और सुशील समेत कई लोग आ गए और उन पर ईंट पत्थरों से वार करने लगे। 
इसके बाद ईंट लगने से वह घटनास्थल पर बेहोश हो गए जब होश आया तो वह अपोलो में थे। उन्होंने अपनी एफआईआर में यह माँग की है कि उनके बच्चों पर जानलेवा हमला करने वालों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो।
इस संबंध में पुलिस ने मिन्नतुल्लाह खान की ओर से दूसरे पक्ष पर धारा 307 और 34 के तहत मामला दर्ज किया है।
हिन्दू पक्ष की शिकायत में किस-किसके हैं नाम 
हिंदू पक्ष की ओर से दी गई शिकायत में उन्होंने मिन्नतुल्लाह खान उर्फ बुच्ची, जोया, सद्दाम, इरफान, बुच्ची की पत्नी चुन्ना, कौशर, कौशर की पत्न, उस्मान अली मंसूरी, सलमान, समीर, शाहरूख, राजा, अमन, अब्दुल्ला, सैम्यूल मैसी व उनके अन्य साथियों के ख़िलाफ़ शिकायत करते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग की है। 
इनकी शिकायत में आरोप है कि इनके साथ मारपीट, पथराव, घर की महिलाओं के साथ बदसलूकी के अलावा इनके घर के दीये को उठाकर फेंका गया और बाइक में आग लगाने की कोशिश हुई।

शिकायत में यह भी स्पष्ट लिखा है कि इतनी भीड़ के बीच में उन्होंने खुद को असहाय देखा और जब उनके घर की महिलाओं व छोटी बच्चियों के साथ छेड़छाड़ हुई तो एक साथ उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस बीच उन लोगों को भी चोट आई और ये लोग भी घायल हुए।
परिवार ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि कि दूसरे पक्ष के लोग आपराधिक प्रवृति के हैं। उनके ख़िलाफ़ बहुत से मामले दर्ज हैं। ये लोग फेसबुक पर भी बंदूक के साथ फोटो डालते हैं। अगर आने वाले समय में कोई भी अप्रिय घटना घटित हुई तो उसके लिए ये लोग जिम्मेदार होंगे। 
अपइंडिया को मिली रिपोर्ट में क्या है  
परिवार ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि कि दूसरे पक्ष के लोग आपराधिक प्रवृति के हैं। उनके ख़िलाफ़ बहुत से मामले दर्ज हैं। ये लोग फेसबुक पर भी बंदूक के साथ फोटो डालते हैं। अगर आने वाले समय में कोई भी अप्रिय घटना घटित हुई तो उसके लिए ये लोग जिम्मेदार होंगे। 
घटना से संबंधित वीडियोज में हम देख सकते हैं कि उस दिन काफी लोगों की भीड़ वीडियो बनाने वाले युवक के घर पर गाली-गलौच करते हुए पथराव कर रही थी। बड़ी-बड़ी ईंटों को उठाकर घर पर फेंकी जा रही था। बगल के घर से पत्थर उखाड़ कर भी हमले के लिए प्रयोग किया गया
एक अन्य वीडियो में दिखता है कि एक युवक बाइक में तोड़फोड़ करता है। फिर घर में जल रहे चिराग को गिराया जाता है और वहाँ खड़ी बाइक पर हमला होता है। दूसरा व्यक्ति बार-बार समझाता है, “बुच्ची भाई बाइक मेरी है” लेकिन उपद्रवी भीड़ नहीं सुनती है और लगातार पत्थरबाजी और गाली गलौच चलता रहता है।
एक वीडियो में यह भी साफ नजर आता है कि गगन अपने घर से तलवार लेकर मिन्नतुल्लाह खान पर हमला करता है और उसके बाद वह लोग वहाँ से भागने लगते हैं। बाद में दूसरी ओर से पथराव भी होता है। बीच में कुछ महिलाएँ बीच-बचाव करने पहुँचती हैं। लेकिन माहौल शांत नहीं होता। आखिर में घर का ही युवक इलाके की वीडियो बनाता है और उसे फेसबुक पर डालने की बात कहता है।
(साभार)