Showing posts with label haridwar. Show all posts
Showing posts with label haridwar. Show all posts

उत्तराखंड में RSS को ‘कौरव’ कहने पर राहुल गाँधी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज : ‘मोदी सरनेम विवाद’ में पटना कोर्ट में होना होगा पेश

बुजुर्गों का कहना है कि कोई बात बोलने से उसको तोलो, लेकिन राहुल गाँधी तो मोदी-योगी विरोध में इतने पगला गए कि कुछ का कुछ बोलते जा रहे, इसका पार्टी को कितना नुकसान हो रहा है, इस पर सोंचने का समय नहीं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। पहले सांसदी गई। उसके बाद आवास खाली करने का नोटिस मिला। अब उनके खिलाफ मानहानि का परिवाद दाखिल किया गया है। यह राष्ट्रीय सेवक संघ (RSS) की तुलना कौरवों से करने से संबंधित है। पटना में 'मोदी सरनेम विवाद' केस दर्ज होने के अलावा लंदन में ललित मोदी भी केस करने की तैयारी कर रहे हैं। 

आरएसएस के एक कार्यकर्ता ने यह राहुल गाँधी के खिलाफ मानहानि का यह परिवाद उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित द्वितीय न्यायिक मजिस्ट्रेट शिव सिंह की अदालत में दाखिल किया है। इस पर न्यायालय ने सुनवाई की तिथि 12 अप्रैल 2023 तय की है। 

रुद्र विहार जगजीतपुर कनखल निवासी कमल भदौरिया ने न्यायालय में यह परिवाद दाखिल किया है। इसमें कमल भदौरिया ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में धारा 370 हटाने, मुस्लिम महिलाओं को अधिकार देते हुए तीन तलाक पर कानून बनाने, राम मंदिर की नींव रखने समेत कई कार्य हुए।

परिवाद में कमल ने कहा कि देश में कहीं पर भी कोई विपत्ति आती है तो संघ अहम भूमिका निभाता है। इसके बावजूद राहुल गाँधी ने 9 जनवरी 2023 को कुरुक्षेत्र अंबाला में संघ को 21वीं सदी का कौरव बताया था। उन्होंने कहा था कि ‘आज के कौरव खाकी हाफ पैंट पहनते हैं और हाथ में लाठी लिए होते हैं’।

कमल ने आगे कहा है कि राहुल गाँधी ने कहा था कि यह देश पुजारियों का नहीं, बल्कि तपस्वियों का है। इस बयान को उन्होंने भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला बताया। परिवाद दाखिल करने के बाद कोर्ट ने राहुल गाँधी को 12 अप्रैल को पेश होने का नोटिस भी जारी कर दिया है।

वहीं, मोदी सरनेम को लेकर राहुल गाँधी को पटना की अदालत ने भी 12 अप्रैल को हाजिर होने के लिए कहा है। राज्यसभा सांसद और भाजपा नेता सुशील मोदी ने कहा कि उनके मामले में राहुल गाँधी को धारा 317 के तहत बयान दर्ज कराने के लिए पटना के एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय में 12 अप्रैल 2023 को उपस्थित होना है। इसका नोटिस भेज दिया गया है।

सुशील मोदी ने कहा कि धारा 500 के तहत किसी व्यक्ति या समुदाय की मानहानि करना दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा सूरत कोर्ट की तरह ही बिहार में भी उन्हें 2 साल की सजा हो सकती है। सुशील मोदी ने कहा कि राहुल को इस मामले में 6 जुलाई 2019 को पटना की अदालत में हाजिर होकर जमानत लेनी पड़ी थी।

2 साल के कोरोना ब्रेक के बाद हुई काँवड़ यात्रा पर कहीं मांस फेंका, कहीं थूका, कहीं औरतों ने चारपाई डाल रोका रास्ता

 काँवड़ियों पर कहीं थूका गया, तो कहीं मांस फेंका गया, कोई खाट लगाकर रास्ते में अड़ा, किसी को पुष्प वर्षा से लगी मिर्ची
इस वर्ष (2022) की काँवड़ यात्रा भगवान शिव के भक्तों के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि यह कोविड -19 महामारी के कारण दो साल के अंतराल के बाद पूरे उत्साह के साथ हो रही है। पूरे भारत में लाखों काँवड़िया माँ गंगा की जलधारा से जलभरकर उसे भगवान महादेव को अर्पित करने के लिए कठिन यात्रा कर रहे हैं। इस बीच ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं जहाँ किसी को मिर्ची लगी तो, कहीं काँवड़ियों पर हमले किए गए, उन पर मांस फेंके गए तो कहीं आतंकी हमले की धमकी भी आई। किसी भी #intolerance, #award vapsi, #not in my name, #mob lynching और गंगा-जमुनी तहजीब आदि अन्य गैंग की आवाज़ नहीं निकली, क्यों? कब तक पाखंड का ये नंगा नाच किया जाता रहेगा? ऐसी ही कुछ घटनाओं पर हम यहाँ संक्षेप में बात करेंगे।

कांवड़ यात्रा में अवरोध, रामनवमी जुलुस पर पथराव आदि होने के कारण हिन्दुओं में चर्चा है कि 'जब सरकार मंदिरों के चढ़ावे को अपने नियंत्रण में ले सकती है, फिर मस्जिदों और दरगाहों की कमाई पर नियंत्रण क्यों नहीं? किस आधार पर उन्हें मुक्त किया हुआ है? जामा मस्जिद, निजामुद्दीन दरगाह और अजमेर दरगाह आदि की एक दिन की कमाई सुनकर सब हैरान हो जाएंगे। कहाँ खर्च हो रहा है इतना धन? कौन रखता है इसका हिसाब? क्या सारे कानून और संविधान की शर्तें हिन्दुओं पर ही लागु होंगी? अगर सरकार मस्जिदों और दरगाहों की कमाई को नियंत्रण में ले ले, वक्फ बोर्ड को शायद कोई अनुदान देने की जरुरत न पड़े।' 

काँवड़ यात्रा में महंत की रेकी कर रहा था नाजिम

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में काँवड़ यात्रा के दौरान काँवड़ियों की भीड़ में से एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया गया है। आरोपित का नाम नाज़िम है, जो मेरठ का ही रहने वाला है। उस पर काँवड़ यात्रा में चल रहे महंत मछेन्द्रपुरी की रेकी करने और किसी और को उनकी जानकारी देने का आरोप है। हालाँकि, इस मामले में काँवड़ियों ने नाज़िम को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया है। घटना 24 जुलाई 2022 (रविवार) की है। इस घटना की पुलिस में शिकायत महंत मछेन्द्र पुरी के शिष्य ब्रह्मानन्द पुरी ने दर्ज करवाई है।

कांग्रेस नेता ने की विवादित टिप्पणी

कांग्रेस की राष्ट्रीय समन्वयक रितु चौधरी ने 17 जुलाई को कहा, “किताबें उठाइए, काँवड़ उठाने की जरुरत नहीं पड़ेगी।”
हालाँकि, रितु चौधरी के ट्वीट के बाद, लोगों ने उनकी टिप्पणियों की आलोचना की और सवाल किया कि वह और उनकी पार्टी हिंदुओं और सनातन धर्म से जुड़ी परंपराओं से नफरत क्यों करती हैं। एक यूजर ने उनसे यह कहने के लिए भी कहा, “एक किताब उठाओ, आपको हज नहीं जाना पड़ेगा।” अगर उनमें हिम्मत है। वैसे जैसे ही विवाद गर्माया, उन्होंने बिना किसी माफी के ट्वीट को चुपचाप डिलीट कर दिया।

काँवड़ियों पर पुष्प वर्षा से बरखा दत्त को लगी मिर्ची

सावन के महीने में काँवड़िए बाबा भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए कोई हरिद्वार तो कोई काशी निकल पड़ा है। हरिद्वार में उन पर पुष्प वर्षा भी हो रही है। इस बीच NDTV की पूर्व पत्रकार और मोजो न्यूज़ की संपादक, बरखा दत्त को पुष्प वर्षा से मिर्ची लगी है। उन्होंने ट्विटर पर इसमें प्रशासन की संलिप्तता का विरोध किया है।
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “राज्य के अधिकारियों के लिए काँवड़ियों पर पंखुड़ियों की बौछार करना लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ पर आपत्ति जताना कैसे ठीक है? मैं साझा सार्वजनिक स्थानों पर फैले धर्म की प्रशंसक नहीं हूँ, लेकिन यह खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण है।”

काँवड़ यात्रा पर फेंका गया मांस

19 जुलाई को दिल्ली के मुस्लिम बहुल सीलमपुर इलाके में हरिद्वार से राजस्थान जा रहे काँवड़ यात्रा पर किसी ने मांस का टुकड़ा फेंक दिया। घटना शाम के वक्त हुई, जिसके बाद काँवड़ यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं ने एक घंटे तक सड़क जाम कर दिया। बता दें कि हरिद्वार से दिल्ली पहुँचने में इन काँवड़ियों को सात दिन का समय लगा था। लेकिन दिल्ली में उनका स्वागत मांस के टुकड़े के साथ हुआ।
ऑपइंडिया से बात करते हुए, काँवड़ियों ने कहा कि उन्हें मांस के टुकड़े के बारे में तब पता चला जब एक कंधे से दूसरे कंधे पर काँवड़ बदल रहे थे।

काँवड़ियों से भरी सड़क पर नमाज पढ़ने वाले 8 मुस्लिम गिरफ्तार

पुलिस को उत्तराखंड के शिवालिकपुर नगर, रानीपुर और हरिद्वार में नमाज अदा करने वाले मुस्लिम पुरुषों के एक समूह के बारे में सूचना मिली। जब वे नमाज अदा कर रहे थे तभी उस रास्ते से काँवड़ियों का एक बड़ा जत्था गुजर रहा था। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए सभी आठ नमाजी दुकानदार थे। उन पर कानून-व्यवस्था भंग करने का मामला दर्ज किया गया था।

मुस्लिमों ने मेरठ में काँवड़ियों पर थूका

यूपी के मेरठ में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने के लिए मुस्लिम समुदायके युवकों ने काँवड़ियों पर थूक दिया। इससे काँवड़िए भड़क गए और युवक को जमकर कर पीट दिया। बाद में पुलिस ने मामले को शांत कराया। घटना 22 जुलाई को मेरठ में हुई। घटना के बाद काँवड़ियों ने सड़क जाम कर पुलिस से कार्रवाई की माँग की।
22 जुलाई 2022 को कुछ काँवड़िए अपने काँवड़ को रखकर शिविर में आराम कर रहे थे। तभी दूसरे समुदाय के दो युवक बाइक से आए और काँवड़ पर थूकने का प्रयास किया। आगे चलकर इनमें से एक युवक बाइक से उतरा और काँवड़ पर थूक कर अपवित्र कर दिया।
जब काँवड़ियों ने इन्हें देखा तो एक को पकड़ लिया, जबकि दूसरा भाग गया। पकड़ने के बाद काँवड़ियों ने उसे पीटना शुरू कर दिया। इसी बीच पुलिस मौके पर पहुँचकर आरोपित को भीड़ से छुड़ाकर अपने साथ लेकर चली गई।

इब्राहिमपुर में मुस्लिम महिलाओं ने काँवड़ियों का रास्ता रोका

ताजा घटना मुरादाबाद के इब्राहिमपुर गाँव की है। जहाँ मुस्लिम महिलाओं के एक समूह ने काँवड़ियों को इब्राहिमपुर में आगे बढ़ने से चारपाई लगाकर रोक दिया। उन्होंने सड़क पर खाट बिछा दी और माँग की कि काँवड़िए वापस जाएँ और निर्धारित मार्ग का पालन करें। यहाँ, महिलाओं ने जिन काँवड़ियों को रोका, वे उसी इब्राहिमपुर गाँव के ही थे।
हालाँकि, इस मामले में पुलिस ने आकर दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। महिलाओं ने दावा किया कि काँवड़िए मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में प्रवेश करने का एक नया चलन शुरू कर रहे हैं, और वे उन्हें वहाँ से नहीं जाने देंगे। दूसरी ओर, काँवड़ियों ने कहा कि वे एक ही गाँव के हैं। बाद में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और बुजुर्गों ने एक पंचायत की और जिसके बाद काँवड़ियों को वहाँ से गुजरने दिया।

काँवड़ियों पर हुए आतंकी हमले के इनपुट्स

काँवड़ यात्रा शुरू होने से पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों को सतर्क रहने को कहा था क्योंकि तीर्थयात्रियों पर आतंकी हमले की सूचना भी मिली थी।

धर्म संसद: अब नरसिंहानंद पर FIR, कहा – ‘गाँधी एक गंदगी, नहीं रिहा हुए कालीचरण महाराज तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के घर के सामने आमरण अनशन’

यति नरसिंहानंद सरस्वती और सागर सिंधु महाराज पर FIR
उत्तराखंड के हरिद्वार में आयोजित हुए धर्म संसद के मामले में महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती और एक अन्य संत पर FIR दर्ज की गई है। इस मामले में पहले ही FIR दर्ज कर ली गई थी, लेकिन अब इसमें उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के डासना स्थित शिव-शक्ति धाम के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के अलावा सागर सिंधु महाराज का नाम भी जोड़ा गया है। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार के अनुसार, वायरल वीडियो क्लिप के आधार पर ये कार्रवाई हुई है।

भड़काऊ भाषण के आरोप में इन दोनों पर ‘भारतीय दंड संहिता (IPC)’ की धारा-295A (किसी समुदाय द्वारा पवित्र मानी जाने वाली वस्तु को नष्ट करना या धार्मिक भावनाओं को आहत करना) भी जोड़ी गई है। बता दें कि हरिद्वार में 17-20 दिसंबर को इस धर्म संसद का आयोजन हुआ था, जिसमें वसीम रिजवी से जितेंद्र नारायण त्यागी बने सुन्नी वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष भी शामिल हुए थे। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी इस आयोजन पर निशाना साधा था।

उधर रायपुर धर्म संसद में महात्मा गाँधी पर दिए गए बयान को लेकर कालीचरण महाराज की मध्य प्रदेश से गिरफ़्तारी का भी यति नरसिंहानंद सरस्वती ने विरोध किया है। उन्होंने गाँधी को ‘गंदगी’ बताते हुए कहा कि इस गिरफ़्तारी को अंजाम देने वालों का माँ काली और महादेव विनाश कर देंगे। उन्होंने ये भी कहा कि अगर कालीपुत्र कालीचरण महाराज को जल्द रिहा नहीं किया जाता है तो वो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आवास पर जाकर आमरण अनशन करेंगे।

अवलोकन करें:- 

‘गाँधी राष्ट्र पुत्र हो सकते हैं राष्ट्रपिता नहीं’ ; भगवान राम-माँ सीता को गाली देने वालों के खि

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
‘गाँधी राष्ट्र पुत्र हो सकते हैं राष्ट्रपिता नहीं’ ; भगवान राम-माँ सीता को गाली देने वालों के खि

वहीं इस मामले में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी 100 से अधिक छद्दम ‘बुद्धिजीवियों’ ने पत्र लिख कर साधु-संतों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। साथ ही वकीलों का एक समूह भी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना को पत्र लिख कर ऐसी आयोजनों के स्वतः संज्ञान लेने की अपील कर चुका है। 76 वकीलों के इस समूह ने ‘हिन्दू युवा वाहिनी’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर भी आपत्ति जताई थी। हरिद्वार वाले कार्यक्रम में डॉक्टर मनमोहन सिंह को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप लगे हैं। 

ये वही गैंग है जिसने जामा मस्जिद दिल्ली के इमाम के विरुद्ध भड़काऊ भाषणों पर गिरफ्तार होने से उसी तरह संरक्षण दिया जाता था, जिस तरह इस्लामिक आतंकवादियों को संरक्षण दिया जाता था। कोर्ट से गिरफ़्तारी के आदेश होने के बावजूद कभी बीमारी अथवा किसी अन्य कारणों का बहाना कर गिरफ्तारी से बचाते रहे, लेकिन हिन्दू साधु-संतों द्वारा सच्चाई उजागर करने पर जेलों में डाला जा रहा है। तब कहाँ गयी थी इनकी धर्म-निरपेक्षता? 

‘अरेस्ट तो उनका बाप भी नहीं कर सकता’: गिरफ्तारी की माँग पर स्वामी रामदेव

बाबा रामदेव द्वारा एलोपैथ को स्टूपिड साइंस बताने के बाद से योगगुरू चिकित्सकों के निशाने पर आ गए हैं। कोई उनकी गिरफ्तारी की माँग कर रहा है तो कोई इसे कोरोना योद्धा चिकित्सकों का अपमान बता रहा है।

इस मामले में बाबा रामदेव ने अब एक और बड़ा बयान दे दिया है। उनका कहना है कि किसी का बाप भी रामदेव को गिरफ्तार नहीं करा सकता है। बता दें कि बुधवार (मई 26, 2021) को सोशल मीडिया पर इसी विवाद के चलते ‘अरेस्ट बाबा रामदेव’ ट्रेंड कर रहा था। जिसके जवाब में रामदेव ने यह टिप्पणी की।

वायरल हो रहे इस वीडियो में आईएमए पर तंज कसते हुए बाबा रामदेव ने कहा, “अरेस्ट तो उनका बाप भी नहीं कर सकता संत रामदेव को, लेकिन वह एक शोर मचा रहे हैं कि ‘क्विक अरेस्ट स्वामी रामदेव’। आगे उन्होंने कहा कि कभी कुछ चलाते हैं, कभी कुछ चलाते हैं। कभी ठग रामदेव, कभी महाठग रामदेव, कभी गिरफ्तार रामदेव।”

अब अपने लोगों को भी ट्रेंड चलाने की प्रैक्टिस हो गई

तंज कसते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि वह ट्रेंड चलाते रहते हैं। अब अपने लोगों को भी ट्रेंड चलाने की प्रैक्टिस हो गई है। इस दौरान रामदेव ने ताली बजाई और हँसते हुए कहा कि आप ट्रेंड में हमेशा ही टॉप पर पहुँच जाते हो इसके लिए आपको बधाई है।

एलोपैथी और एलोपैथिक चिकित्सकों पर की गई बाबा रामदेव की टिप्पणी से उठा तूफान शांत होता नजर नहीं आ रहा है। इतना ही नहीं रामदेव ने तो यह भी पूछ डाला कि यदि एलोपैथी सर्वशक्तिमान और सर्वगुण संपन्न है तो फिर एलोपैथिक चिकित्सकों को बीमार ही नहीं होना चाहिए।

इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन ने बाबा रामदेव को पत्र लिख सख्त संदेश भी दिया था, जिसमें स्पष्ट तौर पर लिखा था कि उनकी टिप्पणी एलोपैथिक चिकित्सकों का मनोबल तोड़ने वाली है। इसके बाद बाबा रामदेव ने अपने बयान के लिए माफी माँगी थी।

IMA उत्तराखंड ने बाबा रामदेव को 1000 करोड़ रुपए की मानहानि का नोटिस भेजा है। नोटिस में उनसे अपने बयान का खंडन कर लिखित और वीडियो के जरिए माफी की माँग की गई है। इसके लिए 15 दिनों का वक्त दिया गया है। नोटिस के अनुसार 15 दिन में माफी नहीं मॉंगने पर बाबा रामदेव से 1000 करोड़ रुपए की माँग की जाएगी।

बाबा रामदेव ने आईएमए और दवा कंपनियों ने से 25 सवाल पूछे थे। उन्होंने हाइपरटेंशन, टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज जैसे कई बीमारियों के स्थायी समाधान के बारे में सवाल पूछा था। पत्र में उन्होंने पूछा था कि बिना बैरियाट्रिक सर्जरी और लाइपोसेक्शन या किसी छेड़छाड़ के फॉर्मा इंडस्ट्री में कोई ऐसी दवा है जिसे खाने से वजन घट जाए? सोरायसिस, सोरायटिक अर्थरायटिस और सफेद दाग का बिना साइड इफेक्ट के स्थायी समाधान बताने को भी कहा था।

बाबा रामदेव ने अपने पत्र में IMA से सवाल किया था कि एलोपैथी के पास पार्किंसन का निर्दोष स्थायी समाधान क्या है? बाबा ने यह भी कहा था कि कब्ज, गैस, एसीडिटी का फॉर्मा इंडस्ट्री के पास स्थायी समाधान क्या है? अनिद्रा, लोगों को नींद नहीं आती है, क्योंकि आपकी दवा 4-6 घंटे ही असर करती हैं, वह भी साइड इफेक्ट के साथ। क्या इन सबका कोई स्थायी समाधान है?

मरकज से कुम्भ की तुलना पर CM तीरथ सिंह ने दिया ‘लिबरलों’ को करारा जवाब : एक हॉल और 16 घाट, इनकी तुलना कैसे?

उत्तराखंड के हरिद्वार में 1 अप्रैल से कुंभ मेला चल रहा है। मेले के भव्य दृष्य को देखकर इंटरनेट पर लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं। दुर्भावनापूर्ण इरादे के साथ सोशल मीडिया पर सेक्युलरों ने कुंभ की तुलना निजामुद्दीन मरकज़ के तबलीगी जमात से की है।

जबकि दोनों ही घटनाओं में साफ मूलभूत अंतर है। बावजूद इसके देश के तथाकथित सेक्युलर फैब्रिक को बचाने के नाम पर सोशल मीडिया पर एक हताशा वर्ग इसे तबलीगी जमात से जोड़ने में लगा है। ये लिबरल-वामपंथी और कट्टरपंथियों का समूह गलत सूचनाओं के आधार पर इसे कोरोना नियमों का उल्लंघन साबित करते हुए अपना प्रोपेगेंडा सेट करने में लगा है।

उत्तराखंड सरकार ने कुंभ मेले के आयोजन को सख्त नियमों के पालन के साथ अनुमति दी है। यहाँ नागरिकों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। मेले में आने से पहले लोगों को कोरोना के आरटी पीसीआर टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट होनी चाहिए, जो कि 72 घंटे से अधिक पुरानी न हो। यही कारण है कि इस वर्ष भीड़ पिछले वर्षों की तुलना में बहुत कम है।

इसके अलावा उत्तराखंड में प्रवेश करने के सभी रास्तों पर सरकार ने कोविड-19 टेस्ट सेंटर बनाए हैं। हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर आने वाले यात्री के पास या तो पहले से कोरोना नेगेटिव आरटी पीसीआर रिपोर्ट हो या स्वास्थ्य विभाग द्वारा उसकी जाँच कराई जाएगी। हर की पौड़ी में सैनिटाइजर डिस्पेंसर लगाए गए हैं। इसके अलावा विशेष कोविड -19 आईसोलेशन सेंटर भी बनाए गए हैं।

सोशल मीडिया पर लिबरल, वामपंथी और कट्टरपंथियों ने कुम्भ की तुलना पिछले साल के निजामुद्दीन मरकज और तबलीगी जमात से कर दी थी। जिसका जवाब देते हुए सीएम तीरथ सिंह रावत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि कुंभ की तुलना मरकज से नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मरकज एक हाल में होता है, लेकिन कुंभ के 16 घाट हैं। यह हरिद्वार से लेकर नीलकंठ तक विस्तृत है। बावजूद इसके लोग एक सही जगह पर स्नान कर रहे हैं और इसके लिए समयसीमा निर्धारित है।

सोमवती अमावस्या पर हुए शाही स्नान को पूरी तरह से सफल बताते हुए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने संत समाज के पूर्ण सहयोग का जिक्र किया। अधिकारियों और मीडिया को धन्यवाद देते हुए सीएम ने कहा कि जिस तरह की सुविधाएँ संत चाहते थे वैसी सुविधा उन्हें दी गई।

कुंभ की जमातियों से तुलना करने वालों को सबक

उत्तराखंड सरकार ने कुंभ मेले के आयोजन को सख्त नियमों के पालन के साथ अनुमति दी है। यहाँ नागरिकों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। मेले में आने से पहले लोगों के पास कोरोना के आरटी पीसीआर टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट होनी चाहिए, जो कि 72 घंटे से अधिक पुरानी न हो। यही कारण है कि इस वर्ष भीड़ पिछले वर्षों की तुलना में बहुत कम है। लेकिन लिबरल-वामपंथी और कट्टरपंथियों का समूह गलत सूचनाओं के आधार पर इसे कोरोना नियमों का उल्लंघन साबित करते हुए अपना प्रोपेगेंडा सेट करने में लगा है।

मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की समय सीमा को भी आगे बढ़ाया जा सकता है। इसीलिए, कोरोना संक्रमण संभावित संक्रमण को रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं। जबकि पिछले साल मरकज निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात वालों ने ऐसी किसी भी सावधानी का पालन नहीं किया था।

वो महामारी का शुरुआती दौर था और उस दौरान कोरोना वायरस का फैलाव उतना नहीं था, जितना अभी है। जमातियों ने कोरोना के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया था, जिस कारण हजारों लोग संक्रमित मिले थे।

मरकजी जमातियों ने जानबूझकर संक्रमण के हालात को बदतर बनाने के लिए इसे छिपाए रखा। निजामुद्दीन मरकज के लोगों ने कोरोना वायरस को देशभर में फैलाया। अधिकारियों की अपील के बावजूद मरकजी सामने नहीं आए।

लेकिन, जब प्रशासन ने इन जमातियों को ट्रेस कर लिया तो इन्होंने हिंसा की, क्योंकि ये लोग खुद को आईसोलेट नहीं करवाना चाहते थे। यहाँ तक ​​कि जिन लोगों को अस्पतालों और आईसोलेशन सेंटरों पर रखा गया था, वहाँ भी इन शांतिदूतों ने घृणित आचरण का परिचय दिया था। इन्होंने नर्सों का यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की और डॉक्टरों पर संक्रमण फैलाने के उद्देश्य से थूका।

तबलीगी जमात की इन्हीं हरकतों की वजह से उनकी छवि पूरी तरह से नकारात्मक हो गई। अगर तबलीगी जमातियों का मामला केवल निजामुद्दीन के मरकज तक ही सीमित होता तो शायद लोगों की संवेदनाएं इनके साथ होतीं। लेकिन, इन्होंने गाजियाबाद के अस्पताल में बहुत ही घटिया हरकत की थी। ये न केवल पूरे अस्पताल में नग्न होकर घूमते थे, बल्कि महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ छेड़छाड़ की थी। जमातियों ने खुले में शौच किया और पूरे सरकारी तंत्र को चुनौती दे दी थी।

उदाहरण के तौर पर दिल्ली में कई बार जमातियों के स्वास्थ्यकर्मियों पर थूकने की घटनाएं सामने आईं। कानपुर में जमातियों ने अस्पताल के कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया। कुछ स्थानों इन्होंने गोमांस तक की माँग की। ये कुछ घटनाएं हैं बाकी इनके कारनामों की फेहरिस्त बड़ी लंबी है।

इसके उलट कुंभ मेले में इस तरह की कोई भी घटना नहीं हुई है। यहाँ भक्त धार्मिक आयोजनों को देखने के लिए आते हैं और धार्मिक ज्ञान का लाभ उठाते हैं। जो लोग कुंभ जैसे पवित्र मेले की तुलना जमातियों से करते हैं उन्हें इनकी हरकतों के बारे में जानना चाहिए।

इसके अलावा इस बात के भी सबूत हैं कि कोरोना वायरस का संक्रमण बंद स्थानों की अपेक्षा खुली जगहों में काफी कम होता है। यह कहने की जरूरत नहीं है कि कुंभ मेले में भीड़ बाहर खुले आसमान के नीचे है। जबकि, मरकज निजामुद्दीन के मरकजी बिल्डिंग के अंदर थे।

उत्तराखंड : एक गाँव में 98 जमाती, पुलिस ने पूरे गाँव को किया सील

उत्तराखंड के एक गाँव में मिले 98 जमाती (फोटो साभार: NBT)
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
तबलीगी जमात की लापरवाही ने भारत की बड़ी आबादी को कोरोना वायरस से बचाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के स्वास्थ्यकर्मियों की कोशिशों पर काफी हद तक पानी फेर दिया है। देशव्यापी लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए कोरोना वायरस संक्रमण पर काफी हद तक लगाम लगाने की उम्मीद थी, मगर अब आलम यह है कि तबलीगी जमात से जुड़े कोरोना वायरस मामले में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है।
तब्लीगी जमात द्वारा आयोजित मजहबी धर्मसभा में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी तकरीबन 1500 लोगों ने हिस्सा लिया था। इस मजहबी सभा में भाग लेने वाले लोगों में से 10 की कोरोना वायरस की वजह से मौत भी हो चुकी है, वहीं 400 से अधिक तबलीगी जमात के सदस्यों का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है। दक्षिणी दिल्ली स्थित निजामुद्दीन मरकज भारत के विभिन्न भागों में कोरोना वायरस फैलने का एक केंद्र बन गया है। अभी तक तबलीगी जमात से जुड़े लगभग 9000 लोगों की पहचान कर क्वारंटाइन किया जा चुका है।
पूरे देश में कोरोना महामारी फैलाने का केन्द्र बने दिल्ली के निजामुद्दीन से निकले जमातियों ने हर किसी को संकट में डाल दिया है। यही कारण है कि मदरसों से लेकर मस्जिद तक स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन की टीमें दिल्ली से निकले जमातियों की खोज में लगी हुई हैं। इसी बीच उत्तराखंड पुलिस को जानकारी मिली कि हरिद्वार जिले के एक गाँव में दिल्ली से कई जमाती लौट कर आए हैं। सूचना पर पहुँची पुलिस ने इसे सही पाया। इसके बाद गाँव को तत्काल सील करके पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया गया।

हरिद्वार जिले के गैंडीखाता गुज्जर बस्ती में सूचना पर पहुँची पुलिस ने गाँव में बड़ी संख्या में जमातियों को देखा। इसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे गाँव को ही सील कर दिया। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी लोगों के सैंपल लेकर जाँच के लिए भेज दिए हैं। इतना ही नहीं, गाँव से कोई बाहर न जा सके और गाँव में कोई अंदर न प्रवेश करे, इसके लिए गाँव के बाहर कैंप लगाकर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है।
श्यामपुर थाने के थानाध्यक्ष दीपक सिंह कठैत ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस प्रशासन की टीम को जानकारी मिली थी कि गैंडीखाता गुज्जर बस्ती में दिल्ली, देवबंद और अन्य स्थानों से लौटकर सैकड़ों जमाती आए हैं। इस जानकारी के बाद तत्काल पुलिस स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ गाँव में पहुँची तो यह जानकारी सही पाई गई। थानाध्यक्ष दीपक सिंह ने बताया कि पूरे गाँव में 98 जमाती पाए गए। इसके बाद गाँव के सभी लोगों को घर में ही क्वारंटीन कर दिया गया। साथ ही पूरे गाँव को एहतियात के तौर पर सील कर दिया गया।
वहीं दिल्ली निजामुद्दीन की घटना के बाद से ही लगातार उत्तराखंड पुलिस को अलग-अलग स्थानों पर तबलीगी जमात के लोगों के होने की सूचनाएँ मिल रही हैं। इन्हें गँभीरता से लेते हुए पुलिस ने मुस्लिम आबादी वाले थानों में सेक्टर मैजिस्ट्रेट और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को तैनात किया है ताकि सूचना मिलते ही ऐसे लोगों की जाँच करके तत्काल क्‍वारंटाइन किया जा सके।
अवलोकन करें:-
About this website

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
कोरोना वायरस के भारत में लगातार मरीजों की संख्‍या बढ़ कर 2283 पर पहुंच चुकी है और इस महामारी से देश में 56 लोगों की मौत ह....
इससे पहले भी पुलिस ने बहादराबाद के बौंगला गाँव स्थित आर्य इंटर कॉलेज में करीब 40 लोगों को क्वारंटाइन किया हुआ है। वहीं ज्वालापुर के मोहल्ला तेलियान कैथवाड़ा से एक जमात मरकज से होकर अंबाला गई थी। इसके बाद जमात वापस ज्वालापुर लौटकर आई। जानकारी मिलने पर पुलिस ने जमात के लोगों के साथ दो ड्राइवरों को भी क्वारंटाइन किया गया था। निजामुद्दीन मरकज से लौटे जमातियों को घर में ठहराने और इसकी जानकारी छिपाने के मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

अयोध्या पर फैसले के बाद उत्तराखंड के CM को धमकी भरा कॉल, कहा- उड़ा दूॅंगा ‘हर की पौड़ी घाट’

उत्तराखंड, हर की पौड़ीहरिद्वार में ‘हर की पौड़ी घाट’ को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले एक शख़्स को उत्तराखंड पुलिस ने सोमवार (11 नवंबर) को गिरफ़्तार कर लिया है। आरोपित को उसी जगह से गिरफ़्तार किया गया था, जहाँ से उसने धमकी दी थी। फ़िलहाल, उससे पूछताछ की जा रही है।
9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रामजन्मभूमि का फैसला सुनाए जाने के कुछ ही घंटों बाद दोपहर लगभग 3:30 बजे, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को उनके मोबाइल फोन पर एक गुमनाम कॉल आया, जिसमें हर की पौड़ी घाट को बम से उड़ाने की धमकीa दी गई थी।
यह कॉल सीएम के प्रोटोकॉल अधिकारी आनंद सिंह रावत के पास आई थी। इस धमकी भरे कॉल के बाद, इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बस स्टॉप और रेलवे स्टेशनों के आसपास की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।
हरिद्वार में हरि कि पौड़ी नाम का एक घाट है, जिसमें रोजाना लाखों की संख्या में श्रद्धालु स्नान करने आते हैं।

इस धमकी भरी कॉल के बाद प्रशासन ने घाट में सुरक्षा-व्यवस्था बढ़ा दी है और आने-जाने वालों पर लगातार कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इस समय उत्तराखंड में राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर कई जगहों पर कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं ऐसे में धमकी भरी कॉल से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

लश्कर ने दी रुड़की, हरिद्वार समेत 10 रेलवे स्टेशनों को उड़ाने की धमकी

चीन को चेतावनी पर बोला पाकिस्‍तान, 'मसूद अजहर पर किसी के दबाव में नहीं आएंगे'
मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के मामले पर पाकिस्तान किसी के भी ‘दबाव’ में नहीं आएगा। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने अप्रैल 18 को यह बात कही।
फैसल का यह बयान चीन के उन रपटों को खारिज करने के बाद आया है जिसमें यह कहा गया था कि अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने चीन को अल्टीमेटम दिया है कि वह संयुक्त राष्ट्र द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के मसले पर अपने ‘तकनीकी रोक’ को हटा ले।
भारत में मोदी विरोधी पाकिस्तान के विरुद्ध उठाए जा रहे कदमों का विरोध कर रहे हैं, जबकि विश्व मोदी की विदेश कूटनीति का कायल है।  
'मसूद अजहर पर किसी के दबाव में नहीं आएंगे' : चीन को चेतावनी पर बोला पाकिस्‍तान 
फैसल ने कहा कि अजहर पर पाकिस्तान का रुख स्पष्ट है। भारत का आरोप है कि 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित अजहर के जैश-ए-मोहम्मद का हाथ है। इस हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 40 जवान शहीद हो गए थे। 
अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने पर चीन द्वारा तकनीकी रोक लगाए जाने के मसले पर फैसल ने कहा, ‘‘इस मामले में पाकिस्तान जो भी निर्णय करेगा वह उसके राष्ट्रहित में होगा। पाकिस्तान इसमें किसी के दबाव में नहीं आएगा।’’ चीन ने अप्रैल 17 को उन खबरों को खारिज कर दिया कि अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने इस मामले पर उसे अल्टीमेटम दिया है। 
लश्कर ने दी रुड़की, हरिद्वार समेत 10 रेलवे स्टेशनों को उड़ाने की धमकी, अलर्ट जारी
लश्कर ने दी रुड़की, हरिद्वार समेत 10 रेलवे स्टेशनों को उड़ाने की धमकी
रुड़की समेत दो दर्जन से अधिक रेलवे स्टेशनों को उड़ाने की धमकी मिली है।लश्कर एरिया कमांडर के नाम से रुड़की स्टेशन अधीक्षक को अप्रैल 18 देर रात एक धमकी भरा पत्र मिला है। इस पत्र में उत्तराखण्ड की रुड़की, हरिद्वार समेत 10 रेलवे स्टेशनों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। 
तारीख को भी किया तय
रुड़की स्टेशन अधीक्षक को जो चिट्ठी मिली है, उसमें 10 रेलवे स्टेशनों को 6 मई की तारीख को बम से उड़ाएंगे
। धमकी भरा पत्र मिलते ही स्टेशन अधीक्षक ने इस मामले की जानकारी उत्तराखण्ज पुलिस को दी है। फिलहाल पुलिस सभी दस्तावेजों को इकट्ठा करके मामले की छानबीन शुरू कर दी है। 

प्रोफेसर जीडी अग्रवाल की मौत के पीछे ‘कांग्रेसी बाबा’ की साज़िश?

गंगा के लिए 112 दिन से उपवास कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद यानी प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के निधन के मामले में कुछ चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। ऋषिकेश के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उनका इलाज करने वाले डॉक्टरों ने कहा है कि प्रोफेसर अग्रवाल अनशन तोड़ने के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन कोई था जो उन्हें अनशन जारी रखने के लिए उकसा रहा था। एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रविकांत ने मीडिया से बातचीत में इसकी पुष्टि की है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह दबाव किसका था। एम्स का ये दावा इस मौत को लेकर छिड़े विवाद को नया रंग दे चुका है। 
मातृ सदन संस्था की भूमिका भी सवालों के दायरे में
सूत्रों के मुताबिक एम्स के अधिकारी जिसकी तरफ इशारा कर रहे हैं वो दरअसल उन्हीं के करीबी कुछ बड़े साधु-संत हैं। इसके अलावा मातृ सदन संस्था की भूमिका भी सवालों के दायरे में है। प्रोफेसर जीडी अग्रवाल को स्वामी सानंद के रूप में 2011 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दीक्षा दी थी। यह इत्तेफाक है कि स्वरूपानंद और अविमुक्तेश्वरानंद, दोनों ही कांग्रेस के बेहद करीबी माने जाते हैं।
एम्स, ऋषिकेश के निदेशक डॉ. रविकांत ने बताया है कि स्वामी सानंद अपना अनशन खत्म करना चाहते थे। लेकिन कोई उन्हें ऐसा न करने के लिए हिदायत दे रहा था और इसी बारे में उन्हें एसएमएस और फोन किए जा रहे थे। स्वामी सानंद के साथ रहकर इलाज कर रही डॉक्टरों की टीम भी यही बात कह रही है। लेकिन कोई उन्हें फोन और एसएमएस करके अभी और इंतजार करने को कह रहा था। ऐसा कौन कर रहा था, इस सवाल पर डॉ. रविकांत ने चुप्पी साध ली। उन्होंने कहा कि “यह पता करना पुलिस और सरकार का काम है। एक डॉक्टर के तौर पर हमने जो कुछ महसूस किया वो मीडिया के आगे बता दिया।” शुरू से ही माना जा रहा था कि एम्स निदेशक का इशारा मातृ सदन की तरफ है। यह अजीबोगरीब बात है कि एम्स के इस दावे के फौरन बाद हरिद्वार के मातृ सदन ने मौत के लिए उलटा एम्स प्रशासन पर हत्या के आरोप लगाने शुरू कर दिए थे। मातृ सदन में ही रहकर प्रोफेसर जीडी अग्रवाल धरना दे रहे थे और उन्हें कुछ दिन पहले ही एम्स में शिफ्ट किया गया था। स्वामीजी ने दोबारा अस्पताल में भर्ती किए जाने का काफी विरोध किया था। उन्हें अस्पताल तक ले जाने वाले पुलिस वालों को उनकी नाराजगी का भी सामना करना पड़ा था।
कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी, हरिद्वार के डीएम दीपक रावत, एसडीएम मनीष कुमार, कनखल थाने के सीओ और एसएचओ तक पर हत्या की साजिश....?
उधर, मातृ सदन के प्रमुख स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा है कि वो एम्स के निदेशक के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करेंगे। हालांकि एम्स के निदेशक ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसी का नाम नहीं लिया था। फिर भी मातृ सदन ने इसे खुद पर आरोप मान लिया। मातृ सदन के पीछे कोई राजनीतिक ताकत है ये इसी बात से पता चलता है कि उन्होंने कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी, हरिद्वार के डीएम दीपक रावत, एसडीएम मनीष कुमार, कनखल थाने के सीओ और एसएचओ तक पर हत्या की साजिश का आरोप जड़ दिया। स्वामी सानंद 22 जून से मातृ सदन में गंगा विधेयक बनाने, गंगा भक्त परिषद के गठन, गंगा और सहायक नदियों पर बन रही पनबिजली परियोजनाओं को रद्द करने की मांग को लेकर अनशन पर थे। इस दौरान वो सिर्फ नींबू पानी, शहद, जल और नमक ले रहे थे। 12 जुलाई को तबीयत बिगड़ने पर प्रशासन ने उन्हें जबरन दून अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां से उन्हें एम्स, ऋषिकेश भेज दिया गया। 23 जुलाई को सानंद को एम्स से छुट्टी दे दी गई थी। स्वामी सानंद इसके बाद से मातृ सदन में ही अनशन पर थे। 9 अक्तूबर से उन्होंने जल भी त्याग दिया, जिसके बाद हरिद्वार प्रशासन उन्हें फिर से ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया। जहां एक दिन बाद ही हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।