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1965 से 2026 तक का वो खौफनाक इतिहास, जब हवाई दुर्घटनाओं में दिग्गजों ने गँवाई जान : होमी भाभा-संजय गाँधी से जनरल रावत और अजित पवार तक

अजित पवार के अलावा इन दिग्गज राजनेताओं की मौत भी विमान हादसे में हुई (साभार : NDTV, News18, Aajtak & Deccanherald)
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बुधवार (28 जनवरी 2026) सुबह बारामती में एक विमान हादसे में दुखद निधन हो गया। मुंबई से उड़ान भरने के बाद लैंडिंग के दौरान उनका चार्टर्ड प्लेन अनियंत्रित होकर खेतों में जा गिरा और धू-धू कर जल उठा। इस हादसे ने न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश को हिला कर रख दिया है। अजित पवार अकेले ऐसे नेता नहीं हैं, भारतीय राजनीति का इतिहास ऐसे कई काले पन्नों से भरा है जब ‘आसमानी सफर’ ने देश के कई राजनेताओं को हमेशा के लिए खामोश कर दिया।

जब सरहद पर पाकिस्तानी हमले का शिकार हुआ गुजरात के मुख्यमंत्री का विमान

19 सितंबर 1965 की वह शाम भारतीय इतिहास के सबसे दर्दनाक पन्नों में से एक है, जब गुजरात के दूसरे मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता का विमान पाकिस्तानी वायु फौज ने बीच हवा में मार गिराया था। भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान मेहता अपनी पत्नी सरोजबेन, तीन स्टाफ सदस्यों और एक पत्रकार के साथ कच्छ सीमा के दौरे पर थे। जैसे ही उनका विमान मीठापुर से उड़ा, पाकिस्तानी फाइटर जेट के पायलट कैश हुसैन ने उसे घेर लिया।

विमान उड़ा रहे रिटायर्ड पायलट जहाँगीर इंजीनियर ने विंग्स हिलाकर दया का संकेत भी दिया, लेकिन पाकिस्तानी फौज के आदेश पर महज 100 मीटर की ऊँचाई पर विमान को मिसाइल से नेस्तनाबूद कर दिया गया। इस कायराना हमले में मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी समेत विमान में सवार सभी 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह देश के लोकतांत्रिक इतिहास की पहली और इकलौती घटना थी, जब युद्ध के दौरान किसी मुख्यमंत्री के नागरिक विमान को निशाना बनाया गया।

आल्प्स की पहाड़ियों में दफन हुआ भारत का ‘परमाणु सपना’

24 जनवरी 1966 की वह सर्द सुबह भारत के लिए एक ऐसी त्रासदी लेकर आई, जिसने देश के वैज्ञानिक भविष्य की नींव हिला दी। भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक और महान वैज्ञानिक होमी जहाँगीर भाभा एयर इंडिया के विमान ‘कंचनजंघा’ से जिनेवा जा रहे थे, तभी फ्रेंच आल्प्स की माउंट ब्लांक चोटियों से टकराकर उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस खौफनाक हादसे में भाभा समेत सभी 117 लोगों की मौत हो गई। हालाँकि, आधिकारिक रिपोर्ट ने इसे नेविगेशनल गलती बताया, लेकिन महज 18 महीने में परमाणु बम बनाने का दावा करने वाले भाभा की मौत पर आज भी साजिश के बादल मंडराते हैं। कई थ्योरीज दावा करती हैं कि भारत की परमाणु शक्ति को रोकने के लिए सीआईए (CIA) ने विमान में बम लगाया था। ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री के निधन के महज दो हफ्ते बाद हुई इस घटना ने पूरे राष्ट्र को एक गहरे शून्य में धकेल दिया था।

संजय गाँधी की वो आखिरी उड़ान: रोमांच जब बन गया काल

अजित पवार के प्लेन क्रैश ने आज पूरे देश को 46 साल पुराने उस मंजर की याद दिला दी, जिसने इंदिरा गाँधी के लाडले संजय गाँधी को हमेशा के लिए खामोश कर दिया था। 23 जून 1980 की वो सुबह दिल्ली के सफदरजंग एयरपोर्ट पर आम दिनों जैसी ही थी, जब 33 साल के तेजतर्रार नेता संजय गाँधी अपने नए ‘पिट्स एस-2ए’ विमान में सवार हुए। इंदिरा गाँधी के उत्तराधिकारी माने जाने वाले संजय गाँधी अपनी बेबाक शैली और युवाओं में जबरदस्त पैठ के लिए जाने जाते थे। उस दिन वे काफी उत्साहित थे और सुबह करीब 8 बजे अपने प्रशिक्षक सुभाष सक्सेना के साथ हवा में कलाबाजियाँ दिखाने के लिए उड़ान भरी।
अगले 11 मिनट तक आसमान में रोमांच का खेल चलता रहा। विमान कभी गोते लगाता तो कभी अचानक ऊँचाई छूता। लेकिन 12वें मिनट में जैसे ही संजय गाँधी ने खतरनाक करतब दिखाने के लिए विमान को नीचे झुकाया, अचानक इंजन बंद हो गया। देखते ही देखते विमान जमीन पर आ गिरा और सब कुछ खत्म हो गया। जब प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी अस्पताल पहुँचीं और बेटे का बेजान शरीर देखा तो वे फफक कर रो पड़ीं। उस एक हादसे ने न केवल एक माँ की गोद सूनी की, बल्कि देश की राजनीति का रुख भी हमेशा के लिए बदल दिया।

माधवराव सिंधिया: नियति का वो क्रूर फैसला और ग्वालियर का ‘काला रविवार’

30 सितंबर 2001 की वह सुबह ग्वालियर के लिए किसी आम दिन जैसी ही शुरू हुई थी, लेकिन दोपहर होते-होते आसमान से आई एक खबर ने पूरे देश को सन्न कर दिया। कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता और ग्वालियर के ‘महाराज’ माधवराव सिंधिया को उस दिन वास्तव में कानपुर की एक रैली में नहीं जाना था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की तबीयत खराब होने के कारण सिंधिया जी ने उनके स्थान पर रैली में जाने का फैसला किया। उन्होंने सुबह फोन पर अपने करीबियों से कहा था कि शाम को लौटकर मीटिंग करेंगे, पर वह शाम कभी नहीं आई। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के करहल में भारी बारिश के बीच उनका निजी ‘सेसना’ विमान आग का गोला बनकर खेतों में जा गिरा।
जैसे ही यह खबर फैली कि विमान में माधवराव सिंधिया सवार थे, ग्वालियर से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया। ग्वालियर की सड़कों पर सन्नाटा पसर गया और हजारों लोग बदहवास होकर ‘जयविलास पैलेस’ की ओर दौड़ पड़े। शहर के 90 फीसदी घरों में उस शाम चूल्हा नहीं जला था। हर आँख नम थी और हर दिल अपने लाडले नेता के लिए दुआ कर रहा था। उनकी अंतिम यात्रा में जनसैलाब का वो मंजर ऐतिहासिक था। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पूरी संसद को एक विमान से ग्वालियर लाने का फैसला किया था। महात्मा गाँधी के बाद यह देश का पहला ऐसा शोक जलसा था, जहाँ किसी गैर-पदेन नेता के लिए लाखों लोग बिलख-बिलख कर सड़कों पर उतर आए थे।

जीएमसी बालयोगी: लोकसभा के वो ‘सबसे युवा’ अध्यक्ष जिनका सफर तालाब में थम गया

गंती मोहन चंद्र बालयोगी भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने महज 51 साल की उम्र में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी। वे लोकसभा के सबसे युवा और पहले दलित अध्यक्ष थे, जिन्हें उनकी शालीनता और कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहने के लिए जाना जाता था। एक वकील और मजिस्ट्रेट से अपना करियर शुरू करने वाले बालयोगी ने संसद की गरिमा बनाए रखने के लिए कई कड़े सुधार किए। उन्होंने ही सबसे पहले सदन के ‘वेल’ में हंगामा करने वाले सांसदों के स्वतः निलंबन का नियम बनाया और सांसदों के लिए आचार संहिता लागू की। साल 2001 के संसद हमले के बाद सुरक्षा पुख्ता करने में भी उनकी भूमिका अहम रही थी।
3 मार्च 2002 की वह सुबह उनके जीवन की आखिरी सुबह साबित हुई। आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में सफर के दौरान उनका ‘बेल 206’ हेलीकॉप्टर तकनीकी खराबी और घने कोहरे का शिकार हो गया। पायलट को धुँध के कारण रास्ता नहीं दिखा और उसने जमीन समझकर हेलीकॉप्टर को एक तालाब में उतारने की कोशिश की, जिससे यह भयानक हादसा हो गया। इस क्रैश में बालयोगी समेत उनके सुरक्षा अधिकारी और पायलट की मौके पर ही मौत हो गई। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि उनके अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को विजयवाड़ा, हैदराबाद और दिल्ली ले जाया गया, जहाँ हजारों लोगों ने नम आँखों से अपने प्रिय ‘शांतिदूत’ को विदाई दी।

सहारनपुर के आसमान में थमी ओपी जिंदल और सुरेंद्र सिंह की धड़कनें

31 मार्च 2005 की वह दोपहर हरियाणा की राजनीति के लिए एक काला साया लेकर आई, जब सहारनपुर के पास हुए एक हेलिकॉप्टर क्रैश में दिग्गज बिजनेसमैन और तत्कालीन ऊर्जा मंत्री ओम प्रकाश जिंदल का निधन हो गया। वे चंडीगढ़ से दिल्ली जा रहे थे, तभी अचानक हेलिकॉप्टर के इंजन में खराबी आ गई। इस भयानक हादसे में जिंदल के साथ हरियाणा के कृषि मंत्री चौधरी सुरेंद्र सिंह और पायलट कर्नल टीएस चौहान की भी मौके पर ही मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हेलिकॉप्टर के गिरते समय सुरेंद्र सिंह को दिल का दौरा पड़ा था, जबकि ओपी जिंदल का सिर खिड़की से टकराने की वजह से उन्हें जानलेवा चोट आई। इस दुर्घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था क्योंकि जिस हेलिकॉप्टर ने यह गोता खाया था, वह बिल्कुल नया था।

वाई एस राजशेखर रेड्डी: पहाड़ियों में खो गया आंध्र का नायक

2 सितंबर 2009 की वह सुबह आंध्र प्रदेश के लिए किसी काल से कम नहीं थी। मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी (YSR) अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ‘प्रजापथम’ के लिए चित्तूर जिले की ओर निकले थे। सुबह 8:38 बजे जब उनके बेल-430 हेलीकॉप्टर ने हैदराबाद के बेगमपेट एयरपोर्ट से उड़ान भरी तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनकी आखिरी यात्रा होगी। करीब एक घंटे बाद, जब हेलीकॉप्टर नल्लामाला के घने और खतरनाक जंगलों के ऊपर से गुजर रहा था, अचानक ATS से उसका संपर्क टूट गया। पूरा सरकारी अमला और सुरक्षा एजेंसियाँ सन्न रह गईं। बारिश इतनी तेज थी कि घंटों तक कुछ पता नहीं चला और अफवाहें उड़ने लगीं कि कहीं नक्सलियों ने मुख्यमंत्री का अपहरण तो नहीं कर लिया?
अगले 24 घंटे तक पूरा देश साँसें थामकर टीवी स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहा। तलाशी अभियान में सेना के सुखोई विमान, इसरो के सैटेलाइट और थर्मल इमेजिंग की मदद ली गई। अगले दिन सुबह करीब 9:20 बजे वायुसेना को ‘पसुरुतला’ पहाड़ियों (पिजन हिल के सामने) पर हेलीकॉप्टर का मलबा दिखा। जब राहतकर्मी और मीडिया की टीमें वहाँ पहुँचीं, तो मंजर खौफनाक था। हेलीकॉप्टर के टुकड़े पाँच एकड़ में बिखरे थे और इंजन जलकर खाक हो चुका था।
डीजीसीए (DGCA) की जाँच में खुलासा हुआ कि यह कोई साजिश नहीं, बल्कि एक तकनीकी चूक और पायलट की गलती थी। रिपोर्ट के मुताबिक, हेलीकॉप्टर के गियरबॉक्स में खराबी आ गई थी और उसे ठीक करने के चक्कर में पायलटों ने नियंत्रण खो दिया। साथ ही, उड़ान से पहले जरूरी सुरक्षा जाँच भी पूरी नहीं की गई थी।

तवांग की पहाड़ियों में खो गए दोरजी खांडू, पाँच दिन बाद मिला मलबा

30 अप्रैल 2011 की सुबह अरुणाचल प्रदेश के लिए एक काले साये की तरह आई, जब मुख्यमंत्री दोरजी खांडू का पवन हंस हेलीकॉप्टर तवांग से ईटानगर जाते समय रहस्यमयी तरीके से लापता हो गया। उड़ान भरने के महज 20 मिनट बाद, 13,000 फीट ऊँचे सेला दर्रे के पास पहुँचते ही एटीसी से उनका संपर्क टूट गया। अगले पाँच दिनों तक पूरा देश और राज्य सरकार गहरी चिंता में रही, क्योंकि खराब मौसम और भारी बर्फबारी के बीच भारतीय वायु सेना के सुखोई विमान और इसरो के सैटेलाइट भी मलबे का सटीक पता नहीं लगा पा रहे थे।
आखिरकार, बुधवार सुबह चीन सीमा के पास लुगुथांग गाँव के लोगों ने मलबे की सूचना दी, जहाँ मुख्यमंत्री का निर्जीव शरीर और दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर के अवशेष मिले थे। इस दिल दहला देने वाले हादसे में मुख्यमंत्री के साथ सवार चार अन्य लोगों की भी दुखद मौत हो गई थी।

जनरल बिपिन रावत: कुन्नूर की पहाड़ियों में थम गई देश के पहले ‘चीफ’ की सांसें

8 दिसंबर 2021 का वो काला दिन भारत कभी नहीं भूल सकता, जब तमिलनाडु के कुन्नूर की पहाड़ियों में हुए एक दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे ने देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत को छीन लिया। जनरल रावत अपनी पत्नी मधुलिका रावत और 11 अन्य सैन्य कर्मियों के साथ Mi-17 V5 चॉपर में सवार होकर वेलिंगटन जा रहे थे। रक्षा मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट और जाँच से साफ हुआ है कि यह हादसा किसी तकनीकी खराबी या साजिश का नतीजा नहीं था, बल्कि अचानक बदले मौसम और घने बादलों की वजह से हुई ‘पायलट की चूक’ (ह्यूमन एरर) थी। चश्मदीदों ने बताया कि विमान तेजी से पेड़ों से टकराया और पल भर में आग के गोले में तब्दील हो गया।
हैरानी की बात यह है कि जनरल रावत के हेलीकॉप्टर को ‘मास्टर ग्रीन’ कैटेगरी का क्रू उड़ा रहा था, जो सबसे कम विजिबिलिटी में भी विमान संभालने में माहिर माने जाते हैं। 16 मार्च 1958 को जन्मे जनरल रावत का सैन्य सफर 1978 में गोरखा राइफल्स से शुरू हुआ था और अपनी काबिलियत के दम पर वे भारतीय सेना के प्रमुख और फिर देश के पहले सीडीएस बने। 18वीं लोकसभा की स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2022 के बीच वायुसेना के जो 34 हादसे हुए, उनमें कुन्नूर का यह क्रैश सबसे ज्यादा झकझोर देने वाला था। इस एक दुर्घटना ने न केवल एक जांबाज योद्धा को खो दिया, बल्कि भारतीय सैन्य नेतृत्व में एक ऐसा शून्य पैदा कर दिया जिसे भरना नामुमकिन है।

लंदन की उड़ान बनी आखिरी सफर, विमान हादसे में विजय रूपाणी का निधन

12 जून 2025 की वो तारीख गुजरात के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई, जब सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी एक भीषण विमान हादसे का शिकार हो गए। वे अहमदाबाद एयरपोर्ट से एयर इंडिया की फ्लाइट के जरिए अपनी बेटी से मिलने लंदन जा रहे थे। चश्मदीदों के मुताबिक, टेक-ऑफ के कुछ ही देर बाद विमान अपना संतुलन खो बैठा और एक भयावह दुर्घटना का शिकार हो गया। इस रूह कँपा देने वाले हादसे में विजय रूपाणी समेत विमान में सवार सभी 241 यात्रियों की मौत हो गई। उनकी पहचान करना इतना मुश्किल था कि हादसे के कई दिनों बाद DNA मिलान के जरिए उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि हो सकी।
राजकोट में हुए उनके अंतिम संस्कार में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहाँ हजारों लोगों ने अपने प्रिय नेता को नम आँखों से अंतिम विदाई दी। 21 तोपों की सलामी के बीच जब विजय रूपाणी का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ, तो पूरा शहर शोक की लहर में डूबा था। गुजरात ने अपना एक सादगी पसंद और मिलनसार नेता एक ऐसी आसमानी आफत में खो दिया, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकेगी।

कर्नाटक : उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने महाकुंभ में लगाई आस्था की डुबकी; आयोजन के लिए योगी आदित्यनाथ की तारीफ की

प्रयाग महाकुंभ के अब केवल 16 दिन और सिर्फ एक अमृत स्नान बाकी है। 26 फरवरी को महाशिवरात्रि अमृत स्नान के साथ ही महाकुंभ सम्पन्न हो जाएगा। देश-दुनिया के 43 करोड़ लोगों के साथ तमाम बड़े लोग भी त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा चुके हैं, लेकिन कांग्रेस नेता अभी तक महाकुंभ से दूरी बनाए हुए हैं। यहां तक की कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महाकुंभ पर तंज कसते हुए कहा था कि गंगा में स्नान करने से गरीबी और बेरोजगारी दूर नहीं होती। जो (खड़गे) सनातन का विरोध करता रहा हो, ऐसे विरोधी से और क्या अपेक्षा की जा सकती है? वैसे भी अब तो उनकी स्क्रिप्ट ही उनके आकाओं द्वारा लिखवाई जाती है।    

खरगे के इस बयान के बाद तो, जो कांग्रेस नेता महाकुंभ में जाना भी चाहते थे, उन्होंने जाना रद्द कर दिया। ऐसे में कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगा कांग्रेस नेतृत्व को एक तरह से चुनौती दे दी है। 

चर्चा है कि राहुल गाँधी भी महाकुम्भ में आस्था की डुबकी लगाने का मन बना रहे हैं। अखिलेश यादव पहले ही लगा चुके हैं। वास्तव में अब सभी ने समझना शुरू कर दिया है कि तुष्टिकरण कर मुस्लिम वोट तो मिल सकता है, लेकिन उससे ज्यादा हिन्दू कटना शुरू हो चुका है। मोदी रहे या न रहे सनातन को कोई नहीं रोक सकता। वैसे भी इतिहास साक्षी है कि सनातन मिटाने वालों का दुनिया में कोई नाम लेने वाला नहीं। बस एक भारत है जहाँ उनके नाम पर सियासत की दुकाने चल रही हैं।  

राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच डीके शिवकुमार के इस स्नान से सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। हैरानी की बात यह भी है कि कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार ने सिर्फ महाकुंभ में स्नान ही नहीं किया, बल्कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ भी की और कहा कि इतना बड़ा आयोजन करना कोई मजाक नहीं है। ऐसे में लोग कांग्रेस नेतृत्व पर तंज कसते हुए कह रहे हैं कि यह सनातन विरोधियों के मुंह पर करारा तमाचा है। लोगों का कहना है कि डीके शिवकुमार ने प्रयागराज महाकुंभ में पवित्र स्नान किया और इस ऐतिहासिक आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए आयोजकों का आभार भी जताया। 

लेकिन कुछ दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महाकुंभ जाने को पैसे की बर्बादी बताया था और कहा था कि स्नान करने से गरीबी नहीं मिटती। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि यह वही मानसिकता है जो सनातन संस्कृति और आस्था का अपमान करती है, लेकिन जब चुनाव आते हैं तो यही लोग मंदिर-मंदिर घूमकर आशीर्वाद लेने का ढोंग करते हैं! यह स्पष्ट संदेश है कि सनातन धर्म हमारी संस्कृति और परंपरा की रीढ़ है, और इसे निशाना बनाना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। आप भी देखिए लोग डीके शिवकुमार की डुबकी को लेकर क्या कह रहे हैं…

क्या कर्नाटक के कांग्रेसी मुख्यमंत्री अपने डिप्टी मुख्यमंत्री पर भरोसा नही करते? क्या कांग्रेस में टूटने की खिचड़ी पक रही है? देखिए सोशल मीडिया वीडियो

क्या कांग्रेस अपने आखिरी पड़ाव पर है? सोशल मीडिया समाचारों को देख/सुन लगता है कि 2029 चुनाव आने से पहले कांग्रेस तिनकों की तरह बिखडने को है। जिस नीति पर राहुल गाँधी चल रहे हैं, उससे पार्टी का हर नेता सहमत नहीं है। दूसरे, बांग्लादेशी पत्रकार शोएब द्वारा वर्तमान तथाकथित गाँधी परिवार की असलियत उजागर की है, उसने भी कांग्रेस ही नहीं INDI गठबंधन में भी दूरियां बनानी शुरू कर दी हैं। जिस दिन अपने आपको राष्ट्रीय चैनल बताने वालों से शोएब के सनसनी खुलासों पर चर्चा शुरू कर दी, कांग्रेस बहुत जल्द एक इतिहास बन जाएगी। जितनी चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है, तथाकथित राष्ट्रीय मीडिया खामोश और बहरा बने रहने का स्वांग रच रहा है, लगता है मोटा चढ़ावा पहुँच गया है। नेशनल मीडिया को देख लगता है जनता को राष्ट्रीय मीडिया की बजाए सोशल मीडिया देखना चाहिए। देखिए वीडियो जिनका किसी में खंडन करने का साहस नहीं :-

              
सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दिख रहा है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया एक कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ बैठे हुए हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के हाथ में एक कागज है। मुख्यमंत्री उस कागज को किसी को देना चाहते हैं। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार चूंकि उनके साथ बगल में बैठे हैं, तो वो मुख्यमंत्री से कागज को लेकर उस व्यक्ति को दे देना चाहते हैं। लेकिन सीएम सिद्धारमैया उन्हें कागज नहीं देते हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि डिप्टी सीएम शिवकुमार अपने मुख्यमंत्री से कागज लेने की बार-बार कोशिश करते हैं, लेकिन सिद्धारमैया उनके हाथ में कागज नहीं सौंपते हैं।

ऐसे में लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या कर्नाटक के कांग्रेसी सीएम को अपने डिप्टी सीएम पर भरोसा नहीं है? लोग पूछ रहे हैं कि आखिर उस कागज में ऐसा क्या है कि सीएम उसे अपने डिप्टी सीएम को भी नहीं दे रहे हैं? लोग इस वीडियो को लेकर कांग्रेस पर तंज कस रहे हैं।

कर्नाटक सेक्स सीडी कांड : कांग्रेस नेता शिवकुमार की पोल खुली, मोदी को बदनाम करने का दिया था टास्क

     सलाखों के पीछे देवराजे गौड़ा, डीके शिवकुमार और प्रज्ज्वल रेवन्ना (साभार: Vartha Bharathi and OpIndia)
बीजेपी नेता और वकील देवराजे गौड़ा ने शुक्रवार (17 मई) को एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी को बदनाम करने के लिए 100 करोड़ रुपए देने की पेशकश की थी। गौड़ा ने कहा कि शिवकुमार ने उन्हें अग्रिम राशि के रूप में 5 करोड़ रुपए भी भेजे थे।

देवराजे गौड़ा का आरोप है कि कांग्रेस नेता शिवकुमार ने पूर्व एमएलसी एमए गोपालस्वामी को उनसे बातचीत करने के लिए नियुक्त किया था। गौरतलब है कि शुक्रवार (17 मई 2024) को जब उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा था तो उन्होंने पुलिस वाहन से पत्रकारों से बात करते हुए ये टिप्पणी की। उन्हें लगभग एक सप्ताह पहले यौन शोषण के आरोप में कॉन्ग्रेस सरकार ने गिरफ्तार किया है।

देवराजे गौड़ा ने प्रज्ज्वल रेवन्ना से जुड़े अश्लील वीडियो और यौन शोषण मामले की ओर जनता का ध्यान आकर्षित किया था। गौड़ा के अनुसार, प्रज्ज्वल रेवन्ना मामले से संबंधित घटनाक्रम को सँभालने के लिए एन चेलुवरयास्वामी, कृष्णा बायरे गौड़ा और प्रियांक खड़गे सहित चार मंत्रियों की एक टीम बनाई गई थी।

हासन में अदालत परिसर से ले जाए जाने के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए गौड़ा ने कहा, “मुझे एक बयान देने के लिए कहा गया था कि यह एचडी कुमारस्वामी ही थे, जिन्होंने पेन ड्राइव में रखे सेक्स वीडियो प्रसारित किए थे (इसमें कुमारस्वामी के भतीजे प्रज्वल रेवन्ना, पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा के पोते भी शामिल हैं)। लेकिन, प्रज्ज्वल रेवन्ना के ड्राइवर कार्तिक गौड़ा से पेन ड्राइव लेकर सारी योजना बनाने वाले शिवकुमार थे।”

उन्होंने कहा, “उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, एचडी कुमारस्वामी और भाजपा को बदनाम करने के लिए बड़े पैमाने पर योजना बनाई थी। उन्होंने मुझे 100 करोड़ रुपए की पेशकश की और बॉरिंग क्लब के कमरा नंबर 110 में एडवांस के तौर पर 5 करोड़ रुपए भी भेजे। चन्नारायपटना के एक स्थानीय नेता गोपालस्वामी को इस सौदे पर बातचीत करने के लिए भेजा गया था।”

गौड़ा ने आगे कहा, “जब मैंने उनकी योजनाओं का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया तो उन्होंने पहले मुझे एक मामले में फँसाया, लेकिन उसमें कोई सबूत नहीं मिला। बाद में उन्होंने मुझे यौन उत्पीड़न के मामले में फँसा दिया। जब ये चाल भी नाकाम हो गई तो उन्होंने मेरे खिलाफ रेप का केस दर्ज करा दिया। मुझसे चार दिनों तक पूछताछ की गई, लेकिन उनसे कुछ पता नहीं चल सका।”

देवराजे गौड़ा ने पत्रकारों से बातचीत करते समय जोर देकर कहा, “मेरे पास शिवकुमार की बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग है। मैं जेल से बाहर आते ही उसे जारी कर दूँगा और कॉन्ग्रेस की सरकार गिर जाएगी।” इससे पहले 6 मई को गौड़ा ने कहा था कि यौन उत्पीड़न के वीडियो वाली पेन ड्राइव जारी करने के पीछे शिवकुमार का हाथ था। कॉन्ग्रेस पार्टी का मुख्य निशाना प्रधानमंत्री मोदी हैं।

उन्होंने कहा था, “मुझे सेक्स स्कैंडल की जाँच कर रही SIT पर भरोसा नहीं है। मैं सारे सबूत सीबीआई को सौंप दूँगा। मेरे पास मौजूद वीडियो उन वीडियो से अलग हैं, जो जारी किए गए हैं।” बता दें कि 33 वर्षीय प्रज्वल रेवन्ना पर कई महिलाओं के यौन शोषण के आरोप हैं। प्रज्वल जर्मनी के फ्रैंकफर्ट भाग गए हैं। उनके खिलाफ इंटरपोल ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है।

Delhi Excise Policy Scam: उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के बेहद करीबियों को 5 करोड़ देने से लेकर 144 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफी


दिल्ली के करोड़ों के शराब घोटाले में उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की मुश्किलें बढ़ती जा रहीं हैं। दिल्ली के सबसे बड़े घोटाले के बाबत सीबीआई के हाथ ऐसे पुख्ता सुबूत लगे हैं, जिससे न सिर्फ सिसोदिया का बचना मुश्किल है, बल्कि उसके बेहद करीबी भी जल्द ही एक्सपोज होंगे। सीबीआई ने पता लगाया है कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के करीबी सहयोगियों को शराब व्यापारी समीर महेंद्रू ने 5 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। आबकारी नीति 2021-22 को तैयार करने और इसके क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार पर अपनी प्राथमिकी में सीबीआई ने कहा है कि इंडोस्पिरिट्स के एमडी समीर महेंद्रू ने नई दिल्ली के राजेंद्र प्लेस में स्थित यूको बैंक की शाखा में राधा इंडस्ट्रीज के खाते में 1 करोड़ रुपये की रकम भेजी थी। राधा इंडस्ट्रीज का प्रबंधन दिनेश अरोड़ा कर रहे हैं, जो दिल्ली के डिप्टी सीएम सिसोदिया के करीबी सहयोगी हैं। इसके अलावा मुख्य सचिव नरेश कुमार की एलजी को सौंपी गोपनीय रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने कोरोना की आड़ में शराब ठेकेदारों की 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस ही माफ कर दी।

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए करोड़ों के शराब घोटाले में जल्द होगी ED की एंट्री
दिल्ली की एक्साइज पॉलिसी में गड़बड़ी-घोटाले के आरोप में सीबीआई ने डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया समेत 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। इससे साथ ही सीबीआई ने सिसोदिया के घर समेत 31 जगहों पर छापेमारी भी की थी। अब इस पूरे मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री भी होने वाली है, क्योंकि सीबीआई ने एफआईआर की कॉपी और दस्तावेज इस एजेंसी से भी साझा किए हैं, ताकि करोड़ों के घोटाले में मनी लांड्रिंग की संभावनाओं का भी पता लग सके। माना जा रहा है कि जल्द ही ED भी सिसोदिया के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर सकती है। सीबीआई पड़ताल में सामने आया है कि अरुण रामचंद्र पिल्लई, विजय नायर के माध्यम से समीर महेंद्रू से आरोपी लोक सेवकों को आगे स्थानांतरित करने के लिए अनुचित धन एकत्र करता था। अर्जुन पांडे नाम के एक व्यक्ति ने विजय नायर की ओर से समीर महेंद्रू से लगभग 2-4 करोड़ रुपये की बड़ी नकद राशि एकत्र की।

सिसोदिया के करीबी शराब लाइसेंसधारियों से एकत्रित करते थे अनुचित आर्थिक लाभ
सीबीआई के मुताबिक मनोरंजन और इवेंट मैनेजमेंट कंपनी ‘ओनली मच लाउडर’ के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विजय नायर, पर्नोड रिकार्ड के पूर्व कर्मचारी मनोज राय, ब्रिंडको स्पिरिट्स के मालिक अमनदीप ढल तथा इंडोस्पिरिट्स के मालिक समीर महेंद्रू सक्रिय रूप से पिछले साल नवंबर में लाई गई आबकारी नीति का निर्धारण और क्रियान्वयन में अनियमितताओं में शामिल थे। एजेंसी ने आरोप लगाया कि गुरुग्राम में बडी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमित अरोड़ा, दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे, सिसोदिया के ‘करीबी सहयोगी’ हैं और आरोपी लोक सेवकों के लिए ‘शराब लाइसेंसधारियों से एकत्र किए गए अनुचित आर्थिक लाभ के प्रबंधन और स्थानांतरण करने में सक्रिय रूप से शामिल थे।

दिल्ली सरकार ने नई एक्साइज पॉलिसी में 100 प्रतिशत दुकानें निजी हाथों में सौंप दीं
दरअसल, दिल्ली सरकार के शराब घोटाले का खेल पिछले साल ही शुरू हो गया था। सरकार ने 17 नवंबर 2021 को दिल्ली में नई एक्साइज पॉलिसी लागू की। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए। हर जोन में 27 दुकानें खुलनी थीं। इस तरह कुल मिलाकर 849 दुकानें खोलने की नीति थी। नई नीति लागू होने से पहले तक दिल्ली में शराब की 60% दुकानें सरकारी और 40% प्राइवेट थीं, लेकिन नई नीति लागू होने के बाद 100% दुकानें निजी हाथों को सौंप दी गई। आरोप लगे तो दिल्ली सरकार ने खोखला तर्क गढ़ा कि इससे रेवेन्यू 3,500 करोड़ रुपये बढ़ने की उम्मीद है। अब 1 सितंबर से फिर से पुरानी एक्साइज पॉलिसी लागू हो जाएगी। इसके बाद शराब की दुकानें सरकारी एजेंसियां ही चलाएंगी।

लाइसेंस शुल्क में छूट/कमी, बिना मंजूरी के एल-1 लाइसेंस के विस्तार में हुईं अनियमितताएं
सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा कि शुक्रवार को मध्य दिल्ली में सिसोदिया के आधिकारिक आवास, दिल्ली, गुरुग्राम, चंडीगढ़, मुंबई, हैदराबाद, लखनऊ और बेंगलुरु सहित 31 स्थानों पर तलाशी ली गई, जिससे अब तक आपत्तिजनक दस्तावेज, विभिन्न कागजात, डिजिटल रिकॉर्ड आदि बरामद हुए हैं। प्रवक्ता ने बताया कि यह जांच में यह सामने आया है कि आबकारी नीति में संशोधन, लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ देने, लाइसेंस शुल्क में छूट/कमी, बिना मंजूरी के एल-1 लाइसेंस के विस्तार में अनियमितताएं की गईं। उन्होंने कहा कि यह भी आरोप लगाया गया था कि इन कृत्यों से अवैध लाभ को निजी पक्षों द्वारा संबंधित लोक सेवकों को उनके खातों की पुस्तकों में गलत प्रविष्टियां देकर बदल दिया गया था। प्राथमिकी में डिप्टी सीएम को आरोपी नंबर 1 के रूप में नामित किया गया है।

कैसे फंसे सिसोदिया… कोरोना के बहाने शराब ठेकेदारों के 144.36 करोड़ रुपये माफ कराए
जनमानस की यह जानने में दिलचस्पी जरूर होगी कि आखिर शातिर खिलाड़ी मनीष सिसोदिया इस सारे खेल में कैसे घिर गए। दरअसल, मुख्य सचिव की रिपोर्ट बताती है कि एक्साइज डिपार्टमेंट के प्रभारी होने के नाते मनीष सिसोदिया ने जानबूझकर ऐसे फैसले लिए। इसके आधार पर एलजी ने पाया कि आबकारी नीति को लागू करने में किस प्रकार की वित्तीय गड़बड़ियां हुईं। सिसोदिया पर एक्साइज पॉलिसी के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है. मुख्य सचिव की रिपोर्ट में कहा गया था कि सिसोदिया ने कथित तौर पर टेंडर दिए जाने के बाद भी शराब लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। इसी रिपोर्ट में बताया गया कि शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए सिसोदिया के आदेश पर एक्साइज पॉलिसी के जरिए कोरोना के बहाने शराब ठेकेदारों के 144.36 करोड़ रुपये माफ किए गए।

मुख्य सचिव कुमार की गोपनीय रिपोर्ट पर एलजी ने की थी सीबीआई जांच की सिफारिश
आपको बता दें कि दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और अन्य के खिलाफ ये पूरी कार्रवाई मुख्य सचिव नरेश कुमार की उस रिपोर्ट पर हो रही है, जिसमें एक्साइज पॉलिसी में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया गया है। ये रिपोर्ट दो महीने पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्‍सेना को सौंपी गई थी। मुख्य सचिव कुमार की रिपोर्ट पर एलजी ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इस रिपोर्ट में GNCTD एक्ट 1991, ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स 1993, दिल्ली एक्साइज एक्ट 2009 और दिल्ली एक्साइज रूल्स 2010 के नियमों का उल्लंघन पाया गया था। सीबीआई ने अब 8 आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया है. यानी, ये लोग अब देश छोड़कर नहीं जा सकते।

शराब घोटाले में चीफ सेक्रेटरी नरेश कुमार की विस्तृत जांच में मिलीं ये सात ‘खामियां’

1. मनीष सिसोदिया के निर्देश पर एक्साइज विभाग ने एयरपोर्ट जोन के एल-1 बिडर को 30 करोड़ रुपये रिफंड करने का निर्णय लिया। बिडर एयरपोर्ट अथॉरिटीज से जरूरी एनओसी नहीं ले पाया था। ऐसे में उसके द्वारा जमा कराया गया सिक्योरिटी डिपॉजिट सरकारी खाते में जमा हो जाना चाहिए था, लेकिन बिडर को वह पैसा लौटा दिया गया।
2. सक्षम अथॉरिटीज से मंजूरी लिए बिना एक्साइज विभाग ने 8 नवंबर 2021 को एक आदेश जारी करके विदेशी शराब के रेट कैलकुलेशन का फॉर्मूला बदल दिया और बियर के प्रत्येक केस पर लगने वाली 50 रुपए की इंपोर्ट पास फीस को हटाकर लाइसेंसधारकों को अनुचित लाभ पहुंचाया, जिससे सरकार को रेवेन्यू का भारी नुकसान हुआ।
3. टेंडर दस्‍तावेजों के प्रावधानों को हल्का करके L7Z (रिटेल) लाइसेंसियों को वित्‍तीय फायदा पहुंचाया गया, जबकि लाइसेंस फी, ब्‍याज और पेनाल्‍टी न चुकाने पर ऐक्‍शन होना चाहिए था।
4. सरकार ने दिल्ली के अन्य व्यवसायियों के हितों को दरकिनार करते हुए केवल शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए कोविड काल में हुए नुकसान की भरपाई के नाम पर उनकी 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी, जबकि टेंडर दस्तावेजों में ऐसे किसी आधार पर शराब विक्रेताओं को लाइसेंस फीस में इस तरह की छूट या मुआवजा देने का कहीं कोई प्रावधान नहीं था।

5. सरकार ने बिना किसी ठोस आधार के और किसी के साथ चर्चा किए बिना नई पॉलिसी के तहत हर वॉर्ड में शराब की कम से कम दो दुकानें खोलने की शर्त टेंडर में रख दी। बाद में एक्साइज विभाग ने सक्षम अथॉरिटीज से मंजूरी लिए बिना नॉन कन्फर्मिंग वॉर्डों के बजाय कन्फर्मिंग वॉर्डों में लाइसेंसधारकों को अतिरिक्त दुकानें खोलने की इजाजत दे दी।
6. सोशल मीडिया, बैनरों और होर्डिंग्‍स के जरिए शराब को बढ़ावा दे रहे लाइसेंसियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह दिल्‍ली एक्‍साइज नियमों, 2010 के नियम 26 और 27 का उल्‍लंघन है।
7. लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी किए बिना लाइसेंसधारकों को लाभ पहुंचाने के लिए उनका ऑपरेशनल पीरियड पहले 1 अप्रैल 2022 से बढ़ाकर 31 मई 2022 तक किया गया और फिर इसे 1 जून 2022 से बढ़ाकर 31 जुलाई 2022 तक कर दिया गया। इसके लिए सक्षम अथॉरिटी यानी कैबिनेट और एलजी से भी कोई मंजूरी नहीं ली गई। बाद में आनन फानन में 14 जुलाई को कैबिनेट की बैठक बुलाकर ऐसे कई गैरकानूनी फैसलों को कानूनी जामा पहनाने का काम किया गया। शराब की बिक्री में बढ़ोतरी होने के बावजूद रेवेन्यू में बढ़ोतरी होने के बजाय 37.51 पर्सेंट कम रेवेन्यू मिला।

शराब कारोबारियों को करोड़ों का फायदा देने के लिए नियमों को बौना साबित किया

  • एक्साइज डिपार्टमेंट ने एयरपोर्ट जोन में L1 लाइसेंसधारी को 30 करोड़ रुपये वापस कर दिए, क्योंकि उसे एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से दुकान खोलने की अनुमति नहीं मिली थी। नियमानुसार ये रकम जब्त की जानी चाहिए थी।
  • विदेशों से आने वाली बीयर पर 50 रुपये प्रति केस के हिसाब से रकम ली जाती थी। इस फैसले को बिना किसी मंजूरी के वापस ले लिया गया। इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।
  • सिसोदिया ने कैबिनेट तक को अंधेरे में रखा। शराब कारोबारियों को लाइसेंस फीस में 144.36 करोड़ रुपये की छूट दे दी गई। इसके लिए कोरोना का बहाना बनाया गया। इस छूट के लिए कैबिनेट को लूप में नहीं रखा गया, बल्कि मंत्री स्तर पर ही फैसला ले लिया गया।
  • इतना ही नहीं, आरोप ये भी हैं कि L7Z और L1 लाइसेंसधारियों का लाइसेंस पहले 1 अप्रैल से 31 मई और फिर 1 जून से 31 जुलाई तक बढ़ा दिया गया और इसके लिए एलजी की मंजूरी भी नहीं ली गई।

FIR का फेर: मनीष के करीबियों को पांच करोड़ शराब कारोबारी समीर महेंद्रू ने दिए

  • सीबीआई की एफआईआर में 15 आरोपियों में सिसोदिया पहले नंबर पर यानी मुख्य आरोपी हैं। एजेंसी के मुताबिक, अब तक की जांच में सामने आया है कि शराब कारोबारी समीर महेंद्रू एक्साइज पॉलिसी बनाने और उसे लागू करने में हुई कथित अनियमितताओं में शामिल थे।
  • सीबीआई के मुताबिक सिसोदिया के करीबी सहयोगियों को शराब व्यापारी समीर महेंद्रू ने 5 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।
  • यही नहीं प्राथमिकी में सिसोदिया के तीन और करीबियों- अमित अरोड़ा (बडी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर), दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे का नाम भी शामिल है।
  • आरोप है कि इन्होंने आरोपी सरकारी अफसरों की मदद से शराब लाइसेंसधारियों से पैसा इकट्ठा किया और उसे दूसरी जगह डायवर्ट किया।
  • सीबीआई ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचने और भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया है। इनमें तीन पूर्व सरकारी अफसर एजी कृष्णा (पूर्व एक्साइज कमिश्नर), आनंद तिवारी (पूर्व डिप्टी एक्साइज कमिश्नर) और पंकज भटनागर (पूर्व असिस्टेंट एक्साइज कमिश्नर) का नाम भी शामिल है।
  • सीबीआई की एफआईआर में कुल 15 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जिसमें मनीष सिसोदिया, तीन पूर्व सरकारी अफसर, 9 कारोबारी और दो कंपनियों के नाम शामिल हैं।