क्यों रह गयी माँ नर्मदा कुंवारी?
उत्तर प्रदेश :कोरोना की तीसरी लहर आने से पूर्व योगी एक्शन में ;गाँवों की पंचायतों में ही वैक्सीन और टेस्टिंग के लिए 8000 रैपिड रिस्पॉन्स टीमें गठित
भारत के सबसे बड़े प्रदेश में कोरोना को मात देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कोई कसर नहीं छोड़ रहे और उनके अथक प्रयासों की WHO ने भी प्रशंसा की है। प्रदेश में चाहे ऑक्सीजन की कमी का मुद्दा हो या वैक्सीन का केंद्र पर आश्रित रहने की बजाए उन्होंने स्वयं उसका प्रबंध करने का प्रयास किया।
कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जारी जंग के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश सरकार कोरोना की थर्ड वेव से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। ब्लैक फंगस की समस्या से निपटने की योजना के बारे में जानकारी देते हुए सीएम ने कहा कि इसके लिए प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया है और उस पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा गाँवों में जो लोग वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं करा सकते हैं, उनके लिए ग्राम पंचायतों में ही टीके की व्यवस्था की जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गाँवों में कोरोना के फैलाव को रोकने के लिए प्रदेश के 58 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में टीमें सक्रियता से कार्य कर रही है। कोरोना के थर्ड फेज में बच्चों पर इसके अधिक असर होने की बात कही जा रही है, जिसको लेकर सीएम योगी ने पहले से ही तैयार होने की बात कही है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने 5 मई से ही थर्ड वेव की तैयारी शुरू कर दी थी। 16 मई 2021 को नोएडा के दौरे पर पहुँचे मुख्यमंत्री योगी ने ये बातें कही।
I will visit rural areas. People in rural areas are aware of the situation. We have constituted around 8000 rapid response teams for #COVID19 sample testing. We have also drawn plans for the third wave of coronavirus: Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath pic.twitter.com/9o703vCtTR
— ANI UP (@ANINewsUP) May 16, 2021
मुख्यमंत्री योगी ने ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे का ऐलान करते हुए कहा कि गाँवों के लोग कोरोना के हालात से पूरी तरह से वाकिफ हैं। हमने COVID-19 सैंपल टेस्टिंग के लिए लगभग 8000 रैपिड रिस्पांस टीमों का गठन किया है। साथ ही कोरोना वायरस के तीसरे चरण से निपटने के लिए योजनाएँ भी तैयार कर ली गई हैं।
योगी ने प्रदेश में गंगा से निकली लाशों को लेकर कहा कि उन्नाव में गंगा में मिले शवों की सामान्य मौत थी, जिसे डर के कारण श्मशान घाट ले जाने के बजाय लोगों ने उसे गंगा में प्रवाहित कर दिया। सीएम ने बताया कि सभी मृतकों का सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हो सके इसके लिए हमने हर ग्राम पंचायतों में 5000 रुपए की राशि दी है।
विशेषज्ञों को किया गलत सिद्ध
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण को लेकर विशेषज्ञों के दावों को लेकर कहा कि जो विशेषज्ञ उत्तर प्रदेश में एक लाख केस आने का दावा कर रहे थे, हमने उन्हें गलत साबित कर दिया है। क्योंकि हम जमीन पर काम कर रहे थे। उन्होंने टीकाकरण के लिए वैश्विक टेंडर जारी किया है, जिसमें से 6 कंपनियों ने बिडिंग की है।
प्रोफेसर जीडी अग्रवाल की मौत के पीछे ‘कांग्रेसी बाबा’ की साज़िश?
गंगा के लिए 112 दिन से उपवास कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद यानी प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के निधन के मामले में कुछ चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। ऋषिकेश के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उनका इलाज करने वाले डॉक्टरों ने कहा है कि प्रोफेसर अग्रवाल अनशन तोड़ने के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन कोई था जो उन्हें अनशन जारी रखने के लिए उकसा रहा था। एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रविकांत ने मीडिया से बातचीत में इसकी पुष्टि की है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह दबाव किसका था। एम्स का ये दावा इस मौत को लेकर छिड़े विवाद को नया रंग दे चुका है। मातृ सदन संस्था की भूमिका भी सवालों के दायरे में
सूत्रों के मुताबिक एम्स के अधिकारी जिसकी तरफ इशारा कर रहे हैं वो दरअसल उन्हीं के करीबी कुछ बड़े साधु-संत हैं। इसके अलावा मातृ सदन संस्था की भूमिका भी सवालों के दायरे में है। प्रोफेसर जीडी अग्रवाल को स्वामी सानंद के रूप में 2011 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दीक्षा दी थी। यह इत्तेफाक है कि स्वरूपानंद और अविमुक्तेश्वरानंद, दोनों ही कांग्रेस के बेहद करीबी माने जाते हैं।
एम्स, ऋषिकेश के निदेशक डॉ. रविकांत ने बताया है कि स्वामी सानंद अपना अनशन खत्म करना चाहते थे। लेकिन कोई उन्हें ऐसा न करने के लिए हिदायत दे रहा था और इसी बारे में उन्हें एसएमएस और फोन किए जा रहे थे। स्वामी सानंद के साथ रहकर इलाज कर रही डॉक्टरों की टीम भी यही बात कह रही है। लेकिन कोई उन्हें फोन और एसएमएस करके अभी और इंतजार करने को कह रहा था। ऐसा कौन कर रहा था, इस सवाल पर डॉ. रविकांत ने चुप्पी साध ली। उन्होंने कहा कि “यह पता करना पुलिस और सरकार का काम है। एक डॉक्टर के तौर पर हमने जो कुछ महसूस किया वो मीडिया के आगे बता दिया।” शुरू से ही माना जा रहा था कि एम्स निदेशक का इशारा मातृ सदन की तरफ है। यह अजीबोगरीब बात है कि एम्स के इस दावे के फौरन बाद हरिद्वार के मातृ सदन ने मौत के लिए उलटा एम्स प्रशासन पर हत्या के आरोप लगाने शुरू कर दिए थे। मातृ सदन में ही रहकर प्रोफेसर जीडी अग्रवाल धरना दे रहे थे और उन्हें कुछ दिन पहले ही एम्स में शिफ्ट किया गया था। स्वामीजी ने दोबारा अस्पताल में भर्ती किए जाने का काफी विरोध किया था। उन्हें अस्पताल तक ले जाने वाले पुलिस वालों को उनकी नाराजगी का भी सामना करना पड़ा था।
कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी, हरिद्वार के डीएम दीपक रावत, एसडीएम मनीष कुमार, कनखल थाने के सीओ और एसएचओ तक पर हत्या की साजिश....?
उधर, मातृ सदन के प्रमुख स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा है कि वो एम्स के निदेशक के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करेंगे। हालांकि एम्स के निदेशक ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसी का नाम नहीं लिया था। फिर भी मातृ सदन ने इसे खुद पर आरोप मान लिया। मातृ सदन के पीछे कोई राजनीतिक ताकत है ये इसी बात से पता चलता है कि उन्होंने कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी, हरिद्वार के डीएम दीपक रावत, एसडीएम मनीष कुमार, कनखल थाने के सीओ और एसएचओ तक पर हत्या की साजिश का आरोप जड़ दिया। स्वामी सानंद 22 जून से मातृ सदन में गंगा विधेयक बनाने, गंगा भक्त परिषद के गठन, गंगा और सहायक नदियों पर बन रही पनबिजली परियोजनाओं को रद्द करने की मांग को लेकर अनशन पर थे। इस दौरान वो सिर्फ नींबू पानी, शहद, जल और नमक ले रहे थे। 12 जुलाई को तबीयत बिगड़ने पर प्रशासन ने उन्हें जबरन दून अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां से उन्हें एम्स, ऋषिकेश भेज दिया गया। 23 जुलाई को सानंद को एम्स से छुट्टी दे दी गई थी। स्वामी सानंद इसके बाद से मातृ सदन में ही अनशन पर थे। 9 अक्तूबर से उन्होंने जल भी त्याग दिया, जिसके बाद हरिद्वार प्रशासन उन्हें फिर से ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया। जहां एक दिन बाद ही हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।



