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हरिद्वार का औरंगजेबपुर बना शिवाजी नगर, मियांवाला हुआ रामवाला… उत्तराखंड में 17 जगहों के बदले नाम: बोले CM धामी- भारतीय संस्कृति-विरासत के आधार पर किया बदलाव


उत्तराखंड में 4 जिलों के 17 जगहों के नाम में बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने सोमवार (31 मार्च 2025) को बदले हुए नामों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और विरासत को ध्यान में रखते हुए नाम बदले गए हैं। वहीं, कांग्रेस ने फैसले को बीजेपी द्वारा जनता का असली मुद्दे से ध्यान भटकाने का नाटक करार दिया।

प्रदेश में बदले गए स्थानों की लिस्ट मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने अपने अधिकारिक ‘X’ अकाउंट पर पोस्ट की। सीएम ने लिखा, “हरिद्वार जनपद का औरंगज़ेबपुर अब शिवाजी नगर के नाम से जाना जाएगा…जनभावनाओं के अनुरूप हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और उद्धम सिंह नगर जनपदों में स्थित विभिन्न स्थानों के नाम परिवर्तित किए गए हैं।”

सूची के मुताबिक, हरिद्वार जिले में औरंगजेबपुर का नाम शिवाजी नगर गाजीवाली का नाम आर्यनगर, चांदपुर का नाम ज्योतिबा फुले नगर, मोहम्मदपुर जट का नाम मोहनपुर जट, खानपुर कुर्सली का नाम अंबेडकर नगर, इदरीशपुर का नाम नंदपुर, खानपुर का नाम श्री कृष्णपुर, अकबरपुर फाजलपुर का नाम विजयनगर, आसफनगर का नाम देवनारायण नगर और सलेमपुर राजपूताना का नाम शूरसेन नगर रखा गया है।

देहरादून जिले में वर्तमान स्थान मियांवाला का नाम रामजीवाला, पीरवाला का नाम केसरी नगर, चांदपुर खुर्द का नाम पृथ्वीराज नगर और अब्दुल्लापुर का नाम अब दक्षनगर किया गया है।

नैनीताल जिले में नवाबी रोड अब अटल मार्ग और पनचक्की से आईटीआई मार्ग को गुरु गोवलकर मार्ग नाम से जाना जाएगा। साथ ही उधम सिंह नगर जिले में नगर पंचायत सुल्तानपुर पट्टी का नाम बदलकर अब कौशल्या पूरी हो गया है।

बीजेपी ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उत्तराखंड के मीडिया सचिव मनवीर चौहान ने कहा कि विभिन्न स्थानों के नाम बदलने का काम जनभावना और भारतीय संस्कृति एवं विरासत के अनुरूप किया जा रहा है। इससे लोग भारतीय संस्कृति और इसके संरक्षण में योगदान देने वाले महापुरुषों से प्रेरणा ले सकेंगे।

वहीं, कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, “नाम बदलना बीजेपी का एजेंडा बन गया है क्योंकि उनके पास असली काम दिखाने के लिए कुछ नहीं है। पिछले आठ साल विफल रहे हैं। अब जनता उनसे सवाल कर रही है। सवालों से ध्यान भटकाने के लिए वे नाम बदलने का नाटक कर रहे हैं।”

‘या खुदा’ बोलकर इमरान ने किया मंत्री गणेश जोशी पर हमला, सुरक्षाकर्मियों ने पकड़कर डंडा छीना

                                     देहरादून में इमरान (बाएँ) ने या खुदा बोल कर मंत्री गणेश जोशी पर किया हमला 
देहरादून में एक युवक द्वारा भाजपा नेता व उत्तराखंड सरकार में मंत्री गणेश जोशी पर हमले की खबर है। हमलावर का नाम इमरान बताया जा रहा है जिस पर बाजार में मौजूद अन्य दुकानदारों से भी मारपीट का आरोप है। हमले के दौरान इमरान ने मजहबी नारेबाजी भी की। आरोपित के घर वालों ने उसकी मानसिक स्थिति ठीक न होने की दलील दी है। स्थानीय लोगों ने हमलावर की पिटाई कर दी। बाद में उसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। घटना शुक्रवार (2 जून 2023) की है।

अब जब मंत्रियों पर हमले होने शुरू हो गए तो कब जेहादियों को जल्द फांसी और इनके परिवार को मिल रही सरकारी सुविधा जैसे आधारकार्ड, मतदान पत्र और राशन कार्ड आदि को कब बंद किया जाएगा? क्योकि CCTV आदि से जेहादियों की करतूतों के सबूत मिल रहे हैं, फिर फांसी में देरी क्यों? इनके समर्थन में आने वाले वकीलों के साथ भी सख्ती से पेश आने की जरुरत है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला देहरादून के डाकरा बाजार का है। यहाँ शुक्रवार को राज्य सरकार में सैनिक कल्याण व कृषि मंत्री गणेश जोशी जनसम्पर्क कर रहे थे। इस दौरान वहाँ मौजूद एक इमरान नाम का युवक अचानक ही उनकी तरफ लपका। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमले के समय इमरान के पास डंडा था। इमरान ने मंत्री जोशी को पकड़ने की कोशिश की। हालाँकि इस दौरान मंत्री के साथ चल रहे सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया। उन्होंने इमरान के हाथ से डंडा छीन लिया।

हंगामे को देखते हुए घटनास्थल पर आस-पास के लोग भी जमा हो गए। उन्होंने इमरान की पिटाई कर दी। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में इमरान को मंत्री जोशी के सुरक्षाकर्मियों से उलझते देखा जा सकता है। बाद में पुलिस ने इमरान ने इमरान को भीड़ की पिटाई से बचाया और हिरासत में ले लिया। फिलहाल उस से पूछताछ जारी है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक इमरान मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर का रहने वाला है। वह घटना के 2 दिन पहले ही देहरादून आया था।

लगाया था ‘या खुदा’ का नारा

ऑपइंडिया ने इस मामले में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से बात की। उन्होंने बताया कि उन पर हमले के दौरान इमरान ने ‘या खुदा’ का नारा लगाया था। उन्होंने कहा कि उन पर हमले से पहले इमरान कई लोगों के साथ न सिर्फ मारपीट कर चुका था बल्कि उसने कई जगहों पर तो चाकू भी लहराए थे। बकौल गणेश जोशी दिल्ली में हुई चाकूबाजी की घटना से लोग और उनके सुरक्षाकर्मी अतिरिक्त सतर्क हैं।
खुद पर इमरान की पिटाई के दौरान चुप रहने के कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा लगाए गए आरोपों को मंत्री गणेश जोशी ने बेबुनियाद बताया। मंत्री का दावा है कि उन्होंने ही पुलिस को बुला कर हमलावर को सौंपा था। बाद में इमरान के घर वालों ने मंत्री जोशी से मुलाकत की और हमलावर को सिरफिरा बताया। मंत्री के मुताबिक इमरान के घर वालों का दावा है कि वो उसे एक कमरे में बाँध कर रखते थे लेकिन घटना के दिन वो न जाने कैसे कमरे से निकल कर भाग गया।

उत्तराखंड : 26 अवैध मजारों पर चला बुलडोजर… नीचे नहीं मिला कोई मानव अवशेष: 1400 जगह लिस्ट में

                           उत्तराखंड प्रशासन ने 26 अवैध मजारों पर चलाया बुलडोजर (चित्र साभार- पाञ्चजन्य)
उत्तराखंड प्रशासन ने अवैध मजारों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। स्थानीय मीडिया में दावा किया जा रहा है कि इस अभियान के तहत प्रदेश में एक ही रात के अंदर 26 अवैध मजारों को ध्वस्त कर दिया गया। अभियान को अंजाम देने के लिए पहले से बुलडोजर तैनात कर दिए गए थे। ध्वस्त हुई मजारों में कुछ ऐसी भी हैं, जो राजधानी देहरादून के जंगली जानवरों के लिए रिजर्व क्षेत्र में बनी हुई थीं। यह कार्रवाई रविवार (12 मार्च 2023) को हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सभी 26 मजारें उत्तराखंड वन विभाग की जमीनों पर बनाई गई थीं। इसमें कई मजारें हाल-फ़िलहाल में बनी हुईं थीं। दिलचस्प बात यह कि इन मजारों के नीचे से कोई मानव अवशेष भी नहीं मिले।

मजारों के बनने के पीछे उन हिन्दुओं का ही हाथ है, जो अपने देवी-देवताओं की शक्ति को भूल मजारों को पूजते हैं, वहां नोटों की बारिश करते हैं, और वही नोट हिन्दुओं के खिलाफ षड़यंत्र में अहम् भूमिका निभाता है। 

उत्तराखंड राज्य सरकार ने लगभग 1400 ऐसे स्थानों को चिन्हित किया है, जिसमें इसी प्रकार से मजहबी निर्माण करके अतिक्रमण किया गया है। कुछ ही समय बाद उन सभी स्थानों पर इसी प्रकार की कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। इस मामले में खुद मुख्यमंत्री पुष्कर धामी द्वारा अधिकारीयों को सख्त निर्देश मिलने की बात कही जा रही है।

कुछ रिपोर्ट्स में ध्वस्त हुई मजारों की संख्या एक रात के बजाए अब तक की कुल कार्रवाई के तौर पर गिनाई गई है। बताया ये भी जा रहा है कि अभी अवैध मजारों को चिन्हित करने का काम भी जारी है।

मजारों के अलावा उत्तराखंड प्रशासन अन्य अतिक्रमणों पर भी एक्शन के मूड में है। राजधानी देहरादून में शक्ति नहर डाकपथर के किनारे बसे लोगों की भी पहचान का सत्यापन चल रहा है। कई लोगों ने खुद ही वो जगह छोड़नी शुरू कर दी। आरोप है कि यहाँ सरकारी जमीन पर बाहरी लोगों ने आकर कब्ज़ा कर लिया था।

नगर निगम ने भी शक्तिनहर किनारे की सरकारी भूमि खाली करवाने के लिए अभी से वहाँ बुलडोजर और ट्रैक्टर खड़े कर दिए हैं। लोगों के सत्यापन की प्रक्रिया खत्म होने के बाद माना जा रहा है कि यहाँ JCB मशीन चलाई जाएगी। बताया जा रहा है कि अवैध अतिक्रमण के खिलाफ साल 2018 से ही कार्रवाई की तैयारी थी लेकिन इसमें कुछ कारणों से देर लगी।

उत्तराखंड में सरकारी जमीनों पर अवैध मजारों को ऑपइंडिया ने भी अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में बताया था। तब हमने बाघों के लिए दुनिया भर में मशहूर जिम कार्बेट पार्क के अंदर जाकर वहाँ मौजूद मजारों को दिखाया था। इसके अलावा देहरादून के प्रसिद्ध संत स्वामी दर्शन भारती ने भी हमसे बात करते हुए लैंड जिहाद को उत्तराखंड के आने वाले भविष्य के लिए खतरनाक संकेत बताया था।

35 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ रहे योगी आदित्यनाथ, मणिपुर में भी BJP सरकार, गोवा-उत्तराखंड में काँटे की टक्कर,पंजाब में AAP की बड़ी जीत

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, 
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन वीरेन सिंह और पंजाब में AAP के मुख्यमंत्री उम्मीदवार भगवंत मान (बाएँ से दाएँ)

पाँचों राज्यों के विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल्स सामने आ गए हैं। जानिए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में किसको कितनी सीटें मिल रही हैं। जहाँ उत्तर प्रदेश और मणिपुर में भाजपा को स्पष्ट विजेता बताया जा रहा है, गोवा और उत्तराखंड में कॉन्ग्रेस के साथ उसकी काँटे की टक्कर बताई जा रही है। वहीं पंजाब में AAP को लगभग सभी एग्जिट पोल्स ने पूर्ण बहुमत मिलते दिखाया है। 

वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वापसी उत्तर प्रदेश में 35 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ने के अलावा उस मिथ्या को भी गलत सिद्ध करने जा रहे हैं, जो पिछली मुख्यमंत्रियों ने नोएडा जाने वाले वाले को पदमुक्त होने की बना रखी थी। योगी ने नोएडा में एक बार नहीं बल्कि 4/5 बार पदापर्ण किया। आइए, देखते हैं किस राज्य में किस पार्टी को कौन से एग्जिट पोल कितनी सीटें दे रहे हैं।

403 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में भाजपा को ‘ABP News-CVoter’ ने 228-244, ‘ETG Research’ ने 230-245, ‘India News’ ने 222-260, ‘India TV -Ground Zero Research’ ने 182-220, ‘India TV-CNX’ ने 240-250, ‘India Today- Axis My India’ ने 288-326, ‘News 24- Todays Chanakya’ ने 294, ‘NewsX-Polstrat’ ने 212-225, ‘Republic-P Marq’ ने 240, ‘Times Now-VETO’ ने 225 और ‘Zee News-DESIGNBOXED’ ने 223-248 सीटें मिलते हुए दिखाया है।

वहीं 117 सीटों वाले पंजाब में ‘ABP News-CVoter’ ने AAP को 51-61, ‘ETG Research’ ने 70-75, ‘India News’ ने 39-43, ‘India TV -Ground Zero Research’ ने 27-37, ‘India Today- Axis My India’ ने 76-90, ‘News 24- Todays Chanakya’ ने 100, ‘NewsX-Polstrat’ ने 56-61, ‘Republic-P Marq’ ने 62-70, ‘Times Now-VETO’ ने 70 और ‘Zee News-DESIGNBOXED’ ने 52-61 सीटें मिलते हुए दिखाया है।

70 विधानसभा सीटों वाले उत्तराखंड में भाजपा को ‘ABP News-CVoter’ ने 26-32, ‘ETG Research’ ने 37-40, ‘India News’ ने 32-41, ‘India TV -Ground Zero Research’ ने 25-29, ‘India TV-CNX’ ने 35-43, ‘India Today- Axis My India’ ने 36-46, ‘News 24- Todays Chanakya’ ने 43, ‘NewsX-Polstrat’ ने 31-33, ‘Republic-P Marq’ ने 35-39, ‘Times Now-VETO’ ने 37 तो ‘Zee News-DESIGNBOXED’ ने 26-30 सीटें दी हैं।

40 सीटों वाले गोवा में भाजपा को ‘ABP Majha-C Voter’ ने 13-17, ‘ETG Research’ ने 17-20, ‘India News’ ने 13-19, ‘India TV -Ground Zero Research’ ने 10-14, ‘India TV-CNX’ ने 16-22, ‘India Today- Axis My India’ ने 16-18, ‘NewsX-Polstrat’ ने 17-19, ‘Republic-P Marq’ ने 13-17, ‘Times Now-VETO’ ने 14 और ‘Zee News-DESIGNBOXED’ ने 13-18 सीटें मिलने का अंदाज़ा लगाया है।

वहीं 60 विधानसभा सीटों वाले उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर की बात करें तो यहाँ ‘ABP Majha-C Voter’ ने भाजपा को 23-27, ‘India News’ ने 23-28, ‘India TV -Ground Zero Research’ ने 26-31, ‘India Today- Axis My India’ ने 33-43, Republic-P Marq ने 27-31 और ‘Zee News-DESIGNBOXED’ ने 32-38 सीटें दी हैं। अब देखना है कि 10 मार्च को नतीजे आने पर किसके आँकड़े कितने सटीक बैठते हैं।

समान नागरिक संहिता आखिर कब? बुर्के पर बवाल ने फिर समझाई जरूरत

कर्नाटक में हुए बुर्का विवाद के बाद अब जगह-जगह एक बार फिर से समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड- Uniform Civil Code) को लागू कराने की बातें होना शुरू हो गई हैं। उत्तराखंड चुनावों के मद्देनजर तो भारतीय जनता पार्टी ने इसे लेकर वादा भी किया है कि अगर उनकी सरकार राज्य में लौटी तो शपथ ग्रहण के तुरंत बाद समान नागरिक संहिता लागू होगी। ये वादा प्रदेश की भाजपा ने देवभूमि उत्तराखंड के स्वरूप में हो रहे बदलाव और उसे लेकर उठने वाली चिंताओं के मद्देनजर किया है।

वैसे बुर्का विवाद पहली वजह नहीं है जिसके कारण देश में समान नागरिक संहिता को लागू कराने का मुद्दा गरमाया हो। इससे पूर्व, इसके समर्थन में कई बार तरह-तरह की माँगें उठती रही हैं। विभिन्न अदालतों ने भी यूनिफॉर्म सिविल कोड के समर्थन में अपनी टिप्पणी की है…।

समान नागरिक संहिता का कोर्ट में समर्थन

पिछले साल की बात है, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी केंद्र सरकार से इसे लागू करने के लिए गंभीरता से विचार करने को कहा था। वहीं सुप्रीम कोर्ट भी इसे 1985 के शाहबानो प्रकरण से लागू कराने के लिए सुझाव देते हुए आया है। अभी कुछ दिन पहले इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने सवाल भी उठाए थे कि आखिर अब तक नागरिक समान संहिता लागू करने के लिए सरकार द्वारा कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया। कोर्ट ने देश को गोवा से सीखने की नसीहत दी थी जहाँ 1962 के बाद से ये संहिता लागू है। इनके अलावा दिल्ली हाईकोर्ट भी यूनिफॉर्म सिविल कोड के समर्थन में अपनी टिप्पणी दे चुका है।

क्या है समान नागरिक संहिता?

समान नागिक संहिता लागू कराने की माँगें इसलिए भी इतने तूल पर हैं क्योंकि इसके बाद देश में हर नागरिक के लिए एक समान कानून हो जाएगा। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, जाति का हो या समुदाय का हो, मगर हर किसी के लिए एक ही कानून होगा। कोई भी पर्सनल लॉ इस यूनिफॉर्म सिविल कोड से ऊपर नहीं होगा। मसलन कानून किसी हिंदू महिला की सुरक्षा के मद्देनजर बनाया जाएगा, तो वहीं कानून मुस्लिम, ईसाई और पारसी महिला को भी सुरक्षा प्रदान करेगा। इसी तरह शादी, तलाक, संपत्ति सबसे जुड़े मामलों में पूरे देश में एक ही कानून लागू होगा।

गोवा में पहले से यूनिफॉर्म सिविल कोड

एक ओर जहाँ भारत के अन्य राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए जद्दोजहद हो रही है। वहीं गोवा भारत का एक अकेला ऐसा राज्य है, जहाँ वर्ष 1962 से ही यह कानून प्रभावी है। जानकारी के अनुसार, 1961 में गोवा के भारत में विलय के बाद भारतीय संसद ने गोवा में ‘पुर्तगाल सिविल कोड 1867’ को लागू करने का प्रावधान किया था जिसके तहत गोवा में समान नागरिक संहिता लागू हो गई और तब से राज्य में ये संहिता लागू है। पिछले दिनों गोवा में यूनिफॉर्म सिविल कोड की तारीफ जस्टिस एस ए बोबड़े ने भी की थी। सीजेआई ने कहा था कि गोवा के पास पहले से ही वह है जिसकी कल्पना संविधान निर्माताओं ने पूरे देश के लिए की थी।

मुस्लिम करते रहे हैं समान नागरिक संहिता का विरोध

देश में जगह-जगह समय-समय पर समान नागरिक संहिता की जरूरत को महसूस करते हुए इसके लिए आवाज उठाई जाती रही हैं, मगर मुस्लिमों ने हमेशा इसका विरोध किया है। समुदाय के कट्टरपंथी वर्ग का मानना रहा है कि उनके इस्लामी पर्सनल लॉ से ऊपर कोई कानून नहीं है। पिछले दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जब अपनी टिप्पणी की थी तो उसके बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ ने भी अपना बयान जारी किया था। अपने बयान में लॉ बोर्ड ने ईशनिंदा के विरुद्ध कानून बनाने की माँग की थी जबकि यूनिफॉर्म सिविल कोड का खुलकर विरोध किया था।

यूनिफॉर्म सिविल कोड की माँग

भारत में यूनिफॉर्म सिविल कोड समेत कुछ कानून लागू कराने के लिए पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने एक रैली का आह्वान किया था। मगर, पहले तो रैली निकालने के लिए आयोजको को इसकी अनुमति नहीं मिली और जब ये रैली आयोजित हुई तो भड़काऊ नारेबाजी के आरोप में इस रैली में शामिल कई हिंदू नेता पकड़ लिए गए थे। बाद में पता चला था कि रैली में कुछ असामाजिक तत्वों की घुसपैठ हो गई थी जिन्होंने कुछ भड़काऊ बयानबाजी करते हुए माहौल खराब करने का प्रयास किया था।

अब चर्चा क्यों?

कर्नाटक के बुर्का विवाद के बाद से समान नागरिक संहिता की बातें जगह-जगह हो रही हैं, इसकी वजह यही है कि एक किसी मजहब के नाम पर समुदाय विशेष की मनमानियों को रोका जा सके। अभी तक मजहब के नाम पर कई नियम बदलने के प्रयास होते रहे हैं। किसी भी पब्लिक प्लेस पर नमाज पढ़ने की बात हो या हिजाब पहनकर कॉलेज तक आ जाने की। हर नियम को मजहब के हवाले से चुनौती मिलती देख लोगों की माँग यही है कि जब भारत में रहने वाला हर नागरिक भारतीय है और सबको समानता का अधिकार है तो फिर सबके लिए एक समान कानून भी होना चाहिए।
मुस्लिमों के आतंक से दु:खी होकर , मुसलमानों पर सबसे ज्यादा जुल्म करने वाले देश
1. - चीन :- रोजा, रमजान, नमाज, दाढ़ी, बुरखा; सब प्रतिबंधित
2. - म्यांनमार :- मुस्लिम आतंकी को देखते ही मारने का आदेश , मस्जिदें लगभग सभी गिरा दी गयी
3. - जापान :- इस्लाम प्रतिबंधित , इस्लाम का प्रचार , एक क़ानूनी अपराध ! संयुक्त राष्ट्र से किसी मुस्लिम को शरण देने से साफ मना कर दिया
4. - अंकोला :- इस्लाम प्रतिबंधित
5. - फ़्रांस :- 210 मस्जिदे , एक दिन में गिराई
6. - ऑस्ट्रेलिया :- सभी मुस्लिमो को दी चेतावनी , कानून माने या देश छोड़े
7. - ब्रिटेन :- मुस्लिम से भेदभाव और नफरत
8. - अमेरिका :- एयरपोर्ट पर ही चड्डी उतरवा लेना ,  शाहरुख़ और आज़म खान  भुक्तभोगी
9. - इसराइल :- मुस्लिम का कट्टर शत्रु , ईंट का जवाब पत्थर से
10. - श्रीलंका :- सभी मस्जिदों की तलाशी व बुरखा पर बैन
अब मुस्लिम देशो में मुस्लिम का हाल
1. - पाकिस्तान :- शिया सुन्नी के नाम पर हर साल दंगे , औसतन पाकिस्तान में हर साल 4,000 शिया व अहमदी क़त्ल किये जाते है
2. - अफगानिस्तान :- आये दिन बम धमाके , बेकसूर मुस्लिमो की मौत
3. - इराक :- शिया सुन्नी की लड़ाई और बम धमाके
4. - ईरान :- सुन्नियो से नफरत , सऊदी अरब से नफरत
5. - लीबिया :- आये दिन , बम धमाके
6.- सीरिया :- दंगे , बम धमाके
7. - मिस्र :- शिया सुन्नी संघर्ष
8. - बांग्लादेश :- आये दिन , बम धमाके
▪फिर भी भारत में मुस्लिम पर अत्याचार  होता है , यहाँ ये  सुरक्षित  नहीं है...!!!!    क्योकि जब चाहे , ये तिरंगे को जला सकते है और भारत माता को गाली दे सकते है
• हिंदू जनता के टुकडो पे पलने वाले और सरकार से हर महीना 18000रूपया पेन्शन लेनेवाले  "नमकहराम,"  मौलाना बरकती जैसे लोग , प्रधानमंत्री को  "गाली"  देते हैं..
• हिन्दुओ के देवी - देवताओं की अश्लिल पेंटिंग बना सकते है
• ओवैसी जैसे  "छपरी, सडकछाप नेता" , 15 मिनट में 100 करोड़ हिन्दुओं की गर्दन काटने की बात करते हैं
• हुर्रियत के नेता , पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाते हैं
• बंगाल और असम के मुस्लिम गद्दारी करते हुए , बंगलादेशियो को शरण दे रहे हैं
• और एक पाखण्ड का दूसरा नाम  "आमिर खान"...
" सत्यमेव जयते " के इतने एपिसोड आमिर खान लेकर आया , लेकिन कभी भी उसने इस्लाम में होने वाले " हलाला " , " गजवा हिन्द " , " ट्रिपल तलाक " , " मदरसा छाप शिक्षा " , " पत्थर-बाजी " , " जनसंख्या-विस्फोट " , " बहु विवाह " , " अशिक्षा " , " बुरका " , " खुला " , जिहाद और आतंकवाद .; जैसी  मुस्लिम धर्म की सामाजिक बुराइयों पर एपिसोड नही बनाया ! केवल  हिन्दू धर्म  की सामाजिक बुराई दिखाता रहा...
इतनी मनमानी , अनियंत्रता प्राप्त होने पर भी , ये  "हरामजादे"  कहते है कि इन पर भारत में  "जुल्म"  होता है ‼️ 
एक ऐसा सच जो आपको आज तक नहीं बताया गया ???? 
भारत में 3 लाख मस्जिदें हैं। जो अन्य किसी देश में भी नहीं है; वाशिंगटन में 24 चर्च हैं; लन्दन में 71 चर्च और इटली के मिलान शहर में 68 चर्च हैं।
जबकि अकेले दिल्ली में 271 चर्च हैं। लेकिन हिन्दू फिर भी सांप्रदायिक है ? 
किसी सेकुलर के पास इसका जवाब ??? 
मैंने ISIS का विरोध करते किसी मुस्लिम को नहीं देखा है।
पर RSS का विरोध करते हुए लाखो हिन्दू देखे है।
मैंने किसी मुस्लिम को होली दीवाली की पार्टी देते नहीं देखा है पर  हिन्दुओ को इफ्तार पार्टी देते देखा है।
मैंने कश्मीर में भारत के झंडे जलते देखे है। पर कभी पाकिस्तान का झंडा जलाते हुए मुसलमान नहीं देखा है। मैंने हिन्दुओ को टोपी पहने मजारो पर जाते देखा है।पर किसी मुस्लिम को टिका लगाते मंदिर जाते नहीं देखा है। मैंने मिडिया को विदेशो के गुण गाते देखा है। पर भारत के संस्कार के प्रचार करते नहीं देखा है। 
मैनें आज तक 
राम बूट हाउस
लक्षमण लेदर स्टोर्स
माँ वैष्णो लस्सी भंडार
शंकर छाप तंबाकू, 
बजरंग पान भंडार
गणेश छाप बीडी, 
लक्ष्मी छाप पटाखे 
कृष्णा  बार  ऐंड  रेस्टारेंट 
जय माँ अम्बे होटल ( चाय नाश्ता )
इस तरह के प्रोडक्ट और दुकाने आपको हर जगह पर दिखाई देंगी
लेकिन, 
आज तक मेनें
अल्लाह छाप गुटका, 
खुदा छाप बीडी 
ईसा मसीह  छाप तंबाकू बिकते नहीं देखा। 

मुसलमान  और  ईसाई  से हम तथाकथित हिन्दू यह सीखे की अपने  "धर्म का सम्मान" कैसे किया जाता है।
अपने भगवान् और उनके प्रतिक चिन्हों को कचरे में और रास्तो पर ना फेंके। अपने धर्म का सन्मान करे।
संभव हो तो ऐसी चिन्हों वाली वस्तुए कतई ख़रीदे ही नहीं।
कंपनिया अपने आप सुधार में आ जायेगी।

240 सीटों के साथ उत्तर प्रदेश में फिर से योगी सरकार, 5 में से 4 राज्यों में BJP को बहुमत: सर्वे में राम मंदिर और काशी कॉरिडोर से पब्लिक गदगद

‘टाइम्स नाउ’ और ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ के ओपिनियन पोल्स में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ की सत्ता में वापसी तय दिख रही है। सर्वे के अनुसार भाजपा की उत्तर प्रदेश में वापसी 35 साल का रिकॉर्ड टूटेगा। जब सत्तारूढ़ पार्टी की वापसी होगी। जहाँ ‘टाइम्स नाउ’ के हिसाब से भाजपा को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में 227-254 सीटें मिलने का अनुमान है, ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ ने पार्टी को 240 सीटें मिलने का अंदेशा जताया है। समाजवादी पार्टी को ‘TN नवभारत’ के ओपिनियन पोल में 143 और मायावती की बसपा को 10 सीटें मिलती दिख रही हैं।

वहीं वोट प्रतिशत के मामले में भी भाजपा का ही बोलबाला दिखाया जा रहा है। चैनल द्वारा किए गए ओपिनियन पोल की मानें तो भाजपा 39.4% वोटों के साथ पहले नंबर पर रहेगी और अखिलेश यादव की सपा 34.6% वोट के साथ दूसरे नंबर पर। बसपा को 12.9% और कांग्रेस  को 6.9% वोट मिलता दिखाया गया है। कांग्रेस को इस ओपिनियन पोल में महज 8 सीट ही दी गई है, जो दिखाता है कि पार्टी की दुर्गति बनी रहेगी। कांग्रेस पार्टी के प्रचार की कमान प्रियंका गाँधी संभाल रही हैं।

वहीं अगर उत्तराखंड की बात करें तो TNN के ओपिनियन पोल में यहाँ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक बड़े बहुमत के साथ सत्ता में लौटते दिख रहे हैं। पहाड़ी राज्य में भाजपा को 48 और कांग्रेस को 14 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं। वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) भी राज्य में अपना खाता खोलेगी और उसे 7 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं। इस तरह भाजपा यहाँ दो तिहाई बहुमत से सत्ता में वापस आती दिख रही है। पार्टी को पिछले एक साल में 3 बार मुख्यमंत्री का बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

सबसे चौंकाने वाले नतीजे पंजाब के दिखाए जा रहे हैं, जहाँ AAP की सरकार बनती हुई दिख रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी को यहाँ 56 सीटों पर जीत मिलते हुए दिखाया गया है, जबकि कांग्रेस 44 पर रह जाएगी। ‘शिरोमणि अकाली दल (SAD)’ को 13 और भाजपा को महज 2 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। गोवा में भी AAP 10 सीटें जीतते हुए दिख रही है, जबकि 20 सीटों के साथ भाजपा बहुमत प्राप्त करती हुई दिख रही है।

अवलोकन करें:-

योगी आदित्यनाथ बनेंगे दोबारा यूपी के मुख्यमंत्री, राज्य में लोगों की पहली पसंद: जन की बात ओपिनि
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योगी आदित्यनाथ बनेंगे दोबारा यूपी के मुख्यमंत्री, राज्य में लोगों की पहली पसंद: जन की बात ओपिनि

इस ओपिनियन पोल की मानें तो मणिपुर में भी भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में वापसी करेगा। वहीं ‘टाइम्स नाउ’ के हिसाब से 57.84% लोगों का कहना है कि राम मंदिर और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण से भाजपा को फायदा होगा, जबकि 36.73% लोग इसके उलट सोच रखते हैं। जिस पश्चिमी उत्तर प्रदेश को ‘जाटलैंड’ कहा जाता है और जहाँ किसान आंदोलन का असर था, वहाँ भी भाजपा को 37.61% वोट मिलते दिख रहे हैं। 46.32% लोगों ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार किसान विरोधी नहीं है।

धर्म संसद: अब नरसिंहानंद पर FIR, कहा – ‘गाँधी एक गंदगी, नहीं रिहा हुए कालीचरण महाराज तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के घर के सामने आमरण अनशन’

यति नरसिंहानंद सरस्वती और सागर सिंधु महाराज पर FIR
उत्तराखंड के हरिद्वार में आयोजित हुए धर्म संसद के मामले में महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती और एक अन्य संत पर FIR दर्ज की गई है। इस मामले में पहले ही FIR दर्ज कर ली गई थी, लेकिन अब इसमें उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के डासना स्थित शिव-शक्ति धाम के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के अलावा सागर सिंधु महाराज का नाम भी जोड़ा गया है। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार के अनुसार, वायरल वीडियो क्लिप के आधार पर ये कार्रवाई हुई है।

भड़काऊ भाषण के आरोप में इन दोनों पर ‘भारतीय दंड संहिता (IPC)’ की धारा-295A (किसी समुदाय द्वारा पवित्र मानी जाने वाली वस्तु को नष्ट करना या धार्मिक भावनाओं को आहत करना) भी जोड़ी गई है। बता दें कि हरिद्वार में 17-20 दिसंबर को इस धर्म संसद का आयोजन हुआ था, जिसमें वसीम रिजवी से जितेंद्र नारायण त्यागी बने सुन्नी वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष भी शामिल हुए थे। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी इस आयोजन पर निशाना साधा था।

उधर रायपुर धर्म संसद में महात्मा गाँधी पर दिए गए बयान को लेकर कालीचरण महाराज की मध्य प्रदेश से गिरफ़्तारी का भी यति नरसिंहानंद सरस्वती ने विरोध किया है। उन्होंने गाँधी को ‘गंदगी’ बताते हुए कहा कि इस गिरफ़्तारी को अंजाम देने वालों का माँ काली और महादेव विनाश कर देंगे। उन्होंने ये भी कहा कि अगर कालीपुत्र कालीचरण महाराज को जल्द रिहा नहीं किया जाता है तो वो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आवास पर जाकर आमरण अनशन करेंगे।

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‘गाँधी राष्ट्र पुत्र हो सकते हैं राष्ट्रपिता नहीं’ ; भगवान राम-माँ सीता को गाली देने वालों के खि

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‘गाँधी राष्ट्र पुत्र हो सकते हैं राष्ट्रपिता नहीं’ ; भगवान राम-माँ सीता को गाली देने वालों के खि

वहीं इस मामले में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी 100 से अधिक छद्दम ‘बुद्धिजीवियों’ ने पत्र लिख कर साधु-संतों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। साथ ही वकीलों का एक समूह भी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना को पत्र लिख कर ऐसी आयोजनों के स्वतः संज्ञान लेने की अपील कर चुका है। 76 वकीलों के इस समूह ने ‘हिन्दू युवा वाहिनी’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर भी आपत्ति जताई थी। हरिद्वार वाले कार्यक्रम में डॉक्टर मनमोहन सिंह को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप लगे हैं। 

ये वही गैंग है जिसने जामा मस्जिद दिल्ली के इमाम के विरुद्ध भड़काऊ भाषणों पर गिरफ्तार होने से उसी तरह संरक्षण दिया जाता था, जिस तरह इस्लामिक आतंकवादियों को संरक्षण दिया जाता था। कोर्ट से गिरफ़्तारी के आदेश होने के बावजूद कभी बीमारी अथवा किसी अन्य कारणों का बहाना कर गिरफ्तारी से बचाते रहे, लेकिन हिन्दू साधु-संतों द्वारा सच्चाई उजागर करने पर जेलों में डाला जा रहा है। तब कहाँ गयी थी इनकी धर्म-निरपेक्षता? 

ABP-सी वोटर का सर्वे : उत्तर प्रदेश समेत 4 राज्यों में खिलेगा ‘कमल’, पंजाब में झाडू

जब भी देश में कहीं भी चुनाव होने को होते हैं, पोल सर्वे आने लगते हैं, कितने सही उतरते हैं, कितने गलत यह चुनाव परिणाम आने पर ही सामने आता है। साल 2022 में पाँच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों पर इस समय सबकी नजरें हैं। ऐसे में एबीपी न्यूज के सी वोटर ने जनता का रुख जानने के लिए इन पाँचों राज्यों (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा और पंजाब) में 1 लाख 7 हजार से अधिक लोगों पर सर्वे किया है। इस सर्वे में जो नतीजे निकल कर आए हैं वो कुछ लोगों की अपेक्षाओं से मेल खाते हैं वहीं कुछ के लिए ये संतोषजनक नहीं है।

सबसे ज्यादा नजरें इस बार उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर हैं। वहाँ कुल 403 विधानसभा सीटों पर वोट पड़ने हैं। कुछ लोग मान रहे हैं कि इस बार उत्तर प्रदेश में बीजेपी दोबारा लौटकर रिकॉर्ड बनाएगी और कुछ को अखिलेश यादव के आने की उम्मीद है। बीजेपी के पुनः सत्ता में आने के कई कारण माने जा रहे हैं, जैसे योगी राज में हिन्दू अपने तीज-त्यौहार जिस उत्साह से मना रहे हैं, तुष्टिकरण के चलते उतने उत्साह से कभी नहीं मना पाते थे; दूसरे, वर्षों से विवादित रहे अयोध्या में राममंदिर के पुनः निर्माण का श्रीगणेश होना, प्रदेश में गुंडागर्दी पर लगाम, पहले से अधिक बिजली सप्लाई आदि का सामान्य जनजीवन पर बहुत असर पड़ने के कारण लोग उत्तर प्रदेश में वापस योगी सरकार को ही चाहते हैं। ऐसे में एबीपी सी-वोटर सर्वे के अनुसार यूपी में भाजपा को 213 से 221 सीट मिलने का अनुमान है, जबकि अखिलेश यादव की सपा को 152-160 सीट मिल सकती हैं। इस सर्वे में मायावती की बसपा को 16-20 सीट मिलने की बात कही गई है और कांग्रेस के हिस्से 6-10 सीट आ सकती है। यूपी में बीजेपी का वोट शेयर सबसे आगे है। पार्टी को 41% वोट मिल सकते हैं। वहीं सपा 31%, बीएसपी 15%, कांग्रेस 9% और अन्य को 4% वोट मिलने का अनुमान है।

उत्तर प्रदेश में जहाँ भाजपा के साथ सपा की कड़ी टक्कर है। वहीं उत्तराखंड में बीजेपी के सामने कांग्रेस चुनौती है। सी वोटर सर्वे के अनुसार बीजेपी को प्रदेश में 41% वोट शेयर के साथ 36-40 सीट मिलेंगी जबकि कांग्रेस इस सर्वे में ज्यादा पीछे नहीं है वहाँ पार्टी को 36 % वोट शेयर के साथ 30-34 सीट मिलने का अनुमान है। आम आदमी पार्टी के खाते में 0-2 सीटें आ सकती हैं।

इसके बाद गोवा में सीधे-सीधे भाजपा के लौटने के आसार है। यदि इस सर्वेक्षण की मानें तो भारतीय जनता पार्टी के इर्द-गिर्द कोई पार्टी नहीं है। यहाँ भाजपा के खाते में 19-23 सीटें आती दिख रही हैं जबकि कांग्रेस 2-6 सीट पाकर सिमटती दिख रही है। AAP को भी यहाँ 3-7 सीट मिलेगी और अन्य के खाते में 8-12 सीटें आएँगी।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गोवा की तरह मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी के लौटने के आसार हैं। सर्वे में 25-29 सीट बीजेपी के खाते में, 20-24 सीट कांग्रेस के हिस्से में वहीं एनपीएफ 4-7 सीट मिल सकती हैं। वोट शेयर की बात करें तो बीजेपी को 39फीसद वोट मिलेंगे, कांग्रेस को 33%,एनपीएफ को 9% और अन्य के हिस्से 19% वोट आएँगे।

इसके बाद पंजाब में न बीजेपी और न ही कांग्रेस के पास सत्ता आती दिख रही है बल्कि अनुमान है कि इस बार आम आदमी पार्टी बाजी मारेगी। कांग्रेस ने 2017 में वहाँ 70 सीट पर विजय प्राप्त की थी लेकिन अब 42 से 50 सीटों में वह सिमटते दिख रहे है। क्योकि सिद्धू और अमरिंदर सिंह हुए घमासान ने कांग्रेस को बहुत नुकसान पहुँचाया है। चुनाव में आम आदमी पार्टी को 47 से 53 सीट मिल सकती है और बीजेपी को यहाँ 16 से 24 सीट के बीच सीट पाकर ही संतोष करना पड़ेगा।

आम आदमी पार्टी की आशाओं पर पानी वर्तमान में दिल्ली में यमुना के दूषित जल में छठ पर्व का मनाना, किसी न किसी विभाग का वेतन रोकना, कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों को दिल्ली से भागने के लिए मजबूर करना आदि कारण इसे सत्ता से दूर कर सकते हैं। लेकिन दिल्ली की भांति पंजाब में भी बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए आप और कांग्रेस की मिलीजुली सरकार बनने से भी इंकार नहीं किया जा सकता।   

‘अरेस्ट तो उनका बाप भी नहीं कर सकता’: गिरफ्तारी की माँग पर स्वामी रामदेव

बाबा रामदेव द्वारा एलोपैथ को स्टूपिड साइंस बताने के बाद से योगगुरू चिकित्सकों के निशाने पर आ गए हैं। कोई उनकी गिरफ्तारी की माँग कर रहा है तो कोई इसे कोरोना योद्धा चिकित्सकों का अपमान बता रहा है।

इस मामले में बाबा रामदेव ने अब एक और बड़ा बयान दे दिया है। उनका कहना है कि किसी का बाप भी रामदेव को गिरफ्तार नहीं करा सकता है। बता दें कि बुधवार (मई 26, 2021) को सोशल मीडिया पर इसी विवाद के चलते ‘अरेस्ट बाबा रामदेव’ ट्रेंड कर रहा था। जिसके जवाब में रामदेव ने यह टिप्पणी की।

वायरल हो रहे इस वीडियो में आईएमए पर तंज कसते हुए बाबा रामदेव ने कहा, “अरेस्ट तो उनका बाप भी नहीं कर सकता संत रामदेव को, लेकिन वह एक शोर मचा रहे हैं कि ‘क्विक अरेस्ट स्वामी रामदेव’। आगे उन्होंने कहा कि कभी कुछ चलाते हैं, कभी कुछ चलाते हैं। कभी ठग रामदेव, कभी महाठग रामदेव, कभी गिरफ्तार रामदेव।”

अब अपने लोगों को भी ट्रेंड चलाने की प्रैक्टिस हो गई

तंज कसते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि वह ट्रेंड चलाते रहते हैं। अब अपने लोगों को भी ट्रेंड चलाने की प्रैक्टिस हो गई है। इस दौरान रामदेव ने ताली बजाई और हँसते हुए कहा कि आप ट्रेंड में हमेशा ही टॉप पर पहुँच जाते हो इसके लिए आपको बधाई है।

एलोपैथी और एलोपैथिक चिकित्सकों पर की गई बाबा रामदेव की टिप्पणी से उठा तूफान शांत होता नजर नहीं आ रहा है। इतना ही नहीं रामदेव ने तो यह भी पूछ डाला कि यदि एलोपैथी सर्वशक्तिमान और सर्वगुण संपन्न है तो फिर एलोपैथिक चिकित्सकों को बीमार ही नहीं होना चाहिए।

इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन ने बाबा रामदेव को पत्र लिख सख्त संदेश भी दिया था, जिसमें स्पष्ट तौर पर लिखा था कि उनकी टिप्पणी एलोपैथिक चिकित्सकों का मनोबल तोड़ने वाली है। इसके बाद बाबा रामदेव ने अपने बयान के लिए माफी माँगी थी।

IMA उत्तराखंड ने बाबा रामदेव को 1000 करोड़ रुपए की मानहानि का नोटिस भेजा है। नोटिस में उनसे अपने बयान का खंडन कर लिखित और वीडियो के जरिए माफी की माँग की गई है। इसके लिए 15 दिनों का वक्त दिया गया है। नोटिस के अनुसार 15 दिन में माफी नहीं मॉंगने पर बाबा रामदेव से 1000 करोड़ रुपए की माँग की जाएगी।

बाबा रामदेव ने आईएमए और दवा कंपनियों ने से 25 सवाल पूछे थे। उन्होंने हाइपरटेंशन, टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज जैसे कई बीमारियों के स्थायी समाधान के बारे में सवाल पूछा था। पत्र में उन्होंने पूछा था कि बिना बैरियाट्रिक सर्जरी और लाइपोसेक्शन या किसी छेड़छाड़ के फॉर्मा इंडस्ट्री में कोई ऐसी दवा है जिसे खाने से वजन घट जाए? सोरायसिस, सोरायटिक अर्थरायटिस और सफेद दाग का बिना साइड इफेक्ट के स्थायी समाधान बताने को भी कहा था।

बाबा रामदेव ने अपने पत्र में IMA से सवाल किया था कि एलोपैथी के पास पार्किंसन का निर्दोष स्थायी समाधान क्या है? बाबा ने यह भी कहा था कि कब्ज, गैस, एसीडिटी का फॉर्मा इंडस्ट्री के पास स्थायी समाधान क्या है? अनिद्रा, लोगों को नींद नहीं आती है, क्योंकि आपकी दवा 4-6 घंटे ही असर करती हैं, वह भी साइड इफेक्ट के साथ। क्या इन सबका कोई स्थायी समाधान है?

मरकज से कुम्भ की तुलना पर CM तीरथ सिंह ने दिया ‘लिबरलों’ को करारा जवाब : एक हॉल और 16 घाट, इनकी तुलना कैसे?

उत्तराखंड के हरिद्वार में 1 अप्रैल से कुंभ मेला चल रहा है। मेले के भव्य दृष्य को देखकर इंटरनेट पर लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं। दुर्भावनापूर्ण इरादे के साथ सोशल मीडिया पर सेक्युलरों ने कुंभ की तुलना निजामुद्दीन मरकज़ के तबलीगी जमात से की है।

जबकि दोनों ही घटनाओं में साफ मूलभूत अंतर है। बावजूद इसके देश के तथाकथित सेक्युलर फैब्रिक को बचाने के नाम पर सोशल मीडिया पर एक हताशा वर्ग इसे तबलीगी जमात से जोड़ने में लगा है। ये लिबरल-वामपंथी और कट्टरपंथियों का समूह गलत सूचनाओं के आधार पर इसे कोरोना नियमों का उल्लंघन साबित करते हुए अपना प्रोपेगेंडा सेट करने में लगा है।

उत्तराखंड सरकार ने कुंभ मेले के आयोजन को सख्त नियमों के पालन के साथ अनुमति दी है। यहाँ नागरिकों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। मेले में आने से पहले लोगों को कोरोना के आरटी पीसीआर टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट होनी चाहिए, जो कि 72 घंटे से अधिक पुरानी न हो। यही कारण है कि इस वर्ष भीड़ पिछले वर्षों की तुलना में बहुत कम है।

इसके अलावा उत्तराखंड में प्रवेश करने के सभी रास्तों पर सरकार ने कोविड-19 टेस्ट सेंटर बनाए हैं। हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर आने वाले यात्री के पास या तो पहले से कोरोना नेगेटिव आरटी पीसीआर रिपोर्ट हो या स्वास्थ्य विभाग द्वारा उसकी जाँच कराई जाएगी। हर की पौड़ी में सैनिटाइजर डिस्पेंसर लगाए गए हैं। इसके अलावा विशेष कोविड -19 आईसोलेशन सेंटर भी बनाए गए हैं।

सोशल मीडिया पर लिबरल, वामपंथी और कट्टरपंथियों ने कुम्भ की तुलना पिछले साल के निजामुद्दीन मरकज और तबलीगी जमात से कर दी थी। जिसका जवाब देते हुए सीएम तीरथ सिंह रावत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि कुंभ की तुलना मरकज से नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मरकज एक हाल में होता है, लेकिन कुंभ के 16 घाट हैं। यह हरिद्वार से लेकर नीलकंठ तक विस्तृत है। बावजूद इसके लोग एक सही जगह पर स्नान कर रहे हैं और इसके लिए समयसीमा निर्धारित है।

सोमवती अमावस्या पर हुए शाही स्नान को पूरी तरह से सफल बताते हुए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने संत समाज के पूर्ण सहयोग का जिक्र किया। अधिकारियों और मीडिया को धन्यवाद देते हुए सीएम ने कहा कि जिस तरह की सुविधाएँ संत चाहते थे वैसी सुविधा उन्हें दी गई।

कुंभ की जमातियों से तुलना करने वालों को सबक

उत्तराखंड सरकार ने कुंभ मेले के आयोजन को सख्त नियमों के पालन के साथ अनुमति दी है। यहाँ नागरिकों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। मेले में आने से पहले लोगों के पास कोरोना के आरटी पीसीआर टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट होनी चाहिए, जो कि 72 घंटे से अधिक पुरानी न हो। यही कारण है कि इस वर्ष भीड़ पिछले वर्षों की तुलना में बहुत कम है। लेकिन लिबरल-वामपंथी और कट्टरपंथियों का समूह गलत सूचनाओं के आधार पर इसे कोरोना नियमों का उल्लंघन साबित करते हुए अपना प्रोपेगेंडा सेट करने में लगा है।

मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की समय सीमा को भी आगे बढ़ाया जा सकता है। इसीलिए, कोरोना संक्रमण संभावित संक्रमण को रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं। जबकि पिछले साल मरकज निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात वालों ने ऐसी किसी भी सावधानी का पालन नहीं किया था।

वो महामारी का शुरुआती दौर था और उस दौरान कोरोना वायरस का फैलाव उतना नहीं था, जितना अभी है। जमातियों ने कोरोना के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया था, जिस कारण हजारों लोग संक्रमित मिले थे।

मरकजी जमातियों ने जानबूझकर संक्रमण के हालात को बदतर बनाने के लिए इसे छिपाए रखा। निजामुद्दीन मरकज के लोगों ने कोरोना वायरस को देशभर में फैलाया। अधिकारियों की अपील के बावजूद मरकजी सामने नहीं आए।

लेकिन, जब प्रशासन ने इन जमातियों को ट्रेस कर लिया तो इन्होंने हिंसा की, क्योंकि ये लोग खुद को आईसोलेट नहीं करवाना चाहते थे। यहाँ तक ​​कि जिन लोगों को अस्पतालों और आईसोलेशन सेंटरों पर रखा गया था, वहाँ भी इन शांतिदूतों ने घृणित आचरण का परिचय दिया था। इन्होंने नर्सों का यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की और डॉक्टरों पर संक्रमण फैलाने के उद्देश्य से थूका।

तबलीगी जमात की इन्हीं हरकतों की वजह से उनकी छवि पूरी तरह से नकारात्मक हो गई। अगर तबलीगी जमातियों का मामला केवल निजामुद्दीन के मरकज तक ही सीमित होता तो शायद लोगों की संवेदनाएं इनके साथ होतीं। लेकिन, इन्होंने गाजियाबाद के अस्पताल में बहुत ही घटिया हरकत की थी। ये न केवल पूरे अस्पताल में नग्न होकर घूमते थे, बल्कि महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ छेड़छाड़ की थी। जमातियों ने खुले में शौच किया और पूरे सरकारी तंत्र को चुनौती दे दी थी।

उदाहरण के तौर पर दिल्ली में कई बार जमातियों के स्वास्थ्यकर्मियों पर थूकने की घटनाएं सामने आईं। कानपुर में जमातियों ने अस्पताल के कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया। कुछ स्थानों इन्होंने गोमांस तक की माँग की। ये कुछ घटनाएं हैं बाकी इनके कारनामों की फेहरिस्त बड़ी लंबी है।

इसके उलट कुंभ मेले में इस तरह की कोई भी घटना नहीं हुई है। यहाँ भक्त धार्मिक आयोजनों को देखने के लिए आते हैं और धार्मिक ज्ञान का लाभ उठाते हैं। जो लोग कुंभ जैसे पवित्र मेले की तुलना जमातियों से करते हैं उन्हें इनकी हरकतों के बारे में जानना चाहिए।

इसके अलावा इस बात के भी सबूत हैं कि कोरोना वायरस का संक्रमण बंद स्थानों की अपेक्षा खुली जगहों में काफी कम होता है। यह कहने की जरूरत नहीं है कि कुंभ मेले में भीड़ बाहर खुले आसमान के नीचे है। जबकि, मरकज निजामुद्दीन के मरकजी बिल्डिंग के अंदर थे।

#justiceforkirannegi: गैंगरेप पीड़िता के परिवार को इंसाफ दिलाने तक चुप नहीं बैठेंगे : त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड


राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुआ निर्भया कांड आज भी रूह कंपा देता है। तसल्ली है तो बस ये कि उसके दोषियों को फाँसी देकर देर-सवेर ही सही उसके साथ न्याय तो हुआ। लेकिन निर्भया के साथ दरिंदगी करने वाले को नाबालिग बोलकर राहत मिल गयी, और उसकी सजा पूरी होने तक दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल की सरकार बन चुकी थी, जिसने उसी को मशीन और वित्तीय सहायता प्रदान की। 

हम खुश हैं क्योंकि एक ऐसे मुद्दे पर हमें कुछ दिन पहले जीत मिली जिसकी वीभत्सता की हमें जानकारी थी, जिसका जिक्र आए दिन मीडिया में हो रहा था, जिसके लिए वकील कोर्ट के चक्कर लगा रहे थे और जिसके लिए कैंडल मार्च किया गया था। राष्ट्रपति भवन तक पहुँच वहां के दरवाजों को झिंझोड़ा गया था। क्योंकि बाबा रामदेव ने काले धन पर यूपीए सरकार को घेरा हुआ था, सरकार को काले धन से जनता का ध्यान बदलने के लिए सोनिया गाँधी के अंतर्गत एनजीओ चला रहे अरविन्द केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के समर्थन से निर्भया कांड को उछाल काले धन की वजह से जनता में हो रहे रोष को निर्भया की ओर मोड़ने में सफल रही। क्या निर्भया के बाद ऐसा कोई कांड नहीं हुआ?  

लेकिन, इन सबके बीच उस उत्तराखंड की किरण नेगी का क्या? जिसके शरीर को दिल्ली में ही उसी साल निर्भया से पहले नोच लिया गया और जिसकी निर्मम हत्या पर चूँ तक न हुई। शायद उस समय किसी ने आवाज उठाई होती तो दिसंबर आते-आते निर्भया भी सतर्क हो जाती और उसके दोषियों के भीतर भी डर होता।

सोशल मीडिया के माध्यम से किरण नेगी का मामला पहुंचा मुख्यमंत्री रावत तक

आज सोशल मीडिया के कारण किरण नेगी का यह मामला मुख्यधारा में आया है। उत्तराखंड की बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए सीएम त्रिवेंद्र रावत ने इस पर स्वयं संज्ञान ले लिया है। उन्होंने किरण को न्याय दिलाने का जिम्मा उठाते हुए ये वादा किया है कि दोषियों को बिना दंड दिलवाए शांत नहीं बैठेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया है जो इस पर सालों से लगातार आवाज उठाते रहे।

अब ट्विटर के ही माध्यम से जनता अपना रोष भी प्रकट कर रही है :-

मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि वह दोषियों को घृणित अपराध के लिए दंड दिलवाएँगे। साथ ही परिवार को भी हर तरह से लीगल सपोर्ट करेंगे। इसी बाबत सीएम रावत ने आज (नवंबर 25, 2020) किरण के माता-पिता से मुलाकात भी की। उन्हें बल देते हुए आश्वस्त किया कि वह उनकी हर संभव मदद करेंगे।

क्या हुआ था किरण नेगी के साथ 

किरण नेगी का मामला जो बहुत पहले सुन लिया जाना चाहिए था, जिस पर आज तक प्रशासन मौन रहा। संदेह है कि यदि इस दर्दनाक घटना पर सीएम रावत स्टैंड नहीं लेते तो शायद यह केस अब भी चर्चा में नहीं होता।

किरण की मृत्यु कोई सामान्य घटना नहीं थी। किरण एक ऑफिस जाने वाली सपने देखने वाली मिडिल क्लास लड़की थी। चूँकि परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी और पिता सेक्योरिटी गार्ड थे इसलिए उसे यही लगता था कि जल्द से जल्द एक घर खरीदना है और अपने पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठानी है।

वह घर आते ही अपनी माँ को चिल्ला कर बताती थी, ‘माँ मैं आ गई।’ उसकी आवाज को याद करते हुए किरण की माँ बताती हैं कि उनकी बेटी को सपने देखने का शौक था और उड़ने का भी।

9 फरवरी 2012 को किरण भी अपने ऑफिस से घर की ओर आ रही थी कि तभी एक लाल इंडिका में उसका अपहरण गुड़गाँव में कर लिया गया। इसके बाद हरियाणा ले जाकर उन दरिंदों ने उसका तीन दिन तक रेप किया। फिर अंत में उसे सरसों के खेत में मरने के लिए छोड़ दिया।

किरण ने बार-बार अपनी जान की भीख माँगी, पर कल्पना करिए जिन्होंने उसके नाजुक अंगो में शराब की बोतल डाल दी हो, उसकी आँखों को तेजाब से जला दिया हो, उसके शरीर को खौलते पानी से दागा हो, उन्हें उस पर दया कैसे आती! उन दरिंदों ने पहले तीन दिन किरण के शरीर पर अपनी हवस मिटाई और फिर उसे दर्दनाक मौत दे दी।

मौजूदा जानकारी से पता चलता है कि किरण के साथ उस रात तीन सहेलियाँ थी। सभी अपना काम करके घर को लौट रही थीं। तभी एक इंडिका में बैठे तीनों दरिंदों ने सब लड़कियों को छेड़ना शुरू किया और जैसे ही वो जब वहाँ से भागने लगीं, उन लोगों ने किरण को अपनी गाड़ी में जबरन बिठा लिया।

ऐसे अपराध होते रहते हैं --शीला दीक्षित, तत्कालीन दिल्ली मुख्यमंत्री, कांग्रेस 

किरण के अपहरण के बाद उसकी सहेलियों ने यह सूचना उसके घरवालों और पुलिस की दी थी। लेकिन प्रशासन ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। अंत में उत्तराखंड समाज के लोगों को इस घटना का विरोध करने के लिए सड़कों पर आना पड़ा, जिसकी वजह से पुलिस हरकत में आई और 14 फरवरी को किरण की लाश हरियाणा के खेत से मिली।

 किरण के पिता बताते हैं कि अपनी बेटी के लिए न्याय माँगने वो शीला दीक्षित के पास तक गए थे, मगर उन्हें ये कह दिया गया कि इस तरह की घटनाएँ होती रहती हैं। इसके बाद अधिकारियों ने उन्हें 1 लाख का चेक थमाया और किसी प्रकार की मदद या मुआवजा देने से इंकार कर दिया गया।

अब लगभग 9 साल होने वाले हैं। किरण के पिता मीडिया को बताते हैं कि उन्हें आज तक इंसाफ की दरकार है। साल 2014 में किरण का गैंगरेप करने वाले तीनों दोषियों को उच्च न्यायालय ने फाँसी की सजा दी थी, मगर बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुँच कर लटक गया। अब स्थिति ये है कि उन्हें यहाँ तक नहीं पता कि कोर्ट की अगली तारीख क्या है और उनके वकील का नाम क्या है।

माँग के नाम पर बस वह इतना चाहते हैं कि उनकी बेटी के साथ दरिंदगी करने वालों को फाँसी हो। उन्हें 8 साल कोर्ट के चक्कर लगाते बीत गए हैं, लेकिन न्याय का कुछ अता-पता नहीं है। वो प्रशासन पर सवाल उठाते हुए सवाल करते हैं कि यदि उनकी बिटिया हाथरस की होती या फिर निर्भया होती तो उसे न्याय मिल जाता?

उन्हें भी यह बात सताती है कि निर्भया से पहले हुई इस घटना पर अब भी कोई सुनवाई नहीं है। वहीं निर्भया के दोषियों को इंसाफ मिल चुका है। कुँवर नेगी (किरण के पिता) कहते हैं कि जब तक रेप मामलों में त्वरित कार्रवाई का प्रावधान नहीं होता तब तक कुछ भी नहीं बदल पाएगा। बेटियाँ डर महसूस करती हैं, ये डर अपराधियों में होना चाहिए। जब तक फाँसी की सजा नहीं होगी, यह रेप नहीं रुकेंगे। जिन मामलों में पुख्ता सबूत मिल रहे हैं उनमें तो 6 माह में फाँसी हो ही जानी चाहिए।

बेटी को न्याय दिलाने के लिए कुँवर नेगी जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर चुके हैं। जहाँ उन्हें पीड़ा यह देख कर हुई कि एक ओर केजरीवाल का पंडाल लगा था और उन्होंने उनके बारे में जानने तक का प्रयास नहीं किया। वहीं दूसरे गेट पर राहुल गाँधी की बैठक हुई और उन्होंने उनकी तरफ तक नहीं देखा। ये सब इन नेताओं ने तब किया जब कुँवर नेगी अपनी बिटिया के लिए हाथ में पोस्टर लेकर न्याय माँग रहे थे।

2019 में हुआ था कैंडल मार्च 

पिछले साल सर्वोच्च न्यायालय संग्रहालय से इंडिया गेट तक किरण के लिए न्याय माँगते हुए पहली बार कैंडल मार्च निकाला गया। इस मार्च में उत्तराखंड समाज के तमाम सामाजिक संगठन और लोग एकत्र हुए। इन सबने एक आवाज़ में माँग की कि उत्तराखंड की बेटी किरन नेगी के हत्यारों को जल्द से जल्द फाँसी की सजा दी जाए।

कैंडल मार्च की अगवाई करने वाले समाज सेवी विनोद बछेती ने बताया था कि वह अपनी उत्तराखंड की बेटी को न्याय दिलाने के लिए एकत्रित हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट बेटी के हत्यारों को फाँसी देगा और उत्तराखंड के लोगों को न्याय मिलेगा।

इस कैंडल मार्च में शामिल किरण के माता पिता तब तक यही आस लगाए हुए थे कि जैसे निर्भया के हत्यारों को फाँसी की सजा दिलवाने की तैयारी हो रही है, वैसे ही कोर्ट उनकी भी सुनेगा, लेकिन अफसोस ये मामला इस साल तक लटका रहा। हालाँकि अब हो सकता है सीएम रावत के साथ आने के बाद उन्हें जल्द इसमें न्याय मिले।

दिल्ली : आप ने उत्तराखंड की इष्ट देवी नंदा देवी की तुलना कूड़े के ढेर से

अरविन्द केजरीवाल की पार्टी ने उत्तराखंड की
इष्ट देवी का किया अपमान
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आम आदमी पार्टी कितनी हिन्दू विरोधी हो सकती है, दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के अलावा इसके गरीब, मजलूम शांतिदूतों द्वारा राजौरी गार्डन, विकासपुरी और लाल कुआँ में हुए हिन्दुओं पर हमलों पर ख़ामोशी साध दंगाइयों को संरक्षण दिया जाता रहा है। 
अरविन्द केजरीवाल माफ़ी मांगो 
अरविन्द केजरीवाल जो चुनावों में हनुमान चालीसा पढ़ते हैं, लेकिन यह नहीं जानते की हनुमान राक्षसों और धर्म का अपमान करने वालों के घोर विरोधी थे। लेकिन चुनाव उपरांत उनकी हरकतों से उनके हिन्दू होने पर ही संदेह होने लगता है।
जिस तरह आप के अधिकारित ट्वीट से गाज़ीपुर के कूड़े के ढेर की भारत के सबसे ऊँचे पहाड़ों से करने पर भी बेशर्मों की तरह चुप्पी साधे होने का क्या अर्थ निकाला जाए। क्या केजरीवाल सहित पार्टी में जितने भी हिन्दू हैं उन सबको राष्ट्र से माफ़ी मांगनी चाहिए। क्या इन आपी हिन्दुओं को नहीं मालूम की हमारे हिन्दुओं के अधिकतर तीर्थ जैसे : वैष्णो देवी, भैरों, शिव खोडी, अमरनाथ, माँ नन्दा देवी आदि पहाड़ों पर ही हैं। क्या गाज़ीपुर कूड़े का ढेर इन पहाड़ों से ऊँचा है? यदि नहीं, फिर किस आधार पर अधिकृत ट्विटर पर इसे भारत का सबसे ऊँचा पहाड़ बताया? क्या लोकप्रियता या चर्चा में रहने का कोई और अन्य तरीका नहीं था, जो हिन्दू तीर्थों का अपमान कर किया जा रहा है? अगर अरविन्द केजरीवाल में लेशमात्र भी शर्म है, तो तुरंत माफ़ी मांगे। 
मोदी विरोध करने में कांग्रेस और वामपंथी तो बेनकाब हो गयी है, अगला नंबर केजरीवाल पार्टी का है, जो आगामी नगर निगम चुनाव के कारण हिन्दू विरोधी प्रचार कर मुस्लिम वोट बैंक को खुश कर रहे हैं। 
दिल्ली को संयुक्त राष्ट्र भी ‘पॉल्यूशन कैपिटल’ के रूप में देखता है लेकिन अरविन्द केजरीवाल की सरकार इस छवि को बदलने की बजाए आरोप-प्रत्यारोप में लगी हुई है, भले ही इससे देश की बदनामी ही क्यों न हो। ईस्ट दिल्ली के गाजीपुर में भारत का सबसे बड़ा कूड़ा-करकट का पहाड़ है, देश का सबसे बड़ा कचरे का ढेर। केजरीवाल की पार्टी ने इसकी तुलना उन पवित्र पर्वतों से की है, जिसकी लोग पूजा करते हैं। इसी क्रम में AAP ने गाजीपुर के कचरे के ढेर की तुलना उत्तराखंड की नंदा देवी से कर दी, जो राज्य की इष्ट देवी भी हैं।
आगे बढ़ने से पहले उस कचरे के पहाड़ के बारे में बता दें कि वो 40 फुटबॉल पिच से भी अधिक के क्षेत्र में फैला हुआ है। आवारा कुत्ते और गाय वहाँ घुमते रहते हैं। जानवर बीमार पड़ते हैं। 1 साल पहले ही इसकी ऊँचाई 213 फ़ीट थी। ऊँचाई में ये इस्लामी आक्रांताओं द्वारा बनाए गए ताजमहल और कुतुब मीनार को टक्कर दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट तो यहाँ तक कह चुका है कि कुछ दिनों बाद वहाँ से गुजरने वाले हवाई जहाजों के लिए अलर्ट जारी करना पड़ेगा।
आते हैं आम आदमी पार्टी (AAP) की करतूत पर, जिसने गाजीपुर के उस कुड़े के पहाड़ की तुलना तीन पवित्र पर्वतों से की। उसने लिखा कि सिक्किम में कंचनजंघा सबसे बड़ा पर्वत है। इसके बाद उसने तस्वीरें डालते हुए लिखा कि इसी तरह उत्तराखंड में नंदा देवी और कामेट पर्वत शहर सबसे ऊँचा है। लेकिन इन तीनों के साथ ही उसने गाजीपुर के कचरे के पहाड़ की तस्वीर भी डाल दी और लिखा कि इसे भाजपा के एमसीडी ने बनाया है।
आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक हैंडल से ऐसा किया। इसके बाद सोशल मीडिया में आलोचना का दौर शुरू हो गया। बता दें कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने जिन पर्वतों का जिक्र किया, वो न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए पवित्र हैं बल्कि पूरा देश उन पर गर्व करता है और उन्हें पूजता है। भारत में हिमालय को भी देवता माना गया है, जिसके घर माँ पार्वती का जन्म हुआ था। ऐसे में AAP का ये मजाक लोगों को नागवार गुजरा। उत्तराखंड में तो नंदा देवी का विशेष महत्व है।

भारतीय जनता युवा मोर्चा की राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी नेहा जोशी ने कहा कि AAP और अरविन्द केजरीवाल ने हमेशा उत्तराखंड और यहाँ के निवासियों का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि नंदा देवी उत्तराखंड की इष्ट देवी हैं और उनके अपमान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने केजरीवाल से इस मामले में माफ़ी माँगने को कहा। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे सीएम केजरीवाल ने बाटला हाउस एनकाउंटर में बलिदान हुए मोहन चंद्र शर्मा के शौर्य पर सवाल उठाया था।
नेहा जोशी ने आरोप लगाया कि सस्ती लोकप्रियता के लिए केजरीवाल और उनकी पार्टी ने जो दुस्साहस किया है, उन्हें उस हर एक व्यक्ति से माफ़ी माँगनी चाहिए, जो माँ नंदा की उपासना करते हैं। वहीं उत्तराखंड के एक अन्य ट्विटर हैंडल ‘सनातन टाइम्स’ ने पूछा कि जिन माँ नंदा देवी की हम पूजा करते हैं, उनका अपमान करना कहाँ तक उचित है? उसने AAP को सलाह दी कि वो देवभूमि को अपनी गन्दी राजनीति से दूर रखे।

नंदा देवी का अर्थ है वो देवी, जो आनंद प्रदान करती हैं। 1983 में ही नंदा देवी और इसके चारों तरफ की पहाड़ियों को पर्वतारोहण के लिए बंद कर दिया था, क्योंकि स्थानीय लोगों के लिए इसका बड़ा ही धार्मिक महत्व है। नंदा देवी नेशनल पार्क तो यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में आता है। इसे उत्तराखंड में सुनंदा देवी के नाम से भी पुकारते हैं। पूरे उत्तराखंड के लोग नंदा देवी को अपना इष्ट मानते हैं।