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LoP राहुल गाँधी का संसद में ‘चीनी प्रोपेगेंडा’ फैलाने का propaganda फेल, पूर्व सेना प्रमुख के नाम पर फैलाया ‘झूठ’: चीन की बीन पर नाचती रही है कांग्रेस

                                           राहुल गाँधी और राजनाथ सिंह (साभार-x@ani)
कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने एक बार फिर देश को गुमराह करने की कोशिश की है। सदन में चीन का प्रोपेगेंडा परोसते हुए उन्होंने कहा कि चीनी सेना भारतीय सीमा में घुस रही है। चीनी टैंक भारतीय क्षेत्र में घुस आते हैं। इस दौरान उन्होंने पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज नरवणे के अप्रकाशित किताब का हवाला दिया।

इस पर रक्षा मंत्री ने राहुल गाँधी को चुनौती दी और कहा कि इस निराधार आरोप का कोई सबूत नहीं है और खुद पूर्व आर्मी चीफ नरवणे ने अपनी किताब में लिखा है कि चीनी टैंक भारतीय पोजिशन से कुछ सौ मीटर की दूरी पर थे। भारत ने एक इंच जमीन भी नहीं दी। रक्षा मंत्री के अलावा गृहमंत्री अमित शाह समेत पूरे सत्ता पक्ष ने मिलकर कड़ी आपत्ति जताई और सदन के माध्यम से देश में गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया।

राहुल गाँधी को स्पीकर ओम बिरला ने गैर सूचीबद्ध मुद्दे को उठाने पर सख्त चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी सदन के नियमों के तहत बोलने की इजाजत दी थी, लेकिन उन्होंने तथ्यों और संसदीय नियमों का उल्लंघन किया।

चीन को लेकर राहुल गाँधी ने सदन को किया गुमराह

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने एलएसी पर चीनी अतिक्रमण की बात कही और केन्द्र से सवाल पूछे। उनका कहना है कि एलएसी की स्थिति काफी गंभीर है और चीनी सेना घुस गई है। इन आरोपों का आधार पूर्व आर्मी चीफ नरवणे का अप्रकाशित किताब बताया गया।

इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गाँधी के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि माननीय सांसद ये साफ करें कि किस आधार पर ये आरोप लगा रहे हैं। इसका कोई ठोस आधार होना चाहिए। इस दौरान स्पीकर ने भी कहा कि सार्वजनिक डोमन में जो उपलब्ध न हो या जिसका प्रमाण न हो, उसके संदर्भ का जिक्र नहीं किया जा सकता। पूर्व आर्मी चीफ नरवणे के अप्रकाशित किताब को लेकर वामपंथी प्रोपेगेंडा फैलाने वाले कारवां ने भी झूठी खबर फैलाई है।

राहुल गाँधी का ‘चीन प्रेम’ और विवादित बयान

ये पहली बार नहीं है जब डोकलाम और चीन को लेकर राहुल गाँधी ने देश को नीचा दिखाने की कोशिश की हो। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गाँधी ने दावा किया था कि चीन ने 2,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। साथ ही कहा था कि चीनी सैनिक ‘अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सैनिकों की पिटाई’ कर रहे हैं। उस वक्त भी उनके पास कोई सबूत नहीं था और आज भी कोई प्रमाण नहीं है।

राहुल गाँधी पहले भी चीन की खुलकर तारीफ कर चुके हैं। मार्च 2023 में कैम्ब्रिज बिजनेस स्कूल में अपने विवादित भाषण में राहुल गाँधी ने चीन को ‘महाशक्ति बनने की आकांक्षा रखने वाला’ और ‘प्राकृतिक शक्ति’ बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि चीन में ‘सामाजिक समरसता’ है।

राहुल गाँधी ने चीन की विवादित और आक्रामक बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का भी समर्थन किया था। 2022 में ‘The Print’ की कॉलमनिस्ट श्रुति कपिला से बातचीत में उन्होंने कहा था कि चीन अपने आसपास के देशों की तरक्की चाहता है।

हालाँकि, 2023 में लद्दाख दौरे के दौरान राहुल गाँधी ने यह भी कहा था कि “चीन ने लद्दाख में भारत की चारागाह भूमि पर कब्जा कर लिया है।” लेकिन 2022 में ब्रिटेन में उन्होंने बयान दिया था कि “लद्दाख, चीन के लिए वही है, जो रूस के लिए यूक्रेन है।”

राहुल गाँधी ने 2020 में विदेशी ताकतों से भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की अपील भी की थी।

इतना ही नहीं, राजीव गाँधी फाउंडेशन (RGF) और चीन के बीच वित्तीय लेन-देन की जानकारी 2020 में सामने आई थी। 2006 के बाद चीनी सरकार ने RGF को 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की फंडिंग दी थी।

नरवणे ने अपने इंटरव्यू में बताया गलवान में क्या हुआ

राहुल गाँधी जिस पूर्व आर्मी चीफ नरवणे के अप्रकाशित किताब का जिक्र कर रहे हैं, उन्होंने अपने इंटरव्यू में ऐसी कोई बात नहीं कही हैं। उन्होंने साफ कहा है कि भारत ने एक इंच जमीन भी नहीं खोई थी।

भारत-चीन बॉर्डर पर दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच ऐसे इलाके हैं, जिस पर दोनों देश अपना दावा करते हैं। ऐसी जगहों पर कोई चिन्ह, पिलर नहीं है। भौगोलिक दृष्टि से ये इलाका काफी अलग है इसलिए नरवणे ने इंटरव्यू में कहा कि गलवान में पहली बार चीन को ऐसा लगा कि सीमा पर सड़क बनाने का विरोध हो सकता है। 3000 किमी तक सीमा तय नहीं होने का फायदा चीन ने उठाने की कोशिश की, लेकिन भारत ने एक इंच जमीन भी नहीं दिया।

पूर्व आर्मी चीफ ने कहा कि एक दर्जन से ज्यादा इलाका है। इन इलाकों में पेट्रोलिंग के दौरान दोनों देश की सेनाओं का आमना-सामना होता है। कई एग्रीमेंट प्रोटोकॉल भी हैं। इसका पालन चीनी सेना की तरफ से उस वक्त नहीं किया गया इसलिए दिक्कत आई।

चीनी सेना आक्रामक तरीके से सारे प्रोटोकॉल तोड़ रहे थे इसलिए हमारे जवानों ने विरोध किया। भिड़ंत में पी 14 में केजुएल्टी हुई दोनों तरफ से। 20 हमारे जवान शहीद हुए हैं। धीरे-धीरे पता चला। चीन में 2-4 महीनों बाद 4 के मरने की घोषणा की।

चीन में भी केजुएल्टी हुई। अपने पड़ोसी देश को पहली बार ऐसा लगा कि मनमर्जी नहीं चलेगी। चीन अक्सर पड़ोसी देशों के साथ अपनी मर्जी चलाता है लेकिन उसे भारत के रुख से झटका लगा।

उन्होंने कहा कि गलवान में सड़क बना रहे थे और सोच रहे थे कि विरोध में कोई कार्रवाई नहीं होगा, तो हमने उसे रोका वही वजह था। कई बार कोशिश की, लेकिन उसका विरोध किया गया। उन्होंने इससे भी इनकार किया कि मीडियो को आर्मी की तरफ से इस बात को भी दबाने के लिए कहा गया था कि वे लोग 100 बार भारत में घुसे और हम 200 बार घुसे, क्योंकि इससे चीन नाराज हो सकता था।

राहुल गाँधी को सदन में बोलने का मौका राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के तहत मिला था। राष्ट्रपति ने जो बातें कही थि उन पर उन्हें अपनी बात रखनी थी, लेकिन वे उन मुद्दों की बात की, जिसका अभिभाषण में जिक्र भी नहीं किया गया था। इस दौरान उन्होंने जिस किताब को कोट किया, उसका प्रकाशन भी नहीं हुआ है। उसकी विश्वनीयता के बारे में नहीं बताया जा सकता।

अगर पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की बात सामने आती, उनका किताब छपा होता, तो उसकी विश्वसनीयता को समझा जा सकता था। इसके बावजूद वह अपनी बात कहने पर अड़े रहे और कहते रहे कि ‘सरकार उनकी बातों से डरी हुई है’। अगर चीन के जमीन कब्जे की बात है तो 1959 से 1962 के बीच जो जमीन चीन ने कब्जा ली, उस पर क्यों नहीं राहुल गाँधी कुछ कहते हैं।

सदन की मर्यादा का सबको पालन करना जरूरी है। अगर स्पीकर ने उन्हें रोका, तो क्यों चीन और डोकलाम पर चर्चा पर अड़े रहे राहुल गाँधी। आखिर नियमों का कोई मतलब है या नहीं। सदन में कॉन्ग्रेस के सीनियर नेता वेणुगोपाल जोश में दिखे और ताली बजाते नजर आए। अगर नियमों का उल्लंघन ही राहुल गाँधी की विशेषता है तो कॉन्ग्रेस का भला नहीं हो सकता।

राहुल “कालनेमि” को मोदी पर अमीर गरीब का कानून बताकर तंज कस करते हुए, दो जवान लड़कों की लाशें नोचने का मौका मिल गया; चल अब तुम भी जवाब दो; Union Carbide पर खामोश क्यों?

 सुभाष चन्द्र

मुझे समझ नहीं आता राहुल “कालनेमि” ऐसे दर्दनाक हादसों पर भी घटिया राजनीति करने के लिए बयान कौन लिख कर देता है। पुणे में एक नाबालिग के हाथों गाड़ी से कुचले गए 24 साल के IT professionals Aneesh Awadhiya and Ashwini Costa की लाशों में जैसे राहुल को मांस नोचने को मिल गया जो उसमे भी राजनीति कर गया

राहुल “कालनेमि” ने प्रधानमंत्री मोदी को बेवजह लपेट दिया जैसे मोदी ही इस हादसे के लिए जिम्मेदार हो राहुल ने अपने खपती दिमाग लगा कर कहा है कि “नरेंद्र मोदी दो भारत बना रहे हैं जहां न्याय धन पर आधारित है अगर कोई बस ड्राइवर, ट्रक ड्राइवर, ओला, उबर, ऑटो ड्राइवर गलती से किसी को कुछ देता है तो उसे 10 साल के लिए जेल में डाल दिया जाता है और चाबी फ़ेंक दी जाती है लेकिन अगर एक आदमी का बेटा नशे की हालत में पोर्शे चलाता है और कुछ लोगों को मार डालता है, उससे एक निबंध लिखने को कहा जाता है ये आम ड्राइवरों से क्यों नहीं कहते” 

राहुल गांधी को क्या याद है निर्भया के साथ क्या हुआ था और उसके अपराधियों को सजा दिलाने के लिए फर्जी गांधी परिवार भी सड़कों पर आया था लेकिन उन्हें फांसी निर्भया के साथ बर्बरता और हत्या के 8 साल बाद फांसी हुई थी

लेखक 
चर्चित youtuber 
राहुल गांधी को याद है ऐसे सड़क पर सोते हुए एक इंसान को सलमान खान ने भी गाड़ी से कुचल दिया था जिसे थाने में जमानत दे दी गई थी कई साल सुनवाई के बाद  Additional Sessions Judge D W Deshpande ने 6 मई 2015 सलमान को 5 साल की कैद सजा दी थी लेकिन पैसे की ताकत याद है न, उसी दिन सलमान ने अपील की और हाई कोर्ट के जज साहब ने उसी दिन उसे बेल दे दी हाई कोर्ट के जज A R Joshi ने केस ऐसा गोली की तरह चलाया कि 6 महीने में फैसला 10 दिसंबर, 2015 को सुनाते हुए सलमान को बरी कर दिया, इससे बड़ा “अमीरों” का कानून और क्या होगा

सलमान के लिए “अमीरों” के कानून का एक और सबूत है कि राज्य की हाई कोर्ट के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में 2016 से लंबित है चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस खानविलकर और चंद्रचूड़ ने 14 नवंबर 2017 को कहा कि 3 महीने बाद इस पर सुनवाई करेंगे लेकिन वह सुनवाई का दिन आया ही नहीं - ये है पैसे वालों का कानून

राहुल गांधी को याद होगा अमीरों का कानून Union Carbide के मालिक Warren M Anderson तुम्हारे मंत्री अर्जुन सिंह के विशेष विमान में बिठा कर भगा दिया गया था और बदले में Adil Shahryar को अमेरिका में 35 साल की जेल की सजा भुगतने वाले को लाया गया था और ये तो राहुल को पता ही होगा कि Adil Shahryar उसके पापा का खास मित्र था और मोहम्मद यूनुस का बेटा था

राहुल गांधी को यह भी याद होगा कि बिना किसी कानून के भारत का एक प्रमुख पार्टी के नेता अमेरिका में Drugs और 2 लाख dollors के साथ पकड़ा गया था और भाजपा के एक बड़े नेता ने उस पर रहम करने उसे वापस छुड़वा कर बुला लिया गया था

इसलिए कांग्रेस के शहजादे को जरा सोच समझ बोलना चाहिए

फ्रांस में भारत के खिलाफ ज़हर उगलने वाले प्रोफेसर क्रिस्टोफ जैफरलॉट से मिले राहुल गाँधी, हिन्दू संगठनों को बताता है ‘हिंसक’

राहुल गाँधी के साथ क्रिस्टोफ जैफरलॉट (फोटो साभार: X/ @INCIndia)
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी यूरोप दौरे पर हैं। इस बीच उन्होंने 8 सितंबर को पेरिस की एक यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित किया। इस दौरान लेखक और कॉलमिस्ट क्रिस्टोफ जैफरलॉट उनके साथ मंच पर नजर आया। क्रिस्टोफ जैफरलॉट भारत और हिंदुओं के खिलाफ नफरत उगलने के लिए कुख्यात रहा है। राहुल के इस कार्यक्रम की फोटो कांग्रेस के ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट्स से शेयर की गई थीं।
अब प्रश्न यह है संविधान की शपथ लेने वाले राहुल भारत विरोधियों से क्यों मिल रहे हैं? क्या संविधान देश विरोधियों से साठगांठ की इजाजत देता है? दूसरे, यह कि चीन से किए गुप्त समझौते का कब संज्ञान लिया जाएगा? यदि इसी तरह कोई गुप्त समझौता बीजेपी ने किया होता, सड़क से लेकर संसद तक हंगामा किया जा होता, संसद की कार्यवाही बाधित की जा रही होती। क्या देश को उस गुप्त समझौते की जानकारी नहीं लेनी चाहिए? आखिर केंद्र सरकार उस गुप्त समझौते पर क्यों चुप है? क्या देश विरोधियों से मिलने वाला कोई भी नेता और उसकी पार्टी वोट की हक़दार है? 

भारत विरोधी बयानों को लेकर अक्सर विवादों में रहने वाले राहुल गाँधी के साथ मंच पर नजर आया क्रिस्टोफ जैफरलॉट का भारत के खिलाफ लिखने का लंबा इतिहास रहा है। वह आमतौर पर केंद्र की भाजपा सरकार और उसके नेतृत्वकर्ता प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करता रहा है।

हिंदू संगठनों का विरोध

क्रिस्टोफ जैफरलॉट ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को भारत की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ करार दिया था। उसने CAA की तुलना इजरायल और वहाँ के यहूदियों से तुलना करते हुए कहा था, “इस तरह का दृष्टिकोण जातीय और धार्मिक आधार पर किसी भी देश की दृष्टि को दर्शाता है। जहाँ बहुसंख्यक आबादी के अलावा बाकी सभी दोयम दर्जे की जिंदगी जीने को मजबूर होते हैं। यह इजरायल की तरह है, जहाँ यहूदी बहुतायत में हैं।”
दिलचस्प बात यह है कि अल्पसंख्यकों को (मुस्लिमों को छोड़ कर) नागरिकता देने के भारतीय कानून में जैफरलॉट को समस्या तो नजर आती है। लेकिन, भारत के 3 पड़ोसी इस्लामी मुल्कों में अल्पसंख्यकों खासतौर से हिंदुओं की दयनीय स्थिति दिखाई नहीं देती।
क्रिस्टोफ जैफरलॉट हिंदुओं में आत्मसम्मान की कमी होने और भाजपा नेताओं पर मुस्लिम जनसंख्या विस्फोट का ‘झूठ’ फैलाने का भी आरोप लगाता रहा है। उसे यह नहीं दिखता कि भारत में मुस्लिम आबादी 20 करोड़ की दहलीज पर खड़ी है। वहीं पड़ोसी मुल्कों में हिंदू शून्य की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं। यही नहीं, वह भारत विभाजन के लिए अंग्रेजों को तो जिम्मेदार ठहराता है। लेकिन, इस्लामिक चरमपंथियों और मुस्लिम लीग जैसे कट्टरपंथी संगठनों के नापाक इरादों का जिक्र करना भूल जाता है।
राहुल गाँधी ने व्यक्ति के साथ मंच साझा किया वह भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कोशिश करते और निर्दोष लोगों की हत्या करने वाले आतंकियों को दोषी नहीं ठहराता। बल्कि वह यह कहता है कि भारत में 1993 से लेकर 2008 तक जो आतंकी हमले हुए उसका फायदा भाजपा को मिला। वह कहता है कि भाजपा ने भय की राजनीति कर चुनाव जीता है। क्रिस्टोफ जैफरलॉट को दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खुद को ‘संघ परिवार’ कहने से भी समस्या है।
जैफरलॉट ने राष्ट्रवादी संगठन ‘बजरंग दल’ पर हिंसा करने, चर्च और मुस्लिमों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया। वह हिंदुओं द्वारा किए गए किसी पलटवार का हर बार जिक्र करता है। लेकिन, इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा आए दिन हिंदुओं के साथ हो रही हिंसा और मिशनरी चर्च के माध्यम से हिंदुओं के खिलाफ रची जा रही साजिशों पर चुप्पी साध लेता है।

मोदी पर हमला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साल 2014 और 2019 में केंद्र में भाजपा सरकार सत्ता में है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि पीएम मोदी के केंद्र की सत्ता में आने से पहले और बाद में विरोधियों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। इनमें से एक नाम क्रिस्टोफ जैफरलॉट का भी है। भाजपा की लगातार जीत पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए उसने ‘मोदीज इंडिया: हिंदू नेशनलिज्म एंड द राइज ऑफ एथनिक डेमोक्रेसी’ नामक अपनी पुस्तक में लिखा है, “पिछले दो दशकों में नरेंद्र मोदी की वजह से हिंदू राष्ट्रवाद को एक तरह के राष्ट्रीय लोकप्रियता के साथ जोड़ा गया है। इससे चुनावों में पहले गुजरात में और फिर भारत में बड़े पैमाने पर सफलता मिली है।”
उसने अपनी इस किताब में भारतीय जनता पार्टी पर विकास का वादा करने के साथ ही जातीय-धार्मिक आधार पर मतदाताओं का ध्रुवीकरण कर देश की जनता को बहकाने का आरोप लगाया। हालाँकि, जैफरलॉट ने अपनी किताब में पीएम मोदी की लोक-कल्याणकारी, विकासवादी और महत्वाकांक्षी योजनाओं डिजिटल इंडिया, जन धन योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना का जिक्र नहीं किया। क्योंकि सच्चाई यह है कि देश की जनता अब किसी बहकावे की जगह विकास के नाम पर वोट देती है।
क्रिस्टोफ जैफरलॉट ने दावा किया है कि उसने पीएम मोदी को लेकर भारतीयों का इंटरव्यू किया है। इस इंटरव्यू के आधार पर उसने लिखा है, “मोदी सरकार ने भारत को लोकतंत्र के एक नए रूप में बदल दिया है। यह एक तरह का जातीय लोकतंत्र है, जिसमें बहुसंख्यक समुदाय के साथ देश में समानता का व्यवहार होता है। लेकिन मुस्लिम और ईसाइयों को दोयम दर्ज के नागरिकों की तरह ट्रीट किया जाता है।” जैफरलॉट ने दावे तो बड़े-बड़े किए हैं। लेकिन, भारत के अन्य विरोधियों की तरह उसके पास भी इस दावे की पुष्टि के लिए कोई सबूत नहीं है। इसके अलावा, अनुच्छेद-370 को लेकर सुनवाई में देरी के लिए उसने भारत की न्यायपालिका पर लांछन लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट पर भी हमला बोला।

डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व इंवेट

साल 2021 में आयोजित ‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व इंवेट’ में क्रिस्टोफ जैफरलॉट को बतौर वक्ता आमंत्रित किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदुत्व के खिलाफ लड़ना और हिंदू धर्म को टारगेट करना था। जैफरलॉट ने इस कार्यक्रम में बोलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदुत्व हमला किया था।

मुंबई : ‘बिन बुलाए मेहमान’ बने कपिल सिब्बल, I.N.D.I.A. के मंच पर हो गया क्लेश


मुंबई में विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A. के मंच पर उस समय स्थिति असहज हो गई, जब मंच पर कपिल सिब्बल पहुँच गए। एक तो सिब्बल पूर्व कॉन्ग्रेसी हैं, जो अब समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद हैं। दूसरी तरफ, वो ‘बिन बुलाए मेहमान’ के तौर पर पहुँचे और वो भी सीधे मंच पर। उनकी मौजूदगी से कॉन्ग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने नाराजगी जताई, जिसे संभालने के लिए कई नेताओं को बातचीत करनी पड़ी।

केसी वेणुगोपाल ने सिब्बल की मौजूदगी पर जताई नाराजगी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कपिल सिब्बल के मंच पर पहुँचने से केसी वेणुगोपाल ने उद्धव ठाकरे से शिकायत की। चूँकि उद्धव ठाकरे ही मुंबई में मुख्य मेजबान की हैसियत में हैं, ऐसे में उन्होंने चीजों को गंभीरता से नहीं लेने की सलाह दी। इस बीच, अखिलेश यादव और फारुख अब्दुल्ला ने भी मामले को संभालने की कोशिश की, लेकिन मामला संभला नहीं।
इसके बाद ये मामला राहुल गाँधी के पास ले जाया गया, तो राहुल गाँधी ने हरी झंडी दे दी। राहुल गाँधी ने कहा कि उन्हें कपिल सिब्बल की मौजूदगी से कोई आपत्ति नहीं है। मंच पर फोटो खिंचाने के कार्यक्रम में सिब्बल सबसे किनारे खड़े नजर आए। वहीं, उद्धव ठाकरे के दोनों ओर सोनिया गाँधी और मल्लिकार्जुन खड़गे खड़े दिखे।

कई अहम मामलों में राहुल-सोनिया-कॉन्ग्रेस के वकील

राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी के खिलाफ चल रहे कई मामलों की पैरवी कपिल सिब्बल ही कर रहे हैं। वो कई मामलों में कॉग्रेस पार्टी के वकील हैं। चूँकि, वो कॉन्ग्रेस में लंबे समय तक रहे हैं और यूपीए की सरकारों में कई अहम मंत्रालय संभाल चुके हैं।
वैसे, पिछले साल कपिल सिब्बल को कॉन्ग्रेस की तरफ से राज्यसभा की सीट नहीं मिली तो वो समाजवादी पार्टी में चले गए। समाजवादी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा। उन्होंने अपने नॉमिनेशन के समय कहा था कि वो कॉन्ग्रेस के नेता ‘थे’ अब वो समाजवादी पार्टी के नेता ‘हैं’।

I.N.D.I.A. का नारा ‘जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया’ – 13 लोगों की समन्वय समिति में मुस्लिम एरिया में झूठा बम फोड़ने वाले नेता भी

मुंबई में I.N.D.I.A गठबंधन की बैठक दूसरे दिन भी जारी है। इस बैठक में विपक्षी दल अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की रणनीति से लेकर मंथन कर रहे हैं। वहीं आज इंडिया के नेताओं ने 13 सदस्यों की समन्वय समिति बनाने का फैसला लिया है। साथ ही गठबंधन ने अपना नारा ‘जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया’ भी जारी किया है। 

सूत्रों के अनुसार अब गठबंधन में ही प्रश्न यह हो रहा है कि भारत टूटा ही कब था जो जुड़ेगा? दूसरे यह कि भारत की दूसरी बड़ी जनसंख्या वाला समाज अल्पसंख्यक क्यों? यानि गठबंधन तो हो गया, लेकिन दिल नहीं मिल पा रहे, जो गठबंधन पर संदेह खड़ा कर रहा है। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह दावा किया जा रहा है कि विपक्षी गठबंधन इंडिया ने शुक्रवार (1 सितम्बर, 2023) को मुंबई की मीटिंग में कई बड़े फैसले लिए गए हैं। लोकसभा चुनाव को लेकर किस राज्य में किस पार्टी को कितनी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने हैं इसे लेकर भी इस बैठक में चर्चा हो रही है। मुंबई में हो रही इस बैठक में इस गठबंधन के संयोजक के नाम को लेकर भी चर्चा हुई है। इस बैठक के दौरान एक समन्वय समिति का भी गठन किया गया है। 

इस समन्वय समिति में कॉन्ग्रेस से केसी वेणुगोपाल, एनसीपी से शरद पवार, डीएमके से एमके स्टालिन, शिवसेना से संजय राउत, आरजेडी से तेजस्वी यादव, टीएमसी से अभिषेक बनर्जी, आप से राघव चड्ढा, समाजवादी पार्टी से जावेद अली खान, जेडीयू से ललन सिंह, जेएमएम से हेमंत सोरेन, सीपीआई से डी राजा, नेशनल कॉन्फ्रेंस से उमर अब्दुल्ला और पीडीपी से महबूबा मुफ्ती शामिल हैं। 

इस समन्वय समिति में हरामखोर को नॉटी समझाने वाले नेता भी शामिल हैं। राउत के अनुसार हरामखोर का मतलब उनके यहाँ नॉटी या बेईमान होता है। वहीं 1993 के बम ब्लास्ट के दौरान मुस्लिम एरिया में झूठा बम फोड़ने वाले नेता शरद पवार भी हैं। अब ऐसे में इस समिति का क्या होगा ये आने वाला समय ही बताएगा।

एक साथ लोकसभा चुनाव लड़ने का साझा संकल्प

इंडिया गठबंधन ने लोकसभा चुनाव-2024 एक साथ मिलकर लड़ने का भी संकल्प लिया। इस बात की जानकारी कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी। उन्होंने लिखा, “इंडिया गठबंधन में शामिल दलों ने एक साथ लोकसभा चुनाव लड़ने का संकल्प लिया। जहाँ तक संभव होगा वहाँ तक हम एकसाथ लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।”  
वहीं ANI की रिपोर्ट के अनुसार, INDIA गठबंधन ने इस पर एक प्रस्ताव भी पास किया।
जयराम रमेश ने कॉन्ग्रेस की तरफ से जानकारी देते हुए आगे कहा, “सीट बँटवारे पर अलग-अलग राज्यों में चर्चा तत्काल शुरू की जाएगी और जल्द से जल्द से इसे पूरा किया जाएगा। देश के अलग-अलग हिस्से में जनसभा आयोजित की जाएगी। अलग-अलग भाषाओं में “जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया” की थीम के साथ विपक्षी गठबंधन चुनाव में उतरेगा। मीडिया की साझा रणनीति भी बनाई जाएगी।

विपक्ष जारी कर सकता है लोगो 

INDIA गठबंधन द्वारा आज लोगो जारी करने की बात सामने आई है वहीं कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि लोगो अभी तैयार नहीं है तो गठबंधन विचार-विमर्श के बाद इसे जारी करेगा। 

मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए नेहरू ने किए थे ‘वन्दे मातरम’ के टुकड़े’

कोई व्यक्ति शिक्षा प्राप्त करता है, स्वयं शिक्षित होने के साथ, परिवार और समाज को शिक्षित करने के लिए, लेकिन भारत विश्व में ऐसा अनूठा देश है, जहां आज शिक्षित ही सर्वाधिक अशिक्षित बने हुए हैं। भारतवर्ष के गौरवशाली इतिहास को धूमिल करने वाले शिक्षित ही है। इन्ही शिक्षित इतिहास विरोधियों ने कुर्सी के भूखे नेताओं/पार्टियों के हाथ अपने जमीर को बेच देश को गलत इतिहास पढ़वा दिया। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 अगस्त, 2023 को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान लोकसभा में कांग्रेस और उसकी सहयोगी दलों को जमकर लताड़ लगाई। इसी दौरान उन्होंने संसद में दिए गए राहुल गाँधी के बयान ‘भारत माता की हत्या’ पर जवाब देते हुए वन्दे मातरम का इतिहास बताया। उन्होंने बताया कि कैसे 
कांग्रेस ने वन्दे मातरम के टुकड़े कर बहुत पहले ही देश के विभाजन की नींव रख दी थी। 

वन्दे मातरम पर कांग्रेस ने कैंची क्यों चलाई थी? राजनीतिक वजह से, धार्मिक वजह से या किसी व्यक्ति को खुश करने के लिए? पूरी बात समझने के लिए वन्दे मातरम के इतिहास की तरफ मुड़ते हैं। समझते हैं कि यह कब पहली बार अस्तित्व में आया… कब इस पर किसी ने आपत्ति जताई और कब कांग्रेसियों ने इसे खंडित ही कर दिया।

वन्दे मातरम का इतिहास

वन्दे मातरम की रचना सबसे पहले बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा पाँच छंदों की कविता के रूप में 7 नवंबर 1875 को की गई थी। ऐसा माना जाता है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को वन्दे मातरम का आइडिया तब आया था, जब वह डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के रूप में अंग्रेजों की सेवा में थे।
इसी वन्दे मातरम को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1882 में बंगाली उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित किया। 1896 में रवीन्द्र नाथ टैगोर ने इसे गीतबद्ध किया था। इसके बाद यह उस समय क्रांति का तराना बन गया था। हर क्रन्तिकारी, अमर बलिदानी के जुबान पर यही गीत थी। 

क्रांतिगीत वन्दे मातरम का विरोध क्यों?

दरअसल, ‘वन्दे मातरम’ का देश विरोधी ताकतों और मुस्लिम लीग द्वारा विरोध शुरू किया गया। जिन आधारों पर विरोध शुरू किया गया, उसी रास्ते पर आगे चल कर देश का बँटवारा भी हुआ। पूरी बात समझने के लिए आपको जानना होगा कि कब और क्यों इसका विरोध शुरू हुआ? फिर नेहरू और कांग्रेस द्वारा कैसे सिर्फ मुस्लिमों के तुष्टिकरण के लिए इसे खंडित कर इसके एक छोटे हिस्से को राष्ट्रगीत घोषित किया गया?
एक समय था जब पूरा देश इस गीत को गुनगुना रहा था। श्री अरबिंदों ने तो इसे राष्ट्रवाद का मंत्र बता दिया था। लाला लाजपत राय ‘वंदे मातरम’ नाम से उर्दू साप्ताहिक निकाल रहे थे। मैडम भीकाजी कामा ‘वंदे मातरम’ लिखा भारतीय झंडा विदेश में लहरा चुकी थीं। तब मुस्लिम लीग क्या कर रहा था? वो कर रहा था इसका विरोध… 1908 से ही मुस्लिम लीग ने वन्दे मातरम का विरोध करना शुरू कर दिया था।
विरोध की वजह थी – इस गीत में मातृभूमि की वंदना और देवी-देवताओं का जिक्र। मुस्लिमों ने इस पर नाराजगी दिखानी शुरू कर दी। अमृतसर में हुए अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के दूसरे अधिवेशन में 30 दिसंबर 1908 को अध्यक्षीय भाषण देते हुए सैयद अली इमाम ने वंदे मातरम का विरोध किया। इसके बाद खिलाफत आंदोलन के जरिए यह भावना प्रबल होती गई कि वंदे मातरम इस्लाम विरोधी है।

वंदे मातरम और कांग्रेस 

क्रांति का तराना वंदे मातरम अब विवादास्पद हो गया था क्योंकि मुस्लिमों का एक बड़ा वर्ग गीत में वर्णित देवी दुर्गा की स्तुति का विरोध कर रहा था। कांग्रेस भला पीछे कैसे रहती? मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए कांग्रेस ने तब जो काम किया, वो आज तक कर रही है।
वंदे मातरम को लेकर 1937 में कांग्रेस ने जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में एक समिति गठित की। इसमें मुस्लिम प्रतिनिधि के तौर पर मौलाना अबुल कलाम आजाद को शामिल किया गया। आजाद ने गीत को पढ़ा और पाया कि इसके शुरुआती दो छंद इस्लाम विरोधी नहीं हैं। उनके अनुसार, इन दो छंदों के बाद हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख है।
समिति के विचार-विमर्श के बाद एक फैसला लिया गया। नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यसमिति ने 26 अक्टूबर 1937 में एक लंबा बयान जारी कर इस गीत के टुकड़े कर दिए। फैसले के एक भाग को पढ़िए और समझिए: “इसमें मुस्लिम बंधुओं का विरोध देख अपील की गई थी कि वंदे मातरम को आनंदमठ से अलग करके पढ़ा जाए और इसके केवल दो ही छंद इस्तेमाल हों, जिनमें हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख नहीं बल्कि मातृभूमि के सौन्दर्य और गुण की चर्चा है।”

वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस ने जो फैसला लिया, उसका असर क्या हुआ? 5 छंद के गीत को काट कर सिर्फ 2 छंद कर देने से क्या मामला शांत हो गया? नहीं हुआ। बल्कि मुहम्मद अली जिन्ना जैसे कट्टरपंथी लोगों को और बल मिल गया। जिन्ना ने 1 मार्च 1938 को इस गीत के विरोध में फिर से एक मुहिम छेड़ा और द न्यू टाइम्स ऑफ लाहौर में लेख लिखा। कट्टरपंथी मुस्लिमों की भावनाओं को भड़काना, जिन्ना के कट्टरपंथी विचारों को कांग्रेस द्वारा पोषित किया जाना ही भारत के विभाजन का मुख्य कारण बना।

आजादी के बाद वंदे मातरम और कट्टरपंथी मुस्लिम

आजादी के बाद 2 छंदों वाले टुकड़े किए गए वंदे मातरम को ही 24 जनवरी 1950 को देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रगीत घोषित किया। उन्होंने इस गीत को लेकर तब कहा था: “वन्दे मातरम गीत, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, को जन-गण-मन के समान सम्मानित किया जाएगा और इसे समान दर्जा दिया जाएगा।”
सवाल यह है कि इस गीत पर कैंची चलाने के बाद भी कांग्रेसी मुस्लिमों का तुष्टिकरण कर पाए? अव्वल दर्जे से असफल हुए… क्योंकि कट्टरपंथी मुस्लिमों को तो छोड़िए, मुस्लिम विधायक-सासंद भी वंदे मातरम नहीं गाते/बोलते हैं।

हिन्दू विरोधी I.N.D.I.A गठबंधन, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल तमिलनाडु की एमएमके पार्टी के अध्यक्ष ने माता सीता का किया अपमान


विपक्षी दलों का I.N.D.I.A गठबंधन हिन्दू विरोधियों का जमावड़ा है। इस गठबंधन का नेतृत्वकर्ता कांग्रेस है, जिसका इतिहास ही हिन्दू विरोध रहा है। इस गठबंधन में वहीं पार्टियां शामिल हैं, जो हिन्दू धर्म और उसके देवी-देवताओं से नफरत करती हैं। I.N.D.I.A गठबंधन में शामिल और तमिलनाडु सरकार के सहयोगी दल मनिथानेया मक्कल काची(MMK) के अध्यक्ष जवाहिरुल्ला ने सड़कों पर ऐसे पोस्टर लगवाए, जो हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने वाला था। यह अब सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस पोस्टर में माता सीता को अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है, जिससे करोड़ों हिन्दुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। हालांकि इसके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है, लेकिन स्टालिन की सरकार ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है। 

रविवार (30 जुलाई, 2023) को तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले में मणिपुर की घटना को लेकर एमएमके ने प्रदर्शन किया। इस दौरान सड़कों पर एक आपत्तिजनक पोस्टर लगाया गया। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे इस पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भगवान राम और गृह मंत्री अमित शाह को लक्ष्मण दिखाया गया है। वहीं इन दोनों के बीच में माता सीता को निर्वस्त्र दिखाया गया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय चिन्ह तिरंगे का भी अपमान किया गया है। इस पोस्टर को लेकर हिन्दुओं में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि तमिलनाडु की डीएमके और कांग्रेस गठबंधन की सरकार में हिंदू देवी देवताओं का अपमान करना,उनका अश्लील चित्रण करना क्या कानूनी रूप से वैध है?

हालांकि बाद में विवाद बढ़ते देख एमएमके अध्यक्ष ने इस विवादित पोस्टर को हटा दिया और लोगों की भावनाएं आहत होने के लिए मांफी मांग ली, लेकिन एमएमके पार्टी के इस पोस्टर को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस निशाने पर आ गए। बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने दावा किया कि एमएमके प्रमुख को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान उनके साथ चलते हुए देखा गया था। गौरव भाटिया ने ट्वीट किया, “बहुत गहरा दुख पहुंचा है। हम उन्हें इतनी सख्ती से वापस देंगे। कानूनी युद्ध शुरू किया जाएगा। क्या यह धर्मनिरपेक्षता है? सिर्फ इसलिए कि हम सहिष्णु हैं, इससे भारत को हमारी धार्मिक भावनाओं को बेरहमी से कुचलने का अधिकार नहीं मिल जाता।” 

क्या अब राहुल गांधी और विपक्षी नेता कहेंगे INDIA में लोकतंत्र नहीं है ? INDIA ने किया UPA मुक्त भारत

कर्नाटक के बेंगलुरु में 26 विपक्षी दलों की दो दिवसीय बैठक हुई। बीती रात की बैठक में सभी दलों से कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन का नया नाम सुझाने के लिए कहा गया था और आज (18 जुलाई) की बैठक के दौरान इन पर चर्चा की गई और आम सहमति से ‘INDIA’ नाम रखा गया। ‘INDIA’ का पूरा नाम इंडियन नेशनल डेवेलपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस है। इस नाम का ऐलान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी दलों की प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया। विपक्ष के घटक दलों द्वारा इस नाम का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। इसके समर्थन में सोशल मीडिया में पोस्ट किए जा रहे हैं।

‘INDIA’ नाम के ऐलान के बाद सोशल मीडिया में प्रतिक्रियाओं का दौरा शुरू हो चुका है। पक्ष और विपक्ष में दिलचस्प दलीलें दी जा रही हैं। जहां विपक्षी दल कह रहे हैं कि ‘चक दे इंडिया’, वहीं अन्य लोगों का कहना है कि कांग्रेस के साथ विपक्षी दलों ने अपने वास्तविक चरित्र और अपनी मानसिकता को जाहिर कर दिया है। उन्हें ‘INDIA’ नाम पसंद है, क्योंकि ये नाम विदेशियों को भी पसंद है। लोग कह रहे हैं कि विपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी को बड़ी राहत देने के साथ ही बैठे बिठाए एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। अब विपक्ष ये नहीं कहेगा कि इंडिया में लोकतंत्र है या नहीं है। इंडिया में संविधान खतरे में हैं। इंडिया में भेदभाव किया जाता है। आइए देखते हैं INDIA नाम रखने पर किस तरह लोग अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं…

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‘मेरे करियर का 8 साल बर्बाद हो जाएगा, वायनाड की जनता मेरे बिना भुगतेगी’: सुप्रीम कोर्ट में राहुल गाँधी की दलील

राहुल गाँधी ने सांसदी जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सूरत के सेशन कोर्ट ने उन्हें मोदी सरनेम को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में 2 साल की सज़ा सुनाई है। इसके बाद राहुल गाँधी गुजरात हाईकोर्ट पहुँचे थे, जिसने उस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अब वो इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँचे हैं। राहुल गाँधी सांसदी से अयोग्य घोषित किए जा चुके हैं और उन्हें दिल्ली में अपना सरकारी बँगला भी खाली करना पड़ा था।

याचिका में उन्होंने दलील दी है कि अगर उन्हें राहत प्रदान नहीं की जाती है तो वो अपने करियर के 8 साल गँवा देंगे। 2 साल या उससे अधिक की सज़ा होने पर सज़ा की अवधि और उसके बाद 6 वर्ष तक कोई व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता। दलील दी गई है कि पूर्णेश मोदी नाम व्यक्ति ने उनके खिलाफ केस किया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में भी कैवेट दायर की है, ताकि राहुल गाँधी को राहत न मिले। पूर्णेश ने अपने वकील पीएस सुधीर के माध्यम से याचिका दायर की थी।

राहुल गाँधी ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने वाले को ऐसा करने के अधिकार को भी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि उनका ये बयान एक राजनीतिक भाषण के दौरान दिया गया था और ऐसे में ये समझा जाना चाहिए कि ये एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के लिए था। उन्होंने कहा कि ये किसी भी समुदाय या समाज के खिलाफ नहीं था। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कोई ऐसा सबूत भी पेश नहीं किया गया है जिससे ये चीजें साबित होती हों। उन्होंने दावा किया है कि वायनाड की जनता उनके बिना भुगतेगी।

याचिका में कहा गया है, “बिना किसी संरचना वाला एक समूह, जो शिकायतकर्ता के हिसाब से मात्र 13 लोगों का है, के बारे में कहा जा रहा है कि उनकी मानहानि हुई है। देश के अलग-अलग हिस्सों में मोदी सरनेम अलग-अलग समुदायों और उप-समुदायों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। इनमें कोई समानता नहीं है। भाषण में जिन 3 लोगों का जिक्र किया गया, उन्होंने कोई शिकायत नहीं की है। गुजरात के जिस व्यक्ति ने शिकायत की है, उसका कोई व्यक्तिगत नुकसान नहीं हुआ है।”

राहुल गाँधी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में दावा किया है कि शिकायतकर्ता ने खुद माना है कि वो मोढ़ वणिक समाज से आता है। उन्होंने दलील दी है कि इस समुदाय को मोदी सरनेम के पर्यायवाची के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। उन्होंने ‘मोदी’ को एक अपरिभाषित समूह करार दिया। साथ ही दलील दी है कि मानहानि का मुकदमा तभी मान्य हो सकता है, जब निशाना कोई परिभाषित समूह हो। राहुल गाँधी ने ये दलील भी दी है कि ये लोकतंत्र में मुक्त भाषण के लिए हानिकारक है।

राहुल गाँधी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि इससे किसी भी प्रकार के राजनीतिक संवाद या बहस की प्रथा खत्म हो जाएगी। इसे जमानती और गैर-संज्ञेय मामला बताते हुए उन्होंने दलील दी कि इसमें नैतिक कदाचार शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि ये गंभीर अपराध भी नहीं है, फिर भी गुजरात हाईकोर्ट ने सज़ा पर रोक नहीं लगाई। उन्होंने इस फैसले को स्वतंत्र अभिव्यक्ति का गला घोंटने वाला बताते हुए कहा कि ये लोकतंत्र की नींव को पूरी तरह से नष्ट कर देगा। उन्होंने दलील दी कि राजनीतिक व्यंग्य नैतिक कदाचार बन गया तो किसी भी सरकार की आलोचना नहीं की जा सकेगी।

सजा पर रोक लगाने से इनकार करना उनके(राहुल गाँधी) साथ कोई अन्याय नहीं होगा… गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने मोदी सरनेम मामले में कांग्रेस नेता राहुल गाँधी  की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया और सूरत की कोर्ट द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा। इस दौरान उच्च न्यायालय ने राहुल गाँधी पर बेहद गंभीर टिप्पणी भी की।

गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस हेमंत प्रच्छक ने 7 जुलाई 2023 को फैसला सुनाते हुए कहा कि सजा पर रोक नहीं लगाना राहुल गाँधी के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होगा। उन्होंने कांग्रेस नेता के खिलाफ चल रहे अन्य आपराधिक मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति में शुचिता जरूरी है। 

जस्टिस प्रेच्छक ने कहा, “उनके खिलाफ कम से कम 10 आपराधिक मामले लंबित हैं। इस मामले के बाद भी उनके खिलाफ कुछ और केस दर्ज हुए हैं। एक मामला वीर सावरकर के पोते ने दायर किया है। सजा पर रोक लगाने से इनकार करना उनके साथ कोई अन्याय नहीं होगा। उनकी दोषसिद्धि न्यायसंगत एवं उचित है। इस आदेश में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है।”

इस पूरे मामले में जस्टिस प्रेच्छक की टिप्पणी बेहद महत्वपूर्ण है। जस्टिस ने कहा कि राहुल गाँधी के खिलाफ 10 आपराधिक मामले चल रहे हैं। आइए देखते हैं कि राहुल गाँधी पर कौन-कौन से मामले चल रहे हैं और क्यों चल रहे हैं।

  1. आरएसएस को महात्मा गाँधी की हत्या से जोड़ने पर: राहुल गाँधी ने मार्च 2014 में ठाणे जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि आरएसएस के लोगों ने गाँधीजी की हत्या कर दी थी। इस बयान से विवाद खड़ा हो गया और आरएसएस की भिवंडी इकाई के प्रमुख राजेश कुंटे ने संघ को बदनाम करने के लिए राहुल गाँधी पर मुकदमा दायर किया। इस मामले में महाराष्ट्र की भिवंडी की अदालत ने उन्हें बेल दी है।
  2. आरएसएस के लोगों ने मुझे मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया: दिसंबर 2015 में असम में प्रचार करते समय राहुल गाँधी को बारपेटा सत्र मठ का दौरा करना था, लेकिन बाद में उन्होंने दावा किया कि आरएसएस के लोगों ने उन्हें मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया था। इसके बाद संघ कार्यकर्ता अंजन बोरा ने राहुल गाँधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गाँधी ने महिला श्रद्धालुओं का अपमान किया। इस मामले में भी राहुल गाँधी जमानत पर हैं।
  3. संघ को पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या से जोड़ा: पत्रकार गौरी लंकेश की 2017 में बेंगलुरु स्थित उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके कुछ ही घंटों के भीतर राहुल गाँधी ने प्रेस वार्ता में कहा था, “जो कोई भी भाजपा की विचारधारा के खिलाफ, आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ बोलता है उस पर दबाव डाला जाता है, पीटा जाता है, हमला किया जाता है और यहाँ तक कि उसे मार दिया जाता है।” इसके बाद उन पर आपराधिक मानहानि मुकदमा दायर किया गया। इस मामले में मुंबई की कोर्ट ने उन्हें जमानत दी है।
  4. नोटबंदी को लेकर अमित शाह पर टिप्पणी: जून 2018 में राहुल गाँधी ने एक ट्वीट पोस्ट कर अमित शाह पर अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक के निदेशक होने का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक ने पाँच दिनों के भीतर 750 करोड़ रुपए के पुराने नोट बदले हैं। इसके लिए एक RTI जवाब का हवाला दिया गया था। इस मामले में भी राहुल गाँधी जमानत पर हैं।
  5. मोदी ‘कमांडर-इन-थीफ’ टिप्पणी: सितंबर 2018 में राफेल विमान सौदे को लेकर फ्रांसिस प्रकाशन की रिपोर्ट को शेयर करते हुए राहुल गाँधी ने ट्वीट किया था, “भारत के कमांडर-इन-थीफ के बारे में दुखद सच्चाई।” इसमें उन्होंने रिलायंस को फायदा पहुँचाने के लिए सौदे में बदलाव करने का आरोप लगाया था। इसके बाद गुरुग्राम में राहुल गाँधी के खिलाफ एक और मानहानि की याचिका दायर की गई।
  6. अमित शाह के खिलाफ टिप्पणी: साल 2019 में मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को हत्या का आरोपित बताया था। उन्होंने कहा था, “हत्यारोपित भाजपा प्रमुख अमित शाह, वाह, क्या शान है…”
  7. बीजेपी की तरह कांग्रेस हत्यारे को पार्टी अध्यक्ष नहीं स्वीकारेगी: साल 2019 में राहुल गाँधी ने झारखंड में पार्टी अधिवेशन के दौरान अमित शाह पर हत्या का आरोपित होने का एक बार फिर आरोप लगाया था। इसको लेकर उन पर मानहानि के दो मानहानि के मामले दायर किए गए थे। एक झारखं के चाईबासा जिले में और दूसरा राँची में दर्ज कराया गया था।
  8. सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है: साल 2019 में कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था और उनकी तुलना भगोड़े नीरव मोदी और ललित मोदी से की थी। इस पर उनके खिलाफ तीन मामले दर्ज किए गए थे। इसमें गुजरात की अदालत के अलावा पटना की अदालत ने भी उन्हें जमानत पर रिहा किया है।
  9. सावरकर ने स्वतंत्रता सेनानियों को धोखा दिया, अंग्रेजों से माफी माँगी: साल 2022 में राहुल गाँधी ने विनायक दामोदर सावरकर पर ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों को धोखा देने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि सावरकर ने अंग्रेजों से माफी माँगी थी। इसलिए उन्हें अंडमान जेल से रिहा किया गया।
  10. नेशनल हेराल्ड केस: नेशनल हेराल्ड केस में भी राहुल गाँधी जमानत पर बाहर हैं। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर मामले में सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी को कोर्ट ने दिसंबर 2015 में जमानत दी थी। यह मामला नेशनल हेराल्ड अखबार चलाने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड द्वारा यंग इंडियन का अधिग्रहण और उसके बाद का लेनदेन से संबंधित है।

राहुल गांधी का डीप स्टेट गठजोड़ बेनकाब! ओपन मैगजीन ने छापा आर्टिकल, सैम पित्रोदा ने किया बचाव, कहा- प्राइवेट मीटिंग के बारे में नहीं बताएंगे


कांग्रेस नेता राहुल गांधी का विदेशी ताकतों और डीप स्टेट से गठजोड़ को अब ‘ओपन’ मैगजीन ने बेनकाब किया है। सत्ता हासिल करने के लिए किसी भी स्तर तक नीचे गिरने का उदाहरण पेश करने वाले राहुल गांधी ने हाल के अमेरिका दौरे के दौरान ऐसे लोगों से प्राइवेट मीटिंग की जो भारत विरोधी हैं, भारत को लगातार नीचा दिखाने में लगे रहते हैं, कश्मीर और अन्य मुद्दों के नाम पर भारत में अराजकता फैलाने की साजिश रचते हैं। ये वही लोग हैं जो भारत में लोकतंत्र खत्म होने का राग अलापते हैं और अल्पसंख्यकों के पीड़ित होने की बात करते हैं। ये वही लोग हैं जो हिंदू और हिंदुत्व के नाम पर सनातन धर्म का अपमान करते हैं। ‘ओपन’ मैगजीन ने ‘फॉरेन हैंड’ यानि विदेशी हाथ शीर्षक से प्रकाशित लेख में राहुल गांधी के अमेरिकी दौरे में विदेशी ताकतों के गठजोड़ पर से पर्दा हटाया है। इसका बचाव करने आए राहुल के करीबी सैम पित्रोदा ने इस खबर को गलत बताया है जबकि एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि कुछ प्राइवेट मीटिंग हुई थी और हमने उसके बारे में किसी को बताया नहीं और बताएंगे भी नहीं।

प्राइवेट मीटिंग के बारे में हमने किसी को नहीं बताया, बताएंगे भी नहींः सैम पित्रोदा
‘ओपन’ मैगजीन ने जब ‘फॉरेन हैंड’ यानि विदेशी हाथ शीर्षक से प्रकाशित लेख में राहुल गांधी के अमेरिकी दौरे में विदेशी ताकतों के गठजोड़ पर से पर्दा हटाया तो राहुल गांधी के करीबी सैम पित्रोदा बचाव में उतर आए कि कहा कि इस लेख में दी गई जानकारी गलत है। वहीं पित्रोदा ने एक इंटरव्यू में खुद ही स्वीकार किया था कि कुछ प्राइवेट मीटिंग हुई थी। पित्रोदा ने कहा था, ”हमने बहुत लोगों से मुलाकात की थी। सम पब्लिक सम प्राइवेट। जो प्राइवेट मीटिंग थी हमने किसी को बताया नहीं उसके बारे में और बताएंगे भी नहीं। क्योंकि वो प्राइवेट थी। पब्लिक मीटिंग्स जो थी प्रेस क्लब फिर थिंक टैंक, डिनर, एनजीओ के साथ मीटिंग। ये सब मीटिंग है, लोगों को बताया गया इसके बारे में। लेकिन थोड़ी सी मीटिंग प्राइवेट थी, जो हमने प्राइवेट ही रखी अभी तक।” सवाल उठता है कि अमेरिका में इस प्राइवेट मीटिंग का रहस्य क्या है?

कांग्रेस का कम्युनिस्ट पार्टी के बीच आखिर क्या समझौता हुआ था?
अमेरिका में राहुल गांधी ने प्राइवेट मीटिंग की और उसके बारे में किसी को कुछ जानकारी नहीं है। कुछ इसी तरह 2008 में कांग्रेस पार्टी ने चीन से गुप्त समझौता किया था जिसे आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया। इसके लिए अदालत में याचिका भी दाखिल की गई थी। वकील शशांक शेखर झा और पत्रकार सेवियो रोड्रिग्स की याचिका में बताया गया था कि 7 अगस्त 2008 को कांग्रेस ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ एक समझौता किया था। लोगों को यह बताया गया कि यह समझौता ‘आपसी सहयोग’ और ‘जानकारियों के लेनदेन’ के लिए किया गया है। लेकिन कभी भी समझौता पत्र को सार्वजनिक नहीं किया गया। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार का शासन 2014 तक चला। इस दौरान चीन ने कई बार भारतीय हितों को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतें की। लेकिन उस पर सरकार का रवैया बेहद कमजोर रहा। इसलिए राष्ट्रीय हित में इस बात की जांच की जरूरत है कि इस समय देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी और चीन में सत्ता पर पूरा नियंत्रण रखने वाली कम्युनिस्ट पार्टी के बीच आखिर क्या समझौता हुआ था? मामले में UAPA के प्रावधानों के तहत एनआईए को जांच का आदेश देना चाहिए।

राहुल के बगल में बैठी रिया चक्रवर्ती की फोटो बताती है प्राइवेट मीटिंग का सच
Open मैगजीन के लेख के अनुसार, हमारे पास अज्ञात, संदिग्ध बैठकों के अकाट्य साक्ष्य हैं। बंद कमरे में बातचीत न करने का उनका दावा तथ्यों के सामने गलत साबित होता है। अरबपति जार्ज सोरोस से जुड़े हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (एचएफएचआर) ने कैपिटल हिल कार्यक्रम के आयोजन में भाग लिया। एचएफएचआर की डायरकेक्टर रिया चक्रवर्ती को राहुल गांधी के बगल में बैठे देखा जा सकता है। यह तस्वीर साफ बताती है कि प्राइवेट मुलाकात हुई थी और सैम पित्रोदा का बचाव यहां नाकाफी लगता है।

खालिस्तानी से संबंध रखने वालों से मुलाकात क्यों?
हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स की संस्थापक सुनीता विश्वनाथ के सोरोस से संबंध हैं और 2011 में घोषित खालिस्तानी आतंकवादी भजन सिंह भिंडर से उनके संबंध हैं। क्या यह चिंताजनक नहीं है, खासकर उस पार्टी के लिए जो भारतीय जनता के हित की सेवा करना चाहती है?

राहुल गांधी का जमात से जुड़े लोगों के साथ बैठक क्यों?
राहुल गांधी, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) के एडवोकेसी निदेशक अजीत साही और उनकी पत्नी सरिता पांडे के बीच एक बैठक की बात कही गई है। IAMC का आतंकी संगठन जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान और सिमी से संबंध है और वह 2013 से भारत के खिलाफ लॉबिंग कर रहा है।

सार्वजनिक जीवन जी रहे राहुल गांधी को प्राइवेट मीटिंग के बारे में बताना चाहिए
इन सबूतों को देखते हुए भारतीय जनता पारदर्शिता और ईमानदारी की हकदार है और उसे प्राइवेट मीटिंग के बारे में भी जानने का हक है। यदि राहुल गांधी सार्वजनिक जीवन में हैं तो प्राइवेट मीटिंग का क्या महत्व है? सार्वजनिक हस्ती के रूप में यह राहुल का कर्तव्य है कि वह लोगों को इसके बारे में बताएं और देश को आश्वस्त करें कि उनका कार्य भारत के सर्वोत्तम हितों के अनुरूप हैं। क्योंकि लोकतंत्र विश्वास, पारदर्शिता और सच्चाई पर पनपता है। सोशल मीडिया पर भी लोग कह रहे हैं कि अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान राहुल गांधी इन भारत विरोधी लोगों के साथ क्या कर रहे थे? उसकी जांच होनी चाहिए।

भारत विरोधी अरबपति जॉर्ज सोरोस की करीबी महिला के साथ राहुल गाँधी क्यों?

राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा एक बार फिर से विवादों में है। बीजेपी ने अमेरिका यात्रा के दौरान संसद से अयोग्‍य घोषित हो चुके राहुल गांधी की भारत विरोधी अमेरिकी अरबपति जार्ज सोरोस की करीबी सुनीता विश्वनाथ और जमात-ए-इस्लामी से जुड़े तजीम अंसारी के साथ बैठक पर सवाल उठाए हैं। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि कई दस्तावेज प्रमाण दे रहे हैं कि भारत की लोकतांत्रिक सरकार को हटाने की बात डंके की चोट पर कहने वाले जार्ज सोरोस द्वारा वित्त पोषित महिला सुनीता विश्वनाथ और जमात-ए-इस्लामी से जुड़े तजीम अंसारी के साथ अमेरिका में राहुल ने बैठक की। सोरोस के ही संस्थान ओपन सोसाइटी के ग्लोबल उपाध्यक्ष सलिल शेट्टी ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी हिस्सा लिया था। इससे साफ जाहिर है कि सत्ता के लिए कांग्रेस आज इतना नीचे गिर गई है कि वह देशविरोधी लोगों से भी हाथ मिलाने से गुरेज नहीं कर रही। सत्ता के लिए राहुल गांधी देश को कमजोर करने और देश को नीचा तक दिखाने के लिए तैयार हैं।

जार्ज सोरोस के सहयोगी से मिलने की राहुल की क्या है मजबूरी?

भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में स्मृति ईरानी ने कहा कि भाजपा ने इस विषय को पहले भी उठाया था कि कैसे जार्ज सोरोस भारत में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को हटाना चाहते हैं। सोरोस के इरादे हर भारतवासी को पता थे, तब भी ऐसी क्या मजबूरी थी कि राहुल गांधी ने जार्ज सोरोस के एक सहयोगी के साथ अमेरिका में बैठक की। ईरानी ने सवाल किया कि राहुल को जवाब देना चाहिए कि वे लोगों के साथ क्या बात कर रहे थे? स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल गांधी अमेरिका दौरे पर 4 जून को जमाते इस्लामी से संबंधित एक इस्लामी संगठन से मिले थे। इस मुलाकात पर सवाल उठाते हुए स्मृति ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पर चर्चा करते हुए कहा कि इस दौरान भी सोरोस के ओपन सोसायटी के मेंबर सलिल सेठी भी राहुल गांधी के साथ दिखाई दिए थे। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मुद्दे को उठाने पर बीजेपी नेता के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। यह सच को दबाने की कोशिश है। उन्होंने पूछा कि जो भारत की सरकार को गिराना चाहता है उसके साथ राहुल गांधी आखिर क्या कर रहे हैं। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में फोटो भी शेयर किए।

अमित मालवीय ने राहुल की सच्चाई दिखाई तो कांग्रेस को मिर्ची लगी

दरअसल, कर्नाटक में भाजपा के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग के प्रमुख अमित मालवीय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के सदस्य रमेश बाबू ने यह शिकायत दर्ज कराई है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि मालवीय ने कांग्रेस और राहुल गांधी का मजाक उड़ाते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर माहौल बिगाड़ने और लोगों को उकसाने का काम किया। जबकि इस वीडियो इसमें उन्हीं बातों को दिखाया गया है जो कि राहुल गांधी अपने ब्रिटेन और अमेरिकी दौरे पर कहते रहे हैं। इसमें दिखाया गया है कि वे भारत के विरोधी हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीचा दिखाने के लिए विदेशों में भारत को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।
सुनीता विश्वनाथ ने किया था पीएम मोदी के दौरे का विरोध
सुनीता विश्वनाथ हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (एचएफएचआर) की कोफाउंडर हैं। वह अमेरिका में इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल के साथ कई कार्यक्रमों में शिरकत करती हैं। यह एक कट्टर संगटन है। खबरों के अनुसार इस संगठन का पश्चिम में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के साथ सांठगांठ है। संदिग्ध संगठन ‘हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स’ ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे का विरोध किया था। इसके खिलाफ प्रोपेगेंडा के लिए विशेष टूलकिट लेकर आया था। संगठन द्वारा जारी टूलकिट उसके मोदी विरोधी अभियान का हिस्सा था। “मोदी प्रोटेस्ट टूलकिट” शीर्षक वाला 24 पेज का दस्तावेज़ एचएफएचआर की वेबसाइट पर खुले तौर पर उपलब्ध था।
अमेरिका में राहुल का जमात, सुनीता विश्वनाथ कनेक्शन, फोटो ने खोल दी पोल
राहुल गांधी पीएम मोदी के अमेरिका दौरे से पहले 30 मई को अमेरिका पहुंचे थे। राहुल गांधी के विदेश दौरे का उद्देश्य भारत को नीचा दिखाना, पीएम मोदी और भाजपा को बदनाम करना और भारत में मुसलमान खतरे हैं, यही बताना रहता है। यह काम वह पिछले कई विदेश दौरे से करते आ रहे हैं। लेकिन जिस तरह सोशल मीडिया पर उनका एक फोटो वायरल हुआ उसने उनकी पोल खोलकर रख दी है। जिस अमेरिकी अरबपति कारोबारी जार्ज सोरोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जहर उगला था, जिसने पीएम मोदी को सत्ता से हटाने की बात कही थी, जिसने राष्ट्रवाद से लड़ने के लिए 100 अरब डॉलर का फंड देने की बात कही थी, अब राहुल गांधी उसी के करीबी सहयोगी सुनीता विश्वनाथ के साथ बैठते करते देखे गए। आखिर राहुल गांधी देश विरोधी लोगों से क्यों मिल रहे थे? क्या भारत को कमजोर करने की जार्ज सोरोस की साजिश में वे भी शामिल हैं? राहुल गांधी का जमात, ISI और जॉर्ज सोरोस से जुड़े लोगों से मिलना यह साबित करता है कि वे भारत से प्रेम नहीं करते बल्कि सत्ता के लिए देश को कमजोर करने से लेकर किसी भी हथकंडे को अपना सकते हैं।
जॉर्ज सोरोस की प्रतिनिधि हैं सुनीता विश्वनाथ

सुनीता विश्वनाथ जॉर्ज सोरोस की प्रतिनिधि हैं, जिसने विपक्षी नेताओं, थिंक टैंक, पत्रकारों, वकीलों और कार्यकर्ताओं के एक नेटवर्क के माध्यम से भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने के लिए 1 अरब डॉलर देने का वादा किया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राहुल गांधी सत्ता पाने के लिए इस हद तक समझौता कर रहे हैं। अमेरिकी एक्टिविस्ट सुनीता विश्वनाथ वही हैं जिन्हें तीन साल पहले अयोध्या में एंट्री से रोक दिया गया था।
कुछ समय पहले विवादित ‘काली’ वेब सीरीज पर उठे विवाद पर इस महिला ने आकर सीरीज की निर्माता के पक्ष में हिंदू देवताओं के लिए उल-जुलूल बातें की थीं। अपने लेख में सुनीता ने महादेव की चिलम फूँकती तस्वीर लगाकर कहा था कि हिंदुओं में शराब और सिगरेट कुछ भी निषेध नहीं है। देवताओं को ये सब चढ़ता है।
सुनीता ने अपने लेख में सेक्स और समलैंगिकता को घुसाकर ये तक लिखा था कि धर्मग्रंथों में अनगिनत ऐसी कहानियाँ भरी पड़ी हैं, जिन्हें पढ़कर समलैंगिकता से पैदा हुए बच्चों का पता चलता है। सुनीता ने यह भी लिखा था कि हिंदुओं के कुछ देवता तो समलैंगिक भी हैं। काली के आपत्तिजनक दृश्यों को सपोर्ट करने के लिए सुनीता ने साफ लिखा था कि हिंदू देवता धूम्रपान, मदिरापान करते हैं। इसके अलावा वो मांस भी खाते हैं।

कौन हैं जॉर्ज सोरोस

92 साल के जॉर्ज सोरोस एक अमेरिकी अरबपति हैं, जो स्टॉक मार्केट में निवेश करके लाभ कमाते हैं। उनका जन्म 1930 में पश्चिमी देश हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में एक यहूदी परिवार में हुआ था। कहा जाता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब यहूदियों पर अत्याचार हो रहा था, तब उन्होंने झूठा पहचान पत्र बनाकर अपना और अपने परिवार की जान बचाई थी।
जब विश्वयुद्ध खत्म हुआ और हंगरी में कम्युनिस्ट सरकार बनी तो वे 1947 में इंग्लैंड की राजधानी लंदन चले गए। वहाँ उन्होंने रेलवे स्टेशन पर कुली और क्लबों में वेटर का भी काम किया। इस दौरान वे लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई की। इसके बाद कुछ समय तक उन्होंने लंदन मर्चेंट बैंक में भी काम किया।
साल 1956 में वे लंदन छोड़कर अमेरिका आ गए और फाइनांस एवं इन्वेस्टमेंट में कदम रखा। उसके बाद उनकी किस्मत चमक उठी और रात दूनी दिन चौगुनी तरक्की करने लगे और खूब संपत्ति इकट्ठा की। वित्तीय पत्रिका फोर्ब्स मैगजीन के अनुसार 17 फरवरी 2023 तक उनके पास 6.7 बिलियन डॉलर (लगभग 55,455 करोड़ रुपए) की संपत्ति है।
सन 1973 में उन्होंने सोरोस फंड मैनेजमेंट की स्थापना की और कथित अत्याचार पीड़ितों की मदद करने लगे। इस दौरान उन्होंने ब्लैक लोगों की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप देना शुरू किया। उनका दावा है कि उन्होंने अब 32 अरब डॉलर (2.62 लाख करोड़ रुपए) जरूरतमंदों को दे चुके हैं। सन 1984 में उन्होंने ओपन सोसायटी नामक संस्था की स्थापना की। आज यह संस्था 70 से अधिक देशों में कार्यरत है।
इन सब मानवीय सेवाओं और दानों के पीछे उनका एक विकृत चेहरा भी है। उन्होंने लाभ कमाने के लिए कई संस्थानों और देशों में वित्तीय संकट खड़ा कर दिया। इसके अलावा, उन्होंने कई देशों की सरकारों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने और उन्हें गिराने के लिए फंडिंग करने का काम किया। ओपन सोसायटी का इसमें नाम आया है। इस तरह के आरोप उन पर लगते रहे हैं।
अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को हटाने के लिए अथाह पैसे खर्च किए थे। साल 2003 में उन्होंने कहा था कि जॉर्ज बुश को हटाना उनके लिए जिंदगी और मौत का सवाल है। उन्होंने कहा था कि अगर बुश को सत्ता से हटाने की अगर कोई गारंटी लेता है और वे अपनी पूरी संपत्ति उस पर लुटा देंगे। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ बुश की कार्रवाई का भी खूब विरोध किया था। बुश को हराने के लिए उन्होंने 250 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए थे।
सोरोस को चीन, भारत के नरेंद्र मोदी, ब्लादिमीर पुतिन, अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता पसंद नहीं हैं। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को ठग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाह कहा था। और यही बोली भारत में मोदी विरोधी बोल रहे हैं। उन्होंने दुनिया में ‘राष्ट्रवाद’ के बयार से लड़ने के लिए लगभग 100 अरब डॉलर की फंड की स्थापना की है। इन फंड का इस्तेमाल इन लोगों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने के लिए किया जाता है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उन्होंने कहा था कि दुनिया में राष्ट्रवाद तेजी से बढ़ रहा है। इसका सबसे खतरनाक नतीजा भारत में देखने को मिला है।

सोरोस ने वित्तीय संकट पैदा किया और लाभ कमाया

जॉर्ज सोरोस को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है, जिसने बैंक ऑफ इंग्लैंड को बर्बाद कर दिया। बैंक ऑफ इंग्लैंड यूनाइटेड किंगडम का केंद्रीय बैंक और यह भारत के RBI के समानांतर है। हेज फंड मैनेजर सोरोस ने अपनी साजिशों से ब्रिटिश मुद्रा पाउंड की वैल्यू को गिरा दिया था। इससे उन्होंने लगभग 1 बिलियन डॉलर (8277 करोड़ रुपए) का लाभ कमाया था। उन्हें वित्तीय युद्ध अपराधी तक कहा गया है।
यह कुछ हिंडनबर्ग रिसर्च की तरह ही है। हिंडनबर्ग भी अपनी रिपोर्ट में किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति को खराब बताया है। इससे उसके शेयर गिरने लगते हैं और उसे शॉर्ट सेल करके लाभ कमाता है। अडानी मामले में भी हिंडनबर्ग ने यही तरीका अपनाया। इसके पहले भी वह ऐसा ही करता है। जॉर्ज सोरोस ने बैंक ऑफ इंग्लैंड के मामले में लगभग यही रणनीति अपनाई थी।
साल 1997 में थाईलैंड की मुद्रा बाहत पर सट्टेबाजी हमलों (Speculative Attack) के लिए सोरोस को जिम्मेदार ठहराया गया था। थाईलैंड की मुद्रा में आई गिरावट के कारण उस साल एशिया के अधिकांश देशों में वित्तीय संकट फैल गया था। मलेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री महाथिर बिन मोहम्मद ने भी वहाँ की मुद्रा रिंगित की गिरावट के लिए सोरोस को जिम्मेदार ठहराया था। हालाँकि, सोरोस ने इसका खंडन किया था।
इसके अलावा, सोरोस पर अन्य अनैतिक तरीकों से संपत्ति कमाने का आरोप लगा है। वर्ष 2002 में फ्रांस की अदालत ने सोरोस को अनैतिक और अनधिकृत व्यापार का दोषी पाते हुए उन पर 23 लाख डॉलर का जुर्माना लगाया था। सोरोस ने अदालत के इस फैसले को फ्रांस की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने सोरोस पर लगाए गए इस जुर्माने को बरकरार रखा।
अमेरिका में भी जॉर्ज सोरोस पर बेसबॉल खेलों में पैसा लगाकर अनैतिक तरीके से लाभ कमाने का आरोप लगा। इसी तरह इटली की फुटबॉल टीम एएस रोमा को लेकर भी सोरोस विवादों में आए था। इतना ही नहीं, सोरोस ने साल 1994 में खुलासा किया था कि उन्होंने आत्महत्या करने में अपनी माँ मदद की थी।

सरकारों के खिलाफ प्रोपगेंडा और भारत

राफेल डील में जाँच के लिए फंडिंग: फ्रांस से भारत ने 36 राफेल विमानों को खरीदा था। इसको लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने हंगामा किया था और कहा था कि इसमें दलाली हुई है। हालाँकि, यहाँ की सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। इसके बाद फ्रांस की एनजीओ शेरपा एसोसिएशन ने इसमें भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराकर जाँच की माँग की थी। इस एनजीओ को जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से फंड जारी किया जाता है।
भारत जोड़ो यात्रा और सोरोस: कांग्रेस नेता राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा से भी जॉर्ज सोरोस के नाम जुड़े हैं। 31 अक्टूबर 2022 को सलिल शेट्टी नाम का एक व्यक्ति राहुल गांधी की कर्नाटक के हरथिकोट में उनकी भारत जोड़ी यात्रा में शामिल हुआ। सलिल शेट्टी जॉर्ज सोरोस द्वारा स्थापित ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन के वैश्विक उपाध्यक्ष हैं। इसके पहले शेट्टी एमनेस्टी इंटरनेशनल से जुड़े थे।
CAA प्रोटेस्ट: सीएए प्रोटेस्ट में भी जॉर्ज सोरोस का नाम जुड़ा है। कहा जाता है कि नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर हुए विरोध को हवा देने के लिए जॉर्ज सोरो ने फंडिंग की थी। इसकी पुष्टि उनके बयानों से भी होती है। सोरोस ने भारत में लागू किए जा रहे NRC और CAA को मुस्लिम विरोधी बताया था।
कश्मीर से धारा 370 का खात्मा: इसी तरह कश्मीर से जब केंद्र की मोदी सरकार ने धारा 370 को खत्म कर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त किया था, तब भी सोरोस सामने आए थे। उन्होंने मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध किया था। सोरोस ने कहा था कि भारत हिंदू राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है। इसी तरह किसान आंदोलन और भारत द्वारा कोरोना का वैक्सीन बनाने के बाद उसके खिलाफ वैश्विक मुहिम चलाने में भी सोरोस का नाम आ चुका है।
दरअसल, जॉर्ज सोरोस की भूमिका उन हर बातों में लगभग सामने आई, जो केंद्र की भाजपा सरकार और नरेंद्र मोदी के खिलाफ रही। जॉर्ज सोरोस की नरेंद्र मोदी के खिलाफ कितनी नफरत है, इसका वे तानाशाह कहकर सबूत दे चुके हैं और समय-समय पर अन्य आरोपों के जरिए इसकी पुष्टि भई करते रहते हैं। वैसे तो सोरोस की कहानी सैकड़ों पन्नों में भी नहीं खत्म होगी, लेकिन फिलहाल संक्षिप्त में इतना ही।