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सजा पर रोक लगाने से इनकार करना उनके(राहुल गाँधी) साथ कोई अन्याय नहीं होगा… गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने मोदी सरनेम मामले में कांग्रेस नेता राहुल गाँधी  की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया और सूरत की कोर्ट द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा। इस दौरान उच्च न्यायालय ने राहुल गाँधी पर बेहद गंभीर टिप्पणी भी की।

गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस हेमंत प्रच्छक ने 7 जुलाई 2023 को फैसला सुनाते हुए कहा कि सजा पर रोक नहीं लगाना राहुल गाँधी के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होगा। उन्होंने कांग्रेस नेता के खिलाफ चल रहे अन्य आपराधिक मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति में शुचिता जरूरी है। 

जस्टिस प्रेच्छक ने कहा, “उनके खिलाफ कम से कम 10 आपराधिक मामले लंबित हैं। इस मामले के बाद भी उनके खिलाफ कुछ और केस दर्ज हुए हैं। एक मामला वीर सावरकर के पोते ने दायर किया है। सजा पर रोक लगाने से इनकार करना उनके साथ कोई अन्याय नहीं होगा। उनकी दोषसिद्धि न्यायसंगत एवं उचित है। इस आदेश में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है।”

इस पूरे मामले में जस्टिस प्रेच्छक की टिप्पणी बेहद महत्वपूर्ण है। जस्टिस ने कहा कि राहुल गाँधी के खिलाफ 10 आपराधिक मामले चल रहे हैं। आइए देखते हैं कि राहुल गाँधी पर कौन-कौन से मामले चल रहे हैं और क्यों चल रहे हैं।

  1. आरएसएस को महात्मा गाँधी की हत्या से जोड़ने पर: राहुल गाँधी ने मार्च 2014 में ठाणे जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि आरएसएस के लोगों ने गाँधीजी की हत्या कर दी थी। इस बयान से विवाद खड़ा हो गया और आरएसएस की भिवंडी इकाई के प्रमुख राजेश कुंटे ने संघ को बदनाम करने के लिए राहुल गाँधी पर मुकदमा दायर किया। इस मामले में महाराष्ट्र की भिवंडी की अदालत ने उन्हें बेल दी है।
  2. आरएसएस के लोगों ने मुझे मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया: दिसंबर 2015 में असम में प्रचार करते समय राहुल गाँधी को बारपेटा सत्र मठ का दौरा करना था, लेकिन बाद में उन्होंने दावा किया कि आरएसएस के लोगों ने उन्हें मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया था। इसके बाद संघ कार्यकर्ता अंजन बोरा ने राहुल गाँधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गाँधी ने महिला श्रद्धालुओं का अपमान किया। इस मामले में भी राहुल गाँधी जमानत पर हैं।
  3. संघ को पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या से जोड़ा: पत्रकार गौरी लंकेश की 2017 में बेंगलुरु स्थित उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके कुछ ही घंटों के भीतर राहुल गाँधी ने प्रेस वार्ता में कहा था, “जो कोई भी भाजपा की विचारधारा के खिलाफ, आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ बोलता है उस पर दबाव डाला जाता है, पीटा जाता है, हमला किया जाता है और यहाँ तक कि उसे मार दिया जाता है।” इसके बाद उन पर आपराधिक मानहानि मुकदमा दायर किया गया। इस मामले में मुंबई की कोर्ट ने उन्हें जमानत दी है।
  4. नोटबंदी को लेकर अमित शाह पर टिप्पणी: जून 2018 में राहुल गाँधी ने एक ट्वीट पोस्ट कर अमित शाह पर अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक के निदेशक होने का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक ने पाँच दिनों के भीतर 750 करोड़ रुपए के पुराने नोट बदले हैं। इसके लिए एक RTI जवाब का हवाला दिया गया था। इस मामले में भी राहुल गाँधी जमानत पर हैं।
  5. मोदी ‘कमांडर-इन-थीफ’ टिप्पणी: सितंबर 2018 में राफेल विमान सौदे को लेकर फ्रांसिस प्रकाशन की रिपोर्ट को शेयर करते हुए राहुल गाँधी ने ट्वीट किया था, “भारत के कमांडर-इन-थीफ के बारे में दुखद सच्चाई।” इसमें उन्होंने रिलायंस को फायदा पहुँचाने के लिए सौदे में बदलाव करने का आरोप लगाया था। इसके बाद गुरुग्राम में राहुल गाँधी के खिलाफ एक और मानहानि की याचिका दायर की गई।
  6. अमित शाह के खिलाफ टिप्पणी: साल 2019 में मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को हत्या का आरोपित बताया था। उन्होंने कहा था, “हत्यारोपित भाजपा प्रमुख अमित शाह, वाह, क्या शान है…”
  7. बीजेपी की तरह कांग्रेस हत्यारे को पार्टी अध्यक्ष नहीं स्वीकारेगी: साल 2019 में राहुल गाँधी ने झारखंड में पार्टी अधिवेशन के दौरान अमित शाह पर हत्या का आरोपित होने का एक बार फिर आरोप लगाया था। इसको लेकर उन पर मानहानि के दो मानहानि के मामले दायर किए गए थे। एक झारखं के चाईबासा जिले में और दूसरा राँची में दर्ज कराया गया था।
  8. सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है: साल 2019 में कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था और उनकी तुलना भगोड़े नीरव मोदी और ललित मोदी से की थी। इस पर उनके खिलाफ तीन मामले दर्ज किए गए थे। इसमें गुजरात की अदालत के अलावा पटना की अदालत ने भी उन्हें जमानत पर रिहा किया है।
  9. सावरकर ने स्वतंत्रता सेनानियों को धोखा दिया, अंग्रेजों से माफी माँगी: साल 2022 में राहुल गाँधी ने विनायक दामोदर सावरकर पर ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों को धोखा देने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि सावरकर ने अंग्रेजों से माफी माँगी थी। इसलिए उन्हें अंडमान जेल से रिहा किया गया।
  10. नेशनल हेराल्ड केस: नेशनल हेराल्ड केस में भी राहुल गाँधी जमानत पर बाहर हैं। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर मामले में सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी को कोर्ट ने दिसंबर 2015 में जमानत दी थी। यह मामला नेशनल हेराल्ड अखबार चलाने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड द्वारा यंग इंडियन का अधिग्रहण और उसके बाद का लेनदेन से संबंधित है।

काशी-उज्जैन के बाद अब ‘माँ कामाख्या कॉरिडोर’ की बारी

 मोदी ने 'माँ कामाख्या कॉरिडोर' को ऐतिहासिक पहल बताया (फोटो साभार: @himantabiswa)
उत्तर प्रदेश के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और मध्य प्रदेश के महाकाल कॉरिडोर की तर्ज पर असम सरकार ने गुवाहाटी में माँ कामाख्या कॉरिडोर की रूप रेखा तैयार कर ली है। यानी जल्द ही राज्य सरकार ‘माँ कामाख्या कॉरिडोर’ पर कार्य शुरू कर देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने 19 अप्रैल 2023 को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) द्वारा शेयर की गई वीडियो को साझा किया।

इसके साथ उन्होंने लिखा, “मुझे यकीन है कि ‘माँ कामाख्या कॉरिडोर’ एक ऐतिहासिक पहल होगी। जहाँ तक आध्यात्मिक अनुभव का संबंध है, काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल महालोक में परिवर्तन हो रहा है। समान रूप से महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।” असम के मुख्यमंत्री ने 18 अप्रैल, 2023 को अपने ट्विटर हैंडल पर मंदिर गलियारे का एनीमेटेड वीडियो शेयर किया और भक्तों को यहाँ के भविष्य की एक झलक पेश की थी।

मुख्यमंत्री ने लिखा, ” ‘माँ कामाख्या कॉरिडोर’ भविष्य में कैसा दिखेगा। इसकी एक झलक साझा कर रहा हूँ।”

कामाख्या मंदिर सभी 108 शक्ति पीठों में से एक प्राचीन मंदिरों में से एक है। असम में नीलाचल पहाड़ी की चोटी पर स्थित कामाख्या मंदिर की उत्पत्ति 8वीं शताब्दी में हुई थी। इसे 16वीं शताब्दी में कूचबिहार के राजा नारा नारायण ने फिर से बनवाया था। इसके बाद से इसे कई बार पुनर्निमित किया गया है। इस मंदिर में अन्य मंदिरों की तरह मूर्ति की पूजा नहीं की जाती है, बल्कि यहाँ देवी की योनि की पूजा की जाती है। इसे गुफा के एक कोने में रखा गया है। बताया जाता है कि मंदिर में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को भी प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाती है।

कामाख्या मंदिर एक वार्षिक आयोजन करता है, जिसे अंबुबासी पूजा के नाम से जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान देवी का मासिक धर्म होता है। मंदिर तीन दिनों तक बंद रहने के बाद चौथे दिन उत्सव के साथ फिर से खुल जाता है। मान्यता है कि इस पर्व के दौरान ब्रह्मपुत्र नदी भी लाल हो जाती है। इस खास मौके पर शक्ति प्राप्त करने के लिए साधु गुफाओं में साधना करते हैं।

माँ कामाख्या शक्तिपीठ 

51 शक्तिपीठों में से एक कामाख्या शक्तिपीठ बहुत ही प्रसिद्ध और चमत्कारी है। कामाख्या देवी का मंदिर अघोरियों और तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। असम की राजधानी दिसपुर से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित यह शक्तिपीठ नीलांचल पर्वत से 10 किलोमीटर दूर है। कामाख्या मंदिर सभी शक्तिपीठों का महापीठ माना जाता है। इस मंदिर में देवी दुर्गा या मां अम्बे की कोई मूर्ति या चित्र आपको दिखाई नहीं देगा। वल्कि मंदिर में एक कुंड बना है जो की हमेशा फूलों से ढ़का रहता है। इस कुंड से हमेशा ही जल निकलता रहतै है। चमत्कारों से भरे इस मंदिर में देवी की योनि की पूजा की जाती है और योनी भाग के यहां होने से माता यहां रजस्वला भी होती हैं। मंदिर से कई अन्य रौचक बातें जुड़ी है, आइए जनते हैं ...

मंदिर धर्म पुराणों के अनुसार माना जाता है कि इस शक्तिपीठ का नाम कामाख्या इसलिए पड़ा क्योंकि इस जगह भगवान शिव का मां सती के प्रति मोह भंग करने के लिए विष्णु भगवान ने अपने चक्र से माता सती के 51 भाग किए थे जहां पर यह भाग गिरे वहां पर माता का एक शक्तिपीठ बन गया और इस जगह माता की योनी गिरी थी, जोकी आज बहुत ही शक्तिशाली पीठ है। यहां वैसे तो सालभर ही भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन दुर्गा पूजा, पोहान बिया, दुर्गादेऊल, वसंती पूजा, मदानदेऊल, अम्बुवासी और मनासा पूजा पर इस मंदिर का अलग ही महत्व है जिसके कारण इन दिनों में लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुचतें है।

असम : कांग्रेस में महिलाओं का सम्मान नहीं : महिला अध्यक्ष अंगकिता दत्ता

                 असम यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष डॉ अंगकिता दत्ता ने यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास BV
कांग्रेस पार्टी में सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के रहते भी पार्टी में महिलाओं की स्थिति बदतर बनी हुई है। पार्टी में महिलाओं का कोई सम्मान नहीं है। कांग्रेस नेता महिलाओं के साथ हमेशा बदसलूकी करते हुए पाए जाते हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा चुनाव के समय तो ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ का नारा देती है, लेकिन और समय में पार्टी नेताओं की मानसिकता महिला विरोधी रहती है। ताजा मामले में यूथ कांग्रेस असम की अध्यक्ष अंगकिता दत्ता ने राहुल गांधी के करीबी यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हैरानी की बात यह है कि संज्ञान में आने के बाद भी राहुल गांधी ने कोई कार्रवाई करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। एक के बाद एक कई ट्वीट करते हुए अंगकिता दत्ता ने लिखा है कि श्रीनिवास बीवी ने मुझे लगातार परेशान किया और लिंग के आधार पर मेरे साथ भेदभाव किया। मेरे मूल्य और संस्कार अब मुझे इसकी अनुमति नहीं देते। मामले को कई बार सामने लाने के बावजूद नेतृत्व में इसे अनसुना कर दिया।
असम कांग्रेस के सीनियर लीडर रहे स्वर्गीय अंजन दत्ता की पुत्री अंगकिता दत्ता ने आगे लिखा है कि बीवी श्रीनिवास को लगता है कि वह बहुत शक्तिशाली हैं और उन्हें पार्टी बड़े नेताओं का आशीर्वाद है इसलिए वह संगठन में एक महिला को परेशान और नीचा दिखा सकता है।
अंगकिता दत्ता का साफ कहना है कि उनकी शिकायतों के बावजूद यूथ कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ कोई जांच समिति गठित नहीं की गई। अंगकिता दत्ता ने यह भी कहा है कि कांग्रेस महिलाओं के लिए सुरक्षित जगह नहीं है।
यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर परेशान करने का आरोप
यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी पर गंभीर आरोप लगे हैं। यूथ कांग्रेस असम की अध्यक्ष अंगकिता दत्ता ने आरोप लगाया है कि श्रीनिवास बीवी ने मुझे लगातार परेशान किया और लिंग के आधार पर मेरे साथ भेदभाव किया। मेरे मूल्य और संस्कार अब मुझे इसकी अनुमति नहीं देते। मामले को कई बार सामने लाने के बावजूद नेतृत्व में इसे अनसुना कर दिया। अंगकिता दत्ता ने कहा है कि बीवी श्रीनिवास को लगता है कि वह बहुत शक्तिशाली हैं और उन्हें पार्टी बड़े नेताओं का आशीर्वाद है इसलिए वह संगठन में एक महिला को परेशान और नीचा दिखा सकता है। युवा कांग्रेस की असम अध्यक्ष ने अपने ट्वीट में यह भी लिखा है उन्हें राहुल गांधी पर बहुत ज्यादा विश्वास था और भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जम्मू में श्रीनिवास के उत्पीड़न और अपमानजनक बर्ताव के बारे में बताया भी था लेकिन अभी तक उनके खिलाफ कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई है। कांग्रेस महिलाओं के लिए सुरक्षित जगह नहीं है।

असम यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष डॉ अंगकिता दत्ता ने यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास BV पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। उन्होंने 18 अप्रैल, 2023 को दोपहर 3:55 में की गई ट्वीट में लिखा, “मेरा परिवार 4 पीढ़ियों से कांग्रेस पार्टी में है। मैंने 2 बार पार्टी के आंतरिक चुनावों में हिस्सा लिया है, बूथ कमिटी बनाई है और पुलिस से पिटाई भी खाई है। मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीतिक विज्ञान में स्नातक किया, फिर LLB किया।”

उन्होंने आगे अपनी बात को जारी रखते हुए लिखा है, “मैंने गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से PhD की डिग्री प्राप्त की। हम पार्टी के हित को ध्यान में रखते हुए चुप्पी साधे रहते हैं। लेकिन, श्रीनिवास द्वारा प्रताड़ना कम नहीं होती।” उन्होंने बताया है कि श्रीनिवास BV ने उन्हें कई बार प्रताड़ित किया है। डॉ अंगकिता दत्ता ने जानकारी दी है कि इस संबंध में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान उन्होंने राहुल गाँधी को भी बताया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि श्रीनिवास BV ने उन्हें लगातार प्रताड़ित किया है और उनके स्त्री होने के कारण उनसे भेदभाव किया है। उन्होंने कहा कि उनके सिद्धांत और उनकी सहीक्षिक पृष्ठभूमि उन्हें अब और चुप रहने की अनुमति नहीं देती। उनकी मानें तो पार्टी आलाकामन के सामने ही कई बार ऐसा हुआ, फिर भी उन्होंने कुछ एक्शन नहीं लिया। उन्होंने कहा कि श्रीनिवास BV खुद को इतना शक्तिशाली समझते हैं कि उन्हें लगता है कि बड़े नेताओं के आशीर्वाद से वो संगठन में एक महिला को प्रताड़ित कर सकते हैं, नीचा दिखा सकते हैं।

उन्होंने राहुल गाँधी को टैग करते हुए अपने पोस्ट में लिखा, “मुझे राहुल गाँधी पर काफी विश्वास था और ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान श्रीनिवास BV की हरकतों के बारे में बताने के लिए मैं जम्मू गई थी। मैंने उन्हें बताया कि श्रीनिवास ने मेरे लिए कैसी भाषा का इस्तेमाल किया। अप्रैल आ गया है और अब तक इस मामले में कोई जाँच नहीं हुई है।” बता दें कि जनवरी के अंतिम हफ्ते में यात्रा जम्मू में थी। उन्होंने बताया कि वो इसीलिए चुप रहीं क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी एक्शन लेगी, लेकिन कोई इन्क्वारी कमिटी नहीं बनी।

असम यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष डॉ अंगकिता दत्ता ने यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास BV पर लगाए प्रताड़ना के आरोप

 डॉ अंगकिता दत्ता ने राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को टैग करते हुए लिखा, “पूरे देश में मैं अकेली महिला हूँ, जो यूथ कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष है। फिर भी मुझे इस तरह प्रताड़ित किया गया। अगर मेरे साथ ऐसा हो सकता है, फिर मैं किस मुँह से दूसरे महिलाओं को पार्टी में शामिल होने के लिए कहूँगी?” उन्होंने कहा कि श्रीनिवास BV जैसे नेताओं के कारण कांग्रेस अब सुरक्षित जगह नहीं रही। इस प्रकरण पर कांग्रेस आलाकमान का कोई बयान सामने नहीं आया है।

पंजाब की बजाए असम मुख्यमंत्री को धमकी क्यों? ‘सुनो CM सरमा… तुम्हें अंजाम भुगतना होगा’: खालिस्तानी संगठन SFJ ने असम मुख्यमंत्री को दी धमकी

आम आदमी पार्टी द्वारा खालिस्तान को गुप्त समर्थन पंजाब चुनाव से पहले कई बार उजागर होता रहा है, पंजाब चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी का झंडा सफ़ेद रंग था, लेकिन पंजाब चुनाव में झंडे में पीला रंग आने से खालिस्तान से सम्बन्ध होने की शंका पैदा हो गयी है। फिर खालिस्तानियों ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को भी धमकी दी है। खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) ने धमकी देते हुए कहा कि उसकी लड़ाई भारत सरकार से है। इसलिए सीएम सरमा बीच में ना पड़ें।


पत्रकारों को फोन करके दी धमकी में पन्नू ने यह भी कहा कि भगोड़े अमृतपाल के साथियों को जेलों में प्रताड़ित किया जा रहा है। उसने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर असम सरकार जेल में बंद अमृतपाल के 6 साथियों को प्रताड़ित करती है तो इसके लिए उसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

पन्नू ने सरमा को सलाह दी है कि खालिस्तानी समर्थकों की लड़ाई केंद्र सरकार के साथ है। इसलिए वह बीच में पड़कर हिंसा का शिकार ना बनें। उसने कहा कि खालिस्तानी समर्थक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया से पंजाब को भारत से मुक्त कराना चाहते हैं।

अमृतपाल के कुछ साथियों को असम की जेल में रखा गया है। वहीं, अमृतपाल की तलाश में पुलिस और NIA लगातार दबिश दे रही हैं। हालाँकि, उसका सही लोकेशन एजेंसियों को नहीं मिल रहा है और वह अभी तक बचने में सफल रहा है।

हाल ही में खबर आई थी कि अमृतपाल पंजाब में ही कहीं छिपा हुआ है। ऐसे में पुलिस ने मानसा में नाकाबंदी बढ़ा दी है। इसके अलावा, राज्य भर में जगह-जगह अमृतपाल और उसके साथी पप्पलप्रीत का पोस्टर लगा दिया है। ये पोस्टर पुलिस बैरिकेडिंग्स पर भी लगाए गए हैं।

‘वारिस पंजाब दे’ के मुखिया अमृतपाल के खिलाफ 18 मार्च 2023 को पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी। उसके पहले गिरफ्तार किए गए अपने कुछ समर्थकों ने छुड़ाने के लिए अमृतसर के पास अजनाला पुलिस स्टेशन पर अपने साथियों के साथ सशस्त्र धावा बोल दिया था।

उस वक्त पुलिस ने दबाव में उसके साथियों को जेल से रिहा कर दिया था। उसके कुछ सप्ताह बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसका पीछा करना शुरू किया, लेकिन वह चकमा देकर भाग निकला। तब वह अपना वेश बदलकर और अलग-अलग गाड़ियों में भाग रहा है।

दिल्ली विधानसभा के बाहर एक शब्द मेरे खिलाफ झूठ बोलकर दिखाएं : केजरीवाल को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दी खुली चुनौती


दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल राजनीति का कीचड़ साफ करने आए थे, लेकिन राजनीति में उतरते ही खुद कीचड़ फैलाना शुरू कर दिया। सस्ती लोकप्रियता के लिए उन्होंने झूठे और आधारहीन आरोप लगाने में मर्यादा की सारी सीमाओं को लांघ दिया। बिना किसी ठोस सबूत के दूसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाना और फिर माफी मांगना उनकी आदत बन चुकी है। कोर्ट से कई बार झटका खाने के बाद अब वो विधानसभा के कवच में छिपकर दूसरों पर हमले कर रहे हैं। केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा को निशाना बनाते हुए कहा था सरमा के खिलाफ कई राज्यों में भ्रष्टाचार के मामले दर्ज है। केजरीवाल के इस आरोप से भड़के हिमंता बिस्वा सरमा ने केजरीवाल को खुलेआम ललकारा है। उन्होंने चुनौती दी है कि केजरीवाल विधानसभा के बाहर उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर दिखाए।

केजरीवाल के असम दौरे से पहले हिमंता बिस्वा सरमा की चेतावनी

केजरीवाल 02 अप्रैल, 2023 को पंजाब के सीएम भगवंत मान के साथ असम का दौरा करेंगे। दोनों मुख्यमंत्री गुवाहाटी के भरलुमुख स्थित सोनाराम उच्च विद्यालय में एक रैली को संबोधित करेंगे। इस रैली से पहले ही अमस के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने केजरीवाल को चेतावनी दे दी है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि क्या मेरे खिलाफ देश के किसी हिस्से में मामले दर्ज हैं? मैं मानहानि का मामला दर्ज कराना चाहता हूं लेकिन अरविंद केजरीवाल कायर की तरह विधानसभा में बोल रहे हैं। इसलिए उन्हें 2 अप्रैल को असम आने दीजिए और यह कहने दीजिए कि हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हैं। मैं उनके खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करा दूंगा, जैसा मैंने मनीष सिसोदिया के खिलाफ किया है।

केजरीवाल को विधानसभा में झूठे आरोप नहीं लगाने की नसीहत

हिमंता बिस्वा सरमा ने केजरीवाल से सवाल किया कि वह बताएं कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का कौन सा मामला कहां दर्ज है? केजरीवाल को नसीहत देते हुए असम के सीएम ने कहा कि दिल्ली विधानसभा में बैठ कर इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए। सबको पता है कि अपना बचाव करने के लिए वहां मैं मौजूद नहीं हूं। मैं अपना पक्ष नहीं रख सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिर्फ लोगों को गुमराह करने के लिए मेरे खिलाफ बयान दे रहे हैं। पूरे देश में मेरे खिलाफ कोई मुकदमा नहीं है, सिर्फ कुछ कांग्रेसियों ने मेरे खिलाफ झूठे मुकदमे करा दिए हैं।

केजरीवाल ने विधानसभा में सरमा पर लगाया था भ्रष्टाचार का आरोप

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में कहा था कि ईडी और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों ने नारायण राणे, हिमंता बिस्वा सरमा और शुभेंदु अधिकारी जैसे भ्रष्टाचारियों को एक साथ ला दिया। केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि भ्रष्टाचार में लिप्त होने और कार्रवाई से बचने के लिए ये लोग बीजेपी में शामिल हो गए। इसके साथ ही केजरीवाल ने कहा था कि सरमा के खिलाफ अन्य राज्यों में भी मामले दर्ज हैं। इसी तरह हताश अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में प्रधानमंत्री मोदी पर भी भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने अडानी को लेकर जो आरोप लगाया, वो काफी हास्यास्पद था। बीजेपी नेताओं ने केजरीवाल को विधानसभा से बाहर वहीं आरोप दोहराने की चुनौती दी। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने ट्वीट कर लिखा कि केजरीवाल में दम हो तो जो बकवास विधानसभा में की है वो एक बार बाहर मंच से या मीडिया की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल दें। नहीं तो मतलब आम आदमी पार्टी डरपोक है।

मनीष सिसोदिया की तरह मानहानि का केस करने की चेतावनी

इससे पहले हिमंता बिस्वा सरमा दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री और फिलहाल जेल में बंद मनीष सिसोदिया के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करा चुके हैं। पिछले साल सरमा की पत्नी भुइयां सरमा ने 21 जून को कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले के सिविल जज नंबर एक की अदालत में सिसोदिया के खिलाफ 100 करोड़ रुपये की मानहानि का मामला भी दायर किया था। इसके बाद सिसोदिया ने आपराधिक मानहानि के मामले को रद्द करने के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट में अपील की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने मामला रद्द करने से इनकार कर दिया था। सिसोदिया ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने मनीष सिसोदिया की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सिसोदिया को बड़ा झठका लगा।

मानहानि मामले में फंसे सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट से लगा था झटका

केजरीवाल के करीब और दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने हिमंता बिस्वा सरमा पर आरोप लगाया था कि असम के स्वास्थ्य मंत्री रहे बिस्व सरमा ने अपनी पत्नी और बेटे के व्यापारिक साझेदारों की कंपनियों को पीपीई किट की आपूर्ति करने के लिए ठेके दिये थे। मनीष सिसोदिया ने बिस्वा सरमा की पत्नी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसी मामले में बिस्वा सरमा ने मनीष सिसोदिया पर मानहानि का मामला दर्ज किया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान बिस्वा सरमा के वकील ने बताया था कि जेसीबी इंडस्ट्रीज ने कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी गतिविधियों के तहत NHM असम को लगभग 1500 पीपीई किट की आपूर्ति की थी। उसका पीपीई किट के आपूर्ति से संबंधित टैंडर से कोई लेनादेना नहीं है। असम को पीपीई किट की आपूर्ति के लिए की गई बोली में कंपनी ने हिस्सा ही नहीं लिया था और न ही उन्होंने कोई बिल पेश किया, जिससे कि उनकी भागीदारी का पता चल सके।

असम में 600 मदरसे बंद, सारे बंद करने का इरादा: कर्नाटक में असम मुख्यमंत्री सरमा, कहा- कांग्रेस आज की मुगल

असम में करीब 600 मदरसे बंद किए गए हैं। राज्य सरकार का इरादा सभी मदरसों को बंद करने का है। यह बात असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कही है। वे कर्नाटक के बेलगावी में बीजेपी की एक सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारतीय संस्कृति के लिए खतरा बताते हुए कांग्रेस को आज के दौर का मुगल करार दिया।

सरमा ने कहा कि कांग्रेस आज के समय की मुगल है। वह देश को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। सभा को संबोधित करते हुए असम के मुख्यमंत्री ने नए भारत की बात करते हुए कहा कि एक समय दिल्ली के बादशाह मंदिर तोड़ने की बात किया करते थे। आज नरेंद्र मोदी के दौर में हम मंदिर निर्माण की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए भारत की अर्थव्यवस्था आज ब्रिटेन से मजबूत है। नए भारत में कोविड से मुकाबले के लिए अपनी वैक्सीन का निर्माण किया जाता है। नए भारत में पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब दिया जाता है। कांग्रेस इसी नए भारत को कमजोर करने की साजिश कर रही है। पहले भारत को कमजोर करने का काम मुगल किया करते थे।

हिमंता ने पूछा कि क्या वे लोग मुगल के बच्चे हैं जो बाबरी के लिए तो बोलते हैं, लेकिन राम मंदिर की बात नहीं करते। उन्होंने लोगों से छत्रपति शिवाजी और स्वामी विवेकानंद का भारत बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ देने की अपील की। असम मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में बहुत सारे लोग हैं जो गर्व से कहते हैं कि मैं मुस्लिम। मैं ईसाई हूँ। इससे मुझे आपत्ति नहीं है। लेकिन हमें ऐसे लोगों की जरूरत है जो गर्व से कह सके कि मैं हिंदू हूँ।

असम के मुख्यमंत्री ने राज्य में 600 मदरसों को बंद करने की जानकारी देते हुए कहा कि इसकी जरूरत नहीं है। वे सभी मदरसों को बंद करना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि मदरसों की जगह स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी खुले। सीएम सरमा ने बांग्लादेश से होने वाले घुसपैठ को खतरनाक करार दिया। कहा कि बांग्लादेश से असम में घुसपैठ करने वाले संस्कृति के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।

असम : 142 लोगों ने ईसाई मजहब को अलविदा कह हिन्दू धर्म अपनाकर की घर वापसी

असम में 142 लोगों ने घर वापसी कर ली। इन सभी ने ईसाइयत छोड़ सनातन धर्म को अपनाया है। इसे असम में हुई अब तक सबसे बड़ी घर-वापसी कहा जा रहा है। इसको लेकर राज्य की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार भी चर्चा में है। चर्चा का कारण यह है कि घर-वापसी को भाजपा हिमंता सरकार की नीतियों का प्रभाव बता रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घर-वापसी का यह कार्यक्रम सोमवार (27 फरवरी, 2023) को मोरीगाँव जिले के जागीरोड़ के तिवासोंग गाँव में हुआ। यहाँ सनातन धर्म संस्कृति के अनुसार यज्ञ तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के बाद सभी लोगों ने हिंदू धर्म अपना लिया।

इस घर-वापसी को लेकर गोबा देवराजा राज परिषद के महासचिव जुरसिंह बोरदलोई का कहना है कि इस घर-वापसी कार्यक्रम में जनजाति समुदाय के 142 लोगों ने अपनी इच्छा से घर वापसी की है। स्थानीय तिवा जनजाति के लोगों ने प्रलोभन व अन्य कारणों के चलते ईसाई मजहब अपना लिया था। लेकिन। अब इन लोगों ने गोबा देवराजा राज परिषद संस्था से संपर्क किया था। इसके बाद यह कार्यक्रम आयोजित कर घरवापसी कराई गई।

बोरदलोई ने यह भी कहा कि घर-वापसी करने वाले इन सभी लोगों ने हमेशा हिंदू धर्म में आस्था और विश्वास रखने का वचन दिया है। घर-वापसी करने वाले तिवा जनजाति के ये लोग जन्म से हिंदू थे। लेकिन इनके दादा-दादी ने गरीबी तथा शिक्षा की कमी के चलते भ्रमित होकर ईसाई बन गए थे। बोरदलोई ने यह भी कहा है कि वह और उनका संगठन घरवापसी करने वाले सभी लोगों का हरसंभव सहयोग करेंगे।

गोबा देवराजा राज परिषद के महासचिव जुरसिंह बोरदलोई ने यह भी कहा है कि कहा है कि सभी 142 लोगों के जीवन में किसी प्रकार की समस्या न हो इसके लिए वह प्रयास करते रहेंगे। सभी को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

बोरदलोई ने दावा किया है कि तिवा जनजाति के करीब 1100 परिवार के लोगों ने सनातन धर्म में घर-वापसी करने का फैसला किया है। घर-वापसी करने वालों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, इसके लिए तिवा परिषद द्वारा स्कूलों की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा इन सभी के नाम मतदाता सूची में जोड़ने तथा राशनकार्ड बनवाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

जनजातियों के हित की बात करने वाले जनजाति सुरक्षा मंच असम और तिवा देवराजा परिषद ने माँग की है कि असम सरकार ईसाई धर्म अपनाने वालों का अनुसूचित जनजाति का दर्जा रद्द कर दे, ताकि उन्हें अल्पसंख्यक और अनुसूचित जनजाति होने का दोहरा लाभ ना मिल सके। वहीं, भाजपा विधायक पीयूष हजारिका ने दावा किया है कि हिमंता सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर इन सभी ने घर-वापसी की है।

FIR होने पर पवन खेड़ा ने बिना शर्त माँगी माफी… : असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमाबोले- उम्मीद है अब असभ्य भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी माँग ली है। इस संबंध में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने जानकारी दी। इससे पहले खेड़ा को रायपुर जाते समय विमान से उतार कर गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी।

सीएम सरमा ने 24 फरवरी 2023 को ट्वीट कर कहा, “आरोपित (कांग्रेस नेता पवन खेड़ा) ने बिना शर्त माफी माँग ली है। हम आशा करते हैं कि सार्वजनिक स्थानों की शुचिता को बनाए रखते हुए अब से कोई भी राजनीतिक बयानबाजी में वे असभ्य भाषा का उपयोग नहीं करेंगे।”

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने ट्वीट में आगे कहा, “असम पुलिस इस मामले को उसके तार्किक अंत तक फॉलो करेंगे।” माना जाता है कि माफी माँगने के बाद भी पवन खेड़ा की मुश्किलें कम नहीं होंगी।

प्रधानमंत्री को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में तीन एफआईआर दर्ज की गई थी। एक एफआईआर लखनऊ में, दूसरा वाराणसी में और तीसरा असम के दीमा हसावो में दर्ज कराई गई थी। असम में दर्ज की गई एफआईआर के संदर्भ में असम पुलिस ने 23 फरवरी 2023 को दिल्ली पुलिस के सहयोग से पवन खेड़ा को गिरफ्तार कर लिया था।

उबलते हुए खून की रवानी हैं मोदी इस देश के युवा की जवानी हैं मोदी सोये हुए थे जो अब तक हिन्दुस्तानी उनके जाग उठने की कहानी हैं मोदी

जिस समय खेड़ा को गिरफ्तार किया, उस समय वे कांग्रेस के अधिवेशन में जाने के लिए रायपुर की फ्लाइट में सवार थे। उनके साथ कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और सुप्रिया श्रीनेत सहित कई वरिष्ठ नेता सवार थे। खेड़ा की गिरफ्तारी के बाद कॉन्ग्रेस के नेता ने एयरपोर्ट पर ही धरना देना शुरू कर दिया।

इसके बाद कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाकर अर्जेंट सुनवाई के लिए लिस्टिंग की। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अदालत ने मामले में सुनवाई की और पवन खेड़ा को गिरफ्तारी से राहत देते हुए अंतरिम जमानत दे दी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा को हिदायत देते हुए सार्वजनिक भाषा की मर्यादा को बनाए रखने की नसीहत दी।

इस दौरान पवन खेड़ा ने तीनों एफआईआर को क्लब करने का भी आग्रह किया। खेड़ा के इस आग्रह को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही कोर्ट को अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि पवन खेड़ा ने बिना शर्त अपने बयान के लिए माफी माँग ली है।

‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस(INC)’ के मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री के लिए नरेंद्र ‘गौतम दास’ मोदी नाम का प्रयोग किया। पीएम अपने नाम में अपने पिता दामोदर दास मोदी का नाम लगाते हैं, इसीलिए उनका नाम नरेंद्र दामोदर दास मोदी है। कांग्रेस प्रवक्ता ने नरेंद्र दामोदर दास मोदी की जगह कई बार नरेंद्र गौतम दास मोदी कहा था।

असम : टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार, 2 मदरसे सील: आतंकी संगठन अल कायदा ने ‘गो टू असम’ का दिया नारा

चित्र साभार- ANI
'हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या' इस्लामिक स्कॉलर्स जब भी टीवी पर मदरसों में हो रही तालीम पर बात होने पर कहते हैं कि कोई एक मदरसा दिखाओं, लेकिन असम पुलिस उन्हें दिखा ही नहीं, मदरसे भी सील कर रही है। और अब तक सैंकड़ों मदरसे बंद किए जा चुके हैं। जुलाई 28 को एक चैनल पर चर्चा के दौरान एडवोकेट अश्विनी कुमार ने बताया कि भारत में 3 लाख से अधिक मदरसे हैं, इतने किसी भी मुस्लिम देश में नहीं। पता नहीं मीडिया भी अपनी TRP के चक्कर में इन समाचारों को बॉयकॉट कर रहा है और यदि स्थिति विपरीत होती देखो हर चैनल बढ़चढ़ कर उस समाचार को दिखाता।  
असम पुलिस (Assam Police) ने आतंकी गठजोड़ का खुलासा करते हुए अल कायदा से जुड़े अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) के 12 सदस्यों को अब तक गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारियाँ मोरगाँव, गुवाहाटी, बारपेटा और गोलपारा जिलों से की गई हैं। वहीं, एक को पश्चिम बंगाल के कोलकाता से गिरफ्तार किया गया है।

एक दिन पहले असम पुलिस ने मोरीगाँव जिले के मोरियाबारी के एक मदरसा के टीचर मुफ्ती मुस्तफा को गिरफ्तार था। नेटवर्क से जुड़े बाकी फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है। गिरफ्तार आरोपितों पर UAPA के तहत कार्रवाई की गई है।

बारपेटा से गिरफ्तार हुए आरोपितों के नाम 25 वर्षीय जुबेर खान, 27 वर्षीय रफीकुल इस्लाम, 20 वर्षीय दीवान हमीदुल इस्लाम, 42 वर्षीय मोइनुल हक, 37 वर्षीय कज़ीबुर हुसैन, 50 वर्षीय मुजीबुर रहमान, 34 साल के शाहजहाँ अली और शहनूर आलम हैं। जुबेर खान को छोड़ कर बाकी सभी स्थानीय बरपेटा थानाक्षेत्र के ही रहने वाले हैं। पुलिस के मुताबिक इन आरोपितों पर UAPA एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अल-कायदा के वर्तमान मुखिया अल जवाहिरी ने ‘गो टू असम’ का एलान किया है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियाँ और अधिक सतर्क हो गई हैं। मोरीगाँव में जमीउल हुडा मदरसा चलाने वाले मुफ़्ती मुस्तफा की गिरफ्तारी के बाद 39 साल के अफसरूद्दीन भुयान को भी मोरीगाँव में गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा एक अन्य गिरफ्तारी अब्बास अली की हुई है। इन सभी पर एक फरार आतंकी महबूब उर रहमान को शरण देने का आरोप है।

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असम : मदरसे से चल रहा था आतंकी गिरोह, ‘हदीस’ पढ़ा कर युवाओं को भड़का रहे जिहादी मुफ़्ती मुस्तफा गिरफ

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मोरीगाँव की SP अपर्णा के मुताबिक, पकड़े गए आरोपितों से उनके बाकी नेटवर्क और फंडिंग आदि के स्रोतों की जानकारी जुटाई जा रही है। अब तक पुलिस द्वारा 2 मदरसों को सील किया जा चुका है। उसमें पढ़ने वाले बच्चों को सरकारी स्कूल में शिफ्ट किए जाने के निर्देश मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए हैं।

दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को हो सकती है जेल

हिमंता बिस्वा सरमा (बाएँ) और मनीष सिसोदिया (फोटो साभार: इंडिया.कॉम/ टेलीग्राफ)
वामपंथी पोर्टल द वायर की रिपोर्ट को आधार बनाकर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुयान सरमा के खिलाफ पीपीई किट में भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के मामले में दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया बुरे फँस गए हैं। 1 जुलाई 2022 को सीएम सरमा ने उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation) का केस गुवाहाटी की कामरूप (ग्रामीण) कोर्ट में दर्ज कराया है। सिसोदिया के खिलाफ ये दूसरा केस है। इससे पहले सीएम हिमंता की पत्नी रिंकी भुयान सरमा ने 100 करोड़ का मानहानि का केस फाइल किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की याचिका पर कोर्ट ने 22 जुलाई को सुनवाई के लिए तारीख तय कर दिया है। अब अगर आप मंत्री मनीष सिसोदिया दोषी करार दिए जाते हैं तो उन्हें दो साल तक की जेल की हवा खानी पड़ सकती है।

सरमा पर लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए वरिष्ठ वकील देवजीत लोन सैकिया ने कहा, “सारे आरोप झूठे हैं। पीपीई किट बनाने वाली उनकी कंपनी ने कभी कोई बिल नहीं दिया। उस समय, एनएचएम ने पीपीई व्यवसाय में सभी से किट की आपूर्ति करने का अनुरोध किया था और उन्होंने अपने सीएसआर के तहत लगभग 1500 पीपीई किट की आपूर्ति की थी। इसके लिए एक पैसा नहीं लिया गया।” सैकिया के मुताबिक, आरोप साबित होने पर सिसोदिया को दो साल की कैद और जुर्माना लग सकता है।

क्या है पूरा मामला

1 जून 2022 को विवादित पोर्टल ने एक रिपोर्ट पब्लिश की, जिसमें उसने आरोप लगाया कि कथित तौर पर रिंकी भुयान के मालिकाना हक वाली वाली एक कपंनी को कोरोना से निपटने के लिए पीपीई किट और दूसरे कोविड से जुड़े सामानों की आपूर्ति का ऑर्डर मिला था। रिपोर्ट के मुताबिक, असम में जब सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री थे और हिमंता बिस्वा सरमा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री थे, तो उनकी पत्नी रिंकी भुयान सरमा की कंपनी को बिना किसी अनुभव के ही 5,000 पीपीई किट, मेडिकल उपकरण और अन्य सुरक्षा के सामानों की आपूर्ति करने का ऑर्डर दिया गया था।

बाद में रिंकी भुयान सरमा ने द वायर की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों का खंडन किया और कहा कि ये पूरी तरह से फ्री था। बावजूद इसके 4 जून 2022 को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और हिमंत बिस्वा सरमा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। बाद में सीएम हिमंता ने आरोपों का खंडन करते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी।

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असम : मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी सरमा ने मनीष सिसोदिया पर किया 100 करोड़ रूपए की मानहानि का मुकदमा

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असम : मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी सरमा ने मनीष सिसोदिया पर किया 100 करोड़ रूपए की मानहानि का मुकदमा

22 जून 2022 को सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुयान ने सिसोदिया के खिलाफ 100 करोड़ रुपए का मानहानि का केस कर दिया। अब सरमा ने भी सिसोदिया के खिलाफ एक्शन ले लिया है। हालाँकि, पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने भाजपा नेताओं अरुण जेटली और नितिन गडकरी के खिलाफ भी झूठा आरोप लगाया था। भाजपा नेता द्वारा मानहानि का मामला दर्ज कराने के बाद दिल्ली के सीएम को माफी माँगनी पड़ी थी।

दिल्ली के डिप्टी CM सिसोदिया को असम के CM सरमा ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

अंग्रेजी में कहावत है "hit & run" और आम आदमी पार्टी इसी नीति पर चल जनता को भ्रमित करती आ रही है। जिसे जनता सच मान बैठती है, लेकिन जब इन पर कोई कानूनी कार्रवाई होती है तब माफ़ी मांगते नज़र आते हैं। अब चर्चा है कि क्या अरुण जेटली और नितिन गडकरी की तरह असम मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा माफ़ी मांगने पर मुकदमा वापस लेंगे या फिर सिसोदिया को सजा दिलवाकर ही दम लेंगे?
5 जून को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर दस्तावेज जारी किए। एक ट्वीट में सीएम सरमा ने कहा, “कंपनी ने असम के एनएचएम को लिखा कि कोविड वॉरियर्स के लिए लगभग 1,500 पीपीई किट की आपूर्ति को सीएसआर योगदान के रूप में माना जाना चाहिए और इसलिए सरकार द्वारा एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया जाना चाहिए।”

सीएम सरमा ने अपनी पत्नी रिंकी भुइयां सरमा की कंपनी जेसीबी इंडस्ट्रीज द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) असम को भेजे गए 26 मार्च 2020 के पत्र की स्कैन फोटो भी जोड़ा है। पत्र में जेसीबी इंडस्ट्रीज ने एनएचएम से कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत 1485 पीपीई किट स्वीकार करने का अनुरोध किया था। पत्र में लिखा है, “हमने एमरेलिस हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड की कुल 1485 पीपीई किट वाली एक खेप पहुँचाई है।”

सरमा ने 4 जून को डिप्टी सीएम सिसोदिया पर बदनाम करने का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। यह सब तब शुरू हुआ जब वामपंथी मीडिया पोर्टल ‘द वायर’ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें आरोप लगाया गया कि सीएम सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा की स्वामित्व वाली एक फर्म को पीपीई किट और कोविड-19 संबंधित अन्य सामानों का आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किए बिना आपूर्ति करने का आदेश दिया गया था।

रिंकी भुइयां सरमा ने द वायर की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों का खंडन किया और कहा कि उन्होंने पीपीई किट की आपूर्ति के लिए एक पैसा भी नहीं लिया। उसने कहा कि उसने सीएसआर के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को पीपीई किट दान की थी और उसके लिए कोई भुगतान नहीं लिया गया था।

वायर की रिपोर्ट का उपयोग करते हुए 4 जून 2022 को दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और हिमंत बिस्वा सरमा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमंत बिस्वा सरमा ने उनकी पत्नी और करीबी सहयोगियों के स्वामित्व वाली कंपनियों को सरकारी खरीद के ठेके दिए। उन्होंने इसकी कॉपी भी पोस्ट की।

इन आरोपों का जवाब देते हुए, हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया, “ऐसे समय में जब पूरा देश 100 से अधिक वर्षों में सबसे खराब महामारी का सामना कर रहा था, असम के पास शायद ही कोई पीपीई किट था। मेरी पत्नी ने आगे आने का साहस किया और जान बचाने के लिए सरकार को लगभग 1500 मुफ्त में दान दिया। उसने एक पैसा भी नहीं लिया।”

असम : 80 में से 77 निकायों पर BJP+ का कब्ज़ा, 977 में 807 वार्ड भी जीते

                                          असम निकाय चुनावों में BJP का धमाकेदार प्रदर्शन
देश के 5 राज्यों में विधानसभाओं के चुनाव के नतीजे 10 मार्च के रुझान के अनुरूप आ रहे हैं, लेकिन उससे पहले बीजेपी ने असम के निकाय चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल करके अपने कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया है। आज 9 मार्च, 2022 को घोषित चुनाव परिणामों में भाजपा ने असम में कुल 80 में से 75 नगर निकायों पर कब्जा कर लिया है। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को यहाँ बड़ी निराशा हाथ लगी है।

80 में से 77 नगर निकाय में बीजेपी+ की जीत

असम राज्य चुनाव आयोग (ASEC) की ओर से आज घोषित किए गए चुनाव परिणामों के अनुसार, बीजेपी ने असम के नगर निकाय चुनावों में कुल 80 में से 75 नगर निकायों पर कब्जा कर लिया है। भाजपा साथ गठबंधन में रहे असम गण परिषद ने 2 नगर पालिकाओं में जीत हासिल की है। वहीं कांग्रेस की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। वह 80 में से केवल 1 नगरपालिका में ही जीत दर्ज कर पाई है जबकि 2 नगरों में अन्य दलों ने जीत दर्ज की है।
आयोग ने बताया कि नगर निकाय चुनावों में कुल 977 में से 807 वार्डों पर बीजेपी ने सहयोगी असम गण परिषद के साथ जीत दर्ज की है। बीजेपी ने जहाँ 742 वार्डों में वहीं असम गण परिषद ने 65 वार्डों पर जीत दर्ज की है। इस चुनाव में कांग्रेस ने 71 और अन्य ने 99 वार्डों में जीत हासिल की है। ASEC के नतीजों के मुताबिक मरियानी म्युनिसिपल बोर्ड के 10 में से 7 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। वहीं बची हुई 3 सीटों पर यहाँ भी बीजेपी ने कब्जा जमाया है। इन चुनावों में 2 नगरों में त्रिशंकु नतीजे भी सामने आए हैं।

सीएम हिमंता सरमा ने कार्यकर्ताओं को दी बधाई

चुनाव परिणामों पर टिप्पणी करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “यह विशाल जनादेश ग्रोथ और डेवलपमेंट के लिए है। इससे पार्टी को नए जोश के साथ प्रगति के एजेंडे को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलेगी।”
सरमा ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा, “मैं सभी @BJP4Assam कार्यकर्ताओं और नेताओं को बधाई देता हूँ, जिन्होंने आदरणीय पीएम नरेंद्र मोदी जी के विकास के आदर्शों को फैलाने के लिए अथक प्रयास किया। मैं असम के लोगों को बीजेपी और उसके सहयोगियों के नगर निकाय चुनावों में प्रचंड जीत के लिए कृतज्ञता में सिर झुकाता हूँ।”
उन्होंने कहा कि मैं नगर निकाय चुनावों में भाजपा की असम इकाई और उसके सहयोगियों को शानदार जीत दिलाने के लिए राज्य के लोगों का आभार व्यक्त करता हूँ। वहीं राज्य में कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त के बाद पार्टी के प्रदेश प्रमुख भूपेन कुमार बोरा ने कहा कि राजनीति में उतार-चढ़ाव एक निरंतर प्रक्रिया है और हर पार्टी को अच्छे-बुरे दौर से गुजरना पड़ता है।
असम में नगर निकाय चुनावों के इतिहास में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के जरिए 6 मार्च, 2022 को चुनाव हुआ था। इनके जरिए राज्य भर में 80 नगरपालिका बोर्डों के लिए मतदान किया गया था। इस चुनाव में राज्य के करीब 70 प्रतिशत मतदाताओं वोट डाला था।