Showing posts with label paid journalists. Show all posts
Showing posts with label paid journalists. Show all posts

कर्नाटक चुनाव : शिवकुमार के लिए काम कर रही थी बिकाऊ पत्रकारों की टीम, खुद किया खुलासा: कांग्रेस-मीडिया नेक्सस फिर हुआ बेनकाब

मोदी विरोधियों द्वारा हर समय गोदी-मीडिया का विलाप करने वाले क्यों भूल गए की देश में एक बिकाऊ पत्रकारों की भी भीड़ है, जो सच्चाई को छुपाकर हिन्दू विरोधी पार्टी को जिताने में व्यस्त थे। हिन्दू शिक्षित होते हुए भी अशिक्षितों की भांति जात-पात में बंटकर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारते आ रहे है। फिर बेशर्मों और पागलों की तरह अनहोनी के लिए सरकार को दोष देते हैं। बेशर्म हिन्दुओं मुसलमानों से सीखो, हिन्दुओं से अधिक उनमे जातियां होने के बावजूद इस्लाम के नाम पर एकजुट रहते हैं। कोई मोदी, योगी या कोई धीरेन्द्र तुम्हे एकजुट करने नहीं आएगा, ये लोग रास्ता दिखा सकते हैं, एकजुट तुम्हे ही होना पड़ेगा। हिन्दू विरोधी और हिन्दू हितैषी को पहचानना होगा। जयचन्दों के ही कारण आतताई मुग़ल राज कर सके थे, उन जयचंदों के वंशों को उनकी हैसियत दिखानी होगी। 

कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कुछ पत्रकार कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे थे। पत्रकारों का यह गिरोह कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिव कुमार से जुड़ा हुआ था। इसका खुलासा खुद शिवकुमार ने किया है। उनके इस कबूलनामे ने कांग्रेस और मीडिया गिरोह की साँठगाँठ को फिर से बेनकाब कर दिया है।

16 मई 2023 को इंडिया टुडे की पत्रकार नबीला जमील से बातचीत में शिवकुमार ने चुनाव में कुछ पत्रकारों के अपने लिए काम करने का खुलासा किया। वीडियो में इसे आप 4 मिनट 16 सेकेंड से सुन सकते हैं। शिवकुमार कहते हैं कि उन्होंने कर्नाटक में अकेले दम पर कांग्रेस की जीत सुनिश्चित की। उनके लिए तीन टीम काम कर रही थी जो एआईसीसी (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) से अलग थी। वे बताते हैं कि उनकी एक टीम पत्रकारों की थी। एक उनके राजनीतिक समर्थकों की। इसके अलावा उनका 10 साल पुराना सिस्टम भी सक्रिय था।

इस तरह से बोलते-बोलते शिवकुमार ने यह उजागर कर दिया उनकी ‘कृपा’ पर कई पत्रकार कांग्रेस को लेकर जनता की धारणा बदलने के मिशन में जुटे थे। हालाँकि ये पत्रकार कौन हैं, इसका खुलासा उन्होंने नहीं किया है। बावजूद इसके शिवकुमार कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनने में नाकामयाब रहे हैं। 20 मई को सिद्धारमैया सीएम पद की शपथ लेने जा रहे हैं। शिवकुमार डिप्टी सीएम होंगे।

सीएम के रेस में शिवकुमार के पिछड़ने की कई वजहें बताई जा रही है। इनमें से एक उनका ‘घनघोर हिंदू’ दिखना भी बताया जा रहा है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि वामपंथी पृष्ठभूमि से आने वाले सिद्धारमैया को आरएसएस और बीजेपी के ‘कट्टर’ वैचारिक विरोधी के तौर पर देखा जाता है। इसके उलट दक्षिणपंथी समूहों को लेकर शिवकुमार की ऐसी छवि नहीं है। वे एक ऐसे हिंदू के तौर पर देखे जाते हैं जो अपना धार्मिक झुकाव छिपाने की कोशिश नहीं करते। अक्सर धार्मिक स्थलों पर जाते रहते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्नाटक का मौजूदा राजनीतिक माहौल स्पष्ट ध्रुवीकरण दिखाता है। यदि ऐसा नहीं होता तो शिवकुमार की यह हिंदुवादी छवि उनके लिए कोई समस्या नहीं होती। रिपोर्ट के अनुसार विधानसभा चुनावों में जेडीएस के मुस्लिम वोटरों ने भी कॉन्ग्रेस का समर्थन किया है। कई लोगों का मानना है कि यह कॉन्ग्रेस के पक्ष में मुस्लिम वोट बैंक के अधिक मजबूती से खड़े होने के संकेत हैं। अगले साल लोकसभा चुनाव से पहले यह ध्रुवीकरण और गहरा हो सकता है। इसे देखते हुए आलाकमान ने एक ऐसे व्यक्ति (सिद्धारमैया) को चुना जो वैचारिक तौर पर बीजेपी-आरएसएस का विरोधी है और जो मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने के पार्टी के एजेंडे को दृढ़ता से आगे बढ़ा सकता है।

वैसे सिद्धारमैया को सीएम बनाने के फैसले पर पार्टी के भीतर अभी से ही असंतोष दिखने लगा है। कॉन्ग्रेस सांसद और शिवकुमार के भाई डीके सुरेश ने कहा है कि वे इस फैसले से पूरी तरह खुश नहीं हैं। जी परमेश्वर जैसे नेता खुद को डिप्टी सीएम भी नहीं बनाए जाने पर नाखुशी जता चुके हैं। इसके अलावा कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने भी मुस्लिम डिप्टी सीएम और गृह, स्वास्थ्य तथा शिक्षा जैसे 5 महत्वपूर्ण मंत्रालय मुस्लिमों के लिए माँग चुका है।