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ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने दिया इस्तीफा: उत्तराधिकारी चुने जाने तक अंतरिम रूप से संभालते रहेंगे पद

                कीर स्टार्मर का इस्तीफा, लेबर पार्टी में कलह के बाद छोड़ा पद (फोटो साभार: X_Keir_Starmer)
ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार (22 जून 2026) को अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी है। लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और आंतरिक कलह के बीच स्टार्मर को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा। डाउनिंग स्ट्रीट से जारी एक भावुक बयान में उन्होंने कहा कि उन्होंने किंग चार्ल्स को अपने फैसले की जानकारी दे दी है, लेकिन नया उत्तराधिकारी चुने जाने तक वह प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारियाँ संभालते रहेंगे।

स्टार्मर का यह इस्तीफा पिछले कई हफ्तों से चल रही राजनीतिक अटकलों के बाद आया है। हाल के दिनों में सरकार को कई राजनीतिक झटके लगे, जिससे जनता के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से घटी। इसके साथ ही लेबर पार्टी के भीतर से ही नेतृत्व परिवर्तन की माँग लगातार तेज हो रही थी, जिसने स्टार्मर को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया।

डाउनिंग स्ट्रीट से दिए अपने इस्तीफे के बयान में कीर स्टार्मर ने पूरी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “मैंने किंग (राजा) को अपने इस फैसले की जानकारी दे दी है। पार्टी के भीतर चल रहे घटनाक्रम को देखते हुए मेरा पद छोड़ना ही उचित है। हालाँकि देश में प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने के लिए मैं तब तक अपने पद पर बना रहूँगा, जब तक कि मेरे उत्तराधिकारी का चुनाव नहीं कर लिया जाता।”

जुलाई 2024 में कीर स्टार्मर के नेतृत्व में लेबर पार्टी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की थी, जिसने ब्रिटेन में कंजर्वेटिव पार्टी के 14 साल के शासन को खत्म किया था। शुरुआती दिनों में स्टार्मर सरकार को जनता का भारी समर्थन मिला, लेकिन जल्द ही देश की अर्थव्यवस्था, चरमराती सार्वजनिक सेवाओं और पार्टी के अंदरूनी मतभेदों ने उनके सामने बड़ी चुनौतियाँ खड़ी कर दीं।

ब्रिटेन के 58वें प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालते हुए 61 वर्षीय स्टार्मर ने देश में बड़े बदलाव और नतीजों को धरातल पर लाने का वादा किया था। अपने पहले ऐतिहासिक भाषण में उन्होंने अपने पूर्ववर्ती ऋषि सुनक की जमकर तारीफ की थी और सुनक के समर्पण व कड़ी मेहनत को सराहा था। हालाँकि उनका यह कार्यकाल भी हाल के वर्षों में ब्रिटेन के अन्य प्रधानमंत्रियों की तरह बेहद छोटा और उथल-पुथल भरा साबित हुआ।

TMC हो रही हवा-हवाई, ममता बनर्जी की करीबी सांसद सुष्मिता देव ने भी दिया इस्तीफा: असम मुख्यमंत्री से की मुलाकात

                मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा से राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव की मुलाकात (साभार : Indiatoday)
कहते है कि बुरे वक़्त में साया भी साथ छोड़ देता है। जिस तरह अखाड़े में दो पहलवानों की कुश्ती में एक हारता है और एक जीतता है ठीक उसी तरह चुनावों में उम्मीदवार बहुत होते हैं लेकिन जीतता सिर्फ एक ही है। लेकिन बंगाल का चुनाव तो एकदम अनोखा जान दिखाई पड़ता है जहाँ 
TMC के हारने पर पूरी पार्टी ताश के पत्तों की तरह ढह रही है। पार्टी छोड़ने वालों का यही सिलसिला जारी रहा तो शायद दो महीने से पहले ही ममता बनर्जी और उसकी पार्टी TMC इतिहास के गर्द में ऐसी दबेगी जहाँ से निकलना बहुत मुश्किल होगा। जितनी दुर्दशा ममता और उसकी पार्टी TMC की हो रही है किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। यही एक चुनाव ऐसा था जब चुनाव अभियान में ममता चोटिल होने का ड्रामा भी नहीं कर पायी। वरना हर चुनाव में हार सामने देख चोटिल होने का ड्रामा कर सहानुभूति वोट लेकर सत्ता में आ जाती थी। चोट भी ऐसी जो वोटिंग होते ही ठीक जो जाती थी। 

जितना तानाशाह का आतंक ममता के मुख्यमंत्री रहते बंगाल में देखने को मिला शायद ही भारत के इतिहास में ऐसा हुआ हो। INDI गठबंधन के शामिल किसी भी पार्टी में ममता के अत्याचारों के खिलाफ बोलने की हिम्मत कर सकी। किसी INDI गठबंधन को घास नहीं डालने वाली ममता उसी INDI गठबंधन की चौखट पर माथा टेक रही है। घुसपैठियों को दामाद की तरह पाला-पोसा जा रहा था और ममता की सत्ता जाते ही वो भी बंगाल छोड़ भागने शुरू हो गए। वैसे जितनी भी पार्टियां हैं बंगाल चुनाव से सीखते हुए घुसपैठियों को पालना बंद करे। जिन रोहिंग्यों को कोई मुस्लिम मुल्क रखने को तैयार नहीं तुम उनको दामाद बना संरक्षण दे रहे हो। उनके आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर कार्ड बनवा रहे हो।     

पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर होते ही ममता बनर्जी की पार्टी TMC बिखरने लगी है। बुधवार (10 जून) को ममता की बेहद करीबी राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सुखेंदु शेखर के बाद इस्तीफा देने वाली वह दूसरी बड़ी नेता हैं।

इस्तीफे के बाद सांसद सुष्मिता देव ने असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा से मुलाकात की है। इससे पहले TMC के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने बागी रुख अपनाया था और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखकर संसद में अलग बैठने की व्यवस्था माँगी थी। यह गुट बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन दे सकता है।

पार्टी के अंदर मचे इस घमासान से ममता बनर्जी अब बिल्कुल अकेली पड़ती जा रही हैं। इससे पहले TMC के विधायक दल भी दोफाड़ हो चुका है। बागी गुट का नेतृत्व कर रही सांसद काकोली घोष के साथ फिलहाल 14 सांसदों के नाम साफ हो चुके हैं।

इनमें शताब्दी रॉय, सुपरस्टार देव (दीपक अधिकारी) और जून मालिया जैसे बड़े चेहरे शामिल हैं। सुष्मिता देव के इस्तीफे की असली वजह अभी सामने नहीं आई है, लेकिन इसे TMC के लिए बहुत बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

कर्नाटक : कांग्रेस सरकार में बगावत, मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने पसंद का मंत्रालय न मिलने पर दिया इस्तीफा: मुख्यमंत्री शिवकुमार पर लगाए गंभीर आरोप

             कर्नाटक कैबिनेट मंत्री रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा (फोटो साभार: DH/Telangana Today)
जिस बात की आशंका थी उसकी शुरुआत हो गयी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि सिद्धारमैया अगर मुख्यमंत्री पद छोड़ रहे हैं तो नए मुख्यमंत्री को भी चैन से नहीं बैठने देंगे। खेल खिलेगा और खिलना शुरू हो गया। मनपसंद मंत्रालय नहीं मिलने पर कैबिनेट से इस्तीफा। मामूली बात नहीं। मुख्यमंत्री शिवकुमार गर्म खीर को फूंक मार-मार कर खाना होगा। इशारा आ चुका है।  

कर्नाटक में नई सरकार के गठन और विभागों के बंटवारे के तुरंत बाद कांग्रेस के भीतर का आंतरिक असंतोष एक बड़े राजनीतिक संकट में बदल गया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और नवनियुक्त कैबिनेट मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। रेड्डी ने खुलेआम अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि उनसे किया गया वादा पूरा नहीं किया गया, जिसके चलते वे यह बड़ा कदम उठा रहे हैं। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे कैबिनेट छोड़ रहे हैं, लेकिन विधायक (MLA) और कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहेंगे।

शुक्रवार (5 जून 2026) को बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रामलिंगा रेड्डी ने मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार पर सीधा निशाना साधा। रेड्डी ने दावा किया, “डीके शिवकुमार खुद मेरे घर आए थे और कहा था कि जब मैं सीएम बनूँगा, तो मैं इस मंत्रालय (बेंगलुरु विकास) को छोड़ दूँगा और आप इसे संभाल लेना।” रेड्डी के मुताबिक, शपथ ग्रहण समारोह से ठीक एक दिन पहले भी जब वे शिवकुमार से मिले, तो उन्हें दोबारा आश्वस्त किया गया था कि बेंगलुरु से जुड़ा पोर्टफोलियो उन्हीं को मिलेगा।

रेड्डी ने भावुक होते हुए कहा, “मैंने कभी इस विभाग की माँग खुद से नहीं की थी, लेकिन मुझे बार-बार इसका भरोसा दिया गया था। दो बार वादा करने के बाद अब मुझे जल संसाधन विभाग दे दिया गया। मैं इस फैसले से बेहद निराश हूँ और इसीलिए इस्तीफा दे रहा हूँ।”

रामलिंगा रेड्डी ने अपना इस्तीफा सीधे मुख्यमंत्री को सौंपने के बजाय अपने एक समर्थक के जरिए मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को भिजवाया है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने लिखा, “मैं कैबिनेट में मंत्री पद देने के लिए आपका और कॉन्ग्रेस पार्टी का आभार व्यक्त करता हूँ। चूँकि मैं अपनी अंतरात्मा के खिलाफ काम करने में असमर्थ हूँ, इसलिए मैं मंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप रहा हूँ। कृपया इसे स्वीकार करें।”

हालाँकि रेड्डी ने मीडिया से कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से न तो शिवकुमार से नाराज हैं और ना ही सिद्धारमैया से।

मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच ट्रंप की खुफिया निदेशक ने दिया इस्तीफा, ईरान ने की तारीफ

                                                      तुलसी गबार्ड (फोटो साभार: US आर्मी)
अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। तुलसी गबार्ड ने शुक्रवार (22 मई 2026) को ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बैठक के दौरान उन्हें अपने फैसले की जानकारी दी। राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय (ODNI) में उनका अंतिम दिन 30 जून 2026 होगा। भारत से जुड़ी पृष्ठभूमि रखने वाली तुलसी गबार्ड के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने उनकी जमकर सराहना की है।

पति की बीमारी बनी इस्तीफे की वजह

तुलसी ने X पोस्ट पर अपने इस्तीफे से जुड़ा पत्र शेयर कर राष्ट्रपति ट्रंप को धन्यवाद दिया है। तुलसी ने लिखा, “आपने मुझ पर जो भरोसा जताया और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय का नेतृत्व करने का अवसर दिया, उसके लिए मैं हार्दिक आभारी हूँ।”
उन्होंने आगे लिखा, “दुर्भाग्यवश, मुझे 30 जून 2026 से प्रभावी अपना इस्तीफा देना होगा। मेरे पति अब्राहम को हाल ही में हड्डियों के कैंसर के एक अत्यंत दुर्लभ प्रकार का पता चला है। हमारे परिवार के लिए इस बेहद निजी और कठिन समय में आपके सहयोग के लिए धन्यवाद।”
उन्होंने आगे कहा कि डीएनआई के रूप में देश की सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात रही और इसके लिए वह अमेरिकी जनता तथा राष्ट्रपति ट्रंप की हमेशा आभारी रहेंगी।

भारत से क्या है तुलसी गबार्ड का नाता

तुलसी गबार्ड का जन्म अमेरिका के समोआ में हुआ था। उनके पिता यूरोपीय मूल के हैं जबकि उनकी माँ भारतीय हैं। सेना में रहते हुए तुलसी ने इराक में भी सेवाएँ दी थीं।
तुलसी गबार्ड अमेरिका की पहली हिंदू सांसद मानी जाती हैं। वह पहले डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़ी थीं और पार्टी की प्रमुख नेताओं में शामिल रहीं। हालाँकि, साल 2022 में उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ दी और बाद में रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हो गईं।
तुलसी कमला हैरिस की मुखर आलोचक रही हैं। साल 2019 में राष्ट्रपति पद की पहली डिबेट में उन्होंने कमला हैरिस को कड़ी चुनौती दी थी। साथ ही, तुलसी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रशंसक भी माना जाता है।

इस्तीफे पर ईरान ने भी की तारीफ

तुलसी गबार्ड के इस्तीफे के बाद ईरान की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। आर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट करते हुए तुलसी गबार्ड की तारीफ की और कहा कि उन्होंने ईरान के बारे में कई बार ऐसी ‘सच्चाई’ कही जिससे राष्ट्रपति ट्रंप असहज थे।
ईरानी दूतावास ने अपने पोस्ट में लिखा, “हम अब्राहम के शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना करते हैं। आपने पहले भी कई बार यह दिखाया है कि आप अमेरिका के लिए काम करती हैं, इजरायल के लिए नहीं। आपने कई बार ईरान के बारे में ऐसी सच्चाइयां बताईं, जिनसे ट्रंप नफरत करते थे।”

सुर्खियों में कर्नाटक के ‘शशि थरूर’: मंत्री राजन्ना ने Rahul Gandhi के वोट चोरी के दावों पर मारा झन्नाटेदार धप्पड़, अभी और भी आने है; जो चुनाव आयोग और मोदी सरकार की सबसे जीत है; विपक्ष जनतंत्र, लोकतंत्र और संविधान की उडा रहा धज्जियां

कांग्रेस समेत सारा विपक्ष नरेंद्र मोदी का तब से विरोध करता रहा है जब मोदी संघ के सिर्फ एक प्रचारक थे। विपक्ष की आंख का कांटा मोदी बन गए गुजरात के मुख्यमंत्री। 2002 गुजरात दंगे करवा मोदी को लपेटने के साम, धाम, दंड और भेद सारे हतकंडे बुरी तरह से फेल होकर औंधे मुंह गिर गए। फिर इसी विपक्ष ने भारत का विदेशों में इतना बड़ा अपमान किया कि देशविद्रोहियों ने अमेरिका को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को वीसा नहीं देने के लिए एक बार नहीं कई बार पत्र लिखे। लेकिन उसी अमेरिका ने मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही सबसे पहले अमेरिका आने का निमंत्रण देकर इस देश विरोधी विपक्ष के जोरदार झन्नाटेदार धप्पड़ मारा। जिसका ना ही देश की बेशर्म जनता और ना ही विपक्ष पर कोई असर नहीं पड़ा। लेकिन महामूर्ख बेशर्म जनता जनतंत्र, लोकतंत्र और संविधान की धज्जियां उडाने वाले विपक्ष को वोट दे देते हैं। 
जो ड्रामेबाज़ विपक्ष बिहार में SIR को लेकर हंगामा कर रहा है ये ही विपक्ष बंगाल में SIR होने पर आपस में लड़ते चुनाव आयोग को गुप्त समर्थन देंगे। आगे आगे देखिए होता है क्या?

अगर जनता अपनी बंद अक्ल को खोल SIR पर हो रहे हंगामे की असलियत को जानेगी तो राहुल गाँधी सारे विपक्ष की बर्बादी करने वाले साबित होंगे। कांग्रेस और अन्य पार्टियों में नेता ही वोट चोरी को बेनकाब करने लगे हैं। जो चुनाव आयोग और मोदी सरकार की सबसे जीत है। राहुल की hit and run चाल को विपक्ष भी समझ रहा है। लेकिन विपक्ष और राहुल के बीच सांप और छछूंदर की लड़ाई चल रही है। 

अब यह साफ हो गया है कि राहुल गांधी को दूसरे दलों में राजनीतिक विरोधियों की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उनकी खुद की पार्टी में एक के बाद एक उनके और उनकी विचारधारा के धुर-विरोधी सामने आ रहे हैं। दरअसल, राहुल गांधी जिन बैसिर-पैर के मुद्दों को उठाते हैं, उनपर कई कांग्रेस नेताओं का ही मतैक्य नहीं होता। जो चापलूस और दब्बू स्वभाव के कांग्रेसी हैं, वे चुप्पी साध जाते हैं और कुछ सिर उठाकर राहुल गांधी की गलतियों और कांग्रेस की नाकामियों को गिनाकर राहुल को ही कठघरे में ले आते हैं। तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर तो इस मामले में काफी सुर्खियों में रहे हैं, लेकिन उन पर राहुल गांधी का अभी कोई बस नहीं चला है। थरूर के ही नक्शेकदम पर चलते हुए कर्नाटक सरकार के सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना ने वोट चोरी के मुद्दे पर राहुल गांधी को ही सच का सामना करा दिया। राजन्ना ने स्पष्ट शब्दों में राहुल गांधी की ओर से लगाए गए वोट चोरी के आरोपों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ही चुनाव से पहले मतदाता सूची में कथित खामियों को दूर करने में विफल रही। इसके लिए पार्टी को शर्मिंदा होना चाहिए। क्योंकि यदि कुछ ऐसा है तो ये अनियमितताएं हमारी आंखों के सामने हुईं हैं। कांग्रेस के युवराज राहुल को अपना ऐसा विरोध बहुत ही नागवार गुजरा। उन्होंने कर्नाटक के सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करवा दिया!

हमारी थी जिम्मेदारी, उस समय हम चुप क्यों रहे- राजन्ना
कांग्रेस नेता केएन राजन्ना ने कहा, ‘कांग्रेस ने उस समय इस पर ध्यान नहीं दिया, इसलिए आगे फिर तैयार रहना होगा।’ चुनाव में गड़बड़ी को लेकर उन्होंने कहा कि महादेवपुरा में सचमुच धोखाधड़ी हुई थी। एक शख्स तीन अलग-अलग जगहों पर पंजीकृत था और उसने तीनों जगह वोट दिया। जब मतदाता सूची का मसौदा तैयार हो रहा हो तो हमें नजर रखनी चाहिए और आपत्तियां दर्ज करानी चाहिए थीं, जो हमारी जिम्मेदारी है। उस समय हम चुप क्यों रहे, लेकिन अब उसके बारे में बात कर रहे हैं। वहीं राजन्ना की इस टिप्पणी से कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेता नाराज हैं। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि राजन्ना पूरी तरह से दोषी हैं और पार्टी नेतृत्व उनकी टिप्पणी का जवाब देगा। राजन्ना का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं। दिल्ली में विपक्ष के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के ऑफिस तक मार्च निकाला।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बहुत करीबी माने जाते हैं केएन राजन्ना
कर्नाटक कांग्रेस नेता केएन राजन्ना ने सोमवार (11 अगस्त) को सिद्धारमैया सरकार में सहकारिता मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। दावा किया जा रहा है कि केएन राजन्ना ने पार्टी आलाकमान की ओर से इस्तीफा देने की मांग के बाद पद छोड़ने का फैसला किया। राजन्ना का इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया गया है। खास बात है कि राजन्ना को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का करीबी माना जाता है, लेकिन कहा जा रहा है कि वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस को ही घेरने के चलते उनके खिलाफ राहुल गांधी के कहने पर कार्रवाई की गई है। हालांकि, इसे लेकर कांग्रेस या राज्य सरकार ने साफतौर पर कुछ नहीं कहा है।

अवलोकन करें:-

राहुल जी नेहरू थे बूथ कैप्चरिंग(वोट चोरी) के मास्टरमाइंड; जिसे राहुल गाँधी बता रहे थे ‘एटम बम’, उ
राहुल जी नेहरू थे बूथ कैप्चरिंग(वोट चोरी) के मास्टरमाइंड; जिसे राहुल गाँधी बता रहे थे ‘एटम बम’, उ
 

राजन्ना ने राहुल के वोट चोरी के आरोपों की आलोचना भी की
एनडीटीवी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी चाहते थे कि राजन्ना को निकाल दिया जाए। खास बात है कि राहुल दिल्ली में केंद्र सरकार के खिलाफ वोट चोरी के मुद्दे पर ही प्रदर्शन कर रहे हैं। सूत्रों ने यह भी बताया है कि राजन्ना कई मौकों पर नेतृत्व परिवर्तन की बात कह चुके थे। इसके अलावा केएन राजन्ना ने राहुल गांधी की ओर से लगाए गए वोट चोरी के आरोपों की आलोचना की थी। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा था कि कांग्रेस पार्टी चुनाव से पहले मतदाता सूची में कथित खामियों को दूर करने में विफल रही। इसके लिए तो पार्टी को शर्मिंदा होना चाहिए, क्योंकि ये अनियमितताएं हमारी आंखों के सामने हुईं। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची तब तैयार की गई थी, जब कांग्रेस सत्ता में थी। ऐसे में चुनाव आयोग या बीजेपी को घेरने का कोई औचित्य ही नहीं है।

कांग्रेस के सत्ता में रहते तैयार हुई थी मतदाता सूची
कांग्रेस नेता केएन राजन्ना ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘क्या उस समय हर कोई आंखें बंद करके चुपचाप बैठा था? पार्टी को शर्म आनी चाहिए।’ कर्नाटक मंत्री ने पीटीआई को बताया कि अगर हम ऐसी बातों पर यूं ही बात करने लगे तो अलग-अलग राय सामने आएगी। मतदाता सूची तब तैयार हुई थी, जब हमारी सरकार सत्ता में थी। उस समय क्या कांग्रेस अपनी आंखें बंद किए चुपचाप बैठी थी? उन्होंने आगे कहा कि ये अनियमितताएं हुई थी, यही सच है। इसमें कुछ भी झूठ नहीं है। हमारी जिम्मेदारी है और हमें शर्म आनी चाहिए। क्योंकि ये अनियमितताएं हमारी आंखों के सामने हुईं। ऐसे समय में जब पार्टी को आपत्ति दर्ज करानी चाहिए थी, वह चुप रही।

अगर हमारी आंखों के सामने गड़बड़ियां हुईं तो आपत्ति नहीं की
राजन्ना ने अपनी ही पार्टी पर आरोप लगाते हुए तुमकुरु में पत्रकारों से कहा था, मतदाता सूची तब बनाई गई थी, जब कर्नाटक में पार्टी सत्ता में थी। तब उन्होंने इस पर आंखे क्यों मूंद लीं। अगर हमारी आंखों के सामने गड़बड़ियां हुईं और हमने तब आपत्ति नहीं जताई, तो आज शिकायत करने का क्या औचित्य है। तब कम आबादी वाले इलाकों में संदिग्ध नाम जोड़े गए। ये सब हमारी आंखों के सामने हुआ, लेकिन निगरानी नहीं की गई। ये पार्टी की नाकामी है।

राजन्ना बोले- ये मेरे खिलाफ साजिश, थोड़े दिन में खुलासा करूंगा
इस्तीफा देने के बाद राजन्ना ने कहा, ‘मैं अब आपसे पूर्व मंत्री के रूप में बात कर रहा हूं। मेरे हटाए जाने के पीछे एक बड़ी साजिश है, मुझे पता है इसके पीछे कौन है और क्या किया गया। पूर्व मंत्री कहलाने में मुझे खुशी है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मुझे मौका दिया, इसके लिए मैं उनका और सभी मंत्रियों का धन्यवाद करता हूं। आने वाले दिनों में मैं इस साजिश का पूरा खुलासा करूंगा।’ यह हाईकमान का फैसला है। मैं पार्टी के फैसले के प्रति वफादार हूं। मैं दिल्ली जाकर राहुल गांधी से बात करूंगा।

राहुल ने बेंगलुरु में 8 अगस्त को की थी ‘वोट अधिकार रैली’
इससे पहले 8 अगस्त को राहुल ने कर्नाटक के बेंगलुरु में फ्रीडम पार्क में आयोजित कांग्रेस की ‘वोट अधिकार रैली’ की थी। इस दौरान उन्होंने अनर्गल आरोप लगाया कि तीसरी बार 25 सीट के मार्जिन से प्रधानमंत्री बने हैं। 25 सीट ऐसी हैं, जिन्हें भाजपा ने 35 हजार या कम वोट से जीतीं। अगर हमें इलेक्ट्रानिक डेटा मिल जाए तो हम साबित कर सकते हैं। राहुल ने कहा, ‘चुनाव आयोग को पिछले 10 साल की देश की सारी इलेक्ट्रॉनिक वोटर लिस्ट और वीडियोग्राफी देनी चाहिए। ये सब नहीं देंगे तो क्राइम है।

तेलंगाना : MLA राजा सिंह ने दिया BJP से इस्तीफा, नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद लिया फैसला: कहा- हिन्दुओं के साथ खड़ा रहूँगा


तेलंगाना में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। भाजपा के फायर ब्रांड नेता और विधायक टी राजा सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। टी राजा सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार पार्टी नेता रामचंदर राव को तेलंगाना भाजपा प्रमुख नियुक्त किए जाने की संभावना की मीडिया रिपोर्टों के बाद, भाजपा विधायक टी. राजा सिंह ने सदमे और निराशा का हवाला देते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

तेलंगाना में राजा सिंह जैसा कद्दावर नेता बीजेपी में नहीं। तेलंगाना में मुस्लिम कट्टरपंथी और कांग्रेस को सबसे बड़ा डर योगी आदित्यनाथ के बाद टी राजा सिंह का है। विधानसभा चुनाव होने से कुछ महीने पहले हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित करने वालों को ईंट का जवाब पत्थर से देने पर "सिर तन से जुदा" गैंग पीछे पड़ गया था। जो कदम अकेले राजा सिंह ने उठाया अगर नूपुर के समय केन्द्र सरकार ने उठाया होता और विवादित टिप्पणी करने वाले जज पर कार्यवाही पर कार्यवाही की होती किसी कन्हैया की जान नहीं जाती। जबकि नवभारत के एंकर सुशांत सिन्हा ने सारे मुल्ला, मौलवी और इमामों को खुली चुनौती दी थी कि बताएं कि नूपुर ने क्या गलत कहा? क्या जो नूपुर ने जो कहा तुम्हारी इस्लामिक किताबों में नहीं लिखा? लेकिन नूपुर शर्मा वाली गलती बीजेपी ने कर राजा को पार्टी से निकाल दिया, लेकिन चुनाव आने पर पार्टी में वापस जरूर ले लिया। पार्टी ने यह नहीं सोंचा पार्टी की इस दोगली नीति से चुनावों में पार्टी को कम से कम 20/22 सीटों का नुकसान हुआ।       

तेलंगाना के भाजपा विधायक टाइगर राजा सिंह ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने पार्टी को इस संबंध में एक पत्र भेज कर अपना फैसला बताया है। राजा सिंह ने यह फैसला भाजपा के तेलंगाना में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद लिया है।

राजा सिंह ने यह पत्र एक्स (पहले ट्विटर) पर भी साझा किया है। उन्होंने कहा है कि राम चन्द्र राव की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर नियुक्ति का फैसला उनके और लाखों कार्यकर्ताओं के लिए चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले पर शांत नहीं रह सकते हैं।

राजा सिंह ने कहा है कि कुछ लोगों ने पार्टी हाईकमान को धोखे में रखा है। राजा सिंह ने कहा है कि वह इस्तीफे के बाद भी हिन्दुओं के हित के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा है कि वह लगातार हिंदुत्व की विचारधारा को बढ़ाते रहेंगे। राजा सिंह ने पार्टी से इस्तीफ़ा देने को कठिन निर्णय बताया है।

राजा सिंह ने क्यों दिया इस्तीफा?

राजा सिंह ने अपने इस्तीफे में लिखा, "मैं यह पत्र भारी मन से और गहरी चिंता के साथ लिख रहा हूं। रामचंदर राव को तेलंगाना भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की खबर से न सिर्फ मैं, बल्कि लाखों कार्यकर्ता, नेता और पार्टी के समर्पित मतदाता भी सदमे में हैं। ऐसे समय में जब भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाने की दहलीज पर है, इस प्रकार का निर्णय पार्टी की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।" 

दिल्ली : मंत्री कैलाश गहलोत का AAP से इस्तीफा: कहा- ‘शीशमहल’ से पार्टी की छवि हुई खराब, जनता का काम करने की जगह राजनीतिक एजेंडे की चल रही लड़ाई; BJP किसी भी आप सदस्य को लेकर भयंकर भूल करेगी


दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले अरविंद केजरीवाल वाली आम आदमी पार्टी (AAP) को गहरा झटका लगा है। दिल्ली सरकार में मंत्री कैलाश गहलोत ने पार्टी से त्याग-पत्र दे दिया है। कैलाश गहलोत के पास दिल्ली सरकार में गृह, प्रशासनिक सुधार, महिला एवं बाल विकास, परिवहन, सूचना एवं प्रौद्योगिकी की बड़ी जिम्मेदारी रही है। कैलाश ने अरविंद केजरीवाल को लिखी चिट्ठी X पर भी शेयर की है।

इस चिट्ठी में कैलाश में आरोप लगाया है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने जनता को किए गए अपने वादे को पूरा नहीं किया। उन्होंने यमुना की सफाई में नाकामी, अरविंद केजरीवाल के बंगले का निर्माण सहित कई मुद्दों को उठाया है और कहा कि इन सब अजीबो-गरीब मुद्दों के कारण AAP की जनता में छवि खराब हुई है और पार्टी बड़ी चुनौतियों से गुजर रही है।

अपने पत्र में गहलोत ने लिखा है, “पार्टी आज गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। मूल्यों की भी चुनौतियाँ हैं, जो हम साथ लेकर चले थे। राजनीतिक महत्वाकांक्षी ने लोगों के प्रति प्रतिबद्धता को पीछे छोड़ दिया है और कई वादे अधूरे रह गए हैं। इसमें यमुना का उदाहरण है, जिसे हमने स्वच्छ नदी बनाने का वादा किया था, लेकिन ऐसा नहीं कर पाए। यमुना अब पहले से भी अधिक प्रदूषित हो गई है।”

अरविंद केजरीवाल के ‘शीशमहल’ पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, इन सबके अलावा शीशमहल जैसे अजीबो-गरीब और शर्मिंदा करने वाले विवाद सामने आए। इसके कारण अब हर कोई इस बात पर आशंका करने लगा है कि क्या हम आज भी ‘आम आदमी’ में विश्वास रखते हैं। अब लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय हम लोग अपने राजनीतिक एजेंडा के लिए लड़ रहे हैं।”

दिल्ली के लोगों को किए गए वादों को पूरा करने में नाकामी के साथ केंद्र से लड़ाई को लेकर गहलोत ने कहा, “इन सब कारणों ने दिल्ली के लोगों के लोगों को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने की हमारी क्षमता को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। अब यह निश्चित है कि दिल्ली का वास्तविक विकास तब तक नहीं हो सकता, जब तक वह अपना अधिकांश समय केंद्र के साथ लड़ाई में व्यतीत करती है।”

अपने राजनीतिक जीवन और अंत में इस्तीफे को लेकर लेकर जाट परिवार में जन्मे कैलाश गहलोत ने आगे लिखा, “मैंने अपना राजनीतिक जीवन दिल्ली के लोगों का जीवन बेहतर बनाने के लिए शुरू किया था। मेरे पास आम आदमी पार्टी से अलग होने के अलावा अब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है और इसलिए मैं आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूँ।”

पिछले कुछ महीने में दिल्ली सरकार के 2 मंत्रियों और 2 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी है। इससे पहले स्वाति मालीवाल ने भी बागी रुख अपना लिया है। माना जा रहा है कि दिल्ली के नजफगढ़ से भाजपा उम्मीदवार को हराकर विधायक बने कैलाश गहलोत जल्दी ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। बता दें कि दिल्ली विधानसभा का चुनाव फरवरी 2025 में प्रस्तावित है।

दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष ने पद से दिया इस्तीफा: AAP से गठबंधन और कन्हैया कुमार को टिकट देने पर जताई नाराजगी INDI गठबंधन हो गया उरांझू

मैनिफेस्टो में मुस्लिम हितों की बात होने की वजह से कट्टरपंथी मुसलमानों से एकतरफा यानि कांग्रेस को ही वोट देने की अपील/फतवा कर रहे है, लेकिन कांग्रेस में फूट होने से कांग्रेस ही नहीं, INDI गठबंधन पर भी बुरा असर पड़ रहा है। जिससे गठबंधन में शामिल सारी पार्टियां डरी हुई है। अगर गठबंधन में आम आदमी पार्टी(आप) को नहीं लिया होता, तब भी बात संभले हुए थी, क्योकि जिस घोटाले को कांग्रेस ने उछाल अरविन्द केजरीवाल और कई नेताओं को जेल पहुँचाया, उसी को शामिल कर कांग्रेस ने खुद ही रायता फैला दिया, और घोटाले का श्रेय बीजेपी ले गयी। रही बात मुस्लिमों की, जब तक यह कट्टरपंथियों के मकरजाल से बाहर नहीं आएगा, यह उपेक्षित ही होता रहेगा। 
लोकसभा चुनाव 2024 की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन 
कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही है। अब दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने टिकट बँटवारों में अनदेखी और दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी से गठबंधन का आरोप लगाया है।

लवली ने रविवार (28 अप्रैल 2024) को चार पेज का अपना त्याग पत्र कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेज दिया। अरविंदर सिंह लवली को अगस्त 2023 में इस पद पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने कहा कि दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस को राजधानी में स्थापित करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रयास किए।

 लवली ने कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी दीपक बाबरिया पर भी आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, “प्रभारी ने मुझे पंगु बना रखा है। वह मुझे पार्टी नहीं चलाने दे रहे हैं। मेरी सलाह पर कोई नियुक्ति नहीं की जाती है। प्रदेश कांग्रेस की रजामंदी नहीं होने पर भी AAP के साथ गठबंधन किया गया।” उन्होंने आरोप दिल्ली के पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावनाओं की उपेक्षा का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “दिल्ली कांग्रेस इकाई उस पार्टी के साथ गठबंधन के खिलाफ थी, जो कांग्रेस पार्टी के खिलाफ झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के एकमात्र आधार पर गठित की गई थी। इसके बावजूद पार्टी ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन करने का फैसला किया।” बता दें कि गठबंधन के बाद दिल्ली की कुल सात सीटों में से तीन कांग्रेस को मिली है।

लवली कन्हैया कुमार की उम्मीदवारी से भी नाराज दिखे। उन्होंने कहा कि स्थानीय उम्मीदवारों को नजरअंदाज किया गया। अपने पत्र में लवली ने आगे लिखा है, “तीन सीटों पर प्रत्याशी चुनने में भी प्रदेश इकाई की सहमति नहीं ली गई। उत्तर पूर्वी में कन्हैया कुमार और उत्तर पश्चिमी दिल्ली से उदित राज को टिकट दिया गया, जबकि स्थानीय उम्मीदवारों को दरकिनार कर दिया गया।”

उन्होंने पार्टी हाईकमान पर सवाल उठाते हुए कहा, “पार्टी उम्मीदवारों पर अंतिम निर्णय लेना हाईकमान का विशेषाधिकार है। हालाँकि, चौंकाने वाली बात यह है कि एक बार जब हाईकमान ने उपरोक्त 2 उम्मीदवारों के संबंध में निर्णय ले लिया तो औपचारिक घोषणा से पहले पीसीसी को सूचित भी नहीं किया गया।”

असम : पार्टी के लिए परिवार फर्स्ट, नेशन लास्ट: यूथ कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, त्रिपुरा में पूर्व अध्यक्ष के निष्कासन की माँग

देश के पाँच राज्यों में जारी चुनावों के बीच भी कांग्रेस में उठा-पटक जारी है। असम प्रदेश युवा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष प्रत्युष रॉय ने पार्टी में परिवारवाद का आरोप लगाते हुए 11 नवंबर 2023 को अपना इस्तीफा दे दिया। वहीं, त्रिपुरा कांग्रेस ने AICC को पत्र लिखकर अपने विधायक बिराजित सिन्हा के खिलाफ ‘पार्टी विरोधी’ गतिविधियों के लिए कार्रवाई की माँग की है।

त्रिपुरा कांग्रेस ने बिराजित सिन्हा पर ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ में शामिल होने और पार्टी नेताओं के भीतर ‘गुटबाजी के लिए उकसाने’ का आरोप लगाया है। बता दें कि बिराजित सिन्हा ने त्रिपुरा कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद ही AICC त्रिपुरा कांग्रेस के अनुरोध पर प्रतिक्रिया देगी।

इस साल की शुरुआत में बिराजित सिन्हा को त्रिपुरा कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। उनके करीबी सहयोगी सम्राट रॉय को भी भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ के त्रिपुरा अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। इसके बाद ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी के कार्यक्रमों में भाग लेना बंद कर दिया था।

वहीं, असम में प्रदेश युवा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष प्रत्युष रॉय द्वारा इस्तीफा देने का मामला नागांव जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुरेश बोरा द्वारा पार्टी से इस्तीफा देने के बाद आया है। रॉय ने अपने त्याग-पत्र में पार्टी पर परिवारवाद का आरोप लगाया और पार्टी के कामकाज से असंतोष व्यक्त किया।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लिखे पत्र में रॉय ने कहा, “मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैं इस संगठन में बने नहीं रह पाऊँगा, क्योंकि यह केवल एलीट वर्ग के लोगों का पक्ष लेता है। अब यह महसूस होने लगा है कि इस संगठन में हम जैसे समाज के निचले तबके से आने वाले लोगों की आवाज नहीं सुनी जाती है।”

असम प्रदेश युवा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष प्रत्युष रॉय ने अपने त्याग-पत्र में आगे लिखा, “इस संगठन (युवा कांग्रेस) में काम करते हुए मुझे एहसास हुआ कि दिसपुर से लेकर दिल्ली तक यह संगठन फैमिली फर्स्ट को तरजीह देता है और राष्ट्र को अंतिम रखता है।” माना जा रहा है कि ये नेता जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

यहाँ यह उल्लेख करना आवश्यक है कि सुरेश बोरा के साथ-साथ प्रत्युश रॉय ने भी भाजपा में शामिल होने की उत्सुकता व्यक्त की है। इससे पहले बोरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देते समय उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक भी मौजूद थे। असम भाजपा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के साथ इन नेताओं की तस्वीरें भी साझा की है।

कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता जयवीर शेरगिल का इस्तीफा, कहा- पार्टी में चाटुकारिता हावी

                                                                                                                                 तस्वीर-DNA
कांग्रेस में नेताओं द्वारा पार्टी छोड़ने का सिलसिला रुकने में नहीं आ रहा। फिर भी परिवार भक्ति कम होने में नहीं आ रही। जिस तरह प्रभावी नेता पार्टी छोड़ रहे हैं, वह दिन भी दूर नहीं, जब कांग्रेस को अपना अस्तित्व बनाये रखना कठिन होने वाला है। दरअसल, गाँधी परिवार अपने आगे किसी की सुनने को तैयार नहीं। गौरतलब यह है कि 2014 में मोदी लहर को रोकने के आम आदमी पार्टी बनाने के विरोध को गंभीरता से नहीं लिया। यही कारण है कि कांग्रेस को मिलने वाली वोट आप को जा रही है, जिस कारण पार्टी निरंतर निचले स्तर पर जा रही है। 

अब कांग्रेस के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता जयवीर शेरगिल (Jaiveer Shergill) ने दुखी मन से अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है। कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गाँधी को भेजे गए त्याग पत्र में उन्‍होंने पार्टी पर ही कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यालय के दरवाजे उनके लिए बंद हो गए। पार्टी में चाटुकारिता हावी है। इसके साथ ही कांग्रेस का यू-ट्यूब चैनल भी डिलीट हो गया है। जिसे पार्टी ने खुद ट्वीट कर बताया है।

दरअसल, देशभर में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरू करने की तैयारी कर रही कांग्रेस के लिए दूसरी बुरी खबर है। अगस्त 24 को ही पार्टी का यूट्यूब चैनल डिलीट हो गया। यह जानकारी कांग्रेस  पार्टी ने खुद ट्वीट करके दी। कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम ने अपने ट्वीट में कहा, “हमारा YouTube चैनल ‘इंडियन नेशनल कॉन्ग्रेस’ को डिलीट कर दिया गया है। हम इसे ठीक कर रहे हैं और गूगल और यूट्यूब की टीमों के लगातार संपर्क में हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने इस्तीफ देते हुए कहा- “मैंने कांग्रेस पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे का प्राथमिक कारण यह है कि कांग्रेस में निर्णय अब जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए नहीं किया जा रहा है। यह विशुद्ध रूप से एक मंडली से प्रभावित हो रहा है जो केवल चाटुकारिता में लिप्त है।”

शेरगिल यहीं नहीं रुके, आगे उन्होंने गाँधी परिवार पर भी हल्ला बोलते हुए कहा- “मैं राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और प्रियंका गाँधी से मिलने के लिए एक साल से अधिक समय से समय माँग रहा हूँ, लेकिन समय नहीं मिला।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अपने इस्तीफे में उन्होंने कुछ कांग्रेस नेताओं पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा- “मैंने पिछले 8 सालों में कांग्रेस से कुछ नहीं लिया बल्कि दिया है। आज मुझे लोगों के सामने झुकने के लिए मजबूर किया जा रहा है क्योंकि वे शीर्ष नेतृत्व के करीब हैं; यह मुझे मंजूर नहीं।”

ऐसा कहा जा रहा है कि उन्हें पिछले कुछ महीनों से प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की अनुमति नहीं दी गई थी। जिसके बाद 24 अगस्त, 2024 को उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रवक्ता के पद से इस्तीफा देने का फैसला किया। जयवीर ने कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को लिखे अपने त्याग पत्र में इशारों-इशारों में वरिष्ठ नेताओं पर निशाना साधा है।

अवलोकन करें:-

कांग्रेस की डूबती नैया से जारी ‘अपमानित’ आनंद शर्मा ने भी छोड़ा साथ

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कांग्रेस की डूबती नैया से जारी ‘अपमानित’ आनंद शर्मा ने भी छोड़ा साथ
कांग्रेस के अध्यक्ष पद की तुलना अगर कोल्हू के बैल से की जाये तो अतिशियोक्ति नहीं होगी। कोल्हू का बैल दिन भर चलता है,...

जयवीर शेरगिल पेशे से एक वकील हैं और पिछले आठ सालों से कांग्रेस से जुड़े हुए थे। वह सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। वह उस समय चर्चा में आए थे, जब उन्होंने कानूनी मामलों का सामना कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को कानूनी मदद करने के लिए 24 घंटे कानूनी टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर लॉन्च किया था।

राजस्थान : प्रदेश में दलितों पर अमानवीयता अब सहन नहीं होती : पानाचंद मेघवाल, कांग्रेस विधायक

राजस्थान की कांग्रेसी गहलोत सरकार में दलितों पर अत्याचार का मुद्दा गर्मा गया है। जालोर जिले में स्कूल टीचर की निर्ममता से की पिटाई से हुई नौ साल के दलित मासूम छात्र की ‘हत्या’ का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सत्ताधारी पार्टी के बारां के अटरू से विधायक पानाचंद मेघवाल ने दलितों पर हो रहे लगातार अत्याचार और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की इस पर चुप्पी से आहत होकर सीएम को अपना इस्तीफा ही भेज दिया है। अपनी सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए उन्होंने अपने पत्र में साफ लिखा है कि आजादी के 75 साल बाद भी राजस्थान में दलित और वंचित वर्ग पर लगातार अत्याचार हो रहे हैं। अपने ही विधायक के आरोपों के बाद कांग्रेस में खलबली है। दूसरी ओर बीजेपी प्रदेश महामंत्री व रामगंजमंडी से विधायक मदन दिलावर ने वीडियो बयान जारी कर प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है।

नौ साल के दलित छात्र की बेहद निर्ममता के पिटाई, बीजेपी ने कहा-यह मौत नहीं हत्या है
राजस्थान सरकार द्वारा लापरवाह रवैया अख्तियार करने के कारण सरकारी स्कूलों में आए दिन बच्चों के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आती रही हैं। कई बार मासूम बच्चों की छोटी सी बात पर इतनी पिटाई की जाती है कि उनकी हड्डी तक टूट जाती है। इस बार तो जालौर में अत्याचार की सारी हदें ही पार कर दी गईं। जालोर जिले में स्कूल टीचर की निर्ममता से की पिटाई से नौ साल के दलित मासूम छात्र की मौत ही हो गई। बीजेपी विधायक मदन दिलावर ने कहा एक दलित बच्चे की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और यह सरकार संवेदनहीन और अनुसूचित जाति के लोगों की दुश्मन बनी हुई है।

आज राजस्थान में दलित समाज जितने अत्याचार झेल रहा है उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता
राजस्थान में दलितों पर अत्याचार का यह कोई पहला मामला नहीं है। दलित महिलाओं के साथ दुष्कर्म, दलितों से मारपीट और हत्या के कई मामले प्रदेश के थाने में दर्ज हैं। यहां तक कि कई बार तो दलित समाज के दूल्हों को घोड़ी तक पर नहीं बैठने दिया जाता है। दलितों के खिलाफ प्रदेश के इसी सिस्टम को कटघरे में खड़ा करते हुए दलित कांग्रेस विधायक पानाचंद मेघवाल ने यह लिखित इस्तीफा सीएम को भेजा है। पानाचंद ने कहना है कि ऐसी घटनाओं से मेरा मन काफी आहत है। मेरा समाज आज जिस प्रकार की यातनाएं झेल रहा है। उसका दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

अत्याचार से आहत होकर अंतरआत्मा की आवाज सुनकर दे रहा हूं इस्तीफा-मेघवाल
जालोर में दलित छात्र के साथ मारपीट के बाद उसकी मौत की घटना से आहत हुए दलित विधायक पानाचंद मेघवाल ने कहा कि जब हम हमारे समाज के अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें न्याय दिलवाने में नाकाम होने लगे तो हमें पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। एमएलए ने लिखा’ ‘मैं अपनी अंतरआत्मा की आवाज पर विधायक पद से इस्तीफा देता हूं।’ उन्होंने सीएम से कहा, ‘विधायक पद से मेरा इस्तीफा स्वीकार करें, ताकि मैं बिना पद के ही समाज के वंचित और शोषित वर्ग की सेवा कर सकूं।’

दलितों पर अत्याचार के मामलों में जानबूझकर FR लगा दी जाती है
विधायक पानाचंद मेघवाल ने त्यागपत्र लिखकर अपनी ही पार्टी की सरकार पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एमएलए ने अपने त्यागपत्र में यह लिखते हुए सीएम को चेताया कि दलितों पर अत्याचार के ज्यादातर मामलों में FR लगा दी जाती है। कई बार ऐसे मामलों को जब मैंने विधानसभा में उठाए, उसके बावजूद भी पुलिस प्रशासन हरकत में नहीं आया। बता दें कि मुख्यमंत्री को त्यागपत्र भेजने वाले बारां-अटरू विधानसभा के विधायक पानाचंद मेघवाल खनन मंत्री प्रमोद जैन भाया गुट से आते हैं।

गहलोत सरकार ने राहत देने के नाम पर पीड़ित परिवार के साथ घिनौना मजाक किया
जालौर के सुराणा गांव टीचर की पिटाई से दलित बच्चे की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बीजेपी प्रदेश महामंत्री व रामगंजमंडी से विधायक मदन दिलावर ने वीडियो बयान जारी कर प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। दिलावर ने कहा सुराणा गांव में एक प्राइवेट स्कूल के अध्यापक ने एक छोटे बच्चे की पीट-पीटकर हत्या कर दी और यह सरकार संवेदनहीन है। यानी सरकार अनुसूचित जाति के लोगों की दुश्मन बनी हुई है। दिलावर ने कहा कि सरकार ने राहत देने के नाम पर पीड़ित परिवार के साथ घिनौना मजाक किया है। 8 लाख 25 हजार तो इंट्रो सिटी में किसी का मर्डर हो जाता है, तो मिलता ही है। 5 लाख चिरंजीव योजना में मिलता है। 13 लाख 25 हजार तो वैसे भी होते हैं। प्रदेश सरकार ने क्या दिया? झुनझुना पकड़ा दिया गरीब परिवार को जानकारी नहीं इसलिए बेवकूफ बना रहे हैं।

कांग्रेस दलितों की दुश्मन, महिलाओं से रेप होते हैं तो ये बलात्कारियों के साथ हो जाते हैं- दिलावर
सरकार ने नियमों से हटकर कोई भी राहत नहीं दी। इसका सीधा-सीधा अर्थ है यदि कोई बड़े आदमी का बेटा मरता है, या किसी हस्ती के साथ ये घटना होती तो शायद 25-50 लाख तक दे देते लेकिन वह गरीब का बेटा, अनुसूचित जाति का बेटा है। उसकी हत्या हुई है इसलिए सरकार ने झुनझुना पकड़ा दिया। उन्होंने कहा कि इसीलिए अनुसूचित जाति के लोगों से कहना चाहता हूं ये ऊपर से लेकर नीचे तक कांग्रेस हमारी दुश्मन है। और हमारी हत्या करवाने के बावजूद भी हमारा मजाक बनाती है। हमको नासमझ समझती है। हम सब जानते हैं। अनुसूचित जाति की महिलाओं व बच्चों के साथ रेप होते हैं, तो ये उन बलात्कारियों के साथ खड़े हो जाते हैं।

गहलोत सरकार में कहीं घोड़ी पर चढ़ने तो कहीं मूंछ रखने पर दलितों पर घोर यातनाएं
अपने त्याग पत्र में विधायक पानाचंद मेघवाल ने लिखा कि प्रदेश में दलित और वंचितों को मटकी से पानी पीने के नाम पर तो कहीं घोड़ी पर चढ़ने और मूंछ रखने पर घोर यातनाएं देकर मौत के घाट उतारा जा रहा है। जांच के नाम पर फाइलों को इधर से उधर घुमाकर न्यायिक प्रक्रिया को अटकाया जा रहा है। पिछले कुछ सालों से दलितों पर अत्याचार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर ने संविधान में दलितों और वंचितों के लिए जिस समानता के अधिकार का प्रावधान किया था, उसकी रक्षा करने वाला कोई नहीं है।

उत्तर प्रदेश : ‘मुसलमानी महिलाओं को टिकट नहीं दिया जाए’: कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओंकार सिंह

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Election 2022) में ‘महिला शक्ति’ का नारा लेकर उतरी कांग्रेस  की एक महिला प्रत्याशी ने यह कहते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया कि संगठन में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं। बदायूँ जिले के शेखूपुर विधानसभा सीट से कॉन्ग्रेस ने फराह नईम (Farah Naeem) को उम्मीदवार बनाया था। नईम ने 27 जनवरी 2022 को चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा करते हुए पार्टी की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया। 

मीडिया से बात करते हुए फराह नईम ने कहा, “पार्टी जिलाध्यक्ष ओंकार सिंह ने कहा कि मुसलमानी महिलाओं को टिकट नहीं मिलना चाहिए और मैं एक चरित्रहीन महिला हूँ। जिला इकाई में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “महिलाएँ बदायूँ कांग्रेस संगठन में सुरक्षित नहीं हैं। मैंने टिकट के लिए दावेदारी की, लड़ाई लड़ी। ओंकार सिंह (कांग्रेस के जिलाध्यक्ष) ने मुझे रोकने के लिए मेरे चरित्र पर कीचड़ उछाले, महिलाओं के चरित्र पर कीचड़ उछाले। उनका कहना है कि मुसलमानी महिलाओं को टिकट नहीं दिया जाए, जबकि कांग्रेस को हर बिरादरी और जाति का वोट चाहिए। ओमकार सिंह ने मेरे लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। हर कोशिश की धमकाने की। उन्होंने टिकट रोकने की हर कोशिश की।” 

जिलाध्यक्ष ने लगाया चरित्रहीन का आरोप

नईम ने कहा, “ओंकार सिंह जैसे लोग इस संगठन में मौजूद हैं तो मैं चुनाव नहीं लड़ूँगी। मैं कांग्रेस पार्टी की सदस्यता से भी इस्तीफा देती हूँ। मेरे बारे में बताया गया है कि मेरे पास अपने खाने के लिए भी एक रुपया नहीं है। दूसरा आरोप है कि मैं चरित्रहीन हूँ। ऐसे बहुत सारे आरोप लगाए गए हैं, जिन्हें गिनते-गिनते मैं थक जाऊँगी। इन आरोपों ने मुझे बहुत आघात पहुँचाया है।”
वह आगे कहती हैं, “मैंने भी तय किया है कि मैं लड़ूँगी, मैं टूटूँगी नहीं। आगे भी सेवा करूँगी और हर उस किनारे पर आकर खड़ी होऊँगी, जहाँ महिलाओं को सुरक्षित नहीं बताया जाएगा और उसे अकेला समझा जाएगा। जब प्रभारी लोगों ने फोन पर मुझसे सवाल पूछे तो मैंने कानों पर हाथ रख लिया और कहा कि मुझे अफसोस है कि मैंने कांग्रेस पार्टी की सेवा की और ओंकार सिंह ने मेरे लिए इतने गंदे शब्द इस्तेमाल किए।” यह बोलते-बोलते फराह नईम पूरी तरह से टूट जाती हैं और रो पड़ती हैं।
फराह नईम के इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस ने उनकी जगह पर बदायूँ के शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र से ममता देवी प्रजापति को मैदान में उतारा है। बता दें कि शेखुपुर विधानसभा क्षेत्र बदायूँ जिले का हिस्सा है और आँवला (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) के पाँच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। 2008 में इस विधानसभा क्षेत्र का गठन किया गया था। विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव 2012 में हुआ था। उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव होने हैं। पहले चरण की वोटिंग 10 फरवरी और अंतिम चरण का मतदान 7 मार्च को होगा।