Showing posts with label narendra modi. Show all posts
Showing posts with label narendra modi. Show all posts

कर्नाटक सेक्स सीडी कांड : कांग्रेस नेता शिवकुमार की पोल खुली, मोदी को बदनाम करने का दिया था टास्क

     सलाखों के पीछे देवराजे गौड़ा, डीके शिवकुमार और प्रज्ज्वल रेवन्ना (साभार: Vartha Bharathi and OpIndia)
बीजेपी नेता और वकील देवराजे गौड़ा ने शुक्रवार (17 मई) को एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी को बदनाम करने के लिए 100 करोड़ रुपए देने की पेशकश की थी। गौड़ा ने कहा कि शिवकुमार ने उन्हें अग्रिम राशि के रूप में 5 करोड़ रुपए भी भेजे थे।

देवराजे गौड़ा का आरोप है कि कांग्रेस नेता शिवकुमार ने पूर्व एमएलसी एमए गोपालस्वामी को उनसे बातचीत करने के लिए नियुक्त किया था। गौरतलब है कि शुक्रवार (17 मई 2024) को जब उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा था तो उन्होंने पुलिस वाहन से पत्रकारों से बात करते हुए ये टिप्पणी की। उन्हें लगभग एक सप्ताह पहले यौन शोषण के आरोप में कॉन्ग्रेस सरकार ने गिरफ्तार किया है।

देवराजे गौड़ा ने प्रज्ज्वल रेवन्ना से जुड़े अश्लील वीडियो और यौन शोषण मामले की ओर जनता का ध्यान आकर्षित किया था। गौड़ा के अनुसार, प्रज्ज्वल रेवन्ना मामले से संबंधित घटनाक्रम को सँभालने के लिए एन चेलुवरयास्वामी, कृष्णा बायरे गौड़ा और प्रियांक खड़गे सहित चार मंत्रियों की एक टीम बनाई गई थी।

हासन में अदालत परिसर से ले जाए जाने के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए गौड़ा ने कहा, “मुझे एक बयान देने के लिए कहा गया था कि यह एचडी कुमारस्वामी ही थे, जिन्होंने पेन ड्राइव में रखे सेक्स वीडियो प्रसारित किए थे (इसमें कुमारस्वामी के भतीजे प्रज्वल रेवन्ना, पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा के पोते भी शामिल हैं)। लेकिन, प्रज्ज्वल रेवन्ना के ड्राइवर कार्तिक गौड़ा से पेन ड्राइव लेकर सारी योजना बनाने वाले शिवकुमार थे।”

उन्होंने कहा, “उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, एचडी कुमारस्वामी और भाजपा को बदनाम करने के लिए बड़े पैमाने पर योजना बनाई थी। उन्होंने मुझे 100 करोड़ रुपए की पेशकश की और बॉरिंग क्लब के कमरा नंबर 110 में एडवांस के तौर पर 5 करोड़ रुपए भी भेजे। चन्नारायपटना के एक स्थानीय नेता गोपालस्वामी को इस सौदे पर बातचीत करने के लिए भेजा गया था।”

गौड़ा ने आगे कहा, “जब मैंने उनकी योजनाओं का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया तो उन्होंने पहले मुझे एक मामले में फँसाया, लेकिन उसमें कोई सबूत नहीं मिला। बाद में उन्होंने मुझे यौन उत्पीड़न के मामले में फँसा दिया। जब ये चाल भी नाकाम हो गई तो उन्होंने मेरे खिलाफ रेप का केस दर्ज करा दिया। मुझसे चार दिनों तक पूछताछ की गई, लेकिन उनसे कुछ पता नहीं चल सका।”

देवराजे गौड़ा ने पत्रकारों से बातचीत करते समय जोर देकर कहा, “मेरे पास शिवकुमार की बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग है। मैं जेल से बाहर आते ही उसे जारी कर दूँगा और कॉन्ग्रेस की सरकार गिर जाएगी।” इससे पहले 6 मई को गौड़ा ने कहा था कि यौन उत्पीड़न के वीडियो वाली पेन ड्राइव जारी करने के पीछे शिवकुमार का हाथ था। कॉन्ग्रेस पार्टी का मुख्य निशाना प्रधानमंत्री मोदी हैं।

उन्होंने कहा था, “मुझे सेक्स स्कैंडल की जाँच कर रही SIT पर भरोसा नहीं है। मैं सारे सबूत सीबीआई को सौंप दूँगा। मेरे पास मौजूद वीडियो उन वीडियो से अलग हैं, जो जारी किए गए हैं।” बता दें कि 33 वर्षीय प्रज्वल रेवन्ना पर कई महिलाओं के यौन शोषण के आरोप हैं। प्रज्वल जर्मनी के फ्रैंकफर्ट भाग गए हैं। उनके खिलाफ इंटरपोल ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है।

भारत विरोधी तत्वों ने किया इस्तेमाल, मैं नहीं चाहती कि कोई और युवा फँसे: शेहला रशीद, जेएनयू छात्र संघ की पूर्व उपाध्यक्ष

शेहला रशीद और अमित शाह (साभार: आउटलुक/एबीपी)
जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष रहीं शेहला रशीद को कभी मोदी विरोधी चेहरे के तौर पर जाना जाता था। अब वो पिछले काफी समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की तारीफ कर रही हैं। अचानक वो क्यों बदलीं और कश्मीर में ऐसा क्या देखा कि शेहला राशिद मोदी विरोधी की जगह मोदी समर्थक हो गई? ऐसे कई सारे सवालों के जवाब उन्होंने एक पॉडकास्ट में दिया है। उन्होंने बताया है कि कश्मीर में अगर शांति वापस लौटी है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले और अमित शाह की इच्छाशक्ति की वजह से। इसके लिए कश्मीर की माताएँ हमेशा दोनों की आभारी रहेंगी।

शेहला रशीद ने ANI की संपादक स्मिता प्रकाश के साथ पॉडकास्ट में चर्चा के दौरान कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जमकर तारीफ की। उन्होंने मोदी को सेल्फलेस मैन(स्वार्थहीन व्यक्ति) कहा। राशिद ने कहा, “अभी हम सबने देखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने देश की जनता के हित में तमाम बेहतरीन फैसले किए। उन्होंने कभी खुद को ऊपर नहीं रखा। उन्होंने जो भी काम किया, उसमें उन्होंने सिर्फ जनता के हित को ध्यान में रखा। वो सिर्फ राष्ट्र हित में काम करते हैं। उन्होंने कश्मीर को हमेशा के लिए बदलने का काम किया।”

रशीद ने मुक्तकंठ से की गृहमंत्री अमित शाह की प्रशंसा

शेहला राशिद ने पॉडकास्ट में कहा, “कश्मीर को बदलने के लिए गृहमंत्री अमित शाह की तारीफ करनी होगी। उन्होंने बाकी चीजों की परवाह न करते हुए कश्मीर की बेहतरी के लिए काम किया। कश्मीरी माताएँ राज्य में शांति स्थापना के लिए अमित शाह को हमेशा आशीर्वाद देंगी। जिन माताओं ने अपने बच्चों को आतंकवाद में खोया है, वो अमित शाह की हमेशा तारीफ करेंगी। उन्होंने कश्मीर में शांति लौटाई है। पीढ़ियों तक उनकी तारीफ होगी।” शेहला ने कहा कि जिस तरह की वादियों में शांति लौटी है, वो हमेशा बनी रहे।

भारत विरोधी तत्वों ने किया इस्तेमाल, मैं नहीं चाहती कि कोई और युवा फँसे: रशीद

शेहला रशीद ने बताया कि उन्हें किस तरह इस्तेमाल किया गया। कैसे देश विरोधी ताकतों ने उनसे वो बातें कहलवाईं, जो सच थी ही नहीं। शेहला ने कहा, “मैंने जो बातें कभी गलती से कही थी, उसका इस्तेमाल एंटी-इंडिया एलिमेंट्स ने चुनिंदा तरीके से किया। इसीलिए जब मुझे उसकी सच्चाई का पता चला तो मैंने उन बातों को हटा दिया और सही बातें सामने रखी।”
शेहला रशीद ने आगे कहा, “मैंने कभी आर्मी की तरफ से परेशानी नहीं झेली। हालाँकि, आर्मी के खिलाफ एक नैरेटिव बनाया जा चुका है कि आर्मी ऐसी है, आर्मी वैसी है। कुछ ऐसी घटनाएँ भी हुईं तो आतंकवाद के समय की थीं। ये नैरेटिव बनाया गया था। ऐसे में मैंने सच्चाई सामने रखने की अपनी जिम्मेदारी निभाई।”
पूर्व छात्र नेता ने आगे कहा, “मेरे ऊपर सेकंड हैंड इन्फॉरमेशन थोपा गया। मैंने अब सभी चीजों से दूरी बना ली। आज भारत बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। मैं नहीं चाहती हूँ कि युवा उन चीजों में फँसे, जिनमें मैं फँसी थी। आज मेरे साथ पढ़ने वाले लोग कॉरपोरेट वर्ल्ड में सीनियर पदों पर हैं, लेकिन मैं क्रांति करती रही। हालाँकि, अब मैं सही रास्ते पर लौट आई हूँ।”
शेहला रशीद से जब सवाल किया गया कि क्या उनके ऊपर किसी तरह का कोई दबाव है? इस साल के जवाब में उन्होंने कहा, “मैं किसी के दबाव में नहीं हूँ। मैं जो कुछ भी कर पा रही हूँ, इस देश में मिली आजादी की वजह से कर पा रही हूँ। हालाँकि, इस देश में मेरे साथ किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं हुआ। हाँ, मैं फिर से कहूँगी कि पहले मैं भी गुमराह की गई थी, मुझ तक आधी-अधूरी जानकारियाँ पहुँचती थी, उसके लिए मैं माफी भी चाहूँगी।

 


शराब घोटाले की फांस के बीच अरविंद केजरीवाल को डिग्री विवाद में गुजरात हाईकोर्ट से झटका!

शराब घोटाले की फांस के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पीएम मोदी की डिग्री मामले में कोर्ट से झटका लगा है। गुजरात हाईकोर्ट ने 9 नवंबर को केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के गुजरात विश्वविद्यालय को दिए गए निर्देश को रद्द करने के आदेश पर समीक्षा करने की अपील की थी। इस मामले में कोर्ट ने केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। उच्च न्यायालय गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा दायर मानहानि मामले पर रोक लगाने के अरविंद केजरीवाल के अनुरोध को पहले ही खारिज कर चुका है। वहीं इससे पहले अगस्त 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने पीएम मोदी की डिग्री से जुड़े विवाद में गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी थी। इस तरह शराब घोटाले से लेकर पीएम डिग्री मामले में केजरीवाल की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही है।

पीएम डिग्री मामले में केजरीवाल को गुजरात हाईकोर्ट से झटका
प्रधानमंत्री की डिग्री के विवाद में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को झटका लगा है। दरअसल गुजरात हाईकोर्ट ने पीएम मोदी की डिग्री के विवाद में सीएम केजरीवाल की समीक्षा याचिका 9 नवंबर 2023 को खारिज कर दी। जस्टिस बीरेन वैष्णव ने अपने पूर्व के आदेश को बरकरार रखा। न्यायाधीश वैष्णव ने यह कहा कि कोर्ट सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की ओर से दी गई दलील से सहमत रखती है। साथ ही यह भी अवलोकन किया कि जिस तरीके से पुनर्विचार याचिका दायर की गई है वह सार्वजनिक जीवन में उचित नहीं दिखता। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि पुनर्विचार कानून में विकल्प है लेकिन मौजूदा याचिका के आधार व दलीलों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता है कि याचिकाकर्ता ने विकल्प का इस्तेमाल पूरी तरह कानूनी समाधान को लेकर किया है।

केजरीवाल को अगस्त में सुप्रीम कोर्ट भी नहीं मिली राहत
इससे पहले अगस्त 2023 में उच्चतम न्यायालय ने पीएम मोदी की डिग्री से जुड़े विवाद में गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका को खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय ने गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा दायर मानहानि मामले पर रोक लगाने के अरविंद केजरीवाल के अनुरोध को खारिज कर दिया था। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने कहा कि वह याचिका पर नोटिस जारी नहीं कर रही है क्योंकि मामला गुजरात उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है और 29 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। पीठ ने कहा कि गुजरात विश्वविद्यालय और केजरीवाल अपनी शिकायतें उच्च न्यायालय के समक्ष उठा सकते हैं।

मोदी की डिग्री को लेकर दिया था ‘व्यंग्यात्मक’ बयान
आप के दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की डिग्री के सिलसिले में ‘व्यंग्यात्मक’ एवं ‘अपमानजनक’ बयान दिया था जिसे लेकर गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा दर्ज कराए गए आपराधिक मानहानि मामले का सामना कर रहे हैं। केजरीवाल और सिंह ने इस मामले की त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया क्योंकि अदालत ने आगे की सुनवाई के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की। उनके वकील ओम कोतवाल ने अदालत से अनुरोध किया कि गुजरात हाई कोर्ट में 29 अगस्त और मेट्रोपोलिटन अदालत में 31 अगस्त को संबंधित मामलों की सुनवाई होने से पहले वह इस विषय पर आगे बढे़। लेकिन निचली अदालत ने 22 अगस्त को त्वरित सुनवाई की अर्जी खारिज कर दी। इस बीच मेट्रोपोलिटन अदालत ने इन दोनों को समन को लेकर 30 अगस्त को उसके सामने पेश होने का समय दिया।

हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से किया था इनकार
केजरीवाल और संजय सिंह ने सत्र अदालत में अपने पुनरीक्षण आवेदन का निस्तारण होने तक अपने विरूद्ध आपराधिक मानहानि सुनवाई पर स्थगन का अनुरोध करते हुए गुजरात हाई कोर्ट का रूख किया था। हाई कोर्ट ने 11 अगस्त को राज्य सरकार और गुजराज विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पीयूष पटेल को नोटिस जारी कर 29 अगस्त तक जवाब मांगा था। साथ ही, उसने केजरीवाल और सिंह को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।

केजरीवाल और संजय के खिलाफ पहले भी जारी हुए थे समन
गुजरात यूनिवर्सिटी की मानहानि से जुड़े मामले में केजरीवाल और संजय सिंह को निचली अदालत से एक बार पहले समन जारी किए जा चुके हैं। जिस पर दोनों बार नेताओं ने पेशी से छूट ली थी। गुजरात यूनिवर्सिटी ने पिछली सुनवाई पर दोनों नेताओं को वारंट जारी करने की मांग की थी। तब मेट्रोपॉलिटन कोर्ट ने इस पर सुनवाई करने के लिए 31 अगस्त की तारीख निर्धारित की थी। मानहानि केस में कानूनी दांवपेंच का सामना कर रहे अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह ने निचली कोर्ट मानहानि की कार्रवाई रोकने की मांग को लेकर हाई कोर्ट का रुख किया था। 11 अगस्त की सुनवाई में हाई कोर्ट ने दोनों नेताओं के रोक लगाने की मांग से इनकार कर दिया और सुनवाई के लिए 29 अगस्त की तारीख रखी थी।

सात साल पुराना है यह केस, केजरीवाल पर लग चुका 25 हजार जुर्माना
पीएम मोदी की डिग्री से जुड़ा यह पूरा मामला सात साल पुराना है। अप्रैल, 2016 में केंद्रीय सूचना आयोग ने केजरीवाल से उनके चुनावी फोटो पहचान पत्र के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में केजरीवाल ने कहा था कि वह सीआईसी को जानकारी देने के लिए तैयार हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री का खुलासा करने के लिए कहा जाना चाहिए। केजरीवाल के जवाब को आरटीआई का आवेदन मानते हुए सीआईसी ने एक ऑर्डर पास किया था। इसमें गुजरात यूनिवर्सिटी को पीएम मोदी की डिग्री का ब्योरा देने का निर्देश दिया था। इस ऑर्डर के खिलाफ गुजरात यूनिवसिर्टी हाई कोर्ट चली गई थी। हाई कोर्ट ने इस 31 मार्च, 2023 को फैसला सुनाते हुए सीआईसी को ऑर्डर को रद्द कर दिया था और केजरीवाल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया था। केजरीवाल ने हाई कोर्ट के फैसले के बाद एक प्रेस कांफ्रेंस की थी। गुजरात यूनिवर्सिटी का आरोप है कि इसमें केजरीवाल ने विश्वविद्यालय की मानहानि की। इसके बाद यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार की तरफ से केस दाखिल किया गया, जिसमें केजरीवाल के साथ-साथ संजय सिंह मानहानि के आरोपी हैं।

53 साल बाद पूरा हुआ निलवंडे डैम, कांग्रेस की लटकी परियोजनाओं को पूरा करवा रही मोदी सरकार


कांग्रेस पार्टी ने देश पर करीब 60 साल तक शासन किया लेकिन वोट की राजनीति करके किसानों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अक्टूबर 2023 को जिस निलवंडे परियोजना पर जल पूजा की इसे 1970 में स्वीकृति मिली थी। मतलब ये परियोजना 5 दशकों से लटकी हुई थी। वर्ष 2014 में जब मोदी सरकार आई तो इस पर तेजी से काम हुआ और अब यह महाराष्ट्र के लोगों को समर्पित कर दिया गया। इसके साथ ही दशकों से लटकी महाराष्ट्र की 26 और सिंचाई परियोजनाओं को केंद्र सरकार पूरा करने में जुटी है। पीएम मोदी ने जब 2014 में देश की बागडोर संभाली तब उन्होंने अधूरी परियोजनाओं की समीक्षा करवाई। चौंकाने वाली जानकारी यह सामने आई कि करीब 400 से अधिक परियोजनाएं ऐसी थीं जिसे कांग्रेस सरकार ने शिलान्यास करके छोड़ दिया था। इस पर कभी काम शुरू ही नहीं किया गया। कांग्रेस 60 सालों तक देश को लूटती रही, हर परियोजना, हर डील में दलाली और कमीशन का खेल चलता रहा और गांधी परिवार अपनी तिजोरी भरता रहा और विकास के नाम पर शिलान्यास का पत्थर लगाकर लोगों की आंखों में धूल झोंकने का ही काम किया गया।

मोदी ने चार दशक पुरानी परियोजनाओं को पूरा करवाया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार दशक से भी ज्यादा समय से लटकी परियोजनाओं को पूरा करा रहे हैं वहीं 100 साल पुरानी मांग भी पूरी कर रहे हैं। इसकी फेहरिस्त लंबी है। यहां उदाहरण स्वरूप इन परियोजनाओं को देख सकते हैं जिन्हें पीएम मोदी ने पूरा करवाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार सरोवर बांध की बाधाओं को दूर कर 38 सालों से लटकी परियोजना पूरी करवाई, 18 साल बाद अटल टनल का उद्घाटन किया, कांग्रेस के 10 साल से लटकाए प्रोजेक्ट वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे को 2 साल में पूरा करवाया, 16 साल से अटके देश के सबसे लंबे बोगीबील रेल-रोड ब्रिज का उद्घाटन किया, 39 साल से लटकी बाणसागर परियोजना को पीएम मोदी ने देश को सौंपा, चार दशक से अटकी सरयू नहर परियोजना का प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन किया, ठाणे-दीवा रेल लाइन का शिलान्यास 2005 में हुआ था लेकिन इसे पीएम मोदी ने पूरा करवाया। इसी तरह 31 साल बाद फिर गोरखपुर खाद कारखाना शुरू हुआ जिसमें 20 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। 15 साल से बंद सिंदरी खाद कारखाने से उत्पादन शुरू हुआ, 23 साल बाद रामागुंडम (तेलंगाना) खाद कारखाना शुरू हुआ। बरौनी खाद कारखाने में 22 साल बाद उत्पादन शुरू हुआ। 32 साल बाद पीएम मोदी ने असम गैस क्रैकर प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। करीब 100 साल पुरानी मांग पीएम मोदी ने पूरी की और तरंगा हिल नई रेल लाइन को मंजूरी दी।

कांग्रेस शासन में कई प्रोजेक्ट दशकों तक लटके रहे
कांग्रेस शासन में कई प्रोजेक्ट तो चार दशकों तक लटके पड़े रहे और लागत में सैकड़ों गुना तक की वृद्धि हो गई। पीएम मोदी अक्सर कहते भी हैं कि अटकाना, लटकाना और भटकाना कांग्रेस की कार्यशैली रही है। लेकिन 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने उन परियोजनाएं पर तेजी काम शुरू करवाया जो आत्मनिर्भर भारत के जरूरी था और जिसका देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान होने वाला था। प्रधानमंत्री मोदी ने बीते नौ साल में सरकार के कामकाज करने के तरीके को भी बदला है। कांग्रेस ने 60 साल के शासनकाल में लोगों की बुनियादी सुविधाओं की तरफ कभी ध्यान ही नहीं दिया और अगर योजना शुरू भी की गई तो आधे-अधूरे रूप में छोड़ दिया गया जिसे आज मोदी सरकार पूरा कर रही है। इनमें प्रमुख रूप से आधार को सब्सिडी से जोड़ना, डीबीटी, स्वच्छता मिशन, घर-घर शौचालय, गंगा सफाई, गरीबों को गैस कनेक्शन, मिड डे मील, जीएसटी, बेनामी संपत्ति पर शिकंजा जैसे तमाम काम हैं। प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता की वजह से इन योजनाओं को नया मकाम हासिल हुआ और सही मायने में देश के लोगों को फायदा हुआ। मोदी सरकार ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के विजन से लटकाने, अटकाने और भटकाने की कार्य संस्कृति को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।

मोदी ने 53 साल बाद निलवंडे डैम का किया उद्घाटन
स्वीकृतिः वर्ष 1970
उद्घाटनः 26 अक्टूबर 2023
महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के करीब 182 गांव के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए 1970 में डैम बनाने की परियोजना सोची गयी थी लेकिन 23 सालों तक ये परियोजना कागज पर ही सीमित रही। साल 1993 में डैम बनाने का काम शुरू हुआ। डैम साल 2011 में बनकर तैयार हुआ लेकिन काम अभी पूरा नही हुआ था, क्योंकि डैम से खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए नहर की जरूरत थी। नहर को बनाने की शुरुआत 2011 में की गई। नहर को बनाने में अगले 12 साल का समय लग गया। कांग्रेस की सरकार में इस पर काम धीमा ही रहा। 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद इस पर तेजी से काम शुरू किया गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अक्टूबर 2023 को इसका उद्घाटन किया। अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार होती तो कल्पना कर सकते हैं कि इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में अभी 10-20 साल और लग जाते। नहर का काम पूरा होने से अहमदनगर के साथ नासिक जिले के सिन्नर इलाके में पानी की समस्या का समाधान हो जाएगा।

शिलान्यासः 26 मई 2002
उद्घाटनः 3 अक्टूबर 2020

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 अक्टूबर 2020 को हिमांचल प्रदेश के रोहतांग में बनाई गई अटल सुरंग का उद्घाटन किया। यह दुनिया की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग है। इस टनल को बनाने का ऐतिहासिक फैसला तीन जून 2000 को लिया गया था, जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे। 26 मई 2002 को इसकी आधारशिला रखी गई थी। उसके बाद 10 साल तक कांग्रेस की सरकार ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस परियोजना को लटकाए रखा। 2014 पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद इस पर तेजी से कार्य किया गया और इसे पूरा किया गया। अटल टनल मनाली और लेह के बीच की दूरी को 46 किलोमीटर तक कम करती है और यात्रा के समय को भी 4 से 5 घंटे कम कर देती है। यह 9.02 किलोमीटर लंबी सुरंग है, जो कि मनाली को पूरे साल लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे पहले घाटी हर साल लगभग 6 महीने तक भारी बर्फबारी के कारण अन्य हिस्सों से कट जाती थी। सुरंग को समुद्र तल से 3,000 मीटर (10,000 फीट) की ऊंचाई पर हिमालय की पीर पंजाल श्रेणी में आधुनिक तकनीक के साथ बनाया गया है। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा था कि 2014 तक इस टनल का सिर्फ 1.5 किलोमीटर तक ही हो पाया था। इस प्रोजेक्ट की 2014 के पहले जो स्पीड थी उसके मुताबिक ये टनल 2040 में पूरी होती। उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए प्रोजेक्ट की रफ्तार बढ़ाई गई। 6 साल में हमने 26 साल का काम पूरा किया। इस तरह के प्रोजेक्ट में देरी से देश का नुकसान होता है। कनेक्टिविटी से देश के विकास का सीधा संबंध होता है। खास तौर पर बॉर्डर एरिया में कनेक्टिविटी सीमा सुरक्षा से जुड़ी होती है। पीएम ने कहा कि 2014 के बाद सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों में काफी तेजी आई है।

शिलान्यासः 5 अप्रैल 1961
उद्घाटनः 17 सितंबर 2017

प्रधानमंत्री मोदी ने 17 सितंबर, 2017 को अपने 67वें जन्मदिन के अवसर पर सरदार सरोवर बांध देश को समर्पित किया। इस बांध को गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों को लिए लाइफ लाइन माना जा रहा है। यह प्रोजेक्ट इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि देश के इस सबसे ऊंचे बांध को बनने में 56 साल लगे, लेकिन 2014 में प्रधानमंत्री ने इसे पूरा करने की समय सीमा तय की और और देश को सौंप भी दिया। इस बांध की आधारशिला देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 5 अप्रैल, 1961 को रखी थी। लालफीताशाही और कांग्रेस की घोटाले की कार्य संस्कृति ने इस प्रोजेक्ट को वर्षों तक लटकाए रखा। 1986-87 में जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे, उस समय इसकी लागत 6400 करोड़ रुपये आंकी गई थी। लेकिन इसकी लागत बढ़ती गई और यह पूरा होते-होते 65 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया। जाहिर है इसकी लागत 100 गुना से भी अधिक बढ़ गई। अगर समय पर काम शुरू होकर पूरा हुआ होता तो यह काफी कम खर्च में पूरा हो जाता।

प्रस्तावः 2003
काम शुरूः 2009
उद्घाटनः 19 नवंबर, 2018

कांग्रेसी सरकार के लेट-लतीफी का एक अहम सबूत वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने 19 नवंबर, 2018 को देश को समर्पित किया। करीब 83 किलोमीटर लंबे स्ट्रेच वाला कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस वे बेहद हाईटेक और रोल मॉडल है। इसके जरिये चार प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग, एनएच-1, एनएच-2 , एनएच-8 और एनएच-10 आपस में जुड़ गए हैं। ये एक्सप्रेस वे बनने से उत्तर भारत के राज्यों का सेंट्रल, पश्चिमी और दक्षिण भारत के राज्यों से सीधा संपर्क हो गया है। दरअसल सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी ने एक तरफ तो बुनियादी ढांचा मजबूत करने के अपने विजन को शीघ्रता से लागू करने पर जोर दिया, साथ ही कांग्रेस सरकारों की अकर्मण्यता से अटके पड़े प्रोजेक्ट्स की बाधाएं भी दूर की। ये प्रोजेक्ट 2005-06 में अस्तित्व में आया था लेकिन शुरुआत से ही ये यूपीए सरकार की सुस्ती का शिकार हो गया। इस प्रोजेक्ट पर पूरे दस साल तक सोनिया-मनमोहन की यूपीए सरकार और फिर साल 2014 से दो साल तक हरियाणा की भूपिंदर हुड्डा सरकार कुंडली मारकर बैठी रही। लेकिन हरियाणा में बीजेपी की सरकार बनते ही मोदी सरकार ने इस पर तेजी से काम शुरु दिया दिया। इसे और बेहतर बनाने के लिए इसमें नई और आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी। पहले ये एक्सप्रेस वे 4 लेन का ही था लेकिन मोदी सरकार ने इसे 6 लेन का बनाया। इसमें देश में पहली बार स्पीड और वजन वाले सेंसर लगाए गए हैं, जिस पर 120 किलोमीटर की रफ्तार से वाहन दौड़ सकते हैं। मोदी सरकार ने इस एक्सप्रेस वे में हरियाणा की संस्कृति को भी दर्शाने पर ध्यान दिया है। इसके दोनों तरफ हरियाणा की कला एवं संस्कृति, योग एवं गीता से जुड़ी 21 प्रतिमाएं लगाई गई हैं। यहां सौर ऊर्जा से बिजली बन रही है और ड्रिप इरिगेशन सिस्टम भी लगाया है। इसी मॉडल पर महाराष्ट्र और गुजरात में भी एक्सप्रेस वे बनाए जा रहे हैं। 2009 में एक्सप्रेस-वे की कंस्ट्रक्शन कंपनी ने अपना काम रोक दिया था लेकिन केंद्र सरकार के बीच बचाव के बाद 2016 में काम फिर शुरू हुआ। इस परियोजना का प्रस्ताव 2003 में किया गया था लेकिन इस पर 2009 में काम शुरू हुआ और इसे 2012 तक बन जाना था।

‘मंत्री को देख PM मोदी गुस्से में, प्लेन से नहीं उतरे… उपराष्ट्रपति से हुए खुश’ – जेहादी पत्रकार मोहम्मद जुबैर ने फैलाई फर्जी खबर

                                                        मोहम्मद जुबैर है फर्जी खबरों की फैक्ट्री
प्रधानमंत्री मोदी जब BRICS समिट में हिस्सा लेने दक्षिण अफ्रीका पहुँचे तो वहाँ का कोई छोटा मंत्री उनकी स्वागत में एयरपोर्ट पर आया। पीएम मोदी को गुस्सा आ गया। वो प्लेन से उतरे ही नहीं। जब दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने उपराष्ट्रपति को एयरपोर्ट भेजा तो प्रधानमंत्री मोदी प्लेन से नीचे उतरे।

यह एक खबर है। खबर फेक है। एक आदमी है, नाम है – मोहम्मद जुबैर। खुद को फैक्ट चेकर कहता है। इसने ही यह फेक खबर भारत में फैलाई। अपने चंटू-बंटू को खुश करने के लिए दक्षिण अफ्रीका के एक झंडु से वेबसाइट Daily Maverick का लिंक और उसकी बनाई खबर को भी शेयर किया।

ऐसे जेहादी पत्रकारों पर सूचना प्रसारण और गृह मंत्रालय कब सख्ती से पेश आएगा? नूपुर शर्मा के जीवन के पहले ही खिलवाड़ करने के चक्कर समस्त भारतीय मुसलमानों को विश्व में बदनाम कर चूका है। क्यों नहीं इसके बैंक खातों की जाँच की जाती? अब मामला देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है। यह देश के प्रधानमंत्री का अपमान है। आखिर किन कट्टरपंथियों के इशारे पर फेक खबरे चला कर कब तक देश में अराजकता फैलाता रहेगा? कार्यवाही करने पर इसका समर्थन करने वाली पार्टियों और नेताओं पर भी सख्ती से पेश आना होगा, क्योकि बिना किसी के समर्थन से फेक न्यूज़ फैक्ट्री नहीं चल सकती।  

मोहम्मद जुबैर जो नहीं कर पाया, वो था फैक्ट चेक। ना तो भारत का सरकारी पक्ष जानने की कोशिश की, ना ही दक्षिण अफ्रीका का… लेकिन कहलाता है वो फैक्ट चेकर।

मोदी प्लेन से कब और कैसे उतरे?

भारत सरकार से जुड़ी खबर है तो देखते हैं कि प्रधानमंत्री के ऑफिस ने क्या कुछ कहा है, इस घटना को लेकर। 22 अगस्त को 6 बजकर 27 मिनट पर प्रधानमंत्री ऑफिस ने जो ट्वीट किया है, उसके अनुसार दक्षिण अफ्रीका के उप-राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी का एयरपोर्ट पर स्वागत किया।
कट्टर इस्लामी मानसिकता के कारण अपने ही देश भारत और यहाँ की सरकार से नफरत करने वाला मोहम्मद जुबैर शायद इस ट्वीट को न देख पाया हो। पूरे दिन की 5 बार नमाज पढ़ने में ज्यादा समय लग गया होगा, इसलिए शायद 23 अगस्त को किए अपने ट्वीट में भी उसने बिना फैक्ट चेक किए ही फेक न्यूज फैला दी।
घटना चूँकि दक्षिण अफ्रीका में हुई है, इसलिए वहाँ की सरकार का भी जरा पक्ष जान लेते हैं। दक्षिण अफ्रीकी उपराष्ट्रपति के प्रवक्ता वुकानी एमडे ने Daily Maverick वेबसाइट में छपी खबर को फेक खबर बताया। फैक्ट को चेक करने के लिए मोहम्मद जुबैर यहाँ तक भी नहीं पहुँच पाया।

AltNews: फैक्ट चेकर नहीं, फेक न्यूज प्रचारक

जहाँ की घटना है, वहाँ से कोई आई सूचना को क्रॉस चेक नहीं किया। जिससे संबंधित घटना है, उससे बात करने या उसका पक्ष जानने की कोशिश नहीं की। फिर किस आधार पर फैक्ट चेक करते हो? इस्लाम की कट्टर विचारधारा में ऐसी ही ट्रेनिंग होती होगी शायद – अपने ही देश से नफरत करो, अपने ही लोगों को मूर्ख बनाओ, अपने ही लोगों को टोपी पहना कर उनसे पैसे ऐंठ लो, खुद उनके पैसे पर ऐश करो।
“हम AltNews हैं, हम फैक्ट चेक करते हैं, हमें पैसा दो” – हर महीने ऐसा रोना रोने वाला मोहम्मद जुबैर खुद कितना बड़ा फेक न्यूज प्रचारक है, यह खबर एक छोटा सा उदाहरण भर है। गिनती कितना करे कोई? 2 साल पहले ऑपइंडिया ने इसके 35 फेक खबरों की लिस्ट बनाई थी। कट्टर इस्लामी मानसिकता और वामपंथी कौम वाले चंटू-बंटू अगर इस लिस्ट को पढ़ लेते तो इसके बहकावे में नहीं आते, अपनी गाढ़ी कमाई इस पर नहीं लुटाते।

क्या बौखलाया विपक्ष मोदी सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाकर आत्महत्या करने जा रहा है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (25 जुलाई, 2023) को भाजपा के संसदीय दल को संबोधित करने के दौरान विपक्ष के नए गठबंधन पर भी जम कर हमला बोला। बता दें कि विपक्ष ने यूपीए को अलविदा कहते हुए अपने गठबंधन का नाम ‘I.N.D.I.A’ रखा है, जिसे ‘इंडिया’ कह कर प्रचारित किया गया। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया है कि आतंकी संगठन ‘इंडियन मुजाहिदीन’ और आक्रांता अंग्रेजों की ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ के नाम में भी तो इंडिया है।

उन्होंने कहा कि सिर्फ नाम में ‘इंडिया’ लगा लेने से कुछ नहीं होता है। बता दें कि विपक्ष मणिपुर हिंसा पर हंगामा करते हुए संसद नहीं चलने दे रहा है, जबकि मोदी सरकार चर्चा के लिए तैयार है। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने इस तरह का दिशाहीन विपक्ष नहीं देखा। उन्होंने कहा कि ये लोग भ्रमित हैं और इनके बर्ताव से ऐसा लगता है कि ये दशकों तक सत्ता में नहीं आना चाहते। उन्होंने विपक्ष को बिखरा हुआ हताश करार दिया।

प्रधानमंत्री ने एक तरह से साफ़ कर दिया है कि वो संसद में विपक्ष के उपद्रव के सामने झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने गिनाया कि कैसे आतंकी संगठन PFI के नाम में भी इंडिया था। उधर ये भी खबर आ रही है कि विपक्ष अब अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी कर रहा है। अगर मोदी सरकार विरोधी ऐसा करते हैं तो यह उनका आत्मघाती कदम होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मणिपुर पर संसद में चर्चा का उत्तर देने के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री के संसद में पहुँचने पर भाजपा के सांसदों में खासा उत्साह दिखा और उन्होंने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया।

उधर पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हमें अपने प्रधानमंत्री पर गर्व है, उन्होंने एक नई आशा जगाई है। पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र से सांसद ने कहा कि 2024 में भी NDA ही सत्ता में आएगी। उन्होंने कहा कि देश-दुनिया जानती है और विपक्ष भी ये समझता है, फिर भी वो बार-बार विरोध करते हैं क्योंकि वो मान चुके हैं कि उन्हें सत्ता में नहीं आना। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस और ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’, दोनों को अंग्रेजों ने ही बनाया है। उन्होंने कहा कि 2024 का परिणाम आएगा जो हारे हुए और थके हुए निराश विपक्ष की संख्या और कम हो जाएगी।

‘नरेंद्र मोदी, मेरे अब्बू को कुछ हुआ तो तुम जिम्मेदार होगे’: यासीन मलिक की 11 साल की बेटी का जहरीला Video

आतंकी यासीन मलिक की बेटी रजिया सुल्तान ने भारत के खिलाफ उगला ज़हर
आतंकी यासीन मलिक की 11 साल की बेटी ने जम्मू कश्मीर को लेकर ज़हर उगला है। अपने अब्बा के नक्शेकदम पर ही चलते हुए उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी कोसा। यासीन मलिक फ़िलहाल जेल में बंद है। रजिया सुल्तान ने दावा किया कि उसके अब्बा बीमार हैं और उसे उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है। 57 वर्षीय आतंकी की बेटी ने मुजफ्फराबाद में रिजनल लेजिस्लेटिव असेंबली में बोलते हुए ये बातें कहीं। उसने कहा, “मेरे अब्बा कश्मीर के हित की लड़ाई के दीप-स्तंभ हैं।”

यासीन की बेटी को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि उसके अब्बू ने कितने हिन्दुओं को मौत के घाट उतरवाया, घाटी छोड़ने को मजबूर किया और हिन्दू लड़कियों और महिलाओं का बलात्कार करवाने के लिए लोगों को उकसाया। यदि यही स्थिति तुम्हारे, तुम्हारी अम्मी और बहनों के साथ होता, तब क्या प्रतिक्रिया होती तुम्हारी?

उसने कहा कि अगर उसके अब्बा को कुछ भी नुकसान पहुँचता है तो वो इसका दोष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देगी। उसने कहा कि उसके अब्बा को फर्जी मामले में फँसाया गया है और उसे उम्मीद है कि जल्द ही वो जेल से निकलेंगे। उसने कहा, “मैं अपने अब्बा से मिलूँगी और उनके साथ अच्छा समय व्यतीत करूँगी। जब मैं उनसे मिली थी, तब मेरी उम्र मात्र 2 साल थी। अब मैं 11 साल की हो गई हूँ। मैं उन्हें बहुत याद करती हूँ। मैं उनकी आवाज़ सुनने के लिए बेचैन हूँ।”

यासीन मलिक की बेटी ने दावा किया कि वो जल्द ही जेल से निकल कर पाकिस्तानियों के बीच में होगा। यासीन मलिक 1088 में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चला गया था और वहाँ से भारत के खिलाफ सशस्त्र आतंक चला रहा था। इसके बाद वो वापस आ गया और अलगाववादी बन कर रहने लगा। उसके ऊपर वायुसेना जवानों की हत्या समेत 60 मामले दर्ज हैं। 2009 में पाकिस्तान जाकर उसने मुशैल हुसैन से निकाह कर ली थी।

इस दौरान यासीन मलिक की बेटी ने ‘जम्मू कश्मीर की आज़ादी’ वाले पाकिस्तान के नैरेटिव का भी समर्थन किया। पाकिस्तान एक तरह से अब नाबालिग लड़की के सहारे वैश्विक स्तर पर भारत विरोधी प्रोपेगंडा खेल रहा है। यासीन मलिक की बेटी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरे अब्बू का अपहरण कर लिया है।” साथ ही उसने संयुक्त राष्ट्र समेत अन्य वैश्विक संगठनों से भी अपील की कि वो उसके अब्बू को छुड़ाने के लिए प्रयास करें।

अवलोकन करें:-

‘घरों पर लेटर लगा बताते थे आज किसकी होगी हत्या’: अब ‘कश्मीर फाइल्स’ की वेब सीरीज, पीड़ित खुद बताए

यासीन मलिक वो आतंकी है, जो कश्मीर में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार में सीधे तौर पर शामिल था। इसके बावजूद मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री रहते उससे मुलाकात की थी और उससे हाथ मिलाया था। उस पर ‘अलगाववादी नेता’ के मुखौटे में कश्मीर में आतंकवाद का समर्थन करने का भी आरोप है। साथ ही उसे भारत में टेरर फंडिंग समेत दूसरे अपराधों के मामले में हिरासत में भी लिया गया था। यासीन मलिक पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण का भी आरोप है।

भारत का कायल हुआ ‘मुस्लिम वर्ल्ड लीग’, उधर जावेद अख्तर बोले – UCC लागू करना संभव नहीं

मोदी से मिलते अल-ईसा और जावेद अख्तर (साभार: सोशल मीडिया, आजतक)
मुस्लिम वर्ल्ड लीग के महासचिव शेख डॉक्टर मोहम्मद बिन अब्दुल करीम अल-ईसा भारत दौरे पर हैं। उन्होंने बुधवार (12 जुलाई 2023) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। ईसा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और अन्य धार्मिक नेताओं से मुलाकात पर खुशी जताते हुए भारत के लोकतंत्र एवं बहुलतावाद की जमकर तारीफ की। उधर, बॉलीवुड अभिनेता जावेद अख्तर को अलग तरह का दुख है।

अल-ईसा ने संबोधित करते हुए कहा, “मैं भारतीय लोकतंत्र को तह-ए-दिल से सलाम करता हूँ। मैं भारत के संविधान को सलाम करता हूँ। मैं दुनिया को सद्भावना सिखाने वाले भारतीय दर्शन और परंपरा को भी नमन करता हूँ। भारत में जो मैंने शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व देखा, वह भी अपने आप में यूनिक है।”

‘Harmony of Dialogue among Religions’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “जब भी संवाद की कमी होती है तो दो लोगों के बीच में गलतफहमी और समस्या खड़ी होती है। इसलिए संवाद का पुल बनाना आवश्यक है। सांस्कृतिक टकराव (Clash of Civilisation) को रोकने के लिए हमें अगली पीढ़ी का बचपन से ही मार्गदर्शन करना होगा और उन्हें इससे बचाना होगा।”

आतंकवाद पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “गलतफहमी, घृणा और गलत अवधारणाओं ने कट्टरपंथ फैलाकर आतंकवाद बढ़ाने में सहयोग दिया है। अपनी ताकत को बढ़ाने वाले बहुत से नेता हेट नैरेटिव का प्रयोग करते हैं और अपनी प्रासंगिकता एवं नियंत्रण सुनिश्चित करते हैं।” उन्होंने कहा कि कुछ ही संस्थाएँ इस तरह की गलत विचार परोसते हैं।

इससे पहले 11 जुलाई 2023 को सऊदी अरब के पूर्व न्याय मंत्री अल-ईसा ने कहा था, “भारत ने हिंदू बहुल राष्ट्र होने के बाद भी धर्मनिरपेक्ष संविधान अपनाया। विभिन्न संस्कृतियों में संवाद स्थापित करना समय की माँग है। सहनशीलता जीवन का हिस्सा है। इस्लाम प्यार और संवाद के लिए खुला है।”  

अल-ईसा ने कहा, “भारत के बारे में पाकिस्तान दुष्प्रचार किया करता है। भारत में मुस्लिम और उनके मज़हब को कोई खतरा नहीं है। मुस्लिम देश इंडोनेशिया को छोड़ दें तो भारत में विश्व की सर्वाधिक मुस्लिम आबादी रहती है। इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के 33 सदस्य देशों के बराबर मुसलमान भारत में रहते हैं।”

एक तरफ सऊदी अरब के नेता भारत की तारीफ कर रहे हैं तो दूसरी तरफ जावेद अख्तर का अपना रोना है। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता (यानी अलग-अलग धर्म के लोगों के रहने की वजह से) देखते हुए भारत में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करना संभव नहीं है।

उन्होंने कहा, “भारत एक औसत यूरोपीय देश की तरह नहीं है जहाँ एक धर्म, एक संस्कृति और एक परंपरा है। यहाँ संस्कृतियों, उप-संस्कृतियों, रीति-रिवाजों, परंपराओं की विविधता है। यह विविधता इतनी अधिक है कि यह कल्पना करना बहुत मुश्किल हो जाता है कि इसे कैसे हासिल किया जा सकता है।”

भारत में अलग-अलग रीति-रिवाजों का हवाला देते हुए अख्तर ने कहा, “दक्षिण भारतीय राज्यों में एक लड़की अपने मामा से शादी कर सकती है। उत्तर भारत में यह अकल्पनीय है। इसे अनाचार माना जाएगा। समान नागरिक संहिता के तहत इन चीजों को कैसे संतुलित किया जा सकता है?”

2014 चुनाव से पहले जिस सनातन संस्कृति को भारतीय राजनीति मानती रही अछूत, उसे मोदी ने बना दिया कूटनीति

                     वारंगल के भद्रकाली मंदिर की गोशाला में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो साभार: pib.gov.in)
मैंने लाल किले से कहा था ये समय गुलामी की मानसिकता से मुक्त होकर, अपनी विरासत पर गर्व करने का है। आज देश विकास और विरासत दोनों को साथ लेकर चल रहा है। एक ओर भारत डिजिटल टेक्नोलॉजी में नए रिकॉर्ड बना रहा है तो साथ ही सदियों बाद काशी में विश्वनाथ धाम का दिव्य स्वरुप भी देश के सामने प्रकट हुआ है। आज हम वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहे हैं तो साथ ही केदारनाथ और महाकाल महालोक जैसे तीर्थों की भव्यता के साक्षी भी बन रहे हैं। सदियों बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर का हमारा सपना पूरा होने जा रहा है…

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध विदेशी फण्ड पर विपक्ष लामबंध होने का प्रयास कर रहा है, वास्तव में मूल मुद्दों से पदभ्रष्ट हो चुके है। जो नेता और पार्टियां हवा का रुख नहीं पहचान सके, क्या वह राज कर सकते हैं? 2014 चुनाव से पहले कुर्सी के भूखे और मुस्लिम तुष्टिकरण के गुलाम अभी तक अपनी उस गुलामी मानसिकता से बाहर ही नहीं निकल पा रहे। उसका कारण है, कल तक इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने वाले 'हिन्दू आतंकवाद', 'भगवा आतंकवाद' का नाम देकर हिन्दू संस्कृति को कलंकित कर रहे थे, हिन्दू तीर्थों को विवादित बना रहे थे, अयोध्या में हुई खुदाई में मिले मंदिर के प्रमाणों को कोर्ट से छुपाने वाले आज किस मुंह से सच्चाई को स्वीकार करें। चुनावों में चुनावी हिन्दू बन जनता को मूर्ख बना रहे हैं। और यही भयंकर भूलें अब इन्हे पाताललोक लेकर जा रही है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2023 को गोरखपुर में गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। भारतीय धर्म ग्रंथों को घर-घर तक पहुँचाने वाले गीता प्रेस लिबरलों को नहीं सुहाता है। कारण आप समझ सकते हैं। लिबरल गैंग का यह दर्द पिछले दिनों तब भी प्रकट हुआ, जब गीता प्रेस को वर्ष 2021 का गाँधी शांति पुरस्कार देने की घोषणा हुई।

दरअसल भारत के प्रधानमंत्री का गीता प्रेस जाना, वहाँ के लीला मंदिर में अर्चना करना, भारतीय राजनीति की वह लकीर है जो 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने खींची है। इससे पहले भारत की राजनीति हिंदू, मंदिर, सनातन संस्कृति, भारतीय विरासत की बात करने वाले को ‘सांप्रदायिक’ और टोपी-चादर वाली इफ्तार पार्टियों में शिरकत करने वालों को ‘सेकुलर’ मानने की अभ्यस्त रही है। लेकिन मोदी सरकार का कार्यकाल विकास और गरीब कल्याण की योजनाओं के साथ-साथ सांस्कृति विरासत को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने, सांस्कृतिक कूटनीति के जरिए भारतीय विरासत का वैश्विक प्रसार करने, स्वदेशी विचारों को सम्मान और मान्यता देने, चोरी कर विदेश ले गई भारतीय कलाकृतियों को वापस लाने की गाथा का भी कार्यकाल है।

   गीता प्रेस के लीला मंदिर और वारंगल के भद्रकाली मंदिर में पूजा अर्चना करते पीएम मोदी (फोटो साभार: pib.gov.in)

जिस दिन प्रधानमंत्री गीता प्रेस गए, उसी दिन गोरखपुर से उन्होंने दो वंदे भारत एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई। 498 करोड़ रुपए की लागत से गोरखपुर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास की आधारशिला रखी। कॉन्ग्रेस शासित छत्तीसगढ़ को 7 हजार करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाएँ देकर प्रधानमंत्री गोरखपुर आए थे। गोरखपुर के बाद वे वाराणसी गए और वहाँ ₹12,110 करोड़ की 29 परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। PM आवास योजना (ग्रामीण) के तहत लाभुकों को 4.51 लाख आवास सौंपे। अगले दिन वे तेलंगाना के वारंगल में थे। 6100 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। माँ भद्रकाली की पूजा की। यह केवल गोरखपुर, वाराणसी या वारंगल की ही बात नहीं है। मोदी सरकार के पूरे कार्यकाल में विकास और संस्कृति एक साथ देश के हर कोने में इसी तरह गतिमान रही है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री सार्वजनिक मंचों से बार-बार इस बात को दोहराते हैं कि यह समय अपनी विरासत पर गर्व करने का है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद, घर हो या बाहर अपनी सरकार की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की रणनीति के ध्वजवाहक बने हुए हैं। मोटे तौर पर चार तरीकों से इस कार्य को पूर्ण किया जा रहा है।

  • भारतीय कला का वैश्विक स्तर पर प्रसार
  • चोरी हुई कलाकृतियों की घर वापसी
  • संस्कृति का संरक्षण करने वालों को सम्मान
  • बजटीय आवंटन में लगातार वृद्धि
जून 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G-7 शिखर सम्मेलन के लिए जर्मनी गए थे। यहाँ उन्होंने भारत के सांस्कृतिक हुनर को कैसे वैश्विक मंच पर स्थापित किया, इसे राष्ट्राध्यक्षों को दिए भेंट से समझिए। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति को डोकरा कला से बनी नंदी तो दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति को इसी कला से बनी रामायण भेंट की। छत्तीसगढ़ की डोकरा कला अलौह धातु की ढलाई कला है। ऐसी धातु की ढलाई का उपयोग भारत में 4,000 से अधिक वर्षों से होता आ रहा है। जापान के पीएम को उत्तर प्रदेश के निजामाबाद के बने काली मिट्टी के बर्तन भेंट किए। कनाडा के पीएम को हाथ से बुनी गई सिल्क की चटाई भेंट की। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को लैक्वेरेंस कला से निर्मित राम दरबार भेंट की। सेनेगल के राष्ट्रपति को मूंज से बनी टोकरियाँ और कपास की दरियाँ भेंट की। इसका निर्माण उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, सुल्तानपुर और अमेठी में होता है। जर्मनी की चांसलर को निकेल कोटेड पीतल का मटका भेंट किया। यह मटका यूपी की पीतल नगरी मुरादाबाद की पहचान है। इटली के पीएम को संगरमर से बना टेबल टॉप भेंट किया। यह कलाकृति आगरा की पहचान है। फ्रांस के राष्ट्रपति को जरदोजी बॉक्स में इत्र भेंट किए। अमेरिकी राष्ट्रपति को वाराणसी में बना गुलाबी मीनाकारी ब्रोच और कफलिंक सेट उपहार में दिया। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को यूपी के बुलंदशहर में बना प्लेटिनम पेंटेड हैंड पेंटेड टी सेट गिफ्ट किया।
अब 2022 के नवंबर में हुए जी 20 देशों के सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए उपहारों पर गौर करिए;
  • अमेरिका के राष्ट्रपति को भगवान श्रीकृष्ण और राधा की पेंटिंग गिफ्ट की। इसे हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के चित्रकारों ने बनाया था। कांगड़ा की पेंटिंग में श्रृंगार रस और प्राकृतिक प्रेम का चित्रण किया जाता है। इसकी खासियत ये है कि इसे बनाने में सिर्फ प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग किया जाता है।
  • ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को ‘माता नी पछेड़ी’ उपहार के रूप में दिया। यह गुजरात का एक हस्तनिर्मित कपड़ा है। इसमें देवी माँ का चित्र बना होता है। नवरात्रि के समय और अन्य पूजन के दौरान इसे देवी मंदिर में चढ़ाया जाता है।
  • इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री को ‘पाटन पटोला दुपट्टा’ (स्कार्फ) गिफ्ट किया। यह स्कार्फ उत्तरी गुजरात के पाटन क्षेत्र में बनाया जाता है। इसमें आगे और पीछे का हिस्सा एक जैसा दिखता है। इसे अलग-अलग पहचानना मुश्किल है।
  • गुजरात के छोटा उदयपुर के राठवा कारीगरों द्वारा निर्मित जनजातीय लोक कला का चित्र ‘पिथौरा’ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री को उपहार में दिया गया।
  • इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को सूरत का चाँदी का कटोरा और हिमाचल प्रदेश की किन्नौरी शॉल उपहार में दिया।
  • स्पेन के प्रधानमंत्री को मंडी और कुल्लू का कनाल ब्रास सेट (वाद्ययंत्र) गिफ्ट किया। यह हिमाचल के आयोजनों में बजाए जाने वाला प्रमुख बाजा है, जिसका उपयोग अब सजावट के सामान के तौर पर किया जाने लगा है।
बीते जून में प्रधानमंत्री अमेरिका गए थे। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को 10 दान के प्रतीक भेंट कर भारतीय संस्कृति में ‘दस दानम’ के महत्व को चर्चा में ला दिया। दस दानम के प्रतीक जिस विशेष बक्से में बंद थे, उसे मैसूर के चंदन की लकड़ी से जयपुर के कारीगरों ने तैयार किया था। इसमें भगवान गणेश की मूर्ति और एक दीया भी था। साथ ही राष्ट्रपति बायडेन को ’10 प्रिंसिपल्स ऑफ उपनिषद’ नामक किताब भी दी। दूसरी ओर, जब सितंबर 2021 में प्रधानमंत्री अमेरिका से लौटे थे तो 11वीं से 14वीं शताब्दी के बीच 157 मूर्तियाँ-कलाकृतियाँ साथ लेकर आए थे। इन्हें चोरी से देश के बाहर ले जाया गया था। अमेरिका द्वारा भारत को सौंपी गई इन कलाकृतियों में सांस्कृतिक पुरावशेष, हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म से संबंधित मूर्तियाँ शामिल थीं।
भारत सरकार के पोर्टल MyGov के आधिकारिक ट्विटर हैंडल के मुताबिक 2014 के बाद से 238 से अधिक ऐसी कलाकृतियाँ भारत वापस आई हैं, जो चोरी कर देश से बाहर ले जाई गईं थी। 2014 से पहले ऐसी केवल 13 कलाकृतियों को ही देश वापस लाने में सरकार सफल रही थी। स्वदेशी विचारों के सम्मान की संस्कृति भी मोदी सरकार में विकसित हुई है। चाहे वह गीता प्रेस का सम्मान हो या फिर दुनिया के एकमात्र संस्कृत के अखबर ‘सुधर्मा’ को पद्मश्री से सम्मानित करना। इसी तरह जो पद्म पुरस्कार अब तक एलीट वर्ग तक सीमित माने जाते रहे थे, वे उन लोगों तक भी पहुँच रहे हैं जो सुदूर इलाकों में लोक कलाओं को संरक्षित करने में जुटे हुए हैं।
इसके अलावा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘प्रसाद योजना’ है तो संस्कृत भाषा को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में 200 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। खादी का पुनरुद्धार इसी सरकार में संभव हुआ है। अभिलेखागार और पुस्तकालयों का विकास किया जा रहा है। 2013-14 के मुकाबले 2023-24 तक संस्कृति संरक्षण के लिए बजट आवंटन में 65 फीसदी तक वृद्धि हो चुकी है।
स्वतंत्र भारत में विकास के साथ भारतीय विरासत को आगे बढ़ाने की जो प्रतिबद्धता मोदी सरकार दिखा रही है, वह इससे पहले कभी नहीं देखी गई। यह केवल हिंदुओं के धार्मिक स्थलों के विकास तक ही सीमित नहीं है। यह एक ऐसी यात्रा है, जिसमें विलुप्त हो रही भारतीय भाषाओं, लोक संस्कृतियों, परंपराओं, वाद्य यंत्रों, कलाओं को न केवल आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा रहा है, बल्कि उन्हें वैश्विक पहचान देकर इनसे जुड़े लोगों के जीवन में बदलाव लाने के भी प्रयास हो रहे हैं। अपने अब तक के कार्यकाल में मोदी सरकार ने यह भी बार-बार प्रमाणित किया है भारतीयता और भारतीय संस्कृति उसके लिए कोई चुनावी मुद्दा नहीं है।
हम राजनीति के उस दौर में जी रहे हैं जिसमें नेता चुनाव के समय मंदिरों की प्रदक्षिण करने लगते हैं। अपने जनेऊ दिखाने लगते हैं। अपना गोत्र बताने लगते हैं। वे वोटों के लिए हिंदू से लेकर किसान तक दिख रहे हैं। ऐसे दौर में संस्कृति को लेकर एक सरकार की ऐसी प्रतिबद्धता न केवल सुखद है, बल्कि सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का रास्ता भी इससे ही निकलेगा।

‘मोदी-योगी मुस्लिम बन जाएँ तो बहुत कुछ सुधर जाएगा’: तबलीगी जमात के मौलाना ने दी इस्लाम कबूलने की दावत, कहा- भारत में भी आएगा शरिया

           तबलीगी जमात के मौलाना ने मोदी और योगी को दी इस्लाम कबूलने की दावत (चित्र साभार: टाइम्स नाउ नवभारत)
मुंगेरी लाल के सपने देखना कोई बुरी बात नहीं। कट्टरपंथी जिन लोगों को इस्लाम कबूलने की दावत दे रहे हैं, इसके लिए सालन, रोटी और बिरयानी खाने की बजाए सुबह-शाम लोहे के चने खाने चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस्लाम कबूलने की दावत तबलीगी जमात के एक मौलाना ने दी है। मौलाना तौकीर अहमद का कहना है कि यदि ये दोनों मुस्लिम बन गए तो बहुत कुछ सुधर जाएगा। एक इंटरव्यू में मौलाना ने धर्मांतरण के लिए इस्लामी मुल्कों से पैसा आने की बात कबूली है। साथ ही अफगानिस्तान की तरह भारत में भी एक दिन शरिया राज स्थापित होने की बात कही है। 
मौलाना यह भूल रहे है कि ये अफगानिस्तान नहीं भारत है। यह 2014 चुनाव से पहले का भारत नहीं 2014 चुनाव के बाद का भारत है। और जिस ओर भारत जा रहा है, उससे घबराकर मौलाना असंभव बातों से मन बहराने का प्रयास कर रहे हैं। मौलाना तौकीर तो क्या इन जैसे मौलाना यह भूल रहे हैं कि समय बहुत बड़ा बलवान होता है। देखना यह है कि विजय पताका किसके हाथ होगी, धर्मातरण की या फिर घर वापसी की? शरीयत लागु होगी या फिर सनातन पताका? हाँ, जिस दिन सनातन प्रेमियों ने अनवर शेख की पुस्तकों का वितरण शुरू कर दिया, मुस्लिमों के दिल इनका डर ही समाप्त नहीं होगा, इनके पीछे खड़े होने वाले भी सनातन पताका के नीचे भागे आएंगे।   

मौलाना तौकीर अहमद ने टाइम्स नाउ नवभारत से बातचीत में उपरोक्त बातें कही है। 4 जुलाई 2023 को उसका 8 मिनट लंबा यह इंटरव्यू प्रकाशित हुआ है। इसमें मौलाना तौकरी ने बताया है कि उसका मुख्य मकसद योगी आदित्यनाथ और नरेंद्र मोदी को इस्लाम कबूल करवाना है। इन दोनों को हिंदुओं की मुख्य शख्सियत बताते हुए कहा कि ये दोनों अगर कन्वर्ट हो गए तो बहुत कुछ सुधर जाएगा। मौलाना तौकीर ने कहा, “मैं तो योगी जी को भी यही समझाना चाहूँगा कि एक बार बैठें और समझें कि दीन और इस्लाम क्या है। इंशाअल्लाह वो जरूर ईमान लाएँगे।” नीचे वीडियो में 4 मिनट 57 सेकेंड के बाद आप ये बात सुन सकते हैं

मौलाना तौकीर ने इस दौरान इस्लामी धर्मांतरण, समान नागरिक संहिता (UCC), विदेशी फंडिंग सहित कई अन्य मसलों पर भी बात की। बताया कि देश में हो रहे इस्लामी धर्मांतरण के 99% मामलों के लिए अकेला तबलीगी जमात जिम्मेदार है। जमात के दाई लोगों का जिक्र करते हुए उसने कहा कि ये वो लोग हैं जो गैर मुस्लिमों को दीन इस्लाम की दावत देते हैं। उसने कहा कि दावत देने के दौरान गैर मुस्लिमों को कुरान की आयतें, हदीसों और गुजरे समय में नबियों द्वारा लोगों को समझाई गई चीजों के बारे में बताया जाता है।

उसने बताया कि दाई का मुख्य काम युवाओं को अपनी तरफ खींचना है। वे लोगों को बताते हैं कि पहले जिन लोगों ने नबियों की बातें नहीं मानी उनको सजा भुगतनी पड़ी थी। तौकीर ने खुद को भी दाई बताते हुए कहा कि वो अभी भी लोगों को इस्लाम कबूलने की दावत दे रहे हैं। अपनी मजहबी किताब का हवाला देते हुए मौलाना तौकीर ने कहा कि दुनिया के पहले इंसान आदम और उनकी जात से खुदा ने सिर्फ खुद को पूजने और बुतपरस्ती (मूर्ति न पूजने) का वादा लिया था। मूर्ति पूजने वालों को भटका हुआ बताते हुए मौलाना ने कहा कि उन्हें अल्लाह की इबादत की तरफ लाने की जरूरत है।

तौकीर ने दावा किया कि साल 2014 से अब तक देश भर में लगभग 20 लाख गैर मुस्लिम इस्लाम कबूल कर चुके हैं। उसने कहा कि तबलीगी जमात के सदस्य अधिक से अधिक लोगों को इस्लाम कबूल करवाने का प्रयास करते हैं। बकौल तौकीर UCC से मुस्लिमों को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि वो अपने मुख्य टारगेट शरिया कानून को लागू करने के प्रयास में लगे हुए हैं। मौलाना ने कहा, “इंशाअल्लाह शरिया कानून आएगा। आप अफगानिस्तान में देख लीजिए वहाँ शरिया कानून लागू हुआ। अमेरिका था वहाँ। सबको भगा दिया।”

धर्मांतरण को जरूरी बताते हुए हुए मौलाना ने कहा कि सबको अल्लाह के एक रास्ते पर लाना है। धर्मांतरण नेटवर्क को ऑपरेट करने वाले मुख्य व्यक्ति के तौर पर उसने मौलाना साद, उनके बेटे और हाल ही में जेल से छूटकर आए कलीम सिद्दीकी का नाम लिया। उसने बताया कि इस्लामी धर्मांतरण का नेटवर्क पूरे देश में सक्रिय है। इसके लिए पैसे अरब देशों और अफगानिस्तान से आते हैं। तौकीर के मुताबिक विदेश से मिले इन पैसों से हिन्दुओं को लुभाया जाता है जो घर से किसी कारण से बेघर कर दिए जाते हैं। मौलाना तौकीर अहमद ने क़ुरान का हवाला देते हुए कहा कि 72 हूरों को अल्लाह ने इंसानों को बुराइयों से दूर रखने के लिए बनाया है।

नरेंद्र मोदी : 9 साल, 13 देशों ने दिया अपना सर्वोच्च सम्मान

साभार:narendramodi.in
भारत के लिए गर्व का एक और क्षण है। अमेरिका के सफल दौरे के बाद Egypt पहुंचे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को वहां के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया है। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने पीएम मोदी को ‘ऑर्डर ऑफ द नाइल’ से सम्मानित किया। मिस्र के राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बैठक से पहले प्रधानमंत्री को यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत ही नहीं दुनिया के सबसे सम्मानित और लोकप्रिय नेता हैं और Egypt में उन्हें दिया गया, ये सम्मान हर देशवासी को गौरवान्वित करने वाला है। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता सातवें आसमान पर है। दुनियाभर में वह जहाँ भी जा रहे हैं उनके स्वागत के लिए लोग पलकें बिछाए दिखाई दे रहे हैं। पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री द्वारा PM मोदी के पैर छूना। फिर अमेरिकी संसद में मोदी-मोदी की गूँज और अब मिस्र में सर्वोच्च सम्मान मिलना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। पीएम मोदी को दुनियाभर के 13 देश अब तक सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित कर चुके हैं।

मोदी मिस्र की दो दिवसीय यात्रा के दौरान, रविवार (25 जून, 2023) को मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने उन्हें देश के सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द नील’ से सम्मानित किया है। इससे पहले 22 मई 2023 को पापुआ न्यू गिनी, फिजी और पलाऊ गणराज्य ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने-अपने देशों के सर्वोच्च राजकीय सम्मान से नवाजा था।

पापुआ न्यू गिनी के गवर्नर-जनरल सर बॉब डाडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रैंड कम्पेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगोहू’ से सम्मानित किया था। इसी दिन फिजी के प्रधानमंत्री सित्विनी राबुका ने PM मोदी को ‘कम्पेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी’ से सम्मानित किया था। यह पुरस्कार फिजी का सर्वोच्च राजकीय पुरुस्कार है। यही नहीं, पलाऊ गणराज्य के राष्ट्रपति सुरंगेल एस व्हिप्स जूनियर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च सम्मान ‘एबाक्ल अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था।

इसके अलावा, दिसंबर 2021 में भूटान ने अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द ड्रक ग्यालपो’ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्मानित किया था। साल 2020 में अमेरिकी सरकार ने पीएम मोदी को यूनाइटेड स्टेट आर्म्ड फोर्सेस अवार्ड ‘लीजन ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया था। इसी तरह साल 2019 में बहरीन ने PM मोदी को ‘द किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां’ से सम्मानित किया था। उन्हें यह अवार्ड बहरीन के किंग हमद बिन इसा बिन सलमान अल खलीफा ने खाड़ी देशों के साथ संबंध बढ़ाने की मान्यता के तौर पर दिया था।

जून 2019 में मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम सालेह ने PM मोदी को विदेशी गणमान्य नागरिकों को दिए जाने वाला देश का अपना सर्वोच्च सम्मान ‘रूल ऑफ निशान इज्जुद्दीन’ से  सम्मानित किया था। अप्रैल 2023 में रूस ने रूस ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू’ से सम्मानित किया था। अगस्त 2019 में संयुक्त अरब अमीरात पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वहाँ के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ पुरस्कार से सम्मानित किया था। यह यूएई का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।

फरवरी 2018 में फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने पीएम मोदी को ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन’ पुरस्कार से सम्मानित किया था। यह विदेशी गणमान्य नागरिकों को दिया जाने वाला फिलिस्तीन का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। जून 2016 में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘अमीर अमानुल्लाह खान पुरस्कार’ से सम्मानित किया था। वहीं, अप्रैल 2016 में सऊदी अरब की यात्रा पर पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सऊदी अरब के किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘किंग अब्दुलअजीज सैश’ से सम्मानित किया था।

बीते 9 वर्षों में पीएम मोदी को विभिन्न देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की ओर से सम्मानित किया गया है। हाल ही में उन्हें पापुआ न्यू गिनी और फिजी का सर्वोच्च सम्मान दिया गया था। फिजी ने अपने देश के सम्मान ‘कम्पैनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी’ और पापुआ न्यू गिनी ने ‘द ग्रैंड कम्पैनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगोहु’ से सम्मानित किया था। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी को संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार चैंपियंस ऑफ अर्थ, बहरीन के शीर्ष पुरस्कार किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां, यूएई के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ जायेद, मालदीव के सर्वोच्च सम्मान निशान इज्जुद्दीन, रूस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल, दक्षिण कोरिया के सियोल शांति पुरस्‍कार, फिलिस्तीन का सर्वोच्च ग्रैंड कॉलर सम्मान, सऊदी अरब के सर्वोच्च सैश ऑफ किंग अब्दुल अजीज सम्मान, अफगानिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान आमिर अमानुल्लाह खान अवार्ड के साथ प्रथम फिलिप कोटलर प्रेशिडेंशियल पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

25.06.2023

ऑर्डर ऑफ द नाइल, Egypt

Egypt के दौरे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को वहां के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया है। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने पीएम मोदी को ‘ऑर्डर ऑफ द नाइल’ से सम्मानित किया। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बैठक से पहले प्रधानमंत्री को यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया। Egypt में पीएम मोदी को दिया गया ‘ऑर्डर ऑफ द नाइल’ सम्मान हर देशवासी को गौरवान्वित करने वाला है। 

22.05.2023

कम्पैनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी
प्रधानमंत्री मोदी को फिजी के सर्वोच्च सम्मान कम्पैनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी से नवाजा गया है। फिजी के प्रधानमंत्री सित्वनी राबुका ने 22 मई, 2023 को उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान Companion of the Order of Fiji से सम्मानित किया। यह सम्मान भारत के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि यह सम्मान अभी तक दुनिया के कुछ खास गैर-फिजी लोगों को ही मिला है।

22.05.2023
पापुआ न्यू गिनी के ‘द ग्रैंड कम्पैनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगोहु’ से सम्मानित
फिजी द्वारा सम्मानित किए जाने के तुरंत बाद पापुआ न्यू गिनी ने भी प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किया। प्रशांत द्वीप देशों की एकता का समर्थन करने और ग्लोबल साउथ के कारण की अगुवाई करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को Companion of the Order of Logohu प्रदान किया गया। पापुआ न्यू गिनी के बहुत कम अनिवासियों को इस सम्मान से नवाजा गया है। ‘द ग्रैंड कम्पैनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगोहु’ से सम्मानित किए जाने केबाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह भारत और हमारे लोगों की उपलब्धियों की एक बड़ी पहचान है।

22.05.2023

एबाक्ल अवॉर्ड
2023 में पापुआ न्यू गिनी की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को पलाऊ गणराज्य के राष्ट्रपति सुरंगेल एस व्हिप्स जूनियर ने अपने सर्वोच्च सम्मान एबाक्ल अवॉर्ड (Ebakl Award) से सम्मानित किया।

25.04.2022
सचखंड श्री हजूर साहिब के सम्मान पत्र से सम्मानित
सिखों के 5 तख्तों में से एक सचखंड श्री हजूर साहिब ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सम्मान पत्र से नवाजा है। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने साहिबजादों जोरावर सिंह और फतेह सिंह की स्मृति में वीर बाल दिवस हर साल 26 दिसंबर को मनाने की घोषणा की थी। इससे प्रेरित होकर सचखंड श्री हजूर साहिब ने 25 अप्रैल, 2022 को प्रधानमंत्री मोदी को सम्मानित किया।

24.04.2022
प्रथम लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 24 अप्रैल को मुंबई में मास्टर दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार समारोह में प्रथम लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारत रत्न लता मंगेशकर की स्मृति में स्थापित किया गया यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष सिर्फ एक व्यक्ति को राष्ट्र निर्माण में अनुकरणीय योगदान के लिए दिया जाएगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वे आमतौर पर पुरस्कार लेते हुए बहुत सहज नहीं महसूस करते, लेकिन जब मंगेशकर परिवार लता दीदी जैसी बड़ी बहन का नाम लेता है और उनके नाम पर पुरस्कार देता है, तो यह उनके स्नेह और प्यार का प्रतीक बन जाता है।

17.12.2021
भूटान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान Order of the Druk Gyalpo
भूटान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान Order of the Druk Gyalpo से नवाजा है। भूटान के प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी को भूटान के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार Order of the Druk Gyalpo से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले कुछ वर्षों में बिना शर्त दोस्ती निभाई है और कोरोना वायरस महामारी के दौरान काफी मदद की है। शेरिंग ने बताया है कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को एक महान, आध्यात्मिक इंसान के रूप में देखा है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से सम्मान का जश्न मनाने के लिए तत्पर हूं। प्रधानमंत्री मोदी के शासन काल में भारत और भूटान के बीच संबंधों में काफी मजबूती आई है। श्री मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद पहला विदेश दौरा भूटान का किया था। भूटान के 114वें राष्ट्रीय दिवस पर ये सर्वोच्च सम्मान देने की घोषणा की गई है।

05.03.2021
CERAWeek वैश्विक ऊर्जा और पर्यावरण लीडरशिप अवार्ड
प्रधानमंत्री मोदी को 5 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा समिट के दौरान भारत के सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए CERAWeek वैश्विक ऊर्जा और पर्यावरण लीडरशिप अवार्ड से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान CERAWeek कॉन्फ्रेंस-2021 को संबोधित भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘मैं इस पुरस्कार को अपने देश के लोगों को अर्पित करता हूं। आप किसी भी भाषा में भारतीय साहित्य को पढ़ लीजिए आपको पता चलेगा कि लोगों का प्रकृति के साथ गहरा संबंध रहा है’। उन्होंने कहा, ‘‘मैं बहुत विनम्रता के साथ सेरावीक वैश्विक ऊर्जा और पर्यावरण नेतृत्व पुरस्कार को स्वीकार करता हूं। मैं इस पुरस्कार को अपने महान देश की जनता को समर्पित करता हूं। मैं यह पुरस्कार अपनी भूमि की महान परम्परा को समर्पित करता हूं जिसने पर्यावरण को हमेशा राह दिखाई है।’’

22.12.2020
लीजन ऑफ मेरिट अवॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 22 दिसंबर को लीजन ऑफ मेरिट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। अमेरिका का यह प्रतिष्ठित सम्मान उत्कृष्ट सेवाओं और उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। इस अवॉर्ड के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद प्रधानमंत्री मोदी को नामित किया था। कोरोना काल को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से इस अवॉर्ड को अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओब्रायन से भारतीय राजदूत तरणजीत सिंह संधू ने रिसीव किया। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने ट्वीट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लीजन ऑफ मेरिट से सम्मानित किया है, उन्होंने जिस तरह भारत को ग्लोबल स्टेज पर पहुंचाया है और भारत-अमेरिका के रिश्तों को मजबूत किया है उसके लिए ये सम्मान दिया गया है।

24.09.2019
प्रधानमंत्री मोदी को मिला ‘ग्लोबल गोलकीपर अवॉर्ड’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 24 सितंबर 2019 को स्वच्छ भारत अभियान के लिए बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की ओर से ‘ग्लोबल गोलकीपर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार भारत में पचास करोड़ लोगों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी ने पुरस्कार को 130 करोड़ भारतीयों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि ये सम्मान उन भारतीयों को समर्पित है जिन्होंने स्वच्छ भारत मिशन को एक जनआंदोलन में बदला।

24.08.2019
‘किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां’ 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 24 अगस्त, 2019 को बहरीन के शीर्ष पुरस्कार किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां (The King Hamad Order of the Renaissance) पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान बहरीन के किंग हमद बिन इसा बिन सलमान अल खलीफा ने भारत के खाड़ी देशों के साथ मित्रता को मजबूत करने और द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने की मान्यता के तौर पर दिया।

सम्मान मिलने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं विनम्रतापूर्वक द किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां सम्मान को स्वीकार करता हूं। यह बहरीन के साथ भारत की मजबूत दोस्ती को मान्यता देता है, जो सैकड़ों साल पहले से है और 21वीं सदी में तेजी से बढ़ रही है।

08.06.2019

मालदीव के सर्वोच्च सम्मान ‘निशान इज्जुद्दीन’ से नवाजा गया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 8 जून, 2019 को मालदीव के सर्वोच्च सम्मान ‘निशान इज्जुद्दीन’से सम्मानित किया गया। दूसरी बार भारत का प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा पर मालदीव पहुंचने पर पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया। उसके बाद प्रधानमंत्री मोदी को विदेश मेहमानों को दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान ‘निशान इज्जुद्दीन’ से नवाजा गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज मुझे मालदीव के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित करके आपने मुझे ही नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष को एक नया गौरव दिया है। निशान इज्जुद्दीन का सम्मान मेरे लिए हर्ष और गर्व का विषय है। यह मेरा ही नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच मित्रता और घनिष्ठ संबंधों का सम्मान है। मैं इसे बड़ी विनम्रता और आभार के साथ, सभी भारतीयों की ओर से स्वीकार करता हूं।”

12.04.2019
रूस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान- ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’
हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रूसी संघ के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार – ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने में असाधारण सेवाओं के लिए दिया गया।

रूसी दूतावास ने अपने एक बयान में कहा, ’12 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल यानी रूस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने का ऐलान किया गया है।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ये सम्मान भारत और रूस के रिश्तों को मजबूत करने के लिए दिया गया है। पहली बार किसी भारतीय को यह सम्मान मिला है।

04.04.2019
यूएई का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ जायेद’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चार अप्रैल को यूएई के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ जायेद देने की घोषणा की गई और उन्हें 24 अगस्त, 2019 को ऑर्डर ऑफ जायेद से सम्मानित किया गया। अबू धाबी में क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने प्रधानमंत्री मोदी को ऑर्डर ऑफ जायेद से सम्मानित किया। जायेद मेडल किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष को दिया जाने वाला यूएई का सबसे बड़ा सम्मान है। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान दोनों देशों के बीच दोस्ती और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए दिया गया है। यह सम्मान यूएई के संस्थापक शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान के नाम पर है। यह सम्मान भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच विशेष संबंधों का परिचायक है। 

22.02.2019

प्रधानमंत्री मोदी को मिला सियोल शांति पुरस्‍कार
प्रधानमंत्री मोदी को 22 फरवरी, 2019 को दक्षिण कोरिया के सोल में 2018 के सियोल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया। यह सम्‍मान उन्‍हें अंतरराष्‍ट्रीय सहयोग, ग्‍लोबल आर्थिक प्रगति और भारत के लोगों के मानव विकास को तेज करने के लिए प्रतिबद्धता दिखाने के लिए दिया गया है। दक्षिण कोरिया के सियोल पीस प्राइज कल्चरल फाउंडेशन ने अमीरों और गरीबों के बीच सामाजिक और आर्थिक खाई को कम करने के लिए मोदीनॉमिक्स की प्रशंसा भी की है।

प्रधानमंत्री मोदी को सियोल शांति पुरस्कार के तहत एक प्रशस्त्रि पत्र और 2 लाख डॉलर (करीब 1 करोड़ 30 लाख रुपये) की सम्मान निधि दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस सम्मान के साथ जो राशि सम्मान निधि के रूप में मिली है, वो मैं नमामि गंगे को समर्पित करता हूं। प्रधानमंत्री मोदी यह पुरस्कार पानेवाले दुनिया के 14वें और भारत के पहले व्यक्ति हैं।

14.01.2019
फिलिप कोटलर प्रेशिडेंशियल पुरस्कार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इसी साल, 14 जनवरी, 2019 को देश को उत्कृष्ट नेतृत्व देने के लिए प्रथम फिलिप कोटलर प्रेशिडेंशियल पुरस्कार से सम्मानित गया। यह पुरस्कार तीन आधार रेखा पीपुल, प्रॉफिट और प्लानेट पर केन्द्रित है। प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि श्री मोदी के नेतृत्व में भारत की पहचान अब इनोवेशन और मेक इन इंडिया के साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी, लेखांकन एवं वित्त जैसे पेशेवर सेवाओं के केन्द्र के रूप में हुई है। प्रशस्ति पत्र में यह भी कहा गया है कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व की वजह से सामाजिक लाभ और वित्तीय समावेशन के लिए विशिष्ट पहचान संख्या, आधार सहित डिजिटल इंडिया क्रांति हो सकी। इससे उद्यमिता, व्यापार सुगमता और देश के लिए 21वीं सदी का ढांचागत विकास करने में मदद मिली है। इसमें मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्वच्छ भारत जैसी पहलों की चर्चा की गई है जिससे भारत पूरी दुनिया में सबसे अधिक आकर्षक उत्पादन और व्यापार केन्द्र के रूप में उभरा है।

प्रोफेसर फिलिप कोटलर नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी, केलॉग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में मार्केटिंग के विश्व प्रसिद्ध प्रोफेसर हैं। बीमारी की वजह से प्रोफेसर कोटलर ने अमेरिका के जॉर्जिया में इमोरी यूनीवर्सिटी के डॉ जगदीश सेठ को प्रधानमंत्री मोदी को पुरस्कार प्रदान करने के लिए भेजा था।

03.10.2018

प्रधानमंत्री को मिला UN का सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार ‘चैंपियंस ऑफ अर्थ’
प्रधानमंत्री मोदी को 3 अक्तूबर, 2018 को नई दिल्ली में एक विशेष समारोह में संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण संबंधी पुरस्कार ‘UNEP चैम्पियंस ऑफ द अर्थ’ से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने दिया। प्रधानमंत्री मोदी को अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के समर्थन में उनके पथप्रदर्शक कार्य और 2022 तक भारत में सभी एकल-उपयोग प्लास्टिक को समाप्त करने के उनके अभूतपूर्व संकल्प के लिए नेतृत्व वर्ग में यह सम्मान दिया गया। वार्षिक चैम्पियंस ऑफ द अर्थ पुरस्कार सरकारी, सिविल सोसायटी और निजी क्षेत्र के उन असाधारण नेताओं को प्रदान किया जाता है जिनके कार्यों का पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा हो।

10.02.2018
पीएम मोदी को मिला फिलिस्तीन का सर्वोच्च ग्रैंड कॉलर सम्मान
फिलस्तीन के दौरे पर जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने ग्रैंड कॉलर सम्मान प्रदान किया। भारत और फिलिस्तीन के रिश्तों की बेहतरी के लिए श्री मोदी द्वारा उठाए गए कदमों के लिए यह सम्मान दिया गया। ग्रैंड कॉलर विदेशी मेहमान को दिया जाने वाला फिलस्तीन का सर्वोच्च सम्मान है।

04.06.2016

अफगानिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, आमिर अमानुल्लाह खान अवार्ड से सम्मानित
प्रधानमंत्री मोदी को अफगानिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘अमीर अमानुल्लाह खान पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। जून, 2016 को हेरात में ऐतिहासिक अफगान-भारत मैत्री बांध के उद्घाटन के बाद राष्ट्रपति अशरफ गनी द्वारा उन्हें इस सम्मान से नवाजा गया। अफगानिस्तान के नागरिकों के साथ-साथ विदेशी नागरिकों को उनकी सेवाओं की प्रशंसा में अफगान सरकार द्वारा दिया जाने वाला यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। पदक के पीछे यह उल्लेख है – “निशान-ए दौलती गाजी अमीर अमानुल्लाह खान” अर्थात “राज्य आदेश गाजी अमीर अमानुल्लाह खान।”

03.04.2016

सऊदी अरब का सर्वोच्च सैश ऑफ किंग अब्दुल अजीज सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी को 2016 में सऊदी अरब के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘सैश ऑफ किंग अब्दुल अजीज (स्पेशल क्लास) से सम्मानित किया गया।