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कर्नाटक : कांग्रेस सरकार में बगावत, मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने पसंद का मंत्रालय न मिलने पर दिया इस्तीफा: मुख्यमंत्री शिवकुमार पर लगाए गंभीर आरोप

             कर्नाटक कैबिनेट मंत्री रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा (फोटो साभार: DH/Telangana Today)
जिस बात की आशंका थी उसकी शुरुआत हो गयी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि सिद्धारमैया अगर मुख्यमंत्री पद छोड़ रहे हैं तो नए मुख्यमंत्री को भी चैन से नहीं बैठने देंगे। खेल खिलेगा और खिलना शुरू हो गया। मनपसंद मंत्रालय नहीं मिलने पर कैबिनेट से इस्तीफा। मामूली बात नहीं। मुख्यमंत्री शिवकुमार गर्म खीर को फूंक मार-मार कर खाना होगा। इशारा आ चुका है।  

कर्नाटक में नई सरकार के गठन और विभागों के बंटवारे के तुरंत बाद कांग्रेस के भीतर का आंतरिक असंतोष एक बड़े राजनीतिक संकट में बदल गया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और नवनियुक्त कैबिनेट मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। रेड्डी ने खुलेआम अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि उनसे किया गया वादा पूरा नहीं किया गया, जिसके चलते वे यह बड़ा कदम उठा रहे हैं। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे कैबिनेट छोड़ रहे हैं, लेकिन विधायक (MLA) और कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहेंगे।

शुक्रवार (5 जून 2026) को बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रामलिंगा रेड्डी ने मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार पर सीधा निशाना साधा। रेड्डी ने दावा किया, “डीके शिवकुमार खुद मेरे घर आए थे और कहा था कि जब मैं सीएम बनूँगा, तो मैं इस मंत्रालय (बेंगलुरु विकास) को छोड़ दूँगा और आप इसे संभाल लेना।” रेड्डी के मुताबिक, शपथ ग्रहण समारोह से ठीक एक दिन पहले भी जब वे शिवकुमार से मिले, तो उन्हें दोबारा आश्वस्त किया गया था कि बेंगलुरु से जुड़ा पोर्टफोलियो उन्हीं को मिलेगा।

रेड्डी ने भावुक होते हुए कहा, “मैंने कभी इस विभाग की माँग खुद से नहीं की थी, लेकिन मुझे बार-बार इसका भरोसा दिया गया था। दो बार वादा करने के बाद अब मुझे जल संसाधन विभाग दे दिया गया। मैं इस फैसले से बेहद निराश हूँ और इसीलिए इस्तीफा दे रहा हूँ।”

रामलिंगा रेड्डी ने अपना इस्तीफा सीधे मुख्यमंत्री को सौंपने के बजाय अपने एक समर्थक के जरिए मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को भिजवाया है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने लिखा, “मैं कैबिनेट में मंत्री पद देने के लिए आपका और कॉन्ग्रेस पार्टी का आभार व्यक्त करता हूँ। चूँकि मैं अपनी अंतरात्मा के खिलाफ काम करने में असमर्थ हूँ, इसलिए मैं मंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप रहा हूँ। कृपया इसे स्वीकार करें।”

हालाँकि रेड्डी ने मीडिया से कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से न तो शिवकुमार से नाराज हैं और ना ही सिद्धारमैया से।

कर्नाटक कांग्रेस में फिर बवाल, सिद्धारमैया के बेटे द्वारा सतीश जारकीहोली को पिता का उत्तराधिकारी बताने पर टेंशन में आए डीके शिवकुमार

सतीश जारकीहोली (बाएँ), बेटे यतींद्र सिद्धारमैया (बाएँ से दूसरी तरफ), सीएम सिद्धारमैया (बीच में), डीके शिवकुमार (दाएँ), (साभार : Bhaskar, Prabhatkhabar & MSN)
कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे और एमएलसी यतींद्र सिद्धारमैया के एक बयान ने पूरे राज्य में सियासी तापमान बढ़ा दिया है। यतींद्र ने कहा कि उनके पिता अब राजनीति के आखिरी दौर में हैं और 2028 का चुनाव नहीं लड़ेंगे। इतना ही नहीं, यतींद्र ने यह भी कहा कि सिद्धारमैया की विरासत आगे लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली को संभालनी चाहिए। इस बयान ने कॉन्ग्रेस में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है, खासकर तब जब डीके शिवकुमार पहले से ही सिद्धारमैया के बाद मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार माने जाते हैं।

ढाई-ढाई साल की सीएम राजनीति और नई हलचल

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार बनने के बाद से ही सत्ता में ‘ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री’ फॉर्मूले की चर्चा चल रही है। माना जाता है कि सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच समझौता हुआ था कि दोनों आधा-आधा कार्यकाल संभालेंगे। लेकिन अब यतींद्र का बयान इस राजनीतिक समझौते पर नए सवाल खड़े कर रहा है।

राज्य की राजनीति पहले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर दो खेमों में बँटी हुई थी। एक तरफ सिद्धारमैया का ‘आहिंदा गुट’ और दूसरी तरफ शिवकुमार का ‘वोक्कालिगा गुट’। यतींद्र के बयान ने इन दोनों गुटों के बीच तनाव और गहराने का संकेत दे दिया है।

सिद्धारमैया के बेटे ने क्या कहा?

यतींद्र सिद्धारमैया ने एक कार्यक्रम में कहा कि उनके पिता अब अपने राजनीतिक जीवन के आखिरी पड़ाव पर हैं और 2028 का चुनाव नहीं लड़ेंगे। यतींद्र ने कहा, “मेरे पिता को अब सतीश जारकीहोली जैसे नेताओं का मार्गदर्शन करना चाहिए। वे मजबूत विचारधारा और सामाजिक न्याय की राजनीति में यकीन रखते हैं।”

यतींद्र ने आगे कहा, “सतीश जारकीहोली में निश्चित रूप से मेरे पिता की जगह लेने की क्षमता है। वे अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं।” इस बयान ने ऐसा माहौल बना दिया जैसे सिद्धारमैया अपने उत्तराधिकारी का नाम खुद तय कर चुके हों, जिससे डीके शिवकुमार की दावेदारी पर सीधा असर पड़ सकता है।

कौन हैं सतीश जारकीहोली?

जानकारी के अनुसार, सतीश जारकीहोली इस समय कर्नाटक के लोक निर्माण मंत्री (PWD Minister) हैं। वे उत्तर कर्नाटक के बेलगावी जिले के यमकनमर्दी विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। 63 वर्षीय जारकीहोली अनुसूचित जाति के वाल्मीकि समुदाय से आते हैं और लंबे समय से सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के हक की लड़ाई लड़ते रहे हैं। वे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के ‘आहिंदा’ (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) गठबंधन के मजबूत स्तंभ माने जाते हैं। इस गठबंधन की राजनीति ही सिद्धारमैया की सबसे बड़ी ताकत रही है।

जारकीहोली राजनीतिक रूप से बेहद प्रभावशाली परिवार से हैं। उनके भाई रमेश जारकीहोली पहले कॉन्ग्रेस में थे, लेकिन 2018 में बीजेपी में चले गए और मंत्री बने। वहीं, उनकी बेटी प्रियंका जारकीहोली कॉन्ग्रेस की सांसद हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सिद्धारमैया गुट किसी ऐसे नेता को आगे बढ़ाना चाहता है जो उनकी विचारधारा और सामाजिक एजेंडे को आगे ले जा सके। जारकीहोली इस प्रोफाइल में पूरी तरह फिट बैठते हैं।

डीके शिवकुमार ने क्या कहा?

यतींद्र के बयान के बाद पत्रकारों ने जब डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार से सवाल किया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री बदलने का कोई सवाल ही नहीं है। शिवकुमार ने कहा, “सिद्धारमैया हमारे नेता हैं। वे पूरा कार्यकाल मुख्यमंत्री रहेंगे। पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। जो भी फैसला होगा, वह हाईकमान लेगा।”

शिवकुमार का यह बयान यह दिखाने की कोशिश थी कि वे आलाकमान के प्रति वफादार हैं और जल्दबाजी में कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते। हालाँकि, कॉन्ग्रेस के अंदर यह माना जा रहा है कि यतींद्र का बयान कहीं न कहीं शिवकुमार गुट के लिए ‘राजनीतिक चेतावनी’ की तरह है।

यतींद्र का बयान और फिर सफाई

बयान पर विवाद बढ़ने के बाद यतींद्र सिद्धारमैया ने सफाई दी। यतींद्र ने कहा कि उनका मतलब मुख्यमंत्री बदलने या किसी को हटाने से नहीं था। उन्होंने कहा, “नेतृत्व परिवर्तन की बात गलत है। मैंने सिर्फ इतना कहा था कि कॉन्ग्रेस को विचारधारा वाले नेताओं को आगे बढ़ाना चाहिए। मेरे पिता 2028 तक एक्टिव रहेंगे और पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे।”

यतींद्र ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री बदलने पर कोई चर्चा नहीं हुई है। अगर कभी बदलाव होता है तो वह फैसला पार्टी आलाकमान और विधायक मिलकर लेंगे। यतींद्र की यह सफाई तो आई, लेकिन तब तक राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो चुकी थी कि सिद्धारमैया गुट भविष्य की तैयारी कर रहा है।

क्यों बढ़ी डीके शिवकुमार की चिंता

डीके शिवकुमार लंबे समय से मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखते हैं। वे कर्नाटक के शक्तिशाली वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं और दक्षिण कर्नाटक में उनका मजबूत जनाधार है। कॉन्ग्रेस की सरकार बनने से पहले भी उन्होंने सिद्धारमैया को समर्थन देने में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन अब वे उम्मीद कर रहे थे कि 2025 के बाद उन्हें मौका मिलेगा। यतींद्र का यह बयान इस उम्मीद पर पानी फेरने जैसा है। सिद्धारमैया गुट का झुकाव किसी दलित नेता की ओर दिखाना यह संकेत है कि सत्ता का संतुलन बदल सकता है।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अगर सिद्धारमैया जारकीहोली को आगे बढ़ाते हैं, तो वे अपने ‘आहिंदा वोट बैंक’ को मजबूत रखना चाहेंगे, जबकि शिवकुमार का आधार मुख्य रूप से दक्षिणी जिलों में सीमित है।

‘आहिंदा’ राजनीति और सिद्धारमैया की सोच

‘आहिंदा’ शब्द कन्नड़ के तीन शब्दों से बना है- अल्पसंख्यक (A), हिंदू पिछड़ा वर्ग (HI), और दलित (DA)। इस मॉडल की सोच सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री देवराज उर्स ने दी थी, लेकिन इसे आधुनिक दौर में सिद्धारमैया ने मजबूत किया। उनकी राजनीति का फोकस सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता रहा है। सतीश जारकीहोली उसी राजनीतिक विचारधारा से आते हैं। वे लगातार सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं और सिद्धारमैया के करीबी नेताओं में शामिल हैं। इसलिए जब यतींद्र ने उन्हें ‘अगला मुख्यमंत्री’ बताया, तो इसे सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत माना गया।
यतींद्र सिद्धारमैया का बयान भले ही ‘गलतफहमी’ के रूप में पेश किया गया हो, लेकिन इसने कॉन्ग्रेस के भीतर के समीकरणों को उजागर कर दिया है। कर्नाटक की सत्ता अब दो रास्तों पर खड़ी है- एक तरफ ‘आहिंदा राजनीति’ का चेहरा सतीश जारकीहोली और दूसरी तरफ ‘वोक्कालिगा शक्ति’ के प्रतीक डीके शिवकुमार। तय है कि आने वाले महीनों में कर्नाटक की राजनीति और भी दिलचस्प मोड़ लेने वाली है।

कर्नाटक : हिन्दू विरोधी कांग्रेस हिन्दू धार्मिक स्थल को बना रही विवादित : देवी हुईं प्रकट, महिषासुर का किया वध… सनातन से ही जुड़ा है उस ‘चामुंडेश्वरी पहाड़ी’ का इतिहास, जिस पर कर्नाटक के कांग्रेस नेता बोले- ये जगह सिर्फ हिंदुओं की नहीं…

     मैसूर में विश्व प्रसिद्ध दशहरा महोत्सव तस्वीर (बाएँ) और डी के शिव कुमार दाएँ) (साभार -न्यूज 18/ प्रभात खबर)
कर्नाटक की राजनीति इन दिनों एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को लेकर गहराई तक हिल गई है। विश्व प्रसिद्ध मैसूर दशहरा महोत्सव, जो सदियों से आस्था और परंपरा का प्रतीक माना जाता है, अब सियासी बयानबाजी और धार्मिक विवाद का केंद्र बन गया है।

अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से सम्मानित कन्नड़ लेखिका बानू मुश्ताक को दशहरा पूजा के उद्घाटन के लिए आमंत्रित करने और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के विवादास्पद बयान ने माहौल को राजनीतिक रूप दे दिया है।

डीके शिवकुमार ने दिया विवादित बयान

इसी बीच उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का बयान विवाद को और गहरा ले गया। डीके ने कहा “चामुंडी पहाड़ी और चामुंडेश्वरी देवी केवल हिंदुओं की नहीं बल्कि सभी समुदायों की हैं। मंदिर किसी एक धर्म की संपत्ति नहीं है। यहाँ हर धर्म के लोग आकर अपनी श्रद्धा प्रकट कर सकते हैं। जिस तरह मैं गिरजाघरों, मस्जिदों और गुरुद्वारों में जाता हूँ, वैसे ही किसी को भी हिंदू मंदिर आने से रोका नहीं जाता। अयोध्या राम मंदिर में भी ऐसा कोई नियम नहीं है कि केवल हिंदू ही जा सकते हैं।”

चामुंडी पहाड़ी और मंदिर का महत्व

मैसूर की चामुंडी पहाड़ी और यहाँ स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर का इतिहास एक हजार साल से भी पुराना माना जाता है। यह मंदिर शक्तिपीठ के रूप में दक्षिण भारत में विशेष पहचान रखता है। माना जाता है कि देवी चामुंडेश्वरी ने इसी स्थान पर महिषासुर का वध किया था और तभी से यह पहाड़ी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

मैसूर का दशहरा उत्सव चामुंडी देवी की पूजा से ही प्रारंभ होता है। यह परंपरा वाडियार शाही परिवार के शासनकाल से चली आ रही है और आज भी बड़ी श्रद्धा से निभाई जाती है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं और देवी की आराधना के साथ जंबू सवारी के भव्य जुलूस को देखते हैं। इस जुलूस में सजे-धजे हाथियों के साथ देवी की मूर्ति मैसूर महल से लेकर बन्नीमंतप तक ले जाई जाती है।

बानू मुश्ताक को न्योता भेजना बना विवाद कारण

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने घोषणा की कि इस बार 22 सितंबर 2025 को दशहरा महोत्सव का उद्घाटन बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक करेंगी। 77 साल की लेखिका मूल रूप से कर्नाटक के हासन की रहने वाली हैं और उनकी कृति हार्ट लैंप (अनुवाद: दीपा भाष्थी) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है।

इस घोषणा ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया। भाजपा और हिंदू संगठनों का कहना है कि देवी चामुंडेश्वरी के पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान में किसी ऐसे व्यक्ति को आमंत्रित करना उचित नहीं है जो हिंदू धर्म का पालन न करता हो। भाजपा का तर्क है कि यह आस्था और परंपरा से खिलवाड़ है, सरकार इस पवित्र आयोजन को तुष्टिकरण की राजनीति में बदल रही है।

भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

राज्य भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने शिवकुमार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस  हिंदू परंपराओं का अपमान कर रही है। उन्होंने कहा की “पहले तुम कुत्ते की तरह भौंकते थे, अब मेंढक बन गए हो। अगर चामुंडी माता से खिलवाड़ करोगे तो राजनीतिक रूप से राख हो जाओगे।”

केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने भी कॉन्ग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दशहरा कोई राजनीतिक मंच नहीं बल्कि देवी चामुंडेश्वरी की भक्ति और परंपरा का पर्व है। किसी ऐसे व्यक्ति से पहली पूजा करवाना, जिसका देवी में विश्वास ही नहीं है, भक्तों की आस्था का अपमान है।

मैसूर के पूर्व सांसद और भाजपा नेता प्रताप सिम्हा ने भी सवाल उठाया कि क्या बानू मुश्ताक देवी चामुंडी में विश्वास करती हैं? अगर नहीं, तो उन्हें उद्घाटन के लिए आमंत्रित करना परंपरा के खिलाफ है।

मैसूर के सांसद और शाही परिवार के सदस्य यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार ने भी शिवकुमार की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि चामुंडी मंदिर सदियों पुरानी आस्था और परंपरा का प्रतीक है।

इसे राजनीतिक विवाद में घसीटना इस धार्मिक विरासत की गरिमा को ठेस पहुँचाता है। वाडियार ने स्पष्ट किया कि दशहरा मूल रूप से हिंदू परंपराओं से जुड़ा उत्सव है और इसमें हस्तक्षेप से बचना चाहिए।

कांग्रेस सरकार का बचाव

विवाद गहराने के बाद कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री सामने आए। गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा “दशहरा केवल धर्म का आयोजन नहीं, बल्कि एक राजकीय उत्सव भी है। अतीत में निसार अहमद और मिर्जा इस्माइल जैसे गैर-हिंदू भी दशहरा उद्घाटन में शामिल रहे हैं। इसमें राजनीति करना गलत है।”

मंत्री एच के पाटिल ने भी कहा कि दशहरा सभी समुदायों के लिए खुला उत्सव है। इसे किसी एक धर्म तक सीमित करना कर्नाटक की सांस्कृतिक विविधता के साथ अन्याय होगा। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा, “बानू मुश्ताक एक साहित्यिक हस्ती हैं। उन्हें बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वह हमारे राज्य की प्रगतिशील लेखिकाओं में से एक हैं। अगर उन्हें किसी कार्यक्रम के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया जाता है, तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। मेरा मानना है कि जो लोग उन पर टिप्पणी कर रहे हैं, वे केवल उनके मजहबी पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर ऐसा कर रहे हैं।”

इसके राजनीतिक असर की बात करे तो कर्नाटक में दशहरा उत्सव हमेशा से सांस्कृतिक गर्व और धार्मिक परंपरा का प्रतीक रहा है। लेकिन इस बार बानू मुश्ताक को आमंत्रित करने और डीके शिवकुमार के बयानों ने इसे राजनीति का अखाड़ा बना दिया है। भाजपा जहाँ इसे हिंदू आस्था पर हमला बताकर आक्रामक हो गई है, वहीं कांग्रेस इसे सभी के लिए खुला राजकीय आयोजन बताकर बचाव कर रही है।

कर्नाटक : उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने महाकुंभ में लगाई आस्था की डुबकी; आयोजन के लिए योगी आदित्यनाथ की तारीफ की

प्रयाग महाकुंभ के अब केवल 16 दिन और सिर्फ एक अमृत स्नान बाकी है। 26 फरवरी को महाशिवरात्रि अमृत स्नान के साथ ही महाकुंभ सम्पन्न हो जाएगा। देश-दुनिया के 43 करोड़ लोगों के साथ तमाम बड़े लोग भी त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा चुके हैं, लेकिन कांग्रेस नेता अभी तक महाकुंभ से दूरी बनाए हुए हैं। यहां तक की कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महाकुंभ पर तंज कसते हुए कहा था कि गंगा में स्नान करने से गरीबी और बेरोजगारी दूर नहीं होती। जो (खड़गे) सनातन का विरोध करता रहा हो, ऐसे विरोधी से और क्या अपेक्षा की जा सकती है? वैसे भी अब तो उनकी स्क्रिप्ट ही उनके आकाओं द्वारा लिखवाई जाती है।    

खरगे के इस बयान के बाद तो, जो कांग्रेस नेता महाकुंभ में जाना भी चाहते थे, उन्होंने जाना रद्द कर दिया। ऐसे में कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगा कांग्रेस नेतृत्व को एक तरह से चुनौती दे दी है। 

चर्चा है कि राहुल गाँधी भी महाकुम्भ में आस्था की डुबकी लगाने का मन बना रहे हैं। अखिलेश यादव पहले ही लगा चुके हैं। वास्तव में अब सभी ने समझना शुरू कर दिया है कि तुष्टिकरण कर मुस्लिम वोट तो मिल सकता है, लेकिन उससे ज्यादा हिन्दू कटना शुरू हो चुका है। मोदी रहे या न रहे सनातन को कोई नहीं रोक सकता। वैसे भी इतिहास साक्षी है कि सनातन मिटाने वालों का दुनिया में कोई नाम लेने वाला नहीं। बस एक भारत है जहाँ उनके नाम पर सियासत की दुकाने चल रही हैं।  

राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच डीके शिवकुमार के इस स्नान से सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। हैरानी की बात यह भी है कि कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार ने सिर्फ महाकुंभ में स्नान ही नहीं किया, बल्कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ भी की और कहा कि इतना बड़ा आयोजन करना कोई मजाक नहीं है। ऐसे में लोग कांग्रेस नेतृत्व पर तंज कसते हुए कह रहे हैं कि यह सनातन विरोधियों के मुंह पर करारा तमाचा है। लोगों का कहना है कि डीके शिवकुमार ने प्रयागराज महाकुंभ में पवित्र स्नान किया और इस ऐतिहासिक आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए आयोजकों का आभार भी जताया। 

लेकिन कुछ दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महाकुंभ जाने को पैसे की बर्बादी बताया था और कहा था कि स्नान करने से गरीबी नहीं मिटती। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि यह वही मानसिकता है जो सनातन संस्कृति और आस्था का अपमान करती है, लेकिन जब चुनाव आते हैं तो यही लोग मंदिर-मंदिर घूमकर आशीर्वाद लेने का ढोंग करते हैं! यह स्पष्ट संदेश है कि सनातन धर्म हमारी संस्कृति और परंपरा की रीढ़ है, और इसे निशाना बनाना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। आप भी देखिए लोग डीके शिवकुमार की डुबकी को लेकर क्या कह रहे हैं…

FREE bees के नाम पर राहुल गाँधी करते हैं झूठे वादे, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ही खोल दी पोल: BJP ने कहा- जनता से माफी माँगें


2024 लोकसभा चुनावों में 'खटाखट' के नाम पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी द्वारा जो सीटें मिलने पर इतने खुश हो रहे है, भूल रहे है कि अगर 
'खटाखट' का लॉलीपॉप नहीं दिया होता, इन दोनों पार्टियों की प्रतिष्ठा धूमिल हो गयी होती। विदेशी चंदे से कभी चुनाव नहीं जीते जाते, जमीन पर काम करना पड़ता है। किसी भी विपक्षी को मोदी को हराने किसी विदेशी भीख की बजाए सरकार की कमियों को लेकर सड़क पर आना चाहिए था। लेकिन विदेशी भीख जो लेनी थी। CAA विरोध से लेकर तथाकथित किसान आंदोलन और पहलवान महिलाओं का प्रायोजित आंदोलनों आदि का पर्दाफाश हो गया। जनता को गुमराह करना चाहा लेकिन पांसा सच्चाई सामने आने पर उल्टा पड़ गया। संभावनाएं व्यक्त की जा रही है कि महाराष्ट्र और झारखण्ड हारने पर कांग्रेस में दो फाड़ हो सकते हैं।     

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की वादाखिलाफियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) ने हमला बोल दिया है। दरअसल, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस सरकार की योजनाओं की आलोचना करते हुए सुझाव दिया कि वादे उतने ही किए जाएँ, जितने पूरे हो सकें।

खरगे का ये बयान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के एक बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने कर्नाटक की “शक्ति योजना” की समीक्षा करने का संकेत दिया था। इस योजना के तहत महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा का लाभ दिया जाता है, लेकिन कुछ महिलाओं की ओर से इसके लिए भुगतान करने की इच्छा जताने के बाद इसकी समीक्षा की बात कही गई।

खरगे के बयान को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधा। बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का बयान इस बात को साबित करता है कि कांग्रेस चुनावी वादों के जरिए जनता को मूर्ख बनाती है। प्रसाद ने खरगे के बयान को कांग्रेस की स्वीकारोक्ति बताया और कहा कि कांग्रेस ने हमेशा से ही झूठे वादों के बल पर जनता को गुमराह किया है। उन्होंने कांग्रेस के पुराने “गरीबी हटाओ” नारे का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस ने 1971 में ये नारा दिया था, लेकिन गरीबी हटाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए।

बीजेपी ने कांग्रेस पर केवल कर्नाटक ही नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में भी झूठे वादों के आधार पर वोट लेने का आरोप लगाया। प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस की ऐसी घोषणाओं का असलियत से कोई लेना-देना नहीं होता और ये केवल कागजों पर ही रहती हैं। बीजेपी नेता ने कहा कि कांग्रेस ने कर्नाटक की जनता को पांच गारंटी का वादा किया था, लेकिन अब “शक्ति योजना” की समीक्षा की बात कहकर एक गारंटी पर पुनर्विचार कर रही है। बीजेपी के मुताबिक, कांग्रेस को अपने वादों पर कायम रहने की सीख लेनी चाहिए और जनता के सामने माफी माँगनी चाहिए।

रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा कि कांग्रेस को अन्य राज्यों जैसे महाराष्ट्र और झारखंड में भी झूठे वादों से जनता को गुमराह करने से बचना चाहिए। उन्होंने बीजेपी की केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा शुरू की गई योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पार्टी अपने वादों को पूरा करती है। प्रसाद ने लाडली लक्ष्मी योजना, किसान सम्मान निधि, गरीब कल्याण, और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं का उदाहरण दिया और कहा कि ये योजनाएं कांग्रेस के चुनावी वादों से अलग हैं जो पूरी की जाती हैं।

क्या कर्नाटक के कांग्रेसी मुख्यमंत्री अपने डिप्टी मुख्यमंत्री पर भरोसा नही करते? क्या कांग्रेस में टूटने की खिचड़ी पक रही है? देखिए सोशल मीडिया वीडियो

क्या कांग्रेस अपने आखिरी पड़ाव पर है? सोशल मीडिया समाचारों को देख/सुन लगता है कि 2029 चुनाव आने से पहले कांग्रेस तिनकों की तरह बिखडने को है। जिस नीति पर राहुल गाँधी चल रहे हैं, उससे पार्टी का हर नेता सहमत नहीं है। दूसरे, बांग्लादेशी पत्रकार शोएब द्वारा वर्तमान तथाकथित गाँधी परिवार की असलियत उजागर की है, उसने भी कांग्रेस ही नहीं INDI गठबंधन में भी दूरियां बनानी शुरू कर दी हैं। जिस दिन अपने आपको राष्ट्रीय चैनल बताने वालों से शोएब के सनसनी खुलासों पर चर्चा शुरू कर दी, कांग्रेस बहुत जल्द एक इतिहास बन जाएगी। जितनी चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है, तथाकथित राष्ट्रीय मीडिया खामोश और बहरा बने रहने का स्वांग रच रहा है, लगता है मोटा चढ़ावा पहुँच गया है। नेशनल मीडिया को देख लगता है जनता को राष्ट्रीय मीडिया की बजाए सोशल मीडिया देखना चाहिए। देखिए वीडियो जिनका किसी में खंडन करने का साहस नहीं :-

              
सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दिख रहा है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया एक कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ बैठे हुए हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के हाथ में एक कागज है। मुख्यमंत्री उस कागज को किसी को देना चाहते हैं। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार चूंकि उनके साथ बगल में बैठे हैं, तो वो मुख्यमंत्री से कागज को लेकर उस व्यक्ति को दे देना चाहते हैं। लेकिन सीएम सिद्धारमैया उन्हें कागज नहीं देते हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि डिप्टी सीएम शिवकुमार अपने मुख्यमंत्री से कागज लेने की बार-बार कोशिश करते हैं, लेकिन सिद्धारमैया उनके हाथ में कागज नहीं सौंपते हैं।

ऐसे में लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या कर्नाटक के कांग्रेसी सीएम को अपने डिप्टी सीएम पर भरोसा नहीं है? लोग पूछ रहे हैं कि आखिर उस कागज में ऐसा क्या है कि सीएम उसे अपने डिप्टी सीएम को भी नहीं दे रहे हैं? लोग इस वीडियो को लेकर कांग्रेस पर तंज कस रहे हैं।

‘दक्षिण भारत बनेगा अलग देश’: कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री के भाई एवं कांग्रेस सांसद का ‘भारत तोड़ो’ बयान

                                               कांग्रेस सांसद डीके सुरेश (साभार: रिपब्लिक भारत)
कांग्रेस एक बार फिर भारत को तोड़ने की बात करने लगी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा गुरुवार (1 फरवरी 2024) को पेश किए गए अंतरिम बजट को 
कांग्रेस के सांसद डीके सुरेश ने पक्षपाती बताया है। केंद्र पर दक्षिण भारतीय राज्यों को धन जारी नहीं करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने धमकी दी कि अगर यह प्रवृत्ति जारी रही तो एक अलग देश की माँग उठाई जाएगी।

डीके सुरेश ने जो आपत्तिजनक बयान पर कांग्रेस की तरफ से किसी ने विरोध तक नहीं किया। क्या कांग्रेस सुरेश के अरमानों को पूरा करने के लिए टुकड़े-टुकड़े गैंग की शरण में जाएगी?  

बेंगलुरु ग्रामीण संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सांसद और कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के भाई डीके सुरेश ने यह बयान बजट 2024 की आलोचना करते हुए संसद भवन के बाहर दिया। अलगाववाद को बढ़ावा देते हुए उन्होंने कहा कि दक्षिण भारतीय राज्यों का पैसा उत्तर भारतीय राज्यों को दिया जा रहा है और उन पर हिंदी थोपी जा रही है। यह बात उन्होंने कन्नड़ में कही।

सुरेश ने कहा, “केंद्र दक्षिण भारतीय राज्यों को जीएसटी और प्रत्यक्ष करों का उचित हिस्सा नहीं दे रहा है। दक्षिण भारतीय राज्यों को अन्याय का सामना करना पड़ रहा है। दक्षिणी राज्यों से इकट्ठा किया गया पैसा उत्तर भारतीय राज्यों, हिंदी बेल्ट को दिया जा रहा है। हम पर हिंदी थोपी जा रही है। हमें इस पर सवाल उठाना होगा। अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम अलग देश की माँग करने पर मजबूर हो जाएँगे।”

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, “अगर हम देखें कि देश के विभिन्न राज्यों में पैसा कैसे वितरित किया जाता है तो यह स्पष्ट है कि हमारे राज्यों का धन उत्तरी राज्यों में भेजा जा रहा है। यह हमारे साथ अन्याय है। केंद्र को हमसे 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक मिल रहे हैं और बदले में हमें जो मिल रहा है वह कुछ नहीं है। अगर इसे ठीक नहीं किया गया तो सभी दक्षिण राज्यों को अलग राष्ट्र की माँग के लिए आवाज उठानी होगी।”

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि विभिन्न राज्यों को धन का वर्तमान वितरण सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य को 15वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित अनुदान नहीं मिला है। इसे चुनावी बजट बताते हुए उन्होंने कहा, “यह चुनावी बजट है। अंतरिम बजट में सिर्फ नाम बदले गए हैं। उन्होंने कुछ संस्कृत नाम पेश किए हैं और योजनाएँ पेश की हैं।”

इससे पहले तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK ने भी कुछ ऐसी ही धमकी दी थी। डीएमके के सांसद ए राजा ने केंद्र को चेतावनी देते हुए कहा था कि केंद्र सरकार तमिलनाडु को और अधिकार दे, वरना अगला स्टेट अलग राष्ट्र के लिए लड़ाई होगा। राजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को संबोधित करते हुए यह बात कही थी।

डीएमके सांसद ने कहा था, “मैं पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से विनम्रता से कह रहा हूँ कि हमारे मुख्यमंत्री अन्ना (पूर्व मुख्यमंत्री और DMK के संस्थापक) के रास्ते पर चले रहे हैं। हमें पेरियार के रास्ते पर चलने के लिए मजबूर ना करें। हमें अलग देश की माँग करने के लिए मजबूर मत कीजिए। हमारे राज्य को स्वायत्तता दीजिए और इसे पाने तक हम चुप नहीं बैठेंगे।”

कर्नाटक : थिएटर में ब्लू फिल्म या इंदिरा गाँधी के नाम पर टूर टॉकीज? घिरे कांग्रेसी उप-मुख्यमंत्री शिवकुमार

एचडी कुमारस्वामी (बाएँ) और डीके शिवकुमार (दाएँ) (चित्र साभार: DaijiWorld)
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल के बड़े नेता एच डी कुमारस्वामी ने राज्य के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार पर आरोप लगाया है कि वह अपने थिएटर में ‘ब्लू फिल्म’ दिखाया करते थे। वहीं उनके इस बयान पर डीके शिवकुमार ने प्रतिक्रिया दी है।

दरअसल, कुमारस्वामी ने शिवकुमार को लेकर कहा, “उनकी क्या गरिमा है? पोस्टर चिपकाना ही उनकी गरिमा है? वह डोड्डलहल्ली और सथानुर में टेंट थिएटर में ब्लू फिल्म दिखाया करते थे। यह दिखाता है वह कहाँ से आते हैं। यही पार्टी अध्यक्ष की गरिमा है क्या?”

कुछ दिनों से कुमारस्वामी के खिलाफ पोस्टर के माध्यम से जंग छिड़ी हुई है। शिवकुमार के ब्लू फिल्म वाले थिएटर चलाने को लेकर यह बयान भी उसी बीच आए हैं। कुमारस्वामी पर बिजली चोरी का आरोप लगाते हुए कुछ दिन पहले उनके घर के बाहर पोस्टर लगे मिले थे। इसमें कुमारस्वामी को बिजली चोर बताया गया था।

वहीं डीके शिवकुमार ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कुमारस्वामी अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। उन्होंने कहा, “मुझे कुमारस्वामी के लिए बड़ा दुःख होता है। वह इतने वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हैं और इस तरह की बातें कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “उनसे कहिए कि वह मेरी विधानसभा में जाएँ और लोगों से पूछे कि क्या उन्होंने मुझे ब्लू फिल्म दिखाने के लिए जिताया है। अगर कुमारस्वामी या और कोई भी यह सिद्ध कर दे तो मैं राजनीति छोड़ दूँगा। कुमारस्वामी को इस तरह बोलने के लिए शर्म आनी चाहिए।”

इससे पहले शिवकुमार ने कहा था, “मैं इंदिरा गाँधी के नाम से 4 टूरिंग टाकीज (जगह बदल कर चलाए जाने वाले टाकीज) चलाता था। केवल एक नहीं बल्कि मैं ऐसे तीन टाकिज चलाता था जो कि डोड्डलहल्ली, हरोबेले और कोडीहल्ली में थे। हुसेनाहल्ली वाला टेंट अब भी चल रहा है। मीडिया वहाँ जा कर देख सकता है कि क्या दिखाया जाता है।”

दरअसल, कुमारस्वामी के बेंगलुरु में जेपी नगर स्थित घर पर दीपावली में हुई सजावट में बिजली एक पोल से अवैध तरीके से ली गई थी। बाद में कुमारस्वामी ने कहा था कि उनकी गैरमौजूदगी में ऐसा हुआ और यह सजावट वाले ने किया है। कुमारस्वामी पर बेंगलुरु में बिजली देने वाले BESCOM ने शिकायत भी दर्ज करवा दी थी।

हालाँकि, कुमारस्वामी ने अपनी गलती मानते हुए इस मामले में माफ़ी भी माँगी थी और 68,000 रूपए का जुर्माना भी भरा था। इसके बाद भी कुछ शरारती तत्वों ने उनके घर के बाहर उनके कार्टून बनाए और पोस्टर लगाए जिन पर बिजली चोर लिखा हुआ था।

कुमारस्वामी के जुर्माना भरने के बाद भी यह तत्व बाज नहीं आए। उन्होंने दूसरे पोस्टर लगाए जिनमें लिखा हुआ था कि उन्होंने 68,000 रूपए की फिल्म बनाई है। इनमें यह भी लिखा हुआ था कि आखिर वह ट्रेलर से क्यों घबरा रहे हैं अभी तो पूरी फिल्म बाक़ी है। ऐसे कुछ पोस्टर जेडीएस के दफ्तर के बाहर भी मिले थे। इन्हीं पोस्टर के बाद यह पूरी जुबानी जंग छिड़ी है।

कर्नाटक : ‘राहुल-सोनिया के आगे झुकाना पड़ा मुझे सिर’: मुख्यमंत्री की कुर्सी न मिलने पर छलका डीके शिवकुमार का दर्द

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार रहे डीके शिवकुमार को राज्य के उपमुख्यमंत्री पद से संतोष करना पड़ा है। मुख्यमंत्री की कुर्सी न मिल पाने को लेकर डीके शिवकुमार ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा है कि जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री  बनाने के लिए वोट किया था। लेकिन पार्टी हाईकमान के कहने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद की दावेदारी छोड़नी पड़ी।

शिवकुमार के आगे सबसे बड़ी चुनौती चुनावों में विशाल हनुमान मंदिर बनाने की होगी, क्योकि Amnesty International और मुस्लिम संगठन अपने वायदों को भी पूरा करवाने के लिए पार्टी पर दबाव बनाए हुए हैं। जो हिन्दू हितों के विरुद्ध हैं, जबकि शिवकुमार ने एक हिन्दू नेता की छवि बनाई थी। 

दरअसल, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद डीके शिवकुमार पहली बार शनिवार (3 जून 2023) को अपने विधानसभा क्षेत्र कनकपुरा पहुँचे। यहाँ उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “आप सभी लोगों ने यह सोचकर प्यार दिया था कि मुझे नया पद मिलेगा, नई जिम्मेदारी मिलेगी। किसी को निराश होने की जरूरत नहीं है।”

डीके शिवकुमार ने आगे कहा है, “आपने मुझे मुख्यमंत्री बनाने के लिए बड़ी संख्या में वोट दिया था। लेकिन राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी, मल्लिकार्जुन खड़गे ने फैसला लेते हुए मुझे एक सलाह दी। मुझे उनके फैसले के आगे सिर झुकाना पड़ा। अब मुझे धैर्य रखते हुए इंतजार करना चाहिए। लेकिन ईश्वर और आप लोगों की इच्छा कभी अधूरी नहीं रहेगी। मैं बस यही कहूँगा सब लोग धैर्य रखें।” इसके अलावा उन्होंने अपने क्षेत्र के मतदाताओं को उन्हें वोट देने के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही, आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारी करने के लिए कहा।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव की 224 सीटों में से कांग्रेस ने 136 सीटों में जीत कर सत्ता में वापसी की थी। विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलकों में डीके शिवकुमार ही कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए बड़ा चेहरा माने जा रहे थे। इसके अलावा मीडिया में भी सिद्धारमैया की अपेक्षा डीके शिवकुमार के नाम की अधिक चर्चा थी। चुनाव परिणाम आने के बाद शिवकुमार ने भी मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश की थी। लेकिन राहुल, सोनिया और खड़गे के आगे उनकी एक न चली। इस प्रकार सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया। वहीं, डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री पद से संतोष करना पड़ा।