Showing posts with label DK Shivakumar. Show all posts
Showing posts with label DK Shivakumar. Show all posts

कर्नाटक सेक्स सीडी कांड : कांग्रेस नेता शिवकुमार की पोल खुली, मोदी को बदनाम करने का दिया था टास्क

     सलाखों के पीछे देवराजे गौड़ा, डीके शिवकुमार और प्रज्ज्वल रेवन्ना (साभार: Vartha Bharathi and OpIndia)
बीजेपी नेता और वकील देवराजे गौड़ा ने शुक्रवार (17 मई) को एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी को बदनाम करने के लिए 100 करोड़ रुपए देने की पेशकश की थी। गौड़ा ने कहा कि शिवकुमार ने उन्हें अग्रिम राशि के रूप में 5 करोड़ रुपए भी भेजे थे।

देवराजे गौड़ा का आरोप है कि कांग्रेस नेता शिवकुमार ने पूर्व एमएलसी एमए गोपालस्वामी को उनसे बातचीत करने के लिए नियुक्त किया था। गौरतलब है कि शुक्रवार (17 मई 2024) को जब उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा था तो उन्होंने पुलिस वाहन से पत्रकारों से बात करते हुए ये टिप्पणी की। उन्हें लगभग एक सप्ताह पहले यौन शोषण के आरोप में कॉन्ग्रेस सरकार ने गिरफ्तार किया है।

देवराजे गौड़ा ने प्रज्ज्वल रेवन्ना से जुड़े अश्लील वीडियो और यौन शोषण मामले की ओर जनता का ध्यान आकर्षित किया था। गौड़ा के अनुसार, प्रज्ज्वल रेवन्ना मामले से संबंधित घटनाक्रम को सँभालने के लिए एन चेलुवरयास्वामी, कृष्णा बायरे गौड़ा और प्रियांक खड़गे सहित चार मंत्रियों की एक टीम बनाई गई थी।

हासन में अदालत परिसर से ले जाए जाने के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए गौड़ा ने कहा, “मुझे एक बयान देने के लिए कहा गया था कि यह एचडी कुमारस्वामी ही थे, जिन्होंने पेन ड्राइव में रखे सेक्स वीडियो प्रसारित किए थे (इसमें कुमारस्वामी के भतीजे प्रज्वल रेवन्ना, पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा के पोते भी शामिल हैं)। लेकिन, प्रज्ज्वल रेवन्ना के ड्राइवर कार्तिक गौड़ा से पेन ड्राइव लेकर सारी योजना बनाने वाले शिवकुमार थे।”

उन्होंने कहा, “उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, एचडी कुमारस्वामी और भाजपा को बदनाम करने के लिए बड़े पैमाने पर योजना बनाई थी। उन्होंने मुझे 100 करोड़ रुपए की पेशकश की और बॉरिंग क्लब के कमरा नंबर 110 में एडवांस के तौर पर 5 करोड़ रुपए भी भेजे। चन्नारायपटना के एक स्थानीय नेता गोपालस्वामी को इस सौदे पर बातचीत करने के लिए भेजा गया था।”

गौड़ा ने आगे कहा, “जब मैंने उनकी योजनाओं का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया तो उन्होंने पहले मुझे एक मामले में फँसाया, लेकिन उसमें कोई सबूत नहीं मिला। बाद में उन्होंने मुझे यौन उत्पीड़न के मामले में फँसा दिया। जब ये चाल भी नाकाम हो गई तो उन्होंने मेरे खिलाफ रेप का केस दर्ज करा दिया। मुझसे चार दिनों तक पूछताछ की गई, लेकिन उनसे कुछ पता नहीं चल सका।”

देवराजे गौड़ा ने पत्रकारों से बातचीत करते समय जोर देकर कहा, “मेरे पास शिवकुमार की बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग है। मैं जेल से बाहर आते ही उसे जारी कर दूँगा और कॉन्ग्रेस की सरकार गिर जाएगी।” इससे पहले 6 मई को गौड़ा ने कहा था कि यौन उत्पीड़न के वीडियो वाली पेन ड्राइव जारी करने के पीछे शिवकुमार का हाथ था। कॉन्ग्रेस पार्टी का मुख्य निशाना प्रधानमंत्री मोदी हैं।

उन्होंने कहा था, “मुझे सेक्स स्कैंडल की जाँच कर रही SIT पर भरोसा नहीं है। मैं सारे सबूत सीबीआई को सौंप दूँगा। मेरे पास मौजूद वीडियो उन वीडियो से अलग हैं, जो जारी किए गए हैं।” बता दें कि 33 वर्षीय प्रज्वल रेवन्ना पर कई महिलाओं के यौन शोषण के आरोप हैं। प्रज्वल जर्मनी के फ्रैंकफर्ट भाग गए हैं। उनके खिलाफ इंटरपोल ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है।

कर्नाटक चुनाव : शिवकुमार के लिए काम कर रही थी बिकाऊ पत्रकारों की टीम, खुद किया खुलासा: कांग्रेस-मीडिया नेक्सस फिर हुआ बेनकाब

मोदी विरोधियों द्वारा हर समय गोदी-मीडिया का विलाप करने वाले क्यों भूल गए की देश में एक बिकाऊ पत्रकारों की भी भीड़ है, जो सच्चाई को छुपाकर हिन्दू विरोधी पार्टी को जिताने में व्यस्त थे। हिन्दू शिक्षित होते हुए भी अशिक्षितों की भांति जात-पात में बंटकर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारते आ रहे है। फिर बेशर्मों और पागलों की तरह अनहोनी के लिए सरकार को दोष देते हैं। बेशर्म हिन्दुओं मुसलमानों से सीखो, हिन्दुओं से अधिक उनमे जातियां होने के बावजूद इस्लाम के नाम पर एकजुट रहते हैं। कोई मोदी, योगी या कोई धीरेन्द्र तुम्हे एकजुट करने नहीं आएगा, ये लोग रास्ता दिखा सकते हैं, एकजुट तुम्हे ही होना पड़ेगा। हिन्दू विरोधी और हिन्दू हितैषी को पहचानना होगा। जयचन्दों के ही कारण आतताई मुग़ल राज कर सके थे, उन जयचंदों के वंशों को उनकी हैसियत दिखानी होगी। 

कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कुछ पत्रकार कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे थे। पत्रकारों का यह गिरोह कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिव कुमार से जुड़ा हुआ था। इसका खुलासा खुद शिवकुमार ने किया है। उनके इस कबूलनामे ने कांग्रेस और मीडिया गिरोह की साँठगाँठ को फिर से बेनकाब कर दिया है।

16 मई 2023 को इंडिया टुडे की पत्रकार नबीला जमील से बातचीत में शिवकुमार ने चुनाव में कुछ पत्रकारों के अपने लिए काम करने का खुलासा किया। वीडियो में इसे आप 4 मिनट 16 सेकेंड से सुन सकते हैं। शिवकुमार कहते हैं कि उन्होंने कर्नाटक में अकेले दम पर कांग्रेस की जीत सुनिश्चित की। उनके लिए तीन टीम काम कर रही थी जो एआईसीसी (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) से अलग थी। वे बताते हैं कि उनकी एक टीम पत्रकारों की थी। एक उनके राजनीतिक समर्थकों की। इसके अलावा उनका 10 साल पुराना सिस्टम भी सक्रिय था।

इस तरह से बोलते-बोलते शिवकुमार ने यह उजागर कर दिया उनकी ‘कृपा’ पर कई पत्रकार कांग्रेस को लेकर जनता की धारणा बदलने के मिशन में जुटे थे। हालाँकि ये पत्रकार कौन हैं, इसका खुलासा उन्होंने नहीं किया है। बावजूद इसके शिवकुमार कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनने में नाकामयाब रहे हैं। 20 मई को सिद्धारमैया सीएम पद की शपथ लेने जा रहे हैं। शिवकुमार डिप्टी सीएम होंगे।

सीएम के रेस में शिवकुमार के पिछड़ने की कई वजहें बताई जा रही है। इनमें से एक उनका ‘घनघोर हिंदू’ दिखना भी बताया जा रहा है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि वामपंथी पृष्ठभूमि से आने वाले सिद्धारमैया को आरएसएस और बीजेपी के ‘कट्टर’ वैचारिक विरोधी के तौर पर देखा जाता है। इसके उलट दक्षिणपंथी समूहों को लेकर शिवकुमार की ऐसी छवि नहीं है। वे एक ऐसे हिंदू के तौर पर देखे जाते हैं जो अपना धार्मिक झुकाव छिपाने की कोशिश नहीं करते। अक्सर धार्मिक स्थलों पर जाते रहते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्नाटक का मौजूदा राजनीतिक माहौल स्पष्ट ध्रुवीकरण दिखाता है। यदि ऐसा नहीं होता तो शिवकुमार की यह हिंदुवादी छवि उनके लिए कोई समस्या नहीं होती। रिपोर्ट के अनुसार विधानसभा चुनावों में जेडीएस के मुस्लिम वोटरों ने भी कॉन्ग्रेस का समर्थन किया है। कई लोगों का मानना है कि यह कॉन्ग्रेस के पक्ष में मुस्लिम वोट बैंक के अधिक मजबूती से खड़े होने के संकेत हैं। अगले साल लोकसभा चुनाव से पहले यह ध्रुवीकरण और गहरा हो सकता है। इसे देखते हुए आलाकमान ने एक ऐसे व्यक्ति (सिद्धारमैया) को चुना जो वैचारिक तौर पर बीजेपी-आरएसएस का विरोधी है और जो मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने के पार्टी के एजेंडे को दृढ़ता से आगे बढ़ा सकता है।

वैसे सिद्धारमैया को सीएम बनाने के फैसले पर पार्टी के भीतर अभी से ही असंतोष दिखने लगा है। कॉन्ग्रेस सांसद और शिवकुमार के भाई डीके सुरेश ने कहा है कि वे इस फैसले से पूरी तरह खुश नहीं हैं। जी परमेश्वर जैसे नेता खुद को डिप्टी सीएम भी नहीं बनाए जाने पर नाखुशी जता चुके हैं। इसके अलावा कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने भी मुस्लिम डिप्टी सीएम और गृह, स्वास्थ्य तथा शिक्षा जैसे 5 महत्वपूर्ण मंत्रालय मुस्लिमों के लिए माँग चुका है।

कर्नाटक : ‘घनघोर हिन्दू ’ होने के कारण कटा शिवकुमार का पत्ता? मुस्लिम वोट बैंक के लिए कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया को चुना

 


20 मई 2023 को सिद्धारमैया कर्नाटक के मुख्यमंत्री (Karnataka CM) पद की शपथ लेंगे। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) डिप्टी सीएम होंगे। मुख्यमंत्री की  रेस में शिवकुमार के पिछड़ने की कई वजहें बताई जा रही है। इनमें से एक उनका ‘घनघोर हिन्दू’ दिखना भी बताया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार अगले लोकसभा चुनावों से पहले मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण के लिए 
कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया (Siddaramaiah) को उन पर वरीयता दी है। जिसने फिर 'चुनावी हिन्दू' बन जनता को नेत्रहीन बना सिद्ध कर दिया कि कांग्रेस 'हिन्दू विरोधी' है। चुनावों में मन्दिर-मन्दिर जाना, कोट पर जनेऊ पहनकर ढोंग रच हिन्दुओं को गुमराह करना कांग्रेस की चाल एक बार फिर उजागर हो गयी है, लेकिन नेत्रहीन बने हिन्दू कब अपने चक्षु खोल हिन्दू विरोधी और हिन्दू हितैषी को पहचानेगा?

इकोनॉमिक्स टाइम्स ने ‘कांग्रेस आलाकमान द्वारा सिद्धारमैया को कर्नाटक का मुख्यमंत्री चुनने के 5 कारण (Five reasons why Congress high command picked Siddaramaiah as Karnataka CM) शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें जो दूसरा कारण बताया गया है, वह बेहद दिलचस्प है। इसमें कहा गया है कि वामपंथी पृष्ठभूमि से आने वाले सिद्धारमैया को आरएसएस और बीजेपी के ‘कट्टर’ वैचारिक विरोधी के तौर पर देखा जाता है। इसके उलट दक्षिणपंथी समूहों को लेकर शिवकुमार की ऐसी छवि नहीं है। वे एक ऐसे हिंदू के तौर पर देखे जाते हैं जो अपना धार्मिक झुकाव छिपाने की कोशिश नहीं करते। अक्सर धार्मिक स्थलों पर जाते रहते हैं।

ऊपर आप ET की रिपोर्ट का वह हिस्सा देख सकते हैं। इसमें कहा गया है कि कर्नाटक का मौजूदा राजनीतिक माहौल स्पष्ट ध्रुवीकरण दिखाता है। यदि ऐसा नहीं होता तो शिवकुमार की यह हिंदुवादी छवि उनके लिए कोई समस्या नहीं होती। रिपोर्ट के अनुसार विधानसभा चुनावों में जेडीएस के मुस्लिम वोटरों ने भी कांग्रेस का समर्थन किया है। कई लोगों का मानना है कि यह कांग्रेस के पक्ष में मुस्लिम वोट बैंक के अधिक मजबूती से खड़े होने के संकेत हैं। अगले साल लोकसभा चुनाव से पहले यह ध्रुवीकरण और गहरा हो सकता है। इसे देखते हुए आलाकमान ने एक ऐसे व्यक्ति को चुना जो वैचारिक तौर पर बीजेपी-आरएसएस का विरोधी है और जो मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने के पार्टी के एजेंडे को दृढ़ता से आगे बढ़ा सकता है।

कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस की जीत पर शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की प्रबल संभावना जताई जा रही थी। उनकी दावेदारी कितनी मजबूत थी इसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि कर्नाटक चुनाव के नतीजे 13 मई 2023 को ही आ गए थे। 224 सदस्यीय विधानसभा में कॉन्ग्रेस को 135 सीटें भी मिल गई। लेकिन मुख्यमंत्री का नाम 18 मई को जाकर फाइनल हुआ। उससे पहले शिवकुमार और सिद्धारमैया के साथ कई बार पार्टी आलाकमान की बैठकें हुई।

वैसे सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाने के फैसले पर पार्टी के भीतर अभी से ही असंतोष दिखने लगा है। कांग्रेस सांसद और शिवकुमार के भाई डीके सुरेश ने कहा है कि वे इस फैसले से पूरी तरह खुश नहीं हैं। जी परमेश्वर जैसे नेता खुद को डिप्टी सीएम भी नहीं बनाए जाने पर नाखुशी जता चुके हैं। इसके अलावा कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने भी मुस्लिम डिप्टी सीएम और गृह, स्वास्थ्य तथा शिक्षा जैसे 5 महत्वपूर्ण मंत्रालय मुस्लिमों के लिए माँग चुका है।

कर्नाटक : मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में छिड़ा पोस्टर वार: सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की प्रतिष्ठा दांव पर

डीके शिवकुमार और सिद्धरमैया का पोस्टर (साभार: जागरण)
कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने भारी जीत हासिल की है, लेकिन अब मुख्यमंत्री पद को लेकर राज्य में संग्राम छिड़ गया है। प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार (DK Shivakumar)और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) के बीच मुख्यमंत्री बनने को लेकर पोस्टर वार शुरू हो गया है। दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर है, कांग्रेस सूत्रों के अनुसार बैंगलोर में रिमोट कंट्रोल अध्यक्ष मल्लिकार्जुन द्वारा कोई नतीजा नहीं निकलने के कारण अब मामला पार्टी की वास्तविक अध्यक्षा सोनिया गाँधी के दरबार में जरूर चला गया है, लेकिन मामला खटाई में है। देखो, ऊंट किस करवट बैठता है।  

राजस्थान की तरह कर्नाटक में भी कांग्रेस पार्टी दो खेमों में बँट गई है। एक खेमा है डीके शिवकुमार का और दूसरा है सिद्धारमैया है। दोनों खेमें अपने-अपने लोगों को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाह रहे हैं। इसको लेकर बड़े-बड़े पोस्टर छपवाकर लगाए गए हैं।

सिद्धारमैया के समर्थकों ने राजधानी बेंगलुरु में उनके आवास के बाहर एक पोस्टर लगाया है, जिसमें उन्हें ‘कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री’ बताया गया है। वहीं, डीके शिवकुमार के समर्थकों ने भी बेंगलुरु में उनके आवास के बाहर पोस्टर लगाया है। इसमें उन्हें राज्य का अगला ‘मुख्यमंत्री’ घोषित करने की माँग की है।

कर्नाटक चुनावों की 13 मई 2023 को हुई मतगणना में कांग्रेस पार्टी को कुल 224 सीटों में से 135 सीटें मिली हैं, जो बहुमत के लिए जरूरी 113 से 23 सीटें अधिक हैं। वहीं, भाजपा को सिर्फ 66 सीटों से ही संतोष करना पड़ा है। राज्य की जेडीएस को भारी नुकसान हुआ है और उसे 19 सीटें मिली हैं।

मुख्यमंत्री पद को लेकर आज रविवार (14 मई 2023) को शाम 5:30 बजे कांग्रेस विधायक दल की बैठक है। इस दौरान कांग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षक भी शामिल रहेंगे। इसमें मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगेगी। कर्नाटक के कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार के अनुसार, सीएम पद का फैसला पार्टी हाईकमान लेगा।

कर्नाटक : ‘सत्ता में आते ही मुस्लिमों का आरक्षण करेंगे बहाल’: कांग्रेस

संविधान की शपथ लेकर कभी आरक्षण तो कभी जातियों के नाम पर जनता को विभाजित करने वाली पार्टियां क्या वोट की हक़दार हैं? जब संविधान हमें एकजुट रहने की बात करता है, फिर ये कुर्सी ने भूखे नेता क्यों जनता में विभाजन कर संविधान का अपमान कर रहे हैं? ऐसे विभाजनकारी नेताओं और पार्टियों को वोट देने से अच्छा है, NOTA को वोट देना अधिक उचित है। 
कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले अल्पसंख्यक आरक्षण का मुद्दा गरमाता जा रहा है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने मुस्लिमों को मिलने वाला अल्पसंख्यक आरक्षण रद्द कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि धर्म के आधार पर आरक्षण देने का संविधान में कोई प्रावधान नहीं है। वहीं, कांग्रेस सत्ता में वापसी होने पर इस आरक्षण को बहाल करने की बात कर रही है।

कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने अल्पसंख्यक आरक्षण रद्द करने को लेकर भाजपा द्वारा किए गए फैसले को असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने कहा है, “भाजपा सरकार सोचती है कि आरक्षण को संपत्ति की तरह बाँटा जा सकता है। लेकिन आरक्षण संपत्ति नहीं बल्कि अधिकार है। हम नहीं चाहते कि अल्पसंख्यक वर्ग का 4% आरक्षण खत्म हो और किसी बड़े समुदाय को दिया जाए। अल्पसंख्यक हमारे भाई हैं और हमारे परिवार के सदस्य हैं।”

डीके शिवकुमार ने दावा करते हुए कहा है कि भाजपा लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय को जो आरक्षण दे रही है, उसे इस समुदाय के लोगों ने ठुकरा दिया है। शिवकुमार ने एक और दावा करते हुए कहा कि अगले 45 दिनों में कांग्रेस कर्नाटक की सत्ता में होगी। इसके बाद कैबिनेट की पहली बैठक में ही अल्पसंख्यकों का आरक्षण बहाल कर दिया जाएगा।

कर्नाटक में एक सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि भाजपा कभी भी तुष्टिकरण में विश्वास नहीं करती। इसलिए उसने आरक्षण व्यवस्था में बदलाव करने फैसला किया। बीजेपी ने अल्पसंख्यकों को दिया गया 4% आरक्षण समाप्त कर 2 प्रतिशत आरक्षण वोक्कालिगा और 2 प्रतिशत आरक्षण लिंगयत को दिया है। अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण संवैधानिक रूप से वैध नहीं है। संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। कांग्रेस सरकार तुष्टिकरण की राजनीति के तहत अल्पसंख्यकों को आरक्षण दिया था।

कर्नाटक सरकार ने 24 मार्च 2023 को दो बड़े फैसले लिए। पहले फैसले के तहत सरकार ने अल्पसंख्यक कोटे के तहत मुस्लिमों को मिलने वाला 4% आरक्षण रदद् कर दिया। वहीं, दूसरा बड़ा फैसला यह है कि इसी 4% आरक्षण को सरकार ने वोक्कालिगा और लिंयागत समुदाय में बाँट दिया। इस तरह से अब शिक्षा और नौकरी में वोक्कालिगा और लिंगानुपात समुदाय को राज्य में 2-2% आरक्षण मिलेगा। वहीं, धार्मिक अल्पसंख्यकों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की श्रेणी में रखा जाएगा।

कर्नाटक : ‘डीके शिवकुमार 10-12% लेते हैं घूस’: कांग्रेस नेता ने खोली पोल

                                        घर का भेदी लंका ढाए 
पंजाब का मसला अभी धमा भी नहीं कि अब कर्नाटक भी कांग्रेस में उठापटक शुरू हो गयी। अब ये उठापटक कहाँ तक जाएगी, कहना मुश्किल है। कांग्रेस पार्टी की लूट की कहानी बयाँ करता एक वीडियो सामने आया है, जिसके बाद पार्टी के अंदर हड़कंप मच गया है। यह वीडियो कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिव कुमार को लेकर है। वीडियो में कांग्रेस के ही दो नेता आपस में बात कर रहे हैं, जिसमें मीडिया कोऑर्डिनेटर सली को यह कहते सुना जा सकता है कि डीके शिवकुमार 10-12 प्रतिशत घूस लेते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस वीडियो के सामने आने के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने वीएस उग्रप्पा को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है तो वहीं सलीम को 6 साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। बहरहाल इस वीडियो के वायरल होने के बाद बीजेपी भी उन पर हमलावर हो गई है।

कांग्रेस के पूर्व लोकसभा सांसद वीएस उग्रप्पा और पार्टी के मीडिया कोऑर्डिनेटर सलीम अहमद आपस में बातें कर रहे होते हैं। इसमें सलीम अहमद उग्रप्पा से आरोप लगाते हुए कहते हैं कि डीके शिवकुमार 10-12 फीसदी का घूस लेते हैं। इससे उनके सहयोगियों ने करोंड़ों रुपए की संपत्ति खरीदी है। सलीम आगे कहते हैं कि पहले शिवकुमार केवल 6-8 प्रतिशत ही लेते थे, लेकिन अब उन्होंने 10-20 फीसदी लेना शुरू कर दिया है। उन्होंने इसे महाघोटाला करार देते हुए कहा कि जितना खोदोगे उतना ही निकलेगा। डीके शिवकुमार के सहयोगी मुलगुंड ने ही 50-100 करोड़ रुपए कमा लिए हैं।

सलीम ने शिवकुमार पर शराब पीने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो बात करते हुए हकलाते हैं। मुझे शक है कि वो शराब पीकर आते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले दोनों नेताओं की रिकॉर्ड इस बातचीत पर फिलहाल डीके शिवकुमार ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि अनुशासन समिति इस मामले में निर्णय लेगी। वहीं कांग्रेस ने इस मामले में कहा है कि सलीम भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों के बारे में बातें कर रहे थे।